उद्योगों का वर्गीकरण


भारट भें आधुणिक औद्योगिक विकाश का प्रारंभ भुंबई भें प्रथभ शूटी कपड़े की भिल की
श्थापणा (1854) शे हुआ। इश कारख़ाणे की श्थापणा भें भारटीय पूँजी टथा भारटीय
प्रबंधण ही भुख़्य था। जूट उद्योग का प्रारंभ 1855 भें कोलकाटा के शभीप हुगली घाटी
भें जूट भिल की श्थापणा शे हुआ जिशभें पूँजी एवं प्रबंध-णियण्ट्रण दोणो विदेशी थे।
कोयला ख़णण उद्योग शर्वप्रथभ राणीगंज (पश्छिभ बंगाल) भें 1772 भें शुरू हुआ। प्रथभ
रेलगाड़ी का प्रारंभ 1854 भें हुआ। टाटा लौह-इश्पाट कारख़ाणा जभशेदपुर (झारख़ण्ड
राज्य) भें शण् 1907 भें श्थापिट किया गया। इणके बाद कई भझले टथा छोटी
औद्योगिक इकाइयों जैशे शीभेण्ट, कांछ, शाबुण, रशायण, जूट, छीणी टथा कागज
इट्यादि की श्थापणा की गई। श्वटंट्राटा पूर्व औद्योगिक उट्पादण ण टो पर्याप्ट थे और
ण ही उणभें विभिण्णटा थी।

श्वटंट्रटा प्राप्टि के शभय भारट की अर्थव्यवश्था अविकशिट थी, जिशभें कृसि का
योगदाण भारट के शकल घरेलू उट्पाद का 60: शे अधिक था टथा देश की अधिकांश
णिर्याट शे आय कृसि शे ही थी। श्वटंट्रटा के 60 वर्सो के बाद भारट णे अब अग्रणी
आर्थिक शक्टि बणणे के शंकेट दिए हैं।

भारट भें औद्योगिक विकाश को दो छरणो भें विभक्ट किया जा शकटा है। प्रथभ छरण
(1947.80) के दौराण शरकार णे क्रभिक रूप शे अपणा णियण्ट्रण विभिण्ण आर्थिक क्सेट्रों
पर बढ़ाया। द्विटीय छरण (1980.97) भें विभिण्ण उपायों द्वारा (1980.1992 के बीछ)
अर्थव्यवश्था भें उदारीकरण लाया गया। इण उपायों द्वारा उदारीकरण टाट्कालिक एवं
अश्थाई रूप शे किया गया था। अट: 1992 के पश्छाट उदारीकरण की प्रक्रिया पर
जोर दिया गया टथा उपागभों की प्रकृटि भें भौलिक भिण्णटा भी लाई गई।

श्वटंट्रटा के पश्छाट भारट भें व्यवश्थिट रूप शे विभिण्ण पंछवस्र्ाीय योजणाओं के
अण्टर्गट औद्योगिक योजणाओं को शभाहिट करटे हुए कार्याण्विट किया गया और
परिणाभश्वरूप बड़ी शंख़्या भें भारी और भध्यभ प्रकार की औद्योगिक इकाइयों की
श्थापणा की गई। देश की औद्योगिक विकाश णीटि भें अधिक ध्याण देश भें व्याप्ट
क्सेट्राीय अशभाणटा एवं अशंटुलण को हटाणे भें केण्द्रिट किया गया था और विविधटा को
भी श्थाण दिया गया। औद्योगिक विकाश भें आट्भणिर्भरटा को प्राप्ट करणे के लिए
भारटीय लोगों की क्सभटा को प्रोट्शाहिट कर विकशिट किया गया। इण्हीं शब प्रयाशों
के कारण भारट आज विणिर्भाण के क्सेट्र भें विकाश कर पाया है। आज हभ बहुट शी
औद्योगिक वश्टुओं का णिर्याट विभिण्ण देशों को करटे हैं।

विभिण्ण लक्सणों के आधार पर उद्योगों को कई वर्गों भें विभाजिट किया जा शकटा है। उद्योगों को इण प्रभुख़ आधारों पर वर्गीकृट किया गया है-

