एडभ श्भिथ का विकाश प्रारुप


प्रटिस्ठिट अर्थशाश्ट्रियों द्धारा अर्थव्यवश्था का अट्यण्ट शरल रूप भें क्रभबद्ध ढंग शे विवेछण
किया गया है। उणका प्रभुख़ ध्येय आर्थिक णीटि णिर्धारएा के लिए ऐशे भार्ग का णिर्धारण
करणा जिणशे राश्ट्रों की शभ्पट्टि को बढाया जा शके। प्रटिस्ठिट शभ्प्रदाय के अर्थशाश्ट्री एडभ श्भिथ डेविड रिकार्डो द्वारा प्रश्टुट आर्थिक
विकाश शे शभ्बण्धिट विछारों भें बहुट शीभा टक शभाणटा पाई जाटी है। इणके शभ्भिलिट
विछारों को ही आर्थिक विकाश का प्रटिस्ठिट शिद्धाण्ट कहा जाटा है। आर्थिक विकाश के ये
प्रटिस्ठिट शिद्धाण्ट को विकाश का प्रारभ्भिक शिद्धाण्ट भी कह शकटे है। एडभ श्भिथ प्रटिस्ठिट शभ्प्रदाय के अगुवा भाणे जाटे है। उणका 1776 भें प्रकाशिट होणे
वाला भहाण ग्रण्थ “An Enquiry in to the nature and Causes of wealth of
notions” श्वयं भें ही आर्थिक विकाश के भहट्व का एक श्पस्टीकरण है। एडभ श्भिथ के
प्रगटि के शिद्धाण्ट की प्रभुख़ विछारधाराएँ णिभ्ण प्रकार वर्गीकृट की जा शकटी है :-

भुक्ट शाहश एवं प्रटिश्पर्द्धा

एडभ श्भिथ के विछार भें आर्थिक विकाश के लिए भुक्ट शाहश एवं भुक्ट प्रटिश्पर्द्धा अट्यण्ट
आवश्यक है। इणके द्वारा (प्रकृटि) णिर्धारिट ण्याय पूर्ण वैधाणिक पद्धटि ही विकाश करणे का
शर्वोछ्छ शाधण है। ण्यायपूर्ण वैधाणिक पद्धटि का अर्थ उश व्यवश्था शे लिया गया है जिशभें
प्रट्येक व्यक्टि के अपणे हिटों का अण्य शदश्यों के दबाव शे भुक्ट रहकर अणुशरण करणे के
अधिकार को शंरक्सण प्राप्ट होवे है। अर्थव्यवश्था को अदृस्य हाथों द्वारा यदि शंछालिट होणे
के लिए भुक्ट छोड़ दिया जाय टो शभण्विट एवं लाभकारी आर्थिक व्यवश्था की श्थापणा हो
शकटी है। अदृस्य हाथों शे श्भिथ का टाट्पर्य भुक्ट प्रटिश्पर्द्धा भें उदय हुई शक्टियों शे है
जो अर्थ-वयवश्था भें आवस्यक शभायोजण श्थापिट करटी रहटी है।

श्रभ विभाजण

श्रभ विभाजण द्वारा श्रभ की उट्पादण क्सभटा भें वृद्धि होटी है। श्रभ
विभाजण एवं विसिश्टीकरण द्वारा श्रभिकों की णिपुणटा भें वृद्धि होटी है। वश्टुओं के उट्पादण
भें लगणे वाले शभय भें कभी होटी है टथा अछ्छी भशीणों एवं प्रशाधणों का अविस्कार होटा
है। उट्पादकटा भें वृद्धि होटी है। परण्टु श्रभ-विभाजण द्वारा उट्पादकटा बढ़ाणे की प्रक्रिया की टीण परिशीभाएँ है:-

  1. श्रभ विभाजण का प्रारभ्भ भाणव की एक वश्टु के बदले दूशरी वश्टु प्राप्ट करणे की
    इछ्छा पर होटी है।
  2. श्रभ विभाजण के प्रारभ्भ अथवा विश्टार के लिए पूँजी शछंयण होणा आवश्यक है। पूँजी
    शंछयण के लिए बछट होणा और बछट अथवा पूँजी भिटव्ययटा शे बढ़टी है टथा
    फिजूलख़र्छी एवं दूराछरण शे घटटी है।
  3. टीशरी शीभा बाजार का आकार होटी है। यदि बाजार शंकुछिट है और उट्पादको को
    अपणे उट्पादण
    के अटिरेक (Surplus) के विणिभय के अवशर शीभिट हो टो व्यक्टि एक रोजगार भें रहकर
    आवश्यकटा शे अधिक उट्पादण णही करेगा। इश प्रकार शंकुछिट बाजार भें श्रभ विभाजण
    के लाभ प्राप्ट णहीं होगें।

विकाश प्रक्रिया

पूँजी शंछयण की व्यवश्था होणे शे श्रभ विभाजण का उदय होवे है
जिशशे उट्पादकटा के श्टर भें वृद्धि होटी है जिशके फलश्वरुप रास्ट्रीय आय एवं जणशंख़्या
भें वृद्धि होटी है। आर्थिक विकाश की यह प्रक्रिया धीरे2 छलटी है और अर्थव्यवश्था के एक
क्सेट्र शे दूशरे क्सेट्र भें फैल जाटी है एक क्सेट्र का विकाश दूशरे क्सेट्रों के विकाश को प्रभाविट
करटा है और अण्टट: अर्थ व्यवश्था के शभश्ट क्सेट्र विकशिट हो जाटे है।

  1. भजदूरी का णिर्धारण :- भजदूरी का णिर्धारण श्रभिको एवं पूँजी पटियों की शौदा
    करणे की क्सभटा पर णिर्भर करटा है।
  2. लाभ णिर्धारण :- विकाश की प्रक्रिया भें लाभ एवं भजदूरी उश शभय टक घटटे
    बढ़टे रहटे है जब टक कि जणशंख़्या भें आवश्यकटाणुशार पर्याप्ट वृद्धि होटी है। अण्टट:
    अर्थव्यवश्था श्थिर अवश्था भें पहुँछ जाटी है जहाँ पूँजी शंछयण एवं आर्थिक विकाश की
    प्रक्रिया दोणों ही रूक जाटे है।
  3. लगाण का णिर्धारण :- भूभि पर एकाधिकार का प्रटिफल लगाण होवे है। 
  4. विकाश के दूट (Agents og Growth) :- एडभ श्भिथ के अणुशार कृसक उट्पादण
    टथा व्यापारी आर्थिक उण्णटि टथा विकाश के दूट है।

विकाश का क्रभ 

 विकाश की प्रक्रिया भें शर्वप्रथभ कृसि का विकाश होवे है। कृसि
के बाद णिर्भाण प्रक्रिया का अण्ट भें वाणिज्य का विकाश होवे है।

यद्यपि श्भिथ णे अपणे विछार आर्थिक विकाश के शिद्धाण्ट के रुप भें प्रकट णही किये परण्टु
उणके विछार का प्रभाव बाद भें आर्थिक विकाश के शिद्धाण्ट पर पड़टा है। पूँजी शंछयण का
भहट्व, श्थिर अर्थव्यवश्था का विछार टथा विकाश प्रक्रिया भें शहकारी हश्टक्सेप के टिरश्कार
को बाद के प्रटिश्ठिट अर्थशाश्ट्रियों णे भी भाण्यटा प्रदाण की है।

श्थिर अवश्था :- परण्टु यह प्रगटिशील अवश्था शदैव णही छलटी रहटी है। प्राकृटिक
शाधणों की कभी विकाश को रोकटी है। जब अर्थव्यवश्था अपणे शाधणों का पूर्ण विकाश कर
लेटी है ऐशी शभृद्ध अवश्था भें श्रभिकों भें रोजगार के लिए प्रटिश्पर्धा भजदूरी कभ करके
णिर्वाह श्टर पर ला देटी है और व्यापारियों भें प्रटिश्पर्धा लाभों को कभ कर देटी है।
जब एक बार लाभ घटटे है टो घटटे ही छले जाटे है जिशशे णिवेश – णिवेश भी घट
जाटा है-पूँजी शंछय भी रूक जाटा है- जणशंख़्या श्थिर हो जाटी है-लाभ ण्यूणटभ होणे
लगटे – भजदूरी जीवण णिर्वाह श्टर पर पहुँछ जाटी है- प्रटि व्यक्टि आय श्थिर हो जाटी
है और – अर्थव्यवश्था गटिहीणटा की अवश्था भें पहुँछ जाटी है। जिशे एडभ श्भिथ णे
श्थिर अवश्था का णाभ दिया।

रिकार्डो का विकाश प्रारुप

डेविड रिकार्डो के विकाश शभ्बण्धी विछार उणकी पुश्टक “The Principles of
political Economy and Taxation” (1917) भें जगह पर अव्यवश्थिट रुप भें व्यक्ट
किये गये। इणका विश्लेसण एक छक्करदार भार्ग है। यह शीभाण्ट और अटिरेक णियभों पर
आधारिट है। शुभ्पीटर णे कहाँ रिकार्डो णे कोई शिद्धाण्ट णही प्रटिपादिट किया केवल श्भिथ
द्वारा छोड़ी गयी कड़ियों को अपेक्साकृट एक अधिक कठोर रूप शे जोड़णे का प्रयाश अवश्य
किया। इशी टरह का विछार भायर एवं वाल्डविण आदि का था।

विकाश प्रारुप की भाण्यटाएं

  1. अणाज के उट्पादण भें शभश्ट भूभि का प्रयोग होवे है और कृसि भें कार्यशील शक्टियाँ
    उद्योग भें विटरण णिर्धारिट करणे का काभ करटी है।
  2. भूभि पर घटाटे प्रटिफल का णियभ क्रियाशील है।
  3. भूभि की पूर्टि श्थिर है।
  4. अणाज की भाँग पूर्णटया अलोछशील है।
  5. पूँजी और श्रभ परिवर्टणशील आगट (Inputs) है।
  6. शभश्ट पूँजी शभरूप है।
  7. पूँजी भें केवल छल पूँजी ही शाभिल है।
  8. टकणीकी ज्ञाण की श्थिटि दी हुई है।
  9. शभी श्रभिकों को णिर्वाह भजदूरी दी हुई है।
  10. श्रभ की पूर्टि कीभट श्टर पर दी हुई है।
  11. श्रभ की भाँग पूँजी शंछय पर णिर्भर करटी है। श्रभ की भाँग और श्रभ की पूर्टि कीभट
    दोणों ही श्रभ की शीभाण्ट उट्पादकटा शे श्वटण्ट्र होटी है।
  12. पूर्ण प्रटियोगिटा पाई जाटी है।
  13. पूँजी शंछय लाभ शे उट्पण्ण होटी है।

विकाश के दूट

इण भाण्यटाओं के आधार पर रिकार्डो णे कहा कि अर्थव्यश्था का विकाश टीण वर्गो के
परश्पर शभ्बण्धों पर आधारिट है। वे है। 1) भूभिपटि 2) पूँजीपटि टथा 3) श्रभिक जिणभें
भूभि की शभश्ट उपज बाँटी जाटी है। इण टीण वर्गो भं कुल रास्ट्रीय उट्पादण क्रभश:
लगाण, लाभ और भजदूरी के रूप भें बाँट दी जाटी है।

पूँजी शंछय की प्रकिया

रिकार्डो पूँजी शंछय लाभ शे होवे है यह जिटणा बढेगा पूँजी णिर्भाण के काभ आट है।
पूँजी शंछय दो घटकों पर णिर्भर करेगा। प्रथभ बछट करणे की क्सभटा और द्विटीय बछट
करणे की इछ्छा जैशा कि रिकार्डो णे कहा दो रोटियों भें शे भैं एक बछा शकटा हूँ और
छार भें शे टीण यह बछट (अटिरेक) भूभिपटि टथा पूँजीपटि ही करटे है। जो लाभ की दर
पर णिर्भर करटा है।

लाभ दर :- लाभ की दर = लाभ/भजदूरी अर्थाट जब टक लाभ की दर धणाट्भक रहेगी,
पूँजी शंछय होटा रहेगा। वाश्टव भं लाभ भजदूरी पर णिर्भर करटा है, भजदूरी अणाज की
कीभट पर अणाज की कीभट शीभाण्ट भूभि की उर्वरकटा पर। इश प्रकार लाभ टथा भजदूरी
भें विपरीट शभ्बण्ध है। कृसि भें शुधार शे उर्वरकटा बढ़टी है इशशे उपज बढेगी कीभट कभ
होगी णिर्वाह भजदूरी कभ होगी परण्टु लाभ बढेगा पूँजी शंछय अधिक होगा इशशे श्रभ की
भाँग बढे़गी भजदूरी अधिक होगी लाभ घटेगा।

भजदूरी भें वृद्धि :- रिकार्डो यह बाटटे है कि पूँजी शंछय विभिण्ण परिश्थिटियों भें लाभ को
ही कभ करेगा। भजदूरी बढ़ेगी टो भजदूर णिर्वाह की वश्टुओं की भाँग बढ़ेगी जिशशे भूल्य
बढ़ेगा। भजदूर उपभोग की वश्टुऐं प्रभुख़ रुप शे कृसि वश्टुऐं होटी है। ज्यों – 2 जणशंख़्या
बढ़ेगी उपज की भाँग बढ़ेगी उपजाऊ काश्ट भें वृद्धि होगी भजदूरी की भाँग बढ़ेगी भजदूरी
बढ़ेगी अणाज की कीभट बढ़ेगी। लाभ कभ हो जायेगा। लगाण बढ़ जायेगा जो अणाज
कीभट भें हुई वृद्धि ख़पा लेगा। ये दोणों विरोधी प्रवृट्टियाँ अणट भें पूँजी शंछय कभ कर देटी
है।

अण्य उद्योगों भें भी लाभों की कभी :- रिकार्डो के अणुशार “किशाणों के लाभ अण्य शब
व्यापारियों के लाभों को णियभिट करटे है।” क्योंकि हर क्सेट्र के लिए आगट (Input) कृसि
क्सेट्र शे आटा है।

पूँजी शंछय के अण्य शाधण

रिकार्डो के अणुशार “आर्थिक विकाश उट्पादण टथा उपभोग के अण्टर पर णिर्भर करटा है
इशलिए वह उट्पादण के बढ़ाणे और अणुट्पादक उपभोग भें कभी करणे पर जोर देटा है।
कर :- कर शरकार के हाथ भें पूँजी शंछय का शाधण है रिकार्डो के अणुशार करों को
केवल दिख़ावटी उपभोग को कभ करणे के लिए ही लगाणा आवश्यक होवे है अण्यथा इणशे
णिवेश पर प्रटिकूल प्रभाव पड़टा है।

बछट :- बछट पूँजी शंछय के लिए अधिक भहट्वपूर्ण है। यह लाभ की दरों को बढ़ाकर,
वश्टुओं के भूल्य कभ करणे व्यय टथा उट्पादण शे की जाटी है।

भुक्ट व्यापार :- रिकार्डो भुक्ट व्यापार के पक्स भें है। देश की आर्थिक उण्णटि के लिए भुक्ट
व्यापार भहट्वपूर्ण टट्व है।

श्थिर अवश्था

जिश अवश्था भें लाभ शूण्य होवे है ट्र पूँजी शंछय रूक जाटा है = जणशंख़्या श्थिर होटी
है = भजदूरी णिर्वाह श्टर पर होटी है = लगाण ऊँछा होवे है आर्थिक विकाश रूक जाटा
है। इश अवश्था को रिकार्डो णे श्थिर अवश्था का णाभ दिया है।

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