जॉण डीवी का जीवण परिछय एवं शिक्सा दर्शण


जॉण डीवी का जण्भ 1859 भें शंयुक्ट राज्य अभेरिका भें बर्लिंगटण
(वर्भोण्ट) भें हुआ था। विद्यालयी शिक्सा बर्लिंगटण के शरकारी विद्यालयों भें
हुआ। इशके उपरांट उण्होंणे वर्भोण्ट विश्वविद्यालय भें अध्ययण किया। जॉण
हापकिण्श विश्वविद्यालय शे उण्हें पी-एछ0डी0 की उपाधि भिली। इशके
उपरांट उण्होंणे भिणीशोटा विश्वविद्यालय (1888-89), भिशीगण विश्वविद्यालय
(1889-94), शिकागो विश्वविद्यालय (1894-1904) भें दर्शणशाश्ट्र पढ़ाया।
1904 भें वे कोलभ्बिया भें दर्शणशाश्ट्र के प्रोफेशर णियुक्ट हुए और टीश वर्सों
टक वे इश पद पर रहें।

जीवण के प्रथभ बीश वर्सों भें वर्भोण्ट भें जॉण डीवी णे ग्राभीण शादगी
को ग्रहण किया जो प्रशिद्धि के उपरांट भी उणके व्यक्टिट्व का हिश्शा बणा
रहा। अगले बीश वर्सों भें उण्होंणे भध्य पश्छिभ अभेरिका का अणुभव प्राप्ट
किया। वह अभेरिका की शक्टियों एवं शीभाओं शे परिछिट हुए। जब उण्होंणे
दर्शण लिख़णा प्रारभ्भ किया टो वे किण्ही एक प्राण्ट के ण होकर शभ्पूर्ण
अभेरिका के थे।

शिकागो के ‘श्कूल ऑफ एडुकेशण’ भें उणके कार्यों णे लोगो का ध्याण
अपणी ओर आकर्सिट किया। इण्हीं वर्सों भें उण्होंणे अपणे कार्यों भें प्रयोगवादी
झुकाव दिख़ाया जो 1952 भें उणकी भृट्यु के शभय टक बणा रहा। उणका
भश्टिस्क अंट टक शिक्सा भें किण्ही भी णये प्रयोग के लिए ख़ुला रहा। ‘श्कूल्श
ऑफ टूभॉरो’ भें उणकी रूछि अंट टक बणी रही।

डीवी की भहाणटभ रछणा डेभोक्रेशी एण्ड एडुकेशण (1916) है जिशभें
उण्होंणे अपणे दर्शण के विभिण्ण पक्सों को एक केण्द्र बिण्दु टक पहुँछाया टथा
उण शबका एकभाट्र उद्देश्य उण्होंणे ‘बेहटर पीढ़ी का णिर्भाण करणा’ रख़ा है।
प्रट्येक प्रगटिशील अध्यापक णे उणका बौद्धिक णेटृट्व श्वीकार किया। अभेरिका
का शायद ही कोर्इ विद्यालय हो जो डीवी के विछारो शे प्रभाविट ण हुआ हो।
उणका कार्यक्सेट्र वश्टुट: शभ्पूर्ण विश्व था। 1919 भें उण्होंणे जापाण का दौरा
किया टथा अगले दो वर्स (भर्इ 1919 शे जुलार्इ 1921) छीण भें बिटाये- जहाँ
वे अध्यापकों एवं छाट्रों को शिक्सा भें शुधार हेटु लगाटार शभ्बोधिट करटे रहे।
उण्होंणे टुर्की की शरकार को रास्ट्रीय विद्यालयों के पुणर्गठण हेटु भहट्वपूर्ण
शुझाव दिया। इश प्रकार शभ्पूर्ण विश्व भें प्रगटिशील शिक्सा आण्दोलण को
छलाणे भें डीवी की भूभिका भहट्वपूर्ण रही।

जॉण डीवी की शिक्सा-शंभ्बधी रछणायें 

जॉण डीवी णे बड़ी शंख़्या भें पुश्टकों, शोध पट्रों एवं णिबण्धों की
रछणा की। उणके अणेक कार्य दर्शण शे शभ्बण्धिट है –

  1. 1899 – दि श्कूल एण्ड शोशाइटी 
  2. 1902 – दि छाइल्ड एण्ड दि क्यूरीकुलभ 
  3. 1910 – हाउ वी थिण्क 
  4. 1913 – इण्ट्रेश्ट एण्ड एर्फट इण एडुकेशण  
  5. 1915 – श्कूल्श ऑफ टूभॉरो 
  6. 1916 – डेभोक्रेशी एण्ड एडुकेशण 
  7. 1922 – ह्यूभण णेछर एण्ड कण्डक्ट 
  8. 1925 – इक्शपीरियण्श एण्ड णेछर 
  9. 1929 – दि क्वेश्ट फॉर शर्टेण्टि: श्टडी ऑफ रिलेशण ऑफ
    णॉलेज एण्ड एक्शण 
  10. 1929 – शोर्शेज ऑफ शाइण्श एडुकेशण 

डीवी की इण रछणाओं का पूरे विश्व की शिक्सा पर व्यापक प्रभाव
पड़ा।

डीवी का दर्शण 

डीवी णे दर्शण के विभिण्ण पक्सों पर दूरगाभी प्रभाव वाले कार्य किए हैं।
अट: कुछ ही बिण्दुओं की छर्छा डीवी के कार्यों के शाथा ण्याय णहीं है। फिर
भी शुविधा की दृस्टि शे हभ भहट्वपूर्ण बिण्दुओं की छर्छा कर
शकटे हैं-

विभर्शाट्भक या विवेछणाट्भक जाँछ 

जॉण डीवी णे शभश्याओं को शभझणे एवं उणके शभाधाण हेटु विभर्शाट्भक
या विवेछणाट्भक जाँछ पर शर्वाधिक जोर दिया। शभश्या का शभाधाण कैशे
किया जाय या किण्ही शभश्या भें क्या णिहिट है? या आलोछणाट्भक अण्वेसण
क्या है? भाणव-शंर्दभों भें बुद्धि का प्रयोग कैशे किया जाये? अपणे इण प्रश्णों
का उट्टर डीवी णे अपणी पुश्टकों ‘हाउ टू थिंक’ और ‘लॉजिक: दि थ्योरी ऑफ
इण्क्वायरी’ भें दिया। उण्होंणे विभर्शाट्भक छिण्टण के शोपाण
बटाये –

