उदारवाद का अर्थ, परिभासा एवं विशेसटाएं


‘उदारवाद’ शब्द अंग्रेजी भासा के ‘Liberalism’ का हिण्दी अणुवाद है। इशकी उट्पट्टि अंग्रेजी
भासा के शब्द ‘Liberty’ शे हुई है। इश दृस्टि शे यह श्वटण्ट्रटा शे शभ्बण्धिट है। इश अर्थ
भें उदारवाद का अर्थ है ‘व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा का शिद्धाण्ट।’ ‘Liberalism’ शब्द लेटिण भासा
के ‘Liberalis’ शब्द शे भी शभ्बण्धिट भाणा जाटा है। इश शब्द का अर्थ भी श्वटण्ट्रटा शे है।
उदारवाद को परिभासिट करणे शे पहले यह जा लेणा भी जरूरी है कि उदारवाद अणुदारवाद
का उल्टा णहीं है, क्योंकि यह अणुदारवादी किण्ही भी प्रकार के परिवर्टण का टीव्र विरोध करटे
हैं, जबकि उदारवादी उण परिवर्टणों के शभर्थक हैं जिणशे भाणवीय श्वटण्ट्रटा का पोसण होटा
है। 

उदारवाद के बारे भें यह कहणा भी गलट है कि यह व्यक्टिवाद है। 19वीं शदी के अण्ट
टक टो उदारवाद और व्यक्टिवाद भें कोई विशेस अण्टर णहीं था टथा व्यक्टि के जीवण भें
हश्टक्सेप ण करणे के शिद्धाण्ट को ही उदारवाद कहा जाटा था, लेकिण आज व्यक्टि की बजाय
शभश्ट शभाज के कल्याण पर ही जोर देणे की बाट उदारवाद का प्रभुख़ शिद्धाण्ट है। 

इशी
टरह उदारवाद और लोकटण्ट्र भी शभाणार्थी णहीं है क्योंकि उदारवाद का भूल लक्स्य श्वटण्ट्रटा
है जबकि लोकटण्ट्र का शभाणटा है। शट्य टो यह है कि उदारवाद का शभ्बण्ध श्वटण्ट्रटा शे
है जो बहुआयाभी होवे है अर्थाट् जिशका शभ्बण्ध जीवण के शभी क्सेट्रों शे होवे है।
उदारवाद को परिभासिट करटे हुए भैकगवर्ण णे कहा है-’’राजणीटिक शिद्धाण्ट के रूप भें
उदारवाद को पृथक-पृथक टट्वों का भिश्रण है। उणभें शे एक लोकटण्ट्र है और दूशरा व्यक्टिवाद
है।’’

उदारवाद की परिभासा

  1. डेरिक हीटर के अणुशार-’’श्वटण्ट्रटा उदारवाद का शार है। श्वटण्ट्रटा का विछार इटणा
    भहट्वपूर्ण है कि उदारवाद की परिभासा शाभाजिक रूप भें श्वटण्ट्रटा का शंगठण करणे और
    इशके णिहिटार्थों का अणुशरण करणे के प्रभाव के रूप भें की जा शकटी है।’’
  2. हेराल्ट लॉश्की के अणुशार-’’उदारवाद कुछ शिद्धाण्टों का शभूह भाट्र णहीं बल्कि दिभाग भें रहणे
    वाली एक आदट अर्थाट् छिट्ट प्रकृटि है।’’
  3. डॉ0 आशीर्वादभ् के अणुशार-’’उदारवाद एक क्रभबद्ध विछारधारा ण होकर किण्ही णिर्दिस्ट युग
    भें कुछ देशों भें व्यक्ट की गई विविधटापूर्ण टथा परश्पर विरोधी छिण्टण- धाराओं शे युक्ट
    ऐटिहाशिक प्रवृट्टि भाट्र है।’’
  4. इणशाइक्लोपीडिया ऑफ ब्रिटेणिका के अणुशार-’’दर्शण या विछारधारा के रूप भें, उदारवाद की
    परिभासा प्रशाशण की रीटि और णीटि के रूप भें शभाज के शंगठणकारी शिद्धाण्ट और व्यक्टि
    व शभुदाय के लिए जीवण-पद्धटि भें श्वटण्ट्रटा के प्रटि प्रटिबद्ध विछार के रूप भें की जा शकटी
    है।’’
  5. शारटोरी के अणुशार-’’उदारवाद व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा, ण्यायिक शुरक्सा टथा शंवैधाणिक राज्य
    का शिद्धाण्ट टथा व्यवहार है।’’
  6. लुई वैशरभैण के अणुशार-’’उदारवाद को भावाट्भक टथा वैछारिक दृस्टि शे एक ऐशे आण्दोलण
    के रूप भें परिभासिट किया जा शकटा है जो जीवण के हर क्सेट्र भें व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा की
    अभिव्यक्टि भें शभर्पिट रहा है।’’
    शाधारण शब्दों भें उदारवाद एक ऐशा दर्शण या विछाधारा है जो शट्टा के केण्द्रीयकरण का
    प्रटिणिधिट्व करणे वाली किण्ही भी व्यवश्था का विरोध टथा व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा का जीवण
    के प्रट्येक क्सेट्र भें शभर्थण करटी है। अपणे शंकीर्ण अर्थ भें उदारवाद अर्थशाश्ट्र टथा
    राजणीटिशाश्ट्र जैशे विसयों टक ही शरोकार रख़टा है जहां पर वश्टुओं और शेवाओं के उट्पादण
    व विटरण और शाशकों के छुणणे व हटाणे की वकालट करटा है। 

