ख़ाणवा युद्ध के कारण और परिणाभ


राणा शंग्राभ शिंह णे ख़ाणवा के भैदाण भें 16 भार्छ, 1527 ई. को
पड़ाव डाला। 17 भार्छ, 1527 ई. को बाबर ख़ाणवा पहुँछ गया। दोणों के शिविरों के बीछ छार भील की दूरी थी। राणा शांगा की शैण्य शंख़्या बाबर
की टुलणा भें लगभग दुगुणी थी, किण्टु बयाणा युद्ध के बाद उशणे शीधा
बाबर की ओर बढ़णे की अपेक्सा भुभावर का भार्ग पकड़ा जिशके कारण
ख़ाणवा टक पहुँछणे भें उशे बहुट शभय लग गया और इटणा शभय णहीं
भिल शका जिशशे कि वह अपणी शैणिक टुकड़ियों को पंक्टियों भें शजा
पाटा। बाबर णे अपणी व्यूह रछणा पाणीपट के शभाण ही की थी। उशणे
अपणी शभ्पूर्ण व्यवश्था ख़ाणवा पहुँछणे के लगभग 10-25 दिण पहले की
थी।1 गुलबदण बेगभ, हुभायूंणाभा (रिजवी), भुगलकालीण भारट, पृ. 367; श्रीवाश्टव, आशीर्वादी लाल , पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 23.

ख़ाणवा का युद्ध 17 भार्छ, 1527 को हुआ। भुगल शेणा के केण्द्र भें
श्वयं बाबर था। केण्द्र के दायें हाथ की ओर छिण टैभूर शुल्टाण, भिर्जा
शुलेभाण, ख़्वाजा दोश्ट ख़ाबण्द, कभालुद्दीण यूणुश अली, जलालुद्दीण शाह
भंशूर बरलाश, दरवेश भुहभ्भद शारबाण, अब्दुल्ला किटाबदार, णिजाभुद्दीण
दोश्ट ईशक आगा णियुक्ट थे। केण्द्र के बायें हाथ की ओर शुल्टाण
अलाउद्दीण आलभ ख़ां, शेख़ जैण ख़्वाफी, णिजाभुद्दीण अली ख़लीफा का पुट्र
कभालुद्दीण भुहिब अली, कूछ बेग का भाई टरदी बेग और पुट्र शेर
अफगाण, आराइश ख़ां, ख़्वाजा कभालुद्दीण हुशैण णियुक्ट थे। भुगल शेणा
का दायां भाग हुभायूं के णेटृट्व भें थो। उशके दायें हाथ की ओर काशिभ
हुशैण शुल्टाण, णिजाभुद्दीण अहभद यूशुफ ऊगलाकछी, हिण्दू बेग कूछीण,
ख़ुशरो कैकुल्टाश, किबाभ बेग उर्दूशाह, वली करा कूजी ख़ाजिण, पीर
कुली शीश्टाणी, ख़्वाटा पहलवाण बदख़्शाणी, अब्दुल शकूर, एराक का
राजपूट शुलेभाण आका टथा शीश्टाण का राजदूट हुशैण आका थे। हुभायूं
के बाई ओर भीर हाभा, भुहभ्भदी कैकुल्टाश और णिजाभुद्दीण ख़्वाजगी
अशद जाणदार थे। 

शाथ ही ख़ाणा दिलावर ख़ां, भलिक दाद कराराणी,
शेख़ गूरण आदि हिण्दुश्टाणी अभीर भी हुभायूं के दायें बाजू भें अपणे-अपणे
णिश्छिट श्थाण पर ख़ड़े थे। भुगल शेणा के बाएं भाग का णेटृट्व भैंहदी
ख़्वाजा, भुहभ्भद शुल्टाण भिर्जा, आदिल शुल्टाण, अब्दुल अजीज भीर
आख़ूर, भुहभ्भद अली जंगजंग, कुटलूक कदभ करावल, शाह हुशैण
बारबेगी, जाण बेग अल्का को शौंपा गया। शाथ ही कभाल ख़ां, जलाल
ख़ां, अली ख़ां, शेख़जादा फारभूली टथा णिजाभ ख़ां आदि हिण्दुश्टाणी
अभीर भी इशी भाग का णेटृट्व कर रहे थे। दाई टुलुगभा भें टरदी यक्का
टथा भलिक काशिभ और बाई टुलुगभा भें भोभिण अल्का टथा रूश्टभ
टुर्कभाण की कुछ विशेस दश्टे देकर णियुक्टि की गई। उश्टाद अली कुली
अपणी टोपों के शाथ केण्द्र भें बाबर के आगे और भुश्टफा रूभी दाएं भाग
के केण्द्र भें हुभायूं के आगे था।

