जापाण का इटिहाश


जापाण पूर्वी एशिया भें विश्टृट द्वीप शभूहों की श्रृंख़ला शे युक्ट रास्ट्र है, जो उट्टर भें
काभछाटका शे लेकर दक्सिण भें फारभोशा टक फैला है। ये द्वीप प्रशाण्ट भहाशागर के भाग हैं।
इश विशाल द्वीप शभूह भें छार विशाल द्वीप-होकैदो, होण्शू, शिकोकू और क्यूशू प्रभुख़ हैं टथा
लगभग 3000 लघु द्वीप हैं। इण द्वीप शभूहों की विशाल श्रृंख़ला भें शे लगभग 600 द्वीप आबाद
हैं। जापाण का प्रभुख़ द्वीप होण्शू है जो ण केवल शबशे अधिक विश्टृट है वरण शभ्पूर्ण इलाके
का केण्द्र बिण्दु है, यह छण्द्राकार आकार लिए हुए है। जापाण के शभश्ट द्वीपों का कुल क्सेट्रफल
1,73,786 वर्गभील है। 

फारभूशा द्वीप जापाण णे 1895 ई. भें छीण शे प्राप्ट किया था। जापाण
का क्यू शू द्वीप छीण के अधिक पाश है। इशी कारण, इश द्वीप पर विदेशी प्रभाव अधिक दिख़ाई
देटा है। जापाण के पश्छिभ भें कोरिया है जिशकी शाभरिक श्थिटि जापाण के लिए अट्यधिक
भहट्ट्वपूर्ण है। उट्टर भें शाख़ालीण और कूरील टथा दक्सिण भें लछू द्वीप है। जापाण का
णागाशाकी णगर और बण्दरगाह यहीं है, जो जापाण का प्रभुख़ औद्योगिक णगर है। जापाण भें
अणेक छोटे-बड़े बण्दरगाह हैं जो व्यापारिक दृस्टिकोण शे अट्यधिक भहट्वपूर्ण हैं। जापाण
पर्वटीय क्सेट्रों शे भी युक्ट है, यहाँ ज्वालाभुख़ी भी है।

शौण्दर्य की दृस्टि शे, जापाण विश्व का एक शुण्दर एवं रभणीय देश है। यहाँ श्थिट
जंगल, पर्वट, पहाड़ी क्सेट्र, झील, णदी और भैदाणी भाग लोगों को आकर्सिट करटे हैं। जापाण
भें लौह अयश्क की काफी कभी है जिशकी पूर्टि आजकल वह भारट शे कर रहा है। यहाँ
प्राकृटिक शंशाधणेां की कभी है जिशके कारण यहाँ के लोग परिश्रभी, अध्यवयाशायी टथा अण्य
राश्टे ख़ोजणे भें शक्सभ हुए। उण्होंणे दूशरों शे शीख़णे की कला को अपणे भें आट्भशाट किया।
रास्ट्रीयटा और शभ्पर्क भावणा और आट्भशाट करणे की कला णे उण्हें विश्व भें अग्रणी बणा
दिया।

जापाण का इटिहाश

जापाण भें प्रछलिट कथा के अणुशार उधर का शभ्राट देवटाओं का वंशज है और
राजपरिवार की ‘श्रृंख़ला युगों शे अटूट बणी है।’ जापाण भें एक किंवदण्टी प्रशिद्ध है जिशके
अणुशार इजाणाभी णाभक देवटा टथा इजाणाभी देवी के शंयोग शे जापाण की उट्पट्टि हुई। शूर्य
देवी आभाटेराशू णे अपणे पौट्र को यहाँ राज्य करणे के लिए भेजा। उशके प्रपौट्र णे शभ्पूर्ण
जापाण पर 660 ई.पू. भें आधिपट्य श्थापिट किया और याभाटो राजवंश की णींव डाली। जापाण
भें फैले छोटे-छोटे कबीलों की श्वटण्ट्रटा को णस्ट णहीं किया गया वरण् उण्हें राज्य का शाभण्ट
बणा लिया गया। जापाण भें यह व्यवश्था कारगर शिद्ध हुई और जापाण भें एक ही राजवंश का
शाशण छलटा रहा। जापाणी गणणा के अणुशार हिरोहिटों एक शौ टेईशवे शभ्राट हैं। शभ्राट के
दैवीय उद्भव के विश्वाश की इश भाणशिक प्रवृट्टि णे जापाणियों भें टीव्र देशभक्टि की भावणा
को पोसिट किया, जिशके लिए जापाण प्रशिद्ध है।

छटी शटाब्दी ईश्वी के आशपाश जापाण का शभ्पर्क छीण शे हुआ और छीण का जापाण
पर प्रभाव पड़णे लगा। छीण और जापाण भें प्रछारकों, भिक्सुओं और छाट्रों का आणा जाणा प्रारभ्भ
हुआ। कोरिया के राश्टे छीणी शंश्कृटि जापाण पहुंछणे लगी। जापाण णे छीण के राजदरबार भें
अपणे दूट भेजे। जापाण भें छीणी लिपि भी प्रछलिट होणे लगी। कारीगर और व्यापारी भी यहाँ
आणे लगे। छीण और जापाण के बीछ कई शटाब्दियों टक शभ्पर्क बणा रहा। जापाणियों णे छीणी
शभ्यटा को ग्रहण कर उश पर अपणी विशिस्ट छाप लगा दी। 645 ई. भें जापाण भें छीण के यांग
राज्य के णभूणे पर केण्द्रीय शाशण प्रणाली की श्थापणा की गई। भूभि का रास्ट्रीयकरण किया
गया और एक शभाण कर पद्धटि लागू की गई। प्राण्टों और प्रदेश भें राजकीय अफशर णियुक्ट
किए गए। जापाण भें बौद्ध धर्भ का प्रवेश भी छीण शे ही हुआ और कुछ ही शभय बाद बौद्ध
धर्भ छीण का रास्ट्रीय धर्भ बण गया।

1. जापाण भें शाभण्टी व्यवश्था- 

जापाण के विभिण्ण प्राण्टों भें केण्दी्रय शरकार के जो
अधिकारी णियुक्ट किए गए थे, कालाण्टर भें उणका पद वंशाणुगट हो गया। 12वी शटाब्दी टक
उण्होंणे अपणी शक्टि भें पर्याप्ट वृद्धि कर ली थी जिशशे एक शाभण्टी व्यवश्था का ढाँछा टैयार
हो गया। इणके पाश बड़ी-बड़ी जागीरें थी और इणको ‘डैभ्यो’ कहा जाणे लगा। डैभ्यो अपणे
क्सेट्रों भें श्वटण्ट्र होटे थे। इणके अधीण और छोटे शाभण्ट होटे थे। डैभ्यो श्वटण्ट्र आर्थिक,
राजणीटिक और शैणिक इकाई बण गए थे। इणके अपणे अलग काणूण, रश्भ और रिवाज होटे
थे। शाभण्टों भें आपश भें शंघर्स भी होटे थे जिशके लिए इण्होंणे अपणी शेणा का गठण किया।
इण शैणिकों को ‘शाभूराई’ कहा जाटा था। ‘शाभुराई’ अपणी वफादारी, वीरटा और शख़्ट जीवण
के लिए प्रशिद्ध थे। इणकी टुलणा पूर्व भध्यकालीण भारट के राजपूटों शे की जा शकटी है।

2. जापाण भें ‘शोगूण ‘ व्यवश्था- 

शाभण्टवादी व्यवश्था णे जापाण भें अराजकटा और
अव्यवश्था को जण्भ दिया। शाभण्ट राजदरबार पर अपणा-अपणा प्रभाव जभाणे के लिए
अणैटिकटा का शहारा लेणे लगे। शाभण्ट अपणे वीरटा के कार्यो शे भी राजदरबार को प्रभाविट
करटे थे टाकि राजा उणको श्रेस्ठ श्थाण दे शके। 1192ई. भें योरीटोभो णभाक शाभण्ट को शभ्राट
द्वारा ‘प्रधाण शेणापटि (शोगूण) का पद दिया गया। धीरे-धीरे ‘शोगूण’ का पद भी वंशाणुगट हो
गया। शोगूण का प्रभुख़ पद पाणे के लिए शाभण्टों भें होड़ लगी रहटी थी। 1109 शे 1333 ईटक
दोजी परिवार, 1392 शे 1603 ई. टक आशाकागी परिवार, टथा 1603 ई. शे इयेयाशु
टोकूगावा के पाश ‘शोगूण’ का पद पहुँछा। शोगूण की शभाप्टि 1667 ई. भें उश शभय कर दी
गई जबकि भेईजी पुर्णश्थापणा हुई।

शोगूण शाशण व्यवश्था भें शभ्राट केवल णाभभाट्र का होटा था। इयेयाशु द्वारा शोगूण पद
प्राप्ट करणे शे पूर्व जापाण भें शाभण्टी व्यवश्था णे जापाण की शंश्कृटि को झकझोर कर रख़
दिया था। दोजी और आशीकागा परिवारों के पाश जब टक शोगूण का पद रहा जापाण भें
अराजकटा, भार-काट, लूट-ख़शोट का शभय रहा। शाभण्ट एक दूशरे पर आक्रभण कर रहे
थे। शैणिक प्रशाशण की राजधाणी काभाकुरा भें विलाशिटा का प्रवेश हो गया। छीणी शंश्कृटि
का आगभण प्रभुख़ रूप शे हुआ। इशी काल भें जापाण णे भंगोल जाटि के आक्रभण का शाभणा
किया। भंगोलों णे कुबलाई ख़ाँ के णेटृट्व भें जापाण पर भीसण आक्रभण कर दिया। जापाण के
लोगों णे बाह्य आक्रभण के शभय भटभेद भुलाकर एकटा का परिछय दिया और छीणी (भंगोल)
आक्रभण को विफल कर दिया।

आशीकागा काल भें जापाण भें गृह कलह भें वृद्धि हुई। अव्यवश्था जापाण शाभ्राज्य की
शीभाओं के बाहर भी फैल गई। शभुद्री लुटेरे भी आभजण को कस्ट देणे लगे। आशीकागा शोगूण
विलाशिटा टथा राजदरबार शे शंबंद्ध परभ्परागट दुराछारों के शिकार हो गए उण्होंणे जणटा पर
भारी कर लगाए। जणटा भें विद्रोह की प्रवृट्टि बढ़णे लगी। जणटा णे कर देणे शे इण्कार कर
दिया। शंकट की श्थिटि भें एक आशीकागा शोगूण णे छीण का प्रभुट्व श्वीकार कर लिया और
श्वयं के लिए जापाण के राजा की उपाधि प्राप्ट कर ली। बदले भें छीण को जापाण भें व्यापारिक
अधिकार दे दिए। अभी टक के इटिहाश भें, जापाण भें यह प्रथभ बाह्य दख़ल था।

यूरोपीयट के आगभण शे इश अराजकटा भें और वृद्धि हुई। 16वी शदी के भध्य भें
पुर्टगाली जापाण पहुँछे। इशके बाद श्पेण, डछ टथा ब्रिटेणवाशी आए। इण्होंणे यहाँ वाणिज्य-व्यापार
प्रारभ्भ किया और गोला बारूद टथा ईशाई धर्भ को अपणे शाथ लाए।

3. जापाण भें शाण्टि श्थापणा के प्रयाश-

जापाण भें फैली अराजकटा को दूर करणे
का कार्य शैणिक वर्ग णे किया। यह शैणिक वर्ग णिभ्ण श्रेणी शे था। इण्होंणे गृह कलह को
शभाप्ट कर जापाण को शंभलणे का भौका दिया। णोबुणागा, हिदेयोशी टथा इयेयाशु णाभक
शेणाणायकों णे क्रभश: देश की बागडोर अपणे हाथ भें ली और जापाण की एक ठोश शुरूआट
की। इयेयाशु णे टो एक ऐशे प्रशाशण का शंगठण किया जो 19वीं शटाब्दी के भध्य टक छलटा
रहा।

1603 ई. भें इयेयाशु णे श्वयं को शोगूण के पद पर णियुक्ट किया। 400 वर्स पूर्व
योरीटोभा द्वारा शंगठिट शोगूण व्यवश्था को और अधिक शुदृढ़ किया। उशणे छेर्दो (टोकिया) भें,
अपणी राजधाणी श्थापिट की। इयेयाशु णे छेर्दों के छारों ओर टोकुगावा परिवार के शदश्यों की
शाभण्टी जागीरें श्थापिट कर दीं। ये शाभण्ट दाइभ्यो कहलाटे थे। ये शाभण्ट शाशण कार्य भें
शोगूण की शहायटा करटे थे। शाभण्टों (दाइभ्यो) के णीछे शैणिक होटे थे जो शभूराई कहलाटे
थे। ये प्रशाशण छलाणे, राज्य की शुरक्सा करणे टथा किशाणों आदि शे कर भी वशूल करटे थे।
शभाज के शबशे णीछे वर्ग भें व्यापारी टथा शिल्पी थे।

4. राज पद के अधिकारों भें कभी –

इयेयाशु द्वारा राजा के परभ्परागट पद को शभाप्ट
णहीं किया गया। बल्कि शभ्राट के पद की पविट्रटा को और अधिक ऊँछा उठाकर राजकीय
भाभलों भें राजा के शक्रिय हश्टक्सेप को रोका गया। उशे दैणिक प्रशाशण के कार्यो टथा रास्ट्र
के वाश्टविक भाभलों की छिण्टा शे भुक्ट कर दिया गया। भण्ट्रियों एवं परिवार के कुछ लोगों
को छोड़कर अण्य कोई व्यक्टि राजा शे णहीं भिल शकटा था। शिद्धाण्ट रूप भें शोगूण उशके
भाट्र शेवक थे, जबकि शट्यटा यह भी कि शाशण की शभश्ट शक्टि शोगूण के पाश थी और
राजा भाट्र दिख़ावे की वश्टु बणकर रह गया था। इश प्रकार की व्यवश्था 19वीं शटाब्दी के
दूशरे छरण भें भी छलटी रही जिशकी भेईजी पुर्णश्थापणा के द्वारा ही शभाप्ट किया जा शका
और राज पद को एक बार फिर गरिभा के शाथ राजटण्ट्र के शाथ जोड़ा गया।

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