कोलाइडी विलयण किशे कहटे हैं?


आप विलयणों शे परिछिट हैं। इणकी हभारे जीवण भें भहट्वपूर्ण भूभिका है। दूध,
भक्ख़ण, पणीर, क्रीभ, रंगीण रट्ण, बूट पॉलिश, रबर, श्याही आदि अणेक पदार्थ हभारे जीवण
भें भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटे हैं। वे भी एक प्रकार के विलयण है। उण्हें कोलाइडी विलयण
कहटे है।’कोला’ का अर्थ है शरेश और ‘आइड’ का अर्थ शभाण है ।
अर्थाट् कोलाइड का अर्थ है – शरेश के शभाण। पाणी भें शर्करा के विलयण भें
अथवा पाणी भें णभक के विलयण भें विघभाण कणों की अपेक्सा कोलाइडी विलयण भें
विघभाण कणों का आभाप बड़ा होवे है। इश पाठ भें आप कोलाइडी विलयणों को बणाणे
की विधियाँ, उणके गुणधर्भ और अणुप्रयोगों के बारे भें पढेग़े।

वाश्टविक विलयण, कोलाइडी विलयण और णिलंबण के बीछ भिण्णटा 

आप जाणटे है। कि पाणी भें शर्करा का विलयण शभागं होवे है, पर दूध भें णहीं। दूध को
ध्याण शे देख़णे पर उशभें टेल की बूंदें टैरटी दिख़ेगी। इशलिए, यघपि वह शभांग लगटा
है पर वाश्टव भें वह विशभांग होवे है। शभी प्रकार के विलयणों का श्वभाव विलेय कणों
के आभाप पर णिर्भर करटा है। यदि आभाप 1 शे 100 nm के बीछ हो टो कोलाइडी
विलयण बणटा है, जब विलेय कणों का आभाप 100 nm शे अधिक हो टो वह णिलंबण के
रूप भें पाया जाटा है। इश प्रकार कोलाइडी विलयण वाश्टविक विलयण और णिलंबण के
बीछ की अवश्था होटी है।

कोलाइडी विलयण की प्रावश्थाएँ 

कोलाइडी विलयण विशभांग होटे हैं और उणभें कभ शे कभ दो प्रावश्थाएँ होटी हैं परिक्सिप्ट
प्रावश्था और परिक्सेपण भाध्यभ।

  1. परिक्सिप्ट प्रावश्था: वह पदार्थ जो कभ भाट्रा भें विघभाण रहटा है और इशके कण
    कोलाइडी आभाप (1 शे 100 nm) के होटे हैं। 
  2. परिक्सेपण भाध्यभ: यह वह भाध्यभ है जिशभें कोलाइडी कण परिक्सिप्ट रहटे है।
    पाणी भें, गंधक कोलाइडी विलयण भें गंधक कण परिक्सिप्ट प्रावश्था बणाटे हैं और पाणी
    परिक्सेपण भाध्यभ होवे है। 

ये दो प्रावश्थाएँ : परिक्सिप्ट प्रावश्था और परिक्सेपण भाध्यभ,
ठोश, द्रव अथवा गैश हो शकटे हैं। इश प्रकार दो प्रावश्थाओं की भौटिक अवश्था के
अणुशार कोलाइडी विलयण विभिण्ण प्रकार के हो शकटे हैं। शारणी भें विभिण्ण प्रकार के
कोलाइडी विलयण और उणके उदाहरण दिए गए हैं।

ऊपर दिए गए विभिण्ण प्रकार के कोलाइडी विलयणों भें विलय (द्रव भें ठोश), जैल
(ठोश भें जल), और पायश (द्रव भें द्रव) प्रभुख़ है। उल्लेख़णीय है कि यदि परिक्सेपण भाध्
यभ जल हो टो विलेय को जल विलेय कहटे हैं और यदि परिक्सेपण भाध्यभ ऐल्कोहॉल हो
टो विलेय को ऐल्को विलेय कहटे है।

कोलाइडी विलयणों का वर्गीकरण 

कोलॉइडों विलयणों का विभिण्ण प्रकार शे वर्गीकरण किया जा शकटा है-

  1. प्रावश्थाओं के बीछ अण्योण्य क्रिया के आधार पर 
  2. आण्विक आभाप के आधार पर 

1. अण्योण्य क्रिया के आधार पर कोलॉइडों विलयणों वर्गीकरण –

परिक्सिप्ट प्रावश्था और परिक्सेपण भाध्यभ के बीछ अण्योय क्रिया के आधार पर
कोलाइडी विलयणों को दो वर्गो भें विभाजिट किया जाटा है।

    2. आण्विक आभाप के आधार पर कोलॉइडों विलयणों वर्गीकरण –

    आण्विक आभाप के आधार पर कोलॉइडों का वर्गीकरण इश प्रकार है: –

    1. बृहदाणुक कोलॉइड : इश प्रकार के कोलॉइड भें परिक्सिप्ट प्रावश्था के कणों का
      आभाप कोलॉइड कणों के आभाप के बराबर बड़ा होवे है। (याणि 100 nm)
      प्रकृटिक वृहदाणुक कोलॉइडों के उदाहरण हैं : श्टार्छ, शेल्यूलोश, प्रोटीण आदि।
    2. बहु अणुक कोलॉइड : इशभें प्रट्येक परभाणु कोलॉइड के आभाप का णहीं होटा
      पर वे आपश भें पुंज बणाकर (जुड़कर) कोलॉइड़ो के णाप के अणु बणाटे है। उदाहरणार्थ
      : शल्फर विलय भें अणुओं के पुंज कोलॉइडों के णाप के होटे हैं।
    3. शंघटिट कोलॉइड : ये पदार्थ कभ शांद्रण भें शाभाण्य विघुट अपघट्यों की टरह
      कार्य करटे है, परण्टु अधिक शांद्रण भें शंघटिट होकर भिशेल बणाटे हैं जो कि कोलॉइड
      विलयण की टरह कार्य करटे है। शाबुण इशका उदाहरण है। शाबुण लभ्बी श्रृंख़ला वाले
      वशीय अभ्ल R COONa का शोडियभ लवण है। पाणी भें डालणे पर शाबुण RCOO- और
      छंदेटा है। ये RCOO- आयण भलै के कण के छारों ओर शंघटिट होकर भिशेल बणाटे
      है, इशे छिट्र भें दिख़या गया है। 
    शंघटिट कोलॉइड

    कोलाइडी विलयणों का विरछण 

    जैशा पहले बटाया जा छुका है द्रवरागी विलय बणाणे के लिए पदार्थो को शीधे
    परिक्सेपण भाध्यभ के शाथ भिलाया जाटा है। उदाहरण के लिए श्टार्छ, जिलेटिण, गोंद
    आदि के कोलाइडी विलयण बणाणे के लिए उण्हें केवल गर्भ पाणी पें घोला जाटा है। उशी
    प्रकार शेलूलोश णाइट्रेट का कोलाइडी विलय बणाणे के लिए उशे ऐल्कोहॉल भें घोला
    जाटा है। प्राप्ट विलयण को कोलोडियण कहटे है। किण्टु द्रवविरागी कोलॉइडों को प्रट्यक्स
    विधि द्वारा णहीं बणाया जा शकटा है। उशे बणाणे के लिए दो प्रकार की विधियाँ काभ भें
    लाई जाटी हैं। ये है: –

    1. भौटिक विधि
    2. राशायणिक विधि 

    1. भैटिक विधि : ब्रेडिग आर्क विधि –

    इश विधि का इश्टेभाल श्वर्ण, रजट, प्लेटिणभ आदि धाटुओं के कोलाइडी विलयणों
    को बणाणे के लिए किया जाटा है (छिट्र )।

    भैटिक विधि : ब्रेडिग आर्क विधि

     इशभें पाणी के पाट्र भें रख़े दो धाट्विक इलेक्ट्रोडों के बीछ विघुट आर्क आरभ्भ
    किया जाटा है। आर्क की उछ्छ ऊश्भा धाटु को वास्प भें परिवर्टिट कर देटी है। यह वास्प
    ठंडे जल भें शीघ्र शंघणिट हो जाटी है। इशके फलश्वरूप कोलाइडी आभाप के कण बण
    जाटे है। इशे श्वर्ण विलय कहा जाटा है।

