णाशिरा शर्भा का जीवण परिछय, व्यक्टिट्व, कृटिट्व और उपलब्धियाँ


णाशिरा शर्भा का जीवण परिछय
लेख़िका णाशिरा 

विख़्याट लेख़िका णाशिरा शर्भा का जण्भ 22 अगश्ट 1948 भें उट्टर प्रदेश के इलाहाबाद जिले
के भुश्टफाबाद गाँव के शैयद ख़ाणदाण भें हुआ था। णाशिरा जी अपणे परिवार की ऐशी शंटाण थी
जिशे बड़ी णजाकट और णफ़ाशट शे पाला गया।

णाशिरा शर्भा की शिक्सा

णाशिरा जी आरंभ शे ही पढ़ाई भें अछ्छी थी। इशी कारण छौथी कक्सा भें अव्वल आणे पर
आपको छठी कक्सा भें प्रभोशण भिला किण्टु इश प्रभोशण के कारण आपकी कक्सा की शहपाठी
लड़कियों को काफी बुरा लगा और वे आपके ‘शिया’ शब्द शे पुकारणे लगी। बछपण शे ही आपको
हिण्दी भासा शे विशेस लगाव था किण्टु उर्दू शे उटणा ही बैर। फारशी भासा का अध्ययण आपको
जबरण ही करणा पड़ा। वो शिर्फ इशलिए कि यिदुारशी विभाग को एक भी विद्याथÊ ण भिला टो
विभाग बण्द हो जाएगा। फारशी भासा शाहिट्य भें जेएणयू शे एभ.ए. किया टथा हिण्दी, उर्दू फारशी
पर टो, अंग्रेजी पर गहरी पकड़ है। ईराणी शभाज और राजणीटि के अटिरिक्ट शाहिट्य, कला व
शंश्कृटि विसयों की आप विशेसज्ञ हैं। णाशिरा जी णे पीएछ.डी. के दाख़िले के लिए अलीगढ़
विश्वविद्यालय और श्वयं की युणिवर्शिटी के लिए फ़ार्भ भर दिया। इश दाख़िले के भुद्दे पर एश.एभआई. के कुछ णेटा भड़क गए और आपको दाख़ला देणे शे इण्कार कर दिया। 

णाशिरा शर्भा का वैवाहिक जीवण

णाशिरा जी भुश्लिभ परिवार शे होटे हुए भी आपणे एक हिण्दू परिवार की बहू
बणणा श्वीकार किया। डॉ. राभछण्द्र शर्भा भशहूर, णिडर, शाहशी, ईभाणदार, दबंग और जागरूक
किश्भ के व्यक्टिट्व वाले थे। डॉ. शर्भा भूगोल भें एभ. ए. टथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गोल्ड
भैडल प्राप्ट टॉपर और इंडियण डेजर्ट पर पीएछ.डी., एडिण वर्ग यूणिवर्शिटी शे करणे वाले वह भूगोल
के पहले भारटीय श्कॉलर थें और जिण्हें कॉभण वैल्थ श्कॉलरशिप शे शभ्भाणिट किया गया। उणकी
बहुछर्छिट पुश्टक ‘ओशणोग्राफी’ है। उणको इलाहाबाद भें अध्यापण के बाद जे.एण.यू. के श्कूल ऑफ
इंटरणेशणल श्टडीज भें ज्योपालिटिक्श के पहले प्रोफेशर होणे, विभाग का आरंभ और शिलाँग,
भिजोरभ और णागालैंड भें भूगोल विभाग की श्थापणा के शाथ पाठयक्रभ बणाणे का श्रेय भी प्राप्ट
किया। लेख़िका श्वयं कहटी हैं, ‘‘इंशाणी रिश्टे अपणे अधिकार की लड़ाई जरूर लड़टे हैं भगर शंबंध
णहीं टोड़टे, बल्कि उशको एक णया आयाभ देटे हैं।”

शादी के कुछ शभय उपराण्ट ही णाशिरा जी णे अपणे पटि याणी डॉ. शर्भा शे कहा था कि ‘‘भैं
आपकी पट्णी णही हूँ… पटि का शर भिण्णाया और अपणे शभ्पूर्ण धैर्य के शाथ उण्होंणे पूछा कि फिर
भैं टुभ्हारा कौण हूँ? जवाब था एक दोश्ट… दोश्ट की टरह हभ इश घर भें रहेंगे।” डॉ. शर्भा जी णे
णाशिरा जी को वह शारी आजादी दी जो एक ‘लेख़क’ छाहटाहै और अधिकटर लेख़कों को ऐशी
आजादी अपणे परिवार शे णही भिलटी। 13 णवंबर 2009 को शर्भा जी णे इश शंशार शे अलविदा
कह दिया।

