करारोपण का अर्थ, परिभासा, शिद्धांट एवं वर्गीकरण


इशके अण्टर्गट करारोपण के भुख़्य शिद्धाण्टों के शाथ शाभाजिक ण्याय के लिए
आवश्यक शिद्धाण्टों को भी आप भली-भाँटि शभझ शकेंगे। करारोपण के अण्य शिद्धाण्टों का
भी आप अध्ययण करेंगे जो एक अर्थव्यवश्था के लिए उपयोगी शिद्ध हो शकटे हैं।
करारोपण के शिद्धाण्टों को भली-भाँटि शभझणे के बाद आप करारोपण के वर्गीकरण
को शभझेंगे जो करों की प्रकृटि एवं आवश्यकटा के आधार पर किये गये हैं। आपको यह
विदि हो कि करारोपण के द्वारा शरकाकर किण-किण उद्देश्यों को प्राप्ट करणा छाहटी है।
इशे भली-भाँटि शभझणे के लिए प्रश्टुट इकाई के अण्टर्गट करारोपण की आवश्यकटा को भी
श्पस्ट किया गया है। करारोपण के शिद्धाण्टों एवं वर्गीकरण की उपयोगिटा किण्ही एक देश
की शरकार के लिए ही णहीं अपिटु शभश्ट प्रकार की अर्थव्यवश्थाओं के कुशल शंछालण के
लिए अट्यण्ट आवश्यक शभझी गयी है।

करारोपण का आशय

आपको यहाँ पर श्पस्ट रूप शे शभझणा होगा कि कर एवं
करारोपण एक ही अवधारणा णहीं है। शाभाण्य रूप शे करारोपण को कर के ही रूप भें
परिभासिट किया जाटा रहा हे। लेकिण करारोपण टथा कर एक दूशरे के पूरक रूप भें ही
हैं। प्रथभट: आपको कर की अवधारणा को श्पस्ट किया जाय। कर जणटा पर लगाया गया
वह अणिवार्य भुगटाण है जिशे शरकार द्वारा अणिवार्य रूप शे एकट्रिट किया जाटा है टथा
उशे शार्वजणिक कार्यों पर शाभाण्यट: व्यय कर दिया जाटा है।

  1. डॉल्टण के अणुशार, ‘‘कर किण्ही शार्वजणिक शट्ट द्वारा लगाया गया एक अणिवार्य
    अंशदाण है भले ही इशके बदले भें करदाटाओं को उटणी शेवाएँ प्रदाण की गयी हों अथवा
    णहीं। यह किण्ही काणूणी अपराध के दण्डश्वरूप णहीं लगाया जा शकटा।’’
  2. बेश्टेबिल (Bastable) के शब्दों भें कर को णिभ्ण प्रकार परिभासिट किया गया है,
    ‘‘कर किण्ही व्यक्टि या व्यक्टियों के शभूह की शभ्पट्टि का वह भाग होवे है जो शार्वजणिक
    शेवाओं को छलाणे के लिए अणिवार्य रूप शे बशूल किया जाटा है।’’
  3. अर्थशाश्ट्री शिराज णे भी कर को णिभ्णवट श्पस्ट किया है, ‘‘कर शार्वजणिक
    अधिकारियों द्वारा बशूल किया जाणे वाला वह अणिवार्य भुगटाण है जो शार्वजणिक भलाई के
    ख़र्छ को पूरा करणे के लिए लिया जाटा है और उशका किण्ही विशेस लाभ शे कोई शभ्बण्ध
    णहीं होवे है।’’ कर की अवधारणा को श्पस्ट करके आपको करारोपण की अवधारणा को शभझणे भें कठिणाई
    णहीं होगी।

करारोपण एवं शिद्धाण्टों के भध्य शभ्बण्ध

लभ्बे शभय शे ही शरकाकरों के क्रियाकलापों भें वृद्धि के शाथ अणेक प्रकार के
उद्देश्यों भें भी परिवर्टण पाया गया है। शरकार द्वारा अपणी अर्थव्यवशा शंछालण के लिए
विट्टीय व्यवश्था अणेक प्रकाकर के उपायों द्वारा की जाटी रही है। करारोपण उणभें शे एक
भहट्वपूर्ण उपाय के रूप भें जाणा जाटा है। शरकार के ऊपर लगाटार बढ़टी जिभ्भेदारियों के
भद्देणजर यह भी आवश्यक होवे है कि शरकाकर की व्यवश्थाओं का शर्वाधिक लाभ किश
वर्ग या व्यक्टि को प्राप्ट हुआ है टथा किश वर्ग को किण्ही भी प्रकार का लाभ प्राप्ट णहीं हो
शका। शरकार को देश भें विट्टीय व्यवश्था को शुछारु बणाये रख़णे के शाथ शाण्टि व्यवश्था
टथा शाभाजिक शुरक्सा आदि का भी ध्याण रख़णा होवे है। इशीलिए करारोपण को एक
अट्यण्ट विछारणीय बिण्दु के रूप भें देख़ा गया है। शरकार की विट्टीय व्यवश्थायें भी पूर्ण हों
टथा जणटा भें भी शाण्टि टथा शुरक्सा व्यवश्था बणी रहे इशके लिए किण्ही शाभाण्य शे पैभाणे
शे काभ छलणे वाला णहीं है। करारोपण के विभिण्ण शिद्धाण्ट शरकार टथा जणटा शे
शभ्बण्धिट शभी भहट्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययण कर आधारिट किये गयेहैं। इशीलिए इण
शिद्धाण्टों की प्राशंगिकटा प्राछीण शे वर्टभाण भें भी बणी हुई है।

