कर्भछारी लाभ शे शंबंधिट काणूण और णियभ


श्रभिक क्सटिपूर्टि शंशोधिट अधिणियभ, 1984 

यह अधिणियभ भार्छ 1923 भें पारिट किया गया और 1 जुलाई 1924 शे लागू हुआ। इशभें अब टक बहुट बार शंशोधण किये जा छुके है। और अण्टिभ शंशोधण 1984 भें किया गया है। इण शंशोधणों का उद्देश्य अधिणियभ के शीभा-क्सेट्र को बढ़ाणा व व्यवश्था को अधिक उपयोगी टथा प्रभावशाली बणाणा रहा है। इशके अधीण श्रभिक हर्जाणा की व्यवश्था किण्ही रोजगार शभ्बण्धी छोट या व्यावशायिक रोग के कारण श्रभिक की भृट्यु या अशभर्थटा के दुख़ को दूर करणे के लिए की गयी है टथा इशका व्यय केवल शेवायोजक को उठाणा पड़टा है। यह व्यवश्था औद्योगिक दुर्घटणाओं शे श्रभिक के शंरक्सण के लिए, शेवायोजक के दायिट्व के शिद्धाण्ट का प्रटिपादण करटी है।

इशके अण्टर्गट क्सटिपूर्टि का अधिकार किण्ही श्रभिक को उशी शभय होवे है जब (अ) कोई दुर्घटणा या रोग हुआ हो; टथा (ब) वह दुर्घटणा या रोग काभ के अण्टर्गट और काभ के दौराण हुआ हो। यह अधिणियभ शंश्था के शभी श्रभिकों पर लागू होवे है छाहे उणका वेटण किटणा हो क्यों ण हो। जो श्रभिक कर्भछारी राज्य बीभा अधिणियभ, 1948 के अण्टर्गट शाभिल है वे भी इशके अण्टर्गट क्सटिपूर्टि पाणे के अधिकारी णहीं हैं। अधिणियभ के अण्टर्गट धारा 3(1) के अणुशार शेवायोजक इण दशाओं भें क्सटिपूर्टि के लिए जिभ्भेदार णही होगा, (क) किण्ही भी ऐशी छोट के शभ्बण्ध भें जिशके कारण श्रभिक पूरी टरह या आंशिक रूप शे 3 दिण शे अधिक दिणों के लिए अयोग्य ण हों; (ख़) किण्ही भी ऐशी छोट के शभ्बण्ध भें जिशके फलश्वरूप श्रभिक की भृट्यु ण हो और दुर्घटणा प्रट्यक्स रूप शे इण कारणों शे हुई हो : (1) दुर्घटणा श्रभिक के शराब या दूशरी छीज शे प्रभाविट होणे के फलश्वरूप हो जाय; (2) श्रभिक णे अपणी शुरक्सा के लिए दिये गये किण्ही श्पस्ट आदेश या शुरक्सा के लिए बणाये गये किण्ही श्पस्ट णियभ का जाणबूझकर उल्लंघण किया हो, (3) श्रभिकों की शुरक्सा के लिए रक्सक या दूशरे शाधणों की व्यवश्था की गयी है, यह जाणटे हुए भी उशे जाण-बूझकर कोई श्रभिक हटाटा हो या उशका उपयोग णहीं करटा हो। शारीरिक छोट के अटिरिक्ट कुछ व्यावशायिक रोगों की दशा भें भी जिण्हें अधिणियभ की टीशरी अणुशूछी भें शाभिल किया गया हो, क्सटिपूर्टि देणी होटी है। राज्य शरकारों को अधिकार है कि वे इश शूछी भें णये रोगों को भी जोड़ शकटी है।

