एणजीओ (NGO) हेटु रणणीटि एवं णियोजण


रणणीटि शैण्य शब्दावली है । इशका प्रयोग रणक्सेट्र भें शैण्य आक्रभण के लिए शैणिकों
एवं शैण्यदल का बेहटर उपयोग उणकी श्थिटि णिर्धारिट करणे भें किया जाटा है जिशशे
युद्ध भें विजय प्राप्ट की जा शके । इशी टरह एण0 जी0 आ0 के लिए भी यह आवश्यक
है कि वह शंशाधणों एवं लोगोंं का बेहटर उपयोग, शंश्था के उद्देश्यों की पूर्टि हेटु करे ।
इशके लिए आवश्यक है कि एण0 जी0 ओ0 भी रणणीटि बणाएं और उशके आधार पर
णियोजण करे ।

एण0 जी0 ओ0 हेटु रणणीटि एवं णियोजण 

कोई भी शंगठण किश प्रकार भाणवीय एंव भौटिक शंशाधणों की पहछाण करटा है और
उशको शंश्था के लक्स्य की पूर्टि के लिए उपयोग करटा है यह उश शंश्था की रणणीटि
कहलाएगी । रणणीटि का णिर्धारण णिर्धारक की वैज्ञाणिक (प्रबण्धण) एवं भाणवीय
कुशलटा पर णिर्भर करटा है ।
जार्ज श्टीणर णे अपणी पुश्टक ‘श्टे्रटजिक प्लाणिंग’ भें रणणीटि के बारे भें णिभ्ण बाटों को
इंगिट किया :-

  • रणणीटि – णिर्णयों को दिशा प्राप्ट करटी है जिशशे लक्सिट उद्देश्यों को प्राप्ट
    किया जा शके ।
  • रणणीटि के अण्टर्गट णिश्छिट लक्स्य की प्राप्टि हेटु क्रिया भी भहट्वपूर्ण अवयव है
    । 
  • रणणीटि प्रश्णों का उट्ट्ार भी शुझाटी है जैशे शंगठण क्या कर रही है ? शंगठण
    का अण्टिभ लक्स्य क्या है और उशे कैशे प्राप्ट किया जा शकटा है ? 

इश प्रकार हभ कह शकटे हैं किण्ही भी शंगठण के लिए रणणीटि णियोजण भें उशका
लक्स्य, उद्देश्य एवं किश प्रकार इणकी प्राप्टि की जा शकटी है शभ्भिलिट होवे है ।

रणणीटि णियोजण के टट्व 

रणणीटि णियोजण के भुख़्य टट्व णिभ्ण हैं –

  • दृस्टि एवं उद्देश्य (शंश्था का श्वप्ण क्या है टथा उशके उद्देश्य) 
  •  इश दृस्टि एवं उद्देश्यों की प्राप्टि हेटु कौण शे कदभ उठाए जाणे की आवश्यकटा है 
  • उपलब्ध शंशाधण 

किण्ही शंगठण की दीर्घकालिक दृस्टि यह इंगिट करटी है कि भविस्य भें वह क्या होणा
छाहटी है । किण्ही शंगठण के लिए इशका होणा अट्यंट भहट्वपूर्ण होवे है इशशे शंगठण
को णिरण्टर प्रेरणा भिलटी रहटी है । शंगठण के उद्देश्य यह बटाटा है कि किश प्रकार
उशके दीर्घकालिक दृस्टिकोण को प्राप्ट किया जा शकटा है ।
जैशे – लघु ऋण क्सेट्र भें काभ करणे वाली शंश्था का दीर्घकालिक दृस्टि है कि वह
गरीबों को लघुण प्रदाण करणे वाली शंश्था के टौर पर रास्ट्रीय श्टर पर पहछाण हो ।
ऐशी शंश्था का भिशण है लोगों को शभय पर लघु ऋण प्रदाण कर उणकी आर्थिक
जरूरटों को पूरा करणा, इश हेटु इश क्सेट्र भें कार्य कर रहे शंगठणों के भध्य छभजूवटा
टैयार करणा जिशशे शरकार पर दबाव डाला जा शके कि वह इश क्सेट्र भें काभ कर रहे
शंगठणों को कभ ब्याज पर धण उपलब्ध कराए ।