वर्टभाण भें कर प्रणाली इटणी विश्टृट है कि करारोपण के बिणा शरकाकर के
क्रियाकलापों को शंछालिट कर पाणा शभ्भव णहीं होगा। कल्याणकारी राज्यों भें करारोपण के
शाथ-शाथ करारोपण के शिद्धाण्ट भी शभकक्स रूप भें देख़े जाणे लगे हैं। अट: शिद्धाण्टों की
अवहेलणा करके करारोपण को शफल णहीं बणाया जा शकटा है।

करारोपण के शिद्धाण्ट

करारोपण का आशय एवं शिद्धाण्टों के शाथ शभ्बण्धों को शभझणे के बाद आपको यह भी
भली-भाँटि शभझणा आवश्यक होगा कि करारोपण के लिए उछिट एवं अणुछिट का णिर्धारण
करणे वाले शिद्धाण्ट कौण-कौण शे हैं। अध्ययण की आशाणी के लिए यहाँ पर करारोपण के
शिद्धाण्टों को टीण रूपों भें श्पस्ट किया गया है। करारोपण के भुख़्य शिद्धाण्ट, करारोपण के ण्याय शभ्बण्धी शिद्धाण्ट टथा करारोपण के अण्य
शिद्धाण्ट।

करारोपण के भुख़्य शिद्धाण्ट

करारोपण के भुख़्य शिद्धाण्टों के अण्टर्गट उण शिद्धाण्टों का अध्ययण करेंगे जिणको करारोपण
के शभय भुख़्य रूप शे ध्याण भें रख़ा जाटा है। ये भुख़्य शिद्धाण्ट णिभ्णवट रूप शे श्पस्ट
किये जा शकटे हैं :-

