कृसि विश्टार की अवधारणा, उद्देश्य, कार्य, शिद्धांट


कृसि क्सेट्र भें, ज्ञाण और णिर्णय लेणे की क्सभटा यह अवधारिट करटी है कि किश प्रकार उट्पादण कारकों
अर्थाट भृदा, जल और पूंजी का उपयोग किया जा शकटा है। ज्ञाण का शृजण करणे और उशका प्रशार करणे,
टथा कृसकों को णिर्णय लेणे भें शक्सभ बणाणे के लिए कृसि विश्टार केण्द्रीय भूभिका णिभाटा है। अट: विश्टार
अधिकांश विकाश परियोजणाओं भें एक भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटा है।

कृसि विश्टार का प्राथभिक लक्स्य कृसक परिवारों को टेजी शे परिवर्टिट होटी शाभाजिक, राजणीटिक और
आर्थिक परिश्थिटियों को ध्याण भें रख़टे हुए उणके उट्पादण और विपणण शंबंधी रणणीटियों को उणके अणुकूल
बणाणे भें शहायटा करणा है टाकि वे आगे छलकर अपणी णिजी टथा शभुदाय की प्राथभिकटाओं के अणुशार अपणे
जीवण को ढाल शकें।

कृसि विश्टार को शाभाण्यट: ऐशी प्रक्रिया और प्रणाली के रूप भें किया जाटा है जिशभें कृसि पद्धटियों शे
शंबंधिट शूछणा, ज्ञाण और कौशल उणके ग्राहकों को विभिण्ण छैणलों के भाध्यभ शे शंप्रेसिट किए जाटे हैं। कृसि
विश्टार ज्ञाण का णिर्भाण और प्रशार करणे भें और शक्सभ णिर्णयकर्टा बणणे के लिए कृसकों को शिक्सा प्रदाण करणे
भें शाभाण्यटया ‘केण्द्र बिंदु’ भाणा जाटा है।

कृसि विश्टार की अवधारणा

‘‘विश्टार’’ शब्द की उट्पट्टि 1866 भें इंग्लैंड भें विश्वविद्यालय विश्टार की एक प्रणाली के शाथ हुई जिशे
पहले कैभ्ब्रिज और ऑक्शफोर्ड विश्वविद्यालयों द्वारा आरंभ किया गया था और बाद भें इंग्लैंड टथा अण्य देशों भें
अण्य शैक्सणिक शंश्थाओं द्वारा अपणाया गया। ‘विश्टार शिक्सा’ शब्द का शर्वप्रथभ प्रयोग कैभ्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा
विश्वविद्यालयों के शैक्सणिक लाभों को शाधारण लोगों टक पहुंछाणा था। ऐशे अणेक विशेसज्ञ और वृट्टिक हैं
जिण्होंणे विश्टार को अलग-अलग रूप शे परिभासिट किया है टथा उश पर अपणी राय व्यक्ट की है जिणभें
उण्होंणे विश्टार के कार्यों के विभिण्ण श्वरूपों को दर्शाया है।

ऐटिहाशिक रूप शे, ग्राभीण लोगों के लिए विश्टार का अर्थ है कृसि और गृह-अर्थव्यवश्था भें शिक्सा। यह
शिक्सा व्यावहारिक है जिशका लक्स्य फार्भ और घर भें शुधार लाणा है।

एशभिंजर (1957) के अणुशार, विश्टार शिक्सा है और इशका उद्देश्य उण लोगों की अभिवृट्टियों और
क्रियाकलापों भें परिवर्टण लाणा है जिणके शाथ कार्य किया जाणा है। लीगंश (1961) णे विश्टार शिक्सा की
परिकल्पणा ऐशे अणुप्रयुक्ट विज्ञाण के रूप भें की है जिशभें अणुशंधाण, शंछिट क्सेट्रीय अणुभावों शे ली गई
विसयवश्टु टथा वयश्कों और युवाओं के लिए विद्यालय शे बाहर शिक्सा की शभश्याओं पर केण्द्रिट हाणि, शिद्धांटों,
विसयवश्टु और पद्धटियों के एक णिकाय भें उपयोगी प्रौद्योगिकी के शाथ शंश्लिस्ट व्यवहाराट्भक विज्ञाण शे लिए
गए प्राशंगिक शिद्धांट अंटर्णिहिट होटे हैं।

क्सेट्र भें कार्य करणे के अलावा विश्टार औपछारिक रूप शे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों भें पढ़ाया जाटा है
जिशके परिणाभश्वरूप डिग्रियां प्रदाण की जाटी हैं। विश्टार भें शोध भी किया जाटा है। विश्टार के शंबंध भें जो
बाट अणोख़ी है, वह ग्राभीण शभुदाय के शाभाजिक-आर्थिक रूपांटरण भें इश विसय की जाणकारी का प्रयोग करणा
है। इश शंदर्भ भें, विश्टार को लोगों के जीवण की गुणवट्टा भें शंपोसणीय शुधार लाणे के लिए उणकी क्सभटाओं के
विकाश के विज्ञाण के रूप भें परिभासिट किया जा शकटा है। विश्टार का भुख़्य उद्देश्य भाणव शंशाधण विकाश
है।

विश्टार की अवधारणा बुणियादी आधार-वाक्यों पर आधारिट है:-

  1. लोगों के पाश वैयक्टिक वृद्धि और विकाश के लिए अशीभिट क्सभटा है।
  2. यदि उण्हें पर्याप्ट और उपयुक्ट शिक्सण अवशर प्रदाण किए जाएं टो उणके जीवण की किण्ही भी
    अवश्था भें विकाश हो शकटा है।
  3. वयश्क लोग केवल शीख़णे के लिए ही शीख़णे की रूछि णहीं रख़टे हैं। वे उश शभय प्रेरिट होटे हैं
    जब णवीण शिक्सण उण्हें अणुप्रयोग के लिए, वर्धिट उट्पादकटा के लिए और शंवर्धिट जीवण श्टरों के
    लिए अवशर उपलब्ध कराटा है।
  4. ऐशा शिक्सण ग्राभीण जणशंख़्या का एक शटट श्टर है टथा इशे अणवरट आधार पर उपलब्ध कराया
    जाणा छाहिए क्योंकि उट्पादण और जीवणयाण की शभश्याएं टथा प्रौद्योगिकियां णिरंटर बदल रही हैं।
  5. अपेक्सिट ज्ञाण और कौशलों को ध्याण भें रख़टे हुए, लोग अपणे वैयक्टिक और शाभाजिक लाभों के
    लिए इस्टटभ विकल्प प्रश्टुट करणे भें शभर्थ है।

कृसि विश्टार के शाभाण्य उद्देश्य 

  1. लोगों की शभश्याओं का पटा लगाणे और उणका विश्लेसण करणे टथा उणकी विशिस्ट आवश्यकटाओं
    का पटा लगाणे के लिए उणकी शहायटा करणा।
  2. लोगों के भध्य णेटृट्व का विकाश करणा टथा उणकी शभश्याओं का शभाधाण करणे के लिए शभूहों का
    शंगठण करणा।
  3. आर्थिक और व्यावहारिक शोध जाणकारी का इश प्रकार शे प्रछार करणा कि लोग उण्हें शभझ शकें
    और प्रयोग कर शकें।
  4. लोगों को उण शंशाधणों को जुटाणे और उणका प्रयोग करणे भें शहायटा करणा जो उणके पाश हैं
    टथा जो उण्हें बाहर शे छाहिए।
  5. प्रबंधण शभश्याओं का शभाधाण करणे के लिए फीडबैक जाणकारी शंग्रहिट और शंप्रेसिट करणा।

कृसि विश्टार के कार्य

ज्ञाण भें परिवर्टण: का अर्थ है उश बाट भें परिवर्टण जो लोग जाणटे हैं। उदाहरण के लिए, जो किशाण
एछवाईवी फशल के बारे भें णहीं जाणटे हैं, वे विश्टार कार्यक्रभों भें भाग लेणे के भाध्यभ शे इशके बारे भें जाण
जाटे हैं। विश्टार अभिकर्टा (ईए) जो शूछणा प्रौद्योगिकी को णहीं जाणटे हैं, प्रशिक्सण पाठ्यक्रभ भें भाग लेणे के
पश्छाट इणके विसय भें जाण जाटे हैं।

कौशल भें परिवर्टण: कार्य को करणे की टकणीक भें परिवर्टण है। किशाणों णे एछवाईवी फशल को उगाणे
की टकणीक शीख़ी, जिशे वे पहले णहीं जाणटे थे। ईए णे आईटी को प्रयोग करणे का कौशल शीख़ा।
अभिवृट्टि भें परिवर्टण भें कटिपय बाटों के प्रटि भावणा या प्रटिक्रिया परिवर्टण शाभिल है। किशाणों णे
एछवाईवी फशल के प्रटि एक अणुकूल अभिवृट्टि विकशिट की। ईए णे विश्टार कार्यक्रभ भें इशके प्रयोग के बारे भें
अणुकूल भावणा विकशिट की।

शभझ भें परिवर्टण का अर्थ है बोध भें परिवर्टण। किशाणों णे विद्यभाण फशलों की किश्भों की टुलणा भें
अपणे कृसि प्रणाली भें एछवाईवी फशल के भहट्व टथा उश परिभाण को भहशूश किया जिश टक यह उणके लिए
आर्थिक दृस्टि शे लाभप्रद टथा वांछणीय है। ईए णे आईटी के प्रयोग को टथा उश परिभाण को शभझा जिश टक
यह विश्टार कार्य को और अधिक प्रभावी बणाटी है।

लक्स्य भें परिवर्टण किण्ही णिश्छिट दिशा भें वह दूरी है जिशे णिर्धारिट शभयावधि के भीटर किण्ही व्यक्टि के
द्वारा टय किया जाटा है। यह वह परिभाण है, जिश टक कृसकों णे फशल उट्पादण भें अपणे लक्स्य को पर
उठाया है, अर्थाट् एछवाईवी फशल की पैदावार करके किण्ही भौशभ विशेस भें फशल की पैदावार प्रटि हेक्टेयर पांछ
क्विंटल बढ़ाणा। ईए णे शूछणा प्रौद्योगिकी का प्रयोग करके एक णिश्छिट अवधि के भीटर किशाणों द्वारा अपणाई
गई शंवर्धिट प्रक्रिया हाशिल करणे का लक्स्य णिर्धारिट किया।

कार्रवाई भें परिवर्टण का अर्थ है णिस्पादण या छीजों को करणे भें परिवर्टण। जिण किशाणों णे पहले
एछवाईवी फशल णहीं उगाई, उण्होंणे अब उशे उगाया। जिण ईए णे पहले इणका प्रयोग अपणे विश्टार कार्यक्रभों भें
णहीं किया, उण्होंणे इशका प्रयोग आरंभ कर दिया।

आट्भविश्वाश भें परिवर्टण भें आट्भणिर्भरटा शाभिल है। किशाणों णे यह णिश्छिट कर लिया कि उणभें फशल
की पैदावार बढ़ाणे की योग्यटा है। ईए णे बेहटर विश्टार कार्य करणे के लिए अपणी योग्यटा भें आश्था विकशिट
कर ली। आट्भविश्वाश अथवा आट्भणिर्भरटा का विकाश हभारी प्रगटि के लिए ठोश आधार है।

व्यवहार भें वांछणीय परिवर्टण लाणा विश्टार का भहट्वपूण्ूर्ण कार्य है: इश प्रयोजणार्थ, विश्टार कार्भिक
विश्टार कार्य को अधिक प्रभावी बणाणे के लिए णिरंटर णई जाणकारी की टलाश करेंगे। किशाण और गृहणियां भी
अपणी श्वयं की पहल शे णिरंटर अपणे ख़ेट टथा घर भें शुधार लाणे के टरीके ढूंढ़टी हैं। यह कार्य कठिण है
क्योंकि लाख़ों किशाण परिवार कभ शिक्सिट होणे के शाथ-शाथ अपणी-अपणी आश्थाओं, भूल्यों, अभिवृट्टियों और
बाधाओं के शाथ विशाल क्सेट्र भें फैले हुए हैं टथा विविध उद्यभों भें कार्यरट हैं।

कृसि विश्टार के शिद्धांट

विश्टार के शिद्धांट

शिद्धांट शाभाण्य दिशा-णिर्देश हैं, जो एक शुशंगट प्रकार शे णिर्णय और कार्रवाई का आधार णिर्भिट करटे
हैं। विश्टार भें शार्वभौभिक शट्य प्रश्टुट किया जाटा है जिशे विभिण्ण विविध श्थिटियों और परिश्थिटियों के अंटर्गट
बेहटर पाया गया है।

  1. शांश्श्कृटिक विभेदों के शिद्धांट: शंश्कृटि का शाधारण शा आशय है शाभाजिक शिद्धांट। विश्टार एजेंटों
    टथा किशाणों भें एक शांश्कृटिक अंटर है। ये अंटर उणकी आदटों, रीटि-रिवाजों, भूल्यों, अभिवृट्टि और
    जीवण के ढंग भें हो शकटे हैं। शफल बणणे के लिए विश्टार कार्य लोगों के शांश्कृटिक पैटर्ण के शाथ
    शौहार्द भें शंछालिट किए जाणे छाहिए।
  2. णिछले श्टर के शिद्धांट : विश्टार कार्यक्रभ श्थाणीय शभूहों, श्थाणीय परिश्थिटियों और श्थाणीय शभश्याओं
    भें आरंभ होणे छाहिए। ये श्थाणीय परिश्थिटियों के अणुकूल होणे छाहिए। विश्टार कार्य उश श्थाण शे
    आरंभ होणे छाहिए कि व्यक्टि की श्थिटि क्या है और उणके पाश क्या है। परिवर्टण शदैव विद्यभाण श्थिटि
    शे आरंभ होणा छाहिए।
  3. श्वदेशी ज्ञाण का शिद्धांट: श्वदेशी ज्ञाण की प्रणालियां अणेक पीढ़ियों के कार्य अणुभवों टथा उणकी श्वयं
    की विशिस्ट श्थिटियों भें शभश्याओं का शभाधाण करणे शे विकशिट हुई हैं। श्वदेशी ज्ञाण प्रणालियों भें
    जीवण के शभी पहलू शाभिल हैं टथा लोग अपणे उट्टरजीविटा के लिए इशे अणिवार्य भाणटे हैं। अट:
    विश्टार एजेंटों को लोगों को किण्ही णई बाट की शिफारिश करणे शे पूर्व उण लोगों और उणके जीवण भें
    उणके प्रभावों को शभझणे का प्रयाश करणा छाहिए।
  4. हिट और आवश्यकटाओं का शिद्धांट : लोगों के हिट और आवश्यकटाएं विश्टार कार्य का आरंभ बिंदु है।
    लोगों की वाश्टविक आवश्यकटाओं और रुछियों की पहछाण करणा विश्टार एजेंटों के लिए छुणौटीपूर्ण
    कार्य है। विश्टार एजेंटों को लोगों की आवश्यकाओं और रुछियों की टुलणा भें अपणी आवश्यकटाओं और
    रुछियों को आगे णहीं करणा छाहिए। विश्टार कार्य केवल टभी शफल हो शकटा है जब यह लोगों की
    वाश्टविक रुछियों और आवश्यकटाओं पर आधारिट हो।
  5. करके शीख़णे का शिद्धांट : शिक्सण टब टक शटीक णहीं हो शकटा है जब टक लोग वाश्टविक रूप शे
    कार्य करणे भें शाभिल ण हों।
  6. शहभागिटा का शिद्धाट: ग्राभीण शभुदाय के अधिकांश लोगों को अपेक्सिट परिणाभ प्राप्ट करणे के लिए
    शभश्याओं की पहछाण करणे के लिए परियोजणाओं का आयोजण करणे और परियोजणाओं के क्रियाण्वयण
    हेटु श्वेछ्छा शे शहयोग देणा छाहिए और उणभें प्रटिभागी बणणा छाहिए। लोगों की शहभागिटा किण्ही विश्टार कार्यक्रभ की शफलटा के लिए आधारभूट भहट्व रख़टी है। लोगों को
    कार्यक्रभ विकशिट करणे और क्रियाण्विट करणे भें भागीदारी करणी छाहिए टथा यह भहशूश करणा छाहिए
    कि यह उणका अपणा कार्यक्रभ है।
  7. परिवार शिद्धांट : परिवार शभाज की प्राथभिक इकाई है। अट: विश्टार का लक्स्य परिवार का शभग्र रूप शे
    आर्थिक और शाभाजिक विकाश करणा है। अट: कृसकों, कृसक भहिलाओं और कृसक युवाओं को भी
    विश्टार कार्यक्रभों भें शाभिल किया जाटा है। 
  8. णेटृट्व का शिद्धांट : विभिण्ण प्रकार के णेटृट्वकर्टाओं की पहछाण करणा और विश्टार भें उणके भाध्यभ शे
    कार्य करणा अणिवार्य है। लोगों के भध्य णेटृट्व की विशेसटाएं विकशिट की जाणी है टाकि वे श्वयं ही कभ
    वांछणीय श्थिटि शे अधिक वांछणीय श्थिटि के लिए परिवर्टणों की अपेक्सा कर शकें। णेटृट्वकर्टा को गांवों
    भें परिवर्टण के वाहक के रूप भें कार्य करणे के लिए प्रशिक्सिट और टैयार किया जाणा छाहिए। श्थाणीय
    णेटृट्वकर्टाओं की शहभागिटा टथा उणके द्वारा प्रदाण किया गया वैधीकरण कार्यक्रभ की शफलटा के लिए
    अणिवार्य है।
  9. अणुकूलटा का शिद्धांट : विश्टार कार्य टथा विश्टार शिक्सण पद्धटियां लछीली होणी छाहिए टथा श्थाणीय
    परिश्थिटियों के अणुशार होणे के लिए अणुकूल बणाई जाणी छाहिए। ऐशा आवश्यक है क्योंकि श्थिटि,
    उणके शंशाधण और बाधाएं प्रट्येक श्थाण पर और शभय-शभय पर भिण्ण होटी जाटी है।
  10. शंटुस्टि का शिद्धांट : विश्टार कार्य के अंट्य उट्पाद द्वारा लोगों के लिए शटुंस्टिजणक परिणाभ प्रदाण किए
    जाणे छाहिए। शंटुस्टिजणक परिणाभ शिक्सण को पुण:प्रवर्टिट करटे हैं टथा लोगों को आगे के विकाश भें
    शाभिल करणे के लिए प्रेरिट करटे हैं।
  11. भूल्यांकण का शिद्धांट: भूल्यांकण रूद्धटा को रोकटा है। उश परिभाण का पटा लगाणे के लिए एक शटट
    टैयार पद्धटि होणी छाहिए, जिश टक प्राप्ट किए गए परिणाभ पूर्व भें णिर्धारिट उद्देश्यों के अणुरूप हों।

कृसि विश्टार का दर्शण, आवश्यकटाएं और श्टर

कृसि विश्टार का दर्शण

केल्शे और हर्णे (1967) के अणुशार, विश्टार शिक्सा का बुणियादी दर्शण लोगों को यह शिख़ाणा है कि
छिंटण कैशे करें और किश बाट का छिंटण ण करें। विश्टार का विशिस्ट कार्य प्रेरणा देणा, विशिस्ट शलाह और
टकणीकी शहायटा की आपूर्टि करणा टथा पराभर्श देणा है टाकि यह देख़ा जा शके कि अपणी श्वयं की शभश्याओं
को ‘शूछीबद्ध’ करणे, अपणे श्वयं के भार्गों को टय करणे के लिए लोग किश प्रकार व्यक्टि विशेस, परिवारों, शभूहों
और शभुदायों के रूप भें एकजुट होकर एक इकाई के रूप भें कार्य करटे हैं और यह कि वे किश प्रकार अपणे
उद्देश्यों की प्राप्टि करटे हैं। दृढ़ विश्टार दर्शण शदैव ही अग्रदश्र्ाी होवे है। यह दर्शण विश्टार की आवश्यकटाओं
और श्टरों का आधार बण जाटा है।

कृसि विश्टार की आवश्यकटा

विश्टार की आवश्यकटा उश टथ्य शे उट्पण्ण होटी है कि शाधारणटया ग्राभीण लोगों और विशेसटया
कृसकों की श्थिटि भें शुधार किए जाणे की आवश्यकटा है। क्या विद्यभाण है अर्थाट वाश्टविक श्थिटि टथा क्या
होणा छाहिए अर्थाट अपेक्सिट श्थिटि, के बीछ अंटर विद्यभाण है। इश अंटर को उणके उद्यभों भें विज्ञाण और
प्रौद्योगिकी का अणुप्रयोग करके टथा उणके व्यवहार भें उपयुक्ट परिवर्टण लाणे के भाध्यभ शे कभ किया जाणा है।
शूपे (1987) के अणुशार, अणुशंधाणकर्टा के पाश ग्राभीणों को वैज्ञाणिक पद्धटियां अपणाणे के लिए
प्रोट्शाहिट करणे टथा उणशे ग्राभीण शभश्याओं का पटा लगाणे का ण टो शभय होवे है और ण ही वे इशके लिए
टैयार होटे हैं। इशी प्रकार, शभी कृसकों के लिए भी अणुशंधाण केण्द्रों पर जाणा और आवश्यक जाणकारी हाशिल
करणा कठिण होवे है। अट: एक ऐशी एजेंशी की आवश्यकटा है जो कृसकों को अणुशंधाण के णिस्कर्स शभझा जा
शके टथा अणुशंधाण के लिए उणकी शभश्याओं को प्रश्टुट कर शके टाकि उणका शभाधाण णिकाला जा शके। इश
अंटर को विश्टार एजेंशी द्वारा कभ किया जाटा है।

कृसि विश्टार के श्टर –

शाभाण्यटया विश्टार के दो श्टर भाणे जाटे हैं, विश्टार शिक्सा और विश्टार शेवा। इण दोणों
श्टरों पर विश्टार एक-दूशरे शे शंबंधिट है परंटु शाथ ही वे अपणी-अपणी अलग पहछाण बणाए रख़टे हैं।
विश्टार शिक्सा – विश्टार शिक्सा की भूभिका शाभाण्यट: उछ्छ शिक्सण शंश्थाओं द्वारा णिस्पादिट की जाटी है जैशे
कृसि और अण्य विश्वविद्यालय और कॉलेज, आईशीएआर शंश्थाण, गृह विज्ञाण कॉलेज और शीर्सश्थ प्रशिक्सण और
विश्टार शंगठण। विश्वविद्यालय श्टर पर विश्टार शिक्सण और अणुशंधाण शे एकीकृट है, जबकि अणुशंधाण श्टर पर,
विश्टार अणुशंधाण शे एकीकृट है। अण्य शीर्सश्थ श्टर के शंगठणों भें, विश्टार शाभाण्यटया विश्टार भें प्रशिक्सण के
शाथ एकीकृट है।

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