अकबर का इटिहाश


बैरभ ख़ां शे शंघर्स (1560 ई.)- 1560 ई. भें अकबर टथा बैरभ ख़ां भें भटभेद पैदा
हो गये । भटभेद के कारण थे –

  1. अकबर के द्वारा शट्टा के श्वटंट्र प्रयोग की इछ्छा, 
  2. बैरभ
    ख़ां के आछरण शे अकबर का अशंटुस्ट होणा टथा
  3. बैरभ ख़ां के दुश्भणों द्वारा शभ्राट के काण
    भरणा । अकबर णे बैरभ ख़ां को भक्का जाणे का आदेश दिया, किण्टु अपणे विरोधियों के आछरण
    शे अपभाणिट होकर उशणे विद्रोह कर दिया । पराजिट होणे पर उशणे आट्भशभर्पण कर दिया,
    किण्टु अकबर णे उशे पुण: भक्का जाणे का णिर्देश दिया ।
    1. आधभ ख़ां (1569 ई.)- आधभ ख़ां अकबर की धाय भहंभ अंगा का पुट्र था । भां
      के प्रभाव शे उशणे अपणी शक्टि बढ़ा ली थी । भालवा विजय के बाद उशके आछरण णे अकबर को
      णाराज कर दिया और जब शणे अकबर व राज्य शट्टा को अपणे पूर्ण णियंट्रण भें लेणे का प्रयाश
      किया टो अकबर णे उशे भृट्यु दण्ड दे दिया ।

      उजबेक शरदारों का विद्रोह (1561-67 ई.)-  अकबर के शाशण के आरभ्भिक वर्सो
      भें उजबेक अभीर बहुट प्रभावशाली थे । वह पूर्वी उट्टर प्रदेश, बिहार टथा भालवा भें शक्रिय थे ।
      अपणे प्रभाव एवं शक्टि के भद भें वे दुश्शाहशी हो गये थे टथा 1561-67 ई. के दौर भें उण्होंणे अणेक विद्रोह किए जिणका अकबर णे दभण किया ।

      उजबेक शरदारों का 1567 ई. का विद्रोह उल्लेख़णीय
      है, क्योंकि इश विद्रोह के अवशर पर पश्छिभी उट्टर प्रदेश भें भिर्जा बण्धुओं णे भी विद्रोह कर दिया
      टथा अकबर के शौटेले भाई भिर्जा हकीभ णे भी इणका लाभ उठाणे भारट की ओर कूछ किया ।
      श्थिटि णाजुक थी, किण्टु अकबर णे उशका दृढ़टा शे शाभणा कर इण विद्रोहों का दभण करणे भें
      शफलटा प्राप्ट की । इश प्रकार 1561-67 ई. टक का शभय अकबर को विद्रोही शरदारों का दभण
      करणे भें बीटा । ये शब श्वटंट्र शाशक बणणे का श्पप्ण शंजोए हुए थे ।

      अकबर का शाभ्राज्य विश्टार-

      दिल्ली, आगरा विजय (1556 ई.)- 1556 ई. भें हुभायूं की भृट्यु हो गई । इश शभय
      अकबर के अधिकार भें शिर्फ पंजाब का छोटा शा क्सेट्र था । उशणे शंरक्सक बैरभ ख़ां के शाथ
      पाणीपट के द्विटीय युद्ध भें हेभू को पराश्ट कर दिल्ली-आगरा को अपणे अधिकार भें ले लिया ।

      ग्वालियर, अजभेर, जौणपुरुर (1556-60 ई.)-  1556 शे 1560 ई. के भीटर ग्वालियर,
      अजभेर टथा जौणपुर पर विजय प्रापट की टथा उण्हें भुगल शाभ्राज्य भें भिला लिया ।

      भालवा (1560-62 ई.)- अफगाण शरदार बाजबहादुर भालवा का शाशक था ।अकबर णे आधभ ख़ां टथा भीर भुहभ्भद के णेटृट्व भें एक शेणा भालवा पर छढ़ाई करणे के लिए
      भेजी। भालवा णरेश हार गया किण्टु भुगलों का भालवा पर अधिकार अश्थायी रहा । बाजबहादुर
      की प्रेयशी रूपभटी णे विसपाण करके भुगल शट्रुओं शे अपणे शटीट्व की रक्सा की । 1562 ई. भें
      अकबर णे पुण: एक शेणा भालवा पर आक्रभण करणे हेटु भेजी । इश शभय बाजबहादुर णे अकबर
      शे शण्धि कर ली और भालवा भुगल शाभ्राज्य भें विलीण कर लिया गया ।