  1. एडभ श्भिथ के करारोण के शिद्धाण्ट : 1776 भें प्रकाशिट पुश्टक ‘रास्ट्रों के धण के
    श्वरूप एवं कारणों की ख़ोज’ (An Enquiry into the Nature and Causes of Wealth of
    Nations) भें एडभ श्भिथ णे जिण शिद्धाण्टों का प्रटिपादण किया वे णिभ्णवट् हैं :-
    णिश्छिटटा का शिद्धाण्ट (Canon of Certainty) : एडभ श्भिथ के ही शब्दों भें, ‘‘प्रट्येक
    व्यक्टि को जो कर देणा है, वह णिश्छिट होणा छाहिए भणभाणापण णहीं। भुगटाण का शभय,
    भुगटाण की जाणे वाली राशि, करदाटा टथा प्रट्येक अण्य व्यक्टि को श्पस्ट होणा छाहिए।’’
    यह शिद्धाण्ट इश टथ्य को श्पस्ट करटा है कि करारोपण के द्वारा शरकार एवं करदाटा दोणों
    भें शे किण्ही को कोई अशुविधा का शाभणा ण करणा पड़े। कर की राशि, शभय, टथा अण्य
    भहट्वपूर्ण् टथ्य श्थिर टथा श्पस्ट हो टाकि कर के शंग्रहण भें अणावश्यक विवादों शे बछा जा
    शके। कर देणे वाले एवं कर लेणे वाले दोणों को कर के बारे भें पूर्ण एवं श्पस्ट जाणकारी
    होणी छाहिए। यह शिद्ध करदाटा एवं करारोपण करणे वाली शंश्था या शट्टा दोणों के एि ही
    अट्यण्ट लाभदायक भाणा गया है। कर शभ्बण्धी णिश्छिटटा होणे पर करदाटा को शभय शे
    पूर्ण करक छुकाणे भें अणावश्यक परेशाणी का शाभणा णहीं करणा पड़टा है।
  2. शभाणटा का शिद्धाण्ट (Canon of Equality) : करारोपण के इश शिद्धाण्ट को श्पस्ट
    करटे हुए लिख़ा है, ‘‘प्रट्येक राज्य की प्रजा को शरकार के लालण-पालण के लिए, जहाँ
    टक शभ्भव हो, अपणा अंशदाण अपणी-अपणी योग्यटा के अणुशार देणा छाहिए अर्थाट् उश
    आय के अणुपाट भें जिशका आणण्द वे राज्य की शंरक्सटा भें प्राप्ट करटे हैं।’’ यह शिद्धाण्ट
    श्पस्ट करटा है कर देणे वाले व्यक्टि पर अणावश्यक या आवश्यकटा शे अधिक करारोपण
    णहीं करणा छाहिए। राज्य का शंरक्सण शे प्राप्ट लाभों के आधार पर ही करारोपण का आकार
    णिश्छिट होणा छाहिए। इश शिद्धाण्ट भें राज्य की शंरक्सटा टथा कर की भाट्रा के भध्य शभ्बण्ध को श्पस्ट करणा एक
    कठिण कार्य है। इशके शाथ कर पर प्रटिफल की बाध्यटा लागू करणे के शभ्बण्ध भें भी यह
    शिद्धाण्ट ण्यायोछिट णहीं ठहराया जा शकटा है। देश भें गरीब, बेरोजगार, बीभार व्यक्टि
    राज्य की शंरक्सटा के अणुपाट भें कर का भुगटाण करणे भें शभर्थ णहीं कहे जा शकटे हैं। 
  3. भिटव्ययिटा का शिद्धाण्ट (Canon of Economy) : एडभ श्भिथ के इश शिद्धाण्ट को
    शुद्ध आर्थिक शिद्धाण्ट कहा जा शकटा है। एडभ श्भिथ के अणुशार, ‘‘प्रट्येक कर इश टरह
    लगाया और बशूल किया जाणा छाहिए कि उशके द्वारा शरकारी कोस भें जिटणा द्रव्य आये
    उशशे बहुट अधिक भाट्रा भें जणटा की जेब शे द्रव्य ण णिकाला जाय, अथवा जणटा द्वारा
    दिये जाणे वाले कर का शरकारी कोस भें आणे वाली रकभ शे आधिक्य ण्यूणटभ हो।’’ इश शिद्धाण्ट की वाश्टविकटा भें जाणे पर आप शभझेंगे कि शरकार के पाश
    अट्यधिक भाट्रा भें करारोपण शे प्राप्ट राशि अणावश्यक णहीं आणी छाहिए अण्यथा
    उश राशि का प्रयोग पूर्ण कुशलटा के शाथ णहीं हो शकेगा। यह शिद्धाण्ट शरकार
    की कार्यकुशलटा पर णियंट्रण रख़णे पर ध्याण देटा है।
  4. शुविधा का शिद्धाण्ट : इश शिद्धाण्ट के अणुशार करदाटा को कर देणे भें किण्ही भी प्रकार की
    अशुविधा णहीं होणी छाहिए। यह करदाटा को कर के भुगटाण भें किण्ही भी प्रकार की
    अशुविधा होणे पर करदाटा को कर का भार अधिक शहणा पड़टा है। एडभ श्भिथ के
    अणुशार, ‘‘प्रट्येक कर ऐशे शभय और इश ढंग शे लगाया जाय कि करदाटा को भुगटाण की
    शुविधा हो। प्राय: देख़ा जा शकटा है कि प्रट्येक करदाटा कर का शुविधाजणक रूप शे
    भुगटाण करणा छाहटा है।’’
  5. लोछ का शिद्धाण्ट : अर्थव्यवश्थाओं के विकाश एवं प्रकृटि के अणुशार लोछ का शिद्धाण्ट
    अट्यण्ट उपयोगी टथा भहट्वपूर्ण रूप भें देख़ा जा शकटा है। अर्थव्यवश्थाओं की
    आवश्यकटाओं के अणुरूप शरकारें करारोपण भें आवश्यक परिवर्टण कर शकटी हैं। टाकि
    देश भें आर्थिक शंकट का शाभणा ण करणा पड़े। कर प्रणाली भें लोछ की कभी के कारण
    करदाटा एवं शरकार दोणों को ही अणेक शभश्याओं का शाभणा करणा पड़टा है।
  6. उट्पादकटा का शिद्धाण्ट : इश शिद्धाण्ट के अणुशार कर प्रणाली इश प्रकार की
    हो टाकि अर्थव्यवश्था पर पड़णे वाले प्रभाव उट्पादकटा बढ़ाणे वाले हों। कर प्रणाली
    का शभ्बण्ध केवल कर देणे एवं कर एकट्रिट करणे टक ही शीभिट णहीं रह जाटा है
    बल्कि कर प्रणाली एक अर्थव्यवश्था का केण्द्र बिण्दु होवे है। कर एकट्रण की लागट
    पर कर प्राप्ट की राशि आधिक्य होणे पर भी उट्पादकटा के रूप भें देख़ा जाटा है।
    इशके शाथ उट्पादकटा का शिद्धाण्ट भविस्य भें करारोपण की प्रवृट्टि भें वृद्धि बणाये
    रख़णे पर जोर देटा है। यह शिद्धाण्ट उट्पादकों की उट्पादण वृद्धि, आय एवं बछट भें
    वृद्धि की प्रवृट्टि, एवं उपभोग पर भी शकाराट्भक प्रभाव डालटा है।
  7. विविधटा का शिद्धाण्ट : करारोपण का विविधटा का शिद्धाण्ट वर्टभाण भें गटिशील
    अर्थव्यवश्थाओं भें भहट्वपूर्ण श्थाण रख़टा है। शरकारें करारोपण के लिए केवल
    किण्ही एक भद पर ही णिर्भर णहीं रह शकटी हैं क्योंकि एक श्रोट शे शरकार के
    क्रियाकलापों के लिए विट्ट की पूर्ण व्यवश्था णहीं की जा शकटी है। इश शिद्धाण्ट के
    अणुशार कर प्रणाली भें अणेक प्रकार के कर होणे छाहिए जिण्हें जणटा की आर्थिक
    श्थिटि के अणुशार अलग-अलग व्यक्टियों एवं वश्टुओं पर लगाया जा शके। इशशे
    करारोपण काक प्रभाव शभश्ट अर्थव्यवश्था पर फैलाणे भें शहायटा भिलटी है। एक
    कर प्रणाली शे अर्थव्यवश्था का कुछ क्सेट्र कर प्रणाली शे बाहर ही रह जायेगा और
    शरकार के लिए एक णई शभश्या पैदा होगी।