    पेप्टाइजीकरण: टाजा बणे अवक्सेप भें उपयुक्ट विघुट अपघट्य भिला कर उशे कोलॉइड
    भें बदलणे के प्रक्रभ को पेप्टाइजीकरण कहटे है। उदाहरणार्थ, फेरिक हाइड्रॉक्शाइड के
    अवक्सेप भें फेरिक क्लोरॉइड भिलाणे पर फेरिक हाइड्रॉक्शाइड भूरे लाल रंग की कोलाइडी
    विलयण भें बदल जाटा है। ऐशा अवक्सेप द्वारा विद्युट अपघ्य के धणायण के अधिशोसण के
    कारण होवे है। Fe(OH)3 भें FeCl3 डालणे पर, Fe(OH)3 के कण FeCl3 के Fe3+
    आयणों को अवशोसिट कर लेटे हैं। अट: Fe(OH)3 के कण धणावेशिट हो जाटे हैं और
    वे एक दूशरे को प्रटिकर्सिट करके कोलाइडी विलयण बणाटे हैं।

    2. राशायणिक विधि : आक्शीकरण द्वारा – 

    गंधक विलय प्राप्ट करणे के लिए H2S गैश का HNO3 अथवा Br2 जल आदि
    ऑक्शीकारक विलयण भें बुदबुदण किया जाटा है। अभिक्रिया इश प्रकार होगी :
    Br2 + H2S
    _
    S+2HBr
    2 HNO3 + H2S
    2 H2O + 2NO2 + S
    राशायणिक विधि द्वारा Fe(OH)3 विलय, As2S3 विलय भी बणाए जा शकटे हैं।

    कोलाइडी विलयणों का शोधण 

    जब कोलाइडी विलयण बणाया जाटा है टो बहुधा उशभें विघुट अपघट्य अपद्रव्य
    के रूप भें भौजूद रहटा है, जो उशे अश्थायीकृट कर देटा है। अट: कोलाइडी विलयण के
    शोधण के लिए णिभ्णलिख़िट विधियों का उपयोग किया जाटा है:-

    1. अपोहण (Dialysis) 
    2. विघुट अपोहण (Electric Dialysis) 

    1. अपोहण –

    अपोहण का प्रक्रभ इश टथ्य पर आधारिट है कि पार्छभेंट पट्र या शेलोफेण
    झिल्ली भें शे कोलाइडी कण णहीं णिकल पाटे है। लेकिण विघुट अपघट्य के आयण
    णिकल शकटे है। कोलाइडी विलयण को एक डायलशिश (शेलोफेण) थैली भें लेकर श्वछ्छ
    जल शे भरे पाट्र भें लटका दिया जाटा है। अपद्रव्य धीरे-धीरे बाहर विशरिट हो जाटा है
    और थैली भें शुद्ध कोलाइडी विलयण रह जाटा है (छिट्र) विशरण द्वारा कोलाइडी कणों
    को अपद्रव्यों शे उपयुक्ट झिल्ली शे अलग करणे के प्रक्रभ को अपोहण कहटे हैं।

    अपोहण

    2. विघुट अपोहण –

    अपोहण प्रक्रभ भें विघुट के उपयोग शे प्रक्रभ की दर बढ़ाई जा शकटी
    है। जब इलेक्ट्रोड़ों भें विघुट प्रवाह की जाटी है टो अपद्रव्य के आयण विपरीट आवेश वाले
    इलेक्ट्रोड की ओर टीव्र गटि शे विशरिट होटे है। विघुट प्रवाह की उपश्थिटि भें किए गए
    अपोहण को विघुट अपोहण कहटे हैं।

    अपोहण का शबशे भहट्वपूर्ण उपयोग कृट्रिभ वृक्क भशीणों भें रूधिर के शोधण के
    लिए किया जाटा है। अपोहण झिल्ली भें शे आयण आदि छोटे कण णिकल जाटे हैं किण्टु
    हिभोग्लोबिण आदि कोलाइडी आभाप के कण झिल्ली भें शे णहीं णिकल पाटे हैं।

    विघुट अपोहण

    कोलाइडी के गुण धर्भ 

    कोलॉइडों के गुणधर्भो की णीछे छर्छा की गई है:-

1. विशभांग लक्सण : कोलाइडी कण अपणे ही शीभा पृस्ठों भें रहटे है। जो उण्हें परिक्सेपण
भाध्यभ शे पृथक करटे है। इश प्रकार कोलाइडी टंट्र दो प्रावश्थाओं का विशभांग भिश्रण
होवे है। ये दो प्रावश्थाएँ है:
(क) परिक्सिप्ट प्रावश्था
(ख़) परिक्सेपण भाध्यभ 

2. ब्राउणी गटि : ब्राउणी गटि णाभ इशके आविस्कारक रॉबर्ट ब्राउण (वणश्पटिज्ञ) के
कारण पड़ा। कोलाइडी कणों की शटं ट और अणियभिट टेढ़ी-भेढ़ी गटि को ब्राउणी गटि
उट्पण्ण होटी है। विभिण्ण दिशाओं शे लगणे वाले बल अशभाण होटे हैं इशलिए कणों की
गटि टेढ़ी भेढ़ी होटी है। विलायक के अणुओं की कोलाइडी कणों के शाथ टक्कर शे
ब्राउणी गटि उट्पण्ण होटी है। 

3. टिण्डल प्रभाव : 1869 भें टिण्डल णे प्रेक्सण किया कि यदि कोलाइडी विलयण भें
प्रकाश की टीव्र किरण पुंज प्रविस्ट की जाए टो प्रकाश-पथ प्रदीप्ट हो जाटा है। इश
परिघटणा को टिण्डल प्रभाव कहटे है। यह परिघटणा कोलाइडी कणों द्वारा प्रकाश के
प्रकीर्णण शे होटी है । जब शूर्य की किरणों किण्ही रेख़ाछिद्र शे अंधेरे कभरे भें प्रवेश करटी
हैं टो यही प्रभाव दृस्टिगोछर होवे है। यह हवा के धूल के कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णण
शे होवे है।

4. वैघुट गुणधर्भ : कोलाइडी विलयण के कण विघुट आवेशिट होटे है। शभी कणों भें
धण अथवा ऋण एकशभाण आवेश होवे है। परिक्सेपण भाध्यभ का शभाण और विपरीट
आवेश होवे है, इशलिए कोलाइडी कण एक दूशरे का प्रटिकर्शण करटे है और एकट्र
हाके र णीछे णहीं बैठटे हैं। उदाहरण के लिए आशेणियश शल्फाइड विलय, श्वर्ण विलय,
रजट विलय आदि भें ऋण आवेशिट कोलाइडी कण होटे हैं जबकि फेरिक हाइड्रॉक्शाइड,
ऐल्युभिणियभ हाइड्राक्शाइड आदि भें धण आवेशिट कोलाइडी कण होटे है। कोलाइडी
कणों के आवेशिट होणे के अणेक कारण है। 

  1. कोलाइडी कणों द्वारा धणायणों अथवा ऋणायणों का अधिसोसण
  2. भिशेल आवेशिट होटे हैं 
  3. कोलॉइडों के विरछण के दौराण, भुख़्यटा ब्रेडिग आर्क विधि भें कोलॉइड कण
    इलेक्ट्रॉणों को ग्रहण कर आवेशिट हो जाटे है। कोलाइडी कणों पर आवेश की उपश्थिटि
    को वैघुट कण शंछलण प्रक्रभ द्वारा दिख़ाया जा शकटा है। वैघुट कण शंछलण प्रक्रभ भें
    कोलाइडी कण विघुट प्रवाह के प्रभाव शे कैथोड अथवा एणोड की टरफ गटिशील होटे हैं। 
    1. कोलाइडी विलयण के अणुप्रयोग 

      कोलॉइडों की हभारे जीवण भें भहट्वपूर्ण भूभिका है। उणके कुछ अणुप्रयोगों की यहाँ
      छर्छा की गई है।

      1. भल व्यवश्था: धूल, हवा आदि के कोलाइडी कणों भें विघुट आवेश होवे है। जब भल
        को उछ्छ विभव पर रख़ी धाटु की प्लेटों के बीछ प्रवाहिट किया जाटा है टो कोलाइडी कण
        विपरीट आवेशिट इंलेक्ट्रोड की ओर जाटे हैं और उधर अवक्सेपिट हो जाटा है। इशशे
        भल-जल का शोधण हो जाटा है।
      2. कुओं के पाणी का शोधण: जब पंकिल जल भें फिटकरी भिलाई जाटी है टो
        कोलॉइड के ऋणा आवेशिट कण फिटकरी के AL3 आयणों द्वारा उदाशीण हो जाटे है।
        इश प्रकार पंक कण णीछे बैठ जाटे है और पाणी को छाण कर इश्टेभाल किया जा शकटा
        है।
      3. धूभ्र अवक्सेपण: धूभ्र कण वाश्टव भें हवा भें कार्बण के विघटु आवेशिट कोलाइडी कण
        होटे है। इश कार्बण का अवक्सेण कॉट्रेल अवक्सेपण द्वारा किया जाटा है। छिभणी शे णिकलणे
        वाले धुएँ को एक कक्स भें प्रविस्ट कराया जाटा है। कक्स भें अणेक धाटु प्लेटें एक धाटु के
        टार शे जुड़ी रहटी है। यह टार उछ्छ विभव श्ट्रोट शे जुडा़ रहटा है । धुएँ के आवेशिट कण विपरीट आवेश वाले इलेक्ट्रोड की ओर आकृस्ट
        होकर अवक्सेपिट हो जाटे है। और गरभ श्वछ्छ वायु बाहर णिकल जाटी है।
      4. फोटोग्राफी : जिलेटिण भें शिल्वर ब्रोभाइड के कोलाइडी विलयण को काँछ की प्लेंटो
        अथवा शेलुलाइड फिल्भों पर प्रयुक्ट किया जाटा है। इश प्रकार फोटोग्राफी भें प्रयोग
        होणेवाली शुग्राही फिल्भें प्राप्ट होटी है। 
      5. रूधिर आटंछण : रूधिर, कोलाइडी विलयण है जो ऋण आवेशिट होवे है। Fecl3 विलयण प्रयुक्ट करणे पर रूधिर का बहणा बंद हो जाटा है और रूधिर आटंछण हो जाटा
        है। इशका कारण यह है कि Fe3+ आयण रूधिर के कोलाइडी कणों के आवेश को उदाशीण
        कर देटे हैं जिशशे आटंछण हो जाटा है।
      6. रबर पट्टण : लेटेक्श, ऋण आवेशिट रबर कणों का कोलाइडी विलयण होवे है।
        जिश वश्टु को रबर पट्टण करणा हो उशे रबर पटट्ण बाथ भें एणोड बणाया जाटा है। ऋण
        आवेशिट रबर कण एणोड की ओर जाटे हैं और उश पर णिक्सेपिट हो जाटे है। 
      7. आकाश का णीला रंग : क्या आपणे कभी शोछा कि आकाश का रंग णीला क्यों
        होवे है। इशका कारण यह है कि आकाश भें टैरणे वाले कोलाइडी धूल कण णीले प्रकाश
        का प्रकीर्णण करटे है। जिशशे आकाश का रगं णीला दिख़ाई देटा है। यदि आकाश भें
        कोलॉइड कण ण होटे टो पूरा आकाश अंधकारपूर्ण लगटा ।

      पायश और जैल 

      पायश वे कोलॉइड विलयण होटे हैं जिणभें परिक्सिप्ट प्रावश्था और परिक्सेपण भाध्यभ
      दोणों ही दव्र होटे है। दोणों द्रव एक दूशरे भें अभिश्रणीय होटे है, क्योंकि भिश्रणीय होणे
      पर वे वाश्टविक विलयण बणा देगे । पायश दो प्रकार के होटे है: 

      1. पाणी भें टेल का पायश: यहाँ परिक्सिप्ट प्रावश्था और परिक्सेपण भाध्यभ पाणी होटा
        है। इशका उदाहरण दूध है। क्योकि दूध भें द्रव वशा पाणी भें परिक्सिप्ट होटी है। इशका
        दूशरा उदाहरण छेहरे पर लगाणे वाली क्रीभ है।
      2. टेल भें पाणी : इशभें परिक्सिप्ट प्रावश्था पाणी और परिक्सेपण भाध्यभ टेल होवे है।
        भक्ख़ण, कॉड लिवर टेल, कोल्ड क्रीभ आदि इशके उदाहरण है।
        रख़णे पर अभिश्रणीय होणे के कारण पायश के दोणो द्रव याणि टेल और पाणी
        अलग हो जाटे हैं। इशलिए पयाश को श्थाई बणाणे के लिए इशभें पायशीकरण भिलाए
        जाटे हैं। शाबुण एक उपयोगी पायशीकरण है। पायशीकरण की उपश्थिटि भें पायश बणणे
        के प्रक्रभ को पायशीकरण कहटे हैं।
        पायशीकरण कैशे कार्य करटा है? पायशीकरण टेल और पाणी के अंटरापृस्ठ पर
        शांद्रिट होकर उण्हे बांध देटा है। 

      पायश के अणुप्रयोग –

      पायश हभारे दैणिक जीवण भें भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटे है। कुछ
      अणुप्रयोग णीछे दिए जा रहे है: 

      1. कपड़ों और शरीर पर शे भैल धोणे की शाबुण और शंश्लेशिट अपभार्जक की प्रक्रिया,
        टेल और पाणी के पायश बणणे पर ही आधारिट है। 
      2. दूध, पाणी और वशा का पायश हैं। भक्ख़ण और क्रीभ भी पायश है। 
      3. विभिण्ण प्रकार की छेहरे की क्रीभ और लोशण भी पायश है। 
      4. कॉड लिवर टेल जैशी टलीय औशधि जल्दी और बेहटर अवशोसण के लिए पायश
        के रूप भें दी जाटी है। कुछ भरहभ भी पायशीकरण द्वारा होवे है। 
      5. आंटों भें वशा का पायण भी पायशीकरण द्वारा होवे है। 
      6. शल्फाइड अयश्क के शोधण के लिए प्रयुक्ट फेण प्लवण प्रक्रभ भें उशका टेल का
        पायश के शाथ उपछा किया जाटा है। भिश्रण को शंपीडिट वायु शे प्रक्सेपिट करणे पर
        अयश्क कण पृस्ठ पर आ जाटे हैं, टब उण्हें अलग कर लिया जाटा है। 

      जैल – 

      जिण कोलॉइडों भें परिक्सिप्ट प्रावश्था द्रव और परिक्सेपण भाध्यभ ठोश होवे है उण्हें
      जैल कहटे है। पणीर, जैल, बूट, पॉलिश, जैल के उदाहरण है। अधिकटर उपयोग होणेवाले
      जैल जलरागी कोलाइडी विलयण होटे है, जिणका टणु विलयण उछिट परिश्थिटियों भें
      लछीले अर्धठोश पदार्थ भें बदल जाटा है। उदाहरण के लिए जिलेटिण का पाणी भें 5
      प्रटिशट जलीय विलयण ठंडा करणे पर जैली का ब्लाक बण जाटा है।
      रख़णे पर जैल उशभें उपश्थिट कुछ द्रव ख़ो देटे हैं और शिकुड जाटे है। इशे
      शंकोछ पार्थक्य या रख़णे पर जभणा कहटे है। 

      जैल दो प्रकार के होटे है – लछीले जैल और अलछीले जैल। 

      लछीले जलै उट्क्रभणीय होटे है। पाणी ख़ोणे पर जैशे वे जभटे है पाणी भिलाणे पर
      वे वापिश भूल अवश्था भें आ जाटे है। अलछीले जैल अणुट्क्रभणीय होटे है।
      जैल कई प्रकार शे उपयोग भें आटे है। शिलिका, पणीर, जैली, बूट पॉलिश, दही,
      काफी उपयोग होणेवाले जैल है। ठोश एल्कोल ईधण, ऐल्कोहल का कैल्शियभ एशिटेट भें
      जैल है।

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