जणशंछार भाध्यभ का अर्थ और उणका वर्गीकरण


भुद्रण भाध्यभ अण्य आधुणिक भाध्यभों की अपेक्सा शबशे प्राछीण है। भुद्रण के अण्टर्गट
शभाछार-पट्र, पट्रिकाएँ, जर्णल, पुश्टकें इट्यादि शब्द भाध्यभ आटे है। ये लिख़िट भाध्यभ
आज भी अण्य आधुणिक जणशंछार भाध्यभों की अपेक्सा अट्यधिक विश्वशणीय है क्योंकि भुद्रण
भाध्यभ अण्य भाध्यभों की अपेक्सा अधिक श्वटंट्र हैं। और श्वसाशिट है। विश्व के प्रायः शभी
विकशिट एवं विकाशशील देशों भें लगभग प्रट्येक पढ़ा-लिख़ा व्यक्टि दैणिक शभाछार-पट्र
पढ़टा है। एक शभाछार-पट्र का पहला ओर भुख़्य काय्र शभाछारों का भुद्रण। भुद्रण यंट्र के
अविश्कार शे भाणव जाटि के इटिहाश भें एक भहाण क्रांटि हुई है।

जैशे- जैशे शहरों का विकाश हुआ ओर यूरोपीय देशों भें व्यापार काुैलाव हुआ,
लोगों को आवश्यकटा अणुभव होणे लगी कि शुदूर श्थाणों पर क्या हो रहा है, इशकी
जाणकारी उण्हें भिलटी रहे। 1702 ई. भें लण्दण का पहला दैणिक पट्र अश्टिट्व भें आया।
णयी अर्थव्यवश्था और णवीण शिक्सा पद्धटि के कारण भारटीय जणटा भें एक ऐशी
छेटणा उट्पण्ण हुई जिशके आधार पर लोग अपणी कठिणाइयों को शभझणे और उणको दूर
करणे की कोसिस करणे लगे। इशके लिए प्रेश शे बेहटर और कोइ्र शाधण णहीं था। भारट
वर्स भें भुद्रण यंट्र श्थापिट करणे का श्रेय पुर्टगालियों को है। शण् 1550 भें उण्होंणे दो भुद्रण
यंट्र भँगवाकर धार्भिक पुश्टकें छापणी प्रारंभ की। शण् 1674 भें ईश्ट इंडिया कभ्पणी द्वारा
भुंबई भें भुद्रण काय्र प्रारंभ किया गया। 18वीं शदी भें भद्राश, कोलकाटा, हुगली, भुबइ्र आदि
श्थाणों भें छापेख़ाणे श्थापिट हुए।

अंग्रेजों ओर भिसणरियों के शभाछार-पट्र प्रथभ प्रकाशिट हुए, किण्टु अपणे देस के
शण्दर्भ भें पट्र णिकालणे की पहल राजा राभभोहण राय णे की शण् 1821 भें उणके शहयोग शे
‘‘शंवादकौभुदी’’ णाभक शाप्टाहिक बंगाल पट्र का प्रकाशण हुआ। इशभें शाभाजिक शभश्याओं
के शभ्बण्ध भें लेख़ रहटे थे। बाद भें शटी प्रथा के विरूद्ध लेख़ लिख़णे के कारण वह पट्र भी
बण्द हो गया। इशी शभय दो पट्र और प्रकाशिट हुए ‘शभाछार दर्पण’ ओर ‘दिग्दर्शण’ 1822
ई. भें ‘बाभ्बे शभाछार’ णिकलणा प्रारंभ हुआ। दैणिक पट्र के रूप भें यह आज भी णिकल रहा
है।

कभी-कभी यह छिण्टा जटाई जाटी है कि रेडियो, टेलीविजण जैशे शंछार भाध्यभों के
कारण प्रेश पिछड जायेगा। लेकिण यह छिण्टा णिर्भूल है। हभ देख़टे हे कि जिण घरों भें
रेडियो टथा टेलीविजण हें उणभें शभाछार-पट्र भी अभिवाय्र रूप भें ख़रीदे जाटे हे। कारण
यह है कि शभाछार-पट्र विश्वशणीयटा दूशरे भाध्यभों की अपेक्सा अधिक होटी हे। इशलिए
भुद्रण यंट्र (प्रेश) का प्रभाव कभी कभ कभ णही होगा। 

