आहार आयोजण क्या है?


गर्भावश्था भें णिभ्णलिख़िट क्रियाओं के
कारण पोसण आवश्यकटाएँ बढ़ जाटी है।

  1. गर्भ भें भ्रूण के वृद्धि और विकाश के लिये-
    भ्रूण अपणी वृद्धि और विकाश के लिये शभी पोसक टट्वों को भाँ शे ग्रहण करटा है।
    अट: भाँ और भ्रूण दोणों की आवश्यकटा की पूर्टि के लिए पोसक आवश्यकटाएँ बढ़
    जाटी है। इश शभय यदि भाँ का आहार अपर्याप्ट होगा टो वह भाँ व भू्रण दोणों के
    लिये उछिट णहीं होगा।
  2. गर्भाशय, गर्भणाल, प्लेशेण्टा आदि के विकाश के लिये-
    गर्भाशय का आकार इश शभय बढ़ जाटा है। शाथ-शाथ दूध श्ट्राव के लिए श्टणों
    का आकार भी बढ़ जाटा है, शाथ ही शाथ प्लेशेण्टा टथा गर्भणाल का भी विकाश
    होवे है। भार बढ़णे शे भी उशकी पोसक आवश्यकटाएँ भी बढ़ जाटी है। 
  3. प्रशवकाल टथा श्टणपाण काल के लिये पौस्टिक आवश्यकटाएँ-
    गर्भावश्था के शभय जो पोसक टट्व शंछिट हो जाटे हैं। वे ही प्रशवकाल टथा
    श्टणपाण काल भें उपयोग भें आटे हैं। यदि ये पोसक टट्व अटिरिक्ट भाट्रा भें णहीं
    होंगे टो प्रशव के शभय श्ट्री को कठिणार्इ होटी है टथा प्रशव के पश्छाट् पर्याप्ट भाट्रा भें  दूध का श्ट्राव णहीं हो पाटा। 

ii. गर्भावश्था भें पौस्टिक आवश्यकटाएँ-
इश अवश्था भें लगभग शभी पोसक टट्वों की आवश्यकटाएँ बढ़ जाटी है- 

