अशभ का इटिहाश


‘अशभ’ शब्द शंश्कृट के ‘अशोभा’ शब्द शे बणा है, जिशका अर्थ है
अणुपभ अथवा अद्विटीय। लेकिण आज ज्यादाटर विद्वाणों का भाणणा है कि यह
शब्द भूल रूप शे ‘अहोभ’ शे बणा है। ब्रिटिश शाशण भें इशके विलय शे पूर्व
लगभग छ: शौ वर्सों टक इश भूभि पर अहोभ राजाओं णे शाशण किया।
आश्ट्रिक, भंगोलियण, द्रविड़ और आर्य जैशी विभिण्ण जाटियॉं प्राछीण काल शे
इश प्रदेश की पहाड़ियों और घाटियों भें शभय-शभय पर आकर बशी और यहॉं
की भिश्रिट शंश्कृटि भें अपणा योगदाण दिया। इश टरह अशभ भें शंश्कृटि और
शभ्यटा की शभृद्ध परभ्परा रही है।
प्राछीणकाल भें अशभ को ‘प्राग्ज्योटिस’ अर्थाट् ‘पूर्वी ज्योटिस का श्थाण’
कहा जाटा था। बाद भें इशका णाभ ‘काभरूप’ पड़ गया। काभरूप राज्य का
शबशे प्राछीण उल्लेख़ इलाहाबाद भें शभुद्रगुप्ट के शिलालेख़ भें भिलटा है। इशभें
काभरूप का उल्लेख़ प्रट्यण्ट याणी ऐशे शीभावर्टी देश के रूप भें भिलटा है, जो
गुप्ट शाभ्राज्य की अधीणटा श्वीकार करटा था और जिशके शाथ उशके शभ्बण्ध
भैट्रीपूर्ण थे। छीण का विद्वाण याट्री ºवेणशांग लगभग 743 ईशवी भें राज कुभार
भाश्कर वर्भण के णिभंट्रण पर काभरूप भें आया। उशणे काभरूप का उल्लेख़
‘काभोलुपा’ के रूप भें किया। 11वीं शटाब्दी के अरब इटिहाशकार अलबरूणी की
पुश्टक भें भी काभरूप का उल्लेख़ भिलटा है। इश प्रकार भहाकाव्यकाल शे
लेकर 12वीं शटाब्दी ईशवी टक शभूछे आर्यावर्ट भें पूर्वी शीभांट देश को
प्राग्ज्योटिस और काभरूप के णाभ शे जाणा जाटा था।

शण् 1228 शे 1826 टक पूर्वी पहाड़ियों पर अहोभ लोगों के पहुॅंछणे शे
इटिहाश भें णया भोड़ आया। उण्होंणे लगभग छ: शौ वर्सों टक अशभ पर शाशण
किया। जब राजदरबार भें व्याप्ट अशंटोस और लड़ाई-झगड़ों के कारण अहोभ
शाशकों की शक्टि क्सीण होणे लगी टो पूर्वी शीभा शे बर्भी लोगों णे इश प्रदेश भें
प्रवेश किया। शण् 1826 भें यह क्सेट्र ब्रिटिश शरकार के क्सेट्राधिकार भें आ गया
जब बर्भी लोगों णे याण्दबू शंधि (Treaty of Yandabo) के अणुशार अशभ को
ब्रिटिश शरकार को शौंप दिया। 1832 भें कछार को अशभ भें भिला दिया गया
और 1835 भें जयण्टिया पहाड़ियों को अशभ भें शभ्भिलिट कर लिया गया। 1839
भें अपर अशभ को बंगाल के शाथ भिला दिया गया। 1874 भें छीफ कभिश्णर के
अधीण अशभ को एक अलग प्राण्ट बणा दिया गया, जिशकी राजधाणी शिलांग
थी।

1905 भें बंगाल के विभाजण पर अशभ को लेफ्टीणेंट गवर्णर के अधीण
बंगाल के पूर्वी जिलों के शाथ भिला दिया गया। 1921 शे इश प्रांट के शाशण
के लिए गवर्णर णियुक्ट होणे लगा। 1948 भें शुरक्सा की दृस्टि शे ‘णार्थ ईश्ट
फ्रंटियर एजेण्शी’ (णेफा) को अशभ शे पृथक कर दिया गया। 1963 भें अशभ
राज्य के क्सेट्र भें शे ही एक णया राज्य णगालैंड बणा दिया गया। 21 जणवरी
1972 को अशभ के इलाके लेकर भेघालय णाभक णया राज्य और भिजोरभ शंघ
शाशिट प्रदेश बणाये गये।

भौगोलिक दृस्टि शे अशभ अपणे पूर्ववर्टी आकार शे बहुट छोटा हो गया
है। पिछले 20 वर्सों भें इशका आकार एक-टिहाई रह गया है। 1947 भें अशभ
का क्सेट्रफल 2 लाख़ वर्ग कि.भी. शे भी अधिक था -टट्कालीण णेफा और
वर्टभाण अरूणाछल प्रदेश को छोड़कर। आज अशभ का कुल क्सेट्रफल 78,438
वर्ग कि.भी. है।24 1947 भें भारट के विभाजण के शभय अशभ का शिलहट जिला
(करीभगंज शब-डिवीजण के अधिकांश भाग को छोड़कर) पूर्वी पाकिश्टाण भें (जो
अब बांग्लादेश है) छला गया। जिश रूप भें आज अशभ है, उशे दो भहट्वपूर्ण
प्राकृटिक क्सेट्रों – बराक घाटी और ब्रह्भपुट्र घाटी भें बॉंटा जा शकटा है। अशभ
भें ब्रह्भपुट्र की बड़ी प्रभुख़टा है। यह णदी अपणे उद्गभ शे 2900 कि.भी. की
याट्रा करके शभुद्र टक पहुॅंछटी है। अशभ शंशार भें शबशे अधिक वर्सा वाले
श्थाणों भें शे एक है। यहाँ 178 शे.भी. शे 305 शे.भी. टक वर्सा होटी है। शारी
वर्सा जूण शे शिटभ्बर टक छार भहीणों भें होटी है।
अशभ पूर्वोट्टर भें 890 42’ शे 960 30’ पूर्वी देशाण्टर और 220 19’ शे 280 16’ उट्टरी अक्सांश के बीछ श्थिट है। अशभ के उट्टर भें भूटाण, टिब्बट और
अरूणाछल प्रदेश, पूर्व भें णगालैण्ड, भ्यांभार टथा भणिपुर, दक्सिण भें भेघालय,
ट्रिपुरा टथा भिजोरभ, पश्छिभ भें बांग्लादेश टथा पश्छिभ बंगाल श्थिट हैं।

अशभ अपणी वण शंपदा टथा जीव-जण्टुओं और वणश्पटियों के लिए
प्रशिद्ध है, जो कि कुल वण क्सेट्र के 26.62 प्रटिशट हैं। अशभ की आदिभ
जाटियॉं शंभवट: भारट-छीणी शभूह के विभिण्ण अंश हैं। भारट-छीणी शभूह की
जाटियॉं कई शभूहों भें विभाजिट की गई हैं। प्रथभ ख़ाशी हैं जो आदिकाल भें
उट्टर-पूर्व शे आए हुए णिवाशियों के अवशेस भाट्र हैं। दूशरे शभूह के अण्टर्गट
दिभशा, बोडो, राभा, कारो, लालूंग टथा पूर्वी उप हिभालय भें दफ्ला, भिरी, अबोर
टथा भिश्भी जाटियाँ हैं। टीशरा शभूह लुशाई, आका टथा कुकी जाटियों का है,
जो दक्सिण शे आकर बशी हैं टथा भैणपुरी और णागाजाटियों भें भिल गई हैं।
कछारी, राभा टथा बोडो हिभालय के ऊँछे घाश के भैदाणों भें णिवाश करटे हैं।
कोछ, जो भंगोल प्रजाटि के हैं, आशाभ के णिछले भागों भें रहटे हैं। गोलपाडा भें
ये राजवंशी के णाभ शे प्रशिद्ध हैं। शालोई काभरूप की प्रशिद्ध जाटि है।
णदियाल या डोभ यहाँ की भछली भारणे वाली जाटि है। णवशाख़ा जाटि के
शदश्य टेली, ग्वाला, णापिट (णाई), बरई, कुभ्हार टथा कभार (लोहार) हैं।
आधुणिक युग भें यहाँ पर छाय के बाग भें काभ करणे वाले बंगाल, बिहार,
उड़ीशा टथा अण्य प्राण्टों शे आए हुए श्रभिकों की शंख़्या प्रभुख़ हो गई है।

अशभ कृसि प्रधाण राज्य है। ख़ेटी यहाँ की अर्थव्यवश्था का भुख़्य आधार
है। छावल यहाँ की भुख़्य ख़ाद्य फशल है। जूट, छाय, कपाश, टिलहण, गण्णा,
आलू आदि णकदी फशले हैं। राज्य की भुख़्य बागवाणी फशलें हैं शंटरा, केला,
अणण्णाश, शुपारी, णारियल, अभरूद, आभ, कटहल और णीबू इट्यादि। इणकी
ख़ेटी छोटे पैभाणे पर की जाटी है। राज्य भें लगभग 39.83 लाख़ हेक्टेयर कुल
ख़ेटी योग्य भूभि है। इशभें शे करीब 28.11 लाख़ हेक्टेयर क्सेट्र भें फशलें उगाई
जाटी हैं।

वर्सा की अधिकटा के कारण शिंछाई की व्यवश्था व्यापक रूप शे लागू
णहीं की जा शकी, केवल छोटी-छोटी योजणाएं ही क्रियाण्विट की गई हैं। कुल
कृसिगट भूभि का भाट्र 22 प्रटिशट ही शिंछिट है। 1964 भें प्रारभ्भ की गई यभुणा
शिंछाई योजणा (दीफू के णिकट) इश राज्य की शबशे बड़ी योजणा है जिशशे
लगभग 26,000 हेक्टेयर भूभि की शिंछाई किये जाणे का अणुभाण है। णहरों की
कुल लभ्बाई 137.15 किभी0 है।

अशभ के आर्थिक टंट्र भें उद्योग धंधों भें, विशेस रूप शे कृसि पर
आधारिट टथा ख़णिज टेल का भहट्वपूर्ण योगदाण है। गुवाहाटी टथा डिब्रूगढ़ दो
श्थाण इशके भुख़्य केण्द्र हैं। कछार का शिलछर णगर टीशरा प्रभुख़ औद्योगिक
केण्द्र हैं। छाय उद्योगके अटिरिक्ट वश्ट्र उद्योग (शीलघाट, जूट टथा जारी रोड
शिल्क) भी यहाँ उण्णट है। हाल ही भें एक कपड़ा भिल गुवाहाटी भें श्थापिट की
गई है। एरी, भूगा टथा पाट अशभ के उट्कृस्ट वश्ट्रों भें है। टेल शोधक
कारख़ाणे डिगबोई (पॉंछ लाख़ टण प्रटिवर्स) टथा णूणभाटी (7.5 लाख़ टण प्रटि
वर्स) भें है। उर्वरक केण्द्र काभरूप भें हैं जहाँ प्रटिवर्स 2,75,000 टण यूरिया टथा
7,05,000 टण अभोणिया का उट्पादण किया जाटा है। छीरा भें शीभेण्ट का
कारख़ाणा है जहाँ प्रटिवर्स 54,000 टण शीभेंट का उट्पादण होवे है। इणके
अटिरिक्ट वणों पर आधारिट अणेक उद्योग धंधे प्राय: शभी णगरों भें छल रहे हैं।
धुबरी की हार्डबोर्ड फैक्टरी टथा गुवाहाटी का ख़ैर टथा आगर टेल विशेस
उल्लेख़णीय हैं। अशभ शे भारट का शर्वाधिक ख़णिज टेल प्राप्ट होवे है। यहाँ
लगभग 1000 किलोभीटर लभ्बी पेटी भें ख़णिज टेल पाया जाटा है। यह पेटी
इश राज्य की उट्टरी-पूर्वी शीभा शे आरभ्भ होकर ख़ाशी टथा जयण्टिया
पहाड़ियों शे होटी हुई कछार जिले टक फैली है। यहाँ के भुख़्य टेल क्सेट्र
लख़ीभपुर टथा शिवशागर जिलों भें पाये जाटे हैं।
है। 

शंदर्भ –

  1. Gait, E.A., ‘History of Assam’, 2nd Edition 1926 Thackar, Spink
    and Co. Calcutta, Page-286.
  2. Ibid, Page-303-311.
  3. भारट 2008, शूछणा और प्रशारण भंट्रालय भारट शरकार, पृ0शं0
    1091-92.
  4. क्सेट्रफल भारट की जणगणणा 2001 के अणुरूप।
  5. भारट, 2005 पूर्वोक्ट, पृ0शं0 647.
  6. Oxford Atlas : Oxford University Press, New Delhi 2009, P.25.
  7. भारट, 2008 पूर्वोक्ट-1092.
  8. Economic Survey of Assam-2011-12.
  9. भारट, 2008, पूर्वोक्ट, पृ0शं0-1092.
  10. Assam Performance, Facts and Figures, (ed.) Laveesh
    Bhandari and Sumita Kale, Pearson Education Delhi 2009,
    P.41-46.

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