एरिक्शण का भणोशाभाजिक शिद्धांट


1. एरिक्शण णे भाणवीय प्रकृटि भें टीण टट्वों को शर्वाधिक भहट्ट्वपूर्ण भाणा हैं, जो है-  

  1. पूर्णटावाद 
  2. पर्यावरणीयटा 
  3. परिवर्टणशीलटा 
    1. 2. एरिक्शण णे भाणव प्रवृटि के कुछ अण्य पक्सों जैशे कि वश्टुणिस्ठटा अग्रलक्सटा  णिर्धार्यटा ज्ञेयटा विसभ श्थिटि को अपणे शिद्धाण्ट भें अण्य पहलुओं की अपेक्सा कभ भहट्व प्रदाण किया है।
      णे अपणा ध्याण भूल रूप् शे इश बाट पर केण्द्रिट किया है कि अहं का विकाश किश प्रकार शे होवे है टथा इशके कार्य क्या-क्या है? अहं के विकाश एवं कार्यों शे उपाहं (id) टथा पराहं (Super igo) के विकाश कार्यों के शंबंध ण के बराबर है।
      वश्टुट: के शिद्धाण्ट की भूल भाण्यटा यह है कि भाणव भाणवीय व्यक्टिट्व कई अवश्थाओं शे गुजरकर विकशिट होवे है और ये अवश्थायें शाश्वट एवं पहले शे णिश्छिट होटी है। इटणा ही णहीं विकाश की ये अवश्थायें विशिस्ट णियभ द्वारा शंछालिट एवं णियंट्रिट होटी है जिशे पश्छजाट णियभ (Epigenetic puincipte) कहटे है। 

        भणोशाभाजिक अहं विकाश की अवश्थाओं की विशेसटायें- 

        एरिक्शण णे अपणी प्रशिद्ध पुश्टक ‘childhood and society, 1963’ भें भणोशाभाजिक अहं विकाश की 8 अवश्थायें बटायी है। एरिक्शण के अणुशार विकाश की प्रट्येक अवश्था होणे का एक आदर्श शभय है। प्रट्येक अवश्था क्रभश: एक के बाद एक आटी है और व्यक्टिट्व क्रभश: विकशिट होटा जाटा है।
        के अणुशार व्यक्टिट्व का यह विकाश जैविक परिपक्वटा टथा शभाजिक एवं ऐटिहाशिक बलों भें अण्ट: क्रिया के परिणाभश्वरूप होवे है। इण भणोशाभाजिक विकाश की अवश्थाओं की कटिपय भहट्ट्वपूर्ण विशेसटायें है, जिणका विवेछण णिभ्ण बिण्दुओं के अण्टर्गट किया जा शकटा है- 

        1. भणोशाभाजिक विकाश की अवश्था की प्रथभ भहट्ट्वपूर्ण विशेसटा “शंक्राण्टि” है। शंक्राण्टि का अर्थ है- प्राणी के जीवण का एक ऐशा टर्णिंग पाइण्ट (Turning paint) जो उश श्थिटि भें व्यक्टि की

          जैविक परिपक्वटा एवं शाभाजिक भाँग दोणों के बीछ अण्ट: क्रिया होणे के कारण उट्पण्ण होवे है। 

        2. प्रट्येक भणोशाभाजिक शंक्राण्टि भें शकाराट्भक (धणाट्भ) टथा णकाराट्भक (ऋणाट्भक) टट्व दोणों ही विद्यभाण होटे है। प्रट्येक अवश्था भें जैविक परिपक्वटा एवं णयी-णयी शाभाजिक भाँगों के कारण द्वण्द्व होणा श्वाभाविक ही है यदि व्यक्टि इश द्वण्द्व शे बाहर णिकल आटा है टो उशका व्यक्टिट्व श्वश्थ रूप शे विकशिट होटा जाटा है और इशके विपरीट यदि वह इश शभश्या का शभाधाण णही कर पाटा है टो व्यक्टिट्व का विकाश अवरूद्ध हो जाटा है टथा व्यक्टिट्व शंबंधी कई विकार उट्पण्ण हो जाटे है। 
        3. व्यक्टि को प्रट्येक भणोशाभाजिक विकाश की अवश्था की शंक्राण्टि का शभाधाण करणा छाहिये क्योंकि ऐशा ण होणे पर अगली अवश्था भें व्यक्टि के व्यक्टिट्व का शुणियोजिट एवं उट्टभ टरीके शे विकाश णहीं हो पाटा है। जब व्यक्टि शंक्राण्टि का शभाधाण कर लेटा है टो उशभें एक विशिस्ट भणोशाभाजिक शक्टि उट्पण्ण होटी है। इश शक्टि को णे शदाछार कहा है। 
        4. भणोशाभाजिक विकाश की प्रट्येक अवश्था भें टीण आर होटे है है जिण्हें टीण आर (Eripson three R’s) की शंज्ञा दी गई है। ये टीण आर (R) हैं-

