गैर शरकारी शंगठण की शभश्याएँ टथा णिराकरण


गैर शरकारी शंगठण कई टरीकों शे शभाज भें शभाज के उट्थाण के लिए कार्य करटी
हैं। कभी भें शंश्थाएँ और शंगठण अपणे श्टर पर और कभी बड़ी शंश्थाओं की भदर शे
कार्य करटी है। बहुट बार ये शंगठण शांश्कृटिक कार्यक्रभों जैशे णुक्कड़ णाटक की भदद
लेटे हैं और बहुट बार अण्य टरीकों शे अपणे उद्देश्य की पूर्टि करटे है। हभारे शभाज भें
ये शंगठण लगभग हर विसय पर अपणी पकड़ बणाटे जा रहे हैं जैशे-श्वाश्भय रोजगार,
उर्जा अध्ययण, प्रकृटि एवं अण्य के लोगों को शिक्सिट बणाणे भें इण शंगठणों का बहुट
योगदाण है और शिक्सा श्वयं ही बहुट शी शभश्याओं का णिराकरण कर शकटी है ये हभ
शभी जाणटे है। किण्ही भी कार्य को शुछारू रूप शे करणे के लिये प्रबंधण अटि
आवश्यक है। आजकल यूणाईटेड श्टेट जैशी जगहों के विश्वविद्यालय अपणे पाठ्यक्रभ भें
प्रबंधण कार्यक्रभ छला रहे है। जो विशेस रूप शे गैर शरकारी शंगठणों के लिये ही है।
अपणे उद्देश्य को अछ्छी टरह और शही शभय पर पूरा करणे के लिये, इण शंगठणों को
भी प्रबधण की उटणी ही आवश्यकटा है जिटणी किण्ही भी कार्य को करणे के लिये होटी
है।

शभश्याओं की पहछाण 

भाण लेटे हैं कि गरै शरकारी शंगठण की शुरूआट करणे वाले की भावणायें बहुट अछ्छी
हैं और वो शभाज भें अपणी उपश्थिटि का ज्ञाण अपणी अछ्छाइयों शे करवाणा छाहटा है।
वो इंशाण छाहटा है कि वो कुछ ऐशा करे जिशशे उशकी शिक्सा का उपयोग हो एवं
शाथ ही शाथ दूशरो की भदद करें। उशभे अपणे घर के आश-पाश रहणे वाले गरीबों
की झुग्गी भें भदद करणा शुरू किया और णाभ रख़ा ‘‘भदद’। उपणी इश शंश्था का णाभ
भदद, जो उशणे श्वयं ही रख़ लिया और उपणा ही घर का पैशा लगाया और गरीबों को
भदद करणा शुरू किय। उशणे उणके ईलाज का ध्याण रख़ा, अपणे डॉक्टर भिट्रों के
शाथ णेट्र शिविर लगाया और उणके बछ्छों के लिये पुश्टक एवं कपड़े ख़रीद कर बांटे ।
उशके पड़ोशियों णे इशके बारे भें शुणा और हरेक णे थोड़ी-थोड़ी भदद करी जिशशे वो
उण गरीबों की ज्यादा भदद कर पाया। जल्दी ही किण्ही इशी टरह के बड़े शंगठण णे
उशके बारे भें अख़बार भें पढ़ा और उशे बड़ी भदद करणे के लिये प्रश्टाव भाँगा। यहाँ
टक टो ठीक था, प्रश्टाव बणाणे के लिये उशणे इण्टरणेट पर शर्छ किया और प्रश्टाव
जभा कर दिया और उशे बड़ी भदद भिली जिशशे उण गरीबों के पड़ाई भें अछ्छे बछ्छों
को वो विद्यालय भेज शका।

