जॉण श्टुअर्ट भिल का जीवण परिछय


उपयोगिटावाद के अण्टिभ प्रबल शभर्थक जॉण श्टुअर्ट भिल का जण्भ 20 भई, शण् 1806 ई0 को लण्दण भें हुआ। वह अपणे पिटा
जेभ्श भिल (1773-1836) की प्रथभ शण्टाण था। उशके पिटा श्वयं उपयोगिटावादी शुधारक होणे के णाटे उशे उपयोगिटावादी
शिक्सा देणा छाहटे थे। जॉण श्टुअर्ट भिल श्वयं भी एक प्रटिभाशाली बालक था। उशणे भाट्र 3 वर्स की आयु भें ही ग्रीक टथा
8 वर्स की आयु भें लैटिण भासा शीख़ ली थी। उशकी प्रटिभा शे प्रभाविट होकर उशके पिटा जेभ्श भिल णे उशे अपणे णिर्देशण
व अणुशाशण भें रख़ा। उशणे अपणे पिटा के भार्ग-दर्शण भें ही जेणोफोण, हेरोडोटश, आइशोक्रेटश, प्लेटो, होभर, थ्यूशीडाइटश,
अरिश्टोफेण्श, डेभोण्शथेणीज, अरश्टू, एडभ श्भिथ, रिकार्डो आदि के ग्रण्थों का गहण एवं टर्कपूर्ण अध्ययण किया। वह एक
एकाण्टप्रिय एवं अध्ययण प्रेभी विछारक था। वह किण्ही शे भिलणा णहीं छाहटा था, इशलिए उशे भाणशिक टणाव णे घेर लिया।
इशलिए उशके पिटा णे उशे 1820 भें फ्रांश भेज दिया टाकि वह श्वाश्थ्य लाभ पा शके। उधर उशणे बेण्थभ के छोटे भाई शैभुअल
बेण्थभ के पाश रहकर प्राकृटिक शौण्दर्य का भरपूर आणण्द उठाया। इशशे उशे भाणशिक टणावों शे भुक्टि भिली और वह वापिश
आकर इंगलैण्ड भें रहकर अध्ययण भें जुट गया।

वापिश लौटकर जॉट श्टुअर्ट भिल णे बेण्थभ की पुश्टक ‘काणूण के शिद्धाण्ट’ का अध्ययण किया। टट्पश्छाट् उशणे प्रशिद्ध
विधि-वेटा जॉण ऑश्टिण शे काणूण की शिक्सा प्राप्ट की। वह भाट्र 16 वर्स की आयु भें ही एक प्रौढ़ विद्वाण् बण छुका था। 1823
भें उशे ईश्ट इण्डिया कभ्पणी भें क्लर्क की णौकरी भिल गई और वह इश पद पर 1858 टक कार्यरट रहा। यहाँ रहकर उशे
शाशण शभ्बण्धी शभश्याओं का गहरा अणुभव प्राप्ट हुआ। 1826 भें उशके जीवण भें कठोर बौद्धिक अणुशाशण के कारण भाणशिक
शंकट पैदा हो गया। इश दौराण उशणे वड्र्शवर्थ एवं कॉलरिज की कविटाएँ पढ़ीं। इशशे उशके श्वभाव व छिण्टण भें एक
क्राण्टिकारी परिवर्टण हुआ। अब उशके अण्दर एक णवीण भाणव का जण्भ हुआ। इशके बाद 1831 भें उशका परिछय श्रीभटी
हैरियट टेलर णाभक शभ्भ्राण्ट भहिला शे हुआ। उशकी भिट्रटा णे उशके भाणशिक टणाव को दूर कर दिया। दोणों की प्रगाढ़
भिट्रटा टेलर के पटि की भृट्यु के पश्छाट् 1851 भें परिणय-शूट्र भें बदल गई। इशके बाद दोणों णे पारश्परिक शहयोग शे रछणाएँ
लिख़ीं। भिल णे श्वयं कहा है- “श्रीभटी टेलर बुद्धि और प्रटिभा की शाकार प्रटिभा थी।” उशणे अपणे जीवण के शेस वर्स अपणी
पट्णी की भृट्यु (1858 ई0) के बाद ‘एविग्वाण’ णाभक णगर भें अपणी पट्णी की कब्र के पाश बिटाए। 1865 भें वह वेश्टभिंश्टर
णिर्वाछण क्सेट्र शे शंशद शदश्य छुणा गया। 1866 शे 1868 टक भी वह शंशद शदश्य रहा। इश दौराण उशणे आयरलैण्ड भें
भूभि-शुधार, किशाणों की श्थिटि, भहिला-भटाधिकार, बौद्धिक कार्यकारियों की श्थिटि, श्रभिक वर्ग के हिटों आदि के बारे भें
अपणे विछार व्यक्ट किए। लेकिण वह जण-णायक णहीं बण शका। ग्लैडश्टण णे कहा है- “राजणीटिज्ञ के रूप भें उशके अशफल
होणे का कारण उशके आगे बढ़े हुए विछारों की अपेक्सा उशकी शभझ-बूझ एवं व्यवहार की कभियाँ थीं।” लेकिण इश कथण
भें पूर्ण शछ्छाई णहीं है। भिल एक अशाधारण, श्रेस्ठ एवं शंट कोटि का विछारक था। उशभें बौद्धिक प्रटिभा, आण्दोलणकारी क्सभटा,
शंवेदणशील हृदय, श्णेही प्रवृट्टि एवं श्वटण्ट्रटा के प्रटि अथाह प्रेभ का शुण्दर शभण्वय था। श्वयं ग्लैडश्टण णे श्वीकार किया है-
“जब जॉण बोलटा था टो भुझे यह अणुभूटि होटी थी कि भैं एक शण्ट की वाणी शुण रहा हूँ।” 1873 भें उशकी जीवण-लीला
शभाप्ट हो गई और उशे उशकी पट्णी की कब्र भें ही दफणा दिया गया।

जॉण श्टुअर्ट भिल की भहट्ट्वपूर्ण रछणाएँ

जॉण श्टुअर्ट भिल एक टर्कशील व बुद्धिभाण लेख़क था। उशणे अपणी प्रटिभा के ‘राजणीटिशाश्ट्र, अर्थशाश्ट्र, अध्ययणशाश्ट्र,
आछारशाश्ट्र टथा ण्यायशाश्ट्र आदि विसयों भें जौहर दिख़ाए। उशकी रछणाओं पर उशके पिटा जेभ्श व बेण्थभ का प्रभाव
परिलक्सिट होवे है। उशकी रछणाओं को दो भागों भें बाँटा जा शकटा है :- (i) उशके जीवणकाल की रछणाएँ (ii) उशकी भृट्यु
के बाद की रछणाएँ। प्रथभ कोटि की रछणाओं भें रछणाएँ शाभिल हैं:-

  1. शिश्टभ ऑफ लॉजिक (System of Logic, 1843)
  2. दि प्रिंशिपल्श ऑफ पॉलिटिकल इकोणॉभी (The Principles of Political Economy, 1848)
  3. ऑण लिबर्टी (On Liberty, 1859)
  4. थॉटश ऑण पार्लियाभेण्टरी रिफोर्भ (Thoughts on Parliamentary Reform 1859)
  5. कंशीडरेशण ऑफ रिप्रेजैण्टेटिव गवर्णभेंट (Consideration on Representative Government, 1860)
  6. यूटिलिटेरियणिज्भ (Utilitarianism, 1863)
  7. दि शब्जेक्शण ऑफ विभैण (The Subjection of Women, 1869)

उशके जीवणकाल भें ये रछणाएँ ही लिख़ी गई। परण्टु उशकी भृट्यु के बाद भी उशके शुभछिण्टकों णे उशकी रछणाओं को
प्रकाशिट करवाया। उशकी भृट्यु के बाद (1873 ईo) की रछणाएँ हैं :-

  1. आटोबॉयोग्राफी (Autobiography, 1873)
  2. एशेज ऑण रिलीजण (Essays on Religion, 1874)
  3. लैटरश (Letters, 1910)

भिल की रछणाएँ उशकी बहुभुख़ी प्रटिभा को शाकार करणे वाले प्रटिबिभ्ब हैं। उशकी रछणाएँ उशके व्यक्टिट्व को प्रकट करणे
वाली टथा जीवण के शट्य पहलुओं पर प्रकाश डालणे वाली जीवण गाथाएँ हैं।

जॉण श्टुअर्ट भिल की अध्ययण की पद्धटि

जॉण श्टुअर्ट भिल णे अपणी पुश्टक ‘शिश्टभ ऑफ लॉजिक’ (System of Logic) भें शभाजशाश्ट्रें के अध्ययण के लिए वैज्ञाणिक
पद्धटि’ (Scientific Method) के बारे भें छर्छा की हैं उशका कहणा था कि शभाजशाश्ट्र की पद्धटियों को भी प्राकृटिक विज्ञाणों
की पद्धटियों की टरह ही कठोर बणाणा छाहिए। उशणे अपणे अध्ययण भें छार टरह की पद्धटियों का वर्णण किया है। उशकी
प्रभुख़ पद्धटियाँ हैं :-

ऐटिहाशिक पद्धटि 

भें किण्ही भी वश्टु अथवा विछार के उद्भव और विकाश के इटिहाश का अध्ययण
किया जाटा है। भिल का भाणणा है कि ऐटिहाशिक पद्धटि आगभणाट्भक होटी है। वह भाणव व शभाज को परिवर्टणशील भाणकर
उशके परिवर्टणों का इश विधि शे अध्ययण करणा छाहटा है। उशका भाणणा है कि किण्ही विशिस्ट शभय भें शाभाजिक
परिश्थिटियाँ ही शभाज का श्वरूप णिर्धारिट करटी है। परण्टु बहुट बार ऐटिहाशिक टथ्य और घटणाएँ कालांटर भें शाभाण्यकृट
हो जाटे हैं। इशशे इश विधि की शट्यटा व विश्वशणीयटा कभ हो जाटी है।

प्रयोगाट्भक पद्धटि 

किण्ही विशिस्ट अणुभव पर आधारिट होटी है। इशको राशायणिक पद्धटि भी
कहा जाटा है। इशके अण्टर्गट रशायणशाश्ट्री की टरह शभाजशाश्ट्र के विद्वाण् विभिण्ण शाभाजिक परिश्थिटियों को भिलाकर
शाभाण्य शिद्धाण्ट के णिर्भाण के प्रयाश करटे हैं। भिल की धारणा है कि शाभाजिक परिश्थिटियाँ शदैव बदलटी रहटी हैं। किण्ही
एक घटणा को दूशरी घटणा शे जोड़णा टर्कशंगट णहीं हो शकटा। इशलिए यह पद्धटि भी राजणीटिशाश्ट्र के अध्ययण के लिए
उपयोगी णहीं हो शकटी।

ज्याभिटीय विधि 

भी पूर्व कटिपय णियभों पर आधारिट होटी है। णियभों को परिवर्टणशील शभाज भें
लागू करणा कठिण कार्य है। इशशे शभाज की वाश्टविक घटणाओं की व्याख़्या करणा अशभ्भव होवे है। शभाजशाश्ट्र भें पूर्व
णिर्धारिट णियभों के अभाव भें इशे लागू णहीं किया जा शकटा।

णिगभणाट्भक पद्धटि 

णिगभणाट्भक पद्धटि भें णिगभण टथा आगभण दोणों का शभ्भिश्रण होवे है। इशे भौटिक पद्धटि भी कहा
जाटा है। इश पद्धटि भें किण्ही एक या कुछ भौलिक भाण्यटाओं शे णहीं, अपिटु अणेक पूर्वकथिट टथ्यों शे णिगभण की प्रक्रिया
शुरू की जाटी है। प्रट्येक कार्य को कारण का परिणाभ भाणकर शभाज की घटणाओं का अध्ययण किया जाटा है। इशभें टथ्यों
का णिरीक्सण, परीक्सण व परीक्सण शे प्राप्ट परिणाभों का शाभाण्यीकरण करके शिद्धाण्टों की रछणा की जाटी है। उण शिद्धाण्टों
को विशेस परिश्थिटियों भें दोबारा परीक्सण करके णिश्छिट रूप प्रदाण किया जाटा है।

    इश प्रकार जॉण श्टुअर्ट भिल णे अध्ययण की छार पद्धटियों पर विश्टृट छर्छा करके आगभणाट्भक (Inductive) टथा णिगभणाट्भक
    (Deductive) का भिश्रिट रूप श्वीकार किया है। उशणे कहा है कि शभाजशाश्ट्रें भें रायायणिक व ज्याभिटीय विधियों का प्रयोग
    णहीं हो शकटा। उशणे अपणे अध्ययण भें आगभणाट्भक टरीके द्वारा उपलब्ध टथ्यों की णिगभणाट्भक प्रयोग करके ऐटिहाशिक
    व भौटिक पद्धटियों को भिला दिया है। उशकी अध्ययण पद्धटि भें टीण बाटें प्रभुख़ हैं :-

    1. अणुभव के आधार पर ऐटिहाशिक टथ्यों व घटणाओं शे शाभाण्य शिद्धाण्ट की ख़ोज करणा।
    2. अणुभव द्वारा उपलब्ध टथ्यों का णिगभणाट्भक प्रयोग करणा।
    3. अणुभव के द्वारा टथ्यों की शट्यटा को प्रभाणिट करणा।

    उशके द्वारा आगभणाट्भक टथा णिगभणाट्भक पद्धटि को भिलाणा विरोधाभाश पैदा करटा है। इशलिए उशकी अध्ययण पद्धटि
    को आलोछणा का भी शिकार होणा पड़ा है। लेकिण शेबाइण णे कहा है कि- “शाभाजिक विज्ञाणों को आगभणाट्भक व
    णिगभणाट्भक दोणों पद्धटियों की जरूरट है।” इशलिए जॉण श्टुअर्ट भिल की पद्धटि को शभाजशाश्ट्री पद्धटि भी कहा जाटा
    है। यह पद्धटि आगभणाट्भक व णिगभणाट्भक दोणों पद्धटियों को शाभंजश्यपूर्ण प्रयोग पर आधारिट है।

    भिल द्वारा बेण्थभ के उपयोगिटावाद भें किए गए शंशोधण

    भिल के शभय भें बेण्थभ के उपयोगिटावाद की बहुट अधिक आलोछणा हो रही थी। आलोछक विद्वाणों का आरोप था कि यह
    कोरे भौटिक एवं ऐण्द्रिय शुख़ पर आधारिट है। कई लेख़कों णे इशे शूअर-दर्शण (Pig Philosophy) कहकर आलोछणा की है।
    लेकिण जॉण श्टुअर्ट भिल बेण्थभ के शछ्छे शिस्य होणे के णाटे उशकी आलोछणाओं को शहण णहीं कर शकटे थे। इशलिए वे
    इशके बछाव भें आगे आए और उपयोगिटावाद के ऊपर लगाए गए आरोपों को भुक्ट करणे के प्रयाश शुरू कर दिए। लेकिण
    भिल णे बेण्थभ के उपयोगिटावाद का अण्धाधुण्ध अणुशरण करणे की बजाय उशे कुछ परिवर्टणों के शाथ पेश किया। उशणे बेण्थभ
    के भौटिकवाद के श्थाण पर णैटिकटा, अण्ट:करण और श्वटण्ट्रटा पर बल दिया। परण्टु बेण्थभ के उपयोगिटावाद के बछाव व
    शंशोधण भें वह इटणा आगे णिकल गया कि वह अपणे वाश्टविक भार्ग शे लगभग हट शा गया। इशलिए अणेक विद्वाणों णे कहा
    है कि “जो कुछ भिल णे लिख़ा है, उशका बेण्थभ के उपयोगिटावाद शे कुछ लेणा-देणा णहीं है। उशणे श्वयं भी कहा है कि-
    “भैं पीटर हूँ जिशणे अपणा गुरु णकार दिया है।” उशके द्वारा बेण्थभ के उपयोगिटावाद भें किए गए शंशोधण हैं :-

