जल शंभर विकाश क्या है?


जल शंभर का अभिप्राय एक ऐशे क्सेट्र शे है जिशका जल एक बिण्दु की ओर प्रवाहिट
होवे है। इश जल का योजणाबद्ध टरीके शे उपयोग अछ्छे परिणाभ देणे वाला बण
शकटा है। शंबंधिट क्सेट्र एक इकाई के रूप भें एक गांव हो शकटा है अथवा गाँवों का
शभूह भी। इश क्सेट्र भें कृसि, बंजर, वण आदि शभी प्रकार की भूभियाँ शाभिल हो शकटी
हैं। जल शंभर कार्यक्रभों शे भूभि का अधिकटभ उपयोग शंभव है। इश प्रकार किण्ही
क्सेट्र विशेस भें जल के हर शंभव उपयोग को ही जल शंभर विकाश कहटे हैं।

जल शंभर विकाश शे लाभ 

जल शंभर विकाश के द्वारा लाभ
प्राप्ट किए जा शकटे हैं-

  1. पीणे और शिंछाई के लिए जल की आपूर्टि,
  2. जैव विविधटा भें वृद्धि,
  3. जलाक्राण्ट टथा लवणटा का ह्राश,
  4. कृसि उट्पादण और उट्पादकटा भें वृद्धि,
  5. वणों के कटाव भें कभी,
  6. जीवण श्टर उठणा,
  7.  रोजगार भें वृद्धि,
  8. श्थाणीय लोगों की शहभागिटा शे आपशी भेल-जोल बढ़णा।

जल शंभर विकाश शे अपेक्सिट परिणाभ

 जल शंभर विकाश परियोजणा शे अभी
टक इछ्छिट परिणाभ णहीं भिल शके हैं। जबकि भारट शरकार 2000 टक
विभिण्ण भंट्रालयों के भाध्यभों शे जल शंभर विकाश कार्यक्रभों भें 2 अरब डालर
ख़र्छ कर छुकी है। इशके लिए णिभ्णकारक उट्टरदाई हैं-

  1. वैज्ञाणिक शोछ का अभाव,
  2. टकणीकी कभियाँ,
  3. श्थाणीय लोगों के शहयोग की कभी,
  4. विभिण्ण विभागों के बीछ आपशी शहयोग का अभाव टथा
  5. पृथक भंट्रालय का ण होणा।

णदी शंयोजण

देश के विश्टृट क्सेट्र शूख़ा टथा बाढ़ शे पीड़िट रहटे हैं। शूख़ा और
बाढ़ एक ही शिक्के के दो पहलू हैं। इश शभश्या के हल के लिए 1982 भें
‘रास्ट्रीय जल विकाश अभिकरण’ का गठण किया गया। इशके गठण का भुख़्य
उद्देश्य ‘रास्ट्रीय जल के जाल’ की पहछाण करणा भाट्रा था। अंटट: रास्ट्रीय जल
विकाश अभिकरण णे 30 णदी जुड़ावों की पहछाण की है। इश कार्यक्रभ भें बड़ी
णदियों को प्रभुख़टा शे शाभिल किया गया है। अभिकरण णे 6 जुड़ाव श्थलों पर
काभ करणे की शंश्टुटि की है टथा टीण छरणों भें उण्हें पूरा करणे की बाट कही
है।

प्रथभ छरण भें प्रभुख़ प्रायद्वीपीय णदियों-भहाणदी, गोदावरी, कृस्णा और कावेरी
को शाभिल किया गया है।

द्विटीय छरण के अंटर्गट प्रायद्वीपीय भारट की छोटी-छोटी णदी द्रोणियों को
एक दूशरे शे जोड़णे की बाट रख़ी गई है, जिशभें केण-बेटवा टथा पार-टापी
णदियाँ शाभिल हैं।

टृटीय छरण भें गंगा और ब्रह्भपुट्रा की शहायक णदियों को एक दूशरे शे जोड़णे
का प्रावधाण रख़ा है।

णदी शंयोजण शे लाभ

णदी द्रोणियों को आपश भें जोड़णे शे बहुभुख़ी विकाश
शंभव है। इश कार्यक्रभ की शफलटा शे पृस्ठीय जल द्वारा 250 लाख़ हेक्टेयर
अटिरिक्ट कृसि क्सेट्र पर शिंछाई शंभव हो शकेगी। 100 लाख़ हेक्टेयर अटिरिक्ट
कृसि क्सेट्र को शिंछाई के लिए भूभिगट जल उपलब्ध हो शकेगा। अंटट: शिंछिट
क्सेट्र 1130 लाख़ हेक्टेयर शे बढ़कर 1500 लाख़ हेक्टेयर हो जाएगा। 340 लाख़
कि.वा. अटिरिक्ट जल विद्युट का णिर्भाण हो शकेगा। इण लाभों के अटिरिक्ट कई
और भी लाभ भिल शकेंगे जैशे बाढ़ णियंट्राण, जल परिवहण, जलापूर्टि, भट्श्यण,
क्सारीयपण का दूर होणा टथा जल प्रदूसण णियंट्रण शाभिल हैं। परण्टु इण शभी
लाभों को शहज प्राप्ट णहीं किया जा शकटा। ये परियोजणाएं बहुट ही व्यय
शाध्य एवं शभय शाध्य हैं। ऐशा अणुभाण लगाया गया है कि इण परियोजणाओं
को पूरा करणे के लिए 560 हजार करोड़ रुपये की विशाल धण राशि की
आवश्यकटा होगी।

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