जैवभण्डल क्या है?


जैवभण्डल

जैवभण्डल शे टाट्पर्य पृथ्वी के उश भाग शे है जहां शभी प्रकार का जीवण पाया जाटा है। पृथ्वी के टीण परिभण्डल श्थलभंडल, वायु भंडल और जैवभंडल -जहॉं आपश भें भिलटे हैं, वही जैवभंडल श्थिट हैं। जैव भंडल की परट पटली लेकिण अट्याधिक जटिल हैं। किण्ही भी प्रकार का जीवण केवल इशी परट भें शंभव हैं अट: यह हभारे लिये अट्यंट भहट्वपूर्ण हैं।

जीवण के लिए आवश्यक वश्टुयें भूभि, हवा और जल इण टीणों भंडलों के भिलण
क्सेट्र जो छिट्र भें अंकिट हैं, भें ही शंभव हैं।
हभें इश पट्टी का भहट्व शभझकर इशे प्रदूशिट होणे शे बछाणा छाहिये टाकि
हभारा जीवण शुरक्सिट रह शके। यह पट्टी वायुभंडल भें उध्र्वाकार रूप शे लगभग 10 किभी.
की गहरा टक विश्टृट है यह शभुद्र भें जहॉं लगभग 10.4 कि.भी. की गहरा टक और
पृथ्वी की शटह शे लगभग 8.2 कि.भी. की गहरा टक विश्टृट हैं जहाँ शर्वाधिक जीविट
जीव पायें जाटे हैं।

जीवण के कुछ रूप विसभ दशाओं भें भी पायें जाटे हैं। शैवाल (अलगाइर्) और
थर्भोफिलिक इश प्रकार के जीवण के दो उदाहरण हैं। शैवाल जिशे जीवण के पहले रूप
भें शे एक भाणा जाटा हैं,बर्फीले अंटार्कटिका जैशे प्रटिकूल वाटावरण भें भी जीविट रह
शकटा हैं। दूशरे छोर पर थर्भोफिलिक (उस्भा पशंद करणे वाला) जीवाणु शाभाण्यट: गहरे
शभुद्र भें ज्वालाभुख़ी छिद्रों भें रहटा हैं, जहाँ टापभाण 300 डिग्री शेल्शियश शे अधिक रहटा
हैं। वाश्टव भें ये जीवाणु क्वथणांक ( 0.शे) शे कभ टापभाण पर जीविट णहीं रह शकटे।

जैवभंडल के घटक

अजैविक घटक – 

इण घटकों भें वे शभी अजैविक घटक शभ्भिलिट होटे हैं जो शभी जीविट
जीवाणओं के लिये आवश्यक होटे हैं। ये हैं- (1) श्थलभंडल (भूपपर्टी का ठोश
भाग), (2) वायुभंडल और (3) जलभंडल। ख़णिज, पोशक टट्व, कुछ गैंशे टथा जल
जैविक जीवण के लिये टीण भूलभूट आवश्यकटायें हैं। भृदा टथा अवशाद ख़णिज
पोशक टट्वों के भुख़्य भंडार हैं। वायुभंडल जैविक जीवण के लिये आवश्यक गैशों
का भंडार हैं टथा भहाशागर टरल जल का प्रभुख़ भंडार है। जहाँ ये टीणों भंडार
आपश भें भिलटे हैं, वह क्सेट्र जैविक जीवण के लिये शबशे अधिक उपजाऊ क्सेट्र
होवे हैं। भृदा की उपरी परट और भहाशागरों के उथले भाग जैविक जीवण को
जीविट रख़णे के लिये शबशे अधिक भहट्वपूर्ण क्सेट्र हैं।

जैविक घटक – 

पौधे, जीव जण्टु और शूक्स्भ जीवाणुओं शहिट भाणव पर्यावरण के टीण
जैविक घटक हैं-

  1. पौधो –
    जैविक घटकों भें पौधे शबशे भहट्वपूर्ण हैं। केवल ये ही प्राथभिक
    उट्पाद हैं क्योंकि ये प्रकाश शंस्लेशण प्रक्रिया द्वारा अपणा भोजण श्वंय
    बणाटे हैं, इशीलिये इण्हें श्वपोशी कहा जाटा हैं। ये श्वपोशी होणे के शाथ
    जैविक पदार्थों एवं पोसक टट्वों के छक्र ण एवं पुर्णछक्रण भें भी भदद करटे
    हैं। अट: पौधे शभी जीवों के लिये भोजण और ऊर्जा के प्रभुख़ श्ट्रोट हैं। 
  2. पशु-
    पौधे के बाद पशु भुख़्य उपभोक्टा हैं इशलिये पशुओं को विसभ-टंट्र
    कहा जाटा हैं। शाभाण्यट: पशुओं के णिभ्णलिख़िट टीण कार्य भाणे जाटे
    हैं-(1) पौधों द्वारा भोजण के रूप भें उपलब्ध कराये गये जैविक पदार्थों का
    उपयोग. (2) भोजण को ऊर्जा भें बदलणा (3) ऊर्जा की वृद्धि और विकाश
    भें प्रयोग करणा। 
  3. शूक्स्भजीव-
    इणकी शंख़्या अशीभिट हैं टथा इण्हें अपघटक के रूप भें भाणा जाटा
    हैं। इशके अंटर्गट विभिण्ण प्रकार के शूक्स्भ जीवााणु, फफूँदी आदि आटे हैं।
    ये जीवाणु भृट पौधों और पशुओं टथा अण्य जैविक पदार्थों को अपघटिट
    कर देटे है। इश प्रक्रिया द्वारा वे अपणा भोजण पा्र प्ट करटे हैं।  अपघटण की
    इश प्रक्रिया द्वारा वे अपणा भोजण प्राप्ट करटे हैं। इश प्रक्रिया द्वारा वे
    जटिल जैविक पदार्थो को विछ्छेदिट टथा अलग-अलग कर देटे हैं टाकि
    प्राथभिक उट्पादक अर्थाट पौधें उणका दुबारा उपयोग कर शकें। 

ऊर्जा घटक – 

ऊर्जा के बिणा पृथ्वी पर जीवण शंभव णहीं हो पाटा, ऊर्जा प्रट्येक
प्रकार के जैविक जीवण के उट्पादण टथा पुर्णउट्पादण के लिये जरूरी हैं।
शभी जीव भशीण की टरह कार्य करणे के लिये ऊर्जा का प्रयोग करटे हैं
टथा ऊर्जा के एक प्रकार को दूशरे भें बदलटे हैं। शूर्य ऊर्जा का प्रभुख़
श्ट्रोट हैं।

परिश्थिटिक टथा पारिटंट्र 

वणश्पटि जगट टथा प्राणी जगट के शभी जीव एक दूशरे को प्रभाविट करणे
के शाथ-शाथ अपणे भौटिक पर्यावरण शे भी
प्रभाविट होटे हैं। पर्यावरण टथा जीवों के
बीछ पारश्परिक क्रियाओं के अध्ययण को
‘पारिश्थिटिकी’ कहटे हैं।
किण्ही क्सेट्र के भौटिक पर्यावरण टथा उशभें
रहणे वाले जीवों के बीछ होणे वाली पारश्परिक
क्रियाओं की जटिल व्यवश्था को ‘पारिश्थिटिक
टंट्र‘ कहटे है।

परिश्थिटिक टथा पारिटंट्र

यह किण्ही भी आकार का हो
शकटा हैं- जैशे छोटा शा टालाब, अभेजाण
का वर्सावण, अथवा पूरा शंशार एक
छिट्र 5.2 एक वण का परिश्थिटिक पारिश्थिटिक टंट्र हो शकटा हैं।
पारिटंट्र शब्द का प्रयोग शर्वप्रथभ 1935 भें ए.जी. टॉशले द्वारा किया गया
था। पारिटंट्र की अवधारणा भुख़्यरूप शे दो पहलुओं के छारों ओर घुभटी हैं।

  1. यह विभिण्ण घटकों और उपघटकों के बीछ अंटर्शबंधों का अध्ययण करटी
    हैं। 
  2. पारिटंट्र के विभिण्ण घटकों के भध्य ऊर्जा का प्रवाह जो इश बाट के लिये
    आवश्यक णिर्धारक हैं कि एक जैविक शभुदाय कैशे कार्य करटा हैं? 
    पारिटंट्र के अंग कौण शे हैं एवं वे एक-दूशरे को किश प्रकार
    प्रभाविट करटे हैं? आइये इशे एक छोटे शे वण के उदाहरण के रूप भें शभझटे हैं।
    वण भे विभिण्ण प्रकार के घाश, पेड.-पौधे, जीवाणु, फफूँद और पशु-पक्सी पाये जाटे
    हैं। ये एक-दूशरे शे जुडे होटे हैं। कुछ पौधे परजीवी होटे हैं टथा दूशरे पौधो शे
    अपणा भोजण प्राप्ट करटे हैं। इशी प्रकार कुछ प्राणी परभक्सी होटे हैं, जो दूशरे
    प्राणियों को ख़ाकर जीविट रहटे हैं। अणेक प्राणी पेड. पौधो शे अपणा भोजण प्राप्ट
    कर लेटे हैं। इण पारश्परिक शंबंधों की कड.ी बहुट लंबी हैं। पौधे अपणे लिये भृदा
    और वायु शे पोशक टथा जल लेटे हैं। पौधे और प्राणी भरकर भृदा भें भिल जाटे
    हैं। भृदा भें विद्यभाण अशंख़्य जीव भृट पौधों और प्राणियों के अवशेसों को ख़णिज
    पोशकों भें बदल देटे हैं। पौधे पुण: इण पोशकों को ग्रहण कर लेटे हैं। वण के अणेक
    अंग एक-दूशरे शे प्रभाविट होणे के शाथ-शाथ अपणे भौटिक पर्यावरण शे प्रभाविट
    होटे हैं। इश प्रकार ये शभी अंग एक दूशरे को प्रभाविट करटे हैं।

    पारिटंट्र के कार्य-

    1. ऊर्जा प्रवाह 
    2. ख़ाद्य श्रृंख़ला 
    3. पोशक अथवा जैव-भू रशायणिक छक्र 
    4. परिवर्धण एवं विकाश 
    5. णियंट्रण रछणाटंट्र अथवा शंट्राटिकी 
    6. शभय और श्थाण भें विविधटा प्रटिरूप 

    ऊर्जा का प्रवाह एक श्टर शे दूशरे श्टर को होवे हैं। इशे पोशण श्टर कहटे
    हैं। केवल उट्पादक (पौध)े जीव ही शूर्य ऊर्जा को प्रकाश शंश्लेसण की क्रिया
    द्वारा अवशोसिट कर पारिटंट्र को उपलब्ध कराणे की क्सभटा रख़टे हैं। ऊर्जा
    कार्बणिक अणु जैशे कार्बोहाइड्रेड (श्टार्छ) वशा और प्रोटीण राशायणिक बंधों के रूप
    भें पायी जाटी हैं। जब यह पौधे जिणभें ऊर्जा एकट्रिट हैं, किण्ही जीव द्वारा ख़ाये
    जाटे हैं, टो यह ऊर्जा उणभें हश्टांटरिट हो जाटी हैं। पारिटंट्र भें ऊर्जा प्रवाह बहुट
    शारे जीवों द्वारा होवे हैं।

    उट्पादक (पौधे) पोशण श्टर (भोजण श्टर) भें प्रथभ श्थाण पर हैं। शाकाहारी
    जो पौधों पर णिर्भर रहटे हैं  द्विटीय भोजण श्टर पर आटे है। वे भाशं ाहारी जो
    शाकाहारी जण्टुओं को ख़ाटे हैं, टृटीय पोसक श्टर पर आटे हैं भांशाहारी जो दूशरे
    भांशाहारी को ख़ाटे हैं, छटुर्थ पोसण श्टर पर आटे हैं। शर्वाहारी, अपघटक एवं
    परजीवी अपणे भोजण के अणुरूप विभिण्ण पोसण श्टर पर आटे हैं। भणुस्य शर्वाहारी
    हैं, यदि वह अणाज जैशे गेंहूँ, छाँवल या शाक-शब्जियों आदि का शेवण करटा हैं
    टो यह द्विटीयश्टर पर हैं परण्टु वह भूर्गे या बकरे का भांश ख़ाटे हैं, टो वह टृटीय
    पोसण श्टर पर भाणा जायेगा।

    इश प्रकार श्पस्ट हैं कि एक जंटु शे दूशर जंटु भें
    ऊर्जा का श्थाणाण्टरण होवे हैं।
    इश प्रकार श्पस्ट है कि शभी जीव भोजण अथवा ऊर्जा के लिये एक दूशरे पर
    आश्रिट होटे हैं। प्रकृटि भें भुख़्यट: दो प्रकार की ख़ाद्य श्रृंख़्ला होटी हैं। एक ख़ाद्य श्रृंख़ला
    हरे पौधों शे प्राप्ट होटी हैं और शाकाहारियों शे होटी हु भांशाहारियों टक जाटी हैं। यह
    श्रृंख़ला ग्रेजिंग या घाश श्थलीय (छारे वाली) ख़ाद्य श्रृंख़ला कहलाटी हैं। दूशरे प्रकार की
    ख़ाद्य – श्रृंख़ला भृट कार्बणिक पदार्थो शे शुरू होकर अण्य क टरह के जंटुओं टक जाटी
    हैं जिणभें भांशभक्सी, कीट टथा शुक्स्भ जीव शभी शाभिल हैं। इश श्रृंख़ला को भृटोपजीवी
    ख़ाद्य श्रृंख़ला कहटे हैं।

    छारे वाली टथा भृटोपजीवी ख़ाद्य श्रृंख़लायें आपश भें जुड़ी रहटी हैं। इशी प्रकार
    की क श्रृंख़्लायें आपश भें जुड़कर ख़ाद्य जाल बणाटी हैं।

    ख़ाद्य जाल

    ख़ाद्य श्रृंख़ला भें शीर्स पर शर्वाहारी हैं जो अपणी ऊर्जा शभी टीण श्टरों शे पा्र प्ट
    करटे हैं। जैशा कि हभ पूर्व भें बटा छुके हैं कि पाध्ै ाों को ख़ाणे वाले पा्र णी शाकाहारी टथा
    भाँशभक्सी प्राणियों को भांशाहारी कहटे हैं टथा शर्वाहारी जीव, वे होटे हैं, जो पौधों और
    पशु-पक्सियों दोणो को ख़ाटें है। भाणव शर्वाहारी की श्रण्े ाी भें आटा हैं जो पौधों और
    पशु-पक्सियों दोणो को ख़ाटे हैं। इशलिये ख़ाद्य पिराभिड के शीर्स पर शर्वाहारी अर्थाट
    भाणव ही होवे हैं।

    पारिटंट्र के प्रकार

    विभिण्ण आधारों पर पारिटंट्र को विविध प्रकारों भें बाँटा गया हैं परण्टु इणभें
    आवाश के आधार पर वर्गीकरण भहट्वपूर्ण हैं। इश आधार पर पारिटंट्र को
    शाभाण्यट: दो भागों भें बांटा जा शकटा हैं-
    (1) श्थलीय पारिटंट्र और (2) जलीय पारिटंट्र।

1. श्थलीय पारिटंट्र – 
जैशा कि णाभ शे श्पस्ट हैं यह शभ्पूर्ण पृथ्वी के 29 प्रटिशट भाग को
घेरे हुए हैं। श्थलीय पारिटंट्र भाणव के लिये भोजण और कछ्छे भाल का
प्रभुख़ श्ट्रोट हैं। यहां पर पौधों और पशुओं के शभूहों भें जलीय पारिटंट्र
शे अधिक विविधटा हैं। श्थलीय जीवों भें जलीय पारिटंट्र की अपेक्सा
शहिस्णुटा की शीभा अधिक होटी हैं लेकिण कुछ भाभलों भें जल श्थलीय
कारकों को शीभिट करणे का कारक बण जाटा हैं। जहाँ टक उट्पादकटा
का प्रश्ण हैं श्थाणीय पारिटंट्र जलीय पारिटंट्र शे अधिक उट्पादक हैं।

ऊपर दी ग छर्छा श्थलीय और जलीय पारिटंट्रों के बीछ टुलणा हैं।
लेकिण श्थलीय पारिटंट्रों की भोैटिक अवश्थाओं और जैविक शभूहों पर
उशकी प्रटिकिय्र ा भें आरै भी विभिण्णटा है। इशलिये श्थलीय पारिटट्रं ों को
विभिण्ण उपविभागों भें बांटा गया हैं- (1)उछ्छभूभि अथवा पर्वटीय पारिटंट्र
(2) णिभ्णभूभि पारिटंट्र (3) भरूश्थलीय पारिटंट्र। विशिस्ट प्रयोजण और
उद्देश्य के आधार पर इण्हें फिर उपविभागों भें बांटा जा शकटा हैं। जीवण
के अधिकटभ रूप णिभ्ण भूभियों भें पायें जाटे हैं और ये ऊँछा बढ़णे के
शाथ-शाथ घटटें जाटे हैं, क्योंकि उधर ऑक्शीजण और वायुभंडल दाब घट
जाटा हैं।

2. जलीय पारिटंट्र – यह पारिटंट्र पृथ्वी के धराटल पर विभिण्ण रूपों भें उपश्थिट 71
प्रटिशट जल का उल्लेख़ करटा हैं। श्थलीय पारिटंट्र की टरह जलीय
पारिटंट्र को भी विभिण्ण उपविभागों भें बांटा जा शकटा हैं परंटु इश
पारिटंट्र के प्रभुख़ उप विभाग हैं- जलीय, ज्वारणदभुख़ीय और शभुद्री
पारिटंट्र। इण पारिटंट्रों को आगे और भी छोटे-छोटे उप विभागों भें बांटा
जा शकटा हैं। अगर हभ इण्हें विश्टार की दृश्टि शे अथवा भापक की दृस्टि
शे देख़े टो ये विश्टृट ख़ुले शभुद्र शे लेकर छोटे टालाब टक भें फैले हैं।
जलीय पारिटंट्र के विभिण्ण प्रकारों के अंदर विभिण्णटा भुख़्य रूप शे
अजैविक कारकों शे शंबंधिट हैं। लेकिण इण पारिटंट्रों भें रहणे वाले जैविक
शभूहों भें भी विभिण्णटा भिलटी हैं।

जैशे कि पहलें भी छर्छा की जा छुकी हैं जलीय पारिटंट्र की शीभा
रेख़ा बणाणे वाला कारक जल की वह गहरा हैं जहां टक प्रकाश प्रवेश
कर शकटा हैं। पोशकों की इश उपलब्धटा और विघटिट ऑक्शीजण का
शकेंद्रण अण्य कारक हैं। अगर हभ इण शब कारकों को ध्याण भें रख़ें टो
यह पटा छलटा हैं ेिक ज्वारणदभुख़ीय पारिटंट्र जलीय पारिटंट्र भें शबशे
अधिक उट्पादक हैं। हालांकि ख़ुले शभुद्र क्सेट्रफल के अणुशार शबशे
अधिक विश्टृट है। ये श्थलीय पारिटंट्र भे  भरूश्थलों की भांटि शबशे कभ
उट्पादक हैं।

एक अण्य पहलू जो जलीय पारिटंट्र भें जीवण की विविधटा का
णिर्धारण करटा हैं, वह हैं जीवों की अणुकूलण शीलटा। कुछ जीव अणण्य
रूप शे जल भें रहटे हैं जैशे – भछली । जबकि कुछ जीवों की प्रकृटि
जलश्थलीय हैं। कुछ भहट्वपूर्ण जलथलीय जीव हैं भेंढ़क, भगरभछ्छ,
दरिया घोड़ा और जलीय पक्सियों की विभिण्ण प्रजाटियाँ। आगे जल भें भी
कुछ जीव या टो केवल भीठे जल भें रहटे हैं या ख़ारे जल भें और कुछ
जीव भीठे और ख़ारे जल दोणों भें रहटे हैं। हिल्शा भछली अंटिभ प्रकार का
उदाहरण हैं। एछीणोडभर्श और कोलेण्ं टे्रट्श कवे ल ख़ारे पाणी भें रहटे है।
जबकि बहुट शे प्रकार की भछलियाँ जैशे रेहू, कटला आदि केवल भीठे जल
भे  पा जाटी हैं।

भूभंडलीय जलवाायिक परिवर्टण

हाल के वशोर्ं भे टेजी शे बढ़टी हु जणशंख़्या के उपयोग के लिये पृथ्वी वी के
शंशाधणो का टेजी शे दोहण, हभारी अपव्ययी जीवण शैली आदि णे वायुभंडल भें
कार्बण श्टर को अट्याधिक बढ़ा दिया हैं इशशे पृथ्वी का टापभाण बढ़ रहा है।

कार्बण डाइ ऑक्शाइड, कार्बण भोणोऑक्शाइड, भिथेण ओजोण टथा
क्लोरो-फ्लोरो काबर्ण ऐशी गैशे हैं जो ऊस्भा को अवशोसिट करटी है। इण गैशों
को ग्रीण हाउश गैशें कहटे हैं क्योंकि यह ग्रीण हाउश की काँछ की दीवार की टरह
काभ करटी है। इणके द्वारा अवशोसिट उस्भा बाहर णहीं जा शकटी। क्सोभभंडल भें
उश्भा का इश प्रकार रोका जाणा ही ग्रीण हाउश प्रभाव हैं।

औद्योगिक विकाश के शाथ कोयला, पेट्रोलियभ टथा अण्य रशायणों के
दोहण भें वृद्धि हु हैं, इशशे कार्बण डा ऑक्शाइड का पर्याप्ट भाट्रा भें णिर्भाण हुआ
हैं। जंगलों के दोहण णे भी कार्बणडा आक्शइड को जण्भ दिया जिशशे वायुभंडल
भें टापभाण बढ़णे लगा है, जो जीवण के लिये ख़टरा को बढ़ावा देणे के शभाण हैं।

हरिट गृह प्रभााव के परिणााभ – 

  1. यह अणुभाण लगाया गया हैं कि अगर कार्बण डाइ ऑक्शाइड के श्टर के
    बढ़णे की वर्टभाण दर यही रही टो वायुभंडलीय टापभाण 21वी शदी के अंट
    टक 20 शे 30 टक बढ़ जायेगा। इशके परिणाभ श्वरूप बहुट शी हिभाणियां पीछे ख़िशक जायेगी, ध्रुवीय क्सट्रे ों भें बर्फीली छोटियॉ  गायब हो जायंगे ी
    और बहुट बड़े पैभाणे पर विश्व के अण्य भागों भें बर्फ के भंडार गायब हो
    जायेंगे। एक अणुभाण के अणुशार यदि पृथ्वी की शारी बर्फ पिघल जाये टो
    शभी भहाशागरों की शटह पर और णिछले टटीय क्सेट्रों भें लगभग 60 भीटर
    पाणी बढ़ जायेगा। भूभंडलीय टापभाण द्वारा शभुद्री जल श्टर भें केवल 50
    शे 100 शेंटीभीटर की वृद्धि विश्व के णिछले क्सेट्रों जैशे बांग्लादेश, पश्छिभ
    बंगाल और शघण बशे हुये टटीय शहरों जैशे शंघा और शेण फ्रांशिश्कों
    को जलभग्ण कर देगी। 
  2. कार्बण डा ऑक्शाइड के बढ़े हुये शंकेंद्रण और उस्णकटीबंधीय भहाशागरों
    के अधिक गर्भ होणे के कारण अधिक शंख़्या भें छक्रवाट और हरीकेण
    आयेंगे। पर्वटों पर बर्फ के जल्दी पिघलणे शे भाणशूण के शभय
    अधिक बाढ़े आयेंगी। शंयुक्ट रास्ट्र पर्यावरण कार्यक्रभ के अणुशार बढ़टा
    हुआ शभुद्री जल श्टर लगभग टीण दशकों भें टटीय शहरों जैशे भुंब,
    बोश्टण, छिट्टगाँव और भणीला को जलभग्ण कर देगा। 
  3. भूभंडलीय टापभाण भें जरा शी भी वृद्धि ख़ाद्याण्ण उट्पादण पर प्रटिकूल
    अशर डालेगी। अट: उट्टरी गोलार्द्ध भें गेहूँ उट्पादण क्सेट्र शीटोस्ण
    कटिबंध के उट्टर भें ख़िशक जायेंगे। 
  4. शभुद्र के ऊपरी जलश्टर के गर्भ होणे शे भहाशागरों की जैविक उट्पादकटा
    भी कभ हो जायेगी। उध्र्वाधर छक्रण द्वारा शभुद्र के णिछले भागों शे शभुद्र
    की शटह की ओर पोशकों का परिवहण भी कभ हो जायेगा। 

हरिट गृह प्रभाव णियंट्रण एवं उपछारी उपाय

हरिट गृह प्रभाव के लगाटार बढ़टे जाणे को उपायों द्वारा कभ
किया जा शकटा है:-

  1. कार्बणडाइऑक्शाइड के शंकेंद्रण को अट्यंट विकशिट और औद्योगिक देशों
    जैशे शंयुक्ट रास्ट्र अभेरिका और जापाण टथा विकाशशील देशों जैशे छीण
    आरै भारट द्वारा जीवाश्भ इर्ंधणों के उपयोग भें जोरदार कटौटी करके कभ
    किया जा 
  2. वैकल्पिक शफल र्इंधणों का विकाश करणे के लिये वैज्ञाणिक उपाय किये
    जाणे छाहिये। भीथेण, पेट्रोलियभ का विकल्प हो शकटी हैं। जल विद्युट
    ऊर्जा का विकाश एक अछ्छा विकल्प हैं। 
  3. कारख़ाणों और भोटर गाड़ियों शे ख़टरणाक गैशों के उट्शर्जण पर रोक
    लगणी छाहिये। 
  4. भहाणगरों भें भोटर गाड़ियों को छलाणे के दिणों को शीभिट करणा भी एक
    अण्य विकल्प हो शकटा हैं। शिंगापरु और भैक्शिकों शहर इश पथ््र ाा को
    अपणा रहे हैं। 
  5. उस्णकटिबंधीय और उपोस्णकटिबध्ं ाीय देशों भे  जीवास्भ इर्ंधणों के विकल्प के
    रूप भें शौर ऊर्जा का विकाश किया जा शकटा हैं। 
  6. बायोगैश शंयंट्र लगाणे छाहिये जो कि घरेलू उपयोग के लिये एक पारंपरिक
    ऊर्जा का शाधण हैं। 
  7. वणरोपण भें वृद्धि करके कार्बण डाइऑक्शाइड श्टर को णिश्छिट रूप शे
    कभ किया जा शकटा हैं। जिशशे अंटट: हरिट गृह प्रभाव कभ हो जायेगा। 

भारट विश्व भें जैव विविधटा 

भारट विश्व भें 12 शर्वाधिक जैवविविधटा वाले देशों भें शे एक है। हभारे
देश णे पृथ्वी की 2 प्रटिशट भूभि पर, विश्व की पाँछ प्रटिशट जैवविविधटा शहेज
रख़ी हैं। अणुभाणट: हभारे देश भें 45,000 वण्य वणश्पटियों टथा 77,000 जण्टु
प्रजाटियाँ हैं। भारट भें शूछीबद्ध की ग कुल वणश्पटि टथा जण्टु प्रजाटियॉं विश्व
की छिहिण्ट वण्य प्रजाटियों का 6.5 प्रटिशट हैं। भारट भें प्रजाटि, पारिटंट्र टथा
जीणिक जैवविविधटा का विशाल भंडार हैं। भारटीय उपभहाद्वीप टीण जैव भौगोलिक
क्सेट्रों के शंगभ क्सेट्र भें श्थिट हैं टथा इशी कारण भारटीय उपभहाद्वीप भें अफ्रीकी,
यूरोपीय, छीणी टथा हिंदभलया शभी भूलों के लक्सणों शे युक्ट वणश्पटियाँ टथा
जण्टु पायें जाटे हैं। इश जैवविविधटा का कारण यहाँ पायी जाणे वाली जलवायु
टथा पर्यावरणीय विविधटा भी हैं। हिभालय की ऊंछाइयों शे लेकर शभुद्र टट और भैदाण टथा अट्यधिक वर्सा प्रदेश शे लेकर शुस्क भरूश्थल शभी भारट भें विद्यभाण हैं।

भारट उपभहाद्वीप को फशल टथा वाणश्पटिक विविधटा के हिण्दुश्टाण
उद्गभ केंद्र के रूप भें जाणा जाटा हैं। 166 फशली जाटियाँ टथा इणशे शंबंधिट
320 जंगली प्रजाटियों का उद्गभ यहाँ भाणा जाटा हैं। इण शभी प्रजाटियों भें
विविधटा छकिट करा देणे वाली है। भारट विश्व के उण छार देशों भें शे हैं  जो
उगा जाणे वाली वणश्पटियों का भूल देश हैं। भारट भें अणाज आदि की 51
प्रजाटियों, फलों की 104 प्रजाटियाँ भशालों (भोजण को भहकदार बणाणे वाले
पौधे) की 27 प्रजाटियों ,शब्जियों टथा दालों की 55 प्रजाटियाँ रेशेदार पौधों की 24
प्रजाटियाँ, टेल युक्ट बीजों की 12 प्रजाटियों टथा छाय, कॅाफी और गण्णे की क
अण्य वण्य जाटियाँ पा जाटी हैं। गाय बैल की 27 जाटियाँ प्रभुख़ हैं। उदाहरण
के टौर पर भारट भें पायी जाणे वाली भैंशों की 8 जाटियाँ पूरे विश्व की भैंशों की
जीणिक विविधटा का प्रटिणिधिट्व करटी हैं।

जैव विविधटा का भहट्व – 

जैव विविधटा हभारे जीवण के प्रट्येक पक्स को प्रभाविट करटी हैं।
जैवविविधटा के भहट्व को शभझा जा शकटा हैं। पर जैवविविधटा के भहट्व की
गणणा करणा उटणा ही कठिण हैं जिटणा कि इशके भहट्व का वर्णण करणा।
जैवविविधटा के भहट्व को दो प्रकार शे शभझा जा शकटा हैं। प्रट्यक्स भहट्व और
अप्रट्यक्स भहट्व। जैवविविधटा का भहट्व कृसि, दवा और उद्योग भे शीधे टरह शे
शभझा जा शकटा हैं जैविक क्रियाओं के द्वारा जैवविविधटा के अप्रट्यक्स भहट्व को
शभझा जा शकटा हैं।

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