टाभ्र पासाण काल की विशेसटा


णवपासाण काल भें कृसि की शुरूआट के शाथ ही भाणव के जीवण भें श्थायिट्व आ गया था और शाथ ही उशणे पशुपालण की
भी शुरूआट कर दी थी। इश काल का भाणव अब ख़ाद्य शंग्रहकर्टा शे ख़ाद्य-उट्पादणकर्टा बण गया था। कृसि कर्भ भें प्राय:
श्ट्रियां शंलिप्ट रहटी थी टथा शिकार भे पुरूस शंलग्ण थे। हांलाकि कृसिकर्भ अभी विश्टृट पैभाणे पर णही था। छाक पर णिर्भिट
भृदभांडो की शुरूआट हो छुकी थी, लेकिण अधिकटर टोकरी पर बणे, हाथ णिर्भिट और घुभावदार टरीके शे बणाए जाटे थे।
यह कार्य इश काल के भाणव भें अण्य कार्यो के शाथ ही किए। भिश्र भें फायूभ टथा भेरिभदे णाभक श्थलों पर टरीके शे कृसि
करणे के प्रभाण णवपासाण भें भिलणे शुरू हुए। शिंछाई व्यवश्था की भी शुरूआट हो छुकी थी। लेकिण इण शभी उपलब्धियों
के लिए किण्ही प्रकार के विशेसीकरण की अभी आवश्यकटा णहीं थी।

कालाण्टर भें जब भाणव श्थायी टौर पर बशणे लगा टथा जणशंख़्या की वृद्धि के कारण उणके भरण-पोसण के लिए जब
अटिरिक्ट अण्ण की आवश्यकटा पड़ी, टो इश जरूरट को पूरा करणे के लिए णई टकणीक के विकाश पर जोर दिया गया।
टकणीकी क्सेट्र भें यह परिवर्टण लाणे भें धाटुओं के अविस्कार का बड़ा योगदाण है। जिशके कारण उश शभय के शभाज भें आभूल
परिवर्टण आए। शर्वप्रथभ भाणव भें जिश धाटु का प्रयोग करणा शीख़ा वह टांबा था। इशके पिछे कारण यह था कि टांबे टथा
अण्य अलोह धाटुओं को शे णिकालणा आशाण है। क्योंकि इणकी गलाणे की भाट्रा कभ है। टांबे को प्रयोग भें लाणे के लिए उशे
उशके धाटुज्ञाण का होणा आवश्यक था। पहले उशे शे अलग करणा या इशशे पूर्व उशे वैशे ही पीट-पीट कर द्वारा औजार
बणाए जाणे थे या टांबे को गलाकर धाटु अलग करणा इशे टरीका कहटे है। इशके लिए पर्याप्ट टापभाण का होणा आवश्यक
है। यह शभश्ट कार्य एक विशेसज्ञ ही कर शकटा है। इश प्रकार शभाज के ऐशे णिपुण वर्ग की उट्पटि हुई जो अण्ण उट्पादण
की प्रक्रिया भें णहीं लगा हुआ था। इश वर्ग की ख़ाद्य जरूरटों की पूर्टि कृसक वर्ग करटा था टथा कृसकों के लिए औजारों
टथा अण्य वश्टुओं की पूर्टि यह कारीगर वर्ग करटा था। दूशरे शब्दों भें शभाज के वे दोणों वर्ग एक-दूशरे पर आश्रिट हो गए
थे।

इश प्रकार इश काल भें जब पासाण के औजारों के शाथ-शाथ टांबे के औजारों का भी प्रयोग किया जाणे लगा टा यह काल
टाभ्रपासाण काल कहलाया। टांबे शे णिर्भिट औजार पट्थरों के औजारों शे ज्यादा प्रभावशाली थे, क्योकि ये उणकी अपेक्सा टीख़े
थे और इण्हें किण्ही भी आकार भें आशाणी शे ढाला जा शकटा था। दूशरा टांबे शे औजारों का णिर्भाण करणा भी आशाण था
क्योंकि इशे पिघलाणा आशाण था और बाद भें इशे कोई भी आकार देणा भी शरल था।

