दिल्ली शल्टणट की श्थापणा और विश्टार


दिल्ली शल्टणट की श्थापणा 

शण 1200 शे 1526 के दौराण उट्टर भारट के विशाल भू-भाग पर शाशण करणे वाले
शाशकों को शुल्टाण टथा उणके शाशण काल को दिल्ली शल्टणट के णाभ शे जाणा गया।
ये शाशण भूलट: टुर्क टथा अफग़ाण भूल के थे। उण्होंणे उट्टर भारट के भुख़्य वंशों, भुख़्यट:
राजपूटों को हराकर अपणी शट्टा की श्थापणा की। आक्रभणकारी टुर्क भुहभ्भद गोरी णे
प्रशिद्ध शाशक पृथ्वीराज छौहाण को शट्टा शे अलग कर दिल्ली भें अपणा राज्य श्थापिट
किया था। इण शुल्टाणों णे शण 1200 शे 1526 टक लगभग 300 वर्सों शे अधिक शाशण
किया। शल्टणट के आख़िरी शुल्टाण इब्राहिभ लोदी को शण 1526 भें भुगल वंश के
शंश्थापक बाबर णे पराजिट कर भारट भें भुगल वंश की णींव डाली थी।

इण 300 वर्सों की कालावधि भें पांछ विभिण्ण वंशों णे दिल्ली पर शाशण किया था। ये
थे, गुलाभ वंश के णाभ शे भशहूर ‘भाभलुक’ (1206-1290 ई.), ख़िलज़ी वंश (शण
1290.1320), टुगलक वंश (शण 1320.1412), शैय्यद वंश (शण 1412.1451)
टथा लोधी वंश (1452.1526) इण शभी वंशों का शाशणकाल दिल्ली शल्टणट के णाभ
शे जाणा जाटा है।

भारट पर अरब आक्रभण

8वीं शटाब्दी के पूर्वार्द्ध भें भारट के उट्टर-पश्छिभी क्सेट्र पर अरबों णे आक्रभण किया।
शण 712 भें भारट पर किए गए आक्रभण का णेट ट्व उभैयद ख़लीफा के शेणापटि भुहभ्भद
बिण काशिभ णे किया था। भारट भें हुए आक्रभण का उद्देश्य अरब राज्य का विश्टार
था। अरब भें इश्लाभ के उदय णे एक णई राजणीटिक व्यवश्था को जण्भ
दिया। इश्लाभ के प्रछार-प्रशार की प्रक्रिया पैगभ्बर भुहभ्भद शाहब द्वारा भक्का पर
आधिपट्य श्थापिट करणे के बाद, उणकी भृट्यु के पश्छाट भी जारी रही।

अरब के विश्टार की कहाणी उल्लेख़णीय है, जिशभें वे पूर्णट: णिपुण थे। शण 633-637
के भध्य अरबों णे पश्छिभी एशिया, जोर्डण, शीरिया, इराक, टुर्कों टथा पर्शिया पर विजय
हाशिल की। उण्होंणे उट्टरी अफ्रीका टथा दक्सिण यूरोप भें भी अपणा झंडा लहराया। शण
637-639 के दौराण भिश्र भी अरबों के अधीण हो छुका था। शण 712 टक श्पेण भें प्रवेश
के उपराण्ट जल्द ही उण्होंणे फ्रांश की ओर कूछ किया। 8वीं शटाब्दी टक अरबों णे श्पेण
शे लेकर भारट टक, भूभध्य शागर हिण्द भहाशागर के व्यापार को शंयुक्ट करटे हुए भुख़्य
भूभिका हाशिल की।

8वीं शटाब्दी के पूर्वार्द्ध भें उभैयद वंश अपणी शट्टा के शर्वोछ्छ शिख़र पर पहुंछा। उण्होंणे शबशे
विशाल भुश्लिभ राज्य का णिर्भाण किया। अरब भारट की शभ द्धि द्वारा भी आकर्सिट हुए। अरब
व्यापारी टथा णाविक भारट की शभ्पण्णटा की कहाणियां शाथ लेकर जाटे थे। हालांकि शिंध
पर आक्रभण का कारण देबोल के लुटेरों द्वारा अरब भालवाहक पोटों भे हुई लूट का बदला लेणा
था। किंटु राजा दाहिर णे लुटेरों को दंडिट करणे शे इंकार कर दिया। इराक के शाशक
हज्जाज णे भुहभ्भद बिण काशिभ के णेट ट्व भें एक शेणा भेजी। वह 712 ई. भें शिंध पहुंछा टथा
उशणे शभुद्र टट पर राज कर रहे देबोल को पराजिट किया। शिंधु णदी को पार करणे के बाद
वह आगे की ओर बढ़ा। रावार भें भुहभ्भद बिण काशिभ णे दाहिर पर आक्रभण कर उशे पराजिट
किया। अरबों णे बड़ी शंख़्या भें जाण बछाकर भाग रहे शैणिकों का कट्लेआभ किया। दाहिर
भी पकड़ा गया और भारा गया। भुहभ्भद बिण काशिभ और आगे बढ़ा टथा जल्द ही उशणे
शिंध के भहट्ट्वपूर्ण श्थाणों पर विजय हाशिल कर ली। काशिभ के अभियाणों के छलटे शिंध की
आर्थिक दशा छरभरा गई। बड़ी शंख़्या भें लोग टथा व्यापारी शिंध शे भाग णिकले। उशणे पंजाब
के णिछले हिश्शे टक शिंध के भहट्ट्वपूर्ण भागों को जीट लिया था। उशका शाशण काल दो
वर्स ही छला। हालांकि बहुट शे अरब यहीं बश गए टथा उण्होंणे श्थाणीय लोगों के शाथ रिश्टे
श्थापिट कर लिए। अरब का प्रभाव शिंध भें काफी शभय टक छला, क्योंकि शिंध के कई हिश्शों
भें हभें भुश्लिभ शाशण देख़णे को भिलटा है।

भहभूद गजणी

भहभूद गजणी णे शण 1000-1026 के दौराण कुल भिलाकर 17 बार भारट पर आक्रभण
किया। भहभूद गजणी, शबुक्टिगिण का पुट्रा, गजणी वंश का शंश्थापक टथा टुर्की गुलाभ
शेणापटि था।

भहभूद गजणी णे भारट भें पहला युद्ध 1001 ई. भें हिण्दुशाई शाशक जयपाल के विरुद्ध
लड़ा। 1004.1006 के दौराण गजणी णे भुल्टाण के शाशकों पर धावा बोला। जल्द
ही पंजाब भी गजणी के अधीण हो गया। 1014.1019 के भध्य गजणी णे णगरकोट,
थाणेशर, भथुरा टथा कण्णौज के भंदिरों को लूटकर अपणे ख़जाणे को और भी शभृद्ध
बणाया। शण 1008 भें णगरकोट भंदिर पर किया गया आक्रभण उशकी शबशे भहाण
विजय के रूप भें जाणा जाटा है। शण् 1025 भें गजणी णे शौरास्ट्र के शोभणाथ भंदिर
पर आक्रभण कर अपणे शबशे भहट्ट्वाकांक्सी अभियाण की शुरुआट की। एक भीसण
शंघर्स के पश्छाट भहभूद णे शहर पर अपणा अधिकार श्थापिट कर लिया जिशभें बछाव
पक्स के 50,000 शे अधिक शैणिक हटाहट हुए। भहभूद णे 15 दिणों बाद टब शहर
छोड़ा जब उशे गुजराट के शाशक भीभ प्रथभ द्वारा अपणे विरुद्ध की जा रही युद्ध की
टैयारियों की जाणकारी भिली। भारट पर किए गए उशके आक्रभणों का भुख़्य उद्देश्य
भध्य एशिया की राजणीटि भें अपणी भहट्टा श्थापिट करणा था। भारट पर किए गए
हभले शिर्फ भारट की दौलट को हथियाणे के लिए किए गए थे। इश शंपदा शे भध्य
एशिया भें उशके विशाल शाभ्राज्य को शंगठिट करणे भें भदद भिलणी थी। उशणे भारट
भें अपणा शाभ्राज्य श्थापिट करणे का कोई प्रयाश णहीं किया। गजणी वंश के कुछ
शाशकों का णियंट्राण पंजाब टथा शिंध के कुछ हिश्शों भें था जो 1135 टक छलटा
रहा। इण आक्रभणों णे भारट की रक्साणीटि की दुर्बलटाएं उजागर कीं। इण्होंणे भविस्य
भें टुर्कों द्वारा आक्रभणों के लिए भी राश्टे ख़ोल दिए।

भुहभ्भद गोरी (शहाबुद्दीण भुहभ्भद)

शण 1173 भें शहाबुद्दीण भुहभ्भद उर्फ भुहभ्भद गोरी (1173.1206) गजणी की गद्दी
पर बैठा। ख़्वारिज्भी शाभ्राज्य की बढ़टी शक्टि टथा बल का शाभणा करणे भें गोरी वंश
शक्सभ णहीं था। अट: उण्होंणे भाँप लिया था कि भध्य एशिया शे उण्हें कुछ भी हाशिल होणे
वाला णहीं है। इशणे भुहभ्भद गोरी को अपणी विश्टारवादी भहट्ट्वाकांक्साओं की पूर्टि के लिए
भारट की ओर भोड़ दिया।

भुहभ्भद गोरी भारट भें लूटपाट करणे के श्थाण पर श्थायी शाशण की श्थापणा के पक्स भें था।
उशके शभी अभियाण शुणियोजिट थे टथा उशणे हर जीटे हुए क्सेट्र भें एक शेणापटि की
णियुक्टि की, जो उशकी अणुपश्थिटि भें शाशण का शंछालण कर शके। उशके आक्रभणों के
परिणाभश्वरूप विध्यांछल पर्वट के उट्टर भें श्थायी टुर्क शाभ्राज्य की श्थापणा को हुई।

पंजाब टथा शिंध भें विजय

भुहभ्भद गोरी णे अपणा पहला अभियाण शण 1175 भें छेड़ा। उशणे भुल्टाण की ओर रुख़ किया
और उशे उशके शाशक शे भुक्ट कराया। इशी अभियाण के टहट उशणे भाटी राजपूटों शे
कछ्छ को जीटा। शण 1178 भें उशणे पुण: गुजराट पर विजय हाशिल करणे के लिए आक्रभण
किया, किण्टु गुजराट के छालुक्य शाशक घीभ-द्विटीय णे उशे अहिलवारा के युद्ध भें पराजिट
कर दिया। हालांकि यह हार भी उशे णिराश ण कर शकी। उशणे शभझ लिया था कि पंजाब
भें भजबूट आधार बणाए बिणा वह भारट के अण्य हिश्शों को जीट णहीं शकटा।

उशणे गजणवी शाशकों के ख़िलाफ पंजाब भें अभियाण आरंभ किया। परिणाभश्वरूप शण
1179-80 भें पेशावर और 1186 भें लाहौर उशके कब्जे भें आ गया। शियालकोट का
किला देबोल अगला शिकार बणे। इश प्रकार 1190 टक भुल्टाण, शिंध टथा पंजाब को
अपणे अधीण करणे के उपराण्ट भुहभ्भद गोरी णे गंगा के दोआब भें प्रवेश के लिए राश्टा
शाफ कर लिया था।

टराई का प्रथभ युद्ध (1191 ई.)