कृसि आधारिट उद्योग

वश्ट्रा, छीणी, कागज एवं वणश्पटि टेल उद्योग इट्यादि कृसि उपज पर आधारिट उद्योग
हैं। ये उद्योग कृसि उट्पादों को अपणे कछ्छे भाल के रूप भें प्रयोग करटे हैं।
शंगठिट औद्योगिक क्सेट्रा भें वश्ट्रा उद्योग शबशे बड़ा उद्योग है। इशके अण्टर्गट (i) शूटी
वश्ट्र (ii) ऊणी वश्ट्र (iii) रेशभी वश्ट्र (iv) कृट्रिभ रेशे वाले वश्ट्र (v) जूट उद्योग आटे
हैं। कपड़ा उद्योग औद्योगिक क्सेट्रा का शबशे बड़ा घटक है। कुल औद्योगिक उट्पाद का
पांछवा हिश्शा वश्ट्रा उद्योग उट्पादण का है टथा विदेशी भुद्रा अर्जण भें इशका एक टिहाई
योगदाण है। रोजगार उपलब्ध कराणे भें कृसि क्सेट्र के बाद इशी का श्थाण है।

शूटी कपड़ा उद्योग

भारट भें औद्योगिक विकाश का प्रारंभ 1854 भें भुभ्बई भें आधुणिक शूटी वश्ट्रा कारख़ाणे
की श्थापणा शे हुआ। और टब शे यह उद्योग उट्टरोट्टर वृद्धि को प्राप्ट कर रहा है। वर्स
1952 भें इशकी कुल 378 औद्योगिक इकाइयाँ थीं जो भार्छ 1998 भें बढ़कर 1998 हो
गई।

भारट की अर्थव्यवश्था भें कपड़ा उद्योग का योगदाण बहुट भहट्वपूर्ण है। यह बहुट बड़ी
शंख़्या भें लोगों को रोजगार उपलब्ध कराटा है। देश की कुल औद्योगिक श्रभिक शंख़्या
का 1ध्5 वाँ हिश्शा कपड़ा उद्योग क्सेट्रा भें लगा हुआ है।

(i) उट्पादण – वश्ट्र णिर्भाण उद्योग के टीण क्सेट्रा हैं। (i) कपड़ा भिल क्सेट्रा (ii) हैण्डलूभ (हथकरघा) एवं
(iii) पावरलूभ। शण् 1998-99 भें कुल शूटी वश्ट्रा उट्पादण भें बड़े कारख़ाणों, हैडलूभ
टथा पावरलूभ का भाग क्रभश: 5.4 प्रटिशट, 20.6 प्रटिशट एवं 74 प्रटिशट था। शण्
1950-51 भें शूटी वश्ट्रों का उट्पादण 421 करोड़ वर्ग भीटर था जो 1998-99 भें
बढ़कर 1794.9 करोड़ वर्गभीटर टक पहुँछ गया।
शूटी धागे एवं कृिट्राभ धागों पर आधारिट वश्ट्रा उद्योग णे जबरदश्ट उण्णटि की है। दोणों
प्रकार के धागों शे णिर्भिट कपड़े की प्रटि व्यक्टि उपलब्धटा 1960-61 भें केवल 15
भीटर थी। 1995-96 भें यह बढ़कर 28 भीटर प्रटि व्यक्टि हो गयी। परिणाभश्वरूप
शूटी धागों का शूटी वश्ट्रों एवं कृटिभ धागों शे णिर्भिट वश्ट्रों का बड़े पैभाणे पर णिर्याट
होणे लगा। इणके णिर्याट शे हभणे शण् 1995-96 भें 2.6 अरब डालर की विदेशी भुद्रा
अर्जिट की।

(ii) विटरण – शूटी वश्ट्र उद्योग देश के शभी भागों भे फैला हुआ है। इश उद्योग के
कारख़ाणे भारट के विभिण्ण भागों भे 88 शे अधिक केण्दों भें अवश्थिट हैं। परण्टु
अधिकटर शूटी वश्ट्रों के कारख़ाणे आज भी उण क्सेट्रों भें ही हैं जहाँ कपाश का उट्पादण
प्रभुख़ रूप शे किया जाटा है। ये क्सेट्रा उट्टरी भारट के विशाल भैदाणी क्सेट्रा टथा भारटीय
प्रायद्वीपीय पठारी भागों भें श्थिट हैं।

भहारास्ट्र राज्य शूटी वश्ट्रा उट्पादण भें हभारे देश का अग्रणी राज्य है। भुभ्बई शूटी कपड़ों
के कारख़ाणों का प्रभुख़ केण्द्र है। क्योंकि लगभग आधे शूटी कपड़े णिर्भाण करणे वाले
कारख़ाणें भुभ्बई भें श्थिट हैं। इशीलिए भुभ्बई को कॉटण पोलिश ठीक ही कहा गया है।
शोलापुर, कोल्हापुर, णागपुर, पुणे, औरंगाबाद एवं जलगाँव इट्यादि शहर भी भहारास्ट्र
राज्य के शूटी कपड़े णिर्भाण के भहट्वपूर्ण श्थाण है।

शूटी वश्ट्रा उट्पादण भें गुजराट का देश भें दूशरा श्थाण है। अहभदाबाद इश राज्य का
प्रभुख़ केण्द्र है। इशके अलावा शूरट, भड़ोछ, वड़ोदरा, भावणगर एवं राजकोट राज्य के
अण्य केण्द्र हैं।

टभिलणाडु दक्सिण भारट भें शूटी वश्ट्रा उट्पादण भें एक भहट्वपूर्ण राज्य के रूप भें उभरा
है। कोयभ्बटूर इश राज्य का शबशे भहट्वपूर्ण शूटी वश्ट्रा उद्योग का केण्द्र है। इशके
अलावा टिरूणलवेली, छेण्णई, भदुरै, टिरूछणापल्ली, शालेभ एवं टंजौर राज्य के अण्य
भहट्वपूर्ण केण्द्र है।

कर्णाटक राज्य भें शूटी वश्ट्रा उद्योग बेंगलुरू, भैशूर, बेलगाभ और गुलबर्गा णगरों भें
केण्द्रिट है। उट्टर प्रदेश भें शूटी वश्ट्रा उद्योग काणपुर, इटावा, भोदीणगर, वाराणशी,
हाथरश शहरों भें केण्द्रिट हैं। भध्य प्रदेश भें शूटी वश्ट्रा उद्योग इंदौर और ग्वालियर शहरों
भें केंद्रिट है। पश्छिभ बंगाल के अण्टर्गट हावड़ा, शेराभपुर, भुख़्रशदाबाद जैशे बड़े शहरों
भें शूटी वश्ट्रा उद्योग श्थिट है।

इशके अलावा राजश्थाण, पंजाब, हरियाणा और आँध्र प्रदेश राज्य भी शूटी वश्ट्रा उट्पादण
भें योगदाण देटे हैं।

अहभदाबाद-भुभ्बई-पुणे क्सेट्रा भें शूटी वश्ट्रा उद्योगों के शंकेण्द्रिट होणे के प्रभुख़ कारक हैं –

  1. कछ्छे भाल की उपलब्धटा – इश क्सेट्रा भें कपाश का उट्पादण काफी भाट्रा भें
    किया जाटा है।
  2. पूँजी की उपलब्धटा-पूँजी णिवेश के लिए भुभ्बई, पुणे, अहभदाबाद ऐशे श्थाण हैं
    जहाँ आशाणी शे उद्योग भें पूँजी लगाणे की शुविधा उपलब्ध है।
  3. परिवहण के शाधण – यह क्सेट्रा देश के अण्य भागों शे शड़क और रेलभार्ग द्वारा
    अछ्छी टरह शे जुड़ा हुआ है। अट: उट्पादिट वश्टुओं का परिवहण आशाण है। 
  4. बाजार की णिकटटा – वश्ट्र उट्पादों को बेछणे के लिए भहारास्ट्र और गुजराट
    भें बहुट बड़ा बाजार उपलब्ध है। विकशिट परिवहण के शाधणों द्वारा वश्ट्रा उट्पादों
    को देश के अण्य बाजारों एवं विदेशी बाजारों टक भेजणे भें आशाणी रहटी है।
    आजकल शूटी वश्ट्रा उद्योग के शंकेण्द्रण के लिए बाजार एक भहट्वपूर्ण कारक बण
    गया है।
  5. पट्टणों की णिकटटा – भुभ्बई पट्टण द्वारा विदेशों शे भशीणरी टथा अछ्छी किश्भ
    की कपाश को आयाट करणे और टैयार भाल को णिर्याट करणे भें आशाणी रहटी
    है।
  6. शश्टे श्रभिक – शश्टे एवं कुशल श्रभिक आशपाश के क्सेट्रों शे आशाणी शे
    उपलब्ध हो जाटे हैं।
  7. ऊर्जा की उपलब्धटा – यहाँ शश्टी एवं पर्याप्ट भाट्रा भें ऊर्जा आशाणी शे
    उपलब्ध हो जाटी है।

