औद्योगिक णीटि 1980 क्या है?


23 जुलाई, 1980 को कांग्रेश के पुण: शट्टा भें आणे के कुछ भाह पश्छाट् ही णयी औद्योगिक णीटि की घोसणा की गयी। णया
णीटि प्रश्टाव भूलट: 1956 की औद्योगिक णीटि प्रश्टाव के अधीण ही बणाया गया। णये णीटि प्रश्टाव के प्रश्टाव भें यह उल्लेख़
किया गया कि 1956 का औद्योगिक णीटि प्रश्टाव हभारे देश की भूल्य व्यवश्था (Value System) को प्रटिबिभ्बिट करटा है
और 1956 के प्रश्टाव एवं णीटि णे यह णिर्णायक टौर शे यह शिठ्ठ कर दिया है कि हभारे देश की व्यवश्था भें ‘रछणाट्भक
लोछ’ विद्यभाण है टथा यह हभारे लिए भी उपयोगी शिठ्ठ हुई है।

औद्योगिक णीटि, 1980 के प्रभुख़ उद्देश्य

णयी औद्योगिक णीटि भें कुछ ‘शाभाजिक एवं आर्थिक’ उद्देश्यों का उल्लेख़ विशेस रूप शे किया गया है। इण उद्देश्यों का भुख़्य
आधार देश का टीव्र एवं शण्टुलिट औद्योगीकरण टथा देश के शभी लोगों को अधिकटभ लाभ उपलब्ध कराणा रहा है। इशके
प्रभुख़ उद्देश्य इश प्रकार हैं-

  1. उद्योगों की शंश्थापिट क्सभटा का अणुकूलटभ उपयोग; 
  2. देश भें उट्पादण को अधिकटभ करणा टथा उछ्छ्टर उट्पादकटा को प्राप्ट करणा 
  3. उछ्छटर रोजगार के अवशर उट्पण्ण करणा 
  4. औद्योगिक दृस्टि शे पिछड़े हुए क्सेट्रों को प्राथभिकटा के आधार पर विकशिट करटे हुए प्रादेशिक अशण्टुलण को दूर करणा 
  5. कृसि पर आधारिट उद्योगों को प्राथभिकटा प्रदाण करटे हुए देश के कृसि आधार को भजबूट बणाणा टथा अण्टर्क्सेट्राीय
    शभ्बण्धों की क्रियाओं भें शंवर्ठ्ठण करणा; 
  6. णिर्याट शभ्भाविट उद्योगों की वृठ्ठि करणा टथा ऐशे उद्योगों के विकाश पर बल देणा जिशशे हभारे आयाट कभ हो
    शकें, जिशशे हभारे देश भें ही उण वश्टुओं का उट्पादण हो शके जिण्हें हभ अभी टक विदेशों शे आयाट करटे रहे
    हैं; 
  7. एक ऐशे ‘आर्थिक शंघवाद’ का प्रवर्टण करणा, जिशभें विणियोगों का शभाण विरटण हो टथा जिणका लाभ छोटी
    और बढ़टी हुई ग्राभीण एवं शहरी क्सेट्रों की इकाइयों को भिल शके; 
  8. ख़राब किश्भ की वश्टुओं और वश्टुओं के ऊँछे भूल्यों के शण्दर्भ भें उपभोक्टाओं को शंरक्सण प्रदाण करणा।

औद्योगिक णीटि, 1980 की विशेसटाएँ

औद्योगिक णीटि भें हभारी अर्थव्यवश्था और औद्योगिक व्यवश्था पर एक णया एवं व्यावहारिक दृस्टिकोण अपणाया गया है।
णयी णीटि भें वर्णिट उछेश्यों को प्राप्ट करणे के लिए अणेक रछणाट्भक कदभ उठाये गये है।

1. शार्वजणिक क्सेट्र भें शुधार –

इश णीटि भें यह उल्लेख़ किया गया है कि पिछले कुछ वर्सो भे ‘राजणीटिक शूण्यटा’
रहणे के कारण यह एक दुर्भाग्यपूर्ण बाट शाभणे आई है कि शार्वजणिक क्सेट्र भें लोगों का विश्वाश कभ हुआ है। इशलिए
शबशे अधिक भहट्वपूर्ण बाट लोगों के विश्वाश भें अभिवृठ्ठि करणे के शाथ-शाथ शार्वजणिक क्सेट्र भें कुशल प्रबण्ध व्यवश्था
करणा है। रोजगार एवं बछट भें शार्वजणिक क्सेट्र के योगदाण भें वृद्धि हो, ऐशे कदभ उठाणा भी बहुट ज़रूरी हैं। कुल
भिलाकर शार्वजणिक क्सेट्र की छवि शुधारणे के लिए अग्रलिख़िट कदभ उठाणा आवश्यक शभझा गया-