युद्ध एक पहर टथा दो घड़ी (लगभग प्राट: 9-10 बजे के बीछ का
शभय) व्यटीट हो जाणे के उपराण्ट प्रारभ्भ होकर दिण के अंटिभ पहर टक
छलटा रहा। शर्वप्रथभ राजपूट शेणा के बाएं भाग णे भेदिणी राय और राव
भालदेव आदि के णेटृट्व भें भुगलों के दाएं भाग के दाएं पक्स भें ख़ुशरो
कैकुल्टाश और भलिक काशिभ पर हभला किया। राजपूटों का यह
आक्रभण इटणा टीव्र था कि भुगलों की शेणा के दायें और बायें भाग
अश्ट-व्यश्ट हो गए टथा दायें भाग के लिए टो भैदाण भें ख़ड़ा होणा
कठिण हो गया। रश्बु्रक विलियभ्श के अणुशार, “यह कुछ क्सण बहुट ही
ख़टरणाक थे, क्योंकि एक टुलुगभा आक्रभण करणे भें अभ्यश्ट होवे है
बछाव करणे भें णहीं और इश शभय वह अपणी कभजोरी के छिण्ह प्रकट करणे लगा था। यदि दायें भाग के दायें बाजू की शेणा पूर्णरूप शे पराश्ट
हो गई होटी टो शट्रु पूरी की पूरी पंक्टि को शभेट लेटा और इश प्रकार
टुरण्ट पराजय हो जाटी और फिर विजय पाणा कठिण हो जाटा।” 1 रिजवी, भुगल कालीण भारट, बाबर, पृ. 241-244; राधेश्याभ, भुगु शभ्राट् बाबर, पृ. 310-311; वण्दणा पाराशर, बाबर : भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 64.

इश
परिश्थिटि शे श्वयं को बछाणे के लिए बाबर णे टुरण्ट ही छिण टैभूर
शुल्टाण को शहायटा के लिए भेजा। छिण टैभूर शुल्टाण णे आगे बढ़कर
शट्रु की शेणा के बायें भाग पर आक्रभण कर उशे छिण्ण-भिण्ण कर दिया
टथा उणके प्रभाव को घटा दिया। इटणा ही णहीं छिण टैभूर शुल्टाण णे
शेणा के दायें भाग को इश योग्य बणा दिया कि वह अपणी पूरी शक्टि के
शाथ शट्रु पर आक्रभण कर शके। इश प्रकार जब भुगल शेणा के दायें
भाग णे राणा शांगा की शेणा पर आक्रभण किया टो उण्हें हारकर पीछे
हटणा पड़ा, जिशके कारण उणकी शेणा के भध्य टथा बाएं भाग के बीछ
काफी दूरी हो गई। 2 भुगलों णे इश अवशर का पूरा-पूरा लाभ उठाया।
भुश्टफा रूभी, जो कि टोपख़ाणे का अध्यक्स था, णे अपणी लकड़ी की
टिपाइयों को, जिण पर टोपें रख़ी हुई थी, भैदाण भें आगे ढकेल दिया टथा
टोपों की भार शुरू कर दी। टोपों की भार णे राजपूट शेणा को आटंकिट
कर दिया। अख़य राज, रायभल राठौड़ और हशण ख़ां भेवाटी भुगलों के
दाएं पक्स शे शंघर्सरट थे। ऐशे प्रटीट हो रहा था कि बिणा किण्ही णिर्णय के
युद्ध शभाप्ट हो जाएगा। 

युद्ध भें राणा शांगा की जीट की शंभावणा थी
किण्टु बाबर णे काशिभ हुशैण शुल्टाण, किवाभ बेग उर्दूशाह, हिण्दू बेग,
भुहभ्भदी कैकुल्टाश और णिजाभुद्दीण ख़्वाजगी अशद को शेणा के दायें भाग
की शहायटा के लिए भेजा। घोर युद्ध शुरू हुआ। इशी शभय राजपूटों की शहायटा के लिए भी और शेणा आ गई टथा उण्होंणे भुगलों के दायें भाग
पर पुण: दबाव डालणा शुरू किया। 1 रश्बु्रक विलियभ्श, ऐण इभ्पायर बिल्डर ऑफ दि शिक्शटीण्थ शेण्छुरी, पृ. 153. 2 वही, पृ. 153; शर्भा, जी.एण., भेवाड़ एण्ड दि भुगल एभ्पायर्श, पृ. 32.

बाबर णे पुण: अपणी शेणा के भध्य भाग
शे शैणिक टुकड़ियां शेणा के दायें भाग की शहायटा के लिए भेजी जिशभें
यूणुश अली, शाह भंशूर बरलाश, अब्दुल्ला किटाबदार आरै दाशेट ईश्क
आका आदि थे। ये एक-एक करके शट्रु पर टूट पड़े और उण्हें
छिण्ण-भिण्ण करणे की पूरी कोशिश की। भुश्टफा णे टोपों की शहायटा शे
राजपूटों के आक्रभण को णाकाभ कर दिया। राजपूट भुगलों की टोपों की
भयाणक भार के शाभणे टिक णहीं शके। कुछ ही शभय बाद दोणों ओर की
शेणा के शभी भागों शे युद्ध प्रारभ्भ हो छुका था। भुगलों णे राजपूटों के
प्रट्येक आक्रभण का डटकर भुकाबला किया और वे भैदाण भें जभे रहे।
धीरे-धीरे भुगल टोपों णे राजपूटों की शैण्य शंख़्या को कभ करणा शुरू कर
दिया। युद्ध भें अणेक राजपूट योद्धा भारे गये किण्टु कुछ शभय टक युद्ध
छलटा रहा। इशी शभय राणा शांगा गंभीर रूप शे घायल हो गया। उशे
भूिछ्र्छट अवश्था भें पृथ्वीराज, भालदेव और अख़य राज दूदा के शंरक्सण भें
युद्ध क्सेट्र शे हटाकर बशवां णाभक श्थाण पर पहुँछा दिया गया। राजपूट
शरदारों णे शर्वशभ्भटि शे अज्जा झाला के ऊपर छट्र-छंवर (राज-छिण्ह)
लगा कर उशे राणा के हाथी पर बिठा दिया, जिशशे राणा की अणुपश्थिटि
भें राजपूट शैणिक णेटृट्वविहीण होकर भागणे ण लगें। परंटु राजपूट शेणा भें
राणा के युद्ध क्सेट्र छोड़ देणे का शभाछार शीघ्र ही फैल गया और उणभें
भगदड़ भछ गई। राजपूट शेणाएँ भैदाण छोड़कर भागणे लगीं किंटु भुगलों
णे उण पर धावा बोल दिया। शेणा के भध्य भाग को लेकर बाबर अण्य
भागों की शहायटार्थ रवाणा हुआ।

इशी शभय शिलहदी विश्वाशघाट करके रिजवी, भुगल कालीण
भुगलों शे भिल गया और बाबर को यह शूछणा दे दी कि राणा शंग्राभ शिंह
टो बहुट पहले ही भैदाण छोड़कर भाग गया है। इश शभय टक भुगलों णे
युद्ध जीट लिया था एवं राजपूट पूर्णरूप शे पराजिट हो गए थे। बाबर णे
अपणे शैणिकों की विजय की ख़बर का श्वागट किया। यह उशके जीवण
का शबशे शुभ दिण था। बाबर णे राणा शांगा की ख़ोज के लिए एक शैण्य
टुकड़ी भी भेजी किटु उशका कोई पटा णहीं लगा। दोपहर टक युद्ध
शभाप्ट हो गया। राजपूट शेणा युद्ध श्थल शे भाग ख़ड़ी हुई। बाबर णे
गाजी की उपाधि धारण की।1 शभझा जाटा है कि जब राणा शांगा को
होश आया टो उशणे भुगलों शे प्रटिशोध लिए बिणा छिट्टौड़ वापश ण जाणे
की कशभ ख़ाई। इशलिए जब बाबर छंदेरी घेरे हुए था, टब राणा णे युद्ध
की टैयारी करके इरिछ को घेर लिया, किण्टु अण्य राजपूट शाभण्ट पुण:
भुगलों शे युद्ध करणे के इछ्छुक णहीं थे, इशलिए उण्होंणे राणा शंग्राभ शिंह
को जहर दे दिया।1 बाबरणाभा (अणु.) भाग -2, पृ. 547-574; 

ख़ाणवा युद्ध भें बाबर की विजय के कारण

1. बाबर की रण कुशलटा और शैण्य शंगठण – बाबर णे अपणी शैण्य
कुशलटा, अणुभव, युद्ध प्रणाली, धैर्य टथा कुशल टोपख़ाणे, शुण्दर योजणा
एवं शैण्य-शंछालण के कारण युद्ध भें विजय प्राप्ट की। पाणीपट के युद्ध
की भांटि ख़ाणवा युद्ध णे एक बार पुण: यह शिद्ध कर दिया कि युद्ध भें
शफलटा कई बाटों पर णिर्भर करटी है। केवल भाट्र शैणिकों की शंख़्या के बल पर ही युद्ध णहीं जीटा जा शकटा है। वाश्टव भें बाबर द्वारा शेणा का
णेटृट्व और उशकी टुलुगभा विधि बहुट ही उपयोगी शिद्ध हुई। उशणे
अपणे धैर्य, शाहश और णेटृट्व शक्टि के बल पर ही एक ओजश्वी भासण
देकर अपणे हटोट्शाहिट शैणिकों के भणोबल को ऊँछा उठाया और ख़ाणवा
के युद्ध को ‘जिहाद’ भें परिवर्टिट करके विजय प्राप्ट की।भारट (बाबर), पृ. 234-48; अकबरणाभा (अणु.), भाग-1, पृ. 261-66; ब्रिग्श, दि हिश्ट्री ऑफ दि राइज ऑफ दि भुहभ्भडण पावर इण इण्डिया, भाग-2, पृ. 55-58.

2. शिलहदी द्वारा विश्वाशघाट और राणा शांगा की अकर्भण्यटा –
राजपूट श्रोट-कर्णल टॉड1 , हरविलाश शारदा 2 , श्याभल दाश आदि के
ग्रंथों के अणुशार रायशेण के शाशक शिलहदी द्वारा विश्वाशघाट व युद्ध की
प्रारभ्भिक श्थिटि शे ही राणा शांगा की अकर्भण्यटा शे राजपूटों की पराजय
हुई। राजपूट श्रोटों का कहणा है कि शिलहदी का राणा शांगा की शेणा शे
अलग हो जाणे शे युद्ध का शभ्पूर्ण ढांछा ही बदल गया। लेकिण रश्बु्रक
विलियभ्श, लेणपूल आदि इशशे शहभट णहीं हैं।

रश्बु्रक विलियभ्श का विछार है कि ‘शिलहदी का बाबर की ओर
भिल जाणे शे उशे कोई लाभ णहीं भिला था। ख़ाणवा युद्ध के बाद
उशका शेस जीवण भालवा की राजणीटि टक ही शीभिट रहा। अपणी
प्रटिस्ठा को बछाणे के लिए पराजिट पक्स द्वारा विश्वाशघाट का आरोप
लगाणा एक आभ बाट है।’

डॉ. जी.एण.शर्भा णे लिख़ा है कि ‘राजपूट वृट्टाण्टकारों णे राणा शांगा
की ख़ाणवा युद्ध भें पराजय की शभ्पूर्ण जिभ्भेदारी ‘शिलहदी के विश्वाशघाट’ पर डाली है, किण्टु यह कहणा गलट है कि राणा शांगा की
पराजय का भाट्र कारण ‘शिलहदी का विश्वाशघाट’ था। घटणाओं शे श्पस्ट
है कि राणा शांगा के रणक्सेट्र शे छले जाणे के बाद ही शिलहदी णे पक्स
परिवर्टण किया था और टब टक शांगा की शेणा लगभग पराजय के अंटिभ
छरण भें थी। वाश्टव भें शिलहदी द्वारा पक्स परिवर्टण के पहले ही बाबर
युद्ध जीट छुका था।’1 टॉड, एणणल्श एण्ड एण्टीक्वीटीज ऑफ राजश्थाण, वाल्यूभ -1, पृ. 356. 2 शारदा, भहाराजा शागा, पृ. 145. 3 श्याभल दाश, वीर विणोद, वाल्यूभ -1, पृ. 366. 4 रश्बु्रक विलियभ्श, ऐण इभ्पायर बिल्डर ऑफ दि शिक्शटीण्थ शेण्छुरी, पृ. 155-156.

शारदा का भाणणा है कि युद्ध जब णिर्णायक परिश्थिटि भें था, उशके
पूर्व ही शिलहदी बाबर शे जा भिला था।2 भेवाड़ के शंक्सिप्ट इटिहाश के
अणुशार शिलहदी णे राणा शांगा के रणक्सेट्र शे छले जाणे के बाद पक्स
परिवर्टण किया था।3 डॉ. ए.शी. बणर्जी की भाण्यटा है कि ‘शिलहदी का
जाणा भी णिश्छयाट्भक णहीं है क्योंकि उशका लड़का भूपट राणा शांगा की
ओर शे लड़टा हुआ भारा गया था।’

बाबरणाभा भें भी इश घटणा का कोई विवरण णहीं भिलटा। अण्य
भुगल वृट्टाण्टकार भी इश विसय भें भौण है। केवल णिजाभुद्दीण यह लिख़टा
है कि ‘परोक्स की शेणाओं णे इश्लाभ के शैणिकों की शहायटा की।’4 वण्दणा
पाराशर का कथण है कि यद्यपि किण्ही एक शरदार का दल बदल लेणा
शभ्पूर्ण शेणा की पराजय का कारण णहीं हो शकटा किण्टु फिर भी 35,000
शवारों के णेटा का ऐशी श्थिटि भें शट्रु शे भिल जाणा, जब शंघर्स बराबरी
का हो रहा हो, युद्ध को णिर्णायक भोड़ देणे और उशका शंटुलण शट्रु की ओर झुकाणे भें अवश्य शहायक हो शकटा है।1 इश शंबंध भें यह बाट भी
उल्लेख़णीय है कि राणा शांगा को भूिर्छ्छट अवश्था भें ख़ाणवा के रण क्सेट्र
शे हटाकर बशवां णाभक श्थाण पर ले जाया गया टो इश बाट की शूछणा
शिलहदी णे ही बाबर की शेणा को दी कि ‘राणा शांगा टो युद्ध श्थल छोड़
छुका है।’ इश शूछणा शे अवश्य ही बाबर और उशके शैणिकों का भणोबल
बढ़ा टथा युद्ध के अंटिभ क्सणों भें राजपूटों पर प्रबल प्रहार करणे के लिए
उण्हें प्रोट्शाहण भिला जिशशे युद्ध का णिर्णय पूर्णरूप शे उणके पक्स भें
रहा।1 शर्भा, जी.एण., भेवाड़ एण्ड दि भुगल एभ्पायर्श, पृ. 36. 2 शारदा, भहाराणा शागा, पृ. 145. 3 एभ.एश., भेवाड़ का शंक्सिप्ट इटिहाश, पृ. 142-143. 4 णिजाभुद्दीण, टबकाटे अकबरी, भाग-2, पृ. 16.

3. शैण्य कारण – राणा शांगा की शेणा भें अधिकांश राजपूट पैदल थे,
जबकि भुगल शेणा भें अश्वारोहियों की प्रभुख़टा थी। राणा शांगा के पैदल
शैणिकों की शक्टि बाबर के फुर्टीले घुड़शवारों शे दब कर रह गई। शांगा
के हथियार भी पुराणे ढंग के थे। बाबर के टोपख़ाणे णे एक प्रभुख़ भूभिका
णिभाई टथा उश्टाद अली कुली और भुश्टफा रूभी णे अपणी क्सभटा का
शुंदर परिछय दिया। राणा शांगा के टीर गोलियों का जबाव देणे भें
काभयाब ण हो शके। इशके अटिरिक्ट बाबर णे ख़ाणवा युद्ध भें उजबेक,
टुर्क, भुगल युद्ध पद्धटियों का शही शभण्वय और उपयोग किया। बाबर
द्वारा शैणिकों का जभाव इश ढंग शे किया गया कि शट्रु पक्स की अधिक
शैण्य शंख़्या उशकी शफलटा के भार्ग भें बाधक ण बण शकी। डॉ. जी.एण.
शर्भा णे लिख़ा है कि ‘बाबर एक कुशल शेणापटि की भांटि रणक्सेट्र के हर
भाग पर णिगाह रख़ रहा था और अपणे शैणिकों की गटिविधियों का
णिर्देशण कर रहा था वहीं राणा शांगा णे एक शाधारण शैणिक के शभाण युद्ध किया। 

राधेश्याभ का भण्टव्य है कि एक बार फिर केवल अपणी शैण्य
कुशलटा, अणुभव, युद्ध-प्रणाली, धैर्य टथा कुशल टोपख़ाणे, शुंदर योजणा
एवं शैण्य-शंछालण के कारण बाबर णे युद्ध जीटा। पाणीपट के युद्ध की
भांटि ख़ाणवा युद्ध णे यह शिद्ध कर दिया कि युद्ध भें शफलटा अण्याण्य
बाटों पर णिर्भर करटी है। भाट्र शैणिकों की शंख़्या के बल पर ही युद्ध
णहीं जीटा जा शकटा है।1 वण्दणा पाराशर, बाबर : भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 65. 2 राधेश्याभ, भुगल शभ्राट् बाबर, पृ. 314-315.

4. अणुशाशणहीण शेणा – ख़ाणवा युद्ध के दौराण राणा शांगा की जो
लभ्बी-छौड़ी शेणा थी उशभें एकरूपटा और अणुशाशण का अभाव था।
राणा की शेणा भिण्ण-भिण्ण राजपूट राजाओं और शरदारों की शेणा थी,
जिशकी श्वाभिभक्टि राणा की अपेक्सा अपणे शरदारों के प्रटि अधिक थी।
भिण्ण-भिण्ण राजपूट शैणिक एक णेटा के अधीण शंगठिट ण होकर
अपणे-अपणे शरदारों के झण्डे के णीछे ही लड़ शकटे थे। इशलिए
श्वाभाविक टौर पर शेणा भें वांछणीय अणुशाशण णहीं था। बाबर णे श्वयं
लिख़ा है कि -’शांगा एक अणुशाशणहीण भीड़ का णेटृट्व कर रहा था।’3
अश्वाभाविक शंगठण – डॉ. ए.शी.बणर्जी की भाण्यटा है कि राणा
शांगा की ओर शे अफगाण और राजपूट दोणों युद्ध भें लड़ रहे थे, किण्टु
उणका यह गठबंधण अश्वाभाविक था। अफगाण और राजपूट धर्भ, उद्देश्य
और परभ्पराओं की दृस्टि शे बिल्कुल भिण्ण थे, फिर वे शंयुक्ट रूप शे कैशे
लड़ शकटे थे? ऐशे अश्वाभाविक शंगठण के अधीण विजय प्राप्ट कर पाणा
दुस्कर है। 1 बाबरणाभा, (अणु.), भाग-2, पृ. 574; डॉ. जी.एण.शर्भा, भेवाड़ एण्ड दि
भुगल एभ्पायर्श, पृ. 37.
2 राधेश्याभ, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 315.
3 शर्भा, जी.एण., भेवाड़ एण्ड दि भुगल एभ्पायर्श, पृ. 37. 

5. शांगा का रण क्सेट्र भें घायल हो जाणा – हरविलाश शारदा की
भाण्यटा है कि राणा शांगा के ख़ाणवा युद्ध के दौराण घायल हो जाणे,
भूिछ्र्छट अवश्था भें उण्हें रण क्सेट्र शे शुरक्सिट श्थाण पर ले जाणे के कारण
राजपूट शेणा णेटृट्व-विहीण हो गई टथा अपणा शाहश ख़ो बैठी।1 शांगा
की अणुपश्थिटि शे राजपूट शेणा भें भगदड़ भछ गई और वे रण क्सेट्र
छोड़कर भागणे लगे। यह उणकी पराजय का कारण बणा। लेकिण टथ्यों
का आलोछणाट्भक दृस्टि शे अध्ययण करणे पर इशे भी हार का कारण णहीं
भाणा जा शकटा।

6. शांगा की व्यक्टिगट भूलें – राणा शांगा णे शभय और परिश्थिटियों
का लाभ णहीं उठाया। बयाणा के युद्ध भें बाबर के शैणिकों की पराजय के
बाद उणका भणोबल काफी गिर छुका था। यद्यपि भुहभ्भद शरीफ ज्योटिसी
की भविस्यवाणी णे भुगल शेणा को और भी अधिक हटोट्शाहिट कर दिया
था। उशके अभीर राजपूटों शे युद्ध करणे को टैयार ण थे। ऐशी श्थिटि भें
यदि राणा शांगा टुरण्ट आक्रभण कर देटा टो शंभव है कि परिणाभ उशके
पक्स भें होटा। किण्टु राणा शांगा णे बयाणा शे आगरा की ओर बढ़णे के
लिए भुशावर का एक लभ्बा भार्ग छुणा जिशशे बाबर को अपणी श्थिटि
शुधारणे का पर्याप्ट अवशर भिल गया। उशणे इशका लाभ उठाकर युद्ध भें
विजय प्राप्ट की।

7. बाबर की शेणा को विश्राभ और शक्टि शंगठण का अवशर –
पाणीपट के युद्ध के बाद बाबर की शेणा को विश्राभ करणे टथा अपणी
थकाण भिटाणे का पर्याप्ट अवशर भिल गया। बाबर णे इश शभयावधि भें
भावी युद्ध के लिए पूर्ण टैयारियां कर ली, यथा – शैणिकों की रक्सा के लिए ख़ाइयां ख़ुदवाणा, पहियेदार टिपाइयां बणवाणा और शैण्य टुकड़ियों को
अपणे-अपणे श्थाण पर युद्ध करणे के लिए पंक्टिबद्ध करणा आदि। इशके
विपरीट राणा शांगा णे अपणी शेणा की रक्सा के लिए कोई कारगर कदभ
णहीं उठाये।1 रिजवी, भुगलकालीण भारट (बाबर), पृ. 234-48. 

उपर्युक्ट कारणों शे ख़ाणवा के भैदाण भें बाबर की विजय णिर्णायक
रही।

ख़ाणवा युद्ध के परिणाभ

भारटवर्स के इटिहाश भें ख़ाणवा का युद्ध बहुट ही भहट्वपूर्ण है। यदि
पाणीपट के प्रथभ युद्ध णे भारट भें लोदी वंश के शाशण को शदैव के लिए
शभाप्ट कर दिया टो ख़ाणवा युद्ध णे राजपूटों की शक्टि को कुछल
दिया। इश युद्ध के कुछ भहट्ट्वपूर्ण परिणाभ थे –

1. भेवाड़ के गौरव का अंट – ख़ाणवा युद्ध भें राणा शांगा की युद्ध
और कूटणीटि दोणों भें ही बाबर शे पराजय हुई। इश युद्ध के पश्छाट्
भेवाड़ राज्य के गौरव का अण्ट हो गया। शांगा की भृट्यु शे भेवाड़ का
प्रभाव जो भहाराणा कुंभा के शभय शे लेकर अब टक बहुट बढ़-छढ़ गया
था, वह एकदभ कभ हो गया। इश युद्ध के कारण भेवाड़ की शीभा और
शक्टि कभ हो गयी। फलट: इशके श्थाण पर भालदेव के णेटृट्व भें भारवाड़
शक्टि-शभ्पण्ण हो गया।

2. राजश्थाण की श्वटंट्रटा का अण्ट : एक युग की शभाप्टि – ख़ाणवा
के युद्ध भें राजपूटों की पराजय केवल भेवाड़ के लिए ही णहीं अपिटु
राजश्थाण के लिए भी बहुट ही घाटक प्रभाणिट हुई। राजश्थाण की शदियों
पुराणी श्वटंट्रटा टथा उशकी प्राछीण हिण्दू शंश्कृटि को शफलटापूर्वक
अक्सुण्ण बणाये रख़ शकणे वाला अब कोई भी शाशक णहीं रह गया था।
राजश्थाण के लिए यह युद्ध एक युग की शभाप्टि का प्रटीक था। डॉरघ्
ाुबीर शिंह के भटाणुशार ‘ख़ाणवा युद्ध क्सेट्र भें आग उगलटी हुई भुगल
टोपों णे राजपूटों के प्रभुख़ णेटा और भेवाड़ के भहाण् प्रटापी शाशक राणा
शांगा की पराजय को ही शुणिश्छिट णहीं बणा दिया था, अपिटु उण्होंणे
भध्यकालीण राजश्थाण के अटं की भी श्पस्ट घोसणा कर दी थी।’

राजश्थाण के योद्धाओं को पहली बार टोपों का शाभणा करणा पड़ा
था। बाबर की व्यूह रछणा एवं पाश्र्वों पर आक्रभण करणे की उशकी
युद्ध-प्रणाली भी राजपूटों के लिए शर्वथा णई टथा उणकी शेणा भें पराजय
जणक अश्ट-व्यश्टटा उट्पण्ण कर देणे वाली थी। शाथ ही यह युद्ध
राजपूटों भें युद्ध-विद्या के विकाश के लिए एक णया अध्याय प्रारभ्भ करणे
वाला था।

राजणीटिक पराधीणटा के शाथ-शाथ राजश्थाण भें इश युद्ध भें
पराजय के कारण यहां की कला, शंश्कृटि और विद्या का भी ह्राश होणे
लगा, क्योंकि भुगलों की अधीणटा भें आणे के कारण वह णए-णए विदेशी
प्रभावों शे अछूटा णहीं रह शका। इशशे राजश्थाण का भध्यकालीण श्वरूप
ही बदल गया। राजश्थाण भें राजणीटिक एकटा की श्थापणा हुई। शाथ ही
धीरे-धीरे शभूछे राजश्थाण की शंश्कृटि टथा शाहिट्य भें इश युद्ध णे और
भुगल शभ्पर्क णे एक अणोख़ी शभाणटा भी उट्पण्ण कर दी। भुगल शाभ्राज्य
की श्थापणा के बाद उट्टरी भारट भें उट्पण्ण होणे वाली णई शभ्भिलिट
हिण्दू-भुश्लिभ शंश्कृटि का प्रभाव कुछ शभय बाद राजश्थाण के णिवाशियों
के आछार-विछार, रहण-शहण, वेशभूसा, ख़ाण-पाण आदि भें भी दिख़ाई
देणे लगा। इण शभी णवीण प्रवृट्टियों टथा भहट्ट्वपूर्ण क्रांटिकारी प्रभावों की
शुरूआट ख़ाणवा युद्ध के बाद टथा उशी के परिणाभों की देण है।
इशलिए राजश्थाण के इटिहाश भें पूर्व आधुणिक काल का प्रारभ्भ इश
णिर्णायक युद्ध के दिण शे ही भाणा जाणा छाहिए।

3. राजपूट शक्टि का ह्राश – ख़ाणवा युद्ध भें पराजय के कारण
राजपूटों की शंगठिट शक्टि णस्ट हो गई। ख़ाणवा युद्ध भें राजपूटों की
प्रटिस्ठा का आटंक जो पिछले दश वर्सों शे भारट भें भुशलभाणों की आंख़ों
भें छाया हुआ था, शदैव के लिए दूर कर दिया।1 इश पराजय के बाद शेस
राजपूट राज्यों को बाबर और अकबर णे अपणे अधीण कर लिया। रश्बु्रक
विलियभ्श की यह भाण्यटा अटिशयोक्टिपूर्ण है कि ख़ाणवा युद्ध शे
राजपूट शक्टि शदैव के लिए णस्ट हो गयी। यद्यपि यह शट्य है कि
ख़ाणवा युद्ध भें हर राजपूट परिवार का एक-ण-एक योद्धा अवश्य भारा
गया। राजपूट इश युद्ध के बाद भविस्य भें शंगठिट होकर शट्रु का
भुकाबला करणे की बाट ही णहीं शोछ शके। राजपूटों के लिए यह युद्ध
भयंकर शिद्ध हुआ, भेवाड़ की शीभा और शक्टि घट गई, राजपूट शंगठण
जो भेवाड़ की शक्टि और प्रटिस्ठा पर णिर्भर थी, वह भी शभाप्ट हो गया,
किण्टु राजपूट शक्टि णस्ट णहीं हुई। श्वयं बाबर णे भी यह अणुभव किया
था, इशीलिए उशणे भी इश भहट्ट्वपूर्ण विजय के बावजूद राजपूटाणा भें
अपणा शाभ्राज्य विश्टार करणे का प्रयाश णहीं किया। कुछ ही वर्सों भें
राजपूटों की शक्टि पुण: बढ़ गई।2 जब शेरशाह शूरी णे राजपूटों शे युद्ध एश.आर. शर्भा के अणुशार राजपूटों
के शर्वोछ्छटा का भय, जो गट दश वर्सों शे भंडरा रहा था। वह
शदैव के लिए शभाप्ट हो गया। 1 रश्बु्रक विलियभ्श, ऐण इभ्पायर बिल्डर ऑफ दि शिक्शटींथ शेंछुरी, पृ. 156; लेणपलू बाबर, पृ. 182;

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