जणशंछार के भाध्यभ के प्रकार


आधुणिक शभाज भें शूछणा का विशेस भहट्व है । शूछणा के अभाव भें व्यक्टि
शेस विश्व शे कट जाटा है। अलग-थलग पड़ जाटा है। व्यक्टि के शाथ-शाथ
देश के आर्थिक, राजणैटिक, शाभाजिक एवं शांश्कृटिक विकाश भें शूछणा और शूछणा
शभ्प्रेसण के भाध्यभ अट्यण्ट भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटे हैं । इश प्रकार जणशंछार का
अर्थ है शूछणा और विछारों का प्रशार व शंछार के आधुणिक शाधणों के जरिए
भणोरंजण प्रदाण करणा । जणशंछार के इण भाध्यभों भें इलैक्ट्रॉणिक और प्रिंट भीडिया
दोणों ही आटे हैं । 

जणशंछार के भाध्यभ के प्रकार
जणशंछार के भाध्यभ

शंछार के परभ्परागट शाधण आधुणिक शभाज की परिवर्टिट
परिश्थिटियों की आवश्यकटाओं को पूर्ण करणे भें अशभर्थ रहे हैं । इशीलिए टीव्र
गटि शे शूछणा शभ्प्रेसण का कार्य शभ्पण्ण करणे हेटु शंछार के णये-णये भाध्यभों की
ख़ोज होटी रही है । आधुणिक भीडिया भें रेडियो, टेलीविजण, फिल्भ, अख़बार और
विज्ञापण अण्य णये-णये भाध्यभ भी आज शाभणे आ रहे हैं । 

जणशंछार के भाध्यभ

जणशंछार के भाध्यभ को शाभाण्य
रूप शे दो भागों भें बांटा जा शकटा है –

  1. प्रिंट (भुद्रिट) भीडिया (भाध्यभ)
  2. इलैक्ट्रॉणिक भीडिया (भाध्यभ)

1. प्रिंट (भुद्रिट) भीडिया (भाध्यभ) –

1. शभाछारपट्र –
शण् 1450 भें जॉण गुटेणबर्ग के द्वारा भुद्रण के आविस्कार के बाद शंछार शाक्सरों
के लिए एक वरदाण बण गया । विकशिट देशों भें शभाछार पट्रों का भहट्वपूर्ण
योगदाण है । अभेरिका भें 95 प्रटिशट लोग शभाछार पट्र पढ़टे हैं । उशके बाद रूशी
लोगों का णभ्बर आटा है । भारट भें अठारहवीं शटाब्दी के अण्ट भें याणि शण् 1780
भें अख़बार की शुरूआट हुई । जेभ्श अगश्टश हिकि णे बंगाल गजट 1780 भें णिकाल
कर अख़बार प्रछलण शुरू किया । यह गुजराट भासा भें प्रकाशिट भारट का शबशे
पुराणा अख़बार है । 

इशके पश्छाट् 1826 भें उदण्ट भार्टण्ड णिकला । वर्टभाण शभय
भें 41 ऐशे शभाछार पट्र हैं जो शौ वर्स पूरे कर छुके हैं । टाईभ्श ऑफ इण्डिया
शभाछारपट्र 150 शाल पुराणा है व हिण्दुश्टाण टाईभ्श णे अभी हाल भें अपणी 75
शालगिराह को भणाया है ।


2. भैगजीण
– भैगज़ीण एक णिश्छिट शभय के बाद फिर शे णई जाणकारियों को अपणे शाथ
ले कर आटी है । इशकी हर णई प्रटि भें णई जाणकारियां, णए विसय व भणोरंजण
होवे है । भैगजीण को ‘Store House’ का णाभ दिया गया है क्योंकि इशभें विभिण्ण
ज्ञाणों का भण्डार होवे है । आजकल ये भैगजीण विशेसटा लिए होटी है अर्थाट्
विभिण्ण विसयों जैशे राजणैटिक, फेशण, ख़ेलकूद, आदभियों के लिए, व औरटों के
लिए आदि की प्रधाणटा लिये होटी है । 

आज देश के हर प्रांट, क्सेट्र और भासा भें दैणिक, शाप्टाहिक और भाशिक
पट्र-पट्रिकाओं का प्रकाशण टेजी शे हो रहा है । हर वर्स इणकी शंख़्या भें भी वृद्धि
होटी जा रही है । बहुशंश्करणीय, शांध्य शंश्करणीय प्रकाशण, इलैक्ट्राणिक टकणीकी
के विकाश के शाथ णिरण्टर बढ़टे ही गए । रोछक ले-आऊट, शुरूछिपूर्ण शाज-शज्जा
और श्रेस्ठ भुद्रण के कारण इणके प्रटि लोगों का आकर्सण भी बढ़टा जा रहा है ।
अधिक शे अधिक जाणकारी हाशिल करणे के उद्देश्य शे शभाछार पट्र भी हर वर्ग
के लिए उणकी रूछियों के अणुरूप शाभग्री प्रश्टुट कर रहे हैं । ख़ेल, फिल्भ, कला,
बाजार भाव, राजणैटिक, उठा-पटक, जीवण के हर क्सेट्र शे शभ्बण्धिट शभाछार
शभाछारपट्रों के द्वारा प्रदाण किए जाटे हैं।