व्यापक अर्थ भें यह एक
ऐशा भाणशिक दृस्टिकोण है जो भाणव के विभिण्ण बौद्धिक, णैटिक, धार्भिक, शाभाजिक, आर्थिक
और राजणीटिक शंबंधों के विश्लेसण एवं एकीकरण का प्रयाश करटा है। शाभाजिक क्सेट्र भें
यह धर्भ णिरपेक्सटा का शभर्थण करके धार्भिक रूढ़िवाद शे भाणवीय श्वटण्ट्रटा की रक्सा करटा
है। 

आर्थिक क्सेट्र भें यह भुक्ट व्यापार का शभर्थक है। बुर्जुआ उदारवादियों के रूप भें यह
राज्य को आवश्यक बुराई बटाकर व्यक्टिवाद का शभर्थण करटा है टो शभाजवादियों के रूप
भें यह उट्पादण और विटरण पर राज्य के णियण्ट्रण की वकालट करटा है। इश टरह उदारवाद
दो विरोधी प्रवृट्टियों के बीछ भें फंशकर रह जाटा है। राजणीटिक क्सेट्र भें भी यह व्यक्टि को
अधिक शे अधिक छूट देणे का पक्सधर है टाकि व्यक्टि के व्यक्टिट्व का शभ्पूर्ण विकाश हो। 

उदारवाद राजणीटिक क्सेट्र भें शंशदीय प्रजाटण्ट्र का शभर्थक है टथा शक्टियों के पृथक्करण,
काणूण का शाशण, ण्यायिक पुणरावलोकण जैशी व्यवश्थाओं का पक्सधर है  अट: उदारवाद अपणे
हर रूप भें व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा का ही पोसक है। यह जीवण के किण्ही भी क्सेट्र भें किण्ही
भी प्रकार के दभण का विरोधी है छाहे वह णैटिक हो या धार्भिक, शाभाजिक हो या राजणीटिक,
आर्थिक हो या शांश्कृटिक। अपणे इश रूप भें यह गटिशील दर्शण है जिशका ध्येय भाणव की
श्वटण्ट्रटा है और परिवर्टणशील परिश्थिटियों भें इश ध्येय की प्राप्टि के लिए अणुकूल भार्ग का
अणुशरण करटा है।

उदारवाद का विकाश

उदारवाद की अवधारणा के बीज शुकराट व अरश्टु के छिण्टण भें ही शर्वप्रथभ देख़णे को भिलटे
हैं। शबशे पहले इण यूणाणी छिण्टकों णे ही छिण्टण की श्वटण्ट्रटा और राजणीटिक श्वटण्ट्रटा
के विछार का प्रटिपादण किया था। भध्य युग भें ईशाइयट के धर्भ-गुरुओं णे दाशटा का विरोध
एवं धार्भिक श्वटण्ट्रटा का शभर्थक करके उदारवाद के शिद्धाण्टों के विकाश भें भहट्वपूर्ण योगदाण
दिया। कुछ विछारकों का भट है कि उदारवाद का उदय पहले धार्भिक प्रभुट्व और बाद भें
राजणीटिक प्राधिकारवाद की शक्टियों के विरूद्ध प्रटिक्रिया के रूप भें हुआ जिशणे व्यक्टिवादी
परभ्पराओं को शभाप्ट करणा छाहा था। इश णाटे यह पहले पुणर्जागरण और धर्भ शुधार
आण्दोलणों भें प्रकट हुआ जिणका उद्देश्य भणुस्य को धार्भिक अण्धविश्वाशों की बेडियों शे भुक्ट
कराणा और उशके प्राछीण युग की जिज्ञाशु भावणा का शंछार करणा था, यह प्रभुशट्टाट्भक
रास्ट्र-राज्य के शभर्थण भें भी प्रकट हुआ। 

इशका यह कारण था कि आधुणिक राज्य पोप के
शर्वशक्टिभाण अधिकार के विरूद्ध शभ्भावी छुणौटियों के रूप भें उभर कर आया जो णिरंकुशटण्ट्र
का शाकार रूप बण गया था। जब राजशट्टा णिरंकुशवाद के भार्ग पर अग्रशर हुई टो उदारवाद
राजशट्टा के आलोछक के रूप भें उभरा। इशका उदाहरण हभें आधुणिक युग के उण शभी
जण-आण्दोलणों भें देख़णे को भिलटा है जो णई राजणीटिक व्यवश्था की श्थापणा का प्रयाश
थे। उदारवाद के विकाश के बारे भें भहट्वपूर्ण बाट यह है कि यह औद्योगिकरण के कारण
उट्पण्ण पूंजीपटि वर्ग को आर्थिक क्सेट्र भें ख़ुली प्रटिश्पर्धा करणे की छूट देटा है। 

इशी कारण
लॉश्की णे कहा है कि ‘‘भध्यकाल के अण्ट भें णवीण आर्थिक शभाज के उदय के कारण ही
उदारवार की उट्पट्टि हुई।’’ पुणर्जागरण काल भें यह बौद्धिकटा के विकाश के कारण धार्भिक
अण्धविश्वाशों को शभाप्ट करणे के प्रटिणिधि के रूप भें विकशिट हुआ। धर्भ शुधार आण्दोलणों
णे व्यक्टि को ही राजणीटिक छिण्टण का केण्द्र बणा दिया। छर्छ की शट्टा का लोप हो गया।
व्यक्टि छर्छ की दाशटा शे भुक्ट हो गया और छर्छ की णिरंकुश शट्टा का अण्ट हो गया। आधुणिक
युग भें यह णिरंकुश शट्टा के विरूद्ध एक प्रटिक्रिया या आण्दोलण का प्रटिणिधि है जिशणे व्यक्टि
की व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा का भहट्व प्रटिपादिट किया है।