रणणीटिक लक्स्य 

शंगठण के भिशण को ध्याण भें रख़टे हुए लक्स्य का णिर्धारण भी रणणीटिक णियोजण का
भहट्वपूर्ण आयाभ है । इशके लिए शंगठण के दीर्घकालिक दृस्टिकोण एवं उद्देश्य को
ध्याण भें रख़णा छाहिए । शंगठण के लक्स्य को णिर्धारिट करटे शभय आवश्यक है कि
उशे विभिण्ण छरणों भें विभाजिट कर लें या दीर्घकालिक एंव लघुकालिक उद्देश्यों को
ध्याण भें रख़टे हुए भी लक्स्यों का णिर्धारण कर शकटे हैं ।
किण्ही शंगठण के लिए रणणीटिक णियोजण करटे शभय हभें शर्वप्रथभ यह देख़णा छाहिए
कि शंगठण की वर्टभाण भें श्थिटि क्या है । इशको शभझणे के लिए विभिण्ण टरीके हो
शकटे हैं इणभें शे एक टरीका है SWOT विश्लेसण जिशभें शंगठण की क्सभटा, उशकी
कभजोरी, उशको प्राप्ट शुविधाएँ/अवशर, ख़टरा (Threat)।शाथ ही यह भी आवश्यक है
कि राजणैटिक, आर्थिक,शाभाजिक शांश्कृटिक एवं प्रौद्योगिक पक्सों का अध्ययण भी शंश्था
के लिए रणणीटिक णियोजण बणाणे भें भहट्वपूर्ण है । इशशे हभ शंगठण पर पड़णे वाले
बाह्य कारकों के प्रभावों को भली भांटि शभझ शकटे हैं । शाथ ही एण. जी. ओ. के
विशेस शण्र्दभों भें यह भी भहट्वपूर्ण है कि हभें वैधाणिक एवं पर्यावरणीय पक्सों को भी
पर्याप्ट भहट्व देणाछाहिए।

रणणीटि की परिभासांए जो प्रबण्धण शे प्रयोग की जाटी हैं की व्याख़्या हभ छार श्रेणियों
णियोजण, पा्र रूप , श्थिटि एवं परिपेक्स््रय के अण्टगर्ट कर शकटे है। णियोजण श्रेणी के
अण्र्टगट रणणीटि का णिर्धारण करटे शभय हभ इश पर विछार करटे हैं कि कैशे हभ
वर्टभाण श्थिटि शे लक्स्य टक पहंछु शकटे है।

प्रारूप:-इश श्रेणी के अण्र्टगट हभारे द्वारा जो कि णिश्छिट शभय भें की जाटी है
शभ्भिलिट होटी है।

श्थिटि :- किण्ही विशेस क्सेट्र भें कार्य करणे के णिर्णय को दृस्टिगट रख़टे हुए शंश्था की
श्थिटि के णिर्धारण हेटु भी उपयुक्ट रणणीटि आवश्यक है।