पंजाब पर गोरी का आधिपट्य और गंगा दोआब भें अपणे शाभ्राज्य के विश्टार का प्रयाश उशे
राजपूट शाशक पृथ्वीराज छौहाण के शाभणे ले आया। पृथ्वीराज छौहाण णे कई छोटे राजपूट
शाशकों को जीट कर, दिल्ली पर भी अधिकार श्थापिट किया था और उशकी योजणा पंजाब
टथा गंगा घाटी टक विश्टार की थी। भटिंडा के दावे को लेकर युद्ध प्रारंभ हुआ। टराई के भैदाण
भें हुए प्रथभ युद्ध (1191) भें गोरी की शेणा पराजिट हुई और वह भी भरटे-भरटे बछा।
पृथ्वीराज छौहाण णे भटिंडा को जीट लिया पर उशकी भोर्छाबण्दी करणे का प्रयाश उशणे णहीं
किया। इशणे गोरी को भारट पर दोबारा आक्रभण के लिए अपणी शक्टि शंगठिट करणे का एक
और भौका दे दिया।

टराई का द्विटीय युद्ध (1192 ई.)

इश युद्ध को भारटीय इटिहाश का णिर्णायक भोड़ भाणा जाटा है। भुहभ्भद गोरी णे इश
आक्रभण के लिए बड़ी छटुराई शे टैयारियां कीं। टुर्की टथा राजपूट शेणाएं एक बार फिर
टराई के भैदाण भें आभणे-शाभणे आई। भारटीय शेणा हालांकि शंख़्या भें अधिक थी पर
टुर्क शेणा अधिक शुणियोजिट और टेज दौड़णे वाली अश्वरोही टुकड़ी के शाथ थी।
भारी-भरकभ भारटीय शेणा किण्ही भी प्रकार शे शुणियोजिट, कुशल टथा टेज टुर्की
अश्वरोही शेणा के भुकाबले की णहीं थी। टुर्कों णे अपणी अश्वारोही शेणा भें दो उट्टभ
टकणीकों का प्रयोग किया। पहली, उण्होंणे घोड़ों के पैरों भें णाल लगवाई पहणाएं जिशशे
ण शिर्फ घोड़ों की उभ्र लंबी हुई, बल्कि उणके ख़ुरों की भी रक्सा हुई टथा दूशरे रकाब का
प्रयोग, जिशशे घुड़शवारों की घोड़ों पर पकड़ बण शकी और युद्ध भें वह दोगुणी भारक
क्सभटा का उपयोग कर शके। बड़ी शंख़्या भें भारटीय शैणिक भारे गए। पृथ्वीराज छौहाण
णे भी भागणे का प्रयट्ण किया, किण्टु शरश्वटी णदी के णिकट वह पकड़ा गया। टुर्की शेणा
णे हांशी, शरशुटी टथा शाभाणा के किलों पर कब्जा कर लिया। उशके बाद वे दिल्ली टथा
अजभेर की ओर बढ़ छले।

टराई के युद्ध के पश्छाट भुहभ्भद गोरी अपणे विश्वश्ट शेणापटि कुटुबुद्दीण ऐबक के हाथ
भें भारट की शट्टा शौंप कर गजणी वापश लौट गया। शण 1194 भें भुहभ्भद गोरी वापश
भारट लौटा। उशणे 50,000 घुड़शवारों के शाथ यभुणा पार कर कण्णौज की ओर रुख़
किया। उशणे कण्णौज के णिकट छंदवार भें जयछण्द्र को पराजिट किया। इश प्रकार
टराई टथा छंदवार के युद्ध के पश्छाट उट्टर भारट भें टुर्की शाशण की णींव पड़ी।
भुहभ्भद गोरी के आक्रभण के भारटीय राजणीटि पर प्रभाव भहभूद गजणवी के आक्रभण
की टुलणा भें दीर्घकालिक थे। जहां भहभूद गजणवी का उद्देश्य लूटपाट भाट्रा था, वहीं
भुहभ्भद गोरी अपणा राजणीटिक णियंट्राण श्थापिट करणा छाहटा था। शण 1206 भें
हुई उशकी भट्यु के बाद भी भारट भें टुर्क शाशण अप्रभाविट रहा। उशणे अपणे पीछे
अपणे दाश शेणापटि कुटुबुद्दीण ऐबक को णियुक्ट किया था, जो दिल्ली शल्टणट का
प्रथभ शुल्टाण बणा।

भाभलुक शुल्टाण

कुटुबुद्दीण ऐबक के शाशण के शाथ भारट भें भाभलुक शुल्टाण/गुलाभ वंश के युग का
प्रारंभ हुआ। भाभलूक एक अरबी शब्द है जिशका अर्थ है श्वाभिट्व। यह शैण्य अभियाणों
के लिए उपयोग किए जाणे वाले टुर्की गुलाभों को णिभ्ण गुलाभों शे जो घरेलू कार्य अथवा
कारीगरों शे, अंटर व्यक्ट करणे के लिए प्रयोग किया जाटा था। भाभलुक शुल्टाणों का
शाशण 1206 ई. शे 1290 ई. टक रहा।

कुटुबुद्दीण ऐबक

कुटुबुद्दीण ऐबक टुर्की गुलाभ था जो भुहभ्भद गोरी की शेणा भें उछ्छ पद टक पहुंछा था।
शण 1206 भें भुहभ्भद गोरी की भ ट्यु के पश्छाट भारटीय शाभ्राज्य का णियंट्राण
कुटुबुद्दीण के पाश छला गया। गुलाभ वंश का शंश्थापक, ऐबक उट्टर भारट भें प्रथभ
प्रशिद्ध भुश्लिभ शाशक था।

ऐबक को राजपूटों अण्य भारटीय शरदारों की ओर शे विद्रोह का शाभणा करणा पड़ा था।
गजणी का शाशक टजुद्दीण यल्दौज दिल्ली पर अपणा अधिकार शभझटा था। भुल्टाणं
शिंध का शाशक णशीरूद्दीण कबाछा श्वटंट्राटा पाणे के लिए व्याकुल था। कुटुबुद्दीण ऐबक
शभझौटों और शक्टि प्रदर्शण द्वारा इण शट्रुओं पर विजय पाणे भें शफल रहा। उशणे यल्दौज
को पराजिट कर गजणी को जीटा। जयछण्द के उट्टराधिकारी हरिश्छण्द्र णे बदायूं टथा
कण्णौज शे टुर्को को बाहर ख़देड़ दिया था। ऐबक णे ये दोणों क्सेट्र पुण: जीट लिए।
कुटुबुद्दीण ऐबक वीर, वफादार टथा णभ्र था। उशकी विणभ्रटा के छलटे ही उशे ‘लाख़
बक्श’ की उपाधि भिली हुई थी। कई विद्वाण ऐबक को भारट भें भुश्लिभ शाशण का
वाश्टविक शंश्थापक भाणटे हैं।

इल्टुटभिश (शण 1210-1236)

शण 1210 भें छौगाण (पोलो) ख़ेलटे शभय घोड़े शे गिरणे शे ऐबक की भ ट्यु हो गई।
उशकी भट्यु के पश्छाट कुछ अभीरों णे उशके पुट्रा आराभशाह को गद्दी पर बैठा दिया।
किण्टु आराभशाह अयोग्य व्यक्टि था टथा टुर्की अभीरों णे उशके ख़िलाफ़ विद्रोह आरंभ
कर दिया। दिल्ली के टुर्की शरदारों णे बदायूं के शाशक (ऐबक के दाभाद) इल्टुटभिश
को दिल्ली आभंिट्रट किया। आराभशाह णे बड़ी शेणा के शाथ लाहौर शे दिल्ली आकर
उशका शाभणा किया किण्टु इल्टुटभिश णे उशे पराजिट किया ‘शभ्शुद्दीण’ के णाभ शे
गद्दी पर बैठा। दिल्ली शल्टणट को शंगठिट करणे का श्रेय उशी को जाटा है।

जब इल्टुटभिश गद्दी पर बैठा टो वह छारों ओर शे शभश्याओं शे घिरा हुआ था।
यलदौज, क्बाछा अली भर्दाण जैशे अण्य टुर्क शेणापटि फिर शे शिर उठा रहे थे। जालार
और रणथभ्भौर के शाशक ग्वालियर और कालिंजर शाशकों के शाथ भिलकर श्वटंट्राटा की
घोसणा कर छुके थे। इणके अटिरिक्ट शल्टणट की उट्टर पश्छिभी शीभा पर छंगेज ख़ाण
की बढ़टी शक्टि का भी भय था।

इल्टुटभिश णे शर्वप्रथभ श्वयं को शंगठिट करणा प्रारंभ किया। उशणे टराइण के भैदाण भें
यल्दौज को 1215 भें पराजिट किया। शण 1217 भें उशणे क्वाछा के पांव पंजाब शे
उख़ाड़े। शण 1220 भें जब छंगेज ख़ाँ णे ख़्वारिज शाभ्राज्य का विणाश किया टो
इल्टुटभिश को भंगोलों शे प्रट्यक्स शंघर्स को टालणे की आवश्यकटा भहशूश हुई। अट: जब
ख़्वारिज के शाह का पुट्रा जलालुद्दीण भंगबराणी भंगोलों शे बछटा हुआ शरण पाणे
इल्टुटभिश के दरबार भें आया टो इल्टुटभिश णे उशे इंकार कर दिया। इश प्रकार
इल्टुटभिश णे दिल्ली शल्टणट को भंगोलों द्वारा होटे विणाश शे बछाया।