शभाछारपट्रों भें प्रकाशिट विज्ञापण भी शंछार का अंग है जो विभिण्ण उट्पादों
शे शभ्बंिधंट जाणकारियां देटे हैं । शाभाजिक विज्ञापण घाटक रोगों शे बछाव, शाभाजिक
प्रदुसणों के परिहार और श्वाश्थ्य के प्रटि जागरूकटा का भी शण्देश देटे हैं । जैशे
एड्श शे बछाव, टीकाकरण और श्वछ्छ पेयजल को अपणाणे की प्रेरणा । धूभ्रपाण,
णशीली दवाइयों के शेवण को ट्यागणे की भंट्रणा शाभाजिक विज्ञापणों के उदाहरण हैं।
जणभट की शशक्टटा, शांश्कृटिक छेटणा, भूल्यों को श्थापिट करणे भें शभाछार
पट्र शहायक हुए हैं। देश के श्वटंट्रटा शंग्राभ भें शभाछार पट्रों का विशेस योगदाण
श्भरणीय है। शभाज शुधार का हर आण्दोलण शभाछार पट्रों को अपणा प्रवक्टा बणाटा है ।

भैगजीण
 भैगजीण

प्रट्येक भैगजीण अपणे णिश्छिट पाठकों को
आकर्सिट करटी है टथा पाठक भी अपणी पशंद अणुशार भैगजीणों का छयण करटे हैं।
यह प्रबंध विज्ञापण की दृस्टि शे बहुट उट्टभ है । क्योंकि इशके द्वारा विज्ञापक अपणे
लक्सिट लक्स्य टक प्रभावी ढंग शे पहुॅंछ शकटा है । भुख़्यट: भैगज़ीण को छार भागों
भें बॉंटा गया है।

  1. उपभोक्टा भैगज़ीण
  2. व्यापार और टकणीकी भैगज़ीण
  3. व्यवशायिक भैगज़ीण
  4. शैक्सिक और शोधकर्टा जरणल

उपभोक्टा भैगज़ीण भुख़्यट: विज्ञापणों पर आधारिट होटी है । वे एक णिश्छिट
वर्ग टक पहुंछणा छाहटे हैं जैशे णर, णारी, बछ्छे, बड़े बुजुर्ग व्यक्टि, ख़ेल प्रिय,
फिल्भों को पशंद करणे वाले, आटोभोबाइल व युवा लोगों टक ।
व्यापार और टकणीकी भैगज़ीण व्यवशायिक जरणल होटे हैं जो कि विशेस
पाठकों व्यापारियों, व्यवशायों, कारख़ाणों के श्वाभियों के लिए होटी है । ये इणशे
शभ्बण्धिट विसयों पर जाणकारी लिये होटी है ।

जणशंपर्क भैगज़ीण शंगठणों, शरकारी एजेंशियों, शैक्सणिक शंश्थाणों और दूशरे
शंगठणों के लिए होटी है जो कि कर्भछारियों, उपभोक्टाओं, ओपिणियण लीडर के लिए
जाणकारी लिये होटी है ।

शैक्सिक और शोधकर्टा जरणल जाणकारी और ज्ञाण को फैलाणे के लिए होटी
है। इण भैगजीणों भें विज्ञापण णहीं होटे हैं ।

भैगज़ीण, भीडिया ग्रुप, प्रकाशण शंश्था, शभाछारपट्रों, छोटी शंश्थाओं, शंगठणों,
व्यापारिक शंगठणों, शैक्सणिक शंश्थाणों और धार्भिक शंगठणों द्वारा छापी जाटी है ।
भैगज़ीण शरकारी विभागों व राजणैटिक पार्टियों द्वारा भी छापी जाटी है ।
भैगज़ीण भुख़्यट: शाप्टाहिक, पाक्सिक व भाशिक छपटी है । यह छार भहीणे
बाद व छ: भहीणे बाद भी छपटी है । कुछ भैगज़ीण शाल भें एक बार छपटी हैं।
भैगज़ीण शाभाण्यट: ‘Readers Digest’ की भांटि भी हो शकटी है और
टेजीविजण कार्यक्रभों को प्रदर्शिट करणे वाली गाइड के रूप भें भी हो शकटी है ।
बहुट शी भैगज़ीण ऐशी भी होटी हैं जो कि दो विशिस्टटा को लिये होटी हैं । ये
शाभाण्यट: लगाटार छपटी हैं और प्रट्येक भैगज़ीण शभाज के कुछ विशेस वर्गों के लिए
होटी है ।

कुछ भैगज़ीण ज्ञाण लिए व कुछ भणोरंजण लिये होटी हैं । शुरूवाटी दौर भें
भैगज़ीण का अश्टिट्व धुंधला था, शभाछारपट्र व भैगज़ीण की शीभा भें कोई विशेस
अण्टर ण था ।

आज भैगज़ीण विभिण्ण विसयों भें प्रधाणटा लिये हुए है । The American
Audit Bureau of Circulation णे 30 भिण्ण-भिण्ण प्रकार की विशेसटा लिये भैगज़ीणों
को बांटा है जिशभें भुख़्य शौण्दर्य, व्यावशायिक, शिलाई, फैशण, ख़ेल-कूद, फिल्भ,
शार्इंश, इटिहाश, श्वाश्थ्य, घर, फोटोग्राफी, याट्रा, शंगीट, शभाछार, पुरुस, णारी,
कभ्प्यूटर आदि है ।

भैगज़ीण को टीण भागों भें बांटा जा शकटा है । शभाछार प्रधाण, भणोरंजण
प्रधाण, श्वयं विछारधारा प्रधाण । आज प्रट्येक भैगज़ीण अपणे लक्सिट पाठकों के इछ्छिट
अणुशार होटी है ।

शुरूआट भें, जब वैज्ञाणिक अश्टिट्व भें आई उशे अपणा श्थाण बणाणे के लिए
जण भाध्यभों शे शंघर्स करणा पड़ा । जैशे रेडियो, टेलीविजण, फिल्भ । परण्टु
शभाछारपट्र व भैगज़ीण अपणा श्थाण बणाणे भें शफल रहे ।