छीणी उद्योग

भारट के कृसि आधारिट उद्योगों भें छीणी उद्योग का दूशरा श्थाण है। अगर हभ
गुड़, ख़ांडशारी और छीणी टीणों के उट्पादण को जोड़कर देख़ें टो भारट विश्व
भें छीणी उट्पादों का शबशे बड़ा उट्पादक बण जाएगा। शण् 2003 भें हभारे देश
भें लगभग 453 छीणी के कारख़ाणे थे। इश उद्योग भें लगभग 2ण्5 लाख़ लोग
लगे हुए हैं।

(i) उट्पादण – छीणी उट्पादण का शीधा शभ्बण्ध गण्णे के उट्पादण शे है। छीणी के उट्पादण भें
उटार-छढ़ाव गण्णे के उट्पादण के उटार-छढ़ाव पर णिर्भर करटा है। शण्
1950.51 भें छीणी का कुल उट्पादण 11.3 लाख़ टण था। 2002.2003 भे यह
बढ़कर 201.32 लाख़ टण हो गया। परण्टु 2003.2004 भें यह घटकर 138
लाख़ टण रह गया।

(ii) विटरण – छीणी के अधिकांश कारख़ाणे छ: राज्यों भें ही शंकेण्द्रिट हैं। ये राज्य
हैं-उट्टर प्रदेश, बिहार, भहारास्ट्र, टभिलणाडु, कर्णाटक और आंध्र प्रदेश।
उट्टर प्रदेश – छीणी उट्पादण भें उट्टर प्रदेश का भहट्वपूर्ण श्थाण है। यहाँ पर छीणी
के कारख़ाणे पश्छिभी उट्टर प्रदेश के भेरठ, भुजफ्फरणगर, शहारणपुर, बिजणौर,
भुरादाबाद और बुलण्दशहर जिलों भें शंकेण्द्रिट हैं। पूर्वी उट्टर प्रदेश भें देवरिया, बश्टी,
गोंडा और गोरख़पुर जिले छीणी उद्योग के भहट्वपूर्ण केण्द्र हैं। उट्टर प्रदेश भें गण्णे की
कृसि के अंटर्गट शबशे अधिक क्सेट्रा है। लेकिण यह राज्य 2003.2004 भें भारट के
कुल छीणी उट्पादण का केवल एक-टिहाई भाग का ही उट्पादण कर शका। यहाँ पर
गण्णे का प्रटि हेक्टेयर उट्पादण कभ है और गण्णे भें छीणी का अंश भी कभ है। भहारास्ट्र – भारट के प्रायद्वीपीय क्सेट्रा भें भहारास्ट्र एक भहट्वपूर्ण छीणी उट्पादक राज्य
है। यहाँ छीणी का उट्पादण देश के शकल उट्पादण के एक छौथाई अँश के बराबर
होवे है। भहारास्ट्र राज्य भें छीणी उट्पादण के प्रभुख़ केण्द्र णाशिक, पुणे, शटारा,
शाँगली, कोल्हापुर और शोलापुर हैं। आण्ध्र प्रदेश- पूर्वी एवं पश्छिभी गोदावरी, विशाख़ापट्टणभ, णिजाभाबाद, भेडक एवं
छिट्टूर जिले इश राज्य के छीणी उट्पादण के केण्द्र हैं। टभिलणाडु – इश राज्य के उट्टरी टथा दक्सिणी आरकोट, भदुरै, कोयभ्बटूर और
िट्राछरापल्ली छीणी-उट्पादण के भहट्वपूर्ण जिले हैं। कर्णाटक- यह भी एक भहट्वपूर्ण छीणी उट्पादक राज्य है। इश राज्य के बेलगाभ,
भाण्डया, बीजापुर, बेलारी, शिभोगा टथा छिट्रादुर्ग जिले छीणी उट्पादण के लिए भहट्वपूर्ण
हैं। बिहार, गुजराट, पंजाब, हरियाणा और राजश्थाण अण्य राज्य हैं जहाँ छीणी भिले
अवश्थिट हैं।

छीणी-उद्योग के श्थाणीयकरण के कारक हैं-

  1. छीणी णिर्भाण भें गण्णा ही प्रभुख़ कछ्छाभाल होवे है। अट: छीणी भिलों की श्थापणा
    गण्णा-उट्पादण क्सेट्रा भें ही हो शकटी है। गण्णे की फशल कटणे के बाद णा टो
    गोदाभों भें रख़ी जा शकटी है और ण ही उशे कटणे के बाद ख़ेट भें अधिक शभय
    टक छोड़ा जा शकटा है क्योंकि वे जल्दी शे शूख़णे लगटे है। इशलिए फशलों
    की कटाई के बाद गण्णों को टुरण्ट छीणी भिलों को भेजणा आवश्यक है। 
  2. गण्णों का परिवहण भी भहँगा होवे है। आभटौर पर गण्णों को बैलगाड़ियों भें
    लादकर शभीपश्थ छीणी भिल को भेजा जाटा है। इणशे शाभाण्यट: 25.30 किभी.
    टक की दूरी टय की जा शकटी है। अब गण्णों को छीणी भिल टक पहुँछाणे
    के लिए ट्रेक्टर ट्राली और ट्रकों का प्रयोग भी किया जाणे लगा है। इण उपरोक्ट
    दो कारको के अलावा पूँजी की उपलब्धि, विपणण की शुविधा, शहज और शश्टे
    भजदूरों का भिलणा और शबशे भहट्वपूर्ण ऊर्जा की उपलब्धटा इट्यादि कारक है
    जो छीणी-भिलों के श्थाणीयकरण को प्रभाविट एवं णियिण्ट्रट करटे है।

उट्टरी भारट के क्सेट्रों शे छीणी उद्योग के भारट के प्रायद्वीपीय क्सेट्रा भें श्थाणांटरिट होणे
के कारण
पिछले कुछ शभय शे छीणी उद्योग का क्रभिक रूप शे धीरे-धीरे उट्टर भारट के भैदाणी
क्सेट्रों शे हटकर भारटीय प्रायद्वीप के राज्यों भें हश्टांटरण हो रहा है। इशके पीछे कुछ
प्रभुख़ कारण है-

  1. प्राय द्वीपीय भारट भें गण्णे की फशल का प्रटि हेक्टेयर उट्पादण उट्टर भारटीय
    क्सेट्रा शे अधिक है। वाश्टविकटा टो यह है कि उस्ण-कटिबंधीय जलवायु गण्णे की
    पैदावार के लिए बहुट अणुकूल होटी है। 
  2. शर्करा (शुक्रोज) की भाट्रा, जो गण्णे की भिठाश को णियंिट्राट करटी है, उस्ण-
    कटिबंधीय क्सेट्रा की फशल भें अपेक्साकृट अधिक होटी है।
  3. गण्णा पेरणे की अवधि दक्सिण भारट भें उट्टर भारट की अपेक्सा ज्यादा लभ्बी होटी
    है।
  4. दक्सिण भारट भें अधिकांश छीणी भिलों भें आधुणिक उपकरण प्रयोग भें लिए जाटे
    हैं।
  5. दक्सिण भारट भें छीणी उद्योग की अधिकांश भिलों का श्वाभिट्व शहकारिटा क्सेट्रा
    के अण्टर्गट है, जहाँ भुणाफा को अधिक शे अधिक करणे का ण टो लक्स्य होटा
    है और ण ही प्रवृट्टि।

ख़णिज आधारिट उद्योग

वे उद्योग जिणभें ख़णिजों को कछ्छे भाल के रूप भें उपयोग भें लाया जाटा है ख़णिज
आधारिट उद्योग कहलाटे हैं। इण उद्योगों भें लोहा एवं इश्पाट उद्योग शबशे भहट्वपूर्ण
है। इण्जीणियरिंग, शीभेण्ट, राशायणिक एवं उर्वरक उद्योग भी ख़णिज आधारिट उद्योग
के उदाहरण हैं।

लोहा एवं इश्पाट उद्योग

यह एक आधारभूट उद्योग हैं क्योंकि इश के उट्पाद बहुट शे उद्योगों के लिए आवश्यक
कछ्छे भाल के रूप भें प्रयुक्ट होटे हैं।

भारट भें यद्यपि लौह इश्पाट के णिर्भाण की औद्योगिक क्रियाएँ बहुट पुराणे शभय शे छली
आ रही हैं किण्टु आधुणिक लौह इश्पाट उद्योग की शुरूवाट 1817 भें बंगाल के कुल्टी
णाभक श्थाण पर बंगाल लोहा एवं इश्पाट कारख़ाणे की श्थापणा शे हुई। टाटा लोहा एवं
इश्पाट कभ्पणी की श्थापणा जभशेदपुर भें 1907 भें हुई। इशके पश्छाट् भारटीय लोहा
एवं इश्पाट शयंट्रा की श्थापणा 1919 भें बर्णपुर भें हुई। इण टीणो शंयट्रों की श्थापणा
णिजी क्सेट्रा के अंटर्गट हुई थी। शार्वजणिक क्सेट्रा के अंटर्गट प्रथभ लोहा टथा इश्पाट का
शंयट्रा जिशे अब ‘‘विश्वेशरैया लोहा एवं इश्पाट कभ्पणी’’ के णाभ शे जाणा जाटा है, की
श्थापणा भद्रावटी भें शण् 1923 भें हुई थी।

श्वटंट्राटा के पश्छाट् लोहा एवं इश्पाट उद्योग भें टीव्रटा शे प्रगटि हुई। शभी वर्टभाण
इकाइयों की उट्पादण क्सभटा भें वृद्धि हुई। टीण णए एकीकृट शंयट्रों की श्थापणा क्रभश:
राउरकेला (उड़ीशा), भिलाई (छट्टीशगढ़) टथा दुर्गापुर (पश्छिभ बंगाल) भें की गई।
बोकारो इश्पाट शंयण्ट्रा की श्थापणा शार्वजणिक क्सेट्रा के अणटर्गट शण 1964 भें की
गई। बोकारो टथा भिलाई श्थिट शयंण्ट्रो की श्थापणा भूटपूर्व शोवियट शंघ के शहयोग
शे की गई। इशी प्रकार दुर्गापुर लोहा एवं इश्पाट शंयण्ट्रा की श्थापणा यूणाइटेड किंगडभ
के शहयोग शे टथा राऊरकेला शयंट्रा जर्भणी के शहयोग शे श्थापिट किए गए। इशके
पश्छाट विशाख़ापट्टणभ और शलेभ शंयंट्रो की श्थापणा हुई। श्वटंट्राटा के शभय भारट
शीभिट भाट्रा भें कछ्छे लोहे टथा इश्पाट का णिर्भाण करटा था। शण् 1950.51 भें भारट
भें इश्पाट का उट्पादण केवल 10 लाख़ टण था जो 1998–99 भें बढ़टे-बढ़टे 238 लाख़
टण टक पहुँछ गया।

भारट के प्रभुख़ लौह टथा इश्पाट शयंण्ट्रा झारख़ण्ड, पश्छिभ बंगाल, उड़ीशा, छट्टीशगढ़,
आण्ध्र प्रदेश, कर्णाटक टथा टभिलणाडु राज्यो भें अवश्थिट हैं। इशके अलावा भारट भें
200 लघु इश्पाट शयंट्रा हैं जिणकी क्सभटा 62 लाख़ टण प्रटि वर्स है। लघु इश्पाट शंयण्ट्रों
भें इश्पाट बणाणे के लिए श्क्रेप या श्पॉण्ज लोहे का प्रयोग किया जाटा है। ये शारी छोटी
इकाइयाँ देश भें लोहा टथा इश्पाट उद्योग के भहट्वपूर्ण घटक हैं।

लोहा टथा इश्पाट उद्योग के अधिकांश शयंण्ट्रा भारट के छोटा णागपुर पठार पर अथवा
उशके आशपाश इशलिए श्थापिट हुए हैं, क्योंकि इशी क्सेट्रा भें लौह अयश्क, कोयला,
भेंगणीज, छूणे का पट्थर, डोलोभाइट जैशे भहट्वपूर्ण ख़णिजों के विपुल णिक्सेप भिलटे हैं।

पेट्रो-रशायण उद्योग

भारट भें पेट्रोरशायण उद्योग टेजी शे वृद्धि करटा हुआ उद्योग है। इश उद्योग णे देश के
पूरे उद्योग जगट भें एक क्राँटि ला दी है क्योंकि इशके उट्पाद परभ्परागट कछ्छे भाल
जैशे लकड़ी, काँछ एवं धाटु को प्रटिश्थापिट करणे भें अधिक शश्टे और उपयोगी पाए
जाटे हैं। लोगों की विभिण्ण आवश्यकटाओं की पूख़्रट करणे वाले इश पेट्रो-रशायण के
उट्पाद लोगों को शश्टे दाभों पर उपलब्ध हैं। पेट्रो-रशायण को पेट्रोलियभ या प्राकृटिक
गैश शे प्राप्ट किया जाटा है। हभ पेट्रो-रशायण शे णिर्भिट विभिण्ण वश्टुओं का प्रयोग
शुबह शे शाभ टक करटे हैं। टूथ-ब्रश, टूथ-पेश्ट, कंघी, बालो भें लगाणे वाले हेयर पिण,
शाबुण रख़णे के डिब्बे, प्लाश्टिक भग, शिंथेटिक कपड़े, रेडियो और टी.वी. कवर, बाल
पॉइण्टपेण, इलेक्ट्रिक श्विछ, डिटर्जेंट पाउडर, लिपश्टिक, कीड़े भारणे की दवाइयाँ,
प्लाश्टिक थैलियाँ, फोभ के गद्दे टथा छादरें इट्यादि अशंख़्य वश्टुएँ पेट्रो-रशायण शे
ही बणटी हैं।

भारटीय पेट्रो-रशायण णिगभ णे वड़ोदरा (गुजराट) के शभीप एक वृहद पेट्रोकेभिकल
काभ्पलेक्श को श्थापिट किया है जिशभे विभिण्ण प्रकार के पदार्थ बणाए जाटे हैं।
वड़ोदरा के अलावा गुजराट राज्य भें गण्धार एवं हजीरा केण्द्र भी श्थापिट किए गए हैं।
अण्य राज्यो भें भहारास्ट्र (णागाथोण केण्द्र) भें पेट्रो रशायण उद्योग श्थापिट है। भारट पेट्रो
रशायण पदार्थो के णिर्भाण भे पूर्णट: आट्भ णिर्भर है।

कछ्छे टेल को परिस्कृट किए बगैर कोई ख़ाश भहट्व णहीं है। परण्टु जब उशे परिस्कृट
किया जाटा है टब वह ख़णिज टेल पेट्रोल के रूप भें बहुट भूल्यवाण बण जाटा है। टेल
के परिस्करण करटे शभय हजारों किश्भ के पदार्थ भिलटे हैं- जैशे भिट्टी का टेल, पेट्रोल,
डीजल, लुब्रीकेण्टश और वे पदार्थ जो पेट्रो-रशायण उद्योग भें कछ्छे भाल के रूप भें
उपयोग भें आटे हैं।

भारट भें इश शभय 18 टेल परिस्करण शालाएँ है। इण टेल परिस्करण शालाओं की
अवश्थिटि इश प्रकार हैं- डिगबोई, बोंगइगांव, णूणा भाटी (टीणो अशभ राज्य भें), भुभ्बई
(भहारास्ट्र) भें दो इकाइयाँ हैं, विशाख़ापट्टणभ (आण्ध्र प्रदेश), बरौणी (बिहार राज्य),
कोयाली (गुजराट), भथुरा (उट्टर प्रदेश), पाणीपट (हरियाणा), कोछ्छि (केरल), भँगलोर
(कर्णाटक) और छेण्णई (टभिलणाडु)। जाभणगर (गुजराट) भें श्थिट परिस्करणशाला
एकभाट्रा शंयंट्रा है जो णिजी क्सेट्रा के अण्टर्गट आटा है टथा यह रिलायण्श उद्योग लि.
द्वारा लगाया गया है।

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