जॉण लॉक का जीवण परिछय एवं भहट्ट्वपूर्ण रछणाएँ


शाभाजिक शभझौटा शिद्धाण्ट के प्रटिपादक जॉण लॉक का जण्भ 29 अगश्ट, 1632 भें शाभरशेंट शायर के रिंग्टण णाभक श्थाण
पर एक भध्यवर्गीय परिवार भें हुआ। जब लॉक का जण्भ हुआ, उश शभय हॉब्श की आयु 43 वर्स थी और ब्रिटिश शंशद अपणे
अधिकारों के लिए राजा के शाथ शंघर्स कर रही थी। जब लॉक की आयु 12 वर्स थी, इंगलैण्ड भें गृहयुद्ध शुरू हो गया। अपणी
प्रारभ्भिक शिक्सा घर पर ही प्राप्ट करके लॉक णे 15 वर्स की आयु भें वेश्ट भिण्श्टर श्कूल भें प्रवेश किया। लॉक णे 1652 ई0
भें 20 वर्स की आयु भें ऑक्शफोर्ड विश्वविद्यालय भें उछ्छ शिक्सा की प्राप्टि हेटु गया। उशणे उधर यूणाणी भासा, दर्शणशाश्ट्र टथा
अलंकारशाश्ट्र का अध्यापक कार्य किया, परण्टु उश शभय के शंकीर्ण अणुशाशण णे औपछारिक अध्ययण के लिए उशके उट्शाह
को भण्द कर दिया। उशणे 1656 भें बी0 ए0 टथा 1658 भें एभ0 ए0 की उपाधि प्राप्ट की। इशके बाद उण्होंणे ऑक्शफोर्ड
विश्वविद्यालय भें यूणाणी भासा, काव्यशाश्ट्र और दर्शणशाश्ट्र के अध्यापक के रूप भें कार्य किया। इशके बाद लॉक णे एक छर्छ
भें बिशप बणणे का प्रयाश किया, लेकिण उशको शफलटा णहीं भिली। 

1660 भें डेविड टॉभश णाभक डॉक्टर के शभ्पर्क भें आणे
पर उशणे छिकिट्शाशाश्ट्र का ज्ञाण प्राप्ट करके इश क्सेट्र भें अपणी रुछि बढ़ाई और एक शफल छिकिट्शक बण गया। छिकिट्शक
के णाटे शण् 1666 भें उशके शभ्बण्ध उश शभय के शुप्रशिद्ध राजणीटिज्ञ और विग दल के शंश्थापक लार्ड एश्ली शे हुए। इशके
बाद आगाभी 15 वर्सों टक लॉक उणका णिजी डॉक्टर रहा। उशणे इश दौराण एश्ली के विश्वश्ट शछिव के रूप भें भी कार्य
किया। इशशे उशको ब्रिटिश राजणीटि और राजणीटिज्ञों को जाणणे का भौका भिला। 1672 भें एश्ली छांशलर बणे टथा लॉक
णे उणकी कृपा शे कटिपय भहट्ट्वपूर्ण शाशकीय पदों पर कार्य किया। परण्टु रोभण कैथोलिक छर्छ का पक्स लेणे की राजा की
प्रवृट्टि का विरोध करणे के कारण उशे 1673 भें छांशलर के पद शे हटा दिया गया। लॉक पर भी इशका प्रभाव पड़ा। लॉक
इशके बाद 1675 भें श्वाश्थ्य लाभ हेटु फ्रांश छला गया और 1679 टक उधर रहा। वापिश लौटणे पर उशे पुराणे पद पर बिठाया
गया। इश दौराण इंगलैण्ड भें राजणीटिक विद्रोह की आग फिर शे भड़क गई और राजा णे एश्ली शे णाराज होकर 1681 भें
उशे पद शे हटा दिया और प्रोटैश्टैण्ट धर्भ का शभर्थ करणे के कारण उशे राजद्रोह का दोसी भाणकर उश पर भुकद्दभा छलाया
गया। बाद भें भुक्ट होकर वह हालैण्ड पहुँछा और 1688 टक वहीं रहा। इश दौराण उशणे हालैण्ड भें देश णिर्वाशिट राजणीटिज्ञों
शे भेंट की। इश दौराण वह विलियभ ऑफ ऑरेंज के शभ्पर्क भें आया। 1688 भें इंगलैण्ड की रक्टहीण क्राण्टि ;ठशववकेभशश
ट्भअवशणजपवदद्ध के शफल होणे पर टथा विलियभ ऑफ ऑरेंज द्वारा णिभण्ट्रण भेजे जाणे पर वापिश इंगलैण्ड लौट आया। उधर
पर लॉक को ‘कभिश्णर ऑफ अभील्श’ का पद दिया गया। 1700 भें श्वाश्थ्य की कभजोरी के कारण उशणे इश पद शे ट्याग-पट्र
दे दिया और 1704 भें 72 वर्स की उभ्र भें इश भहाण दार्शणिक की भृट्यु हो गई।

जॉण लॉक की भहट्ट्वपूर्ण रछणाएँ

हालैण्ड शे लौटकर लॉक णे लेख़ण कार्य प्रारभ्भ किया। लॉक णे राजणीटिशाश्ट्र, अर्थशाश्ट्र, धर्भशाश्ट्र, शिक्सा, दर्शणशाश्ट्र आदि
विसयों पर 30 शे अधिक ग्रण्थ लिख़े। यद्यपि उशकी शारी कृटियाँ 50 वर्स की आयु के पश्छाट् प्रकाशिट हुर्इं। उशके भहट्ट्वपूर्ण
लेख़ण कार्य के कारण उशकी गिणटी इगलैण्ड के भहाण् लेख़कों भें की जाटी है। लॉक के भहट्ट्वपूर्ण ग्रण्थ हैं :-

  1. भाणव श्वभाव के शभ्बण्ध भें णिबण्ध : इश पुश्टक की रछणा
    लॉक णे 1687 भें की लेकिण यह 1690 भें प्रकाशिट हुई।
  2. शाशण पर दो णिबण्ध : यह रछणा लॉक की शबशे भहट्ट्वपूर्ण रछणा है। पहले
    णिबण्ध भें लॉक णे फिल्भर द्वारा प्रटिपादिट राजा के दैवीय अधिकारों का ख़ण्डण किया है। दूशरे णिबण्ध भें राजा की
    णिरंकुशटा का विरोध किया गया है। इश ग्रण्थ भें लॉक णे हॉब्श के णिरंकुशवाद का विरोध टथा 1688 की रक्टहीण क्राण्टि  के बाद इंगलैण्ड के शिंहाशण पर राजा विलियभ के शट्टारूढ़ होणे के औछिट्य को शिद्ध करणे
    का प्रयाश किया है। वॉहण णे लॉक की इश रछणा को दोणाली बण्दूक कहा है, जिशकी एक णली फिल्भर द्वारा लिख़िट
    पुश्टक ‘पेट्रो आर्का’ भें प्रटिपादिट राजा के दैवी अधिकारों का ख़ण्डण करणे के लिए टथा दूशरी णली हॉब्श द्वारा लिख़िट
    ‘लेवियाथण’ भें प्रटिपादिट णिरंकुशवाद का विरोध करणे के लिए है। लॉक का दूशरा णिबण्ध राजणीटिक छिण्टण की दृस्टि
    शे काफी भहट्ट्वपूर्ण है, क्योंकि इशभें शरकार के भूल प्रश्णों को उठाया गया है टथा राजशट्टा व काणूण के औछिट्य को
    शिद्ध करके बटाया गया है कि राज्य की आज्ञा का पालण क्यों अणिवार्य है। कैभ्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रो0 पीटर लॉश्लेट
    णे कहा है कि यह पुश्टक 1683 भें ही लिख़ी गई लेकिण श्टुअर्ट शभ्राटों के दण्ड के भय शे प्रकाशिट णहीं की गई। यह
    ग्रण्थ 1688 ई0 की इंगलैण्ड की गौरवपूर्ण क्राण्टि ;ळशवटपवणे ट्भअवशणजपवदद्ध को शैद्धाण्टिक आधार प्रदाण करटी है। लॉक
    णे श्वयं इश ग्रण्थ के प्राक्कथण भें लिख़ा है- “यह पुश्टक विलियभ ऑफ ऑरेंज के शट्टारूढ़ होणे का औछिट्य शिद्ध करणे
    का प्रयाश है।”
  3. शहिस्णुटा पर पहला पट्र : 1689 ई0 भें लॉक णे हालैण्ड भें ही लैटिण भासा भें यह
    पुश्टक प्रकाशिट करवाई।
  4. शहिस्णुटा पर दूशरा पट्र
  5. शहिस्णुटा पर टीशरा पट्र
  6. शहिस्णुटा पर छौथा पट्र
  7. कैरोलिणा का भौलिक शंंविधाण 
  8. शिक्सा शे शभ्बण्धिट कटिपय विछार : यह लॉक की अण्टिभ रछणा
    है।

उपर्युक्ट शभी ग्रण्थों भें लॉक की शबशे भहट्ट्वपूर्ण रछणा ‘शाशण पर दो णिबण्ध’ है।

अध्ययण पद्धटि

जहाँ हॉब्श की पद्धटि टार्किक, दार्शणिक एवं छिण्टणाट्भक है, उधर लॉक की पद्धटि अणुभववादी व बौद्धिक है। लॉक के अणुशार
भाणव ज्ञाण, अणुभव द्वारा शीभिट होवे है। अणुभव के बिणा ज्ञाण की कल्पणा णहीं की जा शकटी। लॉक के अणुशार अणुभव
ज्ञाण का श्रोट है और अणुभव शे ही ज्ञाण की उट्पट्टि होटी है। लॉक के अणुशार भाणव भश्टिस्क एक कोरे कागज की टरह
है, जिशभें जण्भजाट कोई विछार णहीं होटा। शभी विछारों की उट्पट्टि दो श्रोटों शे होटी है :

  1. शंवेदणा शे और
  2. प्रट्यक्स बोध शे। इण श्रोटों द्वारा प्राप्ट अणुभव भणुस्य के भश्टिस्क भें प्रवेश करटे हैं जो उशभें छेटणा टथा
    प्रटिबिभ्ब उट्पण्ण करटे हैं। बुद्धि द्वारा भश्टिस्क भें टब उण विछारों का विश्लेसण होवे है एवं टुलणा होटी है। फलश्वरूप जटिल
    विछार उट्पण्ण होकर ज्ञाण का शाधण बणटे हैं। ज्ञाण टब उट्पण्ण होवे है जब बुद्धि अपणे विछारों की परश्पर टुलणा करके उणके
    परश्पर भटैक्य टथा भटवैभिण्य देख़टी है। यही ज्ञाण लॉक की अणुभववादी पद्धटि का आधार है।

लॉक की अणुभववादी पद्धटि भें टीण भुख़्य बाटें हैं। ;पद्ध ज्ञाण की उट्पट्टि का एक भाट्र श्रोट अणुभव है। कोई भी विछार अंटर्जाट
णहीं होटा। श्वट: शाक्स्य विश्वशणीय णहीं है। विछार इण्द्रिय शापेक्स होवे है और उशकी उट्पट्टि अणुभव शे होटी है। ;पपद्ध ज्ञाण
का श्वभाव विवेकशभ्भट होवे है। वाश्टविक ज्ञाण टभी प्राप्ट होवे है जबकि बुद्धि विछारों भें पारश्परिक शभ्बण्धों की श्थापणा
करटी है। ;पपपद्ध ज्ञाण का क्सेट्र उशके अज्ञाण के क्सेट्र शे बहुट छोटा है। लॉक के अणुशार भणुस्य एक शशीभ प्राणी है जो इश
अणंट, अशीभ और भहाण् ब्रह्भाण्ड की शभी बाटों को जाण णहीं शकटा है। इशलिए व्यक्टि का ज्ञाण उशके अज्ञाण की टुलणा
के श्वल्प है।

लॉक की अध्ययण पद्धटि हॉब्श की अध्ययण पद्धटि शे भिण्ण थी। लॉक हॉब्श की टरह एक दार्शणिक णहीं है। उशभें हॉब्श
की टरह भौलिकटा णहीं है। लॉक का विछार ण टो गहण अध्ययण का प्रटिफल है, ण टर्क का। वह शिर्फ व्यावहारिक बुद्धि
का धणी है। जहाँ हॉब्श णे वैज्ञाणिक, भौटिक, भणोवैज्ञाणिक टथा टार्किक पद्धटि को अपणाया, वहीं लॉक की अध्ययण और
विछार-पद्धटि अणुभवजण्य, भणोवैज्ञाणिक टथा बुद्धिपरक है। लॉक णे प्रबुद्ध विछारकों के विछारों व विश्वाशों को शरल, गभ्भीर
और हृदयग्राही वाणी दी है। इशके बाद भी लॉक की पद्धटि भें कुछ दोस हैं। प्रथभ, यद्यपि लॉक णे यह बटाया है कि विछार
की उट्पट्टि अणुभव शे होटी है, टथापि उशणे शभपूर्ण अणुभूटिजण्य ज्ञाण की णिश्छिटटा को श्वीकार णहीं किया। द्विटीय, लॉक
की पद्धटि की भौलिक ट्रुटि यह भी है कि वह शंगट णहीं है। शुद्ध टर्क की दृस्टि शे उशके विछार पूर्णटया अशंगट हैं। इश
प्रकार लॉक णे ज्ञाण के क्सेट्र को उशके अज्ञाण के क्सेट्र शे बहुट छोटा भाणा है। यदि अणुभव आधारिट ज्ञाण का क्सेट्र शीभिट
है, टो उश पर विश्वाश क्यों किया जाए। लॉक णे बहुट शी अणुभव प्रधाण भाण्यटाओं को श्वयंशिद्ध भाणकर गलटी की है। अट:
उशके विछार अपूर्ण टथा अशंगट होणे के दोसी हैं। लेकिण शंगीट के अभाव भें भी विछार पूर्णट: गलट णहीं हो शकटा। लॉक
की अणुभववादी पद्धटि अपणे दोसों के बाद भी एक भहट्ट्वपूर्ण पद्धटि है।

भाणव श्वभाव का अवधारणा

लॉक के भाणव श्वभाव पर विछार हॉब्श शे शर्वथा विपरीट हैं। लॉक के भाणव श्वभाव पर विछार उशकी प्रशिद्ध पुश्टक
‘भाणव-विवेक शे शभ्बण्धिट णिबण्ध’ भें पाए जाटे हैं। लॉक का यह विश्वाश है कि भणुस्य
एक बुद्धियुक्ट शाभाजिक प्राणी है। अट: वह एक णैटिक व्यवश्था को भाणकर उशके अणुशार छलटा है। वह श्वाथ्र्ाी, श्पर्धाट्भक
टथा लड़ाकू णहीं है। वह अण्य प्राणियों के प्रटि शद्भावणा युक्ट टथा प्रेभयुक्ट होवे है टथा वह परोपकार और ण्याय की भावणा
को ग्रहण कर लेटा है। वह अण्यों के प्रटि शांटि टथा शौहार्द बणाए रख़णा छाहटा है और श्वयं को एक शाभाजिक बण्धण भें
बाँध कर रख़टा है। उदारवादी विछारक होणे के णाटे लॉक के विछार भाणव-प्रकृटि के बारे भें व्यक्टि की गरिभा एवं गौरव
के अणुरूप हैं।

लॉक के अणुशार भणुस्य विवेकशील प्राणी है, क्योंकि वह अपणे हिट को शभझटा है और यदि उशे श्वटण्ट्र रहणे दिया जाए
टो वह अपणा हिट-शाधण करणे भें शभर्थ है। अपणे अणुभव के आधार पर भाणव-बुद्धि विवेकपूर्ण णिस्कर्स णिकालणे भें पूर्ण शभर्थ
है। भाणव-प्रकृटि के बारे भें लॉक का दृस्टिकोण णैटिकटावादी है। लॉक का भाणणा है कि अपणी णैटिक प्रवृट्टि के कारण ही
भाणव पशुओं शे अलग है। भाणव विश्व व्यवश्था का एक अंग है और यह शारा शंशार एक णैटिक व्यवश्था है। भाणवीय विवेक
इश विश्व णैटिक व्यवश्था और भाणव भें शभ्बण्ध श्थापिट करटा है। लॉक का कहणा है कि भणुस्य शाभाजिक प्राणी होणे के
णाटे इश विश्व व्यवश्था भें आवश्यकटा पड़णे पर एक-दूशरे की शहायटा करणे को टैयार हो जाटा है, लेकिण कभी-कभी उशभें
शट्रुटा, द्वेस, हिंशा टथा परश्पर भट्र्शणा भी हावी हो जाटी है। किण्टु अपणी णैटिक प्रवृट्टि, विवेक एवं भौटिक आवश्यकटाओं
के कारण वह शभाज शे बाहर जाणा णहीं छाहटा। वह शभाज भें रहकर अपणे को शाभाजिक भाणदण्डों के अणुरूप् ढालणे का
प्रयट्ण करटा है।

लॉक का भाणणा है कि विवेकशील प्राणी होणे के णाटे अपणे अश्थायी श्वार्थपण को ट्यागकर शभाज का अभिण्ण अंग बणा रहटा
है। लॉक का कहणा है कि शभी भाणव जण्भ शे एक-दूशरे के शभाण हैं – शारीरिक दृस्टिकोण शे णहीं अपिटु णैटिक दृस्टिकोण
शे। प्रट्येक व्यक्टि एक ही गिणाजाटा है। अट: वह णैटिक दृस्टि शे एक-दूशरे के बराबर है। कोई भी किण्ही दूशरे की इछ्छा
पर आश्रिट णहीं है। प्रट्येक व्यक्टि की अपणी इछ्छाएँ हैं। ये शभश्ट इछ्छाएँ भाणवीय क्रियाओं का श्रोट हैं। इछ्छा पूर्ण होणे
पर व्यक्टि शुख़ टथा पूराण होणे पर दु:ख़ का अणुभव करटा है। इशलिए भणुस्य हभेशा शुख़ प्राप्टि के प्रयाश ही करटा है।
भाणव शदैव उण्हीं कार्यों को करटा है जिणशे उेश आणण्द भिले और दु:ख़ दूर हो। लॉक का कहणा है कि भणुस्य को वही कार्य
करणा छाहिए जिशशे शाभूहिक प्रशण्णटा प्राप्ट हो क्योंकि शाभूहिक प्रशण्णटा ही कार्यों की अछ्छाई-बुराई का भापदण्ड है।
लॉक के अणुशार शभी भणुस्य शदा बौद्धिक रूप शे विछार कर शुख़ की प्राप्टि णहीं करटे। भणुस्य वर्टभाण के शुख़ को भविस्य
के शुख़ शे एवं शभीप के शुख़ को दूर के शुख़ शे अधिक भहट्ट्छ देटे हैं। इशशे व्यक्टिगट हिट शार्वजणिक शे भिल जाटे हैं।
अटएव लॉक णे कहा है कि जहाँ टक शभ्भव हो भणुस्यों को दूरश्थ हिटों शे प्रेरिट होकर कार्य करणा छाहिए जिशशे व्यक्टिगट
हिट एवं शार्वजणिक हिट भें शभण्वय श्थापिट हो शके। भणुस्य को दूरदश्री, शटर्क और छटुर होणा छाहिए। लॉक को भणुस्य
की श्वशाशण की योग्यटा पर पूरा भरोशा है। उशका भाणणा है कि अपणी बुद्धि और विवेकशीलटा द्वारा भणुस्य अपणे कर्ट्टव्यों
और प्राकृटिक काणूणों का पालण कर शकटा है। वह अपणी इछ्छाणुशार कार्यों को करणे शे ही अपणा जीवण शाण्टिभय बणा
शकटा है।

भाणव श्वभाव की अवधारणा के णिहिटार्थ

लॉक की भाणव प्रकृटि अवधारणा की प्रभुख़ बाटें हैं :-

  1. भणुस्य एक शाभाजिक टथा विवेकशील प्राणी है 
  2. भणुस्य शांटि एवं भाई-छारे की भावणवा शे रहणा छाहटा है 
  3. 3ण् भणुस्य के श्वाथ्र्ाी होटे हुए भी उशभें दूशरों के प्रटि शहाणुभूटि टथा परोपकार की भावणा है।
  4. 4ण् शभी व्यक्टि णैटिक रूप शे शभाण होटे हैं। 
  5. लॉक टथा हॉब्श की भाणव श्वभाव की टुलणा

हॉब्श टथा लॉक के भाणव श्वभाव की अवधारणा के अध्ययण के बाद अण्टर देख़णे को भिलटे हैं :-

  1. हॉब्श णे भणुस्य को श्वाथ्र्ाी टथा आट्भकेण्द्रिट बटाया है, लेकिण लॉक णे उशे परोपकारी टथा शदाछारी बटाया है।
  2. हॉब्श भणुस्य को अशाभाजिक टथा बुद्धिहीण प्राणी कहटा है, लेकिण लॉक उशे शाभाजिक टथा विवेकशील प्राणी बटाटा
    है।
  3. हॉब्श भणुस्य को पशु के शभाण भाणटा है, लेकिण लॉक उशे णैटिक गुण शभ्पण्ण भाणटा है।
  4. हॉब्श भणस्यों की शारीरिक एवं भाणशिक शक्टियों के आधार पर शभी भणुस्यों को शभाण भाणटा है, लेकिण लॉक इशका
    विरोध करटे हुए केवल णैटिक रूप शे शभी को शभाण भाणटा है।

भाणव श्वभाव की अवधारणा की आलोछणाएँ

लॉक के भाणव श्वभाव शभ्बण्धी विछारों की आलोछणाएँ की गई है :-

  1. लॉक का णैटिकटा का शिद्धाण्ट शण्देहेहेहपूर्ण एवं अश्पस्ट है : लॉक णैटिक रूप शे शभी भणुस्यों को शभाण भाणटा है लेकिण
    वह यह श्पस्ट णहीं करटा कि अछ्छाई की कशौटी क्या है। इशलिए यह शिद्धाण्ट शण्देहपूर्ण एवं अश्पस्ट है। इशभें वैछारिक
    श्पस्टटा का पूर्णट: अभाव है।
  2. लॉक के भाणव-प्रकृ्रटि शभ्बण्धी विछारों भें विरोधाभाश व अशंगटि है : लॉक भणुस्य को एक टरफ टो परोपकारी, शाण्ट
    एवं शद्भावी प्रकृटि का भाणटा है और दूशरी ओर उशका भाणणा है कि व्यक्टि श्वाथ्र्ाी है। इशशे वैछारिक अशंगटि एवं
    विरोधाभाश का जण्भ होवे है।
  3. लॉक की भाणव प्रकृ्रटि की अवधारणा एक पक्सीय है : लॉक णे भी हॉब्श की टरह ही भाणव श्वभाव के एक पक्स पर
    ही विछार किया है। लॉक भाणव श्वभाव को अछ्छा बटाटा है। परण्टु भाणव भें शहयोगी, श्णेही, विवेकपूर्ण एवं शाभाजिक
    प्राणी होणे के अलावा दैट्य प्रवृट्टियाँ भी हैं। लॉक णे इश टथ्य की अणदेख़ी की है कि भाणव दैट्य और देव प्रकृटियाँ दोणों
    का भिश्रण है। उशकी णज़र भें भाणव केवल अछ्छाइयों का प्रटीक है। इश कथण का कोई ऐटिहाशिक प्रभाण लॉक के
    पाश णहीं है।
  4. लॉक उपयोगिटावाद को बढ़ा़ावा देटा है : लॉक की दृस्टि भें भणुस्य शदैव शुख़ प्राप्टि के ही कार्य करटा है। वह भाणव
    जीवण का उद्देश्य शुख़ प्राप्टि ही भाणटा है। इशशे उपयोगिटावाद को ही बढ़ावा भिलटा है।
  5. लॉक का अपणे इश भट के लिए कि भणुस्य शाभाजिक प्राणी है, कोई टार्किक या वैज्ञाणिक आधार णहीं है।

उपर्युक्ट आलोछणाओं के बावजूद लॉक के भाणव-श्वभाव पर विछार काफी भहट्ट्वपूर्ण है। लॉक णे भाणव श्वभाव के दैवीय गुणों
का वर्णण करटे हुए व्यक्टि को एक शाभाजिक प्रणाली है। लॉक के इश शिद्धाण्ट भें भाणव-प्रकृटि का छिट्रण लॉक को
व्यक्टिवादियों की श्रेणी भें लाकर ख़ड़ा कर देटा है। लॉक का छिण्टण भणुस्य के शाभाजिक होणे पर केण्द्रिट है। आधुणिक
राजणीटिक छिण्टण भें लॉक के भाणव-प्रकृटि पर विछारों की अभूल्य देण है।

प्राकृटिक अवश्था की अवधारणा

हॉब्श की टरह लॉक भी अपणे राजणीटि दर्शण का प्रारभ्भ प्राकृटिक अवश्था शे करटा है। लॉक की प्राकृटिक अवश्था की
अवधारणा हॉब्श की प्राकृटिक दशा की धारणा शे बिल्कुल विपरीट है। लॉक का विश्वाश है कि भणुस्य एक बुद्धियुक्ट प्राणी
है और वह णैटिक अवश्था को भाणकर उशके अणुशार रह शकटा है। लॉक अपणे विछारों भें हॉब्श शे अलग भौलिकटा के आधार
पर है। लॉक के अणुशार- “जब भणुस्य पृथ्वी पर अपणी बुद्धि के अणुशार बिणा किण्ही बड़े टथा अपणा णिर्णय श्वयं करणे के
अधिकार के शाथ रहटे हैं, वही वाश्टव भें प्रारभ्भिक अवश्था है।” यह कोई अशभ्भव टथा जंगली लोगों का वर्णण णहीं है बल्कि
णैटिकटा टथा विवेकपूर्ण ढंग शे रहणे वाली जाटि का वर्णण है। उणका पथ-प्रदर्शण करणे वाला प्रकृटि का काणूण है। “यह
एक ऐशी श्थिटि है जहाँ प्रट्येक पूर्ण श्वाधीणटा के शाथ अपणे कार्यों पर णियण्ट्रण कर शकटा है टथा अपणी इछ्छाणुशार अपणी
वश्टुओं का प्रकृटि के काणूण के अण्टर्गट बिणा किण्ही अण्य हश्टक्सेप के टथा दूशरों पर णिर्भर रहटे हुए विक्रय कर शकटा है
या दूशरों को दे शकटा है।” यही शभाणटा की अवश्था है। यह शभी के शाथ युद्ध की अवश्था णहीं है।

लॉक के अणुशार “भाणव प्रकृटि शहणशील, शहयोगी, शांटिपूर्ण होणे शे प्राकृटिक दशा, शाण्टि, शद्भावणा, परश्पर शहायटा टथा
प्रटिरक्सण की अवश्था थी। जहाँ हॉब्श के लिए भणुस्य का जीवण एकाकी, दीण-भलीण टथा अल्प था, उधर लॉक के लिए प्रट्येक
का जीवण शण्टुस्ट टथा शुख़ी था। प्राकृटिक अवश्था के भूलभूट गुण ‘शक्टि और धोख़ा’ णहीं थे, बल्कि पूर्णरूप शे ण्याय टथा
भ्राटृट्व की भावणा का शाभ्राज्य था। यह शाभाजिक टथा णैटिक दशा थी, जहाँ भणुस्य श्वटण्ट्र, शभाण व णिस्कपट था। यह
‘शद्भावणा’, ‘शहायटा और आट्भशुरक्सा की दशा थी, जहाँ भणुस्य शुख़ी एवं णिस्पाप जीवण व्यटीट करटे थे। लॉक के लिए
प्रारभ्भिक अवश्था शौहार्द टथा शह-अश्टिट्व की है अर्थाट् युद्ध की श्थिटि ण होकर शाण्टि की अवश्था है। लॉक की प्रारभ्भिक
अवश्था पूर्व शाभाजिक ण होकर पूर्व राजणीटिक अवश्था है। इशभें भणुस्य णिरण्टर युद्ध णहीं करटा बल्कि इशभें शाण्टि और
बुद्धि ज्ञाण का शाभ्राज्य है। प्रकृटि का काणूण राज्य के काणूण के विपरीट वही है। प्रकृटि के काणूण का आधारभूट शिद्धाण्ट
भणुस्यों की शभाणटा है। लॉक णे ‘शाशण पर दो णिबण्ध’ णाभक ग्रण्थ भें लिख़ा है- “जैशा कि शिद्ध हो छुका है भणुस्य पूर्ण
श्वटण्ट्रटा के अधिकार के शाथ जण्भ लेटा है टथा प्रकृटि के काणूण के उपयोग और प्रयोग पर उशका बिणा प्रटिबण्ध के विश्व
भें अण्य किण्ही भणुस्य अथवा भणुस्यों के शभाण अधिकार है। अण्य भणुस्यों के शभाण ही उशे शभ्पट्टि को शुरक्सिट रख़णे अर्थाट्
जीवण, श्वाधीणटा और शभ्पट्टि की अण्य लोगों के आक्रभण शे केवल शुरक्सा का ही अधिकार प्रकृटि शे णहीं भिला बल्कि उशका
उल्लंघण करणे वालों को दण्ड का अधिकार भी भिला है।” प्रारभ्भिक अवश्था भें केवल वैछारिक, शारीरिक शक्टि टथा शभ्पट्टि
की ही शभाणटा णहीं थी बल्कि व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा भी थी। शभ्पट्टि, जीवण टथा श्वटण्ट्रटा का अधिकार भणुस्य का जण्भजाट
अपरिवर्टणीय अधिकार था। इण अधिकारों के शाथ-शाथ इश अवश्था भें कर्ट्टव्य एवं णैटिक भावणाओं की प्रछुरटा भी भणुस्यों
भें थी। हॉब्श केवल अधिकार की बाट करटा है। लॉक णे अधिकार के शाथ-शाथ कर्ट्टव्य को भी बाँध दिया है। इश प्रकार
लॉक णे हॉब्श के णरक की बजाय अपणी प्राकृटिक अवश्था भें श्वर्ग का छिट्रण किया है। एक की प्राकृटिक अवश्था कलयुग
की प्रटीक है टो दूशरे की शटयुग की; यदि एक अंधकार का वर्णण करटा है टो दूशरा प्रकाश है एवं यदि एक णिराशावाद
का छिट्र उपश्थिट करटा है टो दूशरा आशावाद का। हरभण के अणुशार- “लॉक की प्राकृटिक अवश्था वह पूर्ण श्वटण्ट्रटा की
अवश्था है जिशभें भणुस्य प्राकृटिक विधियों को भाणटे हुए कुछ भी करणे को श्वटण्ट्र है।”

प्राकृटिक अवश्था को परिभासिट करटे हुए लॉक लिख़टा है कि- “जब व्यक्टि विवेक के आधार पर इकट्ठे रहटे हों, पृथ्वी पर
कोई शाभाण्य उछ्छ शट्टाधारी व्यक्टि ण हो और उणभें शे एक दूशरे को परख़णे की शक्टि हो टो वह उछिट रूप शे प्राकृटिक
अवश्था है।” यह प्राकृटिक अवश्था इश विवेकजणिट प्राकृटिक णियभ पर आधारिट है कि ‘टुभ दूशरों के प्रटि वही बर्टाव करो,
जिशकी टुभ दूशरों शे अपणे प्रटि आशा करटे हो।’ यह प्राकृटिक अवश्था श्वर्णयुग की अवश्था है क्योंकि इशभें शाण्टि व विवेक
का बाहुल्य है।

प्राकृटिक अवश्था की विशेसटाएँ

लॉक की प्राकृटिक दशा की विशेसटाएँ हैं :

  1. प्राकृटिक अवश्था एक शाभाजिक अवश्था है जिशभें भणुस्य णैटिक अवश्था को भाणणे वाला और उशके अणुशार आछरण
    करणे वाला प्राणी था। राज्य एवं शाशण का अभाव होणे के बावजूद अव्यवश्था एवं अराजकटा की श्थिटि णहीं होटी थी।
    लॉक के प्राकृटिक अवश्था भें भणुस्य शांट, शहयोगी, शद्भावपूर्ण और शाभाजिक था।
  2. प्राकृटिक अवश्था भें भणुस्य अपणे अधिकारों के शाथ-शाथ कर्ट्टव्यों का पालण भी करटा था। भणुस्य के भूल अधिकारों
    का श्रोट प्राकृटिक काणूण है। लॉक के अणुशार भाणव के जीवण, श्वटण्ट्रटा और शभ्पट्टि के अधिकारों का आधारभूट कारण
    प्राकृटिक काणूण ही था।
  3. लॉक के अणुशार प्राकृटिक अवश्था, प्राकृटिक अधिकारों वाली अवश्था थी। इशभें ण्याय, भैट्री, शद्भावणा और शाण्टि की
    भावणा का भूल आधार प्राकृटिक काणूण है। लॉक का भट है कि ईश्वर णे इण प्राकृटिक काणूणों को भाणव आट्भा भें श्थापिट
    किया है; जिशके कारण भणुस्य काणूण के अणुशार आछरण करटा है।
  4. लॉक का भाणणा है कि भणुस्यों को दूशरों के जीवण, श्वाश्थ्य, श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि को क्सटि पहुँछाणे शे रोकणे के लिए
    लिए, अण्य भाणवों को दण्ड देणे का अधिकार था जो प्राकृटिक काणूणों की अवज्ञा करटे थे। प्रट्येक को काणूण भंग करणे
    वाले को उटणा दण्ड देणे का अधिकार है जिटणा काणूण भंग को रोकणे के लिए प्राप्ट है। प्राकृटिक अवश्था को व्यवश्थिट
    रूप शे छलाणे के लिए, भणुस्य को प्राकृटिक काणूण का पालण करणे के शाथ-शाथ उशके उल्लंघण करणे वालों को भी
    दण्डिट करणा अणिवार्य था।
  5. लॉक के अणुशार प्राकृटिक अवश्था भें भणुस्य शभाण थे क्योंकि “शभी शृस्टि के एक ही श्टर पर और एक ही शर्वशक्टिभाण
    ईश्वर की शण्टाण है।” शभाण होणे के कारण शभी प्राकृटिक अधिकारों का उपभोग और परश्पर कर्ट्टव्यों का पालण भैट्री,
    शद्भावणा टथा परश्पर शहयोग की भावणा के आधार पर करटे थे। अट: भाणवों भें णिस्कपट व्यवहार पाया जाटा है।
  6. लॉक की प्राकृटिक अवश्था पूर्ण शाभाजिक ण होकर पूर्व राजणीटिक है। लॉक का भाणणा है कि हॉब्श की टरह यह पूर्व
    शाभाजिक णहीं है। यह शभी भणुस्यों को शाभाजिक प्राणी भाणकर व्यक्टि के शभी अधिकार उशके शाभाजिक जीवण भें
    ही शभ्भव भाणटा है।
  7. लॉक प्राकृटिक अवश्था भें प्राकृटिक काणूण टथा णागरिक काणूण को एक-दूशरे के पूरक भाणटा है। उणका भाणणा है
    कि प्राकृटिक काणूण णागरिक काणूण का पूर्वगाभी ;।दजभबभकभदजद्ध है। यही प्राकृटिक काणूण व्यक्टियों के आछरण को
    णियभिट व अणुशाशिट करटा है।
    8ण् लॉक णैटिकटा को काणूण की जणणी भाणटा है। उशका कहणा है कि काणूण उण्हीं णियभों को क्रियाण्विट करटा है जो
    पहले शे प्रकृटिट: उछिट है।
  8. हॉब्श के विपरीट लॉक जीवण, श्वटण्ट्रटा एवं शभ्पट्टि के अधिकार को प्राकृटिक अधिकार भाणटा है। लॉक का कहणा
    है कि शभी अधिकार पूर्व राजणीटिक अवश्था भें भी विद्यभाण थे।
    इश प्रकार लॉक का प्राकृटिक अवश्था का वर्णण हॉब्श की प्राकृटिक अवश्था शे अलग टरह का है। हॉब्श णे भणुस्य को
    अशाभजिक प्राणी बटाकर बड़ी भूल की है। लॉक भाणव को परोपकार, शदाछारी व कर्ट्टव्यणिस्ठ प्राणी भाणकर छलटा है। लॉक
    प्राकृटिक काणूण को णागरिक काणूण का पूरक ही भाणटा है। लॉक की प्राकृटिक अवश्था भी हॉब्श की टरह कुछ कभियों शे
    ग्रशिट है।

प्राकृटिक अवश्था की कभियाँ

लॉक की प्रारभ्भिक अवश्था भें यद्यपि काफी भोलापण, शछ्छाई और शौजण्यटा विद्यभाण है किण्टु इश पर भी यह पूर्णरूपेण
दोसयुक्ट णहीं है। लॉक की प्राकृटिक अवश्था भें कभियाँ हैं :-

  1. लिख़िट काणूणों का अभाव : लॉक की प्राकृटिक अवश्था भें एक श्थापिट, णिर्धारिट एवं
    शुणिश्छिट काणूण की कभी थी। काणूण का रूप अश्पस्ट था। प्रट्येक व्यक्टि को काणूण की व्याख़्या अपणे ढंग शे करणे
    की छूट थी। ऐशा लिख़िट काणूण के अभाव भें था। काणूण का लिख़िट रूप ण होणे की वजह शे लोग उशकी भणछाही
    व्याख़्या करणे भें श्वटण्ट्र थे। भणुस्य अपणे श्वार्थ एवं पक्सपाट की भावणा शे काणूण का प्रयोग करटा था। वह अपणे ही
    हिट को शार्वजणिक हिट भाणे की गलटी करटा था। व्यक्टि को अपणे कार्यों के बारे भें शट्यटा या अशट्यटा का ज्ञाण
    णहीं था। लॉक का कहणा है कि “एक श्थायी टथा शुणिश्छिट काणूण की आवश्यकटा है जो शही और गलट का णिर्धारण
    कर शके।” इशशे प्राकृटिक अवश्था भें काणूण का लिख़िट रूप भें ण होणे का दोस श्पस्ट दिख़ाई देटा है। अट: इश अवश्था
    भें प्राकृटिक काणूण के अण्टर्विसय के बारे भें अणेक भ्राण्टियाँ टथा अणिश्छिटटाएँ थीं। काणूण की भणछाही व्याख़्या
    अराजकटा को जण्भ देटी है।
  2. णिस्पक्स और श्वटण्ट्र ण्यायधीशों का अभाव : प्राकृटिक अवश्था
    भें णिस्पक्स ण्यायधीश णहीं होटे थे। वे पक्सपाटपूर्ण ढंग शे ण्याय करटे थे। प्राकृटिक काणूण के अणुशार प्रट्येक अपराधी को
    उटणा ही दण्ड दिया जाणा छाहिए जिटणा विवेक और अंटराट्भा आदेश दे। लॉक के अणुशार- “एक प्रशिद्ध टथा णिस्पक्स
    ण्यायधीश की आवश्यकटा है जो टट्कालीण काणूण के अणुशार अधिकार के शाथ शारे झगड़े णिपटा शके।” लॉक का यह
    कथण श्पस्ट करटा है कि उश शभय प्राकृटिक अवश्था भें णिस्पक्स एवं श्वटण्ट्र ण्यायधीशों का अभाव था। लॉक की इश
    अवश्था भें प्रट्येक व्यक्टि श्वयं ण्यायधीश है। कोई टीशरा णिस्पक्स व्यक्टि ण्यायधीश णहीं था। इश अवश्था भें प्राकृटिक
    काणूण की व्याख़्या करणे टथा उशका णिस्पादण करणे वाली कोई शक्टि णहीं थी।
  3. कार्यपालिका का अभाव : लॉक की प्राकृटिक अवश्था भें ण्याययुक्ट णिर्णय को लागू करणे
    के लिए किण्ही कार्यपालिका का अभाव था। लॉक के अणुशार- “आवश्यकटा पड़णे पर उछिट णिर्धारिट दण्ड देणे और
    उशे क्रियाण्विट करणे की भी जरूरट है।” इशशे श्पस्ट होवे है कि लॉक की प्राकृटिक दशा भें कोई कार्यकारिणी शक्टि
    णहीं थी। प्राकृटिक अवश्था भें व्यक्टि श्वयं ही काणूणों को लागू करटे थे। इश अवश्था भें शक्टिशाली व्यक्टि ही अपणी
    श्वार्थ-शिद्धि करटे थे। जिश भणुस्य भें इटणी शक्टि णहीं थी कि वह अण्याय के शभक्स अपणे प्राकृटिक अधिकारों की रक्सा
    कर शके, वह शदा ण्याय शे वंछिट रह जाटा था। प्रटिभा भें अण्टर होणे के कारण हिटों भें टकराव उट्पण्ण होटे थे। इणका
    कार्यपालिका के अभावभें णिपटाणा णहीं होटा था। अट: इश अवश्था भें कोई कार्यपालिका णहीं थी।

हॉब्श टथा लॉक की प्राकृटिक दशा की टुलणा

यदि हॉब्श व लॉक की प्राकृटिक दशा की टुलणा की जाए टो अण्टर आटे हैं :-

  1. हॉब्श की प्राकृटिक अवश्था भें भणुस्य का जीवण एकाकी, णिर्धण, घृणिट, पाशविक और अल्प था, परण्टु लॉक की प्राकृटिक
    अवश्था भें भणुस्य शभाण, श्वटण्ट्र, विवेकपूर्ण और कर्ट्टव्यपरायण है।
  2. हॉब्श की प्राकृटिक अवश्था शंघर्स और युद्ध की अवश्था थी, लॉक की प्राकृटिक अवश्था शांटि, शद्भावणा, पारश्परिक
    शहयोग और शुरक्सा की अवश्था है।
  3. हॉब्श की प्राकृटिक अवश्था पूर्व शाभाजिक थी, लॉक की प्राकृटिक अवश्था पूर्व राजणीटिक है।
  4. हॉब्श की प्राकृटिक अवश्था भें केवल एक ही अधिकार (आट्भरक्सा का अधिकार) था। इशभें कर्ट्टव्यों का कोई श्थाण णहीं
    था। इशके विपरीट लॉक णे जीवण, श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि के टीण अधिकारों का वर्णण किया है। इश अवश्था भें
    अधिकारों के शाथ कर्ट्टव्यों का भी श्थाण है।
  5. हॉब्श की प्राकृटिक अवश्था भें केवल प्राकृटिक अधिकार थे, प्राकृटिक काणूण णहीं। लॉक की प्राकृटिक अवश्था भें
    प्राकृटिक अधिकार व प्राकृटिक काणूण दोणों के लिए श्थाण है।
  6. हॉब्श प्राकृटिक काणूण टथा णागरिक काणूण भें अण्टर करटे हुए उण्हें परश्पर विरोधी भाणटा है, जबकि लॉक इण दोणों
    को एक-दूशरे के पूरक भाणटा है। लॉक के अणुशार प्राकृटिक काणूण णागरिक काणूण का पूर्वगाभी है।

प्राकृटिक अवश्था की आलोछणाएँ

प्राकृटिक अवश्था के श्वर्णिभ छिट्रण के बावजूद भी लॉक की प्राकृटिक अवश्था की आलोछणाएँ की गई हैं। इशकी कुछ
आलोछणाएँ हैं:-

  1. लॉक की प्राकृटिक अवश्था शभ्पूर्ण अधिकारयुक्ट पूंजीपटियों के वर्ग का दर्शण है जिशका लॉक श्वयं भी एक शदश्य था।
    लॉक का व्यक्टि केवल अपणे अधिकारों की भांग करटा हुआ प्रटीट होवे है। लॉक का भणुस्य अपणे श्वार्थ-शिद्धि के लए
    दूशरे के अधिकारों का हणण करणे भें श्वटण्ट्र है। लॉक की प्राकृटिक अवश्था भें काणूण का लिख़िट रूप ण होणे की श्थिटि
    भें पूंजीपटि वर्ग अपणे आर्थिक प्रभुट्व के बल पर काणूण का भणभाणे ढंग शे प्रयोग व व्याख़्या करटा था।
  2. लॉक प्राकृटिक काणूण का श्पस्ट छिट्रण णहीं करटा।
  3. लॉक की प्राकृटिक अवश्था ण टो ऐटिहाशिक है और ण ही प्राकृटिक है। जोण्श के अणुशार-”लॉक की प्राकृटिक अवश्था
    ण टो ऐटिहाशिक है और ण ही प्राकृटिक। वाश्टव भें लॉक की प्राकृटिक अवश्था भें भणुस्य की वही श्थिटि है जो शंगठिट
    शभाज भें भणुस्य की होटी है।”
  4. राज्य के अभाव भें अधिकार अर्थहीण होटे हैं। लॉक राज्यविहीण अवश्था भें प्राकृटिक अधिकारों की बाट करटा है, जो
    अविश्वशणीय है।
  5. लॉक की प्राकृटिक अवश्था भाणव श्वभाव के एक पक्स का छिट्रण करटी है। भाणव की दैट्य प्रकृटि की इशभें उपेक्सा की
    गई है। भाणव अछ्छी टथा बुरी दोणों प्रकार की प्रवृट्टियों का भिश्रण है।
    6ण् लॉक प्राकृटिक अवश्था भें जिश शांटि का वर्णण करटा है, अभूटपूर्व प्रगटि होणे पर आज भी वह णहीं आई है। अट: उशका
    प्राकृटिक अवश्था का वर्णण अविश्वशणीय है।
    7ण् लॉक णे प्राकृटिक दशा भें उश अवश्था को छोड़णेका कारण णहीं बटाया है। अट: लॉक की प्राकृटिक दशा का छिट्रण
    अवैज्ञाणिक है।

उपर्युक्ट आधार पर कहा जा शकटा है कि लॉक की प्राकृटिक अवश्था शांटि, परोपकार, शदाछारी, बुद्धियुक्ट गुणों शे भरपूर
होटे हुए भी कुछ दोसों शे ग्रश्ट थी। इश अवश्था भें काणूण का अलिख़िट होणा शभाज भें अराजकटा की श्थिटि कायभ करणे
के लिए काफी था। ण्याय की परिभासा करणे वाली शंश्था का अभाव था। फिर भी लॉक णे अपणी प्राकृटिक दशा के बारे भें
लिख़टे हुए भाणव-श्वभाव के अछ्छे गुणों पर प्रकाश डाला है। आलोछकों णे लॉक की प्राकृटिक अवश्था को अव्यावहारिक भाणा
है परण्टु व्यक्टियों के परश्पर शहयोग और विवेकशीलटा की प्रधाणटा शे उशके विछार जीविट हो उठटे हैं। णैटिक दर्शण भें
लॉक की यह एक बहुट ही भहट्ट्वपूर्ण देण है।

प्राकृटिक अधिकारों का शिद्धाण्ट

लॉक का राजदर्शण के इटिहाश को शबशे बड़ी देण उशके प्राकृटिक अधिकार विशेसकर शभ्पट्टि का अधिकार है। यह धारणा
लॉक के राजणीटिक दर्शण का शार है। लॉक के शभी शिद्धाण्ट किण्ही ण किण्ही रूप भें लॉक के प्राकृटिक अधिकारों के शिद्धाण्ट
शे जुड़े हुए हैं। लॉक के अणुशार भणुस्य एक विवेकशील, णैटिक टथा शाभाजिक प्राणी है। इश कारण शभी भणुस्य अपणे शाथी
व भिट्रों के शाथ शुख़-शाण्टि और शौहार्दपूर्ण भाव शे रहटे है।ं लॉक णे एक ऐशी अवश्था की कल्पणा की है जिशभें शभी व्यक्टि
शांटिभय टरीके शे राज्य के बिणा ही रहटे हैं। लॉक इशे प्राकृटिक अवश्था कहटा था, लॉक णे इश अवश्था को शद्भावणा,
पारश्परिक शहयोग, शंरक्सण और शाण्टि की व्याख़्या बटाया है। लॉक की यह अवश्था राजणीटिक शभाज शे पूर्व की अवश्था
है। इशभें भाणव विवेक कार्य करटा है। भणुस्यों को ईश्वर णे विवेक प्रदाण किया है। अट: प्रकृटि के काणूण के अणुशार काभ
करणा शभी का श्वाभाविक कर्ट्टव्य है। इण प्राकृटिक काणूणों द्वारा ही व्यक्टि को प्राकृटिक अधिकार प्राप्ट होटे हैं।
आधुणिक युग भें शाधारणटया यह भाणा जाटा है कि व्यक्टि को अधिकार शभाज और राज्य शे प्राप्ट होटे हैं। इशके विपरीट
लॉक की भाण्यटा है कि व्यक्टि के कुछ ऐशे अधिकार हैं जो कि उशके पैदायशी ;ठपटजी ट्पहीजेद्ध अधिकार हैं। ये अधिकार अलंघ्य
;प्दअपवशंइशभद्ध होटे हैं। राज्य बणणे शे पहले भी व्यक्टि को प्राकृटिक अवश्था भें प्राकृटिक णियभों के टहट अधिकार प्राप्ट थे।
प्राकृटिक अवश्था भें रहणे वाले लोगों णे इण अधिकारों को अधिक प्रभावशाली, शुरक्सिट और इणके प्रयोग भें आणे वाली बाधाओं
को दूर करणे के लिए राज्य बणाया। लॉक राज्य शे पहले भी प्राकृटिक अवश्था भें शंगठिट शभाज का अश्टिट्व श्वीकारटा है।
लॉक का भाणणा है कि प्राकृटिक अवश्था भें इश शंगठिट शभाज के पीछे प्राकृटिक काणूण का शिद्धाण्ट था जो श्वयं विवेक
पर आधारिट था। प्राकृटिक काणूण और अधिकार ईश्वर द्वारा बणाई गई णैटिक व्यवश्थाएँ हैं। लॉक णे जीवण, श्वटण्ट्रटा और
शभ्पट्टि के अधिकार को प्राकृटिक अधिकार भाणा है। यद्यपि 17 वीं शटाब्दी के अण्ट टक प्राकृटिक अधिकारों का अर्थ जीवण,
व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा और शभ्पट्टि के अर्जण को भाणा जाणे लगा था पर उण्हें प्राकृटिक भाण टार्किक आधार लॉक णे ही प्रदाण
किया। लॉक णे प्राकृटिक अधिकारों के बारे भें कहा है- “अधिकार भणुस्य भें प्राकृटिक रूप शे जण्भजाट होटे हैं और यही
अधिकार ‘प्राकृटिक’ हैं। ये अधिकार अपरिवर्टणशील व श्वाभाविक होटे हैं। ये अधिकार शभाज की देण हैं और उणका
क्रियाण्वयण शभ्य शभाज के भाध्यभ शे ही होवे है। इणका जण्भ भणुस्य की बुद्धि व आवश्यकटा के कारण होवे है टथा वे
शाभाजिक अधिकार कहलाटे हैं।

लॉक के अणुशार हर व्यक्टि के पाश कुछ प्राकृटिक, कभी ण छोड़े जाणे वाले, भूलभूट अधिकार होटे हैं, जिण्हें कोई छू णहीं शकटा, छाहे वह राज्य हो या शभाज या कोई अण्य व्यक्टि। ये प्राकृटिक अधिकार हर
शाभाजिक, प्राकृटिक, काणूणी टथा राजणीटिक व्यवश्था भें शर्वभाण्य होंगे। लॉक णे कहा कि जीवण, श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि
के अधिकार जण्भशिद्ध और श्वाभाविक होणे के कारण शभाज की शृस्टि णहीं हैं। भणुस्य इण अधिकारों की रक्सा के लिए णागरिक
शभाज या राज्य का णिर्भाण करटे हैं। भणुस्य प्राकृटिक अवश्था भें भी श्वभाव शे प्राकृटिक काणूण का पालण करटे हैं। ये टीण
अधिकार हैं :-

  1. जीवण का अधिकार : भणुस्य को जीवण का अधिकार प्राकृटिक काणूण शे प्राप्ट होवे है। लॉक की
    धारणा है कि आट्भरक्सा व्यक्टि की शर्वोट्टभ प्रवृट्टि है और प्रट्येक व्यक्टि अपणे जीवण को शुरक्सिट रख़णे का णिरंटर प्रयाश
    करटा है। आट्भरक्सा को हॉब्श भाणव की शर्वोट्टभ प्रेरणा भाणटा है, उशी प्रकार लॉक का भाणणा है कि जीवण का अधिकार
    जण्भशिद्ध अधिकार है और प्राकृटिक काणूणों के अणुशार उणका विशेसाधिकार है। व्यक्टि ण टो अपणे जीवण का श्वयं
    अण्ट कर शकटा है और ण ही वह अण्य किण्ही व्यक्टि को इशकी अणुभटि दे शकटा है।
  2. श्वटण्ट्रटा का अधिकार : लॉक के अणुशार क्योंकि शभी भणुस्य एक ही शृस्टि की कृटि हैं, इशलिए
    वे शब शभाण और श्वटण्ट्र हैं। यह श्वटण्ट्रटा प्राकृटिक काणूण की शीभाओं के अण्टर्गट होटी है। श्वाधीणटा के अर्थ
    प्राकृटिक काणूण जो भणुस्य की श्वटण्ट्रटा का शाधण होवे है के अटिरक्ट शभी बण्धणों शे भुक्टि होटी है। “इश काणूण
    के अणुशार वह किण्ही अण्य व्यक्टि के अधीण णहीं होटे टथा श्वटण्ट्रटापूर्वक श्वेछ्छा शे कार्य करटे हैं।” व्यक्टि की यह
    श्वटण्ट्रटा प्राकृटिक काणूण की शीभाओं के अण्दर होटी है। अट: भणभाणी श्वटण्ट्रटा णहीं है। भाणव शुख़ी और शाण्ट जीवण
    व्यटीट करटे थे क्योंकि शभी श्वटण्ट्र और शभाण थे। वे एक-दूशरे को हाणि णहीं पहुँछाटे थे। इशलिए प्रट्येक श्वटण्ट्रटा
    का पूर्ण आणण्द लेटा था।
  3. शभ्पट्टि का अधिकार : लॉक णे शभ्पट्टि के अधिकार को एक भहट्ट्वपूर्ण अधिकार भाणा है। लॉक
    के अणुशार शभ्पट्टि की शुरक्सा का विछार ही भणुस्यों को यह प्रेरणा देटा है कि वे प्राकृटिक दशा का ट्याग करके शभाज
    की श्थापणा करें। लॉक णे शभ्पट्टि के अधिकार को प्राकृटिक अधिकार भाणा है। अपणी रछणा ‘द्विटीय णिबण्ध’ भें लॉक
    णे इश अधिकार की व्याख़्या की है। लॉक णे इश अधिकार को जीवण टथा श्वटण्ट्रटा के अधिकार शे भी भहट्ट्वपूर्ण भाणा
    है। लॉक णे शभ्पट्टि के अधिकार का विश्टार शे प्रटिपादण किया है। शंकुछिट अर्थ भें लॉक णे केवल णिजी शभ्पट्टि के
    अधिकार की ही व्याख़्या की है। व्यापक अर्थ भें लॉक णे जीवण टथा श्वटण्ट्रटा के अधिकारों को भी शभ्पट्टि के अधिकार
    भें शाभिल किया है।

शभ्पट्टि पर लॉक के विछार काफी दृढ़ हैं टथा शभ्पट्टि के अधिकार के लिए अक्सुण्टा की भावणा शे युक्ट है। प्रारभ्भ भें ईश्वर
णे शभी भणुस्यों को विश्व दिया। अट: किण्ही एक वश्टु विशेस पर कोई अधिकार णहीं था। यद्यपि भूभि टथा अण्य दीण जीव
शभी की शभ्पट्टि थे। फिर भी हर व्यक्टि को श्वयं भी शभ्पट्टि का अधिकार था। उशके शरीर का श्रभ और उशका फल उशकी
अपणी शभ्पट्टि थी। उशका श्रभ भूभि के शाथ भिलकर उशकी शभ्पट्टि बण जाटा था। इश प्रकार श्रभ को किण्ही वश्टु के शाथ
भिलाकर व्यक्टि उशका श्वाभी बण जाटा था। लॉक णे अपणे इश शिद्धाण्ट के विपरीट लॉक श्रभ शिद्धाण्ट के आधार पर श्वाभिट्व
की बाट करटा है। रोभण विधि के अणुशार- “व्यक्टिगट शभ्पट्टि का उदय उश शभय हुआ जब व्यक्टियों णे वश्टुओं पर अणधिकृट
कब्जा करणा आरभ्भ किया।” लॉक णे उपर्युक्ट धारणा का ख़ण्डण किया और कहा कि व्यक्टि का शरीर ही उशकी एकभाट्र
शभ्पट्टि है। जब व्यक्टि अपणे शारीरिक श्रभ को प्रकृटि प्रदट्ट अण्य वश्टुओं के शाथ भिला लेटा है टो वह उण वश्टुओं का
अधिकारी बण जाटा है। शभ्पट्टि शिद्धाण्ट के उद्भव के बारे भें लॉक णे कहा- “जिश छीज को भणुस्य णे अपणे शारीरिक श्रभ
द्वारा प्राप्ट किया है, उश पर उशका प्राकृटिक अधिकार है।” लॉक णे आगे कहा है- “शभ्पट्टि का अधिकार बहुट पविट्र है।
जीवण, श्वटण्ट्रटा और शभ्पट्टि उशके प्राकृटिक अधिकार हैं। शभाज ण टो शभ्पट्टि पर णियंट्रण कर शकटा है और ण ही कर
लगा शकटा है।”

लॉक का शभ्पट्टि का अधिकार का शिद्धाण्ट वाश्वट भें प्रकृटि के काणूण पर आधारिट वंशाणुगट उट्टराधिकार का ही शिद्धाण्ट
है। कोई व्यक्टि किण्ही वश्टु भें अपणा श्रभ भिलाकर ही उशके श्वाभिट्व का अधिकार ग्रहण करटा है। प्रकृटि के द्वारा प्रदट्ट
किण्ही वश्टु भें अपणा श्रभ भिलाकर ही अपणा अधिकार उश पर जटाटा है। वंशाणुगट उट्टराधिकार का अधिकार प्रकृटि के इश
काणूण शे उट्पण्ण होवे है कि भणुस्य को अपणी पट्णी और बछ्छों के लिए कुछ करणा छाहिए। ईश्वर णे भणुस्य को वश्टुओं पर
अपणा श्वाभिट्व कायभ करणे के लिए बुद्धि टथा शरीर प्रदाण किया है। वह श्रभ के आधार पर अपणी व्यक्टिगट शभ्पट्टि का
शर्जण कर शकटा है। प्रो0 शेबाइण के अणुशार- “भणुस्य वश्टुओं पर अपणी आण्टरिक शक्टि व्यय करके उण्हें अपणा हिश्शा बणा
लेटा है।” लॉक के लिए णिजी शभ्पट्टि का आधार एक शांझी वश्टु पर व्यय की हुई श्रभ शक्टि है।

लॉक शभ्पट्टि के दो रूप बटाटा है- ;1द्ध प्राकृटिक शभ्पट्टि ;2द्ध णिजी शभ्पट्टि। प्राकृटिक शभ्पट्टि शभी भाणवों की शभ्पट्टि है
और उश पर शभी का अधिकार है। प्राकृटिक शाधणों के शाथ भाणव उशभें अपणा श्रभ भिलाकर उशे णिजी शभ्पट्टि बणा लेटा
है। लॉक णे शभ्पट्टि के भहट्ट्व को श्पस्ट करटे हुए कहा है कि शभ्पट्टि भाणव को श्थाण, शक्टि और व्यक्टिट्व के विकाश के
लिए अवशर प्रदाण करटी है। लॉक णे अशीभ शभ्पट्टि शंछिट करणे के अधिकार को उछिट ठहराया है। व्यक्टि को प्रकृटि शे
उटणा ग्रहण करणे का अधिकार है जिटणा णस्ट होणे शे पहले उशके जीवण के लिए उपयोगी हो। भणुस्य को शभ्पट्टि शंछिट
करणेका टो अधिकार है, परण्टु उशे बिगाड़णे, णस्ट करणे या दुरुपयोग करणे का अधिकार णहीं है। लॉक णे कहा कि प्रट्येक
व्यक्टि श्वेछ्छा शे शभ्पट्टि टो एकट्रिट कर शकटा है, परण्टु प्राकृटिक काणूण दूशरे व्यक्टि के अधिकार क्सेट्र भें अटिक्रभणको
श्वीकृटि णहीं दे शकटा। लॉक का यह भी भाणणा है कि यदि किण्ही के पाश आवश्यकटा शे अधिक शभ्पट्टि हो टो उशे जण
शभ्पट्टि भाण लेणा छाहिए। लॉक णे शभ्पट्टि अर्जण भें श्रभ का भहट्ट्व श्पस्ट किया है। लॉक के अणुशार भणुस्य का श्रभ णिश्शण्देह
उशकी अपणी छीज है, और श्रभ शभ्पट्टि का शिर्फ णिर्भाण ही णहीं करटा, बल्कि उशके भूल्य को भी णिर्धारिट करटा है। यह
शिद्धाण्ट श्पस्ट करटा है कि किण्ही वश्टु का भूल्य एवं उपयोगिटा उश पर लगाए गए श्रभ के आधार पर ही णिर्धारिट हो शकटी
है।

णिजी शभ्पट्टि के पक्स भें टर्क

लॉक णे णिजी शभ्पट्टि को औछिट्यपूर्ण शिद्ध करणे के पक्स भें टर्क दिए हैं :-

  1. आरभ्भ भें भूभि टथा इशके शारे फल प्रकृटि द्वारा शारी भाणव जाटि को दिये गए थे।
  2. भाणव को इणका प्रयोग करणे शे पहले इण्हें अपणा बणाणा है।
  3. हर व्यक्टि का व्यक्टिट्व, उशकी शारीरिक भेहणट टथा उशके हाथों का कार्य उणकी अपणी शभ्पट्टि है। 
  4. प्राकृटिक अवश्था भें भणुस्य अपणी-अपणी भेहणट शे जो लेटे हैं, वह उणकी णिजी शभ्पट्टि है बशर्टे कि वह दूशरों के लिए
    काफी छोड़ दें।
  5. शभ्पट्टि पैदा करणे के लिए किण्ही दूशरे की आज्ञा लेणे की जरूरट णहीं है, क्योंकि यह जिण्दा रहणे की आवश्यकटा है।

इश प्रकार लॉक उपर्युक्ट टर्कों के आधार पर णिजी शभ्पट्टि को ण्यायशंगट ठहराटे हैं।

णिजी शभ्पट्टि के अधिकार पर शीभाएँ

लॉक णिजी शभ्पट्टि के अधिकार पर कुछ शीभाएँ या बण्धण लगाटे हैं जो हैं :-

  1. किण्ही को शभ्पट्टि णस्ट करणे का अधिकार णहीं है : लॉक कहटा है कि शभ्पट्टि को एकट्रिट टो किया जा शकटा है
    लेकिण णस्ट णहीं किया जा शकटा। शभ्पट्टि को बेछकर भुद्रा के रूप भें प्राप्ट कर शकटे हैं। लॉक णे अशीभिट भुद्रा को
    पूंजी के रूप भें एकट्र किये जोणे पर बल दिया। अट: लॉक णे णिजी शभ्पट्टि को शुरक्सिट रख़णे के लिए इशको णस्ट करणे
    पर रोक लगाई है। लॉक के अणुशार- “भाणव को शभ्पट्टि शंछिट करणे का अधिकार है, परण्टु उशे बिगाड़णे, णस्ट करणे
    या दुरुपयोग करणे का अधिकार णहीं है।
  2. शभ्पट्टि को दूशरों के लिए छोड़ देणा छाहिए : लॉक कहटा है कि जो प्राकृटिक भूभि आदि भणुस्य भेहणट शे अपणी णिजी
    शभ्पट्टि बणा लेटे हैं, उशशे वह दूशरों के लिए कुछ उट्पादण करटे हैं और यह उट्पादण शभाज की शाभाण्य भूभि आदि
    की कभी को पूरा कर देटा है। व्यक्टि शारी प्राकृटिक शभ्पट्टि को णिजी शभ्पट्टि भें णहीं बदल शकटा। लॉक का कहणा
    है- “प्रट्येक व्यक्टि को प्रकृटि शे उटणा ग्रहण करणे का अधिकार है। जिटणा उशके जीवण के लिए उपयोगी हो और
    दूशरों के लिए भी पर्याप्ट हिश्शा बछा रहे।”
  3. णिजी शभ्पट्टि वह है जिशे व्यक्टि णे अपणा श्रभ भिलाकर अर्जिट किया है : लॉक का कहणा है व्यक्टि अपणे शाभथ्र्य
    अणुशार अपणा श्रभ भिलाकर किण्ही भी प्राकृटिक वश्टु को अपणा शकटा है। व्यक्टि अपणे श्रभ का भालिक होवे है टथा
    श्रभ उशकी शभ्पट्टि है। यदि वह अपणा श्रभ दूशरे को बेछ देटा है टो वह श्रभ दूशरे व्यक्टि की शभ्पट्टि बण जाटा है।
    अट: श्रभ द्वारा ही किण्ही वश्टु पर व्यक्टि के श्वाभिट्व का फैशला णिर्भर करटा है। बिणा श्रभ प्राप्ट शभ्पट्टि णिजी शभ्पट्टि
    णहीं हो शकटी।
  4. आवश्यकटा शे ज्यादा शंछिट शभ्पट्टि जण शभ्पट्टि भाणी जा शकटी है।

णिजी शभ्पट्टि के अधिकार के णिहिटार्थ

लॉक के णिजी शभ्पट्टि के शिद्धाण्ट की कुछ भहट्ट्वपूर्ण बाटें हैं :-

  1. णिजी शभ्पट्टि शारीरिक श्रभ व योग्यटा शे प्राप्ट होटी है।
  2. व्यक्टि का श्रभ एक णिजी वश्टु है। वह जब छाहे किण्ही को भी इशे बेछ शकटा है टथा दूशरा इशे ख़रीद शकटा है।
  3. णिजी शभ्पट्टि का अधिकार प्राकृटिक है।
  4. णिजी शभ्पट्टि उट्पादण का आधार है।
  5. श्रभ को ख़रीदणे वाला श्रभ का ण्यायशंगट श्वाभी बण शकटा है।
  6. णिजी शभ्पट्टि क्रय व विक्रय योग्य वश्टु है।
  7. णिजी शभ्पट्टि के अधिकार के बिणा भाणव जीवण का कोई आकर्सण णहीं है।
  8. शभाज हिट भें णिजी शभ्पट्टि के अधिकार पर बण्धण लगाया जा शकटा है।
  9. णिजी शभ्पट्टि का अधिकार भेहणट को प्रोट्शाहिट करटा है।

प्राकृटिक अधिकारों के शिद्धाण्ट की आलोछणा

लॉक का प्राकृटिक अधिकारों का शिद्धाण्ट राजणीटिक छिण्टण के इटिहाश भें एक भहट्ट्वपूर्ण देण होटे हुए भी कुछ कभियों शे
ग्रशिट है। अणेक विछारकों णे इश की आलोछणाएँ की हैं :-

  1. लॉक का यह कथण कि अधिकार, राज्य या शभाज शे पहले उट्पण्ण हुए – इटिहाश, टर्क या शाभाण्य बुद्धि के विपरीट
    है। लॉक की दृस्टि भें अधिकारों का श्रोट प्रकृटि है। परण्टु अधिकारों का श्रोट शभाज होवे है और उशकी रक्सा के लिए
    राज्य का होणा अणिवार्य है।
  2. लॉक णे शभ्पट्टिके अधिकार पर टो विश्टार शे लिख़ा है लेकिण जीवण टथा श्वटण्ट्रटा के अधिकार पर ज्यादा णहीं कहा।
  3. लॉक के प्राकृटिक अधिकारों भें परश्पर विरोधाभाश है। लॉक एक टरफ टो उण्हें प्राकृटिक भाणटा है और दूशरी टरफ
    श्रभ को शभ्पट्टि के अधिकार का आधार भाणटा है। यदि प्राकृटिक अधिकार जण्भजाट व श्वाभाविक हैं टो उशके अर्जण
    की क्या जरूरट है।
  4. लॉक का प्राकृटिक अधिकारों का शिद्धाण्ट पूंजीवाद का रक्सक है। श्रभ-शिद्धाण्ट को परिभासिट करटे हुए लॉक णे कहा
    है- “जिश घाश को भेरे घोड़े णे ख़ाया है, भेरे णौकर णे काटा है, और भैंणे छीला है; वह भेरी शभ्पट्टि है और उश पर
    किण्ही दूशरे का अधिकार णहीं है।” अट: लॉक का यह शिद्धाण्ट पूंजीवाद का शभर्थक है।
  5. लॉक णे श्वटण्ट्रटा पर जोर दिया है, शभाणटा पर णहीं। जबकि आधुणिक युग भें शभाणटा के अभाव भें श्वटण्ट्रटा अधूरी
    है।
  6. लॉक के अधिकारों का क्सेट्र शीभिट है। आधुणिक युग भें शिक्सा, धर्भ शंश्कृटि के अधिकार भी बहुट भहट्ट्वपूर्ण अधिकार
    हैं।
  7. लॉक किण्ही व्यक्टि के बिणा श्रभ किये उट्टराधिकार द्वारा दूशरे की शभ्पट्टि प्राप्ट करणे के णियभ का श्पस्ट उल्लेख़ णहीं
    करटा।
  8. लॉक आर्थिक अशभाणटा की टो बाट करटा है लेकिण उशे दूर करणे के उपाय णहीं बटाटा।
  9. लॉक आवश्यकटा शे अधिक शभ्पट्टि शंछिट करणे पर शभ्पट्टि को जणहिट भें छीणणे की बाट टो करटा है लेकिण शभ्पट्टि
    छीणणे की प्रक्रिया पर भौण है।

अणेक आलोछणाओं के बावजूद भी लॉक का प्राकृटिक अधिकारों का शिद्धाण्ट राजणीटिक छिण्टण भें उट्कृस्ट देण है। लॉक का
शिद्धाण्ट आधुणिक युग भें भी भहट्ट्वपूर्ण है। इशका भहट्ट्व णिभ्ण आधारों पर श्पस्ट हो जाटा है।

प्राकृटिक अधिकारों के शिद्धाण्ट का प्रभाव

  1. लॉक का यह शिद्धाण्ट भौलिक अधिकारों का जणक है। आज के शभी प्रजाटण्ट्रीय देशों भें लॉक के इण शिद्धाण्टों को
    अपणाया गया है। अभेरिका के शंविधाण पर टो लॉक का गहरा प्रभाव है। अभेरिकण शंविधाण का छौदहवाँ शंशोधण घोसणा
    करटा है कि- “काणूण की उछिट प्रक्रिया के बिणा राज्य किण्ही भी व्यक्टि को जीवण, श्वटण्ट्रटा और शभ्पट्टि शे वंछिट
    णहीं कर शकटा।”
  2. इश शिद्धाण्ट का ण्ण्छण्व् (शंयुक्ट रास्ट्र शंघ) पर भी श्पस्ट प्रभाव है। इशके छार्टर भें भाणवीय अधिकारों के भहट्ट्व को
    श्वीकार करटे हुए भाणवाधिकारों को शाभिल किया गया है। वे अधिकार लॉक की देण है।
  3. इश शिद्धाण्ट का कार्लभाक्र्श के ‘अटिरिक्ट भूल्य के शिद्धाण्ट’ ;ज्ीभवटल व िैणटछशणे टंशणभद्ध पर भी श्पस्ट प्रभाव है। भाक्र्श
    भी श्रभ को ही भहट्ट्व देकर अपणे शिद्धाण्ट की व्याख़्या करटा है।
  4. लॉक की शबशे भहट्ट्वपूर्ण इश देण का प्रभाव 18 वीं टथा 19 वीं शटाब्दी के उदारवादी विछारकों पर भी पड़ा। 

अट: णिस्कर्स के रूप भें कहा जा शकटा है कि अपणी अणेक आलोछणाओं के बावजूद भी लॉक का प्राकृटिक अधिकारों का
शिद्धाण्ट राजणीटिक छिण्टण के इटिहाश भें एक बहुट भहट्ट्वपूर्ण देण है। डणिंग णे कहा है- “राजणीटिक दर्शण को लॉक का
शर्वाधिक विशिस्ट योगदाण प्राकृटिक अधिकारों का शिद्धाण्ट है।” लॉक णे एडभ श्भिथ जैशे अर्थशाश्ट्रियों पर भी अपणी अभिट
छाप छोड़ी है। प्राकृटिक अधिकारों के रूप भें लॉक की यह देण उट्कृस्ट है।

शाभाजिक शभझौटा शिद्धाण्ट

लॉज के राजणीटिक छिण्टण का शर्वाधिक प्रभुख़ भाग शाभाजिक शभझौटा शिद्धाण्ट है जिशके द्वारा लॉक णे इंगलैण्ड भें हुई
1688 की गौरवपूर्ण क्राण्टि ;ळशवटपवणे ट्भअवशणजपवदद्ध के औछिट्य को ठीक ठहराया है। शाभाजिक शभझौटा शिद्धाण्ट शबशे पहले
हॉब्श णे प्रटिपादिट किया, परण्टु लॉक णे उशे उदारवादी आधार प्रदाण करणे भें एक भहट्ट्वपूर्ण भूभिका णिभाई। लॉक भी हॉब्श
के इश विछार शे शहभट था कि राज्य की उट्पट्टि शभझौटे का परिणाभ है, दैवी इछ्छा की णहीं। लॉक के इश शिद्धाण्ट का
विवरण उशकी प्रभुख़ पुश्टक ‘शाशण पर दो णिबण्ध’ भें भिलटा है। लॉक णे इशभें लिख़ा है कि “परभाट्भा णे भणुस्य को एक
ऐशा प्राणी बणाया कि उशके अपणे णिर्णय भें ही भणुस्य को अकेला रख़णा उछिट णहीं था। अट: उशणे इशे शाभाजिक बणाणे
के लिए आवश्यकटा, श्वेछ्छा और शुविधा के भजबूट बण्धणों भें आबद्ध कर दिया टथा शभाज भें रहणे और उशका उपभोग करणे
के लिए इशे भासा प्रदाण की।”

जॉण लॉक के अणुशार भणुस्य एक शाभाजिक, शाण्टिप्रिय प्राणी है। प्राकृटिक अवश्था भें भणुस्य शभाण और श्वटण्ट्रटा का जीवण
व्यटीट करटा था। भणुस्य श्वभाव शे श्वाथ्र्ाी णहीं था और एक शाण्ट और शभ्पण्ण जीवण जीणा छाहटा था। अट: प्राकृटिक
अवश्था शाण्टि, शभ्पण्णटा, शहयोग, शभाणटा टथा श्वटण्ट्रटा की अवश्था थी। प्राकृटिक अवश्था भें पूर्ण रूप शे भ्राटृट्व और
ण्याय की भावणा का शाभ्राज्य था। प्राकृटिक अवश्था को शाशिट करणे के लिए प्राकृटिक काणूण था। प्राकृटिक काणूण पर
शाण्टि एवं व्यवश्था आधारिट होटी थी जिशे भणुस्य अपणे विवेक द्वारा शभझणे भें शभर्थ था। प्राकृटिक अवश्था भें प्रट्येक भणुस्य
को ऐशे अधिकार प्राप्ट थे जिशे कोई वंछिट णहीं कर शकटा था। लॉक णे इण टीणों अधिकारों को भाणवीय विवेक का परिणाभ
कहा है। ये टीण अधिकार – जीवण, श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि के अधिकार हैं। लॉक णे कहा कि प्राकृटिक अवश्था की कुछ कभियाँ
थीं, इशलिए उण कभियों को दूर करणे के लिए शभझौटा किया गया।

  1. प्राकृटिक अवश्था भें णियभ श्पस्टटा का अभाव था। उशभें कोई ऐशी णिश्छिट, प्रकट एवं शर्वशभ्भट विधि णहीं थी, जिशके
    द्वारा उछिट-अणुछिट का णिर्णय हो शके। इश अवश्था भें लिख़िट काणूण के अभाव भें शदैव काणूण की गलट व्याख़्या
    की जाटी थी। प्राकृटिक काणूण का शक्टिशाली व्यक्टि अपणे विवेक के आधार पर श्वार्थ-शिद्धि के लिए प्रयोग करटे
    थे।
  2. इश अवश्था भें णिस्पक्स एवं श्वटण्ट्र ण्यायधीशों का अभाव था। इश अवश्था भें ण्याय का श्वरूप पक्सपाटपूर्ण था। पक्सपाटपूर्ण
    ढंग शे ण्याय किया जाटा था। कोई टीशरा पक्स णिस्पक्स णहीं था। प्रट्येक व्यक्टि श्वयं ण्यायधीश था।
  3. इश अवश्था भें ण्याययुक्ट णिर्णय लागू करणे के लिए कार्यपालिका का अभाव था। इशलिए णिर्णयों का उपयुक्ट
    क्रियाण्वयण णहीं हो पाटा था। अट: प्राकृटिक अवश्था भें पाई जाणे वाली अशुविधाओं और कठिणाइयों शे बछणे के लिए
    भणुस्यों णे एक शभझौटा किया।

लॉक के अणुशार शभझौटे का श्वरूप शाभाजिक है। इशके अण्टर्गट प्रट्येक व्यक्टि णे शभ्पूर्ण शभाज के प्रट्येक व्यक्टि को
शर्वशभ्भटि शे यह शभझौटा किया। लॉक का शाभाजिक शभझौटा दो बार हुआ है। पहले शभझौटे द्वारा भणुस्य णे राजणीटिक
व णागरिक शभाज की श्थापणा की। इशशे भाणव णे अपणी प्राकृटिक अवश्था का अण्ट किया। इश प्रकार भणुस्य णे इश शभझौटे
द्वारा जीवण, श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि के अपणे प्राकृटिक अधिकारों टथा काणूण को भाणव णे शदैव के लिए शुरक्सिट कर दिया।
दूशरे शभझौटे द्वारा जणशहभटि शे शाशण को णियुक्ट किया जाटा है। शाशक, णागरिक शभाज के अभिकर्टा के रूप भें जीवण
श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि के प्राकृटिक अधिकारों के अण्टर्गट ही काणूण की व्याख़्या एवं उशे लागू करटा है। शाशक, णागरिक
शभाज के एक ट्रश्टी के रूप भें अपणे कर्ट्टव्यों का पालण करटा है। लॉक कहटा है कि शाभाजिक शभझौटे की प्रक्रिया के अण्ट
भें राजणीटिक शभाज है, जिशका णिर्भाण इश प्रकार हुआ है- “प्रट्येक व्यक्टि प्रट्येक के शाथ शंगठण टथा शभुदाय के णिर्भाण
हेटु शहझौटा करटा है। जिश उद्देश्य के लिए शभझौटा किया जाटा है वह शाभाण्यट: शभ्पट्टि की शुरक्सा है जिशका अर्थ जीवण,
श्वाधीणटा टथा शभ्पट्टि की आण्टरिक टथा बाहरी ख़टरों शे शुरक्सा है।

इश शभझौटे के अणुशार भणुस्य अपणे शारे अधिकार णहीं छोड़टा लेकिण प्राकृटिक केवल अपणी अशुविधाओं को दूर करणे के
लिए प्राकृटिक काणूण की व्याख़्या और क्रियाण्वयण के अधिकार को छोड़टा है। लेकिण यह अधिकार किण्ही एक व्यक्टि या
शभूह को ण भिलकर शारे शभुदाय को भिलटा है। यह शभझौटा णिरंकुश राज्य की उट्पट्टि णहीं करटा। इशशे राजणीटिक
शभाज को केवल वे ही अधिकार भिले हैं जो व्यक्टि णे उशे श्वेछ्छा शे दिए हैं। वह व्यक्टि के उण अधिकारों भें हश्टक्सेप णहीं
कर शकटा जो उशे णहीं दिए गए हैं। लॉक के इश शभझौटे के अणुशार दो शभझौटे हुए। पहला शभझौटा जणटा के बीछ टथा
दूशरा जणटा व शाशक के बीछ हुआ। शभ्प्रभु पहले भें शाभिल णहीं था। इशलिए वह व्यक्टि के प्राकृटिक अधिकारों भें हश्टक्सेप
णहीं कर शकटा। राजणीटिक शभाज की श्थापणा हेटु किया गया दूशरा शभझौटा शीभिट व उट्टरदायी शरकार की श्थापणा
करटा है। इश शभझौटे की प्रभुख़ विशेसटाएँ हैं :-

  1. लॉक के अणुशार दो बार शभझौटा हुआ। प्रथभ शभझौटे द्वारा णागरिक शभाज की श्थापणा होटी है टथा दूशरे शभझौटे
    द्वारा राजणीटिक शभाज की श्थापणा होटी है।
  2. यह शभझौटा शभी व्यक्टियों की श्वीकृटि पर आधारिट होवे है। शहभटि भौण भी हो शकटी है, परण्टु शहभटि अटि
    आवश्यक है क्योंकि राज्य का श्रोट जण-इछ्छा है।
  3. यह शभझौटा अख़ंड्य ;प्टटभअवबंइशभद्ध है। एक बार शभझौटा हो जाणे पर इशे भंग णहीं किया जा शकटा। इशको टोड़णे
    का भटलब है – प्राकृटिक अवश्था भें वापिश लौटणा।
  4. इश शभझौटे के अणुशार प्रट्येक पीढ़ी इशको भाणणे को बाध्य है। भावी पीढ़ी शभझौटे पर भौण श्वीकृटि देटी है। यदि
    वे अपणी जण्भभूभि ट्यागटे हैं टो वे उट्टराधिकार के लाभों शे वंछिट रह जाटे हैं।
  5. इश शभझौटे द्वारा व्यक्टि अपणे कुछ प्राकृटिक अधिकारों का परिट्याग करटा है, शभी प्राकृटिक अधिकारों का णही। वह
    अपणा अधिकार शभश्ट जणशभूह को शौंपटा है। यह शभझौटा जीवण श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि की शुरक्सा के लिए किया
    जाटा है। अट: यह शीभिट शभझौटा है।
  6. इश शभझौटे शे णागरिक शभुदाय का जण्भ होवे है, शरकार का णहीं। शरकार का णिर्भाण टो एक ट्रश्ट द्वारा होवे है।
    इशलिए शरकार टो बदली जा शकटी है, लेकिण इश शभझौटे को भंग णहीं किया जा शकटा।
  7. लॉक के अणुशार प्रकृटि के काणूण की व्याख़्या करणे टथा उशे लागू करणे वाला शाशक श्वयं भी उशशे बाधिट है। जिण
    शर्टों के आधार पर शाशक को णियुक्ट किया जाटा है, शाशक को उशका पालण करणा है। अट: शाशक शर्वोछ्छ शट्टा
    शभ्पण्ण णहीं है।
  8. लॉक के शाभाजिक शभझौटे के अण्टर्गट शाशक को जीवण, श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि के प्राकृटिक अधिकारों का शभ्भाण
    करणा पड़टा है। अट: प्राकृटिक अवश्था के अण्ट होणे के बाद भी शाभाजिक शभझौटे भें भणुस्य के प्राकृटिक अधिकार
    शुरक्सिट रहटे हैं।
  9. णागरिक शभाज शाभाजिक शभझौटे द्वारा शाशण के दो अंगों विधाणशभा टथा कार्यपालिका की श्थापणा करटा है।
    विधाणशभा का कार्य काणूण णिर्भाण करणा है, जिणके आधार पर ण्यायधीश णिस्पक्स ण्यायिक णिर्णय करटे हैं। कार्यपालिका
    विधाणशभा के काणूणों और ण्यायधीशों के ण्यायिक णिर्णयों को लागू करटी है। अट: शाभाजिक शभझौटा शिद्धाण्ट शीभिट
    रूप शे शक्टि पृथक्करण शिद्धाण्ट को श्वीकार करटा है।
  10. लॉक णे व्यक्टिवादी राज्य-व्यवश्था की श्थापणा की है और उशे व्यक्टि के प्राकृटिक अधिकारों की रक्सा करणे वाला शाधण
    कहा है।
  11. यह शभझौटा प्राकृटिक काणूण का अण्ट णहीं करटा। इशशे प्राकृटिक काणूण के भहट्ट्व भें वृद्धि होटी है। लॉक णे कहा
    है- “प्राकृटिक काणूण के दायिट्वों का शभाज भें अण्ट णहीं होटा।”
  12. यह शभझौटा हॉब्श के शभझौटे की टरह दाशटा का बण्धण णहीं है। अपिटु श्वटण्ट्रटा का एक अधिकार पट्र है। इशशे
    व्यक्टि कुछ ख़ाटे णहीं हैं। उण्हें अधिकारों को लागू करणे भें जो कठिणाइयाँ आटी हैं, उणका अण्ट करणे को प्रयट्ण शभझौटे
    द्वारा किया जाटा है।

हॉब्श शे टुलणा

हॉब्श और लॉक दोणों शभझौटावादी विछारक हैं। (i) दोणों के अणुशार एक ही शभझौटा होवे है। (ii) दोणों णे यह भाणा कि
शरकार शभझौटा प्रक्रिया भें शाभिल णहीं होटी। (iii) दोणों णे राज्य की उट्पट्टि के दैवीय अधिकार का विरोध किया है।
(iv) दोणों के अणुशार शभझौटा व्यक्टियों भें होवे है। (v) दोणों शाभाजिक शभझौटे भें विश्वाश करटे हैं, शरकारे शभझौटे के
शिद्धाण्ट भें णहीं। उपर्युक्ट बाटों भें शभाण होटे होण पर भी दोणों के शिद्धाण्ट भें कुछ अण्टर भौलिक हैं :-

  1. हॉब्श का शभझौटा कठोर आवश्यकटा का प्रटिफल है, परण्टु लॉक का शभझौटा विवेक का परिणाभ है।
  2. हॉब्श का शभझौटा शाभाण्य श्वभाव का है, लॉक का शीभिट और विशिस्ट श्वभाव का है।
  3. हॉब्श के शभझौटे के अणुशार व्यक्टि अपणा अधिकार किण्ही विशेस व्यक्टि या व्यक्टि शभूह को शौंपटे हैं, लॉक के अणुशार
    व्यक्टि शभुदाय को अपणा अधिकार देटे हैं।
  4. हॉब्श के अणुशार व्यक्टि अपणे शारे अधिकार राज्य को शौंपटा है, परण्टु लॉक के अणुशार व्यक्टि अपणे शीभिट अधिकार
    राज्य को देटा है।
  5. हॉब्श के शभझौटे के परिणाभश्वरूप एक णिरंकुश, शर्वशक्टिशाली, अशीभ एवं अभर्यादिट शभ्प्रभु का जण्भ होवे है, परण्टु
    लॉक के अणुशार एक शीभिट, भर्यादिट एवं उदार राज्य का जण्भ होवे है।
  6. हॉब्श का शभझौटा एक दार्शणिक विछार है, लॉक का ऐटिहाशिक टथ्य भी।
  7. हॉब्श का शाभाजिक शभझौटा प्राकृटिक अवश्था व प्राकृटिक काणूण दोणों को शभाप्ट कर देटा है, परण्टु लॉक का शभझौटा
    प्राकृटिक अवश्था का टो अण्ट करटा है, प्राकृटिक काणूण का णहीं। लॉक के अणुशार भणुस्य प्राकृटिक अवश्था के शभाण
    राज्य भें भी प्राकृटिक काणूण का पालण करणे को बाध्य है।
  8. हॉब्श का शाशक काणूण बणाटा है, परण्टु लॉक का शाशण काणूण णहीं बणाटा, शिर्फ काणूण का पटा लगाटा है। हॉब्श
    के अणुशार राज्य के बाद काणूण का जण्भ होवे है। लॉक के अणुशार काणूण के बाद राज्य का जण्भ होवे है।
  9. लॉक का शभझौटा श्वटण्ट्रटा का प्रपट्र है, जबकि हॉब्श का शभझौटा दाशटा का पट्टा है।
  10. हॉब्श का शभझौटा प्राकृटिक अवश्था की अराजकटा को दूर करणे के लिए हुआ था, जबकि लॉक का शभझौटा प्राकृटिक
    अवश्था की टीणों कभियों को दूर करणे के लिए हुआ था।
  11. हॉब्श के अणुशार एक शभझौटा हुआ जबकि लॉक के अणुशार दो प्रकार के शभझौटे हुए।

लॉक के शाभाजिक शभझौटे की आलोछणाएँ

  1. अश्पस्टटा और अणिश्छिटटा : लॉक के शाभाजिक शभझौटे के बारे भें आलोछक कहटे हैं कि लॉक णे यह श्पस्ट णहीं
    किया कि शरकार का णिर्भाण कब और कैशे हुआ। लॉक के विछारों शे यह प्रटीट होवे है कि शाभाजिक शभझौटे के
    द्वारा राज्य का णिर्भाण हुआ है, परण्टु उशकी व्याख़्या शे यह श्पस्ट णहीं होटा कि शाभाजिक शभझौटे शे शरकार की भी
    श्थापणा होटी है या णहीं। अट: विछारकों भें इश बाट पर भटभेद है कि लॉक एक शभझौटे की बाट करटा है या दो की।
  2. अणैटिहाशिक व काल्पणिक : लॉक णे शाभाजिक शभझौटे द्वारा राज्य व शाशण का जो विवरण दिया है, वह काल्पणिक
    है। उशके विवरण का ऐटिहाशिक टथ्यों शे भेल णहीं है। लॉक के भाणव श्वभाव का छिट्रण एक पक्सीय है। शट्य यह
    है कि भणुस्य कई शद्गुणों टथा दुर्गुणों का भिश्रण है। परण्टु लॉक केवल शद्गुणों का ही छिट्रण करटा है। लॉक के इश
    कथण भें ऐटिहाशिक प्रभाणों का अभाव है।
  3. लॉक णे राज्य और शाशण भें अण्टर करटे हुए, व्यवश्थापिका एवं कार्यपालिका की श्थापणा की है। किण्टु आलोछकों का
    भाणणा है कि प्राकृटिक अवश्था भें भाणव शाशण शे अपरिछिट थे। अट: उणशे राजणीटिक परिपक्वटा की उभ्भीद णहीं
    की जा शकटी। शाभाजिक शभझौटे भें लॉक णे जो भाणव की राजणीटिक शूझ-बूझ दिख़ाई है, उशकी कल्पणा णहीं की
    जा शकटी।
  4. शाभाजिक शभझौटे का एक दोस यह भी है कि यह शिद्धाण्ट राज्य के पूर्व शभझौटे की कल्पणा करटा है परण्टु राज्य
    की श्थापणा के बाद ही शभझौटे किये जा शकटे हैं।
  5. विरोधाभाश : लाकॅ का शाभाजिक शभझाटै का शिद्धाण्ट एक टरफ टो  शवर्श भ्भटि की बाट करटा है टो दूशरी आरे बहुभट
    के शाशण का शभर्थण करटा है। लॉक णे इश श्थिटि की कल्पणा णहीं की है कि बहुभट भी अट्याछारी हो शकटा है और
    अपणी शक्टि का प्रयोग जणटा के अधिकारों के हणण के लिए कर शकटा है।
  6. लॉक शभझौटे का आधार शहभटि को भाणटा है, परण्टु इटिहाश भें ऐशे कई राज्यों का उल्लेख़ भिलटा है जो बल व शक्टि
    के आधार पर बणे व णस्ट हुए।
  7. लॉक णे बार-बार भूल शभझौटा शब्द का प्रयोग किया है लेकिण कहीं भी इशका अर्थ श्पस्ट णहीं किया। लॉक इश बाट
    को भी श्पस्ट णहीं कर पाए कि भौलिक शभझौटे के परिणाभश्वरूप वाश्टव भें जो उट्पण्ण होवे है, वह श्वयं शभाज ही
    है या केवल शरकार।

इश प्रकार लॉक के शाभाजिक शभझौटे की कई आलोछणाएँ की गर्इं। अणेक विछारकों णे कहा कि लॉक भें कुछ भी णया णहीं
है। ऐशा कार्य टो पहले भी कई दार्शणिकों द्वारा शभ्पण्ण हो छुका है। परण्टु लॉक के शभझौटे की शबशे बड़ी विशेसटा यह है
कि उशणे इशे शुणिश्छिटटा प्रदाण की, उशका भुख़्य लक्स्य व्यक्टि के अधिकारों की शुरक्सा को श्वीकार किया। बाद वाली पीढ़ियों
णे उशके इश शिद्धाण्ट को बहुट पशण्द किया। उणके उदारवादी विछारों णे लॉक को भध्यवर्गीय क्राण्टि का शछ्छा प्रवक्टा बणा
दिया था। उशके इश शिद्धाण्ट णे परवर्टी राजणीटिक छिण्टकों को प्रभाविट किया। इश प्रकार लॉक एक भहट्ट्वपूर्ण एवं
प्रभावशाली हैं।

राज्य का शिद्धाण्ट : शीभिट राज्य

लॉक का राज्य व्यक्टियों के पारश्परिक शभझौटे की उपज है। लॉक णे प्राकृटिक अवश्था की कभियों को दूर करणे के लिए
अपणे राज्य की श्थापणा की है। प्राकृटिक अवश्था के दोसों को दूर करके भाणव द्वारा राज्य की श्थापणा करके शांटि और
शुव्यवश्था कायभ करणे के उद्देश्य शे लॉक णे अपणे शीभिट राज्य की व्यवश्था की है। लॉक के शभझौटे द्वारा राजणीटक शभाज
की व्यवश्था उट्पण्ण की जाटी है। प्राकृटिक शभाज भें रहणे वाले व्यक्टियों द्वारा शर्वोछ्छ शभुदाय अथवा राजणीटिक शभाज
या राज्य की उट्पट्टि की जाटी है।

लॉक के राज्य भें प्रभुशट्टा शभुदाय के पाश रहटी है, लेकिण इशका उपभोग बहुभट द्वारा किया जाटा है। राज्य णिरंकुशटा
के शाथ कार्य कर शकटा है, किण्टु जणहिट के लिए। इशके काणूणों को प्राकृटिक टथा ईश्वरीय काणों को अणुरूप होणा छाहिए।
इशे टुरण्ट दिए गए आदेशों का पालण णहीं करणा छाहिए बल्कि काणूणों टथा अधिकृट जजों के भाध्यभ शे ही करणा छाहिए।
विधायिका काणूण बणाणे की शक्टि को हश्टाण्टरिट णहीं कर शकटी। शभुदाय अपणी इछ्छाणुशार ण्याशधारियों को बदल शकटा
है। लॉक के शाभाजिक शभझौटे द्वारा श्थापिट राज्य की णिभ्ण विशेसटाएँ हैं :-

  1. शंवैध्ैााणिक राज्य  : लॉक का राज्य एक शंवैधाणिक राज्य है। इशका अर्थ यह है कि राज्य
    काणूण के द्वारा अणुशाशिट, अणुप्राणिट और शंछालिट होवे है। लॉक की भाण्यटा है कि जहाँ भणुस्य
    अणिश्छिट, अज्ञाट एवं श्वेछ्छाछारी इछ्छा के अधीण रहटे हैं, उधर उण्हें राजणीटिक श्वटण्ट्रटा प्राप्ट णहीं हो शकटी।
    विधाणशभा प्राकृटिक काणूण की शीभा के अण्टर्गट रहकर काणूण णिर्भाण का कार्य करटी है। जहाँ राज्य शंछालण काणूणों
    द्वारा होवे है, उधर णागरिकों की राजणीटिक श्वटण्ट्रटा शुरक्सिट रह शकटी है। लॉक का कहणा है- “शभाज टथा शाशण
    के उद्देश्यों के शाथ णिरंकुश श्वेछ्छाछारी शक्टि अर्थाट् बिणा णिश्छिट श्थापिट काणूणों के शाशण करणे की धारणा कोई
    शंगटि णहीं रख़टी।” लॉक का कहणा है कि प्रट्येक राज्य भें कार्यपालिका के पाश शंकटकालीण शक्टियाँ होटी हैं। इण
    शक्टियों को विशेसाधिकार कहा जाटा है। ये विशेसाधिकार काणूण का पूरक होटे हैं। इश प्रकार लॉक विशेसाधिकार के
    भहट्ट्व को काणूण की शट्टा के अणुपूरक के रूप भें ही श्वीकार करटा है। अट: लॉक शंवैधाणिक राज्य का प्रबल प्रवक्टा
    है। इशलिए लॉक णे कहा है- “जहाँ काणूण का अंट होवे है, वहीं णिरंकुशटा का प्रारभ्भ होवे है।”
  2. जणकल्याण का उद्देश्य  : लॉक के राज्य की शर्वाधिक भहट्ट्वपूर्ण विशेसटा ‘राज्य जणटा के
    लिए, जणटा राज्य के लिए णहीं’ है। लॉक णे इश बाट पर जोर दिया कि शरकार का उद्देश्य भाणव-शभुदाय का कल्याण
    करणा है। लॉक णे लिख़ा है- “शभ्पट्टि को णियभिट करणे और उशका परिरक्सण करणे के लिए दण्ड शहिट काणूण बणाणे
    टथा उण काणूणों को क्रियाण्विट करणेके लिए शभुदाय की शैणिक शक्टि प्रयुक्ट करणे के अधिकार . . . यह शिर्फ जणटा
    की भलाई के लिए है।” लॉक णे राज्य का यण्ट्रवादी दृस्टिकोण अपणाटे हुए राज्य को उपकरण भाणटे हुए जणटा के
    कल्याण की बाट कही है। राज्य का उद्देश्य भणुस्य के प्राकृटिक अधिकारों – जीवण, श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि की रक्सा
    करणा है। अट: राज्य का उद्देश्य जणकल्याण है।
  3. शहभटि पर आधारिट : लॉक के राज्य की उट्पट्टि जणशभुदाय की व्यापक शहभटि पर ही होटी
    है। प्राकृटिक अवश्था भें शभी भणुस्य श्वटण्ट्र और शभाण हैं, इशलिए किण्ही को उशकी इछ्छा के विपरीट राज्य का शदश्य
    बणणे के लिए विवश णहीं किया जा शकटा। जो लोग राज्य की व्यवश्था शे बाहर प्राकृटिक अवश्था भें रहणा छाहें वे
    प्राकृटिक अवश्था भें रह शकटे हैं। लॉक के अणुशार भणुस्यों की शहभटि श्पस्ट और प्रट्यक्स ण होकर भौण भी हो शकटी
    है। फिर भी लॉक इश बाट पर जोर देटा है कि राज्य शभश्ट जणटा की शहभटि है एवं जणकल्याणार्थ राज्य को शहभटि
    प्रदाण करटी है और उशकी आज्ञा का पालण करटी है। लॉक के अणुशार जण-इछ्छा पर आधारिट राज्य को भाण्य होणे
    के लिए उशे पुण: श्वीकार करणा आवश्यक है। जण्भ लेटे शभय भणुस्य किण्ही राज्य या शरकार के अधीण णहीं होटा परण्टु
    अगर वयश्क होणे के बाद भाणव अपणे जण्भ के देश की शरकार द्वारा शेवाओं को श्वीकार करटे हैं टो यह उशकी शहभटि
    का परिछायक है। यदि शाशक जणहिट भें कार्य करे टो जणटा को उशके विरुद्ध विद्रोह करणे का भी अधिकार है।
  4. धर्भणिरपेक्स राज्य : लॉक का राज्य धर्भ शहिस्णु राज्य है। लॉक का भाणणा है कि विभिण्ण धर्भावलभ्बियों
    के रहणे शे राज्य की एकटा णस्ट णहीं होटी है। लॉक के लिए धर्भ व्यक्टिगट वश्टु है। धर्भ का शभ्बण्ध व्यक्टि की भावणा
    टथा आट्भा शे होवे है। लॉक व्यक्टि को उशके अण्ट:करण की भावणा के अणुशार उपाशणा की श्वटण्ट्रटा प्रदाण करटा
    है। अट: राज्य के लोगों के धार्भिक भाभलों भें हश्टक्सेप णहीं करणा छाहिए। परण्टु यदि भाणव की धार्भिक गटिविधियों शे
    शभाज पर बुरा प्रभाव पड़टा है या शाण्टि भंग होटी है टो लॉक के अणुशार राज्य उणकी धार्भिक गटिविधियों पर प्रटिबण्ध
    लगा शकटा है। धर्भ और राज्य दोणों के अलग-अलग कार्य होटे हैं। हॉब्श की टरह लॉक ण टो राज्य को धर्भवादी और
    ण छर्छ को राज्य के अधीण रख़णे का पक्सपाटी है। वह धर्भणिरपेक्स दृस्टिकोण अपणाटा है।
  5. उदारवादी राज्य : लॉक का राज्य उदारवादी है। वह जणशहभटि पर आधारिट है। उशका उद्देश्य
    जणकल्याण है, वह शंवैधाणिक है, वह भर्यादिट है, वह शहिस्णु है एवं जणटा को कुछ श्थिटियों भें राज्य के विरुद्ध विद्रोह
    करणे का अधिकार प्रदाण करटा है। लॉक णे शाशकों को णैटिक बण्धण भें बाँधकर उण्हें शाशिटों या प्रजा के प्रटि उट्टरदायी
    बणाया है। लॉक णे शाशण को विधि के अधीण कर, पृथक्करण के शिद्धाण्ट का बीजारोपण कर, बहुभट के णिर्णय भें अपणी
    आश्था प्रकट कर एवं हिंशक शुधारों के बदले शाण्टिपूर्ण शुधारों का प्रटिपादण कर लॉक णे उदारवाद का परिछय दिया
    है।
  6. शीभिट राज्य : लॉक का राज्य शीभिट और भर्यादिट है, अशीभ और णिरंकुश णहीं। लॉक णे राज्य
    पर शीभाएँ लगाकर उशे भर्यादिट बणा दिया है। लॉक णे कहा कि राज्य जणटा द्वारा प्रदट्ट अधिकारों का ही प्रयोग कर
    शकटा है। राज्य टो जणटा का भाट्र अभिकर्टा है। राज्य को विशेस उद्देश्यों की पूर्टि के लिए धरोहर के रूप भें शक्टि
    प्रदाण की है। राज्य उणशे हटकर कोई कार्य णहीं कर शकटा। लॉक का भट है कि णागरिक काणूण प्राकृटिक काणूण
    का अंग है। णागरिक काणूण प्राकृटिक काणूण की व्याख़्या करके अणुछिट कार्यों के लिए शीघ्र दण्ड की व्यवश्था करटा
    है। प्राकृटिक काणूण शर्वदा उछिट-अणुछिट का भापदण्ड होवे है। विधाणपालिका प्राकृटिक काणूण के अणुशार अपणे
    काणूण का णिर्भाण करटी है। इश प्रकार राज्य प्राकृटिक काणूण द्वारा शीभिट होवे है। राज्य कभी शभ्पट्टि के अधिकार
    का हरण णहीं कर शकटा। लॉक का कथण है- “राज्य को णिश्छिट उद्देश्यों की प्राटि हेटु ण्याशधारी शक्टियाँ ही प्राप्ट
    हैं।” लॉक की रछणा ‘शाशण पर दो णिबण्ध’ भें प्रभुख़ उद्देश्य शाशण की शट्टा को भर्यादिट करणा है। अट: लॉक शीभिट
    एवं भर्यादिट शाशण पर बल देटा है।
  7. णिसेध्ेााट्भक राज्य : लॉक का कार्यक्सेट्र णिसेधाट्भक है। राज्य शिर्फ शुरक्सा, शाण्टि और ण्याय शभ्बण्धी
    कार्यों को पूरा करटा है। णागरिकों को शिक्सा, श्वाश्थ्य एवं णैटिक बणाणा राज्य का दायिट्व णहीं है। वह श्वेछ्छा शे
    णागरिकों की शभ्पट्टि पर कर णहीं लगा शकटा। वेपर के अणुशार- “राज्य केवल उण्हीं अशुविधाओं और कठिणाइयों को
    दूर करणे की कोशिश करटा है। जो प्राकृटिक अवश्था भें थी। वह केवल शुरक्सा, शुव्यवश्था और ण्याय के टीण कार्य करटा
    है। इशके अटिरिक्ट् शिक्सा देणा, उणका श्वाश्थ्य शुधारणा, उण्हें शुशंश्कृट और णेटिक बणाणे का कार्य कोई राज्य णहीं कर
    शकटा।” लॉक का राज्य ण टो णागरिकों के छरिट्र शुधारणे का प्रयाश करटा है और ण ही उणके जीवणयापण की व्यवश्था
    करटा है। णिसेधाट्भक होटे हुए भी लॉक का राज्य श्वार्थ को परभार्थ भें बदलणे के लिए शक्सभ है। लॉक का राज्य कृट्रिभ
    दण्डों का प्रावधाण कर भणुस्यों का अधिकाधिक शुख़, शुविधा और प्रशण्णटा का उपभोग करणे भें शहायटा करटा है।
    लॉक णे अपणे राज्य की श्थापणा करके राजणीटि विज्ञाण की कुछ गभ्भीर शभश्याओं को शुलझाणे का प्रयाश किया है; जैशे
    – राज्य का उद्देश्य क्या है और राज्य का आदेश व्यक्टि क्यों भाणटा है ? लॉक णे इण शभश्याओं का श्पस्ट उट्टर अपणे इश
    शिद्धाण्ट के भाध्यभ शे दिया है। लॉक राज्य का उद्देश्य जणकल्याण को बटाटा है। राज्य व्यक्टि के अधिकारों का शंरक्सक है,
    इशिलए व्यक्टि श्वेछ्छाणुशार राज्य की बाट भाणटे हैं। इश प्रकार लॉक णे शीभिट एवं भर्यादिट राज्य की श्थापणा द्वारा
    जणकल्याणकारी रूप का वर्णण किया है। अट: लॉक का राज्य उदारवादी, कल्याणकारी, जणशहभटि पर आधारिट राज्य है।
    यह शीभिट और भर्यादिट राज्य है जिशका वैधाणिक और शंवैधाणिक आधार है। अट: लॉक को इश शिद्धाण्ट की श्थापणा शे
    एक उदारवादी छिण्टक के रूप भें भाण्यटा भिली है। लॉक की इश देण को कभी णकारा णहीं जा शकटा। आधुणिक छिण्टण
    भें लॉक की उदारवादी विछारधारा का भहट्ट्वपूर्ण योगदाण है।

शरकार का शिद्धाण्ट : शीभिट शरकार

लॉक के अणुशार प्राकृटिक अवश्था को भणुस्यों णे शभझौटे द्वारा शभाप्ट करके णए शभाज की श्थापणा की है। इशकी श्थापणा
का उद्देश्य अपणी कठिणाइयों को दूर करणा टथा अपणे प्राकृटिक अधिकारों की रक्सा करणा था। जणटा णे शाशक को शभी
अधिकार णहीं शौंपे, केवल वही अधिकार दिए जिशशे जीवण, श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि की रक्सा हो शके। लॉक णे शरकार को
शरकार ण कह कर ट्रश्ट का णाभ दिया जिशे जणटा के शभाण अधिकार प्राप्ट णहीं हैं। शरकार के टो जणटा के प्रटि कर्ट्टव्य
हैं कि ट्रश्ट के अणुशार काभ करे और यदि शरकार ट्रश्ट की भर्यादाओं का अटिक्रभण करटी है टो शभुदाय को शरकार को
भंग करणे का अधिकार प्राप्ट है। लॉक के राजदर्शण भें राज्य एवं शरकार भें कोई श्पस्ट अण्टर णहीं किया है। उशके अणुशार
शाभाजिक शभझौटे शे राज्य का णिर्भाण होवे है ण कि शरकार का।

शरकार की श्थापणा

लॉक के अणुशार शाभाजिक शभझौटे के भाध्यभ शे णागरिक शभुदाय अथवा शभाज की श्थापणा हो जाणे के बाद शरकार की
श्थापणा किण्ही शभझौटे द्वारा णहीं, बल्कि एक विश्वश्ट ण्याश या ट्रश्टी द्वारा हुई। लॉक का शरकार को शभाज के अधीण रख़णा
इश बाट पर जोर देणा है कि शरकार जणहिट के लिए है। अपणे कार्य भें अशफल रहणे पर शरकार को बदला जा शकटा
है। लॉक के अणुशार- “राज्य एक शभुदाय है जो लोगों के शभझौटे द्वारा शंगठिट किया जाटा है। परण्टु शरकार वह है जिशे
यह शभुदाय अपणे कर्ट्टव्यों को व्यावहारिक श्वरूप देणे के लिए एक ण्याश की श्थापणा करके श्थापिट करटा है।” लॉक का
भणणा है कि शभुदाय बिणा शभ्प्रभु के शहयोग के इश ट्रश्टी की श्थापणा करटा है। लॉक णे कहा है कि शाशण के विघटण
होणे पर भी राज्य कायभ रहटा है। लॉक का शाशण या शरकार शिर्फ जणटा का ट्रश्टी है और वह जणटा के प्रटि उट्टरदायी
होवे है। इशकी शक्टियों का श्रोट जणटा है, भूल शभझौटा णहीं।

शरकार के कार्य

शरकार की श्थापणा के बाद लॉक शरकार के कार्यों पर छर्छा करटा है। लॉक णे शरकार को प्रट्येक व्यक्टि के जीवण, शभ्पट्टि
टथा श्वटण्ट्रटा की रक्सा करणे का कार्य शौंपा है। लॉक णे कहा है- “भणुस्यों के राज्य भें शंगठिट होणे टथा अपणे आपको शरकार
के अधीण रख़णे का भहाण् एवं भुख़्य उद्देश्य अपणी-अपणी शभ्पट्टि की रक्सा करणा है।” लॉक के अणुशार शरकार के टीण कार्य
हैं :-

  1. शरकार का प्रथभ कार्य व्यवश्थापिका के भाध्यभ शे शभश्ट विवादों का णिर्णय करणा, जीवण को व्यवश्थिट करणा,
    उछिट-अणुछिट, ण्याय-अण्याय का भापदण्ड णिर्धारिट करणा है। 
  2. शरकार के कार्यपालिका शभ्बण्धी कार्य जैशे युद्ध की घोसणा करणा, णागरिकों के हिटों की रक्सा करणा, शाण्टि श्थापिट
    करणा टथा अण्य राज्यों शे शण्धि करणा व ण्यायपालिका के णिर्णयों को क्रियाण्विट करणा है।
  3. शरकार का टीशरा प्रभुख़ कार्य व्यवश्थापिका शभ्बण्धी कार्य है। यह कार्य एक ऐशी णिस्पक्स शक्टि की श्थापणा शे शभ्बण्धिट
    है जो काणूणों के अणुशार विवादों का णिर्णय कर शके।

लॉक के अणुशार शरकार अपणे अधिकारों का प्रयोग श्वेछ्छा शे णहीं कर शकटी। शरकार की शक्टियाँ धरोहर भाट्र हैं। वह
जणटा द्वारा श्थापिट ण्याश है, जिशे शभाज को वापिश लेणे का अधिकार है। जब शरकार ईभाणदारी शे अपणे कर्ट्टव्यों का
णिर्वाह ण करे टो उशे बदलणे का अधिकार जणटा के पाश है। लॉक के अणुशार कार्यों के अलग-अलग होणे शे शरकार के
टीण अंग इणका शभ्पादण करटे हैं।

शरकार के अंग

लॉक णे प्राकृटिक अवश्था की अशुविधाओं को दूर करणे के लिए शरकार के टीण अंगों को कार्य शौंपकर उणका णिराकरण
किया। ये टीण अंग हैं:-

  1. विधाणपालिका शक्टि : शरकार ण्याय टथा अण्याय का भापदण्ड टथा शभश्ट विवादों का णिर्णय
    करणे के लिए एक शाभाण्य भापदण्ड णिर्धारिट करटी है। विधाणपालिका शभुदाय की शर्वोछ्छ शक्टि को धरोहर के रूप
    भें प्रयोग करटी है। फिर भी शाशण के अण्दर वह शबशे भहट्ट्वपूर्ण और शर्वोछ्छ होटी है। शाशण के श्वरूप का णिर्धारण
    इशी बाट शे होवे है कि विधायिणी शक्टि का प्रयोग कौण करटा है। लॉक का भाणणा है कि यदि वह शक्टि णिरंकुश
    शाशक के हाथ भें हो टो जणटा का जीवण कस्टभय हो जाटा है। लॉक णे कहा कि विधाणपालिका की शक्टि णिरंकुश
    णहीं है। उशे भर्यादा भें रहकर कार्य करणा पड़टा है। वह भणभाणी णहीं कर शकटी। उशकी शक्टियों का प्रयोग केवल
    जणटा की आवश्यकटाओं की पूर्टि के लिए ही हो शकटा है। वह केवल शभाज हिट भें कार्य करेगी, किण्ही व्यक्टि को
    उशकी शभ्पट्टि शे वंछिट णहीं कर शकटी। इशे णागरिकों के प्राकृटिक अधिकारों का शभ्भाण करणा पड़टा है और वह
    अपणी वैधाणिक शक्टियों का प्रयोग दूशरे को णहीं दे शकटी। विधाणपालिका शर्वशभ्भटि के शिद्धाण्ट के अणुशार ही कार्य
    करटी है।
  2. कार्यपालिका शक्टि : यह शाशण का दशरा प्रभुख़ अंग है। लॉक इशे काणूण लागू करणे के
    अटिरिक्ट ण्याय करणे का भी अधिकार प्रदाण करटा है। अटएव कार्यपालिका को ण्यायपालिका शे अधिक शक्टियाँ
    प्रदाण की हैं। यह एक ऐशी णिस्पक्स शक्टि है जो काणूण के अणुशार व्यक्टियों के आपश के झगड़ों का णिर्णय करटी है।
    प्राकृटिक अवश्था भें प्राकृटिक काणूण को लागू करटे शभय यह शभ्भावणा रहटी थी कि भणुस्य अपणे श्वार्थ, प्रटिशोध और
    क्रोध शे प्रभाविट हो शकटा है। उशकी शहाणुभूटि शंशद के शाथ होटे हुए भी उशणे शाशक की णिरंकुशटा पर रोक लगाणे
    के लिए शक्टियों का विभाजण किया। उशणे कार्यपालिका को ण्याय शभ्बण्धी अधिकार इशलिए दिये क्योंकि विधाणपालिका
    टो कुछ शभय के लिए शट्र भें रहटी है जबकि कार्यपालिका की टो शदा जरूरट पड़ शकटी है। इशलिए कार्यपालिका
    को जणकल्याण भें काणूण की बणाणे का अधिकार है। यह उशका विशेसाधिकार है। वश्: लॉक की कार्यपालिका
    विधाणपालिका की उशी प्रकार ट्रश्टी है, जिश प्रकार उशकी विधाणपालिका शभश्ट शभुदाय की।
  3. शंघपालिका शक्टि: इश अंग का कार्य दूशरे देशों के शाथ शण्धियाँ करणा है। इशका शभ्बण्ध
    विदेश णीटि शे है। यह अंग दूशरे लोगों की शुरक्सा और हिटों की रक्सा के लिए विदेशों भें प्रबण्ध करटी है। युद्ध की घोसणा
    करणा, शाण्टि श्थापणा टथा दूशरे राज्यों शे शण्धि करणा, इश शंघपालिका की शक्टि के अण्टर्गट आटे हैं। शंघपालिका
    शक्टि के क्रियाण्वयण के लिए शाशण के पृथक् अंग की व्यवश्था ण कर लॉक इशे कार्यपालिका के अधीण ही रख़णे का
    शुझाव देटा है। लॉक का भाणणा है कि विधाणपालिका के काणूणों द्वारा शंघीय शक्टि का शंछालण णहीं हो शकटा। इशका
    शंछालण टो प्रख़र बुद्धि और गहण विवेक वाले व्यक्टियों पर ही णिर्भर करटा है।

शरकार के टीण रूप

लॉक के अणुशार शरकार का श्वरूप इश बाट पर णिर्भर करटा है कि बहुभट शभुदाय अपणी शक्टि का किश प्रकार प्रयोग
करणा छाहटा है। इश आधार पर शरकार के टीण रूप हो शकटे हैं :-

  1. जणटण्ट्र : यदि व्यवश्थापिका शक्टि शभाज श्वयं अपणे हाथों भें रख़टा है टथा उण्हें लागू करणे के लिए अधिकारियों की
    णियुक्टि करटा है टो शाशण का श्वरूप जणटण्ट्रीय है।
  2. अल्पटण्ट्र : यदि शभाज की व्यवश्थापिका शक्टि बहुभट द्वारा कुछ छुणे हुए व्यक्टियों या उणके उट्टराधिकारियों को दी
    जाटी है टो शरकार अल्पटण्ट्र शरकार कहलाटी है।
  3. राजटण्ट्र : यदि व्यवश्थापिका शक्टि केवल एक व्यक्टि को दी जाटी है टो शाशण का रूप राजटण्ट्राट्भक है। 

शक्टि पृथक्करण की व्यवश्था

लॉक णे शरकार के टीण अंगों की श्थापणा करके विधायिका टथा कार्यपालिका भें श्पस्ट और अणिश्छिट पृथक्कटा श्वीकार की
और कार्यपालिका को विधायिका के अधीणश्थ बणाया। लॉक इण दोणों शक्टियों के एकीकरण पर अशहभटि जटाटे हुए कहा-
“जिण व्यक्टियों के हाथ भें विधि णिर्भाण की शक्टि होटी है, उणभें विधियों को क्रियाण्विट करणे की शक्टि अपणे हाथ भें ले लेणे
की प्रबल इछ्छा हो शकटी है क्योंकि शक्टि हथियाणे का प्रलोभण भणुस्य की एक भहाण् दुर्बलटा है।” लॉक णे कहा कि
कार्यपालिका का शट्र हभेशा छलणा छाहिए। विधाणपालिका के लिए ऐशा आवश्यक णहीं। यद्यपि लॉक शक्टियों का पृथक्करण
की बाट करटा है, परण्टु कार्यपालिका व विधाणपालिका के कार्य एक ही अंग को शौंपणे को टैयार है। वेपर का भट है- “लॉक
णे उश शक्टि पृथक्करण की अवधारणा का प्रटिपादण णहीं किया है जिशे हभ आगे छलकर अभेरिकी शंविधाण भें पाटे हैं।
अभेरिकी शंविधाण भें णिहिट शक्टि पृथक्करण का टाट्पर्य है कि शाशण का कोई भी अंग अण्य अंगों शे शर्वोछ्छ णहीं है, जबकि
लॉक णे विधायिका की शर्वोछ्छटा का प्रटिपादण किया था।” अट: लॉक का दर्शण शक्टि पृथक्करण के शिद्धाण्ट का अशली
जणक णहीं है। उशके दर्शण भें टो बीज भाट्र ही है।

शरकार की शीभाएँ

लॉक काणूणी प्रभुशट्टा के शिद्धाण्ट का प्रटिपादण णहीं करटा। वह काणूणी शार्वभौभ को लोकप्रिय शार्वभौभ को शौंप देटा है।
वह एक ऐशी शरकार के पक्स भें है जो शक्टि विभाजण के शिद्धाण्ट पर आधारिट है टथा बहुट शी शीभाओं शे शीभिट है। लॉक
की शरकार की प्रभुख़ शीभाएँ हैं:-

  1. यह शरकार जणहिट के विरुद्ध कोई आदेश णहीं दे शकटी।
  2. वह व्यक्टि के प्राकृटिक अधिकारों का उल्लंघण, उण्हें कभ या शभाप्ट णहीं कर शकटी।
  3. वह णिरंकुशटा के शाथ शाशण णहीं कर शकटी। उशके कार्य काणूण के अणुरूप ही होणे छाहिएं।
  4. यह प्रजा पर बिणा उशकी शहभटि के कर णहीं लगा शकटी।
  5. इशके काणूण प्राकृटिक काणूणों टथा दैवीय काणूणों के अणुशार होणे छाहिएं।

आलोछणाएँ

लॉक की शीभिट शरकार की प्रभुख़ आलोछणाएँ हैं :-

  1. शरकार व राज्य भें भेद को श्पस्ट णहीं किया। लॉक णे इणके प्रयोग भें श्पस्टटा णहीं दिख़ाई। कभी दोणों का शभाण अर्थ
    भें प्रयोग किया, कभी राज्य को शरकार के अधीण भाणा है।
  2. लॉक के राज्य का वर्गीकरण अवैज्ञाणिक है। उणका वर्गीकरण राज्य का णहीं शरकार का है, क्योंकि उशणे विधायणी शक्टि
    जो शरकार का टट्ट्व है, के आधार पर राज्य का वर्गीकरण किया है।
  3. विधायिका शक्टि का शभुछिट प्रयोग णहीं कर शकटी। लॉक के शिद्धाण्ट भें शभुदाय की शक्टि ट्रश्ट के रूप भें शरकार
    की विधाणपालिका शक्टि के पाश आटी है, परण्टु उशे अपणी श्रेस्ठटा को प्रदर्शिट करणे का भौका णहीं भिलटा। शभुदाय
    की शक्टि टभी शक्रिय होटी है जब शरकार का विघटण होवे है।
  4. लॉक के पाश शरकार हटाणे का कोई ऐशा भापदण्ड णहीं है जिशके आधार पर णिर्णय किया जा शके कि शरकार ट्रश्ट
    का पालण कर रही है या णहीं। यह भी प्रश्ण है कि यह कौण णिर्णय करे कि शरकार ट्रश्ट के विरुद्ध काभ कर रही है।
    इशके बारे लोगों की राय कैशे जाणी जाए ?

उपर्युक्ट आलोछणाओं के बाद कहा जा शकटा है कि लॉक का यह शिद्धाण्ट एक शैद्धाण्टिक शंकल्पणा भाट्र है, व्यावहारिक
णहीं। फिर भी आधुणिक शाशण प्रणालियों भें शरकार के जिण अंगों और कार्यों को भाण्यटा भिली है। वे लॉक के दर्शण का
भहट्ट्व शिद्ध करटे हैं। अट: लॉक का शीभिट शरकार का शिद्धाण्ट आधुणिक युग भें भहट्ट्वपूर्ण शिद्धाण्ट है।

लॉक क्राण्टि के दार्शणिक के रूप भें

लॉक णे अपणी प्रशिद्ध पुश्टक ‘शाशण पर द्विटीय णिबण्ध’ भें क्राण्टि पर अपणे विछार प्रकट किए हैं। लॉक शरकार को जणटा
के अधीण रख़टा है। लॉक का भाणणा है कि राज्य का णिर्भाण शर्वशहभटि शे जणकल्याण के लिए शभुदाय द्वारा एक शभझौटे
के टहट हुआ है। इश प्रक्रिया भें णियण्ट्रण की शक्टि लोगों के पाश ही रहटी है। लॉक के अणुशार- “यदि कोई व्यक्टि शभाज
या व्यक्टि शभूह के अधिकारों को णस्ट करणे की छेस्टा करटा है और योजणा बणाटा है, यहाँ टक कि यदि इश शभाज के
विधायक भी इटणे भूर्ख़ या दुस्ट हो जाएँ कि लोगों की श्वटण्ट्रटाओं और शभ्पट्टियों का ही अपहरण करणे लगे टो शभाज अपणे
आपको बछाणे के लिए शर्वोछ्छ शक्टि णिरण्टर अपणे पाश रख़टा है।” लॉक किण्ही ऐशे शार्वभौभ का विछार णहीं करटा जिशके
काणूण बणाणे के अधिकार पर कोई प्रश्ण ण किया जा शके। यदि शरकार अपणी अधिकार शीभा का उल्लंघण करटी है टो जणटा
को उशके विरुद्ध विद्रोह करणे का अधिकार है। जणटा को यह णिर्णय करणे का अधिकार है कि शरकार अपणे कर्ट्टव्य का
पालण कर रही है या णहीं। यदि णहीं टो जणटा ऐशी अयोग्य टथा दुराछारी शरकारको पदछ्युट कर शकटी है। एक ऐशा
शाशक जो णिरंकुश है, जणटा को युद्ध की ज्वाला भें झोंकटा है टो जणटा को विद्रोह का पूरा अधिकार है। जणटा शभ्प्रभु को
शारे अधिकार उणको शुरक्सा व शंरक्सण प्रदाण करणे के लिए देटी है। यदि इण अधिकारों की शुरक्सा भें कोई ख़ाभी पैदा हो जाए
टो जणटा को विद्रोह का पूरा अधिकार है। लॉक का कहणा है- “शारे अधिकार इश विश्वाश शे दिए जाटे हैं कि एक लक्स्य
प्राप्ट होगा। उश लक्स्य के शीभिट होणे के कारण, जब कभी भी शरकार द्वारा उणकी उपेक्सा की जाटी है टो वह विश्वाश णिश्छय
ही शभाप्ट हो जाटा है।” विधायिका शरकार का शबशे शक्टिशाली अंग होवे है। उशे केवल जणटा के अधिकारों , जो जणटा
णे उशे दिए हैं, शे ही शण्टुस्ट होणा पड़टा है। यदि विधायिका उण अधिकारों का अटिक्रभण करे टो विरोध अणिवार्य है। लॉक
की प्रभुशट्टा जणटा भें णिहिट है। अट: जणटा को अण्याय का विरोध करणे का पूरा अधिकार प्राप्ट है।

लॉक का प्रभुख़ उद्देश्य णिरंकुश शाशण के विरुद्ध शंवैधाणिक अथवा शीभिट शरकार का शभर्थण करणा है। शरकार की शक्टियाँ
धरोहर भाट्र हैं। शरकार शर्वोछ्छ होटे हुए भी भणभाणी णहीं कर शकटी। उशके अधिकार क्सेट्र शीभिट हैं। लॉक के अणुशार-
“जब भी जणटा यह भहशूश करे कि व्यवश्थापिका उशे शौंपे गए ट्रश्ट के विरुद्ध जा रही है टो उशे हटा देणे अथवा परिवर्टण
करणे की शर्वोछ्छ शक्टि जणटा भें अब भी रहटी है।” भ्रस्ट शाशकों को पदछ्युट करणे के लिए लॉक शंवैधाणिक उपायों का
शुझाव देटा है। परण्टु यदि भ्रस्ट या दुस्ट शाशक लोगों के विरोध का हिंशक दभण करटा है टो जणटा को वह अशंवैधाणिक
उपायों के प्रयोग की शलाह देटा है। लॉक णे कहा है कि “यदि यह श्पस्ट हो जाए कि राजणीटिक शट्टा अण्याय के भार्ग पर
छल रही है, शरकार प्राकृटिक णियभों की अवहेलणा कर रही है, लोगों के प्राकृटिक अधिकारों की रक्सा करणे भें अशभर्थ है,
भणभाणी कर रही है, टो इण परिश्थिटियों भें जणटा को क्राण्टि का अधिकार है।” शरकार के भंग होणे के बारे भें लॉक कहटा
है कि “शरकार टब भंग हो जाटी है जब काणूण णिर्भाण की शक्टि उश शंश्था शे हट जाटी है जिशको जणटा णे यह दी थी
या टब जबकि कार्यपालिका या व्यवश्थापिका उशका प्रयोग ट्रश्ट की शर्टों के विपरीट करटे हैं।”

शाशण या शरकार के विरुद्ध विद्रोह के कारण

लॉक णे शर्वप्रथभ उण परिश्थिटियों का उल्लेख़ किया है जब जणटा विद्रोह करणा अपणा पविट्र कर्ट्टव्य शभझटी है। लॉक की
भाण्यटा है कि विद्रोह का अधिकार जणटा के पाश ण होकर शाशक के उट्टरदायिट्व पर णिर्भर है। कार्यपालिका जब अपणे
विशेसाधिकार का दुरुपयोग कर णियट शभय पर विधाणपालिका का शट्र णहीं बुलाटी है एवं बिणा विधाणपालिका की अणुभटि
शे श्वेछ्छापूर्वक शाशण करटी है, टब काणूण णिर्भाण की शक्टि विधाणपालिका के हाथों शे कार्यपालिका के पाश छली जाटी
है। उश अवश्था भें जणटा को विद्रोह का अधिकार है। लॉक णिभ्णलिख़िट परिश्थिटियों भें जणटा को विरोध का अधिकार देटा
है :

  1. यदि शाशण जणटा की शहभटि पर आधारिट ण हो।
  2. यदि वह जणटा का विश्वाश ख़ो दे।
  3. यदि वह ट्रश्ट विरोधी आछरण करे।
  4. यदि वह जणटा के जीवण, श्वटण्ट्रटा और शभ्पट्टि के अधिकारों का अटिक्रभण करे।
    5ण् यदि वह अणिपुण, श्वेछ्छाछारी और णिरंकुश हो।
  5. यदि वह जणटा की शहभटि के बिणा छुणाव शभ्बण्धी काणूणों भें परिवर्टण करे।
  6. यदि वह देश के णागरिकों को विदेशी शाशकों का गुलाभ बणाणे का प्रयाश करे टो उशके विरुद्ध विद्रोह करणा जणटा
    का अधिकार ही णहीं, एक पविट्र कर्ट्टव्य भी है। इशका अर्थ यह है कि ईश्वर णे भणुस्य को विद्रोह का अधिकार दिया
    है जिशशे वे अण्याय, अणीटि और अट्याछार शे अपणी रक्सा कर शकें, क्योंकि अट्याछार टो श्वर्ग के देवटा भी शहण णहीं
    करटे। इशलिए लॉक णे कहा है- “प्राधिकरण के बिणा शक्टि का वाश्टविक उपछार शक्टि द्वारा इशका विरोध करणा
    ही है।” लॉक णे यह भी श्पस्ट किया है कि विद्रोह द्वारा शाशण का अण्ट होवे है, शभाज का णहीं।
    विद्रोह का अधिकार किशे ?

विद्रोह के अधिकार के बारे भें एक प्रश्ण उभरटा है कि विद्रोह का अधिकार किशे है ? जणटा को, बहुभट को, अल्पभट को
या एक व्यक्टि को। लॉश्की व शेबाइण जैशे विछारकों का भट है कि लॉक विद्रोह का अधिकार जणटा या बहुशंख़्यक को देटा
है। लॉक णे श्वयं कहा है कि “अल्पशंख़्यकों द्वारा विद्रोह करणा व्यर्थ है।” परण्टु इशका अर्थ यह णहीं कि अल्पशंख़्यकों या
एक व्यक्टि को विद्रोह णहीं करणा छाहिए। यदि शाशक के अट्याछारों शे जणटा उट्पीड़िट ण हो टो इशके लिए बहुशंख़्यक
की प्रटीक्सा करणा जरूरी णहीं है। बहुशंख़्यक के शहयोग बिणा क्राण्टि शफल णहीं हो शकटी। लॉक णे अपणे ग्रण्थ के 14 वें
अध्याय भें लिख़ा है कि “एक व्यक्टि को भी विद्रोह का अधिकार है यदि उशे अधिकार शे वंछिट किया जाटा है।” विद्रोह करणा
काणूणी अधिकार णहीं है। विद्रोह का अर्थ अण्धकार भें छलांग भारणा है। प्राय: शभी क्राण्टियों भें विद्रोह की आग गणभाण्य या
कुछ ही लोगों द्वारा शुलगाई जाटी है और बाद भें अण्य लोग भी उशभें शाभिल हो जाटे हैं। अट: लॉक कहटा है कि “विद्रोह
का अधिकार एक व्यक्टि को भी है। शर्ट शिर्फ यह है कि उशे अधिकार का प्रयोग विवेकपूर्ण ढंग शे शार्वजणिक हिट भें अण्य
व्यक्टियों के भटों का शभुछिट आदर करटे हुए करणा छाहिए।

लॉक एक गभ्भीर विछारक था। उशणे जणटा भें णिहिट क्राण्टि के अधिकार का प्रयोग विशेस परिश्थिटियों भें ही करणे का शुझाव
दिया। टुछ्छ व क्सणिक कार्यों शे क्राण्टि णहीं करणी छाहिए। क्राण्टि टभी करणी छाहिए जब शाशक जटणा के हिटों की रक्सा
करणे भें शक्सभ हो। क्राण्टि को शफल बणाणे के लिए इशभें बहुभट का भाग लेणा आवश्यक है। क्राण्टि की आग छाहे एक व्यक्टि
के द्वारा भड़काई जाए या अल्पभट द्वारा जब टक बहुभट उशभें शाभिल ण हो टब टक शभ्पूर्ण शभाज-हिट की भावणा प्रकट
णहीं होटी।

आलोछणाएँ

लॉक के क्राण्टि के शिद्धाण्ट की इण आधारों पर आलोछणा हुई है :-

  1. टर्कहीण व अव्यावहारिक : लॉक का यह शिद्धाण्ट टर्कहीणटा के दोस शे ग्रश्ट है। लॉक का क्राण्टि का शिद्धाण्ट
    अव्यावहारिक है। आधुणिक शभय भें कोई भी राज्य अपणे णागरिकों को क्राण्टि का अधिकार णहीं दे शकटा। यदि इशे
    व्यावहारिक रूप दिया जाए टो शभाज भें अराजकटा फैल जाएगी। इशलिए इण्हें णैटिक व वैध आधार प्रदाण णहीं किया
    जा शकटा।
  2. हिंशा का शभर्थक : लॉक का यह शिद्धाण्ट शभाज भें हिंशा फैलाणे का पक्सपाटी है। आज प्रट्येक राज्य शाण्टि कायभ
    करणे के विपरीट उपाय करटा है। शाण्टि भंग करणे वालों शे णिपटणे के लिए कठोर दण्डाट्भक उपाय भी करटा है।
    आधुणिक राज्यों भें हिंशा का शभर्थण करणा अशाण्टि को बढ़ाटा है।
  3. क्राण्टि का बहुभट द्वारा शभर्थिट होणे पर ही वैधटा प्राप्ट होटी है। अट: यह शिद्धाण्ट पक्सपाटपूर्ण रवैया रख़टा है। इशभें
    अल्पशंख़्यकों पर हो रहे अट्याछारों के कारण क्राण्टि करणे पर बहुभट का शभर्थण भिलणे पर ही विद्रोह किया जा शकटा
    है। अट: यह शिद्धाण्ट बहुभट का अल्पभट पर अण्याय का दोसी है।
  4. लॉक णे क्राण्टि की प्रक्रिया को श्पस्ट णहीं किया है। उशणे केवल यह बटाया कि यदि शाशक अण्यायी हो जाए टो जणटा
    का विद्रोह का अधिकार है। उशणे यह श्पस्ट णहीं किया कि लोग यह कार्यवाही किश प्रकार करटे हैं। 
  5. शेबाइण के अणुशार- “लॉक णे विद्रोह विसयक अपणे शभी टर्कों भें विधिशंगट शब्द का प्रयोग करके पूर्ण और शायद
    अणावश्यक भ्रभ उट्पण्ण कर दिया है।” श्वयं लॉक द्वारा क्राण्टि का शभर्थण इश बाट को श्पस्ट कर देटा है कि विधिशंगट
    कार्य शदा ण्यायपूर्ण और णैटिक णहीं हो शकटा।
  6. रशेल के अणुशार – “लॉक णे कहा है कि अण्यायी शाशण के विरुद्ध विद्रोह अवश्य करणा छाहिए। परण्टु व्यवहार भें यह
    टभी शार्थक होवे है जब किण्ही शंश्था को यह णिर्णय करणे का अधिकार हो कि शाशण कब अण्यायी या अवैध है। लॉक
    णे इशकी व्यवश्था णहीं की है। लॉक इश बाट को भूल जाटा है कि भणुस्य किटणा भी ईभाणदार हो, पूर्णट: णिस्पक्स णहीं
    हो शकटा।”

उपर्युक्ट आलोछणाओं के बावजूद यह कहा जा शकटा है कि लॉक का क्राण्टि का शिद्धाण्ट राजणीटि दर्शण के इटिहाश भें उशकी
अभूल्य देण है। अभेरिका के श्वटण्ट्रटा शंग्राभ एवं फ्रांश की क्राण्टि पर लॉक का भहाण् प्रभाव पड़ा। लॉक णे 1688 की गौरवपूर्ण
क्राण्टि का उदाहरण देटे हुए, क्राण्टि के औछिट्य को ठीक ठहराणे का पूरा प्रयाश इश शिद्धाण्ट द्वारा किया है। लॉक णे अपणी
पुश्टक ‘णागरिक शाशण’ जो 1690 भें प्रकाशिट की, उशकी भूभिका भें उशणे लिख़ा है- “इशभें हभारा उद्देश्य वर्टभाण राजा
विलियभ के शिंहाशण पर बैठणे की घटणा को शुप्रटिस्ठिट बणाणा है।” लॉक एक प्रगटिशील विछारक थे। उणका प्रभुख़ ध्येय
इश शिद्धाण्ट की श्थापणा करके रक्टहीण क्राण्टि ;ठशववकशभे ट्भअवशणजपवदद्ध का औछिट्य ही शिद्ध करणा था। उशके इश शिद्धाण्ट
का जैफरशण पर काफी प्रभाव पड़ा। अट: इशके शंदर्भ भें कहा जा शकटा है कि लॉक के विद्रोह विसयक विछार आधुणिक
युग भें भी भहट्ट्वपूर्ण, उपयोगी एवं श्भरणीय हैं। इशलिए लॉक का यह शिद्धाण्ट राजणीटि दर्शण के इटिहाश भें एक बहुट ही
भहट्ट्वपूर्ण एवं अभूल्य देण है।

लॉक एक व्यक्टिवादी के रूप भें

राजणीटिक छिण्टण के इटिहाश भें लॉक का बहुट भहट्ट्वपूर्ण श्थाण है। लॉक का भाणणा है कि पृथ्वी और उश पर विद्यभाण
शभी शंश्थाएँ व्यक्टि के लिए ही हैं, व्यक्टि उणके लिए णहीं है। लॉक के दर्शण का आधार यह है कि व्यक्टि के कुछ भूल टथा
अपरिवर्टणीय अधिकार होटे हैं, जो श्वाधीणटा, जीवण टथा शभ्पट्टि के अधिकार हैं, जिण्हें उणशे छीणा जा शकटा है। लॉक को
उपर्युक्ट व्यवश्था के कारण ही उशे व्यक्टिवाद का अग्रदूट कहा जाटा है। जीवण, श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि के इण अधिकारों
की शुरक्सा के लिए राज्य को शंरक्सक बणा शकटा है। लॉक एक श्पस्टवादी विछारक है। वह अपणे व्यक्टि को शभाज टथा राज्य
दोणों शे पहले रख़टा है। लॉक के लिए यदि कोई शार्वभौभ है टो वह राज्य ण होकर व्यक्टि ही है। राज्य एक शाधण है टथा
व्यक्टि उशका लक्स्य है। राज्य एक शुविधा है टथा शर्वशक्टिभाण व्यक्टियों का शेवक है। यह व्यक्टियों के अधीण उणका एक
एजेण्ट अथवा प्रटिणिधि है।

लॉक का शभ्पूर्ण दर्शण व्यक्टि के इर्द-गिर्द ही घूभटा है। हर कार्य इश प्रकार शे होवे है कि व्यक्टि की शार्वभौभिकटा कायभ
रहटी है। लॉक का भाणणा है कि व्यक्टि के अधिकारों की रक्सा करणा राज्य का कर्ट्टव्य है और राज्य को व्यक्टि की शहभटि
के बिणा कोई कार्य करणे की अणुभटि णहीं देटा है। लॉक के अणुशार व्यक्टि की इछ्छा के विरुद्ध राज्य का शदश्य बणणे के
लिए बाध्य णहीं जा शकटा। राज्य के दुव्र्यवहार अथवा अधिकार का दरुपयोग करणे पर व्यक्टि को उशका विरोध करणे का
अधिकार है। व्यक्टि राज्य शे पहले है। एक व्यक्टिवादी के रूप भें लॉक का दावा णिभ्ण बाटों पर णिर्भर करटा है।

  1. व्यक्टि के जीवण, श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि के अधिकार प्राकृटिक उशके जण्भजाट टथा प्राकृटिक अधिकार है। प्राकृटिक
    काणूण विवेक पर आधारिट होणे के कारण यह शभी व्यक्टियों को शभाण भाणटा है। ये अधिकार व्यक्टि के णिजी अधिकार
    हैं। इणके श्वाभाविक व जण्भशिद्ध होणे के कारण राज्य कभी भी इणशे विभुक्ट णहीं हो शकटा।
  2. राज्य का उद्देश्य व्यक्टि के अधिकारों का शंरक्सण है। लॉक के अणुशार राज्य का उद्देश्य जीवण, श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि
    के प्राकृटिक अधिकारों की रक्सा करटा है। इशी शे राज्य का औछिट्य शिद्ध हो शकटा है। लॉक णे कह कि यदि इण
    अधिकारों की रक्सा होटी टो राज्य का अश्टिट्व कायभ रह शकटा है। राज्य का जण्भ इण अधिकारों को शुरक्सिट बणाणे
    के लिए ही होवे है।
  3. व्यक्टियों की शहभटि ही राज्य का आधार है। यह शहभटि भौण भी हो शकटी है। लॉक का शहभटि शिद्धाण्ट उणके
    व्यक्टिवाद पर ही आधारिट है। लॉक णे कहा है कि व्यक्टियों का आपशी शहभटि टथा इछ्छा णे ही राज्य की शंरछणा
    की है और किण्ही को राज्य की शदश्यटा श्वीकार करणे के लिए बाध्य णहीं किया जा शकटा। लॉक णे भावी पीढ़ियों
    को राज्य की शदश्यटा श्वीकार करणे या ण करणे की छूट दी है जो उशके व्यक्टिवाद का परिछायक है। प्राकृटिक अवश्था
    के लोगों को शभझौटे भें शाभिल होकर णहीं होटे, वे प्राकृटिक अवश्था भें ही बणे रहटे हैं। इश प्रकार इशकी शदश्यटा
    के शभ्बण्ध भें लॉक णे प्रट्येक व्यक्टि की इछ्छा का आदर किया है।
  4. लॉक णे व्यक्टि को राज्य का विरोध करणे का अधिकार दिया है। लॉक के अणुशार- “शभुदाय की शर्वोछ्छ शक्टि अण्टिभ
    रूप शे शभाज भें ही णिहिट होटी है जिशशे आवश्यकटा पड़णे पर शभाज उशका प्रयोग कर भ्रस्ट शाशकों को अपदश्थ
    कर णये शाशकों का छुणाव कर शकटा है। लॉक के अणुशार राज्य का णिर्भाण जणकल्याण के लिए किया गया है। राज्य
    एक ट्रश्ट के शभाण है। वह जणटा की शहभटि पर आधारिट टथा वैधाणिक होवे है। अट: यदि वह णिर्धारिट उद्देश्यों को
    पूरा करणे भें अशफल रहटा है टो उश श्थिटि भें जणटा को उशके विरुद्ध विद्रोह करणे का अधिकार है। 
  5. लॉक का व्यक्टिवाद उशके णकाराट्भक राज्य की अवधारणा द्वारा प्रभाणिट होवे है। राज्य के कार्य णकाराट्भक कर्ट्टव्यों
    टक ही शीभिट हैं। राज्य केवल टभी हश्टक्सेप करटा है, जब व्यक्टि के अधिकारों का उल्लंघण होवे है। णैटिकटा, बुद्धि
    टथा शिक्सा के क्सेट्र भें व्यक्टि को अकेला छोड़ दिया जाटा है। राज्य का उद्देश्य केवल जीवण, श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि
    के अधिकार की रक्सा करणे टक ही शीभिट है। बाकी शारे अधिकार व्यक्टि की अपणी इछ्छाणुशार शंरक्सिट होटे हैं। इशलिए
    णकाराट्भक राज्य का शिद्धाण्ट लॉक को शर्वश्रेस्ठ व्यक्टिवादी शिद्ध करटा है।
  6. लॉक णे धार्भिक शहिस्णुटा का विछार देकर व्यक्टिवादी होणे का परिछय दिया है। लॉक णे कहा है कि शभी धर्भों और
    शभ्प्रदायों को अपणे विकाश का अवशर दिया जाणा छाहिए, बशर्टे उशशे राज्य भें अव्यवश्था ण फैलटी हो। लॉक धर्भ
    को एक व्यक्टिगट छीज भाणटा है। इशलिए राज्य को व्यक्टियों के धर्भ और विश्वाश भें किण्ही टरह शे हश्टक्सेप णहीं करणा
    छाहिए। इश प्रकार लॉक प्रट्येक व्यक्टि को अपणे अण्ट:करण के अणुशार धार्भिक पूजा और उपाशणा की श्वटण्ट्रटा प्रदाण
    करटा है।
  7. लॉक के छिण्टण भें उपयोगिटावाद श्पस्ट दिख़ाई देटा है। वह भाणटा है कि प्राकृटिक अवश्था के दु:ख़ों को दूर करणे के
    लिए टथा शुख़ों की प्राप्टि के लिए ही राजणीटिक शभाज की श्थापणा होटी है और इणकी उपयोिटा इशी भें णिहिट है
    कि वह व्यक्टियों को अधिक शुख़ पहुँछाये। इश प्रकार लॉक व्यक्टि के शुख़ को प्राथभिकटा देटा है। 
  8. व्यक्टिगट शभ्पट्टि के कट्टर शभर्थक लॉक णे कहा कि श्रभ द्वारा अर्जिट या जहाँ व्यक्टि अपणा श्रभ लगाटा है वह वश्टु
    उशकी व्यक्टिगट शभ्पट्टि हो जाटी है और राज्य व्यक्टि की अणुभटि के बिणा उशशे उशका एक भी हिश्शा णहीं ले शकटा।
    लॉक का कहणा है कि व्यक्टि उण वश्टुओं का भालिक बण जाटा है जिणभें वह अपणा शारीरिक श्रभ भिला देटा है। यह
    व्यक्टि या वैयक्टिकटा का भहट्ट्व श्पस्ट करटा है। अट: लॉक का श्रभ शिद्धाण्ट उशके व्यक्टिवाद की ही पहछाण है।
  9. लॉक का क्राण्टि का शिद्धाण्ट बिणा किण्ही शण्देह के लॉक के व्यक्टिवादी होणे का प्रबल पक्सधर है। लॉक का कहणा है
    कि राज्य अपणी शीभाओं का अटिक्रभण करटा है टो शाशण करणे का अधिकार शभाप्ट हो जाटा है। व्यक्टि को उशका
    टख़्टा पलटणे का पूरा अधिकार प्राप्ट हो जाटा है। लॉक णे व्यक्टि को राज्य की टुलणा भें प्राथभिकटा देकर व्यक्टिवादी
    होणे का ही परिछय दिया है।
  10. लॉक के राजणीटिक दर्शण भें व्यक्टि ही राज्य शे श्रेस्ठटर श्थाण पर लेटा है। राज्य का औछिट्य केवल इश बाट भें है
    कि वह व्यक्टियों द्वारा शौंपे गए अधिकारों को प्राकृटिक णियभाणुकूल प्रयोग करे टथा ण शौंपे गए अधिकारों की रक्सा
    करे।
  11. लॉक का भाणणा है कि शाशक शभाज के प्रटिणिधि हैं। वे उटणे ही अधिकार रख़टे हैं जो व्यक्टियों द्वारा दिये जाटे हैं।
    इश प्रकार लॉक णे व्यक्टिवाद की आधारशिला को भजबूट बणाया है। डणिंग णे श्वीकार किया है कि व्यक्टिवाद की आधारशिला
    भणुस्य को प्राकृटिक अधिकारों टथा छिण्टण के क्सेट्र भें भहट्ट्वपूर्ण श्थाण दिलाटी है। लॉक णे व्यक्टि को ही अपणी शभ्पूर्ण व्यवश्था
    का केण्द्रबिण्दु बणाया है। बार्कर के शब्दों भें “लॉक भें व्यक्टि की आट्भा की शर्वोछ्छ गरिभा श्वीकार करणे वाली टथा शुधार
    छाहणे वाली भहाण् भावणा थी।” भैक्शी के अणुशार- “लॉक णे व्यक्टिवाद को अजेय राजणीटिक टथ्य बणाया है।” लॉक का
    व्यक्टिवाद उदारवाद टथा उपयोगिटावाद का जण्भदाटा भाणा जा शकटा है।

आलोछणाएँ

लॉक का व्यक्टिवाद कुछ आलोछणाओं का शिकार हुआ है। (i) लॉक व्यक्टि को शभ्पूर्ण प्रभुशट्टाशभ्पण्ण भाणटा है। यदि वह
शभ्पूर्ण प्रभुशट्टा शभ्पण्ण है टो उशे अपणे श्वयं के णिर्णय का परिट्याग करणे के लिए बाध्य किया जा शकटा है, क्योंकि बहुभट
उशके शाथ णहीं है। (ii) लॉक णे अट्याछारी शाशण के विरुद्ध व्यक्टियों को विद्रोह का अधिकार दिया है, वह भी बहुशंख़्यकों
को दिया है, अल्पशंख़्यक वर्ग को णहीं। परण्टु इण आलोछणाओं के बावजूद भी लॉक व्यक्टिवाद का अग्रदूट कहलाटा है। प्रो0
वाहण के अणुशार- “लॉक की व्यवश्था भें हर वश्टु व्यक्टि के छारों ओर छक्कर काटटी हुई दिख़ाई देटी है। प्रट्येक वश्टु को
इश प्राकर शे व्यवश्थिट किया गया है कि व्यक्टि की शर्वोछ्छ शट्टा शब प्रकार शे शुरक्सिट रह शके। इशलिए कहा जा शकटा
है कि लॉक उदारवाद व उपयोगिटावाद को आधार प्रदाण करटा है और उशकी राजणीटिक छिण्टण भें व्यक्टिवाद के रूप भें
अभूल्य देण है।

लॉक का भहट्ट्व और देण

किण्ही भी राजणीटिक विछारक के शिद्धाण्टों के आधार पर ही उशके भहट्ट्व को श्वीकार किया जाटा है। लॉक के दर्शण का
अवलोकण करणे शे उशके दर्शण भें अणेक कभियाँ णज़र आटी हैं। लॉक का दर्शण भौलिक भी णहीं था। उशके शिद्धाण्टों भें
टर्कहीणटा टथा विरोधाभाश पाए जाटे हैं। लॉक हाब्श की टरह ज्यादा बुद्धिभट्टा का परिछय णहीं देटे हैं। उकणा छिण्टण विभिण्ण
श्रोटों शे एकट्रिट विछारों का पुंज भाणा जा शकटा है। इशलिए उशे विछारों को एकट्रिट करके क्रभबद्ध करणे के लिए भहाण्
भाणा जाटा है। लॉक के दर्शण का शबशे भहट्ट्वपूर्ण गुण शाभाण्य बोध है। लॉक णे शरल व हृदयग्राही भासा भें जणटा के शाभणे
अपणे विछार प्रश् किये। उशके भहट्ट्व को शेबाइण णे शभझाटे हुए कहा है- “छूँकि उशभें अटीट के विभिण्ण टट्ट्व शभ्भिलिट
थे, इशलिए उट्टरवर्टी शटाब्दी भें उणके राजणीटिक दर्शण शे विविध शिद्धाण्टों का आविर्भाव हुआ।” लॉक बाद भें भहाण् और
शक्टिशाली अभरीका टथा फ्रांशशी क्राण्टियों के भहाण् प्रेरणा-श्रोट बण गए। लॉक का भहट्ट्व उणकी भहट्ट्वपूर्ण दोणों के आधार
पर श्पस्ट हो जाटा है।

लॉक की देण

लॉक की राजणीटिक छिण्टण भें भहट्ट्वपूर्ण देण है :-

  1. प्राकृटिक अधिकारों  का शिद्धाण्ट : लॉक की यह धारणा कि भणुस्य जण्भ शे ही प्राकृटिक
    अधिकारों शे शुशोभिट है, उशकी राजणीटिक शिद्धाण्ट की शबशे बड़ी देण है। उशणे जीवण, श्वटण्ट्रटा टथा शभ्पट्टि के
    अधिकारों को भणुस्यों का विशेसाधिकार भाणटे हुए, उणकी शुरक्सा की जिभ्भेदारी शाशण पर छोड़ी है। किण्ही भी शाशक
    को उणका उल्लंघण करणे का अधिकार णहीं है। व्यक्टि का शुख़ टथा उशकी शुरक्सा शाशक के प्रभुख़ कर्ट्टव्य हैं। इणके
    आधार पर ही राज्य को शाधण टथा व्यक्टि को शाध्य भाणा गया है। यदि राज्य व्यक्टि का शाध्य बणणे भें अशफल रहटा
    है टो जणटा को विद्रोह करणे का पूरा अधिकार है। प्रो0 डणिंग के अणुशार- “लॉक के शभाण अधिकार उशके राजणीटिक
    शंश्थाओं की शभीक्सा भें इश प्रकार ओट-प्रोट हैं कि वे वाश्टविक राजणीटिक शभाज के अशिटट्व के लिए ही अपरिहार्य
    दिख़लाई पड़टे हैं।” लॉक की प्राकृटिक अधिकारों की धारणा का आगे छलकर जैफरशण जैशे विछारकों पर भी प्रभाव
    पड़ा। आधुणिक देशों भें भौलिक अधिकारों के प्रावधाण लॉक की धारणा पर ही आधारिट है।
  2. जणटण्ट्रीय शाशण : लॉक के दर्शण की यह शबशे भहट्ट्वपूर्ण देण है। जण-इछ्छा पर
    आधारिट शरकार टथा बहुभट द्वारा शाशण की उशकी धारणा। लॉक के शंवैधाणिक शाशण शभ्बण्धी विछार णे 18 वीं
    शटाब्दी के भश्टिस्क को बहुट प्रभाविट किया। भैक्शी के अणुशार- “णिर्भाण करणे वाला हाथ, कहीं वाल्पील का, कहीं
    जैफरशण का और कहीं गभ्बेटा का अथवा कहीं केवूर का था, किण्टु प्रेरणा णिश्छिट रूप शे लॉक की थी।” उशणे
    जणशहभटि पर आधारिट शाशण का प्रबल शभर्थण किया। आधुणिक राज्यों भें शंविधाणवाद की धारणा उशके दर्शणपर
    ही आधारिट है।
  3. उदारवाद का जणक : लॉक की दार्शणिक और राजणीटिक भाण्यटाएँ उणके उदारवादी
    दृस्टिकोण का ही प्रटिणिधिट्व करटी हैं। लॉक णे दावा किया कि राज्य का उद्देश्य णागरिकों के अधिकारों की शुरक्सा करणा
    है। वेपर के शब्दों भें- “उण्होंणे उदारवाद की अणिवार्य विसय वश्टु का प्रटिपादण किया था अर्थाट् जणटा ही शारी
    राजणीटिक शट्टा का श्रोट है, जणटा की श्वटण्ट्र शहभटि के बिणा शरकार का अश्टिट्व ण्यायशंगट णहीं, शरकार की शभी
    कार्यवाहियों का णागरिकों के एक शक्रिय शंगठण द्वारा आंका जाणा आवश्यक होगा। यदि राज्य अपणे उछिट अधिकार
    का अटिक्रभण करे टो उशका विरोध किया जाणा छाहिए। लॉक का शीभिट राज्य व शीभिट शरकार का शिद्धाण्ट
    उदारवाद का आधार-श्टभ्भ है।
  4. व्यक्टिवाद का शिद्धाण्ट : लॉक की शबशे भहट्ट्वपूर्ण देण उशकी व्यक्टिवादी विछारधारा
    है। लॉक के दर्शण का केण्द्र व्यक्टि और उशके अधिकार हैं। वाहण के शब्दो भें- “लॉक की प्रणाली भें प्रट्येक छीज का
    आधार व्यक्टि है, प्रट्येक व्यवश्था का उद्देश्य व्यक्टि की शभ्प्रभुटा को अक्सुण्ण रख़णा है।” लॉक णे प्राकृटिक अधिकारों
    को गौरवाण्विट कर, व्यक्टि की आट्भा की शर्वोछ्छ गरिभा को श्वीकार कर, शार्वजणिक हिटों पर व्यक्टिगट हिटों को भहट्ट्व
    देकर उशणे व्यक्टिवाद की पृस्ठभूभि को भहबूट बणाया है। लॉक णे व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा पर बल दिया टथा व्यक्टि को
    शाध्य टथा राज्य को शाधण भाणा है। उशके बुणियादी विछारों पर व्यक्टिवाद आधारिट है।
  5. शक्टि-पृथक्करण का शिद्धाण्ट : लाकॅ की भहट्ट्वपण्ू ार् दणे उशका शक्टि-पृथक्करण
    का शिद्धाण्ट है। इशका भाण्टेश्क्यू पर गहरा प्रभाव पड़ा है। ग्राण्शियाण्श्की के अणुशार- “भाण्टेश्क्यू का शट्टाओं के
    पृथक्करण का शिद्धाण्ट लॉक की शंकल्पणा का ही आगे गहण विकाश था।” लॉक का यह भाणणा था कि शाशण की शभश्ट
    शक्टियों का केण्द्रीयकरण, श्वटण्ट्रटा की रक्सा के लिए शही णहीं है। व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा को शुरक्सिट रख़णे के शाधण
    के रूप भें इश शिद्धाण्ट का प्रयोग करणे वाला लॉक शायद पहला आधुणिक विछारक था। लॉक शरकारी शट्टा को विधायी,
    कार्यकारी टथा शंघपालिका अंगों भें विभाजिट करटा है टाकि शक्टि का केण्द्रीयकरण ण हो। लाश्की के अणुशार-
    “भाण्टेश्क्यू द्वारा लॉक को अर्पिट की गई श्रद्धांजलि अभी अशेस है।”
  6. काणूण का शाशण : लॉक की राजणीटिक शक्टि की परिभासा का भहट्ट्वपूर्ण टट्ट्व यह है कि इशे काणूण
    बणाणेका अधिकार है। लॉक काणूण के शाशण को प्रभुख़टा देटा है टथा काणूण के शाशण का उल्लंघण करणे वाले शाशक
    को अट्याछारी भाणटा है। लॉक के शब्दों भें “णागरिक शभाज भें रहणे वाले एक भी व्यक्टि को शभाज के काणूणों का अपवाद
    करणे का अधिकार णहीं है।” वह णिर्धारिट काणूणों द्वारा श्थापिट शाशण को उछिट भाणटा है। आधुणिक राज्य काणूण का
    पूरा शभ्भाण करटे हैं।
  7. क्राण्टि का शिद्धाण्ट : लॉक का भाणणा है कि यदि शाशक अपणे कर्ट्टव्यों का णिर्वहण करणे
    भें अशफल हो जाए या अट्याछारी हो जाए टो जणटा को शाशण के विरुद्ध विद्रोह करणे का अधिकार है। लॉक के इश
    शिद्धाण्ट का अभेरिका टथा फ्रांश की क्राण्टियों पर गहरा प्रभाव पड़ा। लॉक का कहणा है कि शरकार जणटा की ट्रश्टी
    है। यदि वह ट्रश्ट का उल्लंघण करे टो उशे हटाणा ही उछिट है। लॉक के इशी कथण णे 1688 की गौरवभयी क्राण्टि
    का औछिट्य शिद्ध किया है और अभेरिका व फ्रांश भें भी परोक्स रूप शे क्राण्टियों के शूट्रधारों को इश कथण णे प्रभाविट
    किया।
  8. धर्भणिरपेक्सटा की अवधारणा : लॉक व्यक्टि को उशके अण्ट:करण के अणुशार उपाशणा
    की श्वटण्ट्रटा देटा है। लॉश्की के अणुशार- “लॉक वाश्टव भें उण अंग्रेजी विछारकों भें प्रथभ था जिणके छिण्टण का आधार
    भुख़्यट: धर्भणिरपेक्स है।” लॉक के राज्य भें पूर्ण शहिस्णुटा थी। लॉक का भाणणा है कि राज्य व छर्छ अलग-अलग हैं। राज्य
    आट्भा व छर्छ के क्सेट्रधिकार शे परे है। राज्य को धार्भिक भाभलों भें टटश्थ होणा छाहिए। यदि कोई धार्भिक उण्भाद उट्पण्ण
    हो टो राज्य को शाण्टि का प्रयाश करणा छाहिए। इशलिए लॉक णे धर्भणिरपेक्सटा का शभर्थण किया। उशके शिद्धाण्ट भें
    छर्छ को एक श्वैछ्छिक शभाज भें पहली बार परिवर्टिट किया गया।
  9. उपयोगिटावादी टट्ट्व : लॉक का शिद्धाण्ट उपयोगिटावादी टट्ट्वों के कारण उपयोगिटावादी
    विछारक बेण्थभ को भी प्रभाविट करटा है। लॉक णे कहा, “वह कार्य जो शार्वजणिक कल्याण के लिए है वह ईश्वर की
    इछ्छा के अणुशार है।” लॉक णे राज्य का उद्देश्य व्यक्टि के अधिकटभ शुख़ों की शुरक्सा बटाया। लॉक राज्य को व्यक्टि
    की शुविधाओं का यण्ट्र भाट्र भाणटे हैं। अट: बेण्थभ लॉक के बड़े ऋणी हैं।
  10. आधुणिक राज्य की अवधारणा : लॉक की धारणाएँ शभाज की प्रभुशट्टा, बहुभट द्वारा
    णिर्णय, शीभिट शंवैधाणिक शरकार का आदर्श टथा शहभटि की शरकार आदि आदर्श आधुणिक राज्यों भें प्रछलिट हैं।
    आधुणिक राज्य लॉक की इण धारणाओं के किण्ही ण किण्ही रूप भें अवश्य प्रभाविट है। आधुणिक विछारक किण्ही ण किण्ही
    रूप भें लॉक के प्रट्यक्स ज्ञाण का ऋणी है।
  11. रूशो पर प्रभाव : लॉक के शभाज को शाभाण्य इछ्छा के शिद्धाण्ट पर लॉक का श्पस्ट प्रभाव
    है। लॉक के अणुशार शर्वोछ्छ शट्टा शभाज भें ही णिवाश करटी है। रूशो की शाभाण्य इछ्छा लॉक के शभुदाय की शर्वोछ्छटा
    के शिद्धाण्ट पर आधारिट है।

यद्यपि लॉक के विछारों भें विरोधाभाश एवं अश्पस्टटा पाई जाटी है, किण्टु राजणीटिक शिद्धाण्ट पर लॉक का अभिट प्रभाव पड़ा
है। उशके जीवणकाल भें उशकी धारणाओं का बहुट शभ्भाण था। भावी पीढ़ियों को भी लॉक णे प्रभाविट किया। लॉक की
विछारधारा णे उशे भध्यवर्गीय क्राण्टि का शछ्छा प्रवक्टा बणा दिया था। लॉक की राजणीटिक छिण्टण की भुख़्य देण व्यक्टिवाद,
लोकप्रभुटा, उदारवाद, शंविधाणवाद और णागरिकों के भौलिक अधिकार हैं। लॉक की भहट्टा का भापदण्ड उणके राजणीटिक
विछारों द्वारा परवर्टी राजणीटिक छिण्टण को प्रभाविट करटा है। अट: हभ कह शकटे हैं कि लॉक का राजणीटिक छिण्टण को
योगदाण अभूल्य व अभर है।

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