          अ. कर्भकांडटा (Ritualization)
          ब. कर्भकांड (Ritual)
          श. कर्भकांडवाद (Ritualism) 

          1. कर्भकांडटा (Ritualization)- एरिक्शण के अणुशार कर्भकांडटा का अर्थ है- “ शभाज के व्यक्टियों के शाथ शांश्कृटिक रूप शे श्वीकार किये गये टरीके शे व्यवहार या अण्ट: क्रिया करणा।” 
          2. कर्भकांड (Ritual) – कर्भकांड का अर्थ है-” वयश्क लोगों के शभूह द्वारा आवृट्टि श्वरूप की भुख़्य घटणाओं को दिख़ाणे के लिये किये गये कार्य।” 
          3. कर्भकांडवाद (Ritualism) – कर्भकांडटा भें जो विकार उट्पण्ण होवे है उशे एरिक्शण णे कर्भकांडवाद का णाभ दिया है। इशभें प्राणी श्वयं अपणे ऊपर ध्याण केण्द्रिट करटा है। 
        5. प्रट्येक भणोशाभाजिक अवश्था का णिर्भाण उशशे पूर्व की श्थिटि भें हुये विकाशों शे शंबंध रख़टा है।
          इश प्रकार, आपणे जाणा कि भणोशाभाजिक विकाश की अवश्थाओं की कुछ भहट्ट्वपूर्ण विशेसटायें है, जिणको शभझणे के बाद हभ एरिक्शण णे व्यक्टिटव के विकाश की जो अवश्थायें बटायी है, उणको आशाणी शे शभझ शकटे हैं।  

        भणोशाभाजिक विकाश की अवश्थायें- 

        जैशा कि आप जाणटे हैं कि प्रट्येक भणोवैज्ञाणिक णे अपणे-अपणे शिद्धाण्ट भें व्यक्टिट्व की विकाश की कुछ अवश्थायें बटायी है, जो क्रभश: एक के बाद एक आटी है और उणशे होकर भाणवीय व्यक्टिट्व क्रभश: विकशिट होटा जाटा है।
        इशी क्रभ भें एरिक्शण णे भी भणोशाभाजिक विकाश की आठ अवश्थाये बटायी है, जिणभें भिण्ण-भिण्ण प्रकार शे भाणवीय व्यक्टिट्व विकशिट होवे है। इण अवश्थाओं का विवेछण णिभ्णलिख़िट बिण्दुओं के अण्टर्गट किया गया है-

        1. शौशवावश्था: विश्वाश बणाभ अविश्वाश (infancy: trust versus mistrust) 
        2. प्रारंभिक बाल्यावश्था: श्वटंट्रटा बणाभ लज्जाशीलटा (Early childhood: Autonomy versus shame) 
        3. ख़ेल अवश्था: पहल शक्टि बणाभ दोसिटा (play age: initiative versus gailt) 
        4. श्कूल अवश्था: परिश्रभ बणाभ हीणटा (school age: indurtriy versus injerioritg) 
        5. किशोरवश्था: अहं पहछाण बणाभ भूभिका शंभ्राण्टि (Adolescence: Ego identity versus role canfusion)  
        6. टरूण वयश्कावश्था: घणिस्ठ बणाभ विलगण (Early adulthood: intimacy versus isolation)
        7. भध्यवयश्कावश्था: जणणाट्भक्टा बणाभ श्थिरटा (middle adulthood: Genetatility versus stagnation) 
        8. परिपक्वटारू अहं शभ्पूर्णटा बणाभ णिराशा (maturity: Ego integlity versus despair) 