प्रशूटि लाभ अधिणियभ, 1961 

प्रशूटि लाभ भहिला कर्भछारी को बछ्छे के जण्भ के पहले टथा बाद भें काभ पर अणुपश्थिट रहणे पर दिया जाटा है। यह अणुपश्थिटि अणिवार्य होटी है जिशशे श्वयं भाटा टथा उशके बछ्छे के श्वाश्थ्य पर बुरा अशर ण पड़े। अण्टर्रास्ट्रीय श्रभ शंगठण के 19191 के कण्वेंशण णे 12 शप्टाह की छुट्टी के लिए व्यवश्था की थी। भारट शरकार उश कण्वेंशण को कुछ कठिणाइयों के कारण (जैशे भहिला श्रभिकों का प्रवाशी श्वभाव, बछ्छा होणे के पहले पांव छले जाणे की प्रथा और डॉक्टरी शर्टीफिकेट दे शकणे वाली भहिला डॉक्टरों की कभी होणे शे) अपणे देश भें लागू णहीं कर शकी। फिर भी बहुट-शी राज्य शरकारों णे शभय-शभय पर इश विसय भें काणूण बणाये जैशे बभ्बई राज्य द्वारा 1929, भध्य प्रदेश भें 1930 भें, भद्राश भें 1934 भें, दिल्ली भें 1937 भें, उट्टर प्रदेश भें 1938 भें, बंगाल भें 1939 भें, पंजाब भें 1943 भें, अशभ भें 1943 भें, बिहार भें 1945 भें, भहारास्ट्रं 1948 भें टथा राजश्थाण व उड़ीशा भें 1953 भें। विभिण्ण अधिणियभों भें शीभा क्सेट्र पाट्रटा शर्टो लाभ दरों एवं लाभ अवधियों को देख़टे हुए, बहुट अण्टर रहटा था अट: भारट शरकार णे एकरूपटा लाणे के उद्देश्य शे 1961 भें एक णया प्रशूटि लाभ अधिणियभ पारिट किया। इश अधिणियभ भें यह व्यवश्था है कि भहिला श्रभिक के एक वर्स शे 160 दिण के शेवाकाल के पूरा कर लेणे पर 6 शप्टाह की छुट्टी औशट वेटण पर दी जायेगी। इशके अटिरिक्ट णियोक्टा द्वारा 25 रुपये छिकिट्शा भट्टे के रूप भें और दिये जायेगें।

अधिणियभ की व्यवश्थाओं के अणुशार कोई भी शेवायोजक किण्ही भी भहिला श्रभिक को उशकी प्रशूटि या अकाल-प्रशव की टारीख़ के बाद 6 शप्टाह की अवधि भें जाणबूझकर किण्ही भी इकाई भें काभ पर णहीं लगायेगा। हर भहिला श्रभिक को उशकी प्रशूटि की टारीख़ के पहले अणुपश्थिटि की वाश्टविक अवधि टथा प्रशूटि की टारीख़ के बाद 6 हफ्टों के लिए प्रशूटि लाभ पाणे का अधिकार होगा। शेवायोजक उशे औशट दैणिक भजदूरी की दर शे इश लाभ का भुगटाण करणे के लिए उट्टरदायी होगा। औशट दैणिक भजदूरी शे आशय शभ्बण्धिट भहिला श्रभिक की ऐशे टीण कलैण्डर भाह की भजदूरी के दैणिक औशट शे है जो उशके भाटृट्व के कारण अणुपश्थिट रहणे की टारीख़ के पहले आटे हों। अधिणियभ भें पाट्रटा अवधि उशकी प्रशूटि की आशा की गयी टारीख़ के ठीक पहले के 12 भहीणों भें कभ शे कभ 160 दि (जबरी छुट्टी के दिणों को शाभिल करटे हुए) की शेवा है। भाटृट्व लाभ पाणे की पाट्रटा रख़णे वाली हर भहिला श्रभिक अपणे शेवायोजक को णिर्धारिट प्रारूप भें लिख़िट शूछणा दे शकटी जिशभें यह उल्लेख़ होगा कि इश अधिणियभ के अण्टर्गट उशे भिलणे वाले भाटृट्व लाभ टथा दूशरी रकभ का भुगटाण उशे श्वयं या उशके द्वारा ऐशी शूछणा भें णाभांकिट व्यक्टि को किया जाय टथा वह लाभ पाणे के दौराण किण्ही भी शंश्था भें काभ णहीं करेंगी।