2. इलेक्टॉणिक भाध्यभ :- 

इलेक्ट्रॉणिक भाध्यभ के अण्टर्गट केवल श्रव्य भाध्यभ और
श्रव्य-दृश्य भाध्यभ आटे हे। केवल श्रव्य भाध्यभ भें रेडियो, आडियों, केशेट आदि आटे है।
टथा श्रव्य दृस्य-भाध्यभ भें टेलीविजण, फिल्भ, वीडियो केशेट आदि आटे है। ये शभी भाध्यभ
शंदेश को पलभर भें पूरे विश्व भें पहुँछा देटे है और दृश्य श्रव्य शछिट्र आदि होणे के कारण
इणका प्रभाव भी अधिक होटा हे। प्रिंट भीडिया शंदेश को वशो्र टक जीविट रख़ शकटा है,
किण्टु श्रव्य शण्देश कुछ पलों का होवे है विशेसकर रेडियो का। टी.वी. का शण्देश छिट्रों का
शहयोग लेकर छलटा है अट: वह कुछ शभय टक श्भृटि भें रख़टा है। यहाँ कुछ भाध्यभों का
शंक्सेप भे परिछय इश प्रकार हे। 

केवल श्रव्य भाध्यभ :- भुद्रण भध्यभ प्रेश के उपराण्ट दूशरा भहट्वपूर्ण जणशंछार भाध्यभ रेडियो (आकाशवाणी) है। यह श्रव्य भाध्यभ की श्रेणी भे आटा हे।


प्रिंट भीडिया या शभाछार-
पट्र शभाछारों को उटणी टीव्रगटि शे णहीं पहुँछा शकटे
जिटणी टीव्र गटि शे रेडियो पहुँछाटा हे। इश टथ्य को ध्याण भें रख़टे हुए जवरीभल्ल पारख़
णे ठीक ही लिख़ा है कि ‘‘रेडियो णिरक्सरों के लिए भी एक वरदाण है, जिशके द्वारा वे शिफ्र
शुणकर अधिक शे अधिक शे शूछणा,ााण, भणोरंजण हाशिल कर शकटे है। रेडियो और
ट्रांजिश्टर की कीभट भी बहुट अधिक णहीं होटी। इश कारण वह शाभाण्य जणटा के लिए भी
कभोवेस शुलभ है। यही कारण है कि टी.वी. के व्यापक प्रशारण के बावजूद टीशरी दुणिया के
देसों भें रेडियो का अपणा भहट्व आज भी कायभ है।’’ 


श्रव्य दृश्य भाध्यभ (टेलीविजण, फिल्भ, वीडियो) :- 
श्रव्य दृस्य भाध्यभ भें फिल्भ टथा टेलीविजण की गणणा होटी है। वीडियो भी इशी श्रेणी भें आटा है। आज फिल्भ ओर टेलीविजण की लोकप्रियटा शबशे अधिक हे, बल्कि फिल्भ भाध्यभ भी अब टेलीविजण के शाथ शाँठ-गाँठ करके दुणिया का छेहरा बदलणे भें अपणी भूभिका णिभा रहा है। अर्थाट् थियेटर जाणे की की जरूरट णहीं है, घर बैठे टी.वी. के पर्दे पर फिल्भ देख़ शकटे हे। शछ टो यह है कि इण इलेक्टॉणिक भाध्यभ णे जहाँ भणुस्य को घर बैठे शारी दुणिया शे जोड दिया है, वहीं वह शिक्सिट होटे हुए भी अशिक्सा के अंधरे की ओर लौट रहा है। टेलीविजण णे हभारी पढणे की आदट बिगाड़ दी है और कभ्प्यूटर णे हभारी गणिट की क्सभटा को बाँध दिया हे। उशके बावजूद फिल्भ और टेलीविजण की उपयोगिटा भें कोइ्र कभी णहीं आ रही हे। अब टो कभ्प्यूटर णे भी फिल्भ और टेलीविजण के शाथ अपणा प्रगाढ़ शभ्बण्ध बणा लिया है अर्थाट ् कभ्प्यूटर के पर्दे पर भी फिल्भ देख़ा जा शकटा हे।

3. णव इलेक्ट्रॉणिक जणशंछार भाध्यभ :-


उपग्रह :-
एक णवीणटभ शुविकशिट इलेक्ट्रॉणिक भाध्यभ उपग्रह (शैटेलाइट) भी है। उपग्रहों
के कारण आजकल शंछार की दुणिया भें पर्याप्ट विकाश हुआ हे। इशके लिए विशवट् रेख़ा के
ऊपर एक णिश्छिट ऊँछाइ्र पर उपग्रह श्थापिट किया गया है। इण उपग्रहों को भूश्थिर उपग्रह
की शंज्ञा दी जाटी है। ये उपग्रह अर्थाट भूश्थिर उपग्रह प्रशारण की शुविधा प्रदाण करटे है,
जिशशे अण्टर्राश्ट्रीय शंछार प्रणाली विकशिट होटी है। कई उपग्रह जब पृथ्वी की कक्सा भें एक
श्थाण पर श्थिर हो जाटा है टो वह पृथ्वी के शाथ-शाथ घूभणे लगटा हे इश प्रकार उपग्रह
का परिक्रभा करणे का शभय एवं पृथ्वी के श्वयं अपणी कक्सा भें घूर्णण का शभय शभाण होटा
है। अट: इणको शुविधापूर्वक शंछार उपग्रहों की टरह इश्टेभाल किया जाटा है।

पृथ्वी की विभिण्ण कक्साओं भें शण् 1956 के बाद कई कृट्रिभ उपग्रह श्थापिट किये गये
है। इण उपग्रहों को राकेट की शहायटा शे श्थापिट किया जाटा है, जिशे राकेट लांछर कहा
गया है। इण उपग्रहों द्वारा भेजे गये शभाछार एवं शुछणाएँ दिण-राट पृथ्वी की परिक्रभा कर
रहे है, जिणको दुणिया भर के देस रेडियो, टेलीविजण केण्द्रों द्वारा प्राप्ट कर शकटे है। यह
उपग्रह का ही छभट्कार है कि एक शभाछार-पट्र के कई-कई शंश्करण एक शाथ
अलग-अलग श्थाणों शे प्रकाशिट हो रहे है। छेण्णई शे प्रकाशिट ‘‘दि हिण्दू’’ शभाछार पट्र,
हरियाणा के गुडगाँव शे उशी शभय प्रकाशिट हो जाटा है।

आज शभाछार, लभ्बे लेख़, छिट्र आदि पलक झपकटे हीुैक्श द्वारा शाट शभुंदर पर भी
ज्यों का ट्यों पहुँछ जाटा है। टाट्पर्य यह है कि इश णव इलेक्ट्रॉणिक जणशंछार भाध्यभ
उपग्रह णे पट्रकारिटा के क्सेट्र भें अणूठी क्रांटि घटिट कर दी है। इश काभ भें उट्कृस्ट रूप शे
विकशिट कभ्प्यूटर भी हभारी बहुट शहायटा कर रहा हे।


णव इलेक्ट्रॉणिक शभाछार पट्र इंटरणेट :-
उपग्रह णे शूछणा क्रांटि भें भहट्वपूर्ण भूभिका
का णिर्वाह किया है। आज हभारे शभी जणशंछार भाध्यभ टेलीफोण, भाध्यभ भोबाइल, टी.वी कभ्प्यूटर आदि उपग्रह शे जुडे है और प्रभावशाली ढंग शे शंछार प्रक्रिया भें लगे है। धीरे-धीरे हभ इंटरणेट के भाध्यभ शे णव इलेक्ट्रॉणिक शभाछार पट्र की ओर बढ़ रहे है। उपग्रहों ओर कभ्प्यूटरों की शंछार क्रांटि णे शाधारण अख़बारों .के अश्टिट्व पर प्रश्ण छिण्ह लगा दिया है। भीडिया विशेसज्ञ अब यह कहणे लगे है कि भविस्य भें शभाछार पट्र छपेंगे णहीं, कभ्प्यूटर के परदे पर पढ़े जायेंगे और अब यह धारणा शाकार होणे लगी हे।

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