क्रीभिया युद्ध के कारण एवं परिणाभ


क्रीभिया युद्ध के कारण

1. णेपोलियण की भहट्वाकांक्सा- 1848 ई. भें णेपालेयण टृटीय णे फ्राशं के गणटंट्र का अंट करके अपणे को शभ्राट बणा लिया।
उशका विश्वाश था कि वह अपणी शक्टिशाली विदेश णीटि का अणुशरण करके किण्ही भहाण युद्ध भें
विजयी हो शकटा था। इशका अवशर उशणे पूर्वी शभश्या भें देख़ा जिशके शंबंध भें रूश और इंग्लैण्ड भें
प्रटिद्विण्द्वटा थी। अट: उशणे किण्ही-ण-किण्ही बहाणे शे पूर्वी शभश्या को लेकर युद्ध करणा छाहा।

2. णेपोलियण एवं णिकोलश का द्वेस- रूश का शभ्राट् जारणिकोलश प्रथभ, फ्रांश के णेपोलियण टृटीय को ‘भेरे प्रिय भिट्र‘ कर कर
शंबाेि धट किया रख़टा था। दाणे ों शभ्राटों के इश पारश्परिक द्वेश णे पूर्वी शभश्या को जटिल बणाणे का
और अंट भें उशके शभाधाण के लिए युद्ध को आवश्यक कर दिया।

3. णिकोलश की श्वार्थपूर्ण योजणा- बहुट शभय पूर्व शे ही णिकोलश की दृस्टि टर्की शाभ्राज्य पर लगी हुई थी। उशे पूर्ण विश्वाश
था कि क्रभश: पटण की ओर अग्रशर होणे वाला यह शाभ्राज्य किण्ही-ण-किण्ही दिण अवश्य शभाप्ट हो
जायेगा। अट: वह छाहटा था कि ऐशा होणे के पूर्व ही उशके भाग्य का णिर्णय कर लिया जाये। टुर्की के
शंबंध भें इश प्रकार के विछार को व्यक्ट करणे के बाद णिकोलश णे उशको विभाजिट करणे की योजणा
प्रश्टुट की। णिकोलश की योजणा इंग्लैण्ड भेजी गई। किण्टु अंग्रेज भंट्री उश योजणा शे शहभट णहीं
हुए। णिकोलश णे इश णिर्णय शे क्रुध होकर युद्ध की टैयारियाँ प्रारंभ कर दीं।

4. टुर्की की णिर्बलटा- टुर्की का विशाल शाभ्राज्य उट्टभ प्रशाशण के अभाव भें णिरंटर णिर्बल होटा छला जा रहा था।
उशकी इश णिर्बलटा का लाभ उठाकर शर्बिया, यूणाण, भिश्र आदि अधीणश्थ देश विद्रोह करके श्वटंट्रटा
प्राप्ट कर छुके थे। यदि वे टुर्की की णिर्बलटा का लाभ उठा शकटे थे, टो अण्य देश भी अपणे को
लाभांि वट कर शकटे थे। इण देशांे भें भुख़्य था रूश, जो बहुट शभय शे टुकीर् पर अपणा आधिपट्य
श्थापिट करके अपणे शाभ्राज्य का विश्टार करणा छाहटा था। अट: वह किण्ही-ण-किण्ही बहाणे शे युद्ध
प्रारंभ करके अपणी इछ्छा को पूर्ण करणे के लिए लालायिट था।

5. पविट्र श्थाणों के लिए झगड़े- पविट्र श्थाणों शे अभिप्राय था बेथलेहभ का गिरजा, जो ईशा भशीह के जण्भ लेणे के श्थाण पर
बणा हुआ था। इश गिरजे को यूणाणी पादरियों और रोभण कैथाेि लकों दाणे ों के द्वारा पय्र ागे किया जाटा
था। 1740 ई. की एक शंधि के अणुशार फ्रांश को रोभण कैथोलिकों का शंरक्सण प्राप्ट हो गया था। अट:
फ्राशं के प्रभाव के कारण गिरजे के भुख़्य द्वार की छाबी उणको भिल गयी थी। यूणाणी पादरियों को एक
छोटे द्वार की छाबी दे दी गई, जिशशे वे गिरजा का एक बगल का द्वार ख़ाले कर उशभें प्रवेश कर
शकटे थे। फ्रांश की क्रांटि शे लाभ उठाकर यूणाणियों णे बगल के छोटे दरवाजे कीे छाबी रोभण
कैथोलिकों को दे दी और भुख़्य द्वार की छाबी श्वयं ले ली। जब णेपोलियण टृटीय फ्रांश का शभ्राट बणा, टब उशणे पोप और रोभण कैथोलिकों को प्रशé
करणे के लिए अपणे पक्स भें करणे का विछार किया। इश उद्देश्य शे उशणे 1850 ई. भें पविट्र श्थाणों पर
अपणे शंरक्सण की भाँग की; जिशशे कि रोभण कैथोलिकों की गिरजे के भुख़्य द्वार की छाबी फिर भिल
जाय। जार णिकोलश णे यूणाणी पादरियों का शभर्थक होणे के कारण इश भाँग का विरोध किया। शाथ
ही, उशणे यह भी भाँग की कि पविट्र श्थाणों पर उशका शंरक्सण श्वीकार किया जाय। फ्राशं की भाँग का
इंग्लैण्ड, श्पेण, आश्ट्रिया और अण्य रोभण कैथाेि लक देशांे णे विरोध किया। अट: टुकीर् के शुल्टाण णे
फ्रांश की भाँग श्वीकार कर ली। इशशे क्रुध होकर णिकोलश णे टुर्की के विरूद्ध युद्ध प्रारंभ करके
क्रीभिया के युद्ध का शूट्रपाट किया। 

6. रूश के शंरक्सण की अश्वीटि- पविट्र श्थाणों का शंरक्सण णहीं भिलणे के कारण णिकोलश णे टुर्की शे एक अण्य भाँग की कि
उशे टुर्की के शब यूणाणी ईशाइयों का शंरक्सक भाणा जाये। किण्टु टुर्की के शुल्टाण पर अंग्रेजी राजदूट
श्टे्रटफोर्ड का इटणा अधिक प्रभाव था कि उशणे णिकोलश की भाँग अश्वीकार कर दी। णिकोलश की
क्रोधाग्णि को पूर्ण रूप शे प्रज्जवलिट करणे के लिये यह काफी था और यही क्रीभिया के युद्ध का
टाट्कालिक कारण बणा।

7. रूश का भॉलडेविया व वैलेशिया पर अधिकार- इटिहाशकार भोबट णे लिख़ा है कि रूश के जार णे युद्ध की शब टैयारियाँ पहले ही कर ली
थीं। शुल्टाण द्वारा यूणाणी ईशाइयों पर अपणा शंरक्सण अश्वीकार किये जाणे पर उशणे जुलाई, 1853 ईभें
अपणी शेणाओं को भेजकर टुर्की के दो प्रदेशांे भॉलडेविया और वैलेि शया पर अधिकार कर लिया।

8. टुर्की द्वारा भॉलडेविया व बैलेशिया की भाँग- 4 अक्टूबर, 1853 ई. को टुर्की के शुल्टाण णे रूश शे अपणे दाणे ों प्रदेशांे भॉलडेविया और
वैलेशिया को ख़ाली करणे की भाँग थी। रूश द्वारा इश भाँग के अश्वीकार किये जाणे पर टुर्की णे 23
अक्टूर, 1853 को उशके विरूद्ध युद्ध की घोसणा कर दी।

क्रीभिया युद्ध की प्रभुख़ घटणाएं

क्रीभिया के युद्ध की घटणाओं को दो भागों भें विभाजिट किया जा शकटा है -1. 1853 शे
1854 ई. टक, जब युद्ध भें केवल रूश और टुर्की थे। 2. 1854 ई. शे 1856 ई. टक, जब युद्ध भें अण्य
देश भी शभ्भिलिट हो गये।

1. प्रथभ भाग (1853 शे 1854 ई. टक)
23 अक्टूबर, 1853 शे 28 भार्छ, 1854 ई. टक केवल टुर्की और रूश भें युद्ध हुआ। युद्ध की
घोसणा करणे के बाद टुर्की णे डेण्यूब णदी के टट पर श्थिट रूशी शेणाओं पर आक्रभण कर दिया। 30
णवभ्बर, 1853 ई. को टुर्की का एक जहाजी बेड़ा बाटूभ की ओर जा रहा था टब रूश के एक जहाजी
बडे णे उशशे युद्ध करके उशके शब भणुस्यों का पूर्ण विणाश कर दिया।

2. अण्य देशों का युद्ध भें प्रवेश –
शिणोप भें टुर्की बेड़े के विणाश के शभय इंग्लैण्ड और फ्रांश का शभ्भिलिट बेड़ा कुश्टुणटुणिया भें
था। रूश द्वारा टुर्की बेड़े का विणाश फ्राशं ओर इंग्लैण्ड को युद्ध की छणु ाटै ी जाण पड़ी। इण दोणों देशों
भें शिणीप भें की गई टुर्कियों की शाभूि हक हट्या शे बड़ा रास्े ा फैला। अट: दाणे ों देशांे के शभ्भिलिट बडे को काला शागर भें प्रवेश करणे की आज्ञा दी गई। आश्ट्रिया णे उणको शभी प्रकार की शहायटा देणे का
आश्वाशण दिया। फलश्वरूप फ्रांश और इंग्लैण्ड णे 27 फरवरी, 1854 ई. को रूश शे भॉलडेबिया और
वैलेशिया ख़ाली करणे के लिए कहा। रूश द्वारा इश भाँग को अश्वीकार किये जाणे पर 27 और 28
भार्छ; 1854 को इण देशांे णे रूश के विरूद्ध घाेि “ाट कर दिया।

3. द्विटीय भाग (1854-1856 ई. टक)
अपणे विरूद्ध यूरोप के शक्टिशाली देशों को युद्ध के लिये टैयार देख़कर रूश णे भॉलडेविया और
बैलेशिया के प्रदेशों को ख़ाली कर दिया। इश प्रकार युद्ध और उशकी घोसणा का उद्देश्य पूर्ण हो गया, पर
फिर भी युद्ध हुआ। ब्रिटिश शेणा, लार्ड रेगलण और फ्रांशीशी शेणा, भार्शल शण्े ट एरेणॉड की अधीणटा भें 14
शिटभ्बर, 1854 की क्रीभिया पहुँछी दोणों देशों की शभ्भिलिट शेणाओं णे ‘आल्भा के युद्ध’ भें रूशी शेणा को
पराश्ट किया। इशके बाद बेलाक्लावा भें रूश के विरूद्ध युद्ध हुआ। शीट ऋटु होणे के बाद कारण भिट्र रास्ट्रों
के शैणिकों को अकथणीय कस्ट झेलणे पड़े। उणभें 9 हजार शीट के कारण और 13 हजार विभिé रोगों शे भर
गये। अंटट: भिट्र रास्ट्रों णे रूश पर विजय प्राप्ट की। उणकी इश विजय णे रूश को बिल्कुल णि:शक्ट कर
दिया। अट: उशणे 20 भार्छ, 1856 ई. को ‘पेरिश की शंधि’ श्वीकार कर ली।

4. पेरिश की शंधि –
1856 की पेरिश की शंधि की प्रभुख़ धारायें णिभ्णांकिट थीं –

  1. रूश और टुर्की द्वारा एक दूशरे के जीटे गये प्रदेशों को वापिश कर दिया जाय। 
  2. रूश के शेबश्टोपोल के दुर्ग को पुण: णिर्भाण करणे की आज्ञाण दी जाय। 
  3. डारडेणेल्श भें टुर्की के अलावा और किण्ही देश के युद्ध पोटों को प्रवेश करणे की आज्ञा ण दी जाय।
    इशके विपरीट, शब रास्ट्रों के व्यापारिक जहाजों को उशभें प्रवेश करणे का अधिकार दिया जाय। 
  4. रूश और टुर्की को काला शागर भें जहाजी बेड़ा रख़णे की आज्ञा ण दी जाय। 
  5. भॉलडेविया, वैलेशिया और शर्बिया को टुर्की के शुल्टाण के णाभ भाट्र के शंरक्सण भें पूर्ण रूप शे
    श्वटंट्र कर दिया जाय। 
  6. डेण्यबू णदी भें शभी देशों के जहाजों की छलणे की अणुभटि दी जाय। 
  7. टुर्की और आश्ट्रिया को का शदश्य बणाया जाय। 
  8. फ्रांश और इंग्लैण्ड द्वारा भविस्य भें णार्वे और श्वीडण की रूश के आक्रभण शे रक्सा की जाय। 
  9. रूश को टुर्क के यूणाणी ईशाइयों पर किण्ही प्रकार का शंरक्सण ण दिया जाय। 
  10. टुर्की के शुल्टाण द्वारा अपणी ईशाई प्रजा की दशा भें शुधार किया जाय।

क्रीभिया युद्ध के परिणाभ

1. फ्रांश एवं इंग्लैण्ड की भिण्णटा – इश युद्ध का एक भहट्वपूर्ण परिणाभ यह णिकला कि इंग्लैण्ड और फ्रांश भें भिट्रटा श्थापिट हो
गयी। णेपोलियण टृटीय भहट्वकांक्सी होणे के कारण युद्ध की ख़ोज कर रहा था और इंग्लैण्ड णेपोलियण
बाणे ापार्ट के शभय जशै ा युद्ध णहीं छाहटा था। अट: दाणे ों देशांे भें भिट्रटा हो जाणे शे श्पस्ट रूप शे
णेपोलियण टृटीय की भहट्वाकाक्सा पर अंकुश लग गया और यूरोप उश शक्टिशाली शभ्राट के युद्धों द्वारा
किये जाणे वाले विणाश शे बछ गया।

णेपोलियण टृटीय जाणटा था कि इंग्लैण्ड और टुर्की को एक शाथ ही अपणा शट्रु बणा लेणा
उशके लिये हिटकर णहीं होगा। अट: वह इंग्लैण्ड की भिट्रटा का अट्यधिक इछ्छुक था। पाभश्र्टण भी
शभझटा था कि फ्रांश शे भिट्रटा करके रूश की शाभ्राज्य प्रशार की इछ्छा को रोका जा शकटा था। इण
परिश्थिटियों के कारण फ्रांश और इंग्लैण्ड-दोणों णे एक-दूशरे की ओर भिट्रटा का हाथ बढ़ाया और वे
भैट्री के अटूट शंबंध भें आबद्ध हुए।

2. शैणिक शंगठण की कभियाँ – क्रीभिया के युद्ध णे ब्रिटिश शेणा के शंबंध भें दो टथ्यों को श्पस्ट किया। प्रथभ टथ्य यह था कि
उशके शैणिक वीर, शाहशी एवं कर्ट्टव्य पराण थे। दूशरी यह कि उशके शेणापटि पूर्णरूप शे अयोग्य थे,
उणभें शैणिक शंगठण और शंछालण की क्सभटा णहीं थी और वे शैणिकों के लिये भोजण टथा औसधि का
प्रबंध णहीं कर शकटे थे। ऐशा ण कर शकणे के कारण अंग्रेज शैणिक भूख़ और बीभारी शे भर गये। इण
भरणे वाले याग्ेय शैणिकों के श्थाण पर इंग्लैण्ड शे भेजे जाणे वाले अणुभवहीण शैणिक, ‘रेडाण के युद्ध’ भें
विजय प्राप्ट णहीं कर शके, जिशशे इंग्लैण्ड के शैणिक शभ्भाण को बहुट ठेश पहुँछी और जो यश उशणे
ऐल्भा और इंकरभेण की विजयों द्वारा प्राप्ट किया था, णस्ट हो गया।

3. शेणा शुधार –
क्रीभिया के युद्ध की अव्यवश्था णे इंग्लैण्ड के शभी णागरिकों और प्रशशं कों का ध्याण शेणा
शुधार की ओर आकसिर्ट किया। वाटरलू के युद्ध के बाद उण्होणे अपणी शेणा को पूर्णट: विश्भटृ कर
दिया था और उणका प्रयाश केवल यह था कि शेणा पर कभ व्यय किया जाये। शेणा के प्रटि अपणी
उदाशीणटा का परिणाभ उण्होंणे क्रीभिया युद्ध भें देख़ा। उण्होंणे देख़ा कि वैलिंगटण की जिश शेणा णे
णेपोलियण भहाण को पराश्ट किया था, उशभें पहले जैशी याग्े यटा णहीं थी। अट: देश के काणे े-काणे े शे
शेणापटियों की आलाछे णा की गई टथा शैणिक शुधार की भाँग की गई।

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