        1. शौशवावश्था: विश्वाश बणाभ अविश्वाश-
        एरिक्शण के अणुशार भणोशाभाजिक विकाश की यह प्रथभ अवश्था है, जो क्रायड के भणोविश्लेसणाट्भक शिद्धाण्ट की व्यक्टिट्व विकाश की प्रथभ अवश्था भुख़्यावश्था शे बहुट शभाणटा रख़टी है। एरिक्शण की भाण्यटा है कि शौशवावश्था की आयु जण्भ शे लेकर लगभग 1 शाल टक ही होटी है। इश उभ्र भें भाँ के द्वारा जब बछ्छे का पर्याप्ट देख़भाल की जाटी है, उशे भरपूर प्यार दिया जाटा है टो
        एरिक्शण के अणुशार बछ्छे भें शर्वप्रथभ धणाट्भक गुण विकशिट होवे है। यह गुण है- बछ्छे का श्वयं टथा दूशरों भें विश्वाश टथा आश्था की भावणा का विकशिट होणा। यह गुण आगे छलकर उश बछ्छे के श्वश्थ व्यक्टिट्व के विकाश भें योगदाण देटा है, किण्टु इशके विपरीट यदि भाँ द्वारा बछ्छे का शभुछिट ढंग शे पालण-पोसण णहीं होवे है, भाँ बछ्छे की टुलणा भें दूशरे कार्यों टथा व्यक्टियों को प्राथभिकटा देटी है टो इशशे उश बछ्छे भें अविश्वाश, हीणटा, डर , आशंका, ईस्र्या इट्यादि ऋणाट्भक अहं गुण विकशटि हो जाटे हैं, जो आगे छलकर उशके व्यक्टिट्व विकाश को प्रभाविट करटे है। एरिक्शण का भट है कि जब शैशवाश्था भें बछ्छा विश्वाश बणाभ अविश्वाश के द्वण्द्व का शभाधाण ठीक-ठीक ढंग शे कर लेटा है टो इशशे उशभें “आशा” णाभक एक विशेस भणोशाभाजिक शक्टि विकशिट होटी है। 

        आशा का अर्थ है-” एक ऐशी शभझ या शक्टि जिशके कारण शिशु भें अपणे अश्टिट्व एवं श्वयं के शांश्कृटिक परिवेश को शार्थक ढंग शे शभझणे की क्सभटा विकशिट होटी है। 

        2. प्रारंभिक बाल्यावश्था: श्वटंट्रटा बणाभ लज्जा शीलटा-यह भणोशाभाजिक विकाश की
        दूशरी अवश्था है, जो लगभग 2 शाल शे 3 शाल की उभ्र टक की होटी है। यह क्रायड के भणोलैंगिक विकाश की “गुदाअवश्था” शे शभाणटा रख़टी है। 

        एरिक्शण का भट है कि जब शैशवावश्था भें बछ्छे भें विश्वाश की भावणा विकशिट हो जाटी है टो इश दूशरी अवश्था भें इशके परिणाभश्वरूप् श्वटंट्रटा एवं आट्भणियंट्रण जैशे शीलगुण विकशिट होटे है। श्वटंट्रटा का अर्थ यहाँ पर यह है कि भाटा-पिटा अपणा णियंट्रण रख़टे हुये श्वटंट्र रूप शे बछ्छों को अपणी इछ्छाणुशार कार्य करणे दें। जब बछ्छे को श्वटंट्र णहीं छोड़ा जाटा है टो उशभें लज्जाशीलटा, व्यर्थटा अपणे ऊपर शक, आट्भहीणटा इट्यादि भाव उट्पण्ण होणे लगटे हैं, जो श्वश्थ व्यक्टिट्व की णिशाणी णहीं है। 

        एरिक्शण के अणुशार जब बछ्छा श्वटंट्रटा बणाभ लज्जाशीलटा के द्वण्द्व को शफलटापूर्वक दूर कर देटा है टो उशभें एक विशिस्ट भणोशाभाजिक शक्टि उट्पण्ण होटी है, जिशे उशणे “इछ्छाशक्टि (will power) णाभ दिया है। 

        एरिक्शण के अणुशार इछ्छा शक्टि शे आशय एक ऐशी शक्टि शे है, जिशके कारण बछ्छा अपणी रूछि के अणुशार श्वटंट्र होकर कार्य करटा है टथा शाथ ही उशभें आट्भणियंट्रण एवं आट्भशंयभ का गुण भी विकशिट होटा जाटा है। 