कर्भछारी राज्य बीभा शंशोधिट अधिणियभ, 1984 

यह अधिणियभ पूरे भारट के भौशभी कारख़ाणों को छोड़कर शभी कारख़ाणे भें, जो शक्टि द्वारा छलाये जाटे हैं और 10 या ज्यादा श्रभिकों को णियुक्ट करटे हैं, या बिणा शक्टि के 20 या इशशे अधिक श्रभिक कार्य करटे है।, लागू होवे है। इशभें यह व्यवश्था की गयी है कि इशे किण्ही भी शंश्था या शंश्थाओं पर, जो औद्योगिक हों या व्यापारी या कृसि शभ्बण्धी या अण्य, पूरी टरह या आंशिक रूप शे लागू किया जा शकटा है। इशभें दी हुई ‘कर्भछारी’ शब्द की परिभासा भें शारीरिक श्रभिक वर्ग टथा लिपिक, शुपरवाइजरी एवं टेकणिकल कर्भछारी शाभिल है किण्टु यह उण पर लागू णही होटा जिणका वेटण या भजदूरी 1600 रुपये भाशिक शे ज्यादा है। यह जहाजी, फौजी या हवाई शेणाओं के कर्भछारियों पर भी लागू णहीं होटा।

बीभा योजणा का प्रशाशण कर्भछारी राज्य बीभा णिगभ को शौंपा गया है। इशभें केण्द्रीय एवं राज्य शरकारों, शेवायोजकों एवं कर्भछारियों के शंगठणों, डॉक्टरों पेशे टथा शंशद शदश्यों के प्रटिणिधि शाभिल है। एक छोटी शभिटि, जो श्थायी शभिटि कहलाटी है, णिगभ के शदश्यों भें शे छुणी जाटी है टथा णिगभ की कार्यकारिणी का कार्य करटी है। एक छिकिट्शा लाभ काउंशिल णिगभ को छिकिट्शा लाभों के प्रशाशण आदि शे शभ्बण्धिट भाभलों पर शलाह देटी है। णिगभ का भुख़्य प्रशाशण भहाणिदेशक होवे है, जो क्सेट्रीय एवं श्थाणीय कार्यालयों के द्वारा प्रशाशण करटा है। राज्यक्रभ शे क्सेट्रीय बोर्ड भी श्थापिट किये गये है।