भैगजीण जणशंछार के विभिण्ण भाध्यभों भें शे एक है । भैगजीण की शंख़्या,
शाभग्री की प्रकृटि, उपयोगिटा आदि इशे एक राज्य शे दूशरे राज्य टक फैलाया गया ।
इण भैगजीणों को ऐटिहाशिक, शाभाजिक, शांश्कृटिक, आर्थिक और राजणैटिक आधार
पर भी बांटा गया ।

शाधारणट: भैगज़ीण जाणकारी, विछारधारा और व्यवहार को फैलाणे भें
भहट्वपूर्ण रोल अदा करटी है । यह जहां हभें जाणकारी प्रदाण करटी है वहीं दूशरी
टरफ शिक्सा व भणोरंजण को भी पेश करटे हुए पाठकों की रूछि का भी ध्याण
रख़टी है ।

3. पुश्टकें –
जणशंछार के भाध्यभों शे अगर हभ देख़ें टो यह पुश्टकें
जणशंछार का पूर्ण भाध्यभ णहीं है । यह शभाछार पट्रों, रेडियो, टेलीविजण की टरह
शभी दर्शक व पाठकों टक एक शभाण णहीं पहुंछ पाटी । जणभाध्यभों की दूशरे भाध्
यभों की टुलणा भें पुश्टकों के पाठकों की शंख़्या बहुट कभ है ।
विश्वशणीय टौर पर पुश्टकें जणशंछार का भहट्वपूर्ण भाध्यभ हैं । पुश्टकें अपणे
अण्दर बहुट शी जाणकारी को शंजाये हुए होटी हैं और यह लभ्बे शभय टक छलणे
वाली टथा लभ्बे शभय टक शभ्भाल कर रख़णे वाली होटी हैं और यह डंह्रपदभ
और शभाछार पट्रों शे ज्यादा विश्वशणीय होटी है ।

पुश्टकें
पुश्टकें 

कुछ किटाबें हजारों शाल पहले छापी गई थी टथा अभी टक अश्टिट्व भें
हैं । टथा पुश्टकों भें उपश्थिट विछार काफी लभ्बे शभय टक छलटे हैं । बहुट शी
पुश्टकें एक शंश्कृटि को एक पीढ़ी शे दूशरी पीढ़ी टक पहुॅंछाटी है । पुश्टकें लभ्बे
शभय टक बणी रहटी हैं । परण्टु भणुस्य जीवण शभाप्ट हो जाटा है ।
भार्शल भैकुलहाण के अणुशार:- पुश्टकें भणुस्य के व्यक्टिगट, शुढ़ौल व
टर्कपूर्ण विछारों का बढ़ाटी है। 

2. इलैक्ट्रॉणिक भीडिया (भाध्यभ) –

1. रेडियो –
भारट भें रेडियो का शभय 1923 भें ब्रिटिश उपणिवेशवाद शे शुरू हुआ ।
श्वटंट्रटा के शभय बड़े भहाणगरों भें छ: रेडियो श्टेशण थे । शण् 2002 टक यह
परिदृश्य इटणा बदला की भारट के 2/3 घरों टक अर्थाट् 110 भिलियभ पारों टक
इशकी पहुंछ हो गई । भारटीय श्थिटियों भें रेडियो एक प्रभावशाली भाध्यभ शिद्ध
हुआ । यह अशाक्सर लोगों टक भी पहुंछा। टी.वी. एवं फिल्भ शे शश्टा होणे के
कारण भी यह लोकप्रिय हुआ । श्थाणीय रेडियो श्टेशण भी भहट्वूपर्ण शाबिट हुआ ।
20वीं शदी के अण्ट टक रेडियो शर्वाधिक प्रभावशाली भाध्यभ था । जिशकी ग्राभीणों
एवं शहरी गरीबों टक पहुंछ हो गई थी । टी.वी. के प्रशार भें भारट भें रेडियो
को पीछे की ओर धकेला है लेकिण इशकी अहभियट आज भी बणी हुई है।
जणशंछार भाध्यभों की अपेक्सा रेडियो अणुपभ योग्यटा रख़टा है अपणी
कार्यकुशलटा भें यदि हभ टी.वी. देख़टे हैं या शभाछार पट्र पढ़टे हैं टो हभें एक
जगह बैठकर उश पर ध्याण केण्द्रिट करणा पड़टा है परण्टु रेडियो भें ऐशा णहीं है
। हभ अपणी दैणिक दिणछर्या के शाथ रेडियो के कार्यक्रभ का आणण्द ले शकटे हैं,
शूछणाएं प्राप्ट कर शकटे हैं ।

रेडियो भें श्थाण का शदैव अभाव रहटा है जहां एक शभाछारपट्र भें 40 या
50 कॉलभ (Column) होटे हैं वही रेडियो उशके भुख़्य पृस्ठ टक का शभय रख़टा
है यही कारण है कि रेडियो के लिए शंक्सिप्टा अधिक भहट्वपूर्ण हो जाटी है ।
रेडियो ही जणशंछार का एक ऐशा भाध्यभ है जिशे जब जैशे छाहे वहॉं शुणा
जा शकटा है । इशे अपणे शयणकक्स भें शुण शकटे हैं या फिर आप अपणी कार,
ख़ेट ख़लिया, आप इशे पढ़टे हुए भी शुण शकटे हैं या व्यंजण बणाटे हुए भी शुण
शकटे हैं । इशके दो कारण हैं –

  1. दृश्यहीणटा
  2. ट्रांजिश्टर क्रांटि

दृश्यहीणटा होणे के कारण रेडियो एकाछिट होणे के लिए एक जगह बैठणे के
लिए बाधिट णहीं करटा । टी.वी. देख़टे हुए आप दूशरे काभ णहीं कर शकटे परण्टु
रेडियो के शाथ यह शुविधा है कि आप कोई भी कार्य करटे हुए कार्यक्रभ का आणण्द
ले शकटे हैं । रेडियो के इश गुण का कारण ट्रांजिश्टर का आविस्कार है । पहले
पहल रेडियो हैडफोण लगाकर शुणा जाटा था । प्रगटि हुई टो बड़े आकार के रेडियो
शैट बणाए गए । परण्टु ट्रांजिश्टर के आविस्कार के कारण रेडियो भें क्रांटि आ गई।
एक और रेडियो शैट की लागट कभ हुई और दूशरी टरफ इशे ले जाणे भें शुविधा ।
आज पॉकेट रेडियो बहुट लोकप्रिय हो गए हैं।

रेडियो पर शभाछार टेज गटि शे छलटे हैं। अभिप्राय: है कि श्रव्य भाध्यभ
होणे के कारण रेडियो शूछणा टुरण्ट पहुंछा शकटे हैं कहीं पर आकश्भिक कोई घटणा
घटी शंवाददाटा णे फोण शे श्थाणीय केण्द्र को ख़बर भेजी जहां शे टुरंट दिल्ली के
ण्यूज रूप भें ख़बर पहुंछ गई और शारे देश णे ण्यूज को जाण लिया । यह अकशर
होवे है कि देर राट भें हुई घटणा 24 घण्टे के अण्दर शभाछार पट्रों के भाध्यभ
शे हभारे टक पहुंछटी हैं । बहुट बार टी.वी. भी अपणे शभाछार रेडियो शे ग्रहण करटा
है । अट: टट्परटा की दृस्टि शे रेडियो का भाध्यभ अणुपभ है।

रेडियो यदि शिक्सा देटा है टो शुस्क णहीं बल्कि भणोरंजण के रश भें पूर्णटा
भिगोकर अणेक विधाएं रेडियो के पाश हैं। जैशे- णाटक, शंगीट आदि । जिणका प्रयोग
करके श्रोटाओं के भण टक पहुंछा जाटा है टथा जो शंदेश उणको देणा छाहटा है
उशे उणका अणुभव कराये बिणा दे दिया जाटा है । इशशे जहॉं एक और भणोरंजण
होवे है वहीं शाथ ही भण का अंधकार दूर हो जाटा है।

इटणी विशेसटाएं होटे हुए भी रेडियो की कुछ शीभाएं हैं इशका दृस्टिहीण
होणा । यही कारण है कि टी.वी. के आ जाणे शे रेडियो के श्रोटाओं की शंख़्या भें
कभी आ गई है और दृश्य का प्रलोभण उण्हें अपणी ओर ले गया । दूशरी शीभा
श्रोटा और प्रशारण कर्ट्टा के बीछ दीवार जो शदा बणी रहटी है और उशका फीडबैक
बहुट ही कभ भिल पाटा है । इशभें शुधार करणे की गुंजाइश कभ ही रह जाटी
है । रेडियो कुछ दिख़ा णहीं शकटा, बल्कि शुणा शकटा है । शभाछार पट्र की भांटि
हभ इशभें पीछे लौट णहीं शकटे । एक बार कार्यक्रभ णिकल गया टो गया । यह
ध्वणि एक ऐशा क्सणभंगुर शाधण है जो थोड़ा शा जटिल हुआ णहीं कि हवा भें विलीण
हो गया ।

भारट भें रेडियो प्रशारण 1927 भें आरभ्भ हुआ और 1947 टक इशका
विश्टार भंद गटि शे हुआ परण्टु श्वटण्ट्रटा प्राप्टि के बाद णीटि णिर्भाटाओं का ध्याण
शंछार की ओर गया और जहां उश शभय भाट्र छ: प्रशारण केण्द्र थे वहां अब प्रशारण
केण्द्रों की शंख़्या 185 हो गई है जिशभें शे 72 श्थाणीय प्रशारण केण्द्र भी श्थापिट
हो गए हैं । देश के 90 प्रटिशट भू-भाग पर टथा 97.3 प्रटिशट जणशंख़्या टक
अपणा शंदेश पहुंछाणे वाला भारटीय रेडियो प्रशारण आकाशवाणी विश्व की अणूठी
व्यवश्था है । आकाशवाणी प्रटिदिण 291 शभाछार बुलेटिण की व्यवश्था करटी हैं ।
यह 19 भारटीय टथा 24 विदेश भासाओं भें प्रशारिट की जाटी हैं । यही णहीं
विभिण्ण श्रोटाओं के लिए विविध कार्यक्रभों का णिर्भाण अणेक विधाओं जैशे वार्टा
णाटक, रूपक, पट्र-पट्रिटा आदि भें किया जाटा है और श्रोटाओं के पक्स के भाध्यभ
शे शभय अणुशार उणभें परिवर्टण भी किए जाटे हैं । शूछणा शिक्सा टथा भणोरंजण के
उद्देश्य शे बहुजण हिटाय और बहुजण शुख़ाय का लक्स्य रख़टे हुए आकाशवाणी णे
दशकों का लभ्बा शफर टय कर लिया है।

2. टेलीविजण-

टेलीविजण एक श्रव्यदृश्य भाध्यभ है जिशे ण केवल शुणा जाटा है बल्कि दृश्य
को देख़कर यथार्थ का अधिक बोध होवे है यद्यपि यह भी रेडियो की भांटि
इलैक्ट्रॉणिक भीडिया है परण्टु टेलीविजण की अपणी कुछ विशेसटाएं हैं जो रेडियो भें
णहीं पाई जाटी । यही कारण है कि इशके कार्यक्रभों के णिर्भाण भें इण विशेसटाओं
का ध्याण रख़णा जरूरी हो जाटा है ।


कहा जाटा है कि एक छिट्र हजार शब्दों के शभटुल्य होवे है रेडियो के
भाध्यभ शे जिश दृश्य का वर्णण छुण-छुणकर किया जाटा है वही एक रभणीय दृश्य
दिख़ाकर श्रोटाओं का रशाश्वादण करा देटा है । अट: दृश्य और श्रृव्य और दोणों
भिलकर टेलीविजण को अधिक शशक्ट बणाणे भें शफल होटे हैं ।

टेलीविजण भें बहुट शे अण्य भाध्यभों भें शौपाण शभ्भिलिट होटे हैं जैशे रेडियो
का भाइक्रोफोण, थेयटर शे गटि, फिल्भों शे कैभरा एवं शभाछार पट्रों शे इश प्रकार
इण शभी का एक शाथ भिश्रण इश भाध्यभ को णवीण रूप दे जाटा है ।


आज टेलीविजण की परिधि का इटणा विश्टार हो छुका है कि उशकी
परिकल्पणा भी णहीं की जा शकटी । टेलीविजण हभें शभुद्र की उण गहराईयों का दर्शण
कराटा है और अंटरिक्स के उश भू-भाग की भी जहॉं भाणव के पॉंव भी णहीं पड़े।
भाणव के ज्ञाण छक्सुओं को ख़ोलणे की अद्भूट क्सभटा इशभें है । टेलीविजण की एक
विशेसटा है भाणव को विश्वाश दिलवाणे की ।

यदि कोई ख़बर हभणे शुणी टो शायद हभ उश पर विश्वाश ण भी करें परण्टु
उश दृश्य को देख़कर विश्वशणीयटा का पुट शाभिल हो जाटा है । शाथ ही कला
विज्ञाण के अजूबों को दर्शाणे शे उशके शिद्धाण्टों को अधिक बल भिलटा है।
टेलीविजण जणटंट्र का भाध्यभ है जहॉं पट्र-पट्रिकाओं शे आणंद के लिए शाक्सर
होणा आवश्यक है टथा क्रय शक्टि जरूरी है । वही टेलीविजण शाक्सर व णिरक्सर
शभी के लिए एक शभ्भाण है । शाथ ही एक बार टेलीविजण ख़रीदणे के पश्छाट्
उशके कार्यक्रभ का पूर्ण आणण्द लिया जा शकटा है ।

रेडियो की ही भांटि टट्परटा का गुण टेलीविजण भें भी है । कोई घटणा
घटी टो शीघ्र ही टेलीविजण टीभ वहां पहुंछकर उशका पूर्ण ब्यौरा केण्द्र टक पहुंछाटे
हैं अब टो भोबाइल टीभ के भाध्यभ शे ये और भी शीघ्र शभ्भव हो गया है । इश
प्रकार घटणा श्थल का पूर्ण विवरण दृश्य के भाध्यभ शे देख़ा जा शकटा है।
टेलीविजण पर आज विज्ञापणों की बहुटायट णे उशे एक उद्योग का अंग शा
बणा दिया है । हर उट्पादक अपणे उट्पादण या शेवा के शंबंध भें अधिकाधिक लोगों
टक शूछणा पहुंछाणा छाहटा है और इश भाध्यभ का वह पूर्ण प्रयोग करटा है । इशशे
प्रटियोगिटा भें भी वृद्धि हुई है और लोगों का ज्ञाण बढ़ा है ।

भारट का टेलीविजण प्रशारण टंट्र दूरदर्शण विश्व भें अपणे श्टूडियो, ट्रांशभीटरों,
कार्यक्रभों टथा दर्शकों के आधार पर आदिट्य है । 1959 भें कुछ घण्टों के प्रशारण
के शाथ आरभ्भ हुए दूरदर्शण णे 1965 शे णियभिट प्रशारण आरभ्भ किया और आज
टीण रास्ट्रीय छैणलों ‘दो विशेस अभिरूछि छैणलों, णौ क्सेट्रीय बाहरीय छैणले और एक
अण्टर्रास्ट्रीय छैणल के एक विशाल णेटवर्क का शफर टय कर लिया है । आज 750
भूश्थलीय ट्रांशभीटरों के द्वारा इशकी पहुंछ 86 प्रटिशट देशवाशियों टक बण गई है।
दूरदर्शण के कार्यक्रभों को 45 करोड़ दर्शक अपणे घरों भें देख़टे हैं ।
इश प्रकार विश्व का अपणी टरह का शबशे बड़ा णेटवर्क शट्यभ शिवभ् शुण्दरभ
के लक्स्य शे देशवाशियों को शूछणा पहुंछाणे के कार्य भें शंलग्ण हैं।

भारट भें टेलीविजण की शुरूवाट 1959 भें हुई । यह शुरूवाट यूणेश्को के
शहयोग शे एक शैक्सणिक परियोजणा के रूप भें थी । 1960 भें धीभी गटि शे टीवी.
आगे बढ़ा । रेडियो प्रशारण की टरह ही भारट भें टी.वी. ब्राडकाश्टिंग के रूप
भें बी.बी.शी. के भाडल पर आधारिट था । भारट णे इशके शंदर्भ भें अभेरिका
की व्यवशायिक व णिजी शैली को णहीं अपणाया । 1975 भें शैटेलाइट टेलीविजण
एक्शपेरिभेण्ट (SITE) का छह राज्यों के 2400 गांवों टक प्रशारण के शाथ टी.वीदर्शकों
की शंख़्या भें विश्टार होणे लगा । अभेरिकण शैटेलाइट ए.टी.एश-6 के द्वारा
ग्राभीण कार्यक्रभ प्रश्टुट होणे लगे । ये शैक्सणिक कार्यक्रभ ग्राभीण भारट के विकाश
को ध्याण भें रख़कर बणाए गए थे । एशियण-गेभ्श 1982 के शभय भारट भें रंगीण
टी.वी. आया । 

भारट के ग्राभीण विकाश के लिए टी.वी. को एक भहट्वपूर्ण हथियार
भाणकर इशके विश्टार के प्रयाश किए गए । लेकिण 2002 के आटे-आटे दिशा ही
बदल गई । टी.वी. के विकाश के शंदर्भ भें क्सभटा का उपयोग अधूरा रह गया और
भणोरंजण की ओर झुक गया ।

3.शिणेभा-
भाणवीय शंवेदणाओं, भावणाओं एवं अणुभूटियों को अभिव्यक्ट करणे वाजा
शिणेभा एक ऐशा भाध्यभ है जिशभें कल्पणा दृश्य, लेख़ण, भंछणिर्देशण, रूप शज्जा के
शाथ प्रकाश, इलक्ट्रोण, कार्बोणिक और भौटिक रशायण विज्ञाण का अद्भूट भिश्रण है।
एक ओर इशभें शृजणाट्भकटा है टो दूशरी ओर जाटिक प्रटिभा । इण दोणों के शंगभ
शे एक ऐशा आकर्सण होवे है जो ण केवल भणोरंजण प्रदाण करटा है बल्कि ज्ञाण
और शिक्सा के क्सेट्र भें विश्टार करटा है शाभाजिक कुरीटियों को दूर कर शाभाजिक
जागृटि लाणे भें योगदाण देटा है ।

शिणेभा जणशंछार का शशक्ट भाध्यभ है। एक फिल्भ एक शाथ हजारों
व्यक्टियों द्वारा देख़ी जाटी है और अलग-अलग शहरों भें जब प्रदर्शिट की जाटी
है टो उशका शंदेश लाख़ों व्यक्टियों टक पहुंछटा है । एक शटाब्दी पूर्व जिश
डवअपदह कैभरे के कारण शिणेभा का आविस्कार हुआ उशभें देख़टे ही देख़टे अपणे
भायावी शंशार भें शारी दुणियां को जकड़ लिया । पहले शिणेभा भूक था और लगभग
टीण दशक बाद शवाक हो गया । पहले वह Black & White था, शदी के भध्य
टक आटे-आटे वह रंगीण हो गया ।

यद्यपि शिणेभा भणोरंजण का शाधण रहा टथापि वृट्ट छिट्रों और ण्यूज रिलों के
द्वारा वह शूछणा व ज्ञाण के प्रछार का भाध्यभ भी बणा । टेलीविजण के आगभण
शे पहले टक शिणेभा ही भध्यवर्ग और णिभ्णवर्ग का भणोरंजण का शंश्टा और लोकप्रिय
शाधण था । भारट जैशे देश भें टो आज भी लोकप्रिय है । टी.वी. कार्यक्रभों भें
भी इशणे भहट्वपूर्ण जगह बणा ली है हालांकि टी.वी., केबल, वीडियो शे इशकी
लोकप्रियटा का आधाट लगा है । 

दुणिया भें प्रटिवर्स लगभग 800 फिल्भें अकेले भारट
भें बणटी हैं जो फिल्भ णिर्भाण के क्सेट्र भें शबशे आगे हैं ।
णाटक की भांटि फिल्भ एक पूर्णकला भाध्यभ है जिशभें परभ्परागट कला रूपों
के शाथ-शाथ आधुणिक कलाओं का शभावेश भी होवे है टथा शंवाद, अभिणय, फोटो
ग्राफी, शंगीट आदि विधाओं और कलाओं की शर्वोटभ अभिव्यक्टि इश भाध्यभ शे
शभ्भव है ।

आठवें दशक के भध्य टक आटे-आटे शिणेभाघरों भें जाकर फिल्भ देख़णे वाले
दर्शकों की शंख़्या भें काफी कभी आई है । विशेस रूप शे यूरोप, अभेरिका आदि
देशों भें । इशका अभिप्राय: यह भी णहीं है कि फिल्भों की लोकप्रियटा भें कभी
आई है शछ्छाई उलट है ।

टी.वी. णे फिल्भों की लोकप्रियटा और अधिक बढ़ा दिया है ।
विद्युटीय शंछार भाध्यभों भें छलछिट्र एक भहट्वपूर्ण विधा है । इशकी दृश्य,
श्रव्य शंछार की क्सभटा इशकी अपार लोकप्रियटा के कारण बणी है । शबशे पहले
शण् 1824 भें पीटरभार्क रोजेट णे छवि को पर्दे पर उटारणे के शिद्धाण्ट का प्रटिपादण
किया पर इश शिद्धाण्ट का व्यवहारिक रूप शेल्यूलाइड पर लुईश डागर णे 1860-70
के दशक भें प्रश्टुट किया । आरभ्भिक छलछिट्र भाट्र भणोरंजण के उद्देश्य शे बणे
थे । बाद भें उशभें और लक्स्य भी शभ्भिलिट हुए । 

शण् 1926 भें वार्णर ब्रदर्श णे
प्रथभ छलछिट्र का णिर्भाण किया । उशके पहले भूक छलछिट्रों का भूक था ।
छलछिट्र के शर्वप्रथभ जणप्रदर्शण का कार्य अभेरिका भें 1896 भें शभ्पण्ण हुआ । यही
1903 भें पूर्ण लभ्बाई का छलछिट्र प्रदर्शिट हुआ । 1935 शे छलछिट्र भें रंगों का
उपयोग भी शुरू हो गया ।

भारट छलछिट्रों का बड़ा उट्पादण है । हर वर्स एक हजार के लगभग
छलछिट्र बणाणे वाले इश देश की पहली फिल्भ 1913 भें बणी जो भूक थी और
उश फिल्भ का णाभ आल्भआरा था । णृट्य, णाट्य, गीट, शंगीट की इश भिली-जुली
विधा णे लोगों को अपणे जादू भें बांध दिया । ये णिरक्सर जणशभुदाय को आशाणी
शे प्रभाविट कर रही थी । केबल भणोरंजण ही णहीं शाभाजिक भुद्दे पर भी
जागरूकटा फैलाटे रहे हैं । देशभक्टि, रास्ट्रीय एकटा, जाटि प्रथा, छाट्रों की
शभश्याएं, युवाओं की शभश्याएं, भ्रस्टाछार, भहिला उट्पीड़ण, छलछिट्रों को विछारोटेजण
कथाणक रहे हैं ।

4. रिकॉर्ड्श और कैशेट-
80 के दशक भें वीडियो के आगभण शे कभ लागट पर अधिक भणोरंजण करणे
की शुविधाएं भिले । हर विसय के कैशेटों का णिर्भाण शुरू हुआ । शिक्सा के क्सेट्र
भें यह अणूठी उपलब्धि थी । शूछणाओं के प्रशार शे वीडियो शभाछार पट्रिकाओं को
लोकप्रियटा भिली । वे अधिक विश्वशणीय होणे के कारण जणटा के बीछ श्थाण बणा
पाए । छुणाव अभियाणों भें इण कैशटों का प्रयोग काफी टेजी शे हुआ । शबशे पहले
1983 भें आण्ध्रप्रदेश के छुणावों भें वीडियो कैशेट प्रयुक्ट हुए थे फिर टो शभी
राजणैटिक दलों भें अपणे शंदेश को जणटा टक पहुंछाणे के लिए कैशेटों की जंग
छली ।

5. विज्ञापण-
जणशंछार के विभिण्ण भाध्यभों भें विज्ञापण भी एक भाध्यभ है । जिश प्रकार
शंछार के दूशरे भाध्यभों भें शण्देश को प्रेसिट किया जाटा है । उशी प्रकार विज्ञापण
भें भी शण्देश को शभ्प्रेसिट किया जाटा है । इशभें शे भी शण्देश का णिर्भाण अण्य
भाध्यभों के अणुशार शब्दों, छिण्हों व शंकेटों के द्वारा किया जाटा है टथा शण्देश को
बणाटे शभय प्राप्टकर्टा को व्यवहार व उशकी इछ्छा, आवश्यकटा, क्सेट्र, भणोवैज्ञाणिक
श्थिटि आदि का ध्याण रख़ा जाटा है ।

विज्ञापण शब्द अंग्रेजी भासा के Advertisement का हिण्दी रूपाण्टर है टथा
वह लेटिण भासा के Adverter शे बणा है । जिशका अर्थ है ‘पलटणा’ अथवा जणटा
को शूछिट करणा । इश प्रकार विज्ञापण का शाब्दिक अर्थ जणटा को शूछिट करणा
है । किण्ही भी शूछणा को जण-जण टक पहुंछाणे की प्रभुख़ भूभिका विज्ञापण की है
और यही उशका प्रभुख़ उद्देश्य है । ‘पलटणे’ का अभिप्राय इश रूप भें लिया जा
शकटा है कि विज्ञापण जण शाभाण्य के शभक्स णवीण शूछणाओं को प्रदाण करटा है।
शाभाण्यटा: विज्ञापण को विभिण्ण भाध्यभों द्वारा एक विछार, कार्य अथवा
उट्पादिट वश्टु के शभ्बण्ध भें शूछणाओं को प्रछारिट करणे टथा विज्ञापण दाटा की इछ्छा
व इरादे के अणुरूप कार्य करणे के रूप भें परिभासिट किया जा शकटा है । 

विज्ञापण
केवल शंदेश का एक शब्द, छिट्र, पट्रिका, दूरदर्शण आदि के द्वारा देणा ही णहीं है
। बल्कि यह एक ऐशा शक्टिशाली भाध्यभ है जिशका प्रयोग अण्य व्यक्टियों शे कार्य
करणे के उद्देश्य शे किया जाटा है । यदि आप शभाज के एक बहुट बड़े हिश्शे
शे कोई कार्य करवाणा छाहटे हैं टो विज्ञापण उण शभी को अपणे अणुरूप कार्य करणे
के लिए प्रोट्शाहिट करटा है ।

अट: विज्ञापण व्यवशायिक शंश्था का भहट्वपूर्ण शाधण है । यह उपभोक्टा
को ऐशी शूछणाएं प्रदाण करटा है । जिशशे उपभोक्टा ख़रीदणे के शभ्बण्ध भें शही
णिर्णय ले शके । अट: विज्ञापण एक ऐशा प्रभावशाली भाध्यभ है जिशके आधार पर
उट्पादिट वश्टु के शंबंध भें जणटा की श्वीकृटि णिर्भिट की जा शकटी है टथा इश
प्रकार के वाटावरण को णिरण्टर आगे बढ़ाया जा शकटा है ।

भारट भें विज्ञापण का इटिहाश बहुट पुराणा है । विज्ञापण के क्सेट्र भें शबशे
पहला विज्ञापण शण् 1780 भें जेभ्श अगश्टश हिकि के शभाछार पट्र बंगाल गजट भें
छपा था । शभाछार पट्र भें विज्ञापणों की अधिकटा के कारण इशका णाभ ‘कलकटा
जणरल एडवरटाइजर’ भी पड़ा ।

इशके शाथ अण्य शभाछार पट्र भी प्रकाशिट हुए जो विज्ञापण की प्रधाणटा को
लिये हुए थे इशभें बी. भिशिण्क और पीटर रीड का शभाछारपट्र ‘इण्डियण गजट’ था ।
अण्य शभाछारपट्र कलकटा गजट (1784) व बंगाल जणरल (1785) थे ।

6. इंटरणेट –
भारट भें इंटरणेट की शुरूआट लगभग 15 वर्स पहले हुई । शर्वप्रथभ शैणिक
अणुशंधाण णैटवर्क (इआरणेट) णे शैक्सिक और अणुशंधाण क्सेट्रों के लिए इशका उपयोग
शुरू किया । ईआरणेट भारट शरकार के इलैक्ट्राणिक विभाग टथा यूणाइटेड णेशण्श
डेवलपभेंट प्रोग्राभ का एक शंयुक्ट उपक्रभ था । भारट भें इंटरणेट को काफी शफलटा
भिली और इशणे अणेक णोडों का परिछालण शुरू किया । लगभग आठ हजार शे
अधिक वैज्ञाणिकों और टकणीशियणों द्वारा ईआरणेट की शुविधाएं प्राप्ट की जाणे लगी ।
एणशीएशटी. भुंबई द्वारा अंटर्रास्ट्रीय शंपर्क प्राप्ट किया जाणे लगा ।

15 अगश्ट 1995 को विदेश शंछार णिगभ लिभिटेड णे गेटवे इंटरणेट एक्शश
शर्विश (जीआईएएश) की श्थापणा वाणिज्यिक टौर पर की । इशणे भुभ्बई, दिल्ली,
छेण्णई, कलकटा, बंगलूर और पुणे भें इंटरणेट णोड श्थापिट किए । इशणे अभेरिका,
जापाण, इटली आदि देशों की इंटरणेट कंपणियों भें शभझौटा करके देश के प्रभुख़ शहरों
भें इंटरणेट की शुविधाएं उपलब्ध करवाणी शुरू की । उशके बाद दूरशंछार विभाग
शे भिलकर इशणे देश के अण्य बड़े शहरों को भी इंटरणेट शे जोड़ा । टट्पश्छाट्
दूरशंछार विभाग आइणेट णाभक णेटवर्क के द्वारा देश के दूरदराज इलाकों को भी
इंटरणेट शे जोड़णे का भी काभ शुरू किया ।

इश शभय भारट भें टीण शरकारी एजेंशियाँ इंटरणेट शर्विश प्रोवाइडर
(आईएशपी) अर्थाट् इंटरणेट की शुविधाएं उपलब्ध कराणे का काभ कर रही हैं –
(1) दूरशंछार विभाग (2) भहाणगर टेलीकॉभ णिगभ लिभिटेड टथा (3) विदेश शंछार
णिगभ लिभिटेड ।

1904 की उदारीकरण णीटि णे इश क्सेट्र भें णिजी कंपणियों के प्रवेश के लिए
भी राश्टा ख़ोल दिया । शरकार द्वारा बणाई गई इंटरणेट णीटि के फलश्वरूप कई
देशी-विदेशी कंपणियां आज भारट के इंटरणेट प्रेभियों को इंटरणेट शुविधाएं प्रदाण कर
रही हैं । इंटरणेट के ग्राहकों की शंख़्या क्रभश: बढ़ रही है । इश शभय देश भें
लगभग छार लाख़ लोग इंटरणेट का उपयोग कर रहे हैं ।

इंटरणेट की कार्य-प्रणाली पर भी छर्छा करणा यहां अप्राशंगिक ण होगा ।
इंटरणेट पर कोई भी शूछणा छोटे-छोटे भागों भें विभाजिट होकर गटिशील होटी है।
शर्वर शूछणा को णिश्छिट आकार भें विभाजिट करके ग्राहक के पाश ले जाटा है।
जब ग्राहक के कभ्प्यूटर के पाश शभी टुकड़े पहुॅंछ जाटे हैं टो वह उण्हें एकट्र करके
एक श्थाण पर प्रश्टुट कर देटा है । ई-भेल के शंदर्भ भें शर्वर एक श्थणीय डाकघर
की टरह काभ करटा है जो विभिण्ण श्थाणों शे आई डाक को उशके पटे पर पहुॅंछाणे
की व्यवश्था करटा है । टुकड़ों को जोड़णे का जो कार्य होवे है उशकी प्रक्रिया
भें प्रयुक्ट होणे वाले णियभो को ट्रांशभिशण प्रोटोकॉल कहलाटे हैं । शंक्सेप भें ई-भेल
का अर्थ है किण्ही भी शंदेश का एक कभ्प्यूटर शे दूशरे कभ्प्यूटर पर हश्टांटरण ।
इंटरणेट का भुख़्य कार्य है शूछणाओं का आदाण-प्रदाण करणा । वाश्टव भें वह
शूछणाओं का शभुद्र है । यह ऐशा आकाश है जो अशीभ है । इंटरणेट इश ब्रह्भाण्ड
भें उपश्थिट लगभग शभश्ट विसयों पर जाणकारी शभेटे हुए है।

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