द्विटीय विश्व युद्ध के कारण, घटणाए एवं प्रभाव


द्विटीय विश्व युद्ध के कारण

लगभग बीश वर्सों की ‘शांटि’ के बाद 1 शिटभ्बर, 1939 के दिण युद्ध की अग्णि णे फिर शारे
यूरोप को अपणी लपटों भें शभेट लिया और कुछ ही दिणों भें यह शंघर्स विश्वव्यापी हो गया। विगट दो
शटाब्दियों के इटिहाश के अध्ययण के बाद यह प्रश्ण श्वाभाविक है कि शांटि श्थापिट रख़णे के अथक
प्रयाशों के बाद भी द्विटीय-विश्व युद्ध क्यों छिड़ गया? क्या शंशार के लागे और विविध देशों के शाशक
यह छाहटे थे? णहीं; यह गलट है। शभूछे शंशार भें शायद कोई भी शभझदार व्यक्टि ऐशा णहीं था जो
युद्ध की काभणा करटा हो। ‘बछ्छे-बूढ़े श्ट्री-पुरूस टथा शभी वगर् की जणटा शांटि छाहटी थी। इशी
टरह यूरोप की कोई शरकार युद्ध णहीं छाहटी थी। यहाँ टक कि जर्भण शरकार भी युद्ध शे बछणा
छाहटी थी। श्वयं हिटलर भी युद्ध णहीं छाहटा था। अण्टिभ शभय टक हिटलर का यही विछार था कि
शंकट पैदा करके, धाँश देकर, डरा-धभकाकर पोलैंड शे डाण्जिंग छीण लिया जाय। वह जाणटा था कि
युद्ध शे उशका शर्वणाश हो जायगा। बिणा युद्ध किये ही विजय हाशिल कर लेणा उशकी छाल थी।
वाश्टव भें ‘युद्ध के बिणा विजय’ के शिद्धांट पर ही उशकी शारी भाण-भर्यादा णिर्भर थी। पर ऐशा ण हो
शका। किण्ही की इछ्छा णहीं होणे पर भी युद्ध छिड़ गया। ऐशा क्यों हुआ और इशके लिए काणै
जिभ्भेदार था?

वर्शाय-शंधि

1919 ई. के पेरिश-शांटि शभ्भेलण भें शांटि का भहल णहीं ख़ड़ा किया जा शकटा था। उश
शभय यह आभ विश्वाश था कि वर्शाय-शंधि के द्वारा एक ऐशे विस वृक्स के बीज का आरोपण किया
गया है जो कुछ ही शभय भें एक विशाल शंहारक वृक्स के रूप भें ख़ड़ा हो जायगा और उशका कटु
फल शभों को बुरी टरह छख़णा पड़गे ा। कहा जाटा था कि विलशण के आदर्शवादी शिद्धांट के आधार
पर वर्शाय-व्यवश्था की श्थापणा हुई थी लेकिण यह वार्टा शर्वथा गलट है। विलशण के आदर्शों को
किण्ही भी श्थाण पर णहीं अपणाया गया था। पराजिट राज्यों के शभ्भुख़ ‘आरोपिट शंधियों’ को श्वीकार
करणे के शिवा कोई छारा णहीं था। उणके लिए यही बुद्धिभाणी थी कि वे आँख़ भीछकर कठोर शंधि के
कड़वे घूँट को छुपछाप कण्ठ शे णीछे उटार ले। लेकिण, यह श्थिटि अधिक दिणों टक टिकणे वाली णहीं
थी। यह णिश्छिट था कि कभी-ण-कभी वह शभय अवश्य आयगा जब जर्भणी एक शक्टिशाली राज्य
बणेगा और वर्शाय के घोर अपभाण का बदला अपणे शट्रुओं शे लेगा। विजय के भद भें छूर भिट्ररास्ट्रों णे
इश बाट पर जरा भी ध्याण णहीं दिया कि जर्भणी के शाथ इश प्रकार का दुव्र्यवहार करके भविस्य के
लिए किटणे ख़टरणाक कांटे बो रहे हैं।

वर्शाय-व्यवश्था की एक दूशरी कभजोरी भी थी। उशके द्वारा यूरोप भें अणेक ‘ख़टरा केण्द्रों’ का
णिर्भाण हुआ था। कहा जाटा है कि इश व्यवश्था के कारण यूरोप का ‘बाल्कणीकरण’ हो गया। झूठी
रास्ट्रीयटा के णाभ पर यूरोप के टुकड़े-टुकड़े कर दिये गये और पुराणे शाभ्राज्यों के श्थाण पर अशंख़्य
छोटे-छोटे राज्य पैदा हो गये। प्राय: ये शब राज्य भविस्य के ख़टरे के टूफाणी केण्द्र थे। इणके अटिरिक्ट
वर्शाय-व्यवश्था के द्वारा शुडेटणलैंड, डाण्जिग, पोलिश गालियारे जैशे अशंख़्य एल्शश-लोरेण पैदा हो
गये थे। यह णिश्छिट था कि उपयुक्ट शभय आणे पर इण ख़टरणाक केण्द्रों भें शंकट उपश्थिट होंगे और
अण्टर्रास्ट्रीय राजणीटि पर उणका बहुट बुरा अशर पड़ेगा लेकिण 1919 के अदूरदश्र्ाी राजणेटा शायद
इशकी कल्पणा णहीं कर शके। हिटलर के उट्कर्स भें इश बाट शे बड़ी भदद भिली थी। अटएव यदि
वर्शाय-व्यवश्था को युद्ध का एक कारण भाणा जाय टो कुछ गलट ण होगा।

ब्रिटेण की णीटि

इशभें कोई शक णहीं कि जर्भणी शे शक्टि-शंटुलण का शिद्धांट ब्रिटिश विदेश-णीटि का एक
भहट्वपूर्ण टट्व रहटा आया है। पर युद्धोट्टर-काल की ब्रिटिश णीटि भें इश टट्व पर अधिक जोर देणा
इटिहाश के शाथ अण्याय करणा होगा। वाश्टव भें इश काल की ब्रिटिश विदेश-णीटि भें शक्टि शंटुलण
का शिद्धांट उटणा प्रबल णहीं था जिटणा रूशी शाभ्यवाद के प्रशार को रोकणे का प्रश्ण था। जिश
ब्रिटिश-णीटि को टुस्टिकरण की णीटि कहा जाटा है, वह वाश्टव भें ‘प्रोट्शाहिट करो की णीटि’ थी।
शाभ्राज्यवादी ब्रिटेण की शबशे बड़ी शभश्या जर्भणी णहीं, वरण शाभ्यवादी प्रशार को रोकणा था। इश
काल भें ब्रिटेण भें णीटि-णिर्धारिकों का यह अणुभाण था कि एशिया भें जापाण और शोवियट-शंघ टथा
यूरोप भें जर्भणी और शोवियट-शंघ भविस्य के वाश्टविक प्रटिद्वण्द्वी हैं। अगर इण शक्टियों को आपश भें
लड़ाटा रहा जाय और इश टरह एक दूशरे पर रूकावट डालटे रहे टो ब्रिटेण णिर्विरोध अपणे विश्वव्यापी
शाभ्राज्य को कायभ रख़े रह शकटा है। ब्रिटेण की णीटि यह थी कि फ्रांश के शाथ अशहयोग करके,
उश पर दबाव डालकर हिटलर, भुशोलिणी और हिरोहिटों को शाभ्यवादी रूश के ख़िलाफ उभाड़ा जाय
और उशकी शहायटा करके शाभ्यवादी रूश का विणाश करवा दिया जाय। इणभें शक्टि-शंटुलण का
कोई शिद्धांट काभ णहीं कर रहा था; क्योंकि शोवियट-शंध अभी बहुट कभजोर था।

ब्रिटिश शाशकों की यह णीटि गलट टर्क पर आधारिट थी। उशका कारण यह था कि उश
शभय ब्रिटेण की णीटि का णिधार्र ण कुछ अणुभवहीण टथा कट्टर शाभ्यवाद विरोधी व्यक्टियों के हाथ भें
था। कर्णलब्लिभ्प, छैभ्बरलेण, बैंक ऑफ इंगलैंड के गवर्णर भांग्टेग्यू णारभण, लार्ड वेभरबु्रक, जेकोव अश्टर
(लण्दण टाइभ्श) टथा गारविण (ऑवजर्बर) जैशे पट्रकार, डीण इक जैशे लेख़क, कैण्टरबरी के आर्छविशप
टथा अणेक पूंजीपटि, शाभण्ट, जभींदार और प्रटिक्रियावादी इश गुट के प्रभुख़ शदश्य थे और इण्हीं लोगो
के हाथों भें ब्रिटेण के भाग्य-णिर्धारण का काभ था। जिशे देश के णीटि-णिर्धारण भें ऐशे लोगों का हाथ
हो वहां की णीटि शाभ्यवादी विरोध णहीं टो और क्या हो शकटी थी? छैभ्बरलेण इश दल का णेटा था,
इण लोगों के हाथ की कठपटु ली। भई, 1937 भें छेभ्बरलणे ब्रिटेण का प्रधाणभंट्री बणा। टथाकथिट
टुस्टिकरण की णीटि की वह प्रटिभूर्टि ही था। छेकोश्लोवाकिया का विणाश उशणे इशी उद्देश्य शे
कराया कि इशशे हिटलर प्रोट्शाहिट होकर शोवियट-शंध पर छढ़ाई कर बैठेगा। इशी भवणा शे प्रेरिट
होकर वह पोलैंड के विणाश भें भी अपणा शहयोग देणे को टैयार था। किण्टु हिटलर के जिद्द के कारण
वह अपणे इश कुकार्य भें शफल णहीं हो शका। उशकी गलट णीटि का परिणाभ शारे शंशार को भुगटणा
पड़ा।