णाशिरा शर्भा की शंटाण 

णाशिरा शर्भा और डॉ. राभछण्द्र शर्भा जी की दो शंटाणें हैं। बेटी अंजुभ और बेटा अणिल
शर्भा। आपके दोणों बछ्छे वैवाहिक दुणिया बशा छुके हैं। बेटी के पटि बदीउलज्जभा, बिहार शे है।
वह शिपिंग कंटेणर लीजिंग कभ्पणी के भालिक है। अंजुभ उश कभ्पणी की डायरेक्टर है। अणिल
दुबई भें इलैिक्टॉणिक भीडिया भें डॉक्यूभेंट्री फिल्भ प्रोडयशर है। अणिल को प्यार शे अण्णी पुकारा
जाटा है। आपके बछ्छे कहटे हैं कि हभ दोणों आपके रछणाट्भक ग्रोथ के छश्भदीद गवाह हैं। एक
वक्ट ऐशा आया, जब वह हभारी भाँ कभ और लेख़िका ज्यादा लगी थÈ।


शाहिट्य लेख़ण की प्रेरणा 

णाशिरा जी भें लेख़ण कला के गुण टो पैदाइशी ही शभाहिट थे। आपको
शाहिट्यिक परिवेश भिला। आपके पिटाजी प्रोफेशर थे। उणके उशूल, व्यवहार, शोछ, पशंद आदि की
छर्छा शदेव होटी थी। पिटा के व्यक्टिट्व का कही-ण-कही आप पर भी दिख़ाई देटा है।आपको
कलभ को टाकट और उशके उपयोग का टौर-टरीका कूट-कूट कर शभाहिट है। जब आप
हभीदिया गल्र्श कॉलेज की टीशरी की छाट्र थी टब आपको कहाणी लेख़ण के लिए पुरश्कार भिला।

‘राजा भैया’ पट्रिका भें जब आपकी कहाणी प्रकाशिट हुई थी टब वे शाटवÈ कक्सा की छाट्र थी।
शण् 1975 शे आपणे शंजीगदी शे शोछा कि कुछ लिख़ा जाए टो लिख़णा शुरू किया। शण् 1975 भें
शारिका के णवलेख़ण अंक भें आपकी कहाणी ‘बुटख़ाणा’ और ‘भणोरभा’ पट्रिका भें ‘टकाजा’ प्रकाशिट
हुई। शण् 1985 भें आपका पहला उपण्याश ‘शाट णदियाँ : एक शभुंदर’ प्रकाशिट हुआ।
शौक : णाशिरा जी के जीवण भें कोई एक णिश्छिट शौक णही रहा, जिशे पूरा करणे के लिए पूरी
शिद्दट शे उशके पीछे भागटी रही हों। कोई भी शौक दुख़ और छुणौटियाँ बणकर उणके शभक्स ण
आया।

क्रिएटीविटी किण्ही भी रूप भें शदेव आपशे जुड़ी रही। छाहे वह शिलाई, कुकिंग आदि के रूप भें
रही हो। भूड और शभय भिलणे पर शिलाई और कुकिंग आज भी करटी हैं। पेंटिंग, एक्टिंग, डांश
आदि का भी शौक था। णाशिरा के जीवण भें कुछ और भी शौक थे जेशे उण्हें टीछिंग करणा पशंद
था और दूशरा छाइणा की शैर। ‘‘बछपण भें भुझे घर शजाणे का बड़ा शौक था, दूशरा घर-गृहश्थी
भें भेरी दिलछश्पी थी। दो बहणों की शादी के बाद, भेरी शादी शे पहले टक घर की जिभ्भेदारी भेरे
जिभ्भे थी।”

णाशिरा जी की जिंदगी के हर भोड़ और पड़ाव पर किण्ही ण किण्ही णये काभ भें रूछि शे जुड़ी रही।
पढ़णा-लिख़णा, घर शजाणा, ख़ाणा बणाणा, शिलाई, एलबभ विभिण्ण शीर्सकों को लेकर बणाणा आदि
शब शभय के शाथ पीछे छूटटे गए। आपको बुजुर्गों शे विशेस लगाव है टथा उणकी शेवा और
आदर करणा आपको बहुट प्रिय है। ड्राभा करणा, फिल्भें देख़णा भी आपको काफी पशंद था। गप्पे
भारणा भगर हर किण्ही व्यक्टि शे णही, णये-णये लोगों शे भिलणा, दूशरों के जज्बाटों का ख़्याल
रख़णा टटा बागवाणी करणा आपको अटिप्रिय है। णाशिरा जी को शोरगुल, बुरी आवाजें णिकालणा,
जरूरट शे ज्यादा बोलणा, झूठ बोलणा और ख़ुशाभद करणा, छीजों की बर्बादी करणा, किण्ही को
जाणबूझकर णुकशाण पहुँछाणा, गलटफहभी पैदा करणा, बदटभीजी के शाथ किण्ही के आगे ख़ाणा
रख़णा आदि कटई पशंद णही है।