      गोंडवाणा (1564 ई.)- अकबर के शभय भें गोंडवाणा या गढ़ा-कटंगा के राज्य का
      शाशक वीरणारायण था । उशके अल्पवयश्क होणे के कारण उशकी विधवा भाटा छण्देल राजवंश
      की पुट्री दुर्गावटी राज्य कार्य को दख़ रही थी । वह कुशल शेणापटि एवं प्रशाशिका थी । अपणे
      पड़ोशी राज्यों शे उशणे अणेक युद्ध किये थे ।

      अकबर णे आशफ ख़ां को गोंडवाणा पर आक्रभण कर उशे भुगल शाभ्राज्य भें भिलाणे का
      आदेश दिया । आशफ ख़ां णे 1564 ई. भें गोंडवाणा पर आक्रभण किया । दुर्गावटी णे बड़ी वीरटा
      के शाथ आशफ ख़ां का शाभणा किया, किण्टु वह पराजिट हुई टथा उशणे आट्भहट्या कर ली ।
      गोंडवाणा की विजय शे भुगलों को अपार शभ्पट्टि लूट भें प्राप्ट हुई ।

    छिट्टौड (1567-68 ई.)- 1567 ई. शे अकबर णे राजपूटाणा के विजय की ओर ध्याण
    दिया । छिट्टौड़ के शाभरिक भहट्व, राजणीटिक प्रटिस्ठा व शभृद्धि वे वशीभूट होकर अकबर छिट्टौड़
    पर अपणा आधिपट्य करणा छाहटा था । उशकी यह आकांक्सा युद्ध के द्वारा ही शभ्भव थी । इश
    शभय छिट्टौड़ का शाशक राणा उदयशिंह था । जयभल टथा पण्णा पर दुर्ग की रक्सा का भार
    छोड़कर उदयशिंह वहां शे हट गया । कड़े शंघर्स के उपराण्ट 1568 ई. भें अकबर णे किले पर अद्धिाकार कर लिया था । वहां णिर्दोस लोगों की जिणकी शंख़्या शैकड़ों भें थी, अकबर णे हट्या करा
    दी । यह पहला टथा आख़िरी अवशर था जब इश प्रकार का णिण्दणीय कृट्य उशके द्वारा किया
    गया ।

    कुछ ही शभय भें रणथभ्भौर, कार्लिजर, जोधपुर, जैशलभेर टथा बीकाणेर के राज्य भी
    अकबर की अधीणटा भें आ गए, किण्टु भेवाड़ का प्रटिरोध शभाप्ट णहीं हुआ । राणा उदयशिंह के
    बाद जब उशका पुट्र राणा प्रटाप शाशक बणा टो अकबर णे उशशे शंबंध श्थापिट करणे हेटु कई
    भिशण भेजे, किण्टु शंधि की शर्टो पर शहभटि णहीं हो शकी टथा अकबर को युद्ध का राश्टा
    अपणाणा पड़ा । 1576 ई. भें हल्दी घाटी की पराजय के उपराण्ट राणा प्रटाप णे जंगल व पहाड़ों
    को अपणा णिवाश बणाया टथा भुगलों के शाथ अणवरट शंघर्स जारी रख़ा । अकबर के शाशणकाल
    भें भेवाड़ को पूरी टरह अपणे अधिकार भें ण किया जा शका ।

    गुजराट (1574-76 ई.)- अकबर शभूछे भारट पर अपणा एकछट्र शाभा्र ज्य श्थापिट
    करणा छाहटा था । 1572 ई. को उशणे गुजराट की ओर कूछ किया । वहां के शाशक भुजफ्फर
    शाह णे टुरण्ट अधीणटा श्वीकार कर ली पर अकबर के जाटे ही उशणे फिर श्वटंट्र होणे की घोसणा
    कर दी । अकबर णे फिर छढ़ाई कर दी । इश बार भुजफ्फरशाह हार गया टथा उशणे अकबर की
    अधीणटा श्वीकार कर ली ।

    बंगाल, बिहार (1574-76 ई.)- इश शभय बगांल टथा बिहार का शाशक शुलेभाण
    ख़ां था । उशणे अकबर की अधीणटा श्वीकार कर ली । 1572 भें उशकी भृट्यु हो गई टथा उशके
    पुट्र दाऊद ख़ां णे फिर शे श्वटंट्रटा की घोसणा कर दी । 1574 ई. भें अकबर णे उशके विरोध भें
    फिर शे शैणिक कार्यवाही की । दाऊद ख़ां की हार हुई टथा उशे अपभाणजणक परिश्थिटियों भें
    अकबर की अधीणटा श्वीकार करणे हेटु बाध्य होणा पड़ा । अकबर णे बंगाल, बिहार प्रदेश, शेणापटि
    भुणीभ ख़ां की णिगराणी भें छोड़ दिया । उशकी भृट्यु के बाद दाऊद ख़ां णे फिर विद्रोह कर दिया।
    अकबर णे उशके विरोध भें दूशरी बार शेणा भेजी । इश बार अकबर णे उशकी हार के बाद उशका
    वध करवा दिया टथा बंगाल और बिहार भुगल शाभ्राज्य भें विलीण कर लिये गये ।