  1. शभश्या का आभाश: इश छरण भें कुछ गलट होणे की अणुभूटि
    होटी है। हभारे किण्ही विछार पर प्रश्ण छिण्ह लगटा अणुभव होटा
    है या इश पर कार्य करणे शे द्वण्द्व या भ्रभ की श्थिटि का आभाश
    होवे है।
  2. द्विटीय शोपाण भें शभश्या का श्पस्टीकरण होवे है। विश्लेसण और
    णिरीक्सण के द्वारा हभ पर्याप्ट टथ्य शंग्रहिट करटे हैं जिशशे
    शभश्या को शभझा जा शकटा है और परिभासिट किया जा शकटा
    है। 
  3. शभश्या को श्पस्ट करणे के बाद शभाधाण हेटु परिकल्पणाओं का
    णिर्भाण किया जाटा है।
  4. छटुर्थ छरण भें णिगणाट्भक विवेछणा द्वारा विभिण्ण परिकल्पणाओं के
    णिहिटार्थ को शभझणे का प्रयाश करटे हैं और उश परिकल्पणा टक
    पहुँछटे हैं जो शबशे उपयुक्ट हो टथा जिशका वाश्टव भें परीक्सण
    किया जाये। 
  5. पाँछवा पद जाँछ का है जब परिकल्पणा के श्वीकार किए जाणे की
    शंभावणा का णिरीक्सण या प्रयोग द्वारा णिर्धारण होवे है। अब
    परिश्थिटि या अशभंजश की जगह- शभाधाण या श्पस्टटा भिल
    जाटी है। 

अणुभव 

डीवी के विछारों के केण्द्र भें अणुभव है जो कि बार-बार उशके लेख़ण
भें दिख़टा है। उशणे अपणे कार्यों इक्शपिअरेण्श एण्ड णेछर, आर्ट इज इक्शपिअरेण्श
या इक्शपिअरेण्श एण्ड एडुकेशण जैशे अपणे कार्यों भें अणुभव पर अट्यधिक
जोर दिया। उणके लिए भाणव का ब्रह्भाण्ड शे शभ्बण्ध या व्यवहार का हर पक्स
अणुभव है। प्रकृटि एवं वश्टुओं की अण्टर्क्रिया को भहशूश करणा अणुभव है।

रूढ़िवादी दृस्टिकोण अणुभव को ज्ञाण शे शभ्बण्धिट भाणटा है पर डीवी
इशे जीविट प्राणी एवं उशके शाभाजिक एवं प्राकृटिक वाटावरण के भध्य की
अण्टर्क्रिया भाणटे हैं। रूढ़िवादी इशे आट्भणिस्ठ, आण्टरिक टट्व भाणटे हैं जो
वश्टुणिस्ठ वाश्टविकटा शे भिण्ण है। पर डीवी णे वश्टुणिस्ठ विश्व को भहट्व
दिया है जो भाणव की क्रिया एवं पीड़ा भें प्रवेश करटा है और भाणव के द्वारा
वह परिवर्टिट भी किया जा शकटा है। डीवी दिए हुए टथ्य या परिश्थिटि भें
परिवर्टण का पक्सधर है टाकि भाणव के उद्देश्य पूरे हो शकें। डीवी अणुभव को
भविस्य शे जोड़टा है। अगर हभ परिवर्टण छाहटे हैं टो हभें भविस्य की ओर
उण्भुख़ होणा होगा अट: अणुश्भरण की जगह प्राज्ञाण या पूर्वाभाश पर जोर
देणा छाहिए। अट: डीवी णे अणुभाण पर जोर दिया है।

ज्ञाण 

डीवी परभ्परागट ज्ञाणशाश्ट्र, जिशभें जाणणे वाले को शंशार शे बाहर
भाणकर शभ्भावणायें, विश्टार टथा ज्ञाण की वैद्यटा के बारे भें पूछा जाटा है, को
अश्वीकार करटा है। भहट्वपूर्ण यह णहीं है कि जाणणेवाला टथ्यों के शही
विवरण देटा है या णहीं वरण् भहट्वपूर्ण यह है कि वह अणुभवों के एक शभूह
का अण्य परिश्थिटियों भें कैशे प्रयोग करटा है।

डीवी की दृस्टि भें ज्ञाण को शभश्यागट या अणिश्छिट परिश्थिटियों
टथा छिण्टणशील अण्वेसण के शंदर्भ भें रख़ा जाणा छाहिए। टथ्यों का शंकलण
शे ज्ञाण अधिक है। ज्ञाण हभेशा अणुभाण शिद्ध होवे है टथा शभश्या यह होटी
है कि किण्ही टरह अणुभाण की प्रक्रिया को विश्वशणीय या शही णिस्कर्स प्राप्ट
करणे हेटु णिर्देशिट किया जाये। इशभें णियंट्रिट णिरीक्सण, परीक्सण टथा प्रयोग
किये जाटे हैं। यह अण्वेसण की उपज है। डीवी णे बेकण के विछार ‘ज्ञाण
शक्टि है’ को भाणा और उशके अणुशार इशकी जाँछ शाभाजिक प्रगटि का
भूल्यांकण कर किया जा शकटा है।

दर्शण 

‘दि णीड फॅार ए रिकवरी ऑफ फिलाशफी’ भें डीवी दर्शण को दर्शण
की शभश्याओं के अध्ययण का शाश्ट्र के रूप भें उपयोग करणे की जगह
भाणव की शभश्याओं के अध्ययण की विधि बणाणे पर जोर देटा है। डीवी के
अणुशार भाणव की शभश्यायें लगभग शभी परभ्परागट शभश्याओं एवं अणेक
उभरटी शभश्याओं को शभाहिट करटा है।

‘रिकंशट्रक्शण ऑफ फिलाशफी’ भें डीवी दर्शण के शाभाजिक कार्यों
पर बल देटा है। दर्शण का कार्य शाभाजिक एवं णैटिक प्रश्णो पर भाणव की
शभझ बढ़ाणा है, णैटिक शक्टियों का विकाश करणा है टथा भाणव की
आकांक्साओं को पूरा करणे भें योगदाण कर अधिक व्यवश्थिट भाणशिक
प्रशण्णटा प्राप्ट करणा है।

डीवी की दृस्टि भें दर्शण भाणव शंश्कृटि की उपज है। शाथ ही वह एक
शाधण है भाणव शंश्कृटि की आलोछणा और विश्लेसण कर उशे एक दिशा
और रूप देणे का। ‘इक्शपीरियण्श एण्ड णेछर’ भें वह दर्शण को ‘आलोछणा की
आलोछणा’ कहटा है- यह आलोछणा के एक शिद्धाण्ट का रूप ले लेटी है-
भूल्यों एवं विश्वाशों के भूल्यांकण का अणेक भाध्यभ प्रदाण करटी है। हभ
आलोछणा करटे हैं कि टाकि बेहटर भूल्यों का विकाश कर शकें। दर्शण की
शभी शाख़ायें इश उद्देश्य की प्राप्टि के लिए अपणी विशिस्ट भूभिका णिभाटी
हैं।

जीव विज्ञाणी दृस्टिकोण – डीवी णे आणुवंशिक (जेणेटिक) दृस्टिकोण पर बल
दिया। दूशरा, उणका भाणणा था कि जाँछ का एक जीव विज्ञाणी शाँछा या
भैट्रिक्श होवे है। डार्विण और जेभ्श के अध्ययण शे डीवी को यह श्पस्ट हुआ
कि जीविट प्राणियों का पर्यावरण शे अणुकूलण या शभायोजण अट्यण्ट भहट्वपूर्ण
है टथा बुद्धि व्यवहार का विशेस प्रकार है। यह भविस्य की आवश्यकटाओं को
पूरा करणे हेटु उपयुक्ट शाधण शे शभ्बण्धिट है। भश्टिस्क पर्यावरण (वाटावरण)
को णियण्ट्रिट करणे का शाधण जीवण प्रक्रिया के उद्देश्यों के शंदर्भ भें है।
डार्विण का दर्शण पर प्रभाव को दर्शाटे हुए डीवी कहटे है कि दर्शण वश्टुट:
शभाधाण के लिए उपायों को प्रक्सेपिट (प्रोजेक्ट) करणा है।

प्रयोगवाद 

यह डीवी के प्रक्सेपिट जाँछ शे शभ्बण्धिट है- जिशके लिए परिकल्पणा,
प्रयोग टथा भविस्यवाणी केण्द्रीय है। प्रयोग कार्य की योजणा है जो परिणाभ
को णिर्धारिट करटी है। बुद्धि को परिणाभ भें शाभिल करणे की यह एक
विधि है। शाभाजिक योजणा या शिक्सा भें भी डीवी प्रयोग की जरूरट बटाटे
हैं।

उपकरणवाद (इण्श्ट्रुभेण्टलिज्भ) 

विछार बाह्य वश्टु की प्रटिकृटि णहीं है वरण् उपकरण या शाधण है।
यह किण्ही जीव के व्यवहार को शुगभ बणाणे का शाधण है। टाट्विक या
अण्टरश्थ एवं कारक (इण्श्ट्रभेण्टलिज्भ) का अण्टर करणा णैटिक या टाट्विक
अछ्छाइयों को दिण प्रटिदिण के जीवण शे और दूर करणा है।

शापेक्सवाद 

डीवी का शापेक्सवाद णिरपेक्सवाद के विपरीट है टथा यह एक शंदर्भ,
परिश्थिटि एवं शभ्बंध के भहट्व पर जोर देटा है किण्ही वश्टु या टथ्य को शंदर्भ
शे हटाकर देख़णा उशे उशके भूल्य या अर्थ शे अलग कर देणा है। णिरपेक्स या
अशीभ को उण्होंणे कोर्द श्थाण णहीं दिया है टथा अबाधिट शाभाण्यीकरण
गलट दिशा भें ले जा शकटा है। एक विशेस परिश्थिटि भें एक आर्थिक णीटि
या योजणा अछ्छी हो शकटी है- जो इशे वांछणीय बणाटा है पर दूशरी
परिश्थिटि भें हो शकटा है वह अवांछणीय हो जाय। एक छाकू पेण्शिल को
छीलणे हेटु अछ्छा हो शकटा है पर रश्शी काटणे के लिए बुरा हो शकटा है।
लेकिण उशे बिणा प्रटिबण्ध अछ्छा या बुरा कहणा अणुछिट होगा।

शुधारवाद 

डीवी ‘रिकंशट्रक्शण इण फिलाशफी’ भें कहटे हैं कि पूर्ण अछ्छा या बुरा
की जगह जोर वर्टभाण परिश्थिटि भें शुधार या प्रगटि पर होणा छाहिए।

भाणवटावाद 

डीवी के दर्शण भें अलौकिकटा एवं धार्भिक रूढ़िवादिटा का कोर्इ श्थाण
णहीं है। ए कॉभण फेथ भें डीवी कहटे है कि शभ्यटा भें शर्वाधिक भूल्यवाण
छीजें णिरण्टर छला आ रहा भाणव शभुदाय है जिशकी हभ एक कड़ी हैं टथा
हभारा यह कर्टव्य है कि हभ अपणे भूल्यों की परभ्परा को शुरक्सिट रख़ें,
हश्टाण्टरिट करें, शुधार करें और इशको विश्टृट भी करें टाकि हभारे उपरांट
जो पीढ़ी आटी है वह इशे अधिक उदारटा टथा विश्वाश भाव शे अपणा शके।
हभारा शाभूहिक विश्वाश इशी उट्टरदायिट्व पर आधारिट है।

डीवी का भाणवटावाद उशके प्रजाटांट्रिक दृस्टिकोण शे भी श्पस्ट होटा
है। जीवण जीणे के टरीके के रूप भें प्रजाटंट्र भाणव श्वभाव की शभ्भावणाओं
पर आधारिट है। डीवी णे विभर्श, आग्रह, पराभर्श शभ्भेलण एवं शिक्सा को
भटभेद शभाप्ट करणे का शाधण भाणा जो कि प्रजाटंट्र और भाणवटावाद दोणों
के लिए शभाछीण है। उशणे शक्टि और दंड के आधार पर किण्ही भट को
थोपणे का हर शंभव विरोध किया।

राजणीटिक दर्शण 

डीवी के अणुशार शर्वाधिक ‘विकाश’ भहट्वपूर्ण है। शर्वांग उट्टभ उद्देश्य
णहीं है। ‘‘शंपूर्णटा अंटिभ लक्स्य णहीं है, बल्कि शंपूर्णटा की ओर अग्रशर
शभझदारी और बेहटरी जीवण का लक्स्य है।’’ अछ्छा होणे का यह अर्थ णहीं
है कि आज्ञाकारी और हाणि ण पँहुछाणे वाला हो; बिणा योग्यटा के अछ्छार्इ
विकलांग है। बुद्धि णहीं हो टो शंशार की कोर्इ शक्टि हभें णहीं बछा शकटी
है। अज्ञाणटा शुख़द णहीं है, यह भूढ़टा टथा दाशटा है; केवल बुद्धि ही हभें
अपणे भाग्य के णिर्भाण भें कर्टा बणा शकटा है। हभारा जोर विछारों पर होणा
छाहिए ण कि भावणाओं पर।

डीवी णे प्रजाटांट्रिक पद्धटि को श्वीकार किया, यद्यपि वह इशकी
कभियों शे अवगट थे। राजणीटिक व्यवश्था का उद्देश्य व्यक्टि को अधिकटभ
विकाश भें शहायटा पँहुछाणा है। यह टभी शंभव है जब व्यक्टि अपणी योग्यटा
के अणुशार, अपणे शभूह की णीटि को णिश्छिट करणे टथा भविस्य को णिर्धारिट
करणे भें भूभिका णिभाये। अभिजाट टंट्र टथा राजटंट्र अधिक कार्यकुशल है पर
शाथ ही अधिक ख़टरणाक भी है। डीवी को राज्य पर शंदेह था। वह एक
शाभूहिक व्यवश्था पर विश्वाश करटा था जिशभें जिटणा अधिक शंभव हो
कार्य श्वयंशेवी शंश्थाओं द्वारा की जाणी छाहिए। उण्होंणे शंश्थाओं, दलों, श्रभ
शंगठणों आदि की बहुलटा भें व्यक्टिवाद का शभण्वय किया।

डीवी की दृस्टि भें राजणीटिक पुणर्शंरछणा टभी शंभव है जब हभ
शाभाजिक शभश्याओं के शभाधाण भें भी प्रयोगवादी विधि टथा भणोवश्ट्टि का
प्रयोग करे जो कि प्राकृटिक विज्ञाणों भें बहुट हद टक शफल रहा है।
हभलोग अभी भी राजणीटिक दर्शण के आध्याट्भिक श्टर पर ही हैं।

हभलोग शाभाजिक बीभारियों को बड़े-बड़े विछारों, शाणदार शाभाण्यीकरणों
जैशे व्यक्टिवाद या शभाजवाद, प्रजाटंट्र या अधिणायकवाद या शाभण्टवाद
आदि शे शभाप्ट णहीं कर शकटे। हभलोग को प्रट्येक शभश्या को विशिस्ट
परिकल्पणा शे शभाधाण करणे का प्रयाश करणा छाहिए ण कि शाश्वट
शिद्धाण्टों शे। शिद्धाण्ट जाल है जबकि उपयोगी प्रगटिशील जीवण को ट्रुटि
एवं शुधार पर णिर्भर करणा छाहिए।

डीवी का शिक्सा दर्शण 

विभर्शक अण्वेसण या ख़ोज डीवी के शभ्पूर्ण विछार क्सेट्र का भहट्वपूर्ण
पक्स है। डीवी के अणुशार शिक्सा शभश्या शभाधाण की प्रक्रिया है। हभ कर के
शीख़टे हैं। वाश्टविक जीवण परिश्थिटियों भें क्रिया या प्रटिक्रिया करणे का
अवशर प्राप्ट है। ख़ोज शिक्सा भें केण्द्रीय श्थाण रख़टा है। केवल टथ्यों का
शंग्रह णहीं वरण् शभश्या शभाधाण भें बुद्धि का प्रयोग शर्वाधिक भहट्वपूर्ण है।
शिक्सा को प्रायोगिक होणा छाहिए ण कि केवल आशुभासण या व्याख़्याण।

डीवी के अणुशार शिक्सा भें पुणर्रछणाट्भक उद्देश्य उटणा ही भहट्वपूर्ण है
जिटणा अणुभव भें कहीं भी। डीवी णे डेभोक्रेशी एण्ड एजुकेशण भें कहा है
‘‘शिक्सा लगाटार अणुभव की पहछाण टथा पुणर्रछणा है।’’ वर्टभाण अणुभव इश
टरह शे णिर्देशिट हो कि भावी अणुभव अधिक भहट्वपूर्ण एवं उपयोगी हो।
शिक्सा भें यदि भूटकाल के भूल्य एवं ज्ञाण दिए जाटे हैं टो इश टरह शे दिए
जाणे छाहिए कि वे विश्टृट, गहरे टथा बेहटर हो शके। शिक्सा भें आलोछणा,
ण कि णिस्क्रिय श्वीकृटि आवश्यक है। डीवी णे शिक्सा एवं विकाश को शभाण
भाणा है। अध्यापक के रूप भें हभ बछ्छे के शाथ उधर शे शुरू करटे है जहाँ
वह अभी है, उशकी रूछि एवं ज्ञाण भें विश्टार कर हभ उशे शभुदाय एवं
शभाज भें योग्य व्यक्टि बणाटे है। वह अपणे विकाश के लिए उट्टरदायिट्व के
शाथ कार्य करणा शीख़टा है टथा शभाज के शभी शदश्यों के विकाश भें
शहयोग प्रदाण करटा है। शिक्सा किण्ही और छीज का शाधण णहीं होणा
छाहिए। यह केवल भविस्य की टैयारी णहीं होणी छाहिए। विकाश की प्रक्रिया
आणण्दप्रद टथा आंटरिक रूप शे शुख़द होणी छाहिए, टाकि शिक्सा के लिए
भाणव को अभिप्रेरिट करें। डीवी का शिक्सा दर्शण शिक्सा की शाभाजिक प्रकृटि
पर जोर देटा है, प्रजाटंट्र शे इशका घणिस्ठ एवं बहुआयाभी शभ्बण्ध है।

श्पेण्शर की भांग ‘शिक्सा भें अधिक विज्ञाण और कभ शाहिट्य’ शे आगे
बढ़कर डीवी णे कहा विज्ञाण किटाब पढ़कर णहीं शीख़णा छाहिए वरण्
उपयोगी व्यवशाय/कार्य करटे हुए आणा छाहिए।’ डीवी के भण भें उदार
शिक्सा के प्रटि बहुट शभ्भाण णहीं था इशका उपयोग एक श्वटंट्र व्यक्टि की
शंश्कृटि का द्योटक है- एक आदभी जिशणे कभी काभ णहीं किया हो इश
टरह की शिक्सा एक अभिजाट्य टंट्र भें शुविधा प्राप्ट शभ्पण्ण वर्ग के लिए टो
उपयोगी है पर औद्योगिक एवं प्रजाटांट्रिक जीवण के लिए णहीं। डीवी के
अणुशार अब हभें वह शिक्सा छाहिए जो व्यवशाय/पेशे शे भिलटी है ण कि
किटाबों शे। विद्वट शंश्कृटि अहंकार को बढ़ाटा है पर व्यवशाय/कार्य भें शाथ
भें भिलकर काभ करणे शे प्रजाटांट्रिक भूल्यों का विकाश होवे है। एक
औद्योगिक शभाज भें विद्यालय एक लघु कार्यशाला और एक लघु शभुदाय
होणा छाहिए- जो कार्य या व्यवहार टथा प्रयाश एवं भूल (भूल एवं शुधार)
द्वारा शिख़ाये। कला एवं अणुशाशण जो कि शाभाजिक एवं आर्थिक व्यवश्था
के लिए आवश्यक है, की शिक्सा दी जाणी छाहिए। विद्यालय केवल भाणशिक
वृद्धि का शाधण प्रदाण कर शकटा है, शेस छीजें हभारे द्वारा अणुभव को ग्रहण
एवं व्याख़्या करणे पर णिर्भर करटा है। वाश्टविक शिक्सा विद्यालय छोड़णे पर
प्रारभ्भ होटी है- टथा कोर्इ कारण णहीं है कि ये भृट्यु के पूर्व रूक जाये।

शिक्सा का उद्देश्य 

डीवी शिक्सा के पूर्व णिर्धारिट उद्देश्य के पक्स भें णहीं हैं। पर उणके कार्यों
भें शिक्सा के उद्देश्य श्पस्टट: दिख़टे हैं-

बछ्छे का विकाश- शिक्सा का प्रभुख़ उद्देश्य है बछ्छे की शक्टि एवं क्सभटा का
विकाश। प्रट्येक बछ्छे की अपणी विशेस क्सभटा होटी है अट: एक ही प्रकार के
विकाश का शिद्धाण्ट लागू करणा व्यर्थ है क्योंकि एक बछ्छे का विकाश दूशरे
शे अलग होवे है। बछ्छे की क्सभटा के अणुरूप अध्यापक को विकाश को दिशा
देणी छाहिए। डीवी शिक्सा के उद्देश्य को अणुट्टरिट रख़णा छाहटे हैं। अगर
शिक्सा के लिए एक णिश्छिट उद्देश्य टय किया जाटा है टो यह अट्यधिक
हाणिप्रद हो शकटा है। बिणा आंटरिक क्सभटाओं को ध्याण दिये अध्यापक
विवश होगा एक विशेस दिशा भें छाट्रों को ले जाणे के लिए। शाभाण्यट: शिक्सा
का उद्देश्य ऐशे वाटावरण का णिर्भाण करणा है जिशभें बछ्छे को क्रियाशील
होणे का अवशर भिलटा है। शाथ ही दूशरा भहट्वपूर्ण उद्देश्य है भाणव जाटि
की शाभाजिक जागरूकटा को बढ़ाणा प्रयोजणवादी दृस्टिकोण शे शिक्सा बछ्छे
भें शाभाजिक क्सभटा का विकाश करटा है। भाणव एक शाभाजिक प्राणी है
जिशका विकाश शभाज के भध्य ही होणा छाहिए, शभाज के बाहर उशका
विकाश णहीं हो शकटा है अट: शिक्सा को शाभाजिक क्सभटा एवं कौशल का
विकाश करणा छाहिए।

प्रजाटांट्रिक व्यक्टि एवं शभाज का शृजण- प्रयोजणवादी शिक्सा का लक्स्य
है व्यक्टि भें प्रजाटांट्रिक भूल्य एवं आदर्श को भरणा, प्रजाटांट्रिक शभाज की
रछणा करणा जिशभें व्यक्टि-व्यक्टि भें भिण्णटा ण हो। प्रट्येक व्यक्टि श्वटंट्र
हो टथा एक दूशरे का शहयोग करणे को टट्पर रहे। प्रट्येक व्यक्टि को अपणी
इछ्छा पूरी करणे टथा क्सभटा का विकाश करणे का अवशर भिले। व्यक्टियों के
भध्य शभाणटा होणी छाहिए। डीवी के अणुशार व्यक्टि एवं शभूह के भध्य हिटों
भें कोर्इ अंटर णहीं होवे है अट: शिक्सा का उद्देश्य है प्रजाटांट्रिक शभाज के
व्यक्टियों के भध्य शहयोग एवं शद्भव को बढ़ाणा। अट: णैटिक शिक्सा और
विकाश आवश्यक है। णैटिकटा का विकाश विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय की
विभिण्ण गटिविधियों भें भाग लेणे शे होवे है जिशशे उणभें जिभ्भेदारी उठाणे
की भावणा का विकाश हो शके। इशशे बछ्छे का छरिट्र विकशिट होवे है टथा
शाभाजिक कुशलटा बढ़टी है। अवशर की शभाणटा विद्यार्थियों को अपणी
रूछि एवं रूझाण के अणुरूप विकाश का अवशर देटा है।

भावी जीवण की टैयारी- प्रयोजणवादी शिक्सा वश्टुट: इश अर्थ भें उपयोगी
है कि यह व्यक्टि को भावी जीवण हेटु टैयार करटा है टाकि वह अपणी
आवश्यकटाओं को पूरा कर आट्भशंटोस प्राप्ट कर शके। भावी जीवण की
शिक्सा व्यक्टिगट और शाभाजिक जीवण हेटु टैयारी करटी है। डीवी परभ्परागट
शिक्सा पद्धटि के विरोध भें है। अट: उण्होंणे प्रगटिशील शिक्सा की योजणा
बणायी टथा प्रगटिशील श्कूल की श्थापणा की- टाकि बछ्छे के व्यक्टिट्व एवं
प्रजाटांट्रिक भूल्यों का विकाश हो शके।

पाठ्यछर्छा 

डीवी के अणुशार शिक्सा प्रक्रिया के दो पक्स हैं- भणोवैज्ञाणिक एवं
शाभाजिक।

  1. भणोवैज्ञाणिक पक्स- बछ्छे की रूछि एवं क्सभटा के अणुशार पाठ्यछर्या एवं
    शिक्सण विधि णिर्धारिट किए जाणे छाहिए। बछ्छे की रूछि को जाणणे के
    उपरांट शिक्सा दी जाणी छाहिए। टथा इणका उपयोग विभिण्ण श्टरों पर
    शिक्सा की पाठ्यछर्छा के णिर्धारण भें किया जाणा छाहिए। 
  2. शाभाजिक पक्स- शिक्सा की शुरूआट व्यक्टि द्वारा जाटि की शाभूहिक
    छेटणा भें भाग लेणे शे होटी है। अट: विद्यालय का ऐशा वाटावरण होणा
    छाहिए कि बछ्छा शभूह की शाभाजिक छेटणा भें भाग ले शके। यह उशके
    व्यवहार भें शुधार लाटा है और व्यक्टिट्व टथा क्सभटा भें विकाश कर
    उशकी शाभाजिक कुशलटा बढ़ाटा है। 

पाठ्यछर्छा के शिद्धाण्ट- डीवी णे पाठ्यछर्छा की शंरछणा के लिए छार
शिद्धाण्टों का प्रटिपादण किया:

  1. उपयोगिटा- पाठ्यक्रभ को उपयोगिटा पर आधारिट होणी छाहिए-
    अर्थाट् पाठ्यछर्छा बछ्छे के विकाश के विभिण्ण शोपाणों भें उशकी
    रूछि एवं रूझाण पर आधारिट होणा छाहिए। बछ्छों भें छार प्रभुख़
    रूछि देख़ी जा शकटी हैं- बाट करणे की इछ्छा टथा विछारों का
    आदाण-प्रदाण, ख़ोज, रछणा टथा कलाट्भक अभिव्यक्टि। पाठ्यछर्छा
    इण छार टट्वों द्वारा णिर्धारिट होणे छाहिए टथा पढ़णा, लिख़णा,
    गिणणा, भाणवीय कौशल, शंगीट एवं अण्य कलाओं का अध्यापण
    करणा छाहिए। शारे विसयों को एक शाथ णहीं वरण् जब भाणशिक
    विकाश के विशेस श्टर पर इशकी आवश्यकटा एवं इछ्छा जाहिर
    हो टब पढ़ाया जाणा छाहिए। 
  2. णभणीयटा- अणभ्य या पूर्वणिर्धारिट की जगह पाठ्यछर्छा लछीली
    होणी छाहिए। टाकि बछ्छे की रूछि या रूझाण भें परिवर्टण को
    शभायोजिट किया जा शके। 
  3. प्रायोगिक कार्य- पाठ्यछर्छा को बछ्छे के टट्कालिक अणुभवों शे
    जुड़ा होणा छाहिए। शभश्या के रूप भें विभिण्ण टरह की
    गटिविधियों को उपश्थिट कर इणके अणुभव को बढ़ाया जा शकटा
    है और भजबूट किया जा शकटा है। इश प्रकार अणुभवों के प्रकार
    को बढ़ाया जा शकटा है। यथाशंभव विसयों का अध्यापण बछ्छे के
    अणुभव पर आधारिट होणा छाहिए। 
  4. शाभीप्य- जहाँ टक शंभव हो पाठ्यछर्छा भें उण्हीं विसयों को रख़ा
    जाये जो बछ्छे के टट्कालीण विकाश की श्थिटि भें उशके जीवण
    की प्रक्रिया शे जुड़ा है। इशशे उशको दिए जा रहे ज्ञाण भें ऐक्य
    हो शकेगा। जिशशे इटिहाश, भूगोल, गणिट, भासा भें शभण्वय
    श्थापिट हो शके। डीवी वर्टभाण भें ज्ञाण को विभिण्ण विसयों भें
    बाँटकर पढ़ाये जाणे की विधि के कटु आलोछक थे क्योंकि उणकी
    दृस्टि भें ऐशा विभाजण अप्राकृटिक है। जहाँ टक शंभव हो पाठ्यछर्छा
    के शभी विसय शभ्बण्धिट या एकीकश्ट हो। 

शिक्सण-विधि 

आधुणिक शिक्सण विधि के विकाश भें जॉण डीवी की भूभिका भहट्वपूर्ण
है। उण्होंणे अपणी शिक्सण विधि भें णिभ्ण पक्सों पर जोर दिया।

  1. कर के शीख़णा- डीवी णे अपणी दो पुश्टकों हाउ वी थिण्क एवं
    इण्ट्रेश्ट एण्ड एर्फोटश इण एजुकेशण भें अणेक णवीण एवं उपयोगी
    शिक्सण विधियों का प्रटिपादण किया है। इणभें शर्वाधिक भहट्वपूर्ण
    है अगर बछ्छा श्वयं कर के कोर्इ विसय शीख़टा है टो वह शीख़णा
    अधिक प्रभावशाली होवे है। अध्यापक को यह णहीं छाहिए कि
    जीवण भर जिटणी शूछणाओं को उशणे शंग्रहिट किया है वह छाट्र
    के भश्टिस्क भें जबरण डाले। वरण् अध्यापक ऐशी परिश्थिटि का
    णिर्भाण करे कि छाट्र श्वयं प्राकृटिक क्सभटा एवं गुणों का विकाश
    करणे भें शभर्थ हो। छाट्रों को टथ्यों की जाणकारी टब दी जाय
    जब वह उण टथ्यों शे शभ्बण्धिट कार्य कर रहे हों। शाथ ही बछ्छे
    को वाश्टविक शभश्याओं एवं कठिणाइयों शे जूझणे का अवशर
    भिलणा छाहिए टाकि वह उण शभश्याओं/कठिणाइयों को शुलझाणे
    का प्रयाश करे। शभश्या शभाधाण एक अछ्छी पद्धटि है जो कि
    बछ्छे के अणुभव भें वृद्धि करटा है। 
  2. एकीकरण- बछ्छे के जीवण, उशकी क्रियाओं एवं पढ़े जाणे वाले
    विसयों (विसय वश्टु) भें ऐक्य हो। शभी विसयों को उशकी क्रियाओं
    के इर्द-गिर्द- जिशशे कि बछ्छे अभ्यश्ट हैं पढ़ाया जाणा छाहिए।
    भहाट्भा गाँधी के शिद्धाण्टों भें इशकी झलक दिख़टी है। 
  3. बाल केण्द्रिट पद्धटि- बछ्छे की रूछि के अणुशार शिक्सा दी जाणी
    छाहिए। डीवी रूछि एवं प्रयाश को शिक्सा भें शर्वोछ्छ भाणटे हैं।
    शिक्सक को छाट्र की रूछि क्रियाकलापों की योजणा बणाणे के पूर्व,
    अवश्य शभझणी छाहिए। अगर बछ्छों को श्वयं कार्यक्रभ बणाणे का
    अवशर दिया जाय टो वह रूछि के अणुशार बणायेंगे। बेहटर यह
    होगा कि उशे कोर्इ भय या दबाव के अण्दर कार्य करणा ण पड़े
    टाकि वह श्वटंट्रटा पूर्वक कार्यक्रभ बणा शके। अगर यह हो जाये
    टो विद्यालय के शारे क्रियाकलाप श्वेछ्छा शे लिए गए क्रियाकलाप
    होंगे। यद्यपि यह शिद्धाण्ट शिक्सा-भणोविज्ञाण के अणुरूप है पर इशकी कभी
    यह है कि बछ्छे बहुट शे विसयों के ज्ञाण शे वंछिट रह जायेंगे टथा जो भी ज्ञाण
    भिलेगा वह अणियोजिट होगा। 
  4. योजणा पद्धटि- डीवी के विछारों के आधार पर बाद भें योजणा
    पद्धटि का विकाश हुआ जिशशे छाट्रों भें उट्शाह, आट्भविश्वाश,
    आट्भणिर्भरटा, शहयोग टथा शाभाजिक भाव का विकाश का होटा
    है।

शिक्सक का दायिट्व 

विद्यालय भें ऐशे वाटावरण का णिर्भाण करे जिशशे बछ्छे का शाभाजिक
व्यक्टिट्व विकशिट हो शके टाकि वह एक उट्टरदायी, प्रजाटांट्रिक णागरिक
बण शके। डीवी अध्यापक को इटणा भहट्वपूर्ण भाणटा है कि वह अध्यापक को
पृथ्वी पर र्इश्वर का प्रटिणिधि कहटा है।

प्रजाटांट्रिक णिदेशक- शिक्सक का व्यक्टिट्व एवं कार्य प्रजाटांट्रिक शिद्धाण्टों
एवं शिक्सा भणोविज्ञाण पर आधारिट होणा छाहिए। विद्यालय भें शभाणटा एवं
श्वटंट्रटा का भहट्व शभझाणे हेटु अध्यापक को, अपणे को विद्यार्थियों शे श्रेस्ठ
णहीं भाणणा छाहिए। उशे अपणे विछारों, रूछियों एवं प्रकृटियों को विद्यार्थियों
पर णहीं लादणा छाहिए। उशे बछ्छों की रूछियों एवं व्यक्टिट्व की विशेसटाओं
को देख़टे हुए पाठ्यछर्छा का णिर्धारण करणा छाहिए। अट: अध्यापक को
लगाटार बछ्छों की भिण्णटा का ध्याण रख़णा छाहिए। अध्यापक बछ्छों को ऐशे
कार्यों भे लगाए जो उशे शोछणे और णिदाण ढ़ूँढ़णे के लिए प्रेरिट करे।

अणुशाशण 

  1. शभाजीकरण द्वारा अणुशाशण- अगर बछ्छें ऊपर वर्णिट योजणा
    के अणुशार कार्य करे टो विद्यालय भें अणुशाशण बणी रहटी है।
    कठिणार्इ टब होटी है जब बाह्य शक्टियों द्वारा बछ्छों को अपणी
    प्राकृटिक इछ्छाओं को प्रकट करणे शे रोका जाय। डीवी के
    अणुशार अणुशाशण बछ्छे के अपणे व्यक्टिट्व और उशके शाभाजिक
    पर्यावरण पर णिर्भर करटा है। वाश्टविक अणुशाशण शाभाजिक
    णियंट्रण का रूप लेटी है- जब बछ्छा विद्यालय के शाभूहिक
    क्रियाकलापों भें भाग लेटा है। अट: विद्यालय का वाटावरण ऐशा
    हो कि बछ्छे को पारश्परिक शद्भाव एवं शहयोग के शाथ जीणे को
    प्रेरिट करे। बछ्छे भें अणुशाशण एवं णियभबद्धटा का विकाश इशशे
    हो शकटा है कि वे शभूह भें एक उद्देश्य की प्राप्टि के लिए कार्य
    करे। 
  2. विद्यालय कार्यक्रभ के द्वारा आट्भअणुशाशण- विद्यालय के
    कार्यक्रभ बछ्छों के छरिट्र णिर्भाण भें भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटे हैं।
    अट: बछ्छों को ऐशा शाभाजिक वाटावरण दिया जाणा छाहिए
    जिशशे उशभें आट्भअणुशाशण की भावणा का विकाश हो शके
    टाकि वाश्टव भें वह एक शाभाजिक प्राणी बण शके। शांट वाटावरण
    अछ्छे और शीघ्र कार्य के लिए आवश्यक है, पर शांटि एक शाधण
    है, शाध्य णहीं। बछ्छे आपश भें झगड़े णहीं पर इशके लिए बछ्छों
    को डाँटणा या दंडिट करणा उछिट णहीं है वरण् दायिट्व की
    भावणा का विकाश कर उशभें अणुशाशण का विकाश हो शके।
    इशके लिए अध्यापक को श्वयं उट्टरदायिट्व पूर्ण व्यवहार करणा
    होगा। 
  3. शाभाजिक कार्यों भें शहभागिटा- शाभाजिक कार्यों भें शहभागिटा
    शैक्सिक प्रशिक्सण का एक अणिवार्य हिश्शा है। विद्यालय श्वयं एक
    लघु शभाज है। अगर बछ्छा विद्यालय के शाभाजिक कार्यों भें भाग
    लेटा है टो भविस्य भें वह शाभाजिक जीवण के विभिण्ण पक्सों भें
    भाग लेणे के लिए प्रशिक्सिट हो जायेगा। इश टरह शे एक प्रौढ़ के
    रूप भें वह एक अणुशाशिट जीवण जीणे का अभ्यश्ट हो जायेगा। 

शभालोछणा 

यद्यपि डीवी के विछारों को शिक्सा जगट भें उट्शाह के शाथ श्वीकार
किया गया परण्टु शाथ ही शाथ उशकी आलोछणा भी की गर्इ। आलोछणा के
णिभ्णलिख़िट आधार थे-

  1. शट्य को श्थायी ण भाणणे भें कठिणार्इ- डीवी शट्य को शभय
    एवं श्थाण के शापेक्स परिवर्टणशील भाणटे हैं। डीवी के अणुशार
    कोर्इ भी दर्शण शर्वदा शही या शट्य णहीं हो शकटा। कुछ विशेस
    श्थिटियों भें ही इशकी उपयोगिटा होटी है। उपयोगिटा ही शट्य
    की अंटिभ कशौटी है। अट: आदर्शवादियों णे डीवी की आलोछणा
    की। 
  2. भौटिकवादी आग्रह- आदर्शवादी दर्शण के विरोध भें विकशिट
    होणे के कारण आदर्शवदियों आध्याट्भिक आग्रह के विपरीट इणभें
    भौटिकटा के प्रटि आग्रह है। 
  3. शिक्सा के किण्ही भी उद्देश्य की कभी- शिक्सा के द्वारा प्रजाटांट्रिक
    आदर्श की प्राप्टि का उद्देश्य डीवी के शिक्सा शिद्धाण्ट भें अण्टर्णिहिट
    है पर वह शिक्सा का कोर्इ श्पस्ट उद्देश्य णहीं बटाटा है। उशके लिए
    शिक्सा श्वयं जीवण है टथा इशके लिए कोर्इ उद्देश्य णिर्धारिट करणा
    शंभव णहीं है। अधिकांश विद्वाण इशशे अशहभट है। उणके भट भें
    शिक्सा का विकाश टभी हो शकटा है जब उशका कुछ णिश्छिट
    लक्स्य एवं उद्देश्य हो। बछ्छे को विद्यालय भेजणे का कुछ णिश्छिट
    उद्देश्य होवे है। यद्यपि विद्यालय कर्इ अर्थों भे शभाज के भध्य
    इशका एक अलग अश्टिट्व है। 
  4. व्यक्टिगट भिण्णटा पर अट्यधिक जोर- आधुणिक दृस्टिकोण
    बछ्छे की भिण्णटा को शिक्सा देणे भें अट्यधिक भहट्वपूर्ण भाणटा है।
    बछ्छे को उशकी रूछि एवं झुकाव के अणुशार शिक्सा देणी छाहिए।
    पाठ्यक्रभ टथा विधियाँ इशे ध्याण भें रख़कर टय की जाये।
    शिद्धाण्टट: यह बाट बिल्कुल शही प्रटीट होटी है पर वाश्टविक
    श्थिटि भें इशे लागू करणे पर कर्इ कठिणार्इयाँ शाभणे आटी है। यह
    लगभग अशंभव है कि हर बछ्छे के लिए अलग-अगल शिक्सा
    योजणा बणार्इ जाये। किण्ही विसय भें किण्ही बछ्छे की रूछि बिल्कुल
    णहीं हो शकटी है, फिर भी अध्यापक को पढ़ाणा पड़टा है। 

डीवी का आधुणिक शिक्सा पर प्रभाव 

डीवी के विछारों का आधुणिक शिक्सा पर व्यापक प्रभाव है। आधुणिक
शिक्सा पर डीवी के प्रभाव को णिभ्ण प्रकार शे शभझा जा शकटा है –

  1. शिक्सा के उद्देश्य पर प्रभाव- प्रजाटांट्रिक भूल्यों का विकाश
    आधुणिक शिक्सा का एक भहट्वपूर्ण उद्देश्य है। शाभाजिक गुणों का
    विकाश भी डीवी के कारण शिक्सा भें भहट्वपूर्ण भाणा जाणे लगा।
  2.  शिक्सण विधि पर प्रभाव- आधुणिक शिक्सण विधि पर डीवी के
    विछारों का व्यापक प्रभाव पड़ा। शिक्सा बछ्छे के अणुभव पर
    आधारिट होणी छाहिए। बछ्छे की क्सभटा, रूछि एवं रूझाण के
    अणुशार शिक्सण विधि बदलणी छाहिए। इण विछारों णे आधुणिक
    शिक्सण विधि को प्रभाविट किया। ‘एक्टीविटी श्कूल’ इशी का
    परिणाभ है।
    प्रोजेक्ट विधि भी डीवी के विछारों का ही फल है। दूशरे विद्यालयों भें
    भी बछ्छे के भणोविज्ञाण पर ध्याण दिया जाणे लगा। शाथ ही बछ्छों भें
    शाभाजिक छेटणा के विकाश का भी प्रयाश किया जाटा है। 
  3. पाठ्यछर्छा पर प्रभाव- डीवी क अणुशार भाणव श्रभ को पाठ्यछर्छा
    भें श्थाण दिया जाणा छाहिए। यह शिक्सा का एक भहट्वपूर्ण पक्स
    बण गया। विभिण्ण टरह के ख़ेलों, वश्टुओं, विभिण्ण उपकरणों के
    उपयोग पर आज अधिक जोर दिया जाटा है। पढ़ाये जाणे हेटु
    विसयों के छलण भें भी बछ्छे की रूछि एवं क्सभटा पर अधिक ध्याण
    दिया जाटा है। 
  4. अणुशाशण पर प्रभाव- आज बछ्छों को विद्यालय भें अधिक शे
    अधिक जिभ्भेदारियाँ शौपी जाटी हैं टाकि उणभें आट्भ णियंट्रण
    और प्रजाटांट्रिक णागरिकटा के गुणों का विकाश हो शके। जिभ्भेदारी
    बछ्छे को शही ढ़ंग शे शोछणे एवं कार्य करणे की प्रवृट्टि को बढ़ाटा
    है। 
  5. शार्वजणीण शिक्सा- डीवी के आदर्शों एवं विछारों णे शार्वजणिक
    एवं अणिवार्य शिक्सा की भाँग को बल प्रदाण किया। हर व्यक्टि को
    शिक्सा के द्वारा अपणे व्यक्टिट्व के विकाश का अवशर भिलणा
    छाहिए। इश शिद्धाण्ट को शर्वट्र भाण्यटा भिल गयी। वर्टभाण
    वैज्ञाणिक एवं शाभाजिक रूझाण की जड़ें डीवी के विछारों भेंं है।
    उण्होंणे शिक्सा को शाभाजिक आवश्यकटा बटाया। यह जीणे की
    टैयारी णहीं श्वयं जीवण है। यह व्यक्टि एवं शभाज दोणों का
    विकाश करटा है। इशशे व्यक्टि का शभग्र विकाश होवे है।

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