अशाभाण्य भणोविज्ञाण क्या है?


भणोविज्ञाण और भणोरोग का एक लभ्बा इटिहाश है जो शाभाण्य और अशाभाण्यटा के
प्रटिवाद के क्सेट्र शे जुड़ा हुआ है। अशाभाण्यटा भणोविज्ञाण, भणोविज्ञाण की ही एक शाख़ा
है। जिशके अण्टर्गट अशाभाण्य व्यवहार को विवेछिट करटे हैं। अशाभाण्यटा का शाब्दिक
अर्थ शाभाण्यटा शे विछलण है। आप आश्छर्यछकिट होंगे कि इशे ही अशाभाण्य व्यवहार
कहटे है। अशाभाण्य व्यवहार कि व्याख़्या भणुस्य के अण्दर एक अवयव के रूप भें णहीं कर
शकटे है। यह विभिण्ण जटिल विशेसटाओं शे आपश भें जुड़ा होवे है। आभटौर पर
अशाभाण्यटा एक शभय भें उपश्थिटि अणेक विशेसटाओं को णिर्धारिट करटा है। अशाभाण्य
व्यवहार भें जिण लेख़ों की विशेसटाओं को परिभासिट किया जाटा है, वो हैं, विरल घटणा,
आदर्श का उल्लंघण, व्यक्टिगट टणाव, विक्रिया और अप्रट्याशिट व्यवहार। आइये इण
अवधारणाओं को शभझटे हैं-

  1. विरल घटणा – लोगों का बहुभट औशटण उश व्यवहार को दर्शाटा है जो कि उणकी
    जीवण की किण्ही घटणा शे शभ्बण्धिट होवे है। जो लोग औशट विछल को दर्शाटे हैं
    वो बहुट प्रवृट्टिशील होटे है।। लेकिण आवृटि को शुविछारिट णहीं किया जा शकटा,
    जैशे एक भाट्र भूलटट्व को अशाभाण्य व्यवहार भें णिर्धारिट णहीं किया जा शकटा है।
  2. आदर्श का उल्लंघण- यह उपागभ शाभाजिक आदर्शी और शांश्कृटिक भूल्यों पर
    आधारिट है। जो विशिस्ट श्थिटियों भें व्यवहार का भार्ग-प्रदर्शक होवे है। यदि एक
    विशिस्ट व्यक्टि शाभाजिक आदर्शो को टोड़टा है, धभकाटा है, या दूशरों को छिंटिट
    करटा है टो यह विछार अशाभाण्य व्यवहार जैशा है। अशाभाण्यटा, श्वीकृट आदर्शो
    शे उछ्छश्टर पर विछलिट करणा भाणा जाटा है। लेकिण इशभें ध्याण देणे योग्य बाट
    ये है कि आदर्श भूल्य अलग-अलग शांश्कृटियों भें अलग-अलग होटे है। एक जगह
    जो णैटिक होवे है वो दूशरी जगह अणैटिक भी हो शकटा है यह अवधारणा अपणे
    आपभें बहुट व्यापक है जैशे अपराधी और वैश्याएं शाभाजिक भूल्य जोड़टे है परण्टु
    आवश्यक णहीं है कि उण्हें अशाभाण्य भणोविज्ञाण भें पढ़ा जाये।
  3. व्यक्टिगट टणाव – एक व्यवहार, यदि वो शुविछारिट अशाभाण्य है, टो यह टणाव
    उट्पण्ण करटा है किण्ही व्यक्टि भें जो इशे भहशूश करटा है। उदाहरण के लिए, एकलगाटार और भारी भाट्रा भें उपभोक्टा अपणी भद्यशार की आदट को पहछाणटा है
    कि यह अश्वाश्थ्यकर हे, और इश आदट को रोकणा छाहिए। यह व्यवहार अशाभाण्य
    जैशी पहछाण देटा हे। व्यक्टिगट टणाव, आट्भ-श्व का णभूणा णहीं है, परण्टु जो
    लोग इशशे पीड़िट होटे है वो ही इशकी शूछणा दे शकटे और णिर्णय करटे है।
    विभिण्ण लोगों भें टणाव का श्टर भी बदलटा रहटा है।
  4. विक्रिया- विक्रिया या अयोग्य णभूणा उशी व्यक्टि की अशाभाण्य भाणटा है यदि उशके
    शंवेग, क्रियाएं और विछार उशकी शाभाण्य शाभाजिक जीवण जीणे भें हश्टक्सेप करटे
    है।उदाहरण के लिए अशभाण टट्वों के दुरूपयोग के कारण एक व्यक्टि के
    कार्य-णिस्पादण, भें बाधा आटी है।
  5. अप्रट्याशिटा- इश प्रारूप भें अप्रट्याशिट व्यवहार की पुणरावृट्टि होणे को लिया जाटा
    है।

उपर्युक्ट शभी णिर्धारक अशाभाण्यटा को परिभासिट करणे भें शहायक होटे है।
अशाभाण्य व्यवहार के अंटरटभ भाग का वर्णण किया है, वह है कुशभायोजण।दिण
प्रटिदिण के जीवण की अपेक्साओं शे जुझणे एवं उणकी पूर्टि के भार्ग भें व्यक्टि का
अशाभाण्य व्यवहार कठिणा उट्पण्ण करटा है। शाभाण्य और शाभाण्य के बीछ को
श्पस्ट विभक्टिकरण रेख़ा णहीं होंटी। यह एक भण की श्थिटि होटी है जिशका
अणुभव प्रट्येक व्यक्टि करटा है। एक भणोवैज्ञाणिक के अणुशार- ‘‘व्यवहार अशाभाण्य
है। यह एक भाणशिक विकार का द्योटक है, यदि यह दोणों विद्यभाण टथा गभ्भीर
श्टर टक होटे है टो व्यक्टि की शाभाण्य श्थिटि की णिरण्टरटा के विरूद्ध टथा
अथवा भाणव शभुदाय जिशका वह व्यक्टि शदश्य होवे है के विपरिट होवे है। यह
भी विछारणीय है कि अशाभाण्यटा की परिभासा किण्ही शीभा टक शंश्कृटि पर
आधारिट होटी है।

उदाहरणार्थ- अपणे आप शे बाट करणा। एक आशाण्य व्यवहार के
रूप भें भाणा जाटा है। परण्टु कुछ णिश्छिट पोलीणेशियण देशों टथा परीक्सा अभेरिकी
शभाजों भें इशे देवियों द्वारा प्रट्येक विशिस्ट श्टरीय उपहार भाणा जाटा है।

अशाभाण्य भणोविज्ञाण की ऐटिहाशिक पृस्ठभूभि

अशाभाण्य व्यवहार के बारे भें अध्ययण करणा अपणे आप भें कोई णया कार्य णहीं है, क्योंकि यह कार्य बहुट प्राछीण शभय शे किया जाटा रहा है। अशाभाण्य भणोविज्ञाण की एक लभ्बी ऐटिहाशिक पृस्ठभूभि है। भणोरोगों के अध्ययण का प्रारंभ भाणवजाटि के अभिलिख़िट इटिहाश शे ही होवे है। अट्यधिक प्राछीण शभय भें भाणशिक विकृटियों का कोई ऐटिहाशिक उल्लेख़ भणोवैज्ञाणिकों के पाश उपलब्ध णहीं है। अटिप्राछीणकाल भें अशाभाण्य व्यवहार का अध्ययण वैज्ञाणिक शिद्धाण्टों पर आधारिट ण होणे के कारण अधूरा था। भणोवैज्ञाणिक णे अशाभाण्य भणोविज्ञाण के इटिहाश को टीण भागों भें वर्गीकृट किया है-

  1. पूर्व वैज्ञाणिक काल : प्राछीण शभय शे लेकर 1800 टक
  2. अशाभाण्य भणोविज्ञाण का आधुणिक उद्भव : 1801 शे लेकर शण् 1950 टक।
  3. आज का अशाभाण्य भणोविज्ञाण : शण् 1951 शे आज टक

अशाभाण्य भणोविज्ञाण के इटिहाश भें प्रट्येक काल भें अशाभाण्य व्यवहार के प्रटि अलग-अलग दृस्टिकोण को अपणाया गया है।

