13 वां गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन के महत्वपूर्ण बिन्दु

13 वां गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन 24-25 फरवरी 2003 को 13 वां गुटनिरपेक्ष सम्मेलन मलेशिया की राजधानी क्वालालम्पुर में हुआ। जिसमें 116 देशों ने भाग लिया। 24 फरवरी को अपने उद्घाटन भाषण में मलेशिया के प्रधानमंत्री व इस सम्मेलन के अध्यक्ष महातीर मोहम्मद ने युद्ध तथा परमाणु शस्त्रों को हटाने के लिये बहुपक्षीय अभियान का सुझाव […]

कपालभाति प्राणायाम के प्रकार

कपाल का अर्थ है मस्तिष्कए व भॉंति का अर्थ होता है चमकाना,अर्थात प्रकासित करना। कपालभाति की क्रिया में मतिष्क का का शोधन होता है। वस्तुतः कपालभाति शोधन की ही क्रिया है परन्तु कई जगह इसे प्राणायाम की क्रिया भी कहा गया है।कपालभाति की एक प्रक्रिया में श्वाास-प्रश्वाोस को जोड़ा जाता है। चूँकि यह प्रक्रिया प्राणायाम […]

26 नवंबर को संविधान दिवस क्यों मनाया जाता है?

भारत में हर साल 26 नवंबर को ‘संविधान दिवस’ मनाया जाता है। इस दिन डाॅ. भीमराव अंबेडकर को याद किया जाता है। उन्होंने भारतीय संविधान के रूप में दुनिया का सबसे बड़ा संविधान तैयार किया है। मुख्य तथ्य भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति की स्थापना 29 अगस्त 1947 को की गई […]

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है, ऑपरेटिंग सिस्टम का विकास और प्रकार

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या हैOperating system kya hai ऑपरेटिंग सिस्टम सिस्टम सॉफ्टवेयर है, इसकी मदद से ही कोई कंप्यूटर काम कर सकता है। इस लिहाज से कोई भी ऑपरेटिंग सिस्टम वह माध्यम है, जो उपयोगकर्ता और कंप्यूटर के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है। यहां यह बिन्दु अति महत्वपूर्ण है कि ऑपरेटिंग सिस्टम के […]

ऋग्वेद संहिता का सामान्य परिचय

भारत के प्राचीनतम ग्रन्थ वेद हैं। जीवन, जगत और ईश्वर का यर्थाथ ज्ञान वेद ही है। वेद शब्द ‘विद्-धात’ु से निष्पन्न होकर बना है, जो ज्ञान रूपी महान लाभ को देता है। जिसका अर्थ-ज्ञान का समूह है। डॉ0राधाकृश्णन् के अनुसार-वेद वस्तुत: मानव मस्तिष्क के प्राचीनतम अभिलेख हैं। वेदों का अध्ययन केवल धर्म-कर्म की दृष्टि से […]

ऋग्वेद संहिता का सामान्य परिचय

भारत के प्राचीनतम ग्रन्थ वेद हैं। जीवन, जगत और ईश्वर का यर्थाथ ज्ञान वेद ही है। वेद शब्द ‘विद्-धात’ु से निष्पन्न होकर बना है, जो ज्ञान रूपी महान लाभ को देता है। जिसका अर्थ-ज्ञान का समूह है। डॉ0राधाकृश्णन् के अनुसार-वेद वस्तुत: मानव मस्तिष्क के प्राचीनतम अभिलेख हैं। वेदों का अध्ययन केवल धर्म-कर्म की दृष्टि से […]

भारतेन्दु युग का नामकरण, समय सीमा, प्रमुख विशेषताएं

आधुनिक काल के हिंदी साहित्य का अंतर्विभाजन प्राय: सभी विद्वानों ने एक जैसा किया है किन्तु नामकरण एवं सीमा निर्धारण के विषय में मतैक्य नहीं है। विशिष्ट काल में विशेष साहित्यकार के प्रमुख योगदान को देखते हुए भारतेंदु हरिश्चन्द्र के नाम पर उनके युग को भारतेंदु कहा गया है। भारतेंदु युग का नामकरणआचार्य रामचन्द्र शुक्ल […]

पंडित बालकृष्ण भट्ट द्वारा रचित नाटक और साहित्यिक विशेषताएँ

पंडित बाल कृष्ण भट्ट (सन् 1844 – 1914 ई0) भारतेंदु मंडल के साहित्यकारों में प्रमुख रहे हैं। संवत् 1933 वि. में पंडित बाल कृष्ण भट्ट ने गद्य साहित्य का मार्ग प्रशस्त करने हेतु हिन्दी प्रदीप का संपादन प्रारंभ किया। सामाजिक, साहित्यिक, राजनीतिक एवं नैतिक आदि विभिन्न विषयों पर लिखे गए लघु निबंधों – जिनकी संख्या […]

द्विवेदी युग के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएं

द्विवेदी युग के प्रमुख कवि आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, मैथिली शरण गुप्त, पं. रामचरित उपाध्याय, पं. लोचन प्रसाद पांडेय, राय देवी प्रसाद ‘पूर्ण’, पं. नाथू राम शर्मा, पं. गया प्रसाद शुक्ल ‘सनेही’, पं. राम नरेश त्रिपाठी, लाला भगवानदीन ‘दीन’ पं. रूप नारायण पांडेय, पं. सत्य नारायण ‘कविरत्न’, वियोगी हरि, अयोध्या सिंह उपाध्याय, गिरिधर शर्मा ‘नवरत्न’, […]

द्विवेदी युग का नामकरण एवं द्विवेदी युग की काल सीमा

हिंदी साहित्य के आधुनिक काल में एक नवीन मोड़ आया। साहित्यकारों का चिंतन व्यष्टि से समष्टि, वैयक्तिक से सामाजिक, जड़ता से चेतना, स्थायित्व से प्रगति, श्रृंगार से देशभक्ति, रूढ़ि से स्वच्छंदता की ओर अग्रसर हुआ। भारतेंदु युग के कवियों में भावबोध आधुनिकता से प्रभावित होते हुए भी रीतिकालीन पंरपरा से सर्वथा मुक्त नहीं हो पाया […]