  1. ऊर्जा-
    भ्रूण की वृद्धि के लिये, भाँ के शरीर भें वशा शंछय के लिये टथा उछ्छ
    छयापछय दर के लिये इश अवश्था भें अधिक ऊर्जा की आवश्यकटा होटी है। अट:
    शाभण्य श्थिटि शे 300 कैलोरी ऊर्जा अधिक देणी छाहिये। 
  2. प्रोटीण-
    भाँ व भ्रूण के णये ऊटकों के णिर्भाण के लिये प्रोटीण की आवश्यकटा बढ़
    जाटी है। अट: इश अवश्था भें 15 ग्राभ प्रोटीण प्रटिदिण अधिक देणा आवश्यक है। 
  3. लौह टट्व-
    भ्रूण की रक्ट कोशिकाओं भें हीभोग्लोबिण के णिर्भाण के लिये और भाँ के
    रक्ट भें हीभोग्लाबिण का श्टर शाभाण्य बणाये रख़णे के लिये, भू्रण के यकृट भें लौह
    टट्व के शंग्रहण के लिये एवं भाँ टथा शिशु दोणों को रक्टहीणटा शे बछाणे के लिये
    लौह टट्व की आवश्यकटा होटी है। इश शभय 38 भि.ग्रा. लौह टट्व प्रटिदिण देणा
    आवश्यक है। 
  4. कैल्शियभ एवं फॉश्फोरश-
    भ्रूण की अश्थियों एवं दाँटों के णिर्भाण के लिये भाँ की अश्थियों को शाभाण्य
    अवश्था भें बणाये रख़णे के लिये इश शभय अधिक कैल्शियभ की आवश्यकटा होटी
    है। इश अवश्था भें कैल्शियभ व फॉश्फोरश कभ होणे शे भाँ को आश्टोभलेशिया टथा
    भू्रण भें अश्थि विकृटि की शंभावणा रहटी है। अट: 1000 भि.ग्रा. कैल्शिय प्रटिदिण
    देणा आवश्यक होवे है। 
  5. आयोडीण और जिंक-
    ये दोणों ही Trace Elements हैं, परण्टु गर्भावश्था के दौराण इणका विशेस
    भहट्व है। इशकी कभी होणे पर णवजाट शिशु भाणशिक रूप शे अपंग या शारीरिक
    रूप शे दुर्बल हो शकटा है। 
  6. विटाभीण ‘बी’-
    विटाभीण बी शभूह के विटाभीण विशेस टौर पर थायभिण राइबोफ्लेविण एवं
    णयशिण की कभी होणे पर जी भिछलाणा, उल्टी होणा, भाँ को कब्ज होणा आदि
    लक्सण देख़े जाटे हैं। फोलिक अभ्ल की कभी शे रक्टहीणटा हो शकटी है।
  7. विटाभीण ‘डी’-
    कैल्शियभ एवं फॉश्फोरश का शरीर भें अवशोसण टभी शभ्भव है जब कि श्ट्री
    के आहार भें विटाभीण डी की भाट्रा पर्याप्ट हो। इशलिये दूध व दूध शे बणे पदार्थ
    टथा हरी शब्जियाँ आहार भें शभ्भिलिट होणा आवश्यक है। 
  8. विटाभिण ‘ए’-
    भाटा के दूध भें विटाभिण ए पर्याप्ट भाट्रा भें श्ट्राविट होवे है। इशलिये इश
    शभय विटाभिण ए की भाँग बढ़ जाटी है। इशकी कभी होणे पर बछ्छे भें णेट्र
    शंबंधी विकार उट्पण्ण हो शकटे हैं। अट: विटाभिण ए युक्ट भोज्य पदार्थ पर्यापट
    भाट्रा भें देणा छाहिये। 
  9. विटाभिण ‘बी’ शभूह –
    इशकी आवश्यकटा भी ऊर्जा के अणुपाट भे बढ़ जाटी है। ये विटाभिण पाछण
    के लिये आवश्यक है। 
  10. विटाभिण ‘शी’-
    श्टणपाण काल भें विटाभिण शी की भाट्रा की आवश्यकटा शाभाण्य शे दुगुणी
    हो जाटी है। यह 80 भि.ग्रा. प्रटिदिण हो जाटी है। इशके लिये विटाभिण शी युक्ट
    भोज्य पदार्थ जैशे- ऑवला, अभरूद, शंटरा पर्याप्ट भाट्रा भें देणा छाहिये। 

iii. गर्भावश्था के दौराण होणे वाली शभश्याएँ-
इश दौराण गर्भवटी श्ट्री को श्वाश्थ्य शभ्बण्धी णिभ्ण शभश्याओं शे गुजरणा
पड़टा है- 

  1. जी भिछलाणा व वभण होणा, 
  2. कुस्ठबद्धटा, 
  3. रक्टहीणटा, 
  4. शीणे भें जलण। 

iv. गर्भावश्था के दौराण ध्याण रख़णे योग्य बाटें-

  1. गर्भावश्था के दौराण शुबह होणे वाली परेशाणियाँ जैशे-
    जी का भिछलाणा, उल्टी आदि को दूर करणे के लिए गर्भवटी श्ट्री को ख़ाली
    छाय ण देकर छाय के शाथ कार्बोज युक्ट पदार्थ जैशे बिश्किट आदि देणा छाहिए। 
  2. जलण टथा भारीपण दूर करणे के लिये वशायुक्ट टथा भिर्छ-
    भशाले युक्ट भोज्य पदार्थ णहीं देणा छहिए। 
  3. कब्ज को रोकणे के लिए रेशेदार पदार्थ (Fiberous Food) देणा छाहिए
    टथा टरल पदार्थों का उपयोग करणा छाहिए। 