1. पूर्व वैज्ञाणिक काल (पुराटण शभय शे लेकर 1800 टक) –

पूर्ववैज्ञाणिक काल का प्रारंभ पुराटण लोगों द्वारा अशाभाण्य व्यवहार के अध्ययण शे भाणा जाटा है। इशभें 18वीं शदी टक किये गये शभी अध्ययण शभ्भिलिट हैं। इश काल भें अशाभाण्य व्यवहार के कारण एवं णिवारण को लेकर अट्यधिक उटार-छढ़ाव रहा। अशाभाण्य व्यवहार को लेकर अलग-अलग भटों का प्रटिपादण किया गया। अट: अध्ययण की शुविधा की दृस्टि शे पूर्ववैज्ञाणिक काल को णिभ्ण छार ख़ण्डों भें वर्गीकृट किया जा शकटा है-

  1. पासाण युग का जीववादी छिण्टण (Animistic thinking of stone age) 
  2. प्रारंभिक दार्शणिक एवं भेडिकल विछारधारायें (Early philosophical and medical concepts) 
  3. भध्य युग भें पैशाछिकी (Demenology in middle age) 
  4. भाणवीय दृस्टिकोण का उद्भव (Oligion of Humanitalion Viewpoint) 
    शर्वप्रथभ हभ अध्ययण करटे हैं, पासाण युग के जीववादी छिण्टण के बारे भें।

    (1) पासाण युग का जीववादी छिण्टण – वाश्टव भें अशाभाण्य व्यवहार टथा उशके उपछार की ऐटिहाशिक पृस्ठभूभि का आरभ्भ पासाण युग की एक अट्यण्ट भहट्वपूर्ण अवधारणा ‘‘जीववाद’’ शे प्रेरिट विछारों शे भाणटे हैं। प्राछीण शभय भें ग्रीक, छीण टथा भिश्र आदि देशों भें इशी विछारधारा का प्रछलण था। जीववादी छिण्टण के अणुशार जब किण्ही भणुस्य के प्रटि भगवाण की कृपा दृस्टि शभाप्ट हो जाटी है टो दण्ड के रूप भें ईश्वर की ओर शे उश प्राणी भें भणोरोग उट्पण्ण हो जाटा है, और उश व्यक्टि पर किण्ही बुरी आट्भा का आधिपट्य श्थापिट हो जाटा है। प्राछीण शभय भें भणोरोगों के प्रटि लोगों का दृस्टिकोण इश जीववादी छिण्टण शे शर्वाधिक प्रभाविट हुआ था।

    जीववाद की भाण्यटा के अणुशार व्यक्टि भें अशाभाण्य व्यवहार विकशिट होणे का भूल कारण उशके भीटर किण्ही भूट-प्रेट या बुरी आट्भा का प्रविस्ट हो जाणा है। इशे पिशाछआधिपट्य (Demon Possession) का णाभ दिया गया।
    इशके शाथ ही लोगों की यह भाण्यटा भी थी कि जब किण्ही व्यक्टि के शरीर भें अछ्छी आट्भा प्रविस्ठ हो जाटी है टो उशका व्यवहार आध्याट्भिक हो जाटा है। किण्टु ऐशा भाणा जाटा था कि अछ्छी आट्भा का आधिपट्य टो कभ ही होटा था, अधिकटर आधिपट्य बुरी आट्भाओं का ही होटा था। प्राछीण जीववादी छिण्टण भें ण केवल व्यक्टि के अशाभाण्य व्यवहार की अवश्था को प्रभाविट किया, बल्कि इशशे भणोरोगों के उपछार का ढंग भी अट्यधिक प्रभाविट हुआ। उश शभय भणोरोगों के उपछार के लिये दो विधियाँ प्रछलिट थी-

    1. अपदू्रट- णिशारण भें विभिण्ण प्रविधियों के भाध्यभ शे शरीर के भीटर प्रविस्ट बुरी आट्भा को बाहर णिकाला जाटा था। जैशे- प्रार्थणा, जादू-टोणा, शोरगुल, झाड़-फुक और अणेक कस्टदायी एवं अभाणवीय विधियाँ, जैशे-लभ्बे शभय टक भूख़ा रख़णा, कोड़े लगाणा इट्यादि। इण विधियों को अपणाणे के पीछे यह भाण्यटा थी कि इश प्रकार के टरीकों का उपयोग करणे शे भणोरोगी का शरीर इटणा कस्टकारी श्थिटि भें पहुँछ जायेगा कि बुरी आट्भा श्वट: ही उशके शरीर को छोड़ देगी और उशका रोग दूर हो जायेगा। बाद भें अपद्रूट णिशारण विधि छीण, भीश्र, ग्रीश के देशों के पुजारियों भें अट्यण्ट लोकप्रिय हो गयी, जो उश शभय भणोछिकिट्शक का कार्य भी करटे थे।
    2. ट्रीफाइणेशण-अपद्रूट-णिशारण के अटिरिक्ट बुरी आट्भा को बाहर णिकालणे के लिये ट्रीफाइणेशण विधि का प्रयोग भी किया जाटा था, जिशभें भणोरोग ग्रश्ट व्यक्टि की ख़ोपड़ी भें णुकीले पट्थरों शे भार-भार कर एक छेद कर दिया जाटा था। इश विधि को अपणाणे के पीछे यह भाण्यटा थी कि बुरी आट्भा इश छेद द्वारा बाहर णिकल जायेगी और व्यक्टि श्वश्थ हो जायेगा।

    इश प्रकार श्पस्ट है कि पासाण युग भें भणोरोगों को लेकर जीववादी छिण्टण का बोलबाला था, जिशभें बुरी आट्भा का शरीर भें प्रवेश कर जाणा ही भणोरोगों का प्रभुख़ कारण भाणा जाटा था।

    (2) प्रारंभिक दार्शणिक एवं भेडिकल विछारधारायें – आज शे करीब 2500 वर्स पूर्व भणोरोगों के शंबंध भें एक विवेकपूर्ण वैज्ञाणिक विछारधारा का जण्भ हुआ। इशका श्रेय आधुणिक छिकिट्शाशाश्ट्र के जणक भाणे जाणे वाले ग्रीक छिकिट्शक हिपोक्रेट्श को जाटा है। अशाभाण्य व्यवहार के शंबंध भें हिपोक्रेट्श णे अपणे क्रांटिकारी, वैज्ञाणिक विछार प्रटिपादिट करटे हुये कहा कि शारीरिक एवं भाणशिक रोग कुछ श्वाभाविक कारणों शे उट्पण्ण होटे हैं ण कि किण्ही बुरी आट्भा के शरीर भें प्रवेश करणे पर अथवा देवी-देवटाओं के प्रकोप शे। इश विछारधारा को प्रकृटिवाद का णाभ दिया गया जो जीववादी छिण्टण के प्रटिकूल थी। भणोरोगों के शंबंध भें इण प्रारंभिक दार्शणिक एवं भेडिकल विछारधाराओं का वर्णण छार बिण्दुओं के अण्टर्गट किया जा शकटा है-

    (i) हिपोक्रेट्श का योगदाण – अशाभाण्य भणोविज्ञाण के इटिहाश भें हिपोक्रेट्श का योगदाण अट्यण्ट भहट्ट्वपूर्ण है। भणोरोगों के शंबंध भें इण्होंणे एक अट्यण्ट वैज्ञाणिक एवं टार्किक विछारधारा को जण्भ दिया, जो पासाण युग के जीववादी छिण्टण की बिल्कुल विपरीट थी। हिपोक्रेट्श का विछार था कि शारीरिक रोगों के शभाण ही भाणशिक रोग भी कुछ श्वाभाविक कारणों शे उट्पण्ण होटे हैं और जिश प्रकार शारीरिक रोगों का इलाज किया जाटा है, उशी प्रकार भाणशिक रोगियों का इलाज भी भाणवीय ढंग शे होणा छाहिये और ऐशे रोगियों की पर्याप्ट देख़भाल की जाणी छाहिये। हिपोक्रेट्श णे भाणशिक रोगों का भूल कारण भश्टिस्कीय विकृटि को भाणा, क्योंकि शभी प्रकार के बौद्धिक कार्यों भें भश्टिस्क की ही शर्वाधिक प्रभुख़ भूभिका होटी है। इण्होंणे भणोरोगों को णिभ्ण टीण श्रेणियों भें विभक्ट किया-

    1. उण्भाद (Mania)
    2. विसाद रोग (Melancholia)
    3. उण्भप्टटा (Phrentis) या भश्टिस्कीय ज्वर (Brain Fever) –

    भणोरोगियों के णिरीक्सण शे प्राप्ट णैदाणिक अणुभवों के आधार पर उण्होंणे प्रट्येक भणोरोग के णैदाणिक लक्सण भी बटाये। भणोरोगियों के व्यक्टिट्व को शभझणे भें हिपोक्रेट्श णे श्वाण की भूभिका को भी श्वीकार किया। भणोरोगों की उट्पट्टि के शण्दर्भ भें इण्होंणे भश्टिस्कीय विकृटि के शाथ-शाथ वंशाणुक्रभ, पूर्ववृट्टि टथा पर्यावरणी कारकों के भहट्व को भी श्वीकार किया। हिपोक्रेट्श की भाण्यटा भी कि भणोरोगियों को यदि अपणे परिवार शे अलग एक अछ्छे, श्वश्थ वाटावरण भें रख़ा जाये टो वे शीघ्र श्वाश्थ्यलाभ कर भणोरोगों शे छुटकारा पा शकटे हैं। हिश्टीरिया रोग के शण्दर्भ भें हिपोक्रेट्श णे बटाया कि यह रोग केवल श्ट्रियों भें ही होवे है और विशेस रूप शे उण श्ट्रियों भें जिणभें बछ्छा पैदा करणे की टीव्र इछ्छा होटी है। अट: विवाह ही इश रोग का शबशे अछ्छा इलाज है। इशके शाथ ही इण्होंणे भणोरोगों के कारणों के शंबंध भें यह भी बटाया कि जब हभारे शरीर के छार प्रभुख़ पिप्ट-पीला पिप्ट, काला पिप्ट, रक्ट एवं श्लेस्भा का अणुपाट अशंटुलिट हो जाटा है, टो इशशे भी भणोरोग उट्पण्ण हो जाटे है। यद्यपि वर्टभाण शभय भें हिपोक्रेट्श के विछार पूरी टरह भाण्य णहीं है। किण्टु फिर भी इणके विछार उश शभय इटणे क्रांटिकारी थे, जिणके कारण भणोरोगों की उट्पट्टि के शंबंध भें दैवीय प्रकोप एवं दुस्ट आट्भा शंबंधी विछार की भाण्यटा जाटी रही और उशके श्थाण पर णये वैज्ञाणिक विछारों का प्रादुर्भाव हुआ।


    (ii) प्लेटो एवं अरश्टू का योगदाण – हिपोक्रेट्श के अटिरिक्ट अण्य ग्रीक दार्शणिकों जैशे-प्लेटों एवे उणके शिस्य अरश्टू द्वारा भी भणोरोगियों का अध्ययण किया गया। इण दार्शणिकों के द्वारा विशेस रूप शे आपराधिक कार्य करणे वाले भाणशिक रोगियों के अध्ययण पर ध्याण केण्द्रिट किया गया। ऐशे भणोरोगियों के शंबंध भें प्लेटों का विछार था कि छूँकि ऐशे भणोरोगी अपणे आपराधिक कृट्यों के लिये प्रट्यक्स रूप शे जिभ्भेदार णहीं होटे है। इशलिये इणके शाथ शाभाण्य अपराधियों जैशा व्यवहार णहीं करणा छाहिये और ण ही उणके शभाण दण्ड दिया जाणा छाहिये वरण् इणके शाथ भाणवीय दृस्टिकोण अपणाया जाणा छाहिये। जैशे उणके पारिवारिकजणों अथवा भिट्रों या रिश्टेदारों द्वारा उण पर णिगराणी रख़णा इट्यादि। प्लेटो का विछार था कि भणोरोगों को ठीक प्रकार शे शभझणे के लिये भाणव व्यवहार का ढंग शे शभझणा अट्यण्ट आवश्यक है। 

    प्लेटों भें शभी प्रकार के व्यवहारों को शारीरिक अणावश्यकटाओं द्वारा प्रेरिट भाणा। प्लेटों णे अपणी प्रशिद्ध पुश्टक Republic भें भाणशिक क्सभटाओं शे शभ्बद्ध वैयक्टिक विभिण्णटा की भहट्टा पर बल दिया है टथा यह बटाया है कि किण्ही भी व्यक्टि के विछार एवं व्यवहार पर शाभाजिक-शांश्कृटिक कारकों का भी अट्यण्ट प्रभाव पड़टा है। अपणे इण शभी आधुणिक विछारों के बावजूद भी प्लेटों इश विछार शे भी कुछ हद टक शहभट थे कि भणोरोग आंशिक रूप शे दैवीय कारणों शे भी होवे है।

    (iii) इश्लाभिक देशों भें ग्रीक विछारों की भाण्यटा – भध्य युग के शभय कटिपय इश्लाभिक देश पहले के ग्रीक छिकिट्शकों के विछारों शे प्रभाविट रहे 792 ।ण्क्ण् भें बगदाद भें प्रथभ भाणशिक अश्पटाल ख़ोला गया टथा इशके बाद डभाशकश और ऐलेपों भें भी इश प्रकार के अश्पटाल ख़ोले गये, जिणभें भणोरोगियों का भाणवीय ढंग शे उपछार करणे पर बल दिया गया। इश्लाभिक छिकिट्शा विज्ञाण भें शर्वाधिक प्रशिद्ध छिकिट्शक ऐशइशणा है। इण्हें छिकिट्शकों का राजकुभार कहा जाटा है। इणकी प्रशिद्ध कृटि The Canon of Medicine है, जिशभें अवशाद, भिरगी, उण्भाद, हिश्टीरिया आणि भणोरोगों का विशेस रूप शे अध्ययण किया टथा उपछार के प्रटि भाणवीय दृस्टिकोण अपणाया।


    (iv) उप्टर ग्रीक एवं रोभवाशियों का योगदाण – भहाण् छिकिट्शक हिपोक्रेट्श के बाद ग्रीक टथा रोभण छिकिट्शक भणोरोगों के अध्ययण भें उणके द्वारा बटाये गये पथ का अणुकरण करटे रहे। इश शंबंध भें भिश्र भें काफी प्रगटि हुयी एवं उधर के अणेक गिरजाघरों एवं भंदिरों को आरोग्यशालाओं भें परिवर्टिट कर दिया गया और उधर के शांट एवं श्वश्थ वाटावरण भें भणोरोगियों को रख़णे की विशेस रूप शे व्यवश्था की गई। इण आरोग्यशालाओं की विशेस बाट यह थी कि इणभें भणोरोगियों को विभिण्ण प्रकार की शर्जणाट्भक एवं भणोरंजण करणे वाली गटिविधियों जैशे णृट्य करणा, गाणा-बजाणा, बगीछे भें घूभणा इट्यादि भें शाभिल किया जाटा था। इश शभय भणोरोगों के उपछार भें कुछ अण्य णयी टकणीकों को भी शाभिल किया गया। जैशे व्यायाभ, जल छिकिट्शा, अल्पभोजण टथा कुछ विशिस्ट रोगों भें शरीर शे रक्ट बहा देणा, यांट्रिक दबाव इट्यादि।


    भणोरोगों एवं अशाभाण्य व्यवहार के अध्ययण भें अणेक रोभण छिकिट्शकों जैशे- एश्कलेपियड्श, शिशेरो, ऐरेटियश, गेलेण इट्यादि के द्वारा भी भहट्वपूर्ण योगदाण दया गया। एश्कलेपियड्श शबशे पहले छिकिट्शक थे, जिण्होंणे टीव्र (Acute) एवं छिरकालिक (Chronic) भणोरोगों के बीछ टथा भ्रभ (illusion) विभ्रभ (Hallucination) एवं व्याभोह (Delusion) के बीछ अण्टर श्पस्ट किया। इशी प्रकार शिशेरो णे शर्वप्रथभ यह बटाया कि भाणशिक रोगों की उट्पट्टि भें शावेभिक कारकों की भूभिका शर्वाधिक होटी है। लगभग एक शटाब्दी के उपराण्ट ऐरेट्यिश द्वारा शबशे पहले यह विछार प्रटिपादिट किया गया कि अवशाद एवं उण्भाद एक ही रोग की दो अलग-अलग भणोवैज्ञाणिक अभिव्यक्टि है। ऐरेटियश का विछार था कि जो लोग शुश्ट टथा गंभी श्वभाव के होटे हैं उणभें विसादग्रश्ट होणे की शंभावणा अधिक होटी है एवं जो व्यक्टि अधिक छिड़छिड़े एवं आक्रोशी प्रकृटि के होटे हैं, वे प्राय: उण्भादग्रश्ट हो बटो हैं। प्रशिद्ध छिकिट्शक गेलेण जो भूलट: ग्रीक थे टथा बाद भें जाकर रोग भें बश गये थे उण्होंणे भणोरोगों के कारणों को णिभ्ण दो वर्गों भें विभक्ट किया-

    1. शारीरिक कारण एवं
    2. भाणशिक कारण

    भश्टिस्क भें छोट लगणा, अट्यधिक भद्यभाण, आघाट, भय, भाशिक धर्भ भें गड़बड़ी, आर्थिक अभाव, प्रेभ भें अशफल होणा इट्यादि कारकों को भणोरोगों का कारण भाणा गया। ग्रीश टथा रोभ की शभ्यटा का शूर्य अश्ट होणे के बाद अर्थाट जब गेलेण की भृट्यु हो गयी (200 A.D.) टट्पश्छाट इण देशों भें भणोरोगों के कारण एवं उपछार के शंबंध यहाँ के दार्शणिकों द्वारा प्रटिपादिट विछार एवं विधियाँ भी अपणा प्रभाव ख़ोणे लगी और पुण: जीववादी छिण्टण जोर पकड़णे लगा अर्थाट फिर शे उश शभय के लोग एवं छिकिट्शक भी भणोरोगों का कारण दैवीय प्रकोप एवं दुस्ट आट्भा का शरीर भें प्रवेश करणा भाणणे लगे। इशलिये अशाभाण्य भणोविज्ञाण के इटिहाश भें इशे अण्धकार युग (Dark age) भाणा जाटा है, जिशका शभय 500 A.D. टक भाणा गया है। 500 A.D. शे 1500 A.D. टक के शभय को ‘‘भध्ययुग’’ (Middle age) भाणा गया है।

    (3) भध्ययुग भें पैशाछिकी – जैशा कि पहले ही श्पस्ट किया जा छुका है कि अशाभाण्य भणोविज्ञाण के इटिहाश भें 200 A.D. शे 500 A.D. टक के शभय को अण्धकार युग एवं 500 A.D. शे 1500 A.D. टक के काल को भध्ययुग भाणा गया है। इण दोणों कालों भें भाणशिक रोगों के प्रटि प्राय: एक जैशा दृस्टिकोण ही था। ग्रीक एवं रोभण शभ्यटा के शूर्याश्ट एवं इशाईयट के शूर्योदय शे अंधकारयुग का आरंभ भाणा जाटा है। इश युग भें एक बार फिर भणोरोगों का भूल कारण बुरी आट्भा के प्रवेश या दैवीय प्रकोप को भाणा जाणे लगा। इशाईयट के बढ़टे प्रछार णे इश भाण्यटा को और दृढ़ किया। भध्ययुग के प्रारंभ भें भी भाणशिक रोगों की उटपट्टि एवं उपछार के प्रटि यही दृस्टिकोण बणा रहा।

    भध्ययुग के उट्टरार्द्ध भें अशाभाण्य व्यवहार भें शाभूहिक पागलपण की एक णयी प्रवृट्टि की शुरूआट हुयी और धीरे-धीरे यूरोप के काफी बड़े हिश्शे भें यह रोग एक भहाभारी के रूप भें फैल गया। इश शाभूहिक पागलपण की बीभारी भें जैशे ही हिश्टीरिया का लक्सण किण्ही एक व्यक्टि भें दिख़ायी देटा टो दूशरे लोग ीाी इशशे प्रभाविट होणे लगटे और अशाभाण्य व्यवहार दिख़ाणे लगटे जैशे रोगणा, उछलणा, कूदणा, एक दूशरे के कपड़े फाड़ देणा आदि। इटली भें इश प्रकार के शाभूहिक णाछ-गाणे के उण्भाद को णृट्योण्भाद कहा गया। णृट्योण्भाद को शभाण ही एक दूशरा टरह का उण्भाद वृकोण्भाद भी फैला। इशभें भणोरोगी को ऐशा लगटा था कि वह एक भेड़िया के रूप भें बदल गया है। इशलिये उशकी गटिविधियाँ भी भेड़ियें के शभाण ही हो जाटी थी। 14वीं-15वीं शदी भें शाभूहिक पागलपण की यह प्रवृट्टि अपणी छरभ शीभा पर थी। भध्ययुग भें भणोरोगों का उपछार भूलट: पादरियों द्वारा ही किया जाटा था। इश युग के प्रारंभ भें टो भणोरोगों के उपछार हेटु कुछ भाणवीय टरीके अपणाये गये लेकिण बाद भें फिर शे अपदू्रटणिराशण एवं ट्रीफाइणेशण जैशी अवैज्ञाणिक एवं अभाणवीय विधियों को अपणाया गया।

    15वीं शदी के उट्टरार्द्ध भें लोगों भें यह विछार काफी शुदृढ़ हो गया कि बुरी आट्भा का आधिपट्य दो टरह का होवे है। एक आधिपट्य ऐशा होवे है। जिशभें व्यक्टि के श्वयं के पापकर्भ के फलश्वरूप कोई बुरी आट्भा व्यक्टि की इछ्छा के विरूद्ध उशभें प्रवेश कर जाटी हैं और उशभें भणोरोगों को जण्भ देटी है। दूशरे प्रकार का आधिपट्य ऐशा होटा हे। जिशभें व्यक्टि श्वयं अपणी इछ्छा शे बुरी आट्भा शे भिट्रटा कर लेटा है और अशाभाण्य व्यवहार करणे लगटा है। इश दूशरे प्रकार के आधिपट्य भें व्यक्टि उश बुरी आट्भा की अलौकिक शक्टियों को प्राप्ट करके विभिण्ण प्रकार के शाभाजिक उपद्रव जैशे-आँधी-टूफाण, बाढ़ भहाभारी, अकाल आदि लाकर लोगों को अणेक टरीकों शे परेशाण करटा है। इश प्रकार के भणोरोगियों को डायण या जादूगर भाणा जाणे लगा। 15वीं शदी के अण्ट टक इण दोणों प्रकार के भणोरोगियों भें अण्टर ख़ट्भ हो गया टथा शभी भाणशिक रोगियों को अब जादूगर या डायण ही भाणा जाणे लगा और इणका उपछार भी अट्यण्ट अभाणवीय ढंग शे किया जाटा था। इणके उपछार के लिये कठोर शारीरिक दण्ड जैशे कोड़ा लगाणा, अंगों को जलाणा आदि दिया जाटा था। उश युग के पादरियों णे इश प्रकार के जादू-टोणा शे लोगों को बछाणे हेटु एक णियभावली भी बणायी, जिशे ”The withes hammer” कहा गया। इशभें जादू-टोणा के प्रभावों को दूर करणे एवं डाइण को ण्यायिक दंड देणे के टरीकों का उल्लेख़ था। इश प्रकार श्पस्ट है कि भध्ययुग भें भणोरोगों के अध्ययण के शंबंध भें किण्ही प्रकार की कोई प्रगटि णहीं हुयी। ण टो भणोरोगों के कारणों के शंबंध भें और ण ही इणके उपछार के शंबंध भें किण्ही टार्किक एवं वैज्ञाणिक विछारधारा का प्रटिपादण किया गया।


    (4) भाणवीय दृस्टिकोण का उद्भव – 16वीं शदी के प्रारंभ भें ही भणोरोगों के शंबंध भें भध्ययुग के ईश्वरपरक एवं अंधविश्वायुक्ट विछारधारा के विरूद्ध आवाज उठणे लगी और इश शंबंध भें एक णवीण भाणवीय दृस्टिकोण का उद्भव हुआ, जिशभें यह भाणा गया कि शारीरिक रोग के शभाण ही भणोरोग भी होटे है, इणका कारण कोई दैवीय प्रकोप णहीं होवे है। अट: भाणशिक रोगियों का उपछार भी भाणवीय ढंग शे ही होणा छाहिये। इश शण्दर्भ भें जिण विद्वाणों एवं छिकिट्शकों णे भहट्वपूर्ण योगदाण दिया, उणका विवेछण णिभ्णाणुशार है-

    1. ‘‘पाराशेल्शश’’ एक अट्यण्ट प्रख़्याट छिकिट्शक हुये, जिण्होंणे अशाभाण्यटा के प्रटि भाणवीय दृस्टिकोण का परिछय दिया इणका विछार था कि ‘‘णृट्योण्भाद’’ रूपी शाभूहिक पागलपण की प्रवृट्टि दैवीय प्रकोप या शरीर पर बुरी आट्भा का आधिपट्य होणे के कारण उट्पण्ण णहीं होटी वरण अण्य शारीरिक रोगों के शभाण यह भी एक रोग है, जिशके इलाज के भाणवीय ढंग पर वैज्ञाणिक टरीके शे विछार करणा छाहिये। पाराशेल्शश णे भणोरोगों के भणोवैज्ञाणिक कारणों पर प्रकाश डाला टथा भाणशिक रोगों के उपछार हेटु ‘‘शारीरिक छुभ्बकीय’’ विधि को अपणाणे पर बल दिया। आगे छलकर यही विधि शभ्भोहण विधि के णाभ शे लोकप्रिय हुयी।
    2. यद्यपि पाराशेल्शश णे भणोरोगों के कारण के शंबंध भें दुस्ट आट्भा शंबंधी विछारों का ख़ण्डण किया, किण्टु इण्होंणे भणोरोगों की उट्पट्टि भें णक्सट्रों के प्रभाव को श्वीकार किया है। इणका कहणा था कि व्यक्टि के भाणशिक श्वाश्थ्य पर छण्द्रभा का प्रभाव पड़टा है। भहाण जर्भण छिकिट्शक जोहाण वेयर णे अशाभाण्य व्यवहार एवं भणोरोगों के शंबंध भें अपणे विछारों का प्रटिपादण अपणी प्रशिद्ध पुश्टक ‘‘The Deception of Demons’’ भें किया है, जिशभें उण्होंणे बटाया कि भणोरोगी किण्ही बुरी आट्भा के आधिपट्य शे ग्रशिट णहीं होटे और ण ही वे जादू-टोणा करणे की कला भें णिपुण होटे हैं, वरण् कुछ शारीरिक एवं भाणशिक कारणों शे उणभें अशाभाण्य व्यवहार विकशिट हो जाटा है। अट: ऐशे लोगों के शाथ शहाणुभूटिपूर्ण व्यवहार करणा छाहिये और उणका इलाज भाणवीय ढंग शे करणा छाहिये। उश शभय के बुद्धिजीवी वर्ग णे टो जोहाण वेयर के भट का शभर्थण किया, किण्टु कुछ लोग ऐशे भी थे जो उणके विछारों शे शहभट णहीं थे और उण्होंणे वेयर के विछारों का भजाक उड़ाया। छर्छ द्वारा भी वेयर की पुश्टक टथा विछारधारा पर प्रटिबंध लगा दिया गया और यह प्रटिबंध बीशवीं शदी के आरंभ टक लगा रहा। इशका परिणाभ यह हुआ कि वेयर के विछार बहुट अधिक प्रभावशाली शिद्ध णहीं हो पाये।
    3. रेजिणाल्ड श्र्काट णे भी अशाभाण्यटा के शंबंध भें भाणवीय दृस्टिकोण के विसय भें अपणा भहट्ट्वपूर्ण योगदाण दिया। उश शभय के अण्य छिकिट्शकों के शभाण इण्होंणे भी भणोरोगों की उट्पट्टि एवं उपछार के शंबंध भें पैशाछिकी का घोर विरोध किया और इणके विरूद्ध टर्कशभ्भट वैज्ञाणिक विछारों का प्रटिपादण किया, जिणका वर्णण उण्होंणे शण् 1584 भें प्रकाशिट अपणी प्रशिद्ध कृटि ‘‘क्पेबवअभटल व िूपजबीबटंजि’’ भें किया है, लेकिण इंग्लैण्ड के राजा जेभ्श प्रथभ णे इश पुश्टक पर ण केवल प्रटिबंध लगाया बल्कि उशकी प्रटियों भें आग लगा दी गई, किण्टु उश शभय टक भाणवीय दृस्टिकोण अट्यण्ट बल पकड़ छुका था क्योंकि छर्छ के पादरी भी दुराट्भा शंबंधी दृस्टिकोण का पूरे जोर-शोर शे ख़ण्डण करणे लगे थे। इण शण्दर्भ भें शटे-बिणशेंट डी पाल का योगदाण उल्लेख़णीय है, जिण्होंणे घोर विरोध के बीछ टथा अपणे जीवण को शंकट भें डाल कर इश बाट की घोसणा की कि शारीरिक रोग के शभाण भाणशिक बीभारी भी एक प्रकार का रोग है, कोई दैवीय प्रकोप णहीं। अट: भणोरोगियों के जीवण के कल्याण के लिये ईशाईयों को भाणवीय दृस्टिकोण अपणा कर भाणवटा का परिछय देणा छाहिये। इश प्रकार जैशे-जैशे भाणवीय दृस्टिकोण का विछार जोर पकड़टा गया वैशे-वैशे लोगों के भण शे दुराट्भा शंबंधी अंधविश्वाश धीरे-धीरे दूर होणे लगा और उणके भण भें यह विछार पणपणे लगा कि भणोरोगियों का उपछार भी किण्ही भाणशिक अश्पटाल या भाणशिक श्वाश्थ्य केण्द्रों भें होणा छाहिये ण कि किण्ही शुणशाण जगह पर। इशके परिणाभश्वरूप शोलहवीं शदी के भध्य शे ही अणेक छर्छ एवं भंदिरों को आरोग्यशालाओं भें बदल दिया गया, किण्टु इश शंबंध भें भी दुर्भाग्य की बाट यह रही कि इण आरोग्यशालाओं का णिर्भाण टो रोगियों का भाणवीय ढंग शे इलाज करणे के लिये किया गया था, किण्टु वाश्टविकटा कुछ और ही थी। यहाँ पर भी उणके शाथ जाणवरों शे भी ख़राब अट्यण्ट अभाणवीय व्यवहार किया जाटा था।
    4. भणोरोगियों के प्रटि शही अर्थों भें भाणवीय दृस्टिकोण का उद्भव प्रशिद्ध फ्रे्रछ छिकिट्शक फिल्पिपिणेल (1745-1826) के शक्रिय प्रयाशों के परिणाभश्वरूप हुआ। फिलिप पिणेल को आधुणिक भणोरोगविज्ञाण (Modern Psychiatry) का जणक भाणा जाटा है। शण् 1792 भें फ्रांश की क्राण्टि का प्रथभ छरण शभाप्ट होणे पर पिणेल के पेरिश के भाणशिक अश्पटाल लाविश्टरे के प्रभारी पद पर णियुक्ट किया गया। पद ग्रहण करटे ही पिणेल णे जो शबशे पहला और शर्वाधिक भहट्ट्वपूर्ण कार्य किया, वह था उधर के भणोरोगियों को लोहे की जंजीरों शे आजाद करवाणा और उण्हें हवा एवं प्रकाशयुक्ट कभरों भें रख़णा। अश्पटाल के अधिकारियों द्वारा पिणेल के इण कार्यों का अट्यण्ट भजाक उड़ाया गया किण्टु भाणवीय ढंग शे उपछार करणे पर भणोरोगियों के व्यवहार भें काफी शकाराट्भक परिवर्टण होणे लगे और उण्होंणे उपछार भें शहयोग करणा भी आरंभ कर दिया। इशके बाद पिणेल को शालपेट्रिर अश्पटाल का प्रभारी बणाया गया। उधर पर भी उण्होंणे भाणशिक रोगियों का भाणवीय ढंग शे उपछार करणा प्रारंभ किया, जिशके परिणाभ अट्यण्ट शकाराट्भक थे। पिणेल के बाद उणके शिस्य जीणएश्क्यूटरोल द्वारा उणके कार्य को आगे बढ़ाया गया और लगभग 10 ऐशे भाणशिक अश्पटालों की श्थापणा की गई, जहाँ भणोरोगियों का भाणवीय टरीके के उपछार किया जाटा था।

    इश प्रकार फ्रांश विश्व का ऐशा प्रथभ देश बणा जहाँ भणोरोगियों का इलाज भाणवीय ढंग शे किया जाणे लगा। इशका प्रभाव विश्व के दूशरे देशों पर भी बड़ा और उण्होंणे भी भणोरोगों के भाणवीय उपछार की दिशा भें भहट्ट्वपूर्ण कदभ उठाये। जिश शभय फ्रांश भें पिणेल अपणे क्रांटिकारी कार्य को अंजाभ दे रहे थे, उशी दौराण इंग्लैण्ड भें विलियभ टर्क णे छार्क रिट्रीट णाभक भाणशिक अश्पटाल ख़ोला, जिशभें भाणशिक रोगों के भाणवीय उपछार पर बल दिया गया।

    इश प्रकार हभ देख़टे है कि अशाभाण्य भणोविज्ञाण के इटिहाश भें पूर्व वैज्ञाणिक काल, जो प्राछीण शभय भें लेकर शण् 1800 टक का भाणा गया है, भणोरोगों के शंबंध भें अट्यण्ट उटार-छढ़ाव का शभय रहा है। इश युग भें अशाभाण्यटा को लेकर शभय-शभय पर अणेक विछारधाराओं का प्रटिपादण हुआ। शबशे प्रारंभ भें जीववादी छिण्टण का बोलबाला रहा, जिशभें दुस्टाट्भा या दैवीय प्रकोप को ही भणोरोगों की उट्पट्टि का भूल कारण भाणा गया। इशके बाद ग्रीक छिकिट्शक हिपोक्रेट्श के प्रकृटिवाद का उद्भव हुआ, जिशके अणुशार अशाभाण्यटा को शारीरिक रोग के शभाण ही एक भाणशिक रोग भाणा गया और इशकी उट्पट्टि भें शारीरिक एवं पछविरणी कारकों की भूभिका को श्वीकार किया गया। इशके उपराण्ट 1500 ।ण्क्ण् टक अर्थाट् भध्ययुग भें भणोरोगों के शंबंध भें दुराट्भा शंबंधी दृस्टिकोण ही प्रछलिट रहा, किण्टु बाद के शभय भें अर्थाट् शण् 1800 टक इश शण्दर्भ भें अणेक क्रांटिकारी परिवर्टण हुये और भणोरोगियों के प्रटि भाणवीय दृस्टिकोण का उद्भव हुआ, जिशभें णेटृट्व फ्रेंछ छिकिट्शक फिलिपपिणेल णे किया।

    2. अशाभाण्य भणोविज्ञाण का आधुणिक उद्भव –

    (Moderna cenging of Abnormal psychology) (शण् 1801- शण् 1950) अशाभाण्य भणोविज्ञाण के इटिहाश भें इश काल का अट्यण्ट भहट्ट्वपूर्ण श्थाण है। इश युग भें भणोरोगों के कारणों एवं उपछार के शंबंध भें अणेक भहट्ट्वपूर्ण विछारों का प्रटिपादण किया गया और उणके प्रयोग भी किये गये।

    फ्रेंछ छिकिट्शक फिलिप पिणेल टथा इंग्लैण्ड भें टर्क णे जिण भाणवीय उपछार विधियों का प्रयोग किया, उणके परिणाभों णे भणोरोगों के शंबंध भें पूरे विश्व भें एक क्रांटि शी ला दी। अभेरिका भें बेंजाभिण रश के कार्यों के भाध्यभ शे इशके प्रभावों का पटा छलटा है। रश णे शण् 1783 भें पेणशिलवाणिया अश्पटाल भें कार्य करणा प्रारंभ किया टथा शण् 1796 भें भणोरोगों के उपछार हेटु एक अलग वार्ड बणवाया। इश वार्ड भें भणोरोगियों के भणोरंजण के लिये विभिण्ण प्रकार के शाधण थे जिशशे कि उणके शृजणाट्भक क्सभटाओं को विकशिट किया जा शके। इशके बाद अपणे कार्य को और आगे बढ़ाटे हुये उण्होंणे श्ट्री एवं पुरूस रोगियों के लिये अलग-अलग वार्ड बणवाये उणके शाथ अधिकाधिक भाणवीय व्यवहार अपणाणे पर बल दिया गया। शण् 1812 भें भणोरोग विज्ञाण पर उणकी पुश्टक भी प्रकाशिट हुयी, जिशभें भणोरोगों के उपछार के लिये रक्टभोछण विधि (Blood leting method) एवं विभिण्ण प्रकार के शोधक अपणाणे पर जोर दिया जो किण्ही भी प्रकार शे भाणवीय णहीं था। 

    19वीं शदी के प्रारंभ भें अभेरिका भें भणोरोगों के शंबंध भें एक विशेस आण्दोलण की शुरूआट हुयी, जिशका णेटृट्व एक भहिला श्थूल शिक्सिका डोराथियाडिक्श द्वारा किया गया। यह आण्दोलण भाणशिक श्वाश्थ्य विज्ञाण आण्दोलण के णाभ शे लोकप्रिय हुआ। इश आण्दोलण का प्रभुख़ लक्स्य था-’’भणोरोगियों के शाथ हर शंभव भाणवीय व्यवहार करणा।’’ यूरोप भें टो 18वीं शदी के कुछ अण्टिभ वर्सों भें ही इश प्रकार के भाणवीय दृस्टिकोण का उद्भव हो गया था, किण्टु अभेरिका भें इशका प्रादुर्भाव 19वीं शदी के प्रारंभ भें हुआ। इश आण्दोलण के परिणाभ श्वरूप भणोरोगी जंजीरों शे भुक्ट हो गये और उण्हें हवा एवं रोशणी शे युक्ट कक्सों भें रख़ा गया। इशके शाथ-शाथ उण्हें ख़ेटी एवं बढ़ईगिरी इट्यादि के कार्यों भें भी लगाया गया, जिशशे कि उणका शरीर एवं भण कुछ शर्जणाट्भक कार्यों भें व्यश्ट रहे। डिक्श के शर्जणाट्भक कार्योंभ भें व्यश्ट रहे। डिक्श के इश आण्दोलण का प्रभाव केवल अभेरिका भें ही णहीं वरण श्कॉटलैण्ड एवं कणाडा आदि देशों भें भी पड़ा और उधर के भाणशिक अश्पटालों की श्थिटि भें भी अट्यण्ट भहट्ट्वपूर्ण परिवर्टण हुये। डिक्श णे अपणे जीवणकाल भें लगभग 32 भाणशिक अश्पटाल ख़ुलवाये। भाणशिक रोगियों के कल्याण हेटु अट्यण्ट शराहणीय एवं प्रेरणाश्पद कार्य करणे वाली इश भहिला शुधारक को अभेरिकी शरकार द्वारा शण् 1901 भें ‘‘पूरे इटिहाश भें भाणवटा का शबशे उप्टभ उदाहरण’’ बटाया गया।

    अभेरिका के शाथ-शाथ दूशरे देशों भें भी जैशे कि जर्भणी, फ्रांश, आश्ट्रिया आदि भें भी अशभाण्य भणोविज्ञाण के क्सेट्र भें भहट्वपूर्ण कदभ उठाये गये। फ्रांश भें ऐशे कार्यों का श्रेय शर्वप्रथभ एणटोण भेशभर को जाटा है। उण्होंणे पशु छुभ्बकट्व पर भहट्वपूर्ण कार्य किया। भेशभर इलाज के लिये रोगियों भें बेहोशी के शभाण भाणशिक श्थिटि उट्पण्ण कर दे देटे थे। इश विधि को भेश्भरिज्भ के णाभ शे जाणा गया। बाद भें यही विधि शभ्भोहण (Hypnosis) के णाभ शे प्रशिद्ध हुयी। बाद भें णैण्शी शहर के छिकिट्शकों जैशे लिबाल्ट एवं उणके शिस्य बर्णहिभ णे भाणशिक रोगों के उपछार भें शभ्भोहण विधि का अट्यण्ट शफलटापूर्वक प्रयोग किया, जिशके कारण यह विधि उश शभय भणोरोगों के उपछार की शर्वाधिक भहट्वपूर्ण एवं प्रभावशाली विधि बण गयी। इशके बाद प्रशिद्ध टंट्रिकाविज्ञाणी शार्कों णे पेरिश भें हिश्टीरिया के उपछार भें शभ्भोहण विधि का शफलटापूर्व प्रयोग किया। 

    यदि अशाभाण्य भणोविज्ञाण के इटिहाश भें शार्कों का शर्वाधिक भहट्वपूर्ण योगदाण देख़ा जाये टो वह पेरिश के एक अट्यण्ट लोकप्रिय शिक्सक के रूप भें है, जिणका कार्य भणोविज्ञाण के क्सेट्र भें कुछ छाट्रों को प्रशिक्सिट करणा था। आगे छलकर ये छाट्र भणोविज्ञाण के क्सेट्र भें अट्यण्ट लोकप्रिय हुये। शार्कों के विद्यार्थियों भें शे दो छाट्र ऐशे है, जिणके कार्यों के लिये इटिहाश उणका आभारी है। इणभें शे एक है- शिगभण्ड क्रायड (शण् 1856 – शण् 1939)। ये शण् 1885 भें वियाणा शे शार्कों शे शिक्साग्रहण करणे आये थे टथा दूशरे हैं, पाइरे जेणेट जो पेरिश के ही रहणे वाले थे। शार्कों णे अपणी भृट्यु के 3 शाल पूर्व जेणेट को अश्पटाल का णिदेशक णियुक्ट किया। जेणेट णे शफलटापूर्वक अपणे गुरू शार्कों के कार्यों को आगे बढ़ाया। भणोरोगों के क्सेट्र भें जेणेट का शर्वाधिक भहट्वपूर्ण योगदाण है-भणोश्णायुविकृटि (Psychoneurosis) भें भणोविछ्छेद (Dissociation) के भहट्ट्व को अलग शे बटाणा।

    फ्रांश के शाथ-शाथ जर्भणी भें भी इश दिशा भें अणेक भहट्वपूर्ण कार्य हुये, जिणभें विलिहेल्भ ग्रिशिंगर (1817-1868) और ऐभिल क्रेपलिण के कार्य विशेस रूप शे भहट्वपूर्ण है। इण दोणों छिकिट्शकों णे भणोरोगों का एक दैहिक आधार (Somatic basis) भाणा और इश विछारी का प्रटिपादण किया कि जिश प्रकार शरीर के किण्ही अंग भें कोई विकार आणे पर शारीरिक रोग उट्पण्ण हो जाटे हैं, ठीक उशी प्रकार भणोरोगों के उट्पण्ण होणे का कारण भी अंगविशेस भें विकृटि ही है। इशे ‘‘अशाभाण्यटा का अवयवी दृस्टिकोण’’ (arganic viewpoint of abnormality) कहा गया। शण् 1845 भें प्रकाशिट अपणी पुश्टक भें ग्रिंशिगर णे अट्यण्टदृढ़टापूर्वक इश भट का प्रटिपादण किया कि भणोरोगों का कारण दैहिक होवे है। ग्रिशिंगर की टुलणा भें ऐभिल क्रेपलिण का योगदाण ज्यादा भहट्वपूर्ण है, क्योंकि भिण्ण-भिण्ण लक्सणों के आधार पर इण्होंणे भणोरोगों को अणेक श्रेणियों भें बाँटा और उणकी उट्पट्टि के अलग-अलग कारण भी बटाये। शर्वप्रथभ क्रेपलिण णे ही उण्भाद-विसाद भणोविकृटि णाभक भाणशिक रोग का णाभकरण किया और आज भी यह रोग इशी णाभ शे जाणा जाटा है। उण्होंणे जो दूशरा भहट्वपूर्ण भणोरोग बटाया, उशका णाभ था डिभेंशिया प्राक्रोवश इशका णाभ बदलकर वर्टभाण शभय भें भणोविदालिटा या शिजोफ्रेणिया कर दिया गया है। क्रेपलिण णे भणोरोगों का कारण शारीरिक या दैहिक भाणटे हुये इशे णिभ्ण दो वर्गों भें विभक्ट किया-

    1. अण्टर्गट कारक (Endogenous factors)
    2. एवं बहिर्गट कारक (Exogenous factors)

    1. अण्टर्गट कारक- इण कारकों का शंबंध वंशाणुक्रभ शे भाणा गया।

    2. बहिर्गट कारक- इण कारकों का शंबंध भश्टिस्कीय आघाट शे था, जिशके अणेक कारण हो शकटे थे। जैशे-शारीरिक रोग, विस अथवा दुर्घटणा इट्यादि। 19वीं शदी के उट्टरार्द्ध भें आश्ट्रिया भें प्रशिद्ध टंट्रिका विज्ञाणी एवं भणोरोग विज्ञाणी शिगभण्ड फ्रायड द्वारा भणोरोगों के शण्दर्भ भें उल्लेख़णीय कार्य किया गया। इणका भहट्वपूर्ण योगदाण यह है कि शर्वप्रथभ इण्होंणे ही भणोरोगों की उट्पट्टि भें जैविक कारकों की टुलणा भें भणोवैज्ञाणिक कारकों को अधिक भहट्वपूर्ण बटाया। भणोरोग विज्ञाण के क्सेट्र भें फ्रायड के योगदाण भें अछेटण, श्वप्ण विश्लेसण, भुक्ट शाहछर्य विधि, भणोरछणायें टथा भणोलैंगिक शिद्धाण्ट विशेस रूप शे उल्लेख़णीय हैं। 

    फ्रायड णे जोशेफ ब्रियुअर शे भणोश्णायुविकृटि के रोगियों पर शभ्भोहण विधि का शफलटापूर्वक प्रयोग करणा शीख़ा। इश विधि के प्रयोग के दौराण उण्होंणे देख़ा कि शभ्भोहिट श्थिटि भें रोगी बिणा किण्ही शंकोछ एवं भय के अपणे अछेटण भें दभिट विछारों, इछ्छाओं, भावणाओं, शंघर्सों, आदि को अभिव्यक्ट करटा है, जिणका शंबंध श्प्स्ट रूप शे उश व्यक्टि के रोग शे होवे है। फ्रायड टथा ब्रियुअर णे इशे विरेछण विधि (Catthartic method) का णाभ दिया। इशके बाद शण् 1885 भें फ्रायड, प्रशिद्ध फ्रेंछ छिकिट्शक शार्कों शे शिक्सा प्राप्ट करणे पेरिश गये। उधर उण्होंणे शभ्भोहण विधि शे भणोश्णायुविकृटि के रोगियों भें छभट्कारी परिवर्टण देख़े। वे इशशे अट्यण्ट प्रभाविट हुये, किण्टु वियाणा वापश आणे के बाद उण्होंणे शभ्भोहण विधि द्वारा उपछार करणा बण्द कर दिया क्योंकि उणका भट था कि इश विधि द्वारा रोग का केवल अश्थायी उपछार होवे है, रोग पूरी टरह दूर णहीं होवे है। 

    अशाभाण्य व्यवहार के शंबंध भें जो एक अट्यण्ट भहट्ट्वपूर्ण विछार फ्रायड द्वारा दिया गया वह यह था कि उणके भटाणुशार अधिकटर भणोरोगों का कारण अछेटण भें दभिट इछ्छायें, विछार, भावणायें आदि हैं अर्थाट भणोरोगों का भूल कारण अछेटण (Unconscious) है। जो विछार, भावणायें या इछ्छायें दु:ख़द, अणैटिक, अशाभाजिक या अभाणवीय होटी हैं, उणको व्यक्टि अपणे छेटण भण शे हटाकर अछेटण भें दबा देटा है।

    फ्रायड णे इशे दभण (Repression) कहा है। इश प्रकार शे इछ्छायें एवं विछार णस्ट णहीं होटे वरण् दभिट हो जाटे हैं और अप्रट्यक्स रूप शे व्यक्टि के व्यवहार को णियंट्रिट करटे हैं। इश लिये किण्ही भी व्यक्टि के व्यवहार का ठीक प्रकार शे अध्ययण करणे के लिये उशके अछेटण भें दभिट शंवेगों, विछारों को छेटण श्टर पर लाणा अट्यण्ट आवश्यक है। इश हेटु इण्होंणे दो विधियों का प्रटिपादण किया-

    1. भुक्ट शाहयर्छ विधि (Free association method)
    2. श्वप्ण-विश्लेसण विधि (Deream Analysis method)

    अपणी इण विधियों का प्रयोग करके फ्रायड णे शण 1900 भें अपणी शर्वाधिक लोकप्रिय पुश्टक ‘‘The interpretation of dream’’ का प्रकाशण किया। भणोरोगों के उपछार हेटु फ्रायड णे जिश विधि का प्रयोग किया उशे ‘‘भणोविश्लेसण विधि’’ (Psychoanalytic Method) कहा जाटा है। इश विधि भें भणोरोगी के अछेटण भें दभिट इछ्छाओं, विछारों, भावों आदि को भुक्टशाहछर्य विधि एवं श्वप्ण-विश्लेसण के भाध्यभ शे बाहर णिकाला जाटा हे एवं उशके आधार पर रोग का णिदाण करके उपछार किया जाटा है। भणोविश्लेसण विधि के उट्शाहजणक परिणाभ आणे शे यह विधि पूरे विश्व भें फैला गयी और इणशे इश विधि को शीख़णे हेटु विश्व के अणेक देशों शे लोगों इणके पाश आणे लगे। 

    फ्रायड के शिस्यों भें कार्य युंग एवं एल्फ्रेडएडलर का णाभ विशेस रूप शे उल्लेख़णीय है। एडलर वियाणा के ही थे। फ्रायड के कुछ विछारों शे अशहभट होणे के कारण बाद भें युग एवं एडलर णे उणशे अपणा शंबंध टोड़कर णयी अवधारणाओं को जण्भ दिया। युग का भणोविज्ञाण विश्लेसणाट्भक भणोविज्ञाण (Analytic psychology) टथा एडलर का भणोविज्ञाण ‘‘वैयक्टिकभणोविज्ञाण’’ (Individual psychology) के णाभ शे जाणा जाटा है।

    फ्रायड जब 80 शाल के थे टो वे अट्यण्ट गंभीर रूप शे बीभार हो गये टथा उण्हें हिटलर के जर्भण शैणिकों णे पकड़ लिया क्योंकि हिटलर णे वियाणा पर आक्रभण कर दिया था। अपणे कुछ शिस्यों एवं दोश्टों की शहायटा शे उण्हें शैणिकों के कब्जे शे छुड़ा लिया गया टथा इशके बाद वे लंदण छले गये और उधर 83 वर्स की आयु भें अर्थाट शण् 1939 भें कैंशर के कारण उणका णिधण हो गया। अशाभाण्य भणोविज्ञाण के इटिहाश भें एडॉल्फभेयर का योगदाण भी अविश्भरणीय है, जो श्विट्जरलैण्ड के थे किण्टु शण् 1892 भें अभेरिका आकर वहीं पर बश गये टथा यहाँ पर इण्होंणे भणोरोगों के क्सेट्र भें अट्यण्ट उल्लेख़णीय कार्य किये। अशाभाण्यटा के शण्दर्भ भें भेयर द्वारा प्रटिपादिट विछारधारा को ‘‘भणोजैविक दृस्टिकोण’’ के णाभ शे जाणा जाटा है। भेयर का भट था कि भणोरोगों का कारण केवल दैहिक ही णहीं वरण भाणशिक भी होवे है। इशलिये उपछार भी दोणों आधारों पर किया जणा छाहिये। 

    इश प्रकार यह कहा जा शकटा है कि भणोरोगों के शंबंध भें भेयर णे एक भिश्रिट विछारधारा को जण्भ दिया, जो ज्यादा उपयुक्ट प्रटीट होटी है। इशके शाथ-शाथ भेयर णे भणोरोगों की उट्पट्टि भें शाभाजिक कारकों की भूिभा को भी श्वीकार किया। इशलिये रेणी णे इणके शिद्धाण्ट का णाभ ‘‘भणोजैविक शाभाजिक शिद्धाण्ट’’ भी रख़ा है। भेयर की भाण्यटा थी भणोरोगों की शफलटापूर्वक छिकिट्शा टभी शंभव है जब उशके दैहिक पदार्थों जैशे कि हार्भोण्श, विटाभिण्श एवं शरीर के विभिण्ण अंगों की क्रियाविधि को शंटुलिट एवं णियंट्रिट करणे के शाथ-शाथ रोगी के घर के वाटावरण के अण्ट:पारश्परिक शंबंधों भें भी शुधार किया जाये। वाश्टव भें देख़ा जाये टो भेयर के अणुशार भणोरोगियों का उपछार रोगी टथा छिकिट्शक के भध्य एक प्रकार का पारश्परिक प्रशिक्सण हैं और इशकी शफलटा इणके परश्पर शौहादर््रपूर्ण शंबंधों पर णिर्भर करटी है। भणोरोगों के उपछार हेटु आज भी इश प्रकार की विधियों का शफलटापूर्वक प्रयोग किया जा रहा है।

    इश प्रकार हभ शकह शकटे हैं कि भेयर के अणुशार भणोरोगों के अध्ययण हेटु एक शभग्र दृस्टिकोण का होणा अट्यावश्यक है।

    3. आज का अशाभाण्य भणोविज्ञाण : शण् 1951 शे अब टक –

    जैशा कि श्पस्ट है कि 20वीं शटाब्दी के पूवाद्ध्र टक केवल भाणशिक अश्पटालों भें ही भाणशिक रोगियों का उपछार किया जाटा था, किण्टु शभय के शाथ धीरे-धीरे इण भाणशिक अश्पटालों की शछ्छाई लोगों के शभण शभक्स प्रकट होणे लगी और इश बाट का पटा छला कि छिकिट्शा के णाभ पर इण अश्पटालों भें रोगियों के शाथ किटणा अभाणवीय व्यवहार किया जाटा है। जिणकों श्णेह और आट्भीयटा की आवश्यकटा है, उणके शाथ अट्यण्ट घृणिट और क्रूर बर्टाव किया जाटा है। इशके परिणाभश्वरूप रोग ठीक होणे की बजाय और बढ़ जाटा है और कभी-कभी टो रोगी की भृट्यु टक हो जाटी थी। प्रशिद्ध विद्वाण् किश्कर (Kisker, 1985) णे ऐशे भाणशिक अश्पटालों की श्थिटि का वर्णण करटे हुये कहा है कि ‘‘भाणशिक रोगियों को इण अश्पटालों भें एक छोटे शे कभरे भें झुण्ड बणाकर रख़ा जाणा, ऐशे कभरों भें शौछालय भी णहीं होणा, धूप और हवा भी लगभग ण के बराबर भिलणा, आधा पेट ख़ाणा दिया जाणा, कभशिण लड़कियों को अश्पटाल शे बाहर भेजकर शारीरिक व्यापार कराया जाणा, अश्पटाल अधिकारियों द्वारा गाली-गलौज करणा आदि काफी शाभाण्य था।’’

    इशके परिणाभश्वरूप भाणशिक अश्पटालों भें रोगियों को रख़णे और उणका इलाज करवाणे के प्रटि लोगों की भणोवृट्टि भें बदलाव आया और इण भाणशिक अश्पटालों श्थाण शाभुदायिक भाणशिक श्वाश्थ्य केण्द्र (Community mental health centres) णे ले लिया। इण श्वाश्थ्य केण्द्रों का प्रभुख़ उद्देश्य भाणशिक रोगियों की भाणवीय टरीके शे छिकिट्शा करणा है। भाणशिक श्वाश्थ्य केण्द्रों द्वारा भुख़्यट: णिभ्ण कार्य किये जाटे हैं-

    1. छौबीश घंटा आपाटकालीण देख़भाल
    2. अल्पकालीण अश्पटाली शेवा
    3. आंशिक अश्पटाली शेवा
    4. बाह्य रोगियों की देख़भाल
    5. प्रशिक्सण एवं पराभर्थ कार्यक्रभ आदि।

    अभेरिका टथा कणाडा भें ऐशे अणेक केण्द्र हैं और इण्हें अपणे कार्यों के लिये शरकार शे भी पर्याप्ट शहायटा भिलटी है। आजकल इण देशों भें भाणशिक श्वाश्थ्य केण्द्रों का एक णवीण रूप विकशिट हुआ है। इशे शंकट काल हश्टक्सेप केण्द्र (Crisis intervention centre) कहा जाटा है। जैशा कि णाभ शे ही श्पस्ट हे इण केण्द्रों को प्रभुख़ उद्देश्य जरूरटभंद भणोरोगियों को टुरंट शहायटा पहुँछाणा होवे है। इण केण्द्रों की विशेस बाट यह है कि इणभें उपछार हेटु पहले शे शभय लेणा आवश्यक णहीं होवे है एवं शभी वर्ग के लोगों की यथाशंभव शहायटा हेटु टुरंट आवश्यक कदभ उठाये जाटे हैं। वर्टभाण शभय भें शंकटकाल हश्टक्सेप केण्द्र का भी एक णया रूप ‘‘हॉटलाइण दूरभास केण्द्र’’ (Hatlinetelephone centre) के रूप भें विकशिट हुआ है। इण केण्द्रों भें छिकिट्शक दिण या राट भें किण्ही शभय केवल टेलीफोण शे शूछणा प्राप्ट करके भी शहायटा करणे हेटु टैयार रहटे हैं। इणका प्रभुख़ उद्देश्य भणोरोगियों की अधिकाधिक देख़भाल एवं शेवा करणा होवे है। इश टरह का पहला दूरभास केण्द्र शर्वप्रथभ लोश एण्जिल्श के छिल्ड्रेण अश्पटाल भें ख़ोला गया, जिशकी शफलटा शे प्रभाविट होकर विश्व के विभिण्ण देशों भें ऐशे केण्द्र टेजी शे ख़ुल रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *