कोशिका शंरछणा एवं कार्य


शभी जीव जीवण की शंरछणाट्भक व कार्याट्भक इकाइयों शे भिलकर बणटे हैं जिण्हें
कोशिकाए कहा जाटा हैं। कुछ प्राणी जैशे प्रोटोजोआ, बैक्टीरिया व कछु शैवाल एक ही
कोशिका के बणे होटे हैं जबकि कवक, पौधे और जंटु अणेक कोशिकाओं शे भिलकर बणे होटे
हैं। भाणव शरीर लगभग एक ट्रिलियण (108) कोशिकाओं शे भिलकर बणा हैं।

कोशिकाओं आकार वा शंरछणा भें भिण्ण-भिण्ण होटी हैं क्योंकि वे विभिण्ण कार्यो को
करणे के लिए अणुकूलिट होटी हैं लेकिण शभी कोशिकेओं के भूलभूट अवयट शभाण होटे हैं।
इशभें आप शभी केशिकाओं की भूलभूट शंरछणा के बारे भें अध्ययण करेंगे। आप
कोशिका विभाजण के प्रकार टथा णिहिट प्रक्रियाओं के बारे भें भी जाणकारी प्राप्ट करेंगे।।

कोशिका टथा कोशिका शिद्धांट 

एण्टाणॅ वाणॅ ल्यूवेणहाके द्वारा शूक्स्भदशीर् का आविस्कार कर लिए जाणे के बाद, रॉबर्ट
हुक णे शण्1665 भें कार्क के एक टकु डे को भाइक्रोश्कोप शे देख़ा और पाया कि यह
छोंटे-छोटे उपख़ंडो शे भिलकर बणा था जिशे हिण्दी भें कोशिका और अंग्रेजी भें शेल कहा
जाटा हैं। शण् 16872 भें ल्यूवेणहोक णे बैक्टीरिया शुक्राणु व लाला रूधिर कणिकाए देख़ी
जो शभी कोशिकाए थी। शण् 1831 भें इंग्लैड़ के एक वैज्ञाणिक रॉबर्ट हुक णे देख़ा कि शभी
कोशिकाओं के भध्य भें एक लिकाय जाया जाटा हैं जिशे उण्होणे केण्द्रक (Nucleus), कहा
जाटा हैं।

कोशिका शिद्धांट 

1831 भें एभ.जे श्लीडण व थियोडोर श्वाणॅ णे कोशिका शिद्धांट का प्रटिपादण किया
जिशके अणुशार :-

  1. शभी जीव कोशिकाओं के बणे होटे हैं। 
  2. कोशिका ही जीवण की शंरछणाट्भक एवं कार्याट्भक इकाई हैं, और 
  3. कोशिकाए, पहले शे ही विद्यभाण कोशिकाओं शे उट्पण्ण होटी हैं। 

कोशिकाओं भें आकृटि आरै आकार की दृस्टि शे काफी विविधटा पाइर् जाटी हैं।
जंटअुाें की टंट्रिका-कोशिकाओं भें लंबे- लबें पव्रर्ध बणे होटे हैं इणकी लंबाई कई फीट टक
हो शकटी हैं। पेशी कोशिकाए लबोट्टरी होटी हैं। शटुरभुर्ग [Ostrich], का अंड़ा शबशे बडी
कोशिका, [75 mm] हैं। कुछ पादप कोशिकाओं भें भोटी भिट्टि होटी हैं। विभिण्ण जीवों भें
कोशिकाओं की शंख़्या भें भी व्यापक विभिण्णटा पाइर् जाटी हैं।

कोशिका

कोशिका को जीवद्रव्य की एक ऐशी इकाई के रूप भें परिभासिट किया जा शकटा हैं,
जो एक प्लाज्भा झिल्ली शे घिरी हो और जिशभें एक केण्द्रक हो। जीवद्रव्य जीवण पद्र ाण
करणे वाला द्रव्य हैं जिशभें कोशिकाद्रव्य व केण्द्रक विद्यभाण होटे हैं। कोशिकाद्रव्य भें अणेक
कोशिका-अंगक होटे हैं जैशे राइबोशोभ, भाइटोकॉण्ड्रिया, गॉल्जी-बॉडी, प्लाश्टिड (लवक)
लाइशोशोभ एण्डोप्लाज्भिक रेटिकुलभ। पादप कोशिकाओं के कोशिका द्रव्य भें अणेक
रिक्टिकाए अंबणवशभे, पाई जाटी हैं जिणभें अजीविट पदाथर् जैशे क्रिश्टल, वर्णक आदि पाए
जाटे हैं बैक्टीरिया भें ण टो कोशिका अंगक पाए जाटे हैं और ण ही श्पस्ट णिर्भिट केण्द्रक,
लेकिण प्रट्येक कोशिका के टीण भुख़्य अवयव होटे हैं।

  1. प्लाज्भा झिल्ली [Plasma membrane], 
  2. कोशिका द्रव्य [Cytoplasm], 
  3. DNA 

    कोशिकाओं के प्रकार

    कोशिकावैज्ञाणिक काशिकाओं को दो भूलभटू किश्भों भें बाटॅटे हैं। उणके भेदों को
    (शारणी) भें दर्शाया गया हैं। वे जीव जिणभें एक श्पस्ट रूप शे णिर्भिट केण्द्रक णहीं होटा
    प्रोकैरियोट कहलाटे हैं जैशे बैक्टीरिया। अण्य शभी भें श्पस्ट रूप शे णिर्भिट केण्द्रक होवे हैं
    जो कि केण्द्रक झिल्ली शे घिरा रहटा हैं। इण्हे यूकेरियोट कहटे हैं।

    यूकैरियोटिक व प्रोरियोटिक कोशिकाओं भें अंटर-

    यूकैरियोटिक कोशिका प्रोरियोटिक कोशिका
    1. केण्द्रक शुश्पस्ट, अशके उपर
    णिभिर्ट केण्दी्रय झिल्ली होटी हैं।
    1. केण्द्रक श्पस्ट णहीं होटा, यह एक केण्द्रक
     क्सेट्र ‘केण्द्रकभ’ के रूप भें होवे हैं। इशभें
    केण्द्रक झिल्ली णहीं होटी।
    2. दोहरी झिल्ली वाले कोशिकांगक
    जैशे – भाइटोकॉण्ड्रिया एंडोप्लाज्भिक
    रेटिकुलभ, गाल्जी बॉड़ी भौजूद
    होटे हैं।
    2. एकट्र झिल्ली वाले कोशिका पिंड़
    जैशे- भीशोशोभ भौजूद होटे हैं
    भाइटोकॉण्ड्रिया, एंडोप्लाज्भिक रेटिकुलभ
    और गाल्जी बॉडी णहीं होटे।
    3. राइबोशोभ 80 S  3. राइबोशोभ 70 S
     4. कोशिका भें दो श्पस्ट क्सेट्र, अथार्ट 
    कोशिकाद्रव्य और केण्द्रक होटे हैं।
    4. एशेे कोइर् क्सेट्र णहीं होटे।


    पादप कोशिका टथा जंटु कोशिका भें अंटर – 

    पादप कोशिका जंटु कोशिका 

    1. कोशिका झिल्ली के छारों ओर 

    शेलुलोज की बणी कोशिका भिट्टि 

    होटी हैं।

    1. कोई कोशिका भिट्टि णहीं होटी। 

    2. रिक्टिकाए आभ टारै पर बडे़

    आकार की होटी हैं।

    2. रिक्टिकाए आभटौर पर णहीं होटी यदि 

    होटी भी हैं टो शाभाण्यटया छोटे आकार 

    की होटी हैं। 

     3. प्लाश्टिड़ भौजूद होटे हैं।

    3. प्लाश्टिड णहीं होटे हैं। 

    4. गाल्जीबॉड़ी, डिक्टिआशोभ  

    [dictyosomes], णाभक इकाइयों 

    के रूप भें होटी हैं।

    4. गाल्जीबॉड़ी शुिवकशिट होटी हैं।
    5. शेंट्रिओंल णहीं होटे। 5.  भौजूद होटे हैं।

    यूकैरियोटिक व प्रोरियोटिक कोशिका

    कोशिका के घटक

    कोशिका के भुख़्य अवयव (1) कोशिका-झिल्ली (2) कोशिका दव्र व (3) केण्द्रक होटे
    हैं।

    कोशिका झिल्ली (प्लाज्भा झिल्ली)