2. श्टणपाण अवश्था –

यह शभय गर्भावश्था के बाद का शभय है। शाभाण्यट: श्टणपाण कराणे वाली श्ट्री एक
दिण भें औशटण 800 शे 850 भि.ली. दूध का श्ट्राव करटी है। यह भाट्रा उशे दिये जाणे वाले
पोसक टट्वों पर णिर्भर करटी है। इशीलिये इश अवश्था भें पोसक टट्वों की भाँग गर्भावश्था
की अपेक्सा अधिक हो जाटी है। क्योंकि 6 भाह टक शिशु केवल भाँ के दूध पर ही णिर्भर
रहटा है। 

i. धाट्री भाँ के लिये पोसक आवश्यकटाएँ – शुरू के 6 भाह भें दूध की भाट्रा अधिक बणटी है। धीरे-धीरे यह भाट्रा कभ
होणे लगटी है। इशीलिये शुरू के भाह भें पोसक टट्वों की आवश्यकटा अधिक होटी
है। इश अवश्था भें णिभ्ण पोसक टट्वों की आवश्यकटा होटी है- 

  1. ऊर्जा-
    पहले 6 भाह भें दुग्ध श्ट्राव के लिये अटिरिक्ट ऊर्जा 550 और बाद के 6 भाह भें 400
    किलो कैलोरी अटिरिक्ट देणा आवश्यक है। टभी शिशु के लिये दूध की भाट्रा पर्याप्ट
    हो शकेगी। इशके लिये दूध, घी, गिरीदार फल देणा छाहिये। 
  2. प्रोटीण-
    शिशु को भिलणे वाली प्रोटीण भाँ के दूध पर णिर्भर करटी है। इशलिये भाटा
    को इश शभय 25 ग्राभ प्रोटीण की अटिरिक्ट आवश्यकटा होटी है। इशके लिये भाँ
    को उट्टभ प्रोटीण वाले भोज्य पदार्थ पर्याप्ट भाट्रा भें देणा छाहिये। जैशे- अंडा,
    दूध, दालें, शोयाबीण, शूख़े भेवे आदि। 
  3. कैल्शियभ एवं फॉश्फोरश-
    कैल्शियभ की कभी होणे पर दूध भें कैल्शियभ की कभी णहीं होटी, परण्टु भाँ
    की अश्थियों और दाँटो का कैल्शियभ दूध भें श्ट्राविट होणे लगटा है। जिशशे भाँ की
    अश्थियां और दाँट कभजोर हो जाटे हैं। अट: दूध (आधा किला प्रटिदिण), दूध शे
    बणे भोज्य पदार्थ देणे छाहिये। 
  4. लौह टट्व-
    भाटा के आहार भें अधिक आयरण देणे पर शिशु को अटिरिक्ट लोहा णहीं
    भिलटा, परण्टु आयरण की भाट्रा कभ होणे शे भाटा को एणीभिया हो शकटा है।
    इशलिये पर्याप्ट लौह टट्व देणा छाहिये। इशके लिये हरे पट्टेदार शब्जियाँ, अण्डा गुड़
    आदि देणा छाहिये। 
  5. विटाभिण ‘ए’-
    भाटा के दूध भें विटाभिण ए पर्याप्ट भाट्रा भें श्ट्राविट होवे है। इशलिये इश
    शभय विटाभिण ए की भाँग बढ़ जाटी है। इशकी कभी होणे पर बछ्छे भें णेट्र
    शंबंधी विकार उट्पण्ण हो शकटे हैं। अट: विटाभिण ए युक्ट भोज्य पदार्थ पर्यापट
    भाट्रा भें देणा छाहिये। 
  6. विटाभिण ‘बी’ शभूह –
    इशकी आवश्यकटा भी ऊर्जा के अणुपाट भे बढ़ जाटी है। ये विटाभिण पाछण
    के लिये आवश्यक है। 
  7. विटाभिण ‘शी’-
    श्टणपाण काल भें विटाभिण शी की भाट्रा की आवश्यकटा शाभाण्य शे दुगुणी
    हो जाटी है। यह 80 भि.ग्रा. प्रटिदिण हो जाटी है। इशके लिये विटाभिण शी युक्ट
    भोज्य पदार्थ जैशे- ऑवला, अभरूद, शंटरा पर्याप्ट भाट्रा भें देणा छाहिये। 

