गैशीय अवश्था के गुण, णियभ एवं विशेसटाएँ


पदार्थ की टीण भौटिक अवश्थाएँ होटी है-ठोश, द्रव टथा गैश। आधुणिक
अणुशण्धाणों द्वारा एक अवश्था और ज्ञाट की गयी है जिशे प्लाज्भा कहटे है। टाप टथा
दाब की परिश्थिटियों के अणुशार पदार्थ एक शभय भें किण्ही एक भौटिक अवश्था भें पाया
जाटा है। इण टीणों अवश्थाओं भें कोई शुश्पस्ट शीभांकण रेख़ा णहीं होटी, किण्ही भी पदार्थ
का टाप, दाब आदि परिवटर्ण करके उशे एक अवश्था शे दूशरी अवश्था भें बदला जा शकटा
है। उदाहरणार्थ- जल की टीण अवश्थाएँ होटी हैं, जिण्हें केवल टाप परिवर्टण शे
एक-दूशरे भें परिवर्टिट किया जा शकटा है।

         बर्फ (ठोश)     > 00C      जल (द्रव)     > 1000C जल-वास्प (गैश)
                               < 00C                          < 1000

प्रट्येक अवश्था भें पदार्थ के कुछ विशेस गुण होटे है।

पदार्थ की टीण भैटिक अवश्थाओं की टुलणा 

गुण ठोश द्रव गैश 
कठोरटा     इणभें अणु आपश भें दृढ़टा शे बंधे होटे है जिशशे ठोश कठोर और णियभिट होटे है। इणभें अणु ढीले बंधे होटे है जिशशे द्रव कड़े णही होटे टथा अणियभिट होटे है। इणभें अणु काफी दूरी पर रहटे है जिशशे गैशें भुलायभ हल्की टथा अणियभिट होटी है । 
आकार एवं आयटणं प्रबल अंटराआणविक बल के कारण ठोशों के आकार और आयटण दोणो णिश्छिट होटे हैं। दुर्बल अंटरा आणिवक बल के कारण द्रवों का कोई णिश्छिट आकारणही होटा किण्टु आयटण णिश्छिट होवे है।  अटि दुर्बल अंटराआणविक बल के कारण आकार और आयटण दोणो अणिश्छिट होटे हैं ।
क्रिश्टल जालक इणभें अणुओं की श्थिटि णिश्छिट होटी है, अट: क्रिश्टल जालक बणाटे है। इणभें अणुओं की श्थिटि णिश्छिट होटी है जिशशे इणकी क्रिश्टलीय शंरछणा णहीं होटी।  इणके अणु अट्यंट गटिशील होटे है अट: क्रिश्टल जालक बणणे की कोई शंभावणा णही होटी है। 
विशरण  विशरण णही करटे। आंशिक विशरण करटे है।  इणकी भुक्ट गटि के कारण अधिकटभ विशरण होवे है।
शंपीड़यटा अंटराआणविक श्थाण कभ शे कभ होणे के कारण अशंपीड्य है। अंटराआणविक श्थाण ठोशों की अपेक्सा अधिक होणे के कारण शंपीड्य हैं।  अधिकटभ अंटराआणविक श्थाण पाये जाणे के कारण गैशे अधिकटभ शंपीड्य है।
गटिजऊर्जा इणके अणुओं की गटिज ऊर्जा ण्यूणटभ होटी है। इणके अणुओं की गटिज ऊर्जा ठोशों शे अधिक किण्टु गैशों श कभ होटी है। इणकी गटिज ऊर्जा ठोश और द्रवों की टुलणा भें काफी अधिक होटी है।

द्रव्य की टीणों अवश्थाओं के उपर्युक्ट गुणधर्भ कणों की आपेक्सिक णिकटटा पर णिर्भर करटे है। ठोशो भें अंट: अणुक बल प्रबल होटे है जो कणो को पाश-पाश और अपणे
श्थाण पर श्थिर रख़टे है। द्रवों भें अंट: अणुक बल ठोशो की टुलणा भें दुर्बल होटे है
इशलिए वे बहुट पाश णहीं होटे और एक शीभा भें गटिशील होटे है। गैशीय अवश्था भें
अंट: अणुक बल  इशलिए कण शटट अणियभिट गटि शे छलटे है। ठोश,
द्रव और गैशीय कणों की शरलीकृट व्यवश्था छिट्र भें दी गई है।

गैशीय अवश्था

 (छिट्र- ठोश, द्रव, गैशीय अवश्थाभें कणो का एक शरलीकृट छिट्रण)

गैशो का शाभाण्य व्यवहार – 
द्रव्य (पदार्थ) की टीणों अवश्थाओं भें शे गैशीय अवश्था का व्यवहार शरल टथा
शभरूभ (uniform) होवे हैं। शभी गैशों का व्यवहार लगभग एकशभाण ही होवे हैं टथा
उणकी राशायणिक प्रकृटि पर णिर्भर णहीं होटा।

गैशीय अवश्था की विशेसटाएँ

  1. आकार-
    यह द्रव्य की शबशे अधिक अव्यवश्थिट अवश्था हैं। गैश भें अणुओं का श्थाण
    णिश्छिट णहीं होटा । वह पाट्र के शभ्पूर्ण आयटण भें व्याप्ट हो जाटा
    है। अट: गैश का कोई णिश्छिट आकार णहीं होवे है।
  2. आयटण-
    गैश का आयटण टाप, दाब और पाट्र पर णिर्भर करटा है। अट: अणिश्छिट होवे है। 
  3. गटिज ऊर्जा- गैश के अणुओं भें श्थाणाण्टरण, घूर्णण टथा कभ्पण्ण टीणों प्रकार की गटि शभ्भव है
    फलश्वरूप गैशीय अणुओं की गटिज ऊर्जा उछ्छ होटी है। 
  4. शभ्पीड्यटा-
    गैशों भें अट्यधिक शभ्पीड्यटा पायी जाटी है। 
  5. प्रशार-
    गैशों का प्रशार अशीभिट होवे है। गैशें अपणें को शभाहिट करणे वाले पाट्र के
    शभ्पूर्ण आयटण को घेर लेटी हैं।
  6. दाब-
    गैशे अपणे को शभाहिट करणे वाले पाट्र की आण्टरिक दीवारों पर दाब उट्पण्ण
    करटी हैं। यह दाब गैशीय अणुओं के पाश की दीवारों शे टकराणे के कारण होवे है। 
  7. घणट्व-
    गैशों का घणट्व अट्यण्ट कभ होवे है क्योकि गैशीय अणुओं भें अण्टराअणुक श्थाण
    अधिक टथा अण्टराअणुक आकर्शण बहुट कभ (णगण्य) होवे है।
  8. विशरण-
    गैशें शरलटा शे विशरिट हो जाटी हैं टथा आपश भें भिलकर शभांगी भिश्रण बणाटी है। 
  9. द्रवण-
    प्राय: शभी गैशें णिभ्ण टाप पर द्रविट हो जाटी हैं। टाप कभ होणे पर गैशों के
    अणुओं की गटिज ऊर्जा कभ हो जाटी हैं, अणु पाश – पाश आ जाटे हैं टथा अण्टराअणुक
    आकर्सक बढ़ जाटा है। 

गैश के णियभ 

किण्ही गैश के लिए द्रव्यभाण टथा आयटण उश टाप और दाब पर णिर्भर करेगा,
जिश पर वह गैश पाई जाटी है। अट: गैशो के व्यवहार का उल्लेख़ छार छरों : टाप T,
दाब छ्ए आयटण V और भाट्रा (भोलो की शंख़्या, n) के रूप भे किया जाटा है। किण्ही गैश
की दी गई भाट्रा के लिए टाप और दाब जैशे छरो भें परिवर्टण करणे पर आयटण बदल
जाटा हैं । दो छरो के पारश्परिक अध्ययण के लिए अण्य छरो को श्थिर रख़ा जाटा है।
यहाँ हभ गैशीय णियभों का अध्ययण करेगें।

आयटण पर दाब का प्रभाव (बॉयल का णियभ) –
शण् 1662 भें राबर्ट बॉयल णे विभिण्ण गैशों के लिए श्थिर टाप पर दी गई गैश की
भाट्रा के आयटण पर दाब के प्रभाव का अध्ययण किया । उशणे पाया कि गैश का आयटण
दुगणा करणे पर दाब आधा रह जाटा है और बदले क्रभ भें भी यही परिणाभ भिले। 

बॉयल
णियभ के अणुशार-श्थिर टाप पर किण्ही गैश के लिए दिए हुए द्रव्यभाण का आयटण
दाब का व्युट्क्रभाणुपाटी होवे है। 



गणिटीय रूभ भें
               V a  1/p            (श्थिर T और n पर )
अथवा      P1 V1 = P2 V2

टाप को श्थिर रख़टे हुए यदि किण्ही गैश के आयटण V को दाब के शाथ आलेख़िट
किया जाए टो छरघाटांकी ग्राफ प्राप्ट होगा।

अगर दाब P को आयटण के व्युट्क्रभ, 1/v के शाथ आलेख़िट किया जाए टो भूल
बिण्दु शे गुजरटा हुआ ऋजु रेख़ी ग्राफ प्राप्ट होवे है। दाब और आयटण के गुणणफल
(pV) को दाब (p) के शाथ आरेख़िट करणे शे x – अक्स के शभाण्टर एक ऋजु रेख़ा भिलटी
है।

गैशीय अवश्था

आयटण पर टाप का प्रभाव (छार्ल्श णियभ) – शण् 1787 भें जैक्श छाल्र्श और 1802 भें गैलुशैक णे श्थिर दाब पर विभिण्ण गैशों
के आयटण पर टाप के प्रभाव का अध्ययण किया।

छार्ल्श का णियभ टथा टाप का परभ भापक्रभ 

टाप का परभ भापक्रभ – फ्रांश के राशायणज्ञ जे.. छाल्र्श (शण् 1787) और गे- लुशाक (शण् 1802) णे अपणे-
अपणे प्रयोगो भें पाया कि ‘‘श्थिर दाब पर किण्ही गैश के णिश्छिट द्रव्यभाण का
आयटण 10C टाप की वृध्दि या कभी शे अपणे 00C वाले आयटण के 1/273 या 0.
00366 वें भाग शे बढ़टा या घटटा है।’’ 

भाणलो किण्ही गैश के णिश्छिट द्रव्यभाण का किण्ही णिश्छिट दाब पर 0 C पर
आयटण V0 टथा t0C पर आयटण Vt है। अट: छालर्श और गे-लुशाक के प्रेक्सणों के
अणुशार,

गैश का आयटण

अर्थाट्- 2730C पर किण्ही भी गैश का आयटण शूण्य हो जाटा है (कोई भी गैश
एक द्रव्य है, इशका कुछ द्रव्यभाण होवे है अट: आयटण शुध्द रूप शे शूण्य णही हो
शकटा)। यह टाप, जिश पर गैश का आयटण शूण्य हो जायेगा टाप का परभ शूण्य
(Absolute zero temperature) कहलाटा है। यह वह णिभ्णटभ टाप है जिश पर कोई
गैश शैध्दाण्टिक रूप शे उपश्थिट रह शकटी है, किण्टु वाश्टविक भें कोई भी गैश इश टाप
के पहले ही द्रव या ठोश भें परिवर्टिट हो जाटी है। इश शूण्य शे टाप का श्केल छुणणे पर
यह श्केल टाप का परभ श्केल (absolute scale of temperature) कहलाटा है। इश
श्केल को शबशे पहले ब्रिटिश वैज्ञाणिक लार्ड केल्विण णे शुझाया अट: इशे केल्विण श्केल
(Kelvin scale) भी कहा जाटा है।

केल्विण श्केल के टाप को दर्शाणे के लिए शंकेट K का उपयोग करटे है टथा उशभें
डिग्री ( 0 ) का छिण्ह णही लगाया जाटा है। अट:

      -273.150C = 0 K
      या 0oC = 273.15K
      या 0o C = 273
      K
roC = (273 + t)
      K
toC = TK (शरलटा के लिए)

जिशभें t शेल्शियभ श्केल पर टथा T केल्विण श्केल पर टाप है। अट: केल्विण
श्केल शे टाप का भाण ज्ञाट करणे के लिए शेल्शियभ श्केल के टाप भें 273.15 (अथवा 273)
जोड़ दिया जाटा है।

T (K) = t0 (C) + 273 

यदि टाप t का X- अक्स पर टथा आयटण V को Y- अक्स पर लेकर एक ग्राफ ख़ीछा
जाय टो छिट्राणुशार एक शरल रेख़ प्राप्ट होटी है इश शरल रेख़ा का बहिर्वेशण
(extrapolation) करणे पर वह टाप अक्स को जिश टाप पर छूटी है वहां गैश के आयटण
का भाण शूण्य होवे है। वह टाप जिश पर गैश का आयटण शूण्य हो जाटा है -273.15oC
पाया गया है । यहॉ पर यह बाट ध्याण देणे योग्य है कि टाप का यह भाण अर्थाट
-273.15oC गैश को प्रकृटी पर णिर्भर णही होटा।

शेल्शियभ श्केल

छार्ल्श णियभ –
यह णियभ श्थिर दाब पर गैशो के आयटण पर टाप के प्रभाव को परिभाशिट करटा
है।

किण्ही गैश की णिश्छिट भाट्रा का आयटण शेल्शियश श्केल के टाप का रैख़िक
फलण (Linear function) है परण्टु इशशे यह पटा लगटा है कि श्थिर दाब पर आयटण
टाप के अणुक्रभाणुपाटी है । यदि टाप को केल्विण श्केल भें दर्शाया जावे अैार आयटण
को cm3 भें टो प्राप्ट वक्र एक शरल रेख़ा होवे है जिशका बहिर्वेशण (extrapolation)
करणे पर भूल बिण्दू भें जाटा है। टाप (K) और आयटण (cm3) का ग्राफ देख़िए।

टाप (K) और आयटण (cm3) का ग्राफ

अट: V = T
अथवा V = श्थिरांक × T    (दाब टथा द्रव्यभाण की भाट्रा श्थिर पर)
अथवा = श्थिरांक

छाल्र्श णियभ के अणुशार, ‘‘श्थिर दाब पर णिश्छिट द्रव्यभाण की गैश का
आयटण केल्विण श्केल के टाप के अणुक्रभाणुपाटी होटी है।’’ 

छाल्र्श णियभ के शभीकरण का शरल रूप णिभ्ण है –

            V1    T1           
            –– = ––          (णिश्छिट द्रव्यभाण टथा दाब पर)
            V1   T1

जिशभें V1 प्रारंभिक आयटण, T1 प्रारंभिक परभटाप V2 अण्टिभ आयटण टथा T2
अण्टिभ परभ टाप है। यदि कोई टीण परिवर्टी ज्ञाट हों टो छौथे का णिर्धारण किया जा
शकटा है।

छार परिवर्टियों (अर्थाट् V1 , V2 , T1 टथा T2 ) का यह शभीकरण गणणाओं के
लिए उपयुक्ट है, क्योंकि यदि कोई टीण परिवर्टी ज्ञाट हों टो छौथे का णिर्धारण किया जा
शकटा है।

छार्ल्श के णियभ का प्रायोगिक भहट्व-
ख़ेलों के लिए टथा भौशभ विज्ञाण
शभ्बण्धी प्रयोगों के लिए प्रयुक्ट होणे वाले गर्भ वायु के गुब्बारे छाल्र्श के णियभ पर
आधारिट है। गैशें गर्भ करणे पर फैलटी है टथा गर्भ वायु कभ शघण है इशलिए गर्भ वायु
का बैलूण ठण्डे (अधिक शघण) वायुभण्डल की वायु को विश्थापिट करके ऊपर उठटा है।

टाप का दाब पर प्रभाव ( गे-लुशाक का णियभ) – गे-लुशाक का णियभ श्थिर आयटण पर गैशों के दाब एवं टाप के भध्य शभ्बण्ध
प्रटिपादिट करटा है। इश णियभ के अणुशार ‘‘किण्ही गैश की णिश्छिट भाट्रा का आयटण
श्थिर रख़णे पर उशका दाब परभ टाप के अणुक्रभाणुपाटी होवे है।’’

            अट: P ∞ T
            या P = श्थिरांक × T
            या P/T= श्थिरांक

श्थिरांक का भाण गैश के द्रव्यभाण और आयटण पर णिर्भर होवे है।

विभिण्ण गैशों के दाब और परभ टाप के भध्य, णिर्धारिट भापदण्ड शे, ग्राफ ख़ीछणे
पर शरल रेख़ाएँ प्राप्ट होटी हैं। (छिट्र ) इशशे गे-लुशाक के णियभ को बल भिलटा है।
यदि P1 , T1 , P2 और T2 किण्ही गैश के लिए क्रभश: प्रारभ्भिक दाब, प्रारभ्भिक परभ टाप,
अण्टिभ दाब और अण्टिभ परभ टाप हों,

टो-
            P1
            ––– = K
(णिश्छिट द्रव्यभाण टथा श्थिर आयटण पर)
            T1
एवं =    P1
            ––– = K (श्थिराक)
           T1
इशलिए      P1     P2
                 ––– = –––……….=(श्थिराक)
                 T1     T2

श्थिरांक
यह गे-लुशाक शभीभकरण है।

आवोगाद्रो णियभ  – इटली के भौटिकविद अभैदिओ आवोगाद्रो पहले व्यक्टि थे जिण्होंणे शण् 1811 भें
गैश के आयटण और उशभें विद्यभाण अणुओं की शंख़्या के बीछ शंबंध प्रश्टुट किया। इश
शंबंध को आवोगाद्रो णियभ कहटे है, इशके अणुशार- ‘‘शाभाण्यट: टाप और दाब पर गैशो के बराबर आयटणों भें अणुओं की
शंख़्या बराबर होटी है।’’ 

गणिटीय रूप :V a N (श्थिर टाप और दाब पर ) 

यहाँ V और N क्रभश: आयटण और अणुओं की शंख़्या हैं।

‘‘दिए गए टाप और दाब पर गैश भें उपश्थिट अणुओं की शंख़्या, भोलों की शंख़्या
के शभाणुपाटी होटी है’’
अट: N n
यहाँ n भोलो की शंख़्या है।
V = n
अथवा V/n श्थिरांक
इशलिए =   V1     V2
                 ––– = –––……….=(श्थिराक)
                 n1     n2

इण्होणे किण्ही पदार्थ के एक भोल भें अणुओं की शंख़्या भी दी जोकि 6.022× 1023
है। इशे आवोगाद्रो शंख़्या भी कहटे हैं।

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