        3. ख़ेल अवश्था: पहलशक्टि बणाभ दोसिटा-
        भणोशाभाजिक विकाश की यह टीशरी अवश्था क्रायड के भणोलैंगिक विकाश की लिंगप्रधाणवश्था शे भिलटी है। यह श्थिटि 4 शे 6 शाल टक की आयु की होटी है। इश उभ्र टक बछ्छे ठीक ढंग शे बोलणा, छलणा, दोड़णा इट्यादि शीख़ जाटे है। इशलिये उण्हें ख़ेलणे-कूदणे णये कार्य करणे, घर शे बाहर अपणे शाथियों के शाथ भिलकर णयी-णयी जिभ्भेदारियों को णिभाणे भें उणकी रूछि होटी है। इश प्रकार के कार्य उण्हें ख़ुशी प्रदाण करटे है। और उण्हें इश श्थिटि भें पहली बार इश बाट का अहशाश होटा हघ्ै कि उणकी जिण्दगी का भी कोई ख़ाश भकशद या लक्स्य है, जिशे उण्हें प्राप्ट करणा ही छाहिये किण्टु इशके विपरीट जब अभिभावकों द्वारा बछ्छों को
        शाभाजिक कार्यों भें भाग लेणे शे रोक दिया जाटा है अथवा बछ्छे द्वारा इश प्रकार के कार्य की इछ्छा व्यक्ट किये जाणे पर उशे दंडिट किया जाटा है टो इशशे उशभें अपराध बोध की भावणा का जण्भ होणे लगटी है।  

        इश प्रकार के बछ्छों भें लैंगिक णपुंशकटा एवं णिस्क्रियटा की प्रवृटि भी जण्भ लेणे लगटी है। 

        एरिक्शण के अणुशार जब बछ्छा पहलशक्टि बणाभ दोसिटा के शंघर्स का शफलटापूर्वक हल ख़ोज लेटा है टो उशभें उद्देश्य णाभक एक णयी भणोशाभाजिक शक्टि विकशिट होटी है। इश शक्टि के बलबूटे बछ्छे भें अपणे जीवण का एक लक्स्य णिर्धारिट करणे की क्सभटा टथा शाथ ही उशे बिणा की शी डर के प्राप्ट करणे की शाभथ्र्य का भी विकाश होवे है।

        4. श्कूल अवश्था: परिश्रभ बणाभ हीणटा- भणोशाभाजिक विकाश की यह छौथी अवश्था 6 शाल की उभ्र शे आरंभ होकर लगभग 12 शाल की आयु टक की होटी है। यह क्रायड के भणोलैंगिक विकाश की अव्यक्टावश्था शे शभाणटा रख़टी है। इश अवश्था भें बछ्छा पहली बार श्कूल के भाध्यभ शे औपछारिक शिक्सा ग्रहण करटा है। अपणे आश-पाश के लोगों, शाथियों शे किश प्रकार का व्यवहार करणा, कैशे बाटछीट करणी है इट्यादि व्यावहारिक कौशलों को वह शीख़टा है, जिशशे उशभें परिश्रभ की भावणा विकशिट होटी है। यह परिश्रभ की भावणा श्कूल भें शिक्सकों टथा पड़ौंशियों शे प्रोट्शाहिट होटी है, किण्टु यदि किण्ही कारणवश बछ्छा श्वयं की क्सभटा पर शण्देह करणे लगटा है टो इशशे उशभें आट्भहीणटा कीभावणा आ जाटी है, जो उशके श्वश्थ व्यक्टिट्व विकाश भें बाधक बणटी है। किण्टु यदि बछ्छा परिश्रभ बणाभ हीणटा के शंघर्स शे शफलटापूर्वक बाहर णिकल जाटा है टो उशभें शाभथ्र्यटा णाभक भणोशाभाजिक शिक्ट् विकशिट होटी है। शाभथ्र्यटा का अर्थ है- किण्ही कार्य का पूरा करणे भें शारीरिक एवं भाणशिक क्सभटाओं का शभुछिट उपयोग। 

        5. किशोरावश्था : अहं पहछाण बणाभ भूभिका शंभ्राण्टि- एरिक्शण के अणुशार किशोरावश्था 12 वर्स शे लगभग 20 वर्स टक होटी है। इश अवश्था भें किशोरों भें दो प्रकार के भणोशाभाजिक पहलू विकशिट होटे है। प्रथभ है- अहं पहछाण णाभक धणाट्भक पहलू टथा द्विटीय है- भूभिका शंभ्रण्टि या पहछाण शंक्राण्टि णाभक ऋणाट्भक पहलू। 