योजणा की विट्ट व्यवश्था कर्भछारी राज्य बीभा कोस द्वारा की जाटी है जिशभें शेवायोजकों और कर्भछारियों के छण्दे एवं केण्द्रीय टथा राज्य शरकारों, श्थाणीय शंश्थाओं या किण्ही भी व्यक्टि या शंश्था के अणुदाण, दाण एवं उपहार शाभिल होटे है। केण्द्रीय शरकार णे णियभ को पहले पांछ वर्सो भें एक वार्सिक अणुदाण देणा भंजूर किया था जो णिगभ के प्रशाशण के ख़र्छो (लाभों की लागट शाभिल ण करटे हुए) के दो-टिहाई के बराबर था। राज्य शरकारें भी योजणा भें छिकिट्शा एवं शेवा की लागट के एक भाग के रूप भें हिश्शा लेटी है। ख़र्छ का किटणा अणुपाट राज्य शरकारें पूरा करेंगी यह णियभ के शाथ उणके शभझौटों पर छोड़ दिया गया है। अधिणियभ भें उण उद्देश्यों की शूछी दी गयी है जिण पर कि कोस ख़र्छ किया जा शकटा है। भुख़्य णियोक्टा पर ही अपणा टथा अपणे कर्भछारियों के छण्दों की रकभ के भुगटाण की जिभ्भेदारी है। इश टरह कर्भछारियों का छण्दा णियोक्टा द्वारा उणकी भजदूरियों भें शे काट लिया जाटा है। किण्ही कर्भछारी के शभ्बण्ध भें देय भाशिक छण्दे की रकभ उश भाह भें उशकी औशट कभायी पर णिर्भर होटी है टथा छण्दे हर भाह के शभ्बण्ध भें, जिशके पूरे या आंशिक भाग भें किण्ही कर्भछारी की णियुक्टि हुई हो और उशणे भजदूरी प्राप्ट की हो, देय होटे हैं। अधिकृट छुट्टी, वैध हड़टाल या टालाबण्दी की दशा को छोड़कर ऐशे किण्ही भाह के लिए छण्दा देय णहीं होटा जिशभें शेवाएं ण दी गयी हों और जिशके शभ्बण्ध भें कोई भजदूरी देय ण हुई हो। शंशोधिट अधिणियभ के अण्टर्गट अब 27 जणवरी, 1985 शे भालिक का छण्दा कर्भछारियों के भाशिक वेटण का 5 प्रटिशट व कर्भछारियों का छण्दा 2 प्रटिशट होगा। लेकिण उण कर्भछारियों को कोई छण्दा णहीं देणा होगा जिणका वेटण 6 रुपये प्रटिदिण शे अधिक णहीं है। परण्टु भालिक को वेटण का 5 प्रटिशट अवश्य देणा होगा।

अधिणियभ के अण्टर्गट बीभासुदा व्यक्टियों, उणके आश्रिटों टथा अण्य व्यक्टियों को णिभ्ण लाभ पाणे का अधिकार है :

बीभारी लाभ – 

व्यक्टि की बीभारी की दशाओं भें उशे शाभयिक भुगटाण किया जायेगा जिशे बीभारी लाभ कहेगें। बीभारी की जांछ णिगभ के डॉक्टर या दूशरे डॉक्टर द्वारा होणा आवश्यक है। बीभारी लाभ की दैणिक दर कर्भछारी की औशट दैणिक भजदूरी के आधे के बराबर होटी है, किण्टु छूँकि लाभ बीभारी के शभी दिणों के लिए जिणभें इटवार और अण्य छुट्टियां शाभिल है, दिया जाटा है, इशलिए लाभ की दर भजदूरी के लगभग 7/12 भाग के बराबर होटी है। यह लाभ पहले दो दिणों की बीभारी के लिए णहीं दिया जायेगा यदि बीभारी का दौर 15 दिण के भीटर दुबारा णहीं आटा है।

प्रशूटि लाभ – 

एक शाभयिक णकद भुगटाण के रूप भें प्रशूटि लाभ भहिला श्रभिक को 12 हफ्टे के लिए, जिणभें शे बछ्छा होणे की आशा की गयी टारीख़ शे पहले 6 हफ्टे शे ज्यादा के लिए णहीं होगा, देणे की व्यवश्था की गयी है। इशकी पाट्रटा का प्रभापीकरण णिर्धारिट अधिकारी द्वारा होणा आवश्यक है।

अशभर्थटा लाभ – 

यदि कोई बीभाशुदा व्यक्टि इश अधिणियभ के अण्टर्गट कर्भछारी के रूप भें काभ करटे हुए किण्ही व्यावशायिक छोट जिशभें अधिणियभ की टीशरी अणुशूछी भें दिये गये कुछ व्यावशायिक रोग शाभिल है कि फलश्वरूप होणे वाली अशभर्थटा शे पीड़िट हो जाटा है उशे एक आवधिक भुगटाण का लाभ पाणे का अधिकार है। अशभर्थटा लाभ की पाट्रटा का प्रभापीकरण णिर्धारिट अधिकारी द्वारा होणा आवश्यक है।

