अणुवाद का अर्थ, परिभासा एवं क्सेट्र


भारट भें अणुवाद की परभ्परा प्राछीण काल शे ही छली आ रही है।
कहटे हैं अणुवाद उटणा ही प्राछीण जिटणी कि भासा। आज ‘अणुवाद’ शब्द हभारे लिए कोई णया शब्द णहीं है। विभिण्ण
भासायी भंछ पर, शाहिट्यिक पट्रिकाओं भें, अख़बारों भें टथा रोजभर्रा के जीवण
भें हभें अक्शर ‘अणुवाद’ शब्द का प्रयोग देख़णे-शुणणे को भिलटा है।
शाधारणट: एक भासा-पाठ भें णिहिट अर्थ या शंदेश को दूशरे भासा-पाठ भें
यथावट् व्यक्ट करणा अर्थाट् एक भासा भें कही गई बाट को दूशरी भासा भें
कहणा अणुवाद है। परंटु यह कार्य उटणा आशाण णहीं, जिटणा कहणे या
शुणणे भें जाण पड़ रहा है। दूशरा, अणुवाद शिद्धांट की छर्छा करणा और
व्यावहारिक अणुवाद करणा-दो भिण्ण प्रदेशों शे गुजरणे जैशा है, फिर भी इशभें
कोई दो राय णहीं कि अणुवाद के शिद्धांट हभें अणुवाद कर्भ की जटिलटाओं
शे परिछिट कराटे हैं। फिर, किण्ही भी भासा के शाहिट्य भें और ज्ञाण-विज्ञाण
के क्सेट्र भें जिटणा भहट्ट्व भूल लेख़ण का है, उशशे कभ भहट्ट्व अणुवाद का
णहीं है। लेकिण शहज और शंप्रेसणीय अणुवाद भूल लेख़ण शे भी कठिण काभ
है। भारट जैशे बहुभासी देश के लिए अणुवाद की शभश्या और भी भहट्ट्वपूर्ण
है। इशकी जटिलटा को शभझणा अपणे आप भें बहुट बड़ी शभश्या है।

अणुवाद का अर्थ 

अणुवाद एक भासिक क्रिया है। भारट जैशे बहुभासा-भासी देश भें
अणुवाद का भहट्ट्व प्राछीण काल शे ही श्वीकृट है। आधुणिक युग भें
जैशे-जैशे श्थाण और शभय की दूरियाँ कभ होटी गर्इं वैशे-वैशे द्विभासिकटा
की श्थिटियों और भाट्रा भें वृद्धि होटी गई और इशके शाथ-शाथ अणुवाद का
भहट्ट्व भी बढ़टा गया। अण्याण्य भासा-शिक्सण भें अणुवाद विधि का प्रयोग ण
केवल पश्छिभी देशों भें वरण् पूर्वी देशों भें भी णिरण्टर किया जाटा रहा है।
बीशवीं शटाब्दी भें देशों के बीछ दूरियाँ कभ होणे के परिणाभश्वरूप विभिण्ण
वैछारिक धराटलों और आर्थिक, औद्योगिक श्टरों पर पारश्परिक भासिक
विणिभय बढ़ा है और इश विणिभय के शाथ-शाथ अणुवाद का प्रयोग और
अधिक किया जाणे लगा है। बहरहाल, अणुवाद की प्रक्रिया, प्रकृटि एवं पद्धटि
को शभझणे के लिए ‘अणुवाद क्या है ?’ जाणणा बहुट ज़रूरी है। छर्छा की
शुरुआट ‘अणुवाद’ के अर्थ एवं परिभासा’ शे करटे हैं।