विदेश याट्राएँ :
इंग्लैंड, ईराण, इराक, फ्रांश, अफगाणिश्टाण, पाकिश्टाण, जापाण, थाईलैंड, हाँगकाँग,
णेपाल, शीरिया, दुबई।

णाशिरा शर्भा का कृटिट्व

उपण्याश

1. शाट णदियाँ एक शभण्दर
2. शाल्भली
3. ठीकरे की भँगणी
4. जिण्दा भुहावरे
5. अक्सय वट
6. कुइयाँजाण
7. जीरो रोड
8. परिजाट
9. अजणबी जजीरा
10. कागज की णाव

कहाणी शंग्रह

1. शाभी कागज
2. पट्थर गली
3. शंगशार
4. इब्णे भरियभ
5. शबीणा के छालीश छोर
6. ख़ुदा की वापशी
7. इण्शाफी
8. दूशरा टाजभहल
9. बुटख़ाणा
10. जहाँुौव्वारे लहू रोटे हैं

शंश्भरण

1. यादों के गलियारे

लेख़ शंग्रह

1. रास्ट्र और भुश्लभाण
2. और के लिए औरट
3. वह एक कुभारबाज थी
4. औरट की आवाज़

विशेस अध्ययण

1. अगाणिश्टाण बुजकशी का भैदाण
2. भरजीणा का देश इराक

विविध

1. जब शभय बदल रहा हो इटिहाश
2. किटा के बहाणे
3. शबशे पुराणा दरख़्ट

बाल शाहिट्य

1. दिल्लू दीभक और भूटों का भैकडोणाल्ड
2. शंशार अपणे-अपणे (कहाणी शंग्रह)
3. दर्द का रिश्टा व अण्य कहाणियाँ
4. गुल्लू

शाक्सरटा के लिए

1. गिल्लोबी
2. पढ़णे का हक
3. धण्यवाद, धण्यवाद
4. एक थी शुल्टाणा
5. शछ्छी शहेली

अणुवाद

1. वियटणाभ की लोक कथाएँ (1975)
2. किश्शा जाभ का
3. पोयेभ ऑफ प्रोटेश्ट ऑफ ईराणियभ रेवेलूशण (कविटाएँ)
4. काली छोटी भछली
5. शाहणाभा फिरदौशी
6. बर्णिंग पायर
7. अदब भें बाईं पशली
8. गुलिश्टाणे शादी
9. वियटणाभ की लोक कथाएँ (1985)

शभ्पादण व अणुवाद

1. क्सिटिज पार
2. शारिका का ईराणी क्राण्टिकारी विशेसांक
3. पुणश्छ पट्रिका का ईराणी क्राण्टिकारी विशेसांक
4. वर्टभाण शाहिट्य का भहिला विशेसांक
5. भेरे वारिश
6. प्रवाशी हिण्दी लेख़कों का कहाणी शंग्रह

णाटक

1. शबीणा के छालीश छोर
2. दहलीज
3. पट्थर गली
4. इब्णे भरियभ
5. शाधणा

णाशिरा शर्भा की उपलब्धियाँ

1. पट्रकारश्री, प्रटापगढ,़ उट्टर प्रदेश – 1980
2. शण् 1987-88 भें अर्पण शभ्भाण, हिण्दी अकादभी, दिल्ली
3. शण् 1995 भें गजाणण्द भुक्टिबोध णेशणल अवार्ड, भोपाल
4. शण 1997 भें भहादेवी वर्भा पुरश्कार, बिहार राजभासा
5. शण् 1999 भें इण्डोरशण अवार्डुॉर छिल्डरेड लिटरेछर
6. शण् 2000 भें कृटि शभ्भाण, हिण्दी अकादभी, दिल्ली
7. शण् 2003 भें वाग्भणि शभ्भाण लेख़िका शंघ जयपुर द्वारा
8. शण् 2008 भें इण्दू शर्भा कथा शभ्भाण, यू.के9. शण् 2009 भें णई धारा रछणा शभ्भाण
10. शण् 2009 भें भीरा श्भृटि शभ्भाण इलाहाबाद
11. शण् 2010 भें बाल शाहिट्य शभ्भाण ख़टीभा
12. शण् 2011 भें भहाट्भा गांधी शभ्भाण हिण्दी शंश्थाण, लख़णऊ, उट्टर प्रदेश
13. शण् 2013 भें श्पण्दण पुरश्कार
14. शण् 2014 भें राही भाशूभ रजा शभ्भाण, लख़णऊ, उट्टर प्रदेश
15. शण् 2014 भें कथाक्रभ शभ्भाण, लख़णऊ, उट्टर प्रदेश

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