न्यूटन का गति का प्रथम नियम, द्वितीय एवं तृतीय नियम

आपने देखा होगा कि यदि पेड़ की डालियों को तेजी से हिलाया जाए तो उस पर लगे पत्ते और फल झड़ते हैं। इसी तरह, कालीन को डंडे से पीटने पर धूल के कण कालीन से अलग हो जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है? इन सभी का कारण जड़त्व है। जड़त्व… Read More »

व्यावसायिक पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा, घटक एवं महत्व

व्यावसायिक पर्यावरण दो शब्दों-व्यवसाय एवं पर्यावरण के संयोग से बना है। व्यवसाय, विद्यमान पर्यावरण में रहकर अपनी क्रियाओं को संचालित करता है। व्यवसाय को पर्यावरण प्रभावित करता है और व्यवसाय पर्यावरण को प्रभावित करता है। अत: दोनों ही अन्तर्सम्बन्धित हैं। वास्तव में व्यावसायिक पर्यावरण उन सभी परिस्थितियों, घटनाओं एवं कारकों का योग है जो व्यवसाय… Read More »

खाद्य श्रृंखला क्या है?

पोषी स्तर जब उत्पादक का उपभोग प्रथम उपभोक्ता द्वारा और फिर प्रथम उपभोक्ता का उपभोग द्वितीय उपभोक्ता द्वारा एक क्रम से किया जाता है कि एक श्रृंखला के समान रचना बन जाती है, इसे ही खाद्य श्रृंखला कहते है। किसी पारिस्थितिक तंत्र में उत्पादक – उपभोक्ता व्यवस्था को किसी पारिस्थितिक तंत्र में उत्पादक उपभोक्ता व्यवस्था को… Read More »

मानव पर्यावरण स्टॉकहोम सम्मेलन 1972 क्या है?

विकसित देशों में हुई वैज्ञानिक क्रान्ति के फलस्वरूप हुआ औद्योगीकरण पर्यावरण ही नहीं समूचे जैवमण्डल के लिए खतरनाक भी बनता गया। कई औद्योगिक इकाइयों के कारण ऐसी भयावह दुर्घटनाएँ हुई कि दुनिया हिल गई। विज्ञान के इस अभिशाप को अमेरिका, इग्लैण्ड, जापान सहित देशों में देखा गया। इन समस्याओं से परेशान होकर लोगों ने मानव… Read More »

खाद्य परिरक्षण क्या है?

खाद्य परिरक्षण वह है जिसके द्वारा खाद्य पदार्थों को उनकी सही तथा अच्छी अवस्था में ही काफी लम्बे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। एक अति सरल उदाहरण लें-दूध का उबलना। हम दूध क्यों उबालते हैं? इसे लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के लिए। आप जानते हैं कि दूध को उबाल देने से दूध… Read More »

भारत में क्षेत्रवाद की उत्पत्ति के कारण

क्षेत्रवाद के अर्थ में हम कह सकते हैं कि एक देश में या देश के किसी भाग में निवास करने वाला, लोगों के छोटे समूह से है जो आर्थिक, भौगोलिक, सामाजिक आदि कारणों से अपने पृथक अस्तित्व के लिए जागरूक हो। साधारण से अर्थ में क्षेत्रवाद किसी क्षेत्र के लोगों की उस भावना व प्रयत्नों… Read More »

क्रीमिया युद्ध के कारण एवं परिणाम

क्रीमिया युद्ध के कारण 1. नेपोलियन की महत्वाकांक्षा- 1848 ई. में नेपालेयन तृतीय ने फ्रासं के गणतंत्र का अंत करके अपने को सम्राट बना लिया। उसका विश्वास था कि वह अपनी शक्तिशाली विदेश नीति का अनुसरण करके किसी महान युद्ध में विजयी हो सकता था। इसका अवसर उसने पूर्वी समस्या में देखा जिसके संबंध में रूस… Read More »

कौटिल्य का जीवन परिचय एवं कृतियाँ

अत: अर्थशास्त्र दक्षिण भारत की ही रचना है किन्तु यह भी स्मरणीय तथ्य है कि चन्द्रगुप्त मौर्य अपने सम्राट पद से अवकाश ग्रहण करने पर, 299 ई.पू. में दक्षिण चले गए थे तथा वहÈ उनकी मृत्यु हो गई। चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को राज्य दिलाकर एक राज्यसंहिता देश को दी थी। ‘कौटिल्य’ के सम्मुख सम्पूर्ण भारतवर्ष… Read More »

कृषि का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

कृषि शब्द की व्युत्पत्ति विज्ञान के अनुसार कृषि का अभिप्राय कर्षण से या खींचने से होता है। कृषि का अंग्रेजी पर्याय Agriculture लेटिन भाषा के दो शब्दों को मिलाकर बना है। Ager ( agerfiels or soil) तथा Culture (cultura- the care of tillingh) से मिलकर बना है। Culture का हिन्दी अर्थ संस्कृति होता है। तात्पर्य जीवन जीने की एक विशेष कला है। इस प्रकार… Read More »

कोष प्रवाह विवरण क्या है?

कोष ‘प्रवाह’ का अर्थ कोष प्रवाह विवरण तैयार करने हेतु कोष (Fund) अर्थ, शुद्ध कार्यशील पूंजी (Net working capital) अर्थात् चालू सम्पत्तियों का चालू दायित्वों पर आधिक्य (Excess of total current assets over the total current liabilities) के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। चालू सम्पत्तियाँ : चालू सम्पत्तियों में वे सीाी सम्पत्तियाँ सम्मिलित की… Read More »