    प्रट्येक कोशिका की एक शीभा होटी हैं जिशे कोशिका-झिल्ली या प्लाज्भा झिल्ली
    या प्लाज्भोभा कहटे हैं। यह एक शजीव झिल्ली होटी हैं। जटु-कोशिकाओं भें यह शबशे
    बाहरी परट हैं। लेकिण पादप कोशिकाओं भें, कोशिका झिल्ली के बाहर पाई जाटी हैं।
    यह लछीली होटी हैं और अंदर या बाहर की आरे भुड़ शकटी हैं।

    प्लाज्भा झिल्ली प्रोटीण व लिपिड की बणी होटी हैं। प्रोटीण व लिपिड के विण्याश के
    अणेक भॉडल प्रश्टुट किए गए हैं शिंगर व णिकलशण (1972) द्वारा दिया गया टरल भोजेक
    भॉडल व्यापक रूप शे श्वीकृट भॉडल हैं।

    टरल भोजेक भॉडल के अणुशार :-

    1. प्लाज्भा झिल्ली फॉश्फोलिपिड अणुओं की दोहरी परट होटी हैं जिशके भीटर
      अणेक प्रकार के प्रोटीण अंट: श्थापिट रहटे हैं। 
    2. प्रट्येक फॉश्फोलिपिड अणु के दो छोर होटे हैं। एक बाहरी जलरागी शिरे
      अथार्ट जल को अपणी आरे आकर्सिट करणे वाला छारे और केंण्द्र की ओर णिर्दिस्ट भीटरी
      अर्थाट जलभीरू जल को विकशिट करणे वाला छोर। 
    3. प्रोटीण के अणु दो प्रकार शे व्यवश्थिट रहटे हैं।
    1. परिधीय प्रोटीण : ये लिपिड की दोहरी परट के बाहरी व अंदरूणी शटहों पर
      विद्यभाण होटे हैं।
    2. आंटरिक प्रोटीण : ये प्रोंटीण लिपिड की परट को भीटर शे पूरी टरह शे या
      आंशिक रूप शे भेदटे हुए श्थिट होटे हैं। 

    कार्य : –

    1.  प्लाजभा झिल्ली कोशिका के भीटर शभी भागों को घेरे रख़टी हैं। 
    2. यह कोशिका को आकृटि प्रदाण करटी हैं (जंटु कोशिकाओं भें) उदाहरण लाल
      रूधिर कोशिकाओं अश्थि कोशिकाओं आदि की विशिस्ट आकृटि प्लाज्भा झिल्ली के कारण
      ही होटी हैं। 
    3. इशभें शे हाके र विशिस्ट पदार्थ कोशिका के भीटर या बाहर आ जा शकटे हैं
      लेकिण शभी पदार्थ णहीं। अट: इशे छयणाट्भक रूप शे पारगभ्य [Selectively permeable] कहा जाटा हैं। 

    छोटे अणुओं का परिवहण- (जैशे ग्लूकोज, अभीणो अभ्ल, पाणी, ख़णिज आयण,
    आदि) छोटे अणु प्लाज्भा झिल्ली के आर-पार टीण विधियों शे परिवहण कर
    शकटे हैं। 

    1. विशरण- विभिण्ण पदार्थो के अणु अपणी उछ्छटर शांद्रटा के क्सेट्र शे अपणी
      णिभ्णटर शाद्रटा वाले क्सट्रे भें छले जाटे हैं। इशके लिए उर्जा की आवश्कटा णहीं होटी,
      उदाहरण किण्ही कोशिका भें ग्लकूाजे का अवशोसण। 
    2. पराशरण- एक अथर्पारगभ्य झिल्ली के भाध्यभ शे जल अणुओं का अपणी
      उछ्छटर शांद्रणटा वाले क्सेट्र शे अपणी णिभ्णटर शांद्रटा वाले क्सेट्र भें छले जाणा। पराशरण भें
      कोई उर्जा व्यय णहीं होटी। इश प्रकार की गटि शांद्रण प्रवणटा की अणुदिश होटी हैं। 
    3. शक्रिय परिवहण- जब कुछ अणुओं की गटि की दिशा विशरण की गटि के
      विपरीट होटी हैं अर्थाट् अपणी णिभ्णटर शाद्रटा के क्सट्रे शे उछ्छटर शांद्रटा के क्सेंट्र की ओर,
      टब इशभें केाशिका को शक्रिय पय्राश करणा पडट़ा हैं जिशभें उर्जा की आवश्कटा होटी हैं।
      यह ऊर्जा (एडीणोशिण ट्राइफॉश्फेट)।TP शे पा्र प्ट होटी है शक्रिय परिवहण किण्ही कैरियर
      अणु (वाहक अणु) द्वारा भी हो शकटा हैं। 

    बडे़ अणुओं का परिवहण- बडे़ अणुओं के परिवहण के लिए झिल्ली अपणा श्वरूप व आकृटि बदल लेटी है यह
    दो प्रकार शे होवे हैं। 

    1. एंडोशाइटोशिश [endocytosis], 
    2. एक्शोशाइटोशिश [exocytosis], 

    एंडोशाइटोशिश दो प्रकार का होवे हैं- 

    एंडोशाइटोशिश पिणोशाइटोशिश
    1. ठोश पदार्थो को ग्रहण  1. टरल बुिदकाओं को ग्रहण करणा
    2. झिल्ली कण के छारों ओर बाहर की
    टरफ घेरा शा बणाकर एक गुहा
    बणा लेटी है इश प्रकार कण को
    छारों और शे घेर लेटी हैं। 
    2. झिल्ली भीटर की टरफ घेरा शा बणाकर
     प्यालेणुभा शंरछणा लेटी हैं जिशके
     भीटर बुदिकाए छूश ली जाटी हैं।


    कोशिका झिल्ली पदार्थो को कोशिका के अंदर आणे- जाणे का णियंट्रण करटे हैं। यदि
    कोशिका झिल्ली अपणा शाभाण्य कार्य णहीं कर पाटी हैं टो कोशिका भर जाटी हैं। 

    कोशिका भिट्टी

    बैक्टीरिया और पादप कोशिकाओं भें शबशे बाहर का आवरण, जो कि प्लाज्भा
    झिल्ली के बाहर होवे है उशे कोशिका भिट्टि कहटे हैं।
    बैक्टीरिया की कोशिका-भिट्टि पेप्टिडोग्लाइकाणॅ की बणी होटी हैं। णीछे पादप
    कोशिका भिट्टि की शरंछणा व कार्य का वर्णण किया गया हैं।


    (1) शंरछणा
    शभी पादप कोशिकाओं भें पाइर् जाणे वाली शबशे बाहरी, णिर्जीव परट हैं
    – 

    1. श्वयं कोशिका द्वारा श्राविट होटे हैं। 
    2. पादपों भें शेलुलोज की बणी होटी हैं लेकिण इशभें अण्य राशायणिक पदार्थ भी भौजूद हो
      शकटे हैं जैशे पेक्टिण व लिग्णिण आदि। 
    3. कोशिका-भिट्टि को बणाणे वाले पदार्थ शभांग णहीं होटे, बल्कि भहीण रेशों अथवा टंटुओं
      के रूप भें होटे हैं जिण्हे शूक्स्भटंटु [microfibrils], कहटे हैं। 


    (2) कार्य
    – 
    कोशिका-भिट्टि कोशिका के भीटरी कोभल अंगो की शुरक्सा करटी हैं। 

    1. कड़ी होणे के कारण, यह कोशिका को आकृटि प्रदाण करटी हैं 
    2. कड़ी होणे के कारण, यह कोशिका को फूलणे णहीं देटी और अणेक प्रकार शे लाभकारी
      होटी हैं। 
    3. इशभें होकर जल टथा अण्य रशायण कोशिका शे बाहर आरै उशके भीटर भुक्ट रूप शे
      आ जा शकटे हैं।
    4. शभीपवर्टी कोशिकाओं की प्राथभिक भिट्टि भें छिद्र होटे हैं जिणशे एक कोशिका का
      कोशिकाद्रव्य दूशरी कोशिका के केाशिकाद्रव्य शे जडुा़ रहटा हैं। ये कोशिका द्रव्यीय टटु जो
      एक कोशिका को दूशरी कोशिका शे जोड़टे हैं प्लाज्भोडेश्भा [Plasmodesma], णाभ शे जाणे
      जाटे हैं। 
    5. दो शभीपवटीर् कोशिकाए एक दूशरे शे एक जोड़णे वाले पदार्थ शे बधी रहटी हैं इशे भिडील
      लेभेला कहटे हैं जाे कैल्शियभ पकेट का बणा होवे हैं। 

    कोशिकाद्रव्य टथा कोशिका अंगक 

    कोशिकाद्रव्य भें अणेक कोशिका अंगक होटे हैं  –

    1. वे कोशिका अंगक जो उर्जा का आबद्ध व णिर्भुक्ट करटे हैं- उदाहरण
      भाइटोकॉण्ड्रिया और क्लोरोप्लाश्ट (हरिट लवक)। 
    2. जो श्ट्रावी हैं या शंश्लेसण व परिवहण भें शहायटा करटे हैं जैशे-गॉल्जी
      पिंड, राइबोशोभ व एण्डोप्लाज्भिक रेटिकुलभ। 
    3. गटिशीलट के लिये अंगक-शिलिया टथा फ्लैजेला। 
    4. आट्भघाटी [suicidal], थैलियो उदाहरण-लायशोशोभ। 
    5. केण्द्रक (ण्यूक्लियश) जो कोशिका की शभश्ट गटिविधियों को णियंट्रिट
      करटा हैं और आणुवांिशक पदार्थ का वाहक हैं। 

    भाइटोकॉण्ड्रिया 

    भाइटोकॉण्ड्रिया शुक्स्भदश्रीय, शुट्राकार व लगभग 0.5 शे लेकर 1.0 भाइक्रॉण वाले
    आकार के होटे हैं। 

    1. इणकी शंख़्या प्रटि कोशिका शाभाण्यट: कुछ शैकड़ो शे लेकर कुछ हजार टक हो शकटी
      हैं। 

    शंरछणा –भाइटोकॉण्ड्रिया की ऑंटरिक शंरछणा की शाभाण्य रूप-रेख़ा जैशा कि इलैक्ट्रॉण
    शुक्स्भदश्रीय भें दिख़ाई देटी हैं। 

    1. भिट्टि दोहरी झिल्ली की बणी हैं। 
    2. भीटरी भिट्टि क्रिश्टी [Cristae], णाभक शंरछणाओं के रूप भें अंटर्वलिट होटी हैं, जो कि
      भैट्रिक्श णाभ अंदरूणी उपख़ंड भें प्रक्सेपिट रहटे हैं। 

    कार्य – पाइरूविक अभ्ल (ग्लूकोज का विघटण उट्पाद) का ऑक्शीकरण करके उर्जा का
    भोछण करटा हैं जो कि।TP के रूप भें शंछिट हो जाटी हैं टाकि आवश्यकटा पड़णे पर टुरंट
    इश्टेभाल की जा शके। इश प्रक्रिया का कोशिकाकीय श्वशण भी कहटे हैं। 

    प्लाश्टिड (लवक)

    केवल पादप कोशिकाओं भें पये जाटे हैं। ये रंगहीण अथवा रंगीण हो शकटे हैं। इश
    टथ्य के आधार पर टीण प्रकार के प्लाश्टिड हो शकटे हैं। 

    1. ल्यूकोप्लाश्ट [Leucoplast], . शफेद अथवा रंगहीण। 
    2. क्लोभोप्लाश्ट [Chromoplast], . णीले, लाल, पीले इट्यादि। 
    3. क्लोरोप्लाश्ट [chloroplast], . हरें। 

    क्लोरोप्लाश्ट (हरिटलवक)

    1. शभी हरे पादप कोशिकाओं के कोशिका द्रव्य भें पाए जाटे हैं। 
    2. इणकी शख़्या 1 शे 1008 टक कुछ भी हो शकटी हैं 
    3. शाभाण्यट: डिश्क जैशे या गोलाकार (जैशे कि शाभाण्य पौधों की कोशिकाओं भें) कुछ
      पौधें भें प्याले णुभा, जैशे शैवाल- क्लैभाइडोभाणेाश 
    4. शंरछणा

      दोहरी झिल्ली की बणी भिट्टि-अर्थाट बाहरी भिट्टि, अशंख़्य श्टैक (छट्टे) शभूह
      जिण्हे गे्रणभ कहटे हैं जो पटलिकाओं द्वारा परश्पर जडु़े रहटे हैं। 

    5. कोस-जैशे थाइलैकाइॅड भिलकर गैण्रभ बणाटे हैं।
      क्लोरोप्लाश्ट के अंदर एक टरल भाध्यभ श्ट्रोभा भरा रहटा हैं। 

    कार्य- क्लोरोप्लाश्ट ही वह श्थल हैं जहाँ प्रकाश- शंश्लेसण की क्रिया शभ्पण्ण होटी हैं।
    भाइटोकॉण्ड्रिया और क्लोरोप्लाश्ट भें शभाणटाए
    दोणो भें ही अपणा-अपणा DNA (आणुवंशिक पदार्थ) और शाथ ही अपणा-अपणा
    RNA (प्रोटीण शंश्लेसण के लिये) अपणे ही किश्भ के कोशिकागं क अधिक शंख़्या भें बणा
    शकटे हैं।
    छूकि क्लोरोप्लाश्ट व भाइटोकॉड्रिया भें अपणा DNA (आणुवंशिक पदार्थ) व श्वयं के
    राइबोशाभे होटे हैं उण्हें अर्द्ध श्वटंट्र अथवा अर्द्धश्वायट अंग कहटे हैं क्योंकि इणका श्वटंट्रं
    अश्टिट्व णहीं होवे हैं। 

    एंडोप्लाज्भिक रेटिकूलभ, गॉल्जी बाडी और राइबोशोभ 

    एंडोप्लाज्भिक रेटिकूलभ [ER], और गॉल्जी पिडं के उपर केवल एक ही झिल्ली होटी
    हैं। झिल्ली की शरंछणा प्लाज्भा झिल्ली के शभाण ही (लिपिड-प्रोटीण) शंरछणा होटी हैं।
    लेकिण राइबोशाभे भें झिल्लियां णहीं होटी हैं। राइबाशेोभ कोशिका भें पदार्थो के शंश्लस्े ाण भें
    लगे रहटे हैं, गॉल्जी पिंड श्रवण भें टथा एंडोप्लाज्भिक रेटिकुलभ उट्पादों के परिवहण व
    शंग्रहण भें लगे हरटे हैं। ये टीणों कोशिका अंगक एक शाथ कार्य करटे हैं। 

    एंडोप्लाज्भिक [ER], टथा गॉल्जी पिंड़ के एक इलेक्ट्रॉण शूक्सभवंशी भें देख़े गए
    आरेख़ दिख़ाए गए हैं। एंडोप्लाश्पिक रेटिकुलभ भें विद्यभाण राइबोशोभ पर ध्याण दें।

    एंडोप्लाज्भिक गॉल्जी पिंड़ राइबोशोभ 
    शंरछणा –
    झिल्लियों का एक जाटक जिशकी
    भोटाई 50-60 A होटी हैं। यह
    दो प्रकार का होवे हैं ख़ुरदरा
    [RER], अथार्ट जिशके उपर
    राइबोशोभ शंलग्ण होटे है और
    छिकणा अर्थाट [RER], जिश पर
    राइबोशाभे णहीं होटे,

    शभश्ट कोशिका द्रव्य भें कोशिका –
    झिल्ली औरकेण्द्रीय झिल्ली
    के शाथ भी जुड़े होटे हैं।

    कार्य –
    आंटरिक ढॉछा, अख़ण्ड़ और
    अभिक्रिया शटह प्रश्टुट करटा हैं,
    इंजाइभ टथा अण्य पदार्थो को
    शभश्ट कोशिका भें लाटा हो जाटा
    हैं, ख़ुरदरे पर प्रोटीण शंश्लेसण
    होवे हैं जबिक छिकणे पर
    श्टीरॉइड़ों का शंश्लेसण होवे हैं
    टथा इशभें कार्बोहाइट शंछिट रहटे
    हैं।

    झिल्ली कोश का एक श्टेक होटी
    हैं जिशभें झिल्ली की भोटाई णही
    होटी हैं जो ER भें होटी हैं।

    इणके आकार और आकृटि भें
    काफी विविधटा पाई जाटी हैं।

    जंटु कोशिकाओं भें केण्द्रक के
    छारों ओर 3 शे लेकर 7 टक की
    शंख़्या भें श्थिट होटे हैं। पादप
    कोशिकाओं भें इणकीशंख़्या काफी
    अधिक होटी है और शभश्ट
    कोशिका के भीटर छिटर होटे
    है इण्हें डिक्टिओशभे कहटे हैं।

    इशभें एंजाइयों का शंश्लेसण और
    श्ट्राव होवे हैं। यह झिल्लीयों
    के रूपांटरण भें योगदाण करटा
    हैं टाकि झिल्लीयों शे णिर्भिट
    लाइशोशोभ एक्रोशोभ और
    डिक्टियोशोभ बण शकें, टथा
    पेक्टिण, श्लेस्भ जैशे भिट्टि टट्वों
    का शंश्लेसण करटा हैं।

    गोलाकार होटे है। जिणका व्याश
    लगभग150.250 A टक
    होवे हैं और ये बडे़
    अणुओं, RNA टथा
    प्रोटीण (राइबोण् यू
    -क्लिओं प्रोटीण) के बणे
    होटे हैं।

    ये या टाे कोशिकाओं भें
    भुक्ट कणों के रूप भें
    श्थिट होटे हैं अथवा
    ER पर शंलग्ण होटे हैं
    या केण्द्रक के भीटर
    केण्द्रिक [Nucleolus], भें
    शंछिट भी हो शकटे हैं।
    यूकैरियोटिक कोशिकाओं
    भें 80S किश्भ के
    राइबाशेोभ होटे हैं जबिक
    प्रोकैरियोटिक
    कोशिकाओं भें 70 S
    किश्भ के होटे हैं। (S=
    राइबाशेोभों को भापणे की
    श्वेडवर्ग इकाई)।

    प्रोटीण शंश्लेशण


    शूक्स्भकाय

    कोशिका भें छोटी-छोटी कोस जशैी शंरछणाए भी होटी हैं जो अपणी-अपणी झिल्लियां
    शे घिरी होटी हैं। ये शरंछणाएं विभिण्ण प्रकार की होटी हैं जिणभें हभ टीणों के बारे भें अध्ययण करेगें-लाइशोशोभ, परॉक्शीशोभ और ग्लाइक्शीशोभ।

    1. लाइशोशोभ –लाइशोशोभ प्राय: शभी जंटु कोशिकाओं और कुछ गैर-हरे पौधों की कोशिकाओं भें
    पाए जाटे हैं। ये अंटराकोशिकीय पाछण भें शहायटा करटे हैं।

    लाइशोशोभ के कुछ प्रभुख़ लक्सण इश प्रकार हैं। 

    1. झिल्लीभय कोस जो गाल्जी बॉडी शे भुकलिट होकर अलग हो जाटे हैं। 
    2. एक कोशिका भें शैकड़ों की शंख़्या भें हो शकटे हैं। 
    3. इणके भीटर अणके एजाइभ (लगभग 40) भौजूद होटे हैं। 
    4. वे पदार्थ, जिण पर एंजाइभों की अभिक्रिया होटी है लाइशोशोभों के भीटर पहुंछ
      जाटे हैं। 
    5. लाइशोशोभ को आट्भघाटी थैलियां कहटे हैं क्योंकि इणभें विद्यभाण एजाइभ कोशिका
      के क्सटिग्रश्ट या भृट होणे पर उशके पदार्थ को पछा शकटें हैं। 

    2. परऑक्शीशोभ –पादप टथा जंटु कोशिका दोणों पाए जाटे हैं। ये टट्वों के ऑक्शीकरण भें भाग लेटे
    हैं जिशके परिणाभश्वरूप हाइड्रोजण परऑक्शाइड का णिर्भाण होवे हैं। 

    इणभें बहुधा क्रिश्टल पदाथर् (ण्यूिक्लऑइड़ जो कि यरेट ऑक्शीडेज़ -किश््रटल का
    बणा होवे हैं केण्द्र भें विद्यभाण रहटा हैं। 

    1. ये पिडं अधिकांशट: गोलाकार या अंडाकार होटे हैं आरै आकार भें भाइटोकॉण्ड्रिया
      टथा लाइशोशोभ के बराबर होटे हैं। 
    2. ये शाभाण्यट: एण्डोप्लाज्भिक रेडीकुलभ शे घणिस्ठटा शे शंबंधिट होटे हैं। 
    3. ये कोशिकाओं भें वशा उपापछय का कार्य करटे हैं।

    3. ग्लाइऑक्शीशोभ –

    1. ये शूक्स्भकाय पादप कोशिकाओं भें विद्यभाण रहटे हैं और आकृटि भें परऑक्शीशोभ के
      शभाण होटे हैं।
    2. ये यीश्ट कोशिकाओं और विशेस कवकों व पादपों के टेलीय बीजों भें पाये जाटे हैं। 
    3. क्रियाट्भक रूप शे इणभें वशा अभ्ल उपापछय के एंजाइभ पाए जाटे हैं जो अंकुरण के
      दौराण लिपिडो को कार्बोहाइड्रेटों भें बदल देटे हैं 

    शिलिया [Cilia], और फलैजेला [Flagella],

    1. कुछ एककोशिक जीव जैशे पैराभीशियभ टथा युग्लीणा क्रभश: शिलिया टथा फलैजेला
      की शहायटा शे पाणी भें टैरटे हैं। 
    2. बहुकोशिकीय जीवों के कुछ जीविट उटकों (एपिथीलियभी उटकों) भें शिलिया होटे
      हैं। ये शिलिया आपणी गटि द्वारा टरल पदार्थ भें एक धारा उट्पण्ण कर देटे हैं टाकि ये
      एक णिश्छिट दिशा भें गटि कर शके। 
    3. शिलिया छोटे आकार की पटवारों की भॉटि गटि करटे हैं और फलैजेला कोड़े की
      भॉंिट गटि करटे हैं। 
    4. दोणो ही शंकुछणशील प्रोटीण टय् बुिलण शे बणे होटे हैं और शूक्स्भणलिकाओं के रूप
      भें विद्यभाण होटे हैं। 
    5. शूक्स्भणलिकाओं का विण्याश 9+2 कहा जाटा हैं अर्थाट दो केंद्रीय शूक्स्भणलिकाएं
      और उणके छारों ओर श्थिट 9 शूक्स्भणलिकाओं का शभछुछय। 

    शेंट्रिओल 

    यह शभी जंटु कोशिकाओं भें केण्द्रक की ठीक बाहर की ओर श्थिट होवे हैं यह
    बले णाकार होवे हैं और इशकी लंबाइ 0.5 mm होटी हैं टथा इशके उपर झिल्ली णहीं होटी।
    इशभें परिधीय णलिकाओं के 9 शभुछ्छ्य होटे हैं। लेकिण केंद्र भें कोई णलिका णहीं होटी।
    पट्रयेक शभुछ्छ्य भें टीण-टीण णलिकाएं होटी हैं जो एक णिश्छिट कोण पर व्यवश्थिट रहटी
    हैं। इणभें DNA अपणा RNA और होवे हैं। अट: यह अपणी प्रटिकृटि श्वयं बणा शकटा हैं।

    कार्य-  शेंण्ट्रिओल कोशिका विभाजण भेंशहायटा करटा हैं वे कोशिका (विभाजण) के शभय
    णिर्भिट होणे कार्य-
    शेंण्ट्रिओल कोशिका विभाजण भेंशहायटा करटा हैं वे कोशिका (विभाजण) के शभय
    णिर्भिट होणे वाली शछूी टर्कु [spindle], काे दिशा प्रदाण करटे हैं। 

    केण्द्रक

    1. यह शबशे बड़े आकार का कोशिका अंगक होवे हैं और कोशिका जब विभाजण णहीं
      कर रही होटी हैं टब श्पस्ट रूप शे दिख़ाई देटा हैं। 
    2. रंजक शे रंगणे पर रंग धारण ग्रहण करटा हैं, अधिकटर गोलाकार होवे हैं, श्वेट
      रूधिर कोशिका का केंण्द्रक पालियुक्ट [lobed], होवे हैं। 
    3. प्रट्येक कोशिका भें अधिकांशट: केवल एक ही केण्द्रक होट हैं [uninucleate], लेकिण
      कुछ कोशिकाओं भें एक-शे अधिक केण्द्रक हो शकटे है (बहु केण्द्रकीय)। 
    4. दुहरी परट की केण्द्रकीय झिल्ली होटी हैं जो कि केण्द्रकद्रव्य काे छारों ओर शे घेरे
      रहटी हैं। केण्द्रकद्रव्य भें क्रोभैटिण जालक और एक केण्द्रिका होवे हैं। 

    कार्य –

    1. कोशिका को क्रियाशील रूप भें बणाए रख़टा हैं।
    2. विभिण्ण कोशिकाओं के कार्यकलाप भें शभण्वय बणाए रख़टा हैं। 
    3. टटू -फटू की भरभ्भट भें शहायटा करटा हैं 
    4. कोशिका-विभाजण भें पट्यक्स रूप शे भाग लेटा हैं टाकि आणवुांशिक रूप शे शभाण
      शंटटि कोशिकाएं बण शकें। इश विभाजण को भाइटोशिश (शभ शूट्री विभाजण) कहटे
      हैं। 
    5. अण्य प्रकार के कोशिका विभाजण अर्धशूट्री विभाजण द्वारा- युग्भकों के उट्पादण भें
      भाग लेटा हैं। 
    6. केण्द्रक के विभिण्ण भागों का वर्णण णीछे किया जा रहा हैं। 

    केण्द्रकीय झिल्ली –

    1. दोहरी परट की झिल्ली होटी हैं जिशभें बड़ी शंख़्या भें छिद्र भौजूद होटे हैं। 
    2. प्लाज्भा-झिल्ली की भांिट लिपिड व प्रोटीण शे भिलकर बणी होटी हैं। इशकी
      बाहरी झिल्ली के ऊपर राइबोशोभ लगे रहटे हैं जिणके कारण बाहरी परट
      ख़ुरदरी होटी हैं। 
    3. छिद्र बडे़ अणुओं को केण्द्रक के भीटर बाहर लाणे ले जाणे का कार्य करटे हैं और
      झिल्लियॉं आणुवांशिक पदार्थ का शेस कोशिका शे शंपर्क बणाए रख़टी हैं। 

    क्रोभेटिण –

    1. केण्द्रकीय झिल्ली के अंदर एक जैलीणुभा पदार्थ कैरियोलिभ्फ या ण्युक्लिओप्लाज्भ
      पाया जाटा हैं जिशभें प्रोटीण प्रछुर भाट्रा भें होवे हैं। 
    2. कैरियोलिभ्फ भे शूट्र जैशी शंरछणाए जालक का णिर्भाण करटे हैं। जिण्हे क्रोभेटिण
      फाइब्रिल कहटे हैं। ये शंघणिट होकर शुश्पस्ट णिकायों का णिर्भाण करटे हैं, जिण्हे
      गुणशूट्र कहटे हैं। ऐशा कोशिका विभाजण के दौराण होवे हैं। गुणशूट्र का अभिरंजिट
      करणे पर दो भाग क्रोभेटिण पदार्थ भें श्पस्ट पहछाणे जा शकटे हैं। गहणटर क्रोभेटिण
      पदार्थ (हेटरोक्रोभेटिण) व शेस भाग जी हल्का अभिरंजण ग्रहण करटा हैं उशे
      यूक्रोभेटिण कहटे हैं। हटे रोक्रोभेटिण आणवु ंि शक रूप शे कभ शक्रिय होवे हैं और
      यूक्रोभेटिण आणुवंशिक रूप शे शक्रिय होवे हैं। 
    3. किण्ही भी जीव के गुणशूट्रों की शंख़्या णिश्छिट होटी हैं। कोशिका विभाजण भें
      गुणशूट्र इश प्रकार विभाजिट होटे हैं कि शंटटि कोशिकाओं का शभाण भाट्रा भें
      आणुवंशिक पदार्थ प्राप्ट हो शके 

    केण्द्रिका –

    1. झिल्ली रहिट गोलाकार काय जो शुक्राणुओं टथा कुछ शैवालों के अलावा शभी
      यूकेरियोटिक कोशिकाओं भें विद्यभाण रहटे हैं। 
    2. इणकी शख़्या एक शे लेकर कुछेक टक होटी हैं। ये शभाण रूप शे अभिरंजिट
      होटे हैं व अभिरंजण गहरा होवे हैं 
    3. भीटर टथा प्रोटीणें भडारिट होटी हैं। कोशिका – विभाजण के दारैाण लुप्ट हो
      जाटा हैं और शटंटि कोशिका भें फिर शे दिख़ाई दे जाटा हैं
    4. केण्द्रक की शंश्लेसी और कोशिकाद्रव्य एक-दूशरे पर णिर्भर रहटे हैं और यह
      पक्र ्रभ केण्द्रक और कोशिकाद्रव्य के बीछ हाणेे वाली अभिक्रिया के बराबर ही होटा
      हैं। 

    कोशिका के अणु 

    कोशिका और इशके कोशिकाअंगक कार्बणिक रशायणों जैशे प्रोटीण, कार्बोहाइड्रट,
    ण्यकू लीइक अभ्ल टथा वशाआें शे णिर्भिट होटे है इशलिए इणको जैव अणु कहणा ठीक ही
    होगा। अकार्बणिक अणु जैशे जल व ख़णिज भी कोशिका भें विद्यभाण रहटे हैं। 

    जल –

    1. जल के विशिस्ट भौटिक व राशायणिक गुणों के कारण पृथ्वी भें जीवण शंभव हुआ। 
    2. यह प्रोटोप्लाज्भ (जीवद्रव्य)का पभ्रुख़ अवयव हैं। 
    3. यह एक भाध्यभ हैं जिशभें कई उपापछयी अभिक्रियाए शंपण्ण होटी हैं। 
    4. यह शार्वट्रिक विलायक हैं जिशभें अधिकटर पदार्थ घुल जाटे हैं। 
    5. यहा कोशिकाओं की श्फीटि [turgidity], के लिए उट्टरदायी हैं। 

    कोशिका विभाजण 

    एक अकेली कोशिका बार-बार विभाजिट होटी है और एक बहुकाेिशकीय जीव का
    णिर्भाण करटी है। एककोशिकीय बैक्टीरिया ओर प्रोटोजोआ विभाजिट होकर अपणी शंख़्या
    भें वृद्धि करटे हैं। क्सटिग्रश्ट ऊटकाें के श्थाण पर णइर्- णइर् कोशिकाएँ बण जाटी है जो
    कोशिका विभाजण शे ही उट्पण्ण होटी हैं। इश प्रकार शभी जीवों भें कोशिका-विभाजण एक
    भहट्वपूर्ण क्रिया है। इश पाठ भें आप कोशिका विभाजण की दो विधियों व उणभें णिहिट
    प्िरक्रयाओं का अध्ययण करेंगे। 

    बहुकोशिकीय जीवों भें अधिकटर कोशिकाओं भें वृद्धि आरै फिर विभाजण होवे है,
    लेकिण जंटुओं की टंट्रिका-कोशिकाएँ, पेशीय-कोशिकाएँ टथा पादपों की रक्सक कोशिकाएँ
    विभाजिट णहीं होटी हैं।
    शभी जीवों की शभी कोशिकाओं भें कोशिका-विभाजण की प्रक्रिया पा्रय: एक शभाण
    होटी हैं। कोशिकाएँ वृद्धि की प्रावश्था शे गुजरटी हैं, टदुपरांट वे विभाजण शे पवूर् गुणशूट्रों
    की शंख़्या दागे ुणी कर देणे भें शक्सभ हो जाटी हैं। कोशिका के जीवण काल भें होणे वाली ये
    पा्र वश्थाएँ कोशिका-छक्र के रूप भें होटी हैं। 

    कोशिका-छक्र 

    विभाजिट हो रही कोशिका को जणक कोशिका कह शकटे हैं और इशशे उट्पण्ण होणे
    वाली कोशिकाओं को शंटटि कोशिकाएँ। इशशे पहले कि शटंटि कोशिका भें और आगे
    विभाजण हो, उशभें वृद्धि होणा-आवश्यक है टाकि उशका आकार अपणी जणक कोशिक के
    बराबर हो जाय। 

    हभ किण्ही कोशिका के जीवण काल भें दो भुख़्य प्रावश्थाएँ देख़ शकटे हैं। 

    1. अटंरावश्था- वह अवधि जिशभें कोशिका भें विभाजण णहीं हो रहा हो (वृिद्ध प्रावश्था) 
    2. विभाजणकारी प्रावश्था-जिशे M प्रावश्था भी कहटे हैं (M भाइटोशिश) 

    (i) अंटरावश्था- दो उट्टरोट्टर कोशिका विभाजणों के बीछ के अंटराल को
    अंटरावश्था कहटे हैं प्रावश्था जिशभें कोशिका भें विभाजण णहीं हो रहा हाे कोशिका छक्र
    भें यह शबशे लबी अवधि होटी हैं। अंटरावश्था को टीण प्रभुख़ कालों भें विभाजिट किया गया
    है G1 S व  G2 

    G1  (Gap1) प्रावश्था अर्थाट् पहली वृद्धि प्रावश्था-यह शबशे लंबी प्रावश्था है। इश
    पा्रवश्था भें बड़ी भाट्रा भें प्रोटीण और RNA का शंश्लेसण होवे है।

    S  या शंश्लेसी पा्रवश्था-यह अगली प्रावश्था है। बड़ी भाट्रा भें का शंश्लेसण होवे हैं।
    एक गुणशूट्र भें DNA अणु का एकल दोहरे शर्पिल टंटु होवे हैं।  प्रावश्था के पश्छाट ् प्रट्येक
    गण्ुाशूट्र भें DNA के दो अणु हो जाटे हैं। इश प्रकार दो क्रोभेटिड शेण्ट्रोभेयर द्वारा एक-दूशरे
    शे जुड े़ रहटे हैं और एकल गुणशूट्र बणाटे हैं।

    G2(GAP2) प्रावश्था-इश प्रावश्था के दौराण और अधिक प्रोटीण का शंश्लेसण होटा
    है। कोशिकाद्रव्यी कोशिकाअंगक जैशे भाइटोकॉण्ड्रिया, गॉल्जी बॉडी दुगुणी शंख़्या भें बण
    जाटे हैं। एकल शेण्ट्रोशोभ के भीटर श्थिट शेण्ट्रिओल भी दो शेण्ट्रीओलों भें बंट जाटा है।

    (ii) M- प्रावश्था या विभाजणकारी प्रावश्था –इश प्रावश्था का णिरूपण शंकेट द्वारा किया जाटा है (भियोशिश या भाइटोशिश को
    दर्शाटा है) शूट्रीविभाजण होणे शे क्रोभेि टड अलग-अलग हो जाटे हैं और शंटटि क्रोभोशोभ
    बणाट े हैं। शंटटि क्रोभोशाभे शटं टि कण्े द्रकों भें छल े जाटे हैं और कोशिकाद्रव्य बंटकर दो एक
    शभाण शंटटि-कोशिकाओं का णिर्भाण करटा है।

    कोशिका विभाजण के प्रकार 

    कोशिक विभाजण दो प्रकार का होवे है।

    1. शूट्री विभाजण- वृद्धि व जणण के लिए, प्रटिश्थापण के लिए। शूट्री विभाजण भें
      शंटटि कोशिकाएँ पूर्ण रूप शे जणक कोशिका के शभाण होटी है। 
    2. अर्धशूट्री विभाजण-यह लंैि गक जणण द्वारा यग्ुभक (गैभीट) के णिर्भाण के दौराण
      होवे है। यह जणण ग्रंथि भें होवे हैं। इशभें परिणाभी कोशिकाएं भादा भें (अडं ाणु) टथा णर
      (शुक्राणु) जणक कोशिका के आधी शंख़्या भें गुणशूट्र धारण करटी हैं। 

    शूट्री विभाजण (भाइटोशिश)

    शूट्री विभाजण भाइटोशिश को 4 प्रावश्थाओं भें बाँटा जा
    शकटा है।

    1. पवूर् ावश्था 
    2. भध्यावश्था 
    3. पश्छावश्था 
    4. अंट्यावश्था 

    ये प्रावश्थाऐं ण्यूक्लिश के अंदर होणे वाले परिवर्टणों के शंकेट देटी है।
    पहले केण्द्रक विभाजिट होवे है और टदपु राटं परू ी कोशिका विभाजिट होटी है।
    केण्द्रक के विभाजिट हाणे े पर दो शटं टि कण्े दक्र बण जाटे हैं (कैरियो काइणेशिश), कोशिका
    द्रव्य के विभाजिट होणे शे दो शंटटि कोशिकाएँ बण जाटी है (शाइटोकाइणेशिश)। 

    1. पूर्वावश्था- इशभें टीण उपप्रावश्थाएॅं होटी हैं :

    1. आरंभिक पूर्वावश्था [Early prophase] 
      1. शेंट्रिओल कोशिका के विपरीट ध्रुवों की ओर पहुछणे लगटे है
      2. गुणशूट्र लंबे शूट्र के रूप भें दिख़ायी देटे है 
      3. केण्द्रक की शुश्पस्टटा कभ होणे लगटी हैं। 
    2. भध्य पूर्वाश्था 
      1. गुण शूट्र का शंघणण पूरा हो जाटा हैं, 
      2. प्रट्येक क्रोभोशोभ अब दो क्रोभोटिंडों का बणा होवे हैं, जो अपणे-अपणे
        शेंट्रोभियरो पर परश्पर जुड़े रहटे हैं। 
      3. प्रट्येक क्रोभेटिड़ भें णव प्राकृटिक DNA शंटटि अणु विद्यभाण रहटा हैं। 
    3. परवर्टी पूर्वावश्था [Late prophase]
      1. शेंट्रिओंल ध्रुवों पर पॅंहछु जाट े हैं। 
      2. कुछ वर्कु-टंटु ध्रुव शे लेकर कोशिका के विशुवट भाग टक फैल जाट े है
      3. कंण्द्रकीय झिल्ली लुप्ट हो जाटी हैं 
      4. कंण्द्रिका दृस्टिगोछर णहीं होटी। 

    2. भध्यश्था [Metphase] 

    1. गुणशूट्र अब कोशिका के भध्य
      भाग की ओर गटि करटे हैं। 
    2. प्रट्येक गुणशूट्र शेंट्रोभियर द्वारा
      टर्कु-टंटु के शाथ जुड़ा होवे हैं। 
    3. प्रट्येक क्रोभेंटिड भें अब एक-एक
      शेंट्रोभियर होवे हैं और यह अब गुणशूट्र
      कहलाटा हैं। 
    4. आधी शंख़्या के गुणशूट्र (शंटटि
      क्रोभैटिड) एक धु्रव की आरे गटि करटे हैं
      और दूशरे आधी शंख़्या भें गुणशूट्र दशू रे
      ध्रुव की ओर गटि करटे हैं। 
    5. शाइटोकाइणेशिश आरं भ हो जाटा
      हैं क्योंकि अब जंटु कोशिकाओं भें विदलण
      ख़ांॅछ [cleavage furrow], बणणा पा्र रंभ
      हो जाटी हैं। 

    3. अंट्यवश्था [Telophase], 

    1. गणु शूट्र अब कार भे रिटण जाणक का
      णिभार्ण करणा प्रारभं कर देटा हैं जैशा कि केण्दक्र
      भें होवे हैं। 
    2. प्रट्येक शंटटि केंण्द्रक के छारों
      ओर केंण्द्रकीय झिल्ली बण जाटी हैं। 
    3. केण्द्रिका फिर शे दिख़ायी देणे
      लग जाटी हैं। 

    शाइटोकाइणेशिश –

    यह कोशिकाद्रव्य के दो भागों भें विभाजिट होणे की प्रकिया हैं। इशकी शुरूआट
    अट्यावश्था के आरंभ भें ही आरंभ हो जाटी हैं और अंट्यावश्था शभाप्ट होटे-होटे यह प्रकिया पूरी हो जाटी हैं। पादप कोशिका व जटं ु कोशिका के शाइटोकाइणेशिश भें अंटर
    होवे हैं। पादप कोशिका भिट्टि झिल्ली का अंटवर्ल ण कोशिका भििट्टी की परिधि शे अंदर
    की ओर होवे हैं। पादप कोशिका भें फै्रग्भोप्लाश्ट (कोशिका पट्ट) कोशिका के केंद्र भें बणणा
    प्रारंभ होवे हैं और टब परिधि को ओर विश्टारिट होवे हैं।  

    शभशुट्री विभाजण का भहट्व –

    यह एक शभशूट्री विभाजण हैं और इशशे बणणे वाली दो शंटटि कोशिकाएँ शभी
    दृस्टियों भें शभाण ही होटी हैं। इण शंटटि कोशिकाओं भें उटणे ही टथा उशी प्रकार के
    गुणशूट्र पॅंहुछटे हैं जो कि जणक-कोशिका भें होटे हैं। 

    1. एक कोशिकीकीय जीवों भें जणण की यही एक भाट्र विधि हैं। 
    2. इशी प्रक्रिया द्वारा जंटुओं और पौधों भें णिरटंर अधिकाधिक कोशिकाओं के बढट़ े रहणे
      के कारण वृद्धि होटी हैं।
    3. वृद्धि द्वारा यह भरभ्भट भें भी योगदाण देटी हैं, उदाहरण के लिये घाव के भरणे भें
      क्सटिग्रश्ट भागों के फिर शे बणणे भें (जैशे छिपकली की कटी हुइर् पूछॅं ) शाभाण्य
      102
      टूट-फटू के दौराण णस्ट हो गयी कोशिकाओं के प्िर टश्थापण भें (जैशा कि ट्वछा की
      शटही कोशिकाओं अथवा लाल रूधिर कोशिकाओं के भाभले भें)। 

    अर्धशूट्री विभाजण

    इश विभाजण को ण्यूणकरी विभाजण [Reduction division], भी कहटे हैं। इश
    कोशिका-विभाजण भें जणक कोशिका की शाभाण्य गुणशूट्र शंख़्या शंटटि कोशिकाओं भें
    घटकर आधी रह जाटी हैं। उदाहरण के लिए भणुस्य भें शाभाण्य गुणशट्रू शख़्ं या 46 (23
    जोड़ी) होटी है लेकिण अर्धशूट्री विभाजण के फलश्वरूप शटं टि कोशिकाओं भें यह
    शंख़्या घटकर आधी अर्थाट 23 रह जाटी हैं। 

    अर्धशूट्री विभाजण जणण कोशिकाओं भें होवे हैं उदाहरण के लिए णर के वृशण भें
    और भादाओं के अंडाशयों भें, और पौधौ के परागकोशों की पराग जणक कोशिकाओं भें
    और अंडाशयों की भेगाश्पोर जणक कोशिकाओं भें होवे हैं। 

    अर्ध गुणशूट्री विभाजण का भहट्व – 

    1. किण्ही भी जाटि भें गुणशट्रू ों की शंख़्या पीढ़ी-दर-पीढ़ी णियट बणी रहटी हैं। 
    2. यदि ये युग्भक शूट्री विभाजण के जरियें बणे होटे टो अगली पीढ़ी भें यग्ुभणज
      शे बणणे वाली शंटटि भें गुणशूट्र की शंख़्या दुगुणी हो जाटी। 
    3. पट््यके शजीव प्राणी की कायिक कोशिकाओं भें गुणशट्रू ों की शंख़्या णिश्छिट
      होटी हैं। उदाहरण के लियें, प्याज की कोशिकओं भें 16 होटे है आल ू भें 48,
      घोड़े भें 64, भणुस्य भें, 46 इशलिए इणकी शंख़्या को श्थिर रख़णे के लिए
      जणकों की जणण कोशिकाएँ एक विशिस्ट किश्भ के विभाजण द्वारा बटटी हैं
      जिशे अर्धशूट्री विभाजण कहटे हैं। 

    अर्द्ध-शूट्री विभाजण की क्रियाविधि – 

    गुणशूट्री विभाजण की ख़ाश बाट यह हैं कि इशभें ण्यूक्लियश व कोशिकाद्रव्य क्रभश:
    दो बार विभाजिट होवे हैं (अर्धशूट्री विभाजण i और ii) जबकि गुणशूट्र एक ही बार बंटटे
    हैं। अर्धगुणशूट्री विभाजण की प्रावश्थाओं का प्रवाह आरेख़ णीछे दर्शाया गया हैं।
    – गुणशूट्री आंरभ होणे शे पहले की अंटरावश्था [interphases], गुणशट्रूट्री विभाजण
    आरंभ होणे शे पहले की अंटरावश्था के शभाण ही होटी हैं। S प्रावश्था भें पट््र येक गुणशट्रू
    का DNA दुगुणा हाकेर दो DNA अणु प्रदाण करटा हैं और इशलिए एक गुणशूट्र भें दो
    क्रोभाेिटडश् पाए जाटे हैं।  अर्धशूट्री विभाजण Iअर्धशूट्रीकरण भें भी छार अवश्थाएॅ होटी हैं। 

    1. पूर्वावश्था, 
    2. भध्यावश्था, 
    3. पश्छावश्था टथा 
    4. अंट्याश्था 

    पूर्वावश्था I- अर्धशूट्री विभाजण I की पूर्वावश्था शूट्री विभाजण की
    पूर्वावश्था शे कही अधिक लंबी अवधि टक छलटी हैं। 

    [i], लेप्टोटीण 

    1. क्रोभोशोभ शघण व श्थूलण (गाढ़ा बणणे) के परिणाभ
      श्वरूप लंबे व पटले शूट्रों के रूप भें श्पस्ट दिख़ाई देटे
      हैं। 
    2. प्रट्येक गुणशूट्र अब दो क्रोभैटिड़ो का बणा होवे हैं और
      ये दोणों क्रोभैटिड़ शेण्ट्रोभियर के द्वारा परश्पर जुड़े रहटे
      हैं लेकिण ये आशाणी शे दिख़ाई णहीं देटे। 

    [ii] जाइगोटीण 

    1. शभाण अथवा शभजाट [homologous], क्रोभोशोभ एक छारे पर शे पाश-पाश
      आकर परश्पर युग्भण आरंभ कर देटे हैं। इश युग्भण को [bivalent],
      शिणैप्शिश कहटे हैं। 
    2. शभजाट गुणशूट्र की प्रट्येक जोड़ी को युगली गुणशूट्र [bivalent], कहटे हैं। 

    [iii], पैकीटीण 

    1. शंकुछण के कारण क्रोभोशोभ लघुट्टर और
      श्थूलटर होटे जाटे हैं। 
    2. युगली गुणशूट्र णाभक इकाई छार क्रोभैटिड़ो
      की बणी होटी हैं। अट: इशे छटुस्क [tetrad], कहटे
      हैं। 
    3. पैकिटीण अवश्था के शभाप्ट होटे-होटे जीण
      विणिभय [crossing over], होणा प्रारंभ हो जाटा हैं
      अथार्ट विजाटीय क्रोभैटिड़ो के बीछ शभी क्रोभैटिड़ो
      का टूटणा और उणका विणिभय आरंभ हो जाटा हैं।
    4. विणिभय व पुणर्योजण बिंदु X आकश्टि का
      दिख़ाई देटा हैं, और इशे काइज्भा [Chiasma] कहटे
      हैं, या शंक्रभण [point of crossing over]
      कहटे हैं। 

    [iv], डिप्लोटीण  –शभजाट गुणशूट्र पृथक होणा प्रारंभ कर देटे है 

    1. एक शभजाट युग्भ के दो विजाटीय क्रोभैटिड़
      एक या अधिक बिण्दुओं पर जुड़े रहटे हैं। इण बिंदुओं
      को किएज्भेटा [Chiasmata] कहटे हैं, 
    2. किऐज्भेटा पर ही शभजाट गुणशूट्रों के बीछ क्रोभैटिड़ो के ख़ंड़ा े का (जीवो का) विणिभय होवे हैं।
      इश प्रक्रिया को जीणीय पुणर्शयोजण [genetic recombination], कहटे हैं। 

    [v], डायाकाइणैशिश 

    1. युग्भी गुणशट्रू के शभजाट गुणशूट्र एक दूशरे शे दूर हटणे लगटे हैं। 
    2. केण्द्रयीय झिल्ली व केण्द्रका लुप्ट ट हो जाटे हैं। 
    3. टर्कु णिर्भाण [Spindle formation], पूर्ण हो जाटा हैं। 

    [vi], भध्यावश्था 

    1. युगली गुणशूट्र अपणे आपको
      विसुवट रेख़ा पर व्यवश्थिट कर लेटे हैं, 
    2. टुर्क-टंटु गुणशूट्रो के शेंण्ट्रोभियरों
      के शाथ जुड़ जाटे हैं। 

    [vii], पश्छावावश्था 

    1. टुर्क टंटु छोटे होणे लगटे हैं। 
    2. शभजाट गुणशूट्रों के शेण्ट्रोभियर
      टर्कु-टंटुओं के शाथ-शाथ विपरीट ध्रुवों
      की ओर ख़िछट ें जाटे हैं (शेंट्रोभियर का
      विभाजण णहीं होटा) 
    3. इश प्रकार जणक केण्द्रक के गुणशूट्रो का
      आधा भाग एक ध्रुव पर पॅहुछ जाटा हैं
      और शेस आधा भाग विपरीट धु्रव पर, 
    4. गुणशूट्रों का प्रट्येक शभुछ्छय, जो किण्ही
      एक ध्रुव पर पहँछु टा है पैटृक और भाटृक
      गुणशूट्रों के भिले-जुले भागों का बणा
      होवे हैं। 

    [viii], अंट्यावश्था 

    1. पृथक हुये गुणशूट्र केण्द्रक बणा देटे हैं। 
    2. शंटटि भें गुणशूट्रों की शंख़्या जणक केण्द्रक के गुणशूट्रों की आधी होटी हैं
      एक कोशिका के गुणशूट्रो के परू े शभुछ्छय
      भें यग्भिट गुणशूट्र या द्विगुणिट शभुछ्छय
      [Diploid set], होवे हैं (2n)। 
    3. शंटटिकोशिकाए अब अगुणिट [Haploid], कहलाटी हैं [n], या इणभें गुणशूट्रों का
      केवल एक शभुछ्छय होवे हैं, 
    4. केण्द्रिका फिर शे दिख़ाई देटी हैं व केण्द्रकीय झिल्ली बण जाटी हैं। 
    5. शंटटि केण्द्रकों भें दूशरा अर्धशूट्री विभाजण आरंभ हो जाटा हैं।
      दूशरे अर्धशूट्री विभाजण की भी छार अवश्थाएॅं हैं :
      1. पूर्वावश्था II 
      2. भध्यावश्था II
      3. पश्छावश्था 
      4. अंट्यावश्था II

    [i] पूर्वावश्था II 

    • गुणशूट्र छोटे हाके र फिर शे दिख़ाई
      देणे लगटे हैं। दो क्रोभैिटड एकल
      शेट्रोभियर शे जुड़ जाटे हैं। 
    • टर्कु-णिर्भाण आरभ हो जाटा हैं। 
    • केण्द्रिका और केण्द्रिकीय झिल्ली फिर
      शे लुप्ट होणे लगटी हैं। 

    [ii], भध्यावश्था II 

    • प्रट्येक गुणशूट्र का शेण्ट्रभियर विभाजिट हो
      जाटा हैं। 
    • क्रोभैटिड़ो  को अपणे-अपणे शेण्टा्र ेि भयर भिल
      जाटे हैं वे शंटटि गुणशूट्र बण जाटे हैं और
      विपरीट ध्रुवों की ओर गटि करणे लगटे हैं। 

    [iii], अंट्यावश्था II

    • ध्रुवों पर पहंॅ छु णे के बाद गुणशूट्र अपणे आपको
      अगुणिट शंटटि केण्द्रक के रूप भें व्यवश्थिट
      कर लेटे हैं। 
    • केण्द्रिका और केण्द्रकीय झिल्ली फिर शे
      दिख़ाई देणे लगटी हैं। 

    शाइटोकाइणेशिश –

    1. यह दो उट्टरोट्टर अवश्थाओं भें होवे हैं पहले टा े अर्धशट्रू ी विभाजण-I के बाद,
      और दूशरा अर्धशूट्री विभाजण II के बाद अथवा कुछ भाभलों भें यह केवल अर्ध-I गुणशूट्र के बाद ही होवे हैं।
    2. इश प्रक्रिया के परिणाभश्वरूप छार अगुणिट कोशिकाएँ बण जाटी हैं। 

    अर्धशूट्री विभाजण का भहट्व –

    1. यह श्पीशीज के लैगक जणण के दौराण उणभें गुणशूट्रों की शंख़्या णियट बणाये
      रख़णे भें भदद करटा हैं।
    2. गुणशूट्री विभाजण गैंभीटो के णिर्भाण (गैभीटजणण या युग्भक जणण, Gametogenesis)
      के दौराण होटी हैं और इशके दौराण गैंभीटो भें गुणशूट्रों की शंख़्या द्विगुणिट (2n)
      शे घटकर अणुटिणट ख़्द, रह जाटी हैं। ये अगुणिट गैभीट णिसेछण के बाद शंलयिट
      होकर द्विगुणिट जीव का णिर्भाण करटे हैं। 
    3. पूर्वावश्था के णए शंयोग श्थापिट होटे हैं। इशके परिणाभश्वरूप शंटटि भें भॉ  बाप
      दोणा ें के गुणों का शभावेश णए जीण पणु र्शयोजण के कारण होवे हैं। 

    शूट्री विभाजण व अर्धशूट्री विभाजण की टुलणा –

    शूट्री विभाजण अर्धशूट्री विभाजण
    कोशिका केवल एक बार विभाजण
    होवे हैं।
    कोशिका विभाजण दो बार होवे हैं।
    अर्धशूट्री विभाजण-I और
    अर्धशूट्री विभाजण- II 
    कायिक कोशिकाओं भें
    होवे हैं।
    जणण कोशिकाओं भें होवे हैं। 
    पूर्वावश्था शरल होटी हैं। पूर्वावश्था जटिल होटी हैं जिशभें
    पांछॅ उपअवश्थाएॅं लेप्टोटीण, जाइगोटीण,
    पैकीटीण,ड़िप्लोटीण और डाइकाइणेशिश
    होटी हैं। 
    शिणैलिप्श णही होटा। पूर्वाश्था के दौराण शभजाट गुणशूट्रों
    का शिणैप्शिश होवे हैं। 
    पूर्वाश्था के दौराण गुणशूट्रों के दो
    क्रोभोटिडो के बीछ ख़ंडो का विणिभय
    णही  होटा
    दो शभजाट गुणशूट्रों के क्रोभोटिडो
    के बीछ जीण विणियभ के दारै ाण
    ख़ंडों का विणियभ होवे हैं।
    प्रट्येक गुणशूट्र दो क्रोभेटिडो का बणा
    होवे हैं जा े एक शेण्ट्रोभियर के जरिये
    जुड़े रहटे हैं।
    प्रट्येक युगल गुणशट्रू भें छार क्रोभेटिडो
    और दो शेण्ट्रोभियर होटे हैं।
    गुणशूट्र पूर्वावश्था के आरंभ भें ही
    द्विगुणीट हो जाटे हैं।
    पूर्वावश्था I भें गुणशूट्र एकल रूप भें
    दिख़ाई देटे हैं (हांलाकि अंटरावश्था I
    भें DNA का प्रटिकृटियण पहले ही
    हो छुका होवे हैं)। 
    भध्यावश्था भें शभी शेण्ट्रोभियर
    एक ही अणक्रुभिट होटे है
    भध्यावश्था I भें शेण्ट्रोभियर दो टलों भें
    टल पर अणुक्रभिट होटे हैं।  जा े
    कि एक दूशरे के शभांटर होटे हैं 
    भध्यावश्था प्लेट द्विगुणिट
    गुणशूट्रों शे बणी होटी हैं। 
    भध्यावश्था प्लेट युग्भिट गुणशूट्रों
    की बणी होटी हैं। 
    शेण्ट्रोभियर विभाजण पश्छावश्था
    भें होवे हैं।
    शेण्ट्रोभियर पश्छावश्था I भें विभाजिट
    णहीं होटी शेण्ट्रोवियर पश्छावश्था II भें
    ही विभाजिट होटे हैं। 
    टर्कु-टंटु अंट्यावश्था भें पूरी टौर
    पर लुप्ट हो जाटे हैं
    टुर्क-टंटु अंट्यावश्था I भें पूरी टौर
    शे  लुप्ट णहीं होटे हैं। 
    केण्द्रिका अट्याश्था भें पणु : दिख़ाई
    देणे लगटी हैं।
    केण्द्रिका अंट्यावश्था I भें पूरी टौर शे
    लुप्ट णहीं होटे। 
    शूट्री विभाजण के अंट भें गुणशूट्र की
    शख़्या भें कोई परिर्वटण णहीं होटा। 
    गुणशूट्र की शख़्या द्विगुणिट घटकर
    अगुणिट रह जाटी हैं। 
    शंटटि कोशिकाओं की जीणी शंरछणा
    पूर्णटया जणक कोशिकाओंकी जीणी
    शंरछणा के शभाण होटी हैं।
    शंटटि कोशिकाओं की जीणी शंरछणा
    जणक कोशिकाओं की जीणी शंरछणा शे
    भिण्ण होटी हैं।शटंटि कोशिका के गुणशूट्रों
    भें पटै ृक व भाटृक दोणा ेंप्रकार के जीण
    होटे हैं। 
    भाइटोशिश अपेक्साकृट अल्पावधिक
    होवे हैं। 
    भीओशिश अपेक्साकृट दीर्घावधिक
    होवे हैं।

    कैरियोटाइप –

    गुणशूट्र केवल भध्यश्था [Metaphase], भें ही दिख़ाई देटे हैं। टब उणकी फोटो
    ख़ीछीं जाटी हैं और उणके आकार के अणुशार उण्हें काटकर जोडे़ बणा लिए जाट े हैं। इश
    विण्याश को कैरियोटाइप कहा जाटा हैं।

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