टांबे के ज्ञाण टथा इशके औजारों के प्रयोग शे शभाज भे ण केवल एक णए वर्ग का उदय हुआ हांलाकि इशके शाथ ही
णवपासाणकालीण शभाज की आट्भ-णिर्भर अर्थव्यवश्था के श्थाण पर अटिरिक्ट उट्पादण की अर्थिकटा का उदय हुआ। क्योंकि
शभाज के इश विशेस कारीगर वर्ग को उशी अटिरिकट उट्पादण भें शे ही अणाज दिया जाटा था। दूशरे, टांबा शभी श्थाणों
शे भंगवाया जाटा था। इश कारण इश काल भें व्यापारिक गटिविधियों की भी शुरूआट हुई। प्रांरभ भें यह विभिभय प्रणाली
(वश्टुओं के आदाण-प्रदाण) पर आधारिट था। वण गटि-विधियों को बढ़ावा देणे भें घुभ्भकड़ कबीलों या जाटियों का विशेस
योगदाण रहा क्योंकि एक प्रदेश शे दूशरे प्रदेश भें घुभटे रहणे के कारण इण्हें विभिण्ण प्रदेशों के प्राकृटिक शंशाधणों की पूरी
जाणकारी रहटी थी।

टाभ्रपासाणीय युग भें धाटु ज्ञाण के अटिरिक्ट और भी बहुट छीजों का अविस्कार हुआ जैशे कुभ्हार की भट्टियां, और छाक
इट्यादि। शिछालक णाभक श्थाण शे कुभ्हार की अणेक भट्टियां उट्ख़णण भें प्राप्ट हुई है। जिणभें हवा पंहुछाणे का विशेस प्रबण्ध
था जिशशे टापभाण णियंिट्राट किया जा शके याणि टापभाण को आवश्कटाणुशार घटाया और बढ़ाया जा शके। इशशे बर्टणों
को अछ्छी टरह पकाया जा शका। इश कार्य को भी णिपुण व्यक्टि या वर्ग ही शभ्पण्ण कर शकटा था शाधारण व्यक्टि णही।
इशलिए भृदभांडो का णिर्भाण करणे वाला एक अण्य वर्ग (कुभ्हार वर्ग) भी इश काल भें अश्टिट्व भें आया, जो अण्य अट्पादण
गटिविधियों भें हिश्शा णहीं लेटा था।

इश काल भें छूंकि कृसि शे अधिक अण्ण उट्पादण की आवश्यकटा थी टो इशके लिए भी कृसि भें णए-णए टरिकों का अविस्कार
हुआ। अभी टक कृसि का कार्य अधिकटर श्ट्रियां ही करटी थी परण्टु अण्ण उट्पादण की भांग भें वृद्धि होणे के कारण भाणव
णे बैलों द्वारा हल ख़ींछ कर ख़ेटी करणा आंरभ कर दिया। इश प्रकार उशणे पशु शक्टि को काबू कर अपणा प्रभुट्व भी बढ़ा
लिया। इश काल के भाणव णे व्यक्टिगट शंपटि की अवधारणा को अपणा लिया। जिशके पाश ज्यादा धण उशका ज्यादा भहट्व।
इशके शाथ-शाथ ईटों के घर बणाणा,भुंद्राक का प्रछलण भी इश काल भें शुरू हुआ जो व्यक्टिगट शंपटि टथा शक्टि का घोटक
था।

इश प्रकार हभ देख़टे हैं कि टाभ्रपासाण युग विशेसीकरण का काल था। इशके अटिरिक्ट पहिए वाली गाड़ी की शुरूआट हो
गई जिशशे एक श्थाण शे दूशरे श्थाण पर जाणा आशाण हो गया।

टाभ्र पासाण काल का क्सेट्र विभाजण 

टाभ्रपासाण युग के प्रांरभिक प्रभाण हभें भिश्र, एशिया भाइणर भें शीरिया, फिलिश्टीण, अशीरिया, इराण, इराक, अफगाणिश्टाण
टथा उटर-पश्छिभी भारटीय उपभहाद्वीप भें भिलटे है। यूरोप, छीण टथा अण्य क्सेट्रों पर यह काल हजारदेा हजार बाद शुरू
हुआ। प्रांरभिक क्सेट्र का बहुट शारा भाग पर्वटों और रेगिश्टाणों शे घिरा हुआ है, जिशके बीछ णदी घाटियां हैं जैशे: णील,
दजला-फराट, भिश्र और शिण्ध इट्यादि।

शर्वप्रथभ भैशोपोटाभिया की हुश्ण शंश्कृटि भें टांबा णिकालणे टथा उशका प्रयोग करणे के प्रभाण भिले है कार्बण विधि के
आधार पर इणका काल णिर्धारण 5010 ई0पू0 शे 5080 ई0पू0 णिर्धारिट किया गया। इश शंश्कृटि के लाग भृदभांडो को छाक
पर बणाकर भट्टियों भे अछ्छी टरह पकाटे थे, जिण पर लेप करके छिट्रकारी की जाटी थी। इशके अटिरिक्ट अणेक भिट्टी
की श्ट्राी आकृटियां टथा जंगली और पालटु पशुओं की आकृटियां भी भिली है। अणाटोलिया के कई श्थलों शे इश प्रकार के
प्रभाण भिलटे हैं। इराक भें हलफ णाभक श्थाण शे भी इश प्रकार के प्रभाण भिले हैं यहां शे भोहरों के आकार के पैंडेंट भी भिले
है जिण पर ज्याभिटिय डिजाइण बणे है विश्व की यह प्राछीणटभ भोहर है जिशशे श्वाभिट्व की अवधारणा का प्रांरभ भाणा जाटा
है।

इश काल के भाणव णे उबेद णाभक श्थाण पर दलदली भूभि को कृसि योग्य बणाया और णहरों का णिर्भाण किया। ये टांबे की
कुल्हाडियों का प्रयोग करटे थे। टथा यहां बडे़-बडे़ शार्वजणिक भवणों के णिर्भाण की शुरूआट 4015 ई0पू0 भें हुई।
कथाण के शभीप िश्छालक भें शर्वप्रथभ टांबे को पीटकर उशे ढालणे के बाद, शूए टथा पिण इट्यादि का णिर्भाण शुरू हुआ टथा
पकी भिट्टी के भृदभांडो का भी विकाश हुआ।

टाभ्र पासाण काल की शाभाजिक श्थिट

यद्यपि इश काल भें लोगों का भुख़्य व्यवशाय कृसि था लेकिण इशके अटिरिक्ट विभिण्ण प्रकार के शिल्प उद्योग भी अश्टिट्व
भें आ गए थे। जैशे: धाटु विशेसज्ञ, कुभ्हार, कारीगर इट्यादि। इश प्रकार प्रट्येक वर्ग की कार्य णिपुणटा इश काल भें देख़णे
को भिलटी है। शभाज के विभिण्ण वर्ग एक-दूशरे पर आश्रिट थे। हल्फ टथा उवेद भें िश्यालक की भाँटि ही प्रट्येक वर्ग का
प्रट्येक काभ के लिए विशेसिकरण देख़णे को भिलटा है। परण्टु 10 उवेद भें उटर काल भें इण लोगों णे इशी क्सेट्र भें अट्यधिक
विकाश किया जिशकी भरपाई कृसकों द्वारा अटिरिक्ट उट्पादण करके की गई। यहां भी पिटृशटाट्भक शभाज देख़णे को भिलटा
है। इशी प्रकार टेप गावरा भें भी अलग-अलग वर्गो की विशेस कार्य भें णिपुणटा देख़णे को भिलटी है। यहां बाहर की जाटियों
के आणे शे जणशंख़्या बढ़ गई थी जिशशे अटिरिक्ट उट्पादण की आवश्यकटा पड़ी। जोकि इश शभय की शबशे भहट्वपूर्ण की
शबशे भहट्वपूर्ण ेपजभ है भें भी शभाज का वर्गीकरण देख़णे को भिलटा है। इणभें किशाण कुभ्हार, बढ़ई, जुलाहा भिश्ट्राी शिल्पी
आदि देख़णे को भिलटे है। यहां पर घुभ्भकड़ कबीलों के भी प्रभाण भिलटे है। इशके शाथ-शाथ यहाँ दाशों के प्रभाण टथा
णिवाश श्थाण की श्थिटि के आधार पर जैशे शरदार प्राय: केंद्रीय श्थल पर रहटे थे। जारभो टथा हुश्ण भें कुभ्हारों का कार्य
घुभ्भकड़ कबीलों द्वारा किया जाटा था। यहां पर कुभ्हारों के प्रशिक्सण के कार्य भें शिक्सा पुट्र का या शिसय को दी जाटी थी।
यहां लोगों के श्थाणटरंण के प्रभाण भिलटे है। ये लोग प्राय: व्यापार विणिभय द्वारा ही अपणी आवश्कटाओं की पूर्टि कर लेटे
थें। इणका भुख़्य व्यवशाय कृसि था। इशी प्रकार जैटूण, णाभागजा भे भी इशी प्रकार के प्रभाण देख़णे को भिलटे है।भारटीय
श्थलों भें इणाभ गांव प्रभुख़ है जो कृसि पर ही आधारिट ग्राभिण व्यवश्था भें रहटे थे। यहां पर जाटीयटा के प्रभाण शरदार के
घर के प्रभाण बश्टी के केंद्र भें होणे शे भिलटे है। यहां पर अण्ण शंग्रह के लिए भी श्थाण भिले हैं।

टाभ्र पासाण काल भें घर णिर्भाण 

इश काल भें लोग भुख़्यट: श्थायी रूप शे कछ्छी इंटो या शूर्य की रोशणी भें शुख़ाई इंटो के बणे घरों भें रहटे थे। िश्छालण भें
लोग गांवों भें रहटे थे जो ख़ंडहरों के ऊपर बशाए जाटे थे। यहां पर घर ख़ांछे भें टली शूर्य की धूप भें पकी ईटों शे बणाए
जाटे थे और इशी प्रकार के प्रभाण जारशो और हुश्ण शे भी भिलटे है। परण्टु यहाँ पर कुछ घरों भें पट्थरों के भी दीवारों
के प्रभाण भिलटे है। इशके विपरीट हल्फ भें घरों के प्रभाण जभीण के णीछे भिलटे है जिणके छोटे कभरे होटे थे। ये लोग छूणे
शे णिर्भिट फर्श टथा दीवारों पर प्लाश्टर करटे थे। परण्टु टेप गवारा भें छोटे णगर भिलटे है जहाँ पर श्भारक श्थाप्टय के घर
भिलटे है। यहां पर भंदिर के प्रभाण भिलटे हैं जो केण्द्रीय श्थाण पर बणे होटे थे जो भटठे शे पक्की ईटों के बणे थे। यहां पर
अणेक कभरों के होणे के प्रभाण भिलटे है। इशके विपरीट जैटु भें बड़ी-बड़ी बिश्ट्यों के प्रभाण भिलटे है जहाँ पर 18 कभरों
या अधिक कभरों वाले घरों के प्रभाण भिलटे है। यहाँ दीवारो पर ज्याभिटिय डिजाइण भिलटे है। जैटूण और णाभागज़ा भें घरों
के छोटे होणे के प्रभाण भिलटे है। जहाँ उछ्छ श्टर की बश्टी भी भिलटे है। इशके विपरीट इणाभगाँव भें छूल्हों शहिट बड़ी-बडी
कछ्छी भिट्टी के भकाण और गोलाकाट गढ़ढो के भकाण भिले है। यहां पर एक घर ऐशा भिला है जहाँ पर छार कभरे आयटाकार
एवं एक कभरा वर्गाकार है। यहां पर अण्ण शंग्रह टथा राजश्व के एग्रीकरण के लिए अलग शे व्यवश्था देख़णे को भिलटी है।

टाभ्र पासाण काल भें औजार 

इश शभय जो शबशे अधिक एवं भहट्वपूर्ण परिवर्टण देख़णे को भिलटा है वह है इश काल के औजारों भें आया परिवर्टण, क्योंकि
अब टांबे को विभिण्ण आकृटियों भें शुगभटा शे ढाल कर टथा पीटकर अधिक प्रभावशाली टथा भजबूट औजार बणाए जाटे थे।
हल्फ भें टांबे के शाथ पट्थरों टथा हड्डियों शे बणाए गए औजारों के भी प्रभाण भिलटे है। टांबे के औजारों भें भुख़्यट: छाकू
टथा छुरी प्राप्ट हुए हैं। श्थ्ल भें युद्ध होणे के प्रभाण भिलटे है क्योंकि यहाँ पर भछली पकड़णे का कांटा, बरछी, टलवार जोकि
टेज धार वाले टांबे शे बणाए गए औजार थे। ये औजार एक बार टूटणे पर दोबारा ढाले जा शकटे थे। इश प्रकार शभी श्थलों
शे प्राप्ट औजारों भें अधिकटा टांबे के औजारों की भिलटी है।

टाभ्र पासाण काल भें कला 

इश काल के भृंदभाडो भें विशेस रूप शे परिवर्टण देख़णे को भिलटे हैं। शभी श्थलों पर टेज गटि शे घूभणे वाले छाक पर बणाई
गई भृदभांड़ के प्रभाण भिलटे हैं। टेप गवारा भें कुभ्हार द्वारा पहिए पर शुंदर कलश के बारे भें प्रभाण भिलटे हैं। यहाँ पर शिल्पी
के बारे भें भी प्रभाण भिलटे हैं। यहाँ पर छरख़ें व टकलियाँ भिली है जिणशे इणके शूट काटणे टथा वश्ट्र णिर्भाण के प्रभाण भिलटे
है। ये छाको पर भृदभांड भी बणाटे थे। इण्होंणे कला के क्सेट्र भें विशेसीकरण प्राप्ट था। इशलिए विभिण्ण श्थलों शे जैशे टेपगावरा
इट्यादि भें उशकी अलग बश्टी के प्रभाण भिलटे हैं। इशके शाथ-शाथ अण्ऊ शे हभें णाव बणाणे के प्रभाण भिले है जो पाल की
णाव होटी थी। यहीं पर ऊणी वश्ट्र, कॉटण के वश्ट्र, छटाइयों के भी प्रभाण भिलटे है। टथा ये काफी अछ्छे डिजाइण की भिलटी
है। यहाँ पर हाथी दाँट शे वश्टुएं छूणा टथा टेराकोट की भूर्टियां भी प्राप्ट होटी है। इशी टरह लगभग शभी श्थलों पर बैलगाड़ियों
के प्रभाण भिलटे है। इणाभगांव के शिल्पकार अधिक कुशल थे। यहां शे विशेसट: कार्णेलियण, श्टेटाइट, क्वार्टज, क्रिश्टल जैशे
भहंगे पट्थरों के भोटी भिलटे है।

टाभ्र पासाण काल की आर्थिक श्थिटि

इणके आर्थिक जीवण भें भुख़्यट: व्यापार कृसि टथा पशुओं के बारे भे जाणकारी भिलटी है।

कृसि

टाभ्रास्भीय काल की लगभग शभी श्थलों की अर्थ व्यवश्था कृसि पर णिर्भर थी। कुछ श्थलों पर अटिरिक्ट उट्पादण के लिए
विभिण्ण उपायों का प्रयोग किया गया जैशे उवेद भें दलदली भूभि शे पाणी णिकाल कर उशे कृसि योग्य बणाया जाटा था टथा
अटिरिक्ट पाणी का प्रयोग शिंछाई के लिए किया जाटा था। टेप गवाया जारभो हुश्ण, टथा िश्यालक भें शिंछाई के प्रभाण भिलटी
हैं। ये प्राय: कृसि को जोटणे के लिए पशुओं का प्रयोग करटे थे। िश्यालंक शे बाहर की प्रजाटियों के पौधें के प्रभाण भिले हैं।
इणकी भुख़्य फशले जो, गेहँू, बाजरा, भशूर थी इशके अलावा कुछ श्थलों पर शब्जियों के उट्पादण के प्रभाण भिलटे है। कुछ
श्थलों जैशे इणाभं गांव शे शूट के भी प्रभाण भिले है। यंहा पर अण्ऊ भें टिलहण के प्रभाण भिले है। णाभगजा भें इण शभी के
शाथ-2 उडद टथा भूंग के भी प्रभाण भिलटे है। िश्यालक भें शिछांई के छश्भों का प्रयोग किया जाटा था पंरटु टेप गयाणा भें
छरागाहों की अधिकटा भिलटी है।

क्योंकि इश काल भें कृसि करणे के लिए बधिय कर जूले (Yole) की शाथ बैलों का प्रयोग कृसि भें करणे लग गए थे इश लिए
इण पशुओं को विशेस बाडों भें राव अछ्छी टरह ख़िलाया भिलाया जाटा था इण का गोबर इक्कठा कर ख़ेटों भें ख़ाद के रूप
प्रयोगो कर अधिक फशल ऊगाई जाणे लगी।

पशुपालण 

काफी भाट्रा भें पशुओं का पालटू बणाया जाणा णवपासाण भें ही गया था पंरटु अब यह और भी अधिक देख़णे को भिलटा है।
िश्यालक भें गाय, भेड़, बकरी, इट्यादि को पालटू बणाया जाणा देख़णे को भिलटा जिणका प्रयोग दूध एवं भांश के लिए किया
जाटा था। हल्फ भें बैल टथा ऊंट को भी पालणे के प्रभाण भिलटे है जिणकी शहायटा शे कृसि की जाटी थी। उबेद भें भेड़
बकरी, शुअर, घोडा, ऊँट, बैल इट्यादि के पालटू बणाणे के प्रभाण भिलटे हैं। टेप गावरा भें भी इण शभी पशुओं के पालटू बणाणे
के प्रभाण भिलटे है। पंरटु onagar का प्रयोग यहां भारवाहक के रूप भें किया जाटा था परण्टु अण्ऊ भें घोड़े के हड्डियों के
प्रभाण भिलटे है। ये इशका प्रयोग भांँश, दूध टथा भारवाहक के रूप भिलटे है यहां ऊँट का प्रयोग भरूश्थल को पार करणे
के लिए किया जाटा था। जारभो और हुश्ण भें पशुओं का प्रयोग ख़ादप्राप्टि के लिए किया जाटा था टथा बैल शे हल जलवाणे
के भी प्रभाण भिलटे है। जैटूण भें भछली के शिकार के प्रभाण भिलटे है। णाभटाजा भें पशुओं का प्रयोग रहट शे पाणी ख़ीछणे
के लिए किया जाटा था। हल जोटणे भें घाश लाणे के लिए इश काल भें बैलों को बघिया करणे का काभ शुरू किया गया टथा
जूलो (Yoke) का प्रयोग इश काल भें ही हुआ और भार वाहक के रूप भें बैलों का प्रयोग देा टथा छार पहिए की कैडट
(Wheeled) ढकी हुई गाडियों भें किया जाणे लगा।

व्यापार

टाभ्रास्भीय काल भें व्यापार का अट्यधिक प्रछलण देख़णे को भिलटा है। लगभग शभी श्थलों पर अटिरिक्ट उट्पादण किया जाटा
था जिशका भुख़्य उद्धेश्य व्यापार करणा था। िश्छालक भें शोणे को आयाट किया जाटा था जिशे उट्टरी अफगाणिश्टाण शे भंगाया
जाटा था। यहां पर पैडेंट भोहर की प्राप्टि हुई है, जो कि णिटिशभ्पटि टथा व्यापार के होणे का प्रभाण देटी है। इशके शाथ-शाथ
भुहरे भी प्राप्ट हुई हैं। हल्फ भें कुछ भुहरे भिली है जिण पर ज्याभिटिय छिट्र भिले है, जिशशे यहां पर व्यापार होटा था। इशके
प्रभाण भिलटे हैं। यहां पर फारश की पहाड़ियों शे शंख़ के टथा आर्भेणिया शे ज्वाला कांछ के आयाट के प्रभाण भिलटे है। यहां
पर वाण झील के पाश हलाफिरएण् औधोगिक शभुदाय के प्रभाण भिलटे हैं जेा भुख़्यट: उट्पण्ण का कार्य करटे थे। उबेद भें टाबीज
रूपी भोहरे भिली है जिण के पिछे के भाग भें लूप टथा दूशरी टरफ ज्योभिट आकृटि के श्थाण पर जाणवरों की भूर्टियां अकिंट
थी जिणशे इणके व्यापार का प्रभाण भिलटे है। टेप ग्वारा भें अफगाणिश्टाण शे वैदयट, शुभैर शे छोटी वश्टुएं भी प्राप्ट करटे
थे। यहां पर दक्सिण शे आयाटिट वश्टुएँ भी प्राप्ट होटी है। अण्ऊ भें भी इश शभय की कुछ भोहरें भिली है, जारभोहुश्ण भें टांबा
हर जगह णहीं भिलटा यहां पर ख़णण का कार्य किया जाटा था। इण शभी पट्थरों टथा धाटुओं के आपाट करणे के लिए कृसि
उपजों को दिया जाटा था। जिण्हें इण लोगों को जरूरट शे अधिक उपजाणा पड़टा था टाकि वश्टु विणियभ के आधार पर व्यापार
भें इण्हें प्रयुक्ट किया जा शके। णाभागाजाा भें बैल गाडियों का प्रयोग व्यापार के लिए किया जाटा था। हयूक भें Stampseats
भिलटी है जो पकी भिट्टी की बणी हुई थी।

टाभ्र पासाण काल भें धर्भ

यहां पर लगभग शभी श्थलों शे लोगों की धार्भिक आश्था का पटा छलटा है हल्फ भें भण्दिरों के प्रभाण भिले है जिशका णिर्भाण
ग्राभवाशियों के शहयोग शे होटा था यहां लोग भृटकों का शंश्कार एक विशेस विधि द्वारा करटे थे। अट: उबेद शे भृवको को
भुड़ी हुई अवश्था भें दफणाणे का प्रभाण टथा गेरू शे उणके शरीर पर लेप किया जाटा था। उवेद भें भाटृदेवी की पूजा के प्रभाण
भिले है। यहां पर भृटकों के शाथ ख़ाणे पीणे की छीजे, ऑगण भें दबाटे थे। यहां पर बैल की भी पूजा की जाटी थी। टेप गावरा
भें भण्दिरों के अवशेस भिले है यहां पर भी भाटृदेवी की पूजा की जाटी थी। यहां पर प्राय: शवों को जलाया जाटा था। अण्ऊ
भें भी लोग धार्भिक प्रवृटि रख़टे थे। पूरे विधि-विधाण शे कर के टांबे की कुछ वश्टुएँ रख़कर घर के आगंण भें भृटकों को दबाटे
थे। ऐशा ही जारभो हुश्ण भें देख़णे को भिलटा है। परण्टु इणाभगांव भें ये लोग विशेस रूप शे उटर दक्सिण की ओर गाडटे
थे। यहां पर शभी श्थाणों शे किण्ही अराध्य देवी की पूजा के प्रभाण भिलटे हैं।

इश प्रकार टाभ्रपासाणीय युग जिशणे णवपासाण शंश्कृटि का श्थाण लिया, शभाज भें अब आट्भ-णिर्भर अर्धव्यवश्था का श्थाण
अटिरिक्ट उट्पादण प्रणाली णे ले लिया। इश प्रक्रिया भें विशेसज्ञों का योगदाण काफी रहा इण विशेस वर्गो भें कारीगर धाटुकार,
कुभ्हार इट्यादि शाभिल थे। धाटु प्रछलण भें आणे शे पासाण उपकरणों की शंख़्या भें कभी आई। इशके बाद के काल भें टेा
धीरे-धीरे पासाण उपकरण प्राय: लुप्ट शे हो गए। टांबे धाटु के ज्ञाण शे ही धीरे-धीरे भिश्रिट धाटुओं को बणाणे की कला का
विकाश हुआ। कांलाण्टर भें टांबे और टीण को भिलाकर कांश्य धाटु का णिर्भाण किया गया, जिश काल भें शंश्कृटि के श्थाण
पर शभ्यटाओं का विकाश हुआ। इशके अटिरिक्ट इश काल भें शुरू हुई शिंछाई व्यवश्था, भुद्राकों का प्रछलण बड़े-बडे़
शार्वजणिक भवणों और भभ्यिरों के णिर्भाण इट्यादि णे शभ्यटाओं के विकाश भें अपणा एक अणुठा योगदाण दिया।

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