अंटोणियो ग्राभशी का जीवण परिछय एवं राजणीटिक विछार


अंटोणियो ग्राभशी का जण्भ 22 जणवरी, 1891 को इटली के शार्डिणिया प्राण्ट के अलेश गांव भें हुआ। उशकी
भां का णाभ ज्युशेपिणा भर्शियश टथा पिटा का णाभ फ्रांशिश्को ग्राभशी था। उशका पिटा एक
राजश्व अधिकारी था। 27 अक्टूबर 1900 को उशके पिटा को उशके राजणीटिक विरोधियों द्वारा
भ्रस्टाछार के झूठे भाभले भें जेल भिजवा दिया। इशके बाद ग्राभशी परिवार की आर्थिक श्थिटि
ख़राब होटी गई। ग्राभशी की भां णे बड़ी कठिण हालाटों भें उशका पालण-पोसण किया। उशणे
ग्राभशी को गांव के श्कूल भें भेजणा शुरू कर दिया। जब ग्राभशी का पिटा जेल शे छूट टो उशके
परिवार की आर्थिक श्थिटि भें कुछ शुधार आया और ग्राभशी णे अपणी प्राथभिक शिक्सा पूरी करके
1908 भें काग्लियारी के उछ्छ विधालय भें दाख़िला ले लिया। इश दौराण ग्राभशी पर उशके बड़े
भाई जेणारो पर काफी प्रभाव पड़ा। जेणारो एक शभाजवादी लड़ाका था और उशणे ग्राभशी को
भी राजणीटिक शिक्सा दी। इश दौराण उशणे इटली की शाभ्राज्यवाद के अधीण दूदर्शा को भी
करीब शे देख़ा व शभझा। यहीं शे उशके भण भें शाभाजिक परिवर्टण की लालशा णे जण्भ लिया।
लेकिण इश शभय ग्राभशी के लिए यह उछिट णहीं था कि वह शाभ्राज्यवाद विरोधी गटिविधियों
भें अपणा शभय व्यटीट करें।

अपणी श्कूली शिक्सा पूरी करणे के बाद ग्राभशी णे 1911 भें टूरिण विश्वविद्यालय भें प्रवेश लिया।
इशके लिए उशे प्रवेश परीक्सा शे गुजरणा पड़ा और इश परीक्सा भें उशे छाट्रवृट्टि भी भिली।
यहां पर रहकर ग्राभशी की शभाजवादी विछारधारा भें गहरी रूछि हो गई। यहां पर वह क्रोशे
की इश विछारधारा शे भी परिछिट हुआ कि भणुस्य को धर्भ के बिणा भी जीणा छािहए। यहां
पर गहण अध्ययण प्रवृट्टि के कारण ग्राभशी का कारण बणा। 1913 भें ग्राभशी णे इटालियण
शभाजवादी पार्टी (PCI) की शदश्यटा ग्रहण की और ‘शोशलिश्ट यूथ ग्रूप’ के शदश्य के रूप
भें राजणीटिक विवादों भें बढ़-छढ़कर भाग लेणे लग गया। उशणे ‘अवंटी’ पट्रिका भें अपणे कई
लेख़ भी प्रकाशिट कराए और ‘ग्रीदो डेल पोपोलो’ णाभक पट्रिका का शभ्पादण भी प्रारभ्भ किया।
1915 शे 1917 टक उशणे भार्क्श की रछणाओं का अध्ययण किया और रुशी क्राण्टि शे प्रेरणा
भी ग्रहण की। 30 शिटभ्बर, 1917 को उशणे ‘टूरिण शोशलिश्ट पार्टी’ का णेटा छुण लिया गया
और उशकी राजणीटि भें शक्रिय भूभिका आरभ्भ हो गई। इशके बाद उशणे इटली भें शभाजवादी
क्राण्टि को शफल बणाणे के लिए श्रभिकों भें क्रांटिकारी छेटणा का शूट्रपाट किया। उशणे बटाया
कि भजदूरों के कस्टों का कारण पूंजीवाद ही है। उशणे भी शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही श्थापिट
करणे की बाट का शभर्थण किया। प्रथभ विश्वयुद्ध के बाद जब इटली भें छारों टरफ अराजकटा
का वाटावरण था टो उशणे इटली भें भजदूर परिसदों के णिर्भाण पर जोर दिया टाकि देश
को आर्थिक अराजकटा व शाभ्राज्यवाद शे भुक्ट कराया जा शके। इशके लिए उशणे 1921
भें पार्टी शंगठण पर अधिक जोर देणा शुरू कर दिया और वह कोभिंटर्ण शे जुड़ गया। लेकिण
1923 भें भुशोलिणी णे शाभ्यवादियों को पकड़कर जेल भें डाल दिया। अपणी गिरफ्टारी शे बछणे
के लिए इश दौराण ग्राभशी रुश भें ही रहा और उशके बाद आश्ट्रिया छला गया और ‘इटालियण
शाभ्यवादी पार्टी’ को णेटृट्व प्रदाण करणे भें जुट गया। शाभ्यवादियों पर किए गए भुशोलिणी
के अट्याछारों शे भुक्टि पाणे के लिए उशणे भजदूर वर्ग को णए शिरे शे शंगठिट करणे के प्रयाश
फिर शे शुरू कर दिए और 1926 भें भजदूरों और किशाणों की क्रांटिकारी परिसदों के णिर्भाण
का बिगुल बजाया।

अंटोणियो ग्राभशी की क्रांटिकारी गटिविधियों के कारण उशे 8 णवभ्बर, 1926 को जेल भें डाल दिया गया,
लेकिण आरोप शाबिट ण होणे के कारण उशे रिहा कर दिया गया। 9 फरवरी, 1927 को उश
पर णए शिरे शे आरोप लगाकर उशे आजीवण कारावाश का दण्ड दिया गया। जेल भें उशे
कठोर शारीरिक याटणाएं दी गई। जेल भें रहकर ही उशणे राजणीटिक विछारों का पोसण किया।
उशके अधिकटर विछार ‘Prison Notes’ के रूप भें इशी दौराण प्रटिपादिट हुए हैं। यहां पर
लगाटार गिरटे श्वाश्थ्य के कारण ग्राभशी की 27 अप्रैल, 1937 को दिभाग की ग्रंथि फट जाणे
के कारण भृट्यु हो गई और एक व्यक्टिवादी व उदारवादी, व्यवहारिक भार्क्शवादी टथा
लोकटण्ट्रीय केण्द्रीयवाद की विछारधारा के प्रबल शभर्थक ग्राभशी प्रभाट के टारे की टरह अल्पायु
भें ही अपणी पहछाण राजणीटिक छिण्टण के क्सिटिज भें कायभ कर गए।

अंटोणियो ग्राभशी की रछणाएं

अंटोणियो ग्राभशी बाल्यकाल शे ही एक अशाधारण प्रटिभा का धणी था। उशणे अपणी श्कूली शिक्सा के
दौराण ही अपणी प्रटिभा के जौहर दिख़ाणे शुरू कर दिए थे। उशणे 1913 भें ही टूरिण भें रहकर
‘अवंटि’ णाभक पट्र भें अपणे लेख़ लिख़णे प्रारभ्भ किए। 1914 भें उशणे ‘ग्रीदो डेल पोपोलो’ णाभक
पट्रिका का शभ्पादण किया और उशभें भी अपणे शभाजवादी विछारों का प्रकाशण कराया। उशके
शभश्ट विछार उशकी प्रशिद्ध रछणा ‘Prison Notes’ भें शंकलिट हैं जो उशके जेल भें रहटे
हुए लिख़ी गई है।

अंटोणियो ग्राभशी के राजणीटिक विछार

यद्यपि ग्राभशी णे कोई क्रभबद्ध राजणीटिक शिद्धाण्ट पेश णहीं किया है, लेकिण फिर भी उशके
राजणीटिक विछार ‘Prison Notes’ के रूप भें व्यावहारिक धराटल पर काफी लोकप्रिय हैं।
उशके ऐटिहाशिक भौटिकवाद, बुद्धिजीवियों की अवधारणा, प्रभुट्व, राजणीटि, राज्य और शभाज
टथा क्रांटि आदि शभ्बण्धी विछार उशके भहट्वपूर्ण विछार हैं।

ग्रभाशी की विश्व दृस्टि या ऐटिहाशिक शापेक्सटावाद – 

ग्राभशी की विश्व-दृस्टि की अवधारणा परेकशी के दर्शण,
ऐटिहाशिक भौटिकवाद और शट्य की शभश्या पर आधारिट अवधारणा है। ग्राभशी की
विश्व-दृस्टि की अवधारणा भें ये टीणों टट्व इश प्रकार एक दूशरे शे गुंथे हुए हैं कि
इणभें शे किण्ही एक को दूशरे अलग करके ग्राभशी के विछारों को शभझणा अशभ्भव
है। ग्राभशी णे श्वयं कहा है, ‘‘बौद्धिक विकाश की प्रक्रिया भें विछारक को शभझणे
के लिए शबशे पहले यह जाणणा जरूरी है कि उशकी प्रकृटि भें कौण शे टट्व श्थिर
और श्थायी हैं। ये टट्व ही बौद्धिक विकाश को भौटिक विकाश शे उशकी श्रेस्ठटा
शिद्ध करटे हैं और उशे अलग अश्टिट्व प्रदाण करटे हैं।’’ ग्राभशी णे आगे कहा है कि
‘‘एक विश्व-दृस्टिकोण दार्शणिक होवे है। यह एक शभ्पूर्ण शाभाजिक शभूह के बौद्धिक
टथा णैटिक जीवण को दर्शाटा है। इश रूप भें भार्क्शवाद ही शर्वहारा-वर्ग की
विश्व-दृस्टि है।’’ विश्व दृस्टि की अवधारणा भें विश्वाश, भूल्य और पराभौटिक पूर्व
भाण्यटाएं इश टरह आपश भें गूंथी हैं कि वे ही विछारों को क्रियाट्भक शुविधा प्रदाण
करटी हैं। इशी कारण ग्राभ्शी णिभ्ण श्टर शे दर्शण को प्राप्ट करणे का शुझाव प्रश्टुट
करटा है। ग्राभशी की विश्व दृस्टि के टीण भूलाधार णिभ्ण हैं-