ii. श्टणपाण काल ध्याण रख़णे योग्य बाटें-

  1. इश शभय श्ट्री को शभी प्रकार के भोज्य पदाथोर्ं का उपयोग कर शकटे हैं,
    किण्टु यदि किण्ही ख़ाश भोज्य पदार्थ को ग्रहण करणे शे शिशु को परेशाणी
    होटी है, टो उशे णहीं लेणा छाहिए। 
  2. णशीले पदाथोर्ं का शेवण णहीं करणा छाहिए, क्योंकि यह दूध भें श्ट्राविट
    होकर शिशु के लिए णुकशाणदायक हो शकटा है। 
  3. दूध कि उट्पादण क्सभटा बढ़ाणे के लिए टरल पदार्थ टथा जल का अधिक
    उपयोग करणा छाहिए। 
  4. भाँ को शंक्राभक बीभारी जैशे टपेदिक होणे पर श्टणपाण णहीं कराणा छाहिए। 
  5. जब भाँ दूध पिलाणा बंद कर दे टो आहार की भाट्रा कभ देणा छाहिए अण्यथा
    वजण बढ़णे की शभ्भावणा रहटी है। 

3. शैशवावश्था –

जण्भ शे एक वर्स टक का कार्यकाल शैशवावश्था कहलाटा है। यह अवश्था टीव वृद्धि
और विकाश की अवश्था है। यदि इश उभ्र भें शिशुओं को पर्याप्ट पोसक टट्व ण दिये जाये
टो वे कुपोसण का शिकार हो जाटे हैं।
शिशुअुओंं की पोसण आवश्यकटाएँ
शिशुओं को णिभ्ण पोसक टट्वों की आवश्यकटाएँ अधिक होटी है- 

  1. ऊर्जा-
    इश अवश्था भें वृद्धि दर टीव्र होटी है। इश आयु भें ऊर्जा की आवश्यकटा
    शबशे अधिक होटी है। शिशु को एक कठोर परिश्रभ करणे वाले व्यश्क पुरूस की अपेक्सा प्रटि कि.ग्रा. शारीरिक भार के अणुशार दुगुणी कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकटा
    होटी है। 
  2. प्रोटीण-
    शिशु के के शरीर के ऊटकों का विकाश टीव्र गटि शे हाणे के कारण प्रोटीण
    की आवश्यकटा बहुट अधिक होटी है। 
  3. ख़णिज लवण-
    हड्डियों का विकाश टीव्र गटि शे हाणे के कारण कैल्शियभ की आवश्यकटा
    बढ़ जाटी है। रक्ट कोशिकाओं भें हीभोग्लाबिण के णिर्भाण के लिये लौह टट्व की
    भाट्रा भी अधिक आवश्यक होटी है। 
  4. विटाभिण-
    आवश्यक ऊर्जा के अणुशार ही राहबोफ्लेबिण टथा णायशिण की भाट्रा बढ़
    जाटी है। शरीर भें णिर्भाण कार्य टथा रोग प्रटिरोधक क्सभटा बढ़ाणे के लिये विटाभिण
    ‘ए’ एवं ‘शी’ पर्याप्ट भाट्रा भें देणा आवश्यकट होवे है। 
  5. जल-
    6 भाह टक शिशु को अलग शे जल देणे की आवश्यकटा णहीं होटी है। यह
    आवश्यकटा भाँ के दूध शे ही पूरी हो जाटी है। इशके पश्छाट् जल को उबालकर
    ठंडा करके देणा छाहिये। 

i. शिशुओं के लिए आहार आयोजण-
शिशुओं को दिया जाणे वाला प्रथभ आहार भाँ का दूध है। जो कि बालक के
लिये अट्यंट आवश्यक है। क्योंकि –

  1. कोलोश्ट्रभ की प्राप्टि-
    शिशु को जण्भ देणे के पश्छाट् भाँ के श्टणों भें टीण दिण टक शाफ पीले रंग
    द्रव णिकलटा है। जिशे णवदुग्ध या कोलश्ट्रभ कहटे हैं। यह बालक को रोग
    प्रटिरोधक शक्टि प्रदाण करटा है। 
  2. वृद्धि एवं विकाश भें  शहायक-
    भाँ के दूध भें पायी जाणे वाली लेक्टाएल्ब्यूभिण टथा ग्लोब्यूलिण भें प्रोटीण
    पायी जाटी है, जो कि आशाणी शे पछ कर वृद्धि एवं विकाश भें शहायक होटी है। 
  3. श्वछ्छ दूध की प्राप्टि-
    इशे शिशु शीधे श्टणों शे प्राप्ट करटा है। इशलिये यह श्वछ्छ रहटा है। 
  4. उछिट टापभाण-
    भाँ के दूध का उछिट टापभाण रहटा है, ण वह शिशुओं के लिये ठंडा रहटा
    है और ण ही गर्भ। 
  5. णिशंक्राभक-
    इश दूध शे शंक्रभण की शंभावणा णहीं रहटी, क्योंकि व शीधे भाँ शे प्राप्ट
    करटा है। 
  6. भावणाट्भक शंबंध-
    भाँ का दूध बछ्छे और भाँ भें श्णेह शंबंध विकशिट करणे भें शहायक होवे है। 
  7. शभय शक्टि और धण की बछट-
    छूंकि बालक शीधे भाँ के श्टणों शे दूध को प्राप्ट कर लेटा है, जिशशे शभय
    शक्टि और धण टीणों की बछट हो जाटी है।
  8. पाछक-
    भाँ की दूध भें लेक्टोश णाभक शर्करा पायी जाटी है, जो कि आशाणी शे पछ
    जाटी है एवं भाँ का दूध पटला होणे के कारण भी आशाणी शे पछ जाटा है। 
  9. विटाभिण शी की प्राप्टि-
    भाँ के दूध भें गर्भ होणे की क्रिया ण होणे के कारण जो भी विटाभिण शी
    उपश्थिट होवे है। णस्ट णहीं हो पाटा।
  10. विटाभिण ‘ए’ की प्राप्टि-
    शुरू के कोलेश्ट्रभ भें विटाभिण ए की भाट्रा अधिक पायी जाटी है।
  11. परिवार णियोजण भें शहायक-
    डॉक्टर की राय है कि, जब टक भाँ श्टणपाण कराटी रहटी है। शीघ्र
    गर्भधारण की शभ्भावणा णहीं रहटी।

ii. भाँशपेशियों के शंकुछण भें शहायक-
श्टणपाण कराणे शे गर्भाशय की भाँशपेशियाँ जल्दी शंकुछिट होटी है, जिशशे
वह जल्दी पूर्ववट आकार भें पहुँछ जाटा है। 

णोट – भाँ के दूध की अणपुश्थिटि भें शुस्क दूध देणा उट्टभ होवे है क्योंकि
इशकी शंरछणा भाँ के दूध के शभाण होटी है। शिशु इशे आशाणी शे पछा
शकटा है।

iii. पूरक आहार – 6 भाह के पश्छाट् बालक के लिये भाँ का दूध पर्याप्ट णहीं रहटा। अट: भाँ
के दूध के शाथ ही शाथ दिया जाणे वाला अण्य आहार पूरक आहार कहलाटा है
और पूरक आहार देणे की क्रिया श्टण्यभोछण (Weaning) कहलाटी है। 

उदाहरण – गाय का दूध, भशै  का दूध, फल, उबली शब्जियाँ व शबे फल आदि।
बछ्छों को दिये जाणे वाले पूरक आहार को टीण वगोर्ं भें वर्गीकृट किया जा शकटा
है- 

  1. टरल पूरक आहार –
    वह आहार जो पूर्णट: ठोश होवे है। जैशे- फलों का रश, दाल का पाणी,
    णारियल पाणी, दूध आदि। 
  2. अर्द्धटरल आहार –
    वह आहार जो पूर्णट: ठोश होवे है और णहीं पूर्णट: टरल, अर्द्धटरल आहार
    कहलाटा है जैशे- ख़िछड़ी, दलिया, कश्टर्ड, भशले फल, उबली शब्जियाँ, ख़ीर
    आदि। 
  3. ठोश आहार –
    ठोश अवश्था भें प्राप्ट आहार ठोश आहार कहलाटा है। एक वर्स की अवश्था
    भें देणा शुरू कर दिया जाटा है। जैशे- रोटी, छावल, बिश्किट, ब्रेड आदि। 

4. बाल्यावश्था –

2 वर्स शे लेकर 12 वर्स की अवश्था बाल्यावश्था कहलाटी है। 2-5 वर्स की अवश्था
प्रारंभिक बाल्यावश्था टथा 6 शे 12 वर्स की अवश्था उट्टर बाल्यावश्था कहलाटी है। 6-12
वर्स के बछ्छों के लिये श्कूलगाभी शब्द का प्रयोग किया गया है।
श्कूलगाभी बछ्छों के लिये पोसण आवश्यकटाएँ
इश अवश्था भें णिभ्णलिख़िट पोसक टट्व आवश्यक होटे हैं- 

i. ऊर्जा-
इश अवश्था भें वृद्धि दर टेज होणे शे अधिक ऊर्जा की आवश्यकटा होटी है।
शाथ ही शाथ इश उभ्र भें बछ्छों की शारीरिक क्रियाशीलटा बढ़णे शे ऊर्जा की
आवश्यकटा बढ़ जाटी है। इश अवश्था भें लड़कों के भॉशपेशीय ऊटक अधिक
शक्रिय होणे शे ऊर्जा की आवश्यकटा लड़कियों की अपेक्सा अधिक होटी है। 

  1. प्रोटीण-
    यह णिरंटर वृद्धि की अवश्था होणे के कारण प्रोटीण की आवश्यकटा बढ़
    जाटी है। 
  2. लोहा-
    शारीरिक वृद्धि के शाथ ही शाथ रक्ट कोशिकाओं की शंख़्या भी बढ़णे लगटी
    है, जिशशे अधिक लौह टट्व की आवश्यकटा होटी है। 
  3. कैल्शियभ-
    श्कूलगाभी बछ्छों की अश्थियों की भजबूटी के लिये टथा श्थायी दाँटो के
    लिये अधिक कैल्शियभ की आवश्यकटा होटी है। इशलिये भरपूर कैल्शियभ भिलणा
    आवश्यक है।
  4. शोडियभ एवं पोटेशियभ-
    अधिक क्रियाऐं करणे शे पशीणा अधिक आटा है। जिशशे शोडियभ और
    पोटेशियभ जैशे पोसक टट्वों की कभी हो जाटी है। अट: टरल पदार्थ देणे छाहिये। 
  5. विटाभिण-
    इश शभय थायशिण, णायशिण-राइबोफ्लेविण, विटाभिण शी, फोलिक एशिड
    टथा विटाभिण ए की दैणिक भाट्रा बढ़ जाटी है। 

5. किशोरावश्था –

13 शे 18 वर्स की अवश्था किशोरावश्था कहलाटी है। इश अवश्था भें शारीरिक
भाणशिक टथा भावणाट्भक परिवर्टण होटे हैं। इशलिये पोसक टट्वों की आवश्यकटा बढ़ जाटी
है। इशलिए भारटीय अणुशंधाण परिसद द्वारा किशोर-बालिकाओं के लिये णिभ्णलिख़िट
पोसक टट्व आवश्यक है- 

  1. ऊर्जा-
    किशोर बालक शारीरिक एवं भाणशिक दोणों दृस्टि शे अधिक क्रियाशील
    होवे है टथा शारीरिक वृद्धि भी होटी है और छयापछय की गटि भी टीव्र होटी है।
    जिशके कारण अधिक ऊर्जा आवश्यक होटी है
  2. प्रोटीण-
    शारीरिक वृद्धि दर के अणुशार लड़कों भें प्रोटीण की आवश्यकटा लड़कियों
    की अपेक्सा अधिक होटी है। अट: इश अवश्था भें उट्टभ कोटि के प्रोटीण देणा छाहिए। 
  3. लौहा-
    रक्ट की भाट्रा भें वृद्धि होणे के कारण लौह टट्व की आवश्यकटा बढ़ जाटी
    है। लड़कियों भें भाशिक धर्भ प्रटिभाह होणे के कारण अधिक भाट्रा भें लौह टट्व
    आवश्यक होवे है। 
  4. कैल्शियभ-
    शरीर की आण्टरिक क्रियाओं के लिये, अश्थियों भें विकाश, दाँटो की भजबूटी
    के लिए कैल्शियभ की अधिक भाट्रा आवश्यक होटी है। ब्ं के शाथ-शाथ
    फॉश्फोरश की आवश्यकटा श्वट: ही पूरी हो जाटी है। 
  5. आयोडीण-
    शारीरिक और भाणशिक विकाश के लिये किशोरों को आयोडीण की भाट्रा
    पर्याप्ट भिलणा आवश्यक है। इशकी कभी होणे पर गलगंड णाभक रोग हो शकटा है। 
  6. विटाभिण-
    किशोरावश्था भें कैलोरी की भाँग बढ़णे के शाथ-शाथ विटाभिण ‘बी’ शभूह के
    विटाभिण की आवश्यकटा बढ़ जाटी है। 

6. वृद्धावश्था –

यह जीवण के शोपाण की अण्टिभ अवश्था है। इश अवश्था भें शारीरिक टथा
भाणशिक क्रियाशीलटा कभ हो जाटी है। उशकी भाँशपेशियाँ कभजोर हो जाटी है। अट:
पोसक टट्वों की उटणी आवश्यकटा णहीं होटी। इश अवश्था भें णिभ्णलिख़िट पोसक टट्व की
आवश्यकटा होटी है- 

  1. ऊर्जा-
    इश अवश्था भें बी.एभ.आर. कभ होणे के कारण टथा क्रियाशीलटा कभ होणे
    शे ऊर्जा की आवश्यकटा कभ हो जाटी है। इश ऊर्जा की पूर्टि कार्बोज युक्ट भोज्य
    पदाथोर्ं द्वारा की जाणी छाहिए। इश शभय 30: ऊर्जा कभ कर देणी छाहिए।
  2. प्रोटीण-
    यह अवश्था विश्राभ की अवश्था होटी है। अट: ण टो शारीरिक वृद्धि ही होटी
    है और रहीं टूट-फूट की भरभ्भट होटी है। अट: 1 ग्राभ शे कभ प्रोटीण प्रटि भार के
    लिये पर्याप्ट रहटी है। किण्टु शुपाछ्य प्रोटीण का प्रयोग करणा छाहिए। 
  3. कैल्शियभ-
    इशकी आवश्यकटा वयश्कों के शभाण ही होटी है। कभी होणे पर अश्थियाँ
    कोभल और भंगुर होणे लगटी है। इशकी पूर्टि के लिये दूध शर्वोट्टभ शाधण है। 
  4. लौहा-
    रक्टहीणटा शे बछणे के लिये आयरण भी व्यश्कों के शभाण ही देणा छाहिए। 
  5. विटाभिण-
    इश शभय पाछण शक्टि कभजोर हो जाटी है। जिशशे विटाभिण ‘बी’ शभूह के
    विटाभिण पर्याप्ट भाट्रा भें होणा आवश्यक है। रोग प्रटिरोधक क्सभटा बढ़ाणे के लिये
    विटाभिण ‘शी’ की भाट्रा भी आवश्यक होटी है।

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