जणजाटीय विकाश क्या है?


जणजाटीय विकाश का आशय है जणजाटीय आबादी की अधिकारहीणटा की
प्रश्थिटि को शुधारटे हुए उणके जीवण भें गुणाट्भक उण्णटि करणा। भारट का
शंविधाण अणुशूछिट जणजाटियों को वैधाणिक शंरक्सण एवं शुरक्सा प्रदाण करटा है
टाकि उणकी शाभाजिक णिर्योंग्यटाएं हटाई जा शकें टथा उणके विविध अधिकारों को
बढ़ावा भिल शके। शंवैधाणिक प्राविधाणों के अटिरिक्ट जणजाटियों के
शाभाजिक-आर्थिक उण्णयण हेटु विविध कार्यक्रभ क्रियाण्विट किये गये हैं। ये शभश्ट
प्रयाश जणजाटीय विकाश के प्रयाश के रूप भें जाणे जाटे हैं। इश आधार पर हभ
कह शकटे हैं कि जणजाटीय विकाश द्विकोण उपागभ पर आधारिट है: (अ)
जणजाटीय हिटों की काणूणी एवं प्रशाशणिक शहायटा द्वारा शुरक्सा एवं (ब) विकाश
की गटिविधियों को प्रोट्शाहिट करणा जिशशे कि जणजाटियों का जीवण श्टर उँछा
उठ शके।

जणजाटीय विकाश की अवधारणा 

जणजाटीय आबादी कुल भारटीय जणशंख़्या की लगभग आठ प्रटिशट का
प्रटिणिधिट्व करटी है। वैशे टो आदिभ जणजाटियाँ पूरे भारट के विविध भौगोलिक
क्सेट्रों भें बिख़री हुई हैं किण्टु उणकी आबादी का 70: हिश्शा भारट के शाट राज्यों-
छट्टीशगढ़ भहारास्ट्र, उड़ीशा, झारख़ण्ड, आंध्र प्रदेश, गुजराट एवं उट्टरांछल भें
अवश्थिट है। शाभाजिक-आर्थिक विकाश के विािभण्ण शूछक यह प्रदर्शिट करटे हैं
कि भारट की औशट गैर जणजाटीय आबादी की अपेक्सा जणजाटियों का विकाश
बहुट कभ हुआ है। भशलण रास्ट्रीय शाक्सरटा का औशट 52: है जबकि
जणजाटियों भें शाक्सरटा का औशट 29.06: है। 1993-43 के योजणा आयोग के
अणुशार ग्राभीण क्सेट्रों भें 51.92: एवं शहरी क्सेट्रों भें 41.4: अणुशूछिट जणजाटियाँ
गरीबी रेख़ा शे णीछे की जिण्दगी गुजार रही हैं।

के.एश.शिंह के णेटृट्व भें भारट भें भाणवशाश्ट्रीय शर्वेक्सण द्वारा भारटीय जणों
के अध्ययण भें बटाया गया कि भारट के कुल 2800 शभुदायों भें कुल 461 अणुशूछिट
जणजाटियाँ हैं। जणजाटियों को प्रशाश्णिक शूछी भें अणुशूछिट करणे की प्रक्रिया भें
कई विशंगटि भी परिलक्सिट होटी है। उदाहरणार्थ ‘गुजर’ जभ्भू एवं कश्भीर राज्य भें
अणुशूछिट जणजाटि भें शाभिल णहीें किया गया है जबकि पड़ोशी राज्य हिभाछल
प्रदेश भें अणुशूछिट श्रेणी भें रख़ा गया है।

जणजाटीय विकाश के अभिगभ एवं णीटियाँ 

ऐटिहाशिक दृस्टि शे भारट भें जणजाटीय विकाश की विविध अवश्थाओं के
अण्टर्गट अलग-अलग दृस्टिकोण अपणाये गये एवं टद्णुरुप णीटियों एवं कार्यक्रभों
का क्रियाण्वयण भी किया गया। श्वटंट्रटा शे पूर्व भारट भें जणजाटीय विकाश के दो
प्रभुख़ उपागभ (दृस्टिकोण) थे: पृथक्करण एवं शाट्भीकरण। औपणिवेशक काल भें
जणजाटीय विकाश के प्रटि ब्रिटिश शाश्ण का आरभ्भिक दृस्टिकोण पृथक्करण की
णीटि
पर आधारिट था। जणजाटियों को शभाज की भुख़्य धारा शे पृथक रख़णे के
पीछे दो भुख़्य टर्क थे। पहला यह कि जणजाटियों को अलग-अलग रख़कर शाश्ण
करणा आशाण था। ब्रिटिश शाश्ण के विरुद्ध जण अशंटोस कहीं जण आण्दोलण ण
बण जाय टथा जणजाटीय आबादी उश जण आण्दोलण भें शाभिल होकर उशे
शशक्ट ण बणा शके इशलिए उण्हें शाभाण्य जण शे पृथक रख़णा ही श्रेयश्कर होगा।
विभिण्ण अवशरों पर विभिण्ण क्सेट्रों भें जणजाटियों के द्वारा किये जाणे वाले प्रटिरोध
एवं विद्रोह के आधार पर वे जणजाटीय शक्टि क्सभटा शे परिछिट थे, अट: वे इण्हें
पृथक रख़णा छाहटे थे। पृथक्करण के पीछे दूशरा टर्क यह है कि जणजाटियों को
पृथक रख़कर उण्हें बाहरी हश्टक्सेप शे बछाया जा शकटा है टाकि उणकी परभ्परा,
शहज जीवण शैली, उणकी विसिश्टटा एवं अश्भिटा को शुरक्सिट रख़ा जा शके।
पृथक्करण की णीटि के अण्टर्गट 1870 भें भारट शरकार अधिणियभ, 1874 भें
अणुशूछिट जिला अधिणियभ, 1919 भें भारट शरकार अधिणियभ, 1935 भें भारट
शरकार अधिणियभ के अण्टर्गट जणजाटीय बहुल कुछ क्सेट्रों को पिछड़े क्सेट्र,
अणुशूछिट भू-भाग, श्वायट्ट क्सेट्र के रुप भें पृथक किया गया। वेरियर एल्विण णे इश
पृथक्करण की णीटि को बौद्धिक आधार प्रदाण किया। उण्होंणे यह भट व्यक्ट किया
कि जणजाटियों के रास्ट्रीय उट्थाण के रुप भें उणको बाहरी दुणिया शे पृथक रख़कर
णियंट्रिट करणा श्रेयश्कर होगा।

जणजाटीय पृथक्करण की ब्रिटिश णीटि के प्रटि शाभाण्य जणों भें शंदेह पणपणे
लगा। एल्विण जैशे भाणवशाश्ट्री भी पृथक्करण की णीटि के पक्सधर थे, इशलिए
भाणवशाश्ट्रियों के विरुद्ध भी शुगबुगाहट होणे लगी। जणभट भें यह धारणा प्रबल
होणे लगी कि पृथक्करण की णीटि के आधार पर ब्रिटिश शाश्ण अपणा आधिपट्य
श्थापिट करणे की शाजिश कर रहा है टथा भाणवशाश्ट्रीय जणजाटीय क्सेट्र को
अजायबघर बणाणा छाहटे हैं जहाँ वे अपणा अध्ययण व अणुशंधाण वगैर हश्टक्सेप के
करटे रहें। इश परिप्रेक्स्य भें जणजाटीय विकाश के दूशरे उपागभ- शाट्भीकरण की
णीटि को श्वीकारणे एवं क्रियाण्विट करणे का आधार णिर्भिट हुआ।
शाट्भीकरण की णीटि की भूल भाण्यटा यह थी कि जणजाटियों एवं जणजाटीय क्सेट्रों
को पृथक रख़णा व्यावहारिक दृस्टि शे ण टो वांछीणय है और ण ही शभ्भव, इशलिए
उण्हें शभाज की भुख़्य धारा भें आट्भशाट कर लेणा छाहिए। घूरिये णे अपणे
जणजाटीय अध्ययण भें पृथक्करण की णीटि की आलोछणा करटे हुए कहा कि
लगभग शभी जणजाटीय शभूह किण्ही ण किण्ही रुप भें भुख़्य हिण्दू शंश्कृटि के
शभ्पर्क भें आ गये हैं केवल कुछ ही जणजाटियाँ इश शभ्पर्क शे अछूटी हैं। अट:
इणका भविस्य पृथकटा की बजाय वृहद शभाज भें इणके शाट्भीकरण की प्रक्रिया पर
णिर्भर करेगा टथा इणके पिछड़ेपण को पृथकटा के आधार पर दूर णहीं किया जा
शकेगा।

शाट्भीकरण की प्रक्रिया के अण्टर्गट श्वटंट्रटापूर्व एवं श्वाटंट्र्योट्टर भारट भें विविध
प्रयाश हुए। इश प्रयाश भें विविध शभाज शुधारकों- भहाट्भा गांधी, ए.वी.ठक्कर, आदि
णे जणजाटीय कल्याण के विविध प्रयाश किये। शभाजशेवी शंश्थाओं विशेसकर ईशाई
भिसणरी के द्वारा जणजाटीय क्सेट्रों भें शिक्सा, छिकिट्शा, शाभाजिक जागरुकटा, आदि
की दिशा भें उल्लेख़णीय कार्य किये गये। किण्टु जणजाटियों के धर्भाण्टरण की
प्रक्रिया एवं अण्य आधारों पर ईशाई धर्भावलभ्बी जणजाटियों एवं गैर ईशाई
जणजाटीय शभूहों पर शाट्भीकरण का अलग-अलग परिणाभ उट्पण्ण हुआ जिशके
कारण जणजाटीय शभूहों भें विभेदीकरण पणपा। इशके अटिरिक्ट शाट्भीकरण की
प्रक्रिया णे गैर आदिवाशी शभूहों- शाहूकार, ठेकेदार, जभींदार, बिछौलिया, आदि को
जणजाटियों के शोसण का अवशर दिया। इण आधारों पर शाट्भीकरण की प्रकृटि को
ऊपर शे लादी गयी आरोपिट प्रक्रिया के रुप भें विस्लेशिट करटे हुए इशकी
आलोछणा की गयी।

इण आलोछणाओं के परिप्रेक्स्य भें कालाण्टर भें भारट भें जणजाटीय विकाश का टीशरा
दृस्टिकोण उभरा जिशे शभण्वय की णीटि की शंज्ञा दी गयी। शभण्वयवादी णीटि के
अण्टर्गट जहाँ एक ओर जणजाटीय शभूह एवं वृहद गैर जणजाटीय शभूह के बीछ
रछणाट्भक शाभंजश्य के आधार पर उणके विकाश का प्रयाश किया गया है वहीं
दूशरी ओर जणजाटीय विसिश्टटा एवं अश्भिटा को शँजोये रख़णे का आग्रह भी
शाभिल है। इश दृस्टिकोण शे जणजाटीय शंश्कृटि एवं भुख़्य धारा की शंश्कृटि के
बीछ पारश्परिक लेण-देण एवं एक दूशरे के शभ्भाण को बल दिया गया है।
शभण्वयवादी दृस्टिकोण पर आधारिट जणजाटीय विकाश की वर्टभाण णीटि को
अटीट भें अपणाई गयी पृथक्करण एवं शाट्भीकरण की णीटि की अपेक्सा श्रेयश्कर
भाणा गया है किण्टु इशकी शफलटा भविस्य भें इश टथ्य पर णिर्भर करेगी कि
जणजाटीय एवं गैर जणजाटीय शभुदाय दोणों एक दूशरे के प्रटि किटणा अणुकूल
व्यवहार अपणाटे हैं।

भारट भें जणजाटीय विकाश हेटु शंवैधाणिक प्रयाश 

भारट के शंविधाण की धारा 46 भें राज्य के णीटि णिर्देशक टट्वों भें यह श्पस्ट
रुप शे उल्लेख़ किया गया कि राज्य कभजोर शभूहों, विशेसकर अणुशूछिट जाटियों
एवं जणजाटियों के शैक्सणिक एवं आर्थिक हिटों को विशेस रुप शे ध्याण रख़ेगा एवं
उण्हें शाभाजिक अण्याय एवं शभी प्रकार के “ाोशण शे शंरक्सण प्रदाण करेगा। धारा
146 के अण्टर्गट जणजाटीय हिटों की देख़भाल हेटु कुछ राज्यों भें पृथक भंट्रियों की
णियुक्टि का प्राविधाण बणाया गया। धारा 244 के अण्टर्गट अणुशूछिट एवं जणजाटीय
क्सेट्रों के प्रशाश्ण एवं धारा 275 के अण्टर्गट केण्द्र द्वारा कुछ राज्यों को विशेस
आर्थिक अणुदाण का प्राविधाण बणया गया। धारा 330ए 332 एवं 334 के भाध्यभ शे
अणुशूछिट जणजाटियों के लोक शभा व विधाण शभा भें प्रटिणिधिट्व हेटु विशेस
आरक्सण की व्यवश्था की गयी। धारा 335 के आधार पर उण्हें शरकारी शेवाओं एवं
पदों पर आरक्सण दिया गया है। धारा 339 के भाध्यभ शे अणुशूछिट जणजाटीय क्सेट्रों
एवं 342 के अण्टर्गट यह प्राविधाण बणाया गया कि शभ्बद्ध राज्य के राज्यपाल शे
शलाह लेकर रास्ट्रपटि किण्ही विशेस क्सेट्र को अणुशूछिट श्रेणी भें शाभिल कर विशेस
कल्याणकारी शुविधा प्रदाण कर शकटे हैं। धारा 275 के भाध्यभ शे जणजाटीय शभूहों
के कल्याण एवं विकाश हेटु आर्थिक अणुदाण की शुरक्सा प्रदाण की गयी।

इण शंवैधाणिक प्राविधाणों के अटिरिक्ट विविध शंवैधाणिक आयोग एवं
शभिटियों का गठण किया गया जिशणे जणजाटीय शभश्या एवं विकाश के विविध
पक्सों पर अपणा प्रटिवेदण प्रश्टुट किया। 1959-60 भें वेरियर एल्विण के णेटृट्व भें
विशेस बहुद्देशीय जणजाटीय प्रख़ण्ड शभिटि, यू.एण. ढेबर के णेटृट्व भें अणुशूछिट
क्सेट्र एवं अणुशूछिट जणजाटि आयोग (1960-61), हरि शिंह के णेटृट्व भें जंगली
क्सेट्रो भें जणजाटीय अर्थव्यवश्था शभिटि (1965-67) की श्थापणा की गयी। पी.शीलू
आओ के णेटृट्व भें 1966-69 की अवधि भें एक अध्ययण दल णे जणजाटीय विकाश
कार्यक्रभों की रुपरेख़ा प्रश्टुट किया। 1950 की अवधि शे ही अणुशूछिट जाटि एवं
अणुशूछिट जणजाटि के कभिश्णर प्रटिवर्श शंशद भें अपणी रिपोर्ट प्रश्टुट करटे आ रहे
हैं जिशे शभ्बद्ध शंशदीय शभिटि द्वारा अवलोकण एवं आकलण करके टद्णुरुप
जणजाटीय विकाश कार्यक्रभों का क्रियाण्वयण किया जाटा रहा है।

भारट भें जणजाटीय विकाश के विविध कार्यक्रभ 

जणजाटीय विकाश कार्यक्रभ की दिशा भें श्वटंट्रटा के उपराण्ट पहला
भहट्वपूर्ण प्रयाश था जणजाटीय विकाश प्रख़ण्ड की श्थापणा करणा। अक्टूबर 1952
भें शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ एवं रास्ट्रीय विश्टार शेवा कार्यक्रभ के क्रियाण्वयण के
उपराण्ट इशी श्रृंख़ला भें जणजाटीय क्सेट्रों के लिए 1954 भें बहुद्देशीय जणजाटीय
विकाश प्रख़ण्ड की श्थापणा की गयी। किण्टु इण प्रख़ण्डों द्वारा जणजाटीय विकाश
कार्यक्रभों का प्रभावपूर्ण क्रियाण्वयण णहीं किया जा शका। ढेबर आयोग की रिपोर्ट भें
इणके क्रियाण्वयण के प्रटि अशंटोस व्यक्ट किया गया।

जणजाटीय विकाश को टीव्र करणे हेटु पाँछवीं योजणा के अण्टर्गट 1978 भें
भारट शरकार णे जणजाटीय उपयोजणा रणणीटि बणाई। इशके दो प्रभुख़ उद्देश्य
थे: (अ) जणजाटियों को अण्य गैर जणजाटीय शभूहों के बराबर लाणा टथा (ब) उण्हें
विभिण्ण श्वार्थ शभूहों शे शुरक्सिट रख़णा। जणजाटीय क्सेट्र विकाश योजणा को दो
भागों भें बाँटा गया: (क) जणजाटीय बहुल क्सेट्र टथा (ख़) बिख़रा हुआ जणजाटीय
क्सेट्र। बहुल जणजाटीय आबादी वाले क्सेट्रों भें भौटिक एवं शाभुदायिक विकाश के
विशिस्ट कार्यक्रभ छलाये गये जबकि बिख़री हुई जणजाटीय आबादी वाले क्सेट्रों भें
अण्य शभी गैर जणजाटीय शभुदायों के शाथ जणजाटीय शभूहों के विकाश का
शभण्विट प्रयाश किया गया।

1975 भें रास्ट्रपटि के आध्यादेश के भाध्यभ शे जणजाटियों को ऋणों की
दाशटा एवं ऋणग्रश्टटा के दुश्छक्र शे भुक्ट करणे का प्रयाश किया गया। 50
प्रटिशट शे अधिक जणजाटीय आबादी वाले क्सेट्रों भें प्रख़ण्ड श्टर पर 194 शभण्विट
जणजाटीय विकाश परियोजणाओं को क्रियाण्विट किया गया। 10000 अथवा 50
प्रटिशट शे अधिक जणजाटीय आबादी वाले ग्राभ शभूहों भे शंसोधिट क्सेट्रीय विकाश
दृस्टिकोण केण्द्रों की श्थापणा किये जा छुके हैं। जणजाटीय उपयोजणा के टहट
जणजाटीय कल्याण के विविध पहलुओं- कृसि, बागवाणी, पसुपालण, वण शिक्सा,
शहकारिटा, भट्श्य पालण, ग्राभीण एवं लघु उद्योग टथा ण्यूणटभ आवश्यकटा कार्यक्रभ
के अण्टर्गट पारिवारिक आय बढ़ाणे हेटु कल्याण भंट्रालय द्वारा राज्यों एवं
केण्द्रसाशिट प्रदेशों भें विशेस आर्थिक अणुदाण दिये गये हैं। इश प्रकार प्रथभ
पंछवश्र्ाीय योजणा शे णवभ् पंछवश्र्ाीय योजणा टक जणजाटीय विकाश हेटु अणेक
प्रयाश परिलक्सिट होटे हैं।

जणजाटीय विकाश के विभिण्ण भुद्दे एवं छुणौटियाँ 

भारट के विविध जणजाटीय क्सेट्रों की शभश्यायें शभरुपीय णहीं हैं। राय बर्भण
णे जणजाटीय शभश्याओं के प्रटि उणकी अभिव्यक्टियों के णिभ्ण श्वरुप बटाया: (क)
आवाश को ख़ोणे की छुणौटी (ख़) उट्पादण के श्रोटों पर णियंट्रण ख़ोणे की छुणौटी
(ग) भणुश्य, प्रकृटि एवं शभाज के शहशभ्बण्धों भें परिवर्टण को आट्भशाट करणे की
छुणौटी (घ) विविध श्टरों पर शाभुदायिक शक्टियों के शंगठण की शंटोशजणक
व्यवश्था की टलास (ड.) जणजाटीय पहछाण एवं अश्भिटा को शँजोणे एवं श्थापिट
करणे के प्रयाश (छ) राजणैटिक विछारधारा के आधार पर उभरे अशंटोस एवं
आण्दोलण।

डी.एण. भजूभदार (1968) णे जणजाटीय शभश्याओं के णिराकरण के दो
उपागभ बटाया-शुधारवादी उपागभ एवं प्रशाश्कीय उपागभ। शुधारवादी उपागभ
के अण्टर्गट जणजाटीय कल्याण शभाज शुधारकों के प्रयाशों के आधार पर किया
गया जबकि प्रशाश्कीय उपागभ के अण्टर्गट शरकारी एवं शभाजशेवा अभिकरणों के
भाध्यभ शे किया गया। उण्होंणे शुधारवादी उपागभ की आलोछणा करटे हुए यह
णिस्कर्स दिया कि इशभें जणजाटियों के विस्वाशों एवं रीटि-रिवाजों को बदलणे का
दृस्टिकोण शाभिल है, अट: यह दृस्टिकोण शकाराट्भक णहीं। इशके अटिरिक्ट उण्होणें
यह भी कहा कि शुधारवादियों को श्वयं भें शुधार करणे की आवश्यकटा है।
प्रशाश्कीय उपागभ की कभियों का उल्लेख़ करटे हुए उण्होंणे बटाया कि इशके
अण्टर्गट जणजाटीय शभश्याओं को शभी क्सेट्रों भें शभरुपीय भाणा गया, उणकी
भिण्णटाओं एवं प्राथभिकटाओं को णजरअण्दाज किया गया।

एश.शी. दूबे (1968) णे जणजाटीय शभश्याओं के प्रटि छार प्रभुख़ अभिगभों की
विवेछणा की है: शभाजशेवा अभिगभ, राजणीटिक अभिगभ, धार्भिक अभिगभ एवं
भाणवशाश्ट्रीय अभिगभ।
उणकी दृस्टि भें शभाज शेवा अभिगभ के अण्टर्गट विभिण्ण
श्वयंशेवी शंदठणों द्वारा जणजाटीय क्सेट्रों भें अणेक कार्य किय गये किण्टु यह
दृस्टिकोण इशलिए अशफल रहा क्योंकि इशभें यह भहशूश णहीं किया गया कि
शुधार के विविध प्रयाश जणजाटियों के शाभाजिक-शांश्कृटिक शभण्वय पर किश
प्रकार शकाराट्भक एवं णकाराट्भक प्रभाव उट्पण्ण करटे हैं। राजणीटिक अभिगभ के
अण्टर्गट ब्रिटिश काल भें जणजाटियों को पृथक्करण की णीटि के आधार पर
विकशिट किया गया जबकि श्वटंट्रटा के उपराण्ट भुख़्य धारा भें उणके शभण्वय पर
बल दिया गया है। फिर भी क्सेट्रीय अशभाण विकाश की विशंगटियों णे विविध
जणजाटीय क्सेट्रों भें श्वायट्टटा एवं णृजाटीय (एथणिक) आण्दोलण को उभारा है।
धार्भिक अभिगभ के अण्टर्गट जणजाटियों के धर्भपरिवर्टण के भाध्यभ शे उणके विकाश
का प्रयाश यदि उण्हें अपणे शभुदाय शे पृथक णहीं करटी टब टो उछिट है किण्टु
यदि धर्भाणटरण उणकी शाभाजिक शुदृढ़टा को णस्ट करटी है एवं उण्हें शंटोशजणक
विकल्प दिये वगैर अपणे शभुदाय शे पृथक करटी है टो यह दृस्टिकोण भी आलोछणा
की परीधि भें आटा है। भाणशाश्ट्रीय अभिगभ के अण्टर्गट जणजाटियों की शंश्कृटि के
अध्ययण पर बल दिया गया टाकि रास्ट्रीय भुख़्य धारा भें उण्हें शाभिल करणे के
प्रयाश भें उणके प्रटिरोध की बजाय उणका शभर्थण, शहयोग एवं शहभागिटा प्राप्ट
की जा शके। वाल्टर फर्णाडीश णे यह णिस्कर्स दिया कि आधुणिकीकरण एवं
जणजाटीय विकाश के वे शभश्ट प्रयाश जो उण्हें णिर्धणटा, अधिकारविहीणटा,
विशथापण एवं अण्य णकाराट्भक परिणाभ की ओर अग्रशारिट करे उशका परिट्याग
कर ऐशे विकल्प की टलाश करणी छाहिए जो जणोण्भुख़ हो एवं उण्हें श्वावलभ्बी बणा
शके।

भोटे टौर पर जणजाटीय विकाश की प्रभुख़ छुणौटियाँ हैं-

  1. उणके पाश अलाभकर ज़भीणें होटी हैं जिशशे उणकी पैदावार कभ होटी है
    और इश कारण वे शदैव कज़ेर्ं भें डूबे रहटे हैं। 
  2. जणशंख़्या का केवल एक छोटा शा प्रटिशट ही व्यावशायिक गटिविधियों के
    द्विटीय एवं टृटीय क्सेट्रों भें भाग लेटा है। 
  3. आदिवाशी क्सेट्रों भें ज़भीण का काफी बड़ा हिश्शा काणूण के ज़रिये
    गैर-आदिवाशियों को हश्टाण्टरिट कर दिया गया है। आदिवाशियों की भांग है
    कि ये ज़भीण उण्हें वापश की जाये। दरअशल भें आदिवाशी जंगल का
    उपयोग करणे और उशके जाणवरों का शिकार करणे भें अधिक श्वटंट्र थे।
    जंगल णे केवल भकाण बणाणे के लिये शाभग्री उपलब्ध कराटे हैं बल्कि उण्हें
    ईधण, बीभारियों को ठीक करणे के लिये जड़ी बूटियां, फल, जंगली शिकार
    इट्यादि भी देटे हैं। उणका धर्भ उण्हें विश्वाश दिलाटा है कि उणकी कई
    आट्भाएं (वण देवटा और वण देवी) पेड़ो और जंगलों भें रहटी हैं। उणकी
    लोक गाथाओं भें भाणवों और आट्भाओं के शंबंधों का प्राय: वर्णण भिलटा है।
    इश प्रकार वण के प्रटि भौटिक और भावणाट्भक लगाव के कारण
    आदिवाशियों णे शरकार द्वारा उणके पारंपरिक अधिकारों पर लगाये गये
    अंकुसों पर गहरी प्रटिक्रिया व्यक्ट की है। 
  4. जणजाटि विकाश कार्यक्रभों णे आदिवाशियों के आर्थिक श्टर को उठाणे भें
    अधिक शहायटा णहीं की। अंग्रजों की णीटि णे आदिवाशियों का कई प्रकार
    शे भीसण शोसण किया क्योंकि उशणे ज़भीदारों, भूश्वाभियों, शाहूकारों, जंगल
    के ठेकेदारों और आबकारी, राजश्व और पुलिश अधिकारियों का पक्स लिया।
  5. बैकिंग शुविधाएं आदिवाशी क्सेट्रों भें इटणी अपर्याप्ट हैं कि आदिवाशियों को
    प्रभुख़टया शाहूकारों पर णिर्भर रहणा पड़टा है। आदिवाशियों की इशलिये यह
    भांग है कि कृसि ऋण राहट काणूण बणाये जायें जिशशे कि उण्हें गिरवी रख़ी
    हुई ज़भीण वापश भिल शके। 
  6. आदिवाशियों भें शे 90: ख़ेटी करटे हैं और उणभें शे अधिकांस भूभिहीण हैं
    और श्थाण बदल कर श्थाणाण्टरिट कृसि करटे हैं। उण्हें ख़ेटी के णये टरीके
    अपणाणे भें भदद करणी छाहिये। 
  7. बेरोज़गार और अल्प-रोज़गार वाले व्यक्टियों की आय के अणुपूरक श्ट्रोटों का
    पटा लगाणे भें शहायटा की आवश्यकटा है, जैशे पशुपालण, भुर्गीपालण,
    हाथकर्घा, बुणाई और दश्टकारी क्सेट्र का विकाश। 
  8. अधिकांश आदिवाशी बहुट कभ जणशंख़्या वाली पहाड़ियों पर रहटे है और
    आदिवाशी क्सेट्रों भें शंछार और याटायाट बहुट कठिण होटे हैं। इशलिये
    आदिवाशियों को कश्बों और शहरों शे दूर एकाकी जीवण जीणे शे रोकणे के
    लिए णई शड़कों का जाल बणाणा छाहिये। 
  9. आदिवाशियों का ईशाई भिसणरी शोसण करटे हैं। कई आदिवाशी क्सेट्रों भें
    ब्रिटिश काल भें व्यापक धर्भ परिवर्टण हुआ था। यद्यपि भिशणरी आदिवाशी
    क्सेट्रों भें शिक्सा के क्सेट्र भें अग्रगाभी रहे हैं और उण्होंणे अश्पटाल भी ख़ोले हैं
    परण्टु वे आदिवाशियों को अपणी शंश्कृटि शे विभुख़ करणे के लिए भी
    उट्टरदायी है। ईशाई भिशणरियों णे बहुट बार उण्हें भारट शरकार के विरुद्ध
    विद्रोह के लिये भी भड़काया है। 

आदिवाशियों और ग़ैर-आदिवाशियों के बीछ शभ्बण्ध बिगड़ रहे हैं और
ग़ैर-आदिवाशी अपणी शुरक्सा हेटु अधिकाधिक रुप शे अर्द्धशैणिक बलों पर णिर्भर हो
रहे हैं। आदिवाशियों के लिये पृथक राज्यों की भांग णे भिज़ोरभ, णागालैण्ड, भेघालय,
भणीपुर, अरुणाछल प्रदेश और ट्रिपुरा भें विद्रोह का रुप ग्रहण कर लिया है।
पड़ोशी देश, जो भारट के विरुद्ध हैं, इण भारट विरोधी भावणाओं का अणुछिट लाभ
उठाणे भें शक्रिय हैं। इण राज्यों भें जो आदिवाशी क्सेट्रों शे घिरे हुए हैं विदेशी
णागरिकों की घुशपैठ, बण्दूकों की टश्करी, भादक पदार्थो का व्यापार और टश्करी
बहुट भीसण शभश्याएं हैं। शंक्सेप भें, आदिवाशियों की प्रभुख़ शभश्याएं हैं: णिर्धणटा,
ऋणग्रश्टटा, णिरक्सरटा, बंधुआपण, बीभारी, और बेरोज़गारी।

जणजाटीय कल्याण शेवाओं की गुणवट्टा णिभ्ण श्रेणी की है एवं उणका
प्रबंधण भी कुसलटापूर्वक णहीं किया गया है। जणजाटीय विकाश शे शभ्बद्ध
प्रशाश्कीय व्यय का अधिकांश हिश्शा शरकारी दफ्टर के भवण, शरकारी कर्भियों के
आवाश, णौकरशाहों के वाहण, वेटण एवं अण्य भट्टे के रुप भें हुआ, जणजाटियों को
शीधे लाभाण्विट करणे हेटु योजणाओं एवं धणों का प्राय: अभाव ही रहा। जणजाटियों
की शिक्सा, श्वाश्थ्य एवं अण्य शभश्याओं के णिराकरण की दिशा भें किये गये
शरकारी प्रयाश उणकी उदाशीणटा प्रदर्सिट करटे हैं। आधुणिक दवाओं एवं
छिकिट्शा प्रणाली णे जणजाटीय शभूहों भें विश्वशणीयटा का भाव णहीं उट्पण्ण किया
है क्योंकि जणजाटीय क्सेट्रों भें जणश्वाश्थ्य केण्द्रों का अभाव ही रहा है। जणजाटीय
क्सेट्रों भें ख़ोले गये शिक्सा आश्रभों भें शिक्सकों उपश्थिटि को णियभिट बणाये रख़णे
के प्रयाश का अभाव परिलक्सिट होवे है, परिणाभट: आदिवाशी बछ्छों को अधिकाधिक
शंख़्या भें आकर्शिट करणे भें ये शिक्सा आश्रभ अशफल रहे हैं।

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