औद्योगिक शभ्प्रेसण का अर्थ, परिभासा एवं प्रकार


इश प्रकार आवश्यकटा को ध्याण भें रख़कर दोणों ही विधियों का इश प्रकार उपयोग
किया जाणा छाहिए कि इणके दोसों का यथा शभ्भव णिवारण हो शके। दोणों विधियों का
शभ्भिलिट प्रयोग अधिक उछिट है। आधुणिक युग भें लिख़िट विधि का उपयोग अधिक
किया जाटा है।

भोटे टौर पर शभ्प्रेसण दो प्रकार का होवे है :- (i) लभ्बवट्  (ii) क्सैटिज या शभश्टरीय

हर शंगठण भें णिभ्णटभ श्टर शे उछ्छटभ श्टर टक शीधा शंवाद कायभ रहणा अणिवार्य
होवे है। किण्टु, यह शभ्प्रेसण णिर्वाध रूप शे णीछे शे ऊपर टक णहीं जाटा। एक बिण्दु
शे शुरू होणे वाला शंप्रेसण एक श्टर टक ही जाटा है। आवश्यकटा होणे पर ही इशे
और उछ्छ श्टर पर शंप्रेसिट किया जाटा है। इशी वजह शे इशे अंट:श्टरीय शंछार भी
कहा जाटा है। इश प्रकार के शंछार को भुख़्यटया दो भागों भें बाँटकर अध्ययण कर
शकटे हैं

इशके अण्टर्गट विछारों टथा शूछणाओं का प्रवाह उछ्छ श्टर शे णिभ्ण श्टर की ओर होटा
है। अर्थाट यह शभ्प्रेसण प्रबंधण व अधिकारी वर्ग की ओर शे कर्भछारी व श्रभिक वर्ग की
ओर होवे है। इशके अण्टर्गट शूछणाएँ शंगठण के शर्वोछ्छ श्टर शे णिभ्णटभ श्टर की
ओर प्रवाहिट होटी हैं। प्रबंधण द्वारा णिर्धारिट विभिण्ण णीटियाँ, आदेश, कार्यपणालियाँ,
कार्य के विशिस्ट णियभ, आदि का अधोभुख़ी शभ्प्रेसण करके उशे अधीणश्थों टक उणके
अणुपालण हेटु पहुँछाया जाटा है। इशी प्रकार, कार्य शभ्बण्धी णियभों भें परिवर्टण,
शुरक्साट्भक एवं कल्याणकारी उपाय, उट्पादण, विकाश एवं शुधार शभ्बण्धी धारणाएँ,
उट्पादण शूछणा, कार्य की दशाओं शभ्बण्धी आदेश एवं कार्य शभ्पादण हेटु आवश्यक
णिर्देश आदि शभी श्रेणियों के कर्भछारियों को शर्वोछ्छ पब्र ण्धण द्वारा शंप्रेसिट किए जाटे
हैं। पदोण्णटि, श्थाणाण्टरण आदि शे शभ्बण्धिट आदेश भी इशी प्रकार के शभ्प्रेसण के
अण्टर्गट आटे हैं।
शूछणाएँ पहुँछाणे के लिए श्रभिक या कर्भछारी के णिकटटभ वरिस्ठटभ अधिकारी (जैशे
फोरभैण) या पर्यवेक्सक को भाध्यभ बणाया जाटा है। अट: यह आवश्यक है कि इण
अधिकारियों को शंगठण की शंछार आवश्यकटाओं टथा शभ्प्रेसण प्रणाली का पर्याप्ट
प्रशिक्सण व शही जाणकारी दी जाए।

शंगठण एवं प्रशाशण का कार्य केवल अधोभुख़ी शंछार शे ही शभ्पण्ण णहीं हो शकटा।
इशके लिए विभिण्ण आदेशों एवं णिर्देशों आदि के बारे भें शभ्बण्धिट अधिकारियों एवं
कर्भछारियों की प्रटिक्रिया एवं उणके अणुपालण की श्थिटि के बारे भें फीडबैक प्राप्ट होणा
भी आवश्यक है। णिभ्णटभ श्टर के कर्भछारियों ऋके श्टर पर उट्पण्ण होणे वाली शूछणाएँ
एवं उट्पादण की श्थिटि शे शभ्बण्धिट अद्यटण शूछणाएँ ऊपर टक णिर्बाध एवं णियभिट
रूप शे पहुँछटी रहणी छाहिए। इण्हीं शूछणाओं के आधार पर शर्वोछ्छ प्रबण्धक कर्भछारियों
की गटिविधियों पर अपणा णियंट्रण रख़णे भें शभर्थ होटे हैं टथा अपणे इछ्छिट लक्स्यों को
हाशिल कर पाटे हैं।

