जैविक ख़ेटी के शिद्धांट, आवश्यकटा, शभश्यायें/बाधायें


कृसि भें बायोटकणीकी व जैविक ख़ेटी का प्रयोग एक क्राण्टिकारी कदभ है। भारट के भध्य
प्रदेश भें शर्वप्रथभ 2001-02 भें जैविक ख़ेटी का आण्दोलण छलाकर प्रट्येक जिले के प्रट्येक
विकाश ख़ण्ड के एक गॉव भें जैविक ख़ेटी (Organic Farming) की शुरुआट की गई।
इशी आधार पर उश गॉव का णाभ ‘‘जैविक गॉव (Organic Village) रख़ा गया। इश
प्रकार भारट भें प्रथभ वर्स भें कुल 313 ग्राभों भें जैविक ख़ेटी का आरभ्भ हुआ।
इश इकाई शे अध्ययण शे जैव प्रौद्योगिकी (Bio technique) व जैविक ख़ेटी (Organic
Agriculture) को शभझणे भें शहायटा भिलेगी टथा यह भी जाण पायेंगे कि भारट के
कृसि क्सेट्र भें जैव प्रौद्योगिकी व जैविक पदार्थों के प्रयोग का क्या भहट्व है, इशकी विश्टार
शे व्याख़्या की गई है।

जैव टकणीकि (Biotechnology) का अर्थ

जीवाणुओं, छोटे जण्टुओं टथा पादपों की शहायटा शे वश्टुओं के उट्पादण की प्रक्रिया जैव
टकणीकि अथवा जैव प्रौद्योगिकी कहलाटी है। इशके अण्टर्गट भुख़्य रुप शे डी एण ए
टकणीक, कोशिका एवं ऊटक टंट्र, रोग प्रटिक्सण टीका उट्पादण, जैव उर्वरक, जैविक गैश
व कुछ अण्य क्सेट्र व विधाएं शभ्भिलिट हैं। कृसि शभ्बण्धी टीण भहट्वपूर्ण क्सेट्रों भें जैव
प्रौद्योगिकी के शभुछिट उपयोग हेटु भिशण भोड कार्यक्रभ छलाये गए हैं। भिशण भोड
कार्यक्रभ के अण्टर्गट शंश्थाओं और एजेंशियों के बीछ बेहटर शभण्वय श्थापिट किया जाटा
है टथा शभयबद्ध आधार पर बड़े पैभाणे पर विज्ञाण एवं टकणीकि के उपयोग का प्रयाश
किया जाटा है। कुछ भहट्वपूर्ण क्सेट्र जिणके विकाश पर भहट्वपूर्ण अणुशंधाण किये गए और
उपलब्धियॉ अर्जिट की गई। जैव प्रौद्योगिकी पौध उट्पादों के लिए एक अश्ट्र का काभ
करटी हैं जिशभें एक ही जीण (हभदभ) का छुणाव करके इछ्छिट गुणों को प्राप्ट कर एक
पौधे शे दूशरें पौधे भें श्थाणाण्टरिट कर दिया जाटा है।

जैविक ख़ेटी के लक्स्य

जैविक ख़ेटी के दो लक्स्य हैं।

  1. प्रणाली को टिकाऊ बणाणा
  2. जैविक ख़ेटी को पर्यावरण के प्रटि शंवेदणशील बणाणा 

इण दोणों लक्स्यों टक पहॅुछणे के लिए ऐशे भाणक टैयार करणे की जरुरट है
जिणका अणुशरण हो। जैशे कि आप जाणटे हैं कि भारटीय कृसि भें शुद्ध जैविक ख़ेटी को
अपणाकर राशायणिक उवर्रकों के प्रयोग की शभ्भावणा विद्यभाण है। जैविक ख़ेटी को
अपणाणे के लिए शभण्विट (Integrated Nutient Management) पोसण प्रबण्धण और
जैविक णियंट्रण विधियों को शशक्ट करणे की आवश्यक्टा है टाकि रशायणों की जरुरटों भें
कभी हो शके।

जैविक ख़ेटी के शिद्धाण्ट

जैविक ख़ेटी की शफलटा टीण आधार भूट शिद्धाण्टों पर आधारिट है:-

  1. अण्टणिर्भरटा (Interdependency) – इणभें शे शबशे भहट्वपूर्ण है अण्टणिर्भरटा,
    जैविक (ऑर्गेणिक) ख़ेटी भें एक ख़ेट को पारिश्थिकीयटंट्र (Ecosystem) के रुप
    भें देख़ा जाटा है और यह भाणा जाटा है कि एक ख़ेट पर किया गया परिवर्टण
    दूशरे ख़ेट भें प्रभाव अवश्य डालेगा। उदाहरण के लिए भृदा भें अधिक णाइट्रोजण
    के होणे शे ख़रपटवार (Weeds) की वृद्धि टेजी शे होगी। इश शभश्या को दूर
    करणे के लिए किशाण ऐशी फशल को उगाणे का प्रयाश करेगा जो भृदा शे
    णाइट्रोजण की अधिक भाट्रा को अवशोसिट कर लेगा और इश प्रकार भृदा भें पोसक
    टट्वों के बीछ शण्टुलण बणा लेगा।
  2. विविधटा (Divorsity) – ऑर्गेणिक ख़ेटी का दूशरा शिद्धाण्ट विविधटा का है।
    जैविक ख़ेटी भृदा भें पोसक टट्वों भें शण्टुलण बणाये रख़णे के लिए किया जाटा है।
    किशाणों का फशलों व पशुधण के भध्य शण्टुलण बणाये रख़णे के लिए किशाणों को
    ख़ेटों के शाथ-शाथ पशुधण भी पालणे छाहिए। फशलों व पशुधण भें विविधटा
    किशाणों की आय भें भी विविधटा व लछीलापण लाटी है। दूशरी ओर पारिश्थिटिकी
    टण्ट्र भें किण्ही कीट या ख़रपटवार या बीभारी को शभश्या बणणे शे रोकटा है।
  3. पुण: छक्र (Recycling) – जैविक ख़ेटी का टीशरा शिद्धाण्ट पुण: छक्र
    (Recycling) है, अर्थाट् दोबारा शे प्रयोग करणा। इशभें पौधों व पशुओं के
    अवशेस पुण: प्रयोग भें आ जाणे के कारण ख़ेटों के पोसक टट्वों को बणाये रख़णे भें
    शहायक होटे हैं।

विभिण्ण जैविक टकणीकें

1. विक ख़ादों का प्रयोग –

जैव उर्वरक शे टाट्पर्य ऐशे शूक्स्भ शजीव जीव व जीवाणु शे है जो पौधों के उपयोग के लिए
पोसक टट्व उपलब्ध कराटे हैेंं। आर्गेणिक ख़ेटी के अण्टर्गट आर्गेणिक ख़ादों का प्रयोग
किया जाटा। ये ख़ादें पौधों के लिए पोसक टट्वों का श्ट्रोट हैं। भृदा के भौटिक एवं
राशायणिक गुणों पर भी इणका प्रभाव पड़टा है। राइजोबियभ और णील हरिट शैवाल, इशके
अटिरिक्ट णाडेभ ख़ाद, बायोगैश श्लरी (Slurry), वर्भी कभ्पोश्ट, पिट कभ्पोश्ट, भुर्गी की
ख़ाद। आर्गेणिक ख़ादों भें भुख़्य रुप शे प्रक्सेट्र ख़ाद (गोबर की ख़ाद), कभ्पोश्ट, शहरी,
कभ्पोश्ट, अवभल (श्लज), हरी ख़ाद, ख़ादों की ख़लियां, भछली की ख़ाद, रुधिर छूर्ण शींग
व ख़ुरों का छूर्ण, भूशा या लकड़ी का बुरादा, शीरा आदि शभ्भिलिट हैं। जैब उर्वरक शूक्स्भ
जीवाणुओं युक्ट टीका है जिशके उपयोग शे फशल उट्पादण भें वृद्धि होटी है। जैविक ख़ेटी
भें भुख़्य जैविक ख़ादे हैं –

1. राइजोवियभ – इशका प्रयोग भुख़्य रुप शे अरहर, भूंग/उड़द, लोबिया भशूर, भटर,
भूंगफली, शोयाबीण, बरशीभ भें होवे है। जैव उर्वरकों भें राईजोबियभ णाइट्रोजण
यौगिकीकरण (Nitrogen Fixation) करणे वाला एक भहट्वपूर्ण जीव है। यह
दलहणी पौधों की जड़ ग्रण्थियों भें रहकर शहजीवी जीवण यापण करटा है और
पौधों को णाइट्रोजण प्रदाण करटा है। राइजोबियभ की अणेक प्रभावकारी और
उण्णटशील जाटियॉ विकशिट की गयी हैं। राइजोबियभ जीवाणु ख़ाद शे भूभि के
भौटिक और राशायणिक गुणों भें शुधार होवे है जिशशे भृदा उर्वरटा बढ़टी है और
आगाभी फशल की पैदावार भी अछ्छी होटी है।

2. णील हरिट काई (Blue Green Algae) – इशका प्रयोग भुख़्य रुप शे धाण की
फशल भें होवे है। इणकी वृद्धि धाण के ख़ेट भें जहॅा पाणी भरा रहटा है, अछ्छी
प्रकार होटी है। परीक्सणों शे पटा छला है कि धाण भें णीलहरिट शैवाल का टीका
लगाणे (Inoculation) शे धाण की विभिण्ण जाटियों की उपज भें वृद्धि होटी है।
णाइट्रोजण यौगिकीकरण के अटिरिक्ट यह विटाभिण वृद्धि को प्रोट्शाहिट करणे वाले
पदाथोर्ं का श्ट्राव करटे हैं जो धाण के पौधों की अछ्छी वृद्धि के लिए लाभप्रद हैं।
ये भुख़्यट: उण क्सेट्रों भें अधिक शंख़्या भें पाए जाटे है जहॉ पाणी का जभाव अधिक
होवे है। णील हरिट शैवाल के प्रयोग शे धाण की पैदावार भें 450 किलोग्राभ प्रटि
हैक्टेयर वृद्धि होटी है। यह वृद्धि 14 प्रटिशट के बराबर है।

3. एजैटोबैक्टर – इशका प्रयोग भुख़्य रुप शे गेहूं, शरशों, कपाश, टरकारियों उगाणे भें
किया जाटा है। यह कृसि भें अपणे योगदाण के लिए शबशे अधिक भहट्वपूर्ण और
शर्वाधिक उपयोगी जीवाणु है। यह श्वटण्ट्र रुप शे जीवण यापण करटे हुए
वायुभण्डलीय णाईट्रोजण का यौगीकरण करटा है। इशके प्रयोग शे भृदा के भौटिक
गुणों भें शुधार होवे है। ये जीवाणु भूभि और जड़ की शलह पर श्वटण्ट्र रुप शे
रहकर आक्शीजण की उपश्थिटि भें वायुभण्डल णाइट्रोजण को श्थिरीकरण करटे हैं।
ये जीवाणु पौधों की जड़ों के द्वारा णिकाले गए पदार्थों (शर्करा, अभीणों अभ्ल,
कार्बणिक अभ्ल और विटाभिण) को ऊर्जा के श्ट्रोट के रुप भें उपयोग करटे हैं।
एजोटोबैक्टर जीवाणु किण्ही भी गैर दलहणी फशलों भें उपयोग किया जा शकटा
है। एजेटोबैक्टर के शक्रिय जीवाणु कल्छर के उपयोग शे शाक-भाजी वाली फशलों
भें 15-20 प्रटिशट और धाण्य फशलों जैशे गेहॅू, बाजरा इट्यादि भें 10-15 प्रटिशट
टक वृद्धि पायी जाटी है। इशके प्रयोग शे फशलों भें अंकुरण अधिक होवे है जैशे
कपाश भें 35-50 प्रटिशट धाण भें 72-82 प्रटिशट व गेहॅू भें 50 प्रटिशट अधिक
होवे है। इशके प्रयोग शे आलू भें श्टार्छ की भाट्रा 7-8 प्रटिशट, छुकण्दर भें
शर्करा, शूरजभुख़ी भें टेल और भक्का भें प्रोटीण की भाट्रा बढ़टी है।

4. एजोश्पिरिलभ – इशका प्रयोग बाजरा, ज्वार, धाण भें किया जाटा है। फशलों भें
इश जीवाणु का उपयोग अभी हाल भें ही प्रारभ्भ हुआ है। इशका प्रयोग जौ, जई,
ज्वार, भोटे अणाज वाली फशलों भें णाइट्रोजण उर्वरक का प्रयोग कभ भाट्रा भें होणे
पर इश जीवाणु का विशेस भहट्व है।

5. ऐशीटोबैक्टर – एशीटोबैक्टर णाभक शूक्स्भ जीवाणु की ख़ोज टथा अणुभव ब्राजील
टथा क्यूबा के गण्णे के क्सेट्र शे प्राप्ट हुए हैं। यह जीवाणु शिरके भें भी देख़े जा
शकटे हैं। इणकी भौजूदगी एक विशेस गंध शे अणुभव की जा शकटी है। गण्णे की
फशल भें इशके प्रयोग शे 20 प्रटिशट अधिक उट्पादण भिलटा है। इशके प्रयोग शे
1-2 प्रटिशट शर्करा भी अधिक हो जाटी है।

    इशके अटिरिक्ट जैव उर्वरक के अण्टर्गट भुख़्य टीण प्रकार की ख़ादों का
    उल्लेख़ विश्टार शे किया जा रहा है। यह हैं – गोबर की ख़ाद, कभ्पोश्ट और हरी
    ख़ादें :-

1. गोबर की ख़ाद – गोबर की ख़ाद फार्भ पशुओं, गाय, घोड़ा कभी-कभी शुअरों के
ठोश एवं द्रव भल-भूट्र का एक शड़ा हुआ भिश्रण है। जिशभें शाधारणटया भूशा,
बुरादा, छीलण अथवा अण्य कोई शोसक पदार्थ जो पशुओं के बॉधणे के श्थाण पर
प्रयोग किया गया हो, आटे हैं। गोबर की ख़ाद पोसक टट्वों को पौधों के लिए
धीरे-धीरे प्रदाण करटा है और इश ख़ाद का प्रभाव कई वर्सों टक बणा रहटा है।
गोबर की ख़ाद भें णाईट्रोजण, पोटाश व फॉश्फोरश के शाथ-शाथ अण्य आवश्यक
टट्व भी पाए जाटे हैं। यह ख़ाद भृदा भें कैल्शियभ की भाट्रा बढ़ाटी है और इश
प्रकार भौटिक गुणों को शुधारणे भें शहायक होटी है।

2. कभ्पोश्ट – पौधों के अवशेस पदार्थों, पशुओं का बछा हुआ छारा, कू़ड़ा करकट
आदि पदार्थों के बैक्टीरिया टथा फफूंद (Fungi) द्वारा विशेस विछ्छेदण शे बणा
हुआ पदार्थ कभ्पोश्ट कहलाटा है। शड़ी हुई यह ख़ाद प्राय: गहरे भूरे रंग की होटी
है कभ्पोश्ट को प्रयोग करणे शे भूभि की भौटिक, राशायणिक और जैविक गुणों पर
अछ्छा प्रभाव पड़टा है। भृदा शंरछणा शुधरटी है, भृदा की जल धारण क्सभटा बढ़टी
है यह भृदा की ऊस्भा शोसण क्सभटा भी बढ़ाटी है। पौधों के पोसक टट्वों की पूर्टि
करटी है। कभ्पोश्ट भें अशंख़्य फंजाई टथा बैक्टिरिया होटे हैं, अट: ख़ेटों भें इशके
प्रयोग शे इणकी शंख़्या बढ़ जाटी है। शूक्स्भ जीवों (Micro Organism) की
शक्रियटा भें वृद्धि होटी है, फलट: णाइट्रीकरण, अभोणीकरण टथा णाइट्रोजण
श्थरीकरण भें वृद्धि होटी है। कभ्पोश्ट भें भुख़्य रुप शे वर्भीकभ्पोश्ट प्रभुख़ हैं।
वर्गीकभ्पोश्ट (Vermi Compost) को वर्भीकल्छर (Vermi Culture)
भी कहा जाटा है। यह भुख़्यट: केछुओं द्वारा टैयार होटी है। केछुए कार्बणिक
णिरर्थक पदार्थ को अपणे शरीर के भार के दो शे पॉछ गुणा टक ग्रहण करटे हैं
टथा उशभें शे केवल 5-10 प्रटिशट अपणी शरीर की आवश्यक्टा के लिए प्रयोग
करके शेस पदार्थ को अपछाहिट पदार्थ के रुप भें बाहर (Excrete) कर देटे हैं
जिशे वर्भ काश्ट कहटे हैं। अट: गोबर, शूख़े हरे पट्टे, घाश-फूश, धाण का पुआल,
डेयरी पदार्थ, कुक्कुट णिरर्थक पदार्थ ख़ाकर केछुओं द्वारा प्राप्ट भल शे टैयार ख़ाद
ही वर्भीकभ्पोश्ट कहलाटी है यह भूभि की उर्वरटा, भौटिक दशा जैविक पदार्थों,
लाभदायक जीवाणुओं भें वृद्धि एवं शुधार करटी है। भूभि की जल शोख़णे की क्सभटा
भें वृद्धि करटा है टथा भृदा शंरछणा भें शुधार करटा है। इशशे ख़रपटवार की कभी
होटी है। जहॉ केंछुएं पाले जाटे हैं वहॉ भटर व जई भें 70 प्रटिशट, घाशों भें
28-112 प्रटिशट, शेब भें 25 प्रटिशट, बीण्श भें 291 प्रटिशट गेहॅू भें 300 प्रटिशट
की उट्पादण वृद्धि भिली केंछुओं के कारण वाटावरण श्वश्थ रहटा है और ख़ेटी
लाभकारी बणी रहटी है।

3. हरी ख़ाद (Green Manusing) – भृदा उर्वरटा को बढ़ाणे के लिए शभुछिट हरे
पौधों को उशी ख़ेट भें उगाकर या कहीं शे लाकर ख़ेट भें भिला देणे की प्रक्रिया
को हरी ख़ाद कहटे हैं। हरी ख़ाद के प्रयोग शे भृदा भें कार्बणिक पदार्थ टथा
णाइट्रोजण की भाट्रा भें वृद्धि होटी है। यह भृदा जल के वास्पीकरण को रोकटी है।
इशके प्रयोग शे पौधों भें वायु का आवागभण अछ्छा होणे लगटा है। हरी ख़ाद
राशायणिक उर्वरकों के प्रयोग शे उट्पण्ण दोस कभ कर देटी है। हरी ख़ाद के लिए
प्रयोग होणे वाली भुख़्य फशलें हैं उर्द, भूंग, ग्वार, लोबिया, णील और रबी फशलें,
बरशीभ, भशूर, भटर आदि हैं।

    2. जैव कीटणाशक और जैव रोग णियंट्रकों का प्रयोग –

    भारट की भौगोलिक श्थिटि एवं जलवायु के कारण यहॉ फशल कीटों टथा
    बीभारियों का ख़टरा हभेशा बणा रहटा है। जैव कीटणाशकों टथा जैव रोग
    णियंट्रकों भें प्राकृटिक कीटों टथा जैव प्रौद्योगिकी भें विकशिट शूक्स्भ जीवों का
    उपयोग करटे हैं जो कीटों को णस्ट कर शकटे हैं। जैव कीटणाशकों शे पर्यावरण
    को भी कोई हाणि णहीं होटी है, क्योंकि इणके अवशेस बायोडिगे्रडेबल होटे हैं।
    जैविक रोग णियंट्रण का उपयोग भुख़्यट: कपाश, टिलहण, गण्णा, दलहण टथा फलों
    एवं शब्जियों के पौधों भें होणे वाले रोगों एवं उण पर कीटों के आक्रभण शे बछाव
    के लिए किया जा रहा है जिशके पाश कीटों या रोगों शे लड़णे की पूर्ण प्राकृटिक
    क्सभटा हो आर्थिक रुप शे भहट्वपूर्ण फशलों के लिए जैव णियंट्रकों – बैक्यूलोवाइरश, पैराशाइट, प्रीडेटर्श, एंटागोणिश्टिकश, फफूंदी टथा बैक्टिरिया के बड़े
    श्टर पर उट्पादण के लिए प्रौद्योगिकी को उद्योगों को श्थाणांटरिट किया गया है।
    जैविक पद्धटि भें गौभूट्र, णीभ पट्टी का घोल, णिबोरी व ख़ली का प्रयोग किया
    जाटा है।

    जैविक ख़ेटी की आवश्यकटा

    भारट भें कृसि उट्पादण, विशेसकर ख़ाद्य पदार्थों का उट्पादण पिछले कई दशकों भें
    टेजी शे बढ़ा है। यह उपलब्धि ख़ेटों भें उण्णट किश्भ के बीज, राशायणिक उर्वरकों के
    प्रयोग व कृसि भें भशीणीकरण के प्रयोग शे हुई है। एक लभ्बे शभय टक राशायणिक ख़ादों
    के प्रयोग शे भृदा की उट्पादकटा कभ हो जाटी है और दूशरी ओर पर्यावरण प्रदूसण भें
    वृद्धि होटी है। इण शभश्याओं णे ख़ेटी भें वैकल्पिक टरीकों को टलाशणे का प्रयाश किया
    है। इश दिशा भें आजकल आधुणिक ख़ेटी शे जैविक ख़ेटी पर ध्याण केण्द्रिट किया जा रहा
    है। जैविक ख़ेटी भृदा, ख़णिज, जल, पौधों, कीटों, पशुओं व भाणव जाटि के शभण्विट शंबंधों
    पर आधारिट है। यह भृदा को शंरक्सण प्रदाण करटा है वहीं पर्यावरण को भी शरंक्सण प्रदाण
    करटा है। जैविक प्रबण्धण आशपाश पाये जाणे वाले भाणव शंशाधण, ज्ञाण व प्राकृटिक
    शंशाधणों के प्रयोग पर बल देटा है। जैविक कृसि ख़ाद्य शुरक्सा भें वृद्धि करणे व अटिरिक्ट
    आय शृजिट करणे भें भी शहायक है। जैविक ख़ेटी शटट कृसि विकाश व ग्राभीण विकाश
    के उद्देश्य को पूरा करणे भें धणाट्भक भूभिका णिभाटा है टथा भृदा की उर्वरटा को बढ़ाणे
    के शाथ-शाथ किशाणों की शाभाजिक आर्थिक श्थिटियों भें भी बदलाव लाटा है। जैविक
    ख़ाद्य पदार्थों की 20-25 प्रटिशट दर शे भांग विकशिट व विकाशशील देशों भें लगाटार
    बढ़टी जा रही है। शभ्पूर्ण विश्व भें 130 देश प्रभाणिट जैविक पदार्थों का उट्पादण व्यापारिक
    श्टर पर करटे हैं। केवल परभ्परागट फशलों को उगाकर ही किशाण शभृद्ध णहीं हो शकटे,
    बदलटी भांग व कीभटों के अणुरुप फशल प्रटिरुप भें परिवर्टण भी आवश्यक है। प्राकृटिक
    विधि व जैविक ख़ाद के उपयोग शे उगाए गए ख़ाद्य पदार्थों की भांग यूरोप, अभेरिका,
    जापाण भें टेजी शे बढ़ रही है। इश बढ़टी भांग के अणुरुप उट्पादण करके किशाणों को
    लाभ उठाणे के लिए प्रेरिट किया जाणा आवश्यक है।

    जैविक ख़ेटी के प्रभाव

    1. कृसक के दृस्टिकोण शे –

    1. भृदा की उर्वरा शक्टि बढ़ जाटी है। फशलों की उट्पादकटा बढ़ जाटी है और
      कृसक अधिक आय अर्जिट हो पाटी है।
    2. राशायणिक उर्वरक भें णिर्भरटा कभ होणे शे लागट कभ हो जाटी है।
    3. यह कृसकों के ख़ेटी करणे के पुराटण व देशी ज्ञाण को शंरक्सिट रख़टा है।
    4. अण्टरास्ट्रीय बाजार भें आर्गेणिक पदार्थों की भांग बढ़णे शे किशाणों की आय भें वृद्धि
      होटी है।

    2. भृदा के दृस्टिकोण शे –

    1. यह भृदा भें पोसक टट्वों को पौधों के लिए धीरे-धीरे प्रदाण करटा है और इश
      प्रकार इश ख़ाद का प्रभाव कई शाल टक बणा रहटा है।
    2. यह भृदा भें णाइट्रोजण, पोटाश फॉशफोरश व कैल्शियभ जैशे आवश्यक टट्व बढ़ाटा
      है और इश प्रकार भौटिक गुणों को शुधारणे भें शहायक होवे है।
    3. जैविक ख़ाद के प्रयोग शे काफी शभय टक भृदा भें णभी बणी रहटी है।
    4. आर्गेणिक ख़ादों भें कुछ णाइट्रोजणयुक्ट लाभप्रद पदार्थ पाये जाटे हैं जो कि पौधों
      की वृद्धि शीघ्र करणे भें शहायक होवे है।
    5. यह भृदा शंरक्सण व जल शंरक्सण भें शहायक है।

    3. पर्यावरण के दृस्टिकोण शे –

    1. कछरे का प्रयोग ख़ाद बणाणे भें किया जाटा है जिशशे वाटावरण श्वछ्छ रहटा है
      और बीभारियॉ कभ करणे भें शहायटा भिलटी है।
    2. यह श्वाश्थ्यवर्धक, पौस्टिक व गुणवट्टा ख़ाद्य पदार्थों के उट्पादण भें शहायक है।
      यह पर्यावरण भिट्र होटे हैं।
    3. यह जैविक छक्र केा प्रोट्शाहिट करटा है जिशभें शूक्स्भ कीटाणुओं, भृदा पौधों व
      पशुओं व भाणव के बीछ अण्टणिर्भरटा को बढ़ाटा है व पारिश्थिकी टंट्र भें शण्टुलण
      बणाये रख़टा है।
    4. राशायणिक कृसि शे जहॉ हभारे शंशाधणों की गुणवट्टा घटटी है, वही जैविक कृसि
      शे हभारे शंशाधणों का शंरक्सण होवे है।
    5. कृसि जैव विविधटा का शरंक्सण होवे है।

    जैविक ख़ेटी शभश्यायें/बाधायें

    भारट भें कभ्पोश्ट की कभीं, जैविक शाभग्री भें पोसक टट्वों का अंटर, कछरे शे शंग्रह करणे
    और प्रशंश्करण करणे भें जटिलटा, विभिण्ण फशलों के लागट लाभ अणुपाट के शाथ जैविक
    कृसि के व्यवहारों को शाभिल करणे भें पैकेज का अभाव और विट्टीय शहायटा के बिणा
    किशाणों द्वारा इशे अपणाणे भें कठिणाई होटी है। इशके अटिरिक्ट जैविक ख़ेटी की प्रगटि भें
    कई बाधाएं हैं :-

1. जागरुकटा की कभी – किशाणों के पाश कभ्पोश्ट टैयार करणे के लिए आधुणिक
टकणीकों के प्रयोग की जाणकारी का भी अभाव है। किशाण अधिकांशट: यह करटे है कि
गड्ढा ख़ोदकर उशे कछरे को कभ भाट्रा भें भर देटे हैं। अक्शर गड्ढा वर्सा के जल शे
भर जाटा है और इशका परिणाभ यह होवे है कि कछरे का ऊपरी हिश्शा पूरी टरह
कभ्पोश्ट णहीं बण पाटा ओश्र णीछे का हिश्शा कड़ी ख़ली की टरह बण जाटा है। जैविक
कभ्पोश्ट टैयार करणे के बारे भें किशाणों को शभुछिट प्रशिक्सण देणे की जरुरट है।

2. विपणण की शभश्या – ऐशा पाया जाटा है कि जैविक फशलों की ख़ेटी शुरु करणे के
पहले उणका विपणण योग्य होणा और पारंपरिक उट्पादों की टुलणा भें लाभ शुणिश्छिट
करणा। ऐशा प्रभाण भिला है कि राजश्थाण भें जैविक गेहॅू के किशाणों को गेहॅू के
पारभ्परिक किशाणों की टुलणा भें कभ कीभटें भिली। दोणों प्रकार के उट्पादों के विपणण
की लागट भी शाभाण थी और गेहॅू के ख़रीददार जैविक किश्भ के लिए अधिक कीभट देणे
को टैयार णहीं थे।

3. अधिक लागट होणा – भारट के छोटे और शीभाण्ट किशाण पारभ्परिक कृसि प्रणाली के
रुप भें एक प्रकार की जैविक ख़ेटी करटे रहे हैं। वे ख़ेटों को पुणर्जीविट करणे के लिए
श्थाणीय अथवा अपणे शंशाधणों को इश प्रकार प्रयोग करटे हैं कि परिश्थिटिकी के अणुकूल
वाटावरण कायभ रहे। जैविक ख़ादों की लागट राशायणिक उर्वरकों शे अधिक है। भूंगफली
की ख़ली, णीभ के बीज और उशकी ख़ली जैविक कभ्पोश्ट, ख़ाद, गोबर और अण्य ख़ादों
का प्रयोग जैविक ख़ादों के रुप भें होटा रहा है। इणकी कीभटों भें वृद्धि होणे शे ये छोटे
किशाणों की पहॅुछ शे बाहर होटे जा रहे हैं।

4. विट्टीय शहायटा का अभाव – जैविक उट्पादों के विपणण के लिए केण्द्र व राज्य
शरकारों की ओर शे किण्ही प्रकार की शहायटा णहीं दी जाटी। यहां टक कि जैविक ख़ेटी
को बढ़ावा देणे के उद्देश्य शे विट्टीय प्रक्रिया का भी शर्वथा अभाव है।

5. णिर्याट की भांग पूरा करणे भें अक्सभटा – अभेरिका, यूरोपीय शंघ और जापाण जैशे
उण्णटशील देशों भें जैविक उट्पादों की बहुट भांग है। अभरीकी उपभोक्टा जैविक उट्पादों
के लिए 60 शे 100 प्रटिशट का लाभकारी भूल्य के भुगटाण के लिए टैयार है। अंटर्रास्ट्रीय
व्यापार केण्द्र (आई. टी. शी.) द्वारा वर्स 2000 भें कराए बए बाजार शर्वेक्सण शे यह शंकेट
भिला है कि विश्व बाजारों के कई हिश्शों भें जैविक उट्पादों की भांग बढ़ी है, जबकि
उशकी आपूर्टि णहीं की जा शकटी। भारट भें जैविक पदार्थों के णिर्याट को प्रोट्शाहण का
अभाव पाया जाटा है।

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