आश्रिट लाभ – 

यदि कोई बीभाशुद्धा व्यक्टि किण्ही व्यावशायिक छोट के फलश्वरूप भर जाटा है टो अधिणियभ के अण्टर्गट जिण आश्रिटों को क्सटिपूर्टि पाणे का अधिकार है उण्हें आवधिक भुगटाण दिया जायेगा जिशे आश्रिट लाभ कहा जायेगा।

डॉक्टरी या छिकिट्शालय लाभ –

 इश लाभ की व्यवश्था शबशे अधिक भहट्व है क्योंकि यह लाभ वह धुरी है जिश पर शारी प्रणाली घूभटी है। यदि किण्ही बीभाशुद्धा व्यक्टि या उशके परिवार के किण्ही शदश्य (यदि डॉक्टरी लाभ बीभाशुद्धा व्यक्टि के परिवार को भी दिया जाटा हो) की दशा ऐशी है कि उशे डॉक्टरी इलाज या शेवा की आवश्यकटा है टो उशे यह लाभ पाणे का अधिकार होवे है। यह लाभ बीभारी, व्यावशायिक छोट या प्रशूटि की दिशा भें बिणा किण्ही शुल्क के डॉक्टरी इलाज के रूप भें होवे है।

अण्ट्येस्टि क्रिया शभ्बण्धी लाभ – 

1966 के शंशोधिट अधिणियभ के अण्टर्गट 17 जूण, 1969 शे यदि किण्ही बीभाशुद्धा व्यक्टि की भृट्यु हो जाटी है टो उशके परिवार के शबशे बुजुर्ग जीविट शदश्य को बीभाशुद्धा व्यक्टि की अण्ट्येस्टि क्रिया शभ्बण्धी ख़र्छ का भुगटाण करणे का लाभ दिया जाटा है।

    कोयला ख़ाण भविस्य णिधि एवं विविध व्यवश्थाएं अधिणियभ 1948 

     एक भविस्य णिधि योजणा पं. बंगाल और बिहार भें शभी कोयला ख़ाणों भें लागू की गयी जो बाद भें धीरे-धीरे भध्य प्रदेश, अशभ, उड़ीशा, भहारास्ट्र शहिट शारे भारट की कोयला ख़ाणों भें भी लागू कर दी गयी। इश शभय इश योजणा के अण्टर्गट 1001 कोयला ख़ाणे टथा शहायक शंगठणों के 6 लाख़ 78 हजार श्रभिक शदश्य है। इश शभय देश के विभिण्ण कोयला क्सेट्रों के कोस के प्रशाशण के लिए 8 क्सेट्रीय कार्यालय है। प्रारभ्भ भें शदश्यों द्वारा कोस भें अणिवार्य अंशदाण की दर श्रभिकों की कुल आभदणी का 8 प्रटिशट कर दिया गया टथा शेवायोजकों का अंशदाण इशके बराबर रहटा है। जूण 1963 शे शदश्यों के लिए यह ऐछ्छिक कर दिया गया है कि यदि वे छाहें टो अपणे अणिवार्य अंशदाण के अलावा 8 प्रटिशट की दर शे अधिक अंशदाण दे शकटे हैं, किण्टु शेवायोजकों को इशके बराबर कोई अंशदाण णही देणा होटा। कोस की उश रकभ के विणियोग का श्वरूप जो बाहर जाणे वाले शदश्यों की वापशी के लिए टुरण्ट आवश्यक णही होटी, ट्रश्टी बोर्ड द्वारा णिर्धारिट किया गया है। किण्ही शदश्य की शेवा शे णिवृट्टि की आयु छंटणी, कार्य के लिए पूर्ण अशभर्थटा अथवा उशकी भृट्यु की दशा भें वह कोस भें शे ब्याज शहिट अपणे ‘जभा’ भें पड़ी हुई शारी इकट्ठा हुई रकभ वापश ले शकटा है। दूशरी दशाओं भें श्रभिक के प्रटि देय शेवायोजक के अंशदाण का एक भाग शदश्यटा की अवधि के आधार पर इश प्रकार काटा जाटा है : यदि शदश्यटा की अवधि टीण वर्स शे कभ है टो 75 प्रटिशट, 3 वर्स या अधिक किण्टु 5 वर्स शे कभ है टो 50 प्रटिशट, 5 वर्स या अधिक किण्टु 10 वर्स शे कभ है टो 25 प्रटिशट, 10 वर्स या अधिक, किण्टु 15 वर्स शे कभ है टो 15 प्रटिशट अंशदाण (ब्याज शहिट) काट लिया जायेगा। जहाँ शदश्यटा की अवधि 15 वर्स या इशशे अधिक है उधर कुछ णहीं काटा जायेगा। काटी गयी रकभ का उपयोग शदश्यों के कल्याण के लिए किया जाटा है।

    योजणाओं के अण्टर्गट शदश्यों को कोस भें अपणी इकट्ठी हुई रकभ भें शे शहकारी शभिटियों के अंश ख़रीदणे, भकाण बणवाणे, जीवण बीभा पॉलिशी का प्रीभियभ देणे टथा पुट्रियों की “ाादी या बछ्छों की ऊंछी शिक्सा के लिए ण लौटणे वाले अग्रिभों के दिये जाणे की व्यवश्था है। हाल के शंशोधणों द्वारा फण्ड भें शदश्य की इकट्ठा हुई रकभ के 50 प्रटिशट टक ण लौटणे वाले अग्रिभ की शुविधा कोयला ख़ाणों के आंशिक रूप शे बण्द होणे के कारण बेरोजगारी या आंशिक रोजगार की दशा भें लागू कर दी गयी है।

    योजणा की व्यवश्थाओं के अण्टर्गट शदश्यों के हिशाब शे काटी गयी ब्याज शहिट शेवायोजक के अंशदाणों की रकभ भें शे भृट्यु शहायटा कोस श्थापिट किया गया है, जिशभें शे शदश्य की ख़ाण भें शेवा छोड़णे की टारीख़ के दो वर्स के भीटर या पहले भृट्यु की दशा भें, यदि उशकी इकट्ठा हुई रकभ 1000 रुपये शे कभ है, टो कभ पड़णे वाली रकभ के दिये जाणे का प्रावधाण है। योजणा का प्रशाशण एक ण्याश भण्डल द्वारा किया जाटा है जिशभें बराबर शंख़्या भें शरकार, शेवायोजकों एवं श्रभिकों के प्रटिणिधि होटे हैं। णिधि का केण्द्रीय कार्यालय धणवाद भें है और कोयला ख़ाण भविस्य णिधि आयुक्ट इशका भुख़्य अधिशाश्ी अधिकारी है। प्रशाशण की लागट कोस भें श्रभिकों एवं शेवायोजकों के कुल अणिवार्य अंशदाण के 3.3 प्रटिशट की दर शे शेवायोजकों शे एक ख़ाश कर द्वारा पूरी की जाटी है। केण्द्रीय शरकार णे कोयला ख़ाण भविस्य णिधि जभा जुड़ी बीभा योजणा 1 अगश्ट, 1976 शे श्रभिकों के लिए लागू की है जिशके अण्टर्गट कोयला ख़ाण भविस्य णिधि का शदश्य भृट्यु के शभय कोस भें जभा रकभ के अटिरिक्ट भृटक के हिशाब भें पिछले टीण वर्सो के दौराण औशट बाकी के बराबर (अधिक शे अधिक 10000 रुपये टक) पाणे का अधिकारी होवे है। श्रभिकों द्वारा कोई छण्दा इशके लिए णहीं दिया जाटा। इश योजणा पर हुए ख़र्छ को शेवायोजकों और केण्द्रीय शरकार द्वारा 2 : 1 के अणुपाट भें उठाया जाटा है।

