अभिप्रेरणा का अर्थ, परिभाषा, महत्व एवं प्रकार

By | February 15, 2021


अभिप्रेरणा अंग्रेजी शब्द ‘मोटिवेशन’ (Motivation) का हिन्दी रूपान्तर है। इस शब्द की उत्पत्ति
‘मोटिव’ (Motive) से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है व्यक्ति में किसी ऐसी इच्छा अथवा
शक्ति का विद्यमान होना, जो उसे कार्य करने की प्रेरणा देती है। अभिप्रेरणा कार्य से सम्बन्धित है,
जिसे प्रत्येक व्यक्ति में जागृत (उत्पन्न) किया जा सकता हैं वास्तव में, अभिप्रेरणा वह मनोवैज्ञानिक
उत्तेजना है जो व्यक्तियों को काम पर बनाए रखने के साथ-साथ उन्हें उत्साहित करती है और
अधिकतम सन्तुष्टि प्रदान करती है। अभिप्रेरणा की महत्वपूर्ण परिभाषाएं हैं-

    अभिप्रेरणा के प्रकार-

    मैस्लो के आवश्यकता के वर्गीकरण के अनुसार मनुष्य की शारीरिक, सुरक्षा,
    सम्बन्धी, सामाजिक आवश्यकता, प्रतिष्ठा रक्षक, आत्म सतुष्टि सम्बन्धी आवश्यताएॅं के
    आधार पर अभिप्रेरण के मुख्य रूप से तीन प्रकार बताये गये है-

    धनात्मक एवं ऋणात्मक अभिप्रेरण-

    इसके अंतर्गत अभिप्रेरण की वह प्रक्रिया जिसके अंतर्गत लक्ष्य के अनुसार
    कार्य पूर्ण करने पर लाभ या पुरस्कार की संभावना हो और दूसरों को इच्छा अनुसार
    उत्कृष्ट कार्य करने हेतु प्रेरित किया जाता हो। उसे धनात्मक अभिप्ररेणा माना जाता है।
    चूंकि यह सोच एक धनात्मक सोच है अत: इसे धनात्मक अभिप्रेरणा कहते है। ठीक इसके
    विपरीत ऐसी सोच जिसके अंतर्गत प्रोत्साहन न होकर भय या चिन्ता हो उसे ऋणात्मक
    अभिप्रेरणा कहा जाता है। जिसमें कर्मचारी द्वारा समय सीमा में लक्ष्य के अनुरूप कार्य न
    करने पर उसे दण्डित या जुर्माना की संभावना बनी हुये हो तो वह भयवश अच्छे कार्य
    करने हेतु प्रेरित होता है। परिणामत: वह भयवश लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अपने अधिकतम
    क्षमता के द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास करता है। इस तरह वह अपमान या निन्दा से बचते हुये
    रोजगार में बना रहता है।

    बाह्य एवं आंतरिक अभिप्रेरणा- 

    बाह्रय अभिप्रेरणा से आषय ऐसे प्रोत्साहन या अभिपे्ररण से है जिसके
    अंतर्गत अधिकारी एवं कर्मचारी को उसके श्रेष्ठ कार्य के लिये अधिक वेतन, या सीमांत
    लाभ या जीवन बीमा या विश्राम का समय अवकाश (छुट्टी) या सेवानिवृत्ति योजनाएं
    आदि का अतिरिक्त लाभ प्राप्त होता हो से है। जबकि आंतरिक अभिप्रेरण के अंतर्गत एसे े
    तत्व सम्मिलित होते है जो कार्य के दौरान संतुष्टि प्रदान करते है और संबंधित कर्मचारी
    या अधिकारी को अतिरिक्त उत्तरदायित्व, मान्यता, हिस्सेदारी, सम्मान आदि प्रदान किया
    जाता है। इस प्रकार दोनों ही विधि संगठन का मनोबल बढ़ता है।

    मौद्रिक एवं अमौदिक अभिप्रेरणा- 

    किसी व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्रेरित करने हेतु जब मौद्रिक तरीकों
    का उपयोग किया जाता है तो उसे मौद्रिक अभिप्रेरणा या वित्तीय अभिप्रेरणा कहते हैं
    जैसे- वेतन, मजदूरी, भत्ता एवं बोनस, गे्रज्युटी, पेंशन, अवकाश वेतन, भविष्य निधि के
    अंशदान, लाभ-भागिता ऋण सुविधा आदि।
    जब किसी व्यक्ति को मुद्रा के अलावा किसी अन्य मनोवैज्ञानिक तरीकों से सन्तुष्ट
    किया जाता है एवं कार्य के लिए पे्ररित किया जाता है तो उसे अमोैद्रिक या गैर वित्तीय
    अभिप्रेरणा कहते हैं जैसे-नौकरी की सुरक्षा, पदोन्नति के अवसर, प्रशंसा एवं पुरस्कार,
    सम्मान, अभिनंदन, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं मनोरंजन सुविधा आदि।

    अभिप्रेरणा की विधियां 

    व्यवहार में सामान्यत: प्रबन्धक अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को अभिप्रेरणा प्रदान करने के लिए
    निम्नलिखित विधियां प्रयोग में ला सकते हैं-

    1. कुशल नेतृत्व द्वारा अभिप्रेरणा – एक बड़े
      आकार की संस्था में प्रबन्धक अपने से उच्च अधिकारियों के नेतृत्व में कार्य करते हैं
      और साथ ही वह अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को नेतृत्व प्रदान करता है। 
    2. लक्ष्यों द्वारा अभिप्रेरणा – प्रत्येक संस्था की स्थापना कुछ
      निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए की जाती है। पूर्व निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति
      करना कर्मचारियों को अभिप्रेरित करके ही की जा सकती है।
    3. सहभागिता द्वारा अभिप्रेरणा – किसी संस्था में कार्य
      करने वाले कर्मचारियों से संयुक्त विचार-विमर्श करने से और उनको निर्णय में
      सम्मिलित करने से एक ओर तो कार्य ठीक ढंग से पूरा होता है और दूसरी ओर
      कर्मचारी अभिप्रेरित भी होते हैं। 
    4. प्रतियोगिता द्वारा अभिप्रेरणा – प्रतियोगिता अभिप्रेरणा
      की एक मुख्य विधि है।
    5. चुनौती द्वारा अभिप्रेरित – अनेक व्यक्ति दक्ष एवं निपुण
      होते हुए भी पूर्ण दक्षता और निपुणता से कार्य नहीं कर पाते। 
    6. आकर्षण द्वारा अभिप्रेरणा – कर्मचारियों को अच्छा कार्य
      करने के प्रति आकर्षण प्रदान करके भी अभिप्रेरित किया जा सकता है।
    7. परिवर्तन द्वारा अभिप्रेरणा – किसी व्यक्ति की प्रवृत्ति में
      आवश्यकता पड़ने पर परिवर्तन करने के लिए प्रबन्ध को स्वयं प्रवृत्ति में परिवर्तन करना
      पड़ता है। 
    8. मानवीय व्यवहार द्वारा अभिप्रेरणा – प्रबन्धक के
      लिए यह आवश्यक है कि वे अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ मानवीय व्यवहार करें। 
    9. अन्य विधियां – उपर्युक्त वर्णित अनेक विधियों के अतिरिक्त
      निम्नलिखित विधियों द्वारा भी कर्मचारियों को अभिप्रेरित किया जा सकता है-
      ;
      1. स्वस्थ कार्य दशाएं उपलब्ध कराके, 
      2. प्रभावी सम्प्रेषण व्यवस्था का विकास करके, 
      3. प्रशिक्षण प्रदान करके, 
      4. पदोन्नति के अवसरों में वृद्धि करके, 
      5. सेवा सुरक्षा प्रदान करके, 
      6. विभिन्न प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं के द्वारा, 
      7. अवित्तीय प्रेरणाएं प्रदान करके,

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