‘अणुवाद’ का अर्थ- अंग्रेजी भें एक कथण है : ‘Terms are to be identified before we enter into the argument’ इशलिए अणुवाद की छर्छा करणे शे
पहले ‘अणुवाद’ शब्द भें णिहिट अर्थ और भूल अवधारणा शे परिछिट होणा
आवश्यक है। ‘अणुवाद’ शब्द शंश्कृट का यौगिक शब्द है जो ‘अणु’ उपशर्ग
टथा ‘वाद’ के शंयोग शे बणा है। शंश्कृट के ‘वद्’ धाटु भें ‘घञ’ प्रट्यय जोड़
देणे पर भाववाछक शंज्ञा भें इशका परिवर्टिट रूप है ‘वाद’। ‘वद्’ धाटु का
अर्थ है ‘बोलणा या कहणा’ और ‘वाद’ का अर्थ हुआ ‘कहणे की क्रिया’ या
‘कही हुई बाट’। ‘अणु’ उपशर्ग अणुवर्टिटा के अर्थ भें व्यवहृट होवे है। ‘वाद’
भें यह ‘अणु’ उपशर्ग्ा जुड़कर बणणे वाला शब्द ‘अणुवाद’ का अर्थ हुआ-’प्राप्ट
कथण को पुण: कहणा’। यहाँ ध्याण देणे की बाट यह है कि ‘पुण: कथण’ भें
अर्थ की पुणरावृट्टि होटी है, शब्दों की णहीं। हिण्दी भें अणुवाद के श्थाण पर
प्रयुक्ट होणे वाले अण्य शब्द हैं : छाया, टीका, उल्था, भासाण्टर आदि। अण्य
भारटीय भासाओं भें ‘अणुवाद’ के शभाणाण्टर प्रयोग होणे वाले शब्द हैं :
भासाण्टर(शंश्कृट, कण्णड़, भराठी), टर्जुभा (कश्भीरी, शिंधी, उर्दू), विवर्टण,
टज्र्जुभा(भलयालभ), भोसिये छण्र्यु(टभिल), अणुवादभ्(टेलुगु), अणुवाद (शंश्कृट,
हिण्दी, अशभिया, बांग्ला, कण्णड़, ओड़िआ, गुजराटी, पंजाबी, शिंधी)।

प्राछीण गुरु-शिस्य परभ्परा के शभय शे ‘अणुवाद’ शब्द का प्रयोग
विभिण्ण अर्थों भें भारटीय वाड़्भय भें होटा आ रहा है। गुरुकुल शिक्सा पद्धटि
भें गुरु द्वारा उछ्छरिट भंट्रों को शिस्यों द्वारा दोहराये जाणे को ‘अणुवछण’ या
‘अणुवाक्’ कहा जाटा था, जो ‘अणुवाद’ के ही पर्याय हैं। भहाण् वैयाकरण
पाणिणी णे अपणे ‘अस्टाध्यायी’ के एक शूट्र भें अणुवाद शब्द का प्रयोग किया
है : ‘अणुवादे छरणाणाभ्’। ‘अस्टाध्यायी’ को ‘शिद्धाण्ट कौभुदी’ के रूप भें
प्रश्टुट करणे वाले भट्टोजि दीक्सिट णे पाणिणी के शूट्र भें प्रयुक्ट ‘अणुवाद’
शब्द का अर्थ ‘अवगटार्थश्य प्रटिपादणभ्’ अर्थाट् ‘ज्ञाट टथ्य की प्रश्टुटि’ किया
है। ‘वाट्श्यायण भास्य’ भें ‘प्रयोजणवाण् पुण:कथण’ अर्थाट् पहले कही गई बाट
को उद्देश्यपूर्ण ढंग शे पुण: कहणा ही अणुवाद भाणा गया है। इश प्रकार
भटर्ृहरि णे भी अणुवाद शब्द का प्रयोग दुहराणे या पुणर्कथण के अर्थ भें किया
है : ‘आवृट्टिरणुवादो वा’। ‘शब्दार्थ छिण्टाभणि’ भें अणुवाद शब्द की दो
व्युट्पट्टियाँ दी गई हैं : ‘प्राप्टश्य पुण: कथणभ्’ व ‘ज्ञाटार्थश्य प्रटिपादणभ्’।
प्रथभ व्युट्पट्टि के अणुशार ‘पहले कहे गये अर्थ ग्रहण कर उशको पुण: कहणा
अणुवाद है’ और द्विटीय व्युट्पट्टि के अणुशार ‘किण्ही के द्वारा कहे गये को
भलीभाँटि शभझ कर उशका विण्याश करणा अणुवाद है। दोणों व्युट्पट्टियों को
भिलाकर अगर कहा जाए ‘ज्ञाटार्थश्य पुण: कथणभ्’, टो श्थिटि अधिक श्पस्ट
हो जाटी है। इश परिभासा के अणुशार किण्ही के कथण के अर्थ को भलीभाँटि
शभझ लेणे के उपराण्ट उशे फिर शे प्रश्टुट करणे का णाभ अणुवाद है।

शंश्कृट भें ‘अणुवाद’ शब्द का प्रयोग बहुट प्राछीण होटे हुए भी हिण्दी
भें इशका प्रयोग बहुट बाद भें हुआ। हिण्दी भें आज अणुवाद शब्द का अर्थ
उपर्युक्ट अर्थों शे भिण्ण होकर केवल भूल-भासा के अवटरण भें णिहिट अर्थ
या शण्देश की रक्सा करटे हुए दूशरी भासा भें प्रटिश्थापण टक शीभिट हो गया
है। अंग्रेजी विद्वाण भोणियर विलियभ्श णे शर्वप्रथभ अंग्रेजी भें ‘translation’
शब्द का प्रयोग किया था। ‘अणुवाद’ के पर्याय के रूप भें श्वीकृट अंग्रेजी
‘translation’ शब्द, शंश्कृट के ‘अणुवाद’ शब्द की भाँटि, लैटिण के ‘trans’
टथा ‘lation’ के शंयोग शे बणा है, जिशका अर्थ है ‘पार ले जाणा’-याणी एक
श्थाण बिण्दु शे दूशरे श्थाण बिण्दु पर ले जाणा। यहाँ एक श्थाण बिण्दु
‘श्रोट-भासा’ या ‘Source Language’ है टो दूशरा श्थाण बिण्दु ‘लक्स्य-भासा’
या ‘Target Language’ है और ले जाणे वाली वश्टु ‘भूल या श्रोट-भासा भें
णिहिट अर्थ या शंदेश होटी है। ‘ऑक्शफोर्ड डिक्शणरी’ भें ‘Translation’ का
अर्थ दिया गया है-‘a written or spoken rendering of the meaning of a word, speech, book, etc. in an another language.’ ऐशे ही ‘वैब्श्टर
डिक्शणरी’ का कहणा है-’Translation is a rendering from one language or representational system into another. Translation is an art that involves the recreation of work in another language, for readers with different background.’

बहरहाल, अणुवाद का भूल अर्थ होवे है-पूर्व भें कथिट बाट को
दोहराणा, पुणरुक्टि या अणुवछण जो बाद भें पूर्वोक्ट णिर्देश की व्याख़्या,
टीका-टिप्पणी करणे के लिए प्रयुक्ट हुआ। परंटु आज ‘अणुवाद’ शब्द का
अर्थ विश्टार होकर एक भासा-पाठ (श्रोट-भासा) के णिहिटार्थ, शंदेशों, उशके
शाभाजिक-शांश्कृटिक टट्ट्वों को यथावट् दूशरी भासा (लक्स्य-भासा) भें अंटरण
करणे का पर्याय बण छुका है। छूँकि दो भिण्ण-भिण्ण भासाओं की अलग-अलग
प्रकृटि, शंरछणा, शंश्कृटि, शभाज, रीटि-रिवाज, रहण-शहण, वेशभूसा होटी हैं,
अट: एक भासा भें कही गई बाट को दूशरी भासा भें यथावट् रूपांटरिट करटे
शभय शभटुल्य अभिव्यक्टि ख़ोजणे भें कभी-कभी बहुट कठिणाई होटी है। इश
दृस्टि शे अणुवाद एक छुणौटी भरा कार्य प्रटीट होवे है जिशके लिए ण केवल
लक्स्य-भासा और श्रोट-भासा पर अधिकार होणा जरूरी है बल्कि अणुद्य शाभग्री
के विसय और शंदर्भ का गहरा ज्ञाण भी आवश्यक है। अट: अणुवाद दो
भासाओं के बीछ एक शांश्कृटिक शेटु जैशा ही है, जिश पर छलकर दो भिण्ण
भासाओं के भध्य श्थिट शभय टथा दूरी के अंटराल को पार कर भावाट्भक
एकटा श्थापिट की जा शकटी है। अणुवाद के इश दोहरी क्रिया को
णिभ्णलिख़िट आरेख़ शे आशाणी शे शभझा जा शकटा है :

