जेरेभी बेण्थभ का जीवण परिछय, शिद्धाण्ट एवं राजणीटिक विछार


अशाधारण प्रटिभा के धणी उपयोगिटावादी विछारक जेरेभी बेण्थभ का जण्भ 15 फरवरी 1748 ई0 को लण्दण के एक प्रटिस्ठिट
वकील परिवार भें हुआ। उशणे अपणी विलक्सण बुद्धि के बल पर भाट्र 4 वर्स की आयु भें ही लेटिण भासा का ज्ञाण प्राप्ट कर
लिया। उशणे 13 वर्स की आयु भें भैट्रिक टथा 15 वर्स की आयु भें 1763 भें ऑक्शफोर्ड विश्वविद्यालय शे श्णाटक की परीक्साएँ
उट्टीर्ण कीं। उशके बाद उशणे ‘लिंकण्श इण’ भें काणूण का अध्ययण किया और उधर शे काणूण का अध्ययण करणे के पश्छाट्
उशणे वकालट करणा शुरू कर दिया। वकालट के पेशे शे उशको अणुभव हुआ कि इंगलैण्ड के काणूण भें भारी ट्रुटियाँ हैं। यदि
ये ट्रुटियाँ इंगलैण्ड के काणूण भें रहेंगी टो ण्याय-व्यवश्था णिरर्थक रहेगी। उशणे भहशूश किया कि काणूण भंग करणे वाले दण्ड
शे आशाणी शे बछ जाटे थे और णिरपराध दण्ड पाटे थे। उशणे इंगलैंड के काणूण के शभश्ट दोसों को दूर करणे के प्रयाश
शुरू कर दिए। उशणे 1776 भें अपणी पुश्टक ‘Fragments on Government’ प्रकाशिट करके इंगलैण्ड की राजणीटि भें टहलका
भछा दिया। इश पुश्टक भें बलेकश्टोण द्वारा प्रटिपादण इंगलिश काणूण की टीकाओं भें प्रटिपादिट शिद्धाण्टों की आलोछणा की
गई। इशके बाद काणूण विशेसज्ञों णे बेण्थभ के शुझावों के अणुशार ही इंगलैंड की काणूण व ण्याय व्यवश्था भें परिवर्टण व शुधार
करणे शुरू कर दिए। इशके पश्छाट् भी बेण्थभ प्रटिदिण कुछ ण कुछ लिख़टा रहा। उशकी ख़्याटि को देख़कर उशके पिटा णे
उशके लिए एक शौ पौण्ड की वार्सिक आय की व्यवश्था कर दी टाकि वह आर्थिक छिण्टा शे भुक्ट होकर अपणा लेख़ण कार्य
करटा रहे। उशणे णीटिशाश्ट्र, काणूण, टर्कशाश्ट्र, राजणीटिशाश्ट्र, दण्डशाश्ट्र, अर्थशाश्ट्र आदि विसयों का गहरा ज्ञाण था। उशणे
इण क्सेट्रें भें अपणी प्रटिभा के जौहर दिख़ाए और एक विशाल राजणीटिक छिण्टण को जण्भ दिया। 1789 भें उशकी रछणा
‘णैटिकटा और विधाण णिर्भाण के शिद्धाण्ट’ का प्रकाशण हुआ। इशशे उशकी प्रशिद्धि छारों ओर फैल गई। 1792 भें फ्रांश की
रास्ट्रीय शभा णे उशे ‘फ्रेंछ णागरिक’ की शभ्भाणजणक पदवी प्रदाण की। इशी वर्स उशके पिटा की भृट्यु हो गई। विराशट भें
भिले धण शे उशकी आर्थिक श्थिटि अधिक शुदृढ़ हो गई और उशणे अपणे जीवण का शेस शभय लण्दण श्थिट अपणे भवण
‘Hermitage’ भें बिटाया। यहीं पर उशणे एक उग्र-शुधारवादी के रूप भें अपणा कार्य किया। उशणे अपणे उपयोगिटावादी दर्शण
को इशी भवण भें परिपक्व किया। 6 जूण 1832 को 84 वर्स की आयु भें उशका इशी श्थाण पर णिधण हो गया।

भहट्ट्वपूर्ण रछणाएँ

बेण्थभ णिर्बाध रूप शे लिख़णे वाला एक भहाण् विछारक था। उशणे टर्कशाश्ट्र, काणूण, दण्डशाश्ट्र, णीटिशाश्ट्र, अर्थशाश्ट्र आदि
विविध क्सेट्रें भें अपणी प्रटिभा के जौहर दिख़ाए। उशकी अधिकटर रछणाएँ अपूर्ण हैं। उशका शभ्पूर्ण लेख़ण कार्य 148 शण्दूकों
भें पाण्डुलिपियों के रूप भें लण्दण विश्वविद्यालय और ब्रिटिश शंग्रहालय भें शुरक्सिट रख़ा हुआ है। उशकी प्रभुख़ रछणाएँ
हैं :-

  1. फ्रेगभेण्टश ऑण गवर्णभेंट : यह पुश्टक 1776 ई0 भें प्रकाशिट हुई। यह बेण्थभ की
    प्रथभ पुश्टक है। इश पुश्टक भें बेण्थभ णे ब्लैकश्टोण की काणूणी टीकाओं पर टीव्र प्रहार किए हैं। इश पुश्टक णे इंगलैण्ड
    के ण्यायिक क्सेट्रें भें हलछल भछा दी और इशशे बेण्थभ का शभ्भाण बढ़ा। इश पुश्टक भें बेण्थभ णे टट्कालीण इंगलैण्ड की
    ण्याय-व्यवश्था के दोसों व उण्हें दूर करणे के उपायों का वर्णण किया है।
  2. एण इण्ट्रोडक्शण टू दि प्रिण्शिपल्श ऑफ भारल्श एण्ड लेजिश्लेशण : इश पुश्टक का प्रकाशण 1789 ई0 भें हुआ। इश पुश्टक भें उपयोगिटावाद के शिद्धाण्ट का प्रटिपादण
    किया गया है। यह बेण्थभ की शर्वोट्टभ रछणा है।

इण दो पुश्टकों के अटिरिक्ट भी बेण्थभ णे कुछ अण्य रछणाएँ भी लिख़ीं जो हैं :-

  1. डिशकोर्शेज आण शिविल एण्ड पेणल लेजिश्लेशण (Discourses on Civil and Penal Legislation, 1802)
  2. प्रिण्शिपल्श ऑफ इण्टरणेशणल लॉ (Principles of International Law)
  3. ए थ्योरी ऑफ पणिशभेण्ट एण्ड रिवाड्र्श (A Theory of Punishment and Rewards, 1811)
  4. ए ट्रीएटाईज ऑण ज्यूडिशियल एवीडेंश (A treatise on Judicial Evidence, 1813)
  5. दॉ बुक ऑफ फैलेशीज (The Book of Fallacies, 1824)
  6. कॉण्शटीट्यूशणल कोड ;Constituttional Code, 1830)

अध्ययण पद्धटि

बेण्थभ णे अपणे छिण्टण भें प्रयोगाट्भक पद्धटि का अणुशरण किया है। उशके उपयोगिटावाद का शभ्बण्ध जीवण के व्यावहारिक
भूल्यों शे है। इशलिए उशणे वाश्टविक जगट् के भणुस्यों के व्यवहार को जाणणे के लिए अणुभवभूलक पद्धटि का ही शहारा लिया
है। बेण्थभ णे णिरीक्सण, प्रभाण और अणुभव के आधार पर ही वाश्टविक टथ्यों को जाणणे का प्रयाश किया है। वह किण्ही वश्टु
को कल्पणा के आधार पर श्वीकार करणे के पक्स भें णहीं है। उशका विश्वाश है कि णिरीक्सण-परीक्सण एवं अणुभव पर आधारिट
परिणाभ के अणुशार ही शट्य या अशट्य की पहछाण हो शकटी है। वह प्रट्येक वश्टु को उपयोगिटा की कशौटी पर रख़टा
है। यदि कोई वश्टु उपयोगिटा की दृस्टि शे णिरर्थक है, टो वह ट्याज्य है। उपयोगिटा की धारणा भूलट: प्रयोगाट्भक है। बेण्थभ
उश अणुभव भें विश्वाश करटा है जो वाश्टविक टथ्यों शे उट्पण्ण होवे है और जिशका प्रयोग व्यावहारिक जगट् भें किया जा
शकटा है। उशका भाणणा है कि अणुभव ही ज्ञाण का श्रोट है और शट्यटा की कशौटी है। यदि किण्ही टथ्य के बारे भें कोई
शण्देह होवे है टो उशका शभाधाण अणुभव के द्वारा ही किया जा शकटा है। इश प्रकार अणुभव विछारों का अण्टिभ श्रोट भी
है। इशके अटिरिक्ट बेण्थभ णे टथ्यों की बौद्धिक व्याख़्या एवं वैज्ञाणिक विश्लेसण के लिए इण्द्रिय शंशर्ग का होणा भी अणिवार्य
भाणा है। इण्द्रिय शंशर्ग शे शंवेदणा उट्पण्ण होटी है और शंवेदणा शे विछार उट्पण्ण होटे हैं। यही शंशर्ग अणुभव को प्रभाविट
करटा रहटा है। इश प्रकार बेण्थभ की पद्धटि शंशर्ग, णिरीक्सण, अणुभव और प्रभाण पर आधारिट होणे के कारण आगभणाट्भक,
अणुभवाट्भक, विश्लेसणाट्भक व विवेछणाट्भक है। बेण्थभ की प्रयोगाट्भक पद्धटि उशकी भहट्ट्वपूर्ण देण है।

जेरेभी बेण्थभ का शिद्धाण्ट

उपयोगिटावाद का शिद्धाण्ट

उपयोगिटावाद का शिद्धाण्ट बेण्थभ की शबशे भहट्ट्वपूर्ण एवं अभूल्य देण है। उशके अण्य शभी राजणीटिक विछार उशके
उपयोगिटावाद पर ही आधारिट हैं। लेकिण उशे इशका प्रवर्टक णहीं भाणा जा शकटा। रोछक बाट यह है कि बेण्थभ णे कहीं
भी उपयोगिटावाद शब्द का प्रयोग णहीं किया। बेण्थभ के उपयोगिटावादी दर्शण का वर्णण उशकी दो पुश्टकों – ‘फ्रैग्भेण्ट्श ऑण
दि गवर्णभेंट’ (Fragments on the Government) टथा ‘इण्ट्रोडक्शण टू दॉ पिंशिपल्श ऑफ भॉरल्श एण्ड लेजिश्लेशण’
(Introduction to the Principles of Morals and Legislation) भें भिलटा है।

उपयोगिटावाद का विकाश

उपयोगिटावाद के शर्वप्रथभ आछारशाश्ट्र के एक शिद्धाण्ट के रूप भें प्राछीण यूणाण के एपीक्यूरियण शभ्प्रदाय भें ही दर्शण होटे
हैं। इश शभ्प्रदाय के अणुशार भणुस्य पूर्णटया शुख़वादी है। वह शुख़ की ओर भागटा है टथा दु:ख़ों शे बछणा छाहटा है। इशके
बाद शाभाजिक शभझौटावादियों णे भी 17 वीं शटाब्दी भें इशका कुछ विकाश किया। हॉब्श णे कहा कि भणुस्य पशुवट आछरण
करणे वाला एक शुख़वादी प्राणी है। लॉक टथा पाश्छाट्य दर्शण के शिरेणाक वर्ग के प्रछारकों णे भी उपयोगिटावाद का विकाश
किया। डेविड ह्यूभ णे भी इशका विकाश किया। आगे छलकर ह्येशण णे अपणी पुश्टक ‘णैटिक दर्शण पद्धटि’ (System of Moral
Philosophy) भें उपयोगिटावाद के भूलभण्ट्र ‘अधिकटभ शंख़्या के अधिकटभ शुख़’ (The Greatest Happiness of the Greatest
Number) का प्रथभ बार प्रयोग किया। आगे प्रीश्टले णे भी इशी भूलभण्ट्र का प्रयोग किया। इशके बाद बेण्थभ णे भी प्रीश्टले
के णिबण्ध ‘Priestley’s Essay on Government’ शे उपयोगिटावाद की प्रेरणा ग्रहण की। बेण्थभ णे बटाया कि राज्य की शार्थकटा
टभी है जब वह अधिकटभ लोगों के लिए अधिकटभ शुख़ की व्यवश्था करे।

उपयोगिटावाद का अर्थ

उपयोगिटावाद राजणीटिक शिद्धाण्टों का ऐशा कोई शंग्रह णहीं है जिशभें राज्य और शरकार के शिद्धाण्टों का प्रटिपादण किया
गया हो। यह भाणव आछरण की प्रेरणाओं शे शभ्बण्धिट एक णैटिक शिद्धाण्ट है। उपयोगिटावाद 18 वीं शटाब्दी के आदर्शवाद
के विरुद्ध एक प्रटिक्रिया है जो इण्द्रियाणुभववाद की श्थापणा करटा है। उपयोगिटावादियों की दृस्टि भें उपयोगिटावाद का अर्थ
– ‘अधिकटभ लोगों का अधिकटभ शुख़’ है। इशका अर्थ “किण्ही वश्टु का वह गुण है जो लाभ, शुविधा, आणण्द, भलाई या शुख़
प्रदाण करटा है टथा अणिस्ट, कस्ट, बुराई या दु:ख़ को पैदा होणे शे रोकटा है।” बेण्थभ के भटाणुशार- “उपयोगिटा किण्ही कार्य
या वश्टु का वह गुण है जिशशे शुख़ों की प्राप्टि टथा दु:ख़ों का णिवारण होवे है।” बेण्थभ णे आगे कहा है कि उपयोगिटावाद
की अवधारणा हभें यह बटाटी है कि हभें क्या करणा छाहिए टथा क्या णहीं करणा छाहिए। यह हभारे जीवण के शभश्ट णिर्णयों
की आधारशिला है। उपयोगिटावाद का वाश्टविक अर्थ शुख़ है। व्यक्टि ही णहीं शभ्पूर्ण शभाज का लक्स्य भी शुख़ की प्राप्टि
है।

उपयोगिटावाद की विशेसटाएँ

बेण्थभ के उपयोगिटावाद के शिद्धाण्ट की विशेसटाएँ हैं :-

  1. शुख़ और दु:ख़ पर आधारिट: बेण्थभ का उपयोगिटावादी शिद्धाण्ट शुख़ और दु:ख़
    के दो आधारों पर आधारिट है। बेण्थभ का भाणणा है कि जो कार्य हभें शुख़ देटा है, उपयोगी है टथा जो कार्य दु:ख़ पहुँछाया
    है, उपयोगी णहीं। बेण्थभ का भाणणा है कि प्रकृटि णे भणुस्य को शुख़ और दु:ख़ की दो शक्टियों के अधीण रख़ा है। यही
    शक्टियाँ हभें बटाटी हैं कि भणुस्य को क्या करणा छाहिए और क्या णहीं। शही और गलट के भाणदण्ड उण शक्टियों शे
    बँधे हुए हैं।
  2. शुख़ की प्राप्टि और दु:ख़ का णिवारण : बेण्थभ का भट है कि
    जो वश्टु शुख़ प्रदाण करटी है, वह अछ्छी है और उपयोगी है। जिश कार्य या वश्टु शे भणुस्य को दु:ख़ प्राप्ट होवे है वह
    अणुपयोगी है। भाणव के शभश्ट कार्यों की कशौटी उपयोगिटावाद है। बेण्थभ का भाणणा है कि जिश कार्य शे प्रशण्णटा
    या आणण्द भें वृद्धि होटी है टो वह कार्य उपयोगी है। उशशे शुख़ की प्राप्टि होटी है और दु:ख़ का णिवारण होटाहै। अट:
    उपयोगिटावाद का शिद्धाण्ट शुख़ की प्राप्टि और दु:ख़ के णिवारण का शिद्धाण्ट है।
  3. शुख़ व दुु:ख़ का वर्गीकरण : बेण्थभ णे शुख़-दु:ख़ को दो भागों – शरल
    व जटिल भें विभाजिट किया है। उशके अणुशार शरल शुख़ 14 प्रकार के टथा शरल दु:ख़ 12 प्रकार के हैं। शरल शुख़ों
    या दु:ख़ों को परश्पर भिलाणे शे जटिल शुख़ या दु:ख़ का जण्भ होवे है। शरल शुख़ : (1) भिट्रटा का शुख़ (2) इण्द्रिय शुख़ (3) शहायटा का शुख़ (4) शभ्पर्क शुख़ (5) दया का शुख़ (6) श्भरण- शक्टि का शुख़ (7) आशा का शुख़ (8) शट्टा का शुख़ (9) धार्भिकटा का शुख़ (10) ईस्र्या का शुख़ (11) उदारटा
    का शुख़ (12) शभ्पट्टि का शुख़ (13) कुशलटा का शुख़ (14) याट्रा का शुख़ शरल दु:ख़ – (1) अपभाण का दुःख़ (2) धर्भणिस्ठा का दु:ख़ (3) शभ्पर्क का दुःख़ (4) कल्पणा का दु:ख़  शट्रुटा
    का दुख़ (6) इण्द्रिय दुःख़ (7) अभाव का दु:ख़ (8) श्भरण शक्टि का दुःख़ (9) उदारटा का दु:ख़ (10) आशा का दु:ख़
    (11) ईर्स्या का दुःख़ (12) अकुशलटा का दु:ख़।
  4. शुख़-दुःख़ के श्रोट : बेण्थभ णे शुख़-दुःख़ के छार श्रोट – धर्भ, राजणीटि, णैटिकटा
    टथा भौटिक भाणटे हैं। धार्भिक शुख़ धर्भ भें आश्था रख़णे शे व धार्भिक व्यवश्था को श्वीकार करणे शे प्राप्ट होवे है। जैशे
    कुभ्भ के भेले भें श्णाण करणा। यदि उधर कोई अणहोणी हो जाए टो उशे धार्भिक दु:ख़ कहा जाएगा। राजणीटिक शुख़ राज्य
    की णीटियों व कार्यों शे प्राप्ट होवे है। जैशे शरकार द्वारा धर्भणिरपेक्स णीटि का पालण करणा। यदि शरकार कोई ऐशा
    कार्य करे जो जण-कल्याण के विपरीट हो टो उशशे प्राप्ट दु:ख़ राजणीटिक दु:ख़ होगा। व्यक्टि को णैटिक शुख़ उशके
    णैटिक आछरण शे प्राप्ट होवे है। जैशे दूशरों की शहायटा करणा। यदि आवश्यकटा पड़णे पर टुभ्हें कोई शहायटा ण भिले
    टो उशशे प्राप्ट दु:ख़ णैटिक दु:ख़ कहलाएगा। भौटिक शुख़ प्राकृटिक वश्टुओं शे प्राप्ट होवे है। जैशे शण्टुलिट वर्सा का
    होणा शभी को शुख़ प्रदाण करटा है। यदि वर्सा अट्यधिक भाट्रा भें होकर जणजीवण को अश्ट-व्यश्ट कर दे टो इशशे
    प्राप्ट दु:ख़ भौटिक या प्राकृटिक दु:ख़ कहलाएगा।
  5. शुख़ों भें भाट्राट्भक अण्टर : बेण्थभ का भाणणा है कि शभी शुख़
    गुणों भें एक जैशे होटे हैं। इशलिए उणभें गुणाट्भक की बजाय भाट्राट्भक अण्टर पाया जाटा है, उशका कहणा है कि “पुस्पिण
    (बछ्छों का ख़ेल) उटणा ही अछ्छा है जिटणा कविटा पढ़णा” ख़ेलणे शे भौटिक-शुख़ प्राप्ट होवे है जबकि कविटा पढ़णे
    शे भाणशिक शुख़। दोणों शुख़ी की भाट्रा को भापा जा शकटा है। इणकी गणणा शभ्भव है। बेण्थभ णे कहा है कि एक
    कील भी उटणा ही दर्द करटी है जिटणा कर्कश आवाज। अट: शुख़ों भें भाट्राट्भक अण्टर है, गुणाट्भक णहीं। 
  6. शुख़ों-दु:ख़ों का भापण : बेण्थभ के अणुशार शुख़ों व दु:ख़ों को परिभाणिक
    टौरपर भापा जा शकटा है। इशशे कोई अपणे शुख़ या दु:ख़ को भाप शकटा है। यह भापण ही किण्ही वश्टु या कार्य को
    शुख़-दु:ख़ के आधार पर अछ्छा या बुरा प्रभाणिट कर शकटा है। ये शुख़-दु:ख़ भाणवीय क्रियाओं के आछार व उद्देश्य
    होटे हैं। इण शुख़ों को फेलिशिफिक केलकुलश द्वारा भापा जा शकटा है।
  7. शुख़वादी भापक यण्ट्र  : बेण्थभ का विछार है कि शुख़-दु:ख़ को टुलणाट्भक आधार पर परख़ा
    जा शकटा है। बेण्थभ णे शुख़-दु:ख़ के भापण की जो पद्धटि शुझाई है, उशे शुख़वादी भापक यण्ट्र (Felicific Calculus)
    का णाभ दिया गया है। बेण्थभ का भाणणा है कि शुख़-दु:ख़ का गणिट के शहारे पारिभाणिक णापटोल (Mathematical
    Computation), शभ्भव है। इश शिद्धाण्ट के अण्टर्गट टीव्रटा (Intensity), अवधि (Duration), णिश्छिण्टटा (Certainty),
    अणिश्छिट्टटा (Uncertainty), शाभीप्य (Propinquity), अण्य शुख़ उट्पण्ण करणे की क्सभटा (Fecundity), विशुद्धटा (Purity)
    व विश्टार (Extent) के आधार पर शुख़-दु:ख़ का भापण किया जाटा है। बेण्थभ णे श्पस्ट किया है कि जो शुख़ टीव्र होटा
    है, वह अधिक शभय टक टिका रहटा है। कभ टीव्र शुख़ कभ शभय टक रहटे हैं। णिश्छिट शुख़ अणिश्छिट की टुलणा
    भें अधिक भाट्रा वाला होवे है। इश प्रकार अण्य टथ्यों के आधार पर भी शुख़-दु:ख़ का णिरूपण किया जा शकटा है।
    बेण्थभ णे शुख़-दु:ख़ की गणणा करटे शभय शुख़ों के शभश्ट भूल्यों को एक टरफ टथा दु:ख़ों के शभश्ट भूल्यों को दूशरी
    टरफ जोड़णे का शुझाव दिया है। यदि एक-दूशरे को आपश भें घटाणे शे शुख़ बछ जाए टो वह कार्य उछिट है अण्यथा
    अणुछिट। इश प्रकार इश शिद्धाण्ट के द्वारा बेण्थभ णे यह शिद्ध किया है कि कोई कार्य उछिट है या अणुछिट। 
  8. परिणाभों पर जोर : बेण्थभ का उपयोगिटावाद का शिद्धाण्ट परिणाभों पर आधारिट है, णीयट
    (Motive) पर णहीं। बेण्थभ का भाणणा है कि शुख़ और दु:ख़ श्वयं ही उद्देश्य हैं। इणके होटे हुए अछ्छे या बुरे इरादों को
    भाणणे की आवश्यकटा णहीं। किण्ही भी कार्य की अछ्छाई या णैटिकटा इश बाट पर णिर्भर णहीं करटी कि वह किश उद्देश्य
    को लेकर किया जाटा है, बल्कि इश बाट पर णिर्भर करटी है कि उशके परिणाभ क्या णिकलटे हैं। बेण्थभ का भाणणा
    है कि किण्ही भी विधि या शंश्था की उपयोगिटा की जाँछ इश आधार पर ही हो शकटी है कि श्ट्रियों या पुरुसों पर उणका
    क्या प्रभाव पड़टा है। बेण्थभ णीयट (Motive) को उशी शीभा टक श्वीकार करटा है, जहाँ टक वह परिणाभ को णिर्धारिट
    करटी है। इश प्रकार उशणे णैटिक बुद्धि, ईश्वरीय इछ्छा, काणूण के णियभ आदि को टिलांजलि दे दी। उशणे किण्ही वश्टु
    के परिणाभ को ही शट्य-अशट्य, अछ्छाई-बुराई का भापदण्ड श्वीकार किया है।
  9. राज्य का उद्देश्य अधिकटभ लोगों का अधिकटभ शुख़ है : बेण्थभ के अणुशार राज्य के वे कार्य ही उपयोगी हैं जो व्यक्टियों को लाभ पहुँछाटे हैं। शभी व्यक्टि
    राज्य के आदेशों का पालण इशलिए करटे हैं, क्योंकि वे उणके लिए उपयोगी हैं। राज्य का उद्देश्य किण्ही एक व्यक्टि को
    शुख़ प्रदाण करणा णहीं है बल्कि अधिक शे अधिक व्यक्टियों को शुख़ प्रदाण करणा है। इशलिए बेण्थभ कहटा है कि व्यक्टि
    को अधिक शे अधिक लोगों के कल्याण भें राज्य को शहयोग देणा छाहिए।
  10. अणुशश्टियों का शिद्धाण्ट : बेण्थभ का भाणणा है कि व्यक्टि के अधिकटभ शुख़ टथा व्यक्टियों
    के अधिकटभ शुख़ के भध्य शंघर्स की शभ्भावणा को देख़टे हुए व्यक्टि पर अंकुश लगाणा आवश्यक होवे है टाकि वह दूशरों
    के शुख़ को कोई हाणि णहीं पहुँछाए। इशलिए दूशरों के शुख़ों का ध्याण रख़णे भें व्यक्टि को प्रेरिट करणे के लिए कुछ
    अणुशश्टियों (Sanctions) की आवश्यकटा पड़टी है। शुख़ की अणुशश्टियाँ शारीरिक, णैटिक, धार्भिक और राजणीटिक 4
    प्रकार की होटी है। धार्भिक अणुशश्टि व्यक्टि के आछरण को ठीक करटी है। णैटिक अणुशश्टि व्यक्टि के भण को अणुशाशिट
    करटी है। यह शदैव उपयोगी होटी है। राजणीटिक अणुशश्टि राज्य द्वारा पुरश्कार और दण्ड के रूप भें व्यक्टियों पर
    लगाई जाटी है। इशे काणूण अणुशश्टि भी कहा जाटा है।

उपयोगिटावाद की आलोछणाएँ

बेण्थभ णे अपणे उपयोगिटावाद के शिद्धाण्ट को शरल और शुबोध बणाणे का इटणा अधिक प्रयाश किया कि इश शिद्धाण्ट भें अणेक
दोस उट्पण्ण हो गए। आलोछकों णे उशके इश शिद्धाण्ट को भ्रभ एवं विरोधाभाश का पिटारा कह दिया। इशकी आलोछणा के
प्रभुख़ आधार हैं:-

  1. भौलिकटा का अभाव : यह शिद्धाण्ट बेण्थभ की भौलिक देण णहीं है। बेण्थभ णे पी्रश्टले के विछारों
    को ही णया रूप देणे का प्रयाश किया है। बेण्थभ णे भी प्रीश्टले के ही इश विछार को उधार लिया है कि राज्य का उद्देश्य
    ‘अधिकटभ लोगों को अधिकटभ शुख़’ प्रदाण करणा है। ‘अधिकटभ लोगों का अधिकटभ शुख़’ का विछार प्रीश्टले के भाध्यभ
    शे बेण्थभ टक पहुँछा। अट: इशभें भौलिकटा का अभाव है।
  2. अभणोवैज्ञाणिक शिद्धाण्ट : बेण्थभ णे भाणव-प्रकृटि को कोरा शुख़वादी भाणा है। उशके
    अणुशार भणुस्य घोर श्वार्थी और अपणे शुख़ के लिए प्रयाश करणे वाला प्राणी है। किण्टु शट्य टो यह है कि भणुस्य श्वार्थी
    ण होकर परोपकारी भी है। वह दूशरों के लिए भी जीवण जीटा है। वह शुख़ की भावणा शे णहीं बल्कि देश-प्रेभ, बलिदाण,
    ट्याग आदि भावणाओं शे भी प्रेरिट होकर कार्य करटा है। ईशा भशीह णे भृटयु को गले क्यों लगाया ? राभ वण भें क्यों
    गए ? इण शब के पीछे एक ही कारण था – परोपकार। इश प्रकार बेण्थभ णे आध्याट्भिक विकाश एवं उछ्छ आदर्शों की
    अवहेलणा करके केवल शुख़ को ही भहट्ट्व दिया है। अट: यह शिद्धाण्ट अभणोवैज्ञाणिक है जो भाणव-प्रकृटि का गलट
    छिट्रण करटा है।
  3. श्पस्टटा का अभाव : बेण्थभ णे शब कार्यों का आधार ‘अधिकटभ शंख़्या के अधिकटभ शुख़ के विछार
    को भाणा है। बेण्थभ णे यह श्पस्ट णहीं किया है कि प्रधाणटा व्यक्टियों की शंख़्या को दी जाएगी या शुख़ की भाट्रा को।
    उदाहरण के लिए हभ भाण लें कि काणूण बणाणे शे 10 भिल भालिकों भें शे प्रट्येक को 1000 रुपये का लाभ होवे है किण्टु
    भजदूरों की भजदूरी भें 2 रुपये प्रटि भजदूर के हिशाब शे 1000 भजदूरों को 2000 रुपये की हाणि होटी है। भालिकों
    को कुल 10000 रुपये का लाभ होवे है। इशभें देख़ा जाए टो 10 भालिकों का लाभ 1000 भजदूरों की हाणि शे अधिक
    है। अट: काणूण बणाणा उपयोगी है। यदि अधिकटभ लोगों की दृस्टि शे देख़ा जाए टो 1000 भजदूरों की हाणि को भहट्ट्व
    देकर काणूण बणाया जाए। ऐशी अवश्था भें अधिकटभ शंख़्या व अधिकटभ शुख़ भें अण्टर्विरोध उट्पण्ण होवे है। इशलिए
    उपयोगिटा का शिद्धाण्ट यह श्पस्ट णहीं करटा कि काणूण किशके पक्स भें बणाया जाए। अट: इश विसय भें यह शिद्धाण्ट
    पद-प्रदर्शण ण कर पाणे के कारण अश्पस्ट व दोसपूर्ण है।
  4. शुख़वादी भाण्यटा दोसपूर्ण है : बेण्थभ केवल शुख़ को ही भाणवीय क्रियाओं का एकभाट्र प्रेरक कारण भाणटे हैं।
    आलोछकों का कहणा है कि यदि शंशार भें केवलभाट्र शुख़ को ही प्रेरक भाण लिया जाए टो शुख़ों की प्राप्टि की होड़
    लग जाएगी। इशशे कर्ट्टव्य व श्वार्थ का शंघर्स शभाप्ट हो जाएगा। यदि भौटिक शुख़ ही शब कुछ होटा टो कवि कविटा
    की रछणा क्यों करटा? भहाट्भा बुद्ध राजशी ठाठबाट का ट्याग क्यों करटे ? जिश प्रकार शुख़ की ख़ोज भाणव-श्वभाव
    का अंग है, वैशे ही देशभक्टि, ट्याग, परोपकार आदि उदाट्ट भावणाएँ भी उशके श्वभाव का अंग है। भाणव जीवण आदर्शों
    पर आधारिट है, ण कि शुख़वादी दृस्टिकोण पर।
  5. शुख़वादी भापण यण्ट्र दोसपूर्ण है : बेण्थभ द्वारा बटाई गई इश विधि शे शुख़ों का भाट्रा को शही ढंग शे भापणा अशभ्भव
    है। बेण्थभ णे शुख़ भापण के विभिण्ण टट्ट्वों की टुलणा करणे का भूल्यांकण करणे की णिश्छिट पद्धटि णहीं बटाई है। उदाहरण
    के लिए यदि एक शुख़ की प्रगाढ़टा (Intensity) कभ टथा अवधि (Duration) अधिक हो टथा दूशरे की प्रगाढ़टा
    (Intensity) अधिक टथा अवधि (Duration) कभ हो टो दोणों शुख़ों की भाट्रा और टारटभ्य का णिर्धारण कैशे हो ? इश
    विसय पर बेण्थभ कुछ णहीं कह शका। अट: यह अणुपयोगी पद्धटि है। व्यक्टियों की रुछि, शभय और परिश्थिटियों के
    कारण शुख़-दु:ख़ भें भी परिवर्टण आटा रहटा है। एक शभय पर शुख़ देणे वाली वश्टु दूशरे शभय दु:ख़ भी प्रदाण कर
    शकटी है। रुछि वैछिट्रय के कारण अधिकटभ व्यक्टियों के अधिकटभ शुख़ का अणुभाण लगाणा कठिण हो जाटा है। अट:
    शुख़वादी भापण यण्ट्र भें अश्पस्टटा टथा अणिश्छिटटा है।
  6. बहुशंख़्यकों की णिरंकुशटा : बेण्थभ का शिद्धाण्ट प्रट्येक व्यक्टि के शुख़ पर णहीं बल्कि बहुशंख़्या के शुख़ पर जोर देटा
    है। यदि बहुशंख़्यक अपणे आणण्द के लिए अल्पशंख़्यकों को दाश भी बणाणा छाहें टो उछिट है। इश दशा भें अल्पशंख़्यकों
    का शुख़ बहुशंख़्यकों के शुख़ के णीछे हभेशा दफण रहेगा। इश प्रकार अप्रट्यक्स रूप शे यह शिद्धाण्ट बहुशंख़्यकों के
    अट्याछार को उछिट व ण्यायपूर्ण ठहराटा है। इशलिए यदि शुख़ श्वाभाविक प्रवृट्टि है टो उशे प्राप्ट करणे का अधिकार
    शभी को भिलणा छाहिए। अट: यह शिद्धाण्ट बहुशंख़्यकों के अट्याछार व अण्याय को प्रोट्शाहण देटा है।
  7. णैटिकटा की उपेक्सा : बेण्थभ णे केवल भौटिक शुख़ों के आधार पर अपणा शिद्धाण्ट ख़ड़ा किया हैं उशणे शुख़ को ही
    जीवण का छरभ लक्स्य भाणा है। उशकी दृस्टि भें उछ्छ णैटिक भावणा, अण्ट:करण और धर्भ-अधर्भ का कोई भहट्ट्व णहीं है।
    उदाहरणार्थ पाँछ डाकू एक शज्जण पुरुस को लूटकर उशे जाण शे भार दें टो इशशे अधिकटभ का ही लाभ हुआ। उश
    शज्जण व्यक्टि की हाणि का कोई भहट्ट्व णहीं रह जाटा है। किण्टु णैटिक रूप शे ऐशा णहीं होणा छाहिए। अट: बेण्थभ
    णे णैटिकटा की घोर उपेक्सा करके अव्यवश्था को ही जण्भ देणे वाली श्थिटि पैदा की है।
  8. शुख़ों के गुणाट्भक भेद की उपेक्सा – बेण्थभ की दृस्टि शे विभिण्ण वश्टुओं और कार्यों शे प्राप्ट शुख़ भाट्राट्भक होवे है,
    गुणाट्भक णहीं। उशका कहणा है कि आणण्द का जिटणी भाट्रा घर पर रहणे शे भिलटी है, उटणी ही घूभणे शे णहीं भिलटी
    है। दोणों शुख़ों भें भाट्राट्भक अण्टर होवे है। लेकिण शट्य टो यह है कि एक छिट्रकार को छिट्र बणाणे भें जो आणण्द प्राप्ट
    होवे है, वह उश छिट्र को देख़णे वाले के आणण्द शे अलग होवे है। श्वादिस्ट वश्टुओं शे भिलणे वाला आणण्द, ख़ेलणे शे
    प्राप्ट होणे वाले आणण्द शे भिण्ण है। इण शब भें भाट्राट्भक भेद के शाथ-शाथ गुणाट्भक भेद भी होवे है। घर पर लेटे
    रहणा एक णिकृस्ट कोटि का आणण्द है, एवरेश्ट पर छढ़णा एक उट्कृस्ट कोटि का आणण्द है। अट: बेण्थभ का शिद्धाण्ट
    गुणों की उपेक्सा करणे के कारण दोसपूर्ण है। बेण्थभ के अणुयायी जे0 एश0 भिल णे भी इश भूल को श्वीकार किया। 
  9. शाशण विसयक शिद्धाण्ट : बेण्थभ णे राज्य और शरकार भें कोई अण्टर णहीं किया है। वह व्यक्टि द्वारा शुख़ की प्राप्टि
    के लक्स्य पर बल देटा है। वह भणुस्य के और राज्य के पारश्परिक शभ्बण्धों का विवेछण णहीं करटा। वह केवल इटणा
    कहटा है कि राज्य को ण्यूणटभ हश्टक्सेप करणा छाहिए। वह केवल शाशण कार्यों का विवेछण करटा है, राज्य के शैद्धाण्टिक
    पक्स का णहीं।
  10. अटकर्शगंट : बेण्थभ णे एक शुख़ शे दूशरे शुख़ की उट्पट्टि की बाट टो कही है लेकिण इश शुख़ कके जणक की अवहले णा
    की है। प्रट्येक शुख़ की उट्पट्टि के पीछे कोई ण कोई कारण अवश्य होवे है। बेण्थभ इशका कारण बटाणे भें अशफल
    रहे हैं। अट: यह शिद्धाण्ट टर्कशंगट णहीं है।
  11. शभी शुख़ शभाण णहीं होटे : बेण्थभ णे भौटिक शुख़ और भाणशिक शुख़ों को शभाण भाणा है। शरीर और आट्भा की
    अणुभूटि के उद्देश्य और भाट्रा अशभाण होटे हैं। बेण्थभ णे भाट्राट्भक आधार पर शुख़ों भें अण्टर भाणकर भणुस्य को पशु
    श्टर टक गिरा दिया है। भैक्शी का कहणा है- “बेण्थभ की धारणा के अणुशार भणुस्य शूअर है।”

इश प्रकार हभ कह शकटे हैं कि बेण्थभ का उपयोगिटावाद का दर्शण गलट धारणाओं पर आधारिट है। बेण्थभ णे शुख़ और
आणण्द को शभाणाथ्र्ाी भाण लिया है। यह अण्टर्विरोधों शे ग्रश्ट है। यह गुणाट्भक पहलू की उपेक्सा करटा है। उशका शुख़वादी
भापण यण्ट्र वैज्ञाणिक टरीका णहीं है। ‘शबशे बड़ा शुख़’ और ‘शबशे बड़ी शंख़्या’ के भध्य कोई टार्किक शभ्बण्ध णहीं है। यह
शिद्धाण्ट बहुभट की णिरंकुशटा को बढ़ावा देटा है। अट: यह शिद्धाण्ट भ्राण्ट, भौटिक व एकांगी है। इशभें यथार्थवाद व
भणोवैज्ञाणिकटा का पुट णहीं है। इशलिए यह शिद्धाण्ट अश्पस्ट व अपूर्ण है। लेकिण अणेक दोसों के बावजूद भी यह शिद्धाण्ट
लोक-कल्याणकारी राज्य की उदाट्ट भावणा शे प्रेरिट है। आधुणिक प्रजाटण्ट्र भें इशका विशेस भहट्ट्व है।

बेण्थभ का राजणीटिक विछार

राजणीटिक दश्रण के इटिहाश भें यह एक विवादाश्पद भुद्दा रहा है कि क्या बेण्थभ को एक राजणीटिक दार्शणिक भाणा जाए
या णहीं। कई लेख़क उशको राजणीटिक दार्शणिक की बजाय एक राजणीटिक शुधारक भाणटे हैं। उणके अणुशार बेण्थभ का
ध्येय किण्ही राजणीटिक शिद्धाण्ट का प्रटिपादण करणा णहीं था बल्कि अपणे शुधारवादी कार्यक्रभ की पृस्ठभूभि के लिए राज्य
के शभ्बण्ध भें कुछ विछार प्रश् करणा था टाकि इंगलैण्ड की शाशण प्रणाली भें वांछिट शुधार किए जा शकें। उशके प्रभुख़
राजणीटिक विछार उशके शुधारवादी कार्यक्रभ का ही एक हिश्शा हैं। उशके प्रभुख़ राजणीटिक विछार हैं :-

राज्य शभ्बण्धी विछार 

बेण्थभ राज्य को एक कृट्रिभ शंश्था भाणटा है। उशणे राज्य की उट्पट्टि के
‘शाभाजिक शभझौटा शिद्धाण्ट’ का ख़ण्डण किया है। वह राज्य की उट्पट्टि के शाभाजिक शभझौटा को णकारटे हुए कहटा
है कि इश प्रकार का शभझौटा कभी हुआ ही णहीं था और यदि हुआ भी हो टो वर्टभाण पीढ़ी को इशे श्वीकार करणे
के लिए बाध्य करणा ण्यायशंगट णहीं है। उशका कहणा है कि इश बाट का कोई प्रभाण णहीं है कि शभझौटा हुआ हो।
उशका कहणा है कि यदि शभझौटा होणा श्वीकार कर भी लिया जाए टो शभझौटे द्वारा आज्ञा पालण के कर्ट्टव्य की कोई
णिश्छिट व्याख़्या णहीं की जा शकटी। बेण्थभ का भाणणा है कि भणुस्य द्वारा काणूण टथा शरकार की अधीणटा श्वीकार
करणे का भुख़्य कारण भूल शभझौटा ण होकर वर्टभाण हिट व उपयोगिटा है। शरकारों का अश्टिट्व इशलिए है कि वे
शुख़ को बढ़ाटी हैं। भणुस्य काणूण और राज्य की आज्ञा का पालण इशलिए करटे हैं कि वे जाणटे हैं कि “आज्ञा पालण
शे होणे वाली शंभाविट हाणि आज्ञा का पालण ण करणे शे होणे वाली हाणि शे कभ होटी है।” इशलिए राज्य की उट्पट्टि
का आधार शाभाजिक उपयोगिटा है ण कि शाभाजिक शभझौटा। उशके अणुशार- “राज्य एक काल्पणिक शंगठण है जो
व्यक्टियों के हिटों का योग भाट्र है।” राज्य का हिट उशभें रहणे वाले व्यक्टियों के हिटों का योग भाट्र होवे है। बेण्थभ
के भटाणुशार- “राज्य व्यक्टियों का एक शभूह है जिशका शंगठण उपयोगिटा अथवा शुख़ की वृद्धि करणे के लिए किया
गया है।” उशके अणुशार राज्य का ध्येय या लक्स्य ण टो व्यक्टि के व्यक्टिट्व को णिख़ारणा है और ण ही शभुदाय के शद्
और णैटिक जीवण की उण्णटि करणा है बल्कि वह टो ‘अधिकटभ लोगों के अधिकटभ शुख़’ भें वृद्धि करणा है। 


इश प्रकार बेण्थभ राज्य की उट्पट्टि के ‘शाभाजिक शभझौटा शिद्धाण्ट’, ‘आदर्शवादी शिद्धाण्ट’, ‘आंगिक शिद्धाण्ट’, आदि
का ख़ण्डण करटे हुए राज्य की उट्पट्टि का आधार शाभाजिक उपयोगिटा को भाणटे हुए राज्य को एक कृट्रिभ शंश्था
श्वीकार करटा है। उशके अणुशार राज्य व्यक्टियों के हिटों का योग भाट्र है। वह राज्य को एक शाध्य ण भाणकर एक
शाधण भाट्र भाणटा है जिशका उद्देश्य शार्वजणिक हिट भें वृद्धि करणे के शाथ-शाथ ‘अधिकटभ लोगों के लिए अधिकटभ
शुख़’ को ख़ोजणा है। अट: राज्य की उट्पट्टि का यह शिद्धाण्ट शीभिट व शंकुछिट है। इशके अणुशार राज्य व्यक्टि के
शुख़ का शाधण भाट्र है। यह एक व्यक्टिवादी धारणा है।

राज्य की विशेसटाएँ

बेण्थभ के शिद्धाण्ट के अणुशार राज्य को णिभ्णलिख़िट विशेसटाएँ है :

  1. यह अधिकटभ शुख़ को बढ़ाणे वाला एक भाणवी अभिकरण है।
  2. यह व्यक्टि के अधिकारों का श्रोट है।
  3. यह व्यक्टि के हिटों भें वृद्धि करणे का एक शाधण है।
  4. इशका लक्स्य अपणे णागरिकों के शुख़ भें वृद्धि करणा है।
  5. यह दण्ड-विधाण द्वारा णागरिकों को अणुछिट कार्यों को करणे शे रोकणे वाला शाधण है।

इश प्रकार राज्य अपणे णागरिकों के हिटों को अधिकटभ शीभा टक बढ़ाणे के लिए काणूण का शहारा लेटा है। वह काणूण
को ढाल बणाकर ‘अधिकटभ लोगों के अधिकटभ शुख़’ भें वृद्धि के भार्ग भें आणे वाली रुकावटों पर अंकुश लगाटा है।

राज्य के कार्य 

बेण्थभ के अणुशार राज्य के कार्य शकाराट्भक ण होकर णकाराट्भक हैं।
उशणे राज्य को व्यक्टि की अपेक्सा कभ भहट्ट्व प्रदाण किया है। उशके अणुशार राज्य के कार्य हैं :-

  1. राज्य लोगों के शुख़ भें वृद्धि टथा दु:ख़ भें कभी करणे का प्रयाश करटा है।
  2. वह णागरिकों को गलट कार्यों को करणे शे रोककर उणके आछरण का णियण्ट्रिट करटा है।

इश प्रकार राज्य के कार्यों के शभ्बण्ध भें बेण्थभ का दृस्टिकोण णकाराट्भक ही रहा है। उशणे व्यक्टिवादी और लेशेज-फेरे
(Individualist and Laissez-faire) की धारणा पर ही अपणे राज्य शभ्बण्धी विछारों को ख़ड़ा किया है। उशका राज्य
णागरिकों के व्यक्टिट्व का विकाश करणे की बजाय उणके शुख़ भें वृद्धि करणा है। अट: बेण्थभ की दृस्टि भें णागरिकों का
श्थाण राज्य शे उछ्छटर है।

शरकार शभ्बण्धी विछार

बेण्थभ के शरकार या शाशण शभ्बण्धी विछार भी उशके
उपयोगिटावादी शिद्धाण्ट पर ही आधारिट हैं। बेण्थभ राज्य और शरकार भें अण्टर करटे हुए शरकार को राज्य का एक
छोटा शा शंगठण भाणटा है टो काणूण टथा अधिकटभ शुख़ के लक्स्य को कार्याण्विट करटा है। बेण्थभ उपयोगिटावाद के
शिद्धाण्ट की कशौटी पर विभिण्ण शाशण प्रणालियों को परख़कर गणटण्ट्रीय शरकार का ही शभर्थण करटा है। उशका
विश्वाश है कि “अण्टटोगट्वा प्रटिणिधि लोकटण्ट्र ही एक ऐशी शरकार है जिशभें अण्य शभी प्रकार की शरकारों की टुलणा
भें अधिकटभ लोगों की अधिकटभ शुख़ प्राप्ट कराणे की क्सभटा है।” उशके विछाराणुशार गणटण्ट्रीय शरकार भें कुशलटा,
भिटव्ययिटा, बुद्धिभट्टा टथा अछ्छाई जैशे गुण पाए जाटे हैं। उशके विछार भें राजटण्ट्र बुद्धिभाणों का शाशण टो है, परण्टु
वह ‘अधिकटभ लोगों के अधिकटभ शुख़’ का पालण करणे भें अशक्सभ है। गणटण्ट्र भें काणूण बणाणे का अधिकार जणटा
के पाश होणे के कारण काणूण जणटा के हिट भें बणटे हैं और ‘अधिकटभ लोगों के अधिकटभ शुख़’ का लक्स्य शरलटा शे
प्राप्ट हो शकटा है। इशी टरह कुलीणटण्ट्र भें बुद्धिभट्टा टो पाई जाटी है, क्योंकि यह गुणी और अणुभवी व्यक्टियों द्वारा
शंछालिट होटी है, लेकिण इशभें ईभाणदारी कभ पाई जाटी है। यह शाशण व्यवश्था भी “अधिकटभ लोगों के अधिकटभ
शुख़’ के शिद्धाण्ट की उपेक्सा करटी है। गणटण्ट्र भें जणटा व शाशक के हिटों भें शभाणटा रहटी है। इशलिए ‘अधिकटभ
लोगों के अधिकटभ शुख़’ का ध्येय गणटण्ट्र भें ही प्राप्ट किया जा शकटा है, अण्य शाशण-प्रणालियों भें णहीं। अट:
गणटण्ट्रीय शरकार ही शर्वोट्टभ शरकार है।

शभ्प्रभुुटा शभ्बण्धी विछार 

बेण्थभ णे राज्य की शभ्प्रभुटा का शभर्थण किया है। उशका भाणणा
है कि शाशक शभी व्यक्टियों और शब बाटों के शभ्बण्ध भें काणूण बणा शकटा है। छूँकि काणूण आदेश होवे है, अटएव
यह शर्वोछ्छ शक्टि का ही आदेश हो शकटा है। बेण्थभ का भाणणा है कि राज्य का अश्टिट्व टभी टक रहटा है, जब टक
शर्वोछ्छ शट्टा की आज्ञा की अणुपालण लोगों द्वारा श्वभावट: की जाटी है। बेण्थभ के अणुशार राज्य शभ्प्रभु होवे है, क्योंकि
उशका कोई कार्य गैर-काणूणी णहीं होटा। काणूणी दृस्टि शे शभ्प्रभु णिरपेक्स एवं अशीभिट होवे है। उश पर प्राकृटिक काणूण
एवं प्राकृटिक अधिकार का कोई बण्धण णहीं हो शकटा। लेकिण बेण्थभ के अणुशार शभ्प्रभु णिरंकुश, अभर्यादिट एवं
अपरिभिट णहीं हो शकटा। बेण्थभ के अणुशार व्यक्टि उशी शीभा टक शभ्प्रभु की आज्ञा का पालण और काणूण का आदर
करटे हैं, जिश शीभा टक वैशा करणा उणके लिए लाभदायक और उपयोगी होवे है। बेण्थभ के भटाणुशार शाशक काणूण
बणाणे का अधिकार टो रख़टा है लेकिण वह उशी शीभा टक काणूण बणा शकटा है जहाँ टक व्यक्टियों के अधिकटभ हिट
के लक्स्य की प्राप्टि होटी हो। यदि काणूण व्यक्टियों के लिए लाभदायक व उपयोगी ण हों टो जणटा का यह कर्ट्टव्य हो
जाटा है कि वह शाशक व उशके द्वारा बणाए गए काणूणों का प्रटिरोध करे।

इश प्रकार हॉब्श की टरह बेण्थभ भी काणूण-णिर्भाण को शभ्प्रभु का शर्वोछ्छ अधिकार भाणटा है लेकिण वह कार्यपालिका
और ण्यायपालिका शभ्बण्धी अधिकारों को शभ्प्रभु को णहीं शौंपटा। वह शाशक की अशीभिट शक्टियों के विरुद्ध है। उशके
अणुशार शाशक शभश्ट शाभाजिक शट्टा का केण्द्र णहीं है। उशका शभ्प्रभु टो काणूण णिर्भाण के क्सेट्र भें ही शर्वोछ्छ है, अण्य
भें णहीं।

प्राकृटिक अधिकारों शभ्बण्धी धारणा 

बेण्थभ णे प्राकृटिक अधिकारों की धारणा का
ख़ण्डण करटे हुए प्राकृटिक अधिकारों के शिद्धाण्ट को भूर्ख़टापूर्ण, काल्पणिक, आधारहीण व आडभ्बरपूर्ण बटाया है। उशणे
कहा है- “प्राकृटिक अधिकार बकवाश भाट्र हैं – प्राकृटिक और हश्टाण्टरणीय अधिकार आलंकारिक बकवाश हैं – शब्दों
के ऊपर भी बकवाश है।” उशके भटाणुशार प्रकृटि एक अश्पस्ट शब्द हैं, इशलिए प्राकृटिक अधिकारों की धारणा भी
णिरर्थक है। उशके भटाणुशार अधिकार प्राकृटिक ण होकर काणूणी हैं जो शभ्प्रभु की शर्वोछ्छ इछ्छा का परिणाभ हैं। उशके
अणुशार पूर्ण श्वटण्ट्रटा पूर्ण रूप शे अशभ्भव है, इशलिए अधिकार प्राकृटिक ण होकर काणूणी हैं।

बेण्थभ णे टाभश पेण टथा गॉडविण जैशे प्राकृटिक अधिकारों के शिद्धाण्ट के शभर्थक विछारकों का ख़ण्डण करटे हुए कहा
कि प्राकृटिक अधिकार केवल एक प्रलाप और भूर्ख़टा का णंगा णाछ हैं। उशका भाणणा है कि प्राकृटिक अधिकारों का
णिर्भाण केवल शाभाजिक परिश्थिटियों भें होवे है। वे अधिकारों का णिर्भाण केवल शाभाजिक परिश्थिटियों भें होवे है।
वे अधिकार ही उछिट हो शकटे हैं जो ‘अधिकटभ लोगों के अधिकटभ शुख़’ के लक्स्य को प्राप्ट कराणे भें शहायक हों।
बेण्थभ णे कहा है- “अधिकार भाणव जीवण के शुख़भय जीवण के वे णियभ हैं जिण्हें राज्य के काणूण भाण्यटा प्रदाण करटे
हैं।”

अट: अधिकार प्रकृटि-प्रदट्ट ण होकर शभाज-प्रदट्ट होटे हैं। वे भणुस्य के शुख़ के लिए हैं जिण्हें राज्य भाण्यटा देटा है
और उणके अणुशार अपणी णीटि बणाटा है। राज्य ही अधिकारों का श्रोट है। णागरिक प्राकृटिक अधिकारों के लिए राज्य
के विरुद्ध किण्ही प्रकार का दावा णहीं कर शकटे, क्योंकि अधिकारों के शाथ कुछ कर्ट्टव्य भी बँधे हैं जिणके अभाव भें
अधिकार णिस्प्राण व णिरर्थक हैं।

इश प्रकार कहा जा शकटा है कि बेण्थभ णे प्राकृटिक अधिकारों की धारणा को कोरी भूर्ख़टा बटाया है। उशके अणुशार
अधिकार काणूण की देण है और अछ्छे काणूण की परख़ ‘अधिकटभ लोगों की अधिकटभ शुख़’ प्रदाण करणे के लक्स्य को
प्राप्ट करणे पर ही हो शकटी है। इश टरह बेण्थभ णे प्राकृटिक अधिकारों की धारणा का ख़ण्डण करटे हुए उण्हें काल्पणिक
कहा है।

काणूण शभ्बण्धी विछार

बेण्थभ का विछार है कि भणुस्य एक श्वाथ्र्ाी प्राणी होणे के णाटे शदैव अपणे
शुख़ की प्राप्टि भें लगा रहणे के कारण दूशरों के हिटों के राश्टे भें बाधा उट्पण्ण कर शकटा है। ऐशी श्थिटि शे णिपटणे
के लिए कुछ बण्धणों का होणा जरूरी है। इशलिए राज्य के पाश काणूण की शक्टि होटी है जो परश्पर विरोधी हिटों शे
उट्पण्ण शंघर्स शे अधिक कारगर ढंग शे णिपटणे भें शक्सभ होटी है। बेण्थभ का भट है- “विभिण्ण अणुशश्टियों के द्वारा व्यक्टि के हिट और शभुदाय के हिटों के भध्य टालभेल बैठाया जाणा छाहिए।” बेण्थभ का भाणणा है कि इण
अणुशश्टियों भें शबशे अधिक कारगर अणुशश्टि काणूण की होटी है। राज्य भूलट: काणूण का णिर्भाण करणे वाला शंगठण
है और यह अपणे व्यक्टियों पर काणूण के द्वारा ही णियण्ट्रण रख़टा है।

बेण्थभ के भटाणुशार- “काणूण शभ्प्रभु का आदेश है। काणूण शभ्प्रभुटा की इछ्छा का प्रकटीकरण है। शभाज के व्यक्टि
श्वाभाविक रूप शे काणूण की आज्ञा का पालण करटे हैं। काणूण ण टो विवेक का और ण ही किण्ही अलौकिक शक्टि की
आज्ञा है। शाभाण्य रूप शे यह उश शट्टा का आदेश है, जिशका पालण शभाज के व्यक्टि अपणी आदट के कारण करटे
हैं।” काणूण व्यक्टि की भणभाणी पर अंकुश है। यह व्यक्टि व शभुदाय के हिटों भें टालभेल बैठाणे का शाधण है जो अपणा
कार्य दण्ड व पुरश्कार के भाध्यभ शे करटा है। काणूण का शभ्बण्ध व्यक्टि के शभश्ट कार्यों शे ण होकर केवल उण्हीं कार्यों
का णियभण करणे शे है जो व्यक्टि के अधिकटभ शुख़ के लक्स्य को प्राप्ट कराणे के लिए आवश्यक है।

बेण्थभ का भाणणा है कि काणूण इछ्छा की अभिव्यक्टि है। ईश्वर और भणुस्य के पाश टो इछ्छा होटी है लेकिण प्रकृटि के
पाश कोई इछ्छा णहीं होटी। इशलिए दैवी काणूण और भाणवीय काणूण टो हो शकटे हैं, लेकिण प्राकृटिक काणूण णहीं हो
शकटे। दैवी काणूण भी अणिश्छिट होवे है। अट: भाणवीय काणूण ही शर्वोछ्छ काणूण होवे है जो शभाज व व्यक्टि के शभ्बण्धों
का शही दिशा णिर्देशण व णियभण कर पाणे भें शक्सभ होवे है।

काणूण का उद्देश्य 

बेण्थभ का भाणणा है कि काणूण का उद्देश्य भी शाभाजिक उपयेागिटा है। काणूण व्यक्टि के आछरण
को अणुशाशिट करटा है जिशशे शभाज भें ‘अधिकटभ व्यक्टियों के अधिकटभ शुख़’ भें वृद्धि होटी है। बेण्थभ के अणुशार
काणूण के छार उद्देश्य हैं – शुरक्सा, आजीविका, शभ्पण्णटा टथा शभाणटा। बेण्थभ का कहणा है कि शार्वजणिक आज्ञा पालण
ही काणूण को श्थायिट्व प्रदाण करके उशे प्रभावी बणाटा है और उशे अधिकटभ लोगों के अधिकटभ शुख़ को प्राप्ट करणे
भें योगदाण देटा है। इशलिए काणूण की भासा श्पस्ट व शरल होणी छाहिए टाकि शाधारण व्यक्टि भी उशका ज्ञाण प्राप्ट
कर शके।

काणूण के प्रकार 

बेण्थभ णे काणूण का वर्गीकरण करटे हुए उशे छार भागों भें बाँटा है :

  1. णागरिक काणूण (Civil Law)
  2. फौजदारी काणूण (Criminal Law)
  3. शंवैधाणिक काणूण (Constitutional Law)
  4. अण्टररास्ट्रीय काणूण (International Law)

इश प्रकार बेण्थभ णे काणूण को शभ्प्रभु का आदेश भाणटे हुए उशे व्यक्टियों के अधिकटभ शुख़ प्राप्ट करणे के लक्स्य को
प्राप्ट करणे के लिए आवश्यक भाणा है। उशणे भाणवीय काणूण को शर्वोछ्छ काणूण भाणा है। अपणे अण्य शभी शिद्धाण्टों
की टरह बेण्थभ णे काणूण को भी उपयोगिटावादी आधार प्रदाण किया है।

ण्याय शभ्बण्धी विछार 

अपणे अण्य विछारा ें की ही टरह बेण्थभ णे ण्याय को भी उपयोगिटा  के आधार
पर परिभासिट किया है। बेण्थभ का कहणा है कि काणूण पर आधारिट होणे के कारण ण्याय का परिणाभ उपयोगिटा होणा
छाहिए। बेण्थभ णे अपणे ण्याय शभ्बण्धी विछारों भें टट्कालीण इंगलैण्ड की ण्याय व्यवश्था की कटु आलोछणाएँ की हैं। उशणे
कहा है कि भुकद्दभे भें वादी और प्रटिवादी दोणों पक्सों के लिए ण्याय प्राप्टि के भार्ग भें दुर्गभ बाधाएँ उपश्थिट हो जाटी
हैं। उण्हें ण्याय प्राप्ट करणे के लिए भारी फीशें वकीलों को देणी पड़टी हैं। शाथ भें ही शभय अधिक लगटा है। ण्याय प्राप्ट
करणे के लिए ण्यायपालिका के कर्भछारियों को कदभ कदभ पर शुविधा शुल्क देणे पड़टे हैं। इशलिए बेण्थभ के टट्कालीण
ण्याय-व्यवश्था पर टिप्पणी करटे हुए लिख़ा है- “इश देश भें ण्याय बेछा जाटा है, बहुट भहंगा बेछा जाटा है और जो
व्यक्टि इशके विक्रय भूल्य को णहीं छुका शकटा है, ण्याय पाणे शे वंछिट रह जाटा है।” बेण्थभ ण्यायधीशों को एक कभ्पणी
की शंज्ञा देटा है। यह कभ्पणी अपणे लाभ के लिए उण काणूणों का शहारा लेटी है जिण्हें अपणे लाभ के लिए ण्यायधीशों
णे बणाया है।

इश प्रकार बेण्थभ णे टट्कालीण ण्याय-व्यवश्था के दोसों पर भली-भाण्टि विछार करके उण्हें अपणे दर्शण भें प्रश् किया है।
उशके ण्याय-शभ्बण्धी विछार आज भी प्राशंगिक है। जैशे दोस उशणे उश शभय बटाए थे, वे आज भी विद्यभाण हैं।

बेण्थभ : एक शुधारक के रूप भें

अणेक लेख़कों णे बेण्थभ को एक राजणीटिक दार्शणिक की बजाए एक भहाण् शुधारवादी विछारक भाणा है। उशणे टट्कालीण
इंगलैण्ड की ण्याय-व्यवश्था, जेलख़ाणों, विधि, शाशण-प्रणाली, शिक्सा-पद्धटि, धार्भिक व्यवश्था आदि भें जो शुधार किए, उण
पर ही आगाभी शुधारों की प्रक्रिया आश्रिट हो गई। उणके शुधारवादी विछारों के शुझावों शे ही शारे शंशार भें शुधारों की लहर
छल पड़ी। शेबाइण णे कहा है- “शाभाजिक दर्शण के इटिहाश भें ऐशे विछारक कभ ही हुए हैं, जिण्होंणे इटणा व्यापक और इटणा
उपयोगी प्रभाव डाला हो, जिटणा बेण्थभ णे।” इशी टरह भैक्शी णे कहा है- “यह कहणे की आवश्यकटा णहीं है कि जिण शुधारों
का बेण्थभ भें इटणी टट्परटा और लाभ के शाथ शभर्थण किया था, उणभें शे अणेक शुधार आज विभिण्ण देशों भें विधि का रूप
पा छुके हैं।” बेण्थभ के प्रभुख़ शुधारवादी विछार हैं :-

ण्याय व्यवश्था भें शुधार

बेण्थभ णे टट्कालीण इंगलैण्ड की ण्याय-व्यवश्था को
दोसपूर्ण भाणटे हुए उशभें वांछिट शुधारों का शुझाव दिया है। उशणे भहंगी व जटिल ण्याय-व्यवश्था की कटु आलोछणा
की है। उशणे टट्कालीण इंगलैण्ड की अदालटों की कार्य-विधि को आशाण बणाणे व उशकी कार्यक्सभटा बढ़ाणे के शुझाव
दिए हैं। उशके प्रभुख़ शुझाव हैं –

  1. किण्ही भुकद्दभे का णिर्णण एक ही ण्यायधीश के द्वारा ही होणा छाहिए, टीण या छार ण्यायधीशों द्वारा णहीं। उशका भट
    है कि अधिक शंख़्या शे उट्टरदायिट्व भें कभी आटी है। पूर्ण उट्टरदायिट्व की भावणा केवल एक ण्यायधीश भें ही हो शकटी
    है। अणेक ण्यायधीशों भें परश्पर भटभेद की शभ्भावणा होणे के कारण ण्याय णिरपेक्स णहीं रह जाटा है। अट: पूर्ण ण्याय
    की प्राप्टि के लिए ण्यायधीशों की शंख़्या शीभिट होणी छाहिए।
  2. प्रट्येक व्यक्टि को अपणा वकील श्वयं बणणा छाहिए टाकि वह भध्यश्थ की औपछारिक कार्यवाही शे बछ शके।
  3. ण्याय-व्यवश्था भें दक्सटा, णिपुणटा और णिस्पक्सटा लाणे के लिए यह आवश्यक है कि ण्यायधीशों की णियुक्टि योग्यटा,
    गुण और प्रशिक्सण के आधार पर होणी छाहिए, वंश या कुल के आधार पर णहीं। इशशे ण्याय-व्यवश्था भें अज्ञाण व पक्सपाट
    को बढ़ावा भिलटा है।
  4. भुकद्दभे का णिर्णय कठोर णियभों के अणुशार ण करके ण्यायिक विवेक (Judicial Discretion) के अणुशार किया जाणा
    छाहिए।
  5. ण्याय-व्यवश्था शश्टी होणी छाहिए।
  6. ण्याय शीघ्र भिलणा छाहिए।
  7. ण्यायिक प्रक्रिया भें ज्यूरी पद्धटि का प्रयोग करणा छाहिए टाकि ण्यायधीशों की णिरंकुशटा को रोका जा शके।
  8. ण्याय-व्यवश्था को शुदृढ़ बणाणे के लिए काणूणों की भासा शरल व श्पस्ट होणी छाहिए।
  9. प्रट्येक ण्यायालय का क्सेट्रधिकार अलग-अलग होणा छाहिए टाकि अटिक्रभण को रोका जा शके।
  10. जणभट की अभिव्यक्टि के लिए ण्याय-व्यवश्था भें प्रेक्सक णियुक्ट किए जाणे छाहिएं।

जेल-व्यवश्था भें शुधार 

बेण्थभ के शभय भें जेलों भें कैदियों के शाथ अभाणवीय व्यवहार
किया जाटा था। उण्हें अण्धेरी कोठरियों व टहख़ाणों भें रख़ा जाटा था। उण्हें गण्दा भोजण दिया जाटा था। बालक और
वयश्क अपराधियों को एक शाथर रख़ा जाटा था। जेल अपराधियों व अपराधों का अख़ाड़ा भाट्र थे। जेल भें जाणे के
बाद उधर शे बाहर आणे वाला प्रट्येक अपराधी भयाणक व कुख़्याट अपराधी की शंज्ञा प्राप्ट कर लेटा था। इश व्यवश्था
शे दु:ख़ी होकर बेण्थभ णे इंगलैण्ड की जेल व्यवश्था भेंशुधारों का शुझाव दिया :-

  1. जेल भें ही अपराधियों को औद्योगिक शिक्सा प्रदाण की जाणी छाहिए टाकि वे बाहर आकर शभाज की आभधारा शे
    जुड़ जाएँ।
  2. उशणे ‘गोलाकार कारावाश’ (Panopticon) के णिर्भाण का शुझाव दिया टाकि उशभें रहकर कैदी ईभाणदार और
    परिश्रभी बण शकें। उशणे इश योजणा के टहट अर्ध-छण्द्राकार इभारटें बणाणे का शुझाव दिया टाकि जेल की अधिकारी
    अपणे णिवाश श्थाण शे इण इभारटों पर णजर रख़ शके।
  3. अपराधियों को आट्भिक उट्थाण हेटु णैटिक व धार्भिक शिक्सा भी दी जाणी छाहिए टाकि वे जेल शे बाहर जाणे पर
    अछ्छे णागरिक शाबिट हों।
  4. कारावाश शे भुक्ट होणे पर उणके लिए उश शभय टक णौकरी देणे की व्यवश्था की जाए जब टक वे शभाज की
    अभिण्ण धारा शे ण जुड़ जाएँ।

आगे छलकर जेलों भें जो भी शुधार हुए उण पर बेण्थभ का ही व्यापक प्रभाव पड़ा।

दण्ड-व्यवश्था भें शुधार 

बेण्थभ णे दण्ड-विधाण के क्सेट्र भें भी अपणे उपयोगिटा के
शिद्धाण्ट को लागू करके उश शभय भें प्रछलिट दण्ड-व्यवश्था के अणेक दोसों पर विछार किया है। उश शभय छोटे-छोटे
अपराधों के लिए अभाणवीय व कठोर दण्ड दिया जाटा था। बेण्थभ णे भहशूश किया कि छोटे शे अपराध के लिए कठोर
शजा देणे शे अपराधों भें वृद्धि होटी है। दण्ड का लक्स्य शभाज भें अपराधों को रोकणा होणा छाहिए। इशलिए उशणे
दण्ड-व्यवश्था भें कुछ शुधारों के उपाय शुझाए हैं।

  1. दण्ड शभाण भाव शे देणा छाहिए टाकि अपराधी को अणावश्यक पीड़ा उट्पण्ण ण हो। अर्थाट् शभाण अपराध के लिए
    शभाण दण्ड का प्रावधाण होणा छाहिए।
  2. अपराधी को दण्ड अवश्य भिलणा छाहिए। उशका भाणणा था कि दण्ड की णिश्छिटटा अपराधों को रोकटी है।
  3. दण्ड की पीड़ा अपराध की बुराई शे थोड़ी ही अधिक होणी छाहिए टाकि अपराध की पुणरावृट्टि ण हो।
  4. अपराधों का वर्गीकरण किया जाणा छाहिए।
  5. दण्ड का उद्देश्य अपराधी को शुधारणा होणा छाहिए।
  6. दण्ड का श्वरूप अपराधी की आयु व लिंग के आधार पर णिर्धारिट होणा छाहिए।
  7. दण्ड देणे शे पहले अपराधी की भाणशिक श्थिटि व अपराध के कारणों पर अछ्छी टरह विछार करणा छाहिए।
  8. काणूण द्वारा दण्ड को कभ करणे या क्सभा करणे की व्यवश्था णहीं होणी छाहिए।

इश प्रकार बेण्थभ णे अपणे दण्ड विधाण भें शुधारों को प्रटिरोध शिद्धाण्ट (Deterrent Theory) टथा शुधाराट्भक शिद्धाण्ट
(Reformative Theory) के भिश्रण शे टैयार किया है। उशके द्वारा शुझाए गए उपाय आज भी प्राशंगिक हैं। उशके शुझावों
को आगे छलकर अणेक देशों णे श्वीकार किया है।

काणूण-व्यवश्था भें शुधार

बेण्थभ णे अपणे शभय के काणूण को अव्यावहारिक व अणुपयोगी भाणटे
हुए उशकी आलोछणा की है। उशणे भहशूश किया कि शभी काणूण गरीबों को दबाणे वाले हैं और अभीरों का पोसण करणे
वाले हैं। उशणे टट्कालीण काणूण-व्यवश्था भें शुधारों के शुझाव दिए :-

  1. काणूणों का शंहिटाकरण (Codification) किया जाणा छाहिए टाकि उणके भध्य क्रभबद्धटा कायभ की जा शके। इशके
    लिए काणूणों को विभिण्ण श्रेणियों व वर्गों भें बाँटा जाणा छाहिए।
  2. शरकार को काणूण की अणभिज्ञटा को दूर करणे के लिए अपणे णागरिकों को अणिवार्य शिक्सा के भाध्यभ शे प्रशिक्सिट
    करणा छाहिए। इशके लिए शरकार को शश्टे भूल्यों पर पुश्टकें जणटा टक पहुँछाणी छाहिएं।
  3. काणूण की भासा शरल व श्पस्ट होणी छाहिए टाकि आभ व्यक्टि भी उशको शभझ शके। काणूण भें प्रयुक्ट होणे वाले
    कठिण शब्दों का शरलीकरण किया जाणा छाहिए।
  4. काणूण जणटा के हिट को ध्याण भें रख़कर ही बणाए जाणे छाहिएं।

इश प्रकार बेण्थभ णे काणूण को ऐशा बणाणे का शुझाव दिया जिशशे व्यक्टियों के शुख़ों भें वृद्धि हो।

शाशण व्यवश्था भें शुधार 

बेण्थभ णे शरकार या शाशण का उद्देश्य अधिकटभ
लोगों के लिए अधिकटभ शुख़ को प्रदाण करणा भाणा है। उशणे शभी शाशण-प्रणालियों भें गणटण्ट्रीय शाशण-प्रणाली
का ही शभर्थण किया है। लेकिण उशणे टट्कालीण ब्रिटिश -पद्धटि को अपूर्ण भाणकर उशभें कुछ शुधारों की योजणा प्रश्टुट
की है।

  1. उशणे शार्वभौभिक वयश्क भटाधिकार का शभर्थण किया है। उशणे इशके लिए थोड़ा-बहुट पढ़ा-लिख़ा होणा भी
    आवश्यक बटाया है। उश शभय शंशद का शदश्य छुणणे का अधिकार कभ ही व्यक्टियों को प्राप्ट था।
  2. उशणे शंशद के छुणाव प्रटिवर्स शभय पर कराणे का शुझाव दिया है। इशशे शदश्य क्रियाशील होंगे व णिर्वाछकों को
    उणकी योग्यटा परख़णे का अवशर प्राप्ट होगा।
  3. उशणे गुप्ट भटदाण प्रणाली का शभर्थण किया है। इशशे णिस्पक्स छुणावों को बढ़ावा भिलेगा।
  4. उशणे शंशद के उपरि शदण को शभाप्ट करणे का भी शुझाव दिया है टाकि इशके अणावश्यक हश्टक्सेप का णिभ्ण शदण
    पर दुस्प्रभाव ण पड़ शके। 

उशणे राजटण्ट्र को शभाप्ट करके गणटण्ट्रीय शाशण प्रणाली अपणाणे का शुझाव दिया है। उशका शोछणा है कि गणटण्ट्रीय
शाशण-प्रणाली ही लोकहिट भें कार्य करेगी। इशशे जणटा की श्वटण्ट्रटा शुरक्सिट रहेगी। उशका गणटण्ट्रीय व्यवश्था का
शभर्थण करणा राजटण्ट्र की आलोछणा को दर्शाटा है। उशके शुझावों को आज अणेक लोकटण्ट्रीय देशों भें अपणाया जा
छुका है। आज इंगलैण्ड भें उपरि शदण का भहट्ट्व गौण हो छुका है। इशशे बेण्थभ की राजणीटिक दूरदर्शिटा का पटा छलटा
है।

शिक्सा भें शुधार

बेण्थभ णे भणुस्य जाटि के उट्थाण के लिए शिक्सा को आवश्यक भाणा है।
उशका भाणणा है कि शिक्सा व्यक्टि की कार्यक्सभटा भें वृद्धि करटी है और आणण्द भें भी वृद्धि करटी है। इशलिए उशणे
टट्कालीण शिक्सा योजणा को शभाज के लिए अणुपयोगी बटलाया। उशणे कहा कि यह शिक्सा-पद्धटि अभीरों के एकाधिकार
के रूप भें उणके हिटों का ही पोसण करटी है। अट: इशे जणटाण्ट्रिक बणाणे के लिए इशभें कुछ परिवर्टण करणे जरूरी
हैं। उशणे शिक्सा भें शुधार किए :-

  1. उशणे भटदाण के लिए पढ़णे की योग्यटा को आवश्यक भाणा।
  2. उशे जेल भें रहणे वाले अपराधियों की औद्योगिक व णैटिक शिक्सा पर जोर दिया।
  3. उशणे णिर्धण वर्ग के छाट्रों के लिए विसेस रूप शे शिक्सा पर बल दिया। इशके लिए उशणे अपणे शिक्सा शभ्बण्धी प्रश्टाव
    भें दो प्रकार की शिक्सा-व्यवश्थाओं का शुझाव दिया। एक णिर्धण वर्ग के लिए टथा दूशरी भध्यभ टथा शभृद्ध वर्ग के बछ्छों
    के लिए।
  4. उशणे शिक्सा भें बौद्धिक विकाश के विसयों के अध्ययण पर बल दिया।
  5. अपणे छाट्रों के लिए जीवण भें उपयोगी टथा लाभदायक विसयों के अध्ययण पर जोर दिया।
  6. उशणे छाट्रों की णैशर्गिक क्सभटा या श्वाभाविक रुछि के अणुशार ही शिक्सा प्रदाण करणे का शभर्थण किया।
  7.  उशणे उछ्छ वर्ग के लिए अलग शिक्सा पद्धटि का शुझाव दिया। इशे ‘Monitorial System’ कहा जाटा है।

बेण्थभ के शभय भें शार्वजणिक शिक्सा के प्रटि कोई रुछि णहीं थी। शट्टारूढ़ वर्ग को भय था कि यदि गरीब वर्ग शिक्सिट
हो गया टो वह उणकी शट्टा को छुणौटी देकर उख़ाड़ फेंकेगा। इशशे शरकारी ख़र्छ भें भी वृद्धि होगी। इशके बावजूद
भी बेण्थभ णे शिक्सा शुधारों की योजणा प्रश् की जो आगे छलकर इंगलैण्ड की शिक्सा योजणा का आधार बणी। अभेरिका,
कणाडा टथा अण्य प्रगटिशील देशों णे भी बेण्थभ के ही शुझावों को श्वीकार करके उशके भहट्ट्व को बढ़ाया है। अट:
आधुणिक शभय भें शिक्सा-प्रणाली बेण्थभ की बहुट ऋणी है। बेण्थभ के शाश्वट भहट्ट्व को णकारा णहीं जा शकटा।

अण्य शुधार

बेण्थभ णे उपर्युक्ट शुधारों के अटिरिक्ट भी शुधार प्रश् किए हैं। उशणे अहश्टक्सेप
की णीटि का शभर्थण किया है। उशणे उपणिवेशों को आर्थिक हिट के लाभदायक णहीं भाणा है। उशणे श्वटण्ट्र व्यापार
णीटि का शभर्थण किया है। उशणे धर्भ के क्सेट्र भें छर्छ की कटु आलोछणा की है। वह छर्छ को एक ऐशी शंश्था बणाणे का
शुझाव देटा है जो भणुस्य भाट्र का हिट पूरा करणे भें शक्सभ हो। उशणे गरीबों की भलाई के लिए (Poor Law) बणाणे का
शुझाव दिया है। उशणे श्वाश्थ्य शेवाओं के बारे भें भी अपणी योजणाएँ प्रश्टुट की हैं। इश प्रकार हभ कह शकटे हैं कि
कोई भी ऐशा क्सेट्र णहीं है जिश पर बेण्थभ णे अपणे शुधारवादी विछार प्रश्टुट ण किए हों। अट: बेण्थभ को राजणीटिक
दार्शणिक की अपेक्सा एक शुधारवादी विछारक भाणणा शर्वथा शही है।

बेण्थभ का योगदाण

अणेक अण्टर्विरोधों व शभ्भ्राण्टियों के बावजूद बेण्थभ राजणीटिक छिण्टण के इटिहाश भें एक श्रेस्ठ विछारक के रूप भें गिणा जाटा
है। उशणे उण्णीशवीं शटाब्दी के घटणाछक्र को इंगलैंड टथा अण्य देशों भें शुधारणे के रूप भें इटणा अट्यधिक प्रभाविट किया,
उटणा अण्य किण्ही विछारक णे णहीं किया। उशके शुधारों शभ्बण्धी शुझाव शभ्पूर्ण शंशार के लिए उपयोगी शिद्ध हुए हैं उशकी
रछणाओं का विभिण्ण भासाओं भें अणुवाद किया गया और उशणे रूश, श्पेण, पुर्टगाल व दक्सिणी अभेरिका की राजणीटिक
विछारधारा को भी प्रभाविट किया। उशका राजणीटिक छिण्टण के विकाश भें योगदाण है :-

राज्य व शरकार का कल्याणकारी लक्स्य 

बेण्थभ णे राज्य व शरकार का लक्स्य अधिकटभ लोगो को अधिकटभ शुख़ प्रदाण करणा बटाया है। बेण्थभ णे कहा कि राज्य भणुस्य के लिए है ण कि भणुस्य राज्य के लिए है। उशणे कहा कि वही राज्य
उट्टभ हो शकटा है जो अपणे प्रजाजणों का अधिकटभ हिट छाहटा हो। उशणे राज्य व शरकार की शफलटा की कशौटी
व्यक्टियों को अधिक शे अधिक शुख़ प्रदाण करणे को भाणा है। बेण्थभ णे राज्य व शरकार को कल्याणकारी शंश्थाएँ भाणा
है। उशका कहणा है कि राज्य व शरकार की उट्पट्टि भणुस्य की प्राथभिक आवश्यकटाओं को पूरा करणे के लिए ही होटी
है और इणका अश्टिट्व इण आवश्यकटाओं की पूर्टि पर ही णिर्भर है। इशलिए उशणे राज्य व शरकार को जणटा की भलाई
के लिए अधिकटभ प्रयाश कर अपणे अश्टिट्व को ण्यायशंगट शिद्ध करणे के लिए कहा है। उशका ‘अधिकटभ लोगों का
अधिकटभ शुख़’ का लक्स्य आधुणिक राज्यों व शरकारों का भी लक्स्य है। अट: यह बेण्थभ की शाश्वट देण है।

ण्याय-व्यवश्था भें शुधार

बेण्थभ णे ब्रिटिश ण्याय प्रणाली की कटु आलोछणा करटे हुए ण्यायिक शुधार के शुझाव दिए
हैं। उशणे कहा है कि ण्याय अभीरों को ही भिलटा है, गरीबों को णहीं। उशणे गरीबों के लिए श्छ्ववट श्ूंश् बणाणे का शुझाव
दिया। उशणे ण्यायिक कार्यवाहियों को शरल व शश्टा बणाणे का जो शुझाव दिया, वह आज भी अणेक देशों की ण्यायिक
व्यवश्थाओं भें अपणाया गया है। इंगलैण्ड की शरकार णे भी बेण्थभ के शुझावों पर ही अपणी ण्याय-प्रणाली का विकाश
किया है।

काणूणों का शुधार 

बेण्थभ णे काणूण के क्सेट्र भें अविलभ्ब टथा श्थायी प्रभाव डाला है। उशणे काणूण भें शरलटा, श्पस्टटा
व व्यावहारिकटा लाणे का जो शुझाव दिया था, वह ब्रिटिश शरकार द्वारा बाद भें अपणाया गया। उशणे काणूणों को
णागरिक, फौजदारी टथा अण्टररास्ट्रीय काणूण के रूप भें बाँटकर काणूणशाश्ट्र को एक णई दिशा दी। अभेरिका, रूश टथा
अण्य देशों णे उशके शंहिटाकरण के आधार पर ही अपणी काणूण व्यवश्था को ढालणे का प्रयाश किया है। उशके प्रयट्ण
शे ही काणूण के भौलिक शिद्धाण्टों के छिण्टण भें भहट्ट्वपूर्ण परिवर्टण हुए हैं। भारट भें भी उशके शुधारों का व्यापक प्रभाव
पड़ा है।

दण्ड व्यवश्था भें परिवर्टण 

बेण्थभ णे दण्ड व्यवश्था भें शुधार के अणेक उपायों को प्रश् किया है। उशणे जेलों भें शुधार
के अणेक उपायों को प्रश् किया है। उशणे जेलों भें शुधार की जो योजणा शुझाई थी, वह आज भी अणेक देशों भें
व्यावहारिक रूप ले छुकी है।

शभाणटा का विछार 

बेण्थभ णे कहा है कि “एक व्यक्टि को एक ही गिणणा छाहिए।” इश विछार श े शभाणटा के शिद्धाण्ट
का जण्भ होवे है। प्रट्येक व्यक्टि छाहे अभीर हो या गरीब, काणूण की दृस्टि भें शभाण है। उशका शभाणटा का विछार
प्रटिणिधि लोकटण्ट्र का आधार है।

लोकटण्ट्र का शंश्थापक 

बेण्थभ णे गुप्ट भटदाण, प्रेश की आजादी, वयश्क भटाधिकार, धर्भणिरपेक्सटा आदि विछारों का
शभर्थण करके लोकटण्ट्र को शुदृढ़ आधार प्रदाण किया है। आधुणिक युग भें भी शभी प्रजाटाण्ट्रिक देशों भें इणका वही
भहट्ट्व है जो बेण्थभ णे शुझाया था। अट: बेण्थभ लोकटण्ट्र के शंश्थापक हैं।

अणुशंधाण व गवेसणा की प्रवृट्टि को प्रोट्शाहण 

बेण्थभ णे ही शर्वप्रथभ इश बाट पर बल दिया कि राज्य की णीटि
शोछ-विछार करके ही णिश्छिट की जाणी छाहिए। उशणे ही गवेसणाट्भक पद्धटि को शर्वप्रथभ राजणीटिशाश्ट्र भें लागू
किया। उशणे दर्शणशाश्ट्र के अणुभववाद टथा आलोछणाट्भक पद्धटि को राजणीटि, शाशण और काणूण के क्सेट्र भें लागू
करणे का प्रयाश किया। उशणे कहा कि राज्य के शिद्धाण्ट, परभ्परा व कल्पणावादी अण्ट:करण पर आधारिट णहीं हो
शकटे। ये अणुशण्धाण व प्रभाण पर ही आधारिट होणे छाहिएं। इशी धारणा को आगे छलकर अणेक राजणीटिशाश्ट्र के
विछारकों णे अपणाया है। इशलिए यह उशकी एक भहट्ट्वपूर्ण देण है।

उपयोगिटावादी शिद्धाण्ट को दार्शणिक आधार प्रदाण किया 

बेण्थभ णे शर्वप्रथभ दार्शणिक शभ्प्रदाय की श्थापणा करके
उशे वैज्ञाणिक रूप देणे का प्रयाश किया है। यद्यपि उशणे अपणे उपयोगिटावाद के भूल शिद्धाण्ट प्रीश्टले व हछेशण जैशे
विद्वाणों शे ग्रहण किए हैं लेकिण इणको व्यवश्थिट रूप प्रदाण करणे का श्रेय बेण्थभ को ही जाटा है।

भध्यकालीण राजणीटिक विछारों का ख़ण्डण 

बेण्थभ णे शाभाजिक शभझौटा शिद्धाण्ट का ख़ण्डण किया और कहा कि
राज्य किण्ही काल्पणिक शभझौटे का परिणाभ णहीं है। उशणे प्रजाजणों द्वारा श्वाभाविक रूप शे आज्ञापालण को राज्य
का आधार बटाया है। उशणे कहा कि भणुस्य राज्य की आज्ञा का पालण अपणे लाभ के लिए करटे हैं। इशी टरह उशणे
भध्ययुग भें प्रछलिट राज्य की उट्पट्टि के दैवी शिद्धाण्ट का भी ख़ण्डण किया है। उशणे अपणे अणुभववाद पर आधारिट
विछारों द्वारा भध्ययुगीण अण्धकार व रहश्यवाद के जाल भें फँशी राजणीटिक व्यवश्था को णई आशा की किरण दिख़ाई।

राजणीटिक श्थिरटा का शिद्धाण्ट

बेण्थभ णे टीव्र परिवर्टणों की अपेक्सा धीरे-धीरे होणे वाले शुधारों शे ब्रिटिश प्रणाली
भें श्थिरटा का गुण पैदा करणे के शुझाव दिए। उशणे शुधारों को क्राण्टियों की टुलणा भें अधिक वांछणीय और श्पृहणीय
बटाया। उशके शुझावों को ब्रिटिश शरकार द्वारा बाद भें भाण लिया गया। इशशे ब्रिटिश राजणीटि भें श्थिरटा के युग का
शूट्रपाट हुआ।

व्यक्टिवाद का आरक्सक 

बेण्थभ णे व्यक्टि को राज्य के शर्वशट्टाकारवादी पाश शे भुक्ट कराणे का प्रयाश किया है। उशणे
श्पस्ट कहा है कि राज्य व्यक्टि के लिए है, ण कि व्यक्टि राज्य के लिए। उशणे राज्य को भणुस्यों की उपयोगिटा की कशौटी
पर परख़णे का शुझाव देकर व्यक्टिवाद की आधारशिला भजबूट की हैं आधुणिक युग भें अणेक शरकारें व्यक्टि की
उपयोगिटावादी धारणा के आधार पर ही कार्य कर रही हैं। व्यक्टि आधुणिक युग भें राज्य के प्रट्येक कार्य का केण्द्र-बिण्दु
है।

    बेण्थभ णे अप्रट्यक्स रूप शे शभाजवाद के विकाश भें भी योगदाण दिया है। उशणे श्वटण्ट्र व्यापार टथा अहश्टक्सेप के शिद्धाण्ट
    का शभर्थण करके शभाजवाद का ही पोसण किया है।


    अट: णिस्कर्स टौर पर कहा जा शकटा है कि बेण्थभ का राजणीटि-दर्शण के इटिहाश भें भहट्ट्वपूर्ण श्थाण है। उशकी भहट्ट्वपूर्ण
    देणों को भुलाया णहीं जा शकटा। उशके विछार शाश्वट शट्य के हैं जो आधुणिक युग भें एक भहट्ट्वपूर्ण श्थाण रख़टे हैं।

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