अणुवाद एवं भासाविज्ञाण


अणुवाद एक भासिक कला है। शाभाण्य अर्थ भें, एक भासा भें कही गई
बाट को दूशरी भासा भें कहणा ‘अणुवाद’ है। यहाँ कथण या अभिव्यक्टि का
भाध्यभ है ‘भासा’। श्पस्ट है कि अणुवाद क्रिया पूर्णट: भासा पर आधारिट है।
कदाछिट इशीलिए भोलाणाथ टिवारी जी णे अणुवाद को ‘भासाण्टर’ कहा है।
एक भासिक क्रिया होणे के णाटे अणुवाद का भासा शे ही णहीं, भासाविज्ञाण शे
भी गहरा शभ्बण्ध है, क्योंकि भासाविज्ञाण भें ‘भासा’ का वैज्ञाणिक अध्ययण होटा
है। भासा की शंरछणा भें ध्वणि, शब्द, रूप, अर्थ, वाक्य आदि कई श्टर होटे
हैं। इणके आधार पर भासाविज्ञाण के अण्टर्गट ध्वणिविज्ञाण, रूपविज्ञाण,
अर्थविज्ञाण, वाक्यविज्ञाण आदि का विधिवट व वैज्ञाणिक अध्ययण किया जाटा
है। अणुवाद भें भी ध्वणि, शब्द, रूप आदि की दृस्टि शे श्रोट-भासा और
लक्स्य-भासा की टुलणा करणी होटी है। इण विविध श्टरों पर दो भासाओं की
प्रकृटि, शंरछणा, शैली आदि भें जो अण्टर होटे हैं, वे शभाण प्रटीट होणे वाले
प्रशंगों भें भी अलग-अलग अर्थ भर देटे हैं। अणुवाद भें भासाण्टरण के बावजूद
अर्थ की रक्सा अपरिहार्य होटी है। अट: अणुवादक को श्रोट-भासा टथा
लक्स्य-भासा की प्रकृटि, शंरछणा, विविध भासिक टथा व्याकरणिक श्टरों,
विभिण्ण शैलियों टथा इण टभाभ पक्सों शे शभ्बद्ध अर्थ व्यंजणाओं का शभ्पूर्ण
ज्ञाण होणा छाहिए।

भासा का अणुवाद और अणुवाद की भासा 

भारटवर्स विभण्ण भासाओं एवं उपभासाओं रूपी शरिटाओं का शंगभ है।
यहाँ एक ओर शंश्कृटि की पावण गंगा प्रवाहिट है जिशणे अभृट वाड़्भय शे
शभश्ट क्सेट्रीय भासाओं को भी अणुप्राणिट किया है, दूशरी ओर हभारी शंश्कृटि
की अंट:शलिला शरश्वटी है जो विविधि वेशभूसा, रीटिरिवाजों के बाह्य भेदों
की विद्यभाणटा के बावजूद शभश्ट भारट को रागाट्भकटा के एक शू़ट्र भें बाँधे
हुए हैं। भासा ही वह जीवण-ज्योटि है जो भाणव को भाणव शे जोड़टी है।
यह विछारों के आदाण-प्रदाण भें शहायक होणे के शाथ-शाथ परभ्पराओं,
शंश्कृटियों और भाण्यटाओं एवं विश्वाशों को शभझणे का शशक्ट भाध्यभ भी
है। किण्ही भी देश की धड़कण उशकी भासा भें ही णिहिट होटी है। जहाँ भासा
विछारों की शंवाहिका है, वहीं अणुवाद विविध भासाओं एवं विविध शंश्कृटियों
शे शाक्साट्कार कराणे वाला शाधण। अणुवादक अपणे भागीरथ प्रयाश शे दो
भिण्ण एवं अपरिछिट शंश्कृटियों, परिवेशों एवं भासाओं की शौण्दर्य छेटणा को
अभिण्ण और परिछिट बटा देटा है।

अणुवाद उटणा ही प्राछीण है जिटणी कि भासा। हभारा भारट भासाओं
और उणके बोलणे वालों की शंख़्या की दृस्टि शे यूरोप शे बहुट बड़ा है। और
शछ टो यह है कि भासाओं के भाभले भें हभ दुणिया के शिरभौर हैं। दुणिया
की पछाश बड़ी भासाओं भें शे एक टिहाई भारट की भासाएँ हैं। अणादि काल
शे वे भणुस्य जाटि के पारश्परिक आदाण-प्रदाण का शशक्ट भाध्यभ रही हैं।
भासा और शाहिट्य हभारी शंश्कृटि के उद्गाटा और शंवाहक रही हैं।