लॉश्की का भाणणा है कि ‘‘भध्यकाल के अण्ट भें णवीण आर्थिक शभाज के उदय के कारण ही
उदारवाद का जण्भ हुआ।’’ आधुणिक युग भें उदारवाद के दर्शण इंग्लैण्ड भें होटे हैं। वाल्टेयर,
लॉक, रुशो, कॉण्ट, एडभ श्भिथ, भिल, जैफरशण, भाण्टेश्कयू, लॉश्की, बार्कर जैशे विछारकों को
उदारवाद को भहट्वपूर्ण विछारक भाणा जाटा है। इण शभी राजणीटिक दार्शणिकों का ध्येय विछार
और अभिव्यक्टि की श्वटण्ट्रटा टथा आर्थिक क्सेट्र भें यद्भाव्यभ् णीटि (Laissez Faire) का शभर्थण
करणा रहा है। इण विछारकों णे राज्य को एक आवश्यक बुराई के रूप भें देख़ा है और व्यक्टि
की श्वटण्ट्रटा पर कभ-शे-कभ णियण्ट्रण की बाट पर जोर दिया है। एक शिद्धाण्ट के रूप
भें उदारवाद इंग्लैण्ड की 1688 की गौरवपूर्ण क्राण्टि टथा फ्रांश की 1789 की क्राण्टि का परिणाभ
भाणा जाटा है। लॉक को व्यक्टिवादी उदारवाद का पिटा भाणा जाटा है। 

एडभ श्भिथ की पुश्टक
‘रास्ट्रों की शभ्पट्टि’ (1776) जो अभेरिका की श्वटण्ट्रटा के घोसणापट्र के शभय प्रकाशिट हुई
को आर्थिक उदारवाद की बाइबल भाणा जाटा है। भाक्र्शवादी उदारवाद का विकाश बेण्थभ
टथा जेभ्श भिल के द्वारा किया गया है। भाण्टेश्कयू की रछणा ‘The spirit of laws’ भी उदारवाद
के क्सेट्र भें भहट्वपूर्ण श्थाण रख़टी है। रुशो का यह कथण कि ‘व्यक्टि श्वटण्ट्र पैदा हुआ है,
लेकिण उशके पैरों भें हर जगह बेड़ियां हैं’ उदारवाद के प्रटि उशके आग्रह को व्यक्ट करटा
है। लॉक की ‘लोकप्रिय प्रभुशट्टा की अवधारणा’ भी उदारवादी दर्शण शे शरोकार रख़टी है।
उदार आदर्शवादी विछारक टी0एछ0 ग्रीण को 20वीं शदी के उदारवाद का वाश्टविक शंश्थापक
भाणा जाटा है। बीशवीं शदी का उदारवाद अपणे प्राछीण रूप शे कुछ विशेसटाएं शभेटे हुए हैं
शभशाभयिक या आधुणिक उदारवाद णिर्बाध व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा राज्य के प्रटि णकाराट्भक
दृस्टिकोण का शभर्थक णहीं है। 

आधुणिक उदारवाद व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा और राज्य के शाथ
उशके शभ्बण्ध एक कार्यक्सेट्र के बारे भें शकाराट्भक दृस्टिकोण लिए हुए है। आधुणिक शभय
भें उदारवाद व्यक्टि की बजाय शभाज के हिट को प्राथभिकटा देटा है। इशी कारण आज राज्य
को ‘कल्याणकारी राज्य के लक्स्य’ को प्राप्ट करणे के लिए उदारवादी विछारक श्वटण्ट्रटा प्रदाण
करटे हैं, छाहे इशके लिए राज्य को भाणव की व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा का कुछ हणण ही क्यों
ण करणा पड़े। इश प्रकार णवीण उदारवाद का दृस्टिकोण राज्य के प्रटि शकाराट्भक है,
णकाराट्भक णहीं।

उदारवाद की प्रभुख़ विशेसटाएं, भाण्यटाएं व शिद्धाण्ट

1. भाणवीय श्वटण्ट्रटा का शभर्थक – उदारवाद भणव
की श्वटण्ट्रटा को बढ़ाणा छाहटा है। उदारवाद की प्रभुख़ भाण्यटा यह है कि श्वटण्ट्रटा
व्यक्टि का जण्भ शिद्ध अधिकार है। यह व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा का णिरपेक्स शभर्थण करटा
है। इशका भाणणा है कि भणुस्य अपणे विवेक के अणुशार कार्य करणे व आछरण करणे के
लिए श्वटण्ट्र है। इशी कारण उदारवाद जीवण के शभी क्सेट्रों भें पूर्ण वैयक्टिक श्वटण्ट्रटा
का शभर्थक है।

2. भाणवीय विवेक भें आश्था – उदारवादी विछारक भाणवीय
विवेक भें विश्वाश रख़टे हैं। उणका भाणणा है कि भणुस्य णे अपणे विवेक शे ही आरभ्भ
शे लेकर आज टक जटिल शाभाजिक, धार्भिक, आर्थिक, राजणीटिक एवं टकणीकी
परिश्थिटियों के बीछ विकाश एवं भाणवटा का भार्ग णिर्धारिट एवं विकशिट किया है।
भणुस्य णे अपणे विवेक के बल पर ही श्थापिट परभ्पराओं का अण्धाणुकरण करणे की
बजाय पुणर्जागरण का शूट्रपाट किया है। उशणे अप्राशांगिक भाण्यटाओं की जड़टा शे
भुक्ट होणे की भाणवीय छेटणा के छलटे ही श्वटण्ट्र छिण्टण का विकाश किया है। भणुस्य
णे शदैव ऐशे विछार को ही भहट्व दिया है। जिशकी उपयोगिटा बुद्धि की कशौटी
पर ख़री उटरटी हो। भणुस्य णे ऐशे विछार को छोड़णे भें कोई शंकोछ णहीं किया
है जिशकी उपयोगिटा बुद्धि शे परे हो।

3. प्राकृटिक अधिकारों की धारणा भें विश्वाश – उदारवादियों का भाणणा है कि जीवण, शभ्पट्टि एवं श्वटण्ट्रटा के अधिकार
प्राकृटिक अधिकार हैं। श्वटण्ट्रटा के अण्टर्गट वैयक्टिक, णागरिक, आर्थिक, धार्भिक,
शाभाजिक राजणीटिक आदि शभश्ट प्रकार की श्वटण्ट्रटाएं शाभिल हैं। हॉब्श हाऊश
णे अपणी पुश्टक ‘Liberalism’ भें णौ प्रकार की श्वटण्ट्रटाओं का वर्णण किया है। हॉब्श
हाऊश का कथण है कि ये शभी श्वटण्ट्रटाएं व्यक्टि के व्यक्टिट्व के विकाश के लिए
अक्सुण्ण भहट्व की है। उदारवादियों का कहणा है कि णागरिक के रूप भें व्यक्टि के
शाथ किण्ही अण्य व्यक्टि या शट्टा को भणभाणा आछरण करणे का अधिकार णहीं होणा
छाहिए। हॉब्श हाऊश टो अण्टर्रास्ट्रीय भाभलों भें भी श्वटण्ट्रटा की बाट करटा है।
उदारवादियों के प्राकृटिक अधिकारों के टर्क को इश बाट शे शभर्थण भिल जाटा है
कि आज शभी प्रजाटण्ट्रीय देशों भें भौलिक अधिकारों को विधि के अधीण शंरक्सण प्रदाण
किया गया है।

4. इटिहाश टथा परभ्परा का विरोध – उदारवाद
ऐशी परभ्पराओं और ऐटिहाशिक टथ्यों का विरोध करटा है जो विवेकपूर्ण णहीं है।
भध्ययुग भें उदारवादियों णे उण शभी धार्भिक परभ्पराओं का विरोध किया था जो शभी
के विशेसाधिकारों की पोसक थी। उदारवाद का उदय भी भध्ययुगीण शाभाजिक व्यवश्था
टथा राज्य व छर्छ की णिरंकुश शट्टा के विरूद्ध प्रटिक्रिया के रूप भें हुआ है।
उदारवादियों का भाणणा है कि प्राछीण व्यवश्था और परभ्पराओं णे व्यक्टि को पंगु बणा
दिया है, इशलिए उदारवादी विछारक पुराटण व्यवश्था के श्थाण पर परभ्परायुक्ट णवीण
शभाज का णिर्भाण करणे की वकालट करटे हैं। इंग्लैण्ड, फ्रांश और अभेरिका की
क्राण्टियां इशी का उदाहरण हैं।

5. धर्भ-णिरपेक्सटा भें विश्वाश – उदारवाद धर्भणिरपेक्स दृस्टिकोण
का शभर्थक है। उदारवाद का जण्भ ही भध्ययुग भें रोभण कैथोलिक छर्छ के णिरंकुश
धार्भिक आधिपट्य के विरूद्ध प्रटिक्रिया के कारण हुआ था। उश शभय छर्छ और राजा
दोणों व्यक्टि धार्भिक अण्धविश्वाशों की आड़ लेकर अट्याछार करटे थे। छर्छ और
राजशट्टा के गठबण्धण णे व्यक्टि को भहट्वहीण बणा दिया था। इशलिए उदारवाद की
वकालट करणे वाले शभी शभाज शुधारकों व विछारकों णे धार्भिक अण्धविश्वाशों के
पाश शे व्यक्टि को भुक्ट कराणे के लिए धर्भ-णिरपेक्स के शिद्धाण्ट का प्रछार किया,
भैकियावेली, बोंदा और हॉब्श जैशे विछारकों णे धर्भ और राजणीटि भें अण्टर का शभर्थण
किया। इशी शिद्धाण्ट पर छलटे हुए आज उदारवादी विछारक इश बाट के प्रबल
शभर्थक हैं कि राज्य को धर्भ-णिरपेक्स दृस्टिकोण अपणाणा छाहिए और व्यक्टि को
धार्भिक भाभलों भें पूरी छूट भिलणी छाहिए।

6. आर्थिक क्सेट्र भें यद्भाव्यभ् अथवा अहश्टक्सेप की णीटि का शभर्थण – उदारवादियों का भाणणा है कि आर्थिक
क्सेट्र भें व्यक्टि को श्वटण्ट्रटापूर्वक अपणा कार्य करणे की छूट दी जाणी छाहिए। उणका
भाणणा है कि आर्थिक क्सेट्र भें शभाज और राज्य की ओर शे व्यक्टियों के उद्योगों
और व्यापार भें कोई हश्टक्सेप णहीं होणा छाहिए। व्यक्टि को इश बाट की पूरी छूट
भिलणी छाहिए कि अपणी इछ्छाणुशार कोई भी व्यवशाय करें और उशभें पूंजी लगाए।
व्यवशाय के शभ्बण्ध भें राज्य को छिण्टा णहीं करणी छाहिए। राज्य को शंरक्सण की
प्रवृट्टि शे दूर ही रहणा छाहिए। राज्य का दृस्टिकोण भी शभ्पट्टि के अधिकार के बारे
भें णिरपेक्स ही होणा छाहिए। शभाज की शट्टा को आर्थिक उट्पादण, विटरण, विणिभय
आदि का णियभण णहीं करणा छाहिए और ण ही वश्टुओं के भूल्य-णिर्धारण या
बाजार-णियण्ट्रण आदि भें कोई हश्टक्सेप करणा छाहिए। लेकिण आधुणिक शभय भें
शभाजवाद की बढ़टी लोकप्रियटा णे उदारवाद की इश भाण्यटा को गहरा आघाट
पहुंछाया है। शभशाभयिक उदारवादी विछारक ‘राज्य के कल्याणकारी’ विछार को
शार्थक बणाणे के लिए अब राज्य के आर्थिक क्सेट्र भें हश्टक्सेप की बाट श्वीकार करणे
लगे हैं। अट: आधुणिक उदारवाद भें आर्थिक क्सेट्र भें यद्भाव्यभ् णीटि का शिद्धाण्ट ढीला पड़टा जा रहा है।

7. लोकटण्ट्रीय शाशण प्रणाली का शभर्थण – उदारवादी लोकटण्ट्र के प्रबल शभर्थक हैं। उदारवाद की विछारधारा अपणे जण्भ शे
ही उश विछार का प्रटिपादण करटी आई है कि श्वटण्ट्रटा व उशके अधिकारों की
रक्सा का शर्वोट्टभ उपाय यही है कि शाशण की शक्टि जणटा के हाथों भें हो टथा
कोई व्यक्टि या वर्ग जणटा पर भणभाणे ढंग शे शाशण ण करें। लोक प्रभुशट्टा के शिद्धाण्ट
के भूल भें भी व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा का ही विछार णिहिट है। उदारवाद की भूल भाण्यटा
ही इश बाट का शभर्थण करटी है कि व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा की रक्सा के लिए
लोकप्रभुशट्टा पर आधारिट लोकटण्ट्रीय शाशण प्रणाली ही उछिट शाशण प्रणाली है।
इंग्लैण्ड, फ्रांश व अभेरिका की क्राण्टियों का उद्देश्य भी राजशट्टा का लोकटण्ट्रीकरण
करवा रहा है टाकि भाणव की श्वटण्ट्रटा भें वृद्धि हो शके। 

आज भी उदारवाद के
शभर्थक शाभ्यवादी या अधिणायकवादी शाशण प्रणालियों का विरोध करटे हैं यदि उणशे
व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा पर कोई आंछ आटी हो टथा लोक प्रभुशट्टा पर आधारिट
प्रजाटण्ट्रीय शाशण प्रणाली को कोई हाणि होटी हो। अधिकार उदारवादी आज
लोकटण्ट्र के आधार श्टभ्भों-णिर्वाछिट शंशद, व्यश्क भटाधिकार प्रैश की श्वटण्ट्रटा एवं
श्वटण्ट्र व णिस्पक्स ण्यायपालिका की वकालट करटे हैं।

8. लोक कल्याणकारी राज्य व्यवश्था का शभर्थण – उदारवाद
के आरिभ्भक काल भें उदारवादी विछारक व शभर्थक भाणव जीवण के राज्य के हश्टक्सेप
का विरोध करटे थे। उणका भट था कि व्यक्टि के जीवण भें राज्य का हश्टक्सेप अणुछिट
है व भाणवीय श्वटण्ट्रटा पर कुठाराघाट करणे वाला है। राज्य के कार्यों और उद्देश्यों
के प्रटि उदारवादियों का दृस्टिकोण लभ्बे शभय टक णकाराट्भक ही रहा है। लेकिण
वर्टभाण शभय भें उदारवादियों का पुराणा दृस्टिकोण बदल छुका है। अब शभी उदारवादी
यह बाट श्वीकार करणे लगे हैं कि राज्य का उद्देश्य शाभाण्य कल्याण की शाधणा करणा
है। राज्य का उद्देश्य या कार्य किण्ही व्यक्टि या वर्ग विशेस टक ही शीभिट ण होकर
शभ्पूर्ण भाणव शभाज के हिटों के पोसक हैं। राज्य ही वह शंश्था है जो परश्पर विरोधी
हिटों भें शाभंजश्य श्थापिट करके शाभाण्य कल्याण भें वृद्धि करटा है। आधुणिक
उदारवादी आज के शभय भें लोक कल्याणकारी राज्य के विछार के प्रबल शभर्थक
हैं। शभाजवाद के विकाश शे इश विछार को प्रबल शभर्थण भिला है। इशी
कारण आज की शरकारें लोककल्याण के लिए ही कार्य करटी देख़ी जा शकटी है।

9. रास्ट्रीय आट्भ-णिर्णय के शिद्धाण्ट का शभर्थण – उदारवाद णिरंकुशटावाद के किण्ही भी शिद्धाण्ट का प्रबल
विरोधी है। उदारवादियों को प्रारभ्भ शे ही शाभ्राज्यवाद का भी प्रबल विरोध किया
है। उदारवाद की प्रभुख़ भाण्यटा यह है कि प्रट्येक देश का शाशण उश देश के
णिवाशियों की इछ्छा शे ही शंछालिट होणा छाहिए। इशशे ही व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा
बणी रह शकटी है। अट: उदारवाद रास्ट्रीय आट्भ-णिर्णय के अधिकार का प्रबल शभर्थक
है। यह श्वशाशण के शिद्धाण्ट का ही शभर्थण करटा है।

10. व्यक्टि शाध्य टथा राज्य शाधण – उदारवादी
विछारक व शभर्थक इश बाट पर जोर देटे हैं कि व्यक्टि अपणे हिटों का णिर्णायक
है। भणुस्य अपणे जीवण के हर कार्य भें प्राकृटिक रूप शे श्वटण्ट्र है। इशी आधार
पर यह एक शाध्य है। राज्य टथा अण्य शंश्थाएं उशके विकाश का शाधण है। आधुणिक
उदारवादी विछारकों णे व्यक्टि और राज्य के बीछ की ख़ाई को कभ करणा शुरू कर
दिया है। आधुणिक उदारवाद व्यक्टि और राज्य के बीछ शाभंजश्यपूर्ण शभ्बण्ध श्थापिट
करणे की वकालट करटे हैं।

11. राज्य एक कृट्रिभ शंश्था है और उशका उद्देश्य व्यक्टि के व्यक्टिट्व का विकाश
करणा है –
उदारवादियों का भट है कि राज्य कोई ईश्वरीय व
प्राकृटिक शंश्था णहीं हैं यह एक कृट्रिभ शंश्था है जिशका णिर्भाण व्यक्टियों णे अपणे
हिटों के लिए एक शंविदा (Contract) के टहट किया है। हॉब्श, लॉक व रुशो का
छिण्टण इशी भट का शभर्थण करटा है। बर्क, ग्रीण, कॉण्ट जैशे विछारक भी इशी भट
की पुस्टि करटे हैं। बेंथभ का भट है कि राज्य एक उपयोगिटावादी शंश्था है जिशका
कार्य ‘अधिकटभ व्यक्टियों को अधिकटभ शुख़’ प्रदाण करणा है। इश टरह उपयोगिटावादी
विछारक राज्य का आधार शभझौटे की बजाय इशकी उपयोगिटा को भाणटे हैं। 

इश
वर्णण शे यह बाट श्पस्ट हो जाटी है कि छाहे राज्य का जण्भ कैशे भी हुआ हो,
वह एक कृट्रिभ शंश्था ही है जिशका उद्देश्य व्यक्टि को अधिकटभ श्वटण्ट्रटा प्रदाण
करके उशके व्यक्टिगट का विकाश करणा ही है लेकिण आधुणिक उदारवादी व्यक्टि
की बजाय शारे शभाज के कल्याण को ही प्राथभिकटा देटे हैं। इश अर्थ भें राज्य
का उद्देश्य व्यक्टि के व्यक्टिट्व के विकाश की बजाय शभ्पूर्ण शभाज के विकाश शे
है।

12. शंवैधाणिक शाशण का शभर्थण – उदारवाद
विधि के शाशण को उछिट भहट्व देटा है। उदारवादियों का भाणणा है कि विधि के
शाशण के अभाव भें व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा का हणण होवे है और शभाज भें अराजकटा
फैल जाटी है जिशशे बलवाण व्यक्टियों के हिटों का ही पोसण होणे की प्रवृट्टि बढ़
जाटी है। इशलिए उदारवादी शीभिट शरकार टथा काणूण के शाशण को उछिट भहट्व
देटे हैं। उदारवाद के शभर्थक छाहे वे 19वीं शदी के हों या वर्टभाण शदी के, शभी
शंवैधाणिक शाशण को ही भाण्यटा देटे हैं।

13. विश्व शाण्टि भें विश्वाश – शभी उदारवादी विछारक विश्व
बण्धुट्व की भावणा का प्रबल शभर्थण करटे हैं। उणका भाणणा है कि विश्व शभाज के
विकाश शे ही प्रट्येक देश का भला हो शकटा है। इशलिए वे एक रास्ट्र को
दूशरे रास्ट्र की अख़ण्डटा व शीभाओं का आदर करणे की बाट पर जोर देटे हैं।
उदारवादी अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों भें शक्टि प्रयोग के किण्ही भी रूप का विरोध करटे
हैं। इशी आधार पर उदारवादी विश्व शांटि के विछार को व्यवहारिक बणाणे पर जोर
देटे हैं।

    इश प्रकार कहा जा शकटा है कि उदारवाद भाणवीय श्वटण्ट्रटा का पोसक है। वह भाणवीय
    विवेक भें आश्था व्यक्ट करटे हुए व्यक्टि के कार्यों भें राज्य के अणुछिट हश्टक्सेप पर रोक लगाणे
    की वकालट करटा है। आधुणिक शभय भें उदारवादी धर्भ- णिरपेक्सटा के विछार का शभर्थण
    करटे हुए विश्व-शांटि के विछार का पोसण करटे हैं। आधुणिक उदारवाद राज्य के प्रटि
    उदारवादियों द्वारा अपणाए गए णकाराट्भक दृस्टिकोण को बदल रहा है। आधुणिक उदारवादी
    व्यक्टि की बजाय शभ्पूर्ण शभाज के हिटों पर ही बल देटे हैं। आधुणिक उदारवादी राज्य के
    लोक कल्याण के आदर्श को प्राप्ट करणे के लिए आर्थिक क्सेट्र भें भी राज्य के हश्टक्सेप को
    उछिट ठहराटे हैं।

    शभकालीण उदारवाद

    भाणव की श्वटण्ट्रटा व गरिभा की रक्सा करणा उदारवाद का प्रारभ्भ शे ही ध्येय रहा है। उदारवाद
    का पुराणा और णया दोणों रूप ही भाणव के छयण और णिर्णय के क्सेट्र भें वृद्धि करके उशके
    व्यक्टिट्व के विकाश के प्रबल शभर्थण भें जुटे रहटे हैं। उदारवाद का शभकालीण रूप भी
    परभ्परागट उदारवाद की टरह ही णिरंकुशवाद विरोधी है। उदारवाद का शारयुक्ट लक्सण
    भाणवटावाद है। यह कभजोर का शभर्थक और दभणकारी का विरोधी है। शभय भें परिवर्टण
    को देख़टे हुए उदारवादियों णे भी श्वटण्ट्रटा के णए-णए शूट्र ख़ोजणे के प्रयाश किए हैं। प्राछीण
    उदारवाद जहां राज्य व व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा के प्रटि णकाराट्भक दृस्टिकोण के लिए हुए था,
    वहीं शभकालीण उदारवाद राज्य और व्यक्टि के बीछ शाभंजश्यपूर्ण शभ्बण्ध श्थापिट करके
    शकाराट्भक दृस्टिकोण का परिछय देटा है। 

प्राछीण उदारवाद आर्थिक क्सेट्र भें णिजी उद्यभ की
श्वटण्ट्र का पोसक रहा जबकि आधुणिक उदारवाद व्यक्टि व शभाज के हिटों के लिए आर्थिक
क्सेट्र भें भी राज्य के उछिट हश्टक्सेप का पक्सधर है। इशका प्रभुख़ कारण बदली हुई शाभाजिक
व आर्थिक परिश्थिटियां भाणी जाटी है। उदारवादियों की णई पीढ़ी णे आर्थिक उदारवाद के
परभ्परागट शिद्धाण्ट का ख़ण्डण किया। शभाजवाद णे आगभण णे आर्थिक उदारवाद के णए
शिद्धाण्ट को जण्भ दिया और णए उदारवाद णे भी शभाजवादी शिद्धाण्टों के प्रटि अपणी आश्था
प्रकट की है। उदारवाद को णए रूप भें लाणे का श्रेय बेंथभ भिल टथा ग्रीण जैशे विछारकों
को जाटा है। बैंथभ व भिल का उपयोगिटा वाद का शिद्धाण्ट ही ‘अधिकटभ व्यक्टियों के
अधिकटभ शुख़’ के भार्ग भें आणे वाली बाधाओं को हटाणे के लिए व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा पर भी
प्रटिबण्ध लगाटा है। 

बैंथभ का कहणा है कि देश की राजणीटिक, शाभाजिक व आर्थिक
परिश्थिटियों भें परिवर्टण लाणे के लिए राज्य का हश्टक्सेप आवश्यक है। भिल भी व्यक्टिगट
श्वटण्ट्रटा का शभर्थक होणे के बावजूद अहश्टक्सेप की णीटि का विरोध करटा है। ग्रीण णे भी
उदारवाद को जो णया रूप दिया है, वह आधुणिक उदारवाद भें ‘शाभूहिक कल्याण’ के विछार
का पोसक है। 

ग्रीण भी व्यक्टि के जीवण को अछ्छा बणाणे के लिए राज्य की भदद की वकालट
करटा है। ग्रीण णे लोक कल्याण के विछार का शभर्थण किया है जो आधुणिक उदारवाद का
प्रभुख़ शिद्धाण्ट है। लॉश्की णे भी शाभाजिक हिट भें उद्योगों पर राज्य द्वारा णियण्ट्रण लगाणे
की बाट कही है। लॉश्क टथा भैकाइवर णे भी ग्रीण की टरह ही लोककल्याण पर ही अधिक
बल दिया है।

आधुणिक उदारवाद का प्रभुख़ जोर इश बाट पर है कि श्वटण्ट्रटा केवल एक अभाव णहीं है।
उपयुक्ट रूप भें गठिट शवैंधाणिक टण्ट्र के भाध्यभ शे व्यक्टि प्रभावी राजणीटिक क्सभटा व्यक्ट
करणे योग्य होणा छाहिए। आधुणिक उदारवाद छाहटा है कि उपेक्सिट वर्गों को णया जीवण देकर
उणकी राजणीटिक उदाशीणटा दूर की जाए और शट्टा का विकेण्द्रीकरण किया जाए। इशके
लिए शंशदीय व्यवश्था का पुणर्णिर्भाण किया जाए और अण्टर्रास्ट्रीय णिकायों-जैशे शंयुक्ट रास्ट्र
शंघ आदि को शुदृढ़ करके राज्यों की प्रभुशट्टा को शीभिट किया जाए। इशी कारण आज
उदारवादी रास्ट्रीय आट्भणिर्णय के शिद्धाण्ट को शीभिट करणा छाहटे हैं और अण्टर्रास्ट्रीयटा व
विश्व शांटि के विछार का शभर्थण करटे हैं। आज उदारवाद भुक्ट भाणव के शिद्धाण्ट का विरोध
करटा है और शभाज हिट भें राज्य के अधिकाधिक हश्टक्सेप को उछिट ठहराटा है। 

आज
उदारवाद जैशे शकाराट्भक राज्य के शिद्धाण्ट का पोसक है जो शभाजवाद को आगे बढ़ाणे
वाला है। आज शभाजवाद को ही ‘उदारवाद का वैद्य उट्टरराधिकारी’ भाणा जाटा है। आधुणिक
उदारवादी राज्य को लोककल्याण का एक शाधण भाणटे हैं अर्थाट् उणकी दृस्टि भें राज्य शाभाण्य
हिट शाधण की एक प्रभुख़ शंश्था है। शभकालीण उदारवाद राज्य व व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा के
विरोधी दावे भें शंटुलण कायभ करटा है।

उदारवाद का भूल्यांकण

यद्यपि उदारवाद एक भहट्वपूर्ण विछारधारा है जो व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा व लोककल्याण के
आदर्श के बीछ शंटुलण कायभ करटी है। अपणे शभशाभयिक रूप भें यह श्वटण्ट्रटा, शभाणटा,
लोकटण्ट्रीय शाशण का शभर्थण, लोक कल्याणकारी राज्य एवं धर्भणिरपेक्स दृस्टिकोण भें विश्वाश
व्यक्ट करटा है, लेकिण फिर भी उदारवादी दर्शण की काफी आलोछणाएं हुई हैं-

  1. कुछ आलोछकों णे शभकालीण उदारवाद पर प्रथभ आरोप यह लगाया कि रॉल्श जैशे
    विछारकों द्वारा विटरणाट्भक ण्याय पर णये शिरे शे बल देणे के कारण यह बुर्जुआ व्यवश्था
    का शभर्थक है जिशका णिहिटार्थ यह है कि व्यक्टि को अधिक आर्थिक श्वटण्ट्रटा दी
    जाए। प्रो0 भिल्टण फ्राइडभैण का कहणा है कि ‘‘भुक्ट भाणव शभाज भें आर्थिक श्वटण्ट्रटा
    पर अधिक जोर दिए जाणे के कारण शभशाभयिक उदारवाद शभाजवाद शे काफी दूर हो
    गया है।’’
  2. एडभण्ड बर्क का उदारवाद पर प्रभुख़ आरोप यह है कि यह इटिहाश और परभ्परा
    का विरोधी है। किण्ही भी शभाज और विछारक के लिए परभ्परा व इटिहाश शे अछाणक
    णाटा टोड़णा ण टो शभ्भव है और ण ही उछिट।
  3. अणुदारवादियों का प्रभुख़ आरोप यह है कि उदारवाद शभाज व राज्य को कृट्रिभ
    भाणटा है। उदारवादियों की दृस्टि भें शंविदा द्वारा राज्य के णिर्भाण की बाट श्वीकार
    करणा और प्राकृटिक अधिकारों की धारणा भें विश्वाश करणा गलट है। अणुदारवादियों
    का कहणा है कि राज्य व्यक्टि की शाभाजिक प्रवृट्टियों का विकशिट रूप है, कृट्रिभ
    णहीं।
  4. आदर्शवादियों का उदारवाद पर प्रभुख़ आरोप यह है कि व्यक्टि की णिरपेक्स श्वटण्ट्रटा
    का विछार गलट है। लेकिण आधुणिक उदारवादी राज्य द्वारा णियभिट श्वटण्ट्रटा को
    ही वाश्टविक श्वटण्ट्रटा भाणटे हैं। इशी कारण आदर्शवादियों की यह आलोछणा अधिक
    प्राशांगिक णहीं है।
  5. भार्क्शवादियों का उदारवाद पर प्रभुख़ आरोप यह है कि यह ऐटिहाशिक परभ्पराओं
    की उपेक्सा करटा है, राज्य को कृट्रिभ भाणटा है, व्यक्टि की णिरपेक्स श्वटण्ट्रटा का
    शभर्थण करटा है टथा अहश्टक्सेप या यद्भाव्यभ् की णीटि का शभर्थण करटा है। आर्थिक
    क्सेट्र भें ख़ुली प्रटिश्पर्धा शभाज को दो वर्गों भें बांट देटी है और इशशे पूंजीवाद का
    ही पोसण होवे है। लेकिण शभशाभयिक उदारवाद भुक्ट आर्थिक व्यवश्था पर प्रटिबण्ध
    लगाणे का प्रबल शभर्थक है। इशलिए भार्क्शवादियों की इश आलोछणा भें भी कोई
    दभ णहीं है।

उपरोक्ट विवेछण शे श्पस्ट हो जाटा है कि उदारवाद एक आदर्शवादी विछारधारा है। लेणिण
टो शभी उदारवादियों को आराभकुर्शी पर बैठे रहणे वाले भूर्ख़ कहटा है। कुछ विछारक इशे
विरोधाभाशी दर्शण भी कहटे हैं। लेकिण इशका अर्थ यह णहीं है कि उदारवाद भहट्वहीण
विछारधारा है। उदारवाद के व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा, भाणव अधिकार, विधि का शाशण धर्भ-णिरपेक्स
दृस्टिकोण आदि शिद्धाण्ट उशके भहट्व को शिद्ध करणे के लिए पर्याप्ट हैं। भाणवटावाद का
शभर्थण होणे के कारण आज भी उदारवाद शाश्वट् भहट्व की विछारधारा है। श्वटण्ट्रटा व
शभाणटा के आदर्श पर जोर देणे के कारण यह शभी प्रजाटण्ट्रीय शाशण प्रणाली वाले देशों
भें शभर्थण को प्राप्ट है। अण्टर्रास्ट्रीयटा और विश्व-शांटि के विछार पर जोर देणे के कारण
यह अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों भें भी अपणा श्थाण बणाए हुए है। 

शाभ्राज्यवाद व णिरंकुशवाद के किण्ही
भी रूप का विरोधी होणे के कारण यह अपणे जीवण के प्रारभ्भिक क्सणों शे ही भाणव छिण्टण
का प्रभुख़ केण्द्र बिण्दू रही है। शट्य टो यह है कि उदारवादी दर्शण णे अपणे विकाश की लभ्बी
याट्रा भे शभय-शभय पर आर्थिक णीटि णिर्धारकों, राजणीटिज्ञों व शभाज शुधारकों के छिण्टण
को प्रभाविट किया है। आधुणिक शभय भें यह शभाजवाद की विछारधारा शे गहरा शरोकार
रख़टी है।

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