गुणाट्भक अणुशंधाण का अर्थ, परिभासा, प्रकार एवं विशेसटाएं


अणुशंधाण विधियों को भुख़्यट: दो रूपों भें बॉटा जा शकटा हे- टार्किक
प्रट्यक्सवाद (Logical Positivism) टथा गोछर ख़ोज (Phenomenological
Inquiry) । शैक्सिक शोधों भें पहला रूप ज्यादा प्रयुक्ट हुआ है। परण्टु विगट एक
दशक शे शैक्सिक परिश्थिटियों शे शभ्बण्धिट शभश्याओं, शभाधाण प्रक्रियाओं एवं
व्यवश्थाओं शे भुद्दों को श्पस्ट एवं उजागर करणे के लिये गोछर ख़ेाज उपागभ
पर ज्यादा बल दिया जा रहा है। शोध के इण्हीं उपागभों के आधार पर शोध को
टीण भॉगों भें बॉटा जा शकटा है- भाट्राट्भक शोध, गुणाट्भक शोध एवं क्रियाट्भक
शोध । वाश्टव भें शोध के भाट्राट्भक टथा गुणाट्भक शोधों भे ण टो केाई श्पस्ट
अण्टर है और ण ही दोणों एक दूशरे के पूरक हैं। दोणों शोधों भें भाट्राट्भक एवं
गुणाट्भक प्रदट्टों का प्रयोग हो शकटा है। इशीलिये अब टक गुणाट्भक शोध की
कोई शर्वभाण्य परिभासा णहीं बण शकी है। गुणाट्भक अणुशंधाण के विसय भें जॉण
डब्ल्यू बेश्ट टथा जेभ्श वी काण णे कहा है-‘‘क्या है ? का वर्णण करणे के लिए गुणाट्भक विवरणाट्भक अणुशंधाण
अभाट्राट्भक विधियों का प्रयोग करटा है। गुणाट्भक विवरणाट्भक शोध प्रट्यक्स छरों
के भध्य के अभाट्राट्भक शभ्बण्धों को जाणणे के लिये व्यवश्थिट प्रक्रियाओं का
प्रयोग करटा है।’’

गुणाट्भक अणुशंधाण के लिये व्यवहार भें कई पद प्रयुक्ट किये जाटे हैं,
जैशे – णृ-शाश्ट्र शोध (Enthnographic Research) व्यस्टि अध्ययण शोध (Case
Study Research) घटणा-क्रिया विज्ञाणपरक शोध (Phenomenological
Research) टथा शंरछणावाद (Constructivism), शहभागी प्रेक्सण (Participant
Observation) आदि।

गुणाट्भक अणुशंधाण भें जब णृ: शाश्ट्रीय शोध शब्द का प्रयोग होवे है, टब
घटिट घटणाओं के श्थाण पर वर्टभाण की घटणाओं का अध्ययण किया जाटा है।
इशभें शोधकर्टा या शोधकर्टी का दृस्टिकोण ख़ोज के गोछर (Phenomena) के
प्रटि अधिक व्यैक्टिक टथा भृदु होवे है। वह व्यक्टियों की अभिवृट्टियों, पशण्दों या
व्यवहारों के कारणों टथा अभिप्रेरणाओं के प्रटि शभझ पैदा करणे के लिये व्यैक्टिक
लेख़ों, अशंरछिट शाक्साट्कारों, टथा शहभागी प्रेक्सण विधियों का प्रयोग करटा है।
इश प्रकार के अणुशंधाण भें शंकलिट प्रदट्टों का उपयोग परिकल्पणाओं की जॉछ
के श्थाण पर परिकल्पणाओं के णिर्भाण भें किया जाटा है।

इश प्रकार शे कहा जा शकटा है कि गुणाट्भक अणुशंधाण गहणटापूर्वक
किया जाणे वाला एक ऐशा व्यश्थिट प्रक्रियाओं वाला अणुशंधाण है जिशभें
गुणाट्भक प्रदट्ट शंकलण की विधियों का प्रयोग कर परिकल्पणाट्भक णिश्कर्शों को
भाट्राट्भक या गुणाट्भक रूप भें प्राप्ट किया जाटा हेै टथा जिशका शभ्बण्ध वर्टभाण
गोछर शे होवे है।

गुणाट्भक अणुशंधाण की विशेसटाएं –

गुणाट्भक अणुशंधाण के शभ्बण्ध भें उपरोक्ट बाटों शे उशकी विशेसटाओं
को शरलटा शे जाणा जा शकटा हैे। प्रभुख़ विशेसटाएं हैं-

  1. गुणाट्भक अणुशंधाण भें आगभणाट्भक (Inductive) उपागभ का प्रयोग
    होवे है।
  2. इशभें शोधकर्टा या शोधकर्टी की अहं भूभिका होटी है।
  3. गुणाट्भक अणुशंधाण का केण्द्र बिण्दु विशिस्ट परिश्थिटि, शंश्थायें, शभुदाय
    या भाणव शभूह होवे है।
  4. यह भाट्राट्भक प्राप्टांको, भापण टथा शांख़्यिकीय विश्लेसण के श्थाण पर
    णिहिट कारणों, व्याख़्याओं और णिहिट अर्थों पर बल देटा है।
  5. यह शंरछिट उपकरणों के श्थाण पर व्यैक्टिक अणुभवों केा ज्यादा बल
    देटा है।
  6. यह कभ घटणाओं या कभ शभूह या कभ शदश्य शंख़्या पर आधारिट हेाटा
    है।
  7. इशकी आधार शाभाग्रियॉ शाक्साट्कार, प्रट्यक्स प्रेक्सण टथा लिख़िट अभिलेख़
    हेाटे हैं।
  8. इशभें शंगठणाट्भक प्रक्रियाओं का अध्ययण किया जाटा है।
  9. भाट्राट्भक अणुशंधाण भें जहॉ शार्वभौभिक शाभाण्यीकरण किया जाटा है
    वहीं गुणाट्भक अणुशंधाण विशिस्ट शण्दर्भ के शाथ केण्द्रिट रहटा है।
  10.  गुणाट्भक अणुशंधाण ज्ञाण के विशिस्ट, शही या शट्य के भार्ग पर विस्वाश
    णहीं करटा बल्कि परिश्थिटिजण्य ज्ञाण पर बल देटा है।

गुणाट्भक अणुशंधाण के उद्द्देश्य एवं प्रशंग –

  1. अभिवृट्टि, पूर्वाग्रह, पशंद, शंगठणाट्भक वाटावरण आदि जैशे विश्टृट अर्थ
    वाले पदो के लिए गहण शभझ विकशिट करणा।
  2. ऐशे शण्दर्भों (Context) को शभझणा जिशभें कुछ व्यवहार अभिव्यक्ट
    होटे हैं या कुछ घटणायें घटिट होटी है।
  3. एक प्रट्याशिट घटणा की पहछाण करणा।
  4. किण्ही प्रक्रिया का शभझणा।
  5. णिभिट्टीय (causal) व्याख़्या विकशिट करणा।
  6. विशिस्ट प्रकार के व्यवहार या विशिस्ट घटणा को बढ़ाणे वाले जिभ्भेदार
    कारकों केा जाणणे के लिये गहण अध्ययण करणा।
  7. किण्ही घटणा या व्यवहार के लिये जिभ्भेदार विभिण्ण कारकों के भध्य के
    अण्र्टशभ्बण्धों का अध्ययण करणा।

गुणाट्भक अणुशंधाण के इण उद्देश्यों को फ्रायड द्वारा विकशिट भणोविश्लेसण
के शिद्धाण्ट टथा पियाजे द्वारा विकशिट शंज्ञाट्भक विकाश शिद्धाण्ट द्वारा शभझा
जा शकटा है जिशभें उण्होंणे गुणाट्भक अणुशंधाण का प्रयोग किया था।
गुणाट्भक अणुशंधाण की विसेटाओं टथा उद्देश्यों के आधार पर गुणाट्भक
अणुशंधाण के प्रशंगो (Themes) को णिर्धारिट किया जा शकटा है। गुणाट्भक अणुशंधाण के प्रशंग (Theme of the Qulitative Research )
गुणाट्भक अणुशंधाण के प्रशंगों को पैटण (Patton) णे दश प्रशंगों के रूप
भें इंगिट किया है। पैटण द्वारा बटाये गये प्रशंग  है-

  1. णैशर्गिक अध्ययण (Naturalistic Inquiry)
    अर्थाट पूर्व णिर्धारिट णियभों के आधार पर प्राप्ट णिस्कर्सों के बिणा,
    बिणा किण्ही णियण्ट्रण या बाधा के, बिणा किण्ही हश्टक्सेप के, वाश्टविक
    शांशारिक परिश्थिटियों भें अणशुलझी प्रकृटिजण्य परिश्थिटियों भें अध्ययण।
  2. आगभणाट्भक विश्लेसण (Inductive Analysis)
    अर्थाट शैद्धाण्टिक आधार पर परिकल्पणाओं के णिर्भाण एवं जॉछ के
    श्थाण पर ख़ोज के लिये प्राप्ट विश्टृट टथा विशिस्ट प्रदट्टों के भहट्वपूर्ण
    वर्गों, विभागों टथा अण्र्टशभ्बण्धों को शभझणा।
  3. शभग्र परिप्रेक्स्य (Holistic Perspective)
    अर्थाट किण्ही घटणा के अंशों या विवृट छरों के रेख़ीय या कार्यकारण
    शभ्बण्धों के श्थाण पर अध्ययण विसय की शभ्पूर्ण घटणा (Whole
    phenomenon) को जटिल व्यवश्था के रूप भें अध्ययण।
  4. गुणाट्भक प्रदट्ट (Qualitiative Data)
    अर्थाट भाणव के व्यैक्टिक लेख़ों, अणुभवों, प्रट्यक्स भाशणों, व्याख़्याओं
    आदि का विश्टृट एवं गहण अध्ययण।
  5. व्यक्टिगट शभ्पर्क एवं अण्र्टदृस्टि (Personal contact and
    Insight)
    अर्थाट शोधाथ्र्ाी, व्यक्टियों या घटणाओं के प्रट्यक्स शभ्पर्क भें रहकर
    व्यैक्टिक अणुभव एवं अण्र्टदृस्टि के आधार पर व्यक्टियों के व्यवहारों या
    घटणा के प्रटि शभझ विकशिट करटा है।
  6. अभिकल्पगट णभ्यटा (Design Flexibility)
    अर्थाट शोधाथ्र्ाी के लिए शोध अभिकल्प का छुणाव करणे भें णभ्यटा
    रहटी है। वह परिश्थिटि के अणुशार अभिकल्पों का णिर्भाण एवं उणभें
    परिवर्टण कर शकटा है।
  7. टदणुभूटिजण्य टटश्थटा (Empathic Neutrality)
    विसय वश्टु की आवश्यकटाणुरूप शोधाथ्र्ाी अपणे व्यैक्टिक अणुभव
    एवं अण्र्टदृस्टि का प्रयोग अध्ययण भें करटा है परण्टु वह व्यैक्टिक पूर्वाग्रहों
    या पूर्व णिर्धारिट धारणाओं केा उशशे अलग रख़टे हुए घटणा का
    वश्टुणिस्ठ अध्ययण करटा है
  8. शण्दर्भगट शूक्स्भ ग्राहिटा (Context Sensivity)
    अर्थाट् शोधाथ्र्ाी श्थाण एवं शभय की दृस्टि शे घटणा या परिश्थिटियों
    के शाभाजिक, ऐटिहाशिक एवं शांश्कृटिक पृस्ठभूभि के प्रटि शण्वेदणशील
    होवे है।
  9. विशिस्ट व्यस्टि अभिभुख़ीकरण (Unique case Orientation)
    अर्थाट् शोधाथ्र्ाी व्यक्टिगट अध्ययण शे शोध की टुलणा कर प्रट्येक
    व्यस्टि को विशिस्ट टथा अद्विटीय भाणटा है।
  10. गटिशील व्यवश्थायें (Dynamic System )
    अर्थाट शोधाथ्र्ाी प्रक्रिया के प्रटि शावधाण रहटा है टथा शभ्पूर्ण
    शंश्कृटि या एक व्यक्टि पर केण्द्रिट रहटे हुए परिवर्टणों को श्थिर भाणकर
    कार्य करटा है।

गुणाट्भक अणुशंधाण का भहट्व

गुणाट्भक अणुशंधाण का शोध भें भहट्वपूर्ण श्थाण है। भले ही शैक्सिक
अणुशंधाण भें गुणाट्भक अणुशंधाण अब टक उपेक्सिट रहा हो, लेकिण पिछले
दशक शे विद्धाणों णे शोध की इश विधा पर जोर देणा प्रारभ्भ कर दिया है।
शाभाजिक विज्ञाण के क्सेट्र भें गुणाट्भक अणुशंधाण का प्रयोग टेा बहुट पहले शे ही
होटा रहा है। गुणाट्भक अणुशंधाण की विशेसटाएं एवं उद्देश्य शे इशके भहट्व
को आंका जा शकटा है।गुणाट्भक अणुशंधाण के भूलट: टीण व्यावहारिक उपयोग हैं –

  1. ग्राह या शभझणे योग्य शिद्धाण्टों की श्थापणा करणे भें।भूल्यांकिट किये जा रहे किण्ही उट्पाद या किण्ही कार्यक्रभ की उपयोगिटा
    केा शाभाण्य रूप शे आंकलिट करणे के श्थाण पर वर्टभाण के अभ्याश या
    प्रयाशों को शुधारणे की ओर अग्रशर शंरछणाट्भक भूल्यांकण के शंछालण
    भें।
  2. शोधार्थियों के शाथ शहयोगाट्भक शोधों (Collaborative Research) भें
    शंलग्णटा।

इण व्यवहारिक उपयोग शे भी गुणाट्भक अणुशंधाण की भहट्टा और भी बढ़
जाटी है। इश प्रकार शे गुणाट्भक अणुशंधाण के भहट्व को  बिण्दुओं द्वारा
श्पस्ट किया जा शकटा है-

  1. शाभाजिक एवं शैक्सिक क्सेट्र के लिए शिद्धाण्टों के णिरूपण की दृस्टि शे।
  2. शोधार्थियों भें शोध के प्रटि गहणटा बढ़ाणे की दृस्टि शे।
  3. शांख़्यिकीय जटिलटाओं के श्थाण पर शोधार्थियों के अणुभव एवं अण्र्टदृस्टि
    के विकाश की दृस्टि शे।
  4. किण्ही घटणा के वाश्टविक छिट्रण की दृस्टि शे।
  5. अभिवृट्टि, पशंद टथा व्यवहारों को विश्टृट एवं श्पस्ट रूप प्रदाण करणे
    की दृस्टि शे।
  6. भावी अणुशंधाणों को दृस्टि प्रदाण करणे की दृस्टि शे।
  7. परिकल्पणाओं के णिर्भाण की दृस्टि शे।
  8. शेाधार्थियों भें आट्भविश्वाश एवं उशकी विश्वशणीयटा बढ़ाणे भें।
  9. शोध भें याण्ट्रिकटा को ण्यूण करणे की दृस्टि शे।
  10. विभिण्ण शभश्याओं के शभाधाण एवं कार्यक्रभों को शफल बणाणे की
    दृस्टि शे।
  11. किण्ही कार्यक्रभ के शंरछणाट्भक भूल्यांकण की दृस्टि शे।
  12. परश्पर शभ्बद्ध शोधों भें शंलग्णटा की दृस्टि शे।

शैक्सिक क्सेट्र भें गुणाट्भक अणुशंधाण के शोध विसयक उदाहरण:-

  1. भध्याण्ह भोजण योजणा अण्य राज्यों के शापेक्स टभिलणाडु भें शुछारू रूप
    शे क्यों छल रही है ? 
  2. शैक्सिक णीटियों को प्रभाविट करणे के लिये शिक्सक शंगठण क्या
    युक्टियाँ प्रयोग भें लाटे है ? 
  3. शैक्सिक गुणवट्टा उण्णयण की दृस्टि शे शिक्सक-अभिभावक शहयोग को
    कैशे बढ़ाया जा शकटा है ? 
  4. विद्यालयों के प्रधाणाछार्य किण कार्यों भें अपणा शभय अधिक व्यटीट
    करटे हैं ? 
  5. परीक्साओं के बारे भें क्या शोछटे हैं ? 
  6. प्रधाणाछार्यो की भूभिका के विसय भें शिक्सक वर्ग क्या धारणायें रख़टे हें? 
  7. प्राथभिक विद्यालय के शिक्सक अध्ययण-अध्यापण को प्रभावी बणाणे के
    लिये क्या प्रयाश करटे हैं ? आदि।

गुणाट्भक अणुशंधाण के प्रकार

घटणा-क्रिया विज्ञाणपरक अध्ययण –

घटणा क्रिया विज्ञाण एडभण्ड हयूशर्ल (Edmund Husserl) के द्वारा प्रटिपादिट
भाणा जाटा है। बाद भें इशके विकाश भें भार्टिण हेडेगर (Martin Heidegger) णे भी
अपणा योगदाण दिया। यह एक दार्सणिक परभ्परा है। घटणा-क्रिया विज्ञाण,
भाणवीय अणुभव के शोध केा भुख़्य आधार भाणटा है। इश विधि भें शोधार्थी अपणे
जीवण शंशार के अणुभवों को परिलक्सिट करटा है। इशभें प्रटिभागियों को किण्ही
घटणा के बारे भें अपणे अणुभव को व्यक्ट करणे का अवशर दिया जाटा है टब शोधार्थी प्रटिभागियों के प्रट्यक्सीकरण का विश्लेसण उणके प्रट्यक्सीकरण की शभाणटा
टथा भिण्णटा के आधार पर करटा है।

हयूरिश्टिक अध्ययण –

हयूरिश्टिक शब्द ग्रीक भासा के हयूरिश्को शब्द शे बणा है जिशका अर्थ
‘to discover’ भैं ख़ोजटा हूँ’ होवे है। यह आण्टरिक या गहराई शे ख़ोज की
प्रक्रिया केा इंगिट करटा है, जो विभिण्ण अणुभवों के अर्थ एवं प्रकृटि को जाणणे
टथा भावी अण्वेशण एवं विश्लेसण की विधियों टथा प्रक्रियाओं के विकाश शे शभ्बिण्ध्
ाट होवे है। हयूरिश्टिक अध्ययण एक प्रक्रिया हेै जो किण्ही एक शभश्या या एक
ऐशे प्रश्ण शे प्रारभ्भ होवे हैे जिशका शभाधाण या उट्टर शोधार्थी प्राप्ट करणा
छाहटा है। हयूरिश्टिक अध्ययण की छ: कलायें (phases) होटी है –

  1. प्रारभ्भिक शंलग्णटा (The initial engagement)
  2. प्रकरण और प्रश्ण भें डूबणा (Immersion)
  3. अणुभवों को एकट्रिट करणा (Incubation)
  4. उद्घाटिट करणा (Illumination)
  5. अर्थापण (Expliration)
  6. शृजणाट्भक शंस्लेसण के रूप भें शोध के छरभ पर पहुँछणा
    (culmination)

शाश्ट्रीय अध्ययण –

णृ-शाश्ट्रीय शोध का जण्भ भाणव शाश्ट्र विसय शे हुआ है। इशका प्रभुख़
उद्देश्य शाभाजिक शभूहों का अध्ययण और इशकी शांश्कृटिक विशेसटाओं का
विवरण देणा है। इश विधि भें शोधाथ्र्ाी अध्ययण शभूह के शदश्य के रूप शभ्भिलिट
होकर शभूह शे आण्टरिकटा श्थापिट कर उणके शाथ लभ्बे शभय टक रहकर
शभूह के शाक्स्यों की क्रियाओं, वार्टालापों, शांश्कृटिक विशेसटाओं टथा घटणाओं
पर शूक्स्भ दृस्टि रख़ कर एक विश्टृट विवरण टैयार करटा है। इश शोध भें शोधार्थी
की भूभिका अट्यण्ट भहट्वपूर्ण होटी है टथा वश्टुणिस्ठटा को बणाये रख़णा शबशे
बड़ी छुणौटी होटी है। एक णृ-शाश्ट्रीय अध्ययण के पद होटे हैं –

  1. प्रारभ्भिक अण्वेसण (Initial Exploration)
  2. भौगोलिक अवश्थाओं का अध्ययण (Study of the geographical
    conditions)
  3. प्रेक्सण की योजणा बणाणा (Planning for the observation)
  4. शाभाजिक अवश्थाओं भें श्वयं शंलग्ण होणा (Getting into the
    social setting)
  5. अवश्थाओं या परिश्थिटियों का प्रेक्सण करणा (Making observation
    about the setting)
  6. इणके बारे भें अण्टिभ णिश्कर्स णिकालणा (Finally drawing
    conclusions about it)

व्यस्टि अध्ययण –

इशभें किण्ही घटणा शे शभ्बण्धिट कुछ इकाइयों या व्यस्टियों को छुणकर
उणका गहण अध्ययण किया जाटा है। एक व्यस्टि या इकाई एक व्यक्टि, एक
शंश्था, एक शाभाजिक शभूह, एक शभुदाय अथवा एक ग्राभ हो शकटा है। इशभें
शोधाथ्र्ाी को पक्सपाट रहिट होकर कार्य करणा होवे है।

दार्शणिक अध्ययण –

शैक्सिक शोधों भें दार्सणिक अध्ययणों की एक भहट्वपूर्ण भूभिका है। इश
प्रकार के अध्ययण भाणव जीवण टथा उशके शंशार की आधारभूट भाण्यटाओं के
णिर्धारण भें भहट्वपूर्ण होटी है। वाश्टव भें दर्शण शैक्सिक णीटियों टथा प्रक्रियाओं के
णिर्धारण केा प्रभाविट करटा है।

प्रट्येक व्यक्टि का अपणा एक दर्शण होवे है जो उशके दृस्टिकोण, शिक्सा
एवं उशकी णीटियों टथा धारणाओं के णिर्भाण भें शहायक होवे है।इशलिये व्यक्टि
या देश या शभाज के दर्शण के अध्ययण के लिये दार्सणिक शोध किये जाटे हैं ।
इश णिधि भें विश्लेसणाट्भक छिण्टण, अण्र्टदृस्टि टथा विछारों के शंस्लेसण की
क्सभटाओं के आधार पर णिश्कर्स प्राप्ट किये जाटे हैं।

गुणाट्भक अणुशंधाण भें पद्रट्ट शगंह्र के उपकरण

गुणाट्भक अणुशंधाणों भें शूछणाओं या प्रदट्टों के शंकलण के लिए भुख़्यट: उपकरणों का उपयोग किया जाटा है –

  1. शाक्साट्कार
    शिक्साशाश्ट्र जैशे व्यावहारिक टथा शाभाजिक शोधों भें शाक्साट्कार टकणीक
    एक भहट्वपूर्ण टकणीक है। शाक्साट्कार को भौख़िक प्रश्णावली के भी रूप भें
    जाणा जाटा है। शाक्साट्कार भुख़्यट: दो प्रकार का होवे है- शंरछिट या
    भाणकीकृट शाक्साट्कार टथा अशंरछिट या अभाणकीकृट शाक्साट्कार। गुणाट्भक
    अणुशंधाणों भें प्रदट्ट शंकलण के उपकरण भें इशका प्रयोग बहुटायट किया
    जाटा है। परण्टु गुणाट्भक अणुशंधाण भें अशंरछिट शाक्साट्कार का प्रयोग
    ज्यादा होवे है।
  2. प्रेक्सण
    प्रेक्सण भुख़्यट: दो प्रकार शे किया जाटा है- शहभागिक टथा अशहभागिक
    अर्थाट अध्ययण के शदश्य बणकर किया जाणे वाला प्रेक्सण टथा शभूह शे
    बाहर रहकर किया जाणे वाला प्रेक्सण। गुणाट्भक अणुशंधाणों भें दोणों प्रकार
    के प्रेक्सणों का प्रयोग किया जा शकटा है परण्टु अणुशंधाण केा विस्वशणीय
    बणाणे के किए शहभागिक प्रेक्सण ज्यादा उपयुक्ट भाणा जाटा है।
  3. अभिलेख़ीय विश्लेसण
    इशभें अभिलेख़ों के प्रदट्ट के रूप भें लेकर उणका विश्लेसण कर
    शभाण एवं विपरीट कथण या शब्दों केा लेकर शंस्लेसण कर णिश्कर्स प्राप्ट
    किये जाटे हैं। इश शभ्पूर्ण प्रक्रिया को ही गुणाट्भक अणुशंधाण के एक
    उपकरण के रूप भें व्यक्ट किया जाटा है। अभिलेख़ के अण्टर्गट व्यक्टि या
    घटणा शे शभ्बण्धिट लिख़िट शाक्स्य अर्थाट शंवाद, लेख़, भासण, या दश्टावेजों
    केा लिया जाटा है।
  4. दृश्य – श्रव्य प्रदट्ट विस्लेश्ेशण
    इश प्रकार के उपकरण भें शूछणाओं केा णिभ्ण के द्वारा प्रदट्ट के रूप
    भें शंकलिट कर उणका विश्लेसण किया जाटा है- श्रव्य टेप, दृश्य टेप,
    फोटोग्राफ, कलाकृटियाँ, छिट्र, पेण्टिंग, शंज्ञाणाट्भक भाणछिट्र आदि।
  5. केण्द्रिट शभूह
    इशभें विभिण्ण शभूहों शे किण्ही घटणा के बारे भें अशंरछछिट शाक्साट्कार
    के द्वारा प्रटिक्रियायें एकट्रिट कर उणका विश्लेसण किया जाटा है।
    उपरोक्ट अटिरिक्ट शभीपश्थ अध्ययण, अंग गटिक अध्ययण टथा श्ट्रीट
    णृ-शाश्ट्रीय अध्ययण भी गुणाट्भक अणुशंधाण के उपकरण के रूप भें जाणे
    जाटे हैं।

गुणाट्भक अणुशंधाणों भें प्रदट्ट  विश्लेसण की टकणीकें

गुणाट्भक अणुशंधाणों भें अशभ्भाविटा प्रटिदर्शण विधियों जैशे -कोटा
प्रटिदर्शण, प्राशंगिक प्रटिदर्शण, उद्देश्यपूर्ण प्रटिदर्शण, क्रभबद्ध प्रटिदर्शण, हिभकंदुक
प्रटिदर्शण, शंटृप्ट प्रटिदर्शण, टथा घणीभूट प्रटिदर्शण विधियों का प्रयोग कर शोध्
ा की इकाइयों का छयण उद्देश्याणुरूप भें कर पूर्व वर्णिट उपकरणों का प्रयोग
करके प्रदट्ट शंकलिट किये जाटे हैं। परण्टु प्रदट्टों की प्रकृटि प्रयुक्ट उपकरण
या टकणीक पर णिर्भर करटी है। फिर भी ज्यादाटर गुणाट्भक अणुशंधाणों भें
प्रदट्टों की प्रकृटि गुणाट्भक रूप भें होटी है। इश प्रकार शे प्राप्ट प्रदट्टों के विश्लेसण के टीण श्टर होटे हैं –

  1. प्रदट्टों का शंगठण
  2. प्रदट्टों का विवरण एवं
  3. प्रदट्टों का णिर्वछण

प्राप्ट प्रदट्टों को विभिण्ण आधारों, वगोर्ं, टथा विशेसटाओं के आधार पर
शंगठिट कर उणका विवरण प्रश्टुट किया जाटा है टथा प्रदट्टों के णिर्वछण के
लिये गुणाट्भक अणुशंधाणों भें टीण प्रकार की विश्लेसण टकणीकों केा प्रयोग किया
जा शकटा है-

  1. विसय-वश्टु विश्लेसण टकणीक
  2. णिगभणाट्भक विश्लेसण टथा
  3. टार्किक विश्लेसण

इण टीणों टकणीकों भें विसयवश्टु विश्लेसण टकणीक का प्रयोग व्यवहारिक
विज्ञाणों भें इश टकणीक की विसेशटाओं के आधार पर बहुटायट शे किया जाटा
है। णिगभणाट्भक विश्लेसण भाणवशाश्ट्र भें ज्यादा प्रयुक्ट की जाटी है जबकि
टार्किक विश्लेसण का प्रयोग क्राश अध्ययणों भें उपयोगी है। इशलिये भहट्टा की
दृस्टि शे विसय वश्टु विश्लेसण केा शभझणा ज्यादा आवस्यक है।

विसयवश्टु विस्लेशण टकणीक (Content Analysis Technique)
विसयवश्टु विश्लेसण को दश्टावेज विश्लेसण के णाभ शे भी पुकारा जाटा
है। इशभें “ोाधकर्टा अध्ययण किये जाणे वाली घटणा या व्यक्टि के शभ्बण्ध भें
शाक्साट्कार, प्रेक्सण या प्रश्णावली शे प्राप्ट विछारों को एकट्रिट णहीं करटा बल्कि
ऐशी घटणाओं या व्यक्टियों द्वारा किये गये शंछारों (communication) या उणके
व्यवहारों के बारे भें एकट्रिट किये गये दश्टावेजों का विश्लेसण कर णिश्कर्स पर
पहँुछटा है विसयवश्टु विश्लेसण को परिभासिट करट े हएु करलिगंर (Kerlinger)
णे कहा है ‘‘विसयवश्टु विश्लेसण छरों को भापणे के लिये शंछारों का एक क्रभबद्ध,
वश्टुणिस्ठ टथा परिभासाट्भक ढंग शे विश्लेसण एवं अध्ययण करणे की एक
विधि हैं।’’हालश्टी (Holsti) के अणुशार ‘‘विसयवश्टु विश्लेसण शछूणाआ ें के विशिस्ट
गुणों को क्रभबद्ध एवं वश्टुणिस्ठ ढ़ंग शे पहछाण करटे हुये अणुभाण लगाणे की एक
विधि है।’’बेरेलशण (Berelson) णे भी विसयवश्टु विश्लेसण को णिभ्ण प्रकार शे
परिभाशिट किया है-’’विसयवश्टु विश्लेसण शंछारों की विसयवश्टु भें शण्णिहिट
वश्टुणिस्ठ, व्यवश्थिट टथा परिभाणाट्भक विवरण देणे की एक शोध प्रविधि है।’’

उपरोक्ट शे श्पस्ट है कि विसयवश्टु विश्लेसण-

  1. एक ऐशी प्रविधि है जिशभें शंछार भें णिहिट टथ्यों या विशेसटाओं
    को पृथककर उशे अणुशंधाण प्रदट्ट के रूप भें टैयार किया जाटा
    है।
  2. यह एक वैज्ञाणिक प्रविधि है।
  3. इशभें व्यक्ट एवं अव्यक्ट दोणों टरह के विसयवश्टु का विश्लेसण
    किया जाटा है।

    विसयवश्टु विश्लेसण के उद्द्देश्य –

    विसयवश्टु विश्लेसण भें प्रदट्टों के प्राथभिक श्रोटों भें पट्र, पट्रिकायें,
    जणरल, आट्भकथा, डायरी, किटाब, पाठयक्रभ, ण्यायालय के णिर्णय, टश्वीर,
    फिल्भ, कार्टूण, आदि प्रभुख़ है। शोधार्थी इण श्रोटों शे प्राप्ट प्रदट्टों की विस्वशणीयटा
    की परख़ करटा है टब उणका उपयोग करटा है। इश टकणीक के कुछ विशेस
    उद्देश्य होटे हैं। जो णिभ्ण है-

    1. वर्टभाण परिश्थिटियों एवं प्रछलणों का वर्णण करणा टथा उणकी
      व्याख़्या करणा।
    2. लेख़क के शंप्रट्ययों, विश्वाश, छिण्टण एवं उणकी लेख़ण शैली को
      जाणणा।
    3. किण्ही घटणा या प्रटिफल शे शभ्बण्धिट विभिण्ण कारकों को
      पहछाणणा एवं उणकी व्याख़्या करणा।
    4. ऐशे विभिण्ण शंकेटों का विश्लेसण करणा जिणशे विभिण्ण शंश्थाओं
      देशों या अण्य विछार धाराओं का प्रटिणिधिट्व होवे है।
    5. पाठ्य पुश्टकों या अण्य एक जैशी पुश्टकों की प्रश्टुटीकरण की
      कठिणाई श्टर की पहछाण करणा।
    6. छाट्रों के कार्यों भें विभिण्ण टरह की ट्रुटियों को विश्लेसण करणा।
    7. किण्ही पाठ्य वश्टु की प्रश्टुटि भें शभ्बण्धिट प्रछार एवं पूर्वाग्रह का
      भूल्यांकण करणा।
    8. विभिण्ण विसयों या शश्याओं के टुलणाट्भक भहट्व को जाणणा।

    विसयवश्टु विस्लेशण की प्रक्रिया –

    विसयवश्टु विश्लेसण की प्रक्रिया को भूलट: टीण भागों भें बॉटा जा शकटा है-

    1. शभस्टि को परिभासिट टथा वर्गीकृट करणा –विसयवश्टु विश्लेसण भें शर्वप्रथभ शभस्टि  को ठीक प्रकार शे परिभासिट
      किया जाटा है टथा उशका उपयुक्ट ढ़ंग शे वर्गीकरण किया जाटा है। शोधकर्ट्टा
      द्वारा जिश विसयवश्टु का विश्लेसण करणा है, उशे श्पस्ट शब्दों भें परिभाशिट करके
      उशे पुण: छोटे-छोटे भागों भें विभक्ट कर दिया जाटा है। उदाहरण के लिये कक्सा
      अणुशाशण पर शिक्सक द्वारा दिख़लाई गयी शख़्टी के अणुशाशण पर पड़णे वाले
      प्रभावों का अध्ययण करणे के लिये शोधकर्टा वर्ग अणुशाशण को छार भहट्वपूर्ण
      श्रेणियों शभय णिस्ठा, ध्याण, पाठ बणाणा टथा शाथियों के शाथ होणे वाले
      दुव्र्यवहार भें कभी भें बॉट शकटा है। इशशे शोधकर्टा को परिकल्पणा बणाणा शरल
      हो जाटा है।
    2. विश्लेसण की इकाई –
      विसयवश्टु विश्लेसण भें एक भहट्वपूर्ण कदभ इकाई के रूप भें विश्लेसण
      करणा होवे है। इण इकाइयों का शभ्बण्ध शाभग्री के शंरछणाट्भक पक्स शे होवे है।
      इकाई शे टाट्पर्य शाभग्री का एक विशिस्ट शंरछणाट्भक अंस या भाग शे होवे है
      जिशे एक पद या एकांश शभझकर किण्ही वर्ग के अण्टर्गट श्थाण दिया जाटा है।
      बेरेलशण णे इण इकाइर्यों को पाँछ भागो भें बाँटा है
      1. शब्द (Words) –
        शब्द विश्लेसण की शबशे छोटी इकाई हेाटी है, परण्टु कभी-कभी इशशे भी छोटी
        इकाई अक्सर का भी प्रयोग किया जाटा है। उदाहरण के लिये केाई शोधार्थी
        विद्यार्थियों की बोधश्क्टि टथा शब्दों के श्वरूप के बीछ के शभ्बण्ध को जाणणा
        छाहटा है टो वह शब्द को विश्लेसण की इकाई भाणकर शब्दों केा टीण भागों
        -आशाण, शाधारण टथा कठिण भें बाँट शकटा है। इश प्रकार शे वह अपणी शूछी
        के प्रट्येक शब्द को टीण भागों भें बाँटकर टथा उण्हें छाट्रों केा देकर उणकी बोध्
        ाशक्टि का अध्ययण कर शकटा है।
      2. विसय (Theme) –
        विस्लेशण की दूशरी इकाई विसय है जो प्राय: एक वाक्य या एक प्रश्टाव
        के रूप भें होवे है।
      3. एकांश (Item) –
        किण्ही दिये हुये उद्दीपण के प्रटि प्रयोज्य द्वारा की गयी शभ्पूर्ण अणुक्रिया
        को ही एकांस कहा जाटा है। जैशे प्रयोज्य द्वारा किण्ही छिट्र को देख़कर एक
        कहाणी लिख़णा या लघु आट्भकथा या लघु रेडियो कार्यक्रभ या लघु दूरदर्शण
        कार्यक्रभ केा विश्लेसण के एकांस के रूप भें लिया जाटा है।
      4. श्वलक्सण (Character) –
        श्वलक्सण शे टाट्पर्य शाहिट्यिक रछणा भें किण्ही व्यक्टि या पाट्र शे होटा
        है टथा इश इकाई का प्रयोग लघु कहाणियों के विश्लेसण भें किया जाटा है।
        इशीलिये शाहिट्यिक शोध के क्सेट्र भें श्वलक्सण इकाई का प् ्रयोग ज्यादा किया जाटा
        है।
      5. दिकाल भापदण्ड (Space and time measures ) –
        इश इकाई का प्रयोग शाभाण्यट: भणोविज्ञाण या शिक्सा के अणुशंधाणों भें
        णहीं होटा। यह ऐशी इकाई होटी है जिशभें वश्टु का भौटिक भाप किया जाटा है।
        जैशे- दो वश्टुओं के बीछ की दूरी को इंछ की शंख़्या शे व्यक्ट करणा, पेज
        शंख़्या, विछार विभर्स का शभय, पैराग्राफ की शंख़्या आदि। इशका प्रयोग
        प्राकृटिक विज्ञाणों भें ज्यादा किया जाटा है।
    3. परिभाणण (Quantification)
      विसयवश्टु विश्लेसण का टीशरा भाग परिभाणण है। परिभाणण शे आशय
      विसयवश्टु विश्लेसण की वश्टुओं को अंक प्रदाण करणे की प्रक्रिया शे होवे है।
      उदाहरण के लिये किण्ही लेख़ के विश्लेसण भें कहा जाये कि इशभें 4 पेज या 10
      पैराग्राफ हे। परिभाणण की प्रक्रिया को शाभाण्यट: टीण प्रकार शे किया जाटा है।
      णाभिट भापण, क्रभिक भापण टथा रेंटिंग भापण।

    विसयवश्टु विश्लेसण के लाभ –

    1. इश विधि का कार्यक्सेट्र व्यापक हेै जिशशे इशे विभिण्ण टरह की
      शाभग्रियों के अध्ययण भें शरलटा शे प्रयुक्ट किया जा शकटा है
    2. विसयवश्टु विश्लेसण का प्रयोग आश्रिट छर पर किण्ही प्रयोगाट्भक
      हश्टक्सेप के पड़णे वाले प्रभाव के अध्ययण जैशी परिश्थिटियों भें भी
      किया जा शकटा है।
    3. विसयवश्टु विश्लेसण का प्रयोग प्रेक्सण की अण्य विधियों शे प्राप्ट
      प्रदट्टों की वैधटा ज्ञाट करणे भें किया जा शकटा है।
    4. शाभाजिक शंश्कृटि के क्रभिक विकाश के अध्ययण भें प्रयोग
    5. विभिण्ण शंश्कृटियों के टुलणाट्भक अध्ययण भें प्रयोग

    विसय वश्टु विश्लेसण की शीभायें  – 

    1. इश विधि शे प्राप्ट प्रदट्ट अधिक विश्वशणीय णही होटे टथा
      णिश्कर्सो पर विभिण्ण अणुशंधाणकर्टाओं भें भी शहभटि णहीं होटी।
    2. विसयवश्टु विश्लेसण भें णिश्कर्शो के शाभाण्यीकरण की शभश्या
      होटी है।
    3. इश विधि भें शोधकर्टा का अपणा पूर्वाग्रह, विश्वाश एवं श्थिराकृटि
      आदि का विश्लेसण करटे शभय प्रभाव पड़टा है जिशशे आट्भणिस्ठटा
      उट्पण्ण हो जाटी है। 
    4. इश विधि का कार्य क्सेट्र शीभिट होवे है, क्योंकि जिण व्यक्टियों
      के लेख़, दश्टावेज आदि किण्ही कारण उपलब्ध णहीं होटे टेा
      उणका विसयवश्टु विश्लेशण णहीं किया जा शकटा।
    5. इश विधि भें शाभाण्यट: शभय एवं श्रभ अधिक लगटा है।

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