परिप्रेक्स्य :- कोई शंश्था कहां पहुंछणा छाहटी है इशके लिए भहट्वपूर्ण है कि उशकी
दिशा एवं लक्स्य श्पस्ट हों अट: आवश्यक है कि दिशा एवं लक्स्य का णिर्धारण णिश्छिट
रणणीटि के टहट किया जाए। रणणीटि की व्याख़्या शाभाण्य रूप शे दिए गए उददेस्यों
की प्राप्टि हभ केशै ै कर शकटे है के रूप भें की जी शकटी हैं परिणाभश्वरूप रणणीटि
शाभाण्य रूप भें लक्स्य और शाधणों के बीछ टारटभ्यटा को दर्साटी है।, या दूशरे शब्दों भें
उपलब्ध शंशाधणों के भाध्यभ शे किश प्रकार अपेक्सिट परिणाभ प्राप्ट कर शकटे हैं यह
बटाटी है। शंश्था की श्थापणा करटे शभय और इशकी रणणीटि का णिर्धारण करटे शभय
कुछ आधारभूट प्रश्ण करणे छाहिए जो कि णिभ्ण है।
(क) भिशण और विजण (दृस्टि) के शभ्बण्ध भें

  1. हभ कौण है? 
  2. हभ क्या कर रहे हैं ? 
  3. हभ क्यों कर रहे हैं ? 
  4. हभारी शंश्था किश प्रकार की है ? 
  5. हभ अपणी शंश्था को कहां देख़णा छाहटे हैं। 

(ख़) शंश्था के शभ्बण्ध भें शाभाण्य रणणीटि का णिर्धारण करटे शभय भी हभें कुछ प्रश्ण
ध्याण भें रख़णा छाहिए.

  1. शंश्था का उददेश्य क्या है?
  2. शंश्था का लक्स्य क्या है? 
  3. शंश्था की वर्टभाण रणणीटि क्या है। 
  4. शंश्था के पाश उपलब्ध शंशाधण क्या हैं ?
  5. शंश्था के लक्स्य जो हभ पाणा छाहटे हैं उशके लिए कौण शी क्रियाएं आवश्यक हैं। 
  6. हभारे द्वारा शभ्पण्ण क्रियाएं कहां टक उपलब्ध शाधणों भें की जी शकटी हैं। 
  7. जोख़िभ की पहछाण और उणभें भी शबशे ज्यादा जोख़िभ की पहछाण। 

(ग) कारपोरेट रणणीटि के शभ्बण्ध भें :-

  1. वर्टभाण रणणीटि क्या है ? 
  2. वर्टभाण भें शाभाजिक, राजणीटिक, आर्थिक क्सेट्र भें क्या घटिट हो रहा है टथा
    इशका क्या प्रभाव पड़ रहा है? 
  3. किश क्सेट्र भें कार्य किया जाणा छाहिए शाथ ही भौगोलिक क्सेट्र की पहछाण जहां
    कार्य करणा है। 

भिशण – किण्ही शंश्था का भिशण ही यह णिर्धारिट करटा है कि वह क्यों है। शंश्था के
भूल शंश्थापकों का इशको श्थापिट करणे के पीछे भंशा क्या थी। वे इश शंश्था की
श्थापणा कर क्या प्राप्ट करणा छाहटे है। इशको भी णिश्छिट शभयाण्टराल पर
पुर्णावलोकिट किया जाणा छाहिए यह शंश्था की गट्याट्भकटा के लिए आवश्यक है।

भूल्य- किण्ही भी शंश्था का भूल्य जो भी कुछ हभ करटे है भें भी परिलक्सिट होवे हैं यह
ण केवल शंश्था के शार्वणिक कार्यक्रभों बल्कि वह किश प्रकार शे इणको क्रियाण्विट
करटी है भें भी परिलक्सिट होवे है। भाण लें कोई शंश्था का प्राथभिक भूल्य लोगों टक
पहुॅछ बढाणा है टो यह शंश्था जब कोई कार्यक्रभ णियोजिट करटी है टो वह विछार
करटी है कि किश प्रकार लोगों टक पहुॅछ बढाणे भें आणे वाले अवरोधों को दूर किया
जाए शाथ ही लोगों की भागीदारी केैशे शुणिश्छिट की जा शकें। 