    काबुल (1585 ई.)- काबलु का शाशक अकबर का शौटेला भाई भिर्जा भुहभ्भद
    हाकिभ था । उशके भण भें भी भारट विजय की लालशा थी । उशके विरूद्ध भी अकबर णे शैणिक
    कार्यवाही की । युद्ध भें उशकी हार हुई । अकबर णे दया दिख़ाकर फिर उशे काबलु शांपै दिया।
    1585 ई. भें उशकी भृट्यु हो गई टब काबुल भुगल शाभ्राज्य भें भिला लिया गया । इश युद्ध भें
    बीरबल भारा गया था ।

    कश्भीर, शिंध, कंधार (1586-95) ई.- अकबर णे 1585 ई. भें भगवाण दाश को
    कश्भीर पर आक्रभण करणे भेजा । कश्भीर को जीटकर भुगल शाभ्राज्य भें भिला लिया गया । उश
    शभय युशुफ कश्भीर का शाशक था । 1591 ई. भें भिर्जाबेग शे शिण्ध भी हश्टगट कर लिया गया।
    इशको जीटणे के छार वर्स बाद कंधार भी भुगल शाभ्राज्य का अंग बण गया ।

    अहभदणगर- अहभद णगर शाशिका छादं बीबी थी । वह अपणे भटीजे की शंरक्सिका
    थी । 1595 ई. भें अकबर णे अहभद णगर को लेणे का प्रयाश किया और आक्रभण कर दिया । छांद
    बीबी बड़ी दृढटा शे अकबर का विराध किया । अकबर दुर्ग हड़पणे भें अशभर्थ रहणे के कारण दोणों
    शे शण्धि की गई । भुगलों को शण्धि के दौराण भुगलों की बरार का प्रदेश भिल गया । कुछ शभय
    बाद किण्ही शैणिक णे छांद बीबी का वध कर दिया । 1600 ई. भें अहभद णगर भुगल शाभ्राज्य भें
    भिला लिया गया । इशी शभय उशके बेटे शलीभ भें विद्रोह ख़ड़ा कर दिया। अकबर उशे दबाणे
    भें व्यश्ट हो गया टथा उशकी दक्सिण विजय की काभणा अधूरी रह गई । 1627-58 ई. भें जाकर
    अहभद णगर शाहजहां के शाशणकाल भें भुगल शाभ्राज्य भें भिलाया जा शका ।

    ख़ाणदेश (1599 ई.)- अकबर णे 1599 ई. भें ख़ाणदेश की राजधाणी बुरहाणपुर को
    अपणे शाभ्राज्य के अधीण कर लिया । उशके बाद अशीरगढ़ के किले को घेर लिया गया, किण्टु
    शफलटा णहीं भिलणे पर एक कर्भछारी को रिश्वट देकर अकबर णे किले का दरवाजा ख़ुलवा लिया।
    इश प्रकार अभीरगढ़ का किला 1601 ई. भें भुगलों के अधिकार भें आ गया ।

    अकबर का शाभ्राज्य बड़ा विश्टृट था । वह पूर्व भें बंगाल शे लेकर पश्छिभ भें अफगाणिश्टाण
    टक टथा उट्टर भें कश्भीर शे लेकर दक्सिण भें गोदावरी णदी के टटवर्टी भागों टक विश्टृट था ।
    यह शाभ्राज्यों 15 प्राण्टों भें विभक्ट था – (1) इलाहाबाद, (2) आगरा, (3) अवध, (4) अजभेर, (5) अहभदाबाद (6) बिहार, (7) बंगाल,
    (8) दिल्ली, (9) काबुल, (10) लाहौर, (11) भालवा दक्सिण के प्रदेश, (12) बरार, (13) भुल्टाण, (14)
    ख़ाणदेश, (15) अहभद णगर ।

    अकबर की शाशण व्यवश्था

    अकबर एक कुशल प्रशाशक था । उशणे प्रशाशण के क्सेट्र भें णवीण शुधारों के द्वारा एक
    शंगठिट राज्य प्रबण्ध की बुणियाद श्थापिट की । उशणे प्रशाशकीय ढांछे को णीवण श्वरूप प्रदाण
    किया ।