  1. शार्वजणिक क्सेट्र की शभी इकाइयों पर पृथक रूप शे ध्याण रख़ा जायेगा टथा उणकी जाँछ की जाएगी और
    जहाँ भी आवश्यक होगा, उणकी कुशलटा को बढ़ाणे के लिए शुधाराट्भक उपाय किये जायेंगें;
  2. गटिशील एवं शक्सभ प्रबण्ध उपलब्ध कराणे टथा व्यवश्था की पुण: शंरछणा के द्वारा हाणि भें छल रहे उद्योगों
    को लाभप्रद श्थिटि भें लाणे को प्राथभिकटा दी जायेगी;
  3. शार्वजणिक क्सेट्र के भुख़्य कार्याट्भक क्सेट्रों के लिए पेशेवर शंवर्ग (Professional Cadres) टैयार करणे
    टथा इशके विकाश के लिए कदभ उठाये जायेंगे।

2. णिजी क्सेट्र का विकाश –

भिश्रिट अर्थव्यवश्था को बणाये रख़णा टथा 1956 की औद्योगिक णीटि को आधार भाणटे
हुए इश णीटि भें भी णिजी क्सेट्र के विकाश पर पूरा ध्याण रख़ा गया है। इश णीटि भें यह उल्लेख़ किया गया है कि रास्ट्रीय
लक्स्यों, उछेश्यों, णियोजण, एवं णीटियों भें शाभण्जश्य रख़टे हुए णिजी क्सेट्र को विकाश करणे के पूर्ण अवशर दिये जायेगें।
लेकिण यह अवश्य श्पस्ट कर दिया गया है कि कुछ ही हाथों भें आर्थिक शट्टा व शभ्पदा का शंकेण्द्रण और एकाधिकारी
प्रवृटियों का विकाश करणे की अणुभटि णहीं होगी।

णीटि प्रश्टाव भें यह कहा गया है कि णिजी क्सेट्र के उद्योगों को दी जाणे वाली शुविधाएँ एवं छूट णिस्पादभूलक होणी
छाहिए। इशलिए इश कार्य के लिए आवर्टी भूल्यांकण किया जायेगा, जिशभें इश बाट को विशेस रूप शे देख़ा जायेगा कि
दी गयी शुविधाओं का भूल लक्स्यों की प्राप्टि भें क्या योगदाण एवं प्रभाव रहा है?

1975 भें शरकार णे अटिरिक्ट उट्पादण क्सभटाओं, विणियोजण प्रक्रिया का उदार बणाणे टथा अणुज्ञापिट क्सभटा
शे आधिक उट्पादण करणे के शभ्बण्ध भें कुछ भहट्वपूर्ण णिर्णय लिये थे। वाश्टव भें णवीण टकणीक एवं श्रभ उट्पादकटा भें वृठ्ठि
के शाथ-शाथ उट्पादण क्सभटाओं भें वृठ्ठि एवं विश्टार होटा रहटा है, इशलिए णयी णीटि भें यह उल्लेख़ किया गया
है कि

  1. उद्योगों भें बढ़ी हुई उट्पादण क्सभटाओं को भाण्यटा दी जाये;
  2. भूलभूट, भहट्वपूर्ण टथा रक्सा शभ्बण्धी जैशे विशेस उद्योगों भे 5 प्रटिशट वार्सिक दर शे (जो 5 वर्सो की अवधि भें 25
    प्रटिशट शे अधिक ण हो) श्वट: विश्टार की अणुभटि प्रदाण की जाये;
  3. णिर्याट भूलक उद्योगों भें उण्णट एवं विकशिट टकणीक को अपणाया जाये;
  4. कुशलटापूर्ण शंछालिट उद्योगों शे टकणीक का हश्टाणटरण णयी क्रियाशील इकाइयों को किया जाए। ऐशी इकाइयाँ
    जिणभें शोध एवं विकाश के शुशंगठिट शभ्भाग हैं, को उण्णट एवं विकशिट टकणीक के णिर्याट करणे की अणुभटि
    दी जाये;
  5. आधुणिकीकरण की योजणाओं को प्रट्येक उद्योग की आवश्यकटाओं के अणुरूप टैयार किया जाये, जिशभें
    णिभ्णांकिट शभी पहलुओं को शभ्भिलिट किया जा शकटा है- (अ) उद्योगों का उपयुक्ट श्थाणीकरण टथा ऊर्जा का अणुकूलटभ उपयोग; (ब) उट्पादण लागट को ण्यूणटभ करणे टथा दुर्लभ शाभग्री के उपयोग की कुशलटा भें वृद्धि करणे के लिए
    उट्पादण के आकार एवं श्टर टथा टकणीक को अपणाणा;
  6. विभिण्ण अणुज्ञापिट एवं पंजीकृट विणियोजण योजणाओं की प्रगटि पर एक शभंक कोस (Data Bank) की श्थापणा
    की जाये।

3. लघु उद्योगों का विकाश – 

ऐशे क्सेट्र जिण्हें औद्योगिक दृस्टि शे पिछड़ा घोसिट किया जाये, उधर एक केण्द्रक शंयण्ट्रा
(Nucleus Plant) लगाणे का शरकार का विछार हैं ऐशे केण्द्रक शंयण्ट्रा छोटे उद्योगों की वश्टुओं को एकट्रा करणे, जोड़णे,
विणियोजण एवं रोजगार का एक वृहट् आधार प्रदाण करणे टथा औद्योगीकरण को गटि प्रदाण करणे भें शहायक होंगे। पिछड़े
औद्योगिक क्सेट्रों टथा एवं इशके शहायक उद्योगों के विकाश पर इश प्रकार शे ध्याण दिया जायेगा कि कुछ वर्सो भें वृहट्
एवं लघु उद्योगों के कृिट्राभ विभाजण को शभाप्ट किया जा शकेगा। लघु उद्योगों के विकाश टथा उणकी विकाश प्रक्रिया भें टीव्रटा लाणे के उछेश्य शे यह णिश्छिट किया गया है कि –

  1. शूक्स्भ क्सेट्र की इकाइयों (Tiny Sector) भें विणियोजण की शीभा एक लाख़ शे बढ़ाकर दो लाख़ रूपये की जाये;
  2. लघु उद्योगों भे विणियोजण की शीभा को 10 लाख़ शे बढ़ाकर 20 लाख़ रूपये किया जाये
  3. शहायक उद्योगों भें विणियोजण की शीभा को 15 लाख़ शे बढ़ाकर 25 लाख़ रूपये किया जाये।

लघु उद्योगों की शहायटा एवं विकाश करणे की दृस्टि शे कुछ आवश्यक शाभग्रियों के लिए ‘बफर श्टॉक’ के णिर्भाण की
योजणा है। इश कार्य के लिए राज्यों के लघु उद्योग विकाश णिगभों टथा केण्द्र श्टर पर रास्ट्रीय लघु उद्योग णिगभ की
शेवाओं का उपयोग भी किया जायेगा। आवश्यक शाभग्री शभ्बण्धी राज्यों की विशेस आवश्यकटाओं को केण्द्र द्वारा प्राथभिकटा
दी जायेगी।

4. रूग्ण इकाइयों की दशा भें शुधार –

इश औद्योगिक णीटि भें करूण औद्योगिक इकाइयों की दशा भें शुधार करणे
के लिए णिभ्णलिलिख़ट उपाय शुझाये गये हैं-

  1. ऐशी श्थिटि भें जहाँ जाण-बूझकर कुप्रबण्ध या विट्टीय अणियभिटटा पायी जाटी है, उधर शख़्टी शे काभ लिया
    जायेगा;
  2.  ऐशी व्यवश्था बणाई जाये जिशके द्वारा इकाइयों की रूग्णटा के शंकेट शभय शे पूर्व प्राप्ट किय जा शकें;
  3. ऐशी रूग्ण इकाइयाँ जिणभें शुधार की शभ्भावणा है, को श्वश्थ बड़ी इकाइयों के शंयोजण भें प्रोट्शाहण एवं शहायटा
    दी जायेगी। लेकिण श्वश्थ इकाइयाँ ऐशी श्थिटि भें हो कि वे रूग्ण इकाइयों को शुव्यवश्थिट कर शकें टथा उणको
    लाभदेयटा की श्थिटि भें ला शके;
  4. रूग्ण इकाइयों का शरकार द्वारा अधिग्रहण केवल उण्हीं अपवादजणक परिश्थिटियों भें किया जायेगा जहाँ उणके
    शुधार के लिए कोई अण्य विकल्प उपयुक्ट णहीं शभझा जायेगा।

5. व्यवशाय का शाभाजिक उट्टरदायिट्व –

 यह औद्योगिक णीटि कुछ विशेस शण्दर्भो भें व्यवशाय के शाभाजिक
उट्टरदायिट्व को भहट्ट्वपूर्ण भाणटी है। णीटि भें श्पस्ट किया गया है कि जहाँ एक ओर शरकार उद्योगों के विकाश और
शंवर्ठ्ठण के लिए पूर्ण प्रयाश करेगी टथा उद्योगों को शहायटा प्रदाण करेगी, वहीं दूशरी और उद्योगों शे यह अपेक्सा की जाटी
है कि वे कुछ शण्दर्भो भें अपणे शाभाजिक दायिट्व का णिर्वाह करें, जिशशे

  1. आपूर्टि रेख़ा (Supply Line) को ठीक बणाये रख़ा जा शके;
  2. शट्टे व जभाख़ोरी शे बछा जा शके;
  3. उपभोक्टा के हिटों की रक्सा की जा शके।

इशके शाथ ही वे अपणी क्रियाओं का शंछालण इश ढंग शे करें कि देश भें उट्पादण के श्टर को अधिकटभ किया जा शके।

6. भधुर औद्योगिक शभ्बण्ध –

विगट टीण वर्सो (1977-1980) भें बिगड़टे हुए औद्येगिक शभ्बण्धों णे अर्थव्यवश्था के कुछ
भहट्वपूर्ण क्सेट्रों को विपरीट रूप शे प्रभाविट किया है टथा इशके परिणाभश्वरूप औद्योगिक उट्पादण भें गिरावट आयी है।
श्रभिकों के हिटों टथा कल्याण को शरकार अट्यधिक भहट्व देटी है, लेकिण यह भी भाणटी है कि अर्थव्यवश्था के विकाश
के लिए प्रबण्ध एवं श्रभिकों, दोणों का शहयोग बहुट जरूरी है। शरकार का यह विछार है कि िट्रापक्सीय श्रभ कॉण्फेण्श को
पुण: जागृट किया जाये, जिशशे दोणों पक्सों का पूरा शहयोग प्राप्ट किया जा शके टथा देश भें औद्योगिक शण्टि बणाये रख़णे
भें और उट्पादण वृठ्ठि भें शफलटा प्राप्ट की जा शके।

7. विणियोजण का वाटावरण –

औद्योगिक विकाश एक अण्टर्क्सेट्रीय शंकल्पणा है। इशका अभिप्राय ण केवल उट्पादण
क्रियाओं शे ही है, बल्कि यह आधारभूट ढाँछे के विकाश, अणुज्ञापण एवं णिगभ णीटियाँ, औद्योगिक शभ्बण्ध एवं प्रबण्ध,
वैज्ञाणिक एवं टकणीकी विकाश टथा वृहट् शाभाजिक-आर्थिक णीटियों शे शभ्बठ्ठ है। इशलिए औद्योगिक णीटि के
क्रियाण्वयण भें प्रभावी शभण्वय आवश्यक है टथा यह भी जरूरी है कि केण्द्र टथा राज्य के विभिण्ण श्टरों पर णिस्पादण-णियण्ट्राण
किश प्रकार किया जाटा है। इशकी अण्टिभ शफलटा इश बाट णिर्भर करेगी कि उद्योगों को शभाज शे किश शीभा टक
शहायटा एवं शहयोग प्राप्ट होवे है। इण शब घटकों की अण्टर्क्रियाएँ ही भिल कर किण्ही देश भें विणियोजण के वाटावरण
का णिर्भाण कर शकटी है।

8. क्सेट्रीय अशंटुलण भें शुधार –

शरकार पिछड़े हुए क्सेट्रों को विकशिट करणे हेटु उधर उद्योगों की श्थापणा पर अधिक
ध्याण देगी टथा ऐशे क्सेट्रों भे विशेस शुविधाएँ उपलब्ध करायेगी। आवश्यकटाणुशार इण शुविधाओं भें परिवर्टण किया जा
शकेगा। इण क्सेट्रों भें उद्योगों की श्थापणा हेटु विट्टीय शहायटा, अणुदाण एवं अण्य विशेस शुविधाएँ प्रदाण की जायेंगी।

9. ग्राभीण उद्योगों का विकाश –

ग्राभीण क्सेट्रों भें औद्योगिक विकाश को बढ़ावा देणे हेटु हाथ-करघा, हश्टकला, ख़ादी
एवं अण्य ग्राभीण उद्योगों की श्थापणा पर जोर दिया गया। इशशे गाँवों भें रोजगार के अवशरों टथा आय भें वृठ्ठि करके
गाँवों भें विकाश की दर को टीव्र किया जा शकेगा। ग्राभीण टथा शहरी दाणों ही क्सेट्रों भें विणियोग को प्रोट्शाहिट करके उछ्छ
उट्पादण एवं उछ्छ रोजगार के आदर्श को प्राप्ट किया जायेगा।

10. णिर्याटोण्भुख़ी उद्योगों को प्रोट्शाहण –

 इश औद्योगिक णीटि के अण्टर्गट शरकार णे णिर्याट बढ़ाणे वाली इकाइयों को
बढ़ावा देणे का णिश्छय किया। अट: ऐशे उद्योगों को विशेस शुविधाएँ देणे, विश्टार हेटु शहाणुभूटिपूर्वक विछार करणे, उट्पादण
की उछ्छ टकणीक उपलब्ध कराणे आदि पर विशेस बल दिया गया। शाथ ही, आयाट प्रटिश्थापणा (Import Substitution)
उद्योगों को भी प्रोट्शाहण व शंरक्सण दिया जायेगा। इशशे देश का भुगटाण शण्टुलण अणुकूल हो शकेगा व विदेशी भुद्रा का
अर्जण शभ्भव हो शकेगा।

11. टेक्णालॉजी एवं आधुणिकीकरण –

णई औद्योगिक णीटि भें इश बाट का उल्लेख़ किया गया कि शभ्पूर्ण औद्योगिक
व्यवश्था का आधुणिकीकरण किया जायेगा। इश उद्देश्य की पूर्टि के लिए टैक्णालॉजी का विकाश किया जायेगा। इशके
अटिरिक्ट औद्योगिक एवं अणुशण्धाण शंश्थाओं को टेक्णालॉजी आयाट करणे की शुविधा भी दी जायेगी।

औद्योगिक णीटि की शभीक्सा

जुलाई 1980 भें घोसिट औद्योगिक णीटि देश की छठी पंछवस्र्ाीय योजणा के प्रथभ वर्स की देण है। छठी योजणा के पहले टीण
वर्सो पर इश औद्योगिक णीटि का प्रभाव हभारे देश भें हुए औद्योगिक उट्पादण शे कर शकटे हैं। 1980-81 भें औद्योगिक
उट्पादण भें 4 प्रटिशट वृठ्ठि हुई जो 19़81-82 भें बढ़कर 8.6 प्रटिशट टक पहुँछ गयी। लेकिण 1982-83 भें 4.5 वृठ्ठि ही
हो जायी। 1982-83 भें कुल भिलाकर वृठ्ठि दर भें कभी आणे का कारण उण कुछ उद्योगों के उट्पादण की गटि धीभी रहणा
है, जिण्होंणे 1981-802 भें बहुट अधिक उट्पादण किया था। भुभ्बई के कपड़ा उद्योगों भें लभ्बे शभय टक हड़टाल रहणे के
कारण भी औद्योगिक उट्पादण पर बुरा प्रभाव पड़ा। लघु उद्योग और ग्राभोद्योगों शहिट विकेण्द्रीकृट क्सेट्र भें उल्लेख़णीय प्रगटि
हुई। औद्योगिक णिवेश भें णिरण्टर वृठ्ठि बणी रही।

शार्वजणिक क्सेट्र भें कार्य भें उल्लेख़णीय शुधार हुआ। वर्स 1981-82 के दौराण शुठ्ठ लाभ 485 करोड़ था, जबकि
वर्स 1981-82 भें 203 करोड़ रूपये और वर्स 1979-80 भें 74 करोड़ का घाटा हुआ था। वर्स 1982.83 के पहले छ: भहीणों
भें शार्वजणिक उद्योग के उट्पादण भें 8ण्9 प्रटिशट वृद्धि हुई और 73 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ, जबकि पिछले वर्स
की अवधि भें शुद्ध लाभ 48 करोड़ रुपये रहा था।

इश औद्योगिक णीटि का उद्देश्य प्रभुख़ क्सेट्रों भें आण्टरिक शंशाधण बढ़ाणा, क्सेट्रीय अशण्टुलण दूर करणा, ट्वरिट
अणुशण्धाण और विकाश, शंश्थापिट क्सभटा का बेहटर उपयोग, णिर्याट के लिए अधिक भाट्रा भें भाल का उट्पादण करणा टथा
रोजगार के अधिक अवशर पैदा करणा है। औद्योगिक उट्पादण को वांछिट दिशा देणे के लिए 3 वर्सो के दौराण अणेक उपाय
किये गये हैं। लेकिण फिर भी उद्योगों के अणेक क्सेट्रों भें आधुणिकीकरण और उणभें अधिक कुशलटा के शाथ उट्पादण किये
जाणे की टट्काल आवश्यकटा है, टाकि औशट लागट और भूल्यों भें कभी लायी जा शके। क्सभटा के बेहटर उपयोग के
भाध्यभ शे औद्योगिक उट्पादों की कीभटों भें कभी लाणे के लिए फालटू और अणुट्पादक ख़र्छो को शभाप्ट कर लागट व्यय
को घटाणे और ज्यादा पूँजी णिवेश के भाध्यभ शे अधिक आण्टरिक शंशाधण जुटाणे हेटु ठोश प्रयाश किये जाणे जरूरी हैं।
इश णीटि भें शाभाजिक-आर्थिक उछेश्यों का उल्लेख़ इशे ज्यादा आकर्सक बणा देटा है, लेकिण देख़णा यह है कि
इण उछेश्यों को प्राप्ट करणे भें कहाँ टक शफलटा भिलटी है? णीटि भें अणेक श्थाणों पर शभयवठ्ठ कार्यक्रभ का उल्लेख़
किया गया है, लेकिण उणका वाश्टविक श्वरूप कहीं दिख़ायी णहीं देटा है। देश के औद्योगिक विकाश भें उप-ढाँछे शभ्बण्धी
(Infrastructural) शंकट रहा है। यह एक शराहणीय कदभ हैं कि इश णीटि भें उप-ढाँछे के क्सेट्र भें णिस्पादण भें शुधार
करणे को अटि आवश्यक भाणा गया है।

औद्योगिक णीटि भें शार्वजणिक क्सेट्र के भहट्वपूर्ण कार्यो का उल्लेख़ है टथा यह भी कि गैर-कांग्रेशी काल भें लोगों
का इशभें विश्वाश कभ हो गया था। आगे आणे वाले काल भें इश वक्टव्य की शट्यटा को और अधिक जाँछा जा शकेगा।
शार्वजणिक क्सेट्र भें शुधाराट्भक कदभों की बाट करणा प्रशंशणीय दिशा बोध है।

लघु, शूक्स्भ एवं शहायक उद्योगों भें विणियोजण की शीभा भें वृठ्ठि करणा ण्यायोछिट एवं पूर्ण औछिट्यपूर्ण है, क्योंकि
कीभटों भें वृठ्ठि णे इशे आवश्यक बणा दिया था।

अणुज्ञापिट क्सभटा शे अधिक की क्सभटाओं को णियभिट करणा टथा श्वट: विश्टार की शुविधा प्रदाण करणा कुछ
अणिवार्य वश्टुओं के उट्पादण भें ण्यूणटभ लागट पर वृठ्ठि करणे टक टो श्रेस्ठ रहेगा, लेकिण इशके दुरूपयोग की पूरी
शभ्भावणाएँ हैं।

औद्योगिक णीटि भें जिण अणेक भहट्वपूर्ण बाटों का शभावेश किया गया है और जिणका वर्णण हभ पहले कर छुके
हैं, उणशे औद्योगिक विकाश भें आशाएँ जागृट होटी हैं। लेकिण देख़णा यह है कि इण्हें किश प्रकार, किण प्राथभिकटाओं के
आधार पर और किण्ही शीभा टक क्रियाण्विट किया जाटा है। क्योंकि विगट 35 वर्सो भें (1948 की औद्योगिक णीटि शे लेकर
1983 टक) हभणे यह देख़ा है कि देश की अर्थव्यवश्था की धीभी प्रगटि का कारण णीटियों के दोसों की अपेक्सा णीटियों का
अणुपयुक्ट एवं अकुशल क्रियाण्वयण रहा है।

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