इलेक्ट्रान की खोज किसने और कब की

By | February 15, 2021


वर्ष 1885 में विलियम क्रुक्स ने प्रयोगों की श्रृंखला की जिसके दौरान उन्होंने कैथोड किरण का
उपयोग करके धातु को एक खाली ट्यूब में तेज गर्म करके उनके व्यवहार का अध्ययन किया।

एक कैथोड किरण नली
एक कैथोड किरण नली : निर्वात नली में इलैक्ट्रोड पर उच्च वोल्टेज
पारित करके कैथोड किरणें प्राप्त की जाती है।

एक कैथोड किरण नली एक आशिंक रूप से खाली ट्यूब होती है जिसमें धातु के इलेक्ट्रोड होते
हैं। हवा रहित ट्यूब को खाली ट्यूब कहते हैं। ऋणावेशित इलेक्ट्रोड को कैथोड जबकि
घनावेशित इलेक्ट्रोड को ऐनोड कहते हैं। इन इलेक्ट्रोड को एक उच्च वोल्टेज स्रोत से जोड़ा जाता
है। इस तरह का एक कैथोड किरण नली को चित्र में दिखाया गया है।
यह देखा गया है कि जब बहुत तेज वोल्टेज पर विद्युत विसर्जन कैथोड किरण ट्यूब में इलेक्ट्रोड
के ऊपर पारित किया जाता है कि तब कैथोड कणों की एक धारा का उत्पादन होता है यह
कण कैथोड से ऐनोड की ओर चलते हुये दिखाये गये है। और इनको कैथोड किरण कहा जाता
है। वाह्य चुम्बकीय या विद्युत के क्षेत्र के अभाव में यह किरणें सीधी रेखा में यात्रा करती हैं।

इलेक्ट्रॉन की खोज

1897 में एक अंग्रेजी भौतिक विज्ञानी सर जे.जे. थामसन ने दिखाया कि यह किरणें ऋणावेशित
कणों की धारा के बने थे यह निष्कर्ष प्रयोगात्मक अनुभव के आधार पर किया गया था जब
प्रयोग एक बाहरी विद्युत क्षेत्रा की उपस्थिति में किया गया था कैथोड किरणों के गुण हैं।

कैथोड किरणों के गुण है :-

  1. कैथोड किरणें सीधी लाइन में चलती है
  2. कैथोड किरणों के घटक कणों का द्रव्यमान है और उनमें गतिज ऊर्जा होती है।
  3. कैथोड किरणों के घटक का द्रव्यमान नगण्य है मगर वह तेज गति से चलते हैं।
  4. कैथोड किरणों के घटक ऋणआवेशित होते हैं और बाहरी विद्युत क्षेत्रा की उपस्थिति में
    घनावेशित प्लेट की ओर आकर्षित होते हैं।
  5. उत्पन्न हुर्इ कैथोड किरणों की प्रकृति, कैथोड किरण ट्यूब में भरी हुई गैस और कैथोड व
    एनोड बनाने के लिये प्रयुक्त धातु की प्रकृति पर निर्भर नहीं थी। प्रत्येक स्थिति में आवेश
    और द्रव्यमान का अनुपात (e/m) एक समान पाया गया।
कैथोड किरणों
कैथोड किरणों ऋणावेशित कणों से बनी है। ये किरणें कैथोड से ऐनोड की
ओर सीधी रेखाओं में चलती है परन्तु एक बाह्य विद्युत
क्षेत्र में ये धन प्लेट की ओर मुड़ जाती है।

कैथोड किरणों के इन कणों को बाद में इलेक्ट्रॉन का नाम दिया गया। यह भी देखा गया कि
कैथोड किरणों के गुण एक जैसे होते हैं चाहे कैथोड ट्यूब में कोर्इ भी गैस ली जाये या कैथोड
किसी भी धातु का बना हो। इससे थामसन ने यह निष्कर्ष निकाला कि सभी परमाणु में इलेक्ट्रॉन
होते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि ‘‘परमाणु अविभाज्य है’’ जैसा कि डाल्टन और दूसरों के द्वारा
माना जाता था। सही नहीं है। दूसरे शब्दों में वह कह सकते हैं कि डाल्टन के परमाणु सिद्धांत
आंशिक रूप से विफल रहे हैं।

इस निष्कर्ष को एक सवाल उठा, यदि परमाणु विभाज्य था तो उसके घटक क्या थे? आज यह
पाया गया है कि परमाणुओं का गठन बहुत से सूक्ष्म कणों से हुआ है परमाणु को बनाने वाले
इन सूक्ष्म कणों को अवपरमाणु कण कहते हैं। आपने ऊपर सीखा है कि इलेक्ट्रॉन परमाणु के
घटकों में से एक हैं। अब अगले भाग में हम परमाणु में मौजूद दूसरे घटकों के विषय में सीखेंगे।
क्योंकि परमाणु उदासीन होता है अत: उसमें घनावेशित कणों की उपस्थिति की हमें उम्मीद है,
जिसके कारण इलेक्ट्रॉन का ऋणावेश उदासीन होता है।

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