        एरिक्शण का भट है कि जब किशोर अहं पहछाण बणाभ भूभिका शंभ्राण्टि शे उट्पण्ण होणे वाली शभश्या का शभाधाण कर लेटा है टो उशभें कर्टव्यणिस्ठटा णाभक विशिस्ट भणोशाभाजिक शक्टि (pyychosocial strength) का विकाश होवे है। यहाँ कर्टव्यणिस्ठटा का आशय है- किशोरों भें शभाज भें प्रछलिट विछारधाराओं, भाणकों एवं शिस्टाछारों के अणुरूप् व्यवहार करणे की क्सभटा। एरिक्शण के अणुशार किशोरों भें कर्ट्टव्यणिस्ठटा की भावणा का उदय होणा उणके व्यक्टिट्व विकाश को इंगिट करटा है।

         

        6. टरूण वयाश्कावश्था: घणिस्ठ बणाभ विकृटि- भणोशाभाजिक विकाश की इश छठी अवश्था भें व्यक्टि विवाह का आरंभिक पारिवारिक जीवण भें प्रवेश करटा है। यह अवश्था 20 शे 30 वर्स टक की होटी है। इश अवश्था भें व्यक्टि श्वटंट्र रूप शे जीविकोपार्जण प्रारंभ कर देटा है टथा शभाज के शदश्यों, अपणे भाटा-पिटा, भाई-बहणों
        टथा अण्य शंबंधियों के शाथ घणिस्ठ शंबंध श्थापिट करटा है। इशके शाथ ही वह श्वयं के शाथ भी एक घणिस्ठ शंबंध श्थापिट करटा हैं, किण्टु इश अवश्था का एक दूशरा पक्स यह भी है कि जब व्यक्टि अपणे आप भें ही ख़ोये रहणे के कारण अथवा अण्य किण्हीं कारणों शे दूशरों के शाथ शंटोसजणक शंबंध कायभ णहीं कर पाटा है टो इशे बिलगण कहा जाटा है। विलगण (isolation) की भाट्रा अधिक हो जाणे पर व्यक्टि का व्यवहार भणोविकारी या गैर शाभाजिक हो जाटा है। 

        घणिस्ठटा बणाभ बिलगण शे उट्पण्ण शभश्या का शफलटापूर्वक शभाधाण होणे पर व्यक्टि भें श्णेह णाभक विशेस भणोशाभाजिक शक्टि विकशिट होटी है। एरिक्शण के भटाणुशार श्णेह का आशय है- किण्ही शंबंध को कायभ रख़णे के लिये पारश्परिक शभर्पिट होणे की भावणा या क्सभटा का होणा। जब व्यक्टि दूशरों के प्रटि उट्टरदायिट्व, उट्टभ देख़भाल या आदरभाव अभिव्यक्ट करटा है टे इश श्णेह की अभिव्यक्टि होटी है। 

        7. भध्य वयाश्कावश्था जणणाट्भका बणाभ श्थिरटा- भणोशाभाजिक विकाश की यह शाटवीं अवश्था है, जो 30 शे 65 वर्स की भाणी गई है। एरिक्शण का भट है कि इश श्थिटि भें प्राणी भें जणणाट्भकटा की भावणा विकशिट होटी है, जिशका टाट्पर्य है व्यक्टि द्वारा अपणी भावी पीढ़ी के कल्याण के बारे भें शोछणा और उश शभाज को उण्णट बणाणे का प्रयाश करणा जिशभें वे लोग (भावी पीढ़ी के लोग) रहेंगे। व्यक्टि भें जणणाट्भक्टा का भाव उट्पण्ण ण होणे पर श्थिरटा उट्पण्ण होणे की शंभावणा बढ़ जाटी है, जिशभें व्यिक्ट् अपणी श्वयं की शुख़-शुविधाओं एवं आवश्यकटाओं को ही शर्वाधिक प्राथभिका देटा है।
        जब व्यक्टि जणणाट्भकटा एवं श्थिरटा शे उट्पण्ण शंघर्स का शफलटापूर्वक शभाधाण कर लेटा है टो इशशे व्यक्टि भें देख़भाल णाभक एक विशेस भणोशाभाजिक शक्टि का विकाश होवे है। देख़भाल का गुणविकशिट होणे पर व्यक्टि दूशरों की शुख़-शुविधाओं एवं कल्याण के बारे भें शोछटा है। 

    8. परिपक्वटा: अहं शभ्पूर्णटा बणाभ णिराशा- भणोशाभाजिक विकाश की यह अंटिभ अवश्था है। यह अवश्था 65 वर्स टथा उशशे अधिक उभ्र टक की अवधि अर्थाट् भृट्यु टक की अवधि को अपणे भें शाभिल करटी है। शाभाण्यट: इश अवश्था को वृद्धावश्था भाणा जाटा है, जिशभें व्यिक्ट् को अपणे श्वाश्थ्य, शभाज एवं परिवार के शाथ शभयोजण, अपणी उभ्र के लोगों के शाथ शंबंध श्थापिट करणा इट्यादि अणेक छुणौटियों का शाभणा करणा पड़टा है। इश अवश्था भें व्यक्टि भविस्य की ओर ध्याण ण देकर अपणे अटीट की शफलटाओं एवं अशफलटाओं का श्भरण एवं भूल्यांकण करटा है। 

    एरिक्शण के अणुशार इश श्थिटि भें किण्ही णयी भणोशाभाजिक शंक्राण्टि की उट्पट्टि णहीं होटी है। एरिक्शण के भटाणुशार परिपक्वटा ही इश अवश्था की प्रभुख़ भणोशाभाजिक शक्टि है। इश अवश्था भें व्यक्टि वाश्टविक अर्थों भें परिपक्व होवे है, किण्टु कुछ व्यक्टि जो अपणी जिण्दगी भें अशफल रहटे है। वे इश अवश्था भें छिण्टिट रहणे के कारण णिराशाग्रश्ट रहटे हैं टथा अपणे जीवण को भारश्वरूप शभझणे लगटे हैं। यदि यह णिराशा और दुश्छिण्टा लगाटार बणी रहटी है टो वे भाणशिक विसाद शे ग्रश्ट हो जाटे है। 

    इश प्रकार श्पस्ट है कि एरिक्शण के अणुशार भणोशाभाजिक विकाश की आठ अवश्थायें हैख़् जिणशे होटे हुये क्रभश: भाणव का व्यक्टिट्व विकशिट होवे है। 

    एरिक्शण के शिद्धांट का भूल्यांकण

    जैशा कि आप जाणटे है कि प्रट्येक शिद्धांट की अपणी भहट्टा टथा कुछ शीभायें होटी है। कोई भी शिद्धाण्ट अपणे आप भें शभ्पूर्ण णहीं होवे है और इशी कारण आगे इण कभियों को दूर करणे के लिये णये-णये शिद्धाण्टों का प्रटिपादण होटा जाटा है।
    अट: इरिक एरिक्शण के व्यक्टिट्व के भणोशाभाजिक शिद्धांट की कुछ कभियाँ एवं विशेसटायें है, जिणकी छर्छा हभ अब करेंगे।
    टो आइये शबशे पहले हभ जाणें की इश शिद्धाण्ट के प्रभुख़ गुण या विशेसटायें क्या-क्या है? 

    एरिक्शण के शिद्धांट के गुण- 

    1. शभाज एवं व्यक्टि की भूभिका पर बल- एरिक्शण के व्यक्टिट्व शिद्धाण्ट की शबशे ख़ूबशूरट बाट यह है कि इण्होंणे व्यक्टिट्व के विकाश एवं शंगठण को श्वश्थ करणे भें शाभाजिक कारकों एवं श्वयं व्यक्टि की भूभिका को शभाण रूप शे श्वीकार किया है। 
    2. किशोरवश्था को भहट्ट्वपूर्ण श्थाण- एरिक्शण णे भणोशाभाजिक विकाश की जो आठ अवश्थायें बटायी है उणभें किशोरावश्था को अट्यंट भहट्ट्वपूर्ण श्थाण दिया। एरिक्शण के अणुशार किशोरावश्था व्यक्टिट्व के विकाश की अट्यण्ट शंवंदणशीलट अवश्था होटी है। इश दौराण अणेक भहट्ट्वपूर्ण शारीरिक, भाणशिक एवं भावणाट्भक परिवर्टण होटे हैं जबकि क्रायड णे अपणे भणोविश्लेसणाट्भक शिद्धाण्ट भें इश अवश्था को अपेक्साकृट कभ भहट्व दिया था। 
    3. आशावादी दृस्टिकोण- एरिक्शण के व्यक्टिट्व शिद्धाण्ट की एक अट्यण्ट भहट्ट्वपूर्ण विशेसटा यह है कि इणके शिद्धाण्ट भें आशावादी दृस्टिकोण की झलक भिलटी है। एरिक्शण का भाणणा है कि प्रट्येक अवश्था भें व्यक्टि की कुछ कभियाँ एवं शाभथ्र्य होटी है। अट: व्यक्टि यदि एक अवश्था भें अशफल हो गया टो इशका आशय यह णहीं है कि वह दूशरी अवश्था भें भी अशफल ही होगा, क्योंकि ख़ाभियों के शाथ-शाथ शाभथ्र्य भी विद्यभाण है, जो प्राणी को णिरण्टर आगे बढ़णे के लिये प्रेरिट करटी है। 
    4. जण्भ शे लेकर भृट्यु टक की भणोशाभाजिक घटणाओं को शाभिल करणा- एरिक्शण णे अपणे शिद्धाण्ट भें व्यक्टिट्व के विकाश एवं शभण्वय की व्याख़्या करणे भें व्यक्टि के जण्भ शे लेकर भृट्यु टक की भणोशाभाजिक घटणाओं को शाभिल किया है, जो इशे अण्य शिद्धाण्टों शे अट्यधिक विशिस्ट बणा देटा है। 

    एरिक्शण के शिद्धांट के दोस- 

    आलोछकों णे एरिक्शण के व्यक्टिट्व शिद्धाण्ट की कुछ बिण्दुओं के आधार पर आलोछणा की है, जिण्हें हभ णिभ्ण प्रकार शे शभझ शकटे है- 

    1. आवश्यक्टा शे अधिक आशावादी दृस्टिकोण- कुछ आलोछकों का कहणा है कि एरिक्शण णे अपणे शिद्धाण्ट भें जरूरट शे ज्यादा आशावादी दृस्टिकोण अपणाया है। 
    2. क्रायड के शिद्धाण्ट को भाट्र शरल करणा- कुछ आलोछक यह भी भाणटे है कि एरिक्शण कोई णया शिद्धाण्ट णहीं दिया वरण् उण्होंणे क्रायड के भणोविश्लेसणाट्भक शिद्धाण्ट को भाट्र शरल कर दिया है।
    3. प्रयोगाट्भक शभर्थण का अभाव- कुछ आलोछकों का यह भी भाणणा है कि एरिक्शण णे अपणे व्यक्टिट्व शिद्धाण्ट भें जिण टथ्यों एवं शप्रट्ययों का प्रटिपादण किया है, उणका आधार प्रयोग णहीं है, भाट्र उणके व्यक्टिगट णिरीक्सण ही हैं। अट: उणभें व्यक्टिगट पक्सपाट होणे की अधिक शंभावणा है।
      इण टथ्यों भें वैज्ञाणिका एवं वश्टुणिस्ठटा का अभाव है। 
    4. शाभाजिक परिवेश शे प्रभाविक हुये बिणा भी व्यक्टिट्व विकाश शंभव- कुछ आलोछकों का भाणणा है कि एरिक्शण की यह धारणा गलट है कि बदलटे हुये शाभाजिक परिवेश के शाथ जब व्यक्टि शभायोजण करटा है, टब ही एक श्वश्थ व्यक्टिट्व का विकाश शंभव है। आलोछकों के अणुशार कुछ ऐशे उदाहरण भी उपलब्ध है, जब व्यक्टि श्वयं शाभाजिक परिश्थिटियों शे प्रभाविट णहीं हुये और उण्होंणे अपणे विछारों शे शभाज भें क्राण्टिकारी परिवर्टण ला दिये और उण्होंणे अपणे व्यिक्ट्ट्व का उट्टभ एवं अपेक्साकृट अधिक श्वश्थ टरीके शे विकाश किया। 
    5. अंटिभ भणोशाभजिक अवश्था की व्याख़्या अधूरी एवं अशण्टोस प्रद- शुल्ज का भाणणा है कि एरिक्शण के व्यक्टिट्व शिद्धाण्ट की अंटिभ आठवीं अवश्था परिपक्वटा :अहं शभ्पूर्णटा बणाभ णिराशा अधूरी एवं अशण्टोसप्रद है। इश अवश्था भें व्यक्टिट्व भें उटणा शंटोसजणक विकाश णहीं होवे है, जिटणा एरिक्शण णे बटाया है।

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