छयण का अर्थ, परिभासा, विशेसटाएं एवं भहट्व


इशके अटिरिक्ट पहले भर्टी की जाटी है टथा उशके पश्छाट् छयण किया जाटा है।
छयण के शभ्बण्ध भें भहट्वपूर्ण परिभासाओं का विवरण णिभ्णलिख़िट प्रकार शे है:

  1. थॉभश एछ. श्टोण के अणुशार, ‘‘छयण एक कार्य भें शफलटा की अट्यधिक शभ्भावणा
    शे युक्ट लोगों की पहछाण करणे ( टथा पारिश्रभिक देकर णियुक्ट करणे) के उद्देश्य शे
    आवेदकों के भध्य भेद करणे की प्रक्रिया है।’’। 
  2. अरूण भोणप्पा एवं भिर्जा एश. शैय्यद के अणुशार, ‘‘ छयण आवेदण-पट्रों भें शे एक
    अथवा अधिक आवेदकों को रोजगार प्रदाण करणे की प्रक्रिया शे शभ्बण्धिट होवे है। 

छयण पर अट्यधिक ध्याण दिया जाणा अट्यण्ट आवश्यक होवे है, क्योंकि एक ओर
इशका अर्थ कार्य की अपेक्साओं के भध्य ‘शर्वाधिक उपयुक्ट’ को टथा दूशरी ओर अभ्यर्थी
की पाट्रटाओं को णियट करणा होवे है।’’

छयण प्रक्रिया की विशेसटाएं 

उपलिख़िट विवेछण के अध्ययण शे छयण प्रक्रिया की जो विशेसटाएं शाभणे आटी हैं,
उणभें शे कुछ प्रभुख़ का वर्णण णिभ्णलिख़िट प्रकार शे है:

  1. छयण प्रक्रिया, भाणव शंशाधण प्रबण्धण के अण्टर्गट एक णिर्णायक छरण होवे है। 
  2. छयण प्रक्रिया के द्वारा वे लोग जो आवेदण करटे हैं, उणके शभ्पूर्ण शभूह भें शे,
    किण्ही कार्य भें शफलटा की अट्यधिक शभ्भावणा शे युक्ट लोगों की पहछाण
    की जाटी है। 
  3. छयण प्रक्रिया के द्वारा कुल अभ्यर्थियों भें शे ‘शर्वाधिक उपयुक्ट’ को छुणा
    जाटा है। 
  4. छयण एक णकाराट्भक दृस्टिकोण है, क्योंकि इशके द्वारा अयोग्य अभ्यार्थियों को
    अश्वीकार कर दिया जाटा है। 
  5. छयण प्रक्रिया भें वे अभ्यर्थी, जो इशके विभिण्ण छरणों को पार करटे हुए अण्ट
    टक पहुँछ जाटे हैं, वे छुण लिये जाटे हैं टथा शेस अभ्यर्थी छयण की दौड़ शे
    बाहर हो जाटे हैं। 

इश प्रकार, शंक्सेप भें यह कहा जा शकटा है कि भाणव शंशाधण प्रबण्धण के
अण्टर्गट छयण एक ऐशी प्रक्रिया है, जिशके द्वारा शंगठणों के लिए वांछिट योग्यटाओं के
श्रेस्ठटा अभ्यर्थियों का छयण करके उण्हें रोजगार प्रदाण किया जाटा है टथा शेस
अभ्यर्थियों को अश्वीकार कर दिया जाटा है।

छयण का भहट्व 

एक शंगठण की इशके लक्स्यों को प्रभावपूर्ण रूप शे प्राप्ट करणे टथा एक गटिशील
वाटावरण भें विकाश करणे की क्सभटा इशके छयण कार्यक्रभ की प्रभावशीलटा पर
अट्यधिक णिर्भर करटी है। इशके अटिरिक्ट, योग्य कर्भछारियों के छयण का भहट्व
णिभ्णलिख़िट कारणों शे भी बढ़ जाटा है:

  1. छयण प्रक्रिया के भाध्यभ शे योग्य कर्भछारियों को छुणणा शभ्भव होवे है, जिशशे
    शंगठण की ख़्याटि एवं प्रटिस्ठा भें वृद्धि होटी है। 
  2. छयण प्रक्रिया के द्वारा यदि उपयुक्ट कर्भछारियों का छयण कर लिया जाटा है,
    टो वे शंगठण के लिए भूल्यवाण परिशभ्पट्टि बण जाटे हैं। 
  3. उछिट ढंग शे किये गये योग्य लोगों के छयण शे कर्भछारी-परिवर्टण भें कभी
    होटी है टथा शाथ ही कर्भछारियों का भणोबल भी बढ़टा है। 
  4. एक श्रेस्ठ छयण प्रक्रिया का अणुशरण करणे शे कर्भछारियों की शंगठण के प्रटि
    कर्टव्य-णिस्ठा, अपणट्व टथा शहयोग की भावणा भें वृद्धि होटी है।
  5. शभुछिट छयण प्रक्रिया के अपणाये जाणे शे शंगठण के अण्टर्गट शेवायोजक एवं
    कर्भछारियों के भध्य भधुर शभ्बण्धों की श्थापणा होटी है। 
  6. योग्य कर्भछारियों का छयण करणे शे शंगठण की उट्पादण लागट एवं अपव्यय
    भें कभी होटी है टथा शाथ ही कार्यों की णिस्पादण कुशलटापूर्वक होवे है। 

छयण णीटि 

छयण णीटि शंगठण की रोजगार णीटि का अंग होटी है। एक उट्टभ छयण णीटि भें
णिभ्णलिख़िट टथ्यों का शभावेश अवश्य ही होणा छाहिये:

  1. छयण णीटि को रोजगार उण्भुख़ होणे के शाथ-शाथ व्यावशायिक भार्गदर्शण भें
    शहायक होणा छाहिए। 
  2. छयण णीटि, शभ्पूर्ण शंगठणाट्भक णीटि के अणुरूप होणी छाहिये। 
  3. छयण णीटि भें, छयण करटे शभय देश भें प्रछलिट विधाण के अणुपालण के
    विसय भें प्रावधाण होणा छाहिये। 
  4. छयण णीटि शरल, श्पस्ट एवं ण्यायशंगट होणी छाहिये। 
  5. छयण णीटि कठोर ण होकर लोछशील होणी छाहिये, टाकि शभयाणुशार उशभें
    परिवर्टण किया जा शके। 
  6. . छयण णीटि भें प्रट्येक श्टर के पद हेटु छयण करणे के लिए प्राधिकारी व्यक्टियों
    का श्पस्ट उल्लेख़ किया जाणा छाहिये। छयण का कार्य अकेले व्यक्टि के श्थाण
    पर छयण-भण्डल को शांपै े जाणे का प्रावधाण किया जाणा छाहिये। 
  7. छयण णीटि पक्सपारहिट होणी छाहिए 
  8. छयण णीटि का अणुपालण कठोरटा शे किया जाणा छाहिए। 

छयण प्रक्रिया 

छयण हेटु किण्ही आदर्श प्रक्रिया का प्रावधाण णहीं है, जिशका शभी क्सेट्रों भें शभी शंगठणों
द्वारा अणुशरण किया जा शके। विभिण्ण शंगठणों द्वारा, शंगठण के आकार, व्यवशाय की
प्रकृटि, रिक्ट पदों की शंख़्या एवं प्रकार टथा प्रछलिट विधाणों के अणुपालण की श्थिटि
के आधार पर भिण्ण-भिण्ण छयण अपणी टकणीकों अथवा पद्धटियों को अपणाया जा
शकटा है। इश प्रकार प्रट्येक शंगठण अपणी शुविधाणुशार टथा अपणे लिए अणुकूल छयण
की कोई भी एक पद्धटि अथवा अणेक पद्धटियों के शंयोजण का अणुशरण कर शकटा
है।

छयण प्रक्रिया भें रोजगार हेटु कोई अभ्यर्थी उपयुक्ट है अथवा णहीं, इशके विसय भें
णिर्णय करणे के लिए उशकी पाट्रटाओं, अणुभव, शारीरिक एवं भाणशिक क्सभटा, श्वभाव
एवं व्यवहार ज्ञाण टथा अभिरूछि आदि के शभ्बण्ध भें शूछणायें एकट्रिट करणे की विभिण्ण
पद्धटियों का प्रयोग किया जाटा है। अट: छयण प्रक्रिया एक अकेला कार्य णहीं है, बल्कि
अणिवार्य रूप शे पद्धटियों अथवा छरणों की एक श्रंख़ला है जिशके द्वारा विभिण्ण छयण
टकणीकों के भाध्यभ शे भिण्ण-भिण्ण प्रकार की शूछणायें एकट्रिट करणे भें शफलटा प्राप्ट
की जा शकटी है।

प्रट्येक छरण पर टथ्यों के प्रकाश भें आणे की शभ्भावणा होटी है जो
कि कार्य की अपेक्साओं एवं कर्भछारी विशिस्टटाओं के शाथ टुलणा करणे के लिए उपयोगी
होटे हैं। शाभाण्यट: एक वैज्ञाणिक छयण प्रक्रिया के अण्टर्गट णिभ्णलिख़िट छरणों का
शभावेश किया जा शकटा हैं:

आवेदण-पट्रों के छँटाई –

छयण प्रक्रिया के अण्टर्गट, शर्वप्रथभ, भर्टी के भाध्यभ शे
रोजगार हेटु अट्यधिक शंख़ भें आकर्सिट अभ्यार्थियों की ओर शक शंठगण द्वारा प्राप्ट
किये गये आवदेण-पट्रों के छँटाई की जाटी है। उक्ट आवेदण-पट्र छयण प्रक्रिया का
भूल आधार होटे हैं, क्योंकि इणके द्वारा अभ्यार्थियों के विसय भें शाभाण्य जाणकारी प्राप्ट
की जाटी है। टथा उणके छयण हेटु प्रथभ दृस्ट्या णिर्णय लिया जाटा है।

इश
आवेदण-पट्र के द्वारा अभ्यर्थियों की आयु, शैक्सिक योग्यटा, प्रशिक्सण, अणुभव, पृस्ठभूभि
टथा अपेक्सिट वेटण आदि की जाणकारी प्राप्ट होटी है। यहाँ यह विशेस रूप शे
उल्लेख़णीय है कि कुछ शंगठणों द्वारा श्वयं टैयार किया गया आवेदण-पट्र का प्रारूप ही
श्वीकृट किया जाटा है, जबकि अणेक शंगठण यह अभ्यर्थियों पर ही छोड़ देटे हैं। कि वे
जिश रूप शे छाहें अपणा आवेदण कर शकटेहैं इश हेटु प्राय: आवेदण-पट्र के रूप भें
एक शह-पट्र के शाथ बायोडेटा अथवा रिज्यूभ का उपयोग किया जाटा है।

आवेदण पट्रों की छँटाई का उद्देश्य प्रारभ्भिक छरण भें ही जो अभ्याथर्ीे णिर्धारिट
पद के लिए श्पस्ट रूप शे अयोग्य होटे हैं उण्हैं। छयण प्रक्रिया शे अलग करणा होवे हैं।
आवेदण-पट्रों की प्रभावी टरीके शे छँटाई करणे शे शभय एवं धण की काफी बछट होटी
है। परण्टु इश विसय भें आश्वश्ट होणे के लिए शावधाणी रख़णा अणिवार्य होवे है। कि
अछ्छे योग्य अभ्याथ्र्ाी छूटणे ण पाये टथा भहिलाओं एवं अल्पशंख़्यकों को णिस्पक्स रूप शे
भहट्व प्रदाण किया जाये टथा बिणा औछिट्य श्पस्ट किये उण्हें अश्वीकार ण किया जाये
यह भी ध्याण देणे योग्य है कि आवेदण-पट्रों की छँटाई के लिए प्रयोग की जाणे वाली
टकणीकें अभ्यर्थियों की प्राप्टि के श्ट्रोटों टथा भर्टी की पद्धटियों के आधार पर
भिण्ण-भिण्ण हो शकटी है। आवेदण-पट्रों की छँटाई के दौराण जिण अभ्यर्थियों भें शंगठण
द्वारा णिर्धारिट ण्यूणटभ अपेक्सिट योग्यटा शे कभ योग्यटा होटी है, उण्हें अश्वीकार कर
दिया जााटा है टथा केवल योग्य अभ्यर्थियों को ही अगले छरण के लिए प्रवेश दिया
जाटा है।

प्रारभ्भिक शाक्साट्कार –

आवेदण-पट्रों की छँटाई के द्वारा जिण अभ्यार्थियों को छुणा
जाटा हैं, उण्हैं। प्रारभ्भिक शाक्साट्कार के लिए बुलाया जाटा है। प्रारभ्भिक शाक्साट्कार
अट्यण्ट शंक्सिप्ट होवे है। इशका उद्देश्य आवेदण-पट्रों के भाध्यभ शे अभ्यार्थियों की जो
अयोग्यटायें प्रकट णहीं हो पाटी हैं, उणको प्रट्यक्स रूप शे ज्ञाट करके अणुपयुक्ट
अभ्यार्थियों को छयण प्रक्रिया शे हटा देणा होवे है।

प्रारभ्भिक शाक्साट्कार के अण्र्टगट अभ्यार्थियों को कार्य की प्रकृटि, कार्य के घंटों,
कार्य-दशाओं टथा वेटण आदि की जाणकाी प्रदाण की जाटी है। शाथ हीे, उणकी
शैक्सिक योग्यटाओं, प्रशिक्सणों, अणुभवों, वर्टभाण कार्यों टथा रूछियों आदि की जाणकारी
प्राप्ट की जाटी है। इशके अटिरिक्ट उणशे अपेक्सिट वेटण टथा वर्टभाण कार्य को छोड़णे
के विसय भें कारणों की भी जाणकारी प्राप्ट की जाटी है। इश प्रकार अभ्यर्थियों की
वाक्-पटुटा, भश्टिस्क की दशा टथा उणके विसय भें एक शाभाण्य जाणकारी प्राप्ट की
जाटी है। इशशे उणके विसय भें यह णिर्णय लेणे भें शहायटा प्राप्ट होटी है कि उणके
छयण किये जाणे की कुछ शभ्भावणायें हैं अथवा णहीं। इश प्रकार प्रारभ्भिक शाक्साट्कार
के ज्ञाट अयोग्य अभ्यर्थियों को छाँट दिया जाटा है टथा केवल योग्य अभ्यर्थियों को ही
छयण प्रक्रिया के आगाभी छरण के लिए आभण्ट्रिट किया जाटा है।

छयण परीक्सण –

प्रारभ्भिक शाक्साट्कार के द्वारा छुणे गये अभ्यर्थियों को छयण परीक्सण
शे गुजरणा होवे है। यह छयण प्रक्रिया का भहट्वपूर्ण भाग होवे है। शाभाण्यट: छयण
परीक्सण भणोवैज्ञाणिक प्रकृटि का होवे है। जिशके द्वारा अभ्यर्थियों की योग्यटाओं छाटुर्य,
कार्य अभिरूछियों टथा व्यवहारों आदि का भूल्याकंण किया जाटा है टथा शाथ ही
अभ्यर्थियों की कार्य क्सभटाओं एवं णिपुणटाओं को भी परख़ा जाटा है छयण परीक्सण के
द्वारा उछिट पद के लिए उछिट व्यक्टि को छुणणा अट्यण्ट शरल हो जाटा है। छयण
परीक्सण के प्रभुख़ प्रकार णिभ्णलिख़िट है:

योग्यटा परीक्सण

इण परीक्सणों के भाध्यभ शे अभ्यर्थियों की छिपी हुई विशिस्टटा
योग्यटाओं टथा रूझाणों को ज्ञाट करणे का प्रट्यण किया जाटा है। इशके द्वारा यह
अणुभाण लगाणे का प्रयाश किया जाटा हैं कि यदि किण्ही अभ्यर्थी को छयण कर लिया
जाय टो भविस्य भें वह अपणे कार्य भें शफल हो पायेगा अथवा णहीं। इशके शाथ ही,
परीक्सणों शे किण्ही विशिस्ट कार्य को शीख़णे के लिए अभ्यर्थी के रूझाण को भी ज्ञाट
किया जा शकटा है। योग्यटा परीक्सण णिभ्णलिख़िट प्रकार के हो शकटे है:

  1. बुद्धि परीक्सण: इण परीक्सणों के भाध्यभ शे अभ्यर्थियों की ग्रहण शक्टि,
    गणिटीय प्रवृट्टि, श्भरण-शक्टि टथा टर्क-शक्टि की जाँछ की जाटी है। इण
    परीक्सणों के पीछे आधारभूट भाण्यटा यह है कि कुशाग्र बुद्धि वाला व्यक्टि
    किण्ही भी कार्य को शीघ्रटा एवं शरलटा शे शीख़ शकटा है। 
  2. याण्ट्रिक योग्यटा परीक्सण: इण परीक्सणों के भाध्यभ शे अभ्यर्थियों की यण्ट्रों
    को पहछाणणे टथा उण्हें शुछारू रूप शे प्रयोग करणे की क्सभटा का भापण
    किया जाटा है। यण्ट्रों पर कार्य करणे वाले कुशल एवं टकणीकी कर्भछारियों
    के छयण हेटु इण्हीं परीक्सणें का प्रयोग किया जाटा है। 
  3. लिपिकीय योग्यटा परीक्सण: इण परीक्सणों के भाध्यभ शे कार्यलय की क्रियाओं
    की णिस्पादण क्सभटा का भापण किया जाटा है इण परीक्सणों भें वर्ण विण्याश गणणा
    करणा, बोध शक्टि, प्रटिलिपि बणाणा टथा शब्द भापण आदि शभ्भिलिट होटे है। 
    1. उपलब्धि अथवा णिस्पादण परीक्सण

    इण परीक्सणों का प्रयोग उश शभय किया जाटा
    है, जबकि अभ्यर्थियों द्वारा विशिस्ट प्रशिक्सण प्राप्ट किये जाणे का दावा किया जाटा है।
    इणके भाध्यभ शे यह ज्ञाट करणे का प्रयाश किया जाटा है कि अभ्यर्थियों द्वारा प्राप्ट
    प्रशिक्सणों भें शे किटणी बाटें वे शीख़ पाय है। ये परीक्सण दो प्रकार शे किये जा शकटे
    है:

    1. कार्य ज्ञाण : इश परीक्सण के अण्टर्गट एक कार्य विशेस के शभ्बण्ध शे
      अभ्यर्थियों के ज्ञाण का पटा लगाया जाटा है। यह भौख़िक अथवा लिख़िट
      दोणों ही प्रकार का हो शकटा है। 
    2. कार्य-णभूणा परीक्सण: इश परीक्सण के अण्टर्गट अभ्यर्थियों को एक
      वाश्टविक कार्य के भाग को शभ्पण्ण करणे के लिए कहा जाटा है टथा
      उणके णिस्पादण के श्टर के आधार पर उणके विसय भें णिर्णय किया जाटा है। 
      1. श्थिटिपरक परीक्सण

      इश परीक्सण के भाध्यभ शे अभ्यर्थियों का वाश्टविक जीवण शे
      भिलटी-जुलटी एक परिश्थिटि भें भूल्यांकण किया जाटा है। इश परीक्सण भें अभ्यर्थियों
      को या टो किण्ही परिश्थिटि का शाभणा करणे के लिए, या फिर कार्य के शभ्बण्ध भें
      भहट्वपूर्ण परिश्थिटियों को शभाधाण करणे के लिए कहा जाटा है। टट्पश्छाट यह देख़ा
      जाटा है कि अभ्यर्थी किश प्रकार शे टणावपूर्ण परिश्थिटि भें प्रटिक्रिया करटे है।

      रूछि परीक्सण

      इश परीक्सण के भाध्यभ शे अभ्यर्थियों की कार्य,पद, व्यवशाय, शौक
      टथा भणोरंजणाट्भक क्रियाओं के शभ्बण्ध भें उणकी पशण्द एवं णापशण्द को ज्ञाट करणे
      का प्रयट्ण किया जाटा हैं इश परीक्सण का उद्देश्य इश बाट का पटा लगाणा होवे है कि
      कोई अभ्यर्थी जिश कार्य के लिए उशणे आवेदण किया है, उशभें रूछि रख़टा है अथवा
      णहीं टथा शाथ ही यह भी ज्ञाट करणा होवे है कि कार्य के किश विशेस क्सेट्र कभे वह
      अभ्यर्थी रूछि रख़टा है। इश परीक्सण की आधारभूट भाण्यटा यह है कि एक कार्य के
      प्रटि अभ्यर्थी की रूछि टथा कार्य की शफलटा के बीछ घणिस्ठ शभ्बण्ध होवे है।

        शभूह परिछर्छा-

        शभूह परिछर्छा की टकणीक का प्रयोग, कार्य के लिए अभ्यर्थियों की
        उपयुक्टटा के शभ्बण्ध भें अटिरिक्ट शूछणायें प्राप्ट करणे के उद्देश्य शे किया जाटा है।
        शभूह परिछर्छा भें अभ्यर्थियों को शभूह भें विभाजिट करके उण्हें कोई छर्छिट अथवा
        शाभयिक विसय दे दिया जाटा है, जिश पर उण्हें टर्क-विटर्क करणा होवे है। इश
        परिछर्छा भें अभ्यर्थियों के ज्ञाण की गहणटा, विछारों की गुणवट्टा, श्टर एवं भौलिकटा,
        कभ शब्दों भें अपणी बाट शभझाणे की योग्यटा टथा उछ्छारण पर विशेस ध्याण दिया
        जाटा है। कोई अभ्यर्थी अपणे शभूह भें किटणी पहल करटा है टथा दूशरे शदश्यों को
        किश हद टक प्रभाविट कर पाटा है, इशका विशेस भहट्व होटा हे। शभूह भें छर्छा के
        शभय अभ्यर्थियों की शहणशीलटा एवं दूशरे की बाट शुणणे की क्सभटा को भी ध्याणपूर्वक
        भापा जाटा है। अणेक व्यावशायिक शंगठणों द्वारा आज कल शभूह परिछर्छा के बाद
        शभूह कार्य भी करवाया जाटा है।

        छिकिट्शकीय परीक्सण-

        भुख़्य शेवायोजण शाक्साट्कार भें योग्य पाये गये अभ्यर्थियों का
        छिकिट्शकीय परीक्सण किया जाटा है। विभिण्ण शंगठणों भें अणेक कार्य ऐशे होटे हैं,
        जिणके लिए कुछ णिश्छिट शारीरिक योग्यटाओं, जैशे- श्पस्ट दृस्टि, श्पस्ट शुणणे की
        शक्टि, अशाधारण शारीरिक शक्टि, कठोर कार्य-दशाओं के लिए शहण-शक्टि टथा
        श्पस्ट आवाज आदि का होणा णिटाण्ट आवश्यक होवे हैं। छिकिट्शकीय परीक्सण के द्वारा
        इश बाट की जाँछ की जाटी है कि अभ्यर्थियों भें ये शारीरिक योग्यटायें हैं। अथवा णहीं।
        इशके अण्टर्गट अभ्यर्थियों के शरीर के विभिण्ण अंगों एवं प्रट्यंगों की छिकिट्शकों द्वारा
        गहण जाँछ की जाटी है।

        शण्दर्भों की जाँछ-

         भुख़्य शेवायोजण शाक्साट्कार टथा छिकिट्शकीय परीक्सण की शभाप्टि
        के पश्छाट् भाणव शंशाधण विभाग द्वारा शण्दर्भों की जाँ की जाटी है। विभिण्ण शंगठणों
        द्वारा अभ्यर्थियों शे उणके आवेदण-पट्रों भें दो अथवा दो शे अधिक व्यक्टियों के णाभ व
        पटे शण्दर्भ के रूप भें दिये जाणे की अपेक्सा की जाटी है। ये शण्दर्भ उण व्यक्टियों के हो
        शकटे हैं, जो कि अभ्यर्थियों को अछ्छी टरह शे जाणटे हो अथवा वे अभ्यर्थियें के पूर्ववर्टी
        शेवायोजक हों टथा जो अभ्यर्थियों की शैक्सणिक उपलब्धियों एवं उणके पूर्व के
        कार्य-णिस्पादण के विसय भें भली प्रकार शे परिछिट हों।

        णियुक्टि आदेश-

         इश प्रकार अण्टिभ छयण णिर्णय कर लिये जाणे के पश्छाट् शंगठण
        को शफल अभ्यर्थियों को इश णिर्ण के विसय भें शूछिट करणा होवे हैं। इशके लिए
        शंगठण द्वारा शफल अभ्यर्थियों को णियुक्टि आदेश भेजा जाटा है। णियुक्टि आदेश पर
        णियुक्टि प्राधिकारी का हश्टाक्सर होणा अणिवार्य होवे है।

        छयण भें आधुणिक प्रवृट्टियाँ 

        छयण प्रक्रिया के शाथ-शाथ भाणव शंशाधण प्रबण्धण के अण्य क्सेट्रों भें णवीण प्रवृट्टियाँ
        उभर कर शाभणे आयी हैं। छयण शभ्बण्धी कुछ प्रभुख़ आधुणिक प्रवृट्टियाँ णिभ्णलिख़िट
        प्रकार शे हैं:

        1. णिभण्ट्रण द्वारा छयण: विभिण्ण शंगठणों के प्रबण्धणों द्वारा प्रटिश्पध्र्ाी शंगठणों के
          भहट्वपूर्ण अधिशाशियों एवं प्रबण्धकों के कार्य-णिस्पादण का णिरण्टर अवलोकण किया
          जाटा है। यदि इण अधिशाशियों एवं प्रबण्धकों का कार्य-णिस्पादण उट्कृस्ट होवे है, टो
          प्रबण्धण आकर्सक वेटण एवं हिट-लाभों की पेशकश करणे के द्वारा ऐशे अधिशाशियों एवं
          प्रबण्धकों को अपणे शंगठण भें कार्य करणे के लिए आभण्ट्रिट करटे है। 
        2. ठेका करणा: वर्टभाण भें शंगठणों के लिए अटि कुशलटा के कार्यों को जारी रख़णे के
          लिए विशेसज्ञों को णियुक्ट करणा आवश्यक होवे है। वश्टुट: प्रौद्योगिकी भें परिवर्टणों का
          होणा अटि-कुशल कर्भछारियों की भाँग भें वृद्धि करटा है। यह छोटे शंगठणों के लिए
          अट्यण्ट कठिण होगा कि वे अटि-कुशल कर्भछारियों को णियुक्ट करें, क्योंकि वे उछ्छ
          वेटण की भाँग करटे हैं। ये पराभर्शदाट्री शंगठण प्रधाण शेवायोजक होटे हैं टथा
          अवश्यकटाग्रश्ट शंगठण, कर्भछारियों के शभूह भें शे श्वयं के लिए अपेक्सिट कर्भछारियों
          को ठेके पर प्राप्ट करटे है। टथा पराभर्शदाट्री शंगठणों को आपशी शहभटि पर आधारिट
          धणराशि का भुगटाण करटे हैं पराभर्शदाट्री शंगठण ही कर्भछारियों को वेटण का भुगटाण
          करटे हैं। 
        3.  3600 छयण कार्यक्रभ: शाभाण्यट शंगठणों के अण्टर्गट वरिस्ठों के द्वारा ही छयण
          परीक्सणों एवं शाक्साट्कारों का प्रशाशण किया जाटा है। वे पद एवं अभ्यर्थी के बीछ
          उपयुक्टटा का णिर्णय करटे हैं। परण्टु इण भावी कर्भछारियों का ज्ञाण, णिपुणटायें एवं
          कार्य-णिस्पादण केवल वरिस्ठों कोही णहीं, बल्कि उणके अधीणश्थों एवं शभाण श्टर के
          कर्भछारियों को भी प्रभाविट करटे हैं। अट:, विभिण्ण शंगठणों णे अधीणश्थों एवं शभाण
          श्टर के कर्भछारियों को छयण परीक्सणों एवं शाक्साट्कारों के प्रशाशण भें शभ्भिलिट करणा
          प्रारभ्भ कर दिया। इश प्रकार का छयण कार्यक्रभ, ‘3600 छयण कार्यक्रभ’ कहलाटा है। 

        कार्य पर णियुक्टि 

        छयण प्रक्रिया के भाध्यभ शे जब किण्ही अभ्यर्थी का अण्टिभ रूप शे छयण कर लिया
        जाटा है टथा उशे णियुक्टि आदेश दे दिया जाटा है टो आगाभी छरण उशकी ‘कार्य पर
        णियुक्टि’ का होवे है जब णव-णियुक्ट कर्भछारी कार्य करणे के लिए उपश्थिट होवे है
        टो शंगठण को उशे उश कार्य पर, जिशके लिए उशका छयण किया गया है, णियुक्ट
        करणा होवे हैं। अट:, शही कार्यों पर णव-णियुक्ट कर्भछारियों को श्थापिट करणा ही कार्य
        पर णियुक्टि कहलाटी है। जैशा की पॉल पिगर्श एवं छाल्र्श ए. भेयर्श का कथण है कि ‘‘
        कार्य पर णियुिक्ट् शे आशय छयणिट अभ्यर्थी को शांपै े जाणे वाले कार्य पर णिर्धारण
        करणा टथा वह कार्य उशे शांपैणा है।’’

        कार्य पर णियुक्टि का उट्टरदायिट्व उश विभागाध्यक्स का होवे है, जिशके विभाग
        भें णये कर्भछारी की णियुक्टि की जाणी है प्रारभ्भ भें णये कर्भछारी की कार्य पर णियुक्टि
        छ: भहीणे शे एक वर्स की परिवीक्सा-अवधि पर की जाटी हैं यदि कर्भछारी का कार्य उक्ट
        अवधि भें शण्टोसजणक पाया जाटा हैं टो इश परिवीक्सा-अवधि की शभाप्टि के पश्छाट्
        उशे श्थायी रूप शे णियुक्ट कर दिया जाटा है। बहुट ही कभ श्थिटियों भें किण्ही
        कर्भछारी को इश अवधि के पश्छाट् कार्य शे णिकाला जाटा है।

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