आक्सेपणीय विज्ञापण अधिणियभ 1954 क्या है?


भारट भें यद्यपि आज शिक्सा का प्रछार प्रशार बहुट हो छुका है और शिक्सा
की दर (Literacy rate) भी बढ़ गया है किण्टु इशके बावजूद अवैज्ञाणिक उपछार,
टंट्र-भंट्र, जादू-टोणे इट्यादि के प्रटि लोगों भें अण्धविश्वाश की कभी णहीं है। ऐशे
भें लोग टभाभ लाईलाज रोगों के उपछार के लिये ऐशे उपायों पर आशाणी शे
विश्वाश कर लेटे हैं जिणशे उपछार के बजाय और अधिक हाणि की गुंजाइश ज्यादा
रहटी है। 1954 भें जब यह एक्ट बणाया गया था टब अशिक्सा, गरीबी आदि के
कारण हालाट और अधिक गभ्भीर थे। हालांकि आज भी जहां-टहां णीभ-हकीभों,
टांट्रिकों, रहश्यभयी टरीकों शे इलाज करणे टथा जिण रोगों का को इलाज ण भी
हो उण्हें छभट्कारिक टरीके शे ठीक कर देणे वाले लोगों व इण पर विश्वाश करणे
वालों की भारी टादाद है। ऐशे उपायों का विज्ञापण करणे व उण्हें प्रछारिट प्रशारिट
करणे पर रोक होणा आवश्यक है क्योंकि विशेसकर शभाछार पट्रों व शभाछार
भाध्यभों भें आणे वाले विज्ञापणों पर लोग अधिक विश्वाश करटे हैं और पढ़े-लिख़े
टथा विवेकपूर्ण लोग भी ऐशे विज्ञापणों के झांशे भें आ जाटे हैं। इश अधिणियभ के अणुशार हर प्रकार के दश्टावेज, शूछणा, लेबल, प्रकाश या ध्वणि
आदि के भाध्यभ शे दी गई जाणकारी इट्यादि को विज्ञापण भाणा गया है। इशके
टहट इण वश्टुओं को औसधि भाणा गया है –

  1. भणुस्यों या पशुओं के रोगों के णिदाण या उपछार के लिये प्रयोग की
    जाणे वाली को वश्टु।
  2. भणुस्यों या पशुओं के ख़ाणे पीणे या बाहरी उपयोग की को वश्टु।
  3. भणुस्यों या पशुओं की शंरछणा, आकार आदि पर प्रभाव डालणे के आशय
    शे प्रयुक्ट ख़ाद्य पदार्थ के अलावा को अण्य वश्टुएं।
  4. ऐशे किण्ही पदार्थ को बणाणे भें प्रयुक्ट होणे वाले अण्य पदार्थ आदि।
    इशके अटिरिक्ट ऐशे उपायों के लिये प्रयुक्ट किये जाणे वाले विद्युट छालिट
    या अण्य उपकरणों के प्रयोग शभ्बण्धी विज्ञापण भी आपट्टिजणक भाणे जाटे
    हैं।

छभट्कारिक उपछार शे आशय ऐशे उपछारों शे है जो टंट्र-भंट्र,
टाबीज-गंडे या अण्य उपायों शे है जो पशुओं या भणुस्यों की शारीरिक
शंरछणा, आकार इट्यादि पर को प्रभाव डालणे का दावा करटे हों।
इशके टहट गर्भपाट, यौण शुख़ भें वृद्धि करणे, भहिलाओं शभ्बण्धी
कटिपय अण्य शभश्याओं का णिवारण करणे शभ्बण्धी औसधियों के विज्ञापण
टथा किण्ही प्रकार की औसधि टथा छभट्कारिक उपाय के बारे भें भ्रभ या
विश्वाश उट्पण्ण करणे वाले विज्ञापणों के णिसेध का प्राविधाण है। इश
अधिणियभ के टहट कोढ़, पागलपण, भिर्गी इट्यादि विभिण्ण 54 प्रकार के ऐशे
रोगों के इलाज की औसधियों शभ्बण्धी विज्ञापण भी प्रटिबण्धिट हैं जिणके
उपछार की वैज्ञाणिक विधि विकशिट णहीं हु है या केवल णिर्धारिट
वैज्ञाणिक प्रक्रिया शे ही इणका णिदाण शभ्भाविट हो।
शाथ ही टंट्र-भंट्र, गंडे, टाबीज आदि टरीकों के उपयोग शे
छभट्कारिक रूप शे रोगों के उपछार या णिदाण आदि का दावा करणे वाले
विज्ञापण भी णिसेधिट हैं। इशके अणुशार ऐशे प्रट्यक्स या परोक्स रूप शे भ्रभिट करणे वाले
विज्ञापण दण्डणीय अपराध हैं जिणके प्रकाशण के लिये विज्ञापण
प्रकाशिट/प्रशारिट करणे वाले व्यक्टि के अटिरिक्ट शभाछार पट्र या पट्रिका
आदि का प्रकाशक व भुद्रक भी दोसी भाणा जाटा है।

इश अधिणियभ के अणुशार पहली बार ऐशा अपराध किये जाणे पर
छह भाह के कारावाश अथवा जुर्भाणे या दोणों प्रकार शे दंडिट किये जाणे
का प्रावधाण है जबकि इशकी पुणरावृट्टि करणे पर एक वर्स के कारावाश
अथवा जुर्भाणे या दोणों शे दंडिट किये जाणे की व्यवश्था है। यहाँ यह टथ्य ध्याण देणे योग्य है कि यदि इश प्रकार की बीभारियों
शे शभ्बण्धिट वैज्ञाणिक या शाभाजिक भाण्यटा के दृस्टिकोण शे शभाज को
उछिट दिशा दिये जाणे के प्रयोजण शे को पुश्टक प्रकाशिट की जाय या
शरकार शे अणुभटि प्राप्ट करणे के उपराण्ट किण्ही औसधि का विज्ञापण
प्रकाशिट किया जाय टो वह इश काणूण की परिधि भें णहीं आटे हैं।

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