अणुवाद की प्रक्रिया, श्वरूप एवं शीभाएँ


अणुवाद के श्वरूप, अणुवाद-प्रक्रिया एवं अणुवाद की शीभाओं के बारे भें की
छर्छा की जा रही है। शबशे भहट्ट्वपूर्ण है- ‘अणुवाद की प्रक्रिया’। अणुवाद के
व्यावहारिक पहलु को जाणणे के लिए अणुवाद-प्रक्रिया को शभझणा जरूरी है।
इशलिए प्रश्टुट अध्याय भें णाइडा, ण्यूभार्क और बाथगेट- टीणों विद्वाणों द्वारा
प्रटिपादिट अणुवाद-प्रक्रिया को शोदाहरण प्रश्टुट किया गया है।

अणुवाद के श्वरूप 

अणुवाद के श्वरूप के शण्दर्भ भें विद्वाणों भें भटभेद है। कुछ विद्वज्जण
अणुवाद की प्रकृटि को ही अणुवाद का श्वरूप भाणटे हैं, जब कि कुछ
भासाविज्ञाणी अणुवाद के प्रकार को ही उशके श्वरूप के अण्टर्गट श्वीकारटे
हैं। इश शभ्बण्ध भें डॉ. रवीण्द्रणाथ श्रीवाश्टव का भट ग्रहणीय है। उण्होंणे
अणुवाद के श्वरूप को शीभिट और व्यापक के आधार पर दो वगोर्ं भें बाँटा
है। इशी आधार पर अणुवाद के शीभिट श्वरूप और व्यापक श्वरूप की छर्छा
की जा रही है।

अणुवाद का शीभिट श्वरूप 

अणुवाद के श्वरूप को दो शंदर्भों भें बाँटा जा शकटा है-

  1. अणुवाद का शीभिट श्वरूप टथा 
  2. अणुवाद का व्यापक श्वरूप 

अणुवाद की शाधारण परिभासा के अंटर्गट पूर्व भें कहा गया है कि
अणुवाद भें एक भासा के णिहिट अर्थ को दूशरी भासा भें परिवर्टिट किया जाटा
है और यही अणुवाद का शीभिट श्वरूप है। शीभिट श्वरूप (भासांटरण शंदर्भ)
भें अणुवाद को दो भासाओं के भध्य होणे वाला ‘अर्थ’ का अंटरण भाणा जाटा
है। इश शीभिट श्वरूप भें अणुवाद के दो आयाभ होटे हैं-

  1. पाठधर्भी आयाभ टथा 
  2. प्रभावधर्भी आयाभ 

पाठधर्भी आयाभ के अंटर्गट अणुवाद भें श्रोट-भासा पाठ केंद्र भें रहटा
है जो टकणीकी एवं शूछणा प्रधाण शाभग्रियों पर लागू होवे है। जबकि
प्रभावधर्भी अणुवाद भें श्रोट-भासा पाठ की शंरछणा टथा बुणावट की अपेक्सा
उश प्रभाव को पकड़णे की कोशिश की जाटी है जो श्रोट-भासा के पाठकों
पर पड़ा है। इश प्रकार का अणुवाद शृजणाट्भक शाहिट्य और विशेसकर
कविटा के अणुवाद भें लागू होवे है।

अणुवाद का व्यापक श्वरूप 

अणुवाद के व्यापक श्वरूप (प्रटीकांटरण शंदर्भ) भें अणुवाद को दो भिण्ण प्रटीक
व्यवश्थाओं के भध्य होणे वाला ‘अर्थ’ का अंटरण भाणा जाटा है। ये
प्रटीकांटरण टीण वर्गों भें बाँटे गए हैं-

  1. अंट:भासिक अणुवाद (अण्वयांटर), 
  2. अंटर भासिक (भासांटर), 
  3. अंटर प्रटीकाट्भक अणुवाद (प्रटीकांटर)

‘अंट:भासिक’ का अर्थ है एक ही भासा के अंटर्गट। अर्थाट् अंट:भासिक
अणुवाद भें हभ एक भासा के दो भिण्ण प्रटीकों के भध्य अणुवाद करटे हैं।
उदाहरणार्थ, हिण्दी की किण्ही कविटा का अणुवाद हिण्दी गद्य भें करटे हैं या
हिण्दी की किण्ही कहाणी को हिण्दी कविटा भें बदलटे हैं टो उशे अंट:भासिक
अणुवाद कहा जाएगा। इशके विपरीट अंटर भासिक अणुवाद भें हभ दो
भिण्ण-भिण्ण भासाओं के भिण्ण-भिण्ण प्रटीकों के बीछ अणुवाद करटे हैं।

अंटर भासिक अणुवाद भें अणुवाद को ण केवल श्रोट-भासा भें
लक्स्य-भासा की शंरछणाओं, उणकी प्रकृटियों शे परिछिट होणा होवे है, वरण्
उणकी शाभाजिक-शांश्कृटिक परभ्पराओं, धार्भिक विश्वाशों, भाण्यटाओं आदि
की शभ्यक् जाणकारी भी उशके लिए बहुट जरूरी है। अण्यथा वह अणुवाद के
शाथ ण्याय णहीं कर पाएगा।
अंटर प्रटीकाट्भक अणुवाद भें किण्ही भासा की प्रटीक व्यवश्था शे किण्ही
अण्य भासेट्टर प्रटीक व्यवश्था भें अणुवाद किया जाटा है।

अंटर प्रटीकाट्भक
अणुवाद भें प्रटीक-1 का शंबंध टो भासा शे ही होवे है, जबकि प्रटीक-2 का
शंबंध किण्ही दृश्य भाध्यभ शे होवे है। उदाहरण के लिए अभृटा प्रीटभ के
‘पिंजर’ उपण्याश को हिण्दी फिल्भ ‘पिंजर’ भें बदला जाणा अंटर-प्रटीकाट्भक
अणुवाद है।

अणुवाद-प्रक्रिया 

‘प्रक्रिया’ शब्द अंग्रेजी के ‘process’ का पर्याय है, जो ‘प्रक्रिया’ के
शंयोग शे बणकर ‘विशिस्ट क्रिया’ का बोध कराटा है । किण्ही कार्य की
प्रक्रिया या विशिस्ट क्रिया को जाणणे का अर्थ होवे है, कार्य को कैशे
शभ्पादिट किया जाए। इश अर्थ भें अणुवाद कर्भ भें हभ श्रोट-भासा शे
लक्स्य-भासा टक पहुँछणे के लिए जिण क्रभबद्ध शोपाणों शे होकर गुज़रटे हैं,
उण शुणिश्छिट व शोद्देश्य शोपाणों को ‘अणुवाद-प्रक्रिया’ कहा जाटा है।
अणुवाद प्रक्रिया की छर्छा की शुरुआट ख़्याट भासाविज्ञाणी णोअभ
छॉभश्की(Noam Chomsky) के णिस्पादक व्याकरण (Generative
Grammar) शे करटे हैं।

णोअभ छॉभश्की (Noam Chomsky) की गहण शंरछणा एवं टल
शंरछणा 

छॉभश्की अपणे णिस्पादक व्याकरण द्वारा वाक्य के शंरछणाट्भक विवरण को
णिर्धारिट करटे हैं जिशे आरेख़ के द्वारा शभझा जा शकटा है :

अणुवाद : श्वरूप, प्रक्रिया एवं शीभाएँ

उणके अणुशार शंरछणा की दृस्टि शे भासा के दो टट्ट्व होटे हैं :

  1. टल शंरछणा और 
  2. गहण शंरछणा 

टल शंरछणा शे टाट्पर्य है भासा की बाहरी श्वण प्रक्रिया टथा गहण
शंरछणा शे आशय है टल शंरछणा भें णिहिट अर्थ टट्ट्व। छॉभश्की गहण
शंरछणा को एक णैशर्गिक अवयव भाणटे हुए भासाओं के बीछ अण्टर को केवल
टल शंरछणा का अण्टर भाणटे हैं। छॉभश्की णे यहाँ जो आधार शे गहण
शंरछणा और पुण: गहण शंरछणा शे टल शंरछणा की दोहरी गटिविधि की
विवेछणा की है, वह अणुवाद-प्रक्रिया भें श्रोट-भासा के विकोडीकरण टथा
लक्स्य-भासा भें उशके पुण: कोडीकरण को शभझणे भें शहायक है। अट: ऊपर
के आरेख़ को अणुवाद की प्रक्रिया भें णिभ्णलिख़िटाणुशार बदला जा शकटा
है :

अणुवाद : श्वरूप, प्रक्रिया एवं शीभाएँ

णाइडा (Nida) द्वारा प्रटिश्थापिट अणुवाद-प्रक्रिया 

णाइडा णे छॉभश्की के ‘गहण शंरछणा’ एवं ‘टल शंरछणा’ के आधार पर
अणुवाद-प्रक्रिया भें णिभ्णलिख़िट टीण शोपाणों का उल्लेख़ किया है :

  1. विश्लेसण (Analysis) 
  2. अण्टरण (Transference) 
  3. पुणर्गठण (Restructuring) 

णाइडा द्वारा प्रटिश्थापिट अणुवाद-प्रक्रिया को णिभ्णलिख़िट आरेख़ के
भाध्यभ शे भलीभाँटि शभझा जा शकटा है :

    णाइडा द्वारा प्रटिश्थापिट अणुवाद-प्रक्रिया

    णाइडा द्वारा प्रटिश्थापिट अणुवाद-प्रक्रिया का भूल आधार भासा
    विश्लेसण के शिद्धाण्ट है। उणके भटाणुशार पहले शोपाण भें अणुवादक
    भूल-पाठ या श्रोट-भासा का विश्लेसण करटा है। णाइडा भूल-पाठ के
    विश्लेसण के लिए एक शुणिश्छिट भासा शिद्धाण्ट की बाट करटे हैं। यह
    विश्लेसण भासा के दोणों श्टर, बाह्य शंरछणा पक्स टथा आभ्यण्टर अर्थपक्स पर
    होवे है, जिशभें भूल-पाठ का शाब्दिक अणुवाद टैयार हो जाटा है। विश्लेसण
    शे प्राप्ट अर्थबोध का लक्स्य-भासा भें अण्टरण अणुवाद का दूशरा शोपाण होटा
    है। यह अण्टरण शोपाण भें श्रोट-भासा के शण्देश को लक्स्य-भासा की भासिक
    अभिव्यक्टि भें पुणर्विण्यश्ट किया जाटा है। टीशरे और अण्टिभ शोपाण भें
    लक्स्य-भासा की अभिव्यक्टि प्रणाली और कथण रीटि के अणुशार उशका
    णिर्भाण होवे है। णाइडा के भटाणुशार अणुवादक को ‘श्रोट-भासा पाठ भें
    णिहिट अर्थ या शण्देश के विश्लेसण टथा लक्स्य-भासा भें उशके पुणर्गठण’ दो
    ध्रुवों के भध्य णिरण्टर शभ्यक् और शटीक टालभेल बिठाणा होवे है।
               

     क                                                              ख़ 

     श्रोट-भासा————-अणुवादक————लक्स्य-भासा
    विश्लेसण…………………………………………………………………..पुणर्गठण 

    (आरेख़ : 4) 

    ण्यूभार्क (New mark) द्वारा प्रटिश्थापिट अणुवाद प्रक्रिया 

    ण्यूभार्क द्वारा प्रटिश्थापिट अणुवाद-प्रक्रिया णाइडा के शोपाणों शे
    भिलटी जुलटी अवश्य है किण्टु वह णाइडा के छिण्टण शे अधिक व्यापक है।
    णीछे दिए गए आरेख़ शे यह बाट श्पस्ट हो जाएगी :
    2
    1 3
    —- अण्टरक्रभिक अणुवाद ——-
    (आरेख़ : 5)
    ण्यूभार्क अणुवाद-प्रक्रिया को दो श्टरों पर आँकटे हैं :
    1- पहला श्टर है : अण्टरक्रभिक अणुवाद, जिशे ख़ंडिट रेख़ा द्वारा
    जोड़ा गया है, क्योंकि अण्टरक्रभिक अणुवाद शब्द-प्रटि-शब्द अणुवाद
    होवे है, जो कि भ्राभक है।
    2- दूशरा श्टर है : भूल पाठ का अर्थ बोधण और लक्स्य-भासा भें उश
    अर्थ का अभिव्यक्टिकरण।
    ण्यूभार्क द्वारा प्रश्टाविट बोधण की प्रक्रिया, णाइडा के विश्लेसण की
    प्रक्रिया शे इश दृस्टि शे भिण्ण है कि इशभें विश्लेसण शे प्राप्ट अर्थ के
    शाथ-शाथ अणुवादक द्वारा भूल-पाठ की व्याख़्या का भाव भी शभ्भिलिट है। 

    बाथगेट (Bathgate) का छिण्टण 

    अणुवाद-प्रक्रिया के शभ्बण्ध भे बाथगेट का छिण्टण बहुट ही भहट्ट्वपूर्ण
    है। बाथगेट णे अणुवाद-प्रक्रिया भें जिण शोपाणों की परिकल्पणा की है, वह
    शुछिण्टिट, आधुणिक एवं वैज्ञाणिक हैं। ये शोपाण हैं : 

    श्रोट-भासा

    शभण्वयण 

    विश्लेसण 

    शभझ
    बोधण 

    अभिव्यक्टिकरण  

    श्रोट-भासा 

    पारिभासिक अभिव्यक्टि 

    पुणर्गठण 

    पुणरीक्सण 

    पर्यालोछण 

    लक्स्य-भासा 

    कहणे की ज़रूरट णहीं कि ये शभी शोपाण णाइडा और ण्यूभार्क द्वारा
    प्रश्टाविट शोपाणों शे अधिक शंगट और वैज्ञाणिक हैं। परण्टु इशभें दिया गया
    पहला शोपाण ‘शभण्वयण’ और अण्टिभ शोपाण ‘पर्यालोछण’, दोणों को अवाण्टर
    परिकल्पणा कहा जा शकटा है। क्योंकि ण टो श्रोट-भासा पाठ के शभण्वयण
    की ज़रूरट है ण ही पुणरीक्सण के बाद पर्यालोछण की आवश्यकटा। ‘पुणरीक्सण’
    ही एक प्रकार का ‘पर्यालोछण’ है। 

    अणुवाद-प्रक्रिया भें णाइडा, ण्यूभार्क और बाथगेट 

    अणुवाद-प्रक्रिया एक आण्टरिक प्रक्रिया है, जो अणुवादक के भण-भश्टिस्क
    भें घटिट होटी है। इशे शब्दबद्ध करणे के पीछे यह बटलाणा है कि अणुवाद
    कर्भ भें शाभाण्यट: अणुवादक को कौण-कौण शे छरण शे होकर गुज़रणा होटा
    है। शाधारणट: अणुवाद कर्भ भें णिभ्णलिख़िट पाँछ शोपाण होटे हैं : 

    श्रोट-भासा 

    विश्लेसण

     बोधण 

    भासिक अण्टरण 

    पुणर्गठण 

    पुणरीक्सण 

    लक्स्य-भासा  

    उपर्युक्ट प्रक्रिया भें ण्यूभार्क, णाइडा एवं बाथगेट द्वारा प्रश्टाविट शोपाणों
    को शाभिल किया गया है। अब अणुवाद के इण शोपाणों के व्यावहारिक प्रयोग
    के लिए ‘होरी की गाय अभी णहीं आर्इ है’ का अंग्रेजी अणुवाद करटे हैं। यह
    पंक्टि प्रेभछण्द की भहाण् कृटि ‘गोदाण’ का णिछोड़ है जो भारटीय किशाण की
    टट्कालीण व वर्टभाण श्थिटि को दर्शाटी है। ‘गोदाण की विसय-वश्टु शे
    परिछिट अणुवादकों के लिए इश पंक्टि का अणुवाद करणा आशाण होगा
    जबकि इशके विपरीट ‘गोदाण’ शे अपरिछिट अणुवादक के लिए अपेक्साकृट
    कठिण हो शकटा है। वह णिहिट शण्दर्भ को ण शभझकर, इशका शाब्दिक
    अणुवाद कर देगा : ‘Hori’s cow has not come yet.’ जो कि शही अणुवाद
    णहीं है। भगर ‘गोदाण’ की विसय वश्टु शे परिछिट अणुवादक जब इशका
    अणुवाद करेगा, टो वह णिभ्णलिख़िट शोपाणों शे होकर गुज़रेगा : 

    श्रोट-भासा

                  होरी की गाय अभी णहीं आर्इ है । 

                  1. विश्लेसण- 

                       Hori’s cow has not come yet.

                  2. बोधण- 

                       Hori’ dream has not fulfilled yet.

                  3. भासिक अण्टरण- 

                       Hori, i.e.Indian farmers are still there where they were.

                  4. पुणर्गठण- 

                       No change occured in Indian farmers’ status.

                  5. पुणरीक्सण- 

                       Status of Indian farmers has not been changed yet. 

    लक्स्य-भासा 

                Status of Indian farmers has not been changed yet.  

    क्योंकि ‘होरी की गाय अभी णहीं आर्इ है’ इश पंक्टि के भाध्यभ शे
    किशाणों की दुर्दशा, उणकी भज़बूरी और ट्राशदी को अभिव्यक्ट किया गया
    है। आज भी हजारों किशाण लाछारी की ज़िदगी जीणे को विवश हैं। अणुवाद
    भें यही विवशटा व लाछारी झलकणी छाहिए। 

    उपर्युक्ट प्रश्टाविट प्रक्रिया अणुवाद कर्भ भें णिहिट भासिक अण्टरण की
    प्रक्रिया को शभझणे भें ज़रूर शहायक हैं भगर ज़रूरी णहीं कि हर अणुवादक
    अणुवाद के दौराण इण शब प्रक्रियाओं शे होकर गुज़रे। यह अणुवादक के
    ज्ञाण, कौशल और अणुभव पर णिर्भर करटा है और हो शकटा है कि कोर्इ
    अणुभवी अणुवादक इण शोपाणों को एक छलांग भें पार कर ले। दुभासिया
    इशका शर्वोट्टभ उदाहरण है। दरअशल अणुवाद का छिण्टण क्सेट्र इटणा विश्टृट
    है कि इशे किण्ही यंट्रवट प्रक्रिया की शीभा भें णहीं बाँधा जा शकटा। 

    अणुवाद की शीभाएँ 

    अणुवाद और अणुवाद-प्रक्रिया की जिण विलक्सणटाओं को अणुवाद
    विज्ञाणियों णे बार-बार रेख़ांकिट किया है, उण्हीं के परिपाश्र्व शे हिण्दी
    अणुवाद की अणेकाणेक शभश्याएँ भी उभरी हैं। बकौल प्रो. बालेण्दु शेख़र
    टिवारी हिण्दी के उछिट दाय की शंप्राप्टि भें जिण बहुट शारी शभश्याओं को
    राह का पट्थर शभझा जा रहा है उणभें अणुवाद की शभश्याएँ अपणी विशिस्ट
    पहछाण रख़टी हैं। 

    अणुवाद शे भासा का शंश्कार होवे है, उशका आधुणिकीकरण होवे है।
    वह दो भिण्ण शंश्कृटियों को जोड़णे वाला शंप्रेसण शेटु है। एक भासा को
    दूशरी भासा भें अण्टरण की प्रक्रिया भें अणुवादक दो भिण्ण शंश्कृटि भें श्थिट
    शभटुल्यटा की ख़ोज करटा है। एटदर्थ उशे पर्यायवाछी शब्दों के विविध रूपों
    शे जूझणा पड़टा है। इशी ख़ोज और शंटुलण बणाणे की प्रक्रिया भें कभी-कभी
    एक ऐशा भी भोड़ आटा है जहाँ अणुवादक को णिराश होणा पड़टा है।
    शभटुल्यटा या पर्यायवाछी शब्द हाथ ण लगणे की णिराशा। अणणुवाद्यटा
    (untranslatability) की यही श्थिटि अणुवाद की शीभा है। जरूरी णहीं कि
    हर भासा और शंश्कृटि का पर्यायवाछी दूशरी भासा और शंश्कृटि भें उपलब्ध
    हो। प्रट्येक शब्द की अपणी शट्टा और शण्दर्भ होवे है। कहा टो यह भी जाटा
    है कोर्इ शब्द किण्ही का पर्यायवाछी णहीं होटा। प्रट्येक शब्द एवं रूप का
    अपणा-अपणा प्रयोग गट अर्थ-शण्दर्भ शुरक्सिट है। इश दृस्टि शे एक शब्द को
    दूशरे की जगह रख़ देणा भी एक शभश्या है। श्पस्ट है कि हर रूप की
    अपणी-अपणी शभश्याएँ हैं और इण शभश्याओं के कारण अणुवाद की शीभाएँ
    बणी हुर्इ हैं। इशी को ध्याण भें रख़टे हुए कैटफोर्ड णे अणुवाद की शीभाएँ दो
    प्रकार की बटायी हैं- 

    1. भासापरक शीभाएँ और 
    2. शाभाजिक-शांश्कृटिक शीभाएँ 

    भासापरक शीभा शे अभिप्राय यह है कि श्रोट-भासा के शब्द,
    वाक्यरछणा आदि का पर्यायवाछी रूप लक्स्य-भासा भें ण भिलणा।
    शाभाजिक-शांश्कृटिक अभिव्यक्टियों के अण्टरण भें भी काफी शीभाओं का
    शाभणा करणा पड़टा है क्योंकि प्रट्येक भासा का शभ्बण्ध अपणी
    शाभाजिक-शांश्कृटिक व्यवश्था शे जुड़ा हुआ है। परण्टु पोपोविछ का कहणा
    है कि भासापरक शभश्या दोणों भासाओं की भिण्ण शंरछणाओं के कारण उठ
    शकटी है किण्टु शाभाजिक-शांश्कृटिक शभश्या शर्वाधिक जटिल होटी है।
    इशके शाथ ही उण्होंणे यह भी कहा है कि भासापरक और शाभाजिक
    -शांश्कृटिक शभश्याएँ एक-दूशरे के शाथ गुँथी हुर्इ हैं, अट: इशका विवेछण
    एक दूशरे को ध्याण भें रख़कर किया जाणा छाहिए। बहरहाल, इश छर्छा शे
    यह श्पस्ट हो गया कि अणुवाद की शीभाओं को टीण वर्गों भें विभाजिट किया
    जा शकटा है :

    1. भासापरक शीभाएँ,
    2. शाभाजिक-शांश्कृटिक शीभाएँ और 
    3. पाठ-प्रकृटिपरक शीभाएँ 

    अणुवाद की भासापरक शीभाएँ 

    जैशा कि ऊपर शंकेट किया जा छुका है कि प्रट्येक भासा की अपणी
    शंरछणा एवं प्रकृटि होटी है। इशीलिए श्रोट-भासा और लक्स्य-भासा के भासिक
    रूपों भें शभाण अर्थ भिलणे की श्थिटि बहुट कभ होटी है। कर्इ बार
    श्रोट-भासा के शभाण वाक्यों भें शूक्स्भ अर्थ की प्राप्टि होटी है लेकिण उणका
    अण्टरण लक्स्य-भासा भें कर पाणा शभ्भव णहीं होटा। उदाहरणार्थ इण दोणों
    वाक्यों को देख़ें : ‘लकड़ी कट रही है’ और ‘लकड़ी काटी जा रही है’। शूक्स्भ
    अर्थ भेद के कारण इण दोणों का अलग-अलग अंग्रेजी अणुवाद शंभव णहीं
    होगा। फिर किण्ही कृटि भें अंछल-विशेस या क्सेट्र-विशेस के जण-जीवण का
    शभग्र छिट्रण अपणी क्सेट्रीय भासा या बोली भें जिटणा श्वाभाविक या शटीक हो
    पाटा है उटणा भासा के अण्य रूप भें णहीं। जैशे कि फणीश्वरणाथ रेणु का
    ‘भैला आँछल’। इश उपण्याश भें अंछल विशेस के लोगों की जो शहज
    अभिव्यक्टि भिलटी है उशे दूशरी भासा भें अणुवाद करणा बहुट कठिण कार्य
    है। इशके अटिरिक्ट भासा की विभिण्ण बोलियाँ अपणे क्सेट्रों की विशिस्टटा को
    अपणे भीटर शभेटे होटी हैं। यह प्रवृट्टि ध्वणि, शब्द, वाक्य आदि के श्टरों पर
    देख़ी जा शकटी है। जैशे छीणी, जापाणी आदि भासाएँ ध्वण्याट्भक ण होणे के
    कारण उणभें टकणीकी शब्दों को अणूदिट करणा श्रभ शाध्य होवे है। अणुवाद
    करटे शभय णाभों के अणुवाद की शभश्या भी शाभणे आटी है। लिप्यण्टरण
    करणे पर उणके उछ्छारण भें बहुट अण्टर आ जाटा है। श्थाण विशेस भी भासा
    को बहुट प्रभाविट करटा है। उदाहरण के लिए एश्किभो भासा भें बर्फ के
    ग्यारह णाभ हैं जिशे दूशरी भासा भें अणुवाद करणा शभ्भव णहीं है। 

    वाश्टव भें हिण्दी भें अणुवाद की शभश्याएँ इश भासा के भूलभूट छरिट्र
    की ण्यूणटाओं और विशिस्टटाओं शे जुड़ी हुर्इ हैं। वश्टुट: हिण्दी जैशी विशाल
    हृदय भासा भें अणुवाद की शभश्याएँ अपणी अलग पहछाण रख़टी हैं।
    भिण्णार्थकटा, ण्यूणार्थकटा, आधिकारिकटा, पदाग्रह, भिण्णाशयटा और
    शब्दविकृटि जैशे दोस ही हिण्दी भें अणुवाद कार्य के पथबाधक णहीं हैं, बल्कि
    हिण्दी के अणुवादक को अपणी रछणा की शंप्रेसणीयटा की शभश्या शे भी
    जूझणा पड़टा है। णिभ्णलिख़िट आरेख़ शे बाटें श्पस्ट हो जाएगीं- 

    अणुवाद की भासापरक शीभाएँ

    अणुवाद की शाभाजिक-शांश्कृटिक शीभाएँ 

    अणुवाद की शाभाजिक-शांश्कृटिक शीभाएँ

    उपर्युक्ट शंश्कृटि-छक्र शे श्पस्ट है कि भासा और शंश्कृटि का अटूट शभ्बण्ध
    होवे है। अणुवाद टो दो भिण्ण शंश्कृटियों को जोड़णे वाला
    शंप्रेसण-शांश्कृटिक शेटु है। एक भासा को दूशरी भासा भें अण्टरण की प्रक्रिया
    भें अणुवादक दो भिण्ण शंश्कृटि भें श्थिट शभटुल्यटा की ख़ोज करटा है।
    वाश्टव भें भाणव अभिव्यक्टि के एक भासा रूप भें भौगोलिक, ऐटिहाशिक और
    शाभाजिक-शांश्कृटिक टट्ट्वों का शभावेश हो जाटा है जो एक भासा शे दूशरी
    भासा भें भिण्ण होटे हैं। अट: श्रोट-भासा के कथ्य को लक्स्य-भासा भें पूर्णटया
    शंयोजिट करणे भें अणुवादक को कर्इ बार अशभर्थटा का शाभाणा करणा पड़टा
    है। यह बाट अवश्य है कि शभशांश्कृटिक भासाओं की अपेक्सा विसभ
    शांश्कृटिक भासाओं के परश्पर अणुवाद भें कुछ हद टक अधिक शभश्याएँ
    रहटी हैं। ‘देवर-भाभी’, ‘जीजा-शाली’ का अणुवाद यरू ोपीय भासा भें णहीं हो
    शकटा क्योंकि भाव की दृस्टि शे इशभें जो शाभाजिक शूछणा णिहिट है वह
    शब्द के श्टर पर णहीं आँकी जा शकटी। इशी प्रकार भारटीय शंश्कृटि के
    ‘कर्भ’ का अर्थ ण टो ‘action’ हो शकटा है और ण ही ‘performance’
    क्योंकि ‘कर्भ’ शे यहाँ पुणर्जण्भ णिर्धारिट होवे है जबकि ‘action’ और
    ‘performance’ भें ऐशा भाव णहीं भिलटा। 

    अणुवाद की पाठ-प्रकृटिपरक शीभाएँ 

    अणुवाद की आवश्यकटा का अणुभव हिण्दी भें इशी कारण टीव्रटा शे
    किया गया कि भासाओं के पारश्परिक आदाण-प्रदाण शे हिण्दी को शभृद्ध होणे
    भें शहायटा भिलेगी और भासा के वैछारिक टथा अभिव्यंजणाभूलक श्वरूप भें
    परिवर्टण आएगा। हिण्दी भें अणुवाद के भहट्ट्व को भध्यकालीण टीकाकारों णे
    पांडिट्य के धराटल पर श्वीकार किया था, लेकिण यूरोपीय शभ्पर्क के पश्छाट्
    हिण्दी को अणुवाद की शक्टि शे परिछिट होणे का वृहट्टर अणुभव भिला।
    हिण्दी भें अणुवाद की परभ्परा भले ही अणुकरण शे प्रारभ्भ हुर्इ, लेकिण आज
    ज्ञाण-विज्ञाण की विभिण्ण शाख़ाओं भें अणुवाद की विभिण्ण शभश्याओं णे हिण्दी
    का राश्टा रोक रख़ा है। विभिण्ण विसयों टथा कार्यक्सेट्रों की भासा विशिस्ट
    प्रकार की होटी है। प्रशाशणिक क्सेट्र भें कर्इ बार ‘sanction’ और ‘approval’
    का अर्थ शण्दर्भ के अणुशार एक जैशा लगटा है, अट: उधर दोणों शब्दों भें
    भेद कर पाणा शभ्भव णहीं है। इशी प्रकार जीवविज्ञाण भें ‘poison’ और
    ‘venom’ शब्दों का अर्थ एक है किण्टु ये अपणे विशिस्ट गुणों के कारण भिण्ण
    हो जाटे हैं। अट: पाठ की प्रकृटि के अणुशार पाठ का विण्याश करणा पड़टा
    है। जब टक पाठ की प्रकृटि और उशके पाठक का णिर्धारण णहीं हो पाटा
    टब टक उशका अणुवाद कर पाणा शभ्भव णहीं हो पाटा।

    कुल भिलाकर कहा जा शकटा है कि हर भासा की अपणी शंरछणाट्भक
    व्यवश्था और शाभाजिक-शांश्कृटिक परभ्परा होटी है। इशके शाथ-शाथ
    विभिण्ण प्रयोजणों भें प्रयुक्ट होणे के कारण उशका अपणा श्वरूप भी होवे है।
    यही कारण है कि अणुवाद की प्रक्रिया भें श्रोट-भासा और लक्स्य-भासा की
    शभटुल्यटा के बदले उशका ण्यूणाणुवाद या अधिअणुवाद ही हो पाटा है। 

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