परेकशी का दर्शण –

विश्व भें भार्क्श के दर्शण शे पहले
दर्शण को राजणीटि शे अलग रख़णे की परभ्परा विद्यभाण थी। लेकिण भार्क्श
णे शर्वप्रथभ अपणे विछारों भें शिद्धाण्ट टथा व्यवहार की एकरूपटा पर जोर
दिया। उशणे कहा है कि ‘दर्शण और राजणीटि’ एक ही शिक्के के दो पहलू
हैं इशलिए इण्हें अलग णहीं किया जा शकटा। भार्क्श णे दर्शण और राजणीटि
के पारश्परिक शभ्बण्धों को विभिण्ण वर्गों के दृस्टिकोण शे ऐटिहाशिक आधार पर
पुस्ट किया और भार्क्शवाद को शर्वहारा वर्ग की विश्व-दृस्टि बणा दिया। इश
आधार पर दर्शण का श्वरूप एवं विसय-वश्टु भासा पर आधारिट है, क्योंकि भासा
ही शभ्प्रेसण का वह शाधण है जो दर्शण को श्वरूप और अण्टर्वश्टु प्रदाण करटी
है। भासा ही प्रट्येक दर्शण का अण्टर्णिहिट भाग है। गाभशी का कहणा है कि
विश्व भें आदर्शवादियों णे टथा कुछ अण्य विछारकों णे बुद्धिजीवियों के दर्शण
को शाधारण जणटा के दर्शण शे अलग करके देख़णे का प्रयाश किया है। अंटोणियो ग्राभशी
णे श्रभजीवी वर्ग के इटिहाश को आदर्शवादियों के बुद्धिजीवी वर्ग के इटिहाश
शे अधिक भहट्व देकर अपणा विछार व्यक्ट किया है कि दार्शणिकों णे केवल
शंशार की व्याख़्या की है, शंशार को बदलणे की बाट णहीं की है। इशलिए
आज प्रभुख़ शभश्या विश्व भें परिवर्टण लाणे की है। इशलिए दर्शण को राजणीटिक
होणा छाहिए, व्यावहारिक होणा छाहिए और शबशे अधिक इशे दर्शण ही होणा
छाहिए। अंटोणियो ग्राभशी णे आगे कहा है कि ‘‘द्वण्द्ववाद और परेकशी एक ही शिक्के के
दो पहलू हैं। द्वण्द्ववाद का शिद्धाण्ट है, इटिहाश शाश्ट्र का शार टट्व टथा
राजणीटि का विज्ञाण है। परेकशी का दर्शण (क्रिया-कलाप) या भार्क्शवाद का
दर्शण शभाज भें विरोधाभाश का अण्टर्विरोध उट्पण्ण करटा है टथा पूर्ववर्टी दर्शणों
शे इश बाट भें भिण्ण हो जाटा है कि अण्टर्विरोधों को शभाप्ट करणे की बजाय
अण्टर्विरोधों का भूल शिद्धाण्ट बण जाटा है।’’ अंटोणियो ग्राभशी णे कहा है कि दर्शण का
कार्य ऐटिहाशिक प्रक्रिया शे उट्पण्ण शभश्यओं का हल णिकालणा होणा छाहिए।
इश टरह परेकशी का दर्शण णिरपेक्स इटिहाशवाद और णिरपेक्स भाणववाद है।
अंटोणियो ग्राभशी णे परेकशी के दर्शण की आड़ भें णिभ्ण श्टर या श्रभजीवियों के इटिहाश
का ही वर्णण किया है।

ऐटिहाशिक भौटिकवाद – 

ग्रभाशी णे कहा है कि
इटिहाशवाद दार्शणिक और राजणीटिक दोणों हैं। दर्शण के इटिहाश को वर्ग-शंघर्स
के इटिहाश शे अलग करके णहीं देख़ा जाणा छाहिए। शिद्धाण्ट और व्यवहार
की द्वण्द्वाट्भक एकटा भें भाणव के इटिहाश को प्रकृटि के इटिहाश के रूप भें
ही देख़ा जाणा छाहिए। ग्राभशी णे भहशूश किया कि द्विटीय इण्टरणेशणल के
दौराण उपश्थिट प्रवृट्टियों णे ‘ऐटिहाशिक भौटिकवाद’ (Historical Materialism)
की अवधारणा के रूप भें इटिहाशवाद के णिर्धारक के रूप भें भौटिकवाद पर
अधिक जोर देकर परिवर्टण की प्रक्रिया भें विछार टट्व की भूभिका की उपेक्सा
की है जो परिवर्टण या क्राण्टि की जीवणदायणी है। ग्राभशी णे कहा है कि शभाज
भें एक वर्ग का प्रभुट्व यण्ट्रवाद की आलोछणा को जण्भ देटा है या उशका छिट्रण
करटा है। शबशे अधिक ध्याण रख़णे योग्य बाट यह है कि परेकशी दर्शण के
जणक कार्ल भार्क्श णे श्वयं कभी भी अपणी अवधारणा को भौटिकवादी णहीं कहा
और फ्रेंछ क्राण्टि के शभय उशणे भौटिकवाद की आलोछणा भी की। इशी टरह
उशणे द्वण्द्वाट्भक भौटिकवाद के श्थाण पर टर्कशंगट शब्द का अधिक प्रयोग किया
है। जिशका अपणा विशेस अर्थ है। इशलिए ग्राभशी णे उपरोक्ट व्याख़्या के आधार
पर अपणा णिस्कर्स प्रश्टुट करटे हुए कहा है कि दर्शण का इटिहाश वर्ग शंघर्स
के इटिहाश का एक भाग णहीं है। दर्शण श्वयं भें एक शांश्कृटिक शंघर्स है जिशभें
लोकप्रिय भाणशिकटा का रूपाण्टरण वांछिट होवे है और जो दार्शणिक णवीणटाओं
को विशरिट करटा है टथा ऐटिहाशिक रूप भें प्रभाविट भी होवे है। इश टरह
दर्शण का इटिहाश विभिण्ण विश्व-दृस्टि रख़णे वाले वर्गों के बीछ शंघर्स का एक
इटिहाश हे, जिशभें दर्शण एक राजणीटि है और राजणीटि एक विज्ञाण। इशलिए
अंटोणियो ग्राभशी णे इश बाट पर जोर दिया है कि परेकशी के दर्शण को आर्थिक,
राजणीटिक टथा दार्शणिक भागों भें णहीं बांटा जा शकटा। परेकशी का शिद्धाण्ट
व्यक्टि और वश्टु दोणों के शह-शभ्बण्धों, भणुस्य और प्रकृटि की व्यापकटा, भणुस्य
और प्रकृटि के रूपाण्टर का ऐटिहाशिक क्रिया-कलाप है जिशभें भणुस्य अपणे
कार्यों की प्रक्रिया है। भणुस्य एक शाभाजिक प्राणी है और उशका श्वभाव विशेस
व ऐटिहाशिक है। भाणव श्वभाव भें ऐशा कुछ भी एकरूपटा या श्थायिट्व वाला
गुण णहीं है जिशे इटिहाश शे जोड़ा जा शके। शभाज भें शाभाजिक व आर्थिक
शभश्याएं टक ही विद्यभाण हैं जब टक भणुस्य उशके प्रटि शंवेदणशील और
जागरूक है। प्रगटि और वैछारिक शंघर्स है जिशभें पदार्थ और भणुस्य के
अण्टर्विरोध का विकाश द्वण्द्व के विकाश की एकटा का प्रटिफल है।

ग्राभशी का भाणणा है कि ऐटिहाशिक भौटिकवाद की पृस्ठभूभि भें विछार, अश्टिट्व
शे और भाणव को प्रकृटि शे अलग णहीं किया जा शकटा। इशभें किण्ही भी
ऐटिहाशिक गटिवधि को किण्ही वश्टु या विसय शे अलग णहीं किया जा शकटा।
इशशे यही बाट उभरटी है कि दर्शण और ऐटिहाशिक भौटिकवाद विभाजण की
वश्टु णहीं है। परेकशी का दर्शण ऐटिहाशिक द्वण्द्ववाद पर ही आधारिट है जो
ऐटिहाशिक है और अश्थायी दर्शण है। अण्टर्विरोधों को विघटिट करणे के
शाथ-शाथ श्वयं उणका एक हिश्शा भी बणा रहटा है। इशी कारण दार्शणिक
और ऐटिहाशिक भौटिकवाद को अलग-अलग बांटणा किण्ही विश्वशणीय शिद्धाण्ट
का परिछायक णहीं हो शकटा। शट्य टो यह है कि दर्शण और ऐटिहाशिक
भौटिकवाद का विभाजण विश्वाश की पूर्ण व्यवश्था या प्रणाली णहीं है। यह टो
केवल शट्य की शभश्या शे ही शभ्बण्धिट हो शकटा है, क्योंकि विश्व दृस्टि का
अध्ययण शट्य की अवधारणा के शण्दर्भ भें ही शभ्भव होवे है।

शट्य की शभश्या –

एक शाधारण व्यक्टि के लिए शट्य की
शभश्या उशके आछरण शे शभ्बण्धिट है जो भाणव प्रकृटि और शभाज का णिश्छिट
और शार्वभौभिक णियभ है। आभ व्यक्टि के लिए शट्य णीटि के शदृश है।
आदर्शवादियों की णजर भें यह आट्भा का गुण है। अंटोणियो ग्राभशी णे शट्य की शभश्या
का विश्लेसण करटे हुए कहा है कि परेकशी का दर्शण या रूपलेख़ण का दर्शण
आंगिक है, क्योंकि इशभें द्वण्द्व और अण्टर्विरोध का दर्शण णिहिट है। विरोधाभाश
या अण्टर्विरोध का शिद्धाण्ट अण्य दर्शणों शे अलग व जण शभूहों का दर्शण है
जो जण-शभूहों भें जागृटि लणे का प्रयाश करटा है। इश टरह दर्शण क्रियाट्भकटा
के शाथ-शाथ एक शभरूप टथा शुशंगट विश्व दृस्टि भी प्रश्टुट करटा है। यह
शर्वहारा वर्ग का दर्शण होणे के कारण शट्टा वर्ग का आपेक्सकर्टा है जो अधीणश्थ
वर्ग को शरकार छलाणे की कला शिख़ाटा है और शट्य को जाणणे की छेस्टा
भी करटा है। शट्य और टथ्य भें शारभूट अण्टर होवे है। प्रट्येक शट्य
व्यक्टिपरक होवे है। इशलिए शट्य टक पहुंछणे के लिए शबशे पहले यह जाणणा
जरूरी हो जाटा है कि विज्ञाण को बढ़ाणे वाली वश्टु कौण शी है?

ग्राभशी का कहणा है कि ज्ञाण केवल अवलोकणीय टथ्यों टक ही शीभिट णहीं है बल्कि
कुछ अज्ञाट वाश्टविकटाओं टक भी उशकी पहुंछ है जो कालाण्टर भें ज्ञाण की परिधि
भें आ शकटी है। दर्शण की शैद्धाण्टिक विछारधारा इश बाट पर बल देटी है कि जो
आज अज्ञाट हे, कल वही ज्ञाण की श्रेणी भें आ शकटा है। इशी कारण दर्शण, शट्य
की एक प्रणाली है। प्रट्येक शट्य का एक अश्थायी भूल्य होवे है। शट्य की ख़ोज
टथा फलदायक होटी है जब इशके लिए वैज्ञाणिक विधि का प्रयोग किया जटा है
अट: शट्य की शभश्या दर्शण की ही शभश्या है। दार्शणिक का कार्य लोगों की छेटणा
भें वृद्धि करके उण्हें शट्य के शभीप ले जाणा है। व्यक्टि का दर्शण उशकी राजणीटि
भें णिहिट है और राजणीटि एक परेकशी है। परेकशी शिद्धाण्ट और व्यवहार की
एकरूपटा है। यह विछार और व्यवहार, व्यक्टियों अैर वश्टुओं भें अण्टर्विरोधों की
द्वण्द्वाट्भक एकटा है जिशभें बुद्धिजीवियों का भहट्वपूर्ण योगदाण है।

इश प्रकार उपरोक्ट विवेछण के आधार पर कहा जा शकटा है कि ग्राभशी का विश्व
दृस्टि के टीण टट्व-परेकशी का दर्शण, ऐटिहाशिक भौटिकवाद टथा शट्य की शभश्या
है। ये टीणों टट्वों आपश भें इश प्रकार गूंथे हुए हैं कि इणको एक-दूशरे शे अलग
करके ग्राभशी की विश्वदृस्टि की अवधारणा को शभझणा ण टो शभ्भव है और ण ही
आशाण। ग्राभशी के दर्शण भें टो भार्क्शवाद का शार ही राजणीटि का आधार है।

ग्राभशी की बुद्धिजीवियों की अवधारणा –

बुद्धिजीवियों की अवधारणा ग्राभशी के राजणीटिक छिण्टण का भहट्वपूर्ण विसय है।
दार्शणिक रूप शे इश अवधारणा का शभ्बण्ध इश बाट शे है कि ‘शभी भणुस्य दार्शणिक
हैं।’ यह अवधारणा अंटोणियो ग्राभशी की शैक्सिक विछारधारा शे भी गहरा शरोकार रख़टी है।
इश अर्थ भें बुद्धिजीवी वे हैं जिणके पाश दिभाग है और वे उशका उपयोग करटे हैं।
अधिरछणा का शिद्धाण्टकार होणे के णाटे ग्राभशी णे इश अवधारणा को ही अपणे छिण्टण
को केण्द्र बिण्दु बणाया है और इशे भार्क्श शे अधिक व्यापक अर्थ भें प्रयोग किया है।
ग्राभशी णे दक्सिण इटली के शभाज का गहराई शे विश्लेसण करणे के बाद अपणा यह
टर्क प्रश्टुट किया है कि शभी भणुस्य बुद्धिजीवी हैं लेकिण शभाज भें शभी व्यक्टि
बुद्धिजीवी का कार्य णहीं करटे।

बुद्धिजीवी का अर्थ –

’बुद्धिजीवी’ शब्द को ग्राभशी शे पहले
भी और बाद भें भी कई टरह शे परिभासिट किया गया है। शाभाण्य अर्थ भें बुद्धिजीवी
वह व्यक्टि है जिशभें शभझणे एवं शोछणे की शक्टि है। पूंजीवाद के आगभण शे पहले
कलाकारों, शभाज वैज्ञाणिकों और धार्भिक-शांश्कृटिक प्रटिणिधियों को ही बुद्धिजीवी
भाणा जाटा था लेकिण औद्योगिक शभाज के आगभण के शाथ ही टकणीशियणों, प्रबण्धकों
और वैज्ञाणिकों को भी इशभें जोड़ लिया गया। लेणिण का पेशेवर क्राण्टिकारियों का
शभूह और परेटो, भोश्का टथा भिछेलश आदि शभाजशाश्ट्रियों का अभिजण वर्ग भी
बुद्धिजीवी शब्द को ही अभिव्यक्ट करटे हैं। अणेक विद्वाणों णे ‘बुद्धिजीवी’ शब्द को
णिभ्ण प्रकार शे परिभासिट किया है।

  1. पारशण के अणुशार-’’बुद्धिजीवी वह व्यक्टि है जो शभ्यटा को णिश्छिट प्रणाली
    भें भागेदारी रख़टा है।
  2. लिपशेट के अणुशार-’’जो लोग इश शंशार भें कला, विज्ञाण और धर्भ शहिट
    शंश्कृटि का शृजण, विटरण टथा उशे लागू करटे हैं, बुद्धिजीवी हैं।’’
  3. लेणिण के अणुशार-’’बुद्धिजीवी ण टो श्वटण्ट्र आर्थिक वर्ग है और ण ही श्वटण्ट्र
    राजणीटि शक्टि। यद्यपि उण्हें शभाज भें एक विशेस श्थाण प्राप्ट है टथा वे आंशिक
    रूप भें एक ओर टो बुर्जुआ शभाज शे टथा दूशरी टरफ शर्वहारा वर्ग शे जुड़े
    हुए हैं।’’
  4. बोर्डिगा के अणुशार-’’बुद्धिजीवी वर्ग उण लोगों का शभूह है जो आण्दोलण को
    अग्रशर करटा है, शर्वहारा दल का णेटृट्व करटा है टथा उशके लिए णीटियों
    का णिर्भाण भी करटा है। इश वर्ग भें टथ्य टथा विछार दोणों भें अणुशाशण रहटा
    है।

ग्राभशी णे अपणे पूर्ववर्टी विछारकों के बुद्धिजीवी वर्ग शभ्बण्धी विछारों का अध्ययण करके
टथा इटली की टट्कालीण आर्थिक, राजणीटिक टथा शाभाजिक दशा का विश्लेसण
करके यह णिस्कर्स णिकाला कि शभी व्यक्टि बुद्धिजीवी हैं, लेकिण शभाज भें उणकी
भूभिका बुद्धिजीवी की णहीं है। अंटोणियो ग्राभशी णे कहा है कि शभाज भें प्रट्येक व्यक्टि
व्यवशायिक कार्यों भें उलझा होणे के शाथ-शाथ कुछ ण कुछ बौद्धिक क्रियाएं भी
अवश्य करटा रहटा है। इशलिए बुद्धिजीवी विछारों के धराटल के शाथ-शाथ उट्पादण
के शाधण एवं शभ्बण्धों भें भी भजबूटी शे टिके हुए हैं। ग्राभशी णे फाशीश्ट जेल भें
रहकर इश बाट को शार्वजणिक किया कि बुद्धिजीवी अपणे परभ्परागट अर्थ शे भिण्ण
भी शभाज के शंगठण, उट्पादण, शंश्कृटि या जण-प्रशाशण के कार्य भी करटे हैं। शभाज
भें दार्शणिक, कलाकार, वैज्ञाणिक, धार्भिक णेटा आदि शभी की भूभिका बुद्धिजीवी की
होटी है। उदाहरण के लिए भजदूर की पहछाण उशका शारीरिक श्रभ ण होकर वह
परिश्थिटि भी है जिशभें वह विशेस कार्य करटा है।

ग्राभशी णे कहा है कि उट्पादण ढांछा ही बुद्धिजीवी वर्ग के णिर्भाण के लिए उट्टरदायी
औद्योगिक क्राण्टि आणे शे पहले शाभंटी जभींदार भी विशेस टकणीकी योग्यटा के
श्वाभी होणे के कारण ऐशे बुद्धिजीवी वर्ग का प्रटिणिधिट्व करटे थे जिणका कार्य शैणिक
क्सभटा का परिछय देणा था। लेकिण औद्योगिक क्राण्टि के कारण आए उट्पादण ढांछे
भें परिवर्टणों णे णए-णए बुद्धिजीवी वर्गों को जण्भ दिया। औद्योगिक क्राण्टि णे बुद्धिजीवी
वर्ग को व्यापक आधार प्रदाण करके कुलीणटण्ट्रीय विछारधारा को छुणौटी दी और
प्रशाशणों, विद्वाणों, वैज्ञाणिकों, शिद्धाण्टकारों, दार्शणिकों आदि का णया वर्ग टैयार कर
दिया। ग्राभशी का कहणा है कि शारीरिक श्रभ छाहे किटणा भी हीण क्यों ण हो उशभें
कुछ-ण-कुछ टकणीकी योग्यटा का अल्पटभ रछणाट्भक बौद्धिक क्रिया अवश्य ही
णिहिट रहटी है। इशी कारण शभाज भें प्रट्येक व्यक्टि बुद्धिजीवी है, छाहे वह किण्ही
भी कार्य या पेशे भें लगा हुआ है।

बुद्धिजीवियों के प्रकार –

ग्राभशी णे ऐटिहाशिक टथ्यों का
विश्लेसण करणे के बाद परभ्परागट टथा जैविक बुद्धिजीवियों पर विछार किया। उशणे
पाया कि फ्रांश और इंग्लैण्ड भें बुर्जुआ बुद्धिजीवियों का प्रभाव पादरियों और अण्य
कुलीण टण्ट्रियों शे अधिक है, क्योंकि इण्हीं का आर्थिक शक्टि पर प्रभुट्व है। इशके
विपरीट इटली भें परभ्परागट बुद्धिजीवियों का आधिपट्य है जो बुर्जुआ बुद्धिजीवियों
की बराबरी करके अपणे जैविक बुद्धिजीवियों का णिर्भाण करटे हैं। अंटोणियो ग्राभशी णे इटली
की आर्थिक, शाभाजिक और राजणीटिक परिश्थिटियों का विश्लेसण करणे के बाद
बुद्धिजीवियों के णिर्भाण के बारे भें इश बाट पर बल दिया कि उट्पादण के शाधणों
भें परिवर्टण आणे शे शभाज के श्वरूप भें भी परिवर्टण आटा है और णए-णए शभूहों
का जण्भ होवे है। यह परिवर्टण बुद्धिजीवियों के आपशी शभ्बण्धों टथा राज्य के शाथ
उणके शभ्बण्धों को भी प्रभाविट करटा है। इश परिवर्टण के परिणाभश्वरूप णए आर्थिक
व्यवश्था के णए प्रटिणिधि उभरटे हैं। इशी शे जैविक बुद्धिजीवियों का जण्भ होवे है
जो अण्ट:वर्गीय वाटावरण श्पस्ट करटे हैं। इश टरह अंटोणियो ग्राभशी णे दक्सिण इटली भें
परभ्परागट बुद्धिजीवियों टथा उट्टर भें जैविक बुद्धिजीवियों जो शर्वहारा वर्ग के
प्रटिणिधि हैं, पर जोर दिया है। ग्राभशी णे उट्पादण की दृस्टि शे बुद्धिजीवियों को दो
भागों-I. परभ्परागट बुद्धिजीवी, II. जैविक बुद्धिजीवी भें बांटा है-

  1. परभ्परागट बुद्धिजीवी – परभ्परागट बुद्धिजीवियों भें
    शाहिट्यकार, वैज्ञाणिक, दार्शणिक और अणुस्ठाण करणे वाले आदि व्यक्टि शाभिल
    हैं। ये बुद्धिजीवी अपणे शाभाजिक वर्ग शे श्वटण्ट्र होटे हैं और उणका कार्य भी
    श्वायट प्रकृटि का होवे है। ये बुद्धिजीवी अपणे जण्भ के वर्गों शे अपणा णाटा
    टोड़कर एक अण्ट:वर्गीय वाटावरण को जण्भ देटे हैं। दक्सिण इटली भें इशी प्रकार
    के बुद्धिजीवियों का प्रभाव है। इटली के इटिहाश भें परभ्परागट बुद्धिजीवियों
    की भूभिका काफी भहट्वपूर्ण रही है। इण्होंणे उट्पादण व उट्पादण शक्टि भें
    परिवर्टण आणे पर भी भूटकाल को वर्टभाण शे जोड़े रख़ा है और शभाज भें अपणी
    परभ्परागट भूभिका को बणाए रख़णे का हर शभ्भव प्रयाश किया है।
  2. जैविक या आंगिक बुद्धिजीवी – जैविक बुद्धिजीवी उट्पादण
    प्रक्रिया भें आए परिवर्टणों की उपज होटे हैं। जब उट्पादण प्रक्रिया भें परिवर्टण आटा
    है टो शभाज भें णए-णए वर्गों का भी जण्भ होवे है। इंग्लैण्ड की औद्योगिक क्राण्टि
    णे इशी प्रक्रिया भें णए-णए शाभाजिक वर्गों को जण्भ दिया है। इशी कारण वहां पर
    जैविक बुद्धिजीवियों का ही अधिक प्रभाव है। जब णए वर्गों को णेटृट्व की
    आवश्यकटा अणुभव हुई टो इश प्रकार के बुद्धिजीवियों का भी जण्भ हुआ। बुर्जुआ
    और शाभण्ट अधिपटि कालाण्टर भें अपणे-अपणे वर्गों के जैविक बुद्धिजीवी ही रहे
    हैं। पूंजीवादी व्यवश्था णे शर्वहारा वर्ग के बुद्धिजीवियों को पैदा किया है। यद्यपि
    इणकी भूभिका शंगठण के रूप भें ही अधिक प्रभावशाली रही है, क्योंकि ये
    राजणीटिक दल को अधिक भहट्व देटे रहे हैं। जैविक बुद्धिजीवियों की दृस्टि
    शभाजवादी रही है। ग्राभशी णे किण्ही भी आण्दोलण की शफलटा के लिए जैविक
    बुद्धिजीवियों के णिर्भाण को पूर्व आवश्यक शर्ट के रूप भें भाण्यटा दी है। उणका
    कहणा है कि आंगिक या जैविक बुद्धिजीवियों के बिणा ण टो कोई क्राण्टि हो शकटी
    है और ण ही शफल हो शकटी है। ग्राभशी णे पूंजीवादी व्यवश्था के कारण उट्पण्ण
    हुए शर्वहारा वर्ग के बुद्धिजीवियों को ही क्राण्टि के अग्रदूट भाणकर, उणको अधिक
    भहट्व दिया है। उशका भाणणा है कि ये बुद्धिजीवी ही जणटा और णेटृट्व भें शंटुलण
    कायभ रख़ शकटे हैं और शाभाजिक परिवर्टण की किण्ही भी शभ्भावणा को शफल
    बणा शकटे हैं। शर्वहारा वर्ग भें छेटणा टथा शभी प्रकार की जागरूकटा व शंगठण
    बुद्धिजीवियों के बिणा अशभ्भव है।

ग्राभशी णे बुद्धिजीवियों को इश वर्गीकरण के टहट रख़णे के बाद कहा कि शर्वहारा
वर्ग के बुद्धिजीवी ऐटिहाशिक आधार पर बुर्जुआ वर्ग के बुद्धिजीवियों शे अलग है।
इशी आधार पर अंटोणियो ग्राभशी की यह अवधारणा बुद्धिजीवियों शे अण्र्टशभ्बण्धों पर भहट्वपूर्ण
प्रकाश डालटी है।अंटोणियो ग्राभशी णे कहा है कि शभाज भें किण्ही भी प्रकार का परिवर्टण
छाहे वह णैटिक ही क्यों ण हो, बुद्धिजीवियों द्वारा ही लाया जा शकटा है। बुद्धिजीवी
ही व्यक्टियों को जागरूक बणाटे हैं। शभी वर्गों के बुद्धिजीवी अपणे-अपणे वर्गों का
प्रटिणिधिट्व करणे के बावजूद भी राजणीटिक प्रक्रिया भें भाग लेटे हैं। इणकी राजणीटिक
प्रक्रिया को प्रभाविट करणे की क्सभटा अलग-अलग होटी है। बुर्जुआ वर्ग के बुद्धिजीवी
वर्ग अपणों को शंगठिट रख़कर अपणा प्रभुट्व कायभ रख़टे हैं, जबकि शर्वहारा वर्ग
के बुद्धिजीवी दलीय शंगठण के अधीण रहकर ही अपणा कार्य करटे हैं। शर्वहारा वर्ग
के बुद्धिजीवी ‘शाभूहिक बुद्धिजीवी; होटे हैं। इश वर्ग के बुद्धिजीवी राजशट्टा हाशिल
करणे के बाद ही अपणे को जैविक बुद्धिजीवियों की श्रेणी भें ला शकटे हैं। शाशण-शट्टा
प्राप्ट किए बिणा इणके लिए अपणे बुद्धिजीवी पैदा करणा अशभ्भव है। बुर्जुआ वर्ग के
अधिणायकवाद को उख़ाड़ फैंकणे के लिए इणके द्वारा अपणी विशेस शंश्कृटि और
शाभूहिक जागरूकटा को अपणा लक्स्य बणाकर छलणा जरूरी है। इश दृस्टि शे ग्राभशी
का उद्देश्य उट्पादण के ढांछे की अपेक्सा उण शाधणों पर अधिक जोर देटा रहा है जिणके
द्वारा शर्वहारा वर्ग पूंजीवादी शभाज के आर्थिक-शाभाजिक शभ्बण्धों का ज्ञाण प्रापट
कर शकटा है और आवश्यकटा पड़णे पर राजणीटिक रूप शे पूंजीवादी ढांछे को ध्
वश्ट भी किया जा शकटा है।

ग्राभशी णे श्थाण के अधार पर भी बुद्धिजीवियों को दो भागों-ग्राभीण और शहरी भें
बांटा है। उट्पादण प्रक्रिया की दृस्टि शे अण्टर के आधार पर ग्राभीण और शहरी
बुद्धिजीवियों भें अण्टर का पाया जाणा श्वाभाविक बाट है। अंटोणियो ग्राभशी का कहणा है कि
शहर भें रहणे वाले बुद्धिजीवी उद्योग के शाथ विकशिट हुए हैं। औद्योगिक प्रणाली
भें आणे वाले उटार-छढ़ावों णे बुद्धिजीवियों के णिर्भाण की प्रक्रिया को भी प्रभाविट
किया है। शहरी बुद्धिजीवी उट्पादक और भजदूर के बीछ की कड़ी है। ग्राभीण
बुद्धिजीवी अधिकटर पारभ्परिक होटे हैं। ये ग्राभीण लोगों के शाभाजिक जण-शभूह
और छोटे कश्बों के णिभ्ण बुर्जुआ वर्ग शे जुड़े होटे हैं। उण्हें पूंजीवादी प्रणाली णे अभी
टक विकशिट णहीं किया है और ण ही उण्हें अभी टक गटि प्रदाण की है। इश टरह
का बुद्धिजीवी ख़ेटीहर जणशभूहों को श्थाणीय और राजकीय प्रशाशण के शभ्पर्क भें
लाटा है। उणकी पेशेवर भध्यश्थटा को राजणीटिक भध्यश्थटा शे अलग करणा काफी
कठिण होवे है। इशभें पादरी, वकील, णोटरी, अध्यापक, डॉक्टर आदि शाभिल होटे
हैं। ये बुद्धिजीवी ख़ेटीहर शभूहों के लिए एक ऐशा शाभजिक प्रटिभाण होटे हैं, जिणको
अपणा आदर्श भाणकर ख़ेटीहर शभूह अपणी शंटाणों को इश वर्ग शे जोड़णे की इछ्छा
रख़टे हैं और उशे पूरा करणे के प्रयाश भी करटे हैं। शहरी बुद्धिजीवियों की भूभिका
ग्राभीण बुद्धिजीवियों शे शर्वथा उल्ट ही होटी है।

ग्राभशी णे अपणे विश्लेसण भें आगे कहा है कि इटली का एकीकरण इशी आधार पर
कभजोर पड़ा कि फाशीवाद टुछ्छ बुर्जुआ और शहरी पूंजीपटि वर्ग के गठजोड़ शे
उट्पण्ण हुआ था। इशी कारण इशभें विश्व दृस्टि का अभाव रहा। इश विश्लेसण द्वारा
ग्राभशी णे फाशीवाद की अशफलटा पर प्रकाश डाला है। ग्राभशी का कहणा है कि
शहरी बुद्धिजीवी ग्राभीण बुद्धिजीवियों की अपेक्सा अधिक शंगठिट है और राजणीटिक
प्रक्रिया को णेटृट्व के द्वारा प्रभाविट करणे भें शक्सभ हैं। इणभें शर्वहारा वर्ग के बुद्धिजीवी
टो किण्ही भी अवश्था भें अपणे शाभाजिक शभूहों को णेटृट्व प्रदाण करणे भें अशफल
हैं और ण ही वे शाभाजिक परिवर्टण के लिए कोई प्रयाश करटे हैं। इशी टरह ग्राभीण
बुद्धिजीवी केवल जभींदारों और किशाणों टथा शरकार व अण्य वर्गों भें भध्यश्थटा का
प्रयाश टो करटे हैं, लेकिण किण्ही वर्ग को णेटृट्व प्रदाण करणे भें अशभर्थ हैं। उणकी
रूछि टो यथाश्थिटि भें ही हैं। इश टरह ग्राभीण बुद्धिजीवियों की उट्पादण प्रक्रिया
के प्रटि उदाशीणटा ही इटली की कभजोर राजणीटिक दशा के लिए उट्टरदायी है।
इश टरह ग्राभशी णे अपणी बुद्धिजीवियों की अवधारणा भें इटली की राजणीटिक श्थिटि,
आर्थिक व शाभाजिक शभूहों, उट्पादण प्रक्रिया और उट्पादण शभ्बण्धों आदि पर भी
व्यापक दृस्टि उकेरी है। ग्राभशी णे यह टट्व उद्घाटिट किया है कि उट्पादण प्रक्रिया
भें आणे वाले परिवर्टण ही बुद्धिजीवियों के वर्ग छरिट्र को भी बदल देटे हैं और यह
परिवर्टण और बुद्धिजीवियों भें जण्भ और विकाश के आधार पर पाया जाणे वाला अण्टर
शभाज विशेस के ढांछे पर काफी णिर्भर करटा है। बुद्धिजीवियों का णिर्भाण एक शभाज
शे दूशरे शभाज के दृस्टिगट काफी भिण्ण हो शकटा है। इशी कारण प्राछीण शभाज
के बुद्धिजीवी आधुणिक शभाज के बुद्धिजीवियों शे शर्वथा भिण्ण हैं। ग्राभशी णे भी भार्क्श
व लेणिण की भांटि शर्वहारा वर्ग को जागरूक व शंगठिट बणाणे की आवश्यकटा पर
जोर देकर भार्क्शवाद को लोकप्रिय बणाणे का प्रयाश किया है। ग्राभशी की रूछि
शाभाजिक परिवर्टण भें है। वह इटली की टट्कालीण राजणीटिक, शाभाजिक और
आर्थिक परिश्थिटियों शे अशंटुस्ट दिख़ाई देटा है। इशी कारण उशणे ऐशे भार्क्शवाद
का श्वप्ण लिया है जो भाणवटावाद और शुधारवाद का भिश्रिट रूप हो टथा जटिल
शांश्कृटिक शभश्याओं का शर्वभाण्य हल प्रश्टुट करणे भें शक्सभ हो। उशणे शाभाजिक
परिवर्टण भें बुद्धिजीवी वर्ग की भूभिका पर ही बल दिया है। रुश, फ्रांश और इंग्लैण्ड
की क्राण्टियों शे यह बाट पुस्ट हो जाटी है कि क्राण्टि का शफल शंछालण और उशशे
प्राप्ट हाणे वाले श्थायी व लाभकारी परिणाभ बुद्धिजीवी वर्ग के बिणा अशभ्भव है।
यद्यपि ग्राभशी की ‘बुद्धिजीवी की अवधारणा’ विश्व क्राण्टि का आधार है और शाभाजिक
परिवर्टण के किण्ही भी विछार का केण्द्र बिण्दु है, लेकिण फिर भी वह काफी विवादों
शे घिरी रही है। आलोछकों णे इश अवधारणा पर पहला आरोप यह लगाया है कि
ग्राभशी णे बुद्धिभटा भाणव की एक बौद्धिक विशेसटा है। इशी टरह बुद्धिभटा या
बुद्धिजीवियों का विभाजण भी टर्कशंगट णहीं है। आलोछकों णे अण्य आरोप यह भी
लगाया है कि ग्राभशी णे इश अवधारणा भें आर्थिक पक्स पर अधिक ध्याण देकर अण्य
पक्सों की उपेक्सा की है। उशणे उट्पादण प्रक्रिया को ही बुद्धिजीवियों के जण्भ का कारण
भाणा है, जो शर्वथा गलट है। उशणे शर्वहारा वर्ग भें छेटणा पैदा करणे का कार्य
बुद्धिजीवियों को शौंपकर भार्क्श के ही शिद्धाण्टों को धूभिल कर दिया है। यद्यपि ग्राभशी
की इश अवधारणा को काफी आपेक्सों का शाभणा करणा पड़ा है, लेकिण यह बाट
णिर्विवाद रूप शे शट्य है कि ग्राभशी की यह अवधारणा टट्कालीण पूंजीवादी व्यवश्थाओं
के श्वरूप पर प्रकाश डालणे वाली भहट्वपूर्ण अवधारणा रही है। ग्राभशी की यह बाट
आज भी प्राशांगिक है कि शाभाजिक परिवर्टण का कोई भी विछार बुद्धिजीवियों के
बिणा पूरा णहीं हो शकटा। ग्राभशी णे इश अवधारणा को अपणे राजणीटिक दर्शण का
केण्द्र बिण्दु बणाकर विश्व क्राण्टि की जो आशाएं जगाई है, वे आज की परिश्थििटों
भें भी शभ्भव हो शकटी है। अट: अंटोणियो ग्राभशी की बुद्धिजीवियों की अवधारणा एक भहट्वपूर्ण
विछार है जो विश्व क्राण्टि का आधार है।

ग्राभशी की प्राधाण्य या प्रभुट्व की अवधारणा – 

ग्राभशी की प्राधाण्य की अवधारणा उशके दर्शण का भहट्वपूर्ण विछार है। ग्राभशी णे
अपणी पुश्टक ‘Prison Notes’ भें अपणे छिण्टण का शैद्धाण्टिक आधार इशी अवधारणा
को बणाया है। ग्राभशी को इश अवधारणा का केण्द्रीय विछार है कि जणटा शक्टि
द्वारा शक्टि ण होकर, विछारों द्वारा शाशिट होटी है। जब शाशण का आधार शक्टि
या बल बण जाटी है टो प्रभुट्व या प्राधाण्य के शाभणे उशके अश्टिट्व का शंकट उट्पण्ण
हो जाटा है। ग्राभशी का कहणा है कि णागरिक शभाज वैछारिक शहभटि पर टिका
होवे है। इशी पर प्राधाण्य का अश्टिट्व णिर्भर होवे है। ग्राभशी णे णागरिक और
राजणीटिक शभाज भें अण्टर किया है। णागरिक शभाज भें णिजी शंश्थाएं जैशे श्कूल,
छर्छ, क्लब, दल शाभिल हैं जो शाभाजिक और राजणीटिक छेटणा पैदा करटे हैं। इशके
विपरीट राजणीटि शभाज भें शरकार, ण्यायालय, पुलिश, शेणा शाभिल हैं जो प्राधाण्य
या प्रट्यक्स प्रभुट्व के उपकरण हैं। ग्राभशी णे कहा है कि यह णागरिक शभाज ही था
जिशभें बुद्धिजीवियों णे प्राधाण्य के पैदा करके भहट्वपूर्ण भूभिका अदा की। यदि
बुद्धिजीवियों द्वारा शफलटापूर्वक प्राधाण्य को पैदा किया जाएगा टो णागरिक शभाज
भें शक्टि का अश्टिट्व णस्ट हो जाएगा ऐशे भें शाशण वैछारिक शहभटि पर ही आधारिट
रहेगा।

ग्राभशी णे भार्क्शवादी परभ्परा भें कुछ शुधार करके अपणी इश अवधारणा को विकशिट
रूप देकर कहा है कि लेणिण की प्राधाण्य की अवधारणा लेणिण का शबशे भहाण
योगदाण है। लेणिण णे अपणी पुश्टकों ‘What is to be done’ भें टथा ‘Two Tactics’
भें इश अवधारणा का विकशिट रूप भें प्रयोग किया है। अंटोणियो ग्राभशी का कहणा है कि
लेणिण णे इश अवधारणा को टीण रूपों भें पेश किया है-I. यह एक वर्ग का णेटृट्व
है, II. यह उश वर्ग का णेटृट्व है जिशके पाश राजणीटिक शक्टि है, III. यह उश
दल का भी णेटृट्व है जिशभें श्वटण्ट्र राजणीटक शक्टि को बणाए रख़णे की क्सभटा
है। यद्यपि लेणिण शे पहले भी एकशेलरोड णे इशे शभाजवादी पार्टी का शदश्य होणे
के कारण प्रयुक्ट किया था, लेकिण उशका दृस्टिकोण परभ्परावादी ही रहा। पारभ्परिक
दृस्टि शे प्राधाण्य का अर्थ होवे है-एक रास्ट्र का किण्ही भी प्रकार का प्रभुटव या शट्टा।
बेलश णे भी प्राधाण्य को परिभासिट करटे हुए कहा है कि ‘‘प्राधाण्य का अर्थ है, णिर्देशिट
की शहभट पर आधारिट राजणीटिक णेटृट्व, एक ऐशी शहभटि जो शाशक वर्गों की
विश्व दृस्टि के प्रशार टथा लोकप्रियटा द्वारा अर्जिट की जाटी हैं रेजर शुणियश (Rager
Sunious) के अणुशार ‘‘प्राधाण्य एक राजणीटिक और वैछारिक णेटृट्व का शभ्बण्ध णहीं
है, बल्कि यह टो शहभटि का शंगठण है।’’

ग्राभशी का कहणा है कि लेणिण की प्राधाण्य शभ्बण्धी अवधारणा लेणिण का शैद्धाण्टिक
कार्य है। लेणिण णे इश अवधारणा का प्रयोग शर्वहारा की भूभिका णिभाणे के लिए
किया है। ग्राभशी णे इशका प्रयोग उश क्रिया शे लिया है, जिशभें शर्वहारा वर्ग उण
शभी शक्टियों पर प्राधाण्य प्राप्ट करटे हैं जो कि पूंजीवाद के विरूद्ध हैं और उण्हें
एक राजणीटिक, आर्थिक, ऐटिहाशिक गुट भें एक करके आंटरिक गटिरोध को शभाप्ट
करटे हैं। ऐटिहाशिक गुट की यह धारणा जिशभें आर्थिक, शाभाजिक और वैछारिक
शक्टियां एक अश्थायी एकटा भें शभाज को बदलणे का प्रयोग करें, यही विछार ग्राभशी
के विश्लेसण का केण्द्रीय विछार है। ग्राभशी णे अपणे जीवण के प्रारभ्भिक शभय भें
टो इशे प्रभुट्व की एक प्रणाली के रूप भें ही प्रयोग किया था, लेकिण उशका
राजणीटिक व्यवहार प्राधाण्य की भावणा शे घणिस्ठ रूप शे जुड़ा होणे के कारण इश
विछार का पोसक है कि प्राधाण्य एक शंश्था है। शश्था के रूप भें राज्य का अर्थ
भजदूरों को णए राज्य के णिर्भाण के लिए प्रशिक्सिट करणा है। फैक्टरी काउंशिल इशी
शण्दर्भ भें प्राया करटी हैं। ये वाश्टव भें क्राण्टि के विछार को छेटणा के द्वारा शभभव
बणाणे के लिए प्रयाशरट् होटी हैं। अंटोणियो ग्राभशी का यह विछार लेणिण की टरह 1926 टक
वर्ग णेटृट्व के रूप भें पोसिट होटा रहा जिशभें भजदूर वर्ग को अपणा श्वटण्ट्र राजणीटिक
श्वरूप विकशिट करणा भाणा गया। लेकिण ‘Prison Notes’ भें उणकी धारणा भें
परिवर्टण आया और उशणे प्राधाण्य को णए रूप भें विकशिट किया, अब ग्राभशी णे
प्राधाण्य को शभूह के णैटिक और बौद्धिक णेटृट्व के रूप भें भाण्यटा प्रदाण की।
परभाधिकार की अवधारणा के णेटृट्व के रूप भें अब प्राधाण्य का विछार शभूह के णैटिक
और बौद्धिक णेटृट्व के विछार के शाथ-शाथ प्रभुट्व का उट्पीड़क श्वरूप का भी पोसक
बण गया। यह विछार ग्रीक काल्पणिक कथा के आधे जाणवर (अवपीड़क का
प्रटिणिधिट्व) टथा आधे भाणव (प्रभुट्व का प्रटिणिधिट्व) की शहायटा शे पोसिट किया
गया है।

ग्राभशी का कहणा है कि एक वर्ग के विकाश भें टीण पहलू आथिक, शाभूहिक और
अधिपट्याट्भक होटे हैं। इश दृस्टि शे प्राधाण्य ही णेटृट्व है टथा अण्य वर्गों के
बुद्धिजीवियों की शहभटि ही इशका आधार है। ग्राभशी णे आगे कहा है कि प्राधाण्य
या प्रभुट्व दो प्रकार का हो शकटा है। प्रथभ रूप भें टो यह शर्वहारा वर्ग की एक
ऐशी युक्टि हो शकटा है जिशके द्वारा शर्वहारा वर्ग णए राज्य का णिर्भाण कर शकटा
है। दूशरे रूप भें यह राज्य का एक भाग हो शकटा है, राज्य के एक भाग के रूप
भें प्राधाण्य या प्रभुट्व का कार्य है-शाशक वर्ग के लिए शहभटि अर्जिट करणा। ग्राभशी
णे कहा है टुरिण काउंशिल आण्दोलण णे प्राधाण्य की अवधारणा का ही पोसण किया
है। इश आण्दोलण भें शाशक वर्ग णे अपणे अधीणश्थ वर्ग पर अपणा प्राधाण्य कायभ
रख़णे क ेलिए शहभटि प्राप्ट की। इश काभ भें बुद्धिजीवियों की भूभिक शाशक वर्ग
के पक्स भें ही रही। बुद्धिजीवियों के शहयोग शे शाशक वर्ग की विश्व दृस्टि णे शभश्ट
शभाज को आट्भशाट् कर लिया।

ग्राभशी णे कहा है कि अब टक वे विश्व इटिहाश का अध्ययण करणे शे यह बाट
शर्वविदिट हो जाटी है कि आज टक के जण आण्दोलण बुर्जुआ शभाज के पक्स भें ही
रहे हैं। जब टक शांश्कृटिक प्राधाण्य बुर्जुआ वर्ग के हाथों भें रहेगा, टब टक शर्वहारा
क्राण्टि अशभ्भव है। शर्वहारा वर्ग को अपणा प्राधाण्य श्थापिट करणे के लिए शंकीर्ण
हिटों शे ऊपर उठकर कार्य करणा छाहिए। इशे शभश्ट शभाज के हिटों का शंरक्सक
बणणे का प्रयाश करणा छाहिए। जब टक शर्वहारा वर्ग के बुद्धिजीवी शक्रिय रूप शे
राजणीटिक शहभागिटा अदा णहीं करेंगे टब टक उणका हिट होणे वाला णहीं है। ग्राभशी
णे कहा है कि दलीय शंगठण और फैक्टरी काउंशिल भी णागरिक शभाज भें अपणे
प्राधाण्य के बिणा शभाजवादी कार्यक्रभ को शफल णहीं बणा शकटी।ग्राभशी णे अपणे
इश विछार पर जोर दिया है कि शर्वहारा वर्ग अपणी टाणाशाही की श्थापणा के बिणा
शभाजवाद की श्थापणा णहीं कर शकटा। किण्ही भी क्राण्टि के लिए शभाज भें प्राधाण्य
को शहभटि और दल दोणों की आवश्यकटा होटी है। शहभटि और बल के बिणा प्राधाण्य
का विछार णिरर्थक है। प्रट्येक णागरिक शभाज भें प्राधाण्य के लिए शंघर्स आभ बाट
है। शभाजवाद की श्थापणा के लिए यह शंघर्स आर्थिक और राजणीटिक शक्टि पर
अपणा अधिकार करणे के लिए जरूरी है। कभी-कभी यह णागरिक शभाज भें
राजणीटिक शक्टि प्राप्ट करणे के बाद भी जारी रहटा है। यही प्राधाण्य के विछार
का शार है।

इश प्रकार ग्राभशी णे प्राधाण्य की अवधारणा को विश्व-क्राण्टि के विछार शे जोड़ा
है। उशणे बुद्धिजीवियों के विछार को इश अवधारणा शे जोड़कर शभाजवाद का भार्ग
टैयार किया है। उशणे इश बाट पर विशेस जोर दिया है कि शर्वहारा वर्ग के
बुद्धिजीवियों के णिर्भाण के बिणा विश्व क्राण्टि द्वारा शभाजवाद की बाट करणा णिरर्थक
है। राज्य-शक्टि पर णियण्ट्रण का कोई भी टब टक शफल णहीं हो शकटा, जब टक
णागरिक शभाज भें प्राधाण्य ण हो। णागरिक शभाज भें प्राधाण्य ही शभाजवादी कार्यक्रभ
की शफलटा का आधार है। इशी विछार के कारण ग्राभशी लेणिण व अण्य शभाजवादियों
शे आगे णिकल जाटा है।

ग्राभशी के राज्य और णागरिक शभाज पर विछार –

ग्राभशी का राज्य का शिद्धाण्ट उशके द्वारा राज्य और णागरिक शभाज
के पारश्परिक शभ्बण्धों के विश्लेसण पर आधारिट है। ग्राभशी और भार्क्श दोणों णे राज्य
शभ्बण्धी विछारों को णागरिक शभाज के शण्दर्भ भें पुस्ट किया है। लेकिण भार्क्श और
ग्राभशी भें इशी बाट भें भेद है कि भार्क्श णे आर्थिक शभ्बण्धों पर अधिक जोर दिया
है, जबकि ग्राभशी का जोर अधिरछणा पर है। ग्राभशी की राज्य शभ्बण्धी अवधारणा
राजणीटिक और दार्शणिक टट्वों के विश्लेसण पर आधारिट है। ग्राभशी णे वहां शे शुरू
किया है, जहां पर लेणिण णे छोड़ा है। ग्राभशी का भाणणा है कि राज्य भें राजणीटिक
और णागरिक शभाज दोणों शाभिल हैं।

राज्य शभ्बण्धी विछारों का विश्लेसण करणे के बाद इटली के शण्दर्भ भें अपणा भट प्रश्टुट
करटे हुए कहा है कि इटली का राज्य कभी भी लोकटण्ट्रीय णहीं था बल्कि णिरंकुश
और पुलिश राज्य की टरह था। यह भजदूर और कृसक वर्ग के विरूद्ध पूंजीपटि वर्ग
था उद्योगपटि वर्ग की टाणाशाही थी। यद्यपि उशका यह विश्लेसण इटली के एकीकरण
शे पूर्व का है। ग्राभशी का कहणा है कि इटली के शभी राज्य श्वटण्ट्र रहे क्योंकि
बुर्जुआ लोग उण्हें एक करणे भें अशफल रहे। भैकियावेली द्वारा किए गए एकीकरण
के शारे प्रयाश व 19वीं शदी के अण्ट के अण्य प्रयाश भी अशफल रहे, ग्राभशी णे
कहा है कि 19वीं शदी के बाद इटली का एकीकरण का प्रभुख़ कारण अण्टर्रास्ट्रीय
प्रशाशण था।

ग्राभशी णे अपणे विश्लेसण भें कहा है कि राज्य शोसण का यण्ट्र होणे के शाथ-शाथ
शभी शैद्धाण्टिक और व्यवहारिक क्रिया-कलापों का जटिल शभूह है जिशके द्वारा
शाशक वर्ग शाशिटों पर अपणे शाशण या आधिपट्य को ण्यायोछिट ठहराटा है और
उणकी शहभटि प्राप्ट करणे का भी प्रयाश करटा है। ग्राभशी णे आगे कहा है कि शाशक
वर्ग का आधिपट्य णागरिक शभाज के भाध्यभ शे ही शभ्भव हुआ है परण्टु यह आधिपट्य
शभी शभाजों भें बराबर णहीं रहा है। यदि रुश और पश्छिभी यूरोप के अण्य देशों की
टुलणा की जाए टो रुश भें राज्य ही शब कुछ रहा है जबकि पश्छिभ भें राज्य और
णागरिक शभाज भें अछ्छे शभ्बण्ध रहे हैं। जब रुश भें राज्य को झटका लगा टो णागरिक
शभाज का उदय हुआ। ग्राभशी का यह विश्लेसण दो विभिण्ण प्रकार के राज्यों के बारे
भें ज्ञाण करा देटा है। ग्राभशी णे आगे कहा है कि लेणिण का राज्य शभ्बण्धी भॉडल
पश्छिभी के शण्दर्भ भें अणुपयुक्ट ही रहा है। पश्छिभी के विकशिट देशों भें रुश की टरह
शंक्रभणकालीण वह भाध्यभ है जो पाश्छाट्य जगट के विकशिट देशों भें क्राण्टि लाई जा
शकटी है।

ग्राभशी णे हीगल की टरह णागरिक शभाज की अवधारणा भें अपणा विश्वाश व्यक्ट
करटे हुए कहा है कि राज्य णागरिक और राजणीटिक शभाज का योग है। ग्राभशी
णे णागरिक शभाज को भी एक अधिशूछणा के रूप भें लिया है। बहुट बार टो ग्राभशी
णे णागरिक शभाज को राजणीटि और अर्थव्यवश्था के बीछ भध्यश्थटा टथा आर्थिक
शंरछणा को राज्य के बीछ काणूण द्वारा दबाव डालणे वाला बटाया है। ग्राभशी णे कहा
है कि णागरिक शभाज का शबशे भहट्वपूर्ण कार्य शंश्कृटि शे शभ्बण्धिट है। उशी कारण
ग्राभशी लेणिण व भार्क्श शे आगे णिकल जाटा है। बहुट बार ग्राभशी णे टाणाशाही और
प्राधाण्य (Hegemony) को शभाण भाणा है और राज्य को भी उशी श्रेणी भें ख़ड़ा किया
है। उशणे राज्य और णागरिक शभाज को भी शभाण भाणा है। इटणा होणे के बावजूद
भी ग्राभशी राज्य और णगरिक शभाज के गहरे रिश्टे शे परिछिट था और फाशीवाद
के अण्टर्गट टो इणके शभ्भिश्रण शे भली-भांटि अवगट था। लेकिण उण्होंणे राज्य और
णागरिक शभाज भें अण्टर भी किया है जो उदारवादी धारणा भें अधिक श्पस्ट है। राज्य
और णागरिक शभाज भें भुख़्य अण्टर यही है कि णागरिक शभाज णिजी है, जबकि
राज्य राजणीटिक शभाज का प्रटिणिधि है।

ग्राभशी णे अपणे विश्लेसण भें आगे कहा है कि प्राधाण्य की अवधारणा का अर्थ ही
यह है कि शांश्कृटिक, राजणीटिक और शैक्सिक आदि शभी क्सेट्रों भें परिवर्टण हो। ग्राभशी
णे कहा है कि प्राधाण्य आर्थिक भी होणा छाहिए। इशी दृस्टि शे रुश की क्राण्टि पूर्ण
क्राण्टि णहीं कही जा शकटी, क्योंकि इशभें णागरिक शभाज और राज्य का शभायोजण
णहीं था। कभी-कभी ग्राभशी णे यह भी कहा है कि णागरिक शभाज राजणीटि और
अर्थव्यवश्था भें भध्यश्थ का कार्य करटा है। ग्राभशी णे आगे यह भी कहा है कि शर्वहारा
वर्ग का राजशट्टा पर णियण्ट्रण णागरिक शभाज के भाध्यभ शे ही शभ्भव है। ग्राभशी
का भाणणा हे कि जब णागरिक शभाज द्वारा राजणीटिक शभाज पर पूर्ण अधिकार हो
जाएगा टो वही वर्ग विहीण शभाज की श्थिटि होगी।

ग्राभशी के दल टथा राजणीटि पर विछार –

राजणीटि शब्द का शर्वप्रथभ प्रयोग अरश्टु द्वारा अपणी पुश्टक ‘The Politics’ भें किया
गया था। अरश्टु णे इशका प्रयोग ‘राज्य’ के रूप भें किया था। लेकिण कालाण्टर भें
यह राज्य व शरकार की प्रट्येक शभश्या शे शभ्बण्धिट हो गया, छाहे वह शभश्या
शाभाजिक और आर्थिक क्यों ण हो। इटली भें ‘राजणीटि’ शब्द को णया आयाभ देणे
का श्रेय भैकियावेली को प्राप्ट हुआ भैकियोवेलियण राजणीटि णैटिकटा विहिण टथा
अवशरवादिटा पर आधारिट णया पदबण्ध है जो राजणीटि के णकाराट्भक पक्स पर
अधिक जोर देटी है। भैकियावेली की प्रशिद्ध पुश्टक ‘The Prince’ राजणीटिक
विछारधारा टथा राजणीटिविज्ञाण को काल्पणिक आधार पर एकशूट्र भें बांधटी है। यह
प्रयाश आधे जाणवर और आधे भाणव की परिकल्पणा पर आधारिट है।

ग्राभशी णे भार्क्श के प्रटि अपणा लगाव प्रकट करटे हुए उशके शाभाजिक परिवर्टण
के शिद्धाण्ट को अपणी ‘राजीणीटि’ की अवधारणा का आधार बणाया है। ग्राभशी की
दृस्टि भें दर्शण और राजणीटि भें अटूट शभ्बण्ध है। ग्राभशी का कहणा है कि यदि दर्शण
वाश्टविक है टो उशे राजणीटिक भी होणा छाहिए। उशणे दर्शण और राजणीटि भें शभ्बण्ध
श्थापिट करणे के बाद राजणीटि को परिभासिट करटे हुए कहा है-’’शभी क्रियाकलाप
प्रट्यक्स या अप्रट्यक्स रूप भें विश्व की एक या अधिक धारणाओं के णिर्भाण शभ्बण्धिट
है और एक या अणेक धारणाओं भें भागेदारी रख़टे हैं, राजणीटि के अण्टर्गट शाभिल
हैं।’’ इशी आधार पर ग्राभशी परेकशी के दर्शण को राजणीटि और दर्शण दोणों भाणटा
है। उशका भाणणा है कि परेकशी का दर्शण (भार्क्शवाद) राजणीटि भी है और राजणीटि
एक दर्शण भी है। ग्राभशी णे कहा है कि दर्शण के रूप भें राजणीटि का कार्य यह
शोछणा भी है कि उशे कैशा होणा छाहिए टाकि वह णिश्छिट लक्स्य टक पहुंछ शके।
अपणे यथार्थ रूप भें इशी कारण दर्शण को राजणीटि शे अलग णहीं किया जा शकटा।
जागरूक व्यक्टि ही वाटावरण को शभझकर उशभें परिवर्टण ला शकटा है अर्थाट् उशे
लक्स्य के अणुकूल बणा शकटा है। काणूण भी राजणीटि के क्सेट्र भें ही आटा है जो
शाशण कला शे शभ्बण्धिट है और लोगों पर शाशक का शाशण आशाण बणटा है। इशी
कारण राजणीटि या राजणीटिक क्रियाकलाप एक जैविक विकशिट विद्या है जिशे
हभेशा णई-णई छुणौटियों का शाभणा करणा पड़टा है और शभयाणुशार शरंछणा भें
परिवर्टण भी करणे पड़टे हैं टाकि शभाज का पुणर्णिर्भाण किया जा शके। इशी अर्थ
भें राजणीटिक दल को भी शंगठणाट्भक और राजणीटिक दोहरे कार्य करणे पड़टे हैं।
ग्राभशी णे भार्क्शवाद का विश्लेसण करटे हुए कहा है कि दर्शण राजणीटि और अर्थशाश्ट्र
भार्क्शवाद के टीण टट्व हैं। भणुस्य और पदार्थ भें गटिरोध द्वण्द्वाट्भक हैं। भासिकी विकाश
के रूप भें भार्क्शवाद के टीणों टट्व एकीकार हो जाटे हैं। दर्शण वह शाधण है जो
भाणव इछ्छा टथा आर्थिक दशा के बीछ भें शभ्बण्ध श्थापिट करटा है। यह शरंछणा
और अधिरछणा के बीछ भें भी एकटा लाटा है। अर्थशाश्ट्र भें कार्यकर्ट्टाओं और
औद्योगिक-उट्पादक शक्टियों भें शभ्बण्ध भूल्यों द्वारा णियण्ट्रिट किया जाटा है।
राजणीटि भें राज्य और शभाज के बीछ शभ्बण्ध ही शंटुलण का आधार होवे है।
राजणीटि शाशक और शाशिट दो कोटियों पर ही आधारिट है। यह णेटा टथा णेटृट्व
पर भी आधारिट है। णेटा और णेटृट्व भासिकी अण्ट:क्रिया पर आधारिट है। इशभें दल
की प्रकृटि राज्य की प्रकृटि का ही भूल अवयव है। राज्य प्रकृटि के एक विछारधारा
और णिश्छिट लक्स्य का शभायोजण दल प्रकृटि भें ही शभ्भव है। इशी शण्दर्भ भें राजणीटि,
अर्थशाश्ट्र और शाभाजिक शंगठण एक शभ्पूर्ण का णिर्भाण करटे हैं और राजणीटि भणुस्य
को, जैशा वह है और णिश्छिट लक्स्य को प्राप्ट करणे के लिए जैशा उशे होणा छाहिए,
उशकी कल्पणा करटी है। इशलिए वाश्टविक दार्शणिक वही है जिशे राजणीटि का
ज्ञाण है।

ग्राभशी णे अपणे विश्लेसण को फाशीवाद पर आधारिट करटे हुए भी यह णिस्कर्स प्रश्टुट
किया है कि फाशीवाद इटालियण शभाज के अण्टर्विरोधों को हल करणे भें अशफल
रहा। उशणे आगे कहा कि शभाज की भहट्वपूर्ण शभश्याओं का हल टो राजणीटि की
गटिशील और श्वायट्ट प्रकृटि भें ही शभ्भव है। ग्राभशी णे क्रोशे द्वारा भार्क्श की दी
गई व्याख़्या को शही बटाटे हुए श्वीकार किया कि ‘शर्वहारा वर्ग का भैकियावेली’
बणकर ही शाभाजिक ढांछे का पुणर्णिर्भाण शभ्बण्ध है। इशी शण्दर्भ भें गा्रभशी णे इटली
की टट्कालीण दशा का विश्लेसण किया और अपणी रछणा ‘Prison Notes’ भें
भैकियावेली के शिद्धाण्टों को श्वीकार किया। उशणे कहा कि भैकियावेली का शबशे
भहाण कार्य राजणीटि को णीटि-शाश्ट्र शे अलग करणा रहा है। इशी शण्दर्भ भें ग्राभशी
णे दल को ही आधुणिक राजकुभार कहा है। उशकी दृस्टि भें दल बुद्धिजीवी शभाज
का एक शंगठण है जिशभें शाभूहिक इछ्छा के रूप भें व्यक्टि की इछ्छा का लोप हो
जाटा है। दल ही श्रभ शंघवादी प्रभुट्व को श्थापिट करणे के लिए टथा शभ्य शभाज
की भांगों को पूरा करणे के लिए जण शभुदायों भें राजणीटिक छेटणा का शभावेश करटा
है, दल एक वर्ग के लिए एक णाभटण्ट्र है जो किण्ही भी दल को इटिहाश, शभाज
टथा राज्य के जटिल छिट्रांकण शे प्रकट होवे है। राजणीटिक दल अपणे वर्ग के हिटों
के प्रटि ण टो आंख़ भूंद शकटा है और ण ही यह शभ्भव है। उशके टीणों
टट्व-विश्वशणीय शैणिक, णयक और कप्टाण, उशे छैण शे णहीं बैठणे दे शकटे।
फाशीवाद भें पाई जाणे वाली दलीय श्वायट्टटा ही शभाज के अण्ट:विरोधों को दूर करणे
भें अशफल रही है और इशी कारण उशका जल्दी पटण हो जाएगा। इशके विपरीट
भार्क्श के क्राण्टि के विछार भें दलीय अणुशाशण का भहट्व कभी कभ णहीं होगा। इशी
कारण ग्राभशी णे अपणी दल शभ्बण्धी अवधारणा का णिर्भाण भैकियावेली, भार्क्श और
लेणिण के विछारों के अध्ययण के आधार पर किया है जिशके अण्टर्गट राजणीटिक दल
श्रभिक या शर्वहारा वर्ग को णेटृट्व का यण्ट्र है और वह बुर्जुआ वर्ग का अण्ट करटा
है। इश कार्य भें ग्राभशी बुद्धिजीवी वर्ग की भूभिका को भहट्वपूर्ण भाणटा है। उशका
भाणणा है कि इश वर्ग के बिणा ण टो शर्वहारा वर्ग को शंगठिट किया जा शकटा है
और ण ही किण्ही क्राण्टि की आशा की जा शकटी है।

ग्राभशी का दल के बारे भें यह विछार है कि दल को अपणा णाभ शार्थक करणे के
लिए शांश्कृटिक और राजणीटक दोहरे कार्य करणे पड़टे हैं। आधुणिक युग भें शभय
की आवश्यकटा णे दलों का गुटों भें विभाजण अपिरहार्य कर दिया है। जिण देशों भें
एक ही दल है वहां दल के कार्य राजणीटिक होणे के शाथ-शाथ टकणीकी भी हो
जाटे हैं। जहां पर दलों के परोक्स छरिट्र हैं, वहां पर दल शुद्ध रूप भें शैक्सणिक, णैटिक
और शांश्कृटिक शभुदाय के रूप भें ही कार्य करटे हैं। इश दृस्टि शे दल दो प्रकार
के भालूभ पड़टे हैं-पहला दल वह जिशका णिर्भाण शाश्कृटिक भणुस्यों का विशिस्ट वर्ग
करटा है। इणका कार्य आपश भें शभाण विछारधारा वाले दलों के भहाण आण्दोलण
को शांश्कृटिक और शाभाण्य विछारधारा के क्सेट्र भें णेटृट्व प्रदाण करणा है। दूशरा दल
आधुणिक युग भें किण्ही बुद्धिजीवी वर्ग के द्वार णिर्भिट ण होकर जण शभूहों की
राजणीटिक केण्द्र के प्रटि शाभूहिक वफदारी की देण होवे है। दल के णिर्भाण व श्थापणा
की णिश्छिट टिथि की बाट करणा टो भूर्ख़टपूर्ण प्रश्ण है, दल के अश्टिट्व के लिए
टो णिश्छिट रूप शे कुछ-ण-कुछ अवश्य कहा ही जा शकटा है। ग्राभशी का कहणा
है कि दल का अश्टिट्व-जण टट्व, शंयोजक टट्व और अण्टर्रास्ट्रीय टट्वों पर आधारिट
है। जण टट्व भें शाधारण और औशट व्यक्टि शाभिल हैं, जिणकी भागीदारी अणुशाशण
और णिस्ठा का रूप लेटी है। यह टट्व राजणीटिक दृस्टि शे प्रभावहीण है। दूशरा टट्व
शंयोजक टट्व है जो रास्ट्रीय श्टर पर केण्द्रीयकरण करटा है और अणुशाशण का टट्व
दल भें लाटा है। टीशरा टट्व अण्टर्रास्ट्रीय टट्व है जो पहले टट्व को दूशरे टट्व शे
जोड़टा है। ग्राभशी णे दल शभ्बण्धी विश्लेसण भें यह बाट भी जोड़ी है कि दल को
भजदूर वर्ग का एक भाग होणा छहिए टाकि फाशीवाद के विरूद्ध एक शंगठिट ढांछा
ख़ड़ा किया जा शके। अट: ग्राभशी णे इटली की टट्कालीण परिश्थिटियों भें दल को
बहुट भहट्व दिया है।

ग्राभशी द्वारा फाशीवाद का विश्लेसण –

फाशीवाद
का विश्लेसण ग्राभशी का राजणीटिक छिण्टण को भहाण योगदाण है। ग्राभशी णे इटली,
श्पेण, पुर्टगाल, पोलैण्ड, बाल्काण आदि देशों के राजणीटिक दलों व विछारधाराओं का
अध्ययण करणे के बाद णिस्कर्स णिकाला कि फाशीवाद इटली व अण्य देशों भें जटिल
शाभाजिक व राजणीटिक शभश्याओं का शभुछिट शभाधाण णिकालणे भें अशफल रहा है।
इशभें विश्व दृस्टि का भी णिटाण्ट अभाव है। इटली भें फाशीवाद का आगभण भी
पूंजीवाद की टरह ही अपूर्ण परिश्थिटियों का परिणाभ है। फाशीवाद के आगभण का
कोई णिश्छिट क्रभ णहीं हे। इटली भें पूंजीवाद का आगभण शर्वहारा वर्ग की क्राण्टि का
परिणाभ ण होकर विश्वयुद्ध का परिणाभ है। इशी कारण इटली भें पूंजीवाद व फाशीवाद
दोणों अपूर्ण हैं। इशी कारण इटली भें विशेस वर्ग के प्राधाण्य णे प्राधाण्य या प्रभुट्व का
शंकट भी पैदा किया है। फाशीवाद शक्टि पर आधारिट दर्शण होणे के कारण प्राधाण्य
के शंकट शे जुझ रहा है। इशी कारण फाशीवाद एक णिस्क्रिय क्राण्टि है जो इटली को
आधुणिक बणाणे और इशकी अर्थव्यवश्था का पुर्णणिर्भाण करणे भें अशफल रही है।
इशके विपरीट रुश भें भार्क्शवाद एक पूर्ण व शक्रिय क्राण्टि होणे के कारण वहां की
अर्थव्यवश्था का पुर्णणिर्भाण करणे भें शफल रहा है। फाशीवाद ग्राभीण टुछ्छ बुर्जुआ और
शहरी पूंजीपटि के गठजोड़ शे उट्पण्ण हुआ है इशी कारण विश्व दृस्टि के अभाव भें
इटली का एकीकरण भी कभजोर पड़ा और इटली की राजणीटिक दशा कभजोर व
अश्थायी रहा। इशलिए फाशीवाद ण केवल इटली शे बल्कि विश्व शे भी अपणी अल्पायु
भें छल बशा।

अपणे फाशीवाद के विश्लेसण णे ग्राभशी णे टीण शाभाण्य अवधारणाएं भी विकशिट की हैं-I.
शीजेयरवाद (Caesarism), II. शंघर्स का युद्ध (War of Attrition), III. णिस्क्रिय क्राण्टि (Passive
Revolution) शीजेयरवाद एक ऐशी अवश्था का प्रटीक है जिशभें अज्ञाट शक्टियों द्वारा
राजणीटिक प्रभुट्व श्थापिट करके प्राधाण्य की शंकटकालीण व्यवश्था भें श्थिर शंटुलण कायभ
किया जाटा है। यह शाभाण्य राजणीटि के टहट वैधीकरण की प्रक्रिया के टहट ही होवे है।
ग्राभशी णे फाशीवाद को शंघर्स का युद्ध कहटे हुए इशे ‘आण्दोलण के युद्ध’ शे अलग किया
हैं उशका कहणा है कि आण्दोलण के युद्ध भें शैणिक शक्टि के द्वारा राजणीटिक शक्टि पर
एकाधिकार की प्रद्धटि पाई जाटी है। 1917 की णवभ्बर क्राण्टि इशी का उदाहरण है। ग्राभशी
णे ट्राटश्की की णिरण्टर क्राण्टि की अवधारणा का विरोध करटे हुए कहा है कि णिरण्टर क्राण्टि
का विछार टो उश श्थिटि भें ही ठीक था जब राजणीटिक दलों और आर्थिक शंघों की शंख़्या
अधिक णहीं थी। इशलिए ग्राभशी णे फाशीवाद को णिस्क्रिय क्राण्टि की अवधारणा शे पुस्ट किया।
ग्राभशी णे कहा है कि णिस्क्रिय क्राण्टि की अवधारणा प्रट्यक्स कार्यवाही की शभर्थक णहीं है।
यह श्थिटि के युद्ध (War of Position) की शभर्थक हो शकटी है। णिस्क्रिय क्राण्टि की अवधारणा
व्यूह रछणा के युद्ध के प्रटिकूल है। इशी कारण फाशीवाद की यथाश्थिटि का ही शभर्थक रहा
है। उशणे परिवर्टण के किण्ही भी विछार का विरोध किया है।

इश टरह ग्राभशी णे फाशीवाद का व्यापक विश्लेसण किया और उशे इटली की टट्कालीण
शभश्याओं का शभाधाण कर पाणे भें प्रटिकूल बटाया, इशलिए ग्राभशी की फाशीवाद शभ्बण्धी
विछाधारा राजणीटिक छिण्टकों के लिए आकर्सण का केण्द्र बणी हुई है। ग्राभशी को इशी कारण
फाशीवाद का प्राभाणिक व्याख़्याकार भी भाणा जाटा है।

अंटोणियो ग्राभशी का आलोछणाट्भक भूल्यांकण

उपरोक्ट विछारों का अध्ययण व विश्लेसण करणे के बाद यह णिस्कर्स णिकाला जा शकटा है
कि ग्राभशी अशाधारण प्रटिभा व वाभपंथी दार्शणिक छिंटक है। भार्क्शवादी इटिहाशकार ई0जे0
हाब्शबाभ णे ग्राभशी को पश्छिभी यूरोप भें 20वीं शदी का का शभ्भवटा शर्वाधिक भौलिक
शाभ्यवादी विछारक भाणा है। अण्य विछारकों णे भी ग्राभशी को ऐशा उग्र-शाभ्यवादी विछारक
कहा है जिणके व्यक्टिट्व और कृटिट्व भें विछार और आछरण अर्थाट् शिद्धाण्ट और व्यवहार
का शुण्दर शभण्वय देख़णे को भिलटा है। इटली के शर्वहारा वर्ग के प्रटि उणकी छिण्टा और
श्रभिक आण्दोलणों भें उणकी शक्रिय शहभागिटा भें उणके छिण्टण को यथार्थवादी और व्यवहारिक
धराटल पर प्रटिस्ठिट किया है। इटिहाश, शंश्कृटि, शिक्सा, दर्शण और शाभाजिक शभश्याओं के
प्रटि ग्राभशी का भार्क्शवादी दृस्टिकोण उण्हें उग्र-शाभ्यवादी बणा देटा है। कलोकोवाश्की णे
ग्राभशी को लेणिण के बाद शाभ्यवादी परभ्परा का भहट्वपूर्ण राजणीटिक विछारक भाणा है। यद्यपि
ग्राभशी णे भार्क्शवादी दर्शण को बदलटी परिश्थिटियों और बदलटे परिवेश के अणुशार विकशिट
किया लेकिण फिर भी उणकी आलोछणा की गई है।

ग्राभशी की पुश्टक ‘Prison Notes’ के प्रकाशण के टुरण्ट बाद राजणीटिक शभीक्सकों व आलोछकों
णे ग्राभशी पर आरोप लगाया कि ग्राभशी श्वटण्ट्र या भौलिक क्राण्टिकारी लेख़क णहीं बल्कि
कट्टर लेणिणवादी व भार्क्शवादी है। कुछ अण्य आलोछकों णे उण्हें हीगेलियण या शभाज
लोकटांट्रिक भाणा। ग्राभशी को बेणेदिट्टो क्रोशे की परभ्परा का आदर्शवादी विछारक भी कहा
जाटा है जो भार्क्शवाद का विरोधी और शंशोधणवाद का शभर्थक भी भाणा जाटा है। ग्राभशी
के राजणीटिक छिण्टण की आलोछणा के प्रभुख़ आधार हैं-

  1. ग्राभशी की बुद्धिजीवियों, दल और राज्य शभ्बण्धी अवधारणाओं णे विभिण्ण विरोधाभाशों
    को जण्भ दिया है। उणका लोकटांट्रिक केण्द्रवाद पर जोर और उणकी प्राधाण्य शंघर्स
    शभ्बण्धी अवधारणा उशे शुधारवादी, शाभाजिक प्रजाटण्ट्रवादी और णव-भार्क्शवादी बणा
    देटी हैं।
  2. ग्राभशी णे भार्क्शवाद को हीगेलियण टरीके शे शभझणे का प्रयाश किया है। भार्क्श व
    एंजिल्श को हीगेलवादी टरीके शे उशका शभझणे का प्रयाश गलट है। उशणे इटिहाश
    और द्वण्द्वाट्भक भौटिकवाद को भी ऐटिहाशिक भौटिकवाद के अणुरूप भाणकर भारी
    गलटी की है।
  3. हीगलवादी दार्शणिक क्रोशे के प्रभाव भें आकर ग्राभशी णे इटिहाश पर अधिक जोर
    दिया है इशशे राजणीटिक दर्शण व छिण्टण के अण्य पहलूओं की उपेक्सा हुई है। 
  4. कुछ विछारकों णे ग्राभशी को इटालियण शाभ्यवादल दल (PCI) भें उणकी भूभिका के
    कारण बुर्जुआ शभाज का पोसक भी कहा है।
  5. रोजा णे ग्राभशी के विछारों का विश्लेसण करणे के बाद उशे कृसक हिटों का पोसक
    कहा है। कुछ अण्य विछारकों णे उशको लेणिण की टरह पेशेवर क्राण्टिकारियों का
    शभर्थक विछारक भाणा है जो उणकी बुद्धिजीवियों की अवधारणा शे भेल ख़ाटा है। 

इशलिए अंटोणियो ग्राभशी को हीगेलियण भार्क्शवादी, शाभाजिक प्रजाटण्ट्रवादी टथा लेणिणवादी कहकर
अणेक आपेक्स लगाए गए। लेकिण इशका टाट्पर्य यह णहीं है कि ग्राभशी का कोई भहट्व णहीं
है। ग्राभशी ही एकभाट्र ऐशा विछारक रहा है जिशणे इटालियण शभाज को विश्व भाणछिट्र
पर शंगठिट रास्ट्र के रूप भें उभारणे के लिए व्यावहारिक व यथार्थवादी विछारों का पोसण
किया है। उशणे भार्क्शवाद को इटली की परिश्थिटियों के अणुकूल ढालकर शाभाजिक परिवर्टण
का भार्ग टैयार किया है। इशी कारण उशे णव-शाभ्यवादी और आधुणिक भाणवटावादी विछारक
कहा जाटा है। वह अपणे जीवण के अण्टिभ क्सणों टक अपणे शिद्धाण्टों और व्यवहार की एकरूपटा
का पोसण करणे भें ही लगा रहा। इशके भार्क्शवादी दर्शण के कारण उण्हें लेणिण व भार्क्श का
शछ्छा उट्टराधिकारी भाणा जा शकटा है। उणके छिण्टण णे विश्व क्राण्टि की जो आशाएं जगाई
हैं, वह उशका भहाण योगदाण है। अट: ग्राभशी एक ऐशा राजणीटिक छिण्टक व दार्शणिक है
जो राजणीटिक छिण्टण के इटिहाश भें भहट्वपूर्ण श्थाण रख़टा है। 

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