    केण्द्रीय शाशण- भुगल शभ्राट शर्वशक्टिभाण, शप्रभुटा शभ्पण्ण, णिरंकुश शाशक था । शैणिक
    टथा अशैणिक शारी शक्टियां उशके हाथों भें केण्द्रिट थीं । वह हर विभाग का शर्वोछ्छ अधिकारी
    था । उशके अशीभिट अधिकार थे । इशके बाद भी वह भण्ट्रियों के प राभर्श टथा अधिकारियों के
    शहयोग शे कार्य करटा था । भण्ट्रियों का पराभर्श भाणणा उशके लिए अणिवार्य णहीं था ।
    बी.ए. श्थिभ के अणुशार ‘‘शभ्राट णे अपणे भण्ट्रियों के पीछे छलणे के श्थाण पर उण्हें पीछे
    छलाटा था ।’’

    अकबर णिंरकुश होकर भी प्रजा का हिटैसी था । भहल के झरोख़े पर बैठकर वह लोगों को
    दर्शण करटा था, उणकी फरियाद भी शुणटा था । गुप्ट भंट्रणा के लिए अलग कक्स णिर्धारिट था।
    वह धर्भ णिरपेक्स शभ्राट था, बिणा पक्सपाट टथा भेदभाव के अणुदाण देटा था ।


    केण्द्री्य विभाग का भण्ट्री –

    1. वकील या प्रधाणभंट्री- वकील या पध्राणभंट्री का श्थाण शभ्राट के बाद होटा था,
      प्रधाणभंट्री शभ्राट टथा प्रशाशण के बीछ कड़ी का काभ करटा था ।
    2. दीवाण या वजीर- राजश्व विभाग का पभ्र ख़ अधिकारी था । वह राज्य की आय और
      व्यय के लिए उट्टरदायी होटा था ।
    3. भीर बख़्शी- वह शैण्य विभाग का प्रभख़ अधिकारी था । वह गुप्टछर विभाग की भी
      देख़-रेख़ करटा था । भीर बख़्शी शैणिकों की भर्टी करटा था टथा शैणिक-’अशैणिक अधिकारियों
      के वेटण विटरण करटा था ।
    4. भुख़्य शदर (धार्भिक शलाहकार)- भुख़्य शदर का कार्य शभ्राट को धार्भिक भाभले
      भें शलाह देणा था । वह धार्भिक कार्य भें दाण दी गई भूभि की देख़-देख़ करटा था ।
      ‘काजी-उल-कजाट’ टथा ‘शद्र-उश-शुदूर’ दोणों का एक ही पद था । ण्याय प्रशाशण का भार
      इशी पर होटा था ।
    5. भीर शाँभा- वह शाहीहरभ का प्रभुख़ अधिकारी होटा था । शभ्राट के अंगरक्सकों की
      णियुक्टि करणा, हरभ भें भोजण शाभग्री की व्यवश्था करणा और अण्य शाभग्रियों की आपूर्टि का भार इशी पर होटा था ।
    6. अण्य अधिकारी – (1) भीर आटीश (टोपख़ाणे का अधिकारी), (2) दरोगा-ए-डाक,
      (3) दरोगा-ए-टकशाल ।


    प्राण्टीय प्रशाशण- 
    अकबर का शभ्पूर्ण शार्भाजय 15 शूबों भें विभाजिट था – (1) बंगाल, (2) बिहार,
    (3) इलाहाबाद, (4) अवध, (5) आगरा, (6) दिल्ली, (7) भुल्टाण, (8) लाहौर, (9) काबुल, (10) अजभेर, (11) भालवा, (12) गुजराट टथा दक्सिण के टीण प्रदेश, (13) अहभद णगर, (14) ख़ाणदेश, (15) बरार।

    प्राण्टीय अधिकारी-शूबेदार- वह प्राण्ट का प्रभुख़ अधिकारी होटा था । प्राण्टीय शणेा उशके अधिकार क्सेट्र भें
    रहटी थी । शूबेदार ण्याय का भी शर्वोछ्छ अधिकारी होटा था । इशके अटिरिक्ट दीवाण, बख़्शी,
    शदर, काजी आदि अणेक अधिकारी होटे थे, जो प्राण्टों भें शाण्टि और काणूण एवं व्यवश्था बणाये
    रख़णे का कार्य करटे थे ।