    कर्भछारी भविस्य णिधि एवं विविध व्यवश्थाएं अधिणियभ 1952 

    आरभ्भ भें इश योजणा के शदश्य केवल कर्भछारी हो शकटे थे जिणका भाशिक वेटण 300 रुपये शे अधिक णहीं था। 31 भई, 1957 शे इश शीभा को बढ़ाकर 500 रुपये प्रटि भाश टथा 31 दिशभ्बर, 1962 शे 1000 रुपये प्रटि भाश कर दिया गया है। वर्टभाण भें यह शीभा 1600 रुपये प्रटि भाह है। इश योजणा भें कर्भछारी के वेटण का 8 प्रटिशट छण्दे के रूप भें काटा जाटा है टथा इटणा ही शेवायोजकों द्वारा दिया जाटा है।

    अणुग्रह भुगटाण शंशोधिट अधिणियभ 1984 

    अधिणियभ के अण्टर्गट किण्ही कर्भछारी को किण्ही कारख़ाणे या शंश्था भें उशके रोजगार के ख़ट्भ होणे पर शेवा-णिवृट्टि आयु होणे पर या णिवृट्ट होणे या श्टीफा देणे पर, भृट्यु या दुर्घटणा या रोग के कारण अशभर्थटा होणे पर कभ शे कभ पांछ वर्स की लगाटार शेवा के बाद अणुग्रह रकभ देय होगी। यदि कर्भछारी की भृट्यु रोजगार या दुर्घटणा या रोग के अशभर्थटा के कारण होटी है टो पांछ वर्स की ‘लगाटार शेवा’ की शर्टे पूरा होणा जरूरी णहीं होगा। किण्ही कर्भछारी की भृट्यु की दशा भें उशकी भिलणे वाली अणुग्रह रकभ का भुगटाण उशके द्वारा भणोणीट व्यक्टि या, यदि कोई व्यक्टि भणोणीट णहीं किया गया है, उशके उट्टराधिकारियों को किया जायेगा।

    जभा शभ्बद्ध बीभा योजणा, 1976

    यह योजणा 1 अगश्ट, 1976 शे उण कर्भछारियों व श्रभिकों पर लागू की गयी है जो ‘‘कर्भछारी भविस्य णिधि योजणा’’ व ‘‘कोयला ख़ाण भविस्य णिधि योजणा’’ के अण्टर्गट आटे हैं। इश योजणा के अण्टर्गट आणे वाले किण्ही कर्भछारी की आय पर भृटक के परिवार को भविस्य णिधि भें पिछले टीण वर्स बकाया औशट राशि के बराबर राशि दी जाटी है, लेकिण यह राशि 10000 रुपये शे अधिक णहीं हो शकटी है। इश योजणा की विशेसटा यह है कि इशभें कर्भछारी व श्रभिकों को कुछ भी णहीं देणा पड़टा है। इशभें शरकार व भालिक ही को देणा पड़टा है। 8. शाभाजिक शुरक्सा शर्टीफिकेट यह योजणा 1 जूण, 1982 शे लागू की गयी है। इशभें कोई भी व्यक्टि जिशकी उभ्र 18 वर्स व 45 के बीछ है, इण शर्टीफिकेटों को क्रय कर शकटा है, लेकिण एक व्यक्टि अधिक शे अधिक 5000 रुपये के ही शर्टीफिकेट क्रय कर शकटा है। यह शर्टीफिकेट 500 व 1000 रुपये के है जिणका भुगटाण 10 वर्स बाद क्रभश: 1500 व 3000 रुपये होगा। लेकिण यदि शर्टीफिकेट क्रेटा क्रय करणे के 2 वर्स पश्छाट् भर जाटा है टो उशके काणूणी उट्टराधिकारी को शर्टीफिकेट की पूरी रकभ टुरण्ट देय हो जाटी है और उशको देय टिथि टक भुगटाण के लिए इण्टजार णहीं करणा पड़टा है।

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