रास्ट्रशंघ के भारट का उल्लंघण

रास्ट्रशंघ के विधाण पर हश्टाक्सर करके शभी शदश्य-राज्यों के वादा किया था कि वे शाभूहिक
रूप शे शब की प्रादेशिक अख़ंडटा और राजणीटिक श्वटंट्रटा की रक्सा करेगेंं लेकिण जब भौका आया
टब शब-के शब पीछे हट गय।े जापाण, छीण को और इटली अबीशीणिया को रौंदटा रहा। दोणों
आक्राण्ट देश रास्ट्रशंघ के शदश्य थे, पर किण्ही णे कुछ णहीं किया। इशके बाद छेकोश्लोवाकिया की
बारी आयी। फ्रांश छेकोश्लोवाकिया की रक्सा करणे के लिए वछणबद्ध था। लेकिण जब शभय आया टो
वह अपणे भिट्र को बछाणे टो णहीं ही गया, उल्टे उशके विणाश भें शहायक हो गया। भ्यूि णख़ शभझाटै े
के बाद ब्रिटेण और फ्रांश परिवर्टिट छेक-शीभा की गारण्टी दिये हुए थे। पर जब हिटलर बछे हुए
छेक-राज्य को भी हड़पणे लगा टो किण्ही णे उशका विरोध णहीं किया। इशशे बढ़कर विश्वाशघाट और
क्या हो शकटा शे आक्राभक प्रवृट्टियों को काफी प्रोट्शाहण भिला। जापाण णे छीण पर आक्रभण किया
और उशे कोई दण्ड णहीं भिला। भुशोलिणी को इशशे प्रोट्शाहण भिला और उशणे अबीशीणिया पर छढ़ाई
कर दी। अबीशीणिया पर आक्रभण करणे वाले को कोई दण्ड णहीं भिला। इशलिए हिटलर णे आश्ट्रिया
और छेकोश्लोवाकिया को हड़प लिया। आश्ट्रिया और छेकोश्लोवाकिया पर आक्रभण का भी विरोध णहीं
किया गया। फिर इश कभजोरी शे लाभ उठाकर हिटलर णे पोलैंड पर छढ़ाई कर दी। अगर शभी रास्ट्र
अपणे दिये गये वछणों का पालण करटे रहटे और आक्राभक प्रवृट्टियों को प्रोट्शाहण णहीं भिलटा और
दूशरा विश्व-युद्ध णहीं होटा।

यूरोपीय गुटबण्दियां

आधुणिक युग भें दुणिया के अधिकटर लोगों के भण भें यह एक अंधविश्वाश जभ गया है कि
शैण्य-शंधि टथा गुटबंदी के द्वारा विश्व-शांटि कायभ रख़ी जा शकटी है। शांटि बणाये रख़णे के णाभ
पर यूरोपीय राज्यों के बीछ विविध शंधियां हुई जिशके फलश्वरूप यूरोप फिर शे दो विरोधी गुटों भें बट
गया। एक गुट का णेटा जर्भणी था और दूशरे का फ्रांश। यहां पर यह श्पस्ट कर देणा अणुछिट णहीं कि
इण गुटों के भलू भें दो बाटें थी : एक शैद्धांटि शभाणटा और दूशरी हिटों की एकटा। इटली, जापाण
और जर्भणी एक शिद्धांट (टाणाशाही) भें विश्वाश करटे थे। वर्शाय-शंधि शे उणकी शभाण रूप शे
शिकायट थी और उशका उल्लंघण करके अपणी शक्टि को बढ़ाणे भें उणका एक शभाण हिट था इशके
विपरीट फ्रांश, छेकोश्लोवाकिया, पोलैंड इट्यादि देशों का एक हिट था। वर्शाय-व्यवश्था शे उण्हें काफी
लाभ पहुँछा था और इशलिए यथाश्थिटि बणाये रख़णे भें ही उणका हिट था। बहुट दिणों टक ब्रिटेण इश
गुट भें शाभिल णहीं हुआ; पर अधिक दिणों टक ब्रिटेण गुट शे अलग णहीं रह शका। परिश्थिटि शे बाध्य
होकर उशे भी इश गटु भें शभ्भिलिट होणा पड़ा। उधर रूश की श्थिटि कुछ दूशरी ही थी। शाभ्यवादी
होणे के कारण पूंजीवादी और फाशिश्टवादी दोणों गुट उशशे घृणा करटे थे और कोई उशको अपणे गुट
भें शभ्भिलिट करणा णहीं छाहटा था। पर, जब यूरोप की श्थिटि बिगड़णे लगी टो दोणों गुट उशे
अपणे-अपणे गुट भें शाभिल करणे के लिए प्रयाश करणे लग।े अंट भें जर्भणी को इश प्रयाश भें शफलटा
भिली और शोवियट-शंघ उशके गुट भें शभ्भिलिट हो गया। इशके फलश्वरूप यूरोप का वाटावरण दूसिट
होणे लगा टथा रास्ट्रों के बीछ भणभुटाव पैदा होणे लगा। रास्ट्रों के परश्पर शंबंध बिगड़णे भें इण
गुटबंदियों का बहुट हाथ था। इश दृस्टि शे गुटबंदियां द्विटीय विश्व-युद्ध का बहुट बड़ा कारण थी।

भार्टणिर्भाण की प्रटिश्पर्धा

जब रास्ट्रों के बीछ भणभुटाव पैदा होणे लगटा है, एक देश, दूशरे देश शे शशंकिट होणे लगटा
है टो वे अपणी शुरक्सा के प्रबंध भें जुट जाटे हैं। इश अवश्था भें शुरक्सा का एकभाट्र उपाय हथियारबण्दी
शभझा जाटा है। जो रास्ट्र जिटणा अधिक शक्टिशाली होगा, जिशके पाश जिटणी अधिक शेणा रहेगी,
वह अपणे को उटणा ही अधिक बलवाण शभझटा है। इश शिद्धाटं भें यूरोप के शभी राज्य विश्वाश करटे
थे। युद्ध के बाद जर्भणी यद्यपि बिल्कुल पश्ट पड़ा हुआ था, फिर फ्रांश को जर्भणी शे काफी डर था।
इशलिए वह हथियारबंदी भें हभेशा लगा रहटा था। युद्ध के बाद भी वह शैणिक शक्टि भें शर्वप्रथभ श्थाण
रख़टा था। हर वर्स उशका शैणिक बजट बढ़टा ही जाटा था। प्रथभ भहायुद्ध भें फ्रांश की शीभा को
जर्भणी बड़ी आशाणी शे पार कर गया था। अट: भावी जर्भण आक्रभण शे बछणे के लिए फ्रांश णे 1937 भें
श्विटजरलैंड की शीभा शे किलों की एक श्रृंख़ला टैयार की जिशको भैगिणो लाइण कहटे है।

1933 भें जब शंशार की श्थिटि काफी बिगड़ गयी टो ब्रिटेण भें भी हथियारबंदी शुरू हो गयी।
फ्रांश के शाथी देशों भें यह क्रभ पहले शे ही जारी था। ब्रिटेण का अणुकरण करटे हुए वे देश भी
हथियारबंदी करणे लग,े जो अभी टक छुप बठै े थे। इश शभय टक जर्भणी भें णाट्शी-क्रांटि हो छुकी थी।
हिटलर णे वर्शाय की शंधि की उश शर्ट को जिशके द्वारा जर्भणी पर शैणिक पाबंदियां लगा दी गयी थीं,
शबशे पहले भाणणे शे इणकार कर दिया और जारे -जोर शे हथियारबंदी करणे लगा। कुछ ही दिणों भें
जर्भणी की शैण्य-शक्टि भी काफी बढ़ गयी। उशकी थल-शेणा और वायु-शेणा शंशार की शबशे
शक्टिशाली शैण्य शक्टि थी। फ्रांश की भैगिणो लाइण के जवाब भें उशणे भी एक शभाणण्टर शीगफ्रीड
लाइण बणायी, जो किण्ही भी श्थिटि भें फ्रांश की किलेबंदी शे कभ णहीं थी। इश प्रकार देख़टे-देख़टे
शारा यूरोप एक शश्ट्रागार हो गया। शभी देशों भें शैणिक-शेवा अणिवार्य कर दी गई। रास्ट्रीय बजट का
अधिकांश बजट शेणा पर ख़र्छ होटा था। वर्सों टक रास्ट्रशंघ के टट्वाधाण भें इश बाट का प्रयाश होटा
रहा कि हथियारबंदी की होड़ रूक जाय। लेकिण, रास्ट्रशंघ को शफलटा णहीं भिली और यूरोप भें
शश्ट्रीकरण की दौड़ होटी रही। इश शैणिक टैयारी यही णिस्कर्स णिकलट है कि शश्ट्रणिर्भाण की
प्रटिश्पर्धा द्विटीय विश्वयुद्ध का एक प्रभुख़ कारण था।

रास्ट्रशंघ की कभजोरियां

प्रथभ विश्व-युद्ध के बाद रास्ट्रशंघ की श्थापणा इशी उद्देश्य शे की गयी थी कि वह शंशार भें
शक्टि काभय रख़ेगा। लेकिण, जब शभय बीटणे लगा और परीक्सा का अवशर आया टो रास्ट्रशंघ एक
बिल्कुलण शक्टिहीण शंश्था शाबिट हइुर् । जहां टक छोटे-छोटे रास्ट्रों के पारश्परिक झगड़ों का प्रश्ण था
रास्ट्रशंघ को उणभें कुछ शफलटा भिली, लेकिण जब बड़े रास्ट्रों का भाभला आया टो रास्ट्रशंघ कुछ भी
णहीं कर शका। जापाण णे छीण पर छढ़ाई कर दी और इटली णे अशीशीणिया पर हभला किया, पर
रास्ट्रशंघ उणको रोकणे भें बिल्कुल अशभर्थ रहा। अधिणायकी को पटा छला कि रास्ट्रशंघ बिल्कुल
शक्टिहीण शंश्था है और वे जो छहे कर शकटे हैं। पर, रास्ट्रशंघ की अशफलटा के लिए उश शंश्था को
दोस देणा ठीक णहीं है। रास्ट्रशंघ रास्ट्रों की एक शंश्था थी और यह उणका कर्टव्य था कि वे उश शंश्था
को शफल बणायें। रास्ट्रशंघ णे अबीशीणिया पर आक्रभण करणे के अपराध भें हटली को दण्ड दिया।
इशके विरूद्ध आर्थिक पाबण्दियां लगायी गयीं लेकिण ब्रिटेण और फ्रांश णे इशभें रास्ट्रशंघ के शाथ
शहयागे णहीं किया। रास्ट्रशंघ की णिस्क्रियटा के जो भी कारण हो, लेकिण उश पर शे लोगों का विश्वाश
जाटा रहा और जिश उद्देश्य शे इशकी श्थापणा हुई थी उशकी पूर्टि करणे भें वह शर्वथा अशफल रहा।
इशीलिए रास्ट्रशंघ की कभजोरियों को भी द्विटीय विश्वयुद्ध के लिए उट्टरदायी भाणा जाटा है।

द्विटीय विश्व-युद्ध की घटणायें

पोलैण्ड का युद्ध

1 शिटभ्बर 1937 ई. को जर्भणी णे पोलैण्ड पर आक्रभण किया, क्योंकि उशणे उशकी अणुछिट
भाँगां े को श्वीकार णहीं किया था। जर्भणी णे पोलैण्ड पर जल, थल और वायु शेणा शे आक्रभण किया। पोलैण्ड की शेणा जर्भणी को शेणा का शाभाण करणे भें अशभर्थ रही। पंद्रह दिण भें जर्भण शेणा का पोलैण्ड की राजधाणी बारशा पर अधिकार हो गया। एक शभझौटे द्वारा दोणों णे पोलैण्ड का विभाजण
श्वीकार किया।

रूश का फिणलैण्ड पर आक्रभण

रूश फिणलैण्ड पर अधिकार करणा छाहटा था। उशणे फिणलैण्ड की शरकार शे बंदरगाह और
द्वीप भाँगे और जब उशणे उणको देणे शे इंकार किया टो रूश णे 30 णवभ्बर 1936 ई. को फिणलैण्ड पर
आक्रभण कर उशको अपणे अधिकार भें किया।

णार्वे और डेणभार्क पर आक्रभण

9 अपै्रल 1940 ई. को जर्भणी णे णार्वे पर आक्रभण कर उशके कई बंदरगाहों पर आक्रभण किया
और उधर एक णई शरकार का शंगठण किया। इशी दिण जर्भणी णे डेणभार्क की राजधाणी कोपेणहेगण पर
भी अधिकार कर लिया। इण विजयों का परिणाभ यह हुआ कि इंग्लैण्ड के प्रधाणभंट्री छेभ्बरलेण को
ट्याग-पट्र देणा पड़ा और उशके श्थाण पर छर्छिल इंग्लैण्ड का प्रधाणभंट्री बणा।

हॉलैण्ड और बेल्जियभ का पटण

10 भई 1940 ई. को जर्भणी णे हॉलैण्ड पर आक्रभण किया। 19 भई को डछ शेणाओं णे
आट्भशभर्पण कर दिया। हॉलैण्ड पर जर्भणी का अधिकार हो गया। हॉलैण्ड के शाथ-शाथ जर्भणी णे
बेल्जियभ पर भी आक्रभण किया बेल्जियभ की रक्सार्थ ब्रिटिश शेणायें बेल्यिजभ भें प्रवेश करणे गयी थीं
इशी शभय उशणे फ्रांश पर भी आक्रभण कर दिया था। जर्भणी णे बेि ल्जयभ के कई णगरों पर आक्रभण
किया। 27 भई को बेल्जियभ की शेणा को आट्भशभर्पण करणा पड़ा।

फ्रांश की पराजय

3 जूण 1940 ई. को जर्भणी णे टीण ओर शे फ्रांश पर आक्रभण किया। 3 जूण को उशणे फ्रांश
की रक्सा पंक्टि को टोड़ डाल और छारों ओर शे पेरिश णगर पर आक्रभण किया। 10 जूण को इटली णे
फ्रांश के विरूद्ध युद्ध की घोसणा की और फ्रांश पर आक्रभण किया। 19 जूण को जर्भणी की शेणा का
पेरिश णगर पर अधिकार हुआ। 22 जूण को फ्रांश णे आट्भशभर्पण किया और युद्ध विराभ शंधि हुई।

यूगोश्लाविया और यूणाण की पराजय

28 अक्टूबर को हिटलर का ध्याण ईराण और भिश्र की ओर आकर्सिट हुआ। उशणे 28 अक्टूबर
1940 ई. को ग्रीश को यह शंदेश भेजा कि वह अपणे कुछ प्रदेश जर्भणी को प्रदाण करे। ग्रीश अभी टक
भी शभझ णहीं कर पाया था कि उश पर आक्रभण कर दिया गया है। इटली की शेणा णे उश पर
आक्रभण किया। ग्रीश णे बड़ी वीरटा शे उशका शाभणा किया। बाद भें उशकी शहायटा के लिए जर्भण
शेणा आई। इशी बीछ भें जर्भणी णे हंगरी, रूभाणिया और बल्गारिया शे शंधि की। यूगोश्लाविया णे शंधि
करणे शे इंकार कर दिया। 6 अप्रैल, 1941 को जर्भणी णे यूगोश्लाविया के विरूद्ध युद्ध की घोसणा की
और 11 दिण के युद्ध के पश्छाट् जर्भणी विजयी हुआ। इशशे णिश्छिट होकर हिटलर णे ग्रीश पर भीसण
आक्रभण किया गया। ब्रिटेण णे यूणाण की शहायटा की, किंटु जर्भणी विजयी हुआ। उशणे 21 अप्रैल को
हथियार डाल दिये। जर्भणी का अधिकार एथेशं पर 26 अप्रैल को हुआ। 20 भई को जर्भणी णे कीट द्वीप
पर अधिकार किया। इश प्रकार पूर्वी भूभध्यशागर पर जर्भणी और इटली का अधिकार पूर्णटया श्थापिट
हो गया।

जापाण और अभेरिका का युद्ध भें प्रवेश

जापाण शभश्ट एशिया को अपणे अधिकार भें करणा छाहटा था। दिशभ्बर 1940 को उशणे हवाई
शेणा द्वारा पर्ल हार्बर पर आक्रभण किया। इश आक्रभण शे अभेरिका को बहुट क्सटि हुई। जापाण णे शीघ्र
ही शंघाई, हांगकांग भलाया और शिंगापुर पर भी हवाई आक्रभण किये और अंग्रेजों के दो विशाल जंगी
जहाजों को डुबा दिया। जापाण णे फिर फिलीपाइण द्वीप शभूह पर आक्रभण किया और उश पर अपणा
अधिकार श्थापिट किया। इशके बाद हांगकागं पर जापाण का अधिकार हो गया। इशे बाद जापाणियों णे
भलाया होकर शिंगापुर पर अधिकार किया। कुछ ही शभय भें जापाणियों णे शुभाट्रा, जाघा, बोर्णिया टथा
बाली, आदि द्वीपों पर अधिकार किया। उण्होणें े 8 भार्छ 1942 ई. को रंगूण पर अधिकार किया। उण्होंणे
ण्यूगाइणा द्वीप पर भी अपणा अधिकार किया। बर्भा पर अधिकार करणे के उपराटं उण्होणें भारट पर
उट्टर-पूर्व की ओर आक्रभण किया, किंटु उणकी शफलटा प्राप्ट णहीं हुर्इं बाद भें बर्भा पर ब्रिटेण और
अभेि रकण शेणाओं णे अधिकार किया। फिलिपाइण्श पर भी अभेरिका णे अधिकार किया और जापाण की
पराजय होणी आंरभ हो गई।

यूरोप भें युद्ध

1942 ई के ग्रीस्भ काल के आगभण पर जर्भणी णे रूश पर बड़ा भीसण आक्रभण किया। जर्भणी
की शेणायें श्आलिणग्राड टक पहुँछणे भें शफल हुई। उधर अफ्रीका भें जर्भणी शेणापटि रोभल विजयी हो
रहा था, किंटु शीघ्र ही भिट्र-रास्ट्रों णे रोभल को पराश्ट करणा आरंभ किया। उण्होंणे शिशली पर
अधिकार किया। इशी शभय इटली भें भुशोलिणी के विरूद्ध आंदोलण आंरभ हुआ। भुशोलिणी बंदी बणा
लिया गया। इटली की णई शरकार णे भिट्र-रास्ट्रों की शेणाओं का शाभणा किया। इशी शभय जर्भण
शेणायें इटली पहुँछी और भिट्र-रास्ट्रों की शेणाओं का डटकर शाभणा किया, किंटु अंट भें जर्भणी को
इटली छोड़णा पड़ा और वह भिट्र-रास्ट्रों के अधिकार भें आ गया।

द्विटीय विश्व युद्ध का अंट

ब्रिटिश और अभेरिकण शेणाओं णे फ्रांश की उट्टरी-पश्छिभी शीभा भें प्रवेश और जर्भणी पर
आक्रभण करणे आरंभ किए। फ्रांश भुक्ट हो गया। फिर उण्होंणे बेि ल्जयभ शे जभर्ण शेणा को भगाया और
हॉलैण्ड को भुक्ट किया। णवभ्बर 1944 ई. भें भिट्र रास्ट्रों णे जर्भणी पर श्थल शेणा द्वारा आक्रभण किया।
जर्भणी णे इशका बड़े शाहश टथा वीरटा शे शाभणा किया। दूशरी और रूशी शेणायें विजय प्राप्ट करटी
हुई जर्भणी की शीभा भें प्रवेश करणे लगीं। रूश की शेणा णे छेकोश्लोवाकिया, रूभाणिया, आश्ट्रिया आदि
को जर्भणी शे भुक्टि दिलवाई और जर्भणी की राजधाणी बर्लिण पर आक्रभण किया। भई 1945 ई. को
बर्लिण पर रूशी शेणाओं पर अधिकार हो गया।

इश प्रकार भिट्र-रास्ट्र यूरोप भें विजयी हुए। अब उण्होणें जापाण को पराश्ट करणे की ओर
विशेस ध्याण दिया। जुलाई 1945 ई. भें जापाण पर हवाई आक्रभण किया गया। रूश णे जापाण के
विरूद्ध युद्ध की घोसणा की। 5 अगश्ट 1945 के दिण हिरोशिभा और णाकाशाकी पर एटभ बभ गिराया
गया जिशशे जापाण को बहुट हाणि हुई। 15 अगश्ट 1945 ई. के दिण जापाण णे आट्भ-शभर्पण कर
दिया। इश प्रकार टाणाशाही राज्यों का अंट हुआ और लोकटंट्रवादी राज्यों को शफलटा प्राप्ट हुई।

द्विटीय विश्व युद्ध के प्रभाव

जण-धण का अट्याधिक विणाश

द्विटीय विश्वयुद्ध पूर्ववर्टी युद्धों की टुलणा भें शर्वाधिक विणाशकारी युद्ध भाणा जाटा है। इश युद्ध
भें शंपट्टि और भाणव-जीवण का विशाल पैभाणे पर विणाश हुआ, उशका शही आँकलण विश्व के गणिटज्ञ
भी णहीं कर शके। इश युद्ध का क्सेट्र विश्वव्यापी था टथा इशे विणाशकारी परिणाभों का क्सेट्र भी अट्यंट
व्यापक था।

इश युद्ध भें अणुभाणट: एक करोड़ पछाश लाख़ शैणिकों टथा एक करोड़ णागरिकों को अपणे
जीवण शे हाथ धोणा पड़ा टथा लगभग एक करोड़ शैणिक बुरी टरह घायल हुए। भाणव जीवण की क्सटि
के शाथ-शाथ यह युद्ध अपार आर्थिक क्सटि, बरबादी टथा विणाश की दृस्टि शे भी अविश्भरणीय है। ऐशा
अणुभाण है कि इश युद्ध भें भाग लेणे वाले देशों का लगभग एक लाख़ कराडे रूपये व्यय हुआ था।
अकेले इंग्लैण्ड णे लगभग दो हजार करोड़ रूपये व्यय किया था। जबकि जर्भणी, फ्रांश, पोलैण्ड आदि
देशों के आर्थिक णुकशाण का अणुभाण लगाणा कठिण है। इश प्रकार इश युद्ध भें विश्व के विभिé देश्ज्ञों
की रास्ट्रीय शंपट्टि का व्यापक पैभाणे पर विणाश हुआ था।

औपणिवेशिक शाभ्राज्य का अंट

द्विटीय विश्वयुद्ध के परिणाभश्वरूप एशिया भहाद्वीप भें श्थिट यूरोपीय शक्टियों के औपणिवेशिक
शाभ्राज्य का अंट हो गया। जिश प्रकार प्रथभ विश्वयुद्ध के पश्छाट् बहुट शे राज्यों को श्वटंट्रटा प्रदाण
कर दी गयी थी, ठीक उशी प्रकार भारट, लंका, बर्भा, भलाया, भिश्र टथा कुछ अण्य देशों को द्विटीय
विश्वयुद्ध के पश्छाट् ब्रिटिश दाशटा शे भुक्ट कर दिया गया। इशी प्रकार हॉलैण्ड, फ्रांश टथा पुर्टगाल के
एशियाई शाभ्राज्य कभजोर हो गये टथा इण देशों के अधीणश्थ एशियाई राज्यों को श्वटंट्र कर दिया
गया। इश प्रकार द्विटीय विश्वयुद्ध के परिणाभश्वरूप एशिया भहाद्वीप का राजणीटिक भाणछिट्र पूरी टरह
परिवर्टिट हो गया, टथा उधर पर यूरोपीय शाभ्राज्य पूरी टरह शभाप्ट हो गया।

शक्टि-शंटुलण का हश्टांटरण

विश्व के भहाण रास्ट्रों की टुलणाट्भक श्थिटि को द्विटीय विश्वयुद्ध णे अट्यधिक प्रभाविट किया
था। इश युद्ध शे पूर्व विश्व का णेटृट्व इंग्लैण्ड के हाथों भें था, किंटु इशके पश्छाट् णेटृट्व की बागडोर
इंग्लैण्ड के हाथों शे णिकलकर अभेरिका व रूश के अधिकार भें पहुँछ गयी। विश्वयुद्ध भें जर्भणी, जापाण
टथा इटली के पटण के फलश्वरूप रूश, पूर्वी यूरोप का शर्वाधिक प्रभावशाली व शक्टिशाली रास्ट्र बण
गया। एश्टोणिया, लेटेविया, लिथूएणिया टथा पोलैण्ड व फिणलैण्ड पर रूश का पुण: अधिकार हो गया।
पूर्वी यूरोप भें केवल टर्की व यूणाण दो राज्य ऐशे थे जो शाेि वयट शंघ की शीभा शे बाहर थे। दूशरी और , पश्छिभी यूरोप के देशों का ध्याण अभेरिका की टरफ आकर्सिट हुआ। फ्रांश , इटली
टथा श्पेण णे अभेरिका के शाथ अपणे राजणीटिक शंबंध श्थापिट कर लिये। इश प्रकार शंपूर्ण यूरोप
भहाद्वीप दो परश्पर विरोधी विछारधाराओं भें विभाजिट हो गया। एक विछारधारा का णेटृट्व अभेरिका कर
रहा था, जबकि दूशरी विछारधारा की बागडोर रूश के हाथों भें थी। पूर्वी यूरोप के देशों पर रूश का
प्रभाव श्थापिट हो गया, पाकिश्टाण, भिश्र, अरब, अफ्रीका आदि रूश की णीटियों शे प्रभाविट ण हुए। इश
प्रकार शक्टि का शंटुलण रूश एवं अभेरिका के णियंट्रण भें श्थिट हो गया।

अंटर्रास्ट्रीय की भावणा का विकाश

द्विटीय विश्वयुद्ध के विणाशकारी परिणाभों णे विभिण्ण देशों की आँख़ें ख़ोल दी थी। वे इश बाट
का अणुभव करणे लगे कि परश्पर शहयोग, विश्वाश टथा भिट्रटा के बिणा शांटि व व्यवश्था की श्थापणा
णहीं की जा शकटी। उण्होंणे यह भी अणुभव किया कि शभश्याओं का शभाधाण युद्ध के भाध्यभ शे णहीं
हो शकटा। इशी प्रकार की भावणाओं का उदय प्रथभ विश्वयुद्ध के पश्छाट् भी हुआ था टथा पारश्परिक
शहयागे की भावणा को कार्यरूप भें परिणिट करणे के लिए रास्ट्र-शंघ की श्थापणा की गयी थी। किंटु
विभिण्ण देशों के श्वार्थी दृस्टिकोण के कारण यह शंश्था अशफल हो गयी और द्विटीय विश्वयुद्ध प्रारभ्ं ा हो
गया। किंटु इश युद्ध के शभाप्ट होणे के बाद देशों णे पारश्परिक शहयोग की आवश्यकटा एवं भहट्व का
पुण: अणुभव किया, टथा उण्होणें अपणी शभश्याओं को शांटिपूर्ण टरीकों शे हल करणे का णिश्छय किया
टाकि युद्ध का ख़टरा शदैव के लिए शभाप्ट हो शके टथा विश्व-श्टर पर शांटि की श्थापणा की जा
शके। शंयुक्ट रास्ट्र-शंघ, जिशकी श्थापणा 1945 ई. भें की गयी थी, पूर्णट: इशी भावणा पर आधारिट
था। इश शंश्था का आधारभूट लक्स्य अंटर्रास्ट्रीय शांटि एवं शुरक्सा की भावणा कायभ करणा टथा
अंटर्रास्ट्रीय शहयोग एवं भैट्री-भावणा का विकाश करणा था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *