जल प्रदूषण के कारण, प्रभाव, जल प्रदूषण रोकने के उपाय

By | February 15, 2021


जल में किसी बाहरी पदार्थ की उपस्थिति जिसके कारण जल का स्वाभाविक गुण
समाप्त हो जाता है तथा वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो तो जल -प्रदूषण कहलाता है।

जल -प्रदूषण के कारण

  1. घरेलू अवसाद- जल -प्रदूषण का एक कारण घरेलू कूड़ा कचरा जल में बहा दिया देना है एवं
    घरेलू तथा सार्वजनिक शौचालयों से निकला मल-मूत्र जब नदी नालों तथा तालाबों में मिल जाता
    है तो जल -प्रदूषण का कारण बनता है।
  2. भूस्खलन-कभी-कभी भूस्खलन के दौरान खनिज पदार्थ पेड़-पौधों की पत्तियां जल में मिलती हैं
    जिससे जल -प्रदूषण होता है।
  3. रासायनिक उर्वरक-कृषि उपज बढ़ाने के लिए उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है। उर्वरकों की
    अतिरिक्त मात्रा वर्षा जल के साथ धीरे-धीरे नदियों तालाबों ,झीलों एवं झरनों में पहुॅंच जाती है ।
    जिससे शैवाल प्रस्फुटन (उत्पन्न) होता है परिणामस्वरूप जल -प्रदूषण में वृद्धि होती है। 
  4. औद्योगिक अपषिश्ट- अधिकांश संयत्रों में जल का भारी मात्रा में उपयोग किया जाता है तथा इन
    संयत्रों से भारी मात्रा में अपषिश्ट पदार्थ भी निकलते हैं जिसके कारण जल -प्रदूषण होता है। 
  5. अन्य कारण- जल -प्रदूषण के अन्य कारणों में मृत जले ,अधजले शवों को बहाना,अस्थि विसर्जन
    करना नदी नालों में साबुन लगाकर नहाना एवं कपड़े धोना ,नदियों के किनारे मल-मूत्र का त्याग
    करना तथा धार्मिक अन्धविश्वास आदि शामिल हैं।

जल -प्रदूषण के प्रभाव

  1. जलीय जीव-जन्तुओं पर प्रदूशित जल का बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है जल -प्रदूषण से जल में
    कोई भी अधिकता हो जाती है तथा ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। 
  2. प्रदूषित जल को पीने से पशु-पक्षियों को तरह-तरह की बीमारियॉं हो जाती हैं। 
  3. प्रदूषित जल का सर्वाघिक भयंकर प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है इससे पोलियो,हैजा,पेचिस
    ,पीलिया,मियादी,बुखार ,वायरल फीवर आदि बीमारियॉं फैलती हैं। 
  4. जल प्रदूशित होने के कारण औद्योगिक इकाईयों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

जल प्रदूषण रोकने के उपाय

  1. जल स्रोंतों के पास गन्दगी फैलाने,साबुन लगााकर नहाने तथा कपड़े धोने पर प्रतिबन्ध लगाना
    चाहिए। 
  2. पशुओं को जल में नहलाने से रोगाणुओं के जल में फैलने की संभावना रहती है इसलिए पशुओं
    को नदियों ,तालाबों आदि में नहलाने में प्रतिबन्ध लगाया जाना चाहिये। 
  3. नदियों में शव,अधजले शव राख तथा अधजली लकड़ी के बहाने पर प्रतिबन्ध लगाया जाना चाहिये
    तथा नदी घाटों पर विद्युत शवदाह गृहों का निर्माण कर उसके उपयोग को प्रोत्साहित किया जाय। 
  4. ऐसी मछलियों को जलाशयों में छोड़ा जाना चाहिये जो मच्छरों के अण्डे ,लार्वा एवं जलीय
    खरपतवारों का क्षरण करती हैं।

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