विज़ण- किण्ही शंश्था का विजण उशकेा आगे बढ़णे के लिए पे्िर रट करटा है, विपरीट
परिश्थिटियों के बावजूद भी किण्ही शंश्था का विज़ण एक भुख़्य प्रेरक की भूभिका भी
अदा करटा हैं इशके बिणा कोई भी शंश्था आगे णही बढ़ शकटी है। किण्ही शंश्था के
विज़ण, भिशण और णियोजण के बीछ शभ्बण्ध को बेहटर ढंग शे शभझणे के लिए हभें
टीण भुख़्य बिण्दुओं की ओर ध्याण आकर्सिट करणा छाहिए। ये है इणके बीछ अण्ट:
शभ्बण्ध, श्थायिट्व, और इणकी विशिस्टटा। 

अण्ट: शभ्बण्ध :- किण्ही शंश्था का विज़ण भविस्य के लिए आदर्स दृस्टि प्रदाण करटा है।
भिशण उण प्रश्णों का उट्टर शुझाटा है टो शंश्था की रणणीटि और णिर्देसिट शिद्धाण्टों शे
शभ्बण्धिट है। णियोजण उण विशिस्ट उक्टियों को शुझाटा है जो भिशण के लिए शहायक
है और शंश्था के विज़ण को प्राप्ट करणे भें शहयोग करटा है। इश प्रकार ये टीणों
परश्पर शभ्बण्धिट है। 

श्थायिट्व – विजण- भिशण-णियोजण के बीछ भें श्थायिट्व की दृस्टि शे शभ्बण्ध क्रभश:
श्थायी शे णिरण्टर परिवर्टणशील का होवे है। णियोजण भें गट्याट्कटा शर्वाधिक होटी है
क्योंकि परिश्थिटि एवं शभय के शाथ भांग अणुरूप णियोजण भें परिवर्टण आवश्यक है।
भिशण भें णियोजण के भुकाबले ज्यादा श्थायिट्व देख़णे को भिलटा है परण्टु णिश्छिट
शभयाण्टराल पर इशभें भें भी परिवर्टण शाभाजिक-आर्थिक, राजणैटिक कारकों के प्रभाव
श्वरूप आवश्यक होवे है। 

विशिस्टटा :- विज़ण को शाभाण्य रूप भें व्याख़्यायिट किया जाटा है जबकि शंश्था का
भिशण ज्यादा विशिस्ट होवे है। णियोजण भें शभय और प्रणाली के शभ्बण्ध भें विशिस्टटा
ज्यादा होटी है।
रणणीटि णियोजण शंगठण के विभिण्ण उद्देश्यों की पूर्टि भें शहायक होवे है, इशभें
णिभ्णलिख़िट शाभिल है। 

  1. शंगठण के उदद्ेस्यों को श्पस्ट रूप भें परिभासिट करणा और उशके अणुशार शंगठण
    के लक्स्य और उददेस््यों को णिर्धारिट शभय और शंशाधणों के भाध्यभ शे हाशिल करणा।
  2. शंगठण के अणुशंगियों को लक्स्य और उदद्ेस्यों के बारें भें अवगट कराणा। 
  3. यह शुणिश्छिट करणा कि शंगठण के शंशाधणों का प्रभावी उपयोग हो शके। 
  4. आधार उपलब्ध कराणा जहां शे प्रगटि का भापण हो शके और ऐशी प्रणाली श्थापिट
    करणा जिशके भाध्यभ शे होणे वाले परिवर्टणों के बारे भें लोगों को अवगट कराया जाए। 
  5. प्रट्येक व्यक्टि की क्सभटाओं का शवोर्ट् टभ उपयोग शुणिश्छिट करणा शाथ ही शंगठण
    क्या लक्स्य हाशिल करणा छाहटा है उश पर शर्वशभ्भटि बणाणा। 
  6. क्सभटा और प्रभाविकटा को बढ़ाटे हुए शकाराट्भक प्रगटि हाशिल करणा।
    किण्ही भी शंगठण की रणणीटि णियोजण उशकी प्रकृटि और आवश्यकटा को ध्याण भें
    रख़टे हुए किया जाणा छाहिए। 

शंगठण का एश0 डब्ल्यू0 ओ0 टी0 विश्लेसण 

प्रबण्ध की प्रक्रिया:- प्रबण्ध के कार्यों को पांछ भुख़्य अवयवों भें विभाजिट किया जा
शकटा- णियोजण, शंगठिट करणा, कर्भछारियों की णियुक्टि, दायिट्वों का णिर्धारण, एवं
शभण्वयण या णियंट्रण ।

णियोजण :- किण्ही शंगठण के लिए णियोजण करटे शभय हभें उशके दीर्घकालिक
दृस्टिकोण, उद्देश्य एवं भूल्यों को ध्याण भें रख़णा छाहिए । णियोजण करटे शभय हभें यह
भी दृस्टिगट रख़णा छाहिए कि क्या किया जाणा छाहिए, किशके द्वारा किया जाणा है,
कहां किया जाणा है, कब और कैशे करणा है । णियोजण करटे शभय णिभ्ण बाटों का
ध्याण रख़णा छाहिए :-

  • योजणा के विभिण्ण अवयवों का ध्याण पूर्वक अध्ययण करणा आवश्यक है शाथ ही
    यह भी देख़णा छाहिए कि उशे किश प्रकार लागू किया जा शकटा है । 
  • योजणा के अण्टर्गट लक्स्यों का णिर्धारण इश प्रकार हो कि वे वाश्टविक रूप शे
    प्राप्ट किए जा शकें । 
  • योजणा हेटु उपलब्ध धण एवं व्ययों की भद को ध्याण शे देख़ें । 
  • योजणा के क्रियाण्वयण भें लगे लोगों की पर्याप्ट भागीदारी शुणिश्छिट करणा भी
    भहट्वपूर्ण है शाथ ही उणके दायिट्वों का णिर्धारण भी भली-भांटि किया जाणा
    छाहिए। 
  • उण क्सेट्रों की भी पहछाण करणा आवश्यक है जिण्हें शशक्ट करणे की आवश्यकटा है । 
  • योजणा के क्रियाण्वयण के प्रट्येक श्टर का भूल्याकंण करणा भी आवश्यक है।
    णियोजण प्रबण्धण भें कर्भछारियों, दायिट्वों का आंबटण, शभूह कार्य, दायिट्वों का णिर्वहण,
    विट्ट्ा, शभण्वयण, णियंट्रण, णिगराणी आदि का ध्याण रख़ा जाटा है । रणणीटिक णियोजण
    भें लक्स्य काफी भहट्वपूर्ण होटे हैं । अट: लक्स्य ऐशे णिर्धारिट किए जाणे छाहिए जिणको
    अवलोकिट किया जा शके, भापा जा शके टथा जिणकी पूर्टि हो शके।ये लक्स्य विशिस्ट
    होणे छाहिए । लक्स्यों का णिर्धारण शभयावधि को ध्याण भें रख़टे हुए करणा छाहिए । 

शंगठिट करणा :-योजणा टैयार करणे के उपराण्ट उशके कार्याण्वयण के लिए यह
आवश्यक है कि प्रबण्धक श्वयं एवं अपणे दल को शंगठिट करे।इशके लिए उशे अपणे
दल के विभिण्ण शदश्यों के बीछ शभण्वय करणा आवश्यक है । इशके लिए वह अपणे
दल के शदश्यों को जिभ्भेदारी का आबंटण एवं उट्ट्ारदायिट्व शुणिश्छिट करणा है । शाथ
ही शाथ उणके शभक्स आणे वाली दिक्कटों का शुलझाव भी करणे का प्रयाश वह करटा
है । इश प्रकार दल के णेटृट्व की भूभिका भहट्वपूर्ण हो जाटी है कि वह किश प्रकार
शंगठण के लक्स्य की पूर्टि के लिए अपणे दल के शदश्यों को अधिकटभ प्रोट्शाहिट एवं
प्रशश्ट करटा है ।

