सामाजिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक

वातावरण और संगठित साधनों के कुछ ऐसे विशेष कारक हैं जिनका बालक के सामाजिक विकास की दशा पर निश्चित और विशिष्ट प्रभाव पड़ता है।सामाजिक विकास को प्रभावित करने वाले कारकसामाजिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक कौन कौन से हैं? सामाजिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक -परिवार के वातावरण का स्वरूपपरिवार ही वह साधन […]

भारत में सामंतवाद का उदय और विकास

भारत में मौर्योतर-काल और गुप्तकाल में कुछ राजनैतिक और प्रशासनिक प्रवृतियों के कारण और विशेष तौर पर गुप्तकाल में राज्य-व्यवस्था सांमतवादी ढांचे में ढ़लने लगी थी। प्रो0 रामशरण शर्मा के अनुसार इनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रवृति ब्राÎह्यणों को भूमिदान देने की थी। मौर्यकाल एवम् मौर्यो से पूर्व पाली साहित्य में मगध और कोसल के शासकों द्वारा ब्राह्मणों […]

ठुमरी शैली की उत्पत्ति एवं विकास

ठुमरी की उत्पत्ति – तीन चार सौ वर्ष पूर्व भारतीय संगीत में ध्रुपद गायन का प्रचार था। परिस्थितिवश ख्याल गायन का प्रादुर्भाव हुआ। धीरे-धीरे ध्रुपद का स्थान ख्याल ने ले लिया। मनुष्यों के बदलती हुई भावनाओं और विचार के परिवर्तन के कारण ख्याल के पश्चात क्रमश: टप्पा, ठुमरी, भावगीत, फिल्मी गीत प्रचलित हुआ। राग की […]

व्यावसायिक पर्यावरण की विशेषताएं

व्यावसायिक पर्यावरण से अभिप्राय उन व्यक्तियों, संस्थानों तथा शक्तियों से होता है जो व्यावसायिक उद्यम के परिचालन को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। व्यावसायिक पर्यावरण की विशेषताएं(1) बाह्य शक्तियों की समग्रता : व्यावसायिक पर्यावरण संस्था के बाहर की शक्तियों/घटकों का योग होता है जिनकी प्रकृति सामूहिक होती है। (2) विशिष्ट एवं साधारण शक्तियाँ : व्यावसायिक पर्यावरण में विशिष्ट तथा […]

लोकतंत्र की परिभाषा क्या है

लोकतंत्र पद ग्रीक शब्द “डेमोस” और “क्रेटोस” से ग्रहण किया गया है। “डेमोस” का अर्थ है जनता और “क्रेटोस” का अर्थ है शक्ति। इस प्रकार लोकतंत्र शब्द का अर्थ है “जनता की शक्ति”। वर्तमान समय में यह शासन का सर्वाधिक लोकप्रिय स्वरूप बन चुका है। इस प्रकार की शासन व्यवस्था में जनता अपने प्रतिनिधियों के माध्यम […]

रूसो का सामान्य इच्छा का सिद्धांत

रूसोरूसो का सामान्य इच्छा का सिद्धांत यह सिद्धांत रूसो के दर्शन का सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण, मौलिक, केन्द्रीय एवं रोचक विचार है। यह रूसो के सम्पूर्ण राजनीतक दर्शन की आधारशिला है। इसी धारणा के आधार पर रूसो ने स्वतन्त्रता, अधिकार, कानून, सम्प्रभुता, राज्य की उत्पत्ति, संगठन आदि विषयों पर अपने विचार प्रकट किये हैं। रूसो का सामान्य इच्छा […]

राष्ट्रपति के चुनाव का सूत्र और राष्ट्रपति को पद से हटाने की प्रकिया

भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन एक निर्वाचन मण्डल द्वारा होता है जिसमें संसद के दोनों सदनों अर्थात लोकसभा एवं राज्यसभा तथा राज्यों की विधान सभाओं के सभी निर्वाचन सदस्य होते है। संसद के मनोनीत सदस्य तथा राज्य विधान परिषदों के मनोनीत सदस्य इस निर्वाचक मण्डल के सदस्य नहीं होते। निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर […]

राजनीतिक आधुनिकीकरण व राजनीतिक विकास में अंतर

कुछ विद्वानों का मानना है कि राजनीतिक विकास की अवधारणा आधुनिकीकरण की अवधारणा की अपेक्षा संकुचित है। उनका मानना है कि राजनीतिक विकास आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का ही एक भाग है। उसका क्षेत्र केवल राजनीतिक है। राजनीतिक विकास एक लक्ष्योन्मुख प्रक्रिया है जिसे अपना गन्तव्य या लक्ष्य ज्ञात है, जबकि आधुनिकीकरण विभिन्न दिशाओं में लाया […]

न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 क्या है?

भारत सरकार द्वारा 1944 में नियुक्त श्रमिक जाँच समिति ने देश के विभिन्न उद्योगों में श्रमिकों की मजदूरी और उनके अर्जन का अध्ययन किया और बताया कि लगभग सभी उद्योगों में मजदूरी की दरें बहुत ही निम्न है। समिति ने अनुभव किया कि उस समय तक देश के प्रधान उद्योगों में भी श्रमिकों की मजदूरी […]

भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रकार

भारतीय नृत्य-कला की उत्पत्ति एवं विकास की अपनी एक स्वतन्त्र परम्परा रही है। इसकी उत्पत्ति वैदिक काल से ही हो चुकी थी। जिसका प्रमाण वेदों में पर्याप्त रूप में प्राप्त होता है। वेदों को मानव जीवन के धर्म, संस्कृति, विज्ञान, साहित्य, सभ्यता एवं कला कौशल का विशाल स्रोत माना गया है। इसलिए इसे विश्वकोश कहा […]