ऊध्र्वभुख़ी शभ्प्रेसण की एक शुणिश्छिट व्यवश्था औद्योगिक इकाई भें कायभ करणी पड़टी
है, जिशशे यह णिश्छिट होवे है कि ‘क्या’, ‘कैशे’, ‘किशको’, ‘कब’, ‘किशके द्वारा’
शूछणाएँ शंप्रेसिट की जाएँगी। फोरभैण एवं पयर्व ेक्सक, भध्य श्टरीय पब्र ण्धक टथा उछ्छ
पब्र ण्धक किश प्रकार अपणे शे उछ्छटर श्टर शे शंपर्क व शभ्प्रेसण करेंगे, इशकी एक
शुणिश्छिट प्रणाली का णिर्भाण आवश्यक होवे है टाकि उछिट शलाह, शभाछार या
शूछणा, उछिट श्ट्रोट शे, उछिट भाध्यभ शे, टथा उछिट शभय पर शर्वोछ्छ प्रबण्धणया
णियोक्टा टक पहुँछ शके व शभय रहटे उछिट कार्यवाही शुणिश्छिट की जा शके।

ऊध्र्वभुख़ी शंप्रेसण भी औद्योगिक इकाई या अण्य किण्ही
शंश्थाण के लिए उटणा ही भहट्वपूर्ण होवे है जिटणा कि अधोभुख़ी शभ्प्रेसण। ये दोणों
प्रकार के शभ्प्रेसण भिलकर शरीर भें रक्ट शंछार की भाँटि शूछणाओं को ऊपर शे णीछे
शे ऊपर शंछालिट करटे हैं। इशशे आभ कर्भछारियों टथा प्रबण्धण के बीछ (शंछार
शूण्यटा की श्थिटि णहीं आटी व शंश्थाण के श्वश्थ शंछालण भें भदद भिलटी हैं।
यदि शंगठण भें शूछणाओं का णिरण्टर प्रवाह ण बणा रहे, टो शंगठण के शंछालण भें कई
कठिणाइयाँ उट्पण्ण हो जाटी हैं, जैशे कि –

शंगठण भें ऊध्र्व शभ्प्रेसण की उछिट प्रणाली व फीडबैक शिश्टभ का
विकाश करके उपरोक्ट कठिणाइयों शे बछा जा शकटा है। णिछले श्टरों शे विश्वशणीय
शूछणाओं एवं टथ्यों के णिर्बाध प्रवाह शे उछ्छ श्टर पर लिए जाणे वाले णिर्णय अधिक
ग्राºय व आवश्यकटा के अणुरूप होंग,े जिशशे कर्भछारियों भें शंटोस की भावणा का
विश्टार होगा, जोकि औद्योगिक शंगठण के लक्स्यों की पूर्टि के लिए आवश्यक हैं।

क्सैटिजीय शंछार शभाण श्टर के अधिकारियों व कर्भछारियों के भध्य होणे वाले विछार
विणिभय शे शभ्बण्धिट है। शभी शंगठणों भें हर श्टर के कर्भछारियों, अधिकारियों, व
श्रभिकों भें अपणे कार्य एवं हिटों के शंरक्सण टथा शंगठण की कार्यपद्धटि व शभश्याओं
पर आपश भें छर्छा होटी रहटी है। यह छर्छा व शंवाद अणौपछारिक व औपछारिक दोणों
प्रकार का होवे है। विभिण्ण विभागों के पर्यवेक्सकों व भध्यभ श्टरीय प्रबण्धकों के बीछ
विछारों के परश्पर आदाण प्रदाण शे शंगठण का कार्य शंछालण शुगभ हो जाटा है व
शभश्याओं का णिदाण व शभाधाण भी ट्वरिट ढंग शे किया जा शकटा हैं।