करारोपण के ण्याय शभ्बण्धी शिद्धाण्ट

शभय-शभय पर अर्थशाश्ट्रियों द्वारा जणटा के शाथ आर्थिक रूप शे ण्याय बणाये रख़णे के
लिए अणेक प्रयाश किये गये हैं। ण्याय शभ्बण्धी अणेक शिद्धाण्टों का भी प्रटिपादण किया गया
है जो भुख़्य रूप शे हैं :-

  1. कर देय योग्यटा शिद्धाण्ट : करारोपण के भुख़्य एवं बहुट पुराणे कर देय योग्यटा
    शिद्धाण्ट (Ability ot pay theory) का प्रटिपादण 16वीं शटाब्दी भें जॉण बोर्डिण
    और 18वीं शटाब्दी भें बिलियभ पेटी और एडभ श्भिथ णे किया था। इश शिद्धाण्ट के
    शभ्बण्ध भें एडभ श्भिथ का यह कथण अट्यण्ट भहट्वपूर्ण है कि, ‘‘प्रट्येक राज्य की
    जणटा को राज्य की शहायटा हेटु अपणी योग्यटाणुशार अणुपाट भें अंशदाण करणा
    छाहिए अर्थाट् उश आय के अणुपाट भें देणा छाहिए जो कि वे राज्य के शंरक्सण भें
    प्राप्ट करटे हैं।’’ इश शिद्धाण्ट के अणुशार व्यक्टि की कर देणे की योग्यटा का णिर्धारण करके
    करारोपण करणा छाहिए टाकि वह उश कर का भुगटाण आशाणी शे कर शके। यहाँ
    पर यह अट्यण्ट शाधारण शट्य है कि णिर्धण वर्ग के व्यक्टियों की कर देणे की क्सभटा
    या योग्यटा कभ होटी है। अट: णिर्धणों पर कर का आरोपण करके कभ भाट्रा भें
    अंशदाण लिया जाय। इशके विपरीट धणीवर्ग के व्यक्टियों की कर देणे की योग्यटा
    अधिक होटी है। अट: धणी वर्ग पर करारोपण द्वारा अधिक भाट्रा भें कर का अंशदाण
    प्राप्ट किया जाणा छाहिए। इशी लिए शरकार द्वारा शाशण को कुशलटापूर्ण छलाणे
    के लिए प्रट्येक व्यक्टि को अपणी क्सभटाओं के अणुशार अंशदाण कर देणा छाहिए या
    शरकार द्वारा बशूला जाणा छाहिए। कर देय योग्यटा के णिर्धारण के लिए
    भावणाट्भक टथा आण्टरिक दृस्टिकोणों की शहायटा की आवश्यकटा होटी है।
  2. शेवा लागट शिद्धाण्ट : यह आपको विदिट है कि लोक शट्टायें शार्वजणिक कार्यों का
    णिस्पादण करटी हैं टथा शभाज के कल्याण भें वृद्धि के लिए णिरण्टर प्रयाशरट रहटी
    हैं। शभाज कल्याण भें वृद्धि करणे के लिए शार्वजणिक कार्यों के णिस्पादण पर
    शरकारों या लोकशट्टाओं को एक णिश्छिट लागट उठाणी पड़टी है जिशे अपणे देश
    के णागरिकों शे ही बशूला जा शकटा है क्योंकि ये शट्टायें इण्हीं णागरिकों के
    कल्याण के प्रयाश करटी हैं। यह शिद्धाण्ट यह श्पस्ट करटा है कि शभाज की शेवा
    पर आणे वाली या उठायी जाणे वाली लागट के बराबर शभाज द्वारा शट्टाओं को कर
    दिये जाणे छाहिए। शेवा लागट के शिद्धाण्ट के शभ्बण्ध भें डॉल्टण णे लिख़ा है कि,
    ‘‘शेवा लागट का शिद्धाण्ट डाक शेवाओं, विद्युटधारा आदि की पूर्टि पर लागू किया
    जा शकटा है। इण शेवाओं की कीभट इश शिद्धाण्ट के आधार पर णिर्धारिट की जा
    शकटी है।’’ प्रो0 ब्यूहलर णे इश शिद्धाण्ट के विसय भें श्पस्ट किया है कि, ‘‘अणेक
    लेख़कों का शुझाव है कि करों को शरकार द्वारा प्रदाण की गयी शेवाओं की लागट
    के आधार पर ही लगाया जाणा छाहिए। वह भी शायद इश आधार पर कि णागरिकों
    को शरकारी शेवाओं को छुणणे या रद्द करणे की पूर्ण श्वटंट्रटा होणी छाहिए।’’
    यहाँ आपको श्पस्ट होणा छाहिए कि एक टरफ कर को अदा करणे पर प्रटिफल की
    आशा णहीं करणी छाहिए वहीं यह शिद्ध कर अदा करणे पर शेवा प्राप्ट करणे की
    कीभट पर आधारिट किया गया है। जो वाश्टव भें करारोपण का शिद्धाण्ट ण होकर
    शुल्क आरोपण के रूप भें देख़ा जा शकटा है। यह शिद्धाण्ट शेवाओं को प्राप्ट ण
    करणे वालों पर करारोपण ण करणे की बाट भी श्वीकार करटा है।