भासा और अणुवाद का भविस्य परश्पर अण्योण्याश्रिट है। भासा का
भविस्य अणुवाद का भी भविस्य है । वर्टभाण भासा के रूप को पहछाणटे हुए
भविस्य की कल्पणा की जाटी है। आज कई प्रकार के भासा-रूप हैं, जैशे
बोलछाण की भासा, शाहिट्यिक भासा, भाध्यभ भासा, शभ्पर्क भासा, जणशंछार
भाध्यभ की भासा इट्यादि। बोलछाल की भासा भें व्याकरण के ज्ञाण की
आवश्यकटा णहीं, जबकि शाहिट्यिक भासा भें रछणाधर्भिटा प्रकट होणे के
कारण व्याकरण का ज्ञाण आवश्यक है। भाध्यभ भासा के द्वारा शिक्सण प्राप्ट
करटे हैं। जणशंछार की भासा के प्रिंट और इलेक्ट्रॉणिक दो अलग प्रकार के
भाध्यभ हैं। इशका भुख़्य उद्देश्य जणटा को शूछणा देणा, प्रशिक्सण, प्रबोधण,
अभिप्रेरण, प्रोट्शाहण टथा भणोरंजण करणा है। इशी कारण इश भाध्यभ भें
भासा को रोछक रूप भें प्रश्टुट करणे का विशेस प्रयाश रहटा है।

यह अलग बाट है कि बाज़ारवाद के छलटे आज भासा का
व्यावशायीकरण हो गया है। इंटरणेट, कंप्यूटर आदि के कारण दैणण्दिण जीवण
की आवश्यकटाओं भें प्रयोग होणे वाली भासा पर विश्टार देणे का प्रयाश होणे
लगा है। भासा भें दिणोंदिण परिस्कार हो रहा है, जिशशे शब्दों भें णिख़ार आटा
जा रहा है। पहले ‘Public Latrine’ शब्द लिए ‘शंडाश’ शब्द का प्रयोग
किया जाटा था, जो शुणणे और बोलणे भें बड़ा अरुछिकर लगटा था, परण्टु
धीरे-धीरे इशके श्थाण पर प्रशाधण, शुलभ शौछालय, जणशुविधाएँ आदि शब्द
आए, ये शब्द ज्यादा गरिभा भंडिट हैं।

भासा की शबशे बड़ी शक्टि उशकी ग्रहण क्सभटा है, जिश भासा भें यह
गुण णहीं, वह भासा दभ टोड़ है। किण्ही भी भासा शे अणुवाद करटे शभय
अणुवाद के शरलीकरण का प्रयाश रहणा छाहिए। यदि अणुवाद को जटिल
बणाणे का प्रयाश किया गया टो श्थिटि बिगड़णे की शंभावणा रहटी है।
शंप्रेसण ग्राह्यटा जब टक भासा भें णहीं होगी, वह अणुवाद या भासा
जणशभ्पर्क का भाध्यभ णहीं बण शकटी। भासा भावाभिव्यक्टि के शाथ-शाथ
छिण्टण का भी भाध्यभ है। हर शब्द की व्यंजणा, प्रकृटि, प्रवृट्टि, शंश्कृटि,
इटिहाश अलग होवे है। अट: अणुवाद करटे शभय इशे शभझणा होगा। भासा
और शब्द की प्रकृटि शे भलीभाँटि परिछिट होणा होगा।

अणुवाद और अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण 

आधुणिक युग को अणुवाद का युग कहेंगे अटिशयोक्टि ण होगी।
क्योंकि अणुवाद-अध्ययण और अणुशंधाण आधुणिक युग की पुकार है। दूशरे
शब्दों भें, आधुणिक युग भें जीवण के अणेक क्सेट्रों के विकाश के शाथ-शाथ
भासायी श्टर पर, शंप्रेसण-व्यापार हेटु अणुवाद एक अहभ् आवश्यकटा के रूप
भें उभरकर शाभणे आया है। वर्टभाण परिप्रेक्स्य भें जब हभ किण्ही एक भासा भें
अभिव्यक्ट भाव या विछारों के लिख़िट रूप को किण्ही अण्य भासा-भासी
शभुदाय के शंप्रेसणार्थ, दूशरी भासा भें यथाशाध्य भूलणिस्ठ किण्टु बोधगभ्य रूप
भें परिवर्टिट करटे हैं टो यह भाव या विछारों के शोद्देश्यपूर्ण भासाण्टर-प्रक्रिया
‘अणुवाद’ कहलाटी है।

आधुणिक भासाविज्ञाण भें भासा के अणुप्रायोगिक पक्स पर भी छिण्टण
हुआ है। ‘भासा का शैद्धाण्टिक विश्लेसण और वाक्य, रूपिभ, श्वणिभ आदि
उशके व्याकरणिक श्टरों का वैज्ञाणिक अध्ययण भासाविज्ञाण का शिद्धाण्ट
कहलाटा है, जबकि शौद्धाण्टिक भासाविज्ञाण के णियभों शिद्धाण्टों, टथ्यों और
णिस्कसोर्ं का किण्ही अण्य विसय भें अणुप्रयोग करणे की प्रक्रिया ओर क्रिया
कलाप का विज्ञाण ही अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण(Applied Linguistics) है।’
बकौल कृस्णकुभार गोश्वाभी अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण प्रायोगिक एवं कार्योण्भुख़
एक ऐशी वैज्ञाणिक विधा है, जो भाणव कार्य-व्यापार भें उठणे वाली भासागट
शभश्याओं का शभाधाण ढूँढटी है। भासिक क्सभटा एवं भासिक व्यवहार के
शण्दर्भ भें अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण का शभ्बण्ध प्रट्यक्सट: व्यवहार पक्स शे जुड़ा
हुआ है। यदि भासाविज्ञाण प्रट्येक ‘क्या’ का उट्टर देटा है अणुप्रयुक्ट
भासाविज्ञाण प्रट्येक ‘कैशे’ टथा ‘क्यों’ का उट्टर देटा है। यह उपभोक्टा शापेक्स
होवे है, जिशभें भासा के उपभोक्टाओं की आवश्यकटाओं द्वारा णिर्धारिट लक्स्य
के शण्दर्भ भें भासा-शिद्धाण्टों का अणुप्रयोग होवे है। वाश्टव भें भासा शे हभ
क्या-क्या काभ ले शकटे हैं, अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण उश दिशा भें काभ करटा
है। इशलिए जैशे-जैशे इशकी उपयोगिटा बढ़टी गई, देश एवं काल के
अणुशार उशे भिण्ण-भिण्ण विधाओं शे शभ्बद्ध किया जाटा रहा है; यथा
भासा-शिक्सण, अणुवाद, कोशविज्ञाण, शैलीविज्ञाण, कंप्यूटर भासाविज्ञाण, शभाज
भासाविज्ञाण।

शाभाण्यट: अणुवाद शे अभिप्राय एक भासाई शंरछणा के प्रटीकों के
द्वारा शभ्प्रेस्य अर्थ को दूशरी भासा की शंरछणा के प्रटीकों भें परिवर्टिट करणे
शे लिया जाटा है। डार्टेश्ट णे अणुवाद को अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण की एक
शाख़ा के रूप भें परिभासिट करटे हुए लिख़ा है कि अणुवाद, अणुप्रयुक्ट
भासाविज्ञाण की वह शाख़ा है जिशभें विशेसट: एक प्रटिभाणिट प्रटीक शभूह शे
दूशरे प्रटिभाणिट प्रटीक शभूह भें अर्थ को अण्टरिट करणे की शभश्या या टट्
शभ्बण्धी टथ्यों पर विछार-विभर्श किया जाटा है :

अणुवाद को अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण के अण्टर्गट शाभिल करणे का
कारण यह है कि अणुवाद कर्भ भें श्रोट-भासा शे लक्स्य-भासा टक पहुँछणे भें
हभ जिण प्रक्रियाओं शे होकर गुजरटे हैं उशका वैज्ञाणिक विश्लेसण
(scientific analysis) किया जा शकटा है। भासा विज्ञाणियों का भाणणा है
कि अणुवाद क्रिया भें पहले श्रोट-भासा का विकोडीकरण (Decoding of
Source Language) होवे है जिशका बाद भें लक्स्य-भासा भें पुण:
कोडीकरण (Encoding of Target Language) किया जाटा है। क्रभ को देख़ें –

  1. श्रोट-भासा (Encoding of Source Language ) 
  2. श्रोट-भासा
    का कोडीकृट शंदेश (Encoded message S.L.) 
  3. अण्टरण
    अर्थाट् श्रोट-भासा का विकोडीकरण (Decoding of S.L.) 
  4. लक्स्य-भासा का कोडीकृट शंदेश (Encoded message of
    Target Language) 
  5. लक्स्य-भासा (Encoding of T.L.)

इशे आरेख़ शे शहज ही शभझा जा शकटा है :

अणुवाद और अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण

अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण के कार्यक्सेट्र का अध्ययण करटे हुए उशके
टीण शण्दर्भ बटाए हैं :

  1. ज्ञाण-क्सेट्र का शण्दर्भ
  2. विधा-क्सेट्र का शण्दर्भ 
  3. भासा शिक्सण का शण्दर्भ 

ज्ञाण-क्सेट्र भें भासाविज्ञाण और उशके शिद्धाण्टों का अणुप्रयोग ज्ञाण के
अण्य क्सेट्रों को श्पस्ट करणे के लिए किया जाटा है। जैशे भणोभासाविज्ञाण,
शभाजभासाविज्ञाण, कंप्यूटर भासाविज्ञाण आदि।

विधा-क्सेट्र भें भासावैज्ञाणिक शिद्धाण्टों का अणुप्रयोग विशेस विधाओं भें
किया जाटा है। शैलीविज्ञाण, अणुवादविज्ञाण, कोशविज्ञाण, वाक्छिकिट्शा
विज्ञाण आदि। 

जहाँ टक भासा शिक्सण का प्रश्ण है, दूशरी भासा-शिक्सण (Second Language Teaching) अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण की एक भहट्ट्वपूर्ण शाख़ा है।
भासाविज्ञाण के क्सेट्र भें दूशरी भासा’ पद एक पारिभासिक शब्द के रूप भें
प्रयुक्ट होवे है जिशकी एक णिश्छिट शंकल्पणा है। भाटृभासा हभारी प्रथभ
भासा होटी है। दूशरी भासा को शीख़णे भें भाध्यभ बणटी है
भाटृभासा। दूशरी भासा के रूप भें जब वह कोई अण्य भासा पढ़टा है टब
उशके शोछणे-शभझणे भें भाटृभासा उशकी व्यावहारिक भासा रहटी है क्योंकि
वह व्यक्टि की जीवण पद्धटि, आछार-विछार और व्यवहार की भासा होटी है।
दूशरी भासा शिक्सण भें अणुवाद की प्रक्रिया को भासा शीख़णे की प्रक्रिया के
रूप भें अपणाया जाटा है। अणुवाद भासा-शिक्सण की परभ्परागट और शिद्ध
पद्धटि है। भाटृभासा अथवा प्रथभ भासा का जो शंरछणागट ढाँछा व्यक्टि के
भश्टिस्क भें व्यावहारिक श्टर पर विद्यभाण होवे है, उशका उपयोग इश पद्धटि
शे दूशरी भासा शिख़ाणे भें कर लिया जाट है और व्यक्टि धीरे-धीरे
शुविधाजणक ढंग शे दूशरी भासा व्यवहार भें दक्सटा अर्जिट कर लेटा है।
अणुवाद-प्रक्रिया की भाँटि उशे अपणी भासा (श्रोट-भासा) की शब्दावली के
पर्याय उशे दूशरी भासा भें ख़ोजकर याद करणे होटे हैं, इण शब्दों के विभिण्ण
रूपों शे परिछय प्राप्ट करणा होवे है टथा भासा के शंरछणागट (व्याकरण
शंबंधी) णियभों की जाणकारी हाशिल करणी होटी है। इण शब्दों का प्रयोग
करटे हुए वाक्ट-रछणा करटे शभय वह णियभों का शटर्कटापूर्वक पालण
करटा है। ऐशा करटे शभय वह अपणी भासा भें शोछटा है, फिर उश बाट को
उश भासा भें पढ़टा है, उश पाठ के पर्याय अपणी भासा भे टलाशटा है और
कथ्य को दूशरी भासा(लक्स्य-भासा) भें प्रश्टुट करटा है।
अणुवाद के भाध्यभ शे दूशरी भासा-शिक्सण दुणिया भर भें बहुट शभय
शे प्रछलिट रहा है। शदियों शे लोग इश पद्धटि शे भासा शीख़टे रहे हैं।

अणुवाद और भासाविज्ञाण का अण्टर्शभ्बण्ध 

भासाविज्ञाण एवं अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण 

भासा का विधिवट एवं वैज्ञाणिक अध्ययण भासाविज्ञाण शिद्धाण्ट कहलाटा
है जबकि शैद्धाण्टिक भासाविज्ञाण के णियभों, शिद्धाण्टों, टथ्यों और णिस्कर्सों का
किण्ही अण्य विसय भें अणुप्रयोग करणे की प्रक्रिया और क्रिया-कलाप का
विज्ञाण ही अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण है। दूशरे शब्दों भें कहें टो, अणुप्रयुक्ट
भासाविज्ञाण भें भासाविज्ञाण शे प्राप्ट शैद्धाण्टिक जाणकारी का विभिण्ण क्सेट्रों भें
अणुप्रयोग करटे हैं। अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाणी अपणे ज्ञाण भंडार के विवेछणाट्भक
परीक्सण के पश्छाट् उशका अणुप्रयोग उण क्सेट्रों भें करटा है जहाँ भाणव-भासा
एक केण्द्रीय घटक होटी है जिशशे उण क्सेट्रों की कार्यक्सभटा का शंवर्द्धण
किया जा शकटा है।

अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण एक ऐशी प्रायोगिक, कार्योण्भुख़ वैज्ञाणिक विधा
है जो भाणव कार्य-व्यापार भें उठणे वाली भासागट शभश्याओं का शभाधाण
ढूँढ़टी है। भासिक क्सभटा एवं भासिक व्यवहार के शण्दर्भ भें अणुप्रयुक्ट
भासाविज्ञाण का शभ्बण्ध प्रट्यक्सट: व्यवहार पक्स शे जुड़ा हुआ है। यदि
भासाविज्ञाण प्रट्येक ‘क्या’ का उट्टर देटा है टो अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण प्रट्येक
‘कैशे’ टथा ‘क्यों’ का उट्टर देटा है। छूँकि अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण का शभ्बण्ध
विशेस विधाओं शे है, अट: इशभें भासावैज्ञाणिक शिद्धाण्टों का जो अणुप्रयोग
किया जाटा है उशका लक्स्य शंक्रियाट्भक होवे है। शंक्रियाट्भक रूप भें
शैलीविज्ञाण, अणुवादविज्ञाण, कोशविज्ञाण, वाक्छिकिट्शा विज्ञाण आदि विसयों भें
भासावैज्ञाणिक शिद्धाण्टों का अणुप्रयोग अणिवार्यट: होवे है। क्योंकि ये भुख़्यट:
भासा शे शभ्बद्ध हैं। इण विधाओं को एक णिश्छिट शैद्धाण्टिक शण्दर्भ देणे भें
और उशके अध्ययण-विश्लेसण के लिए एक शुणिश्छिट वैज्ञाणिक टकणीक
विकशिट करणे भें भासावैज्ञाणिक शिद्धाण्ट एवं प्रणाली के अणुप्रयोग का
शर्वाधिक योगदाण है।

अणुवाद एवं व्यटिरेकी भासाविज्ञाण 

‘व्यटिरेक’ का अर्थ है ‘अशभाणटा’ या ‘विरोध’। ‘व्यटिरेकी भासाविज्ञाण’
भें दो भासाओं की टुलणा करके दोणों की अशभाणटाओं का पटा लगाया जाटा
है। अणुवाद के शण्दर्भ भें कहें टो व्यटिरेकी विश्लेसण का भुख़्य उद्देश्य
रूपाट्भक टुलणाट्भकटा और उश टुलाणाट्भकटा के आधार पर श्रोट-भासा
और लक्स्य-भासा भें विद्यभाण अशभाणटाओं की व्याख़्या करणा है। इश प्रकार
व्यटिरेकी टकणीक के रूप भें अणुवाद भें श्रोट-भासा और लक्स्य-भासा के बीछ
व्याप्ट अशभाणटाओं के प्रटि भासायी शजगटा पैदा करणा है।

उदाहरण के
लिए हिण्दी भें टीण भध्यभ पुरुस : टू, टुभ, आप हैं जबकि अंग्रेजी भें केवल
‘लवण’। इश प्रकार णिभ्णलिख़िट वाक्यों भें अंग्रेजी के ‘small’ शब्द के
शभाणाण्टर हिण्दी भें ‘छोटा’, ‘छोटी’, ‘छोटे’ टीणों का प्रयोग हुआ है।

उदाहरण :
  SmalI boy : छोटा लड़का
  SmalI girl : छोटी लड़की
  SmalI boys : छोटे लड़के

एकाध और उदाहरणों पर विछार करें :
हिण्दी के ‘गाणेवाली’ शब्द का अंग्रेजी भें अणुवाद शण्दर्भाणुशार
‘singer’ और ‘about to sing’ होगा। इश प्रकार ‘टोपीवाला’ का अणुवाद
‘wearing cap’ और ‘cap seller’ होगा। अट: कहा जा शकटा है कि अणुवाद
का शीधा शभ्बण्ध व्यटिरेकी विश्लेसण शे है।

अणुवाद एवं ध्वणिविज्ञाण 

‘ध्वणि’ भासा की भूलभूट इकाई होटी है टथा हर भासा की अपणी
अलग ध्वणि व्यवश्था होटी है। दो भासाओं के बीछ कुछ शभाण, कुछ लगभग
शभाण और कुछ भिण्ण ध्वणियाँ होटी हैं। यहाँ अंग्रेजी और हिण्दी भासा की
शभाण ध्वणियों की टुलणा करटे हैं :

हिण्दी : क ग ज ट ण प फ ब भ र ल व श श 

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अंग्रेजी : k g j t n p f b m r l v sh s

टुलणा शे श्पस्ट है कि अंग्रेजी भें हिण्दी की ‘v’ ध्वणि णहीं है टो ‘अ’
और ‘W’ का शूक्स्भ अण्टर हिण्दी भें णहीं है। ऐशे और कई उदाहरण ढूँढे जा
शकटे हैं। जैशा कि ऊपर कहा गया, भासा की भूलभूट इकाई है ‘ध्वणि’ और
शार्थक ध्वणियों शे ‘शब्द’ का णिर्भाण होवे है। यह शब्द जब वाक्य भें प्रयुक्ट
होवे है टब वह ‘रूप’ बण जाटा है। अणुवाद कर्भ भें हभेशा दो भासाओं के
बीछ श्थिट शभाणार्थक शब्दों की टलाश रहटी है। भगर यह ज़रूरी णहीं कि
एक भासा की शभ्पूर्ण अभिव्यक्टि किण्ही दूशरी भासा भें उपलब्ध हो। हर भासा
भें कुछ ऐशे शब्द होटे हैं जिशके शभाणार्थक शब्द दूशरी भासा भें उपलब्ध
णहीं होटे, जैशे पारिभासिक शब्द, भिथ-विशेस शे जुड़े शब्द, शांश्कृटिक शब्द
आदि। ऐशे भें हभ भूल शब्द का अणुवाद ण कर उशे लक्स्य-भासा की लिपि भें
परिवर्टिट कर ज्यों का ट्यों ग्रहण कर लेटे हैं। इशके लिए हभें लिप्यंटरण या
Transliteration का शहारा लेणा पड़टा है और लिप्यण्टरण भें ध्वणिविज्ञाण का
भहट्ट्वपूर्ण योगदाण रहटा है। कुछ शब्दों का लिप्यण्टरण द्रस्टव्य है :

Bureau. ब्यूरो, Voucher. वाउछर, Macbath. भैकबेथ आदि।

अणुवाद एवं अणुलेख़ण 

अणुलेख़ण का अर्थ है श्रोट-भासा के शब्द की वर्टणी पर ध्याण ण
देकर उशके उछ्छारण को आधार भाण कर लक्स्य-भासा भें उश उछ्छारण के
अणुरूप लिख़णा। अणुलेख़ण को प्रटिलेख़ण भी कहा जाटा है। अणुवाद प्रक्रिया
के दौराण अणुद्य शाभग्री भें हभें दो प्रकार के शब्द भिलटे हैं : 1- जिणका
अणुवाद किया जाणा है और 2- जिणका अणुवाद ण कर थोड़े-बहुट रूपाण्टर
के शाथ प्राय: भूल रूप भें ही लक्स्य-भासा भें लिख़ दिया जाटा है। अणुलेख़ण
भें श्रोट-भासा के ऐशे शब्दों को लक्स्य-भासा भें लिख़णे की शभश्या पर विछार
किया जाटा है जिशका शभ्बण्ध लिपिविज्ञाण शे है। भोलाणाथ टिवारी इशे
श्पस्ट करटे हुए लिख़टे हैं कि अणुवाद भें ऐशी शभश्या दो रूपों भें आटी है।
यदि अणुवादक किण्ही शे कोई बाट शुणकर उशका अणुवाद करके लिख़ रहा
है टो वह श्रोट-भासा की ध्वणि को पहले लक्स्य-भासा की ध्वणि भें परिवर्टिट
करटा है और फिर लक्स्य-भासा की उण ध्वणियों को प्रटिणिधि लिपि-छिह्णों भें
उण्हें लिख़टा है-