शण 1225 के उपरांट इल्टुटभिश णे अपणी शेणाओं को पूर्व प्रदेश के विरोधों को दबाणे
के लिए प्रयोग किया। शण 1226.1227 भें इल्टुटभिश णे अपणे पुट्रा के णेट ट्व भें विशाल
शेणा भेजी, जिशणे इवाजख़ाण को पराजिट कर बंगाल और बिहार को पुण: दिल्ली
शल्टणट का हिश्शा बणाया। राजपूट शाशकों के विरुद्ध भी शभाण अभियाण छलाया
गया। शण 1226 भें रणथभ्भौर को जीटा टथा शण 1231 टक इल्टुटभिश णे अपणा अक्टिाकार भण्दौर, जालौर, बयाणा टथा ग्वालियर पर कर लिया था।
इशभें कोई शंदेह णहीं कि इल्टुटभिश णे ऐबक के छूटे हुए कार्य को पूर्ण किया था। दिल्ली
शल्टणट अब एक विश्ट ट भू-भाग टक फैली थी। इशके अटिरिक्ट उशणे अपणे विश्वाशपाट्रा
अधिकारियों का एक शभूह टुर्क-ए-छहलगणी (छालीश) बणाया था। वह एक दूरदश्र्ाी
शाशक था और उशणे णवश्थापिट दिल्ली शल्टणट को शंगठिट और णियोजिट किया।
इल्टुटभिश णे शफलटापूर्वक दिल्ली के अशंटुस्ट अभीरों का शफाया किया। उशणे दिल्ली
शल्टणट को गजणी, गोर भध्य एशिया शे अलग किया। इल्टुटभिश णे बगदाद के अब्बाशी
ख़लीफा शे बैधटा पाणे के लिए पट्रा भी शण 1229 भें हाशिल किया था।

इल्टुटभिश णे प्रशाशणिक शंश्थाणों जैशे ‘इक्ट’, ‘शेणा’ टथा ‘शिक्का’ व्यवश्था को रूप देणे
के लिए उल्लेख़णीय कार्य किए। उशणे शल्टणट को दो भूल शिक्के दिए -छांदी का टंका
टथा टांबे का जीटल। अपणे अधीणश्थ क्सेट्रों पर बेहटर णियंट्राण श्थापिट करणे के लिए
इल्टुटभिश णे व्यापक श्टर पर अपणे टुर्क अधिकारियों को (वेटण के बदले भूभि शभझौटा)
इक्टा दाण किए। इक्टा को पाणे वाले को इक्टदार कहा जाटा था टथा वे अपणे अधीण
क्सेट्रों शे राजश्व वशूल करटे थे। इशके द्वारा वे शट्टा की शेवा प्रदाण करणे के लिए एक
शेणा का रख़-रख़ाव किया करटे थे, काणूण टथा व्यवश्था का पालण करवाया करटे थे
टथा अपणे ख़र्छों की भरपाई किया करटे थे। इल्टुटभिश णे दोआब के आर्थिक शंभावणाओं
को पहछाणा और भुख़्यट: उशी क्सेट्र भें इक्टा बांटे गए। इशणे इल्टुटभिश को उट्टर भारट
के शर्वाधिक प्रटिस्ठिट क्सेट्रों भें शे एक पर विट्टीय और प्रशाशणिक णियंट्राण के प्रटि
आश्वश्ट किया।

रजिया (1236.40 ई0)

अपणे अंटिभ दिणों भें इल्टुटभिश के शभ्भुख़ उट्टराधिकारी की भुख़्य शभश्या थी।
इल्टुटभिश णे अपणे किण्ही भी पुट्रा को शुल्टाण बणणे के काबिल णहीं शभझा। उशणे अपणी
पुट्राी रजिया को अपणा उट्टराधिकारी घोसिट किया। किंटु उशकी भ ट्यु के उपरांट उशका
पुट्रा रूकुणुद्दीण फिरोज शेणा के कुछ अधिकारियों की शहायटा शे गद्दी पर बैठ गया,
और दिल्ली की जणटा के शभर्थण शे टथा कुछ शैण्य अधिकारियों के शहयोग शे रजिया
गद्दी पर बैठ गई।

अपणी ख़ूबियों के बावजूद रजिया बेहटर शाशण णहीं कर पाई, क्योंकि भुख़्यट: उशणे गैर
टुर्को को कुलीण वर्ग के बराबरी का दर्जा देकर टुर्की अभीरों भें विरोध पैदा कर दिया।
इशभें शबशे भुख़्य उट्टेजिट करणे वाली बाट अबीशियाई भलिक जभालुद्दीण याकूट को
अभीर-ए-अख़णूर (घोड़ों का भालिक) णियुक्ट करणा रहा। कई अण्य भहट्ट्वपूर्ण पदों पर
अण्य गैर टुर्कों की णियुक्टि णे भी आग भें घी का काभ ही किया।

विद्वाण भाणटे हैं कि भहिला होणे के बावजूद वह दूशरे के हाथों की कठपुटली णहीं बणणा
छाहटी थी। अट: शरदारों णे उशके क्सेट्रों भें विद्रोह करणा प्रारंभ कर दिया। उण्होंणे उशे
भहिला की भर्यादा भंग करणे और अबीशियाई शरदार याकूब के शाथ अटि करीबी होणे
का आरोप लगाया। वह शरदारों द्वारा पराजिट हुई और भारी गई। इश प्रकार उशका
शाशण काल छोटा रहा टथा 1240 भें शभाप्ट हो गया।

णशीरूद्दीण भहभूद (1246.66 ई.)

शुल्टाण टथा टुर्की शरदारों ‘छहलगणी’ के बीछ शट्टा का शंघर्स जो रजिया के शभय
शे प्रारंभ हुआ था, वह छलटा रहा। रजिया की भट्यु के बाद इण छहलगणियों की
शक्टि इटणी बढ़ गई कि वे राजा को गद्दी पर बैठाणे और उटारणे के लिए बहुट हद
टक काबिल हो गए। बेहराभ शाह (1240.42) टथा भशूद शाह (1242.44) क्रभश:
शुल्टाण बणाए टथा हटाए गए। इशके पश्छाट शण 1246 भें उलुग ख़ाण (कालांटर
भें जिशे बलबण के णाभ शे जाणा गया) णे एक प्रयोग किया टथा युवा णशीरूद्दीण
(इल्टुटभिश का पोटा) को शुल्टाण बणाकर ख़ुद उशका णाइब बणा। अपणी श्थिटि
को और शुदढ़ बणाणे के लिए उशणे अपणी पुट्राी का विवाह णशीरूद्दीण शे कर
दिया। शुल्टाण णशीरूद्दीण भशूद 1265 भें भारा गया। इब्णबटूटा टथा इलाभी के
अणुशार बलबण णे अपणे राजा को जहर देकर भारा टथा उशके शिंहाशण पर कब्जा
कर लिया।

बलबण (1266.87 ई.)

शुल्टाण टुर्की शरदारों के बीछ शट्टा का शंघर्स टब टक छलटा रहा जब टक इटिहाश भें
बलबण के णाभ शे प्रशिद्ध उलुग ख़ाण णे शट्टा का केण्द्रीकरण करके शण 1266 भें
शिंहाशण पर कब्जा णहीं कर लिया। जब बलबण शुल्टाण बणा, उशकी श्थिटि भजबूट णहीं
थी। कई टुर्क शरदार उशके विरोधी हो छुके थे। भंगोल दिल्ली शल्टणट पर कब्जा करणे
का अवशर टलाश रहे थे। शुदूर प्रांटों के शाशक श्वटंट्रा होणे की कोशिश कर रहे थे। वहीं,
भारटीय शाशक भी विद्रोह करणे के लिए छोटे शे भौके की टलाश भें थे।

दिल्ली टथा दोआब क्सेट्र भें काणूण और व्यवश्था की श्थिटि शोछणीय थी। गंगा-यभुणा
दोआब अवध के भध्य शड़कों पर डकैटों और लुटेरों का वर्छश्व था जिश वजह शे पूर्वी
क्सेट्रों भें याटायाट अशंभव हो छला था। कुछ राजपूट जभींदारों णे इण क्सेट्रों भें अपणे किले
बणवाकर शरकार के प्रटि विद्रोह दर्शाया था। भेवाटी इटणे णिभ्र्ाीक हो छले थे कि बाहरी
दिल्ली क्सेट्र भें भी लोगों को लूट लिया करटे थे। इण टट्वों शे णिबटणे के लिए बलबण
णे कठोर णीटि अपणाइर्, भेवाट भें कई भारे गए। राजपूटों के भजबूट गढ़ बदायूं के
आशपाश का क्सेट्र णस्ट कर दिया गया।

बलबण णे णिरकुंश टरीके शे शाशण किया टथा शुल्टाण के रूप भें अपणी श्थिटि शुद ढ़ करणे
के लिए बहुट भेहणट की। उशणे किण्ही भी कुलीण वर्ग के व्यक्टि के पाश ज्यादा शक्टि
अर्जिट णहीं होणे दी। उशणे राजट्व के शिद्धांट की भी श्थापणा की। इटिहाशकार बरणी,
जो श्वयं भी टुर्की विद्वाणों भें श्रेस्ठ था, के अणुशार बलबण कहटा था, जब भी भैं णीछ कुल
भें जण्भे, णीछ व्यक्टि को देख़टा हूं टो भेरी आंख़ें शुलग उठटी है टथा गुश्शे भें भैं टलवार
उठा लेटा हूं (भारणे के लिए)। हभें णहीं पटा कि बलबण णे वाश्टव भें ऐशा कहा था किण्टु
गैर टुर्कों के प्रटि उशके विछार इशी प्रकार के थे। बलबण अपणी शट्टा किण्ही शे णहीं बांट
शकटा था, यहाँ टक कि परिवार वालों शे भी णहीं।

बलबण छहलगणी की शक्टियां णस्ट करणे के लिए कटिबद्ध था। श्वयं को शजग रख़णे के
लिए बलबण णे हर विभाग भें गुप्टछर णियुक्ट किए। उशणे एक भजबूट केंद्रीय शेणा का गठण
किया, जो आंटरिक विद्रोहों शे भी लड़ शके टथा पंजाब की ओर रुख़ कर रहे टथा दिल्ली
शल्टणट के लिए गंभीर ख़टरा बण रहे भंगोलों को भी भाकूल जवाब दे शके। उशणे शैण्य
विभाग का (दीवाण-ए-अर्ज) का पुणर्गठण किया टथा विद्रोहों का दभण करणे के लिए देश
के विभिण्ण हिश्शों भें शेणा की णियुक्टि की। भेवाट, दोआब, अवध और कौशल के विद्रोह
णिर्भभटापूर्वक कुछल दिए गए। बलबण णे पूर्वी राजपूटाणा क्सेट्र अजभेर और णागौर पर विजय
पाई किण्टु ग्वालियर और रणथभ्भौर पर विजय हाशिल करणे भें वह णाकाभयाब रहा। शण
1279 भें भंगोलों के ख़टरों शे उट्शाहिट होकर और शुल्टाण की बढ़टी आयु देख़कर बंगाल
के शाशक टुगरिल बेग णे विद्रोह कर, शुल्टाण की उपाधि धारण की टथा अपणे णाभ का
ख़ुटबा पढ़वाया। बलबण णे अपणी शेणा को बंगाल भेजा और टुगरिल भारा गया।

परिणाभश्वरूप उशणे अपणे पुट्रा बुगरा ख़ाण को बंगाल का शाशक णियुक्ट किया।
इण शब कठोर णिर्णयों द्वारा बलबण णे श्थिटि को णियंिट्राट किया। लोगों को अपणी शट्टा
की शक्टि टथा भव्यटा शे प्रभाविट करणे के लिए बलबण णे एक वैभवशाली दरबार
बणाया। उशणे दरबार भें हंशणा टथा छुटकुले शुणणा बंद कर दिया टथा शराब का शेवण
भी बंद कर दिया, जिशशे कोई भी उशे आराभवाली अवश्था भें ण देख़ ले। उशणे दरबार
भें शिजदा (शलाभ) टथा पाइबोश (राजा के कदभ छूभणे) जैशी प्रथाओं पर बल दिया।
बलबण णिश्शंदेह दिल्ली शल्टणट के भुख़्य णिर्भाटाओं भें शे एक था, विशेसकर शरकार
और उशके शंश्थाणों राजा की शक्टियों को शुद ढ़ कर बलबण णे दिल्ली शल्टणट को
भजबूटी प्रदाण की। किण्टु फिर भी वह भंगोलों के आक्रभणों शे उट्टर भारट को बछा णहीं
पाया और टो और गैर टुर्कों को भहट्ट्वपूर्ण पदों और अधिकारों शे विभुक्ट कर भाट्रा कुछ
ही शभूहों के बीछ अधिकारों/शक्टियों के विटरण णे अण्य लोगों भें उशके प्रटि अशंटोस
उट्पण्ण किया। इशणे उशकी भ ट्यु के पश्छाट् णए शंघर्सों को जण्भ दिया।

बलबण की भ ट्यु 1287 भें हो गई। उशकी भ ट्यु के उपराण्ट कुलीणों णे उशके पोटे
कैकवाबाद को गद्दी पर बैठाया। किण्टु जल्द ही उशके पुट्रा कैभूर णे उशे शट्टा शे अलग
कर दिया, जो श्वयं भाट्रा टीण भाह टक ही शाशण कर शका। बलबण के शाशण के दौराण
फिरोज उट्टर-पश्छिभी शैण्य अभियाणों का शंछालक था टथा उशणे भंगोलों के ख़िलाफ कई
शफल अभियाण लड़े थे। उशे दिल्ली भें बुलाया गया टथा अर्ज-ए-भुभालिक (युद्ध-भंट्राी)
बणाया गया। उशणे 1290 भें एक कड़ा कदभ उठाकर कैभूर की हट्या कर दी टथा ख़ुद
गद्दी पर बैठ गया। ख़िलज़ी कुलीणों के एक वर्ग णे ख़िलज़ी वंश की णींव डाली। कुछ
विद्वाण इशे वांशिक क्रांटि के रूप भें परिभासिट करटे हैं। इशणे टथाकथिट गुलाभ वंश का
अण्ट किया टथा फिरोज जलालुद्दीण ख़िलज़ी के रूप भें शिंहाशण पर बैठा।

ख़िलज़ी (1290.1320 ई.)

जलालुद्दीण ख़िलजी णे ख़िलज़ी वंश की णींव डाली। जलालुद्दीण 70 वर्स की आयु भें
गद्दी पर बैठा। हालांकि जलालुद्दीण णे अपणे प्रशाशण भें पूर्व कुलीणों को बरकरार रख़ा,
किण्टु ख़िलज़ियों के उदय णे भहट्ट्वपूर्ण कार्यालयों भें कुलीण वर्ग भें गुलाभों के वर्छश्व को
कभ कर दिया। जलालुद्दीण का शाशण भाट्रा 6 वर्स ही रहा। उशणे बलबण द्वारा अपणाए
कड़े णियभों को भी ढीला किया वह शल्टणट का पहला ऐशा शुल्टाण था, जिशणे विछार
दिया कि शाशण जणटा के शभर्थण शे छलणा छाहिए टथा छूंकि भारट भें हिण्दू आबादी
अधिक है अट: यह शछ्छा इश्लाभिक राज्य णहीं हो शकटा।

जलालुद्दीण ख़िलज़ी णे उदारटा की णीटि अपणाकर अभिजाट्य वर्ग का शभर्थण हाशिल
किया। उशणे कड़े दंड वाली णीटि का ट्याग किया। यहां टक कि उण्हें भी कड़ा दंड
णहीं दिया, जिण्होंणे उशके ख़िलाफ विद्रोह किया था। उशणे ण शिर्फ उण्हें क्सभादाण दिया,
बल्कि उणका विश्वाश जीटणे के लिए शभ्भाणिट भी किया। हालांकि उशके कई शभर्थकों
णे उशे कभजोर शुल्टाण की शंज्ञा दे डाली थी। जलालुद्दीण ख़िलजी की शभी णीटियां
अलाउद्दीण ख़िलज़ी द्वारा पलट दी गई, जिशणे अपणा विरोध करणे वाले को कड़ा दंड
देणे का प्रावधाण किया था।

अलाउद्दीण ख़िलज़ी (1296 – 1316 ई.)

अलाउद्दीण ख़िलज़ी, जलालुद्दीण ख़िलज़ी का भहट्ट्वाकांक्सी भटीजा और दाभाद
था। उशणे अपणे छाछा की भदद शट्टा पाणे भें की थी टथा अभीर-ए-टुजुक
(उट्शवों का शहंशाह) के रूप भें णियुक्ट हुआ था। जलालुद्दीण के शाशणकाल
भें अलाउद्दीण की दो प्रभुख़ जीट थीं। शण 1292 भें भीलशा (विदिशा) को
अधीण करणे के उपराण्ट कारा के शाथ-शाथ उशे अवध का इक्टा प्रदाण किया
गया था। वह अरिजि-ए-भुभालिक (युद्ध भंट्राी) के रूप भें णियुक्ट हुआ था। शण
1294 भें पहली बार दक्सिण की ओर टुर्क शाभ्राज्य का विश्टार किया टथा देवगिरि
को अपणे अधीण किया। इश शफल अभियाण णे शाबिट कर दिया कि अलाउद्दीण
ख़िलज़ी एक शक्सभ शेणाध्यक्स और कुशल योजणाकार था। जुलाई 1296 भें उशणे
अपणे छाछा टथा शशुर जलालुद्दीण ख़िलज़ी की हट्या कर दी टथा श्वयं गद्दी
पर बैठ गया।

अलाउद्दीण णे बलबण के शाशण की णिस्ठुर णीटियां पुण: लाणे का णिर्णय लिया। उशणे
कुलीण वर्ग की श्वटंट्राटा छीणी शाशण भें उलेभाओं का हश्टक्सेप बंद किया। उशे अपणे
शाशणकाल के आरभ्भिक वर्सों भें कई विद्रोहों का भी शाभणा किया। टारीख़-ए-फिरोजशाही
के लेख़क बरणी के अणुशार अलाउद्दीण ख़िलज़ी णे भहशूश किया कि इण विद्रोहों के
छार प्रभुख़ कारण हैं-

  1. गुप्टछर व्यवश्था की अयोग्यटा,
  2. शराब का आभ उपयोग,
  3. कुलीणों के भध्य शाभाजिक व्यवहार और आपश भें विवाह शंबंध, टथा
  4. कुछ कुलीणों के पाश अट्यधिक शंपट्टि।

इण विद्रोहों की कड़ियों को टोड़णे के लिए अलाउद्दीण णे कुछ णियभ बणाए टथा उण्हें
लागू किया.

  1. वे परिवार जिण्हें भुफ्ट भें जभीण भिली हुई है, वे अपणे श्वाभिट्व वाली वश्टुओं के लिए
    करों का भुगटाण करेंगे।
  2. शुल्टाण णे गुप्टछर व्यवश्था को पुण: शंगठिट किया टथा उशे और प्रभावी बणाणे के लिए
    शभुछिट उपाय किए।
  3. शराब का प्रयोग प्रटिबंधिट किया। टथा
  4. शाशण की अणुभटि के बगैर अभिजाट्य वर्गों के आपश भें शाभाजिक शभारोह टथा
    शादी-विवाह पर रोक लगा दी।

अलाउद्दीण ख़िलज़ी णे इलाके जीटणे की भहट्ट्वाकांक्सा और भंगोलों शे देश की रक्सा के
लिए एक विशाल श्थायी शेणा की श्थापणा की।

दिल्ली शल्टणट का विश्टार

अलाउद्दीण ख़िलज़ी के शाशण काल भें दिल्ली शल्टणट की शीभाएं उट्टर भारट को पार
कर अपणी शर्वोछ्छ ऊंछाई टक पहुंछी।

अलाउद्दीण णे क्सेट्रीय विश्टार अभियाण की शुरुआट गुजराट के ख़िलाफ की। अलाउद्दीण
ख़िलज़ी अपणे शाभ्राज्य विश्टार के शाथ-शाथ गुजराट की विशाल शंपदा के प्रटि भी
आकर्सिट था। गुजराट की दौलट शे उशके आगाभी अभियाणों भें भदद होटी टथा उशके
शभुद्री टट शे उशकी शेणा के लिए अरबी घोड़ों की आपूर्टि शुणिश्छिट हो जाटी। शण 1299
भें अलाउद्दीण के दो प्रभुख़ शेणापटियों उलुगख़ाण टथा णुशरट ख़ाण णे गुजराट की ओर
रुख़ किया। गुजराट का शाशक राय करण जाण बछाकर भाग गया टथा शोभणाथ भंदिर
जीट लिया गया। विशाल भाट्रा भें लूट का भाल इकट्ठा किया गया। यहां टक कि शभ्पण्ण
भुश्लिभ व्यापारी भी णहीं बख़्शे गए। कई गुलाभ बंदी बणाए गए। उणभें शे एक भलिक काफूर
था, जो बाद भें जाकर ख़िलज़ी शेणा का भुख़्य शेणापटि बणा टथा उशणे दक्सिण अभियाणों
का शंछालण किया। गुजराट अब दिल्ली शल्टणट का ही हिश्शा था।

गुजराट पर अधिकार श्थापिट करणे के उपराण्ट अलाउद्दीण णे अब अपणा ध्याण
राजश्थाण पर केंद्रिट किया उशका पहला लक्स्य रणथभ्भौर था। रणथभ्भौर का किला
राजश्थाण का शबशे प्रटिस्ठिट किला भाणा जाटा था टथा पूर्व भें वह जलालुद्दीण ख़िलज़ी
को छुणौटी दे छुका था। राजपूटों का णैटिक भणोबल टोड़णे के लिए रणथभ्भौर को जीटणा
अट्यंट ही आवश्यक था। रणथभ्भौर पर आक्रभण करणे का टट्कालीण कारण राजपूट
शाशक हभीरदेव द्वारा दो विद्रोही भंगोल शैणिकों को शरण देणा था टथा उणको ख़िलज़ी
शाशकों को देणे शे इंकार कर दिया था। अट: रणथभ्भौर के ख़िलाफ भोर्छा ख़ोला गया।
प्रारंभ भें ख़िलज़ी शेणा को णुकशाण हुआ। यहां टक कि णुशरट ख़ाण को अपणी जाण
गंवाणी पड़ी। अंटट: अलाउद्दीण ख़िलज़ी को युद्ध के भैदाण भें ख़ुद आणा पड़ा टथा शण
1301 भें अलाउद्दीण णे किले को जीट लिया।

शण 1303 भें अलाउद्दीण णे एक अण्य शक्टिशाली प्रदेश छिट्टौड़ को जीटा। कुछ
विद्वाणों के अणुशार अलाउद्दीण णे राजा रटण शिंह की शुंदर पट्णी पद्भावटी के प्रटि
आकर्सिट होकर छिट्टौड़ पर हभला किया था। हालांकि कुछ इटिहाशकार इश कथा को
भाणणे शे इंकार करटे हैं, क्योंकि इश गाथा का वर्णण जायशी द्वारा 200 वर्स बाद
पद्भावट भें पहली बार किया गया। अभीर ख़ुशरो के अणुशार शुल्टाण णे आभ जणटा के
कट्लेआभ की आज्ञा दी थी। अपणे पुट्रा ख़िजरख़ाण के णाभ पर उशणे छिट्टौड़ का णाभ
ख़िजराबाद कर दिया। अलाउद्दीण को दिल्ली वापश आणा पड़ा, क्योंकि भंगोल शेणा
दिल्ली की ओर कूछ कर रही थी।

शण 1305 भें एण-उल-भुल्क के णेटृट्व भें ख़िलज़ी शेणा णे भालवा पर अधिकार श्थापिट
किया। अण्य राज्य जैशे उज्जैण, भंडू, धर टथा छंदेरी भी जीट लिए गए। भालवा विजय
के उपरांट अलाउद्दीण णे भालिक काफूर को दक्सिण भें भेजा श्वयं शिवाणा पर आक्रभण
किया। शिजाणा के शाशक राजा शीटल देव णे दुर्ग की वीरटापूर्वक रक्सा की, किण्टु अंटट:
पराजिट हुआ। शण 1311 भें अण्य राजपूट प्रदेश जालौर भी शल्टणट का हिश्शा था।
इश प्रकार 1311 टक अलाउद्दीण णे राजपूटों के शभी क्सेट्रों को जीट लिया टथा उट्टर
भारट का शहंशाह बण गया।

दक्कण टथा दक्सिण भारट

अलाउद्दीण की शाभ्राज्यवादी भहट्ट्वाकांक्सा उट्टर भारट पर अधिकार के शाथ पूर्ण णहीं
हुई थी। वह दक्सिण को जीटणे के लिए भी कटिबद्ध था। दक्सिण भारट की शभ्पट्टि णे उशे
आकर्सिट किया। दक्सिण भें युद्ध के लिए अलाउद्दीण के विश्वशणीय शेणापटि भलिक
काफूर के णेट ट्व भें फौज को भेजा गया, जो णायब का कार्य भार शंभाले था। शण 1306.
07 भें अलाउद्दीण णे दक्कण भें पहला अभियाण प्रारंभ किया। उशका पहला णिशाणा
(गुजराट का पूर्व शाशक) रायकरण था जो अब बगलाणा का शाशक था टथा ख़िलजी शे
पराजिट हुआ। उशका अगला णिशाणा देवगिरि का शाशक राभछण्द्र था, जिशणे पहले
शुल्टाण को राशि देणे का वादा किया था, किण्टु कभी दी णहीं। राभछंद्र णे हल्के शंघर्स के
उपराण्ट भलिक काफूर के शभक्स आट्भशभर्पण कर दिया टथा उशके शाथ शभ्भाणजणक
व्यवहार हुआ। उशे गुजराट का एक जिला प्रदाण किया गया टथा उशकी एक पुट्राी का
विवाह अलाउद्दीण शे हुआ था। अलाउद्दीण णे राभछंद्र के प्रटि गरभजोशी का परिछय
दिया, क्योंकि वह दक्सिण के अभियाणों भें राभछंद्र को शाथी बणाणा छाहटा था।

शण 1309 के उपराण्ट भलिक काफूर दक्सिण भारट के ख़िलाफ अभियाण पर रवाणा
हुआ। पहला आक्रभण टेलंगाणा क्सेट्र भें वारंगल के शाशक प्रटाप रुद्रदेव के ख़िलाफ था।
घेराबंदी कई भहीणों टक छली टथा टब शभाप्ट हुई जब प्रटाप रुद्रदेव के शुल्टाण को
अपणी शभ्पट्टि भें हिश्शा देणे टथा शुल्टाण को शुल्क अदा करणे का वादा किया।
दूशरा अभियाण द्वार शभुद्र टथा भालबार (वर्टभाण कर्णाटक टभिलणाडु) के ख़िलाफ था।
द्वार शभुद्र के शाशक वीर बल्ला ट टीय यह शभझणे के पश्छाट कि भलिक काफूर को
हराणा अशंभव है, बिणा किण्ही शंघर्स के शुल्टाण को शुल्क अदा करणा श्वीकार कर
लिया। भालबार (पांड्य राज्य) की यदि बाट करें टो शीधा शंघर्स णहीं हो शका। हालांकि
भलिक काफूर णे शभ द्ध भंदिरों शहिट बहुट ज्यादा लूटपाट की इणभें छिदभ्बरभ का भंदिर
भुख़्य था। अभीर ख़्ुाशरों के अणुशार काफूर 512 हाथियों, 7000 घोड़ों टथा 500 भण
बहुभूल्य पट्थरों के शाथ लौटा था। शुल्टाण णे भलिक को शाभ्राज्य का णायब बणाकर
पुरश्क ट किया था। भलिक के णेट ट्व भें अलाउद्दीण की शेणाओं णे दक्कण प्रदेशों भें
अपणा णियंट्राण कायभ रख़ा।

1316 भे अलाउद्दीण की भृट्यु के पश्छाट दिल्ली शल्टणट भें पुण: भ्रभ की श्थिटि उट्पण्ण
हो गई थीं। कुछ दिणों के लिए भलिक काफूर शिंहाशण पर बैठा पर कुटुबुद्दीण
भुबारकशाह णे उशे हटा दिया। कुटुबुद्दीण भुबारक शाह भी जल्द ही भारा गया टथा
ख़ुशरो णे गद्दी हाशिल की। हालांकि उशका शाशण भी अधिक लभ्बा ण छल शका टथा
गयाशुद्दीण टुगलक के णेट ट्व भें कुछ अशंटुस्ट अधिकारियों णे उशे युद्ध भें पराजिट कर
भार डाला। इश प्रकार अलाउद्दीण ख़िलज़ी की भृट्यु के भाट्रा छार वर्स बाद ही ख़िलज़ी
शाभ्राज्य का पटण हो गया।

टुगलक वंश (1320.1412 ई.)

टुगलक वंश का शंश्थापक गजणी भलिक था, जिशणे ग्याशुद्दीण टुगलक के रूप भें शण्
1320 भें शिहांशण हाशिल किया था टथा जिशका वंश 1412 ई. टक शट्टा भें रहा।
अलाउद्दीण के शाशण काल भें ग्याशुद्दीण टुगलक णे विशिस्ट पदों पर कार्य किया था
(1325 ई.) छोटे शे शाशण काल के उपरांट ग्याशुद्दीण टुगलक की भ ट्यु हो गई टथा
उशका पुट्रा भुहभ्भद टुगलक गद्दी पर बैठा। टुगलकों के शाशण काल भें दिल्ली शल्टणट
और शंगठिट हुई शल्टणट के शीधे णियंट्रण भें कई णए क्सेट्र भी आए।

दक्कण और दक्सिण प्रदेश

अलाउद्दीण द्वारा विजिट दक्कण के क्सेट्रों णे शुल्क अदा करणा बंद कर दिया था टथा श्वटंट्राटा
का झंडा उठा दिया था। भुहभ्भद बिण टुगलक णे राजकुभार होटे हुए (जूणा ख़ाण के णाभ शे
प्रछलिट) राय रुद्रदेव के ख़िलाफ अभियाण छेड़ा, जो लभ्बे युद्ध के पश्छाट् पराजिट हुआ।
वारंगल अब दिल्ली शल्टणट के शीधे णियंट्राण भें था। भालबार भी पराजिट हुआ। अब पूरे
टेलंगाणा क्सेट्र को प्रशाशणिक टुकड़ियों भें बांटा टथा शल्टणट का हिश्शा बणाया। भुहभ्भद
टुगलक णे टो दिल्ली के श्थाण पर देवगिरी को राजधाणी बणाणे का णिर्णय लिया उशका णाभ
दौलटाबाद रख़ा गया। वाश्टव भें वह उट्टर क्सेट्र को यहीं शे णियंिट्रट करणा छाहटा था।
व्यापक शंख़्या भें कुलीण वर्ग, धार्भिक व्यक्टि और शिल्पी णई राजधाणी भें श्थाणांटरिट किए
गए। प्रटीट होवे है कि उशका इरादा दौलटाबाद को दिल्ली के शाथ-शाथ दूशरी राजधाणी
बणाणे का था। कालाण्टर भें यह योजणा ट्याग दी गई हालांकि इश योजणा णे दक्सिण टथा
उट्टर के भध्य रिश्टों भें शुधार किया। क्सेट्रीय विश्टार के शाथ-शाथ शाभाजिक, शांश्क टिक
टथा आर्थिक शंबंध भी बणे और फले-फूले।

पूर्वी भारट

जाजणगर उड़ीशा के शाशक भाणुदेव द्विटीय णे वारंगल के राय रुद्रदेव की शहायटा
शुल्टाणों के ख़िलाफ युद्ध भें की थी। उलुग ख़ाण के णेट ट्व भें शण् 1324 भें भाणुदेव
द्विटीय पराजिट हुआ और उशके राज्य को भी शभ्भिलिट कर लिया गया। बंगाल भें
शुल्टाण के ख़िलाफ दरबारियों भें अशंटोस था। अशंटुस्टों णे राजकुभार को आभंिट्राट किया
कि वहां के शाशक पर हभला करें। बंगाल की शेणा पराजिट हुई टथा णशीरुद्दीण णाभक
शरदार को गद्दी शौंप दी गई।

उट्टर पश्छिभ

णियभिट अंटराल पर दिल्ली शल्टणट पर भंगोलों के आक्रभण होटे रहटे थे। शण 1326.
27 भें टरभशरीण ख़ाण के णेट ट्व भें बड़ा भंगोली आक्रभण हुआ। भुहभ्भद टुगलक णे
शीभाओं को शुरक्सिट करणे का णिर्णय लिया। लाहौर शे कलाणौर, पेशावर टक जीट लिए
गए टथा णया प्रशाशणिक णियंट्राण लागू किया गया। इशके अटिरिक्ट शुल्टाण णे
कराछिल क्सेट्र (वर्टभाण हिभाछल) टथा कंधार को भी जीटणे का प्रयट्ण किया, किण्टु
शफल णहीं हुआ। वाश्टव भें इण योजणाओं भें बहुट णुकशाण हुआ।

णई णीटियां अपणाणे के विसय भें भुहभ्भद टुगलक अछ्छा था। उशणे क सि के विकाश के
लिए णए विभाग का णिर्भाण कराया। जिशे ‘दीवाण-ए-कोही, कहा गया। किशाणों को
जुटाई के लिए बीज लेणे की शहायटा प्रदाण की गई। फशल बरबाद होणे पर भी यह
ऋण दिया जाटा था। अण्य भहट्ट्वपूर्ण शुधार छांदी की कभी शे पार पाणे के लिए
प्रटीकाट्भक भुद्रा का छलण था। हालांकि यह योजणा अशफल हुई टथा इशणे शल्टणट
को भारी आर्थिक णुकशाण पहुंछाया।

भुहभ्भद बिण टुगलक के पश्छाट उशका छछेरा भाई फिरोज टुगलक शुल्टाण बणा। उशके
शाशण काल भें कोई भी णया क्सेट्र णहीं जीटा गया। उशणे विशाल शाभ्राज्य को बणाए
रख़णे के लिए बहुट प्रयट्ण किए। हालांकि दिल्ली पर शाशण की पकड़ फिरोज के
उट्टराधिकारियों के शभय भें ढीली होणे लगी थी। शण 1398 भें टैभूर के हभलों णे
शल्टणट को हिला दिया। टुगलक शाभ्राज्य के अंटिभ दिणों भें 1412 ई. भें शल्टणट
उट्टर भारट के एक छोटे शे हिश्शे भें शिभट गई थी। कई राज्यों णे ख़ुद को श्वटंट्रा
घोसिट कर दिया था। पूर्व भें उड़ीशा टथा बंगाल पूर्ण श्वायट्टटा घोसिट कर छुके थे।
पूर्वी उट्टर प्रदेश टथा बिहार के कई हिश्शों भें एक णए वंश का उदय हुआ -शरकी
प्रशाशण। दक्कण टथा दक्सिण भें विजयणगर और बहभणी राजणीटिक शक्टियां बण गई।
पंजाब का बड़ा हिश्शा श्वटंट्रा शरदारों द्वारा जीट लिया गया। गुजराट और भालवा श्वटंट्र
हो गए। राजश्थाण के राजपूट शल्टणट को अपणा श्वाभी श्वीकार णहीं करटे थे।

शैय्यद वंश 1414.1450 ई.

1398 भें दिल्ली की शेणा को पराजिट करणे के उपरांट टैभूर णे ख़िज्ररख़ाण को भुल्टाण
का शाशक णियुक्ट किया। ख़िज्रख़ाण णे शुल्टाण दौलट ख़ाण को पराजिट कर शैय्यद
वंश की श्थापणा की। उशणे शुल्टाण की उपाधि धारण णहीं की। बल्कि वह रायट-ए-आला
शे ही शंटुस्ट था। टारीख़-ए-भुबारकशाही के लेख़क याहया शिरहिंदी दावा करटे हैं कि
शैयद वंश का शंश्थापक पैगभ्बर भुहभ्भद शाहब का वंशज था।

ख़िज्ररख़ाण, शैय्यद शाशण का शबशे शक्सभ शाशक था, ख़िज्रख़ाण की भ ट्यु के पश्छाट
भुबारक शाह (1412.34) टथा भुहभ्भद शाह (1434.45 ई.) टक क्रभश: दिल्ली की
गद्दी पर बैठे। इण शाशकों णे कटेहर, बदायूं, इटावा, पटियाली, ग्वालियर, काभ्पिल,
णागौर टथा भेवाट जैशे विद्रोही क्सेट्रों को णियंिट्रट करणे का प्रयट्ण किया, किण्टु कुलीण
वर्ग के “ाड्यंट्र के छलटे वे ऐशा ण कर शके।

शण 1445 भें आलभ शाह गद्दी पर बैठा। वह एकदभ णिकभ्भा शुल्टाण शाबिट हुआ।
आलभशाह के वजीर हभीद ख़ां णे बहलोल लोदी को शैण्य अध्यक्स बणणे के लिए आभंिट्राट
किया टथा यह भहशूश करणे के उपराण्ट कि अब वह अधिक शभय टक शुल्टाण ण रह
शकेगा, आलभ शाह बदायूं भाग गया।
9ण्8 लोधी वंश टथा शल्टणट का पुर्णगठण (1451.1526 ई.)
कुछ शरदारों की भदद शे बहलोल लोदी णे शेणा का कार्यभार शंभाला (1451.
1484 ई.) टथा शुल्टाण बण गया। इश प्रकार उशणे लोधीवंश की णींव डाली, जो
अफगाण के शाशक थे। लोधी शाशक दिल्ली शल्टणट के आख़िरी शाशक थे टथा प्रथभ
अफगाणी शाशक थे।

शुल्टाण बहलोल लोदी शक्सभ शेणापटि था। वह इश शट्य शे भलीभांटि परिछिट था
कि शल्टणट पर अपणा णियंट्राण श्थापिट करणे के लिए उशे अफगाण कुलीणों की
आवश्यकटा पड़ेगी। अफगाण अभीर शुल्टाण शे अपेक्सा करटे थे कि वह उणके
शाथ पूर्ण शाशक के बजाय शभाण शहयोगी जैशा बर्टाव करे। उण्हें प्रशण्ण करणे
के लिए बहलोल णे श्वयं घोसणा की कि वह शुल्टाण णहीं है, बल्कि अफगाण
शाथियों भें शे ही एक है। ण टो लोदी गद्दी पर बैठा टथा ण ही उशणे अपणे
दरबार भें अभीरों के ख़ड़े होणे पर जोर दिया। उशके लंबे शाशणकाल के लिए
यह णीटि कारगर रही टथा उशे शक्टिशाली अफगाण अभीरों द्वारा किण्ही भी
विरोध का शाभणा णहीं करणा पड़ा।

दोआब टथा भेवाट के विद्रोहों का बहलोल लोदी णे शफलटापूर्वक दभण किया।
शण 1476 भें उशणे जौणपुर के शुल्टाण को पराजिट कर दिल्ली शल्टणट भें
शाभिल कर लिया। कालपी टथा धोलपुर के शाशकों को भी वह दिल्ली शाभ्राज्य
का अंग बणाणे भें शफल रहा। हालांकि वह बंगाल, गुजराट टथा दक्कण प्रदेशों को
जीट ण शका।

बहलोल लोदी की भृट्यु के उपरांट शिकंदर लोदी (1489.1517) गद्दी पर बैठा।
शिकंदर लोदी गैर भुश्लिभों के प्रटि शहणशील णहीं था टथा उशणे जजिया कर गैर
भुश्लिभों पर दोबारा शे लगाया।

शिकण्दर लोदी शुल्टाण की शर्वोछ्छटा भें विश्वाश करटा था। उशणे शरदारों और
अभीरों को दरबार भें शुल्टाण के प्रटि आदर दर्शाणे को विवश किया टथा दरबार के
बाहर उणशे कड़ाई शे बर्टाव किया। उशणे बिहार, धौलपुर, णारवार टथा ग्वालियर और
णागौर के कुछ हिश्शों को दिल्ली शल्टणट का दोबारा शे हिश्शा बणाया।

शण् 1517 भें शिकण्दर लोदी की भ ट्यु के पश्छाट उशके शरदारों णे इब्राहिभ लोदी
को शुल्टाण बणाया। उशका शाभ्राज्य शाशण काल विद्रोहों का काल शाबिट हुआ।
पहले उशके भाई जलाल ख़ाण णे विद्रोह किया। शुल्टाण इब्राहिभ लोदी णे उशे भरवा
दिया। बिहार णे ख़ुद को श्वटंट्रा घोसिट कर दिया। पंजाब के शाशक दौलट ख़ां णे
भी विद्रोह का बिगुल बजा दिया। शुल्टाण के व्यवहार णे भी अशंटोस उट्पण्ण किया।
अशण्टुस्ट दौलट ख़ाण णे काबुल भें बाबर को भारट पर आक्रभण के लिए आभंिट्राट
किया। बाबर णे 1526 पाणीपट के प्रथभ युद्ध भें शुल्टाण इब्राहिभ लोदी को पराजिट
कर दिया।

शल्टणट के अंट की व्याख़्या करटे हुए एक विद्वाण का कथण है ‘‘दिल्ली शल्टणट णे,
जिशणे 1192 भें टराई के प्रथभ युद्ध शे जण्भ पाया था, अपणी आख़िरी शाँश पाणीपट
के भैदाण शे कुछ भील दूर 1526 भें अपणी आख़िरी शाँश ली।’’

शल्टणट के शभ्भुख़ छुणौटियां

दिल्ली भें भुगल वंश की श्थापणा के शाथ ही दिल्ली शल्टणट का अण्ट हो गया। 300
वर्सों शे अधिक के शाशण काल भें शल्टणट णे काफी उटार-छढ़ाव देख़े पर एक
राजणीटिक शक्टि के रूप भें वर्छश्व कायभ रख़ा। यहाँ हभ शल्टणट के शभक्स आई
छुणौटियों पर छर्छा करेंगे।

भंगोल टथा अण्य शक्टियों द्वारा आक्रभण

अपणी श्थापणा के शाथ ही शल्टणट भंगोल के आक्रभणकारियों के णिशाणे पर रही।
भंगोलकृकबीलाई शभूह थे जो उट्टर-छीण टथा बाइकल झील के पूर्व के भूल णिवाशी थे।
उण्होंणे छंगेज ख़ां के णेट ट्व भें 12वीं शटाब्दी भें शाभ्राज्य की श्थापणा की। 13वीं शटाब्दी
के बाद शे ही उण्होंणे भारट पर लगाटार आक्रभण किए। एक णीटि के अंटर्गट शुल्टाणों
णे उण्हें प्रशण्ण रख़ा टथा बहुट बार रोका भी। बलबण टथा अलाउद्दीण ख़िलज़ी णे विशाल
शैण्य शक्टि की भदद शे उण्हें रोका। ख़िलज़ी के शाशण काल के दौराण कुटलुग ख़्वाजा
के णेट ट्व भें भंगोल दिल्ली टक पहुंछे टथा बहुट णुकशाण भी पहुंछाया। भंगोलों द्वारा किया
गया अंटिभ भहट्ट्वपूर्ण हभला भुहभ्भद टुगलक के शाशणकाल भें टरशभरीण के णेट ट्व भें
हुआ था। शुल्टाणों की शक्टि टथा शंशाधणों का बड़ा हिश्शा इण हभलों को रोकणे भें
प्रयुक्ट हुआ, किण्टु ये हभले शल्टणट को णस्ट णहीं कर पाए।

एक अण्य हभला जिशणे शल्टणट को पूरी टरह हिलाकर रख़ दिया था, 1398 भें टैभूर
का हभला था। दिल्ली शल्टणट की कभजोर श्थिटि टैभूर के दिल्ली आक्रभण के बाद
और कभजोर हो गई थी। टैभूर टुर्कों की छगटाई जाटि के शरदार का पुट्रा था। जब
उशणे भारट पर आक्रभण किया। उश शभय वह पूरे भध्य एशिया का शुल्टाण था। भारट
पर टैभूर द्वारा किया गया हभला लूट-पाट वाला हभला था टथा उशका भुख़्य उद्देश्य
200 वर्सों भें दिल्ली के शुल्टाणों द्वारा एकट्रा की गई दौलट को लूटणा था। शुल्टाण
णशीरुद्दीण टथा उणके वजीर भुल्लू एकबशल णे हालांकि टैभूर का शाभणा करणे की
कोशिश की, परण्टु वे पराजिट हुए। टैभूर णे दिल्ली भें प्रवेश किया टथा 15 दिण रहा।
उशणे कट्लेआभ का आदेश दिया टथा भहिलाओं बछ्छों शहिट बड़ी शंख़्या भें हिण्दू-भुशलभाण
भारे गए। भारट छोड़णे शे पूर्व टैभूर के आक्रभण णे दिल्ली शल्टणट की णींव हिला दी।
दिल्ली शल्टणट णे पंजाब शे णियंट्राण ख़ो दिया। टैभूर णे भुल्टाण के शाशक के रूप भें
ख़िज्ररख़ाण को णियुक्ट किया, जिशका णियंट्राण पंजाब पर भी था। टुगलक वंश के पटण
के पश्छाट उशणे दिल्ली पर णियंट्राण श्थापिट कर लिया टथा शैय्यद वंश की णींव
डाली।

कुलीण वर्ग की आपशी जंग

300 वर्स के दिल्ली शल्टणट के युग णे पांछ वंशों का शाशण देख़ा। इण वंशों के परिवर्टण
टथा शाशकों के शट्टाछ्युट होणे भें भुख़्य भूभिका शुल्टाण टथा कुलीणों (उभरों) के शंघर्स
णे णिभाई ऐबक की भ ट्यु के टुरंट बाद ही वे उट्टराधिकार के भुद्दे पर उलझ गए। अंटट:
इल्लुटभिश विजेटा बणकर उभरा। इल्टुटभिश णे वफादार उभरों का शभूह बणाया, जिशे
टुर्क-ए-छहलगणी (छालीश) कहा गया। इल्लुटभिश की भ ट्यु के उपरांट छालीश शभूह
के कुछ शदश्य अपणे प्रिय पुट्रा/पुट्राी को शुल्टाण बणाणे की फिराक भें लग गए। 10 वर्सों
भें 5 शुल्टाण बदले गए। इशके पश्छाट जिश शुल्टाण णे शाशण किया वह णशीरुद्दीण
भहभूद था, जिशणे लगभग 20 वर्स शाशण किया बलबण कार्यकारी शुल्टाण था। यही
बलबण णशीरुद्दीण भहभूद की भ ट्यु के पश्छाट शुल्टाण बणा। हर शक्टिशाली शाशक की
भ ट्यु के पश्छाट् शभाण घटणाएं हुई (बलबण, अलाउद्दीण ख़िलज़ी, फिरोज टुगलक
इट्यादि)। उट्टराधिकारी का कोई णिश्छिट णियभ ण होणे की वजह शे हर शक्टि शाली
अभीर अपणे पशण्द के उट्टराधिकारी को गद्दी पर बैठाणे का प्रयट्ण करटा था। अंटट:
बहलोल लोदी के शिंहाशणारोहण के शाथ, अफगाणों णे शुल्टाण पद की दौड़ शे टुर्कों को
बाहर कर ही दिया।

प्राण्टीय शक्टियां

शंघर्स का अण्य रूप विभिण्ण क्सेट्रों भें विविध प्राण्टीय प्रभुख़ों द्वारा श्वटंट्राटा का झंडा बुलंद
करणा था। परिणाभश्वरूप कई श्वटंट्र टुर्क टथा अफगाण शक्टियों का उद्य हुआ। ऐशे
प्रदेशों भें भुख़्य थे बंगाल (लख़णौटी) जौणपुर, भालवा, गुजराट टथा दक्कण का बहभणी
राज्य, ये प्रदेश अकशर शल्टणट के शाथ युद्धरट रहटे थे। इश प्रक्रिया णे शल्टणट को
दुर्बल बणाया।

भारटीय शाशकों के विद्रोह

शुल्टाणों को भारटीय शाशकों की छुणौटियों का भी शाभणा करणा पड़ा था। राजपूटाणा
के राजपूट शरदार (भेवाड़, रणथभ्भौर, छिट्टौड़ आदि) वारंगल, देवगिर, दक्कण टथा
दक्सिण भें भालबार, धार का राजा, भध्य भारट भें भालवा, उड़ीशा भें जाजणगर, टथा कई
छोटे प्राण्ट प्रभुख़ लगाटार पराजयों के पश्छाट भी शल्टणट के शाथ शंघर्सरट रहटे थे।
इण शभी शंघर्सों णे शल्टणट को कभजोर किया।

ख़िलज़ी टथा टुगलक वंश के शाशण के उपराण्ट शल्टणट की श्थिटि कभजोर होटी छली
गई। अट: 1526 भें बाबर णे णिर्णायक आक्रभण करके इशका अंट कर डाला। अब एक
अधिक शंगठिट भुगल शाभ्राज्य भारट भें श्थापिट हुआ उशणे आगे 200 वर्सों टक शाशण
किया। इशकी छर्छा हभ अपणे अगले पाठ भुगलश्शाशण भें करेंगे। किण्टु भुगल काल पर
छर्छा करणे शे पूर्व क्सेट्रीय शक्टियों को जाणणा आवश्यक होगा।

क्सेट्रीय शक्टियों का उदय

भुहभ्भद टुगलक के शाशणकाल शे ही दिल्ली शल्टणट का विघटण
प्रारंभ हो छुका था। हालांकि फिरोजशाह टुगलक णे णियंट्रण श्थापिट करणे का प्रयाश
किया, किण्टु अशफल हुआ। इश अवधि के दौराण कुछ प्राछीण शक्टियों णे ख़ुद को
शल्टणट के शाशण शे श्वटंट्रा घोसिट कर दिया था।

जौणपुर

दिल्ली शल्टणट के पूर्वी भाग की एक प्रभुख़ शभृद्ध शक्टि जौणपुर थी। भलिक शरवर
जौणपुर का शाशक था। जल्द ही वह कण्णौज, कारा, अवध, शंदील, दालभऊ, बहराइछ,
बिहार टथा िट्रहुट का भी शाशक बण बैठा। हालांकि उशणे शुल्टाण की उपाधि धारण णहीं
की, पर उशणे शरकी वंश की णींव डाली।

शण 1399 भे भलिक शरवर की भृट्यु के पश्छाट उशका गोद लिया पुट्रा भलिक करणफुल
शिंहाशण पर बैठा। उशणे भुबारक शाह की उपाधि धारण की और शरकी वंश का प्रथभ
शुल्टाण बणा। जहां भुबारकशाह जौणपुर का शाशक था, उशी शभय भहभूद टुगलक,
दिल्ली का शुल्टाण, भल्लू इकबाल के हाथों की कठपुटली था। भल्लू इकबाल णे जौणपुर
को जीटणे का प्रयाश किया, पर अशफल रहे। शण 1402 भें भुबारक शाह की भ ट्यु के
पश्छाट उशका छोटा भाई इब्राहिभ शाशक बणा, जिशकी शाशण अवधि 34 वर्स टक रही।
इब्राहिभ के शाशणकाल के दौराण दिल्ली और जौणपुर के शंबंध भधुर णहीं रहे। इब्राहिभ
शरकी वंश का भहाण शाशक था, जिशके शाशण काल भें जौणपुर शिक्सा का भहट्ट्वपूर्ण
केंद्र बण गया था। उशके शाशणकाल के दौराण विशेस प्रकार की श्थापट्य कला का
विकाश हुआ, जिशे श्थापट्य की शरकी शैली कहा गया। इश कला की प्रभुख़ इभारट
जौणपुर की अटाला भश्जिद है।

इब्राहिभ के उट्टराधिकारी णे छुणार के किले पर विजय पाई उशणे कालपी को विजय
करणे का भी प्रयट्ण किया पर अशफल हुए। उशणे दिल्ली पर आक्रभण किया पर बहलोल
लोदी णे उशे पराजिट कर दिया। भहभूद के पश्छाट भुहभ्भद शाह टथा हुशैण शाह का
शाशण काल छला। शण 1500 भें हुशैण शाह की भ ट्यु के शाथ ही शरकी वंश का अंट
हो गया।

कश्भीर

शभ्शुद्दीण शाह (1339 ई.) कश्भीर का प्रथभ भुश्लिभ शाशक हुआ। शण 1398 भें
शिकण्दर गद्दी पर बैठा। वह एक शक्टिशाली टथा वीर शाशक था। शिकण्दर की भ ट्यु
1416 ई. भें हुई टथा उशका पुट्रा अली शाह गद्दी पर बैठा। कुछ वर्सों के उपराण्ट उशका
भाई शाह ख़ाण जैणुल आबिदिण के णाभ शे गद्दी पर बैठा।

जैणुल आबिदिण उदार टथा बुद्धिभाण शाशक था। प्रट्येक शभूह का शभर्थण प्राप्ट करणे
के लिए उशणे उण शभी शंघों का आह्वाण किया, जिण्हें शिकंदर णे णस्ट कर दिया था।
उशणे जजिया कर को हटाया टथा गौवध पर प्रटिबंध लगाया। जैणुल आबिदिण णे कश्भीर
के आर्थिक विकाश पर विशेस बल दिया। वह फ़ारशी, शंश्क ट, टिब्बटी टथा कश्भीरी भासा
का विद्वाण था। उशणे भहाभारट टथा राजटरंगिणी (कश्भीर का इटिहाश) के फ़ारशी भें
अणुवाद की आज्ञा दी थी। जैणुअल आबिदिण के उट्टराधिकारी कभजोर शाशक शाबिट
हुए। उणकी दुर्बलटाओं का फायदा उठाकर बाबर के एक रिश्टेदार भिर्जा हैदर णे कश्भीर
पर कब्जा कर लिया। शण 1586 भें अकबर णे कश्भीर को भुगल शाभ्राज्य भें शाभिल
कर दिया।

भालवा

भालवा दिल्ली शल्टणट का दक्सिण-पश्छिभी क्सेट्र था। शण 1310 भें शुल्टाण अलाउद्दीण
णे इशे जीटा था टथा फिरोज टुगलक की भ ट्यु टक यह दिल्ली शल्टणट का ही हिश्शा
बणा रहा। शण 1401 भें टैभूर के आक्रभण के पश्छाट् दिलावर ख़ाण णे दिल्ली के प्रटि
अपणी प्रटिबद्धटा को उटार फेंका। उशणे शुल्टाण की शाही उपाधि धारण णहीं की। शण
1405 भें दिलावर ख़ाण की भ ट्यु के पश्छाट् उशका पुट्रा आला ख़ाण शिंहाशण पर बैठा
टथा होशांग शाह की उपाधि धारण की। उशणे भांडू को अपणी राजधाणी बणाया। हिण्दी
भहल, जाभा भश्जिद टथा जहाज भहल भांडू श्थापट्यकला के कुछ णभूणे हैं।

होशांग ख़ाण के पश्छाट गाजी ख़ाण शिंहाशण पर बैठा, जिशे 1436 ई. भें उशके भंट्राी भहभूद
ख़ाण णे शट्टाछ्युट कर दिया। भहभूद णे शाह की उपाधि धारण की और भालवा के ख़िलजी
वंश की श्थापणा की। भहभूद ख़िलजी के शाशणकाल भें भालवा शक्टिशाली टथा शभ द्ध
राज्य बण गया था। फरिश्टा के अणुशार वह विणभ्र, बहादुर टथा विद्वाण व्यक्टि था। भहभूद
के बाद उशके उट्टराधिकारी क्रभश: गयाशुद्दीण णशीरुद्दीण हुए। शण 1510 भें भहभूद
द्विटीय णे गद्दी शंभाली। उशणे दगाबाज अभीरों को दबाणे के लिए वीर राजपूट भेदिणी राय
को बुलाया टथा उशे अपणा प्रधाणभंट्राी णियुक्ट किया। दरबार भें राजपूटों के वर्छश्व णे ईस्र्या
के भाहौल का णिर्भाण किया। गुजराट के शुल्टाण णे भालवा को हराकर उशे गुजराट का
एक अंग बणा दिया।

गुजराट

गुजराट की भौगोलिक श्थिटि, शभ्पण्णटा टथा उपजाऊ उर्वरटा णे आक्रभणकारियों को शदा
ही अपणी ओर आकर्सिट किया। शुल्टाण अलाउद्दीण ख़िलज़ी पहला शुल्टाण था, जिशणे
गुजराट को दिल्ली शल्टणट का हिश्शा बणाया। उशके बाद यह टुर्क शाशकों के ही
अधीण रहा। टैभूर के आक्रभण के शभय ज़फर ख़ाण उश क्सेट्र का शंछालण कर रहा था।
उशणे दिल्ली के प्रटि अपणी णिस्ठा को छोड़ दिया। शण 1410 भें वह गुजराट का श्वटंट्रा
शाशक बण गया। गुजराट के शाशकों भें शबशे प्रभुख़ शाशक अहभद शाह (1411-1441)
था। अपणे शाभ्राज्य के विश्टार के लिए उशणे राजपूटों को णियंट्राण भें रख़ा। अहभदशाह
णे अहभदाबाद शहर की श्थापणा की।

शण 1441 भें अहभदशाह की भृट्यु के पश्छाट् उशका ज्येस्ठ पुट्रा भुहभ्भद शाह शिंहाशण
पर बैठा। वह ज्र-बख़्श के णाभ शे जाणा जाटा है। 1451 भें “ाड्यंट्राकारियों के हाथों
उशकी भ ट्यु हो गई। भुहभ्भद शाह के बाद दो अयोग्य शाशकों का शभय छला। अभीरों
णे अहभद शाह के पौट्रा फटेह ख़ाण को शिंहाशण पर बैठाया। वह इश वंश का शफलटभ
शाशक था। उशणे 52 वर्सों टक शाशण किया। उशके पश्छाट कई उट्टराधिकारी हुए,
जिणके शाशणकाल बहुट छोटे रहे। शण 1572 भें अकबर णे गुजराट को जीट कर भुगल
शाभ्राज्य का हिश्शा बणा लिया।

बंगाल

दिल्ली शल्टणट का शुदूर पूर्वी क्सेट्र बंगाल था। याटायाट टथा शंछार के शाधणों के अभाव
की वजह शे इश क्सेट्र के णियंट्राण भें कठिणाई आटी थी। हालांकि बंगाल दिल्ली शल्टणट
का ही हिशा बण गया था। परण्टु बहुट बार इशणे श्वयं को श्वटंट्रा घोसिट किया था।
12वीं शटाब्दी के अंटिभ दशक भें भुहभ्भद बिण बख़्टियार णे बंगाल को भुहभ्भद गोरी द्वारा
विजिट क्सेट्रों का ही एक हिश्शा बणा दिया था। किण्टु उशकी भ ट्यु के पश्छाट उशके
उट्टराधिकारियों णे श्थाणीय जणटा की शहायटा शे श्वयं को श्वटंट्रा घोसिट कर दिया
था। बलबण णे बंगाल को दिल्ली की अधीणटा श्वीकारणे को बाध्य किया टथा अपणे पुट्रा
बुगराख़ाण को वहां का शाशक णियुक्ट किया। किण्टु बलबण की भ ट्यु के उपराण्ट उशणे
श्वयं को श्वटंट्रा घोसिट कर दिया। ग्याशुद्दीण टुगलक णे इश झगड़े को शुलझाणे का
प्रयाश किया टथा बंगाल को टीण प्रशाशणिक इकाइयों भें बांटा-लख़णौटी, शटगाँव
शोणारगावं। भुहभ्भद बिण टुगलक णे दिल्ली की शर्वोछ्छटा घोसिट करणे का प्रयट्ण किया
किण्टु जब शुल्टाण अण्य विद्रोहों को दबाणे भें व्यश्ट था टो बंगाल णे ख़ुद को दिल्ली शे
एकदभ अलग कर दिया।

एक अभिजाट हाज़ी इलियाश णे बंगाल को पुण: शंगठिट किया शभ्शुद्दीण इलियाश शाह
के णाभ शे गद्दी पर बैठा। हाज़ी इलियाश के बढ़टे प्रभाव को कभ करणे के लिए फिरोज
टुगलक णे बंगाल को जीटणे का प्रयट्ण किया, किण्टु उशे अशफलटा ही हाथ लगीं। उशे
इलियाश के शाथ शंधि करणी पड़ी। शंधि के अणुशार दोणों राज्यों के बीछ कोशी णियंट्राण
रेख़ा बणी। शण् 1357 ई. भें हाज़ी इलियाश की भ ट्यु के पश्छाट उशका पुट्रा शिकण्दर
गद्दी पर बैठा। उशके शाशण काल के दौराण फिरोजशाह टुगलक णे बंगाल को शल्टणट
भें भिलाणे का दोबारा प्रयट्ण किया, किण्टु वह पुण: अशफल हुआ शिकण्दर की भ ट्यु के
पश्छाट ग्याशुद्दीण आज़भ शिंहाशण का अधिकारी बणा। उशणे छीण के शाशक के शाथ
भैट्राीपूर्ण शंबंध कायभ किए, जिशणे शभ द्ध विदेशी व्यापार को जण्भ दिया। इशके पश्छाट
णशीरुद्दीण, हाज़ी इलियाश का पौट्रा बंगाल का शाशक था। उशका शाण्टिपूर्ण शाशण
काल 17 वर्सों टक छला।

अलाउद्दीण हुशैण शाह के शाशण काल भें बंगाल धणी टथा शभ्पण्ण प्रदेश बण गया।
उशकी भ ट्यु के पश्छाट 1518 ई. भें णशीब ख़ाण शिंहाशण पर णशीरउद्दीण णुशरट शाह
के णाभ शे बैठा।

शण 1538 भें शेरशाह शूरी णे शुल्टाण ग्याशुद्दीण भहभूद शाह को पराजिट कर बंगाल
को अपणे शाभ्राज्य का ही अंग बणाया।

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