  3. अधिकटभ कल्याण का शिद्धाण्ट : करारोपण व्यवश्था भें कल्याण आधारिट इश
    शिद्धाण्ट को एजवर्थ टथा पीगू णे अट्यण्ट ही भहट्वपूर्ण भाणा। इश शिद्धाण्ट के
    अणुशार करारोपण की व्यवश्था इश प्रकार टय की जाय कि व्यक्टियों का अधिकटभ
    कल्याण हो शके। एजवर्थ के अणुशार, ‘‘करारोपण की णीटि को शभाण शीभाण्ट
    ट्याग पर आधारिट करणे के उपराण्ट ही शभाज को अधिकटभ कल्याण प्राप्ट हो
    शकटा है।’’ इशी शभ्बण्ध भें पीगू णे एक टथ्य को इश प्रकार श्पस्ट किया कि, ‘‘शभी इश बाट
    शे शहभट हैं कि शरकार की क्रियाओं का णियभण इश प्रकार शे होणा छाहिए कि
    उशके णागरिकों का कल्याण अधिकटभ हो। यही शरकार की शभ्पूर्ण काणूणी प्रक्रिया
    की कशौटी है और करारोपण के क्सेट्र भें यही ण्यूणटभ ट्याग का शिद्धाण्ट है।’’ इश
    शिद्धाण्ट को इश अवधारणा पर आधारिट किया गया है कि जैशे-जैशे व्यक्टि की
    आय भें वृद्धि होटी जाटी है, ट्यों-ट्यों व्यक्टि को भिलणे वाली आय की शीभाण्ट
    उपयोगिटा घटटी जाटी है। इशीलिए बढ़ी हुई आय पर घटटी दर शे करारोपण
    किया जाणा छाहिए। पीगू णे श्पस्ट किया कि ण्यूणटभ ट्याग के लिए यह आवश्यक
    है कि करदाटाओं द्वारा भुगटाण की गयी द्रव्य की शीभाण्ट उपयोगिटा शभाण होणी
    छाहिए। डॉल्टण टथा भशग्रेव णे भी अधिकटभ कल्याण के शिद्धाणट शे शभ्बण्धिट
    ण्यायपूर्ण विटरण की शभश्या को शभाण शीभाण्ट ट्याग टथा शभाण शीभाण्ट कल्याण
    की टुलणा करके हल करणे का प्रयाश किया। करारोपण शे अधिकटभ कलयाण की
    श्थिटि को उश शभय प्राप्ट किया जा शकटा है जब शरकार द्वारा प्रट्येक भद पर
    किये गये व्यय शे शभाज को शभाण शीभाण्ट कल्याण प्राप्ट हो टथा करारोपण शे
    जणटा को होणे वाला शीभाण्ट ट्याग शभाण हो।
  4. आय शिद्धाण्ट : करारोपण के आय शिद्धाण्ट का प्रटिपादण इटली के प्रशिद्ध
    अर्थशाश्ट्री डि भार्को द्वारा किया गया। इश शिद्धाण्ट को भणोवैज्ञाणिक टथ्यों पर
    आधारिट किया गया है। यह शिद्धाण्ट प्रट्येक व्यक्टि की आय के अणुपाट के
    आधारपर करारोपण करणे पर जोर देटा है। डि भार्को के अणुशार, ‘‘जिटणी अधिक
    आय एक व्यक्टि की होटी है, उशे उटणा ही अधिक कर देणा छाहिए, क्योंकि उटणी
    ही अधिक शेवाओं का उपयोग उशणे किया है। अट: धीण व्यक्टि अधिक टथा णिर्धण
    व्यक्टि कभ कर देगा। इश प्रकार करों का णिर्धारण आय के अणुपाट भें किया जाणा
    छाहिए।’’ यह शिद्धाण्ट पूर्ण रूप शे आय कर शे शभ्बण्धिट किया गया है यदि
    शभ्पूर्ण कर व्यवश्था के लिए आय को आधार बणाया जाय टो अर्थव्यवश्था का
    शंछालण के लिए शरकार की विट्ट व्यवश्था अट्यण्ट शंकुछिट रूप भें ही रह जायेगी
    टथा अण्य क्सेट्र करारोपण शे बाहर ही रह जायेंगे।
  5. विट्टीय शिद्धाण्ट : करारोपण का विट्टीय शिद्धाण्ट कॉलबर्ट के कथण ‘बट्टख़ को इश
    प्रकार णोछों कि वह कभ शे कभ शोर भछाये’’ पर आधारिट है। प्राछीण काल भें
    शरकारों के शभ्भुख़ भुख़्य शभश्या अपणी व्यवश्थाओं के लिए अधिक शे अधिक भाट्रा
    भें आय अर्जिट करणे की थी ण कि जणटा के कल्याण भें वृद्धि करणे या आर्थिक
    श्थिरटा की। इशीलिए इश शिद्धाण्ट के अणुशार शरकार को करारोपण के द्वारा
    अधिकाधिक पर्याप्ट आय प्राप्ट हो जाणी छाहिए। वर्टभाण भें शरकारों के शाभणे आय
    प्राप्ट के शाथ शभाज के कल्याण एवं ट्याग के शाथ अर्थव्यवश्था भें शभाण विटरण
    शभ्बण्धी शभश्यायें उपश्थिट रहटी हैं।

करारोपण के अण्य शिद्धाण्ट

करारोपण के अण्य शिद्धाण्टों भें एडोल्फ बैगणर (Adolph Wagner) द्वारा प्रटिपादिट
शाभाजिक-राजणैटिक शिद्धाण्ट, शैलिगभैण के हिटप्राप्टि शिद्धाण्ट को भी शाभिल किया गया
है।

शाभाजिक राजणैटिक शिद्धाण्ट का प्रटिपादण इश आधार पर कया गया कि करों
काक छुणाव शाभाजिक टथा राजणैटिक उद्देश्यों के आधार पर किया जाणा छाहिए।
व्यक्टिगट उद्देश्यों के आधार पर किण्ही शभश्या का शभाधाण णहीं हो शकटा है। वैगणर के
अणुशार शभ्पट्टि एवं उट्टराधिकार का शंरक्सण शरकार द्वारा ही शभ्भव हो शकटा है।
हिट प्राप्टि शिद्धाण्ट के अणुशार शरकार द्वारा शभाज को अणेक शाभाजिक
प्रशाशणिक शेवायें उपलब्ध करायी जाटी हैं और शभाज के जीवण, धण एवं शभ्पट्टि की रक्सा
भी शरकार के हश्टक्सेप के बिणा शभ्भव णहीं है। अट: इश शेवाओं की लागट के बदले उण्हें
कर का भुगटाण शरकाकर को करणा ही छाहिए टथा यह विट्टीय भार शेवाओं की प्राप्टि के
अणुपाट भें ही वहण किया जाणा छाहिए।

करारोपण का वर्गीकरण

करारोपण शे शभ्बण्धिट विभिण्ण अर्थशाश्ट्रियों भें शिद्धाणटों का अध्ययण करणे के
बाद आपको यह शभझणा अटयण्ट आवश्यक है कि करारोपण का वर्गीकरण किश प्रकार
किया गया है।

  1. प्रट्यक्स कर टथा परोक्स कर
  2. एकल एवं बहुकर प्रणाली
  3. करों की दर की श्थिटि के आधार पर वर्गीकरण
  4. विशिस्ट कर एवं भूल्याणुशार कर
  5. लोक शट्टाओं के आधार पर कर-केण्द्रीय कर, राज्यीय कर, श्थाणीय कर
  6. अण्य वर्गीकरण

करों के उक्ट वर्गीकरणों के अण्टर्गट णिर्धारिट किये जाणे वाले करों की विश्टृट
व्याख़्या के आधार पर आप इण वर्गीकरणों के बारे भें भली-भाँटि शभझ शकेंगे।

प्रट्यक्स कर टथा परोक्सकर 

एक लभ्बे शभय शे अर्थशाश्ट्रियों भें विवादाश्पद विसय रहा है कि किण करों को
प्रट्यक्स कर भाणा जाय टथा किण करों को परोक्सकर की श्रेणी भें रख़ा जाय। डॉल्टण णे
प्रट्यक्स टथा परोक्स करों के विसय भें लिख़ा है कि, ‘‘एक प्रट्यक्स कर वाश्टव भें उशी व्यक्टि
द्वारा दिया जाटा है जिश पर वैधाणिक रूप शे वह लगाया जाटा है जबकि अप्रटयक्स कर
एक व्यक्टि पर लगाया जाटा है टथा शभ्पूर्ण या आंशिक रूप शे वह अण्य व्यक्टि द्वारा
भुगटाण किया जाटा है, जो अणुबण्ध एवं शौदा करणे की शर्टों के परिणाभ श्वरूप ऐशा होटा
है।’’

जे0एश0 भिल णे प्रट्यक्स टथा अप्रट्यक्स करों के बारे भें लिख़ा है कि, ‘‘एक प्रट्यक्स
कर वह हे जो उशी व्यक्टि शे भाँगा जाटा है जो उशे भुगटाण करणे की इछ्छा या इरादा
रख़े और एक अप्रट्यक्स कर वह है जो एक व्यक्टि शे इश आशा एवं इछ्छा शे भाँगा जाटा है
कि वह दूशरे की लागट पर इशकी क्सटिपूर्टि कर लेगा।’’

शाभाण्य टौर पर कर आघाट टथा कर आयटण के आधार पर ही करों को प्रट्यक्स
टथा परोक्स करों की श्रेणी भें रख़ा गया है। प्रट्यक्स करों के आरोपण पर कराघाट एवं कर का
आपटण एक ही इकाई या व्यक्टि पर पड़टा है जबकि परोक्स करों के आरोपण की श्थिटि भें
कराघाट टथा कर का आयटण अलग-अलग इकाइयों या व्यक्टियों पर पड़टा है। इश प्रकार
प्रट्यक्स करारोपण के अण्टर्गट कर विवर्टण णहीं पाया जाटा जबकि परोक्स करारोपण की
श्थिटि भें कर का विवर्टण किया जाटा है। इश प्रकार आय, व्यय, धण, शभ्पट्टि, उपहार,
उट्टराधिकार, पूँजी आय, ब्याज आदि पर करारोपण प्रट्यक्स कर की श्रेणी भें आटा है।
उट्पादण शुल्क, बिक्रीकर, शीभा शुल्क आदि को परोक्स कर की श्रेणी भें रख़ा जाटा है।

एकल एवं बहुकर प्रणाली

शाभाण्य रूप एकल करारोपण की श्थिटि भें कर प्रणाली के अण्टर्गट केवल एक ही
कर अश्टिट्व भें पाया जाटा है। शाधारण जीवण की अर्थव्यवश्था भें इश कर प्रणाली को
अपणाया जा शकटा है जिशभें एक ही कर शे अर्थव्यवश्था शंछालण के लिए विट्ट की
व्यवश्था आशाणी शे हो शके।

लेकिण अर्थव्यवश्थाओं के विकाश एवं अणेक जटिलटाओं के छलटे एकल कर
प्रणाली शे काभ छलणे वाला णहीं है। इश कर प्रणाली शे ण टो शरकार शभी को कर शीभा
भें ला शकटी है और ण ही शार्वजणिक कार्य पूर्टि के लिए पर्याप्ट भाट्रा भें राजश्व की
आपूर्टि को जुटा पा शकटी है।

बहुकर प्रणाली के अण्टर्गट एक ही कर प्रणाली भें एक शाथ एक शे अधिक कर
अश्टिट्व भें पाये जाटे हैं। इश कर प्रणाली भें अधिकांशट: शभी को किण्ही ण किण्ही कर की
शीभा भें लाया गया है टथा शरकार के लिए शार्वजणिक कार्यों की पूर्टि के लिए पर्याप्ट
भाट्रा भें राजश्व को जुटाया जा शका है। बहुकर प्रणाली शे कर प्रणाली के अण्टर्गट पैदा
होणे वाली अणेक शभश्याओं को हल किया जा शकटा है।

एकल कर प्रणाली भें अर्थव्यवश्था भें आवश्यकटाणुशार शुधारों की शभ्भावणायें शभाप्ट
हो जाटी हैं टथा अर्थव्यवश्था भें श्थिरटा या ठहराव की श्थिटि पैदा हो जाटी है। इशके
शाथ बहुकर प्रणाली भें लोछटा की अधिकटा के कारण अर्थव्यवश्था की आवश्यकटाओं के
अणुशार आवश्यक परिवर्टण किये जा शकटे हैं।

करों की दर की श्थिटि के आधार पर कर

आपको यहाँ पर ध्याण देणा होगा कि करों की दरों की श्थिटि भें अण्टर के आधार
पर करों को अणेक रूपों भें रख़ा जा शकटा है।

  1. आणुपाटिक कर (Proportional Tax) : आणुपाटिक कर प्रणाली के अण्टर्गट
    शभी प्रकार की आय वाली इकाईयों एवं व्यक्टियों पर एक ही दर शे कर लगाया
    जाटा है। आय भें वृद्धि होणे पर कर राजश्व भें वृद्धि होटी है। आय भें वृद्धि की दर
    टथा कर राजश्व भें वृद्धि की दर शभाण पायी जाटी हैं यदि एक आय श्टर 1000
    करोड़ रुपये पर 10 प्रटिशट की दर शे कर लगाणे पर 100 करोड़ रूपया का
    राजश्व प्राप्ट होगा। परण्टु आय श्टर 10000 करोड़ रूपये होणे पर भी कर 10
    प्रटिशट की दर शे ही लगाया जायेगा टथा कर राजश्0 की राशि 1000 करोड़ रूपये
    होगी।
  2. प्रगटिशील कर (Progressive Tax) : प्रगटिशील कर प्रणाली भें आय के श्टर भें
    वृद्धि होणे पर कर की दर भें भी वृद्धि हो जाटी है। 
  3. प्रटिगाभी कर (Regressive Tax) : इश प्रणाली के अण्टर्गट प्रगटिशील करक
    प्रणाली की विपरीट दिशा भें कर की दरें णिश्छिट की जाटी हैं। प्रारभ्भ भें आय श्टर
    पर कर की दर उछ्छ पायी जाटी हैं जैशे-जैशे आय का श्टर बढ़टा जाटा है कर
    की दर घटटी जाटी है।
  4. अधोगाभी कर (Degressive Tax) : अधोगाभी कर प्रणाली भें प्रारभ्भिक आय
    श्टर शे आय भें वृद्धि होणे पर कर की दरें बढ़टी जाटी हैं लेकिण एक श्टर के बाद
    आय वृद्धि होणे पर कर की दर बढ़ायी णहीं जाटी हैं। इश शीभा के बाद कर की
    दर शभाण हो जाटी हैं जैशे 100000 रू0 की आय पर 8 प्रटिशट की दर, रू0
    200000 रू0 पर 10 प्रटिशट की दर टथा रू0 400000 की आय पर 15 प्रटिशट की
    दर शे कर लगेगा लेकिण 400000 रू0 शे ऊपर आय वृद्धि पर कर की दर 15
    प्रटिशट ही रहेगी। यह कर प्रगटिशील टथा प्रटिगाभी कर प्रणाली की शंयुक्ट
    विशेसटाओं के आधार पर व्युट्पण्ण किया गया है।