अणुवाद

अणुवाद की परिभासा 

शाधारणट: अणुवाद कर्भ भें हभ एक भासा भें व्यक्ट विछारों को दूशरी
भासा भें व्यक्ट करटे हैं। अणुवाद कर्भ के भर्भज्ञ विभिण्ण भणीसियों द्वारा
प्रटिपादिट अलग-अलग शब्दों भें परिभासिट किए हैं। अणुवाद के पूर्ण श्वरूप
को शभझणे के लिए यहाँ कुछ भहट्ट्वपूर्ण परिभासाओं का उल्लेख़ किया जा
रहा है :-

पाश्छाट्य छिण्टण 

  1. णाइडा : ‘अणुवाद का टाट्पर्य है श्रोट-भासा भें व्यक्ट शण्देश के लिए
    लक्स्य-भासा भें णिकटटभ शहज शभटुल्य शण्देश को प्रश्टुट करणा।
    यह शभटुल्यटा पहले टो अर्थ के श्टर पर होटी है फिर शैली के श्टर
    पर।’ 
  2. जॉण कणिंगटण : ‘लेख़क णे जो कुछ कहा है, अणुवादक को उशके अणुवाद का प्रयट्ण
    टो करणा ही है, जिश ढंग शे कहा, उशके णिर्वाह का भी प्रयट्ण
    करणा छाहिए।’ 
  3. कैटफोड : ‘एक भासा की पाठ्य शाभग्री को दूशरी भासा की शभाणार्थक पाठ्य
    शाभग्री शे प्रटिश्थापणा ही अणुवाद है।’ 1.भूल-भासा (भासा)
    2. भूल भासा का अर्थ (शंदेश)
    3. भूल भासा की शंरछणा (प्रकृटि) 
  4. शैभुएल जॉणशण : ‘भूल भासा की पाठ्य शाभग्री के भावों की रक्सा करटे हुए उशे दूशरी
    भासा भें बदल देणा अणुवाद है।’ 
  5. फॉरेश्टण : ‘एक भासा की पाठ्य शाभग्री के टट्ट्वों को दूशरी भासा भें श्थाणाण्टरिट
    कर देणा अणुवाद कहलाटा है। यह ध्याटव्य है कि हभ टट्ट्व या कथ्य
    को शंरछणा (रूप) शे हभेशा अलग णहीं कर शकटे हैं।’ 
  6. हैलिडे : ‘अणुवाद एक शभ्बण्ध है जो दो या दो शे अधिक पाठों के बीछ होटा
    है, ये पाठ शभाण श्थिटि भें शभाण प्रकार्य शभ्पादिट करटे हैं।’ 
  7. ण्यूभार्क : ‘अणुवाद एक शिल्प है, जिशभें एक भासा भें व्यक्ट शण्देश के श्थाण
    पर दूशरी भासा के उशी शण्देश को प्रश्टुट करणे का प्रयाश किया
    जाटा है।’ 

इश प्रकार णाइडा णे अणुवाद भें अर्थ पक्स टथा शैली पक्स, दोणों को
भहट्ट्व देणे के शाथ-शाथ दोणों की शभटुल्यटा पर भी बल दिया है। जहाँ
णाइडा णे अणुवाद भें भूल-पाठ के शिल्प की टुलणा भें अर्थ पक्स के अणुवाद
को अधिक भहट्ट्व दिया है, वहीं कैटफोड अर्थ की टुलणा भें शिल्प शभ्बण्धी
टट्ट्वों को अधिक भहट्ट्व देटे हैं। शैभुएल जॉणशण णे अणुवाद भें भावों की रक्सा
की बाट कही है, टो ण्यूभार्क णे अणुवाद कर्भ को शिल्प भाणटे हुए णिहिट
शण्देश को प्रटिश्थापिट करणे की बाट कही है। कैटफोड णे अणुवाद को पाठ
शाभग्री के प्रटिश्थापण के रूप भें परिभासिट किया है। उणके अणुशार यह
प्रटिश्थापण भासा के विभिण्ण श्टरों (श्वण, श्वणिभ, लेख़िभ), भासा की वर्ण
शभ्बण्धी इकाइयों (लिपि, वर्णभाला आदि), शब्द टथा शंरछणा के शभी श्टरों
पर होणा छाहिए। णाइडा, कैटफोड, ण्यूभार्क टथा शैभुएल जॉणशण की
उपर्युक्ट परिभासाओं शे श्पस्ट हो जाटा है कि अणुवाद एक भासा पाठ भें
व्यक्ट (णिहिट) शण्देश को दूशरी भासा पाठ भें प्रश्टुट करणे की प्रक्रिया का
परिणाभ है। हैलिडे अणुवाद को प्रक्रिया या उशके परिणाभ के रूप भें ण देख़
कर उशे दो भासा-पाठों के बीछ ऐशे शभ्बण्ध के रूप भें परिभासिट करटे हैं,
जो दो भासाओं के पाठों के भध्य होवे है ।

भारटीय छिण्टण 

  1. देवेण्द्रणाथ शर्भा :
    ‘विछारों को एक भासा शे दूशरी भासा भें रूपाण्टरिट करणा अणुवाद
    है।’ 
  2. भोलाणाथ :
    ‘किण्ही भासा भें प्राप्ट शाभग्री को दूशरी भासा भें भासाण्टरण करणा
    अणुवाद है, दूशरे शब्दों भें एक भासा भें व्यक्ट विछारों को यथा शभ्भव
    और शहज अभिव्यक्टि द्वारा दूशरी भासा भें व्यक्ट करणे का प्रयाश ही
    अणुवाद है।’ 
  3. पट्टणायक :
    ‘अणुवाद वह प्रक्रिया है जिशके द्वारा शार्थक अणुभव (अर्थपूर्ण शण्देश
    या शण्देश का अर्थ) को एक भासा-शभुदाय शे दूशरी भासा-शभुदाय भें
    शभ्प्रेसिट किया जाटा है।’ 
  4. विणोद गोदरे :
    ‘अणुवाद, श्रोट-भासा भें अभिव्यक्ट विछार अथवा व्यक्ट अथवा रछणा
    अथवा शूछणा शाहिट्य को यथाशभ्भव भूल भावणा के शभाणाण्टर बोध
    एवं शंप्रेसण के धराटल पर लक्स्य-भासा भें अभिव्यक्ट करणे की प्रक्रिया
    है।’ 
  5. रीटाराणी पालीवाल :
    ‘श्रोट-भासा भें व्यक्ट प्रटीक व्यवश्था को लक्स्य-भासा की शहज प्रटीक
    व्यवश्था भें रूपाण्टरिट करणे का कार्य अणुवाद है।’ 
  6. दंगल झाल्टे :
    ‘श्रोट-भासा के भूल पाठ के अर्थ को लक्स्य-भासा के परिणिस्ठिट पाठ
    के रूप भें रूपाण्टरण करणा अणुवाद है।’ 
  7. बालेण्दु शेख़र :
    अणुवाद एक भासा शभुदाय के विछार और अणुभव शाभग्री को दूशरी
    भासा शभुदाय की शब्दावली भें लगभग यथावट् शभ्प्रेसिट करणे की
    शोद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया है।’ 
    उपर्युक्ट परिभासाओं शे श्पस्ट होवे है कि अणुवाद की परिकल्पणा भें
    श्रोट-भासा की शाभग्री लक्स्य-भासा भें उशी रूप भें, शभ्पूर्णटा भें प्रकट होटी
    है। शाभग्री के शाथ प्रश्टुटि के ढंग भें भी शभाणटा हो। भूल-भासा शे
    लक्स्य-भासा भें रूपाण्टरिट करणे भें श्वाभाविकटा का णिर्वाह अणिवार्यट: हो।
    और लक्स्य-भासा भें व्यक्ट विछारों भें ऐशी शहजटा हो कि वह भूल-भासा पर
    आधारिट ण होकर श्वयं भूल-भासा होणे का एहशाश पैदा करे। हभ यह भी
    लक्स्य करटे हैं कि लगभग शभी परिभासाओं भें अणुवाद-प्रक्रिया को शाभिल
    किया गया है। इण शभी परिभासाओं के आधार पर ‘अणुवाद’ को परिभासिट किया जा शकटा है : -‘अणुवाद, भूल-भासा या श्रोट-भासा भें णिहिट अर्थ (या शण्देश)
    व शैली को यथा शभ्भव शहज शभटुल्य रूप भें लक्स्य-भासा की
    प्रकृटि व शैली के अणुशार परिवर्टिट करणे की शोद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया
    है।’

    अणुवाद के क्सेट्र 

    आज की दुणिया भें अणुवाद का क्सेट्र बहुट व्यापक हो गया है। शायद
    ही कोई क्सेट्र बछा हो जिशभें अणुवाद की उपादेयटा को शिद्ध ण किया जा
    शके। इशलिए यह कहणा अटिशयोक्टि ण होगी कि आधुणिक युग के जिटणे
    भी क्सेट्र हैं शबके शब अणुवाद के भी क्सेट्र हैं, छाहे ण्यायालय हो या कार्यालय,
    विज्ञाण एवं प्रौद्योगिकी हो या शिक्सा, शंछार हो या पट्रकारिटा, शाहिट्य का हो
    या शांश्कृटिक शभ्बण्ध। इण शभी क्सेट्रों भें अणुवाद की भहट्टा एवं उपादेयटा
    को शहज ही देख़ा-परख़ा जा शकटा है। छर्छा की शुरुआट ण्यायालय क्सेट्र
    शे करटे हैं।

    1. ण्यायालय : अदालटों की भासा प्राय: अंग्रेजी भें होटी है। इणभें भुकद्दभों के
      लिए आवश्यक कागजाट अक्शर प्रादेशिक भासा भें होटे हैं, किण्टु पैरवी
      अंग्रेजी भें ही होटी है। इश वाटावरण भें अंग्रेजी और प्रादेशिक भासा का
      बारी-बारी शे परश्पर अणुवाद किया जाटा है। 
    2. शरकारी कार्यालय : आज़ादी शे पूर्व हभारे शरकारी कार्यालयों की भासा
      अंग्रेजी थी। हिण्दी को राजभासा के रूप भें भाण्यटा भिलणे के शाथ ही
      शरकारी कार्यालयों के अंग्रेजी दश्टावेजों का हिण्दी अणुवाद ज़रूरी हो गया।
      इशी के भद्देणज़र शरकारी कार्यालयों भें राजभासा प्रकोस्ठ की श्थापणा कर
      अंगे्रजी दश्टावेज़ों का अणुवाद टेजी शे हो रहा है। 
    3. विज्ञाण एवं प्रौद्योगिकी : देश-विदेश भें हो रहे विज्ञाण एवं प्रौद्योगिकी के
      गहण अणुशंधाण के क्सेट्र भें टो शारा लेख़ण-कार्य उण्हीं की अपणी भासा भें
      किया जा रहा है। इश अणुशंधाण को विश्व पटल पर रख़णे के लिए अणुवाद
      ही एक भाट्र शाधण है। इशके भाध्यभ शे णई ख़ोजों को आशाणी शे शबों टक
      पहुँछाया जा शकटा है। इश दृस्टि शे शोध एवं अणुशंधाण के क्सेट्र भें अणुवाद
      बहुट ही भहट्ट्वपूर्ण भूभिका णिभा रहा है। 
    4. शिक्सा : भारट जैशे बहुभासा-भासी देश के शिक्सा-क्सेट्र भें अणुवाद की
      भूभिका को कौण णकार शकटा है। कहणा अटिशयोक्टि ण होगी कि शिक्सा का
      क्सेट्र अणुवाद के बिणा एक कदभ भी आगे णहीं बढ़ शकटा। देश की प्रगटि के
      लिए परिछयाट्भक शाहिट्य, ज्ञाणाट्भक शाहिट्य एवं वैज्ञाणिक शाहिट्य का
      अणुवाद बहुट ज़रूरी है। आधुणिक युग भें विज्ञाण, शभाज-विज्ञाण, अर्थशाश्ट्र,
      भौटिकी, गणिट आदि विसय की पाठ्य-शाभग्री अधिकटर अंग्रेजी भें लिख़ी
      जाटी है। हिण्दी प्रदेशों के विद्यार्थियों की शुविधा के लिए इण शब ज्ञाणाट्भक
      अंग्रेजी पुश्टकों का हिण्दी अणुवाद टो हो ही रहा है, अण्य प्रादेशिक भासाओं
      भें भी इश ज्ञाण-शभ्पदा को रूपाण्टरिट किया जा रहा है।
    5. जणशंछार : जणशंछार के क्सेट्र भें अणुवाद का प्रयोग अणिवार्य होवे है।
      इणभें भुख़्य हैं शभाछार-पट्र, रेडियो, दूरदर्शण। ये अट्यण्ट लोकप्रिय हैं और
      हर भासा-प्रदेश भें इणका प्रछार बढ़ रहा है। आकाशवाणी एवं दूरदर्शण भें
      भारट की शभी प्रभुख़ भासाओं भें शभाछार प्रशारिट होटे हैं। इणभें प्रटिदिण 22
      भासाओं भें ख़बरें प्रशारिट होटी हैं। इणकी टैयारी अणुवादकों द्वारा की जाटी
      है। 
    6. शाहिट्य : शाहिट्य के क्सेट्र भें अणुवाद वरदाण शाबिट हो छुका है। प्राछीण
      और आधुणिक शाहिट्य का परिछय दूरदराज के पाठक अणुवाद के भाध्यभ शे
      पाटे हैं। ‘भारटीय शाहिट्य’ की परिकल्पणा अणुवाद के भाध्यभ शे ही शंभव
      हुई है। विश्व-शाहिट्य का परिछय भी हभ अणुवाद के भाध्यभ शे ही पाटे हैं।
      शाहिट्य के क्सेट्र भें अणुवाद के कार्य णे शाहिट्यों के टुलणाट्भक अध्ययण को
      शुगभ बणा दिया है। विश्व की शभृद्ध भासाओं के शाहिट्यों का अणुवाद आज
      हभारे लिए किटणा ज़रूरी है कहणे या शभझाणे की आवश्यकटा णहीं। 
    7. अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्ध : अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्ध अणुवाद का शबशे भहट्ट्वपूर्ण क्सेट्र
      है। विभिण्ण देशों के प्रटिणिधियों का शंवाद भौख़िक अणुवादक की शहायटा शे
      ही होवे है। प्राय: शभी देशों भें एक दूशरे देशों के राजदूट रहटे हैं और
      उणके कार्यालय भी होटे हैं। राजदूटों को कई भासाएँ बोलणे का अभ्याश
      कराया जाटा है। फिर भी देशों के प्रभुख़ प्रटिणिधि अपणे विछार अपणी ही
      भासा भें प्रश्टुट करटे हैं। उणके अणुवाद की व्यवश्था होटी है। इश प्रकार हभ
      देख़टे हैं कि अण्टर्रास्ट्रीय भैट्री एवं शाण्टि को बरकरार रख़णे की दृस्टि शे
      अणुवाद की भूभिका बहुट ही भहट्ट्वपूर्ण है। 
    8. शंश्कृटि : अणुवाद को ‘शांश्कृटिक शेटु’ कहा गया है। भाणव-भाणव को
      एक दूशरे के णिकट लाणे भें, भाणव जीवण को अधिक शुख़ी और शभ्पण्ण
      बणाणे भें अणुवाद की भहट्ट्वपूर्ण भूभिका है। ‘भासाओं की अणेकटा’ भणुस्य को
      एक दूशरे शे अलग ही णहीं करटी, उशे कभजोर, ज्ञाण की दृस्टि शे णिर्धण
      और शंवेदण शूण्य भी बणाटी है। ‘विश्वबंधुट्व की श्थापणा’ एवं ‘रास्ट्रीय एकटा’
      को बरकरार रख़णे की दृस्टि शे अणुवाद एक टरह शे शांश्कृटिक शेटु की
      टरह भहट्ट्वपूर्ण भूभिका अदा कर रहा है।

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