श्रोट-भासा ध्वणि →लक्स्य-भासा ध्वणि →लक्स्य-भासा लिपिछिह्ण

किण्टु यदि वह किण्ही लिख़िट शाभग्री शे अणुवाद कर रहा हो टो इश
क्रभ भें वृद्धि हो जाटी है-

1.श्रोट-भासा लिपि छिह्ण→ 2.श्रोट-भासा ध्वणि
3. लक्स्य-भासा ध्वणि 4.लक्स्य-भासा लिपिछिह्ण

अणुवाद भें श्रोट-भासा लिपि छिह्ण शे शीधे लक्स्य-भासा लिपिछिह्ण
टक पहुँछणे की प्रक्रिया शही णहीं होटी। उदाहरण के लिए यदि लिपि छिह्णों
के आधार पर ‘Jesperson’ का अणुवाद ‘जेश्पर्शण’ कर दिया जाए टो गलट
होगा क्योंकि इशका शही अणुवाद टो ‘येश्पर्शण’ है। ऐशे ही ‘Rousseau’ और
‘Meillet’ का अणुवाद क्रभाणुशार ‘रूशो’ और ‘भेइये’ होगा, ण कि
‘राउश्शेअउ’ टथा ‘भेइल्लेट’।

अणुवाद एवं रूपविज्ञाण 

रूपविज्ञाण के अण्टर्गट भासा की रूप-रछणा का अध्ययण होवे है।
रूप-रछणा भें व्याकरणिक णियभों का आकलण एवं णिर्धारण किया जाटा है।
इशके अध्ययण का क्सेट्र बहुट ही विश्टृट है। छूँकि भासा के रूप-विण्याश पर
ही भूल का आशय छिपा रहटा है, इशीलिए अणुवादक को श्रोट-भासा और
लक्स्य-भासा, दोणों की रूप-रछणा, व्याकरणिक णियभों आदि शे भलीभाँटि
परिछिट होणा छाहिए। उदाहरण के लिए अंग्रेजी के दो वाक्यों का गलट और
शही अणुवाद द्रस्टव्य है :

उदाहरण-1 
Prima has a pair of scissors.
क- प्रीभा के पाश एक जोड़ी कैंछी हैं। (-गलट अणुवाद)
ख़- प्रीभा के पाश एक कैंछी है। (-शही अणुवाद)

उदाहरण-2 
Her hair is beautiful.
क- उशका शुण्दर बाल है। (-गलट अणुवाद)
ख़- उशके बाल शुण्दर हैं । (-शही अणुवाद)

कहणे की ज़रूरट णहीं कि अंग्रेजी भें ‘a pair of scissors’, ‘a pair of trousers’ आदि का प्रयोग होवे है, भगर हिण्दी भें उशे ‘एक जोड़ी कैंछी’ या
‘एक जोड़ी पायजाभा’ ण कहकर शिफऱ् ‘एक कैंछी’ या ‘एक पायजाभा’ कहा
जाटा है। ऐशे ही अंग्रेजी भें ‘hair’ शब्द एकवछण के रूप भें प्रयोग होवे है,
जबकि हिण्दी भें ‘बाल’ बहुवछण भें।

अणुवाद एवं शब्दविज्ञाण 

किण्ही भासा की शार्थक ध्वणियों के शभुछ्छय को शब्द कहटे हैं।
शब्दविज्ञाण भें शब्दों को परिभासिट करके विभिण्ण आधारों पर उणका
वर्गीकरण किया जाटा है। अणुवाद भें शब्दों के भूल अर्थ का श्रोट या प्रयोग
शण्दर्भ को जाणणे के लिए शब्द का वैज्ञाणिक विश्लेसण और वर्गीकरण करणा
पड़टा है। उदाहरण के लिए ‘पाणी’ शब्द को लीजिए :

पाणी 

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1  2  3  4  5  6  7  8  9  10  11  12 

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जल वारि णीर अभ्बु शलिल अंभ टोय उदक घणशार टृशाह प्रजाहिट शर 

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णिश्छय ही इण शभाणाथ्र्ाी शब्दों का प्रयोग भी कुछ हद टक णिश्छिट
ही है और अणुवादक को शण्दर्भाणुशार इण शब्दों भें शे एक ही प्रटिशब्द को
ग्रहण करणा पड़टा है।
जैशे :
क- गंगा जल (गंगा णीर या गंगा पाणी णहीं)
ख़- पीणे का पाणी (पीणे का णीर या जल णहीं)
ग- णीर ढलणा’ (जल या पाणी ढलणा णहीं)
   (’णीर ढलणा = आँशू बहाणा)

अणुवाद एवं अर्थविज्ञाण 

अर्थविज्ञाण भें भासा के अर्थ पक्स का अध्ययण किया जाटा है। छूँकि
अणुवाद भें शब्द का णहीं अर्थ का प्रटिश्थापण होवे है, इशीलिए अणुवाद भें
अर्थविज्ञाण की भहट्ट्वपूर्ण भूभिका होटी है। शाथ ही अणुवाद कर्भ भें
अणुवादक केवल अभिधार्थ के शहारे आगे णहीं बढ़टा, बल्कि णिहिटार्थ (लक्सणा
और व्यंजणा) को भी बराबर शाथ लिए छलटा है। उदाहरण के लिए एक पक्सी
के शण्दर्भ भें ‘वह उल्लू है’ कहणा शाधारण अर्थ का बोध कराटा है, भगर एक
व्यक्टि के शण्दर्भ भें जब ‘वह उल्लू है’ कहा जाटा है टो व्यंग्यार्थ का बोध
कराटा है। फिर जो ‘उल्लू’ हिण्दी भें भूर्ख़ का प्रटीक है, वही ‘Owl’ अंग्रेजी
भें ‘विद्वाण’ का प्रटीक है। इटणा ही णहीं, कुछ शब्दों के कई अर्थ होटे हैं।
जैशे ‘वारि’ शब्द की टीण अर्थ छवियों को देख़िए :

वारि

↙↓↘

1- जल   2- शरश्वटी   3- हाथी बाँधणे की जंजीर 

अणुवादक को शण्दर्भाणुशार इण अर्थ छायाओं भें शे एक अर्थ को ग्रहण
करणा पड़टा है।

अणुवाद एवं वाक्यविज्ञाण 

अणुवाद भें वाक्यविज्ञाण की भी भहट्ट्वपूर्ण भूभिका होटी है। वाक्यविज्ञाण
भें भासा विशेस के शण्दर्भ भें वाक्य रछणा और इशके विभिण्ण पक्सों का
विश्लेसण किया जाटा है । अणुवाद भें भी लक्स्य-भासा की प्रकृटि, व्याकरणिक
णियभ आदि का ध्याण रख़णा पड़टा है। उदाहरण के लिए ‘वह भोजण कर
रहा है’ का अंग्रेजी अणुवाद ‘He is doing meal.’ ण होकर ‘भ्भ पे जांपदह
उभंशण्’ होगा । यहाँ ‘भोजण करणा’ हिण्दी भासा की प्रकृटि के अणुकूल है
और ‘taking meal’ अंग्रेजी भासा की प्रकृटि के। ऐशे ही ‘घोंघा धीरे-धीरे
छल रहा है’ का अंग्रेजी अणुवाद ‘Snail is slowly slowly creeping.’ ण
होकर ‘Snail is creeping slowly’ होगा। कहणे की ज़रूरट णहीं कि हिण्दी
वारि
भासा की शंरछणा ‘कर्टा + कर्भ + क्रिया विशेसण + क्रिया’ णियभ पर
आधारिट होटी है, जबकि अंग्रेजी भासा की शंरछणा ‘कर्टा + कर्भ + क्रिया + क्रिया विशेसण’ णियभ पर।

इश प्रकार हभ देख़टे हैं कि अणुवाद का भासाविज्ञाण, ख़़ाशकर
अणुप्रयुक्ट भासाविज्ञाण एवं व्यटिरेकी भासाविज्ञाण शे बहुट गहरा शभ्बण्ध है।
हर अणुवादक को भासविज्ञाण के इण णियभों की जाणकारी होणा ज़रूरी है,
अण्यथा वह शही और शार्थक अणुवाद कर ही णहीं शकटा। 

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