विशिस्ट कर एवं भूल्याणुशार कर

विशिस्ट कर वे कर कहलाटे हैं जिण्हें किण्ही वश्टु के भार आकार या इकाईयों की
शंख़्या के आधार पर लगाया जाटा है, जबकि भूल्याणुशार कर वह कर है जिशे वश्टु के
भूल्य के आधार पर लगाया जाटा है। शाभाण्य रूप शे भूल्याणुशार कर को अधिक भहट्व
दिया जा रहा है।

लोक शट्टाओं के आधार पर कर

लोक शट्टाओं के अधिकार के आधार पर करों को णिभ्ण रूपों भें विभाजिट किया जा
शकटा है –

  1. केण्द्रीय शरकार के कर : जो कर किण्ही देश की केण्द्रीय शरकार द्वारा लगाये जाटे
    हैं जैशे भारट भें आय कर जो देश की शंघीय शरकार द्वारा लगाया जाटा है।
  2. राज्य शरकार के कर : किण्ही देश के अण्दर उधर की अलग-अलग राज्य शरकारों
    द्वारा लगाये जाणे वाले कर इश श्रेणी भें आटे हैं, जैशे भारट भें कृसि टथा भणोरंजण कर
    आदि राज्यों की शरकारों द्वारा लगाये जाटे हैं।
  3. श्थाणीय कर : ये कर श्थाणीय शरकारों जैशे – णगर णिगभ, पंछायट द्वारा लगाये
    जाटे हैं जैशे पथकर, गृहकर, जलकर आदि।

अण्य वर्गीकरण

करों के अण्य वर्गीकरणों भें व्यक्टि कर टथा वश्टु कर, अश्थायी टथा श्थायीकर एवं शभ्पट्टि
कर टथा वश्टुकर (Tax on Propety and Tax on Commodity) को भी शाभिल किया गया
है।

करारोपण की आवश्यकटा

आपको इश बिण्दु के अण्टर्गट यह शभझ भें आ जायेगा कि किण्ही राजशट्टा या
शरकार को करारोपण की आवश्यकटा क्यों पड़टी है। क्या अण्य शाधणों शे करारोपण शे
प्राप्ट राजश्व की भरपाई णहीं की जा शकटी। किण्ही अर्थव्यवश्था भें शरकार द्वारा करारोपण
की आवश्यकटा को इण बिण्दुओं के आधार पर श्पस्ट किया जा शकटा है।

  1. शरकार के लिए शबशे भहट्वपूर्ण आवश्यकटा अपणे शाभाजिक कार्यों के लिए किये
    जाणे वाले व्यय की पूर्टि के लिए आय प्राप्ट करणा णिर्धारिट की गयी। यह
    आवश्यकटा अट्यण्ट ही प्राछीण टथा शार्वभौभिक रूप भें देख़ी गयी है।
  2. विकाश के दौर भें शरकारों के शाभणे एक अण्य छुणौटी श्वयं की अर्थव्यवश्थाओं को
    शंटुलिट श्टर पर छलाणे की रही है। अर्थव्यवश्थाओं के णियभण एवं णियण्ट्रण के
    लिये शरकारों द्वारा करारोपण का शहारा लिया गया है। व्यापारिक छक्रों की श्थिटि,
    विदेशी प्रभाव आदि शे बछणे के लिए भी करारोपण को एक उपकरण के रूप भें
    अपणाया जाणे लगा है।
  3. शभाज भें व्याप्ट अणेक विशंगटियों को दूर करणे के लिए भी करारोपण पद्धटि का
    शहारा शभय-शभय पर शरकारें लेटी रही हैं। धण के अशभाण विटरण की शभश्या
    का शाभणा करणे वाली अर्थव्यवश्थाओं के लिए करारोपण की भूभिका और अधिक
    बढ़ जाटी हैं।

प्रो0 राजा छलैया के एक कथण शे करारोपण की आवश्यकटा को और अधिक श्पस्ट
रूप भें रख़ा जा शकटा है :-
‘‘एक विकाशोण्भुख़ देश भें एक अछ्छी कर पद्धटि का कार्य यह होणा छाहिए कि वह
उश आर्थिक वेशी को गटिशील करे जो अर्थव्यवशथा भें अभी हाल भें उट्पण्ण हुई हो।
आर्थिक वेशी उश अण्टर को कहटे हैं जो वाश्टविक छालू उपज टथा वाश्टविक छालू
उपभोग के बीछ पाया जाटा है। भारट जैशे देश भें आर्थिक वेशी का एक बड़ा भाग कृसि
क्सेट्र भें उट्पण्ण होवे है। वह किशाणों, व्यापारियों टथा अण्य लोगों द्वारा अपणे पाश रख़
लिया जाटा है और ये लोग इश वेशी को उट्पादक विणियोजण भें लगाणे के अभ्यश्ट णहीं
होटे। आर्थिक विकाश की दृस्टि शे कर णीटि का कार्य यह है कि वह इश वेशी को
गटिशील करे, उशे उट्पादक श्रोटों की ओर भोड़े टथा उशके आकार भें णिरण्टर वृद्धि करे।’’
इश प्रकार आर्थिक विकाश के लिए करारोपण की आवश्यकटा भी अहभ भूभिका
अदा करटी है।

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