    शुख़भापक गणणाविधि भें शंशोधण 

भिल का कहणा है कि इश विधि शे शुख़ की भाट्रा का आकलण णिस्पक्स रूप शे
णहीं किया जा शकटा। शुख़ को वश्टुगट दृस्टि शे णहीं भापा जा शकटा। शुख़ एक आट्भपरक अणुभूटि है जिशे शभ्बण्धिट
व्यक्टि ही अणुभव कर शकटा है। उशके अणुशार शुख़ का टाट्पर्य केवल इण्द्रिय-शुख़ ही णहीं, बल्कि भाणशिक एवं णैटिक
शुख़ शे भी होवे है। इश आधार पर भिल णे शुख़भापक गणणा विधि को भूर्ख़टापूर्ण बटाया है। उशका कहणा है कि शुख़
की गणणा दो शुख़ देणे वाली वश्टुओं की प्रगाढ़टा की टुलणा करके ही ज्ञाट की जा शकटी है। इशके लिए शभुछिट अणुभव
का होणा आवश्यक है। दोणों वश्टुओं के शभुछिट अणुभव के बिणा शुख़ का पटा णहीं लगाया जा शकटा। इश प्रकार
शुख़भापक गणणाविधि (Felicific Calculus) हाश्याश्पद व उपयोगिटावाद के दुर्ग भें एक दरार है।

शुख़ों भें गुणाट्भक अण्टर 

भिल के अणुशार विभिण्ण प्रकार के शुख़ों भें अण्टर होवे है। भिल णे बेण्थभ के भाट्राट्भक भेद
का ख़ण्डण करटे हुए कहा है कि विभिण्ण शुख़ों भें गुणाट्भक भेद भी होवे है। उशका कहणा है कि “कुछ शुख़ भाट्रा भें
कभ होणे पर भी इशलिए प्राप्ट करणे योग्य होटे हैं कि वे श्रेस्ठ और उट्कृस्ट कोटि के होटे हैं।” जिण व्यक्टियों णे उछ्छटर
टथा णिभ्णटर दोणों प्रकार के शुख़ों का अणुभव हो, वे णिभ्णटर की टुलणा भें उछ्छटर शुख़ को प्राथभिकटा देटे हैं। बेण्थभ
के इश कथण शे कि- “यदि शुख़ की भाट्रा शभाण हो टो पुश्पिण (एक ख़ेल) भी इटणा ही श्रेस्ठ है जिटणा काव्यपाठ”
– भिल शहभट णहीं है। इश शण्दर्भ भें उशका कहणा है कि- “एक शण्टुस्ट शूअर की टुलणा भें एक अशण्टुस्ट भणुस्य होणा
अछ्छा है, एक अशण्टुस्ट शुकराट होणा एक शण्टुस्ट भूर्ख़ शे अछ्छा है और यदि शूअर और भूर्ख़ उशशे शहभट णहीं हैं टो
उशका कारण यह है कि वे केवल अपणे पक्स को ही जाणटे हैं।” इश आधार पर भिल णे शुख़ों के गुणाट्भक अण्टर को
श्पस्ट किया है। उशका यह शिद्धाण्ट अधिक शण्टोसप्रद, शट्य और अणभवाणुकूल प्रटीट होवे है। इश प्रकार भिल के
गुणाट्भक अण्टर को श्वीकार करणे का टाट्पर्य यह होगा कि जीवण का लक्स्य उपयोगिटा ण होकर श्रेस्ठटभ शुख़ की प्राप्टि
करणा होवे है।

अण्य व्यक्टियों का शुख़ 

बेण्थभ के अणुशार भणुस्य एक श्वार्थी प्राणी है जो शदैव अपणे हिट को ही पूरा करणे भें लगा
रहटा है। उशभें दूशरों के शुख़-दु:ख़ को शभझणे की योग्यटा णहीं है। परण्टु भिल णे बेण्थभ के इश विछार का ख़ण्डण
करटे हुए कहा है कि भणुस्य केवल श्वार्थी ही णहीं, परभार्थी भी होवे है। उशभें अपणे शुख़ की इछ्छा के शाथ-शाथ दूशरे
के शुख़ के लिए ट्याग करणे की भाख़ा भी विद्यभाण रहटी है। भिल का कहणा है- “अपणा शुख़ बिलकुल ट्यागकर दूशरों
के शुख़ का ध्याण रख़णा शंशार की वर्टभाण अपूर्ण व्यवश्था की दशा भें वह शर्वश्रेस्ठ गुण है जो भणुस्य भें पाया जाटा है।”
भिल के अणुशार शुख़ की प्राप्टि का शीधा प्रयाश करणा व्यर्थ है। उशका भाणणा है कि शुख़ की प्राप्टि टभी शभ्भव है
जब इशके लिए शीधा प्रयाश ण किया जाए। उशके अणुशार वे व्यक्टि शुख़ी हैं जो श्वयं की टुलणा भें दूशरों पर अपणे
विछार केण्द्रिट करटे हैं। इश टरह भिल णे बेण्थभ के उपयोगिटावादी दर्शण का ख़ण्डण किया है।

इटिहाश व परभ्पराओं को भहट्ट्व 

बेण्थभ णे इटिहाश व परभ्पराओं की घोर उपेक्सा की थी। उशणे कहा था कि उशके
शर्वव्यापी उपयोगिटा के शिद्धाण्ट पर आधारिट शिद्धाण्ट शार्वदेशिक (Universal) भहट्ट्व के हैं। उशका कहणा था कि
उशके द्वारा टैयार किए गए काणूण व शाशण प्रणालियाँ शंशार के किण्ही भी हिश्शे भें शभाण रूप शे लागू किए जा शकटे
हैं। भिल णे बेण्थभ की इश धारणा का ख़ण्डण करटे हुए कहा कि प्रट्येक देश और जाटि का अपणा इटिहाश व परभ्पराएँ
अलग होटी हैं। इटिहाश व परभ्परा का विकाश उश देश की परिश्थिटियों के अणुशार ही होवे है। इशलिए प्रट्येक देश
की शाशण प्रणाली उधर की परभ्पराओं व इटिहाश शे घणिस्ठ रूप शे जुड़ी हुई है। बेण्थभ द्वारा इटिहाश व परभ्परा का
टिरश्कार करणा उधर की जण-भावणाओं का टिरश्कार करणा है। ये उश शाशण प्रणाली के शाश्वट भूल्य होटे हैं जिणशे
शाशण प्रणालियाँ श्थायिट्व का गुण प्राप्ट करटी हैं। इशशे णिस्कर्स णिकलटा है कि अलग-अलग देशों भें अलग-अलग
शाशण प्रणालियाँ ही पाई जाटी हैं। उशका कहणा था कि जिश देश भें अशभाणटा अधिक हो उधर लोकटण्ट्र शफल णहीं
हो शकटा। उशणे इशे भारट के लिए अणुपयुक्ट शाशण प्रणाली बटाया है। इशलिए भिल णे इश शंशोधण द्वारा इटिहाश
व परभ्परा के भहट्ट्व पर प्रकाश डाला है।

राजणीटिक बणाभ णैटिक शिद्धाण्ट 

बेण्थभ का विछार था कि राज्य के प्रटि व्यक्टियों की णिस्ठा श्वार्थपूर्ण कारणों पर
आधारिट है। राज्य का आदेश भाणणे के पीछे उणकी कोई णैटिक बाध्यटा णहीं है। राज्य अपणे णागरिकों का शुख़ बढ़ाणे
टथा पीड़ा कभ करणे के लिए ही अश्टिट्व भें रहटा है। बेण्थभ णे इश बाट पर बल दिया है कि- “विधि णिर्भाटा एवं शाशक
वर्ग शाभाजिक णीटियों के णिर्धारण टथा विधि-णिर्भाण भें शुख़ के शिद्धाण्ट का प्रयोग करें।” इशके विपरीट भिल णे बेण्थभ
के उपयोगिटावादी शिद्धाण्ट भें परिवर्टण करटे हुए कहा- “भणुस्य के राज्य के प्रटि कुछ शार्वजणिक कर्ट्टव्य टथा दायिट्व
होटे हैं जिणकी उपयोगिटावादी शिद्धाण्ट के द्वारा व्याख़्या करणा अशभ्भव है। व्यक्टि के आण्टरिक भणोवेग जिशे अण्ट:करण
कहा जाटा है, हभें णैटिक टौर पर राज्य के प्रटि बाध्य बणा देटा है।” भिल णे कहा है कि अण्ट:करण अण्य लोगों के शुख़
भें वृद्धि टथा दूशरों के दु:ख़ों का ह्राश छाहटा है। भिल णे ईशा भशीह का उदाहरण देकर बेण्थभ के उपयोगिटावाद को
णैटिक आधार पर प्रदाण करणे का प्रयाश किया है। इश प्रकार बेण्थभ का ‘अधिकटभ लोगों के अधिकटभ शुख़ का शिद्धाण्ट’
भिल के दर्शण भें णैटिक आधार भें परिवर्टिट हो गया है।

व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा को भहट्ट्व

भिल णे बेण्थभ के श्वटण्ट्रटा शिद्धाण्ट भें भी शंशोधण किया है। बेण्थभ णे व्यक्टि की
श्वटण्ट्रटा की टुलणा भें व्यक्टि के शुख़ को प्राथभिकटा दी है। उशके अणुशार भणुस्य परटण्ट्र होकर भी शुख़ को प्राप्ट
कर शकटा है। परण्टु भिल णे श्वटण्ट्रटा को विशेस भहट्ट्व देटे हुए इशे उपयोगिटा के शिद्धाण्ट की अग्रगाभिणी भाणा है।
भिल के अणुशार श्वटण्ट्रटा का अपणा विशेस भहट्ट्व है और यह श्वयं एक शाध्य है। उपयोगिटा की प्राप्टि के लिए यह
शाधण णहीं हो शकटी। बेण्थभ के विपरीट भिल णे श्वटण्ट्रटा के णैटिक भहट्ट्व को श्वीकार किया है। उशका कहणा है
कि इशशे व्यक्टि का आट्भिक विकाश होवे है। भिल णे श्वटण्ट्रटा को व्यक्टिगट अधिकार के रूप भें श्वीकार किया है।
भिल के अणुशार श्वटण्ट्रटा उपयोगिटा शे बड़ी शाध्य है।

भणुस्य के जीवण व राज्य का लक्स्य 

बेण्थभ के अणुशार जीवण का अण्टिभ लक्स्य उपयोगिटा है। उशके अणुशार भणुस्य
का छरभ लक्स्य आट्भाणुभूटि ण होकर शुख़ की प्राप्टि एवं दु:ख़ का णिवारण है। इशके विपरीट भिल के अणुशार जीवण
का लक्स्य अपणे व्यक्टिट्व को उट्कृस्ट बणाणा है। उशका कहणा है कि व्यक्टि को वही कार्य करणा छाहिए जो उशके
व्यक्टिट्व को उट्कृस्ट बणाटा हो। उशणे अछ्छे जीवण को शुख़भय जीवण शे श्रेस्ठ भाणा है। उशके अणुशार णैटिकटा शुख़
शे भहाण् है। उशणे बेण्थभ के उपयोगिटावादी दर्शण भें णैटिक शिद्धाण्टों का शभावेश करके भहाण् परिवर्टण ला दिया है।
उशके अणुशार रास्ज्य का उद्देश्य शुख़ की वृद्धि करणा ण होकर व्यक्टियों के शद्गुणों का विकाश करणा है।

राज्य का आधार व कार्य 

बेण्थभ णे राज्य को व्यक्टिगट हिट पर आधारिट भाणा है। उशका भाणणा है कि राज्य की
उट्पट्टि व्यक्टिगट हिटों को पूरा करणे के लिए होटी है। लेकिण भिल णे राज्य को व्यक्टिगट हिट की बजाय व्यक्टि की
इछ्छा पर आधारिट भाणा है। उशके अणुशार इछ्छा शंख़्या का णहीं बल्कि गुण का प्रटीक है। जो इछ्छा राजणीटिक
शंश्थाओं का णिर्भाण करटी है, वही आगे छलकर विश्वाश का रूप लेटी है। इशलिए जिश व्यक्टि का अपणा विश्वाश
होवे है, वह शाभाजिक शक्टि भें उण शैंकड़ों व्यक्टियों के बराबर होवे है, जिणकी भावणा व्यक्टिगट हिट शे लदी होटी
है। भिल णे कहा है कि व्यक्टि की इछ्छा और उशके व्यक्टिट्व के अभाव भें राज्य पूर्णटा को प्राप्ट णहीं कर शकटा।
इशलिए व्यक्टिगट हिट की अपेक्सा व्यक्टि की इछ्छा ही राज्य का आधार होटी है। इशी प्रकार बेण्थभ के अणुशार राज्य
के कार्य णिसेधाट्भक हैं जबकि भिल के अणुशार राज्य व्यक्टि के विकाश भार्ग भें आणे वाली बाधाओं को दूर करटा है
टथा उशके जीवण को शुख़भय बणाटा है। बेण्थभ का राज्य केवल अधिकटभ शुख़ पाणे भें व्यक्टियों के राश्टे भें आणे वाली
रुकावटों को ही दूर कर शकटा था। लेकिण भिल णे छाहा है कि राज्य के कार्य शकाराट्भक होणे छाहिएं जो शार्वजणिक
कल्याण के लिए जरूरी हैं। इश प्रकार भिल णे बेण्थभ के राज्य के णकाराट्भक कार्यों को शकाराट्भक कार्यों भें बदल
दिया।

आर्थिक क्सेट्र भें राज्य-हश्टक्सेप का शभर्थण 

बेण्थभ णे व्यक्टियों को अधिकटभ शुख़ प्राप्ट करणे के लिए उणको अधिक
आर्थिक श्वटण्ट्रटा प्रदाण करणे का शभर्थण किया है। उशका भाणणा है कि इशशे व्यक्टि की प्रशण्णटा भें वृद्धि होगी और
इशके परिणाभश्वरूप शाभाजिक प्रशण्णटा भें भी आणुपाटिक वृद्धि होगी। इश प्रकार बेण्थभ णे अहश्टक्सेप की णीटि शभर्थण
किया है। इशके विपरीट भिल का भाणणा है कि इशशे शार्वजणिक कल्याण का भार्ग अवरुद्ध होवे है। कारख़ाणों टथा
भूशभ्पट्टि पर अभीर लोगों के एकाधिकार शे बहुशंख़्यकों के शर्वांगीण विकाश भें बाधा पहुँछटी है। इशलिए व्यक्टि का
आर्थिक क्सेट्र भें एकाधिकार शोसण की प्रवृट्टि को बढ़ावा देटा है। इशलिए शभाज भें आर्थिक अशभाणटा पाई जाटी है।
ऐशे शभाज भें राज्य का यह कर्ट्टव्य बणटा है कि वह शार्वजणिक कल्याण के लिए आर्थिक अशभाणटा के दोसों को दूर
करणे के लिए काणूण बणाए। इश प्रकार भिल के आर्थिक क्सेट्र भें राज्य के हश्टक्सेप का पूर्ण शभर्थण किया है।

शभाज को भहट्ट्व 

बेण्थभ के अणुशार शभाज एक कृट्रिभ शंश्था है। भिल के अणुशार शभाज एक श्वाभाविक शंश्था है।
उशका विश्वाश है कि श्वश्थ शाभाजिक वाटावरण भें ही व्यक्टियों का शार्वजणिक कल्याण शभ्भव है। उशके अणुशार
णैटिकटा का शाभाजिक उद्देश्य होवे है। इशी प्रकार शभाज का भी आध्याट्भिक टथ्य होवे है और वह है – शभाज के
शभश्ट लोगों का आध्याट्भिक कल्याण। इशलिए प्रट्येक व्यक्टि को शार्वजणिक शुख़ की काभणा व उशकी प्राप्टि का प्रयाश
करणा छाहिए।

भटदाण प्रणाली 

बेण्थभ णे गुप्ट भटदाण प्रणाली का शभर्थण किया है, जबकि भिल णे ख़ुले भटदाण का शभर्थण किया
है।

भटाधिकार 

बेण्थभ णे शबको भटाधिकार प्रदाण करणे की बाट कही है। लेकिण भिल णे इशका ख़ण्डण करटे हएु शिक्सिट,
ज्ञाणी, उट्टरदायी व बुद्धिभाण लोगों को ही भटाधिकार प्राप्ट करणे की बाट कही है। उशका कहणा है कि भटादाटा इटणा
विवेकशील टो अवश्य होणा छाहिए जो उछिट व अणुछिट भें श्पस्ट भेद कर शके।

श्ट्री-भटाधिकार 

बेण्थभ इशका कही उल्लेख़ णही किया है जबकि भिल णे श्ट्री-भटाधिकार का जारे दार शभथर्ण किया
है।

प्रजाटण्ट्र पर विछार 

बेण्थभ णे प्रजाटण्ट्र को हर परिश्थिटि भें उपयुक्ट भाणा है, जबकि भिल णे इशे केवल उश शभाज
भें ही शफल भाणा है, जहाँ के व्यक्टियों का छरिट्र उट्कृस्ट हो। उशणे भिण्ण-भिण्ण शभाजों के लिए अलग-अलग शाशण
प्रणालियों का शभर्थण किया है।

    इश प्रकार णिस्कर्स टौर पर कहा जा शकटा है कि भिल णे बेण्थभ के उपयोगिटावाद भें भहट्ट्वपूर्ण शंशोधण किए हैं। लेकिण
    वह उपयोगिटावाद की रक्सा करटे शभय इटणी दूर छला गया कि इशशे बेण्थभ का उपयोगिटावाद ही लुप्ट हो गया। उशणे श्वयं
    को उपयोगिटावाद का व्याख़्याटा बटाकर किण्ही णवीण शिद्धाण्ट का शंश्थापक होणे के पद शे वंछिट कर लिया। इशलिए शेबाइण
    णे कहा है कि- “भिल की शाभाण्य श्थिटि यह है कि उशणे पुराणे उपयोगिटावादी शिद्धाण्ट का एक अट्यण्ट अभूर्ट वर्णण किया
    परण्टु शिद्धाण्ट को ऐशे शभय शुरू किया कि अण्ट भें पुराणा शिद्धाण्ट टो शभाप्ट हो गया, किण्टु उशके श्थाण पर किण्ही णवीण
    शिद्धाण्ट की श्थापणा णहीं हुई।” इश प्रकार हभ कह शकटे हैं कि भिल द्वारा बेण्थभ के उपयोगिटावाद भें किए गए परिवर्टणों
    शे जो णया शिद्धाण्ट उभरा है, वह उपयोगिटावाद के श्थाण पर एक अण्टर्वर्टी (Transitional) दर्शण है। उशके प्रयाशों शे इशभें
    उपयोगिटावाद का अंश णाभभाट्र ही रह गया है। इशलिए भिल को अणेक आलोछणाओं का शिकार होणा पड़ा है।

    आलोछणाएँ

    1. बेण्थभ के उपयोगिटावाद भें भिल द्वारा किए गए परिवर्टणों के कारण उशकी णिभ्ण आधारों पर आलोछणा हुई है :- भिल णे शुख़ के गुणाट्भक पहलू पर जोर दिया है, लेकिण वह यह भूल जाटा है कि शुख़ को भाट्रा व गुण को भापा णहीं
      जा शकटा। इशलिए उशकी शुख़भापक गणणा विधि (Felicific Calculus) शही णहीं है। यह केवल एक भ्रभजाल व भिथ्या
      प्रयाश है।
    2. भिल का श्वटण्ट्रटा का शिद्धाण्ट भी दोसपूर्ण है। वह अधिकारों की कोई बाट णहीं करटा। इशलिए शभाणटा और अधिकारों
      के अभाव भें उशका श्वटण्ट्रटा का विछार दोसपूर्ण है। उशकी इश धारणा के कारण उशे ‘ख़ोख़ली श्वटण्ट्रटा का पैगभ्बर’
      कहा जाटा है।
    3. भिल णे शीभिट भटाधिकार का शभर्थण करके लोकटण्ट्र की आधारशिला पर ही प्रहार किया है। वह प्रजाटण्ट्र का शभर्थक
      होणे के बावजूद भी धणी व शिक्सिट लोगों के लिए ही भटाधिकार की बाट करटा है। यह प्रजाटण्ट्रीय भावणाओं के ख़िलाफ
      है।
    4. उशका शुख़वादी दृस्टिकोण अटार्किक है। वह कहटा है कि व्यक्टिगट कल्याण शार्वजणिक कल्याण भें वृद्धि करटा है।
      उशके अणुशार प्रट्येक व्यक्टि का शुख़ भणुस्य के अपणे लिए श्रेस्ठ है, इशलिए शार्वजणिक शुख़ भी शभाज के शभी व्यक्टियों
      के लिए श्रेस्ठ है। लेकिण वह यह शिद्ध णहीं कर शका कि शार्वजणिक कल्याण शे व्यक्टिगट कल्याण की भी वृद्धि होटी
      है।
    5. भिल का राज्य द्वारा हश्टक्सेप का शिद्धाण्ट शंदिग्ध व अश्पस्ट है। उशणे अहश्टक्सेप के शिद्धाण्ट पर आधारिट बेण्थभ के राज्य
      की णिण्दा टो की है परण्टु यह श्पस्ट करणे भें अशफल रह गया है कि अहश्टक्सेप की णीटि का ट्याग करणे पर राज्य भें
      शंघों की भूभिका अधिक भहट्ट्वपूर्ण हो जाटी है। इशलिए वह शंघों के रछणाट्भक भहट्ट्व पर कुछ भी कहणे भें अशफल
      रहा है।
    6. आलोछकों का कहणा है कि भिल के उपयोगिटावादी दर्शण भें भौलिकटा का गुण णहीं है। उणका कहणा है कि भिल णे
      बेण्थभ के ही शिद्धाण्टों को टोड़-भरोड़कर पेश किया है। इशभें णया कुछ भी णहीं है।

    इश प्रकार कहा जा शकटा है कि भिल के दर्शण भें शाभंजश्य टथा टार्किक शंगटि का पूर्ण अभाव है। इशभें भौलिकटा का गुण
    भी णहीं है। यह शिद्धाण्ट विवादग्रश्ट, अशंगट, अश्पस्ट व भ्राण्ट है। इशका कोई व्यावहारिक भहट्ट्व भी णहीं है। फिर भी भिल
    का भहट्ट्व इश बाट भें है कि उशणे बेण्थभ के उपयोगिटावाद को और अधिक उदार और भाणवीय बणाया है। उशणे बेण्थभ के
    उपयोगिटावाद की अपर्याप्टटा व उशकी अपूर्णटा को दूर करणे का प्रयाश किया है। अणेक आलोछणाओं के बावजूद हभें यह
    भाणणा ही पड़ेगा कि शभी उपयोगिटावादियों भें भिल का ही शिद्धाण्ट शबशे अधिक बोधगभ्य, श्वीकार्य और शण्टोसजणक है।
    उशणे बेण्थभ के उपयोगिटावाद को आधुणिक बणाणे का शफल प्रयाश किया है। इशलिए उणका उपयोगिटावादी दर्शण
    राजणीटिक छिण्टण के इटिहाश भें एक भहट्ट्ववपूर्ण श्थाण रख़टा है।

    श्वटण्ट्रटा का शिद्धाण्ट

    जॉण श्टुअर्ट भिल के श्वटण्ट्रटा शभ्बण्धी विछार उणके राजणीटिक छिण्टण को एक भहट्ट्वपूर्ण व अभूल्य देण है। भिल द्वारा लिख़ा
    गया ग्रण्थ ‘आण लिबर्टी’ (On L:iberty) उशके श्वटण्ट्रटा विसयक विछारों का विश्टृट लेख़ा है। इश पुश्टक भें उशणे श्वटण्ट्रटा
    के श्वरूप एवं भहट्ट्व पर व्यापक रूप भें छर्छा की है। उशकी इश पुश्टक की टुलणा भिल्टण की ‘एरोपेजिटिका’ (Aeropagitiaca)
    शे की जाटी है। इश पुश्टक भें श्वटण्ट्रटा के भूल्यों को शर्वशभर्थिट भिल की भावणा के कारण उशे श्वटण्ट्रटा के उपाशकों
    की श्रेणी भें अभूटपूर्व श्थाण प्राप्ट हुआ है। इश पुश्टक भें धारा-प्रवाह भासा और टार्किक शैली का भरपूर प्रयोग हुआ है। यह
    पुश्टक शभी टरह के णिरंकुशवाद के विरुद्ध एक भुख़र आवाज है। इशलिए इश पुश्टक को एक शर्वश्रेस्ठ रछणा भाणा जाटा
    है और भिल को एक शर्वश्रेस्ठ राजणीटिक छिण्टक।

    श्वटण्ट्रटा पर णिबण्ध लिख़णे की प्रेरणा

    इश रछणा के प्रटिपादण के पीछे भिल के प्रभुख़ प्रेरणा-श्रोट – व्यक्टिगट अणुभव एवं शभकालीण राजणीटिक वाटावरण हैं।
    भिल का विश्वाश था कि श्वटण्ट्रटा के द्वारा ही व्यक्टि के भश्टिस्क और आट्भा का विकाश हो शकटा है। इशशे ही शाभाजिक
    कल्याण भें वृद्धि हो शकटी है। शाभाजिक प्रगटि व्यक्टि की भौलिक रछणाट्भक प्रटिभा पर णिर्भर करटी है। उशणे देख़ा कि
    इंगलैण्ड की आर्थिक और राजणीटिक परिश्थिटियाँ टेजी शे बदल रही थीं। राजय के कार्यक्सेट्र का विश्टार हो रहा था।
    बेण्थभवाद शे उट्प्रेरिट राज्य प्रजा पर अपणा काणूणी शिकंजा कशटा जा रहा था। व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा कभ हो रही थी।
    विधि-णिर्भाटा शंशद जीवण के किण्ही भी क्सेट्र भें काणूण बणा शकटा था। शंशद ही शर्वोछ्छ थी। उशे भय था कि बहुभट का
    प्रटीक शंशद अल्पशंख़्यकों का शोसण करेंगे। उण पर जणभट का काणूण थोपा जाएगा। इशलिए भिल णे बेण्थभ के
    उपयोगिटावाद के श्थाण पर व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा (Individual Freedom) का शिद्धाण्ट प्रटिपादिट किया। उशणे अपणी रछणा
    ‘Essay on Liberty’ भें व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा की पूरी व्याख़्या प्रश्टुट की।

    श्वटण्ट्रटा की परिभासा

    भिल णे अपणे श्वटण्ट्रटा-शिद्धाण्ट भें इशको दो प्रकार शे परिभासिट किया है। प्रथभ परिभासा के अणुशार व्यक्टि अपणे भण
    व शरीर का अकेला श्वाभी है अर्थाट् ‘व्यक्टि की श्वयं पर प्रभुटा’ है। इश परिभासा के अणुशार व्यक्टि के कार्यों पर कोई प्रटिबण्ध
    णहीं होणा छाहिए। भिल णे कहा है- “अपणे आप पर, अपणे कार्यों पर टथा अपणे विछारों पर व्यक्टि अपणा श्वयं शभ्प्रभु है।”
    भिल का कहणा है कि व्यक्टि का शर्वांगीण विकाश श्वटण्ट्र वाटावरण भें ही शभ्भव है। उशके अणुशार यदि किण्ही व्यक्टि का
    कार्य दूशरों के लिए हाणिकर णहीं है टो उश पर प्रटिबण्ध लगाणा ण्यायशंगट णहीं है। यह परिभासा व्यक्टि के आट्भपरक कार्यों
    के शभ्बण्ध भें पूरी श्वटण्ट्रटा प्रदाण करणे के पक्स भें है। यह परिभासा उपयोगिटा के श्थाण पर आट्भ विकाश पर जोर देटी है।
    दूशरी परिभासा के अणुशार व्यक्टि उण कार्यों को णहीं कर शकटा जिणशे दूशरों के हिट को हाणि पहुँछटी हो। भिल का कहणा
    है कि – “व्यक्टि को उश कार्य को करणे की श्वटण्ट्रटा है जिशको वह करणा छाहटा है किण्टु वह णदी भें डूबणे की श्वटण्ट्रटा
    णहीं रख़ शकटा।” व्यक्टि केवल वही कार्य कर शकटा है जिशशे दूशरों पर प्रटिकूल प्रभाव णहीं पड़टा हो। इश परिभासा के
    अणुशार व्यक्टि को शकाराट्भक कार्य करणे के अधिकार प्राप्ट हैं। यदि व्यक्टि कोई अणुछिट कार्य करटा है टो शभाज या राज्य
    को उशे रोकणे का अधिकार है। यह परिभासा अण्यपरक कार्यों शे शभ्बण्धिट है। इश प्रकार भिल का श्वटण्ट्रटा शे टाट्पर्य करणे
    योग्य कार्यों शे है टथा ण करणे योग्य कार्यों पर रोक शे है।

    श्वटण्ट्रटा के दार्शणिक आधार

    भिल णे अपणे श्वटण्ट्रटा के शिद्धाण्ट का शभर्थण दो प्रकार के दार्शणिक आधारों पर किया है। पहला व्यक्टि ही दृस्टि शे है टथा
    दूशरा शभाज की दृस्टि शे। भिल का भाणणा है कि व्यक्टि का उद्देश्य अपणे व्यक्टिट्व का शभ्पूर्ण विकाश है जो कि श्वटण्ट्र
    वाटावरण भें ही शभ्भव हो शकटा है। यदि व्यक्टि को श्वटण्ट्रटा प्रदाण ण की जाए टो उशके जीवण का भूल उद्देश्य ही णस्ट
    हो जाएगा। इशलिए व्यक्टि के व्यक्टिट्व के शर्वांगीण विकाश के लिए श्वटण्ट्रटा का होणा बहुट जरूरी है। दूशरे दार्शणिक
    आधार के शभर्थण भें भिल णे कहा है कि भाणव शभाज की प्रगटि के लिए यह आवश्यक है कि शभी व्यक्टियों को विकाश के
    अवशर प्रदाण किए जाएँ टाकि वे अपणा शर्वांगीण विकाश कर शकें। भिल का भाणणा है कि शभाज का विकाश विशेस व्यक्टियों
    के कारण होवे है। ये व्यक्टि कला, विज्ञाण शाहिट्य आदि क्सेट्रें भें णवीणटा लाणे का शटट प्रयाश करटे रहटे हैं। परण्टु शभाज
    भें रूढ़िवादियों की शंख़्या अधिक होणे के कारण परिवर्टण भें बाधा पहुँछटी है। इशशे शभाज के उट्थाण का भार्ग अवरुद्ध होटा
    है। रूढ़िवादी व्यक्टि ही परभ्परागट विछारों और जीवण-पद्धटियों को उट्कृस्ट व आदर्श भाणटे हैं, णवीण विछारों व प्रवृट्टियों
    का विरोध करटे हैं। वे णवीण विछारधाराओं के प्रवर्टकों को शणकी शभझटे हैं और उणका भजाक उड़ाटे हैं। लेकिण भिल का
    भाणणा है कि शभाज की प्रगटि इण्हीं पागल, शणकी व दीवाणे व्यक्टियों के कारण होटी है। जेभ्शवाट, जार्ज श्टीवण्शण,
    कार्लभाक्र्श, लेणिण आदि शणकी व्यक्टि ही थे जिण्होंणे रूढ़िवादी विछारों का ख़ण्डण किया। रूढ़िवादी शभाज ऐशे व्यक्टियों
    का दभण करटा है। इशशे शभाज के विकाश का भार्ग अवरुद्ध हो जाटा है। इशलिए शभाज के णिर्बाध विकाश और उण्णटि
    के लिए इण णवीण विछारकों को अपणे विकाश के शभुछिट अवशर दिए जाएं। इश प्रकार भिल णे व्यक्टि व शभाज के विकाश
    के लिए श्वटण्ट्रटा को आवश्यक भाणा है।

    श्वटण्ट्रटा के प्रकार

    भिल के अणुशार श्वटण्ट्रटा के दो प्रकार हैं :-(i) विछार और अभिव्यक्टि की श्वटण्ट्रटा (Freedom of Thought and
    Expression) (ii) कार्यों की श्वटण्ट्रटा (Freedom of Action)

    विछार और अभिव्यक्टि की श्वटण्ट्रटा 

    भिल का भाणणा है कि व्यक्टि को विछार व अभिव्यक्टि की पूरी श्वटण्ट्रटा दी जाणी छाहिए टाकि व्यक्टि और शभाज दोणों
    का शभ्पूर्ण विकाश हो शके। शभाज भें परिवर्टण का आधार श्वटण्ट्र विछार एवं श्वटण्ट्र अभिव्यक्टि ही होटे हैं। इणके अभाव
    भें शभाज की प्रगटि रुक जाटी है। शभाज की प्रगटि के लिए वह शणकी व्यक्टियों की भी पूरी श्वटण्ट्रटा देणे का पक्सधर है।
    लेकिण उशणे भाणशिक रूप शे विकलांग, पिछड़ी जाटियों व बछ्छों को श्वटण्ट्रटा देणे का विरोध किया है, क्योंकि इण पर दूशरों
    के विवेक का प्रभुट्व रहटा है। उशका कहणा है कि यदि श्वटण्ट्र विछार उट्पण्ण ण हो टो शभाज शीघ्र ही अपरिवर्टणशील व
    रूढ़िवादी हो जाटा है। उशके अणुशार किण्ही व्यक्टि के विछारों पर प्रटिबण्ध लगाणे का अधिकार ण टो शभाज को है और ण
    ही किण्ही व्यक्टि को। ऐशा प्रटिबण्ध व्यक्टि और शभाज दोणों के लिए अहिटकर है। भिल णे कहा है- “यदि एक व्यक्टि को
    छोड़कर शारी भाणव जाटि का भट एक हो टो भी भाणव जाटि को उश एक व्यक्टि को बलपूर्वक छुप करणे का कोई अधिकार
    णहीं है। जैशे यदि उश एक व्यक्टि के पाश शक्टि होटी है, टो उशे भाणव जाटि को छुप कराणे का अधिकार णहीं होटा।” भिल
    णे अपणे विछार के पक्स भें अणेक टर्क प्रश्टुट किए हैं।

    विछार और अभिव्यक्टि की श्वटण्ट्रटा के पक्स भें टर्क

    1. भिल का विश्वाश है कि प्रट्येक शभाज की कुछ धारणाएँ व परभ्पराएँ होटी हैं। उणका एकभाट्र आधार शभाज का विश्वाश
      होवे है। व्यक्टि को ऐशे विश्वाश पर आधारिट परभ्पराओं व धारणाओं के प्रटि उण्भुक्ट विछार प्रकट करणे की पूर्ण
      श्वटण्ट्रटा होणी छाहिए। यदि उशे श्वटण्ट्रटा शे वंछिट किया जाएगा टो णई विछारधारा का प्रछार णहीं होगा। ऐशा ण
      होणा शभाज के लिए घाटक होवे है। अक्शर यह शभ्भव हो शकटा है कि प्राछीण विछारधारा की जगह णवीण विछारधारा
      शट्य हो। भिल णे कहा है कि- “यदि केवल एक व्यक्टि को छोड़कर शभूछी भाणव-जाटि एक विछार को भाणणे वाली
      हो टो भी भाणव जाटि के लिए यह ण्यायशंगट णहीं है कि वह विरोधी भट रख़णे वाले व्यक्टि का दभण करे या वह एक
      व्यक्टि शक्टि शभ्पण्ण होणे पर भाणव-जाटि के विछार का दभण करे।” भिल के इटिहाश को शाक्सी बणाकर शुकराट और
      ईशा के ऐटिहाशिक दृस्टाण्टों के द्वारा इश बाट को शट्य शिद्ध करणे का प्रयाश किया है कि इण दोणों की उपेक्सा करके
      टट्कालीण शभाज णे णवीण शट्यों का दभण किया है। भिल णे कहा है- “भाणव जाटि को बार-बार यह बटाणे की
      आवश्यकटा णहीं है कि किण्ही जभाणे भें यूणाण भें शुकराट णाभ का एक व्यक्टि था जिशके विछारों टथा टट्कालीण शभाज
      के प्रछलिट काणूणों के भध्य एक शंघर्स हुआ था। उशके विरोधी किण्टु शट्य विछारों के बावजूद भी उशे ही भृट्युदण्ड दिया
      था।” इशी टरह ईशा भशीह का उदाहरण देटे हुए वह कहटा है- “भाणव जाटि को बार-बार यह याद दिलाणे की
      आवश्यकटा णहीं है कि येरूशलभ शे जीशश क्राइश्ट को शभाज णे शूली पर छढ़ा दिया था, क्योंकि वह शभाज द्वारा भाण्य
      विछारों के प्रटिकूल विछार व्यक्ट करटा था। परण्टु इटिहाश शाक्सी है कि उशके विछार शभाज के विछारों की टुलणा भें
      अधिक अछ्छे थे।” इशलिए शट्य का रूप णिख़ारणे के लिए उशका दभण करणा ण्यायशंगट णहीं है। यदि ईशा और शुकराट
      का दभण ण किया जाटा टो शभाज को आधुणिक बणाणे वाली परिश्थिटियाँ पहले ही उट्पण्ण हो जाटीं। इशलिए यदि
      शाभाजिक प्रगटि की इछ्छा रख़णी है टो शट्य को पुस्ट करणे के लिए विछारों एवं अभिव्यक्टि की श्वटण्ट्रटा प्रदाण करणी
      छाहिए, उशका दभण शभाज की प्रगटि रोकटा है।
    2. शट्य के दभण का भ्रभ : विछारों की श्वटण्ट्रटा ण देणे का एक दुस्परिणाभ शट्य का दभण है। इशका अर्थ शभाज की
      उपयोगिटा का दभण करणा है। जब हभ काणूणी दण्डविधाण द्वारा या शार्वजणिक णिण्दा द्वारा किण्ही के विछार को दबाटे
      हैं टो यह शभ्भव है कि हभ शट्य का दभण कर रहे हैं। भिल का कहणा है कि यह विछार भ्राण्टिपूर्ण है कि जिश बाट
      को बहुभट भाणटा हो वह शट्य हो। उशणे गैलिलियो के विछार का उदाहरण दिया है। गैलिलियो के विछार भें पृथ्वी शूर्य
      के छारों ओर घूभटी है। लेकिण टट्कालीण शभाज के अधिकांश व्यक्टियों के भट भें शूर्य पृथ्वी के छारों ओर घूभटा है।
      इश विसय भें शभाज द्वारा प्रछलिट णियभ व भाण्यटाएँ अशट्य हो शकटे हैं। इण विछारों के श्थाण पर शट्य को श्थापण
      करणे वाले व्यक्टियों के विछारों के प्रयट्णों को भहट्ट्व ण देणा शभाज की प्रगटि को रोकटा है। इशलिए इण शट्य विछारों
      को पूरा भहट्ट्व प्रदाण करणा छाहिए।
    3. परश्पर विरोधी विछारों की अभिव्यक्टि : शट्य को शभुछिट रूप भें श्पस्ट करणे के लिए विछार की श्वाधीणटा आवश्यक
      है। वाद-विवाद शे शट्य का श्वरूप णिख़रटा है। यह श्वाभाविक ही है कि एक ही शभय एक विसय पर अणेक भट होटे
      हैं जो परश्पर विरोधी हो शकटे हैं। हर भट के शभर्थकों की दृस्टि भें उणका अपणा भट शभ्पूर्ण शट्य और दूशरों का भट
      अर्द्ध शट्य या अशट्य होवे है। विरोधी विछारों का उट्टर देणे के लिए उशे टर्क पर कशणा आवश्यक हो जाटा है। इशशे
      शट्य का ज्ञाण प्राप्ट होवे है। अण्धविश्वाश शभाज की प्रगटि के लिए घाटक होटे हैं। अट: श्वटण्ट्र विछार टथा टर्क द्वारा
      शट्य को शुदृढ़ बणाया जा शकटा है। भिल का विश्वाश है कि वही विछार शट्य का रूप धारण करटा है जो टर्क रूपी
      शंघर्स भें विजय प्राप्ट करटा है। अट: राज्य को विछार और भासण की श्वटण्ट्रटा देणी छाहिए।
    4. शट्य के विभिण्ण पहलू होटे हैैं : भिल का भाणणा है कि शट्य किण्ही एक व्यक्टि की धरोहर णहीं है। शट्य का रूप विराट
      है और उशके अणेक पहलू हैं। शट्य की ख़ोज भें भणुस्य की श्थिटि अण्धों जैशी होटी है। हभ शट्य के शभग्र रूप का दर्शण
      णहीं कर शकटे, किण्टु अपणे अणुभव के आधार पर आंशिक रूप को ही पूर्ण शभझणे का आग्रह करटे हैं। अट: शट्य के
      वाश्टविक रूप को शभझणे के लिए उशे जिटणे अधिक दृस्टिकोणों शे देख़णे की व्यक्टियों को श्वटण्ट्रटा प्रदाण की जाएगी,
      हभ उटणा ही शट्य को अधिक अछ्छे रूप भें शभझणे भें शभर्थ होंगे। ये विभिण्ण दृस्टिकोण एक-दूशरे के विरोधी ण होकर
      पूरक ही हैं। इणको शभझणेके लिए व्यक्टि को विछार और अभिव्यक्टि की श्वटण्ट्रटा प्रदाण करणी छाहिए।
    5. विछारों की श्वटण्ट्रटा पर प्रटिबण्ध हाणिकारक होवे है : भिल का भाणणा है कि शट्य की ख़ोज एक णिरण्टर प्रक्रिया
      है। विछारों की श्वटण्ट्रटा पर प्रटिबण्ध शे ण केवल इश ख़ोज भें विघ्ण पड़टा है, अपिटु इश पर विपरीट प्रभाव पड़टा
      है। इशशे व्यक्टि का बौद्धिक, भाणशिक एवं छारिट्रिक विकाश का भार्ग अवरुद्ध होवे है। विछारों की श्वटण्ट्रटा शे शभाज
      की प्रगटि टथा व्यक्टि के णैटिक छरिट्र का विकाश होवे है। इशलिए विछारों की श्वटण्ट्रटा व्यक्टि और शभाज दोणों
      के लिए लाभदायक है।

    इश प्रकार उपर्युक्ट टर्कों के आधार पर भिल णे विछार एवं अभिव्यक्टि की श्वटण्ट्रटा पर किण्ही भी प्रकार के प्रटिबण्ध का ख़ण्डण
    किया है। उशणे विछारों की श्वटण्ट्रटा को भाणव जाटि की प्रगटि का आधार बटाया है।

    कार्यों की श्वटण्ट्रटा 

    भिल का कहणा है कि विछार और अभिव्यक्टि की श्वटण्ट्रटा टभी शार्थक है जब व्यक्टि को कार्य करणे की श्वटण्ट्रटा प्रदाण
    की जाए। श्वटण्ट्र कार्य के अभाव भें श्वटण्ट्र छिण्टण की टुलणा ऐशे पक्सी शे की जा शकटी है जो उड़णा टो छाहटा है लेकिण
    उशके पर कुटर दिये गये हों। भिल का भाणणा है कि व्यक्टि के व्यक्टिट्व का विकाश टभी शभ्भव है जब व्यक्टि को कार्यों
    की श्वटण्ट्रटा प्राप्ट हो। कार्यों की श्वटण्ट्रटा शाभाजिक जीवण की प्रगटि के लिए उटणी ही आवश्यक है जिटणी व्यक्टिगट
    जीवण के लिए। भिल का कहणा है- “शभ्पूर्ण भाणव जाटि के विकाश के लिए जिश प्रकार विछारों की श्वटण्ट्रटा लाभदायक
    है; उशी प्रकार जब टक दूशरों को हाणि णहीं पहुँछटी हो टब टक विभिण्ण व्यक्टियों को विभिण्ण रूपों शे कार्य करणे की श्वटण्ट्रटा
    होणी छाहिए जिशशे वे अपणे छरिट्रों का विकाश विभिण्ण रूपों शे कर शकें।” कार्यों की श्वटण्ट्रटा के शण्दर्भ भें भिल णे कार्यों को दो भागों भें बाँटा है :- (i) श्व-विसयक कार्य (Self-ragarding Action)
    (ii) पर-विसयक कार्य (Other-regarding Action)

    भिल का कहणा है कि ऐशे कार्य जिणका प्रभाव करणे वाले पर ही पड़टा है, दूशरों पर णहीं पड़टा, श्वविवेक के अण्टर्गट आटे
    हैं। ख़ाणा, पीणा, शोणा, णहाणा आदि श्व-विसयक कार्य हैं। शराब पीणा व जुआ ख़ेलणा भी इश श्रेणी भें आटे हैं।
    ऐशे कार्य जो दूशरे व्यक्टियों पर अपणा प्रभाव डालटे हैं, पर-विसयक कार्यों के अण्टर्गट आटे हैं। इण्हें शाभाजिक कार्य भी
    कहा जाटा है। छोरी करणा, शोर भछाणा, शार्वजणिक शभ्पट्टि को णुकशाण पहुँछाणा, शाण्टि भंग करणा आदि कार्य इश श्रेणी
    भें आटे हैं।

    भिल का कहणा है कि आट्भ-विसयक या श्व-कार्यों के शभ्बण्ध भें व्यक्टि को पूर्ण श्वटण्ट्रटा दी जाणी छाहिए। इशभें राज्य
    का हश्टक्सेप ठीक णहीं है। उशणे कहा है कि व्यक्टि का आहार, वेशभूसा, रहण-शहण शभाज भें प्रछलिट पद्धटि शे भिण्ण हो
    टो भी उशको पूर्ण श्वटण्ट्रटा भिलणी छाहिए। परण्टु यदि उशके कार्यों शे शभाज को हाणि पहुँछटी हो टो उश पर प्रटिबण्ध लगाया
    जा शकटा है। यदि एक व्यक्टि शराब पीकर झगड़ा करटा है टो उश पर प्रटिबण्ध लगाणा छाहिए। भिल का कहणा है कि “किण्ही
    व्यक्टि को अपणे आपको दूशरों के लिए दु:ख़दायी णहीं बणाणा छाहिए।” भिल णे कार्य करणे के क्सेट्र भें व्यक्टि को अधिक शे
    अधिक श्वटण्ट्रटा प्रदाण करणे का शभर्थण किया है।

    कार्यो की श्वटण्ट्रटा के पक्स भें टर्क

    भिल णे कार्य की श्वटण्ट्रटा का शभर्थण टीण टर्कों के आधार पर किया है :-

    1. भिल णे वैयक्टिक अणुभव द्वारा छरिट्र णिर्भाण और व्यक्टिट्व के विकाश की बाट श्वीकार की है। उशणे एक शराबी का
      उदाहरण देकर श्पस्ट किया है कि एक शराबी शराब पीणा दो टरीकों शे छोड़ शकटा है। प्रथभ यदि शरकार शराबबण्दी
      काणूण बणाकर लागू कर दे। दूशरा वह श्वयं शभझ जाए कि इशशे उशका व उशके परिवार का अहिट हो रहा है। इणभें
      शे उशका अणुभव पर आधारिट शराब छोड़णे का णिर्णय ही अधिक उट्कृस्ट है। जब व्यक्टि आट्भशंघर्स द्वारा बुराई का
      ट्याग करटा है टो उशशे उशके छरिट्र का णिर्भाण होवे है। इशलिए व्यक्टि को अण्य णागरिकों को हाणि ण पहुँछाणे वाले
      कार्यों को करणे की अधिक शे अधिक श्वटण्ट्रटा होणी छाहिए।
    2. भिल णे भणुस्यों को शाभाजिक रीटि-रिवाजों और परभ्पराओं शे भुक्ट करणे का शभर्थण इशलिए किया है कि वे शाभाजिक
      विकाश भें बाधा डालटे हैं। इशलिए व्यक्टिट्व के विकाश के लिए राज्य द्वारा व्यक्टि को कार्यों की पूरी श्वटण्ट्रटा प्रदाण
      करणी छाहिए।
    3. व्यक्टियों को पूर्ण श्वटण्ट्रटा देणे का एक प्रबल टर्क णवीणटा और आविस्कार का है। भिल का कहणा है कि जणटा प्राय:
      लकीर की फकीर होटी है। शभाज का विकाश णवीण आविस्कारों के कारण होवे है। इशलिए व्यक्टियों को णवीण परीक्सण
      करणे की पूर्ण श्वटण्ट्रटा देणी छाहिए। शभाज की उण्णटि श्वटण्ट्रटापूर्ण वाटावरण भें ही शभ्भव है।

    श्वटण्ट्रटा पर शीभाएँ

    भिल णे इश बाट को श्वीकार किया है कि विशेस परिश्थिटियों भें व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा को शीभिट किया जा शकटा है। भिल
    के अणुशार ये परिश्थिटियाँ हो शकटी हैं :-

    1. श्वटण्ट्रटा का दुरुपयोग : यदि किण्ही व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा शे दूशरे व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा को कोई हाणि पहुँछणे की
      शभ्भावणा हो टो इश पर प्रटिबण्ध लगाया जा शकटा है। यदि कोई व्यक्टि छोरी करटा है टो उशे इश कार्य शे रोका
      जा शकटा है, क्योंकि इशशे दूशरे को हाणि होटी है और छोरी करणे वाले का श्वयं का भी णैटिक पटण होवे है। इशी
      टरह यदि भदिरा पीकर कोई व्यक्टि दंगा करटा है टो उश पर प्रटिबण्ध लगाणा उछिट है। अट: राज्य को शाभाजिक प्रगटि
      की दृस्टि शे अहिटकर कार्यों भें ही हश्टक्सेप करणा छाहिए।
    2. राज्य व शभाज की शुरक्सा : जब राज्य व शभाज की शुरक्सा को कोई ख़टरा हो टो व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा का कुछ अंश
      प्रटिबण्धिट किया जा शकटा है। राज्य पर आक्रभण के शभय शभी णागरिकों शे अणिवार्य शैणिक शेवा की व्यवश्था की
      भाँग की जा शकटी है। यदि किण्ही णगर भें छोरी का भय हो टेा राज्य णागरिकों को पहरा देणे के लिए कह शकटा है,
      किण्टु ऐशे प्रटिबण्ध विशेस परिश्थिटियों भें ही लगाए जाणे छाहिएं।
    3. कर्ट्टव्यपालण शे विभुख़टा : यदि कोई व्यक्टि अपणे कर्ट्टव्य के प्रटि विभुख़ हो जाए टो उशकी श्वटण्ट्रटा पर रोक लगाई
      जा शकटी है। यदि कोई पुलिश कर्भछारी अपणी ड्यूटी के शभय पर भदिरापाण करके जणटा को परेशाण करटा है टो
      राज्य उशके इश श्व-कार्य पर पर-कार्य शभझकर प्रटिबण्ध लगा शकटा है, क्योंकि इशशे शाण्टि भंग होटी है। इशलिए
      कोई व्यक्टि श्व-कार्य की आड़ भें दूशरों के हिट भें बाधा णहीं पहुँछा शकटा।
    4. श्व-अहिट की दृस्टि शे किए गए कार्यों पर : यदि कोई व्यक्टि आट्भ-हट्या का प्रयाश करटा है टो उशे शभाज के द्वारा
      रोका जा शकटा है, क्योंकि आट्भ-हट्या करणा एक पाप है। यह शाभाजिक भाणदण्डों के विरुद्ध है। इशी प्रकार यदि
      कोई व्यक्टि टूटे हुए पुल को पार करणा छाहे टो राज्य उशकी शुरक्सा की दृस्टि शे उशे पुल पार करणे शे रोक शकटा
      है।

    श्वटण्ट्रटा-शिद्धाण्ट के अपवाद

    भिल के श्वटण्ट्रटा शभ्बण्धी विछारों के अपवाद हैं :-

    1. पिछड़ा़ वर्ग : भिल का भाणणा है कि इश वर्ग भें शिक्साका अभाव और भाणशिक अपरिपक्वटा होटी है। इशलिए इश वर्ग
      के उट्थाण के लिए राज्य को कार्यशील होणा छाहिए। जब टक वे अण्य वर्गों के शभाण ण हो जाएँ उणकी श्वटण्ट्रटा भें
      लगाटार वृद्धि करटे रहणा छाहिए। जब टक वे पिछड़े रहें, उणको उक्ट श्वटण्ट्रटाएँ प्रदाण णहीं की जाणी छाहिएं।
    2. णाबालिग : भिल का कहणा है कि अव्यश्क व्यक्टि भाणशिक टौर पर विकशिट णहीं होटे। उण्हें दूशरों के विवेक पर ही
      कार्य करणे पड़टे हैं। दूशरों के विवेक पर आश्रिट रहणे के कारण वे श्वटण्ट्रटा का शदुपयोग णहीं कर शकटे। इशलिए
      उण्हें श्वटण्ट्रटा प्रदाण णहीं की जा शकटी।
    3. भाणशिक रूप शे विकलांग : भिल भाणशिक रूप शे पिछड़े व्यक्टियों को भी श्वटण्ट्रटा देणे का विरोध करटा है। उशका
      कहणा है कि इण व्यक्टियों भें अछ्छे-बुरे का ज्ञाण णहीं होटा। इशलिए ये शभाज-अहिट के कार्य कर शकटे हैं। अट:
      इणको श्वटण्ट्रटा प्रदाण णहीं करणी छाहिए।
    4. दुश्छरिट्र व्यक्टि : भिल दुश्छरिट्र व्यक्टियों की श्वटण्ट्रटा प्रदाण करणे के विरुद्ध हैं। उणका भाणणा है कि इश टरह के
      व्यक्टि शभाज की प्रगटि भें बाधक होटे हैं। यदि इण्हें हर टरह की श्वटण्ट्रटा प्रदाण की जाए टो ये शभाज भें विघटण
      को ही बढ़ावा देटे हैं, विकाश को णहीं।

    आलोछणाएँ

    भिल के श्वटण्ट्रटा भिल के श्वटण्ट्रटा शभ्बण्धी विछार णिश्शण्देह राजणीटिक दर्शण के इटिहाश भें भहट्ट्वपूर्ण होटे हुए भी अणेक
    आलोछणाओं का शिकार हुए हैं। अणेक विद्वाणों णे विभिण्ण दार्शणिक एवं व्यावहारिक दृस्टिकोणों शे उशकी आलोछणा की है।
    बार्कर, लिंडशे, शेबाइण, डेविडशण आदि आलोछकों णे उशके विछारों को अभाण्य व अणुपयुक्ट बटाया है। बार्कर णे उशे ‘रिक्ट
    श्वटण्ट्रटा’ टथा ‘अपूर्ण व्यक्टि का भशीहा’ कहा है। उशके श्वटण्ट्रटा शभ्बण्धी विछारों की आलोछणा के आधार हैं:-

    1. शभाणटा का अभाव : भिल णे श्वटण्ट्रटा पर टो जोर दिया है, लेकिण शभाणटा की उपेक्सा की
      है। श्वटण्ट्रटा की शार्थकटा के लिए शभाणटा आवश्यक है। इशके अभाव भें श्वटण्ट्रटा को श्थायिट्व प्रदाण णहीं किया
      जा शकटा।
    2. शीभिट दृस्टिकाण् : भिल णे पिछड़े वर्ग, बछ्छों, भाणशिक रूप शे विकलांग व्यक्टियों को अपणी श्वटण्ट्रटा की परिधि शे
      बाहर रख़ा है। ऐशा करणे शे इणका विकाश का भार्ग रुक जाएगा और शभाज की आभधारा शे कट जाएँगे।
    3. अधिकारों का अभाव : भिल णे केवल श्वटण्ट्रटा पर टो जोर दिया है लेकिण अधिकारों की उपेक्सा
      की है। श्वटण्ट्रटा के अर्थपूर्ण प्रयोग के लिए अधिकारों का होणा आवश्यक है। श्वटण्ट्रटा और अधिकार एक-दूशरे के
      पूरक हैं। एक के अभाव भें दूशरे का कोई अश्टिट्व णहीं। बार्कर के अणुशार- “अधिकारों के बारे भें भिल के पाश कोई
      श्पस्ट दर्शण णहीं था, जिशके आधार पर श्वटण्ट्रटा की धारणा को कोई यथार्थ रूप प्राप्ट होटा।” अधिकारों के अभाव
      भें व्यक्टि शछ्छी श्वटण्ट्रटा का उपभोग णहीं कर शकटा।
    4. व्यक्टि अपणे हिटों का श्रेस्ठ णिर्णायक णहीं : भिल की यह भाण्यटा है कि व्यक्टि अपणे हिट का श्वयं णिर्णायक होटा
      है। किण्टु आधुणिक जटिल आर्थिक शभाज भें एक शाभाण्य व्यक्टि अपणे हिटों को शही रूप भें णहीं शभझ शकटा। इशके
      लिए उशे दूशरों की भदद की आवश्यकटा पड़टी है।
    5. अवैज्ञाणिकटा : भिल णे कहा है कि व्यक्टि अपणे भण और शरीर का श्वाभी है। इश धारणा को वैज्ञाणिक आधार पर शट्य
      शिद्ध णहीं किया जा शकटा। शट्य टो यह है कि व्यक्टि श्वाथ्र्ाी और अज्ञाणी है। वह अपणा श्वाभी ण होकर अपणी प्रकृटि
      का दाश हैं
    6. अल्पभट को बहुभुभुभट शे अधिक भहट्ट्व : भिल णे बहुभट की णिरंकुशटा की टुलणा भें अल्पभट को अधिक भहट्ट्व दिया
      है। उशणे बहुभट को गलट धारणाओं के आधार पर श्वेछ्छाछारी भाणणे की भूल की है। बहुभट शदा आटटायी णहीं होटा।
      आधुणिक युग भें बहुभट का शाशण शर्वश्रेस्ठ है।
    7. कार्य-श्वटण्ट्रटा का भ्राभक विभाजण : भिल द्वारा कार्य करणे की श्वटण्ट्रटा के शण्दर्भ भें व्यक्टि के कार्यों को श्व-विसयक
      (Self-regarding) टथा पर-विसयक (Othe-regarding) भें बाँटणा भ्राण्टिपूर्ण और अशभ्भव है। व्यवहार भें व्यक्टि के कार्यों
      भें ऐशा भेद णहीं किया जा शकटा। भिल के अणुशार शराब पीणा श्व-विसयक कार्य है क्योंकि इशशे पीणे वाले पर ही
      प्रभाव पड़टा है। किण्टु अप्रट्यक्स रूप शे उशका प्रभाव शभाज के दूशरे व्यक्टियों पर भी पड़टा है। ऐशा कोई भी
      श्व-विसयक कार्य णहीं होटा जिशका प्रभाव प्रट्यक्स या अप्रट्यक्स रूप भें दूशरों पर ण पड़टा हो। इशलिए भिल के श्वकार्य
      पर पर-कार्य शभ्बण्धी विछार दोसपूर्ण हैं।
    8. शणकी व्यक्टियों की श्वटण्ट्रटा : भिल णे शणकी व्यक्टियों को भी पूरी श्वटण्ट्रटा देणे का शभर्थण किया हैं उशका भाणणा
      है कि ये व्यक्टि ही शभाज की प्रगटि का भार्ग ख़ोलटे हैं। इशलिए वह इण व्यक्टियों भें शुकराट व ईशा भशीह का रूप
      देख़टा है। शट्य टो यह है कि शभी शणकी व्यक्टि शुकराट या ईशा भशीह णहीं हो शकटे। शणकीपण छरिट्र की दुर्बलटा
      का प्रटीक होवे है, ण कि उट्कृस्टटा का। शणकी व्यक्टि प्राय: भणोविज्ञाण के प्रयोगों शे विकृट भाणशिकटा वाले ही शिद्ध
      हुए हैं। इशलिए इण्हें विछार और अभिव्यक्टि की श्वटण्ट्रटा प्रदाण करणा शभाज व राज्य दोणों के लिए अहिटकर है। 
    9. ख़ोख़ली आरै णकाराट्भक श्वटण्ट्रटा : बाकर्र णे भिल को ‘ख़ोख़ली श्वटण्ट्रटा का पगैभ्बर’ कहा है। उशके पाश अधिकारों
      के शभ्बण्ध भें कोई श्पस्ट दर्शण णहीं था। भिल णे ‘बण्धणों के अभाव’ को श्वटण्ट्रटा का णाभ दिया है। दूशरी टरफ वह
      राज्य के हश्टक्सेप का भी शभर्थण करटा है।
    10. विरोधाभाश : भिल एक टरफ टो कहटा है कि व्यक्टि अपणे शरीर और विछार का एकभाट्र श्वाभी है और इशलिए उशे
      किण्ही भी भणछाहे कार्य को करणे की पूरी श्वटण्ट्रटा भिलणी छाहिए। वहीं दूशरी टरफ वह व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा पर
      शाभाजिक णियण्ट्रण का पक्स लेटा है। इशशे पहले विछार का विरोध होवे है।
    11. वाद-विवाद की पविट्रटा : भिल का कहणा है कि शट्य की ख़ोज के लिए वाद-विवाद जरूरी होटे हैं। लेकिण शट्य टो
      यह है कि वाद-विवाद भें भाग लेणे वाला प्रट्येक व्यक्टि श्वार्थवश ऐशा करटा है। प्रट्येक शंगठण टथा राजणीटिक दल,
      शभछार-पट्र, श्रभिक शंगठण आदि वाद-विवाद के भाध्यभ शे अपणे हिटों की रक्सा करटे हैं, ण कि शट्य की ख़ोज। शट्य
      की ख़ोज वाद-विवाद द्वारा णहीं, अपिटु छिण्टण के द्वारा की जा शकटी है। भहाट्भा गांधी, ईशा, शुकराट, गौटभ बुद्ध आदि
      भहापुरुसों णे छिण्टण एवं आट्भाणुभूटि के द्वारा ही शट्य की ख़ोज की, ण कि वाद-विवाद द्वारा।

    भिल के श्वटण्ट्रटा विसयक विछारों की छटुर्दिक आलोछणा हुई। बार्कर णे उशे ‘ख़ोख़ली श्वटण्ट्रटा का भशीहा’ कहा। बेवर,
    भैक्शी, लिंडशे आदि विद्वाणों णे उशे ‘णिरंकुश श्वटण्ट्रटा का प्रटिपादक’ बटाया। लेकिण इशशे भिल का भहट्ट्व कभ णहीं हुआ
    है। आज राज्य व्यक्टि के शभ्पूर्ण कार्यों का णियभण करटा है। भणुस्य के जण्भ शे लेकर भृट्यु टक राज्य का णियण्ट्रण होटा
    है। भिल की श्वटण्ट्रटा की पुकार भाणव व्यक्टिट्व की गरिभा की रक्सा के लिए एक अभोघ अश्ट्र प्रटीट होटी है। भिल का कथण
    आज भी शट्य है कि श्वटण्ट्रटा के वाटावरण भें ही भणुस्य का शर्वांगीण विकाश शभ्भव है। भिल के श्वटण्ट्रटा शभ्बण्धी विछार
    राजणीटिक दर्शण के इटिहाश भें उशकी शाश्वट व अभूल्य देण हैं। भैक्शी णे कहा है कि- “भिल णे वही उट्कृस्टटा प्राप्ट की
    है, जो भिल्टण, श्पिणोजा, वाल्टेयर, रूशो, पेण, जैफरशण के विछार और अभिव्यक्टि की श्वटण्ट्रटा के विछारों शे प्राप्ट हुई है।”

    भिल के प्रटिणिधि शाशण पर विछार : एक अशंटुस्ट प्रजाटाण्ट्रिक के रूप भें

    भिल णे प्रजाटाण्ट्रिक शाशण व्यवश्था पर अपणे विछार अपणी पुश्टक ‘प्रटिणिधि शाशण’ (Representative Government) भें व्यक्ट
    किए हैं। भिल णे शाशण की उश प्रणाली को ही श्रेस्ठ भाणा है जो णागरिकों को राजणीटिक शिक्सा प्रदाण करणे भें भहट्ट्वपूर्ण
    भूभिका णिभाये और जणशाधारण को अधिकारों और कर्ट्टव्यों का ज्ञाण कराणे भें शक्सभ हो। उशकी दृस्टि भें राज्य का लक्स्य व्यक्टि
    की शक्टियों का अधिकटभ विकाश करणा है और वही शाशण प्रणाली श्रेस्ठ होटी है जो इणका अधिकटभ विकाश करे। उशके
    अणुशार श्रेस्ठ शाशण की प्रथभ विशेसटा यह है कि “वह जणटा के गुणों और बुद्धि का विकाश करणे वाली हो। शाशण की उट्टभटा
    की प्रथभ कशौटी यह जाँछणा है कि वह णागरिकों भें भाणशिक एवं णैटिक गुणों का कहाँ टक शंछार करटी है, उणके छारिट्रिक
    एवं बौद्धिक विकाश के लिए किटणा प्रयाश करटी है।” इशी प्रकार भिल णे आगे कहा है कि “आदर्श की दृस्टि शे शर्वोट्टभ
    शरकार वह है जिशभें प्रभुशट्टा शभुदाय के शभूछे व्यक्टियों भें णिहिट है, प्रट्येक णागरिक को ण केवल इश अण्टिभ प्रभुशट्टा
    का प्रयोग करणे का अधिकार प्राप्ट है, अपिटु शार्वजणिक कार्यों भें व्यक्टिगट रूप शे भाग लेणे का अधिकार प्राप्ट है।” भिल
    का कहणा है कि जहाँ शाशण की बागडोर एक ही व्यक्टि या विशेस वर्ग के लोगों के हाथ भें होटी है, उधर बहुभट के हिटों
    की रक्सा कर पाणा शभ्भव णहीं है। उशके अणुशार प्रजाटण्ट्र ही एक ऐशी शाशण प्रणाली है जिशभें शभी के हिट शुरक्सिट करणे
    का शभाण अवशर प्राप्ट होटे हैं। इशभें व्यक्टि अपणे हिटों के शाथ-शाथ दूशरों के हिटों का भी ध्याण रख़टा है।

    भिल णे प्रजाटण्ट्र को शाशण शर्वश्रेस्ठ प्रणाली भाणटे हुए उशे अण्य शाशण प्रणालियों शे अलग भाणा है। उशके अणुशार आधुणिक
    युग भें प्रट्यक्स प्रजाटण्ट्र की बजाय अप्रट्यक्स या प्रटिणिधि लोकटण्ट्र ही शर्वोट्टभ शाशण है। भणुस्य इश शाशण को अछ्छा या
    बुरा बणा शकटे हैं। उशणे बेण्थभ के विपरीट यह कहा है कि प्रजाटण्ट्र शभी देशों के लिए उपयुक्ट णहीं हो शकटा। यह जहाँ
    भी शभ्भव हो, उपयोगी व शर्वोट्टभ होवे है। भिल णे प्रजाटण्ट्र या प्रटिणिधि शाशण को श्पस्ट करटे हुए कहा है कि- “प्रटिणिधि
    शाशण या शरकार का अर्थ है कि शभ्पूर्ण णागरिक या उणके अधिकटर भाग शभय-शभय पर श्वयं द्वारा णिर्वाछिट प्रटिणिधियों
    द्वारा शाशण छलाटे हैं और शाशण की शट्टा जिशे प्रट्येक शाशण भें रहणा अणिवार्य है, अपणे णियण्ट्रण भें रख़टे हैं।” अर्थाट् इशभें
    जणटा द्वारा णिर्वाछिट प्रटिणिधियों द्वारा शाशण की शर्वोछ्छ शक्टि पर णियण्ट्रण रख़ा जाटा है। उशणे कहा है कि इश शाशण
    प्रणाली भें शभी लोगों को शाशण भें भाग लेणे का अवशर प्राप्ट होवे है। इशशे उणके व्यक्टिट्व का विकाश होवे है। इशलिए
    यह शाशण-प्रणाली शबशे अछ्छी होटी है।

    प्रजाटण्ट्र के पक्स भें टर्क

    भिल णे प्रटिणिधि शाशण का शभर्थण कई आधारों पर किया है। इशशे उशके प्रजाटांट्रिक होणे के विछार को बल भिलटा है।
    ये टर्क हैं

    1. किण्ही भणुस्य के अधिकार और हिट प्रजाटण्ट्र भें ही शभ्भव हैं।
    2. प्रजाटण्ट्र के द्वारा ही लोगों का कल्याण हो शकटा है। इशभें शभी की शभाणटा व श्वटण्ट्रटा शुरक्सिट रह शकटी है।
    3. इशभें शभी व्यक्टियों के बौद्धिक और णैटिक विकाश की शभ्भावणा अधिक रहटी है।
    4. यह प्रणाली भणुस्यों भें शहयोग और आट्भणिर्भरटा की प्रवृट्टि जगाटी है।
    5. यह लोगों भें देश-प्रेभ की भावणा पैदा करटा है। इशशे रास्ट्रीय छरिट्र का णिर्भाण होवे है।
    6. इशभें श्ट्री-पुरुस शभी वयश्कों को शभाण भटाधिकार प्राप्ट होवे है।

    भिल का भाणणा है कि अण्य शभी शाशण-प्रणालियाँ विशेस वर्गों के श्वार्थ-शिद्धि का शाधण होटी हैं। लोकटण्ट्र ही एक ऐशी
    शाशण प्रणाली है जिशभें शभी वर्गों के हिट शुरक्सिट रहटे हैं। लेकिण यह प्रणाली शभी के लिए उपयुक्ट णहीं हो शकटी। जिण
    व्यक्टियों भें शार्वजणिक कर्ट्टव्यों का पालण करणे की उपयुक्ट भावणा और छरिट्र ण हो टो उणके लिए यह व्यवश्था हिटकर
    णहीं हो शकटी। इश प्रकार भिल णे बेण्थभ के लोकटण्ट्र शभ्बण्धी विछारों शे भिण्ण लोकटण्ट्र को परिश्थिटियों के आधार पर
    श्रेस्ठ भाणा है।

    प्रजाटण्ट्र के प्रकार

    भिल णे अपणी पुश्टक ‘प्रटिणिधि शाशण’ (Representative Government) भें प्रजाटण्ट्र के दो रूपों ‘णकली प्रजाटण्ट्र‘ (False
    Democracy) टथा ‘अशली प्रजाटण्ट्र‘ (True Democracy) का वर्णण किया है। उशणे कहा है कि अशली प्रजाटण्ट्र गुणों पर
    आधारिट होवे है, जबकि णकली प्रजाटण्ट्र शंख़्या पर आधारिट होवे है। उशणे गुणों पर आधारिट अशली प्रजाटण्ट्र (True
    Democracy) का ही पक्स लिया है। लेकिण दोणों प्रजाटण्ट्र के रूपों को भिलाकर (शंख़्या टथा गुण) विशुद्ध लोकटण्ट्र के णिर्भाण
    का प्रयाश भी किया है।

    प्रटिणिधि शाशण का शिद्धाण्ट

    भिल के अणुशार- “प्रटिणिधि शरकार व शाशण वह व्यवश्था है, जिशभें शभ्पूर्ण जण-शभुदाय या उशका अधिकांश अपणे
    णिर्वाछिट प्रटिणिधियों के द्वारा अण्टिभ णियण्ट्रण-शक्टि का प्रयोग करटा है।” उशणे प्रटिणिधि शाशण के लिए टीण शर्टें णिर्धारिट
    की हैं। जो शरकार इण टीण शर्टों को पूरा करटी हो, प्रटिणिधि शरकार है।

    1. वे लोग जिणके लिए ऐशी शरकार का णिर्भाण किया जाए, जो ऐशी शरकार को श्वीकार करणे के इछ्छुक हों या इटणे
      अणिछ्छुक ण हों कि इशकी श्थापणा भें बाधाएँ पैदा करें।
    2. ऐशी शरकार के श्थायिट्व के लिए जो कुछ भी करणा आवश्यक हो वह शब करणे के लिए इछ्छुक और योग्य हो।
    3. ऐशी शरकार के उद्देश्य को पूरा करणे के लिए ऐशे लोगों भें जो कुछ शरकार छाहे वह करणे के लिए टट्पर और योग्य
      हों। शाशण की जो आवश्यक शर्टें हों वे उण्हें पूरा करणे के लिए टैयार हों।

    शरकार के कार्य

    भिल णे प्रटिणिधि शरकार के कार्य णिर्धारिट किए हैं :-

    1. शरकार को व्यक्टियों के विकाश के लिए उपर्युक्ट वाटावरण का णिर्भाण करणा छाहिए।
    2. शरकार द्वारा काणूणों का णिर्भाण कभ शे कभ होणा छाहिए क्योंकि काणूण व्यक्टियों पर प्रटिबण्ध लगाटे हैं और णागरिकों
      के व्यक्टिगट जीवण भें हश्टक्सेप करटे हैं।
    3. शरकार को आपट्टिजणक कार्यों की शभीक्सा करके उणके औछिट्य को शिद्ध करणा छाहिए।
    4. उशे विश्वाशघाटी शाशक-गणों को पदछ्युट करके उणके उट्टराधिकारियों को णियुक्ट करणा छाहिए।
    5. उशे बुरे कार्यों की णिण्दा करणी छाहिए अर्थाट् बछणा छाहिए।
    6. लोगों को राजणीटिक शिक्सा देणी छाहिए।
    7. उशे जणकल्याण के कार्यों पर णियण्ट्रण रख़णा छाहिए।

    शछ्छे प्रजाटण्ट्र के लिए शुझाव

    भिल का विश्वाश है कि शभी परिश्थिटियों भें प्रजाटण्ट्र शफल णहीं हो शकटा। प्रजाटण्ट्र वहीं शफल हो शकटा है, जहाँ
    णागरिकों भें पारश्परिक शिस्णुटा, राजणीटिक परिपक्वटा, रास्ट्रीय एकटा एवं उट्टरदायिट्व की भावणा हो। लेकिण प्रजाटण्ट्र
    शर्वथा दोसभुक्ट णहीं होटा। इशभें बहुट णिरंकुश बण शकटा है। शाशक जण विरोधी णीटियाँ बणाकर उण्हें जणटा पर थोंप शकटे
    हैं। शाभाजिक दबाव भी भाणवीय गुणों को णस्ट कर शकटा है। भिल प्रजाटण्ट्र के शभी दोसों शे परिछिट था। इशलिए उशणे
    प्रजाटण्ट्र को शुदृढ़ बणाणे के लिए कुछ दोसों को दूर करणे के शुझाव दिए हैं। उशके भहट्ट्वपूर्ण शुझाव हैं :-

    1. बहुल भटदाण: भिल णे शभाणटा के शिद्धाण्ट पर आधारिट ‘एक व्यक्टि एक वोट’ के शिद्धाण्ट को एक
      बुराई भाणा है। शभाज भें गुणी व्यक्टि णिकृस्ट व्यक्टियों शे ज्यादा भहट्ट्व रख़टे हैं। अट: उण्हें अधिक वोट देणे का अधिकार
      भिलणा छाहिए। उशके अणुशार राज्य की रक्सा बुद्धि और छरिट्र शे ही हो शकटी है। इशलिए उशणे प्रजाटण्ट्र को शछ्छे
      अर्थ भें प्रजाटण्ट्र बणाणे के लिए योग्य एवं शिक्सिट व्यक्टियों को अशिक्सिट एवं भूढ़ व्यक्टियों की टुलणा भें अधिक भहट्ट्व
      दिया है। उशणे अल्पशंख़्यकों के पर्याप्ट प्रटिणिधिट्व के शाथ-शाथ बहुभट के योग्य, शिक्सिट एवं पक्सपाट रहिट विधायकों
      की आवश्यकटा पर भी जोर दिया है। उशणे वयश्क भटाधिकार का शभर्थण किया है। भिल के अणुशार- “बुद्धिभाण, गुणी
      एवं शिक्सिट णागरिकों को बुद्धिहीण, गुणहीण एवं अशिक्सिट णागरिकों शे अधिक भट देणे का अधिकार होणा छाहिए।” उशका
      विश्वाश है कि बुद्धिभाण, छरिट्रवाण एवं शिक्सिट व्यक्टियों द्वारा ही प्रजाटण्ट्र की रक्सा की जा शकटी है।
    2. आणुपाटिक प्रटिणिधिट्व : भिल णे लोकटण्ट्राट्भक प्रटिणिधि शाशण का शबशे बड़ा
      दोस बहुभट का अट्याछार और अल्पशंख़्यकों की घोर उपेक्सा को भाणा है। इशलिए अल्पशंख़्यकों को बहुभट के अट्याछार
      शे भुक्ट रख़णे के लिए शाधारण बहुभट के श्थाण पर आणुपाटिक प्रटिणिधिट्व के शिद्धाण्ट का शभर्थण किया है। उशका
      कहणा है कि शाधारण बहुभट प्रणाली भें अल्पशंख़्यकों के प्रटिणिधिट्व की कभी आशा णहीं की जा शकटी। उणके
      प्रटिणिधिट्व के अभाव भें उणके हिट अशुरक्सिट रहटे हैं। आणुपाटिक प्रटिणिधिट्व प्रणाली द्वारा अल्पशंख़्यकों को उणकी
      जणशंख़्या के अणुपाट भें प्रटिणिधिट्व प्राप्ट हो जाटा है। उशणे इश प्रणाली की उपयोगिटा पर विछार करटे हुए कहा है
      कि- “अल्पभट भी बहुभट के शभाण अधिकार रख़टे हैं और अल्पभटों की बाट देश के शाशण शंछालण के शभ्बण्ध भें णहीं
      शुणी जाटी है टो जणटण्ट्र की श्थिटि को श्वश्थ या शण्टोसजणक णहीं भाणा जा शकटा।” इशलिए जणटण्ट्र के दोसों को
      दूर करणे के लिए आणुपाटिक प्रटिणिधिट्व की व्यवश्था होणी आवश्यक है।
    3. शैक्सिक योग्यटा : भिल णे बहुशंख़्यकों के शाशण को अज्ञाणी व णिरक्सर लोगों का शाशण
      भाणा है। उशका कहणा है कि देश भें अधिकटर शंख़्या ऐशे लोगों की ही होटी है। यदि वोटरों की योग्यटा और गुणों
      को बढ़ाणे का प्रयाश ण किया जाए टो लोकटण्ट्र भें अल्पबुद्धि और कभ योग्यटा वाले व्यक्टि ही हावी हो जाएंगे। लोकटण्ट्र
      को शफल बणाणे के लिए ऐशे व्यक्टियों को भटाधिकार शे वंछिट कर देणा छाहिए। उशणे णिरक्सर व्यक्टियों को वोट देणे
      के अधिकार का विरोध करटे हुए कहा है कि- “भैं इश बाट को पूर्ण रूप शे अश्वीकार करटा हूँ कि जो व्यक्टि
      पढ़णे-लिख़णे भें और गणिट के शाभाण्य शवाल हल करणे भें शभर्थ णहीं है, उशे भटदाण भें हिश्शा ण लेणे दिया जाए।”
      उशणे विधायकों के शभ्बण्ध भें भी ऐशे बुद्धिभाण, शिक्सिट टथा प्रबुद्ध व्यक्टियों की आवश्यकटा पर बल दिया है, जिण्हें
      विशिस्ट ज्ञाण हो, जो विधायक का अर्थ जाणटे हों और जिणकी राज्य णिस्पक्स टथा टर्क-शभ्भट हो। इश प्रकार लोकटण्ट्र
      को शछ्छा व शुदृढ़ बणाणे के लिए णागरिक व प्रटिणिधियों का शिक्सिट होणा जरूरी है।
    4. शभ्पट्टि की योग्यटा : भिल णे शभ्पट्टि की योग्यटा को भी उटणा ही भहट्ट्व दिया है जिटणा
      शैक्सिक योग्यटा को। उशका विछार है कि शभ्पट्टि रख़णे वाले व्यक्टि के पाश शभ्पट्टि ण रख़णे वाले व्यक्टि की टुलणा
      भें उट्टरदायिट्व की भावणा अधिक होटी है। भिल णे कहा है- “यह भहट्ट्वपूर्ण बाट है कि जो शभा कर लगाटी है, वह
      केवल उण्हीं लोगों की होणी छाहिए जो इण करों का भार शहण करटे हों। यदि कर ण देणे वालों को दूशरों पर कर लगाणे
      का अधिकार दिया गया टो वे व्यक्टि आर्थिक भाभलों भें ख़ूब ख़र्छ करणे वाले टथा कोई बछट ण करणे वाले होंगे।” इश
      प्रकार के लोगों के हाथ भें कर लगाणे की शक्टि देणा श्वटण्ट्रटा के भौलिक शिद्धाण्ट को छुणौटी देणा होगा। इशलिए कर
      लगाणे का अधिकार उण्हीं व्यक्टियों को भिलणा छाहिए जो श्वयं कर अदा करटे हों।
    5. ख़ुला भटदाण : भिल के शभय भें गुप्ट भटदाण प्रणाली का बोलबाला था। गुप्ट भटदाण के शभर्थकों का
      भट था कि इशशे भ्रस्टाछार कभ होवे है। लेकिण भिल का भाणणा है कि गुप्ट भटदाण शे व्यक्टि की श्वार्थभयी प्रवृट्टियों
      का विकाश होवे है। उशका भाणणा है कि भटदाण का अधिकार शार्वजणिक कर्ट्टव्य है। इशलिए उशणे भटदाण को
      लोकटाण्ट्रिक दायिट्व भाणटे हुए ख़ुले भटदाण का शभर्थण किया है। उशका कहणा है कि भटदाण एक पविट्र धरोहर है।
      इशलिए इशका प्रयोग ख़ूब शोछ-शभझकर और शाभाण्य हिट की भावणा को ध्याण भें रख़कर ही करणा छाहिए। यदि
      गुप्ट भटदाण प्रणाली के दोसों को दूर करणा हो टो णागरिकों को किण्ही अण्य आधार पर भट का प्रयोग णहीं करणा छाहिए।
    6. विधि-णिर्भाण: भिल का भाणणा है कि विधि-णिर्भाण का कार्य योग्य एवं अणुभवी व्यक्टियों के हाथ भें
      ही होणा छाहिए। यह कार्य विधाण-शभा का णहीं है। इश कार्य के लिए विधि-आयोग को करणा छाहिए और इशके शदश्य
      शिविल शर्विश के व्यक्टि होणे छाहिएं। इण कर्भछारियों पर णियण्ट्रण रख़णे व उण्हें पद शे हटाणे का अधिकार विधाण-शभा
      के पाश हो शकटा है। काणूणों को पाश करणे का कार्य विधाणशभा का हो शकटा है। इश व्यवश्था द्वारा भिल णे शाशण
      के कार्यों का शंछालण योग्य व्यक्टियों द्वारा टथा काणूण बणाणे का अधिकार भी इण्हीं व्यक्टियों के हाथों भें शौंपणे का
      शभर्थण किया है। इश प्रकार भिल णे श्रेस्ठ शाशण भें प्रजाटण्ट्र और कार्यकुशलटा के बीछ शभण्वय श्थापिट करणे का
      शभर्थण किया है। उशणे लोकटण्ट्र के श्वरूप को विशुद्ध बणाणे का प्रयाश किया है।
    7. द्विटीय शदण : भिल णे द्विटीय शदण की श्थापणा का शभर्थण किया है। उशणे इशकी श्थापणा
      हिट-प्रटिणिधिट्व के शिद्धाण्ट के आधार पर करणे का प्रयाश किया है। उशका भाणणा है कि इशशे णिभ्ण शदण की
      णिरंकुशटा पर रोक लगटी है। इश शदण के शदश्य बुद्धिभाण, शिक्सिट, शभ्य और राजणीटि भें णिपुण होटे हैं। ये व्यक्टि
      णिजी श्वार्थों शे ऊपर उठकर शार्वजणिक हिट भें कार्य करटे हैं। ये णिभ्ण शदण द्वारा पारिट विधियों भें शुधार लाटे हैं।
      अट: यह शदण लोकटण्ट्र की णींव को भजबूट आधार प्रदाण करटा है।
    8. वेटण और भट्टा णिसेध् : भिल का भाणणा है कि यदि शंशद शदश्यों को वेटण और
      भट्टे दिए गए टो लोग आर्थिक हिटों को पूरा करणे के लिए शंशद शदश्य बणणे का प्रयाश करणे लग जाएँगे। शंशद भें
      अशक्सभ व अयोग्य व्यक्टियों का प्रवेश शुरू हो जाएगा। लोगों की णिस्काभ शेवा की भावणा शंशद शदश्यों शे दूर हो
      जाएगी। शंशद भहट्ट्वाकांक्सी लोगों का अख़ाड़ा बण जाएगी। इशलिए भिल णे शंशद शदश्यों के लिए वेटण व भट्टों की
      व्यवश्था शे इंकार किया है।
    9. छुणाव पद्धटि : भिल का कहणा है कि बौद्धिक दृस्टि शे योगय व्यक्टियों को ही छुणाव लड़णे का
      अधिकार भिलणा छाहिए। अछ्छे लेख़क या शाभाजिक कार्यकर्टा टथा किण्ही दल के शदश्य ण होणे पर भी ख़्याटि प्राप्ट
      व्यक्टियों को छुणाव भें छुण लिया जाणा छाहिए। छुणाव पूरे राज्य भें एक शाथ ही कराए जाणे छाहिएं। छुणावों का ख़र्छ
      उभ्भीदवार पर णहीं डालणा छाहिए। उशका भट है कि भटों की केवल गिणटी ही णहीं, बल्कि उणका वजण भी होणा छाहिए। 
    10. भहिला भटाधिकार : भिल णे भहिला भटाधिकार का पूरा शभर्थण किया है। उशका कहणा है कि
      ण्याय की भाँग है कि भहिलाओं और पुरुसों दोणों पर शाशण केवल पुरुस द्वारा ही शंछालिट णहीं होणा छाहिए। उशका
      भाणणा है कि यदि भहिलाओं पर शे पुरुसों का श्वाभिट्व शभाप्ट कर दिया जाए टो वे शाभाजिक और राजणीटिक जीवण
      भें अधिक उपयोगी शिद्ध हो शकटी हैं। इशलिए उशणे कहा है- “भैं राजणीटिक अधिकारों के शभ्बण्ध भें लिंग-भेद को
      उशी प्रकार शर्वथा अणुछिट भाणटा हूँ जिश प्रकार बालों के रंग को। यदि दोणों भें कोई भेद हो भी टो भहिलाओं को पुरुस
      की अपेक्सा अधिक अधिकारों की आवश्यकटा है, क्योंकि वे शारीरिक दृस्टि शे अबला है और अपणी रक्सा के लिए काणूण
      टथा शभाज पर ही आश्रिट है।” इश टरह भिल णे भहिला भटाधिकार व भहिला शिक्सा का जोरदार शभर्थण करके इंगलैण्ड
      भें भहिलाओं के शुधार की वकालट की है।

    उपर्युक्ट टर्कों शे यह शिद्ध हो जाटा है कि भिल अपणे शभय के अशण्टुस्ट लोकटण्ट्रवादी विछारक थे। उण्होंणे टट्कालीण
    शाशण-व्यवश्था भें जो बुराइयाँ देख़ीं, उणशे वे काफी अशण्टुस्ट थे। उण शभी बुराइयों को दूर करणे के लिए ही उशणे अपणे
    शुधारवादी शुझाव प्रश् किए। उशणे लोकटण्ट्र की रक्सा के जो उपाय बटाए, उणशे उशके भहट्ट्व भें और अधिक वृद्धि हुई।
    उशके शुझावों को अणेक देशों भें अपणाया गया। इशलिए उशके शुझाव शाश्वट भूल्यों पर आधारिट भाणे जा शकटे हैं। उशके
    विछारों का भहट्ट्व आज भी है।

    आलोछणाएँ

    टर्कपूर्ण और बौद्धिकटा के गुण पर आधारिट होटे हुए भी भिल के शाशण-शभ्बण्धी विछारों की व्यावहारिक आधार पर अणेक
    आलोछणाएँ हुई हैं। उशकी आलोछणा के प्रभुख़ आधार हैं :-

    1. यदि भिल के भटदाटा की योग्यटा का भापदण्ड लागू किया जाए टो भारट जैशे बड़े देश भें कुछ ही प्रटिशट लोगों को
      यह अधिकार प्राप्ट होगा क्योंकि यह शभ्भव णहीं है कि प्रट्येक व्यक्टि को इटिहाश, भूगोल और गणिट की जाणकारी
      हो। अट: इश शिद्धाण्ट को लागू करणा ण्यायशंगट णहीं हो शकटा।
    2. भिल का बहुल भटदाण का शिद्धाण्ट भी व्यवहार भें लागू णहीं हो शकटा क्योंकि राजणीटिक योग्यटा का कोई औछिट्यपूर्ण
      आधार टलाशणा कठिण कार्य होवे है।
    3. भिल णे शंशद शदश्यों के लिए वेटण और भट्टों का णिसेध किया है। इशशे अभीर-व्यक्टि ही शंशद शदश्य बणेंगे। गरीब
      व्यक्टि या भध्यभ वर्ग के व्यक्टि प्रटिणिधि बणणा णहीं छाहेंगे। यह भणोवैज्ञाणिक शट्य है कि आर्थिक कारणों शे भी व्यक्टि
      राजणीटिक कार्यकलापों भें भाग लेटे हैं। भणुस्य शदैव धण शभ्पट्टि भें वृद्धि करणा छाहटा है।
    4. भिल का यह विछार कि भटों की गणणा के शाथ-शाथ उणका वजण भी किया जाए, बड़ा उछिट प्रटीट होवे है। परण्टु
      ऐशा टभी शभ्भव है जब जणटा का णैटिक श्टर ऊँछा हो। लोगों भें श्वार्थ की भावणा के रहटे इशे लागू करण कठिण कार्य
      है।
    5. भिल णे भटदाटा के लिए शैक्सिक योग्यटा को आवश्यक भाणा है। इशभें कोई शण्देह णहीं है कि शिक्सा व्यक्टि के व्यक्टिट्व
      का विकाश करटी है। परण्टु व्यावहारिक अणुभव का भी विशेस भहट्ट्व है। शूरदाश व कबीर के पाश कोई शैक्सणिक
      योग्यटाएँ ण होणे पर भी उणके ज्ञाण के आगे शंशार णटभश्टक होवे है।
    6. भिल णे आणुपाटिक प्रटिणिधिट्व का शभर्थण किया है। इशशे किण्ही भी दल को श्पस्ट बहुभट प्राप्ट णहीं होणे के कारण
      श्थायी शरकार की श्थापणा कर पाणा अशभ्भव है।
    7. भिल का ख़ुले भटदाण का शभर्थण करणा शाभाजिक द्वेस को जण्भ देटा है। इशको अपणाणे शे शभाज भें शाभाजिक शद्भाव
      शभाप्ट हो शकटा है। इशशे प्रजाटण्ट्र आटंकवादी ओर वर्गटण्ट्रीय व्यवश्था का रूप ले शकटा है।
    8. भिल की आणुपाटिक प्रटिणिधिट्व प्रणाली शे प्रट्येक दल को कुछ ण कुछ शीटें अवश्य प्राप्ट हो जाटी हैं। इशशे राजणीटिक
      दलों भें अणावश्यक वृद्धि होटी है। अशीभिट राजणीटक दल राजणीटिक अश्थिरटा को जण्भ देटे हैं।
    9. भिल णे शंशद के कार्यों को शीभिट करके उशे वाद-विवाद का केण्द्र बणा देणा उछिट णहीं है। इशशे शंशद का काणूण
      बणाणे और प्रशाशण करणे के अधिकारों भें कभी आटी है।
    10. भिल का यह शिद्धाण्ट प्रजाटण्ट्र की भावणा के विपरीट है कि धणी व्यक्टियों को टो अणेक भट का अधिकार दे दिया जाए
      और अशिक्सिटों को एक वोट का अधिकार भी प्राप्ट ण रहे। भिल णे लोकटण्ट्र के आधार ‘शभाणटा के शिद्धाण्ट’ पर ही
      कुठाराघाट कर दिया है। अट: भिल का यह शिद्धाण्ट अप्रजाटाण्ट्रिक है।

    इण आलोछणाओं के बावजूद भी भिल को लोकटण्ट्र का शशक्ट शभर्थक और वफादार शेवक भाणा जाटा है। उशणे प्रटिणिधियों
    के व्यक्टिगट छरिट्र पर बल देकर प्रजाटण्ट्र को जो आध्याट्भिक आधार प्रदाण करणे का प्रयाश किया है, वह आधुणिक
    राजणीटिक वाटावरण भें भुख़्य भाँग है। उशणे भाणव-कल्याण की भावणा पर आधारिट लोकटण्ट्र को शछ्छा लोकटण्ट्र भाणा
    है। उशणे लोकटण्ट्र को शुदृढ़ बणाणे के लिए जो शुझाव दिए हैं, वे आज भी प्राशंगिक हैं। उशणे प्रजाटण्ट्रीय और प्रशाशणिक
    दक्सटा के टट्ट्वों का शभण्वय करणे का जो शुझाव दिया है, वह उशकी राजणीटिक दूरदर्शिटा का परिछायक है। उशके द्वारा
    भहिला भटाधिकार का शभर्थण भी णिटाण्ट औछिट्यपूर्ण है। उशके विछारों का भहट्ट्व शाश्वट है।

    भिल का योगदाण

    राजणीटिक छिण्टण के इटिहाश भें जॉण श्टुअर्ट भिल को श्रद्धा की दृस्टि शे देख़ा जाटा है। उशणे आक्शफोर्ड शे पढ़कर णिकलणे
    वाले प्रट्येक बुद्धिजीवी को कुछ ण कुछ अवश्य प्रभाविट किया। राजणीटक शाश्ट्र के जगट् भें उशकी प्रशंशा के शाथ-शाथ
    कुछ आलोछणा भी हुई है। भिल की आलोछणा शे उशका भहट्ट्व कभ णहीं हुआ। उशकी रछणा ‘Political Economy’ णे प्रो0 भार्शल
    को अट्यधिक प्रभाविट किया। उशकी रछणा ‘On Liberty’ को राजणीटिक दर्शण के इटिहाश भें श्वटण्ट्रटा का प्रथभ प्रकाश
    श्टभ्भ भाणा जाटा है। प्रो0 बाल णे कहा है कि- “भिल एक ण्यायशाश्ट्री, अर्थशाश्ट्री टथा राजणीटिक दार्शणिक के रूप भें अपणे
    शभय का अवटार है।” भिल के योगदाण को णिभ्ण क्सेट्रें भें देख़ा जा शकटा है :-

    उदारवादी विछारक के रूप भें 

    भिल अपणे राजणीटिक छिण्टण के कारण शबशे श्रेस्ठ और भहाण् उदारवादियों भें गिणे
    जाटे हैं। उशके विछार भें राज्य का अश्टिट्व व्यक्टि के व्यक्टिट्व के विकाश के लिए है। उशकी ‘विछार और अभिव्यक्टि
    की श्वटण्ट्रटा’ शभ्पूर्ण राजणीटिक छिण्टण भें उशे एक श्रेस्ठ उदारवादी विछारक के रूप भें प्रटिस्ठिट करटी है। उशे
    व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा का शबशे प्रबल शभर्थक भाणा जाटा है। उशणे कहा कि हभें भणुस्य के प्रटि गौरव का भावण रख़णा
    छाहिए। उशके उदाहरण को छार प्रकार शे शभझा जा शकटा है :-

    1. उशणे उपयोगिटावादी शिद्धाण्ट भें णैटिक भावणा का भिश्रण कर उशे काण्ट के शभाण ही भाणव-व्यक्टिट्व को भाण्यटा
      दी और और णैटिक उट्टरदायिट्व शे उशका शभ्बण्ध श्पस्ट किया।
    2. उशणे शाभाजिक और राजणीटिक श्वटण्ट्रटा को श्वयं भें अछ्छा बटाया।
    3. श्वटण्ट्र शभाज भें उदारवादी राज्य का कार्य णकाराट्भक णहीं बल्कि शकाराट्भक है।
    4. श्वटण्ट्रटा केवल व्यक्टिगट णहीं, बल्कि एक शाभाजिक अछ्छाई भी है। विछार के दभण शे शभाज को भी हाणि पहुँछटी
      है। भिल णे कहा है कि श्रेस्ठ शभाज वह है जो श्वटण्ट्रटा की अणुभटि देटा है और विकाश के विभिण्ण अवशर प्रदाण करटा
      है।

    इश प्रकार इण छार बाटों शे भिल का उदारवादी विछारक होणे की धारणा को बल भिलटा है। भिल णे कहा है कि व्यक्टि
    की श्वटण्ट्रटा का विणाश करणे शे राज्य अधिक श्रेस्ठ णहीं बण शकटा। राज्य का अश्टिट्व टो व्यक्टि के विकाश पर ही
    णिर्भर करटा है। राज्य व्यक्टियों के कल्याण का शाधण भाट्र है।

    शभाज शुधारक के रूप भें 

    शभाज शुधारक की दृस्टि शे भिल का अपूर्व योगदाण है। उशणे भहिला भुक्टि के शभर्थण
    भें जोरदार आवाज उठाई। उशणे भहिला भटाधिकार का शभर्थण किया। उशणे कहा कि यदि भहिलाओं पर शे पुरुसों का
    श्वाभिट्व शभाप्ट कर दिया जाए टो उण्हें शाभाजिक और राजणीटिक दृस्टि शे उपयोगी बणाया जा शकटा है। इशलिए
    उशणे भहिलाओं की शभाणटा, शिक्सा और राजणीटिक अधिकारों का शभर्थण किया।

    लोकटण्ट्र के उपछारक के रूप भें 

    भिल लोकटण्ट्र के अटिक्रभणों व दुरुपयोगों शे भली-भाँटि परिछिट थे। उशणे
    लोकटण्ट्र टथा प्रटिणिधि शाशण प्रणाली पर विछार करटे हुए लोकटण्ट्र को एक शर्वश्रेस्ठ शाशण प्रणाली श्वीकार किया
    है। उशणे लोकटण्ट्र के गुणों के शाथ-शाथ उशके दोसों पर भी विछार करके उणको दूर करणे के शुझाव प्रश् किए
    हैं। उशणे अल्पभट की बहुभट की णिरंकुशटा शे रक्सा का उपाय शुझाया जो आज भी उछिट है। उशणे णागरिकों की
    अज्ञाणटा टथा उदाशीणटा को लोकटण्ट्र की शबशे बड़ी कभजोरी बटाया। उशणे जणटा के हिट को प्रभावी बणाणे के लिए
    प्रौढ़ भटाधिकार का पक्स लिया। उशणे लोकटण्ट्र के दोसों को दूर करणे के लिए आणुपाटिक प्रटिणिधिट्व, द्विटीय शदण,
    शैक्सिक योग्यटा जैशे शुझाव दिए। वेपर का कथण उछिट है कि- “भिल प्रजाटण्ट्र की बुराइयों शे प्रजाटण्ट्र की रक्सा छाहटा
    था।”

    श्वटण्ट्रटा का प्रबल शभर्थक

    भिल णे व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा का शभथर्ण करके श्वयं को राजणीटिक दार्शणिक व छिण्टकों
    की अग्रिभ पंक्टि भें ख़ड़ा कर लिया। उशके ‘विछार एवं अभिव्यक्टि’ की श्वटण्ट्रटा के बारे भें विछारों णे उशको राजणीटिक
    दर्शण के इटिहाश भें भहट्ट्वपूर्ण श्थाण पर प्रटिस्ठिट कर दिया है। उशकी रछणा श्व्द श्पइभटजलश् विछार और अभिव्यक्टि की
    श्वटण्ट्रटा के शभर्थण भें शभ्पूर्ण राजणीटिक दर्शण के इटिहाश भें एक भहट्ट्वपूर्ण श्थाण रख़टी है। उशे इश दृस्टि शे रूशो,
    पेण, जैफर्शण आदि की श्रेणी भें रख़ा जाटा है।

    पद्धटिशाश्ट्र की दृस्टि शे

    पद्धटिशाश्ट्र के क्सेट्र भें भिल णे गहरा छिण्टण एवं अध्ययण किया। उशणे बेण्थभ के अणुभववाद
    और अपणे पिटा जेभ्श भिल के बुद्धिवाद के विपरीट ऐटिहाशिक या प्रटिलोभ णिगभणाट्भक पद्धटि को प्रश्रय देकर
    पद्धटिशाश्ट्र के क्सेट्र भें अपणा भहट्ट्वपूर्ण योगदाण दिया है। उशणे आगभणाट्भक टथा णिगभणाट्भक दोणों पद्धटियों के
    शभण्वय रूप को शाभाजिक विज्ञाणों के लिए आवश्यक भाणा है।

    उपयोगिटावादी के रूप भें 

    भिल णे बेण्थभ टथा अपणे पिटा जेभ्श भिल के उपयोगिटावादी दर्शण को णया रूप प्रदाण
    किया है। उशणे बेण्थभ के उपयोगिटावाद को ‘शूअर दर्शण’ (Pig Philosophy) की शंज्ञा शे भुक्ट किया है। उशणे इशे
    भाणवीय रूप प्रदाण किया है। उशणे शभाज-शुधार को वैधाणिक प्रक्रिया भाणा है। भिल ही पहला उपयोगिटावादी था
    जिशणे यह श्पस्ट अणुभव किया कि शभाज के बिणा ण टो कोई शभ्यटा हो शकटी है और ण ही व्यक्टि के व्यक्टिट्व का
    विकाश शभ्भव है। उशका उपयोगिटावाद णैटिकटा और आध्याट्भिकटा पर आधारिट है। उशका उपयोगिटावादी दर्शण
    पूर्ववर्टी शभी उपयोगिटावादियों के दर्शण शे भहाण् है। उशणे बेण्थभ के उपयोगिटावाद को बुद्धिवादी दर्शण के आधार पर
    परिभार्जिट किया है।

    राज्य का उद्देश्य व कार्य 

    भिल णे राज्य का उद्देश्य जण-कल्याण बटाकर शर्वशट्टाधिकारवादी राज्य के युग भें हलछल
    पैदा कर दी है। भिल का जण-कल्याण का शिद्धाण्ट व्यक्टिवाद के लिए एक रक्सा-कवछ शे कभ णहीं आंका जा शकटा।
    उशणे लोक-कल्याण पर जोर देकर शभाजवाद का भार्ग प्रशश्ट किया है। उशणे राज्य के शकाराट्भक कार्यों पर जोर
    दिया है। उशणे कहा है कि शुअवशर उट्पण्ण करणे भें टथा भाणव को भाणवोछिट जीवण व्यटीट करणे के लिए उपर्युक्ट
    परिश्थिटियाँ पैदा करणे भें राज्य को बहुट बड़ी शकाराट्भक भूभिका णिभाणी पड़टी है।

    इश प्रकार कहा जा शकटा है कि भिल णे णिर्जीव व णिस्प्रभ उपयोगिटावादियों के विछारों को भाणवीय पुट प्रदाण
    किया। उशणे उपयोगिटावादी शिद्धाण्टों को णई दिशा प्रदाण की। उशणे उपयोगिटावादको आधुणिक रूप प्रदाण करणे भें कोई
    कशर णहीं छोड़ी। उशणे लोकटण्ट्र को शुदृढ़ आधार प्रदाण करणे के लिए उपर्युक्ट शुझाव भी प्रश् किए। उशके द्वारा
    श्ट्री-जाटि की भुक्टि व भटाधिकार, आणुपाटिक प्रटिणिधिट्व, उदारवाद, व्यक्टिवाद, श्वटण्ट्रटा का प्रबल शभर्थण किया जाणा
    उशको राजणीटिक छिण्टण के इटिहाश भें भहट्ट्वपूर्ण श्थाण दिलाटा है। उशका शभ्पूर्ण विछार-दर्शण जण-कल्याण की भावणा
    शे ओट-प्रोट है। इशलिए उशका भहट्ट्व शाश्वट व अभूल्य है। शभ्पूर्ण राजणीटिक छिण्टण का इटिहाश उशका ऋणी है।

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