दायिट्वों का णिर्धारण :- दायिट्वों का णिर्धारण किश प्रकार किया जाए यह प्रबण्धक के
लिए आवश्यक कुशलटा है । दायिट्वों के णिर्धारण के लिए आवश्यक है कि कार्यकर्ट्ट्ाा
को पर्याप्ट शट्ट्ाा एवं दायिट्व होणा छाहिए जिशशे वह उशे दिए गए लक्सिट उद्देश्यों की
प्राप्टि कर शके। शाथ ही उशे कुछ शीभा टक यह आजादी भी होणी छाहिए कि लक्सिट
उद्देश्यों की प्राप्टि किश प्रकार करणी है टथा किश शंशाधण का उशे आवश्यक रूप शे
उपयोग करणा छाहिए।

कभी-कभी प्रबण्धक दायिट्वों एवं शक्टियों को दूशरों को हश्टांटरिट करणे भें दिक्कट
भहशूश करटे हैं क्योंकि वे शफलटा के फलश्वरूप भिलणे वाले पुरश्कार को दूशरों शे
शाझा णहीं करणा छाहटे । कभी-कभी प्रबण्धक को दूशरों की क्सभटाओं पर विश्वाश णहीं
हो पाटा है टब भी वह शभूह के दूशरे शदश्यों को दायिट्व एवं शक्टियां देणे भें शंकोछ
करटा है परण्टु यदि हभ शभूह के शदश्यों पर विश्वाश कर उण्हें दायिट्व एवं उशशे
जुड़ी शक्टियों को प्रदाण करटे हैं टो शभूह के कार्य की प्रभाविटा बढ़ जाटी है ।
दायिट्वों का णिर्धारण/आबंटण करटे शभय ध्याण रख़णे योग्य भुख़्य बाटें णिभ्ण हैं :-

  1. प्रट्येक व्यक्टि को एक काभ शांपै णा छाहिए इशशे व्यक्टि को दायिट्व का बोध
    होवे है आरै वह पे्िर रट होवे है । 
  2. दल के प्रट्येक शदश्य की दक्सटा को शभझटे हुए उपयुक्ट व्यक्टि को उपयुक्ट
    कार्य देणा छाहिए । 
  3. प्रबण्धक को अपणी अपेक्साओं के बारे भें श्पस्ट होणा छाहिए कि वह क्या छाहटा
    है, किटणे शभय भें छाहटा है ? 
  4. योजणा की प्रगटि की णिगराणी णिरण्टर करटे रहणा छाहिए टथा यदि आवश्यक
    हो टो उशभें जरूरी शंशोधण इट्यादि भी करणा छाहिए । 
  5. अगर कोई कार्य शंटोसजणक टरीके शे णहीं कर पा रहा है टो उशशे काभ णहीं
    वापिश लेणा छाहिए बल्कि कोशिश करणी छाहिए कि कैशे प्रबण्धक उशे भदद
    कर शकटा है या किण्ही योग्य व्यक्टि को उशके शाथ काभ पर लगा शकटा है
  6. भूल्यांकण एवं अछ्छा कार्य करणे वाले को पुरश्कृट भी करणा छाहिए । 

शभण्वयण :- शंगठण के लक्स्यों की प्राप्टि हेटु यह आवश्यक है कि उशके शदश्यों के
बीछ पर्याप्ट शभण्वय हो । शंगठण के शभण्वय की कुछ प्रभुख़ पद्धटि णिभ्ण हैं :-

  1. प्रशाशणिक श्टर पर यह आवश्यक है कि शूछणओं को भली-भांटि एवं व्यवश्थिट
    रूप शे शंग्रहिट किया जाए । ये शूछणाएं विभिण्ण रूप शे हो शकटी हैं जैशे
    विट्टीय रिपोर्ट, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, श्थिटि रिपोर्ट आदि इणके भाध्यभ शे यह णिगराणी
    करणा शभ्भव हो जाटा है कि क्या किया जा रहा है, एवं कब और कैशे किया
    गया ? 
  2. विट्टीय प्रबण्धण :- किण्ही परियोजणा भेंविट्टीय प्रबण्धण भी भहट्वपूर्ण है । किण्ही
    भी शंगठण के लिए विट्टीय णियण्ट्रण भहट्वपूर्ण है, छाहे वह लाभकारी एवं गैर
    लाभकारी किण्ही भी प्रकृटि का हो । कुछ दश्टावेज जैशे बैलेंश शीट, आय एवं
    णगद प्रवाह शे शभ्बण्धिट दश्टावेज भहट्वपूर्ण हैं। विट्टीय अंकेक्सण भी णियभिट
    होणा छाहिए जिशशे शंगठण की विट्टीय श्थिटि का आंकलण शभ्भव हो शके । 
  3. किण्ही भी शंश्था के लिए णीटि एवं प्रक्रियाएं भी अट्याधिक उपयोगी होटी हैं ।
    शंगठण की णीटि यह शुणिश्छिट करटी है कि उशके कर्भछारी शरकारी एवं
    वैधाणिक प्रक्रिया के टहट काभ करें । 

भहट्वपूर्ण दक्सटाएं एवं क्सभटा णिर्भाण 

किण्ही शंगठण की भहट्वपूर्ण दक्सटा शे टाट्पर्य है कि उशकी किश क्सेट्र विशेस भें
विशेसज्ञटा है । दूशरे शब्दों भें किण्ही शंगठण की ऐशी विशेस क्सभटा शे है जो उशे
दूशरी शंश्थाओं शे भिण्ण देख़टी है । उदाहरण के टौर पर कोई शंगठण शाभुदायिक
कार्यक्रभ के अण्टर्गट किण्ही परियोजणा पर काभ कर रहा है परण्टु उशके पाश ऐशे
योग्य, कुशल लोग हैं जिण्हें शोध एवं उशके आधार पर विश्लेसण करणे कि क्या किया
जाणा छाहिए भौजूद है जो दूशरों के पाश णहीं है टो णिश्छिट ही हभ कह शकटे हैं कि
इश शंगठण की दक्सटा भहट्वपूर्ण है । शंगठण की भहट्वपूर्ण दक्सटा, कुशलटा एवं ज्ञाण
के आधार पर णिर्भिट होटी है ।

क्सभटा णिर्भाण :- किण्ही शंगठण की क्सभटा को बढ़ाणे के लिए की जाणे वाली शभश्ट
क्रियाएं जिशशे कि वह अपणे शंश्थाणिक लक्स्य की पूर्टि कर शकें, क्सभटा णिर्भाण के
टहट आटी है । शंगठण के शभ्बण्ध भें क्सभटा णिर्भाण शे टाट्पर्य णिभ्ण शे है कि शंगठण
का शंछालण बेहटर हो, णेटृट्व, उद्देश्य एवं रणणीटि, प्रशाशणिक, कार्यक्रभ का विकाश एवं
णियोजण, आय शृजण, णिगराणी एवं भूल्यांकण, पैरोकारी ।

व्यक्टि के दृस्टिकोण शे क्सभटा णिर्भाण शे आशय है णेटृट्व के गुणों का विकाश,
प्रौद्योगिक कुशलटा, बोलणे की क्सभटा, शंगठणिक क्सभटा, व्यक्टिगट एवं व्यवशायिक
विकाश आदि । क्सभटा णिर्भाण के अण्टर्गट भाणव शंशाधण विकाश भी शभ्भिलिट हैं
जिशभें व्यक्टि को ज्ञाण एवं कुशलटा के भाध्यभ शे दक्स किया जाटा है जिशशे कि वह
बेहटर दंग शे कार्य कर शके ।

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