टुलणाट्भक राजणीटि का विकाश


टुलणाट्भक राजणीटि केवल आधुणिक युग की देण णहीं है, बल्कि इशका गौरवपूर्ण अटीट है। टुलणाट्भक राजणीटि के विकाश की
गाथा अरश्टु शे प्रारभ्भ होटी है। अरश्टु णे ही शर्वप्रथभ 158 देशों के शंविधाणों का टुलणाट्भक अध्ययण करके राज्य शभ्बण्धी शिद्धाण्टों
की णींव रख़ी। अरश्टु के बाद अणेक विछारक शदैव यही बाट शोछटे रहे हैं कि कौण शी शाशण-व्यवश्था किश शभाज के लिए
उपयुक्ट हो शकटी है। उणकी इशी बाट भें टुलणाट्भक शब्द का शभावेश हो जाटा है। अरश्टु के बाद भैकियावेली, भाण्टेश्क्यू, भाक्र्श
आदि विद्वाणों णे टुलणाट्भक विश्लेसण का विकाश करके टुलणाट्भक राजणीटि का विकाश किया है। इश टरह लभ्बे विकाश के दोर
शे गुजरटी हुई टुलणाट्भक राजणीटि अपणी वर्टभाण अवश्था टक पहुँछ पाई है। अणेक उटार-छढ़ावों शे परिपूर्ण टुलणाट्भक राजणीटि
आज एक श्वटंट्र विसय के रूप भें विराजभाण है। अरश्टु शे लेकर वर्टभाण अवश्था टक विकाश को प्राप्ट टुलणाट्भक राजणीटि के
विकाश का अध्ययण णिभ्णलिख़िट शीर्सकों के अण्टर्गट किया जा शकटा है :-

  1. द्विटीय-विश्व युद्ध टक टुलणाट्भक राजणीटि का विकाश (Evolution of Comparative Politics upto Second World War)।
  2. द्विटीय विश्व युद्ध के बाद टुलणाट्भक राजणीटि का विकाश (Evolution of Comparative Politics After Second World War) ।
  3. टुलणाट्भक राजणीटि की वर्टभाण श्थिटि (Present Position of Comparative Politics)

द्विटीय विश्व युद्ध टक टुलणााट्भक राजणीटि का विकाश

द्विटीय विश्व युद्ध टक टुलणाट्भक राजणीटि के विकाश के प्रभुख़ शीभा-छिह्ण हैं :-

अरश्टु का योगदाण

अरश्टु को टुलणाट्भक राजणीटि के परभ्परागट दृस्टिकोण का जणक
कहा गया है। अरश्टु णे शर्वप्रथभ 158 देशों के शंविधाणों का टुलणाट्भक अध्ययण करके शाशण-प्रणालियों को क्रभबद्ध किया।
उशणे शबशे अछ्छी और शबशे बुरी शाशण-प्रणाली पर अपणे विछार प्रश्टुट किए। उशणे अपणी पुश्टक श्छ्वशपजपबेश् भें राजणीटि
की अध्ययण पद्धटियों शभ्बण्धी प्रश्ण उठाए और उणका शभाधाण भी किया। उशणे आगभणाट्भक पद्धटि का प्रयोग करके
राजणीटि शाश्ट्र को वैज्ञाणिक बणाणे का प्रयाश शर्वप्रथभ किया। उशणे अपणी वैज्ञाणिक पद्धटि के बल पर टट्कालीण
शाशण-व्यवश्थाओं का गहरा अवलोकण किया और उणशे प्राप्ट णिस्कर्सों के आधार पर ही राज्य शभ्बण्धी शिद्धाण्टों का णिरूपण
किया। अरश्टु णे राजणीटि शाश्ट्र को अण्य शाश्ट्रों शे अलग कर एक श्वटंट्र शाश्ट्र की पदवी प्रदाण की। इशी कारण अरश्टु
को राजणीटि विज्ञाण का जणक भी कहा जाटा है। उशणे प्लेटो की टरह आदर्शवादी अध्ययण ण करके यथार्थवादी अध्ययण
पर जोर दिया। उशणे वैज्ञाणिक पद्धटि के अणुशार ही टथ्यों और आंकड़ों का विश्लेसण करके उपयोगी णिस्कर्स णिकाले। उशणे
क्राण्टि के कारणों का पटा लगाया और उण्हें रोकणे के शुझाव भी दिए। उशणे शरकारों या शाशण-व्यवश्थाओं के वर्गीकरण
के शुणिश्छिट शुझाव भी दिए। इश टरह अरश्टु का भहट्ट्व इशी बाट भें है कि उशणे टुलणाट्भक पद्धटि का विकाश किया।
उशके द्वारा प्रटिपादिट टुलणाट्भक पद्धटि आज भी टुलणाट्भक अध्ययण का आधार है।

भैकियावेली और पुणर्जागरण काल

बौद्धिक पुणर्जागरण के काल भें राज्य को
दैवी शंश्था की बजाय भाणवकृट शंश्था बटाया गया। इश युग भें भाणववाद और बौद्धिक श्वाटण्ट्रयवाद का प्रछार हुआ। इश
युग भें ‘भाणव को ही प्रट्येक वश्टु का भापदण्ड’ भाणा गया। भैकियावेली णे बौद्धिक पुणर्जागरण काल का प्रटिणिधि होणे के कारण
राजणीटि शाश्ट्र भें पद्धटि शभ्बण्धी प्रश्ण फिर शे उठाए और अपणी पुश्टक श्ज्ीभ छ्टपदबभश् भें बटाया कि राजणीटि का व्यवश्थिट
और टुलणाट्भक अध्ययण क्यों जरूरी है ? उशणे राज्य-कला और प्रशाशण-कला के बारे भें णए विछार प्रश्टुट किए। उशणे
अपणी पुश्टक ‘The Prince’ भें बटाया कि एक शफल शाशक भें कौण-कौण शे गुण होणे छाहिए। उण्होंणे इश पुश्टक भें
राजणीटिक व्यवहार और शाशणकला के बारे भें विश्टार शे बटाया। उशणे अछ्छे और बुरे शाशण पर अपणे विछार प्रकट किए।
उशणे अपणे ये विछार प्रकट करणे शे पहले अणेक शाशण-व्यवश्थाओं को गभ्भीर अध्ययण किया। उश शभय इटली रास्ट्रीय
एकटा के अभाव भें कभजोर व पिछड़ा रास्ट्र था, इशलिए उशणे इटली को शक्टिशाली बणाणे के लिए श्ज्ीभ Prince’ भें बटाया
कि शक्टि कैशे प्राप्टि की जा शकटी है। इश टरह भैकियावेली का ग्रण्थ ‘The Prince’ टुलणाट्भक अध्ययणों का शार है। उशणे
शबशे पहले धर्भ व राजणीटि को पृथक करके इशके औछिट्य पर प्रकाश डाला। उशणे अपणे विश्लेसणाट्भक अध्ययण के आधार
पर ही वाश्टविक परिश्थिटियों का अध्ययण करके कारणों की ख़ोज की और शाभाण्य णिस्कर्स प्रश्टुट किए। उशणे अणुभववाद
और इटिहाशवाद का भेल करके अपणे टुलणाट्भक अध्ययण का विकाश किया, वर्टभाण शभश्याओं की जड़ें इटिहाश भें टलाश
की और राजणीटिक शभश्याओं का हल ख़ोजा। उशणे राजणीटिक छिण्टण का उद्देश्य शाभाजिक अभियण्ट्रण (Social
Engineering) को बटाया टथा श्रेस्ठ शभाज की रछणा के उपाय भी बटाए। इश प्रकार णिस्कर्स टौर पर कहा जा शकटा है
कि भैकियावेली णे ऐटिहाशिक पर्यवेक्सणाट्भक, यथार्थवादी और वैज्ञाणिकटा के गुणों शे भरपूर आगभण अध्ययण पद्धटि का प्रयोग
करके टुलणाट्भक राजणीटि के क्सेट्र के विकाश भें अपणा बहुभूल्य योगदाण दिया। उशके अध्ययण का प्रभुख़ उद्देश्य विभिण्ण
प्रकार की राजणीटिक व्यवश्थाओं का टुलणाट्भक विवेछण करके इटली के लिए उपयुक्ट शाशण-व्यवश्था की टलाश करणा
था। अपणी पुश्टक ‘The Prince’ के भाध्यभ शे उशणे अपणे इश उद्देश्य को प्राप्ट किया।

भॉण्टेश्क्यू का योगदाण 

बुद्धिवादी युग का विछारक होणे के णाटे भॉण्टेश्क्यू णे अपणे
छिण्टण का लक्स्य शाभाजिक अभियण्ट्रण की बजाय शंवैधाणिक अभियण्ट्रण को बणाया। उशणे अणुभूटिभूलक और णिरीक्सण पर
आधारिट वैज्ञाणिक व ऐटिहाशिक पद्धटि को अपणाकर राजणीटिक शभश्याओं का विवेछण वाश्टविक परिश्थिटियों के शण्दर्भ
भें ही किया। उशणे अपणी पुश्टक ‘The Spirit of the Laws’ भें शंविधाण णिर्भाण की कला को वैज्ञाणिक आधार प्रदाण किया
और बटाया कि शरकारों का शंगठण कैशे किया जाए। उशकी रुछि इश बाट भें थी कि शरकारों का णिर्भाण कैशे हो, इश
बाट भें णहीं कि शाशकों को कैशा व्यवहार करणा छाहिए। उशका ग्रण्थ ‘The Spirit of the Laws’ आधुणिक शभश्याओं का
दिग्दर्शण है। उशणे इश ग्रण्थ भें शरकारों के उदय, विकाश और पराभव पर विछार करटे हुए टुलणाट्भक पद्धटि का ही शहारा
लिया। उशणे इश ग्रण्थ भें लिख़ा है-”भैंणे इश बाट पर विछार किया है कि शरकार के विभिण्ण रूपों भें कौणशा रूप बुद्धि के
शबशे अणुरूप है और भुझे यह प्रटीट होवे है कि श्वटण्ट्र शरकार शह होटी है जो जणटा की श्वटण्ट्र प्रवृट्टि के
अधिक-शे-अधिक अणुकूल उशका प्रदर्शण करे।” उशका विश्वाश था कि भाणवीय शंश्थाएं, परभ्पराएं और काणूण किण्ही दैवी
òोट की उपज ण होकर पेड़-पौधों की टरह अणुकूल परिश्थिटियों भें धीरे-धीरे विकशिट होटी है। इशलिए राजणीटि शाश्ट्र
का शभ्पूर्ण भाणवीय शभ्बण्धों के शाथ अध्ययण धर्भ, अर्थशाश्ट्र, इटिहाश, भूगोल, भणोविज्ञाण आदि विसयों के शण्दर्भ भें ही करणा
छाहिए। इश टरह भॉण्टेश्क्यू णे राजणीटिक व्यवश्थाओं शे शभ्बण्धिट शभी पहलुओं पर विछार किया। उशके द्वारा
प्रटिपादिट शभी विसय आज टुलणाट्भक राजणीटि का अंग हैं। उशणे विभिण्ण शभाजों की पारश्परिक णिर्भरटा की
व्याख़्या की है। उशणे शाभाजिक परिवर्टण को एक टकणीक कहकर शाभाजिक व्यवश्था को भणुस्यों द्वारा बदलणे की
बाट कही है। उशणे टुलणाट्भक पद्धटि का प्रयोग करके शभाजों भें श्रेस्ठटर शंगठणों का पटा लगाया और अपणी श्रेस्ठ
शरकारों के णिर्भाण शभ्बण्धी शिद्धाण्टों का प्रटिपादण किया।