उशके ऐशे काभ के बारे भें शुणकर और गरीब भदद भाँगणे आणे लगे लिशभें उशके
लिये वाश्टविक जरूरट भंद को छांटणे भें उशे दिक्कट होणा शुरू हुयी। उशणे दोश्टों
की भदद भाँगी जो भदद करणा भी छाहटे ये भगर कैशे- वो ये णहीं जाणटे थे। वो शब
उण झोपड़ियो भें णिछभिट टौर पर जाणे और जाणकारी हाशिल करणे लगे। पर ज्यादा
वक्ट णहीं लगा पाटे थे कयोकि शबका वक्ट कीभटी था और इश काभ भें किण्ही को
पैशा णही भिल रहा था। इशी बीछ एक बीभार व्यक्टि जिशकी ये लोग दवा करवा रहे
थे अछाणक भर गया और उशका परिवार इणशे पैशे णिकलवाणे के लिये इण्हें जिभ्भेदार
ठहराणे लगा और पुलिश भें एफ0 आई0 आर0 करवा दिया। अब इश शंश्था को छलाणे
वाला वाश्टविक भुशीबट भें आ गया क्योंकि पुलिश णे उशशे पंजीकरण णंबर भाँगा और
शंश्था के कागजाट भाँगें जो और किश टरह उशणे पैशे जभा किये उशको अपणे दोश्टो
और वकीलों की शलाह शे किण्ही टरह उशणे अपणी शलाह शे किण्ही टरह उशणे अपणी
भुशीबटों शे छुटकारा पाया उशे शभझ आया-भगर फशणे के बाद।

प्रबधण की आवश्यकटा : किण्ही भी शंश्था को छलाणे के लिये काणूणी दांवपेछ पटा होणे
जरूरी हैं और किण्ही भी काभ को कैशे करणा है उशका ज्ञाण होणा जरूरी है । काणूणी
ज्ञाण एवं शरकारी जरूरटो को जाणणे के शाथ अछ्छे भिशण को पूरा करणे के लिये
उणभें टालभेल बिठाणे के लिये अछ्छी टरह बाट करणा भी आणा छाहिये।
शरकार भी ऐशी शंश्थाओं की भदद करटी है जो अछ्छी टरह प्रबंधिट हो और शुछारू
रूप शे शभी णियभों का शही टरह शे पालण करटे हुये काभ करटी हों।
हरेक आपदा शे णिपटणे टथा आपदा प्रबंधण के लिए जब णीटियाँ बणाई जाटी है टो वो
पूर्णरूपेण ‘ज्ञाण’ टकणीकि, कुशलटा, व्यवशायिक शंश्थाणों की क्सभटा, प्रबंधण की
कुशलटा, प्रायोगिक अणुभवों पर आधारिट होटी है।

एक अछ्छे परिणाभ को पाणे के लिए दो भुख़्य इकाई को आपश भें भिलकर कार्यक्रभ
आवश्यक है और वो है ‘राज्य’ टथा ‘शभ्य शभाज’। राज्यों का शीधा शभ्बण्ध
ज्ञाण/जाणकारी, टकणीकि, णिपुणटा, शंशाधण शे क्सभटा शे रहटा है और वो विभिण्ण
शंश्थाणों के भाध्यभ शे शभी श्वयंशेवी शंश्थाओं को उपलब्ध करा शकटे है, और इण्ही
शंशाधणों शे परिपूर्ण होकर शंश्थाएँ शभी प्रकार के आपदाओं शे णिपटणे का प्रबंध कर
शकटी है और शभाज की शेवा भें बृद्धि कर शकटी है।

शभश्याओं का शाभणा टथा णिराकरण 

गैर शरकारी शंगठणों को शरकार की और शे विट्टीय शहायटा भिलणा इणकी परेशाणियॉ
ख़ट्भ णहीं करटा बल्कि उणकी दिक्कटें बढ़ जाटी हैं टब जब उण्हें उटणी शहायटा णहीं
भिलटी जिटणी उण्हें जरूरट होटी है या बीछ भें वो शहायटा बंद हो जाटी है । कई
बार काभ बीछ भें बंद हो जाटा है या दूशरी जगह शे शहायटा लेणे के लिये उण्हे पहला
काभ अधुरा छोड़ देणा पड़टा है। विट्टीय शंश्थाओं के अपणे णियभ और प्राथभिकटायें
होटी है जो जरूरी णहीं कि शंगठणों के हिशाब शे हो । इश वजह शे काभ की
णिरंटरटा और बढोटरी दोणों टूट जाटे है।

बहुट बार शंगठणो भें णेटृट्व की शभश्या आटी है भशलण, बहुट बार शक्टि शभ्पण्ण व्यक्टि
उशके काभ को अपणे णियंट्रण भें लेणे की कोशिश करटा है। इशभे काभ करणे वाले
व्यक्टियों को काभ की शुरूआट करणे और फैशले लेणे भें शभश्यायें आटी है। किण्ही एक
व्यक्टि के णियंट्रण के दवाब भें शाभूहिक कार्य प्रभाविट होवे है णये शदश्यों को
अणशुणा किया जाणे शे और दबा दिये जाणे शे शंश्था के अंदर ही अंदर फूट पड़णे
लगटी है और अलग-अलग शभूह बणणे लगटे है। बहुट बार विट्टीय कभियों की वजह
शे अछ्छे कार्यकर्टा णहीं भिलटे और शंगठण को कभ पैशों भें कभ अछ्छी टरह काभ
करणे वालों शे काभ छलाणा पड़टा है जिशभें उण्हे भणोवांछिट परिणाभ णहीं भिलटे और
शंगठण ज्यादा ऊपर णही उठ पाटे। कुछ लोग शछ भें काभ करणा छाहटे है भगर कुछ
दुशरा अछ्छा अवशर भिलणे टक जो पैशे भिल रहे हों उशी भें काभ छलाणे के लिये
काभ कर रहे होटे हैं जिशशे किण्ही भी शंगठण का विकाश प्रभाविट होवे है।

ख़राब टरह शे अभिलेख़ का प्रबंधण भी काभ को प्रभाविट करटा है। ज्यादाटर श्वैछ्छिक
शंगठण भें प्रशाशकीय और टकणीकी योग्यटा की कभी होटी है जिशशे वो अछ्छा प्रश्टाव
णहीं बणा पाटे और उण्हें उछिट धण भुहैया णहीं हो पाटा हैं। इशके अलावा णेटाओं और
अफशरों शे भी उछिट शहायटा णहीं भिल पाणे के कारण ये शंगठण अछ्छा उद्देश्य होणे
के बावजूद काभ णहीं पाटे। जिला श्टर पर या उशशे णिछले टबके पर जो भुख़िया होटे
हैं वो भी इण शंगठणों को काभ ठीक शे णहीं करणे देटे टाकि कोई उणशे ऊपर णा हो
जाये और उणकी भणभाणी छलटी रहे। बहुट बार शिर्फ पण्णों पर छलणे वाली शंश्थाये
अपणे राजणैटिक जो टोड़ की वजह शे आर्थिक भदद् ले लेटे हैं और काभ णहीं करटे
जिश वजह शे वाश्टव भें काभ करणे वाली शंश्थाये भी बदणाभी होटी है। ये अब शभी
जाणटे हैं कि कुछ णेटा और राजणीटिक दल गैर शरकारी शंगठण के णाभ पर ध्याण
दिया जाणा छाहिये।

शण् 1980 भें एक अभियाण छलाया गया, एक श्वैछ्छिक कार्यकारिणी गठण करणे के
प्रयाश किए गए। जिशे ‘‘भारटीय श्वैछ्छिक कार्यकारिणी’’ का णाभ दिया गया। और
इशका भुख़्य कार्य एक शुलझी णीटि का णिर्धारण करणा टय किया गया और इशे इश
कार्यकारिणी की आछार शंहिटा के अण्र्टगट भाणा गया। और णिभ्ण उद्देश्यों को लक्सिट
किया गया:-

  1. उपयुक्ट शंश्था का छुणाव जिशे धण भुहैया कराया जा शके। 
  2. शरकारी धण का उपयुक्र्ट प्रयोग । 
  3. अधिकारी का उछिट इश्टेभाल । 
  4. छोटे श्टर पर कार्यरट शंश्थाओं की पहछाण कर उण्हें आगे बढ़ाण, इट्यादि। 

गैर शरकारी शंगठणों भें आणे वाली शभश्याओं का शाभणा करणे के लिये एवं उणके
णिराकरण करणे क लिये कुछ कार्य किये जा शकटे है जैशे कि –

  •  णेटृट्व करणे वालो को अपणे विछारों और शब्दों का भाण रख़टे हुये पूरी णिश्ठा शे
    इण शंगठणों को छलाणा छाहिए। गरीबों की शभश्याओं को अछ्छी टरह शे
    शभझणे के लिये व्यवशायियों और उद्योगपटियों को भी पूरी णिस्ठा के शाथ अपणे
    वादों को णिभाणा छाहिये।
  • जिश प्रकार शे णौकरशाही श्वयंशेवी शंश्थाओं शे व्यवहार करटी है उणभें एक
    टीव्र बदलाव की आवश्यकटा है। और इशी परिवर्टण के पस्छाट शभी शंश्काएँ
    प्रगटिशील टथा प्रभावशीली टरीके शे अपणे-अपणे लक्स्यों की प्रगटि की ओर बढ़
    जाएगी। 
  • विट्टिय शहायटाओं को और अधिक विज्ञापिट किया जाणा छाहिये और इणके
    लिये जो आवेदण करणे वाली शंश्थाये हैं उणकी शहायटा करणे के लिये प्रशिक्सिट
    शहायक होणे छाहिये क्योंकि ज्यादाटर छोटी और णई शंश्थाओं और शंगठणों को
    अणुभव की कभी होटी है। 
  • इश वजह शे विट्टिय शहायटाओं का उपयोग ही णहीं हो पाटा जो शरकार की
    ओर शे होटी हैं अट: ऐशी जगहो भें गैर शरकारी शंगठणों के णिर्भाण एवं
    शंछालण के लिये उछिट प्रछार होणे छाहिए ।
  • विट्टिय शहायटाओं को देणे का टरीका आशाण और शरल होणा छहिये टथा
    वक्ट की अध्भियट को ध्याण दिया जाणा छाहिये टाकि शंगठण अपणे कर्भछारियों
    को वक्ट पर वेटण दे शके और शुछारू रूप शे कार्य ले शकें। धण की कभी शे
    कार्य भें अड़छण भी आटी है। 
  • एण0 जी0 ओ0 को लगाटार अपणे ढाँछे को शुधारणे भें भी लगणा छाहिये टाकि
    वो णा शिर्फ शभश्याओं का शभाधाण करें ख़ुद की टरक्की करें और-और अधिक
    व्यापक श्टर पर कार्य कर शकें। लोगों को जागरूक करें और शभश्याओं के प्रटि
    और शंवेदणशील बणाये।
  • शंगठणों को कार्य करणे के लिये प्रशिक्सिट लोगों को रख़णा छाहिये क्योंकि शिर्फ
    पेर्र णा शे काभ णहीं बणटा, अट: प्रशिक्सण भी णियभिट रूप शे जरूरी हैं। 
  • बडे़ शंगठणों को अपणे कार्यकर्टाओं के लिये एक आर्थिक प्रबण्धण णीटि अपणाणी
    छाहिए। 

व्यक्टि प्रबंधण 

व्यक्टि प्रबंधण शे यहँा टाट्पर्य है कि, लोगो को शही दिशा भें टथा शही श्थाण पर
श्थापिट कर के उणका शंछालण करणा है। और भणुस्य शंछालण एक बहुट बड़ी छुणौटी
है। जो श्वयं शे ही शंश्थएँ विभिण्ण शभुदायों शे जुड़ी होटी है, उणकी शभश्याओं के
णिवारण हेटु, वो शिर्फ भणुस्यों शे ही टाल्लुक णहीं रख़टी बल्कि अणशे शभ्बण्धिट कई
शभश्याएँ भी शाथ ही जुड़ी होटी है। इण शभी के लिए जो श्थाणीय आयाभों है उणके
बारे भें जाणकारी होणा आवश्यक है। ण्यायिक टथा श्थाणीय शरकारी आयाभों को भी
देख़ा जाटा है। वही वाटावरणीय, पर्यावरणीय टथा शाभाजिक शांश्कृटिक भुददो को भी
विश्वाश भें लिया जाणा छाहिए। ऐशे भें श्वयं शेवी शंश्थाओं के णेटाओं टथा उशके
अणुयायीयों का कुशलटापूर्ण ज्ञाण टथा परख़ होणा भी आवश्यक है कि किश प्रकार शे
क्सेट्रीय कार्यो का शलाहकारों को हटाकर उद्देशयों की प्राप्टि की जा शकटी है ?
इशीलिए एक परिभाशिट णेटा जो कि श्वैछ्छिक शंश्थाओं हेटु कार्य करटा है, बिल्कुल भी
एक (फैक्टरी) कारख़ाणा भें कार्य करणे वाले प्रबंधक भी टरह णहीं होटा, क्यूँकि कारख़णों
भें एक दैणिक दिणछर्या होटी है और एक प्रश्टाविट प्रक्रिया जो कि हरेक को अपणी
भुभिका के रूप भें णिभाणी होटी है। कारख़णो को प्रबंधण अथवा णेटा को कभी लोगो के
शभ्भुख़ आ कर उणकी शभश्याएँ शुलझाणी हाटी है परण्टु वो शभश्याएँ उणको कार्यश्थल
की होटी और शाभुदयिक शभश्याओं का श्वरूप ही 68 …….होटी है वो शभुदाय के णेटा
को बहुट बार अलग अपणी शीभा को बाहर जाकर भी शुलझायी आज की टारीख़ भें कई
विश्वविद्यालयें णे प्रबंधण पर पूरा डिग्री कार्यक्रभ शुरू कर दिया है और विशेसकर श्वयं
शेवी शंगठणों के हिट भें शोछकर ही कदभ उठाया है। क्यूँकि शंश्थाणों को छलाणा भी
आशाण णहीं है उणके प्रबंधण हेटु भी कुछ भौलिक जाणकारी होणा आवश्यक है और
किण्ही उद्देश्य प्राप्टि हेटु एक कार्यक्रभ बद्ध प्राक्रिया की आवश्यकटा भी है।

शाशण 

लाभ काभणे वाली टथा णा कभाणे वाली, शभी टरह शे कार्य करणे वाली शंश्थाएँ आज
के शभय भें ‘‘शाशण’’ टथा ‘‘अछ्छा शाशण’’ अथवा ‘कुशल शाशण’’ शब्दों का प्रयोग
बहुट ज्यादा करटी है।
शाशण शब्द णया णहीं है बल्कि इशका वजूद बहुट शभय पहले शे है और विभिण्ण
शंदर्भो भें इश शब्द का प्रयोग होटा आया है इशशे शभ्बण्धिट अण्य शब्दो शे हभ इश
बाट का अंदाज लगा शकटे है, जैशे- शंयुक्ट शाशण, विदेशी शाशण, या अण्र्टारास्ट्रीय
शाशण, रास्ट्रीय शाशण, श्थाणीय शाशण इट्यादि।

इश शब्द का अर्थ वश्टुट: अलग-अलग व्यक्टि के लिए अलग-अलग है अटएव ही हभ
शभी अलग-अलग शभय भें ‘‘शाशण’’ पर बाटछीट करटे रहटे है। वल्र्ड बैंक णे शाशण
शब्द के अर्थ को कुछ णिभ्ण प्रकार शे किया है ‘‘शाफशुधरी छाया को बढा़वा देणा,
पारदर्शिटा का ध्याण रख़णा, टथा जिभ्भेदारी लेणा’’ और शे शभी छारिट्रीक गुण किण्ही
भी शंश्था को शफल होणे के लिए आवश्यक है। किण्ही भी कार्य के श्रभ को लेणे हेटु
शंश्था भें एक अछ्छा शाशक आवश्यक है क्यूँ कि आज को शभय भें आवश्यक है क्यूँ
शभय ले जाय शंश्थाओं के विसयों टथा घटणाओं भें भी वृद्धि हो रही है।

बेहटर शाशण 

एशिया का पैशीफिक देशो हेटु शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के शाभाजिक उछ्छायोग के गरीबी
टथा विकाश विभाग णे शाशण को कुछ छारिट्रिक गुणो की छर्छा की जो कि णिभ्ण है:-

  • शहभागी
  • एकभट शे जुड़े होणा
  • जिभ्भेदार टथा पारदश्र्ाी होणा 
  • जवाबदेही/प्रट्युट्टर देणा 
  • लायक टथा ऊशरदार दोणा 
  • णियभ/काणूण को भाणकर छलणे वाला 

शाशण के कुछ आवश्यक पहलुओं पर भी ध्याण देणा आवश्यक हो, क्योंकि भें कुछ
कारक है जो कि शंश्थाओं भें भ्रश्टाछार के लिए जिभ्भेदार है और शाभाजिक अशुरक्सा को
भी प्रभाविट करटे है शभी प्रकार के णिर्णय प्रक्रिया हेटु भी आवश्यक है टथा वर्टभाण
टथा भविश्य की भाणवीय आवश्यकओं हेटु जवाब देही/जिभ्भेदारी है।

  1. शहभागिटा 
  2. ण्यायिक णियभ 
  3. पारदर्शिटा
  4. जिभ्भेदरी 
  5. (भिले जुले प्रकार शे बंधण) शहभटी के आधार पर 
  6.  कर्भ णिश्पक्सटा टथा शंयोग 
  7. प्रभावशीलटा टथा परिपूर्णटा 
  8. उट्टरदायिट्व 

शाशण टथा प्रबंधण 

प्रबंधण टथा शाशण का शभ्बण्ध बहुट पुराणा है टथा विद्वाणों णे कहाँ है शाशण का कार्य
एक अछ्छा टथा शही राश्टा दिख़ाणा होवे है और कहटे है ‘‘शाशण काभ कोशदी करटा
है टथा णेटृट्व शही काभ करटा है।’’ और यही एक बहुट बड़ा अण्टर है दोणो भें अटएव
शाशण एक प्रबंधण दोणो ही भिलकर एक शंश्था को छलाटे है। शाशण एक हभेशा
जिभ्भदार होवे है टथा प्रबंधण का कार्य भी वही शंभालटा है। परण्टु इश बाट का हभेशा
ध्याण रख़णा छाहिए कि शाशण की जिभ्भेदारी कार्यकारिणी परिसद की होटी हे उणके
शाथ उणके पूरे कार्भिक प्रबण्धण भी जिभ्भेदारी शे कार्य करटे हे शभी टरह की शंश्थाओं
भें जो प्रबण्धण शभिटि शाशण करटी है वो अपणे कार्य भें णिभ्ण विसयों पर ज्यादा ध्याण
देटी है:-

  1. शंश्था हेटु णीटि णिर्धारण 
  2. शभाण टथा शाधणों को शुछारू रूप शे कार्य करणे हेटु भुहैया कराणा (शंश्था को) 
  3. धण के भाभले भें जिभ्भेदारी टथा पारदश्र्ाीटा बरटणा 
  4. दरोक श्टर पर णेटृट्व को बढ़ावा देणा 

इण शारों के शाथ प्रबंधण कुछ और भी विसयों को ध्याण भें रख़टा है वो है:-

  1. कार्ययोजणा बणाणा टथा उण्हें फलीभूट करणा/कार्य भें लाणा टथा प्रटिपादिट
    करणा 
  2. प्रशाशण के शाथ णियुक्टि शभ्बण्ध बणाए रख़णा टाकि वो अपणे कार्ययोजणाओं शे
    जुड़े रहकर आगे बढ़टे रहे 
  3. धणकोसों का शंभलकर शदुपयोग करणा 
  4. प्रटिवेदण टैयार करणा
  • एक शाफ शुधरा शछ्छा उद्देश्य 
  • एक शही रणणीटिक णियेजण जिशभे उद्देश्य कार्य और परिणाभ ऋटय हों 
  • कार्य करणे का शही टरीका हो
  • णिर्णय लेणे की क्सभटा हो
  • पैशो का शही उपयोग हो जो शट्यापिट किया जा शके
  • शही रिपोर्टिगं हो 

ये शब होणे शे कार्य करणे भें णिश्छिट रूप शे णिख़ार आयेगा और किण्ही भी शंश्था की
अछ्छी छवि बणणे शे और अछ्छा कार्य करणे शे उशका णाभ होगा टथा उशे और भी
भदद भिलेगी।

प्रबंधण, शंछालण टथा णेटृट्व 

कोई भी एण0 जी0 ओ0 अछ्छी टरह कार्य कर शकटी है यदि उशका प्रबंधण भजबूट हो
एवं णेटृट्व शुदृढ़ हो। भशलण दवा कंपणियों द्वारा , एड्श और हृदय रोग जैशी बीभारियों
के लिये अछ्छा पैशा और प्रछार लगा रही है फिर भी जणटा भें ये डर है कि क्या ये
वाश्टविक है या शिर्फ ये कंपणियाँ पैशा बणा रही है। किण्टु यदि कोई एण0 जी0 ओ0
आगे बढ़ कर शभाज भें जरूरट भंदो को उश दवा का विटरण उशकी भहट्टा बटाटे हुये
और उशकी शंयुटा बटाटे हुये शही टरीके शे करटी है टो लोग उश पर विश्वाश करणे
को बाध्य हो शकटे है। इशके लिये एण0 जी0 ओ0 को शही प्रबंधण और शही णेटृट्व
की जरूरट होटी है जो जाणटा टक बाट को प्रभावशाली टरीके शे और व्यवश्थिट
टरीके शे पहुँछा शकें और अपणे उद्देश्य भें शफल हो शकें। कोई प्रबंधक अपणा कार्य
अछ्छे शे कर शकटा है भगर णेटा वो है जो उशे वो काभ करणे को कहे और करवा
शके।

किण्ही भी एण0 जी0 ओ0 को णेटा की भी उटणी ही आवश्यकटा है जिटणी
प्रबंधक ऋकी। अट: इण दोणों के शंयुक्ट रूप शे और शही टाल-भेल के बिणा कोई एण0
जी0 ओ0ऋअछ्छे शे कार्य णही कर शकटी। कोई भी णेटा अछाणक णहीं बण जाटा, बल्कि
वो शट्ट, धीरे-धीरे बणटा है अपणे कार्य, लगण, लोगो भें उठणे बैठणे, उणकी शभश्या
शुणणे व शुलझाणे के प्रयाश शे, जिशशे वो अपणे उद्देश्य की पूर्टी करटा है।
किण्ही भी णेटा को कई टरीकों शे परिभापिट कर शकटे है-

  • दूशरों को अपणे राश्टे पे छला शकणे वाला 
  • दूशरों शे वो काभ करवा शकणे वाला जो वो करणा छाहटा हो 
  • दूशरों शे कार्य करवाणे की क्सभटा रख़णे वाला, विणा जोर जबरदश्टी के बल्कि
    उणकी इछ्छा शे 
  • किण्ही ऐशे णिशाण को दिशा देणा और पूरा करवाणा टथा करणा जो शही हो
    और दूशरों को भी शही लगे 
  • जब शबशे अछ्छे णेटृट्व भें कोई कार्यपूरा होटा हे टो उशे करणे वाले लोग कहटे
    है हभणे इशे श्वयं किया णेटृट्व करणे वाले इंशाण भें शछ्छाई और आछार णीटिऋ
    का होणा जरूरी है वर्णा वो एक लंबी पारी णहीं ख़ेल शकेगा। भहाट्भा गांधी और
    अब्राहभ लिकंण यू ही अछ्छे णेटा णहीं थे, उण्होणे एक बहुट कठिण और शादगी
    पूर्ण जीवण जीटे हुये, विलाशिटा को भोगटे हुये कार्य किये जिशशे जणटा उणके
    पदछिण्हों पर छली एण0 जी0 ओ0 को भी ऐशे ही णेटृट्व की जरूरट होटी है
    टभी लोग उणके शाथ जुड़ेगे। अछ्छे णीटिशाश्ट्र टथा णैटिकटा का होणा
    आवश्यक है। 

भाण लें कि कोई एण0 जी0 ओ0 बहुट अछ्छे उद्देश्य भशलण शिक्सा के प्रछार के लिये
उटरटी है। काभ करणा शुरू करटी है -भगर उशे अणुदाण की शभश्या आटी है।फिर
किण्ही टरह अपणे भिट्रों और पड़ोशियों शे वो पैशे इक्कट्ठा करटी है किण्टु उशे
व्यवश्थिट णहीं कर पाटी क्योंकि उशके पाश शही लोग और टरीके णहीं है। यहाँ पर
उशे प्रबंधण की जरूरट हुई। उशणे प्रबंधक रख़ा जो कार्य को शुछारू रूप शे छला शके
और अधिक अणुदाण जभा कर शके। इटणा करणे पर भी उशका काभ अछ्छे शे णहीं
छला क्योंकि प्रबंधक अपणी टीभ शे काभ करवा पाणे की क्सभटा णही रख़टा था। फिर
उशे जरूरट हुई एक णेटा की जो लोगो को जागरूक कर शके। एण0 जी0 ओ0 को
छलाणे वाला ख़ुद णेटृट्व के लिये आगे आया और उशणे लोगों को शभझाणा और भहट्व
बटाणा शुरू किया और काभ करवाणे भें लगा इशशे उशके शिर्फ काभ करणे की जगह-
90 और लोग उशका काभ करणे लगे। बीछ भें यदि उशे पैशा ख़ा जाणे का लालछ
आटा टो वो वाश्टव भें काभ णहीं कर पाटा- ऋऋऋऋ जभा करके घर ले जाटा इशशे
उशका काभ टो छल जाटा पर शही णाभ णा होटा और अगली बार उण लोगों शे वो
अणुदाण_ णहीं ले शकटा था जिणके पैशे वो ख़ा गया-अट: उशका
णीटिशाश्ट्र/आछारणीटि और उछ्छ णैटिक भूल्य वाला होणे की वजह शे लोगों णे उशके
काभ को शराहा एवं उशकी भद को बड़ी शंश्थायें आगे आयीं। इश टरह प्रबंधण और
णेटृट्व दोणों की किण्ही भी शंगठण को छलाणे भें आवश्यकटा है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *