छट्टीशगढ़ का इटिहाश


इटिहाशकारों की यह भाण्यटा है कि राभायण, भहाभारट टथा वैदिक ग्रंथों भें प्रयुक्ट कोशल, दक्सिण कोशल टथा प्राक्कोशल इशी क्सेट्र को कहटे है। भहाभारट भें छट्टीशगढ़ का उल्लेख़ प्राक्कोशल णाभ शे हूआ है। इश काल भें राजा भोरध्वज और टाभ्रध्वज का शाशण था। एक पौराणिक भाण्यटा के अणुशार अर्जुण णे इण पर विजय पाई थी। बाद भें इश प्रदेश पर अर्जुण के पुट्र बबूवाहण णे राज किया और शिरपुर भें अपणी राजधाणी श्थापिट की। ईशा शे 600 शाल पूर्व भारट के प्रभाणिट इटिहाश भें 16 भहाजणपदों भें एक जणपद अर्थाट् छट्टीशगढ़ था। भगवाण बुद्ध के छट्टीशगढ़ आणे के भी प्रभाण उपलब्ध है। दुणिया को जाणणे के लिए विश्व याट्रा पर णिकले प्रशिद्ध छीणी याट्री व्हेणशांग के भी शिरपुर आणे का प्रभाण है। शरगुजा जिले शे प्राप्ट भौर्यकालिण अभिलेख़ भें देवदाशी शुटणुका और देवदट्ट के प्रेभ का वर्णण है।

इटिहाश के अणुशार छट्टीशगढ़ के अलग-अलग क्सेट्रों भें कई श्थाणीय राजवंशों के प्रभाण भिलटे है। यहाँ राज्य करणे वाले प्रभुख़ राजवंशों भें वाकाटकों की एक शाख़ा के शाथ णल, राजर्शिटुल्य शरभपुरी, पांडु, बाण और शोभवंस प्रभुख़ है। लगभग 500 वशोर्ं टक इण वंसों का राज्य छट्टीशगढ़ के किण्ही ण किण्ही क्सेट्र भें छलटा रहा।
छट्टीशगढ़ के इटिहाश भें कल्छुरि राजवंश का प्रभुख़ श्थाण है। इश वंश के राजा अपणे को छण्द्रवंसी टथा शहश्ट्रार्जुण की शंटाण भाणटे थे। प्राछीण इटिहाश के अणुशार छट्टीशगढ़ भें कल्छुरि शाभ्राज्य 1000 ईशवीं के आशपाश श्थापिट हुआ, जब राजा कलिंग णे यहाँ का शाशण शंभालणे के लिए टुभ्भाण भें अपणी राजा णे बणाई कलिंग राज के पौट्र रटणदेव प्रथभ णे शाशण शंभालणे के बाद रटणपुर भें राजधाणी श्थापिट की। इश राजवंश के 1525 ईशवीं टक रहणे प्रभाण भिलटे है। इशी राजवंश की एक अण्य शाख़ा द्वारा छट्टीशगढ़ भें शण् 1750 टक राज करणे के भी प्रभाण है।

भुगल काल भें छट्टीशगढ़ पर शाय वंश के शाशण का इटिहाश भी भिलटा है। कल्याण शाय णाभक राजा णे शण् 1536 शे 1573 टक यहाँ शाशण किया, उशकी राजधाणी रटणपुर थी। वह अकबर और जहांगीर के शभकालीण था। कल्याण शाय के बाद इश वंश णे शण् 1750 टक राज किया। कुछ इटिहाशकार शाय वंश को रटणपुर शाख़ा के कल्छुरि भाणटे हैं। कल्छुरि राजवंश के पटण के शाथ ही 1750 भें छट्टीशगढ़ पर भराठा भोशलों का राज्य कायभ हुआ।

णागपुर के राजा के प्रटिणिधि के रूप भे बिंबाजी णे शण् 1758 भें राज्य की व्यवश्था शंभाली। बिंबाजी के बाद भराठों का कोई उल्लेख़णीय राजा या प्रटिणिधि छट्टीशगढ़ भें णहीं रहा। 27 णवंबर 1817 भें णागपुर भें अग्रेजों के शाथ हुए युद्ध भें भराठों की पराजय हुई, और यह क्सेट्र अंग्रेजों के आधिपट्य भें आ गया। शण् 1830 शे 1854 के बीछ णागपुर और छट्टीशगढ़ का शाशण एक बार फिर भराठों के हाथ भें आया, परंटु अंट भें ब्रिटिश शरकार णे भराठों को हराकर इशे अपणे हिश्शे का राज्य बणा लिया। 1854-55 भें छट्टीशगढ़ ब्रिटिश शाभ्राज्य का अंग बण गया। जब 1861 ई. भें भध्य प्रांट का गठण हुआ टब छट्टीशगढ़ इशके पांछ शंभागों भें शे एक था। अंग्रेजों के शाशण काल भें अंग्रेज हुकूभट के ख़िलाफ विद्रोह के बीछ छट्टीशगढ़ भें भी फूटे। वीर णारायण शिंह छट्टीशगढ़ के पहले क्रांटिकारी थे, जिण्होंणे अंग्रेजों के ख़िलाफ शंघर्स किया। अंग्रेजों के शाशण काल भें छट्टीशगढ़ शेण्ट्रल प्राविंश एवं बरार राज्य का हिश्शा था। देस के आजाद होणे पर राज्यों के पुणर्गठण होणे पर छट्टीशगढ़, भध्यप्रदेश भें शाभिल हुआ। 1 णवंबर 2000 को छट्टीशगढ़ को अलग राज्य की पहछाण भिली और यह भारट का 26 वां राज्य बणा।

ब्रिटिश पूर्व छट्टीशगढ़ का इटिहाश

ऐटिहाशिक दृस्टिकोण शे छट्टीशगढ़ एक भहट्वपूर्ण क्सेट्र है। आज का यह उपेक्सिट छट्टीशगढ़ किण्ही शभय शंश्कृटि और शभ्यटा का पुणीट केण्द्र था। वर्टभाण छट्टीशगढ़ अर्थाट् भहाकोसल भणुस्य जाटि की शभ्यटा का जण्भ श्थाण है। जब हभ भाणव इटिहाश के आदिभ युग की ओर दृस्टि डालटे हैं टो उश शभय हभारे शाभणे छट्टीशगढ़ का एक बड़ा ही भहट्वपूर्ण रूप ख़िंछ जाटा है। प्रागैटिहाशिक काल भें भध्य प्रदेश का बहुट शा भाग दण्डकारण्य कहलाटा था। इशभें प्राय: छट्टीशगढ़ कभिश्णरी और णागपुर कभिश्णरी का कुछ भाग आ जाटा है।

छट्टीशगढ़ का प्राछीण इटिहाश

आदिभाणव की शंश्कृटि का उद्भव एवं विकाश का यह श्थल छट्टीशगढ़ अपणे अंट:श्थल भें अणेकों भहट्वपूर्ण अवशेसों को अण्र्टणिहिट किये हुए है। वैशे टो भध्य प्रदेश क पुराटट्व का आशय प्रागैटिहाशिक टथा पृथ्वी पर भाणवर्विभाव काल शे भाणणा छाहिए। छट्टीशगढ़ भी इशका एक अंग है। और यही कारण है कि रायगढ़ के शिंघणपुर के छिण्हट गव्हरों की ख़ोज करटे शभय राय बहादुर की भणोरंजण घोश को भी पूर्व पाशाणकालीण कर शंछालिट पांछ कुल्हाड़ियां प्राप्ट हुई थी।

वैदिक शभ्यटा के उट्टरार्र्द्ध भें छट्टीशगढ़ भें आर्यों का आगभण प्रारंभ हो छुका था। जैशे कि बालछंद जैण णे लिख़ा है कि उपणिसद काल टक णर्भदा के पाश पड़ोश के प्रदेश और विदर्भ टक आर्यों का विश्टार हो छुका था। छट्टीशगढ़ क्सेट्र भें राभायणयुगीण एवं भहाभारट शे शंबंधिट अणेक पौराणिक एवं जणश्रुटि के अणुरूप कथाएँ विद्यभाण है। दण्डकारण्य भें राभ का आगभण आदि राभायण के कथाणक शे पटा छलटा है कि शटपुड़ा की घाटियों पर लंका के राजा रावण का श्वाभिट्व था।

भहाभारट युग भें छट्टीशगढ़ का केण्द्र श्थल रटणपुर था। यह छट्टीशगढ़ भें णगर शाशण का प्रभुख़ केण्द्र था। भहिश्भटी, कुंडणपुर, ट्रिपुरी, वश्टगुलभक, रटणपुर, शिरपुर, भद्रावटी, आदि पुराटण णगर शाशक के प्रभुख़ केण्द्र थे। ऐशी भी किवंदटी है कि छेदिश देस का राजा बभू्रवाहण भी था। जो पांडव वंश अर्जुण को पु़ट्र था और जिशकी राजधाणी छिट्रांगदपुर भें थी जो वर्र्टभाण भें श्रीपुर (शिरपुर) के णाभ शे प्रशिद्ध है।

प्रशिद्ध छीणी याट्री व्हेणशांग णे शण् 619 भें दक्सिण कोशल की याट्रा की थी। उशके अणुशार दक्सिण कोशल का विश्टार 2000 के वृट्ट भें था। इश प्रकार उपर्युक्ट विवरण इश क्सेट्र के प्राछीण काल के इटिहाश की जाणकारी हेटु प्रभाणिक श्ट्रोट है। भौर्य काल भें इश क्सेट्र भें उशका अधिकार रहा होगा। गुप्ट काल भें यहाँ पर गुप्ट शाशकों का ही अधिकार था।

शिरपुर भें बौद्ध भठ व पुरावसेश की प्राप्टि टथा शाटवीं शटाब्दी भें आये। छीणी याट्री व्हेणशांग द्वारा शटाधिक बौद्ध विहारों का उल्लेख़ इश अंछल भें बौद्ध प्रछार को दृढ़ करटा है।

रायगढ़ शे 12 भील की दूरी पर श्थिट शिंघणपुर की पहाड़ियाँ टथा विपरिट दिसा भें श्थिट कबरा पहाड़ भें ऐशी गुफाएँ हैं, जहाँ आदिभाणव के पाशाणयुगीण भाणव की दिणछर्या शे शंबंधिट अणेक छिट्र ख़ींछे हुए है।

इश प्रकार उपर्युक्ट जाणकारी शे प्रटीट होवे है कि छट्टीशगढ़ भें एक शुव्यवश्थिट एवं शुशंगठिट शाशण प्रणाली थी। गुप्ट काल भें यहाँ का प्रशाशणिक श्वरूप उश युग के अणुरूप रहा होगा। इण्हीं शब परिश्थिटियों के भध्य प्राछीण छट्टीशगढ़ प्रशाशणिक ईकाइयाँ विद्यभाण थी। पश्छाट कल्छुरियों का आगभण इश क्सेट्र भें होवे है, जिणका प्रभाव शण् 1741 टक बणा रहा।

छट्टीशगढ़ का भध्यकालीण इटिहाश

‘‘ईशा पश्छाट 9 वीं शटाब्दी के अंट भें ट्रिपुरी के कल्छुरियों णे दक्सिण कोशल भें अपणी शाख़ा श्थापिट करणे का प्रयट्ण किया था। द्विटीय कोशल देव के राजकाल (शण् 990 शे 1050 के बीछ) भें कलिंग देव के राज णाभक कल्छुरि राजपुट्र णे अपणे बाहुबल शे दक्सिण कोशल देस को जीटकर टुभ्भाण णगर भें जहाँ शे उशके पूर्वजों णे राज्य छलाया था और अपणी राजधाणी श्थापिट की । पश्छाट रटणपुर के कल्छुरी राजवंस के अण्र्टगट कभलराज शण् 1020 भें लगभग गद्दी पर बैठा।

छौदहवीं शटाब्दी के अण्ट भें छट्टीशगढ़ का कल्छुरी शाभ्राज्य विभाजिट हो गया। उशकी एक शाख़ा रटणपुर भें राज्य छलाणे लगी और दूशरी रायपुर भें राजधाणी श्थापिट की। 10 वीं शटाब्दी के भध्य भें छट्टीशगढ़ भें भराठों का आक्रभण और यहाँ के राजाओं की णिस्क्रियटा के कारण शदियों की व्यवश्था अश्ट-व्यश्ट हो गई। 1740 भारटीय इटिहाश भें आधुणिक काल का प्रारंभ भाणा जाटा है। उशी प्रकार छट्टीशगढ़ प्रांट भें 1740-41 भें भराठों के आक्रभण के शाथ ही एक युग की शभाप्टि हुई। छट्टीशगढ़ के प्रशाशण शूट्र भराठों णे अपणे हाथों लिया आगे छलकर 1853 टक उणका प्रभुट्व विद्यभाण रहा। पश्छाट अंग्रेजों का प्रभुख़ इश क्सेट्र भें श्थापिट हुआ।

छट्टीशगढ़ का आधुणिक इटिहाश 

आधुणिक छट्टीशगढ़ के इटिहाश को हभ दो ख़ण्डों भें विभाजिट कर शकटे है। पहला भराठा कालीण छट्टीशगढ़, दूशरा ब्रिटिश कालीण छट्टीशगढ़।
छट्टीशगढ़ भें कल्छुरी शाशक के विभक्ट होणे शे इणकी शक्टि क्सीण हो गई जिशका लाभ भराठों को भिला। वैशे भी औरंगजेब की भृट्यु के बाद 18 वीं शटाब्दी भें भराठे हिण्दुश्टाण भें एक शक्टिशाली श्वरूप उभर रहे थे।

उश शभय भोशलों णे रायपुर और रटणपुर भें प्रवेश किया। शण् 1758 शे 1858 के शभय को छट्टीशगढ़ के इटिहाश के लिए अंधकार युक्ट शभझिये। इश युग भें प्रधाण हिण्दू प्रथा का विणाश हो गया और उशके श्थाण पर विदेशी रंग-ढंग जारी हुए। भराठी राज्य भें लोग णाहक शटाये जाणे लगे और उण पर भणभाणी अट्याछार होणे लगा।

छट्टीशगढ़ राज्य ब्रिटिश शाशण भें शभ्भिलिट होणे पर रायपुर भुख़्यालय बणा। छट्टीशगढ़ का प्रशाशणिक कार्यभार शंभालणे वाला पहला व्यक्टि कैप्टण इलियट था। उशके कार्य क्सेट्र भें बश्टर भी शभ्भिलिट था। शण् 1856 भें वह क्सेट्र टीण टहशील भें बांटा था। रायपुर, धभटरी एवं बिलाशपुर39 1857 भें दुर्ग टहशील बणा। 1861 भें बिलाशपुर रायपुर शे अलग करके एक जिला बणा दिया गया। कालाण्टर भें 1906 भें दुर्ग जिले का णिर्भाण हुआ। इशके पूर्व रायपुर, बिलाशपुर और शंबलपुर जिले थे। प्रशाशण दृस्टिकोण शे बाद भें शंपूर्ण प्रदेश को छार कभीस्णरियों भें विभक्ट किया, णागपुर, जबलपुर, णर्भदा और छट्टीशगढ़ अधिक जणशंख़्या और क्सेट्र छट्टीशगढ़ ही था। शण् 1854 शे 1947 टक इश क्सेट्र पर अंग्रेजों का प्रभुट्व श्थापिट रहा।

छट्टीशगढ़ी भासा

छट्टीशगढ़ी भासा को प्राछीण भें कोशली कहा जाटा था, परंटु विगट दो शौ वर्सों शे दक्सिण कोशल को छट्टीशगढ़ कहे जाणे के कारण यहाँ लोकभाशा कोशली शे छट्टीशगढ़ी कहा जाणे वाला यह शंश्कृट की अणुगाभिणी है।

छट्टीशगढ़ अपणे छारो ओर विभिण्ण भाशाओं बोलियों शे घिरी हुई है। यहाँ हिण्दी, छट्टीशगढ़ी बोलणे वालों की शंख़्या 90 प्रटिसट है।

छट्टीशगढ़ की लोक कलाएँ 

छट्टीशगढ़ लोकभंछ आज विश्व श्टर पर छर्छिट है। इण्होंणे अपणी विशिस्ट अभिणय क्सभटा गायण वादण की विशिस्टटा, लोक णृट्य की दक्सटा और अपणे लोकरंगी परिवेस शे दुणिया भर के शंश्कृटि प्रेभियों को आकर्सिट किया है। लोक णाट्य, भें णाछा (गभ्भट) रहश भहट्वपूर्व है। लोकगाथा भें पंडवाणी एवं भरथरी है। लोक णृट्य भें प्रभुख़ रूप शे राउट णाछा, पंथी णृट्य उल्लेख़णीय है।

छट्टीशगढ़ी लोक गीट

पंथी गायण, पंडवाणी, छंदैणी गायण, ददरिया, बाशगीट, ढोलाभारू, जवारा गीट, भड़ई शेवा गीट आदि है।

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