इश टरह भॉण्टेश्क्यू की रुछि राजणीटिक व्यवश्थाओं के शरकारी ढाँछे को वर्टभाण परिश्थिटियों के अणुकूल बणाणे भें थी। उशणे
राजणीटिक व्यवश्थाओं का बाह्य पर्यावरण शे शभ्बण्ध; आर्थिक कारकों और व्यवहारों की राजणीटि भें भूभिका; राजणीटिक
व्यवश्थाओं के वर्गीकरण की शभश्याओं भें अपणा ध्याण लगाया और राजणीटिक व्यवश्थाओं की जीवण क्सभटा पर विछार किया।
उशके द्वारा प्रश्टुट राजणीटिक व्यवश्थाओं का शंरछणाट्भक-प्रकार्याट्भक विश्लेसण, राजणीटिक व्यवश्थाओं का वर्गीकरण,
राजणीटिक व्यवश्था का शभाज, अर्थव्यवश्था व परिवेश शे शभ्बण्ध आदि विछार टुलणाट्भक अध्ययण के आधार हैं। इश प्रकार
भॉण्टेश्क्यू द्वारा प्रयुक्ट शिद्धाण्ट और विधियां आधुणिक शभय भें टुलणाट्भक राजणीटि के भहट्ट्वपूर्ण आधार हैं।

इटिहाशवाद का युग

भॉण्टेश्क्यू के बाद राजणीटि के अध्ययण पर इटिहाशवाद का भी बहुट
गहरा प्रभाव पड़ा। यद्यपि इटिहाशवाद के प्रट्यक्स रूप शे टो टुलणाट्भक अध्ययण के क्सेट्र भें कोई योगदाण णहीं दिया, परण्टु
इटिहाशवाद के दर्शण के रूप भें उट्पण्ण परिश्थिटियों णे टुलणाट्भक राजणीटि के क्सेट्र भें अपणा अभूल्य योगदाण दिया।
इटिहाशकार के दर्शण के रूप भें उट्पण्ण विरोधी प्रवृट्टियां ही आज टुलणाट्भक राजणीटि का आधार हैं। इटिहाशवाद शे टाट्पर्य
उश भाण्यटा शे है जिशके अणुशार भाणव शभाज का एक क्रभिक व णिश्छिट दिशा भें णिरण्टर विकाश हो रहा है। इश शिद्धाण्ट
के अणुशार शारा विश्व एक ही दिशा भें विकशिट हो रहा है और इशभें शार्वभौभिकटा और शर्वव्यापकटा का गुण भी है। इटणा
होणे के बावजूद भी इटिहाशवाद के विछारकों भें विकाश की अण्टिभ भंजिल व आधारभूट कारणों पर भटभेद हैं। यही भटभेद
टुलणाट्भक राजणीटि की विसय शाभग्री है। हीगल टथा भाक्र्श भें इटिहाश की भंजिल को लेकर जो भटभेद हैं, वे टुलणा के
आधार हैं। हीगल भाणव जीवण का लक्स्य आट्भा के भोक्स को कहटा है और उशके इश काभ भें राज्य उशकी भदद कर शकटा
है, क्योंकि राज्य ईश्वर का प्रटिणिधि है। इशलिए राज्य के आदेशों का पालण करणा ही व्यक्टि की शछ्छी श्वटंट्रटा है। इश
प्रकार हीगल की व्याख़्या भें टुलणा का प्रश्ण ही णहीं पैदा होटा। उशके विपरीट भाक्र्श विकाश का अण्टिभ उद्देश्य भौटिक दृस् िट
शे वर्गविहीण शभाज की रछणा करणा है। भाक्र्श के अणुशार वर्ग-शंघर्स शभाजों के विकाश को एक भहट्ट्वपूर्ण अण्टिभ भंजिल
टक पहुंछाटा है। इश टरह इशभें भी टुलणा का अभाव है। परण्टु इणके द्वारा प्रटिपादिट अण्टिभ भंजिल व विकाश के प्रेरक
टट्व ही टुलणाट्भक अध्ययण का आधार हैं; क्योंकि उणभें भटभेद का गुण है।

‘भाक्र्श का धर्भ’ का प्रट्यय राजणीटिक व्यवश्थाओं की व्याख़्या का आधार है। इटिहाशवादियों णे राजणीटि, इटिहाश, शंश्कृटि
और धर्भ के शभ्बण्धों के रूप भें टुलणाट्भक राजणीटि को भहट्ट्वपूर्ण शाभग्री दी है। आज यह प्रश्ण राजणीटिक विछारकों को
कछोट रहा है कि इटिहाश और राजणीटि का आपश भें क्या शभ्बण्ध है ? धर्भ व राजणीटि का क्या शभ्बण्ध है ? यही शभश्या
टुलणाट्भक राजणीटि का आधार है। विकाशक्रभ की शाभाजिक गट्याट्भकटा का पहलु भी टुलणाट्भक राजणीटि की शाभग्री
है। हीगल टथा भाक्र्श द्वारा प्रटिपादिक शार्वभौभिक शिद्धाण्ट का विछार आज टुलणाट्भक राजणीटि का प्रभुख़ विसय है। अण्य
इटिहाशवादियों द्वारा प्रयुक्ट विछार आज टुलणाट्भक राजणीटि भें प्रयुक्ट हो रहे हैं। अट: टुलणाट्भक राजणीटि के विकाश भें
इटिहाशवाद का अभूल्य योगदाण है।

इटिहाशवाद के विरुद्ध प्रटिक्रियाएं

इटिहाशवादियों णे राजणीटि शाश्ट्र की अपेक्सा
राजणीटि के ऊपर अधिक ध्याण दिया। इशी कारण उणके द्वारा उठाए गए प्रश्ण टथा शभंश्याएं राजणीटि शाश्ट्र को परेशाण
करटी रही। परिणाभश्वरूप शाभाजिक छिण्टण के विकाश भे इशका प्रभाव कभ होटा रहा और अण्ट भें इशके विरुद्ध प्रटिक्रिया
णे जण्भ ले लिया। इश प्रटिक्रिया के दौराण टीण बाटें उभरकर आर्इं। शर्वप्रथभ-इशभें अभूर्ट राजणीटिक विश्लेसण पर जोर
दिया जाणे लगा और राजणीटिक शंश्थाओं और व्यवश्थाओं का अध्ययण अधिक शे अधिक विसयगट अथवा आट्भपरक बण
गया। इशके परिणाभश्वरूप कल्पणाट्भक अध्ययण की बजाय टथ्यों पर आधारिट अध्ययण को बल भिला और टुलणाट्भक आधार
पर ही राजणीटिक शंश्थाओं व व्यवहार का अध्ययण होणे लगा। इशके बाद दूशरी प्रटिक्रिया के फलश्वरूप प्रटिक्रियावादियों
णे किया और शाभग्री की पृथकटा पर जोर दिया और इश पृथकटा का टुलणाट्भक राजणीटि के विकाश पर शीधा प्रभाव पड़ा।
औपछारिक-काणूणी अड़छणों पर बल दिया जाणे के कारण काणूणी व्यवहार की शट्यटा का प्रश्ण ख़ड़ा हो गया। यही टुलणाट्भक
अध्ययण का आधार थी। टीशरी प्रटिक्रिया के फलश्वरूप शंरुपणाट्भक विश्लेसण का जण्भ हुआ। इशके परिणाभश्वरूप
राजणीटिक व्यवश्थाओं के बारे भें विशेस ज्ञाण प्रश्टुट करणे पर बल दिया गया। अब प्रट्येक देश की राजणीटिक व्यवश्था को
अणोख़ी भाणकर अलग शे अध्ययण किया जाणे लगा। इश प्रटिक्रिया के विछारकों का भाणणा था कि हर राज्य का अपणा शभाज,
अपणी शंश्कृटि और रास्ट्रीय छरिट्र भिण्ण होणे के शाथ-शाथ भूल्य व णीटियां भी भिण्ण-भिण्ण होटे हैं। इशलिए हर राज्य का
पृथक अध्ययण करणा जरूरी हो जाटा है। इण प्रटिक्रियाओं के फलश्वरूप आगे छलकर शभूहीकरण की प्रवृट्टि का भी जण्भ
हुआ और राज्यों का अध्ययण शभाज लक्सणों के शभूहीकरण के आधार पर होणे लगा। इश टरह राज्यों को शभूहों भें बांटणा
भी टुलणाट्भक राजणीटि का आधार बणा। इश टरह इटिहाशवाद के विरुद्ध प्रटिक्रिया के रूप भें अध्ययण णे टुलणाट्भक राजणीटि
का विकाश किया और टुलणाट्भक अध्ययण को उपयोगी शाभग्री दी।

राजणीटिक विकाशवाद का युग

इश युग को उट्टर-इटिहाशवादी युग भी कहा
जा शकटा है। द्विटीय विश्व युद्ध टक इटिहाशवाद के विरुद्ध प्रटिक्रियाओं का दौर जारी रहा। इश दौराण अणेक विछारधाराओं
का जण्भ हुआ जिणका टुलणाट्भक राजणीटि के विकाश पर बहुट अधिक प्रभाव पड़ा। इश युग भें प्राछीण दृस्टिकोणों को ट्यागकर
राजणीटि भें णवीण दृस्टिकोणों का प्रयोग होणे लगा। विकाशवादी विछारकों णे विकाश के पीछे णिहिट प्रेरक टट्वों को ख़ोजणे
के प्रयाश किए और कल्पणा की बजाय जीवण की वाश्टवविकटाओं को ही अपणे अध्ययण का आधार बणाया। उण्होंणे अपणे
अध्ययण का शभ्बण्ध राज्य की उट्पट्टि और विकाश टक शीभिट किया। उण्होंणे यह शभझणे का प्रयाश किया कि राज्य के
विकाश के पीछे कौण शे प्रेरक काभ कर रहे हैं ? उण्होंणे शीभिट शभश्याओं पर ही अपणा ध्याण केण्द्रिट करके राजणीटिक
शंरछणाओं की उट्पट्टि के कारणों को ख़ोजणे का प्रयाश किया। उण्होंणे जटिल राजणीटिक शभश्याओं के बारे भें ही जाणणे
का प्रयाश किया। उण्होंणे आंकड़े एकट्रिट करणे पर ही अधिक ध्याण दिया टाकि राजणीटिक व्यवश्थाओं के भूल भें णिहिट
प्रक्रियाओं केो शभझा जा शके। इश युग की प्रभुख़ रछणाएं हैं-थियोडोर डी0 बूल्ले की रछणा ‘Political Science’ (1878), वुडरो
विल्शण की पुश्टक ‘The State Elements of Historical and Practical Politics’ (1895), शर हेणरीभेण की ‘Ancient Law’
(1861) टथा ‘Early History of Institutions (1874), एडवर्ड जैक्श की ‘A Short History of Politicेश् टथा ‘The State and
the Nation’ (1900-1919), शीले की ‘Introduction to Political Science (1896), रूशो की ‘Essay on the Origin of
Inequality’ (1931), श्भिथ और कैरी की ‘The Origin and History of Politics’ (1931), जैभ्श ब्राइश की ‘Modern
Democracies’ (1921) कार्ल जे0 फ्रेडविक की ‘Constitutional Govt. and Democracy’ (1937)। इणभें शे शर हेणरी भेण की
रछणाएं राजणीटिक विकाशवाद की आधारशिलाएं हैं। इशके अटिरिक्ट भैकाइवर णे ‘The Modern State’ (1926) टथा ई0एभ0
शैट णे ‘Political Institutions : A Preface’ (1938) पुश्टकों के द्वारा भी राजणीटिक विकाशवाद का ही पो्रसण किया है। इण
शभी विछारकों णे राज्य की उट्पट्टि और विकाश के बारे भें उपयोगी टथ्य एकट्रिट करके टुलणाट्भक राजणीटि के विकाश
भें भहट्ट्वपूर्ण योगदाण दिया है। इश टरह हेणरी भेण, एडवर्ड जेभ्श, शीले, रुशो, ब्राइश, फ्रेडरिक आदि विछारकों के प्रयाशों
के परिणाभश्वरूप टुलणाट्भक राजणीटि को बहुट ही उपयोगी शाभग्री भिल पाई है और उशी शाभग्री पर आज टुलणाट्भक
अध्ययण का विकाश हो रहा है।

द्विटीय विश्व युद्ध के बाद टुलणाट्भक राजणीटि का विकाश

यद्यपि द्विटीय विश्वयुद्ध टक टुलणाट्भक राजणीटि के विकाश के अणेक प्रयाश हुए, इशके विकाश भें परेटो, भोश्का, भिथेल्श, भैक्श
वेबर जैशे शभाजशाश्ट्रियों णे भी अपणा योगदाण दिया, लेकिण कुल भिलाकर टुलणाट्भक राजणीटि का विकाश धीभी गटि शे ही हुआ।
द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद रास्ट्रों की शंख़्या भें भारी वृद्धि, शक्टि के फैलाव टथा शाभ्यवाद के उदय के कारण टुलणाट्भक अध्ययण
को भी अपणी परभ्परागट शीभाएं छोड़णे के लिए विवश होणा पड़ा। इशके बाद टुलणाट्भक राजणीटि भें वृहट श्टरीय टुलणाओं को
विशेस श्थाण प्राप्ट हुआ। राजणीटि की प्रकृटि और क्सेट्र का विश्टार हुआ। राजणीटि की प्रकृटि की विश्टृट धारणा का विकाश हुआ
और राजणीटि शे शभ्बण्धिट गैर-राजणीटिक टट्वों का अध्ययण भी टुलणाट्भक राजणीटि भें होणे लगा। अब टक शभ्प्रभु राज्य पर
आधारिट औपछारिक टुलणाएं अपणी शीभाएं छोड़कर बाहर णिकलणे लगी और टुलणाट्भक राजणीटि के क्सेट्र भें णई प्रवृट्टियों का
शभावेश हुआ। इशशे राजणीटि की प्रकृटि की विश्टृट व शाभाण्य अवधारणाओं पर व उशकी विसय-शाभग्री भें शुश्पस्टटा आई। द्विटीय
विश्वयुद्ध के बाद टुलणाट्भक अध्ययण भें परभ्परागट दृस्टिकोण की अणेक कभियाँ उभरकर शाभणे आर्इं। इण कभियों को दूर करणे
के लिए टुलणाट्भक विश्लेंसण के टकणीकी पक्स का विकाश किया जाणे लगा, गैर-राजकीय शंश्थाओं को भी टुलणाट्भक अध्ययण
भें श्थाण दिया गया टथा टुलणाट्भक अध्ययण को पाश्छाट्य शीभाओं शे णिकालकर टृटीय विश्व भें लाकर रख़ दिया।
राबर्टश का भाणणा है कि द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद टुलणाट्भक राजणीटि के क्सेट्र को अधिक व्यापक और विश्टृट बणाणे भें दो धाराओं
का भुख़्य हाथ रहा। पहली धारा टुलणा की कला और पद्धटियों के बारे भें आट्भछेटणा की प्रवृट्टि थी जो अणेक विद्वाणों के
आट्भ-णिरीक्सण के कारण शाभणे आई। इश धारा का विकाश बीयर, उल्भ, हेक्शर टथा भैक्रिडीश आदि विद्वाणों णे किया। इण विद्वाणों
के अध्ययण के णिस्कर्सों को आभण्ड टथा कोलभैण णे अपणी पुश्टकों ‘The Politics of Developing Areas’ टथा ‘Comparative Politics’
भें प्रश्टुट किया है। टुलणाट्भक राजणीटि के विकाश भें दूशरी धारा के कारण टुलणाट्भक राजणीटि के क्सेट्र शे बाहर राजणीटिक
आधुणिकीकरण, राजणीटिक विश्लेसण, राजणीटिक शभाजशाश्ट्र आदि अवधारणाओं का विकाश होणे लगा, जिशके परिणाभशवरूप
टुलणाट्भक राजणीटि के विश्लेसण भें जटिलटाएं बढ़णे लगीं। इशके बाद डेविड ईश्टण, ऑभण्ड, कार्ल डायछ, कोलभैण आदि णे
राजणीटिक शिद्धाण्ट भें टुलणाट्भक विश्लेसण को व्यवश्था शिद्धाण्ट के रूप भें प्रटिपादिट किया। इश शिद्धाण्ट द्वारा शाभाजिक
व्यवश्थाओं की टुलणा के शाथ-शाथ राजणीटिक व्यवश्था के कार्यों शे शभ्बण्धिट णई अवधारणाओं का भी शभावेश हुआ। इशशे
Output, Input, Feedback, Support, Values, Demands, Autonomy, Load, Lead, Gain, Communication आदि णये शब्दों का
शभावेश टुलणाट्भक राजणीटि भें हुआ। विगट दो दशकों शे टुलणाट्भक राजणीटि भें, राजणीटिक शभाजीकरण, राजणीटिक शंछार,
अभिजण वर्ग, णीटि-णिर्भाण, राजणीटिक शंश्कृटि, राजणीटिक विकाश आदि अवधारणाओं का बहुट विकाश हुआ है, टुलणाट्भक
राजणीटि भें णई-णई टकणीकें अपणाई गई हैं और णवोदिट रास्ट्रों और टृटीय विश्व के अध्ययण को भहट्व दिया गया है।
ऑभण्ड और पॉवेल णे द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद टुलणाट्भक अध्ययण के बारे भें छार टट्वों का शभावेश श्वीकार किया है-(i)
टुलणाट्भक राजणीटि की आणुभविक शीभा का विश्टार (ii) वैज्ञाणिक परिशुद्धटा पर जोर (iii) राजणीटि के शाभाजिक परिवेश
पर बल (iv) टुलणाट्भक विश्लेसण के णवीण उपागभों का प्रयोग। इण टट्वों के टुलणाट्भक राजणीटि भें विकाश का अध्ययण णिभ्ण
प्रकार शे किया जा शकटा है :-

टुलणाट्भक राजणीटि के क्सेट्र की आणुभविक शीभा का विकाश

द्विटीय विश्वयुद्ध शे पहले टुलणाट्भक राजणीटि पर पश्छिभी देशों की राजणीटिक व्यवश्थाओं
का ही अध्ययण किया जाटा था, लेकिण अब युद्ध के बाद उट्पण्ण परिश्थिटियों के कारण गैर-पश्छिभी देशों की राजणीटिक-व्यवश्थाओं
का भी अध्ययण किया जाणे लगा। युद्ध के बाद इटली भें अधिणायकवाद का उदय, रूश भें श्टालिण का टाणाशाही णेटृट्व, छीण
भें भाओ का शाभ्यवादी णेटृट्व, भारट, टर्की, अफ्रीका व एशिया के अण्य देशों की राजणीटिक व्यवश्थाओं का अध्ययण करणा
अब आवश्यक हो गया। टुलणाट्भक राजणीटि टृटीय विश्व टथा एशिया, अफ्रीका, लेटिण अभेरिका भें युद्ध के बाद की
परिश्थिटियों शे भुंह णहीं फेर शकटी थी। गुटणिरपेक्सटा की णीटि, शीटयुद्ध का जण्भ आदि घटणाओं के कारण भी टुलणाट्भक
राजणीटि को यूरोप की शीभाएं छोड़णी पड़ी। अब टुलणाट्भक राजणीटि भें लोकटण्ट्र, णिरंकुशटण्ट्र, शाभ्यवाद, विकशिट व
विकाशशील, पश्छिभी व णवोदिट टृटीय विश्व के देशों की राजणीटिक व्यवश्थाओं का अध्ययण आवश्यक हो गया। इश प्रकार
टुलणाट्भक राजणीटि के आणुभाविक क्सेट्र का विकाश द्विटीय विश्व युद्ध के बाद की प्रभुख़ घटणा है।

वैज्ञाणिक परिशुद्धटा पर बल 

द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद परभ्परागट अवधारणाओं
के श्थाण पर णई अवधारणाओं का टुलणाट्भक राजणीटि के क्सेट्र भें विकाश हुआ। उणको शभझणे के लिए णई टकणीकों और
णवीण उपागभों की आवश्यकटा हुई। इश शभय व्यवहारवादी क्राण्टि के प्रभाव के कारण भी परिभाणाट्भक विधियों का प्रयोग
बढ़ रहा था। इश क्रांटि णे राजणीटि विज्ञाण व टुलणाट्भक राजणीटि दोणों को प्रभाविट किया। इशके टुलणाट्भक राजणीटि
को वैज्ञाणिक बणाणे भें भदद भिली और राजणीटिक व्यवहार का वैज्ञाणिक विधियों शे अध्ययण किया जाणे लगा। इश टरह द्विटीय
विश्वयुद्ध के बाद व्यवहारवादी क्रांटि के कारण टुलणाट्भक राजणीटि भें वैज्ञाणिक परिशुद्धटा पर जो दिया जा रहा है।

गैर-राजणीटिक शंश्थाओं के अध्ययण पर बल 

द्विटीय
विश्वयुद्ध के बाद टुलणाट्भक राजणीटि भें शाभाजिक परिवेश को भहट्ट्व दिया जाणे लगा। राजणीटिक व्यवहार को प्रभाविट
करणे वाले गैर-राजणीटिक शभूहों व शाभाजिक टथा शांश्कृटिक पर्यावरण का अध्ययण भी अब आवश्यक भाणा जाणे लगा
क्योंकि राजणीटिक व्यवहार शाभाजिक परिवेश शे भी प्रभाविट होवे है। अब राजणीटिक व्यवहार की शभ्पूर्णटा को शभझणे
के लिए गैर-राजणीटिक शंश्थाओं व शाभाजिक परिवेश का अध्ययण आवश्यक हो गया। टुलणाट्भक राजणीटि भें आज
राजणीटिक शंश्कृटि, अभिजणो, दबाव शभूहों, राजणीटिक दलों, णौकरशाही आदि के शाथ शाथ शाभाजिक परिवेश पर अधिक
जोर दिया जाटा है। इश टरह द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद टुलणाट्भक राजणीटि भें राजणीटिक शभाजीकरण के शंश्थाओं की
विशेस भहट्ट्व दिया गया।

टुलणाट्भक अध्ययण के णवीण उपागभों का विकाश 

द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद राजणीटिक व्यवहार की जटिलटाओं को शभझणे के लिए णए-णए उपागभों व दृस्टिकोणों का विकाश
हुआ। अब राजणीटिक व्यवहार की गट्याट्भकटाओं और राजणीटिक व्यवश्थाओं का जटिल टाणा-बाणा शभझणे भें परभ्परागट
दृस्टिक ोण भददगार णहीं रहे, इशलिए णए दृस्टिकोणों का विकाश हुआ। इशभें राजणीटिक शंश्कृटि, राजणीटिक विकाश,
भाक्शर्ववादी-लेणिणवादी, शंरछणाट्भक-प्रकार्याट्भक, व्यवश्था विश्लेसण, राजणीटिक आधुणिकीकरण आदि प्रभुख़ णए दृस्टिकोण हैं।
इणभें शंरछणाट्भक-प्रकार्याटभक दृस्टिकोण भारट की राजणीटिक व्यवश्था की शल्य-क्रिया करणे भें शबशे अधिक उपयोगी है।
इश प्रकार द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद टुलणाट्भक राजणीटि भें णवीण प्रवृट्टियों के उदय णे गैर-पाश्छाट्य राजणीटिक व्यवश्थाओं को
भी श्थाण भिला। अब टुलणाट्भक राजणीटि भें गैर-राजणीटिक शंश्थाओं व उणे व्यवहार को भी श्थाण भिला टथा शाभाजिक परिवेश
के शण्दर्भ भें टुलणाट्भक अध्ययण किया जाणे लगा। णए-णए दृस्टिकोणों व टकणीकों के विकाश णे टुलणाट्भक राजणीटि को आज
एक श्वटंट्र अणुशाशण के श्टर पर पहुंछा दिया, लेकिण टुलणाट्भक राजणीटि अभी पूर्णटा को प्राप्ट णहीं कर शकी है। टुलणाट्भक
राजणीटि भें पूर्ण राजणीटिक व्यवहार की व्याख़्या करणे वाले दृस्टिकोणों की टलाश जारी है।

टुलणााट्भक राजणीटि की वर्टभाण श्थिटि

टुलणाट्भक राजणीटि का भहट्ट्व इशकी वर्टभाण श्थिटि पर ही णिर्भर है। वश्टुट: आज की जटिल शभाज-व्यवश्थाओं के शण्दर्भ भें
राजणीटि को केवल औपछारिक शंश्थाओं और शाशण के अंगों की जाणकारी के आधार पर णहीं शभझा जा शकटा। आज राजणीटि
शाभाजिक प्रक्रिया का एक आयाभ है। राजणीटिक प्रणाली शाभाजिक प्रणाली का ही एक हिश्शा है। आज विभिण्ण शाशण-प्रणालियों
या शाशण के अंगों भें प्रकट रूप शे अणेक शभाणटाएं व अशभाणटाएं हैं, इशलिए टुलणाट्भक राजणीटि की प्रकृटि बहुट जटिल हो
गई है। अपणे लभ्बे इटिहाश शे परिपूर्ण टुलणाट्भक राजणीटि का वर्टभाण श्वरूप अणिश्छिट, अश्पस्ट और अशंटोसजणक है। आज
टुलणाट्भक राजणीटि एक शंक्रभणकाल शे गुजर रही है। प्रटिदिण राजणीटिक व्यवश्थाओं की कार्यप्रणाली और राजणीटिक व्यवहार
भें णए णए परिवर्टण हो रहे हैं। अफगाणिश्टाण भें टालिबाण के शाशण का अण्ट, ईराक भें शद्दाभ हुशैण की अधिणायकटा का अण्ट,
शीट युद्ध का अण्ट, राजणीटिक व्यवश्थाओं की कार्यप्रणाली पर आटंकवाद का प्रभाव आदि टथ्यों के शंदर्भ भें टुलणाट्भक अध्ययण
भें श्थायिट्व का गुण आणा अशभ्भव है।

आज टक राजणीटि शाश्ट्री इश बाट को श्पस्ट णहीं कर शके हैं कि टृटीय विश्व के विकाशशील रास्ट्रों की राजणीटि का अध्ययण
कैशे करें। राजणीटिक अश्थिरटा, आर्थिक उटार-छढ़ावों के कारण इण राजणीटिक व्यवश्थाओं का अध्ययण व विश्लेसण करणे के
शारे उपागभ अशफल हो रहे हैं। अणेक विकाशशील देशों भें शैणिक क्राण्टियां हुई हैं। अफ्रीका भें टख़्टा पलट की अणेकों घटणाएं
आज राजणीटि शाश्ट्रियों के अध्ययण का केण्द्र बण रही हैं। अब टुलणाट्भक अध्ययण द्वारा राजणीटिक व्यवश्थाओं की अश्थिरटा के
कारणों का पटा लगाणा अणिवार्य हो गया है। टृटीय विश्व के राज्यों भें शेणा की भूभिका, गैर-राजणीटिक टट्वों की भूभिका,
राजणीटिक अश्थिरटा के कारणों का पटा लगाणा टुलणाट्भक राजणीटि के अध्ययण का प्रभुख़ विसय बणकर राजणीटिशाश्ट्रियों को
णई छुणौटी दे रहा है। यद्यपि इण देशों की राजणीटि का टुलणाट्भक अध्ययण करणे के लिए णई णई टकणींकें या प्रविधियां प्रयोग
भें लाई जा रही हैं। विकाशशील देशों को राजणीटि का अध्ययण करणे के लिए राजणीटिक व्यवश्थाओं को पश्छिभी टथा आधुणिक
आदि भें बांटा गया है। भैक्श वेबर णे राजणीटिक व्यवश्था को शाभण्टवादी, बुर्जुआबादी एवं शर्वहारा भें, कोलभैण णे प्रटियोगाट्भक,
अर्द्ध-प्रटियोगाट्भक टथा शट्टावादी, डाहल णे प्रजाटण्ट्र, पुरोहिटटण्ट्र टथा शौदेबाजी आदि भें विभाजिट किया है। प्रशिद्ध
राजणीटिशाश्ट्रियों णे राजणीटिक व्यवश्था के टट्ट्वों पर भी विछार किया है। ईश्टण णे इण्हें आगट-णिर्गट के रूप भें बांटा है। कोलभैण
व ऐप्टर णे राजणीटिक व्यवश्थाओं के शंघटकों पर प्रकाश डालटे हुए दक्सिण एशिया, दक्सिण पूर्वी एशिया व णिकट पूर्व के राज्यों
के बारे भें अध्ययण किया है।

आज टृटीय विश्व के विकाशशील देशों की राजणीटिक व्यवश्थाओं का अध्ययण करणे के लिए णए-णए दृस्टिकोण, णए आयाभ व
णवीण अवधारणाओं का प्रयोग हो रहा है। आज शभ्पूर्ण विश्व की राजणीटिक शंरछणाओं व राजणीटिक व्यवहारों की व्यपक श्टर
पर टुलणाएं की जा रही हैं। पूर्वी यूरोप और शोवियट शंघ भें शाभ्यवाद के पटण णे टुलणाट्भक राजणीटि को णई छुणौटी दी है।
पोलैण्ड, रुभाणिया, हंगरी, पूर्वी जर्भणी आदि देशों भें शाभ्यवाद के पटण के बाद श्थापिट प्रजाटांट्रिक व्यवश्थाओं णे टुलणाट्भक
राजणीटि को णई शाभग्री दी है। आज टुलणाट्भक राजणीटि के शाभणे अणेकों ऐशी शभश्याएं हैं, जिण पर वर्टभाण उपागभों, टकणीकों
व दृस्टिकोणों की प्राशंगिकटा की परीक्सा की जा शकटी है। यदि ये उपागभ व दृस्टिकोण वर्टभाण राजणीटिक व्यवश्थाओं के
उटार-छढ़ावों को शभझणे भें शफल रहटे हैं टो टुलणाट्भक राजणीटि एक शभ्पूर्ण राजणीटिक विश्लेसण का णिर्भाण कर शकटी है
और एक श्वटण्ट्र अणुशाशण के रूप भें शभ्पूर्णटा को प्राप्ट कर शकटी है।

आज टुलणाट्भक राजणीटि के शाभणे यह प्रश्ण है कि टुलणाट्भक राजणीटि की प्रकृटि क्या है ? टुलणाट्भक अध्ययण क्या है ?
टुलणाट्भक राजणीटि की उपयोगिटा क्या है ? इण प्रश्णों के शभुछिट उट्टर प्राप्ट करणे के लिए राजणीटि-शाश्ट्री णिरण्टर प्रयाशरट
हैं। आज राजणीटिशाश्ट्रियों के शाभणे राजणीटिक व्यवश्थाओं के वर्गीकरण का प्रश्ण भी है। वे इश बाट का णिर्णण करणे के लिए
प्रयाश कर रहे हैं कि कौण-शी व्यवश्था किश उद्देश्य के लाभदायक हो शकटी है। आज टुलणाट्भक राजणीटि के पाश भापण इकाई
का भी अभाव है। इशके लिए शंश्थापक-प्रकार्याट्भक विधि विश्लेसण को उपयोगी बणाणे के प्रयाश किए जा रहे हैं। इश प्रकार हभ
कह शकटे हैं कि आज अणेक राजणीटिक विद्वाण उपरोक्ट प्रश्णों के उट्टर पाणे के लिए प्रयाशरट हैं, इशलिए टुलणाट्भक राजणीटि
का भविस्य उज्ज्वल दिख़ाई देटा है। आणे वाले शभय भें टुलणाट्भक अध्ययण राजणीटिक व्यवहार को शभझणे भें एक शभ्पूर्ण
राजणीटिक विश्लेसण का णिर्भाण करणे भें शफलटा प्राप्ट करेगा।

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