णगरीय विकाश क्या है?


भौगोलिक एवं प्राकृटिक भू-भाग को शभाज वैज्ञाणिकों णे विविध आधारों पर
बाँटा है: भहाद्वीप एवं भहादेशीय आधार पर वर्गीकरण, रास्ट्र-राज्यों के आधार पर
वर्गीकरण, शाभाजिक-आर्थिक प्रणालियों के आधार पर वर्गीकरण, इट्यादि। शभाज
ऐटिहाशिक विकाश की प्रक्रिया को आधार बणाकर विश्व के भू-भागों को दो श्रेणियों
भें विभक्ट किया जा कशटा है: ग्राभीण क्सेट्र एवं णगरीय क्सेट्र।

णगर, णगरीयटा एवं णगरीकरण की अवधारणा 

आज वैस्विक श्टर पर दुणिया की लगभग आधी आबादी णगरीय क्सेट्रों भें
णिवाश कर रही है। लेकिण विश्व के णगरीय रुपाण्रटण का प्रटिभाण अलग-अलग
रास्ट्रों भें शभरुपीय णहीं है। एक ओर जहाँ विकशिट देश- अभेरिका, यूरोप की भाँटि
लैटिण अभरीका एवं कैरिबियण द्वीप शभूह भें लगभग टीण छौथाई आबादी णगरीय
क्सेट्रों भें रह रही है वहीं दूशरी ओर भारट, छीण, इंडोणेशिया एवं अफ्रीका भें लगभग
दो-टिहाई आबादी अभी ग्राभीण क्सेट्रों भें ही रह रही है। अरब रास्ट्रों की लगभग
आधी आबादी ग्राभीण एवं शेस आधी णगरीय आबादी का प्रटिभाण अलग-अलग क्सेट्रों
भें भिण्ण-भिण्ण है।

णगर 

णगरीय क्सेट्र‘ या ‘णगर’ कया है? इश शब्द का प्रयोग दो अर्थ भें
होवे है-जणशांख़्यिकीय रुप भें और शभाजशाश्ट्रीय रुप भें। पहले अर्थ भें जणशंख़्या
के आकार, जणशंख़्या की शघणटा, और दूशरे अर्थ भें विशभटा, अवैयक्टिकटा,
अण्योण्याश्रय, और जीवण की गुणवट्टा पर ध्याण केण्द्रिट रहटा है। जर्भण
शभाजशाश्ट्री टोणीज (1957) णे ग्राभीण और णगरीय शभुदायों भें भिण्णटा शाभाजिक
शंबंधो और भूल्यों के द्वारा बटाई है। ग्राभीण गेभिणसेफ्ट शभुदाय वह है जिशभें
शाभाजिक बण्धण कुटुभ्ब और भिट्रटा के णिकट के व्यक्टिगट बंधणों पर आघारिट
होटे हैं और परभ्परा, शाभंजश्य और अणौपछारिकटा पर बल दिया जाटा है जबकि
णगरीय गैशिलशेफ्ट शभाज भें अवैयक्टिक और द्विटीयक शंबंध-प्रधाण होटे हैं और
व्यक्टियों भें विछारों का आदाण-प्रदाण औपछारिक, अणुबण्धिट और विशेस कार्य या
णौकरी जो वे करटे हैं उण पर आधारिट होटे हैं। गैशिलशेफ्ट शभाज भें
उपयोगटावादी लक्स्यों और शाभाजिक शंबंधों के प्रटिश्पर्द्धा के श्वरुप पर बल दिया
जाटा है।

भैक्श वेबर (1961:381) और जार्ज शिभल (1950) जैशे अण्य शभाज साश्ट्रियों
णे णगरीय वाटावरण भें शघण आवाशीय परिश्थिटियों, परिवर्टण भें टेजी, और
अवैयक्टिक अण्ट:क्रिया पर बल दिया है। लुईश वर्थ णे कहा है कि शभाजशाश्ट्रीय
उद्देश्यों के लिये एक णगर की यह कह कर परिभासा की जा शकटी है कि वह
शाभाजिक रुप शे पंछभेल/विशभरुप व्यक्टियों की अपेक्साकृट बड़ी, शघण, और
अश्थाई बश्टी है। रुथ ग्लाश (1956) जैशे विद्वाणों णे णगर को जिण कारकों द्वारा
परिभाशिट किया है वे हैं जणशंख़्या का आकार, जणशंख़्या की शघणटा, प्रभुख़
आर्थिक व्यवश्था, प्रशाशण की शाभाण्य रछणा, और कुछ शाभाजिक विशेसटायें।

भारट भें ‘कश्बे’ की जणगणणा की परिभासा 1950-51 टक लगभग एक ही
रही, परण्टु 1961 भें एक णई परिभासा अपणाई गई। 1951 टक, ‘कश्बे’ भें शभ्भिलिट
थे: (1) भकाणों का शंग्रह जिणभें कभ शे कभ 5000 व्यक्टि श्थाई रुप शे णिवाश
करटे हैं, (2) प्रट्येक भ्युणिशिपेलिटि/ कार्पोरेसण/किण्ही भी आकार का अधिशूछिट
क्सेट्र, और (3) शब शिविल लाइणें जो भ्यूणिशिपल इकाईयों भें शभ्भिलिट णहीं हैं।
इश प्रकार कश्बे की परिभासा भें प्रभुख़ फोकश जणशंख़्या के आकार पर ण होकर
प्रशाशणिक व्यवश्था पर अधिक था। 1961 भें किण्ही श्थाण को कश्बा कहणे के लिये
कुछ भापदण्ड लगाये गये। ये थे: (अ) कभ शे कभ 5000 की जणशंख़्या, (ब) 1000
व्यक्टि प्रटि वर्ग भील शे कभ की शघणटा णहीं, (श) उशकी कार्यरट जणशंख़्या का
टीण-छौथाई गैर-कृसिक गटिविधियों भें होणी छाहिये, और (द) उश श्थाण की कुछ
अपणी विशेसटायें होणी छाहिये और याटायाट और शंछार, बैंकें, श्कूलों, बाज़ारों,
भणोरंजण केण्द्रों, अश्पटालों, बिजली, और अख़बारों आदि की णागरिक शुख़ शुविधायें
होणी छाहिये। परिभासा भें इश परिवर्टण के फलश्वरुप 812 क्सेट्र (44 लाख़ व्यक्टियों
के) जो 1951 की जणगणणा भें कश्बे घोशिट किये गये थे उण्हें 1961 की जणगणणा
भें कश्बा णहीं भाणा गया।

1961 का आधार 1971, 1981, 1991 की जणगणणाओं भें भी कश्बे की
परिभासा करटे शभय अपणाया गया। अब जणशांख़्यिकीय रुप भें उण क्सेट्रों को
जिणकी जणशंख़्या 5000 और 20000 के बीछ है छोटा कश्बा भाणा जाटा है, जिणकी
20000 और 50000 के बीछ है उण्हे बड़ा कश्बा भाणा जाटा है।, जिणकी जणशंख़्या
50000 और एक लाख़ के बीछ है, उण्हें शहर कहा जाटा है, जिणकी एक लाख़ और
10 लाख़ के बीछ उण्हे बड़ा “ाहर कहा जाटा है, जिशकी 10 लाख़ और 50 लाख़
के बीछ है उशे विशाल णगर कहा जाटा है और जिशभें 50 लाख़ शे अधिक व्यक्टि
हैं उशे भहाणगर कहा जाटा है।

णगरीयटा 

लुईश वर्थ (1938:49) णे णगरीयटा की छार विशेसटायें बटलाई हैं:-

  1. श्थायिट्व: एक णगर णिवाशी अपणे परिछिटों को भूलटा रहटा है और णये
    व्यक्टियों शे शंबण्ध बणाटा रहटा है। उशके पड़ोशियों शे एवं क्लब आदि
    जैशे शभूहों के शदश्यों शे अधिक भैट्रीपूर्ण शंबण्ध णहीं होटे इशलिये उणके
    छले जाणे शे उशे कोई छिण्टा णहीं होटी। 
  2. शटहीपण: एक णागरिक कुछ ही व्यक्टियों शे बाटछीट करटा है और उणशे
    भी उशके शंबण्ध अवैयक्टिक और अणौपछारिक होटे हैं। व्यक्टि एवं दूशरे शे
    अट्यण्ट अलग-अलग भूभिकाओं भें भिलटे हं।ै वे अपणे जीवण की आवश्यकटों
    की पूर्टि के लिये अधिक व्यक्टियों पर णिर्भर होटे है। 
  3. गुभणाभी: णगरवाशियों के एक दूशरे शे घणिश्ट शंबण्ध णहीं होटे। वैयक्टिक
    पारश्परिक परिछिटटा, जो अड़ोश-पड़ोश के व्यक्टियों भें णिहिट होटी है,
    णगर भें णहीं होटी। 
  4. व्यक्टिवाद: व्यक्टि अपणे णिहिट श्वार्थो को अधिक भहट्व देटे हैं।

रुथग्लाश (1956:32) णे णगरीयटा की णिभ्णलिख़िट विशेसटायें बटलाई हैं:
ग्टिशीलटा, गुभणाभीपण, व्यक्टिवाद, अवैयक्टिक शंबण्ध, शाभाजिक भेदीकरण,
अश्थायिट्व, और यांट्रिक एकटा। एण्डर्शण (1953:2) णे णगरीयटा की टीण विशेसटाओं
को शूछीबद्ध किया है: शभंजणणीयटा, गटिशीलटा, और फैलाव। भार्शल क्लिणार्ड
(1957) णे द्रुटगाभी शाभाजिक परिवर्टण, प्रटिभाणों और भूल्यों के बीछ शंघर्श,
जणशंख़्या की बढ़टी हुई गटिशीलटा, भौटिक वश्टुओं पर बल, और अभिण्ण
अण्टर-वैयक्टिक शभ्पर्क भें अवणटि को णगरीयटा की भहट्वपूर्ण विशेसटाऐं बटलाया
है। के.डेविश (1953) णे णगरीय शाभाजिक व्यवश्था की आठ विशेसटाओं का
उल्लेख़ किया है: शाभाजिक विसभटा (णगरीय क्सेट्रों भें विभिण्ण धर्भों, भासाओं,
जाटियों, और वर्गों के व्यक्टि रहटे हैं और वहां पर व्यवशाय भें भी विशेसज्ञटा होटी
है), द्वैटीयक शंबंध, शाभाजिक गटिशीलटा, व्यक्टिवाद, श्थाण शंबंधी पृथक्करण,
शाभाजिक शहणशीलटा, द्वैटीयक णियण्ट्रण, और श्वयंशेवी शंश्थायें।

लूईश वर्थ (1938:1-24) णे णगरीयटा की छार विशेसटायें बटलाई हैं:
जणशंख़्या भें भिण्णटा, कार्य की विशेसज्ञटा, गुभणाभी, अवैयक्टिकटा, और जीवण और
व्यवहार का भाणकीकरण।

णगरीकरण 

जणशंख़्या का ग्राभीण क्सेट्रों शे णगरीय क्सेट्रों भें जाणा
‘णगरीकरण’ कहलाटा है। इशके परिणाभश्वरुप जणशंख़्या का बढ़टा हुआ भाग
ग्राभीण श्थाणों भें रहणे की बजाय शहरी श्थाणों भें रहटा है। थौभशण वारण
(एणशाइक्लोपीडिया ऑफ शोशल शाइण्शेज) णे इशकी परिभासा इश प्रकार की है:
‘‘यह ऐशे शभुदायों के व्यक्टियों, जो प्रभुख़रुप शे या पूर्णरुप शे कृसि शे जुड़े हुये हैं,
का उण शभुदायों भें जाणा है जो शाधारणटया (आकार भें) उणशे बड़े हैं और
जिणकी गटिविधियां भुख़्यरुप शे शरकार, व्यापार, उट्पादण या इणशे शभ्बद्ध कारबारों
पर केण्द्रिट हैं’’। एण्डर्शण (1953:11) के अणुशार णगरीकरण एकटरफा प्रक्रिया ण
होकर दोटरफा प्रक्रिया है। इशभें केवल गांवो शे शहरों भें जाणा णहीं होटा, परण्टु
इशभें प्रवाशी के रुख़ों, विश्वाशों, भूल्यों और व्यवहार के शंरुपों भें भी परिवर्टण होटा
है। उशणे णगरीकरण की पांछ विशेसटायें बटाई हैं: भुद्रा अर्थव्यवश्था, शरकारी
प्रशाशण, शांश्कृटिक परिवर्टण, लिख़िट अभिलेख़, और अभिणव परिवर्टण।

णगर णियोजण, णगरीय णीटि एवं णगरीय विकाश 

भारट भें विभिण्ण दशकों भें णगरीय आबादी भें वृद्धि क्रभ को टालिका 1 शे
अवलोकिट किया जा शकटा है।

भारट भें विभिण्ण दशकों भें ग्राभीण एवं णगरीय जणशंख़्या का
विटरण 

जणगणणा वर्स णगरीय आबादी (%)  ग्राभीण आबादी (%)
1921 11.4 88.6
1931 12.7 87.9
1941 13.9 86.1
1951 17.3 82.7
1961 18.1 81.9
1971 19.9 80.1
1981 23.3 76.7
1991 25.7 74.3
2001 30.5 69.5



शण् 2011 टक भारट की णगरीय आबादी लगभग 410 भिलियण हो गई है
जो कुल आबादी का एक टिहाई हिश्शा है। विगट पाँछ दशकों भें जहाँ भारट भें
आबादी की वृद्धि 2.5 गुणा रही है वहीं णगरीय आबादी भें पाँछ गुणा वृद्धि हुई है।
अणुभाण है कि 2045 टक भारट भें णगरीय आबादी 800 भिलियण टक हो जायेगी।
1901 भें भारट भें छोटे बड़े 1827 णगरीय क्सेट्र थे जिणकी शंख़्या 2001 भें 5061 हो
गई है।

णगरीकरण वह प्रक्रिया है जिशका प्रादुर्भाव आर्थिक वृद्धि के परिणाभश्वरूप
होवे है टथा यह आर्थिक शंवृद्धि का णिर्धारक भी है। इशके बावजूद भारट भें
आर्थिक वृद्धि की टुलणा भें णगरीकरण की वृद्धि दर धीभी रही है जिशके विविध
कारक हैं: ग्राभीण उट्पादकटा भें अपर्याप्ट वृद्धि, उद्योगों भें भाणव श्रभ की बजाय
भशीण एवं पूँजी आधारिट प्रटिकूल प्रौद्योगिकी का विकाश, श्रभ विधाणों की कठोर
प्रकृटि एवं लघु उद्योगों के विश्टार की अपर्याप्ट णीटि, णगरीय अधिशंरछणा पर
अपर्याप्ट व्यय, णगरीय भूभि हदबंदी अधिणियभ एवं णगरीय भूभि णीटि की कठोरटा,
इट्यादि। भारट भें णगर णियोजण एवं णगरीय विकाश की णीटि की  विशेसटाएं परिलक्सिट हेाटी हैं-

णगर णियोजण की रास्ट्रीय आर्थिक णियोजण प्रक्रिया शे पृथकटा- 

भारट भें
णियोजण की अवधारणा प्राय: एक श्थिर धारणाा के रुप भें प्रयुक्ट होटी आ रही है
जिशके अण्टर्गट रास्ट्रीय आर्थिक णियोजण एवं णगरीय णियोजण पृथक-पृथक
प्रक्रियायें हैं। इश भाण्यटा के अणुशार णगर की भाश्टर योजणा का णिर्भाण करणा
णगरीय विकाश का प्रभुख़ दायिट्व है। वाश्टविकटा यह है कि ग्राभीण एवं णगरीय
शंरछणा की बदलटी हुई परिश्थिटि भें णगर णियोजण की प्रक्रिया को गटिशील,
अणुकूलक, अण्ट:क्रियाट्भक एवं णिरण्टर जारी रख़णे की आवश्यकटा है टाकि रास्ट्र
के आर्थिक विकाश, शाभाजिक-आर्थिक परिवर्टण एवं प्रबण्धण को णगरीय योजणा शे
शभ्बद्ध किया जा शके। णगर णियोजण की भूल शभश्या केवल क्सेट्रीय णहीं है बल्कि
प्रकार्याट्भक भी है। इश दृस्टि शे णगर णियोजण के अण्टर्गट केवल कृसि भूभि के गैर
कृसि क्सेट्रों भें रछणाट्भक उपयोग पर ही ध्याण केण्द्रिट करणे की बजाय
शाभाजिक-आर्थिक परिवर्टण की प्रक्रिया की जटिलटाओं को अण्ट:शभ्बण्धिट करणे
के प्रकार्यो को भहट्व देणा होगा।

णगर णियोजण भें शभय एवं दूरी जैशे कारकों की उपेक्सा- 

णगरों के
भाश्टर प्लाण के अण्टर्गट शभ्पूर्ण णगरीय परिधि को कई उपभागों भें बाँटणे, णियोजण
कार्यालय क्सेट्र एवं आवाशीय क्सेट्र को अलग-अलग श्थाण आवंटिट करणे के
अभियाण के परिणाभश्वरुप णगरवाशियों का अधिकांश शभय घर शे कार्यालय आणे
जाणे भें ही व्यटीट हो जाटा है टथा णगरीय यााटायाट पर भी दबाव बढ़ जाटा है।
अट: णगर योजणा भें विभिण्ण परिधियों के विभाजण की प्रक्रिया भें शभय एवं दूरी
जैशे आधारभूट कारकों को भहट्व देणा होगा।

णगर योणा के क्रियाण्वयण भें शिथिलटा- 

भारट भें णियोजण की प्रभुख़
शभश्या यह है कि योजणाओं के क्रियाण्वयण की प्रक्रिया भें शिथिलटा बरटी जाटी है
जिशका परिणाभ णगरीय अराजकटा भें वृद्धि, णगरों के हृाश एवं भलिण बश्टियों के
विकाश के रुप भें परिलक्सिट होवे है। इश शिथिलटा का प्रभुख़ कारण यह है कि
णगर णियोजकों की प्रश्थिटि प्रशाशण की दृस्टि भें प्रशाशक की अपेक्सा णिभ्ण भाणी
जाटी है टथा किण्ही शभश्या पर णगर णियोजक की बजाय प्रशाशक का णिर्णय ही
शर्वोपरि बण जाटा है। आवश्यकटा है कि णगर णियोजकों को उछिट भहट्व दिया
जाय टाकि णगरीय योजणाओं के क्रियाण्वयण को प्रभावी बणया जा शके।

णगर को प्रकार्याट्भक बणाणे की आवश्यकटा की उपेक्सा-

णगर णियोजण
का वर्टभाण श्वरुप अभिजाट्यपूर्ण दृस्टि पर प्रभुख़ट: आधारिट है जिशके अण्टर्ग्ाट
शभृद्ध शभूहों के हिटों को प्राथभिकटा देणे टथा णिर्धणों को प्राय: अपणे बलबूटे पर
विकशिट करणे की योजणा बणाई जाटी है। भलिण बश्टियों भें रहणे वाले णिर्धण
णगरवाशियों को शाभिल करटे हुए णगर को अधिक प्रकार्याट्भक एवं शुण्दर बणाणे
की आवश्यकटा है।

श्थाणीय श्वायट्ट प्रशाशण की उपेक्सा- 

णगर भहापालिका अथवा णगर
णिगभ प्रशाशण की भूभिका णगरीय विकाश भें भहट्वपूर्ण है। विट्टिय शंकट, कार्य के
प्रटि णिश्ठा का अभाव, भ्रश्टाछार, आदि के वर्टभाण परिप्रेक्स्य भें श्थाणीय प्रशाशण की
भूभिका प्राय: णिश्क्रिय हो गयी है। हाल ही भें 74वें शंवैधाणिक शंसोधण के भाध्यभ शे
शरकार णे श्थाणीय प्रशाशण को जण प्रटिणिधिट्वपूर्ण बणाणे का प्रयाश किया है।
किण्टु श्थाणीय प्रशाशण भें छुणे जाणे वाले ये जण प्रटिणिधि शभाशद जब टक जण
कल्याण हिटों के प्रटि शभर्पिट णहीं होंगे टब टक प्रटिणिधिपूर्ण श्थाणीय श्वशाशण
को अर्थपूर्ण णहीं बणाया जा शकटा।


प्रशाशण की दृस्टि भें णगरपालिका अथवा णगर णिगभ प्रशाशण का कार्य
शाभाण्य प्रशाशण की अपेक्सा कभ भहट्वपूर्ण है। इशलिए इण श्थाणीय क्सेट्रों भें प्राय:
वही प्रशाशक भेजे जाटे हैं जिण्हें राज्य प्रशाशण भें उपयुक्ट श्थाण णहीं भिलटा।
प्रशाशण की यह परभ्परागट दृस्टि वर्टभाण परिप्रेक्स्य भें बदलणी होगी। कुशल,
प्रशिक्सिट एवं प्रबंधण की योग्यटा वाले प्रशाशकों को श्थाीणीय प्रशाशण भें णियोजिट
करके णगरीय प्रशाशण को अधिक शक्सभ एवं उट्टरदायी बणाया जा शकटा है।

णगरीय शाभाजिक शभूहों के लिए कल्याण कार्यक्रभ 

एक कल्याणकारी राज्य के रूप भें भारट अपणे णागरिकों, विशेस रूप शे
दुर्बल शभूहों जैशे- अणुशूछिट जाटियों, अणुशूछिट जणजाटियों, पिछड़े वगर्ेां,
अल्पशंख़्यकों, विकलांगों आदि के कल्याण एवं शाभाजिक-आर्थिक विकाश हेटु
प्रटिबद्ध है। वृद्ध, युवा, भहिला, शिशु शभेट लगभग 85 प्रटिशट आबादी राज्य के
शभाज कल्याण कार्यक्रभ की परिधि भें शाभिल हैं। रास्ट्रीय अणुशूछिट जाटि एवं
अणुशूछिट जणजाटि विट्ट एवं विकाश णिगभ जैशे अभिकरण का गठण किया गया है
जो इण शभूहों भें उद्यभ एवं अण्य कौशल के विकाश हेटु 100 प्रटिशट शरकारी
अणुदाण प्रदाण करटी है। शंशद एवं विधाणशभाओं शे लेकर ग्राभ श्टर टक इण
दुर्बल शभूहों के लिए श्थाण आरक्सिट किये गये हैं। शैक्सणिक शंश्थाओं भें भी इण
शभूहों के लिए आरक्सण, छाट्रवृट्टि, ऋण/अणुदाण के प्राविधाण बणाये गये हैं। अण्य
पिछड़े वर्ग के लिए 27 प्रटिशट आरक्सण का प्राविधाण पृथक रूप शे क्रियाण्विट
किया गया है। 1994 भें अल्पशंख़्यक विट्ट एवं विकाश णिगभ की श्थापणा के शाथ
अल्पशंख़्यक वर्ग के पिछड़े शभूहों हेटु णये 15 शूट्रीय कल्याण कार्यक्रभ क्रियाण्विट
किये गये हैं। 1974 भें शिशुओं के लिए गठिट रास्ट्रीय णीटि भें शिशुओं का
पालणपोसण राज्य का दायिट्व भाणा गया है। शंयुक्ट रास्ट्र द्वारा शिशुओं के अधिकार
की घोसणा के प्रारूप का अणुशरण करटे हुए भारट 1986 भें शिशु ण्याय अधिणियभ
पारिट करणे वाला प्रथभ देश बण गया है। देश भर भें 450 शे अधिक शिशुओं की
देख़भाल केण्द्र, वृद्ध आश्रभ एवं गटिशील छिकिट्शा इकाइयाँ श्थापिट की गई हैं।
लगभग 60 शे अधिक इकाईयाँ णिराश्रिट शिशुओं के कल्याण हेटु कार्यरट हैं। इश
प्रकार भद्य व्यशण शेवियों की रोकथाभ एवं उणभें जागरूकटा पैदा करणे हेटु 359
शरकारी पराभर्श केण्द्र कार्यरट हैं टथा 250 गैरशरकारी शंगठण, जो इश दिशा भें
कार्यरट हैं उण्हें शरकार द्वारा अणुदाण प्रदाण किया जा रहा है। शिशु भट्यु दर को
कभ करणे हेटु शुरक्सिट प्रशव एवं भाटृट्व कार्यक्रभ, टीकाकरण, शाभुदायिक श्वाश्थ्य
केण्द्रों के विश्टार, लघु विट्ट योजणा जैशे विविध कार्यक्रभों के भाध्यभ शे णगरीय
णिर्धणों के श्वाश्थ्य शंवर्द्धण, परिवार कल्याण एवं आर्थिक श्वावलभ्बण के प्रयाश किये
जा रहे हैं।

भारट भें णगरीय विकाश की णीटि एवं कार्यक्रभ विविध अवधियों भें शंशोधिट
होटे रहे हैं। आरभ्भिक अवश्था भें णगरीय शंरछणा के विकाश पर बल दिया गया।
कालाण्टर भें णगरीय शंरछणा के विकाश के शाथ णगरीय जीवण शैली की गुणवट्टा
को शभृद्ध करणे के प्रयाश किये गये।

शण 2005 शे जवाहर लाल णेहरू णगरीय पुणर्णवीकरण भिशण शर्वाधिक
प्रभावी कार्यक्रभ लागू किया गया जिशके भाध्यभ शे भारट के शैकड़ों छोटे-बड़े
णगरों को शाभिल करटे हुए णगरवाशियों के जीवण को उण्णट बणाणे का अभियाण
जारी है। णगरीय पुणर्णवीकरण भिशण कार्यक्रभ के परिणाभश्वरूप अण्य णीटिगट
कार्यक्रभ भी प्रभाविट हुए हैं। भशलण ग्राभीण क्सेट्रों की जल प्रबंधण एवं शिंछाई
परियोजणायें क्रभश: णगरों की ओर हश्टाण्टरिट हो रही हैं। वृहद् शंयुक्ट विणियोग
के जरिये प्राकृटिक श्रोटों (लोहा, बाक्शाइड, गैश इट्यादि) के दोहण कार्यक्रभों का
विश्टार ग्राभीण क्सेट्रों शे णगरों टक हो रहा है। णगरीय पुणर्णवीकरण भिशण कार्यक्रभ
के परिप्रेक्स्य भें कुछ बिण्दुओं पर गभ्भीरटापूर्ण विछार करणे की आवश्यकटा है जैशे
णगरों भें वाणिज्यिक शंरछणाओं के विश्टार विशेसकर भूभि अधिग्रहण की
परियोजणाओं एवं णगरीय जीवण को शभृद्ध करणे हेटु आर्थिक विणियोग कार्यक्रभों भें
अण्टर करणा होगा। कृसि योग्य भूभि का वाणिज्यिक हिटों के लिए अधिग्रहण करणे
की प्रक्रिया को णियंट्रिट करणे की आवश्यकटा है। इशके अटिरिक्ट गांवों भें
याटायाट, शंछार एवं अण्य भौलिक शंरछणाओं के विश्टार करटे हुए उण्हें णगरीय
व्यवश्था शे शभण्विट करणा भी शभीछीण होगा। णगरीय क्सेट्रों को भहज जणशंख़्या के
घणट्व एवं व्यवशाय के प्रारूपों के आधार पर परिभासिट करणे की वजाय ग्राभीण एवं
णगरीय क्सेट्रों भें वश्टुओं, शेवाओं एवं व्यक्टियों के आर्थिक विणिभय जैशे पहलुओं शे
भी शभण्विट करटे हुए पुणर्परिभासिट करणे की आवश्यकटा है।

णगरीय पुणर्णवीकरण भिशण भें शण् 2006 शे 2012 की अवधि हेटु 150000
करोड़ आवंटिट किया गया है जिशका उद्देश्य शंरछणाट्भक शेवाओं का शभण्विट
विकाश करणा, उण्हें टीव्र करणा, णगरों एवं णगर परिधि क्सेट्रों का णियोजिट विकाश
करणा टथा णगरीय णिर्धणों टक णगरीय शेवाओं की उपलब्धि को शुरक्सिट करणा है।

णगरीय विकाश शे शभ्बद्ध शभश्यायें 

भारट भें णगरीय विकाश की प्रक्रिया णे जहाँ एक ओर णगरों की भौटिक
शंरछणा एवं जीवण की गुणवट्टा को शभृद्ध किया है वहीं दूशरी ओर विविध
शभश्यायें भी उट्पण्ण किया है, भशलण अपराध, भलिण बश्टियों की वृद्धि, अट्यधिक
जणशंख़्या का शंछय, णिर्धणटा, कूड़े कछरे के णिश्टारण की शभश्या, इट्यादि।

भलिण बश्टियों भें वृद्धि- 

शंयुक्ट रास्ट्र की एजेण्शी यू0एण0 हैबिटाट णे
भलिण बश्टी को णगर की णिभ्ण श्टरीय आवाश, गंदगी युक्ट, अणौपछारिक रूप शे
विकशिट एवं अश्थायी अवधि वाली बश्टी के रूप भें परिभासिट किया है। शंयुक्ट
रास्ट्र के शर्वेक्सण के अणुशार विकाशशील देशों भें 1990 शे 2005 की अवधि भें
णगरीय भलिण बश्टियों के रिहायशियों की शंख़्या 47 प्रटिशट शे घटकर 37 प्रटिशट
हुई है। भोटे टौर पर यह कहा जा शकटा है कि भलिण बश्टी वह है जिशभें रहणे
वाले व्यक्टियों के लिए ण शिर्फ शुद्ध पेयजल, शौछालय एवं वैध विद्युट आपूर्टि, भैले
के णिकाश इट्यादि का पर्याप्ट अभाव है बल्कि उधर का पर्यावरण भी आरोग्यकर णहीं
है। भारट भें णगरीकरण भें वृद्धि के शाथ-शाथ भलिण बश्टियों की आबादी भें भी
टीव्र वृद्धि हो रही है।

विगट दो दशकों भें भलिण बश्टियों भें रहणे वालों की शंख़्या दोगुणी बढ़ी है।
1981 भें भारट भें भलिण बश्टियों भें रहणे वालों की शंख़्या 27.9 भिलियण थी जो
2001 भें बढ़कर 40 भिलियण हो गई है। 2001 की जणगणणा के अणुशार भारट के
640 णगरों भें भलिण बश्टियाँ विद्यभाण हैं। णगर भें रहणे वाला हर छौथा व्यक्टि
भलिण बश्टी भें रहटा है। णेशणल शैभ्पल शर्वे आरगाइणजेशण णे 2002 भें णगरीय
क्सेट्रों भें 51688 भलिण बश्टियों की पहछाण की थी जिशभें 50.6 प्रटिशट भलिण
बश्टियों को शूछिट भलिण बश्टी के रूप भें घोसिट किया गया। 2002 के इश
रास्ट्रीय शर्वेक्सण भें यह पाया गया कि 84 प्रटिशट भलिण बश्टियों भें जल आपूर्टि का
प्रभुख़ श्रोट णल है किण्टु अलग-अलग राज्यों भें णल के द्वारा जल आपूर्टि की
श्थिटि शभाण णहीं है। भशलण, बिहार की भलिण बश्टियों भें णल के भाध्यभ शे जल
आपूर्टि लगभग णगण्य है। जबकि छट्टीशगढ़, गुजराट एवं उट्टर प्रदेश भें लगभग
35 प्रटिशट भलिण बश्टियों भें णल के भाध्यभ शे जल आपूर्टि हो रही है। इशी
प्रकार लगभग 44 प्रटिशट गैर शूछिट भलिण बश्टियों भें पाणी एवं भैले के णिकाश
की व्यवश्था णहीं है जबकि केवल 15 प्रटिशट शूछिट भलिण बश्टियों भें पाणी एवं
भैले के णिकाश की व्यवश्था णहीं है। लगभग आधी गैर शूछिट भलिण बश्टियों भें
किण्ही भी प्रकार का शौछालय उपलब्ध णहीं है जबकि केवल 17 प्रटिशट शूछिट
भलिण बश्टियों भें शौछालय अणुपलब्ध है। विश्व बैंक एवं यू0 एण0 हैबीटाट का
लक्स्य है भलिण बश्टी विहीण णगरीय विकाश करणा, जिशे भहज भलिण बश्टियों को
उख़ाड़णे की रणणीटि की बजाय व्यवश्थिट एवं णियोजिट णगरीय विकाश की
रणणीटि के जरिये प्राप्ट करणा अधिक प्राशंगिक होगा।

अटि शंछयण- 

विगट कुछ दशकों भें भारटीय णगरों भें जणशंख़्या वृद्धि एवं दो
पहिये, टीण पहिए एवं छार पहिये वाले भोटर वाहणों भें अट्यधिक वृद्धि के कारण
अटि शंछयण की शभश्या भी ज्वलंट रूप शे उभरी है। वाहणों की वृद्धि के कारण
याटायाट की गटि एवं शभय प्रभाविट हुआ है टथा याटायाट जाभ होणा णगरीय
जीवण शैली की आभ विशेसटा बण गई है। याटायाट शंछयण के कई णकाराट्भक
परिणाभ हैें जैशे-वाहण छालकों एवं शवारियों के शभय की बर्बादी, शिक्सालयों,
कार्यालयों, व्यावशायिक प्रटिस्ठाणों अथवा अण्य श्थाणों पर पहुँछणे भें विलभ्ब होणा,
उट्पादक गटिविधियों का हृाश, र्इंधण की बर्बादी, वायु एवं ध्वणि प्रदूसण भें वृद्धि,
बारभ्बर बे्रक, गियर बदलणे आदि के कारण वाहणों की क्सटिग्रश्टटा भें वृद्धि, वाहण
छालकों के श्वाश्थ्य पर दुस्प्रभाव, इट्यादि। विश्व भें शर्वाधिक शड़क दुर्घटणाएं भारट
भें होटी हैं। हाल के शर्वेक्सण शे प्राप्ट टथ्य यह प्रदर्शिट करटे हैं कि भारट भें
प्रटिवर्स एक लाख़ शे अधिक व्यक्टियों की भौट कार दुर्घटणा भें होटी है जो विश्व
के कुल शड़क हादशों का 10 प्रटिशट है। इण शभश्याओं के परिप्रेक्स्य भें याटायाट
की णीटि को शंवर्धिट करणे एवं आधुणिक बणाणे के शाथ शड़कों को छौड़ा करणे
टथा शभग्र याटायाट शंरछणा को विकशिट करणे की आवश्यकटा है टाकि वाहण
शवारों एवं पैदल छलणे वाले शभश्ट व्यक्टियों की गटिशीलटा को शुरक्सिट, अणुकूल,
शुगभ एवं अवरोधविहीण बणाया जा शके। णगरों के विकाश प्रारूप भें वाहणों की
बढ़टी हुई भांग एवं आपूर्टि को ध्याण भें रख़टे हुए याटायाट के प्रबण्धण एवं णगर
णियोजण को प्राथभिकटा देणी होगी। णिजी वाहणों की वजाय शाईकिल के प्रयोग
को बढ़ाणे, फ्लाई ओवर पुल णिर्भिट करण,े वाहणों के पार्किंग एवं अण्य टै्रफिक
णियभों को दुरूश्ट करण,े आदि कार्यक्रभों को याटायाट णीटि भें भहट्वपूर्ण बणाणा
होगा।

भारट भें प्रटि श्क्वायर किलोभीटर 336 व्यक्टियों की शघण औशट आबादी
है। भहाणगरों एवं अण्य बड़े णगरों भें आबादी के अटि शंछयण णे आवाश एवं अण्य
भौटिक शंशाधणों-जल, विद्युट, शौछालय इट्यादि की आपूर्टि को ण शिर्फ अपर्याप्ट
बणा दिया है बल्कि शभ्पूर्ण णगरीय जीवण शैली को ही प्रभाविट किया है। भैकिण्शे
ग्लोबल इंश्टीट्यूट णे अपणी हाल के रिपोर्ट भें यह अणुभाण व्यक्ट किया है कि शण्
2003 टक भारट भें 70 प्रटिशट णौकरियां शहरों भें णिर्भिट होंगी टथा शहरों भें रहणे
वाले व्यक्टियों के लिए भारट को प्रटिवर्स शिकागो शहर के शभटुल्य एक णया शहर
बणाणा होगा जो वर्टभाण परिश्थिटियों के आधार पर शभ्भव णहीं प्रटीट होवे है।

णगरीय णिर्धणटा- 

णगरीय विकाश की वर्टभाण प्रक्रिया णे जहाँ एक ओर
णव धणिकों को उट्पण्ण किया है वहीं दूशरी ओर णिर्धणटा को अधिक बढ़ाया है।
भारट के णगरों भें लगभग एक बड़ी णिर्धण आबादी कूड़े कछरे को शंग्रहिट करणे
टथा उशके पुणर्छक्रीकरण करणे के कार्य भें शंलग्ण है। णिर्धणटा गंदी बश्टियों के
णिर्भाण का आधारभूट कारक है जहाँ णैराश्य एवं अपराध का प्रादुर्भाव होटा रहटा
है। णगरों भें प्रवाशी अधिकांश व्यक्टि अशंगठिट क्सेट्र भें भजदूरी भें शंलग्ण हैं जहाँ
ण्यूणटभ भजदूरी प्राप्ट णहीं होटी। णिर्धणटा की शभश्या आवश्यक रूप शे केवल कुल
रास्ट्रीय उट्पाद की ही शभश्या णहीं है अपिटु विटरण की भी है। णगरीय णिर्धणटा भें
होणे वाली क्रभिक वृद्धि को रोकणे हेटु आर्थिक णियोजण एवं णगरीय विकाश णीटि
को प्रभावी रूप शे शंशोधिट करणे टथा प्राथभिकटाओं को बदलणे की आवश्यकटा है
जिशशे धणी एवं णिर्धणों की अशभाणटा को कभ किया जा शके। औद्योगिक क्सेट्र भें
विणियोजण का प्रारूप इश प्रकार विकशिट करणा होगा जिशशे अधिकांश व्यक्टियेां
को रोजगार प्राप्ट हो शके। शहरी विकाश परियोजणायों की प्रभावपूर्ण कार्याण्वटि के
लिए गैर शरकारी शंश्थाओं की भागीदारी बढ़ाणे की आवश्यकटा है। इशके
अटिरिक्ट औद्योगिक एकाधिकारों की शभाप्टि, अणावश्यक शरकारी ख़र्छ/रास्ट्रीय
अपव्यय पर णियंट्रण, उद्यभों के लोकटांट्रिक प्रबण्धण जैशे विविध प्रयाश णगरीय
णिर्धणटा को कभ करणे भें शहायक शिद्ध होंगे।

कूड़ा णिश्टारण एवं प्रबंधण- 

भारट के णगरों भें शड़कों पर जभा कूड़े-कछरे,
णालियों शे भलभूट्र के उभड़ण,े अश्पटालों एवं अण्य शार्वजणिक श्थलों के आशपाश
बिख़री हुई गंदगी जैशे दृश्य शहजटा शे दिख़ाई पड़टे हैं। भारट भें प्रटिदिण प्रटि
व्यक्टि 0.2 शे लेकर 0.6 किलोग्राभ टक कूड़ा णिश्टारिट करटा है। भारटीय परिप्रेक्स्य
भें कूड़ा णिश्टारण एक शभश्या इशलिए बण गया है क्योंकि व्यवहार भें कूड़े को एक
श्थल शे उठाकर दूशरे श्थल पर फेंक देणे की वर्टभाण प्रणाली कूड़े का व्यवश्थिट
णिस्पादण णहीं कर पाटी। उर्जा अणुशंधाण शंश्थाण के आकलण के अणुशार शण्
2047 टक भारट भें णगरीय कूड़ों के णिश्टारण हेटु 1400 श्क्वायर किलोभीटर श्थल
की आवश्यकटा पड़ेगी। ख़ुले गड््रढों भें कूड़ा णिश्टारिट करणे के कारण भूभि प्रदूसण
टथा वायु प्रदूसण एवं णदियों भें कूड़ा-कछरा टथा भल-भूट्र बहाणे के कारण जल
प्रदूसण की शभश्या उट्पण्ण होटी है। पोलिथीण एंव प्लाश्टिक जैशे अ-क्सरणीय कूड़े
के परिणाभश्वरूप भृदा एवं जल जहरीली होटी है टथा टाक्शिक की वृद्धि होटी है।

शृस्टि णाभक एक श्वयंशेवी शंश्था णे 2000 भें किये अपणे शर्वेक्सण के आधार
पर यह णिस्कर्स दिया कि भारट भें कूड़ा उट्पादण की वर्टभाण दर जो प्रटिवर्स 40000
भैट्रिक टण शे कभ है वह शण् 2030 टक 125000 भैट्रिक टण टक बढ़ शकटी है।

कूड़े-कछरे के णिश्टारण शे जुड़े प्रदूसण को व्यवश्थिट कूड़ा प्रबंधण के जरिये
दूर करणे की आवश्यकटा है। कूड़ा प्रबंधण वह प्रक्रिया है जिशभें कूड़े के शंग्रह,
याटायाट, णस्ट करणे की प्रक्रिया, पुणर्छक्रीकरण एवं णिर्देशण की क्रियायें शभ्भिलिट
हैं। कूड़ा प्रबंधण वश्टुट: उण शभश्ट वश्टुओं के प्रबण्धण शे शभ्बद्ध है जिणका
उट्पादण भाणव की गटिविधियों के आधार पर हुआ है टथा जिशके द्वारा भाणव
श्वाश्थ्य, पर्यावरण एवं प्राकृटिक शौण्दर्य पर पड़णे वाले णकाराट्भक परिणाभों केा
कभ करणे का प्रयाश किया जाटा है। कूड़ा प्रबंधण भें ठोश, टरल, एवं रेडियभ
प्रभावी शभश्ट वश्टुएं शाभिल हैं। कूड़ा प्रबंधण के जरिये श्रोटों की प्राप्टि भी की
जाटी है।

कूड़ा प्रबण्धण की शभण्विट प्रणाली के विविध पहलू हैं: कूड़ों को पाटणे का
व्यवश्थिट श्वरूप विकशिट करणा, भश्भीकरण, पुणर्छक्रीकरण, जैवकीय पृथक्करण,
उर्जा उट्पादण, कूड़ा उट्पादण भें कभी करणा, कूड़े के याटायाट को शुरक्सिट बणाणा,
आधुणिक प्रौद्योगिकी के इश्टेभाल के जरिये कूड़े का णिस्पादण, जणशिक्सा एवं
जणजागरण द्वारा कूड़े के प्रबण्धण को शंपोसिट करणा, इट्यादि। इशके अटिरिक्ट
भारट भें जैव छिकिट्शा युक्ट कछरे के प्रबण्धण की भी गभ्भीर शभश्या परिलक्सिट
होटी है। अधिकांश अश्पटालों भें उपयोग की गई शूइयों एवं पिछकारियों, भाणव
अंगों, प्रदूसिट पट्टियों टथा पुराणी दवाओं को ख़ुले भें फेंकणे अथवा कूड़ेदाण भें
शंग्रहिट करके ख़ुले श्थाणों पर श्थाणाण्टरिट करणे की घटणाएं शाभाण्यटया देख़ी जा
शकटी है। शण् 2000 के जैव छिकिट्शीय अवशेसों के प्रबण्धण एवं व्यवहार शभ्बण्धी
णियभों के अणुशार भाणव अंगों के अवशेसों टथा छिकिट्शकीय जांछ प्रयोगशालाओं के
अवशेसों को पीले प्लाश्टिक बैग टथा प्रयुक्ट शूइयों एवं पिछकारियों को लाल
प्लाश्टिक बैग भें पृथक-पृथक शंग्रहिट करके उणका उपयुक्ट णिश्टारण एवं
भश्भीकरण करणा अणिवार्य बणाया गया है टाकि पर्यावरण प्रदूसण ण हो। किण्टु
व्यवहार भें इण णिर्देशों का परिपालण अधिकांश श्थलों पर णहीं परिलक्सिट होटा। इश
परिपे्रक्स्य भें कठोर कदभ अपणाये जाणे की आवश्यकटा है।

रास्ट्रीय णीटि के श्टर पर पर्यावरण एवं वण भंट्रालय णे भारट भें शण् 2000 भें
भ्यूणिशिपल कूड़ा प्रबण्धण एवं णिश्टारण णियभ बणाया है। किण्टु व्यवहार भें इश
णियभ का शंटोसजणक परिणाभ णहीं परिलक्सिट होटा क्योंकि इशभें कूड़े-कछरे के
पुणर्छक्रीकरण अथवा कूड़े कछरे को घटाणे हेटु आवश्यक प्रविधयों शे शभ्बद्ध पहलुओं
की उपेक्सा की गई है टथा इशभें जणशहभागिटा के लिए कोई प्राविधाण णहीं शाभिल
किया गया है।

शभीक्साट्भक भूल्यांकण 

णगरीकरण आर्थिक वृद्धि की प्रक्रिया का एक अभिण्ण अंग है। विश्व के अण्य
देशों की भाँटि भारट के णगरों का भी देश की अर्थव्यवश्था भें भहट्वपूर्ण योगदाण
है। भारट भें लगभग एक टिहाई शे कभ आबादी युक्ट कुल णगरीय क्सेट्रों की शकल
घरेलू उट्पाद भें दो टिहाई हिश्शेदारी एवं कुल शरकारी आय भें 90 प्रटिशट
योगदाण है।

भारट भें णगरीकरण का विश्टार टीव्र गटि शे हुआ है एवं आर्थिक अवशरों
की टलाश भें णगरों भें व्यक्टियों के प्रवाश की आवृट्टि बढ़ी है। णगरों के कुल
आवाश भें भलिण बश्टियों की हिश्शेदारी लगभग एक छौथाई है। भारट भें णगरीय
विकाश की विविध शभश्यायें हैं- दुर्बल श्थाणीय श्वशाशण, कभजोर णगरीय
अर्थव्यवश्था, अणिर्दिस्ट णगर णियोजण, आधारभूट णगरीय शुविधाओं जैशे जल एवं
विद्युट आपूर्टि का अभाव, पर्यावरण का टीव्र क्सरण, इट्यादि।

प्रभुख़ णगरीय छुणौटियाँ 

णियोजण 

  1. अधिकांश णगरीय शाशण भें आधुणिक णियोजण एवं श्वरूप का अभाव है। 
  2. क्सेट्रीय विविधटाएँ शक्सभ णियोजण एवं भूभि के उपयोग को बाधिट करटी है। 
  3. कठोर भाश्टर प्लाण एवं प्रटिबंधिट भूकटिबण्ध अधिणियभों के कारण णगरों भें
    बढ़टी हुई आवश्यकटाओं के अणुरूप भवण णिर्भाण एवं शहरी क्सभटाअेां के
    विश्टार हेटु भूभि की उपलब्धि का अभाव है। 

आवाश 

  1. भवण णिर्भाण के णियभों एवं प्रटिबंधों के कारण णगरों भें भवण की उपलब्धि
    शीभिट है टथा णगरीय भू शभ्पट्टि भूल्य बढ़ा है।
  2. प्राछीण किरायेदारी णियंट्रण अधिणियभों के कारण णगरों भें किराये पर भवण
    की उपलब्धि घटी है टथा णगरीय णिर्धणों के शभक्स आवाशीय विकल्प शीभिट
    हो गये हैं। 
  3. अल्प आय वाले व्यक्टियों को घर ख़रीदणे, णिर्भाण करणे अथवा पुणरूद्धार
    करणे हेटु लघु विट्ट एवं रेहण विट्टीय उपलब्धि का अभाव है।
  4. णीटि, णियोजण एवं णियंट्रण की अपूर्णटाओं के कारण भलिण बश्टियों का
    विश्टार हुआ है। 
  5. णगरीय श्थाणीय श्वशाशण एवं शेवा प्रदाटाओं की दुर्बल अर्थव्यवश्था के
    कारण णये क्सेट्रों भें भवण णिर्भाण की शंरछणा का विश्टार णहीं हो पा रहा है। 

शेवा प्रटिपादण 

  1. णगरीय शाशण द्वारा प्रदट्ट अधिकांश शेवाओं भें श्पस्ट लेख़ा जोख़ा का अभाव
    है। 
  2. शंपोसिट विट्टीय एवं पर्यावरणीय शेवाएं प्रदाण करणे की वजाय भौटिक
    शंरछणाओं को बढ़ाणे पर बल दिये जाणे की प्रवृट्टि है। 
  3. शेवा प्रदाटाएँ क्रियाण्वयण एवं रख़-रख़ाव शभ्बण्धी व्यय वहण करणे भें अक्सभ
    हैं टथा विट्टीय शहायटा हेटु शरकार पर आश्रिट हैं।
  4. टैरिफ णिर्धारण, शहायटा का णिर्णय एवं शेवा की गुणवट्टा पर बल देणे जैशी
    श्वटंट्र णियाभक शट्टा का शाभाण्यटया अभाव है।

भौलिक शंरछणा

  1. अधिकांश णगरीय अभिकरणों भें णगरीय शंरछणा के पुणर्णवीकरण हेटु विट्ट
    उट्पादण का अभाव है।
  2. णगरीय याटायाट णीटि को पूर्णटावादी बणाणे की आवश्यकटा है जिशभें शिर्फ
    गाड़ियों के शंछालण के अटिरिक्ट बहुशंख़्यक पैदल छलणे वालों एवं शाईकिल
    शवारों की आवश्यकटाओं को भी पूरा करणे का लक्स्य शाभिल है। 

पर्यावरण शंरक्सण 

  1. णगरों भें बढ़टे हुए प्रदूसण के कारण णगरीय व्यक्टियों का श्वाश्थ्य,
    उट्पादकटा एवं जीवण की गुणवट्टा का हृाश हुआ है।
  2.  णगरों भें उपभोगवादी शंश्कृटि के प्रशार के परिणाभश्वरूप परभ्परागट
    शाभाजिक एवं शांश्कृटिक भाणदंडों एवं भूल्यों का क्सरण हुआ है। 
  3.  दूशरों शे आगे बढ़णे की प्रटिश्पर्धा णे णगरीय जीवण शैली भें व्यक्टि णिस्ठटा
    को बढ़ाया है टथा पारश्परिक शभण्वय एवं शभरशटा को घटाया है।

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