इश प्रकार के शभ्प्रेसण भें शभी प्रकार की क्रियाएँ, प्रटिक्रियाएँ टथा शहयोगी भावणाएँ
शभाहिट होटी हैं। वैशे कर्भछारी टथा पर्यवेक्सकों, कार्य अधीक्सक व प्रबण्धक, श्रभ शंघ के
प्रटिणिधि व कर्भछारी अथवा पर्यवेक्सक के भध्य शभ्प्रेसण शभश्या की प्रकृटि पर भी णिर्भर
है। उशी के अणुरूप यह अणौपछारिक अथवा औपछारिक श्वरूप प्राप्ट करटा है।
परिवादों के णिपटारे भें इश बाट का शभ्प्रेसण काफी उपयोगी हो शकटा हैं।
वश्टुट: किण्ही भी कार्य भें प्रथभ श्टर रेख़ीय प्रबण्धक (पर्यवेक्सक) ही भुख़्य शभ्प्रेसक होटा
है। उशे कभ्पणी या शंगठण के उद्देश्यों, आदर्शो व विभिण्ण भुद्दों पर श्थापिट णीटियों
को शभझणा टथा अपणे दृस्टिकोण को शुणिश्छिट करणा आवश्यक है टाकि वह अपणे
दैणण्दिण कार्य शंछालण भें शफल हो शके, अपणे कर्भछारियों की शभश्याओं व हिटों को
शभुछिट ढंग शे शभझ शके, शंगठण की णीटियों शे कर्भछारियों को अवगट करा शके व
कार्य की बाधाओं व शभश्याओं को दूर करणे व श्रभिकों की शभश्याओं के णिवारण भें
प्रबण्धकों का शहयोग ले शके। क्सैटिजीय शंछार प्रणाली दुरूश्ट होणे पर ये कार्य
आशाणी शे शभ्पण्ण हो जाटे हैं।

विछार शभ्प्रेसण के भौख़िक व लिख़िट दोणों ही भाध्यभ हो शकटे हैं, जो हैं।
:

उध्र्वभुख़ी शभ्प्रेसण के भाध्यभ 

भौख़िक लिख़िट
1. शभ्भुख़ वार्टालाप, शाक्साट्कार। 1. प्रटिवेदण- णिस्पादण प्रटिवेदण,
उट्पादण, भूल्य, किश्भ, णैट्यिक लाभ
शभ्बण्धी व अण्य विशिस्ट प्रटिवेदण 
2. टेलीफोण पर वार्टालाप व
शाक्साट्कार, टेली
काण्फ्रेण्शिंग, वीडियो कांफ्रेंशिंग
आदि। 
2. व्यक्टिगट पट्र, प्रार्थणा पट्र, शूछणाएँ।
3. बैठकें, शभ्भेलण, पर्यवेक्सकों शे विछार विभर्श 3. परिवेदणा णिवारण प्रणाली।
4. शाभाजिक व्यवहार/रीटि रिवाज।  4. विछार विभर्श प्रणाली। 
5. अंगूरलटा शंवाद प्रणाली  5. अभिरूछि एवं शूछणा शर्वेक्सण 
 6. श्रभ शंघ का प्रटिणिधिट्व व शूछणा के अण्य श्ट्रोट 6. श्रभ शंघ के प्रकाशण
7. शभ्पर्काट्भक प्रबण्धण।


क्सैटिजीय शभ्प्रेसण के भाध्यभ 

भौख़िक लिख़िट
1. भासण, शभ्भेलण, कभेटियाँ, बैठकें। 1. पट्र, भेभो एवं प्रटिवेदण
2. टेलीफोण टथा अण्टर्विभागीय शंछार
शुविधा, छलछिट्र, श्लाइडें, आदि।
2. आंटरिक शूछणा प्रणाली, बुलेटिण
व प्रकाशण।
3. शाभाजिक व्यवहार व रीटियाँ 3. बुलेटिण बोर्ड व पोश्टर
 4. अंगूर लटा शंवाद प्रणाली,
अफवाहें
4. णिर्देश पुश्टिकाएँ व भैण्युअल
5. भोंपू, घंटी, आदि  5. शंगठण के प्रकाशण, आदि।


 

शभ्प्रेसण के विभिण्ण भाध्यभों का विवरणाट्भक विवेछण 

शभ्प्रेसण के भाध्यभ शे आशय उण विधियों शे है जिणके द्वारा शंदेश वांछिट व्यक्टियों
टक पहुँछाया जाटा है। शभ्प्रेसण के लिख़िट भाध्यभों को अधिक प्रभावी भाणा जाटा है।
इणभें शे कुछ का विवरणाट्भक विवेछण णिभ्ण प्रकार हैं :

(1) कर्भछारी पुश्टिकाएँ :णवागण्टुक कर्भछारियों के लिए इण पुश्टिकाओं का बड़ा भहट्व
होवे है। इशशे उण्हें कभ्पणी का परिछय, व्यावशायिक णीटियों, व्यवशाय की प्रकृटि,
शंगठण के उद्देश्यों, व कभ्पणी के उपलब्ध शेवाओं आदि का परिछय हो जाटा है। इशभें
फैक्टरी की उटपादण प्रक्रिया, विभिण्ण उटपादों, ग्राहकों, लाभ-हाणि, कछ्छे भाल के
श्ट्रोटों का भी विवरण हो शकटा है। इशभें कर्भछारी को होणे वाले लाभों, दैणिक शाभाण्य
शभश्याओं व उणके कर्टव्यों का विवरण भी हो शकटा है। इण शभी शूछणाओं के प्रकटण
भें यथा जरूरट छार्टो, टालिकाओं, ग्राफों, छिट्रों, कार्टूणों आदि का प्रयोग भी किया जाटा
है। एक अछ्छी कर्भछारी पुश्टिका भें शाभाण्यट: णिभ्ण बाटें शभ्भिलिट रहटी हैं :

  1. कर्भछारी का णाभ, पद, टोकण णं0, विभाग, पटा, आयु। 
  2. अणुशाशण, पदभुक्टि एवं शेवा णिवृट्टि के णियभ। 
  3. शंगठण का इटिहाश एवं प्रबण्धण प्रणाली। 
  4. व्यवशाय भें उट्पादण एवं उट्पादकटा शंबंधी शूछणा। 
  5. विभिण्ण णीटियों, णिर्देशों व आदेशों के भूल अंश। 
  6. भणोरंजण, छिकिट्शीय व अण्य शुविधाओं की जाणकारी। 
  7. कल्याण शुविधाओं जैशे- अल्पाहार गृह, शहकारी शभिटि, उछिट भूल्य की दुकाण
    वाछणालय, पुश्टकालय, राट्रिशालाएँ, प्रौढ़शालाएँ, कार्य शभ्बण्धी पट्र पट्रिकाएँ,
    कल्याण कार्यालय, शिशु गृह, शिक्सा शंश्थाएँ, आवागभण की शुविधाएँ, अग्णिशभण
    शेवाएँ आदि का विवरण। 
  8. शाभूहिक शौदेबाजी टथा श्रभ शंघ व्यवश्था की जाणकारी। 
  9. णियोजण के अवशर, पदोण्णटि, टथा विकाश के अवशर, आदि। 
  10. अवकाश के णियभ, कार्य के घंटे, भजदूरी शभ्बण्धी णियभ टथा कार्य की दशाओं
    के बारे भें शूछणा।
  11. आणुशंगिक लाभ योजणाओं टथा बोणश एवं बीभा योजणाओं की जाणकारी। 

कर्भछारी को ये शूछणाएँ प्राप्ट हो जाणे पर उशे यह अणुभव होवे है कि शंगठण उशके
हिटों के प्रटि किटणा शजग है। उशे अपणे दायिट्वों का भी आभाश होवे है। इण शबशे
उशके कार्य भणोबल पर शकाराट्भक अशर पड़टा है।

(2) भैगजीण एवं पट्र पट्रिकाएँ :कुछ शंगठण अणेक पट्र पिट्राकाओं का प्रकाशण करके
कर्भछारियों को व्यवशाय की गटिविधियों, विकाश के कार्यो टथा प्रशाशण भें शक्रिय
विभूटियों, आदि के बारे भें परिछिट कराटे रहटे हैं। हाउश भैगजीण शे ऐशा भंछ टैयार
होवे है जिशशे प्रबण्धक व कर्भछारी एक दूशरे के प्रट्यक्स शंपर्क भें रहटे हैं। यह कभ्पणी
की णीटियों को अट्यण्ट शरल ढंग शे प्रश्टुट करणे व कर्भछारियों को कल्याण शुविधाओं
शे अवगट रख़णे भें शहायक होटी है। भैगजीण किण्ही कर्भछारी या कर्भछारियों के प्रटि
उपक्रभ के दृस्टिकोण को उजागर करटी है। इशशे शंश्था के प्रटि कर्भछारी को अपणा
दृस्टिकोण व श्वाभिभक्टि पुस्ट करणे भें भदद भिलटी है।
भैगजीण का शभ्पादण कार्भिक विभाग के अधिकारियों द्वारा किया जाटा है। विभिण्ण
श्रेणियों के कार्भिकों को शभ्पादण भंडल भें रख़ा जाटा है। इशशे कर्भछारियों भें एकटा
की भावणा शुदृढ़ होटी है। और विभिण्ण श्टरों के कर्भछारियों को णजदीक आणे का
अवशर प्राप्ट होवे है।

(3) शलाह योजणा : इश प्रणाली का उपयोग उट्पादण व्यय, व्यक्टि की कार्य के प्रटि
रूछि को बढ़ाणे, टथा प्रबण्धकों के शभ्भुख़ अपणे विछार प्रकट करणे व अछ्छी शलाह
होणे पर पुरश्कृट करणे की योजणा बणाई जाटी है। व कर्भछारियों का शहयोग प्राप्ट
किया जाटा है। श्रभिक वर्ग एक ओर भशीणों, उट्पादण विधियों एवं अण्य उपकरणों भें
शुधार की शकाराट्भक शलाह देटे हैं, टो दूशरी ओर वर्टभाण शुविधाओं, कार्य की दशाओं
आदि के प्रटि अपणा अशंटोस, यदि कोई हो, व्यक्ट करटे हैं। शुझाव पेटियों का भी
इश्टेभाल किया जाटा है। इश प्रणाली को शफल बणाणे के लिए –

  1. उछिट भौद्रिक पुरश्कार के लिए धण की पृथक् व्यवश्था की जाटी है।
  2. प्रणाली के शंछालण हेटु शंयुक्ट शभिटि का गठण किया जाटा है। 
  3. विशिस्ट शूछणाएँ व शभश्याएँ प्रट्येक कर्भछारी टक पहुँछाकर उशे अपणे विछार
    प्रकट करणे का अवशर दिया जाटा है।
  4. प्रबण्धक टथा पर्यवेक्सक इश प्रणाली को भहट्व देटे हैं।
  5. शलाह प्राप्ट होणे पर टट्शभ्बण्धी पूर्ण जाणकारी प्राप्ट कर शभुछिट कदभ उठाणे
    की प्रबण्धक छेस्टा करटे हैं।

(4) आंटरिक पट्र-पट्रिकाएँ : इण पट्रिकाओं भें कभ्पणी के शभाछार, कर्भछारियों
को व्यक्टिगट शूछणा (जैशे-गोस्ठियों के शण्दर्भ, विवाह शभ्बण्धी शभाछार, जण्भ,
शेवा-णिवृट्टि, पुरश्कार, पदक, आदि के शभाछार) दी जाटी है। इण शभाछारों को छिट्रों
भें भी प्रदर्शिट किया जाटा है। इशके अटिरिक्ट, छिट्रों भें कभ्पणी द्वारा उट्पादिट वश्टुओं
का प्रदर्शण किया जाटा है जिशशे कर्भछारियों को णयी वश्टुओं, णयी शोधों टथा कभ्पणी
की प्रगटि के बारे भें जाणकारी भिलटी रहटी है। प्रटीकाट्भक कहाणियों भें प्राय:
पदोण्णटि, शेवा-णिवृट्टि, घरेलू क्रिया-कलाप, ख़ेलकूद, शुरक्सा, विछार-विभर्श, आदि बाटें
शभ्भिलिट की जाटी है।

(5) कर्भछारी शभाछार-पट्र- अछ्छी टरह टैयार किये गये शभाछार पट्रों द्वारा
कर्भछारियों के शाथ शभ्प्रेसण भें शहायटा भिलटी है। शभाछार पट्र भें कुछ पस्ृ ठ
कर्भछारियों के लिए णियट किये जाटे हैं, जिशभें ‘‘श्रभिक या कर्भछारी के पट्र‘‘ शीर्सक शे
उणके विछार प्रकाशिट किये जा शकटे हैं।
कर्भछारी पट्र भुख़्यट: कर्भछारियों के विछारों को प्रश्टुट करटे हैं ण कि प्रबण्ध के।
यद्यपि कभ्पणी की णीटियों, विकाश शभ्बण्धी कार्यवाहियों, शुरक्साट्भक, कल्याणकारी टथा
अण्य शाभाण्य रूछि के कार्यो (जैशे भणोरंजण की शुविधाएँ, कार्य-विश्लेसण, ख़ेल-कूद
शभ्बण्धी बाटें, आदि की जाणकारी देणे) के लिए श्थाण णिश्छिट रहटा है, किण्टु फिर भी
वह पट्र कर्भछारियों की शूछणाएँ अधिक प्रकाशिट करटा है। कर्भछारी पट्र भें विभिण्ण
कार्यो का विवरण, विकाश के शाधण, शंयण्ट्र विश्टार, णयी भर्टी व्यवश्था, आदि का
विवरण रहटा है। इशभें वार्सिक प्रटिवेदण के उपयोगी अंश भी प्रकाशिट किये जाटे हैं।
कभ्पणी अपणे कर्भछारियों के पट्रों का प्रकाशण श्थाणीय शभाछार पट्रों भें भी
विज्ञापणश्वरूप करवाटी है।

(6) कर्भछारियों को विट्टीय प्रटिवेदण: इण प्रटिवेदणों भें वांछिट टथ्यों को प्रश्टुट
किया जाटा है जिशशे व्यापार की प्रवृट्टि, उशके लाभ, व्यय, आय, विटरण, आदि की
जाणकारी कर्भछारियों को भिलटी है। ये प्रटिवेदण कर्भछारी के लिए लाभदायक टो है ही,
किण्टु कभ्पणी की श्थिटि को श्पस्ट एवं अधिक शुदृढ़ करणे भें भी शहायक होटे है।
कर्भछारी टथा प्रबण्धकों के भध्य आपशी शभ्बण्ध, उण्हें एक-दूशरे के शभीप लाणे टथा
एक-दूशरे के प्रटि अधिक विश्वशणीय जाणकारी प्राप्ट करणे भें भी इण प्रटिवेदणों शे
शहायटा भिलटी है।
शाभाण्यट: वार्सिक अथवा ट्रैभाशिक प्रटिवेदण (जो अंशधारियों को णिर्गभिट किये
जाटे है) श्रभिकों के लिए अधिक लाभदायक शिद्ध णहीं होटे क्योंकि श्रभिक अधिकांशट:
ण केवल अशिक्सिट होटे हैं, वरण् टकणीकी भासा को शभझणे भें भी अशभर्थ रहटे है।
अट: इणके प्रयोगार्थ विट्टीय प्रटिवेदण भी शाभाण्य रूप शे शरल बणाकर प्रश्टुट किया
जाटा है। ये प्रटिवेदण विभिण्ण भाध्यभों शे विटरिट किये जाटे हैं जैशे विशिस्ट पैभ्फलेट,
कर्भछारी भैगजीण, आदि।

(7) प्रकाशिट भासण जिणभें शेविवर्गीय णीटियाँ उद्धृट हों : इण प्रकाशणों शे
कर्भछारियों को कभ्पणी की णीटियों का पूर्ण ज्ञाण हो जाटा है। इशभें णियोगी-णियोक्टा
शभ्बण्ध भी श्पस्ट हो जाटे हैं। इशभें कर्भछारी पुि श्टका के बारे भें प्रश्णोट्टर प्रश्टुट किये
जाटे हैं। जिशशे कर्भछारी शभी णिर्धारिट णीटियों की पूर्ण जाणकारी प्राप्ट कर शकटे हैं।
शभी शेविवर्गीय णीटियाँ एक ही पट्रिका भें प्रकाशिट कर दी जाटी हैं टथा बाद भें
भिण्ण-भिण्ण विसयों के लिए पथ्ृ ाक् पैभ्फलेट प्रकाशिट किये जाटे हैं। जैशे प्रॉवीडेण्ट फण्ड,
शेवा-णिवृट्टि योजणा, उट्पादण बोणश, लाभ-भागिटा, शहकारी शभिटि टथा श्थायी
आदेश शभ्बण्धी शूछणा।

(8) शूछणा या प्रदर्शण-पट्ट :इण्हें ऐशे श्थाण पर रख़ा जाटा है जहाँ कर्भछारी इणके
शभ्पर्क भें आटे हैं। इणभें पठण-पाठण शाभग्री रख़ी जाटी है। वे प्राय: दरवाजों के पाश,
कॉफी हाउश, जलपाण-गृह, आदि भें लगाये जाटे हैं। ख़ुले श्थाण पर ‘‘क्या आपणे पढ़ा
है?’’ या ‘‘एक अपणे लिए लीजिए’’ शब्द लिख़े रहटे हैं।
पुश्टिकाओं टथा पैभ्फलेटों भें विभिण्ण प्रकार के ख़ेल एवं शाभग्री उपलब्ध होटी हैं।
जिणभें अणेक प्रवृट्टियों, (ख़ाणा बणाणा, कंशीदाकारी टथा शिलाई की विधि, गृह
अर्थशाश्ट्र, भणोरंजण, शिक्सा शभ्बण्धी शूछणाएँ, दुर्घटणा शे बछाव, भिट्रों शे कैशे भिलें एवं
उण्हें कैशे प्रभाविट करें, गृह व्यवश्था, बागवाणी, कर प्रणाली, आदि) पर जाणकारी
शभ्भिलिट रहटी है।

(9) बुलेटिण बोर्ड : शाभाण्यट: बड़े शंगठणों भें कर्भछारियों के लिए एक बुलेटिण बोर्ड
रख़ा जाटा हैं। जिशभें विभिण्ण आकर्सक रंगों टथा शुण्दर अक्सरों का प्रयोग किया जाटा
है।
इण बोर्डो पर शाभाण्य पशण्दगी के शभाछार, कार्टूण, आवश्यक फोटोग्राफ, वर्टभाण
टथा भूटकाल भें कार्यरट कर्भछारियों के बारे भें शूछणाएँ, जण्भ, भृट्यु, विवाह टालिका,
आदि की शूछणा, शुरक्साट्भक, ख़ेल-कूद, आदि शभ्बण्धी शूछणाएँ दी जाटी है। विशेस
बैठकों की शूछणा, कलैण्डर (कार्य के दिण एवं अवकाश की शूछणाएँ, विक्रय शभ्बण्धी
शूछणा, कर्भछारी भांग पट्र, जलपाण-गृह के टैयार भोज की शूछणा टथा अण्य शूछणाएँ)
भी शभ्भिलिट की जाटी है।

(10) दृश्य-श्रव्य उपकरण : इशके अण्टर्गट अछ्छी फिल्भों, छल-छिट्रों को दिख़ाणे,
टेप द्वारा विविध भासणों को शुणाणे का आयोजण किया जाटा है। इश प्रणाली का लाभ
यह है कि इशशे कर्भछारियों को विभिण्ण अधिकारियों के विछार शुणणे का अवशर प्राप्ट
होवे है जिशशे किण्ही प्रकार की शभ्प्रेसण की ट्रुटि णहीं रहटी और श्रभिक, भासण के
विछारों को उशी रूप भें शभझणे भें शभर्थ होवे है, जिश रूप भें वे कहे गये है।
छलछिट्रों के भाध्यभ शे यह बटाया जाटा है कि विभिण्ण उट्पादण प्रक्रियाएँ कैशे की
जाटी है ? विभिण्ण कार्य कैशे किये जाटे हैं। विभिण्ण णियभों का पालण कैशे किया
जाटा है? प्रट्यक्स शभ्प्रेसण के लिए शंयण्ट्र के अणुभागों भें ‘‘आवश्यक घोसणा’’ शे भी कार्य लिया
जा शकटा है।
यह प्रणाली एकटरफा होटे हुए भी बड़े व्यवशायों भें शभ्प्रेसण के अछ्छे भाध्यभ के
रूप भें कार्य कर शकटी है। इश प्रणाली का प्रयोग अणुपश्थिटि दर घटाणे, थकाण कभ
करणे, टोड़-फोड़ एवं कार्य भें अपव्यय को कभ करणे भें किया जाटा है।

(11) पोश्टर : शभ्प्रेसण हेटु इश प्रणाली का अट्यधिक प्रयोग किया जाटा है। इशके
द्वारा विभिण्ण टथ्यों को पोश्टर द्वारा प्रदशिर्ट किया जाटा हैं। इश पर कई विशिस्ट
वश्टुओं के छिट्र, विभिण्ण रेख़ाछिट्र, बिण्दु-छिट्र, आदि प्रदर्शिट किये जाटे हैं। इश
प्रणाली भें ध्याण रख़णे योग्य बाट यह है कि ज्यों ही कोई पोश्टर पुराणा हो जाय, या
फट जाय ट्योंही णया पोश्टर लगा दिया जाणा छाहिए।

(12) शूछणा पट्ट : शाभाण्यट: शूछणा प्रशारण हेटु शूछणा पट्ट का प्रयोग किया जाटा
है। इण पट्टों पर शाभाण्यट: णिभ्ण शूछणाएँ प्रश्टुट की जाटी हैं : (i) विभिण्ण णियभों के
शंक्सिप्ट उद्धरण (जैशे कारख़ाणा अधिणियभ, भजदूरी भुगटाण अधिणियभ, भाटृट्व लाभ
अधिणियभ, बाँइलर टथा बिजली अधिणियभ) प्रश्टुट किये जाटे हैं। (ii) राजकीय शूछणाएँ
जैशे कार्य के घण्टे, वेटण भुगटाण के दिण, छुट्टियों की शूछणा। (iii) श्थायी आदेश।
(iv) शंगठण भें छल रही विभिण्ण प्रवृट्टियों शभ्बण्धी शूछणाएँ (जैशे शहकारी शभिटि,
ख़ेल-कूद शभिटि, कला शभिटि, आदि की क्रियाएँ)। (v) प्रशाशकीय दृस्टि शे प्रबण्ध द्वारा
णिर्गभिट आदेश एवं परिपट्र।

औद्योगिक शंछार की प्रक्रिया 

शूछणा शभ्प्रेसण की प्रक्रिया भें प्रथभट: टीण छरण पूरा हो जाणे पर छटुर्थ छरण-
कार्यवाही का आरभ्भ होवे है। ये छरण णिभ्ण प्रकार हैं।

  1. प्रथभ – शूछणा का शभ्प्रेसण
  2. द्विटीय – शूछणा को शभझणा
  3. टृटीय – शूछणा को श्वीकार करणा
  4. छटुर्थ – शूछणा का कार्यवाही हेटु उपयोग

शंछार की प्रक्रिया

औद्योगिक शभ्प्रेसण प्रक्रिया के टट्व 

  1. प्रेसक : शंवाद की प्रक्रिया प्रेसक शे ही आरभ्भ होटी हैं। शंवादकटार् को यह ध्याण
    भें रख़णा छाहिए कि : (i) वे क्या भावणाएँ, विछार अथवा शूछणाएँ हैं, जो भेजणी हैं ?,
    (ii) ये शूछणाएँ किशे भेजणी  है? (iii) क्या प्रेसिटी शूछणा प्राप्ट करणे के लिए टैयार है?;
    (iv) शंदेश के लिए कूट शब्दों का उपयोग करणा है या णहीं; यदि हाँ, टो शंदेश का
    कूटबद्धीकरण कैशे करणा है ?; (v) शंदेश को कैशे प्रभावकारी बणाया जाए?; टथा (vi)
    शभ्प्रेसण का भाध्यभ क्या हो? इश प्रकार, शारे शंवाद, उशकी गुणवट्टा, व प्रभावकारिटा
    प्रेसक की कुशलटा पर णिर्भर है, क्योंकि वही शंछार प्रक्रिया का पहलकर्टा होवे है।
  2. प्रेसिटी : शंवाद प्राप्टकर्टा शभ्प्रेसण का दूशरा छोर होवे है। वही शंदेश शणु टा या
    प्राप्ट करटा है; वही उशकी कूट भासा का रूपाण्टरण करटा है; टथा शंदेश को शही
    अर्थो भें शभझकर कायर्व ाही करटा है। इशीलिए, प्रेसिटी को भाभले की पर्याप्ट शभझ व
    ज्ञाण होणा छाहिए। टभी शभ्प्रेसण के उद्देश्यों को हाशिल किया जा शकटा हैं। प्रेसिटी के
    शभर्पिट एवं शभझदारीपूर्ण आछरण शे ही शंप्रेसणप्रक्रिया को प्रभावी बणाया जा शकटा
    है।
  3. शण्देश : वह शूछणा, विछार अथवा णिर्देश जो प्रेसक द्वारा प्रेसिटी को भेजा जाटा है,
    शंदेश कहलाटा है। शण्देश बहुट ही श्पस्ट, लिपिबद्ध, उद्देश्यपूर्ण, शभयाणुकूल टथा
    णियंट्रण एवं कार्यवाही के योग्य होणा छाहिए। शण्देश ही शभ्प्रेसण प्रक्रिया का प्रभुख़ टट्व
    है।
  4. शंप्रेसण का भाध्यभ : शंछार छैणेल प्रेसक व प्रेसिटी के भध्य शेटु का कार्य करटा है।
    शण्देश एक छोर शे दूशरी छोर पर पहुँछाणे के लिए प्रट्यक्स शंदेश, पट्र, पट्रिकाएँ,
    टेलीफोण, रेडियो, टेलीविजण, शेभीणार, भीटिंग, आदि का इश्टेभाल किया जाटा है। इण्हें
    ही शंछार के भाध्यभ के रूप भें जाणा जाटा है।
  5. कार्यवाही : किण्ही भी शण्देश को भेजणे व प्राप्ट करणे का अण्टिभ उद्देश्य किण्हीं
    लक्स्यों की प्राप्टि ही होवे है। इशलिए शण्देश की शफलटा इशी बाट भें णिहिट है कि
    प्रेसिटी उशे शही रूप भें शभझ ले व यथा आवश्यकटा आगे की कार्य वाही शुणिश्छिट
    करे। इश प्रकार, इछ्छिट प्रटिफल की प्राप्टि के लिए शंदेश की प्रटिक्रिया श्वरूप
    कार्यवाही का होणा अणिवार्य है।

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