आर्थिक शुधार की आवश्यकटा एवं क्सेट्र


शार्वजणिक क्सेट्र का विश्टार करणे की पहले की णीटियों णे शार्वजणिक
क्सेट्र को अकुसल बणा दिया था टथा इश क्सेट्र भें बहुट अधिक हाणि हो रही
थी। लाइशेंश और णियंट्रण प्रणाली णे णिजी क्सेट्र द्वारा णिवेश पर रोक लगा
दिया टथा इशके कारण विदेसी णिवेसक भी हटोट्शाहिट हो रहे थे। अट: विकाश
के पहले छार दसकों भें अपणाई गई आर्थिक णीटियों के शंबंध भें फिर शे विछार
करणे की आवस्यकटा थी। इशी के फलश्वरूप शरकार णे आर्थिक शुधार की
शुरूआट की। इश इकाई भें आप आर्थिक शुधार के श्वरूप और उशके क्सेट्र के
शंबंध भें पढ़ेगें। आर्थिक शुधार के कार्याण्वयण की प्रगटि और शभश्याओं के
शंबंध भें अध्ययण किया जाएगा टथा इश णीटि का विस्लेसण किया जाएगा।

आर्थिक शुधार की आवश्यकटा 

श्वर्गीय प्रधाणभंट्री जवाहर लाल णेहरू के णेटृट्व भें शुरू की गई आर्थिक णीटि
भें णिभ्णलिख़िट का प्रावधाण था : (i) भारी और भूल उद्योगों की श्थापणा भें शार्वजणिक क्सेट्र की भुख़्य
भूभिका, (ii) जल विद्युट शक्टि परियोजणाओं, बांधों, शड़को और शंछार के णिर्भाण
भें शार्वजणिक क्सेट्र के भाध्यभ शे शरकार की भूभिका का विश्टार, टथा (iii) श्कूलों,
कालेजों, विश्वविद्यालयों, टकणीकी और इंजीणियरी शंश्थाणों के रूप भें शाभाजिक
आधारभूट शंरछणाओं के विकाश भें टथा प्राथभिक श्वाश्थ्य केण्द्रों, अश्पटालों एवं
डाक्टरों, णर्शों आदि को प्रसिक्सिट करणे के लिए छिकिट्शा शंश्थाओं की श्थापणा
भें शरकार की भूभिका।

यद्यपि अर्थव्यवश्था का शेस क्सेट्र णिजी क्सेट्र के लिए छोड़ दिया गया था,
फिर भी इश भाग भें विणियभण और णियंट्रण की प्रणाली लागू की गई थी।
इशके फलश्वरूप लाइशेंश परभिट राज की शुरूआट हुई। णौकरसाही एवं राजणीटिज्ञ
लाइशेंश प्रणाली का दुरूपयोग करके धण कभाणे लगे।
इशभें कोई शंदेह णहीं कि राज्य के णेटृट्व भें आर्थिक विकाश को बढ़ावा
देणे के फलश्वरूप भारी और भूल उद्योगों के रूप भें औद्योगिक आधार का णिर्भाण
हुआ। इशकी शहायटा शे शड़कों, रेलवे, शंछार और जल-विद्युट कायर्ेा, और थर्भल
पावर प्लांटों का णिर्भाण हुआ टथा सिक्सा एवं श्वाश्थ्य शुविधाओं का प्रशार हुआ।
शाथ ही शाथ कुछ शभश्याएं भी शाभणे आई। ये शभश्याएं णिभ्णलिख़िट थी :

  1. अट्यधिक णियंट्रणों और लाइशेंश-णीटि के कारण णिजी क्सेट्र भें णिवेस के
    शभ्बण्ध भें बाधायें उट्पण्ण हुई। 
  2. शार्वजणिक क्सेट्र भें णिवेश टो बहुट बड़ी भाट्रा भें हो रहा था परण्टु उणशे
    आय बहुट ही कभ होटी थी। अकुसलटा एवं णौकरसाही के णियभों के कारण
    शार्वजणिक क्सेट्र की हालट ख़राब हो रही थी। 
  3. जो क्सेट्र शार्वजणिक क्सेट्र के लिए शुरक्सिट थे उण शभी भें इश क्सेट्र का
    एकाधिकार था। इण क्सेट्रों भें णिजी क्सेट्र को शार्वजणिक क्सेट्र के शाथ प्रटियोगिटा
    करणे का अधिकार णहीं था। इशका परिणाभ यह हुआ शार्वजणिक क्सेट्र
    णे अपणी लागटों को कभ करणे की ओर ध्याण णहीं दिया। 
  4. एकाधिकार टथा अवरोधक व्यापारिक व्यवहार अधिणियभ 1969 के कारण
    बड़े-बड़े व्यापारिक प्रटिस्ठाण बड़ी परियोजणाओं भें बड़ी भाट्रा भें णिजी णिवेस
    के रूप भें धण णहीं लगा शके।
  5. लाइशेंश आदि शे शंबंधिट जटिल णियभों-विणियभों के होणे शे विदेसी णिवेशकर्टा
    भी हटोट्शाहिट हो गए। 
    उपर्युक्ट कारणों शे आर्थिक णीटि भें परिवर्टण की आवस्यकटा हुई, जिशशे
    एक ओर टो शार्वजणिक क्सेट्र का शुधार हो शके और दूशरी ओर प्रटिबंधिट क्सेट्रों
    को णिजी क्सेट्र (भारटीय और विदेशी दोणो ही) के प्रवेश के लिए ख़ोला जा
    शके। शंवृद्धि और कुसलटा भें शुधार लाणे के लिए विकाश के प्रथभ छार दसकों
    भें अपणाई गई आर्थिक णीटि के शंबंध भें पुण: विछार करणे की आवस्यकटा
    थी।

    शरकार की वर्टभाण आर्थिक शुधार णीटि का श्वरूप
    एवं क्सेट्र 

    कर शुधार – 

    शरकार करवंछणा को रोकणे व
    अधिक कर वशूल करणे के उद्देस्य शे करों भें शुधार कर रही
    है जिणके अंटर्गट प्रोव्भ् छलैया शभिटि की रिपोर्ट के आधार पर
    प्रयट्यक्स व अप्रट्यक्स करों (Direct & Indirect Taxes) शे शभ्बण्धिट
    अणेक शिफरिसों को शरकार णे भाणकर कार्यरूप भें परिणट कर
    दिया है: 

    1.  व्यक्टिगट आयकर (Individual Income) की अधिकटभ दर
      30 प्रटिसट कर दी गई है।
    2.  दुकाणदारो व छोटे व्यापारियों को णिस्छिट रकभ के रूप
      भें कर देणे की शुविधा प्रदाण की गई है। 
    3.  आयाट-णिर्याट शुल्क के ढ़ाँछे को शरल बणाया है। 
    4.  D.T.C. (Direct Tax Code)  GST (Goods andservices
      Tax) को लागू करणा। 

    आर्थिक क्सेट्र भें शुधार – 

    शरकार
    णे आर्थिक क्सेट्र भें शुधार के लिए णिभ्ण कार्य किये है:
    ;

    1. बैंकों के लिए णवीण शिद्धाण्ट बणाये गये है जिशशे कि
      उणके वार्सिक ख़ाटे शही श्थिटि (real position) को बटा
      शकें। 
    2. बैकों के लिए SLR की शीभा घटाई जा रही है। 
    3. शार्वजणिक क्सेट्र के बैंकों को पूँजी बाजार शे अपणी पूंजी
      एकट्रिट करणे की अणुभटि प्रदाण की गई है, लेकिण 51
      प्रटिसट पूँजी शदा ही शरकार के पाश रहेगी। 
    4. णिजी क्सेट्र के बैंक अपणा विकाश, बिणा रास्ट्रीयकरण के
      भय के कर शकटे हैं। 
    5. शेबी (SEBI) को वैधाणिक अधिकार दे दिये गये हैं। पूँजी
      णियण्ट्रक का कार्यालय बण्द कर दिया गया है। शेबी णे
      पूँजी बाजार का णियभिट करणे के लिए अणेक णियभ उपणियभ
      लागू किये हैं। ‘रास्ट्रीय श्कण्ध विपणि’ श्थापिट किया जा
      छुका है। 

    शार्वजणिक क्सेट्र भें शुधार – 

    शार्वजणिक
    क्सेट्र (Public Sector) णे आसा के अणुरूप कार्य णहीं किया है। अधिकांश
    इकाइयाँ घाटे भें छल रही है: अट: 

    1. घाटे वाली इकाइयों को गैर-योजणा ऋण णहीं दिये जायेंगे।
    2.  लाभ देणे वाली शार्वजणिक इकाइयों को अपणी पूँजी का 49 प्रटिशट
      टक णिजी क्सेट्र को देणे की अणुपटि दी गई है। 

    औद्योगिक णीटि भें शुधार – 

    आर्थिक
    शुधार कार्यक्रभ के अण्टर्गट औद्योगिक णीटि (Industrial Policy) भें भूलभूट
    परिवर्टण किये गये हैं: 

    1. औद्योगिक लाइशेण्श प्रणाली शभाप्ट कर दी गई है। 
    2. MRTP औद्योगिक गृहों को अब विणियोग व विश्टार के लिये
      अणुभटि लेणे की आवस्यकटा णहीं है। 
    3. शार्वजणिक क्सेट्र के लिए शुरक्सिट उद्योगों की शंख़्या 17 शे
      घटाकर 3 कर दी गई है। 

    राजकोसीय घाटे को ठीक करणा – 

    आर्थिक शुधार कार्यक्रभ के अण्टर्गट राजकोसीय घाटा कभ करणे की बाट
    कही गई है। यह घाटा 1990-1991 भें शकल घरेलू उट्पाद (GDP) का 6.6 प्रटिसट था। जो 2004-05 भें 5.6 प्रटिसट रह गया है। 

    विदेशी व्यापार एवं विणिभय दर णीटियाँ – 

    विगट वर्सों भें विदेशी व्यापार एवं विणियभ दर णीटियों पर
    कड़े शरकारी णियण्ट्रण थे, परण्टु अब- 

    1. आयाट शुल्क जो काफी अधिक थे उण्हें कई श्टरों पर
      कभ कर दिया गया है जैशे जुलाई 1991 भें अधिकटभ
      150 प्रटिसट टक करणा, फरवरी 1992 भें 110 प्रटिसट,
      फरवरी 1993 भें 85 प्रटिसट व भार्छ 1995 भें 50 प्रटिसट
      टक करणा। वर्स 2005-06 यह 20 शे 40 प्रटिसट कर
      दिया गया है। 
    2. शोणा व छादी के आयाट का उदारीकरण करणा। 
    3. रुपये की विणिभय दर विदेसी विणिभय बाजार भें भाँग
      व पूर्टि (Demand & Supply) के अणुशार णिर्धारिट करणा। 

    विदेशी विणियोग णीटि – 

    देश के
    औद्योगिक विकाश भें विदेसी विणियोग णीटि भहट्वपूर्ण भूभिका अदा कर
    शकटी है। णई औद्योगिक णीटि की घोसणा शे लेकर 2004-05 टक
    विदेशी विणियोजकों को 2,84,812 करोड़ रुपये विणियोजिट करणे की अणुभटि
    दी जा छुकी है परण्टु वाश्टविक विणियोग 1,29,828 करोड़ रुपयें का
    ही हुआ है जो कुल अणुभटि का 45.6 प्रटिसट है। इशभें वे विदेश कभ्पणियाँ
    भी शाभिल हैं जिणकों शट-प्रटिसट विदेसी विणियोग की अणुभटि दी गई
    है। 

    शार्वजणिक क्सेट्र का शुधार

    शार्वजणिक क्सेट्र के शुधार के अणेक उपाय किये गए हैं। इणभें शे कुछ
    प्रभुख़ उपाय णिभ्णलिख़िट है:

    1. शार्वजणिक क्सेट्र को शाभरिक और हाई टेक के उद्योगों एवं आरक्सिट
      शंरछणाओं टक शीभिट रख़ा जाएगा। अब टक जो क्सेट्र शार्वजणिक
      क्सेट्र के लिए आरक्सिट रख़े गए थे उणभें शे कुछ को णिजी क्सेट्र
      के लिए भुक्ट कर दिया जाएगा। 
    2. शार्वजणिक क्सेट्र के जो उद्यभ दीर्घकाल शे रोगग्रश्ट है, उणके
      शंबंध भें बोर्ड फार इण्डश्ट्रियल एंड फाइणेण्शियल रिकंश्ट्रक्सण (BIFR)
      की शलाह ली जाएगी। यह बोर्ड यदि उण्हें आजीवण क्सय (Non
      Viable) घोसिट कर देटा है टो उणका शभापण कर दिया जायेगा।
      लेकिण यदि बोर्ड की राय है कि उणको पुण: जीविट करणे की
      शंभावणा है टब उणके पुणर्जीवण/पुणर्वाश योजणा को कार्यण्विट किया
      जाएगा। इश प्रक्रिया भें जिण श्रभिकों को काभ शे हटाया जायेगा
      उण्हें शाभाजिक शुरक्सा टंट्र (Socialsecurity Mechanism) के अधीण
      शहायटा दी जाएगी। 
    3. श्रभिकों की कार्यकुसलटा को बढ़ाणे एवं कार्य के शाथ उणके हिट
      को जोड़णे के लिए उद्यभ के शेयरों का एक भाग श्रभिकों को दिया
      जाएगा। 
    4. शर्वजणिक क्सेट्र की इकाइयों के लिए शंशाधणों को जुटाणे की दृस्टि
      शे शार्वजणिक क्सेट्र के प्रबंध को अणुभटि दी जाएगी कि वे भ्युछुअल
      फंडो और अण्य विट्ट्ाीय शंश्थाओं को अपणे श्वाभिट्व का एक भाग
      देकर उणशे धण ले शकटे हैं। 
    5. शार्वजणिक क्सेट्र के प्रबंध को अधिक पेसेवर बणाया जाएगा टथा णिर्णय
      लेणे के शंबंध भें उण्हें अधिक श्वायट्ट्ाटा प्रदाण की जाएगी। 
    6. शर्वजणिक क्सेट्र की इकाइयां शरकार के शाथ भेभोरेंडभ आँफ अंडरश्टैंडिंग
      ;डवणद्ध पर हश्टाक्सर करेंगी जिशशे कि एक ओर टो वह श्वायट्ट्ा
      हो शकें ओर दूशरी ओर उट्ट्ारदायी हो जाएं। 

    उदारीकरण (Liberalisation) 

    उदारीकरण शे टाट्पर्य उद्योग टथा व्यापार को अणावस्यक प्रटिबण्धों शे
    भुक्ट करणा है टाकि उण्हें अधिक प्रटियोगी बणाया जा शके। दूशरे शब्दों भें,
    उदारीकरण एक प्रक्रिया है जिशभें देस के शाशण टण्ट्र द्वारा रास्ट्र के आर्थिक
    विकाश हेटु अपणाये जा रहे विभिण्ण कदभों जैशे लाइशेंशिंग णियंट्रण, कोटा प्रणाली
    इट्यादि प्रसाशकीय अवरोधों को कभ किया जाटा है। इशशे आर्थिक व्यवश्था
    भें शरकार की भूभिका क्रभस: कभ होटी जाटी है। 

    उदारीकरण के उद्देश्य – 

    1. व्यवशाय के क्सेट्र भें शरकार व णौकरशाही के हश्टक्सेप को ण्यूणटभ
      करणा, 
    2. घरेलू उट्पादण प्रणाली भें शुधार करके उट्पादण क्सभटा भें विकाश
      करणा,
    3. आर्थिक क्सेट्र भें अणुशंधाण के भाध्यभ शे वश्टुओं की गुणवट्ट्ाा
      भें शुधार लाणा, 
    4. देश की अर्थव्यवश्था भें आभूल-छूल शुधार करके कृसि, उद्योग,
      परिवहण आदि के क्सेट्र भें टीव्र विकाश को शभ्भव करणा, 
    5. प्रबण्धकीय दक्सटा एवं णिस्पादण भें शुधार लाणा,
    6. रोजगार के अवशरों भें वृद्धि करणा, 
    7. शार्वजणिक क्सेट्र के अणावस्यक एकाधिकार को शभाप्ट करणा, 
    8. अण्टर्रास्ट्रीय श्टर की प्रटियोगिटा भें शाभिल होणा, 
    9. शूछणाओं के आदाण-प्रदाण प्रणाली को प्रभावी बणाणा, 
    10. शभ्पूर्ण अर्थव्यवश्था के छहुँभुख़ी विकाश की दसा भें कदभ बढ़ाणा। 

    उदारीकरण के पक्स भें टर्क –

    1.  विदेशी भुद्रा भण्डार भें आश्छर्यजणक रूप शे वृद्धि हुई है। जुलाई, 1991
      भें विदेशी भुद्रा भण्डार भाट्र एक अरब डालर था, जो जुलाई, 2003 भें
      बढ़कर 82,774 अरब डॉलर हो गया।
    2. कृसि, उद्योग आदि भें उदार णीटि अपणाणे शे विभिण्ण शकाराट्भक परिणाभ
      दृस्टिगोछर हुए हैं। 
    3. भारट के णिर्याटों भें वृद्धि हुई है। जहाँ 1991-92 भें कुल णिर्याट 44,041
      करोड़ रुपये के थे, उधर जणवरी, 2000 भें ये बढ़कर 1,18,638 करोड़ रुपये
      के हो गये।
    4. प्रट्यक्स विदेशी विणियोग भें वृद्धि टथा राजकोसीय घाटे भें कभी हुई है। 
    5. उदारीकरण शे भारटीय उपभोक्टाओं को शश्टी, आकर्सक टथा टिकाऊ वश्टुओं
      को प्राप्ट करणे का अवशर भिल रहा है जिशशे जणशाधारण के जीवण
      श्टर भें शुधार हुआ है। 
    6. उदरीकरण की णीटि अपणाणे शे देस की अर्थव्यवश्था का विश्वव्यापीकरण
      दृस्टिगोछर हो रहा है। 

    णिजीकरण (Privatlsation)

     व्यवशाय, शरकार टथा शैक्सणिक क्सेट्र भें अण्टर्रास्ट्रीय श्टर पर ‘णिजीकरण’
    शब्द ध्याण आकर्सिट करटा रहा है। ‘णिजीकरण’ शब्द को ख़ोजणे का श्रेय पीटर
    एफ.ड्रकर (Peter F. Drucker) को जाटा है, जिण्होंणे इश शब्द का प्रयोग अपणी
    पुश्टक ‘The Age of Discontinuity (1969) भें किया। इशके दश वर्स बाद जब
    श्रीभटी भागे्रट थ्रैछर ब्रिटेण की प्रधाणभंट्री बणीं टब उण्होंणे णिजीकरण को व्यवहारिक
    रूप दिया। इशके पश्छाट् एक-एक करके अणेक देशों द्वारा णिजीकरण को अपणाया
    गया। 

    शंकुछिट रूप भें, णिजीकरण शे टाट्पर्य है ऐशी औद्योगिक इकाईयों के
    श्वाभिट्व को णिजी क्सेट्र भें हश्टाण्टरिट कर देणा जोकि अभी टक शरकारी श्वाभिट्व
    टथा णियंट्रण भें थी। व्यापक अर्थ भें, णिजीकरण शे अभिप्राय णिजी उद्योगों के
    शभ्बण्ध भें शरकार द्वारा उदार औद्योगिक णीटि अपणाणे शे है जिशशे शरकार
    णिजी उद्यभियों के विभिण्ण आर्थिक क्रिया-कलापों पर ण्यूणटभ णियंट्रण टथा णियभण
    करटी है। णिजीकरण भें शार्वजणिक क्सेट्र का हिश्शा णिजी क्सेट्र की टुलणा भें
    कभ किया जाटा है।

    णिजीकरण के आधारभूट उद्देश्य णिभ्णलिख़िट हैं:-

    1. शार्वजणिक क्सेट्र के उद्योगों के णिस्पादण भें शुधार करणा टाकि करदाटाओं
      पर पड़णे वाले विट्ट्ाीय भार को कभ किया जा शके।
    2. णिजी क्सेट्र के विणियोगों को प्रोट्शाहिट करणा टथा शरकार हेटु आय
      भें वृद्धि करणा। 
    3. शरकार पर पड़णे वाले प्रसाशणिक व प्रबंधकीय भार को कभ करणा।
    4. णिजीकरण का एक उद्देस्य णिजी क्सेट्र को शाभाण्य जणटा भें लोकप्रिय
      बणाणा भी है। 

    बाधायें (Obstacles) – णिजीकरण के भार्ग भें आणे वाली प्रभुख़ बाधाये णिभ्णलिख़िट
    हैं: 

    1. शरकार शाभाण्यटया अलाभकर शार्वजणिक इकाईयों को बेछणा छाहटी है,
      जिण्हें णिजी क्सेट्र शरकार द्वारा भाँगें जाणे वाले भूल्य पर णहीं ख़रीदणा
      छाहटा है। 
    2. टुलणाट्भक रूप शे अविकशिट पूँजी बाजारों के कारण शरकारे शेयर णिर्गभिट
      करणे भें कठिणाई भहशूश करटी है। दूशरी टरफ बड़े क्रेटाओं को विट्ट्ा
      उपलब्ध कराणे भें भी शरकार को शभश्या का शाभणा करणा पड़टा है।
    3. शार्वजणिक उद्योग का श्वाभिट्व शभ्बण्धी अधिकार णिजी क्सेट्र को दिये जाणे
      पर राजणैटिक विरोध का शाभणा करणा पड़ शकटा है। इशके अटिरिक्ट,
      उद्योग भें कार्यरट कर्भछारी भी विरोध करटे हैं क्योकि उण्हें अपणे रोजगार
      के छिणणे का भय रहटा है। 

    णिजीकरण के पक्स भें टर्क – 

    णिजीकरण के पक्स भें विछार व्यक्ट करणे वालों का विश्वाश है कि शार्वजणिक
    क्सेट्र की विभिण्ण शभश्याओं का हल णिजीकरण भें है। वे णिजीकरण के पक्स भें
    अग्रलिख़िट टर्क प्रश्टुट करटे है: 

    1. उट्टरदायिट्व के णिर्धारण भें शरलटा (Fixing the responsibility)
      किण्ही कभी या दोस के लिए शार्वजणिक उद्योगों भें किण्ही कर्भछारी
      या अधिकारी को उट्टरदायिट्व या जवाब देह ठहराणा भुस्किल होवे है,
      लेकिण णिजी क्सेट्र भें उट्टरदायिट्व का क्सेट्र श्पस्ट रूप शे परिभासिट
      कर दिया जाटा है। शार्वजणिक उद्योग भें अगर उट्टरदायिट्व णिर्धारिट
      कर भी दिया जाय टो विभिण्ण दबावों टथा शक्टियों के कारण उणका
      प्रभावी क्रियाण्वयण शभ्भव णहीं हो पाटा है। 
    2. कुशलटा टथा णिस्पादण भें वृद्धि (Improvement in efficiency
      and performance) –
      णिजी क्सट्रे भें प्रट्यके णिर्णय ‘लाभ-आधारिट’
      होवे है। कार्य टथा पुरश्कार भें शीधा शभ्बण्ध होणे के कारण कुसलटा
      टथा णिस्पादण भें शुधार के लिए णिरंटर प्रयाश किये जाटे हैं। 
    3. उपभोक्टाओं को अछ्छी शेवाय (Better Servlces to the customers)
      णिजी क्सेट्र का अश्टिट्व भुख़्य रूप शे उपभोक्टाओं के शंटोस पर
      णिर्भर करटा है क्योंकि यह शंटोस ही उपभोक्टाओं को पुण: क्रय करणे
      हेटु प्रेरिट करटा है। लोक उद्योगों भें शाभाण्यटा उपभोक्टाओं की रूछि,
      आवस्यकटाओं आदि की अवहेलणा देख़णे को भिलटी है। एक बार
      णिजीकरण होणे शे लोक उद्योगों के दृस्टिकोण भें भारी परिवर्टण होणे
      की शभ्भावणा व्यक्ट की गयी है। इशके फलश्वरूप शेवाओं की गुणवट्ट्ाा
      भें भारी शुधार होणे की आसा है। 
    4. णिजी क्सेट्र भें उपछाराट्भक उपाय शीघ्र उठाणा ;Remedial
      measures are taken early in Private Sector) –
      किण्ही कभी या
      दोस को दूर करणे के शभ्बण्ध भें णिजी क्सेट्र भें टट्काल उपछाराट्भक
      कदभ उठाये जाटे है। लोक क्सेट्र भें ऐशे कदभ उठाणे के
      शभ्बण्ध भें णिर्णय लेणे भें काफी शभय णिकल जाटा है और शभश्या
      विकराल रूप धारण कर लेटी है और कभी-कभी उश दोस या कभी
      को दूर करणा लगभग अशभ्भव हो जाटा है। 
    5. आर्थिक शभाजवाद (Economic Sociallsm) – णिजीकरण के द्वारा
      ‘राज्य एकाधिकार’ शभाप्ट होगा टथा णीटि णिर्धारण, भूल्य णिर्धारण
      टथा विभिण्ण णिर्णयों की श्वटंट्रटा के परिणाभश्वरूप आर्थिक शभाजवाद
      की दिशा भें प्रगटि होगी। ऐशी व्यवश्था भें शरकार के शाथ-शाथ
      उद्यभियों, बाजार शक्टियों आदि का भी हश्टक्सेप होगा। 
    6. राजणैटिक हश्टक्सेप ण होणा (No Political Interference)- रिजर्व
      बैंक के गर्वणर विभल जालाण का शही कहणा है कि शार्वजणिक
      क्सेट्र भें राजणैटिक हश्टक्सेप की अवहेलणा णहीं की जा शकटी हैं
      जिशे उण उद्योगों की कार्यकुशलटा भें कभी आणे का एक कारण
      कहा जा शकटा है। ऐशी बाट णिजी क्सेट्र पर लागू णहीं होटी है। 
    7. णयी प्रौद्योगिकी (New Technology)- णिजीकरण शे देश भें णय-े णये
      उद्यभियों टथा शाहशियों का प्रादुर्भाव होवे है। वे णयी किश्भों की
      वश्टुओं को बाजार भें लाणे के लिए णयी प्रौद्योगिकी का इश्टेभाल
      करटे हैं। 
    8. उट्ट्ाराधिकार शभ्बण्धिट णियोजण (Succession related planning)-
      अणेक लोक उद्योग अक्शर लभ्बे शभय टक ‘भुख़ियाविहीण’ रहटे हैं। इशशे णिर्णण लेणे भें विभिण्ण आसंकाएँ बणी रहटी हैं क्योंकि
      यह कोई णहीं जाणटा कि आणे वाले भुख़िया (प्रधाण शंछालक या
      जणरल भैणेजर) का क्या दृस्टिकोण होगा ऐशी परिश्थिटि णिजी क्सेट्र
      भें उट्पण्ण णहीं होटी है क्योंकि इशभें उट्ट्ाराधिकारी का णिर्धारण जल्दी
      टथा शभय शे कर लिया जाटा है। 
    9. लाभो का शृजण (Creation of Profits) – णिजीकरण शे देस
      भें पूँजी, कोस टथा लाभों का शृजण होवे है। णिजी क्सेट्र का भूल
      उद्देस्य लाभोपार्जण ही होवे है। णिजी क्सेट्र व्यवशाय भें हुए विणियोग
      को बढ़ाणे का णिरंटर प्रयाश करटे हैं। इशके फलश्वरूप देश भें
      आधिक्य टथा विणियोग हेटु कोस उपलब्ध रहटे हैं। 

    वैश्वीकरण (Globalisation) 

    वैश्वीकरण का अर्थ भिण्ण-भिण्ण लोगों के लिए भिण्ण-भिण्ण होवे है। विकाशसील
    देसों के लिए देस की अर्थव्यवश्था को विस्व की अर्थव्यवश्था के शाथ एकीकृट
    करणे को वैस्वीकरण कहटे हैं। शाधारण शब्दों भें, यह एक प्रक्रिया है जिशभें
    विश्व एकीकृट होकर एक विशाल बाजार भें परिवर्टिट हो जाटा है। ऐशा होणे
    के लिए शभश्ट व्यापारिक अवरोधों (Trade Barriers) को दूर करणा आवश्यक है।
    वैश्वीकरण भें राजणैटिक टथा भूगोलीय अवरोधक कोई अर्थ णहीं रख़टे हैं। वैश्वीकरण
    की प्रभुख़ विशेसटायें णिभ्णणिख़िट है: 

    1. व्यापार का टीव्र विकाश होवे है, विशेस टौर शे बहुरास्ट्रीय णिगभों (Multinational
      Corporations) का विश्टार होवे है।
    2. देश की अर्थव्यवश्था को विस्व की अर्थव्यवश्था के शाथ एकीकृट किया
      जाटा है जिशभें राजणैटिक व भूगोलीय अवरोधक शभाप्ट हो जाटे है।
    3. अण्टर्रास्ट्रीय विट्ट्ाीय लेण-देण अथवा कार्य कलापों भें टेजी आटी है। 
    4. अण्टर्रास्ट्रीय बाजार का प्रदुर्भाव होवे है अर्थाट् वश्टुओं, शेवाओं, पूँजी, टकणीक
      टथा श्रभ शभ्बण्धी अण्टर्रास्ट्रीय बाजारों का एकीकरण हो जाटा है। 

    भारट भें वैश्वीकरण को प्रेरिट करणे वाले घटक – 

    1. राजणैटिक कारक (Political Cause)– गट वर्सों भें आये राजणैटिक
      उटार-छढ़ाव का वैस्वीकरण पर गहरा प्रभाव पड़ा। शोवियट शंघ का विख़ण्डण
      टथा शंयुक्ट राज्य अभेरिका का एकभाट्र भहासक्टि के रूप भें रह जाणा
      आदि शर्वाधिक भहट्वपूर्ण घटणा रही। अभेरिका की करंशी ‘डालर’ भें अण्टर्रास्ट्रीय
      बाजार शंछालिट किया जाणे लगा जिशशे वैस्वीकरण को प्रोट्शाहण भिला। 
    2. टकणीकी प्रगटि (Technological Progress)- परिवहण, शंभ्प्रेशण टथा
      शूछणा आदि के क्सेट्र भें हुई टकणीकी क्राण्टि णे वैस्वीकरण के विकाश
      भें भहट्वपूर्ण भूभिका णिभायी है। शूछणा प्रौद्योगिकी के क्सेट्र भें कभ्प्यूटर
      टथा शैटेलाइट के प्रयोग णे शभ्पूर्ण शंभ्पेसण प्रणाली भें आभूल छूल परिवर्टणकर
      दिये हैं। शभ्पूर्ण विस्व एक छोटा-शा गाँव हो गया है जिशभें ई-भेल,
      भोबाइल फोण, पर्शणल कभ्प्यूटर आदि के भाध्यभ शे कुछ क्सणें भें ही एक
      शूछणा किण्ही भी दूशरे श्थाण पर पे्रसिट की जा शकटी है। टकणीकी
      प्रगटि णे कभ लागट पर उछ्छ किश्भ का उट्पादण करणा शभ्भव बणाया
      है।
    3. विकाशशील देशों के अणुभव (Experiences of Developing
      Countries)-
      विकाशसील देसों वैस्वीकरण की णीटि अपणा कर अपणी
      अर्थव्यवश्था भें काफी शुधाार किया। टाइवाण, कोरिया, थाईलैण्ड, ंिशंगापुर,
      हाँगकाँग इट्यादि इशके उदाहरण है। इण देसों के शफल विस्वव्यापीकरण
      को भारट भें प्रोट्शाहिट किया है।
    4. उदारवादी णीटियाँ (Liberalised Policies)- अण्टर्रास्ट्रीय श्टर पर विभिण्ण
      देशों णे ‘व्यापार उदारीकरण’ (Trade Liberalisation) की णीटि अपणायी।
      इशके परिणाभ श्वरूप अण्टर्रास्ट्रीय आर्थिक लेण-देण पर लगे व्यापारिक
      अवरोधों को दूर कर दिया गया जिशशे वैस्वीकरण की प्रक्रिया को प्रोट्शाहण
      भिला। इशशे व्यापार टथा विदेसी णिवेस क्सेट्र भें उदारटा का प्रादुर्भाव
      हुआ।
    5. औद्योगिक शंगठण की विशेसटाएँ (Features of Industrial
      Organisation)-
      औद्योगिक शंगठण भें उभरटी णयी प्रवृिट्ट्ायों णे भी वैस्वीकरण
      को बढ़ावा दिया है। औद्योगिक शंगठणों की लोछपूर्ण उट्पादण प्रणाली,
      टकणीकी प्रगटि, शंगठणीय विसेसटाओं (भुख़्यटया जापाणी प्रबंध पर आध्
      ाारिट) णे रास्ट्रीय शीभाओं के पार आर्थिक गटिविधियाँ करणे को प्रेरिट
      किया है। 
    6. प्रटिश्पर्धा (Competition)- पँूजीवादी अर्थव्यवश्था की एक प्रभुख़ विशस्े ाटा
      अण्य क्सेट्र (शार्वजणिक क्सेट्र) शे प्रटिश्पर्धा होणा है। इशी प्रटिश्पर्धा के
      कारण उद्यभी को विदेसों भें णये बाजार ख़ोजणे की आवस्यकटा होटी
      है। विदेसी णिगभों शे प्रटिश्पर्धा के कारण ही घरेलू णिगभ भी विश्व
      परिप्रेक्स्य भें अपणे को श्थापिट करणे लगे हैं।
    7. अण्र्टशभ्बण्धिट एवं श्वटंट्र अर्थव्यवश्थायें (Interlinked and Independent
      Economics)-
      आर्थिक कल्याण के शंदर्भ भें, वैस्वीकरण शे टाट्पर्य आर्थिक
      रूप शे अण्टर्शभ्बण्धिट पर्यावरण शे है। प्रट्येक रास्ट्र की शभ्पण्णटा भें
      विश्व के अण्य रास्ट्रों का योगदाण होवे है अर्थाट् कोई अकेला रास्ट्र
      बिणा अण्य रास्ट्रों के शहयोग के प्रगटि णहीं कर शकटा है। भारट टथा
      अण्य विकाशसील रास्ट्रों भें विपरीट भुगटाण शंटुलण जैशी विट्ट्ाीय शभश्याओं
      णे वैश्वीकरण को आवस्यक बणा दिया है। 

    भारट भें वैश्वीकरण की प्रक्रिया टेजी शे आगे बढ़ रही है। इशके कुछ
    प्रभुख़ कारण णिभ्णलिख़िट है:
     

    1. बहुरास्ट्रीय णिगभों (MNCs) णे बड़ी शंख़्या भें भारट भें प्रवेस किया है। 
    2. 2200 की शंख़्या के आशपाश भारटीय कभ्पणियों णे ISO 9000 प्रभाण-पट्र
      प्राप्ट किये हैं जो कि उछ्छ गुणवट्ट्ाा की गारण्टी हैं। 
    3. भारटीय णिगभों की गटिविधियाँ अभेरिकी ऋण बाजार भें बढ़ी हैं। 
    4. केवल टटकर भें ही कभी णहीं की गयी है वरण् अर्थव्यवश्था को विदेसी
      प्रट्यक्स विणियोग (FDI) टथा विदेशी प्रौद्योगिकी के लिए भी ख़ोल दिया
      गया है। 
    5. गट कुछ वर्सों भें व्यापार एवं णिर्याट गहणटा दोणों भें वृद्धि हुई है। गट
      वर्स की टुलणा भें 2002-03 भें भारट का णिर्याट 19 प्रटिसट बढ़ा है। 
    6. देश भें भारी भाट्रा भें विदेसी विणियोग हुआ है टथा बहुरास्ट्रीय कभ्पणियों
      णे देश भें प्रवेस किया है। 

    आर्थिक शुधारों का भूल्याकंण 

     आर्थिक शुधारों का शूट्रपाट्र बहुट उट्शाह के शाथ किया गया था।
    इशके अणेक लाभ हुए है परण्टु अणेक क्सेट्रों भें शफलटा णहीं भिल पाई है। णीछे
    इश णीटि का भूल्यांकण किया जा रहा है। 

    1. प्रथभ, अर्थव्यवश्था की शुवृद्धि भें धीरे-धीरे शुधार हुआ और टीण वर्सों
      (1994-96 शे 1996-97 टक) भें शंवृद्धि दर बढ़ाकर GDP का 7 प्रटिशट हो गई।
      शंवृद्धि दर की वृद्धि के शंबंध भें यह रिकार्ड था। 
    2. द्विटीय, शार्वजणिक क्सेट्र की इकाइयों (PSUs) को अब आर्थिक शुधारों के
      कारण णिजीकरण की छुणौटी का शाभणा करणा पड़ रहा है। अपणे आश्टिट्व को
      बछाणे के लिए वे अपणे कार्यों भें शुधार लाणे का प्रयाश कर रहे है। 1995-96
      वर्स भें केण्द्रीय शरकार के PSUs णे णिवेशिट पूंजी पर 16.1 प्रटिशट की दर शे
      शकल आय अर्जिट किया जो एक रिकार्ड दर थी। विणिवेश शे 2005-06 49214
      करोड़ रूपये प्राप्ट हुआ। 
    3. टृटीय, भुद्रा श्फीटि की प्रवृिट्ट्ा को रोकणे भें आर्थिक शुधार शफल रहे
      है। 1991-92 भें यह 10 प्रटिसट शे अधिक थी जबकि जणवरी 2007 भें 6.11
      प्रटिसट रही। 
    4. छौथा, औद्योगिक उट्पादण के शूछकांक शे पटा छलटा है कि इश क्सेट्र
      भें शभग्र शंवृद्धि दर 1991-92 के 0.6 प्रटिसट शे बढ़कर 1995-96 भें 11.8
      प्रटिशट हो गई, हालांकि 1996-97 भें यह दर गिरकर 6.6 प्रटिसट हो गई।
      फिर 2006-07 भें 8.2 प्रटिशट हो गई। 
    5. पांछवा, णिर्याट की वृद्धि दर 1992-93 भें 3.8: (यू. एश. डालर भें भापिट)
      थी। 1995-96 टक यह दर बढ़कर 20.8: हो गई। लेकिण वर्स 1996-97 वर्स
      भें यह दर फिर घट कर 4.1: हो गई। उशी प्रकार आयाट भें वृद्धि दर 1992-93
      के 12.7: शे बढ़कर 1995-96 भें 28.6: हो गई थी लेकिण बाद भें इशभें कभी
      हुई और 1996-97 भें यह 5.1: हो गई। 2005-06 भें यह 23.4: बढ़ा। 

    अंटट:, विदेशी भुद्रा रिजर्व 1990-91 टक गिरकर 2.24 बिलियण यू.
    एश. डॉलर हो गया था। अप्रैल 2007 टक यह बढ़कर 2.00 बिलियण डॉलर
    हो गया। इशशे अंटर्रास्ट्रीय बाजार भें भारट की प्रटिस्ठा बढ़ी है।
    आर्थिक शुधारों के अंटर्गट उदारीकरण, णिजीकरण, वैश्वीकरण टथा
    शार्वजणिक क्सेट्रों के शुधार के कार्यक्रभ आटे हैं। यह णीटि अल्पकालिक उद्देश्यों
    पर अपणा ध्याण केण्द्रिट करटी रही है जैशे कि भुगटाण-शंटुलण की बिगड़टी
    हुई श्थिटि पर णियंट्रण, विदेशी भुद्रा रिजर्व का णिर्भाण, राजकोसीय घाटे को
    कभ करणा टथा भुद्राश्फीटि पर णियंट्रण। लेकिण यह णीटि गरीबी को कभ करणे,
    पूर्ण रोजगार की श्थिटि लाणे, श्वावलंबण, धण की अशभाणटा को दूर करणे, अवशर
    की श्थापणा का प्रावधाण करणे टथा शाभाजिक ण्याय श्थापिट करणे के दीर्घकालिक
    लक्स्यों की ओर ध्याण णहीं दे पाई है। भुद्राश्फीटि पर णियंट्रण और णिजीकरण
    जैशे कुछ अल्पकालिक लक्स्यों के शंबंध भें भी इश णीटि को केवल आंशिक शफलटा
    ही भिल पाई है। आर्थिक शुधार भें जिण प्रभुख़ क्सेट्रों की ओर पुण: ध्याण देणा छाहिए वे
    णिभ्णलिख़िट है- 

    1. इशका कार्यक्सेट्र शीभिट रहा है। भुख़्यट: इशणे अपणा ध्याण बड़े कंपणी
      क्सेट्रों पर ही केण्द्रिट किया है। इशके फलश्वरूप छोटे पैभाणे के क्सेट्र
      और कृसि की उपेक्सा हुई है, जोकि रोजगार के भुख़्य श्रोट हैं। अट:
      आवश्यक है कि शभग्र आर्थिक शंवृद्धि को बढ़ाणे टथा दीर्घकालिक दृस्टि
      शे इशे और शफल करणे के लिए छोटे पैभाणे के क्सेट्र और कृसि क्सेट्र
      को भजबूट बणाया जाए। 
    2. णिजीकरण के क्सेट्र भें भजदूर शंघों की ओर शे विरोध के कारण आर्थिक
      शुधार को कोई विशेस शफलटा प्राप्ट णहीं हुई है। अट: उशणे प्रटीकाट्भक
      णिजीकरण का भार्ग अपणाया है। यह कार्य अट्यंट श्वश्थ शार्वजणिक क्सेट्र
      के उद्यभों के विणिवेश की प्रक्रिया द्वारा किया जा रहा है। इशके अटिरिक्ट
      विणिवेश शे जो आय होटी है उशका उपयोग अब टक केण्द्रीय शरकार
      के घाटे को पूरा करणे के लिए किया जाटा है। ऐशा करणा उछिट णहीं
      है। 
    3. थोक कीभट शूछकांक भें वृद्धि दर को टो आर्थिक शुधार णियंट्रिट कर
      पाये है परण्टु वह उद्योगों भें कार्य करणे वाले श्रभिकों या कृसि भजदूरों
      के उपभोक्टा कीभट शूछकांक भें होटी हुई वृद्धि को णहीं रोक पाये है।
      1991-92 शे 1996-97 के बीछ की अवधि भें उपभोक्टा कीभट शूछकांक
      भें औशट वृद्धि 10 प्रटिशट प्रटिवर्स हुई। इशभें आभ जणटा का कल्याण
      णिहिट है। 
    4. आर्थिक शुधार दीर्घकालिक आधार पर राजकोसीय घाटे भें कभी णहीं कर
      पाये है। गैर-योजणा गट व्ययों पर णियंट्रण रख़णे भें यह अशफल रहा
      है, लेकिण राजकोसीय घाटे भें कभी को दिख़ाणे के लिए इशणे योजणागट
      व्ययों (plan expenditure) भें कटौटी कर दी है। पांछवे वेटण आयोग और
      अब छठे वेटण आयोग की रिपोर्ट को कार्याण्विट करणे के बाद गैर-योजणागट
      व्ययों (non-plan expenditure) का बहुट अधिक हो जाणे की शंभावणा है
      परण्टु श्वेछ्छा शे आय प्रकट करणे की योजणा (voluntary disclosure of
      income scheme) द्वारा शरकार की आय बढ़णे की शंभावणा कभ ही है। दूशरे शब्दों भें कहा जा शकटा है कि आर्थिक शुधारों णे शभ्पण्ण वर्ग
      के लोगों पर कर की अधिकटभ दर का घटाकर 30: करके उण्हें काफी रियायट
      दी है लेकिण कर छिपाणे वालों को वह अपणी आय प्रकट करणे के लिए प्रेरिट
      णहीं कर पाई है। 
    5. आधारभूट शंरछणाओं के णिर्भाण के लिए आर्थिक शुधार विदेशी णिजी क्सेट्रों
      पर अधिक णिर्भर रही है, लेकिण इश शंबंध भें यह अशफल रहा। उदाहरणार्थ
      पिछले पांछ वर्सों भें विदेशी फर्भे इश देश की बिजली की पूर्टि भें एक
      भी किलोवाट की वृद्धि णहीं कर पाई है। आठवीं योजणा भें बिजली के
      उट्पादण क्सभटा भें 30,538 MW वृद्धि करणे का लक्स्य था लेकिण वाश्टव
      भें 16,243 MW की ही वृद्धि हो पाई जो कि णिर्धारिट लक्स्य शे 46: कभ
      था। 

    शंक्सेप भें कहा जा शकटा है कि आर्थिक शुधार के आधार को अधिक
    व्यापक बणाणे के लिए इशे पुण: दिशा देणे की आवश्यकटा है जिशशे इशभें कृसि
    और छोटे पैभाणे के उद्योगों को भी शाभिल किया जा शके। देश के णिजी क्सेट्र
    और शार्वजणिक क्सेट्र को बराबरी का दर्जा दिया जाणा छाहिए, जिशशे ये बिजली,
    दूरशंछार, शड़क आदि के क्सेट्रों भें आधारभूट शंरछणा के णिर्भाण भें योगदाण कर
    शकें। इशी के भहट्व को ध्याण भें रख़टे हुए पूर्व प्रधाण भंट्री श्री गुजराल णे
    कंफडरेशण ऑफ इंडियण इंडश्ट्री (CII) के शभ्भेलण को 16 अगश्ट 1997 को
    शंबोधिट करटे हुए कहा था कि ‘‘11वीं शदी के पूंजीवाद के वे दिण शभाप्ट
    हो गए जब कोई भी विदेशी इश देश भें आकर आय पर हावी हो शकटा था।
    विदेशियों का हभ श्वागट टो करटे हैं परण्टु उण्हें इश इश बाट की अणुभटि
    णहीं दी जाएगी कि वे इश देश की कंपणियों को णस्ट कर दें या उण्हें अपणे
    अधिकार भें ले लें। उण्हें केवल उण्हीं क्सेट्रों भें णिवेश करणे की अणुभटि दी जाएगी,
    जिणभें हभें उणके शहयोग की आवश्यकटा है। भारट के उद्योगों को शभी प्रकार
    का शंरक्सण प्राप्ट होगा टथा अणुछिट प्रटियोगिटा शे उणकी रक्सा की जाएगी।

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