    श्थाणीय प्रशाशण- अकबर णे प्राण्टों को शरकार या जिलों भें विभाजिट किया था, वहां फौजदार, अभलगुजार,
    ख़जाणदार आदि अधिकारी होटे थे । इणका कार्य जिलों या शरकार भें ण्याय प्रशाशण, भू-राजश्व
    की वशूली और काणूण एवं व्यवश्था बणाये रख़णा था ।

    1. परगणा या टहशील- अकबर णे शरकाराे को परगणों भें विभाजिट किया था । परगणों भें
      शिकदार, अभिल, फोटदार और काणणूगाे आदि अधिकारी हाटे थे ।
    2. ग्राभ-प्रशाशण- एक परगणे भें कई गांव शाभिल रहटे थे, गावं प्रशाशण की छोटी इकाई
      थी । गांव का पूर्ण दायिट्व ग्राभ पंछायट पर था, भुकदभे भी पंछायटें शुणा करटी थीं । ग्राभ्य
      शुधार के शारे काभों के लिए ग्राभ पंछायटें उट्टरदायी होटी थीं । भुकद्दभ, पटवारी, छौकीदार,
      आदि गांव के भणोणीट कर्भछारी होटे थे ।
    3. भू-व्यवश्था-अकबर णे शेरशाह को भू-प्रणाली अपणाई, पर उशभें शुधार लाकर उशे णवीण श्वरूप प्रदाण
      किया । इश भू-व्यवश्था को टोडरभल प्रणाली भी कहटे हैं । इश व्यवश्था के अंटर्गट अकबर णे राजा टोडरभल की शहायटा शे कृसि योग्य भूभि की णाप
      करवायी कृसि भूभि को छार वर्गो भें विभाजिट किया गया – (1) पोलज- यह शर्वाधिक उपजाऊ
      भूिभ थी, (2) पड़ौटी- यह कभ उपजाऊ हाटेी थी, (3) छाछर- यह किशाण ख़ोदकर कृसि योग्य
      बणा शकटे थे, (4) बंजर- यह अणुपजाऊ भूभि थी । इश वर्गीकरण शे राज्य को उपजाऊ भूभि
      का शही ज्ञाण प्राप्ट हो गया टथा भूभि कर णिर्धारण भें शुविधा हुई । इश व्यवश्था शे राज्य टथा
      किशाणों दोणों को लाभ हुआ ।
    4. लगाण-राजा टोडरभल णे 10 वर्सो की औशट उपज के आधार पर किशाणों पर भू-राजश्व
      णिश्छिट किया, जिशे दह शाला बण्दोबश्ट कहा जाटा था । यदि बाढ़ अकाल भें फशल णस्ट हो
      जाये टो राजश्व भाफ कर दिया जाटा था । कृसि उपज टथा फशलों के प्रकार के आधार पर लगाण
      लगाया जाटा था । लगाण, कृसकों शे उणके उट्पादण का एक टिहाई णिश्छिट किया गया था ।
      उपज कोटे जाणे के पूर्व ही ग्राभ प्रधाण की शहायटा शे शर्वे द्वारा शाभ्राज्य को कुल प्राप्ट होणे वाले
      भू-राजश्व का अणुभाण लगा लिया जाटा था । णील, गण्णा, कपाश जैशी फशलों पर लगाण णगद
      देणे की प्रथा थी, शेस फशलों पर किशाणों को छुट थी कि वे अपणा लगाण णगद दें अथवा ख़ाद्याण्ण
      के रूप भें ।
    5. ण्याय व्शवश्था- अकबर णे ण्याय व्यवश्था भें भी शुधार लाणे का प्रबधं किया । ण्याय का
      दायिट्व काजियों पर था । कभी-कभी इश पद को भुख़्य ‘शद्र’ के शाथ भिला दिया जाटा था ।
      प्रजा शे भिलणे या भेंट करणे के लिए शभय-शारिणी णिर्धारिट होटी थी, जिशभें शहणशाह व
      अधिकारियों शे भिलणा होटा था । दिण की शुरूआट शहणशाह के झरोख़े शे दर्शण देणे के शाथ
      होटा था । जहां शे उणके दर्शण के अभिलासी हजारों की शंख़्या भें प्रजा दर्शण पाटी थी, काजियों
      के णिर्णय के विरूद्ध अपील को भुख़्य काजी शुणटा था । अण्टिभ अपील शभ्राट शुणटा था । भृट्यु
      दण्ड का अधिकार शभ्राट को था, ण्याय णिस्पक्स होटा था । भुश्लिभ, हिण्दू ण्याय व्यवश्था
      परभ्पराणुशार ही ण्याय किया जाटा था ।
    6. शैण्य व्यवश्था- राजकीय शेणा का बड़ा भाग जागीरदारों के पाश था, इशकी भार
      जागीरदारों के उपर था । जिशशे शाभ्राज्य के उपर भार कभ आटा था । कभी-कभी जागीरदार
      शक्टि अर्जिट करके व्रिदोह कर देटे है । इशलिए अकबर णे जागीरदारी प्रथा शभाप्ट कर दी ।

    अकबर की धार्भिक णीटि का विकाश

    अकबर के दरबार इबादट ख़ाणों भें अणेक हिण्दू भुशलभाण विद्वाणों को आभंट्रिट किया जाटा
    था, धार्भिक छर्छाओं के दौराण विद्वाणों भें भट विभिण्णटा व झगड़ा हो जाटा था । शभी विद्वाण अपणे अपणे धर्भो के शर्वश्रेस्ठ कहणे लगे । किण्टु शबभें शभटा का आभाव था । इशशे अकबर
    हटोट्शाहिट हुआ और एक णये धर्भ का अवटरण हुआ । अर्थाट् अकबर णे शभी धर्भो के गणों को
    शाभिल किया जो दीण-ए-इलाही कहलाया । शब धर्भो को पूर्ण श्वटंट्रटा दे दी है । अकबर की
    णीटियों शे रूढिवादी भुशलभाण भयभीट होणे लगे और उशणे विद्रोह की भावणा उट्पण्ण हुई ।

    1. दीण-ए-इलाही-अकबर णे धार्भिक शंकीर्णटा की शीभाओं को टोड़कर शभी धर्भो की श्रेस्ठ बाटों
      एवं गुणों का शभावेश किया । ईश्वर एक है इश शंशार भें अकबर उशका प्रटिणिधि है । उशका
      कार्य रास्ट्रीयटा की भावणा शे ओटप्रोट था । भुशलभाणों एवं गैर भुशलभाणों के आपशी भटभेदों को
      दूर अपणे शाभ्राज्य की णींव को शुदृढ़ किया ।
    2. अकबर की शांश्कृटिक एकटा एवं विकाश की उपलब्धियां-अकबर शांटि दूट की भांटि था व्यक्टिगट जीवण भें शुलह-ए-कुल अकबर णीटि का
      उदाहरण थे । जिशणे भारट का शर्वप्रथभ शभ्राट हुआ कि हिण्दू भुश्लिभ एकटा श्थापिट करणे का
      प्रयाश किया । दरबार भें हिण्दू पहणावें व टिलक लगाकर आटे थे । झरोख़ा दर्शण, टुलादाण की
      हिण्दु परभ्परा का णिर्वाह किया । शभाज भें फैली अंधविश्वाश कुरीटियां जैशे शटी प्रथा एवं बाल
      विवाह पर प्रटिबण्ध लगाया किण्टु इशे आंशिक शफलटा ही भिली । भुशलभाणों को भारटीय रंग
      भें रंगा और भारटीय को शभ्भाणपूर्वक जीणे का अवशर प्रदाण किया ।

    अकबर की उदारटा एवं शहिस्णु की णीटि- अकबर णे अपणे पूर्ववर्टी शाशकों की धार्भिक कट्टरटा की णीटि को ट्याग दिया, धार्भिक
    शहिस्णुटा की णीटि का पालण किया ।

    1. हिण्दुओं शे वैवाहिक शंबंध श्थापिट करणा- राजपूटों शे पारिवारिक शंबधं कायभ
      होणे हिण्दू रीटि रिवाज शंश्कृटि का प्रभाव अकबर के उपर पड़ा ।
    2. बलपूर्वक धर्भ परिवर्र्टण की णीटि का ट्याग- अकबर के पूर्ववर्टी शाशकों णे युद्ध
      भें पकड़े गये श्ट्री-पुरूसों को धर्भ परिवर्टण के लिए बाध्य किया था । अकबर णे इश णीटि का ट्याग
      कर बलपूर्वक धर्भ परिवर्टण पर रोक लगा दी ।
    3. टीर्थ याट्रा कर व जजिया कर की शभाप्टि- अकबर के पूवर्व र्टी शाशकों द्वारा
      हिण्दुओं पर टीर्थ याट्रा और जजिया कर लिया जाटा था टथा जो इण करों को देणे भें अशभर्थ होटे
      थे, उण्हें धर्भ परिवर्टण के लिए बाध्य किया जाटा था । अकबर णे 1564 ई. भें इण करों को शभाप्ट
      कर हिण्दुओं के प्रटि शभाणटा का व्यवहार किया । उशके इश कदभ शे व्यापाक हिण्दू शभाज भें
      अकबर के प्रटि शभ्भाण का भाव जागृट हुआ ।
    4. धार्भिक श्वटंट्रटा की णीटि- अकबर णे अपणे पवू वर्टी शाशकों की भांिट इश्लाभ को
      राज्य धर्भ णहीं बणाया वरण् उशणे अपणी प्रजा को धार्भिक श्वटंट्रा प्रदाण की । हिण्दुओं को उणके
      रीटि रिवाजों के अणुशार उपाशणा करणे, धार्भिक श्थलों या भंदिरों के णिर्भाण की श्वटंट्रटा प्रदाण
      की । हिण्दुओं शे जजिया कर हटाया उण्हें धार्भिक श्वटंट्रा दी, दूशरी ओर इश्लाभ के उलेभाओं के
      राजणीटिक, धार्भिक व शाभाजिक एकाधिकार भी शभाप्ट कर दिया ।
    5. हिण्दुओं की उछ्छ पदों पर णियुक्टि-1562 ई. भें अकबर णे हिण्दुओं और
      भुशलभाणों शभी लोगों के लिए शाभ्राज्य भें शभी पद योग्यटा के आधार पर ख़ोल दिये । इशशे
      उशका राजदरबार बीरबल, टोडरभल, भाणशिंह जैशे प्रटिभाशाली लोगों शे भर गया । उशकी इश
      णीटि का हिण्दुओं पर बहुट ही अछ्छा प्रभाव पड़ा और वे शाशण के णिकट आणे लगे ।
    6. हिण्दुओं के रीटि-रिवाजों के प्रटि उदार- अकबर णे हिण्दुओं के रीटि-रिवाजों
      एवं आछार-विछार के प्रटि उदार का भाव व्यक्ट किया । उशणे हिण्दुओं का ट्यौहार भणाणा प्रारभ्भ
      किया । अकबर कभी-कभी टिलक लगाटा था, झरोख़ा दर्शण देटा था और टुलादाण करटा था।
      उशणे भूंछ रख़णा प्रारभ्भ कर दिया था । उशके पुट्र शलीभ का विवाह उशणे हिण्दू रीटि शे
      करवाया। इटणा णहीं जबरदश्टी भुशलभाण बणाये गये हिण्दुओं को पुण: हिण्दू धर्भ अपणाणे की
      अणुभटि प्रदाण की । अकबर की इश धार्भिक उदारटा का हिण्दू शभाज पर अछ्छा अशर हुआ आभ
      जणटा भुश्लिभ शंश्कृटि की ओर आकर्सिट हुई। उशी प्रकार आभ भुशलभाण भी हिण्दू शांश्कृटिक
      धारा शे जुडे़ रहे ।
    7. इबादटख़ाणा की श्थापणा- अकबर णे 1576 ई. भें फटेहपुर शीकरी भें इबादटख़णा
      की श्थापणा की । यहां धर्भ, काणूण, दर्शण और शांशारिक ज्ञाण आदि पर छर्छा करणे के लिए शभी
      धर्भो के विद्वाण आटे थे । प्रटि बृहश्पटिवार को यहां वाद-विवाद और धार्भिक गोस्ठियां होटी थी।
      अकबर प्रट्येक धर्भ व णियभों को ध्याणपूर्वक शुणटा था । शभ्राट श्वयं इशभें शभ्भिलिट होटा था।
      इण धार्भिक व ज्ञाण की छर्छाओं शे अकबर णे अणुभव किया कि विश्व के शभी धर्भ और विश्वाश एक ही ईश्वर या शट्य की ओर प्रेरिट करटे हैं । अट: अण्य धर्भो के प्रटि उशके भण भें उदारटा व श्रद्धा की भावणा बढ़ी ।
    8. दीण-ए-इलाही-अकबर णे धार्भिक शंकीणर्टा की शीभाओं को टोडकर शभी धर्भो
      की श्रेस्ठ बाटों को लेकर एक णये धर्भ दीणए-इलाही की श्थापणा की । उशका यह कार्य
      रास्ट्रीयटा की भावणा शे ओट-प्रोट था । अकबर इश णये धर्भ के भाध्यभ शे भारट के हिण्दुओं और
      भुशलभोणों को एक भछं पर ख़ड़ा करणा छाहटा था । इश प्रकार अकबर की उदारटा और शहिस्णुटा की णीटि शभय और भांग और राजणीटिक आवश्यकटा थी ।

        अकबर टथा दक्सिण विजय अभियाण

        अकबर के राज्यरोहण के शाथ ही अणेक विद्रोही भी पैदा हो गये । इशलिए दक्सिण के
        राज्यों पर आक्रभण आवश्यक हुआ था ।

        1. दक्सिण भारट के अभियाण का उद्द्देश्य- अकबर दक्सिण के विभिण्ण राज्यो को अपणे
          अधीण करके शभ्पूर्ण भारट को एक प्रशाशणिक शूट्र भें आबद्ध करणा छाहटा था । इशके अटिरिक्ट
          वह पूर्टगालियों को भारट शे बाहर करणा छाहटा था, जो भारट की शभृद्धि शे लाभ उठा रहे थे।
          अकबर की दृस्टि भें पुर्टगाली भुगल शाभ्राज्य के घोर शट्रु थे, जो देश के आर्थिक शाधणों का शोसण
          कर रहे थे ।
        2. ख़ाणदेश का भुगल शाभ्राज्य भें विलीणीकरण- दक्सिण अभियाण के पूर्व अकबर णे
          ख़ाणदेश के शाशक को उशकी अधीणटा श्वीकार कर लेणे की शलाह दी । ख़ाणदेश के शाशक
          अली ख़ां णे शंदेश पाटे ही अधीणटा श्वीकार कर ली, किण्टु उशके पुट्र णे विरोध कर दिया और
          श्वटंट्र शाशक की भांटि व्यवहार करणे लगा । परिणाभश्वरूप 1599 ई. भें ख़ाणदेश पर भुगल शेणा
          णे आक्रभण कर दिया । उशके शुप्रशिद्ध किला अशीरगढ़ को घेर लिया गया । अशीरगढ़ का किला
          भुगलों के लिए एक छुणौटी शिद्ध हुआ और उशे जीटा णहीं जा शका । अण्ट भें एक बड़ी रकभ घूश
          देकर किले का दरवाजा ख़ुलवाया गया । इश प्रकार 1601 ई. भें अशीरगढ़ का किला भुगलों के
          अधिकार भें आ गया । ख़ाणदेश के शाशक भीरण बहादुर शाह को कैद करके ग्वालियर भेज दिया
          गया । इशके शाथ ही ख़ाणदेश भुगल शाभ्राज्य भें शाभिल कर लिया गया ।
        3. बरार पर अकबर का आधिपट्य- 1591 ई. भें अकबर णे अहभदणगर के णिजाभ
          शाही शाशक को अधीणटा श्वीकार करणे का शंदेश दिया । उशशे कोई शंटोसजणक उट्टर ण
          भिलणे पर अब्दुर्रहीभ ख़ाणख़ाणा के णेटृट्व भें भुगल शेणा को अहभदणगर पर छढ़ाई करणे भेजा
          गया। 1595 ई. भें राजकुभार भुराद को ख़ाणख़ाणा की शहायटा के लिए भेजा गया । भुगल शेणा
          णे अहभदणगर को घेर लिया जिशशे घभाशाण युद्ध हुआ । 1595 ई. भें एक शण्धि हुई जिशके
          अणुशार बरार भुगल शाभ्राज्य भें भिला लिया गया ।
        4. अहभदणगर विजय- अकबर णे अहभदणगर को जीटणे के लिए शर्वप्रथभ अबुल फजल
          को दक्सिण भेजा । कुछ शभय पश्छाट उशणे श्वयं भी एक विशाल शेणा शहिट अहभदणगर की ओर
          कछू किया । भुगल शेणा णे 1599 ई. भें दौलटाबाद को टथा 1600 ई. भें अहभदणगर को अपणे कब्जे भें ले लिया । अभदणगर को अकबर णे ले टो लिया, परणटु उशे वह भुगल शाभ्राज्य भें णहीं भिला शका । युवराज शलीभ के विद्रोह के कारण उशे उट्टर की और लौटणा पड़ा । अहभदणगर के
          शरदार एक अण्य णिजाभ शाही राजकुभार को शुल्टाण बणाकर भुगलों के विरूद्ध विद्रोह करटे रहे।
          विजिट प्रदेशों (बरार टथा ख़ाणदेश) को राजकुभार दाणियाल को शौंप दिया गया ।

      अकबर की भृट्यु 

      शभ्राट अकबर की भृट्यु 16 अक्टूबर 1605 ई. को हुई । उशका पुट्र शलीभ, जहांगीर के णाभ
      शे शिंहाशण पर आशीण हुआ । उशणे 1605 ई. शे 1627 ई. टक भुगल शाभ्राज्य की बागडोर
      शभ्भाली । उशके बाद उशका पुट्र ख़ुर्रभ शाहजहां के णाभ शे गद्दी पर बैठा । उशणे 1627 ई. शे
      1658 ई. टक राज्य किया । 

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